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UGC NET Paper 2: Hindi 27th August 2024 Shift 2 (Previous Year Paper)

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Question 1

पाश्चात्य काव्यशास्त्र के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही कथन कौन सा/से है हैं?

A. अरस्तू ने त्रासदी के 6 अनिवार्य अंग स्वीकार किए कथानक, चरित्र, पदावली, विचार, गीत, संगीत व्यवस्था।

B. कॉलरिज ने कल्पना के 2 भेद माने मुख्य कल्पना तथा गौण कल्पना। दोनों में अंतर परिणाम एवं कार्यप्रणाली के स्तर पर होता है।

C. इलियट ने परंपरा और व्यक्ति प्रज्ञा निबंध में घोषणा की 'कविता कवि व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व से पलायन है।

D. आई. ए. रिचर्ड्स ने वृत्तियों को दो वर्गों में बाँटा - अनुकूल एषणा एवं आनुपातिक एषणा।

E. प्रेक्टिकल क्रिटिसिज्म में अर्थ विचार करते हुए रिचर्ड्स ने चार प्रकार के अर्थों का उल्लेख किया - वाच्‍यार्थ, भावना, बोधय के प्रति अभिवृत्ति, अभिप्राय। 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, C एवं E

  2. BOption (b)

    केवल B, D एवं E

  3. COption (c)

    केवल A, B एवं C

  4. DOption (d)

    केवल C, D एवं E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल B, C एवं E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, C एवं E

Key Pointsपाश्चात्य काव्यशास्त्र के संदर्भ में सही कथन -

  • B. कॉलरिज ने कल्पना के 2 भेद माने मुख्य कल्पना तथा गौण कल्पना। दोनों में अंतर परिणाम एवं कार्यप्रणाली के स्तर पर होता है।
  • C. इलियट ने परंपरा और व्यक्ति प्रज्ञा निबंध में घोषणा की 'कविता कवि व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व से पलायन है।
  • E. प्रेक्टिकल क्रिटिसिज्म में अर्थ विचार करते हुए रिचर्ड्स ने चार प्रकार के अर्थों का उल्लेख किया - वाच्‍यार्थ, भावना, बोधय के प्रति अभिवृत्ति, अभिप्राय।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • A. अरस्तू ने त्रासदी के प्रमुख छः अंग बतायें हैं- कथानक, चरित्र-चित्रण, पद रचना, विचार तत्व, संगीत और दृश्य विधान।
  • D. आई. ए. रिचर्ड्स के अनुसार साहित्य का उद्देश्य मनुष्य की वृत्तियों में सन्तुलन स्थापित करना है। 
  • वृत्तियों के जिस सामंजस्य और संतुलन को रिचर्ड्स ने. मूल्य माना है, उसमें आनंद की भूमिका नहीं है।

Additional Informationपाश्‍चात्य काव्यशास्‍त्र के बारे -

  • यूनान पाश्चात्य काव्यशास्त्र और दर्शन का स्रोत माना जाता है
  • और प्लेटो को पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय परंपरा का आरंभिक दार्शनिक।
  • पाश्‍चात्य काव्यशास्‍त्र का जन्म यूनान में, विशेष रूप से एथेन्स में हुआ।
  • जहाँ सुकरात, प्लेटो और अरस्तू निवास करते थे।
  • काव्यशास्‍त्र ही नहीं, वरन् पाश्‍चात्‍य दर्शन, साहित्य, गणित,
  • जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान का जन्म भी यूनान में ही हुआ।

Question 2

निम्नलिखित में से कौन-सा / से युग्म सही है/हैं?

A. 'याद रखो, सूरज सारी दुनिया, लोक-परलोक, ऊपर थल्ले में, धरती आकाश में सबसे बड़ा है - जिंदगीनामा

B. तिरस्कार-भरी आँखों से देखकर कहा- मुझे लाकर यहाँ बैठा दिया। आप परदेश की राह ली - गोदान

C. उस दृष्टि में कोई जिज्ञासा नहीं थी, न उसमें कोई भाव था, न विभाव था, ना राग था, न विराग था - राग दरबारी

D. जब एक बार धुरी गड़बड़ा जाती है तो फिर जिन्दगी लड़खड़ा ही जाती है आपका बंटी

E. ग्रान्ट या कर्ज देने वाली किसी नयी स्कीम के बारे में योजना आयोग के सोचने भर की देर थी, वे उसके बारे में सब कुछ जान जाते थे बाणभट्ट की आत्मकथा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, D

  2. BOption (b)

    A, C, D

  3. COption (c)

    D, B, E

  4. DOption (d)

    C, A, B

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Correct answer

Answer: (a)A.

A, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, B, D

Key Pointsयुग्म सही -

  • A. 'याद रखो, सूरज सारी दुनिया, लोक-परलोक, ऊपर थल्ले में, धरती आकाश में सबसे बड़ा है - जिंदगीनामा
  • B. तिरस्कार-भरी आँखों से देखकर कहा- मुझे लाकर यहाँ बैठा दिया। आप परदेश की राह ली - गोदान
  • D. जब एक बार धुरी गड़बड़ा जाती है तो फिर जिन्दगी लड़खड़ा ही जाती है - आपका बंटी

Important Points जिंदगीनामा -

  • रचनाकार - कृष्णा सोबती
  • प्रकाशन वर्ष - 1979 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • मुख्य पात्र - शाहनी, शाहजी, महरी चाची, लाली शाह, राब��ाँ।
  • विषय -
  • ​इस उपन्यास में पंजाब के अंचल की कथा है।
  • इसमें पंजाब के किसानों और ग्रामीणों के जीवन का चित्रण करता है।

गोदान -

  • रचनाकार - मुंशी प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष - 1936 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • मुख्य पात्र - होरी, धनिया, गोबर और फुलेना आदि।
  • विषय -
  • ​भारतीय ग्रामीण जीवन और उसमें व्याप्त सामाजिक और आर्थिक विषमताओं का जीवंत चित्रण करता है।

आपका बंटी -

  • रचनाकार -  मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष - 1971 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • मुख्य पात्र - बंटी, शकुन आदि।
  • विषय - 
  • इसमें ​बंटी की असामान्य होते जाने की मार्मिक यात्रा ही इस उपन्यास की कथावस्तु है।

Additional Informationराग दरबारी -

  • रचनाकार -  श्रीलाल शुक्ल
  • प्रकाशन वर्ष - 1968 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • मुख्य पात्र - वैद्यजी, रुप्पन, बद्री पहलवान, रंगनाथ आदि।
  • विषय - 
  • यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारतीय समाज में मौजूद मूल्यों की गिरावट को दर्शाता है।

बाणभट्ट की आत्मकथा -

  • रचनाकार - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • प्रकाशन वर्ष - 1946 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • मुख्य पात्र - बाणभट्ट, भट्टिनी तथा निपुणिका।
  • विषय -
  • ​यह कथावस्तु इतिहास प्रसिद्ध कवि बाणभट्ट के जीवन से सम्बन्धित है।

Question 3

'माटी की मूरतें' किस विधा की रचना है?

  1. AOption (a)

    कहानी

  2. BOption (b)

    एकांकी

  3. COption (c)

    नाटक

  4. DOption (d)

    संस्मरण

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Correct answer

Answer: (d)D.

संस्मरण

Why this answer is correct

'माटी की मूरतें' विधा की रचना है - संस्मरण

  • स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख संस्मरण कहलाता है।

Key Pointsमाटी की मूरतें -

  • रचनाकार - रामवृक्ष बेनीपुरी
  • प्रकाशन वर्ष - 1946 ई.
  • विधा - संस्मरण
  • पात्र -
  • रजिया, बलदेव सिंह, सरजू भैया, मंगर, रूपा की आजी, देव, बालगोविंन भगत, भौजी, परमेसर, बैजू मामा, सुभान खान, बुधिया।
  • विषय - 
  • ​लेखक ने जीवन के विविध रंगों को रेखांकित करते हुए शब्द-चित्र के माध्यम से जीवन की विविधता का वर्णन किया है।

Important Points रामवृक्ष बेनीपुरी -

  • (जन्म- 23 दिसम्बर, 1899, मृत्यु- 9 सितम्बर, 1968)
  • भारत के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार और नाटककार थे।
  • संस्मरण-रेखाचित्र - 'जंजीरें और दीवारें', 'मील के पत्थर', लाल तारा, 'मंगर'।

Additional Information

  • कहानी - इसमें जीवन के किसी एक मार्मिक तथ्य या घटना को पात्रों, संवाद एवं घटनाक्रम के माध्यम से नाटकीय रूप में अभिव्यक्ति दी जाती है।
  • एकांकी - एकांकी एक अंक वाले नाटक को कहते हैं. इसमें एक ही कथा और कुछ ही पात्र होते हैं।
  • नाटक - जो रचना श्रवण द्वारा ही नहीं अपितु दृष्टि द्वारा भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है, उसे नाटक या दृश्य-काव्य कहते हैं।

Question 4

'अपना-अपना भाग्य' कहानी के संदर्भ में उपयुक्त कथन कौन-सा/ से है हैं?

A. पोलो लॉन में हॉकी खेलते बच्चों को न आगे की चिंता थी न बीते का ख्याल था।

B. अधिकार गर्व में तने अंग्रेजों के घोड़ों की बाग जिन पहाड़ी हाथों में थी, वे अंग्रेजों का विरोध करना सीख गए थे।

C. मैली-सी कमीज लटकाए हुए दस बरस के लड़के का माथा जैसे अभी से झुर्रियां खा गया था।

D. मित्र ने लड़के को सहायता के लिए होटल बुलाया, पर होटल का नाम बताना भूल गया।

E. प्रकृति ने लड़के के शव के लिए सफेद और ठंडे कफन का प्रबंध कर दिया था।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, D, E

  2. BOption (b)

    केवल A, C, E

  3. COption (c)

    केवल B, C, D

  4. DOption (d)

    केवल A, B, C

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, E

Key Points'अपना-अपना भाग्य' कहानी के संदर्भ में उपयुक्त कथन है -

  • A. पोलो लॉन में हॉकी खेलते बच्चों को न आगे की चिंता थी न बीते का ख्याल था।
  • C. मैली-सी कमीज लटकाए हुए दस बरस के लड़के का माथा जैसे अभी से झुर्रियां खा गया था।
  • E. प्रकृति ने लड़के के शव के लिए सफेद और ठंडे कफन का प्रबंध कर दिया था।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • B. अधिकार-गर्व में तने अँग्रेज़ उसमें थे और चिथड़ों से सजे घोड़ों की बाग थामे वे पहाड़ी उसमें थे
  • ​जिन्होंने अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान को कुचलकर शून्य बना लिया है और जो बड़ी तत्परता से दुम हिलाना सीख गए हैं। ​
  • D.  लेखक तथा उनके मित्र को लड़के की स्थिति पर दया आ गई। वे उसे साथ ले गये। उनके एक मित्र वकील थे जो किसी और होटल में ठहरे हुए थे।
  • वकील साहब को नौकर की आवश्यकता थी, अत: वे लड़के को उनके पास नौकरी दिलाने के लिए ले गये थे।

Important Pointsअपना-अपना भाग्य​ -

  • रचनाकार - जैनेन्द्र
  • प्रकाशन वर्ष - 1931 ई.
  • विधा - कहानी
  • मुख्य पात्र - दस वर्ष का अनाथ बच्चा, कथानायक और कथानायक का मित्र।
  • विषय -
  • ​‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी संग्रह ‘वातायन’ कहानी संग्रह में प्रकाशित हुई थी।
  • इस कहानी में एक गरीब बच्चे का बड़ा ही मार्मिक ढ़ंग से चित्रण किया गया है।

