'दान की बछिया के दाॅंत नहीं देखे जाते' - इस लोकोक्ति का सही अर्थ है
- AOption (a)
उपकार करते समय पैसे का लोभ उचित नहीं।
- BOption (b)
मुफ्त के माल में दोष नहीं देखे जाते।
- COption (c)
दान उपयुक्त वस्तु का होना चाहिए।
- DOption (d)
दान की बछिया से मोह नहीं करना चाहिए।
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Correct answer
मुफ्त के माल में दोष नहीं देखे जाते।
Why this answer is correct
उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "मुफ़्त के माल में दोष नहीं देखे जाते।" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।
Key Points
- दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते
- अर्थ :- मुफ़्त के माल में दोष नहीं देखे जाते।
- वाक्य प्रयोग
- जब परिवार के सदस्य शादी की विदाई में मिले सूट के कपड़े की कीमत आंकने लगे तो पिताजी बोले कि दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते।
Additional Information
- प्रमुख लोकोक्तियाँ
- बुढि़या मरी तो आगरा तो देखा :- प्रत्येक घटना के दो पहलू होते हैं - अच्छा और बुरा।
- लिखे ईसा पढ़े मूसा :- गंदी लिखावट।
- अंधा सिपाही कानी घोड़ी, विधि ने खूब मिलाई जोड़ी :- जहां दो व्यक्ति हों और दोनों ही एक समान मूर्ख, दुष्ट या अवगुणी हों वहां ऐसा कहते हैं।
- अपना रख पराया चख :- निजी वस्तु की रक्षा एवं अन्य वस्तु का उपभोग।
- अच्छी मति जो चाहो बूढ़े पूछन जाओ :- बड़े बूढ़ों की सलाह से कार्य सिद्ध हो सकते हैं।
- अब की अब, जब की जब के साथ :- सदा वर्तमान की ही चिन्ता करनी चाहिए।
- छप्पर पर फूंस नहीं, ड्योढ़ी पर नाच :- दिखावटी ठाट-वाट परन्तु वास्तविकता में कुछ भी नहीं।
- छछूंदर के सर पर चमेली का तेल :- अयोग्य के पास योग्य वस्तु का होना।
- जिसके हाथ डोई, उसका सब कोई :- धनी व्यक्ति के सब मित्र होते हैं।
- योगी था सो उठ गया आसन रहा भभूत :- पुराण गौरव समाप्त।