Additional Informationजैनेन्द्र -

  • ( 2 जनवरी 1905, निधन 24 दिसंबर 1988 )
  • हिन्दी साहित्य के प्रसिद्धि मनोवैज्ञानिक, कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार थे।
  • कहानी संग्रह:
  • फाँसी (1929), वातायन (1930 ), नीलम देश की राज कन्या (1933), एक रात (1934),
  • दो चिड़ियाँ (1935), पाजेब  (1942), ध्रुवयात्रा (1944), जयसंधि (1949 ),  तथा जैनेन्द्र की कहानियाँ (सात भाग)।

Question 5

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I लेखकसूची II यात्रावृत्त
A.राहुल सांकृत्यायनI.पार उतरि कहँ जइहौ
B.भगवतशरण उपाध्यायII.सौन्दर्य की नदी नर्मदा
C.प्रभाकर द्विवेदीIII.किन्नर देश में
D.अमृतलाल बेगड़IV.सागर की लहरों पर

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - II. C - IV, D - I

  2. BOption (b)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - III, B - IV, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - IV, C - I, D - II

Key Points

सूची I लेखकसूची II यात्रावृत्त
A.राहुल सांकृत्यायनIII.किन्नर देश में
B.भगवतशरण उपाध्यायIV.सागर की लहरों पर
C.प्रभाकर द्विवेदीI.पार उतरि कहँ जइहौ
D.अमृतलाल बेगड़II.सौन्दर्य की नदी नर्मदा

Additional Information

लेखकयात्रावृतांत
भारतेंदुसरयू पार की यात्रा, मेंहदावल की यात्रा, लखनऊ की यात्रा (1871-1879 के मध्य)
बालकृष्ण भट्टगया यात्रा (1894) के ‘हिंदी प्रदीप’ मार्च में
प्रताप नारायण मिश्रविलायत यात्रा (1897) के हि०प्र० नवंबर में
सत्यदेव परिव्राजकमेरी कैलाश यात्रा (1915), मेरी जर्मन यात्रा (1926)
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’हमारी जापान यात्रा (1931)
राहुल सांकृत्यायनमेरी लद्दाख यात्रा (1939), रूस में पच्चीस मास (1947), किन्नर देश में (1948), घुमक्कड़शास्त्र (1949) एशिया के दुर्गम खण्डों में (1956) चीन में कम्यून (1959)
रामवृक्ष बेनीपुरीपैरों में पंख बाँधकर (1952), उड़ते चालो उड़ते चालो (1954)
यशपाललोहे के दीवार के दोनों ओर (1953)
मोहन राकेशआखरी चट्टान तक (1953)
स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’अरे यायावर रहेगा याद (1953), एक बूँद सहसा उछली (1960)
भगवतशरण उपाध्यायकलकत्ता से पेकिंग (1955), सागर की लहरों पर (1959)
रामधारी सिंह ‘दिनकर’देश-विदेश (1957), मेरी यात्राएँ (1970)
डॉ रघुवंशहरीघाटी (1963)
प्रभाकर द्विवेदीपार उतरि कहँ जइहौं (1958 ई.)
प्रभाकर माचवेगोरी नजरों में हम (1964)
नर्मल वर्माचीड़ों पर चाँदनी (1964)
धर्मवीर भारतीयादें यूरोप की, यात्राचक्र (1995)
बलराज साहनीरुसी सफरनामा (1971)
डॉ नगेन्द्रअप्रवासी की यात्राएँ (1972)
शंकर दयाल सिंहगाँधी के देश में लेनिन के देश में (1973)
श्रीकान्त वर्माअपोलो का रथ (1975)
कमलेश्वरखंडित यात्राएँ (1975), कश्मीर रात के बाद (1997), आँखों देखा पाकिस्तान (2006)
गोबिंद मिश्रधुंध भरी सुर्खी (1979), दरख्तों के पार शाम (1980), झूलती जड़ें (1990), परतों के बीच (1997), और यात्राएँ (2005)
कन्हैयालाल नन्दनधरती लाल गुलाबी चहरे (1982)
विष्णु प्रभाकरज्योतिपुंज हिमालय (1982), हमसफर मिलते रहे(1996)
अजित कुमारसफरी झोले में (1985), यहाँ से कभी भी (1997)
इन्दु जैनपत्रों की तरह चुप (1987)
रामदरश मिश्रतना हुआ इंद्रधनुष (1990), भोर का सपना (1993), पड़ोस की खुशबू (1999)
शिवप्रसाद सिंहसब्जापत्र कथा कहे (1996)
हिमांशु जोशीयातना शिविर में (1998)
विश्वनाथ प्रसाद तिवारीआत्म की धरती (1999), अंतहीन आकाश (2005)
मनोहर श्याम जोशीक्या हाल हैं चीन के (2006), पश्चिमी जर्मनी पर उड़ती नज़र (2006)
रमेशचंद्र शाहएक लम्बी छांह (2000)
कृष्णदत्त पालीवालजापान में कुछ दिन (2003)
नरेश मेहताकितना अकेला आकाश (2003)
नासिरा शर्माजहाँ फव्वारे लहू रोते हैं (2003)
​अमृतलाल बेगङसौन्दर्य की नदी नर्मदा (1992 ई.), अमृतस्य नर्मदा (2000 ई.)

Question 6

'लखनऊ की कब्र' उपन्यास के लेखक हैं- 

  1. AOption (a)

    बाबू गोपालराम गहमरी

  2. BOption (b)

    लाला श्रीनिवास दास

  3. COption (c)

    पंडित किशोरीलाल गोस्वामी

  4. DOption (d)

    शिवनंदन सहाय

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Correct answer

Answer: (c)C.

पंडित किशोरीलाल गोस्वामी

Why this answer is correct

'लखनऊ की कब्र' उपन्यास के लेखक हैं- पंडित किशोरीलाल गोस्वामी

Key Pointsलखनऊ की कब्र -

  • रचनाकार - किशोरी लाल गोस्वामी
  • प्रकाशन वर्ष - 1917 ई.
  • विधा - उपन्यास
  • विषय -
  • ​वह विशेष रूप से लखनऊ के नवाब नसीरुद्दीन हैदर के चरित्र पर प्रकाश डालने के लिए लिखा गया।

Important Points किशोरी लाल गोस्वामी -

  • (1865-1932)
  • एक भारतीय लेखक और उपन्यासकार थे।
  • उपन्यास-
  • त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी (1888)
  • प्रणयिनी-परिणय (1887)
  • हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी (1890)
  • हीराबाई वा बेहयाई का बोरका (1904)
  • गुलबहार वा आदर्श भरतस्नेह (1902)
  • तारा वा क्षत्र कुल कमलिनी (1902)
  • लाल कुँवर वा शाही रंगमहल (1909) आदि।

Additional Information

उपन्यासकारउपन्यास
बाबू गोपालराम गहमरी'अदभुत लाश', 'बेकसूर की फांसी', 'सर-कटी लाश', 'डबल जासूस', 'भयंकर चोरी', 'खूनी की खोज' तथा 'गुप्तभेद।
लाला श्रीनिवास दासपरीक्षा गुरू (1882)
शिवनंदन सहायदेहाती दुनिया (1926)

Question 7

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I पात्रसूची II नाटक
A.लीलाI.आषाढ़ का एक दिन
B.दन्तुलII.आधे अधूरे
C.अशोकIII.एक और द्रोणाचार्य
D.देवकीIV.स्कंदगुप्त

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  3. COption (c)

    A - I, B - IV, C - II, D - III

  4. DOption (d)

    A - I, B - III, C - IV, D - II

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I पात्रसूची II नाटक
A.लीलाIII.एक और द्रोणाचार्य
B.दन्तुलI.आषाढ़ का एक दिन
C.अशोकII.आधे अधूरे
D.देवकीIV.स्कंदगुप्त

Additional Informationएक और द्रोणाचार्य -

  • रचनाकार- शंकरशेष
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1977 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • अरविंद, लीला, यदू, प्रिसपल, चंदू, विमलेंदु, अनुराधा आदि।
  • विषय-
  • ​इस नाटक में महाभारत कालीन गुरु द्रोणाचार्य के जीवन के प्रसंगों की संवेदनशील झाँकियाँ प्रस्तुत की गई है।

आषाढ़ का एक दिन -

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • ​कालिदास, विलोम, मातुल, दंतुल, निक्षेप, मल्लिका, अम्बिका, प्रियंगुमंजरी आदि।
  • विषय- 
  • ​यह नाटक कालिदास जी की कीर्ति और उन्ही के जीवन पर आधारित है।

आधे अधूरे -

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • महेन्द्रनाथ, सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, ​सावित्री, बिन्नी, अशोक, किन्नी आदि।
  • विषय-
  • इसमें पारिवारिक विघटन, स्त्री-पुरुष संबंध, स्त्री जीवन की त्रासदी आदि का प्रभावपूर्ण चित्रण हुआ है।

स्कंदगुप्त -

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • स्कंदगुप्त, कुमारगुप्त, भीमवर्म्मा, शर्वनाग, देवकी, अनन्तदेवी, कमला, मालिनी आदि।
  • विषय-
  • ​यह नाटक देशभक्त, वीर, साहसी, प्रेमी स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाट्यकृति है।
  • इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संधर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है।

Question 8

खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है?

  1. AOption (a)

    प्रिय प्रवास

  2. BOption (b)

    आँसू

  3. COption (c)

    भारत भारती

  4. DOption (d)

    सरोज स्मृति

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Correct answer

Answer: (a)A.

प्रिय प्रवास

Why this answer is correct

खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य प्रिय प्रवास माना जाता है।

Key Points

  • ‘प्रियप्रवास’ अयोध्यासिंह उपाध्याय “हरिऔध” की हिन्दी काव्य रचना है।
  • ‘प्रियप्रवास**’ (1913-14 ई.) खड़ीबोली** का महाकाव्य है।
  • इसमें 17 सर्ग है। इसमें ‘श्रृगार’ और ‘करुण रस’ की प्रधानता है।
  • हरिऔंध जी द्विवेदी युग के प्रख्यात कवि के साथ-साथ उपन्यासकार, आलोचक व इतिहासकार भी थे।
  • पंडित श्रीधर पाठक के बाद हरिऔंध जी ही हैं जिन्होंने खड़ीबोली में सरस और मधुर रचनाएँ लिखी।
  • प्रियप्रवास की भाषा संस्कृत-गर्भित है। इसमें हिन्दी के स्थान पर संस्कृत का रंग अधिक है।

Additional Information

रचनाकारप्रकाशन वर्षविधारचनाकार
आँसू1925 ई.कविताजयशंकर प्रस��द
भारत भारती1912 ई.कवितामैथिलीशरण गुप्त
सरोज स्मृति1935 ई.कवितासूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Question 9

"गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी, तब तक बना रहेगा।"

उपरोक्त पंक्ति किस आलोचक ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के लिए लिखी है -

  1. AOption (a)

    आचार्य नंद दुलारे वाजपेयी

  2. BOption (b)

    आचार्य रामचंद्र शुक्ल

  3. COption (c)

    बालमुकुंद गुप्त

  4. DOption (d)

    नामवर सिंह

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Correct answer

Answer: (b)B.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

Why this answer is correct

"गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी, तब तक बना रहेगा।"

उपरोक्त पंक्ति आलोचक ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के लिए लिखी है - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

Key Points

  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी के अत्यन्त आदरणीय आलोचक हैं।
  • परवर्ती काल के आलोचक उन्हें सम्मान के साथ उद्धृत करते हैं।
  • उनसे सहमति और असहमति को भी गम्भीरता के साथ रेखांकित किया जाता रहा है।
  • नन्ददुलारे वाजपेयी ने छायावादी काव्यधारा का सम्यक् मूल्यांकन किया।
  • उनकी पुस्तक हिन्दी साहित्य : बीसवी शताब्दी उनके आलोचना-कर्म की बानगी प्रस्तुत करती है।

Important Points

  • आचार्य नंददुलारे वाजपेयी –
  • साहित्य के क्षेत्र में एक व्यक्ति पर इतना बङा उत्तरदायित्व इतिहास की शक्तियों ने कदाचित पहली बार रखा था
  • और पहली ही बार द्विवेदी जी ने इस उत्तरदायित्व को सफल निर्वाह का अनुपम निदर्शन प्रस्तुत किया।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल – 
  • यदि द्विवेदी जी न उठ खङे होते तो जैसी अव्यवस्थित, व्याकरण विरुद्ध,
  • और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पङी थी, उसकी परंपरा जल्दी न सकती।

Additional Informationआचार्य रामचन्द्र शुक्ल- 

  • जन्म- 1884-1941 ईo
  • आलोचनात्मक ग्रंथ- 
  • गोस्वामी तुलसीदास (1923)
  • जायसी ग्रंथावली (1924)
  • भ्रमरगीत सार (1925)
  • हिंदी साहित्य का इतिहास (1929)
  • काव्य में रहस्यवाद (1929)
  • रसमीमांसा (1949)

आचार्य हजारी प्रसाद  द्विवेदी- 

  • जन्म- 1907-1979 ईo
  • आलोचनात्मक ग्रंथ- 
  • सूर साहित्य (1930)
  • हिंदी साहित्य की भूमिका (1940)
  • कबीर (1942)
  • हिंदी साहित्य का आदिकाल (1952)
  • सहज साधना (1963)
  • कालिदास की लालित्य योजना (1965)
  • मध्यकालीन बोध का स्वरूप (1970)

आचार्य नंद दुलारे वाजपेयी -

  • जन्म- 1906 - 1967 ईo
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • हिंदी साहित्य बीसवीं शता��्दी (1942)
  • आधुनिक साहित्य (1950)
  • सूरदास (1953)
  • प्रेमचंद:एक साहित्यिक विवेचन (1953)
  • नया साहित्य :नए प्रश्न (1955)
  • राष्ट्र भाषा की कुछ समस्याएं (1961)
  • कवि निराला (1965)
  • कवि सुमित्रानन्दन पन्त (1997)

बालमुकुंद गुप्त -

  • जन्म- 1865 -1907 ईo
  • निबन्ध  -
  • हरिदास,
  • खिलौना,
  • खेलतमाशा,
  • स्फुट कविता,
  • शिवशंभु का चिट्ठा,
  • चिट्टे और खत
  • सन्निपात चिकित्सा

नामवर सिंह -

  • जन्म- 1926 - 2019 ईo
  • आलोचनात्मक ग्रंथ - 
  • आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ (1954)
  • छायावाद (1955)
  • इतिहास और आलोचना (1957)
  • कहानी: नयी कहानी (1964)
  • कविता के नए प्रतिमान (1968)
  • दूसरी परंपरा की खोज (1982)
  • वाद विवाद संवाद (1989)

Question 10

'संस्कृति के चार अध्याय' किस लेखक का भारतीय संस्कृति के मूल उपादानों का ऐतिहासिक विकास प्रस्तुत करने वाला प्रसिद्ध ग्रंथ है?

  1. AOption (a)

    रामविलास शर्मा

  2. BOption (b)

    रामधारी सिंह दिनकर

  3. COption (c)

    मैथिलीशरण गुप्त

  4. DOption (d)

    हजारी प्रसाद द्विवेदी

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Correct answer

Answer: (b)B.

रामधारी सिंह दिनकर

Why this answer is correct

'संस्कृति के चार अध्याय' रामधारी सिंह दिनकर लेखक का भारतीय संस्कृति के मूल उपादानों का ऐतिहासिक विकास प्रस्तुत करने वाला प्रसिद्ध ग्रंथ है?

Key Pointsसंस्कृति के चार अध्याय -

  • रचनाकार - रामधारी सिंह दिनकर
  • प्रकाशनवर्ष - 1956 ई.
  • पुरस्कार - साहित्य अकादमी पुरस्कार (1959 ई.)।
  • मुख्य -
  • यह विचारोंतेजक पुस्तक भारत के संपूर्ण इतिहास को चार खंडो में बाटकर भारतीय संस्कृति को समझने का सार्थक प्रयास है।

Important Points 

  • 'संस्कृति के चार अध्याय' किताब के लेखक प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर हैं।
  • यह किताब भारत के संस्कृतिक इतिहास को चार भागों में बांटकर लिखी गई है,
  • इस किताब को साहित्य अकादमी ने 1956 में प्रकाशित किया था और बाद में पुरस्कृत भी किया था।
  • यह पुस्तक भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को समर्पित है।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी भूमिका लिखी थी।
  • इस पुस्तक में दिन करने भारतीय संस्कृति के उन पड़ाव का जिक्र किया है जिन्होंने भारतीय संस्कृति के रूप निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वे ऐसे चार सोपान मानते हैं। 
  1. आर्य आगमन
  2. जैन /बौद्ध आंदोलन
  3. इस्लाम का आगमन
  4. यूरोप का आगमन
  • दिनकर पुस्तक को साहित्य और दर्शन का महल कहते हैं जहां इतिहास की हैसियत किराएदार की है।

Additional Information 

रामधारी सिंह दिनकर-

  • जन्म- 1908 - 1974 ई.
  • हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे।
  • वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।
  • रचनाएं -
  • मिट्टी की और (1946 ई.)
  • अर्धनारीश्वर (1952 ई.)
  • रेती के फूल (1954 ई.)
  • हमारी संस्कृतिक एकता (1956 ई.)
  • वेणुवन (1958 ई.)
  • राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता (1958 ई.)
  • बट पीपल (1961 ई.)
  • साहित्य मुखी (1968 ई.)
  • आधुनिकता बोध (1973 ई.)

रामविलास शर्मा -

  • (10 अक्टूबर 1912- 30 मई 2000 )
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे।
  • कृतियाँ  -
  • चार दिन (उपन्यास) - (1936)
  • पाप के पुजारी (नाटक) - (1936)
  • 'तार सप्तक' में संकलित - (1943)
  • महाराजा कठपुतली सिंह (प्रहसन) - (1946)
  • महाराजा कठपुतली सिंह (प्रहसन) -(1946)
  • बुद्ध वैराग्य तथा प्रारम्भिक कविताएँ - (1997)
  • सदियों के सोये जाग उठे - (1988)
  • रूपतरंग - (1956)

मैथिलीशरण गुप्त-

  • (3 अगस्त 1886 – 12 दिसम्बर 1964)
  • हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे।
  • कृतियाँ -
  • महाकाव्य- साकेत 1931, यशोधरा 1932 आदि।
  • खण्डकाव्य- जयद्रथ वध 1910, भारत-भारती 1912, पंचवटी 1925, द्वापर 1936, सिद्धराज, नहुष आदि।
  • नाटक - रंग में भंग 1909, राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट, विरहिणी, वैतालिक, शक्ति आदि।

महावीर प्रसाद द्व‍िवेदी -

  • जन्म- 1864 -1938 ई.
  • हिन्दी के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगप्रवर्तक थे।
  • पद्य रचनाएँ-
  • देवी स्तुति-शतक -1892 ई.
  • कान्यकुब्जावलीव्रतम -1898 ई.
  • नागरी -1900 ई.
  • काव्य मंजूषा -1903 ई.
  • गद्य रचनाएँ-
  • वनिता-विलाप -1918 ई.
  • रसज्ञ रंजन -1920 ई.
  • अतीत स्मृति -1924 ई.
  • दृश्य दर्शन -1928 ई.

Question 11

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I लेखकसूची II रचना
A.भारतेन्दु हरिश्चंद्रI.प्रेमसंपत्ति लता
B.बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघनII.प्रेम पुष्पावली
C.प्रतापनारायण मिश्रIII.वर्षा विनोद
D.जगन्मोहनIV.जीर्ण जनपद

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - IV, B - II, C - III, D - I

  2. BOption (b)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  3. COption (c)

    A - III, B - II, C - IV, D - I

  4. DOption (d)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - III, B - IV, C - II, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - IV, C - II, D - I

Key Points

सूची I लेखकसूची II रचना
A.भारतेन्दु हरिश्चंद्रIII.वर्षा विनोद
B.बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघनIV.जीर्ण जनपद
C.प्रतापनारायण मिश्रII.प्रेम पुष्पावली
D.जगन्मोहनI.प्रेमसंपत्ति लता

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चंद्र -

  • (9 सितंबर 1850-6 जनवरी 1885)
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • काव्यकृतियां -
  • भक्तसर्वस्व (1870)
  • प्रेममालिका (1871)
  • प्रेम माधुरी (1875)
  • प्रेम-तरंग (1877),
  • होली (1879),
  • वर्षा-विनोद (1880),
  • मधु मुकुल (1881)
  • फूलों का गुच्छा (1882)
  • प्रेम फुलवारी (1883)।

बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन -

  • (जन्म, 1855 - निधन, 1923)
  • हिन्दी साहित्यकार थे।
  • काव्यकृतियां -
  • जीर्ण जनपद
  • आनंद अरुणोदय
  • हार्दिक हर्षादर्श
  • मयंक-महिमा
  • अलौकिक लीला
  • वर्षा-बिंदु
  • भारत सौभाग्य
  • प्रयाग रामागमन

प्रतापनारायण मिश्र -

  • (24 सितंबर, 1856 - 6 जुलाई, 1894)
  • भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख लेखक, कवि और पत्रकार थे।
  • काव्य-कृतियाँ -
  • प्रेम पुष्पावली
  • मन की लहर
  • लोकोक्तिशतक
  • कानपुर महात्मय
  • ब्रेडला स्वागत
  • तारापात पचीसी
  • दीवाने बरहमन
  • बेगारी विलाप
  • प्रताप लहरी

जगन्मोहन -

  • (1857 - 1899)
  • हिन्दी के भारतेन्दुयुगीन कवि, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • काव्यसंग्रह -
  • प्रेम-संपत्ति-लता (1942)
  • श्यामालता
  • श्यामासरोजिनी (1943)।

Question 12

स्कंदगुप्त के आमुख के अनुसार निम्न में से कौन सा कथन असत्य है?

A. 467 ई. में स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य का अंत हुआ।

B. मातृगुप्त किशोरावस्था में कुमारगुप्त की सभा में थे।

C. महाराजा चन्द्रगुप्त के समय में सिंहल के राजा मेघवर्ण ने उपहार भेजकर बोधगया में विहार बनाने की प्रार्थना की थी।

D. दिङ्नाग का गुरू वसुबन्धु अयोध्या के विक्रमादित्य का सुहृद था।

E. कालिदास स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य के सहचर थे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A एवं B

  2. BOption (b)

    केवल C

  3. COption (c)

    केवल D

  4. DOption (d)

    केवल E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C

Key Pointsस्कंदगुप्त के आमुख के अनुसार कथन सत्य -

  • A. 467 ई. में स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य का अंत हुआ।
  • B. मातृगुप्त किशोरावस्था में कुमारगुप्त की सभा में थे।
  • D. दिङ्नाग का गुरू वसुबन्धु अयोध्या के विक्रमादित्य का सुहृद था।
  • E. कालिदास स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य के सहचर थे।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • समुद्रगुप्त का समकालीन लंकानरेश मेघवर्ण ने उसके (समुद्रगुप्त ) पास उपहारों सहित एक दूत मंडल भेजा था तथा गया में मठ बनाने की प्रार्थना की थी।

Additional Informationस्कंदगुप्त-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1928 ई.
  • मुख्य पात्र - स्कंदगुप्त, कुमारगुप्त, पर्णदत्त, देवकी, जयमाला, कमला आदि।
  • विषय -
  • ​इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संधर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है।
  • नाटक:
  • सज्जन (1911), कल्याणी परिणय (1912) (जो नागरी प्रचारणी सभा से प्रकाशित हुआ था),
  • प्रायश्चित (1913), करुणालय (1913), राज्य श्री (1915), विशाखा (1921), अजातशत्रु (1922),
  • कामना (1923) में लिखा गया और प्रकाशन 1927 ई० हुआ, जनमेजय का नागयज्ञ (1926),
  • स्कंदगुप्त (1928), एक घूँट (1929), चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933)।

Question 13

नयी समीक्षा के संदर्भ में कौन- से कथन सत्य नहीं हैं?

A. नयी समीक्षा ने स्वच्छन्दतावादी प्रवृत्तियों का विरोध करते हुए पलायनवादी व भावुकतापूर्ण वृत्ति का भी तिरस्कार किया।

B. नयी समीक्षा ने विक्टोरियन नैतिकता को साहित्य की मूल वृत्ति माना ।

C. नयी समीक्षा रचना को एक भाषिक संरचना के रूप में देखती है।

D. नयी समीक्षा आलोचक की जिम्मेदारी किसी कलाकृति के गूढ़ अर्थ के उद्घाटन से जोड़ती है, भले ही उसे प्रभावपरक हेत्वाभास से गुजरना पड़े।

E. नयी समीक्षा कृति की समझ के लिए साहित्य की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक सामाजिक वातावरण र अतिरिक्त बल देने का विरोध करती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B एवं C

  2. BOption (b)

    केवल B एवं D

  3. COption (c)

    केवल A एवं D

  4. DOption (d)

    केवल D एवं E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल B एवं D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B एवं D

Key Pointsनयी समीक्षा के संदर्भ में कथन सत्य-

  • A. नयी समीक्षा ने स्वच्छन्दतावादी प्रवृत्तियों का विरोध करते हुए पलायनवादी व भावुकतापूर्ण वृत्ति का भी तिरस्कार किया।
  • C. नयी समीक्षा रचना को एक भाषिक संरचना के रूप में देखती है।
  • E. नयी समीक्षा कृति की समझ के लिए साहित्य की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक सामाजिक वातावरण र अतिरिक्त बल देने का विरोध करती है।

त्रुटि रहित कथन -

  • B. नयी समीक्षा में नैतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक अथवा अन्य प्रकार की असम्बद्ध धारणाओं को बीच में लाकर इस अनुभव को अशुद्ध नहीं करना चाहिए।
  • D. नयी समीक्षा में आलोचक का कर्तव्य-कर्म किसी कृति के समग्र रूप और अंगों के अन्तः सम्बन्धों का विश्‍लेषण कर उसकी जटिल संरचना का परीक्षण करना है।

Additional Informationनयी समीक्षा के बारे -

  • 20वीं शताब्दी का सबसे महत्वपूर्ण और समृद्ध आलोचनात्मक आन्दोलन का नाम ‘नयी समीक्षा’ आन्दोलन है।
  • आधुनिक काल में इंग्लैंड और अमेरिका में साहित्यिक आलोचना से संबंधित यह सबसे बड़ा आंदोलन था।
  • इस आलोचनात्मक आन्दोलन का उद्भव ‘आंग्ल-अमरीकी’ आलोचनात्मक के रूप में हुआ।
  • अमरीका में आई.ए. रिचर्ड्स को नयी समीक्षा का ‘जनक’ माना जाता है।
  • पश्चिम में रचना की इस समीक्षा पद्धति को ‘नयी समीक्षा’ नाम दिया गया।
  • इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले कोलंबिया विश्वविधालय के तुलनात्मक साहित्य के प्रोफ़ेसर
  • एस.ई. स्पिनगार्न ने 1911 ई. में ‘नयी समीक्षा’ शीर्षक नाम से शोध पत्र लिखा था जो 1913 ई. में प्रकाशित हुआ।

Question 14

अज्ञेय के संबंध में निम्नलिखित में कौन-सा / से कथन असत्य है हैं?

A. अज्ञेय का पहला कविता संग्रह भग्नदूत' 1933 ई. में प्रकाशित हुआ ।

B. 'चिंता' नामक कविता संग्रह चार खंडों में विभक्त है।

C. हरी घास पर क्षण भर कविता में प्रतीकात्मक शैली के अंतर्गत मृत्यु का चित्रण किया गया है।

D. देशभक्ति, बलिदान इत्यादि अन्यान्य भावों के बावजूद इत्यलम का स्थायीभाव प्रेमानुभूति ही है।

E. 'बावरा अहेरी' अज्ञेय का सबसे छोटा कविता संग्रह है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल C और E

  2. BOption (b)

    केवल A, B और D

  3. COption (c)

    केवल B और C

  4. DOption (d)

    केवल B और E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल B और C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B और C

Key Pointsअज्ञेय के संबंध में कथन सत्य -

  • A. अज्ञेय का पहला कविता संग्रह 'भग्नदूत' 1933 ई. में प्रकाशित हुआ ।
  • D. देशभक्ति, बलिदान इत्यादि अन्यान्य भावों के बावजूद इत्यलम का स्थायीभाव प्रेमानुभूति ही है।
  • E. 'बावरा अहेरी' अज्ञेय का सबसे छोटा कविता संग्रह है।

त्रुटि रहित कथन -

  • B. ‘चिंता’ कविता जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित “कामायानी” नामक मूल ग्रंथ का एक भाग है।
  • C. कविता में प्रतीकात्मक शैली के ज़रिए मृत्यु का चित्रण अज्ञेय की कविता 'भग्नदूत' में किया गया है।

Additional Informationसच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' -

  • जन्म-1911-1987 ई.
  • हिंदी भाषा के कवि, लेखक, पत्रकार आ संपादक रहे हैं।
  • काव्य रचनाएँ-
  • भग्नदूत (1933 ई.)
  • चिंता (1942 ई.)
  • हरी घास पर क्षण भर (1949 ई.)
  • बावरा अहेरी (1954 ई.)
  • आंगन के पार द्वार (1961 ई.)
  • कितनी नावों में कितनी बार (1967 ई.) आदि।

Question 15

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए:

सूची I संपादकसूची II पत्रिका
A.राजेन्द्र कुमारI.पहल
B.ज्ञानरंजनII.नयी कविता
C.जगदीश गुप्तIII.अभिप्राय
D.विजयदेव नारायण साहीIV.आलोचना

 

नीचे दिए ��ए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  4. DOption (d)

    A - II, B - III, C - IV, D - I

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Correct answer

Answer: (a)A.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I संपादकसूची II पत्रिका
A.राजेन्द्र कुमारIII.अभिप्राय
B.ज्ञानरंजनI.पहल
C.जगदीश गुप्तII.नयी कविता
D.विजयदेव नारायण साहीIV.आलोचना

Important Points

क्रमांकपत्रिका का नामसन्सम्पादक
1.अभिप्राय -1953-58राजेन्द्र कुमार
2.पहल - त्रैमासिक1960ज्ञानरंजन
3.नयी कविता - अर्द्धवार्षिक1954जगदीश गुप्त
4.आलोचना -  त्रैमासिक1951विजयदेव नारायण साही

Additional Information

क्रमांकपत्रिका का नामसन्सम्पादक
1उदन्त मार्तंड- साप्ताहिक1826जुगल किशोर
2बंगदूत- साप्ताहिक1829राजा राम मोहन राय
3सुधाकर- साप्ताहिक1850बाबु तारा मोहन मित्र
4कवि वचन सुधा- मासिक1868भारतेंदु
5हरिश्चन्द्र मैगजीन- मासिक1873भारतेंदु
6बाल बोधनी- मासिक1874भारतेंदु
7हिंदी प्रदीप- मासिक1877बाल कृष्ण भट्ट
8आनंद कादम्बिनी- मासिक1881बदरी नारायण चौधरी
9भारतेंदु1884पं. राधा चरण गोस्वामी
10प्रयाग समाचारदेवकी नंदन त्रिपाठी
11ब्राह्मण- मासिक1883प्रताप नारायण मिश्र
12हिन्दूस्तान- दैनिकराजा रामपाल सिंह
13इंदु- मासिक
14नागरी नीरद- साप्ताहिकबदरी नारायण चौधरी
15नागरी प्रचारिणी पत्रिका- त्रैमासिक1896वेणी प्रसाद
16उपन्यास- मासिक1898गोपाल राम गहमरी
17सरस्वती- मासिक1900चिंतामणि घोष/ श्याम सुंदर दास (1902)/ महावीर प्रसाद द्विवेदी (1903)
18सुदर्शन- मासिक1900देवकीनंदन/माधव
19समालोचक- मासिक1902गुलेरी
20अभ्युदय- साप्ताहिकमदन मोहन मालवीय
21इंदु- मासिक1909प्रकाश कुमार उपाध्याय
22मर्यादा- मासिक1909कृष्ण कान्त मालवीय/संपूर्णानंद/ प्रेमचंद
23प्रताप- साप्ताहिक1913गणेश शंकर विद्यार्थी
24चाँदमहादेवी वर्मा
25प्रभा1913कालू राम, बाद में कानपुर में बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’/माखनलाल चतुर्वेदी
26माधुरी1922दुलारे लाल भार्गव/ रूप नारायण पांडेय/ कृष्ण बिहारी मिश्र/ प्रेमचंद(1928-31)
27सुधा- मासिक1929दुलारेलाल भार्गव
28विशाल भारत- मासिक1928बनारसीदास चतुर्वेदी
29हंस(1)-1930 ( 2) 1984 "(1)- प्रेमचंद (2)- राजेन्द्र यादव
30आदर्श + मौजीशिव पूजन सहाय
31साहित्य सन्देश- मासिक1937बाबू गुलाब राय
32मतवाला- साप्ताहिक1923महादेव प्रसाद सेठ/ शिव पूजन सहाय/ निराला
33जागरण- साप्ताहिक132शिव पूजन सहाय/ प्रेमचंद(1932)
34नवजीवन- साप्ताहिक1921गाँधी
35देश- साप्ताहिक1920राजेन्द्र प्रसाद
36कर्मवीर- साप्ताहिक1924माखनलाल चतुर्वेदी
37सैनिककृष्ण दत्त पालीवाल
38प्रतीक- दृमासिक1947अज्ञेय
39रूपाभ- मासिक1938पन्त/ नरेंद्र शर्मा
40कल्पना- दृमासिक1949आर्येन्द्र शर्मा
41धर्मयुग- साप्ताहिक1950धर्मवीर भारती
42आलोचना- त्रैमासिक1951शिवदान सिंह चौहान/ धर्मवीर भारती/रघुवंश/ साही/ नंददुलारे वाजपेयी/ नामवर सिंह
43नये पत्ते-1953लक्ष्मी कान्त वर्मा/ रामस्वरूप चतुर्वेदी
44नयी कविता- अर्द्धवार्षिक1954जगदीश गुप्त, रामस्वरुप चतुर्वेदी
45ज्ञानोदय- मासिक1955कन्हैया लाल मिश्र
46निकष- साप्ताहिक1956धर्मवीर भारती/ लक्ष्मीकांत वर्मा
47कृति1958नरेश मेहता
48समालोचक- मासिक1958रामविलास शर्मा

Question 16

निम्नलिखित पंक्तियों में भक्तिकाल के कवियों द्वारा लिखित काव्य पंक्तियां कौन सी हैं ?

A. अँसुवन जल सींचि - सींचि, प्रेम बेलि बोई

B. सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समीर

C. मोर पखा सिर ऊपर राखिहों, गुंज की माल गरे पहिरोंगी

D. बड़े - बड़े नेनन सो आँसू भरि भरि ढरि ।

E. ताही छन उडुराज उदित रस - राज सहायक

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C

  2. BOption (b)

    केवल B, C, D

  3. COption (c)

    केवल A, C, E

  4. DOption (d)

    केवल C, D, E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, E

Key Pointsभक्तिकाल के कवियों द्वारा लिखित काव्य पंक्तियां हैं -

  • A. अँसुवन जल सींचि - सींचि, प्रेम बेलि बोई
  • C. मोर पखा सिर ऊपर राखिहों, गुंज की माल गरे पहिरोंगी
  • E. ताही छन उडुराज उदित रस - राज सहायक

नोट - 

  • भक्ति काल के प्रमुख कवि तुलसीदास, कबीरदास, रहीम, मीरा, रसखान, नंददास, सूरदास इत्यादि।

Important Points 

  • 'अँसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम बेलि बोई' ये पंक्तियां कवयित्री मीराबाई की रचना 'मेरे तो गिरधर गोपाल' से ली गई हैं।
  • ​भावार्थ :  ​मीराबाई ने अनेक कष्टों को सहन कर कर करके हृदय में कृष्ण के प्रेम की बेल को बोया और विकसित किया है।
  • 'मोर-पखा सिर ऊपर राखिहौं, गुंज की माला गरें पहिरौंगी' ये पंक्तियां कवि रसखान द्वारा रचित ‘रसखान के सवैये’ से ली गई है।
  • ​भावार्थ : एक गोपी अपनी दूसरी सखी से कहती है कि हे सखी! मैं तुम्हारे कहने से
  • अपने सिर पर मोर के पंखों से बना मुकुट धारण करूंगी, अपने गले में गुंजा की माला पहन लूंगी।
  • 'ताही छन उडुराज उदित रस - राज सहायक' ये पंक्तियां कवि नंददास की रचना 'रासपंचाध्यायी' से ली गई हैं।​

Additional Information

  • B. 'सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समीर' ये पंक्तियां कवि बिहारी की हैं।
  • ​भावार्थ : कवि बिहारी कहते हैं कि जहाँ के वृक्ष बेहद घने हैं, जहाँ की छाया बेहद सुख देने वाली है।
  • D. 'बड़े-बड़े नैनन सों आँसू भरि-भरि ढरि' ये पंक्ति, कविवर देव की कविता से ली गई है।

Question 17

निम्न में से कौन सा/से कथन आकाशदीप कहानी से संबंधित है हैं?

A. दोनों बंदी नाव स्वतंत्र होने के कारण मुक्त हो गए।

B. वरूण बालिकाओं के लिए लहरों से पन्ना और सोने की क्रीड़ा शैल मालायें बन रही थीं।

C. चम्पा आजीवन दीप स्तंभ में आलोक जलाती रही।

D. बुधगुप्त ने उस जगह का कोई नाम न होने के कारण उसे बुध- द्वीप कहने का निर्णय लिया।

E. बुधगुप्त ने चंपा से कहा कि छोटी नाव पर इधर घूमना ठीक नहीं है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और C

  2. BOption (b)

    केवल B, D और E

  3. COption (c)

    केवल A, C और E

  4. DOption (d)

    केवल C, D और E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C और E

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सही उत्तर है - केवल A, C और E

Key Pointsआकाशदीप कहानी से संबंधित ​कथन है -

  • A. दोनों बंदी नाव स्वतंत्र होने के कारण मुक्त हो गए।
  • C. चम्पा आजीवन दीप स्तंभ में आलोक जलाती रही।
  • E. बुधगुप्त ने चंपा से कहा कि छोटी नाव पर इधर घूमना ठीक नहीं है।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • B. वरुण बालिकाओं के लिए लहरों से हीरे और नीलम की क्रीड़ा शैल-मालायें बन रही थीं।
  • D. बुधगुप्त ने उस जगह का कोई नाम न होने के कारण उसे चंपा-द्वीप कहने का निर्णय लिया।

Important Pointsआकाशदीप-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • प्रमुख पात्र - चंपा और बुद्धगुप्त आदि।
  • विषय-
  • चम्पा और बुद्धगुप्त के आदर्श प्रेम व त्याग की कहानी है।
  • यह नायिका प्रधान प्रेम कहानी है।
  • इसमें समुद्री जीवन को ऐतिहासिक परिवेश में चित्रित किया गया है।
  • कहानी में मानवीय प्रेम को स्पष्ट करते हुए एक आदर्श प्रेम को स्थापित किया गया है।

Additional Informationजयंशकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे।
  • वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
  • कहानी संग्रह-
  • छाया (1912 ई.)
  • प्रतिध्वनि(1926 ई.)
  • आँधी(1931 ई.)
  • इन्द्रजाल(1936 ई.) आदि।
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • देवदासी
  • देवरथ
  • संदेश
  • मधुआ
  • पुरस्कार
  • गुंडा आदि।

Question 18

इनमें से कौन से / सा युग्म सही सुमेलित है/हैं?

A. भारतेंदु - दिल्ली दरबार दर्पण

B. प्रतापनारायण मिश्र - शिवमूर्ति

C. अध्यापक पूर्ण सिंह - नाखून क्यों बढ़ते हैं

D. नामवर सिंह - उठ जाग मुसाफिर

E. विवेकी राय - संस्कृति और सौंदर्य

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A C

  2. BOption (b)

    केवल A, B

  3. COption (c)

    केवल B, C

  4. DOption (d)

    केवल D, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B

Key Pointsयुग्म सही सुमेलित है -

  • A. भारतेंदु - दिल्ली दरबार दर्पण
  • B. प्रतापनारायण मिश्र - शिवमूर्ति

Important Pointsदिल्ली दरबार दर्पण-

  • रचनाकार - भारतेंदु हरिश्चंद्र जी
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1877 ई.
  • विषय -  इस निबंध में 1877 ई. में लगे दिल्ली दरबार का वर्णन मिलता है।

शिवमूर्ति -

  • रचनाकार - प्रतापनारायण मिश्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - (19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में लिखा गया)
  • विषय -  
  • इसमें भारतीय मनीषियों का जनजागरण, संस्कृति का उप-पाठ निहित है, साथ ही कला का पाठ भी।

Additional Informationनाखून क्यों बढ़ते हैं -

  • रचनाकार - हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1951 ई.
  • विषय - 
  • यह विचार-प्रधान व्यक्तिनिष्ठ निबन्ध है।
  • ​यह निबंध हमें नाखूनों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझने का अवसर प्रदान करता है।

उठ जाग मुसाफिर -

  • रचनाकार - विवेकी राय
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 2012 ई.
  • विषय - उल्लास-उमंग भरी शब्द-सुगंध का प्रसार।

संस्कृति और सौंदर्य -

  • रचनाकार -  नामवर सिंह
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1982 ई.
  • विषय -  
  • संस्कृति और सौंदर्य निबंध मूलत: हजारी प्रसाद द्विवेदी पर आधारित है।
  • यह निबंध द्विवेदीजी के शुद्ध पुष्प-प्रेम का प्रमाण नहीं, बल्कि संस्‍कृति-दृष्टि का अनूठा दस्‍तावेज है।

Question 19

'दो फकीर शहर आशोब गाते हुए हाल में प्रवेश करते हैं, और स्टेज पर जाते हैं, कफनी पहने हुए एक हाथ में कश्कोल ओर तस्बीह'

'आगरा बाज़ार' नाटक की उपरोक्त पंक्तियों में कश्कोल' का अर्थ क्या है?

  1. AOption (a)

    अंगोछा

  2. BOption (b)

    जपने की माला 

  3. COption (c)

    डंडा

  4. DOption (d)

    भिक्षा पात्र

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Correct answer

Answer: (d)D.

भिक्षा पात्र

Why this answer is correct

'दो फकीर शहर आशोब गाते हुए हाल में प्रवेश करते हैं, और स्टेज पर जाते हैं, कफनी पहने हुए एक हाथ में कश्कोल ओर तस्बीह'

'आगरा बाज़ार' नाटक की उपरोक्त पंक्तियों में 'कश्कोल' का अर्थ है - भिक्षा पात्र

Key Points

  • दो फकीर 'शहर आशोब' (नगर की दुर्दशा का वर्णन करने वाली कविता) गाते हुए हाल में प्रवेश करते हैं और स्‍टेज पर जाते हैं,
  • कफनी पहने हुए एक हाथ में कश्‍कोल (भिक्षा-पात्र) और तस्‍बीह (जपने की माला) और दूसरे में एक डंडा और लोहे के कड़े लिए हुए।
  • परदे के सामने खड़े होकर जज्‍म सुनाते हैं और ताल पर कड़े बजाते जाते हैं।

Additional Informationआगरा बाज़ार -

  • रचनाकार- हबीब तनवीर
  • प्रकाशन वर्ष- 1954 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र : फ़कीर, लड्डूवाला, तरबूजवाला, बर्फवाला, ककड़ीवाला, पानवाला, मदारीवाला, बर्तनवाला आदि।
  • विषय - 
  • ​इस नाटक में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं का चित्रण किया गया है।
  • अन्य नाटक:
  • शतरंज के मोहरे (1954), लाला शोहरत राय (1954), मिट्टी की गाड़ी (1958),
  • गाँव का नाम ससुराल हमार नाम दामाद (1973), हिरमा की अमर कहानी उत्तर रामचरित (1977),
  • पोंगा पण्डित (1990), जिन लाहौर नहीं देख्या (1990), कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना (1993),
  • द ब्रोकन ब्रिज (1995), जहरीली हवा (2002), राज रक्त (2006)।

Question 20

दिए गए विकल्पों में से असत्य कथन का चयन कीजिए-

A. पूर्वी हिंदी का विकास मागधी से हुआ है।

B. लंका में पालि को ही अर्धमागधी कहा जाता है।

C. अर्धमागधी कोसल के आसपास विकसित हुई है।

D. राजस्थानी भाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है।

E. तीसरी सदी के लगभग विकृत शब्दों को अपभ्रष्ट या अपभ्रंश कहा जाता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, C

  2. BOption (b)

    C, D

  3. COption (c)

    D, B

  4. DOption (d)

    D, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

A, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, C

Key Pointsसत्य कथन -

  • B. लंका में पालि को ही अर्धमागधी कहा जाता है।
  • D. राजस्थानी भाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है।
  • E. तीसरी सदी के लगभग विकृत शब्दों को अपभ्रष्ट या अपभ्रंश कहा जाता है।

त्रुटि रहित कथन -

  • A. 'पूर्वी हिन्दी' का संबंध अर्धमागधी अपभ्रंश से है।
  • C. जार्ज ग्रियर्सन के अनुसार यह मध्य देश (शूरसेन) और मगध के मध्यवर्ती देश (अयोध्या या कोसल) की भाषा थी।

Additional Informationसंस्कृत ⇒ पालि ⇒ प्राकृत ⇒ अपभ्रंश⇒ शौरसेनी ⇒ पश्चिमी हिन्दी ⇒ खड़ी बोली

हिन्दी ���ाषा के इतिहास को तीन भागों में विभाजित किया गया है - 

  1. प्राचीन भारतीय आर्य भाषा (1500 ई.पू. - 500 ई.पू.)
  • वैदिक संस्कृत (1500 ई. पू. - 1000 ई. पू.)
  • लौकिक संस्कृत (1000 ई. पू. - 500 ई. पू.)
  1. मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा (500 ई.पू. - 1000 ई.)
  2. पाली (500 ई. पू .- 1 ई.)
  • पश्चिमोत्तरीय
  • मध्यदेशीय
  • पूर्वी
  • दक्षिणी
  1. प्राकृत (1 ई. - 500 ई.)
  • शौरसेनी
  • पैशाची
  • महाराष्ट्री
  • मागधी
  • अर्धमागधी
  1. अपभ्रंश (500 ई. - 1000 ई.)
  • शौरसेनी - पश्चिमी हिन्दी (ब्रजभाषा, खड़ी बोली, बांगरु, कन्नौजी, बुंदेली),
  • गुजराती, राजस्थानी (मेवाती, मारवाड़ी, मालवी, जयपुरी)
  • पैशाची - लहंदा, पंजाबी
  • महाराष्ट्री - मराठी
  • मागधी - बिहारी (भोजपुरी, मैथिली, मगही), बंगला, उड़िया, असमिया
  • अर्धमागधी - पूर्वी हिन्दी (अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी)
  • खस / मागधी - पहाड़ी हिन्दी)
  1. आधुनिक भारतीय आर्य भाषा (1000 ई. - अब तक)
  • पश्चिमी हिंदी उपभाषा
  • पूर्वी हिंदी उपभाषा
  • राजस्थानी उपभाषा
  • बिहारी उपभाषा
  • पहाड़ी उपभाषा

Question 21

आदिकाल में लिखी गई रचना 'आल्हा' (जगनिक) की मूल भाषा इनमें से कौन सी है:

  1. AOption (a)

    खड़ी बोली

  2. BOption (b)

    अवधी

  3. COption (c)

    छत्तीसगढ़ी

  4. DOption (d)

    बुंदेलखण्डी

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Correct answer

Answer: (d)D.

बुंदेलखण्डी

Why this answer is correct

आदिकाल में लिखी गई रचना 'आल्हा' (जगनिक) की मूल भाषा इनमें से है: बुंदेलखण्डी

Key Pointsआदिकाल में लिखी गई रचना 'आल्हाखंड' की मूल भाषा लोक भाषा है: 

  • जगनिक द्वारा रचित 'आल्हाखंड' को लोक भाषा का पहला मौखिक काव्य माना जाता है।
  • यह वीरगाथात्मक लोकगाथा उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय है।
  • 'आल्हाखंड' में महोबा के दो प्रसिद्ध वीरों आल्हा और ऊदल के वीर चरित का विस्तृत वर्णन है।
  • 'आल्हाखंड' की कोई भी जगनिक द्वारा लिखी गई प्रति अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है।
  • 'आल्हाखंड' के कई संस्करण हैं, जो भाषा और विषय दोनों में एक दूसरे से भिन्न हैं:
  • बुंदेली, बघेली, अवधी, भोजपुरी, मैथिली और कन्नौजी संस्करण इनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं।

Additional Information

  • बुंदेली (पश्चिमी हिंदी) - 
  • ​झांसी, जालौन, हमीरपुर, ओरछा, सागर, नृसिंहपुर, सिवनी, होशंगाबादल आदि।
  • खड़ी बोली (पश्चिमी हिंदी)-
  • ​देहरादून, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, बिजनौर, संभल, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद आदि।
  • अवधी (पूर्वी हिंदी)-
  • ​कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर,अमेठी, कौशाम्बी, चित्रकूट, भदोही, बहराइच, श्रावस्ती, अम्बेडकरनगर, लखीमपुर आदि।
  • छत्तीसगढ़ी (पूर्वी हिंदी)-
  • बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर, रायगढ़, नांदगांव, कांकेर, महासमुंद, सरगुजा, कोरिया।

Question 22

निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए-

A. साहित्य को जनजीवन के समीप लाने का श्रेय भारतेंदु युग के निबंधों को जाता है।

B. विचार प्रधानता और गंभीर मनोभावों का विवेचन द्विवेदी युग के निबंधों की विशेषता है।

C. छायावाद युग के निबंध केवल ललित निबंध की श्रेणी में आते हैं।

D. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने केवल विचार-प्रधान निबंध ही लिखे हैं।

E. कुबेरनाथ राय ललित निबंधकार हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C, D

  2. BOption (b)

    केवल A, E

  3. COption (c)

    केवल A, B

  4. DOption (d)

    केवल A, B, E

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B,E

Key Pointsकथनों पर विचार करते हुए सही उत्तर -

  • A. साहित्य को जनजीवन के समीप लाने का श्रेय भारतेंदु युग के निबंधों को जाता है।
  • B. विचार प्रधानता और गंभीर मनोभावों का विवेचन द्विवेदी युग के निबंधों की विशेषता है।
  • E. कुबेरनाथ राय ललित निबंधकार हैं।

Important Points

  • कथन A सही है:
  • भारतेंदु युग (नवजागरण काल) में हिंदी निबंधों ने साहित्य को जनजीवन, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय जागरण से जोड़ने का कार्य किया।
  • इस युग के निबंधकारों जैसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने सामाजिक सुधार और जनचेतना पर जोर दिया।
  • कथन B सही है:
  • द्विवेदी युग (महावीर प्रसाद द्विवेदी के प्रभाव वाला काल) में निबंध विचार-प्रधान, गंभीर और बौद्धिक थे, जिसमें सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक विषयों का गहन विश्लेषण किया गया।
  • कथन C गलत है:
  • छायावाद युग के निबंध मुख्यतः ललित (भावुक और सौंदर्यपूर्ण) थे, लेकिन केवल ललित श्रेणी में नहीं आते। इस युग में जैनेन्द्र कुमार जैसे निबंधकारों के कार्य ललित थे, लेकिन अज्ञेय आदि के निबंधों में विचार-प्रधानता भी थी; यह युग मुख्य रूप से कविता-प्रधान था, लेकिन निबंधों में विविधता थी।
  • कथन D गलत है:
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी ने विचार-प्रधान निबंध (जैसे साहित्यिक आलोचना) के अलावा ललित निबंध (जैसे "अशोक के फूल") भी लिखे; वे केवल विचार-प्रधान तक सीमित नहीं थे।
  • कथन E सही है:
  • कुबेरनाथ राय मुख्य रूप से ललित निबंधकार थे, जिनके निबंधों में भावुकता, सौंदर्य और व्यक्तिगत अनुभूतियां प्रमुख थीं (जैसे "महिला", "दिव्या" आदि)।

Question 23

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची Iसूची II
A.शब्दार्थे सहितौ काव्यं गद्यं पद्यं च तत् द्विधाI.वामन
B.काव्य शब्दोऽयं गुणालङ्कार संस्कृतयो: शब्दार्थयोर्वर्ततेII.मम्मट
C.तद्दोषौ शब्दार्थो सगुणावनलङ्कत्तीपुनः क्वापिIII.भामह
D.वाक्यं रसात्मक काव्यंIV.विश्वनाथ

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  3. COption (c)

    A - III, B - II, C - IV, D - I

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची Iसूची II
A.शब्दार्थे सहितौ काव्यं गद्यं पद्यं च तत् द्विधाIII.भामह
B.काव्य शब्दोऽयं गुणालङ्कार संस्कृतयो: शब्दार्थयोर्वर्ततेI.वामन
C.तद्दोषौ शब्दार्थो सगुणावनलङ्कत्तीपुनः क्वापिII.मम्मट
D.वाक्यं रसात्मक काव्यंIV.विश्वनाथ

Additional Informationवामन -

  • (8वीं शताब्दी का उत्तरार्ध - 9वीं शताब्दी का पूर्वार्ध) प्रसिद्ध अलंकारशास्त्री थे।
  • उनके द्वारा प्रतिपादित काव्यलक्षण को रीति-सिद्धान्त कहते हैं।
  • वामन द्वारा रचित काव्यालङ्कारसूत्र, काव्यशास्त्र का दर्शन निर्माण का प्रथम प्रयास है।
  • यह ग्रन्थ सूत्र रूप में है। वे रीति को काव्य की आत्मा कहते हैं।

मम्मट -

  • संस्कृत काव्यशास्त्र के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से एक समझे जाते हैं।
  • वे अपने शास्त्रग्रंथ काव्यप्रकाश के कारण प्रसिद्ध हुए।
  • कश्मीरी पंडितों की परंपरागत प्रसिद्धि के अनुसार वे नैषधीय चरित के रचयिता कवि श्रीहर्ष के मामा थे।
  • 'काव्यप्रकाश' ग्रंथ के रचयिता आचार्य मम्मट है।

भामह -

  • आचार्य भामह काव्यशास्त्र के सुप्रसिद्ध आचार्य थे।
  • इन्हें अलंकार संप्रदाय का जनक कहते हैं।
  • "शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्" इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य परिभाषा है।
  • आचार्य भामह की कीर्तिपताका को फहराने वाला यही काव्यालङ्कार ग्रन्थ ��ै।
  • इसमें कुल 6 परिच्छेद तथा 400 श्लोक हैं ,
  • जिसमें उन्होंने मुख्यरूप से 5 विषयों का प्रतिपादन किया है – काव्य शरीर, अलङ्कार, दोष, न्याय और शब्द शुद्धि।

विश्वनाथ -

  • (पूरा नाम आचार्य विश्वनाथ महापात्र) संस्कृत काव्य शास्त्र के मर्मज्ञ और आचार्य थे।
  • वे साहित्य दर्पण सहित अनेक साहित्यसम्बन्धी संस्कृत ग्रन्थों के रचयिता हैं।
  • उन्होंने आचार्य मम्मट के ग्रंथ काव्य प्रकाश की टीका भी की है जिसका नाम "काव्यप्रकाश दर्पण" है।
  • ​कृतियाँ - राघव विलास, संस्कृत महाकाव्य, कुवलयाश्वचरित्प्रा, कृत भाषाबद्ध काव्य, नरसिंहविजय आदि।

Question 24

भारतेन्दु ने ददरी मेले के अवसर पर 'भारवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' विषय पर ओजस्वी और सारगर्भित भाषण किस स्थान पर दिया था?

  1. AOption (a)

    बनारस

  2. BOption (b)

    इलाहाबाद

  3. COption (c)

    लखनऊ

  4. DOption (d)

    बलिया

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

बलिया

Why this answer is correct

भारतेन्दु ने ददरी मेले के अवसर पर 'भारवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' विषय पर ओजस्वी और सारगर्भित भाषण बलिया स्थान पर दिया था। 

Key Points

  • भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 'भारवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' विषय पर भाषण बलिया के ददरी मेले में दिया था,
  • यह भाषण साल 1884 में दिया गया था, इस भाषण का अंश ही 'भारवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' नाम का निबंध है।
  • यह निबंध हरिश्चंद्र चंद्रिका के दिसंबर 1884 के अंक में प्रकाशित हुआ था।

Additional Informationभारतेन्‍दु हर‍िश्‍चन्‍द्र - 

  • जन्म- 1850 - 1885 ई.
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • भारतेन्दु हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • **निबंध संग्रह -**​
  • कालचक्र (जर्नल)
  • लेवी प्राण लेवी
  • भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?
  • कश्मीर कुसुम
  • जातीय संगीत
  • स्वर्ग में विचार सभा

Question 25

निम्नलिखित में से कौन सी कृति शमशेर बहादुर सिंह की है?

A. सतपुड़ा के जंगल

B. अमन का राग

C. यहाँ से देखो

D. सलोना जिस्म

E. पृथ्वी कल्प

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, C, E

  2. BOption (b)

    केवल B, D

  3. COption (c)

    केवल B, E

  4. DOption (d)

    केवल D, E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

केवल B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, D

Key Pointsशमशेर बहादुर सिंह की है - 

  • B. अमन का राग
  • D. सलोना जिस्म

अन्य -

रचनाविधारचनाकार
सतपुड़ा के जंगल (1956)कविताभवानी प्रसाद मिश्र
यहाँ से देखो (1983)कविताकेदारनाथ सिंह
पृथ्वी कल्पकवितागिरिजाकुमार माथुर

Important Pointsअमन का राग -

  • रचनाकार- शमशेर बहादुर सिंह
  • प्रकाशन वर्ष- 1945 ई.
  • विधा- कविता
  • विषय-
  • ​किसी भी तरह की हिंसा और युद्ध की विरोधी कविता है।
  • यह कविता विश्व बंधुत्व, समानता और शांति का पाठ पढ़ाती है।

सलोना जिस्म -

  • रचनाकार- शमशेर बहादुर सिंह
  • प्रकाशन वर्ष- 1973 ई.
  • विधा- कविता
  • विषय- प्रेम।

Additional Informationशमशेर बहादुर सिंह -

  • (13 जनवरी 1911 - 12 मई 1993)
  • आधुनिक हिंदी कविता के प्रगतिशील कवि हैं।
  • ये हिंदी तथा उर्दू के विद्वान हैं।
  • कविता-संग्रह-
  • 'कुछ कविताएं' (1956)
  • 'कुछ और कविताएं' (1961)
  • 'शमशेर बहादुर सिंह की कविताएं' (1972)
  • 'इतने पास अपने' (1980)
  • 'उदिता : अभिव्यक्ति का संघर्ष' (1980)
  • 'चुका भी हूं नहीं मैं' (1981)
  • 'बात बोलेगी' (1981)
  • 'काल तुझसे होड़ है मेरी' (1988)
  • 'शमशेर की ग़ज़लें'।

Question 26

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I रचनासूची II रचनाकार
A.पेरिपोइतिकेसI.कॉलरिज
B.बायोग्रेफिया लिटरेरियाII.आई. ए. रिचर्ड्स
C.द सेक्रेड वुडIII.अरस्तू
D.प्रिंसिपल्ज़ ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्मIV.टी. एस. इलियट

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - I, B - II, C - III, D - IV

  4. DOption (d)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - III, B - I, C - IV, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - IV, D - II

Key Points

सूची I रचनासूची II रचनाकार
A.पेरिपोइतिकेसIII.अरस्तू
B.बायोग्रेफिया लिटरेरियाI.कॉलरिज
C.द सेक्रेड वुडIV.टी. एस. इलियट
D.प्रिंसिपल्ज़ ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्मII.आई. ए. रिचर्ड्स

Additional Information

  • पेरिपोइएतिकेस (1780)
  • पोएटिक्स, यूनानी काव्यशास्त्र पेरिपोइएतिकेस का अनुवाद है।
  • इसका अनुवाद टी० विन्स्टैनली ने 1780 में किया।
  • इसके मूल रचनाकार अरस्तु है जिन्होंने 330 ईसा पूर्व के आसपास इसकी रचना की।
  • प्रमुख रचनाएँ - पोलिटिक्स, यूदेमियन एथिक्स, ऑन दिविनेशन इन स्लीप, ऑन लेनथ एंड शोर्तनेस ऑफ़ लाइफ, ऑन यूथ, ओल्ड ऐज आदि।
  • बायोग्राफिया लिटरेरिया (1817)
  • रचनाकार :- सैमुअल टेलर कॉलरिज
  • सैमुअल टेलर कालरिज सत्यवादी थे और उनकी काव्य संबंधी धारणा जैववादी सिद्धांत पर आधारित है।
  • इनकी महत्वपूर्ण रचनाएं निम्नलिखित हैं:-
  • प्रमुख रचनाएँ - द फ्रेंड (1817), एड्स टू रिफ्लेक्शन्स (1825), चर्च एंड स्टेट (1830), कंफेसन ऑफ अन इन्क्वारइंग स्पिरिट (1840)।
  • द सेक्रेड वुड (1920)
  • रचनाकार :- टॉमर्स स्टनर्स इलियट
  • इलियट की प्रमुख समालोचनात्मक कृतियां  निम्नलिखित हैं :-
  • प्रमुख रचनाएँ - द सेक्रेड वुड (1920),होमज टू जॉन डॉयदान (1924), एलिजाबेथ ऐस ऐज (1932)।
  • प्रिंसिपल्ज़ ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्म (1924)
  • ​रचनाकार :- आई. ए. रिचर्ड्स
  • प्रमुख रचनाएँ - द फाउंडेशन ऑफ एसथेटिक्स (1922), मीनिंग ऑफ मीनिंग (1923), साइन्स एंड पोयट्री (1925), प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म (1929) आदि।

Question 27

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची Iसूची II
A.बुलंदशहरI.सिरमौरी
B.फतेहपुरII.कन्नौजी
C.मंडीIII.खड़ी बोली
D.इटावाIV.अवधी

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - IV, C - III, D - I

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - III, B - IV, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - IV, C - I, D - II

Key Points

सूची Iसूची II
A.बुलंदशहरIII.खड़ी बोली
B.फतेहपुरIV.अवधी
C.मंडीI.सिरमौरी
D.इटावाII.कन्नौजी

Additional Information

  • खड़ी बोली (पश्चिमी हिंदी)-
  • ​देहरादून, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, बिजनौर, संभल, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, रामपुर और मुरादाबाद आदि।
  • अवधी (पूर्वी हिंदी)-
  • ​कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर,अमेठी, कौशाम्बी, चित्रकूट, भदोही, बहराइच, श्रावस्ती, अम्बेडकरनगर, लखीमपुर आदि।
  • पहाड़ी -
  • सिरमौरी, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िले में बोली जाने वाली एक पश्चिमी पहाड़ी भाषा है।
  • कन्नौजी (पश्चिमी हिंदी)-
  • उत्तर प्रदेश के इटावा, फ़र्रूख़ाबाद, शाहजहांपुर, कानपुर, हरदोई और पीलीभीत, जिलों के ग्रामीणांचल में बहुतायत से बोली जाती है।

Question 28

निम्नलिखित रचनाओं का / के उनकी विधाओं के साथ सुमेलित सही युग्म कौन सा/से हैं?

A. प्रेमचंद घर में - आत्मकथा

B. एक कहानी यह भी - जीवनी

C. भोलाराम का जीव - व्यंग्य

D. माटी की मूरतें - संस्मरण

E. अरे यायावर रहेगा याद - कविता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B

  2. BOption (b)

    केवल A, B, C

  3. COption (c)

    केवल C, D

  4. DOption (d)

    केवल C. E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C, D

Key Pointsभोलाराम का जीव-

  • रचनाकार- भोलाराम का जीव
  • प्रकाशन वर्ष- 1967 ई.
  • विधा- व्यंग्य
  • पात्र- 
  • ​भोलाराम, चित्गुप्त, धर्मराज, यमदूत, नारद आदि।
  • विषय-
  • ​ यह कहानी सामाजिक, व्यंग्यात्मक और फैंटसी शैली में रचित है।
  • सरकारी कर्मचारियों की अमानवीयता, संवेदनहीनता पर भी इस कहानी में प्रहार किया गया है।

माटी की मूरतें ​-

  • रचनाकार- रामवृक्ष बेनीपुरी
  • प्रकाशन वर्ष- 1979 ई.
  • विधा- संस्मरण
  • पात्र- 
  • सरजू भैया, बेनीपुरी जी, सरजू भैया के पिता, महाजन, बेनीपुरी जी की मौसी आदि।
  • विषय-
  • ​इसमें बारह रेखाचित्रों का संकलन किया गया है।
  • जीवन के विविध रंगों को रेखांकित करते हुए शब्द-चित्र के माध्यम से जीवन की विविधता का वर्णन है।

Additional Informationप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी देवी
  • प्रकाशन वर्ष-  1944 ई.
  • विधा- जीवनी
  • पात्र-  मुंशी प्रेमचंद​ आदि।
  • विषय-
  • ​''मुंशी प्रेमचंद' की पत्नी 'शिवरानी देवी' द्वारा लिखे गए संस्करणों का संकलन है।
  • इसमें उन्होंने प्रेमचंद के साथ अपने घरेलू जीवन के छोटे-छोटे संस्करण दर्ज किए हैं।

एक कहानी यह भी​-

  • रचनाकार- मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष-  2007 ई.
  • विधा- आत्मकथा
  • पात्र- ​
  • ​जीतमल लूणिय, सुशीला (मन्नू भंडारी की बहन), शीला अग्रवाल, डॉ अंबालाल जी, मिस्टर सेठी आदि।
  • विषय-
  • ​इसमें लेखिका ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण तथ्यों को उभारा है।

अरे यायावर रहेगा याद​-

  • रचनाकार- सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
  • प्रकाशन वर्ष- 1953 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय-
  • ​ इसमें ‘अज्ञेय’ की ‘भारतीय’ यात्राओं का चित्रण है।
  • इसमें अज्ञेय ने ब्रह्मपुत्र के मैदानी भाग से लेकर एलोरा की गुफाओं तक की यात्राओं का वर्णन किया है।
  • ‘एक बूँद सहसा उछली’ में ‘यूरोपीय’ यात्राओं का चित्रण है।

Question 29

‘कृपाकांड' के रचयिता हैं:

  1. AOption (a)

    बोधा

  2. BOption (b)

    घनानंद

  3. COption (c)

    आलम

  4. DOption (d)

    ठाकुर

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Correct answer

Answer: (b)B.

घनानंद

Why this answer is correct

‘कृपाकांड' के रचयिता हैं: घनानंद

Key Pointsघनानंद -

  • (1673 - 1760)
  • रीतिकाल की तीन प्रमुख काव्यधाराओं-
  • रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त के अंतिम काव्यधारा के अग्रणी कवि हैं।
  • ये 'आनंदघन' नाम स भी प्रसिद्ध हैं।
  • रचनाएं-.
  • सुजान सागर
  • कृपा कांड
  • रस केलीवल्ली
  • विरह लीला
  • लोकसार
  • इश्क लता
  • यमुनायश आदि।

Additional Information

रचनाकाररचना
बोधाविरहवारीश, इश्कनामा।
आलमआलमकेलि, माधवानलकामकंदला, सुदामा चरित, स्याम सेनही।
ठाकुरठाकुर ठसक, ठाकुर शतक।

Question 30

मगही के अंतर्गत आने वाली बोलियां हैं: 

  1. AOption (a)

    कुंडारी, तिरहारी

  2. BOption (b)

    नागपुरिया, सुरगुजिया

  3. COption (c)

    कुड़माली, खोंटाली

  4. DOption (d)

    खटोला, कुम्भारो

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Correct answer

Answer: (c)C.

कुड़माली, खोंटाली

Why this answer is correct

मगही के अंतर्गत आने वाली बोलियां हैं: कुड़माली, खोंटाली

Key Points

  • मगही की बोलियाँ - कुरमाली, सादरी कोल, कुरुमाली और खोंटई हैं।

अन्य विकल्प - 

  • बुंदेली की बोलियाँ - खटोला, लोधंती, पनवारी, बनाफरी**, कुंडारी, तिरहरी,** भदावरी, लोधी, कुंभारी हैं।
  • छत्तीसगढ़ी की बोलियाँ - नागपुरिया, सरगुजिया, सदरी कोरवा, बैगानी, बिंझवारी, कलंगा और भुलिया हैं।

Additional Information

  • किसी विशेष क्षेत्र में बोली जाने वाली मौखिक भाषा को बोली कहते हैं।

हिंदी बोलियों के मुख्य पाँच समूह हैं -

  • पश्चिमी हिन्दी - खड़ी बोली, ब्रज, बुंदेली, हरियाणवी, कन्नौजी, निमाड़ी।
  • पूर्वी हिन्दी - अवथी, बघेली, छत्तीसगढ़ी।
  • राजस्थानी - मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मालवी।
  • बिहारी - मगही, मैथिली, भोजपुरी।
  • पहाड़ी - कुमाउनी, गढ़वाली।

Question 31

'नागमती वियोग खण्ड में पिउ वियोग अस बाउर जीऊ' में 'बाउर' का अर्थ है-

  1. AOption (a)

    ठठरी

  2. BOption (b)

    कवचहीन

  3. COption (c)

    धीरे-धीरे

  4. DOption (d)

    बावला

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Correct answer

Answer: (d)D.

बावला

Why this answer is correct

सही उत्तर है - बावला

Key Points

  • 'नागमती वियोग खंड' में 'पिउ वियोग अस बाउर जीऊ' में 'बाउर' का अर्थ है - बावला

Important Points व्याख्या :

  • राजा रत्‍नसेन के जाने के बाद नागमती की दशा अत्यन्त दयनीय है।
  • वह पति के विरह में व्याकुल है, प्रिय के वियोग में उसका जी बावला हो गया है।
  • वह पपीहे की तरह पिउ-पिउ रटने लगी है।
  • काम के प्रभाव से उसके पूरे शरीर में अग्‍न‍ि लगी हुई है,
  • जिससे उसका पूरा शरीर जल रहा है।

Additional Information

  • आचार्य शुक्ल द्वारा सम्पादित पद्मावत (जायसी ग्रंथावली) का 30वाँ खंड नागमती-वियोग खंड है।
  • पद्मावत में वियोग पक्ष तीन चरित्रों के माध्यम से दिखाया गया है - रत्नसेन, पद्मावती तथा नागमती।
  • जायसी के विरह वर्णन में वेदना एवं पीड़ा का आधिक्य है।
  • जायसी के विरह वर्णन में कोमलता सरलता एवं गंभीरता भी पर्याप्त मात्रा में है।
  • जायसी के विरह वर्णन में षडऋतुओं तथा बारह मासे कम रूप में प्रकृति का भी अत्यधिक सहयोग लिया गया है​।
  • किंवदंती के अनुसार, नागमती, मेदपाटा (वर्तमान मेवाड़) के राजपूत शासक राजा रतन सेन की पहली पत्नी और मुख्य रानी थी​।
  • मलिक मुहम्मद जायसी की महाकाव्य पद्मावत में नागमती की महत्वपूर्ण भूमिका है।

Question 32

छत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में कौन सा कथन असत्य है:

  1. AOption (a)

    छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अर्धमागधी से माना है।

  2. BOption (b)

    हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ।

  3. COption (c)

    छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत-ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है।

  4. DOption (d)

    गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।

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Correct answer

Answer: (d)D.

गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।

Why this answer is correct

छत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में कथन असत्य है: - गोंडानी छत्तीसगढ़ी बोली का एक रूप है।

Key Pointsछत्तीसगढ़ी बोली के संदर्भ में कथन सत्य है:

  • छत्तीसगढ़ी का संबंध ग्रियर्सन ने अर्धमागधी से माना है।
  • हैहयवंशी तथा गोंड राजाओं के संरक्षण में सामान्य जनता की बोली के रूप में छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ।
  • छत्तीसगढ़ी भारोपीय परिवार के भारत-ईरानी वर्ग की भारतीय आर्यशाखा की बोली है।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • छत्तीसगढ़ी भाषा की दो भगिनियां हैं - बघेली और अवधी
  • छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली अन्य भाषाएंः गोंडी, हल्बी, कुरुख, कुडुख या उराँव,
  • दोर्ली, और परजी, सादरी, कमारी, बघेली, सरगुजिहा, बैगानी और माडिया शामिल हैं।

Additional Information

  • छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख भाषा है,
  • यह हिन्दी के बहुत करीब है और इसकी लिपि देवनागरी है।
  • छत्तीसगढ़ी के बारे में कुछ खास बातें -
  • छत्तीसगढ़ी, पूर्वी हिन्दी की प्रमुख बोली है।
  • छत्तीसगढ़ी, भारतीय आर्य भाषाओं की मध्यवर्ती शाखा अर्धमागधी से विकसित हुई है।
  • छत्तीसगढ़ी, करीब दो करोड़ लोगों की मातृभाषा है।
  • छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ राज्य की संपर्क भाषा है।
  • छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध साहित्य और व्याकरण है।
  • छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली कुछ और भाषाएंः
  • गोंडी, दोरली, कोरवा, हल्बी, भतरी, धुरवी, सादरी, कमारी, कुडुख, बघेली।

Question 33

मैं तो चाहता हूँ, सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूँ।'

उपरोक्त कथन किस नाटक से लिया गया है:

  1. AOption (a)

    एक और द्रोणाचार्य

  2. BOption (b)

    आधे-अधूरे

  3. COption (c)

    महाभोज

  4. DOption (d)

    अंजो दीदी

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Correct answer

Answer: (c)C.

महाभोज

Why this answer is correct

'मैं तो चाहता हूँ, सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूँ।'

उपरोक्त कथन नाटक से लिया गया है: महाभोज

Key Pointsमहाभोज नाटक का अंश -

  • ‘दा साहब’ गांधीवाद के प्रबल समर्थक लगते हैं।
  • पर ऐसा नहीं है। वे शेर की खाल में छुपे हुए भेड़िये सिद्ध होते हैं।
  • महाभोज के इस कथित और छद्म गांधीवादी पात्र का विचार देखिए-
  • “पद के प्रलोभन से इतने अविवेकी मत बनो।
  • कर्मचारियों को इस तरह के आदेश देना उनके अधिकार में हस्तक्षेप करना है।
  • मुझसे यह सब होगा नहीं, भाई! मैं तो चाहता हूं,
  • सबको अपने अधिकार सौंप कर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूं।”
  • किंतु ‘गांधीवाद’ तो ‘दा साहब’ का मुखौटा मात्र है।

Important Pointsमहाभोज-

  • रचनाकार- मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष- 1979 ई.
  • विधा- नाटक
  • पात्र- 
  • ​दा साहेब, सुकुल बाबू, अप्पा साहेब, श्रीमती सिन्हा, दत्ता बाबू, नरोत्तम आदि।
  • विषय- ​
  • ​इस नाटक में राजनीति स्वार्थ के लिए नैतिक पतन का चित्रण है।
  • नाटक: बिना दीवारों का घर (1966), महाभोज ( महाभोज उपन्यास का नाट्य रूपान्तर 1983)

Additional Informationएक और द्रोणाचार्य-

  • रचनाकार- शंकरशेष
  • प्रकाशन वर्ष- 1977 ई.
  • विधा- नाटक
  • पात्र-
  • ​अरविंद, लीला, यदू, प्रिसपल, चंदू, विमलेंदु, अनुराधा आदि।
  • विषय- इस नाटक में महाभारत कालीन गुरु द्रोणाचार्य के जीवन के प्रसंगों की संवेदनशील झाँकियाँ प्रस्तुत की गई है।
  • अन्य नाटक: मूर्तिकार (1955), रत्नगर्भा (1956), नई सभ्यता नये नमूने (1956),
  • बेटों वाला बाप (1958 अप्राप्य), तिल का ताड़ (1958), बिन बाती के दीप (1958 मंचन 1970 में), बाढ़ का पानी (1968) आदि।

आधे-अधूरे -

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • विधा- नाटक
  • पात्र-
  • इसमें तीन स्त्री पात्र हैं तथा पाँच पुरुष पात्र।
  • महेंद्रनाथ, सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री, बिन्नी, अशोक, किन्नी आदि।
  • विषय-
  • इस नाटक में पारिवारिक विघटन, स्त्री-पुरुष संबंध, स्त्री जीवन की त्रासदी आदि का प्रभावपूर्ण चित्रण हुआ है।
  • अन्य नाटक: आषाढ़ का एक दिन (1958), लहरों के राजहंस (1963), पैर तले  की जमीन (अधुरा कमलेश्वर जी ने पूरा किया 1975) आदि।

अंजो दीदी -

  • रचनाकार- उपेन्द्रनाथ अश्क
  • प्रकाशन वर्ष- 1955 ई.
  • विधा- नाटक
  • पात्र-
  • ​अंजली / अंजो दीदी, श्रीपात, इन्द्रनारायण, अनिमा, नीरज, मुन्नी आदि।
  • विषय- 
  • इस नाटक में​ नारी की कठोर पारिवारिक नियंत्रण से परिवार विघटन की समस्या का उल्लेख है।
  • अन्य नाटक: जय-पराजय (1930), स्वर्ग की झलक (1938) छठा बेटा (1940), अलग-अलग रस्ते (1943),
  • कैद (1945), उड़ान (1946), तकल��लुफ (1948), पैंतरे (1952), अंजो दीदी (1955), अंधी गली (1955),आदि।

Question 34

देवनागरी लिपि के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?

A. देवनगर अर्थात् काशी में प्रचार के कारण इसे देवनागरी कहा गया।

B. ग्रियर्सन ने देवनागरी को शारदा लिपि की बहन माना है।

C. ललितविस्तर में उल्लिखित नाग लिपि ही नागरी है।

D. अरबी लिपि की भाँति इस लिपि की उत्पत्ति पुरानी सामी लिपि की उत्तरी शाखा से हुई है।

E. नगरों में प्रचलन के कारण इसका नाम नागरी पड़ा है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल D. C

  2. BOption (b)

    केवल B, D

  3. COption (c)

    केवल A, C

  4. DOption (d)

    केवल B, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, D

Key Pointsदेवनागरी लिपि के संदर्भ में कथन सत्य है -

  • A. देवनगर अर्थात् काशी में प्रचार के कारण इसे देवनागरी कहा गया।
  • C. ललितविस्तर में उल्लिखित नाग लिपि ही नागरी है।
  • E. नगरों में प्रचलन के कारण इसका नाम नागरी पड़ा है।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • B. देवनागरी लिपि को शारदा लिपि की बहन माना जाता है।
  • D. आरमेइक लिपि की उत्पत्ति भी प्राचीन सामी लिपि की उत्तरी शाखा से हुई है।

Additional Information

  • देवनागरी भारतीय उपमहाद्वीप में प्रयुक्त प्राचीन ब्राह्मी लिपि पर आधारित बाएँ से दाएँ आबूगीदा है।
  • एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं।
  • संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, नेपाली, गढ़वाली, बोडो, अंगिका,
  • मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसे नागरी लिपि भी कहा जाता है।
  • इसमें कुल 52 अक्षर हैं, जिसमें 14 स्वर और 38 व्यंजन हैं। अक्षरों की क्रम व्यवस्था (विन्यास) भी बहुत ही वैज्ञानिक है।
  • स्वर-व्यंजन, कोमल-कठोर, अल्पप्राण-महाप्राण, अनुनासिक्य-अन्तस्थ-उष्म इत्यादि वर्गीकरण भी वैज्ञानिक हैं।
  • एक मत के अनुसार देवनगर (काशी) में प्रचलन के कारण इसका नाम देवनागरी पड़ा।

Question 35

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने आधुनिक काल के किन दो निबंधकारों को हिंदी का 'स्टील' और 'एडीसन' कहा है?

  1. AOption (a)

    बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र

  2. BOption (b)

    बालकृष्ण भट्ट और राधाचरण गोस्वामी

  3. COption (c)

    प्रतापनारायण मिश्र और लाला श्रीनिवासदास

  4. DOption (d)

    प्रतापनारायण मिश्र और कुबेरनाथ राय

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Correct answer

Answer: (a)A.

बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र

Why this answer is correct

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने आधुनिक काल के बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र दो निबंधकारों को हिंदी का 'स्टील' और 'एडीसन' कहा है। 

Key Pointsभारतेन्दु मण्डल के दो प्रमुख निबन्धकार है -

  • बालकृष्ण भटट् (सन् 1845-1915) और प्रताप नारायण मिश्र (सन् 1854- 1894)।
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में ‘इन दोनों ने हिन्दी गद्य साहित्य में वही कार्य किया,
  • जो अंग्रेजी गद्य साहित्य में 'एडीसन' और 'स्टील' ने किया था।’ इस मण्डल में सबसे समर्थ निबन्धकार बालकृष्ण भट्ट थे।
  • अपनी पत्रिका हिन्दी प्रदीप  के माध्यम से उन्होंने विविध विषयों पर निबन्ध लिखे।
  • जहाँ एक ओर उन्होंने सामाजिक समस्याओं पर बाल विवाह, स्‍त्रि‍याँ और उनकी शिक्षा, राजा और प्रजा, कृषकों की दुरवस्था,
  • महिला स्वातन्त्र्य आदि का विवेचन किया, वहीं दूसरी ओर आँख, कान, नाक जैसे विषयों को भी अपने निबन्ध का विषय बनाया।

Important Points

  • भारतेंदु मंडल के प्रमुख लेखक -
  • प्रतापनारायण मिश्र
  • बालकृष्ण भट्ट
  • बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
  • राधाचरण गोस्वामी
  • रायकृष्णदास
  • ठाकुर जगमोहन सिंह
  • अम्बिकादत्त व्यास

Additional Information

लेखकनिबन्ध संग्रह
बालकृष्ण भट्टसाहित्य सुमन, भट्ट निबंधमाला, आत्मनिर्भरता (1893)।
प्रतापनारायण मिश्रनिबंध नवनीत, प्रताप पीयूष, प्रताप समीक्षा।
राधाचरण गोस्वामीयमपुर की यात्रा
लाला श्रीनिवासदासभरतखण्ड की समृद्धि, सदाचरण।
कुबेरनाथ रायप्रिया नीलकंठी (1969), रस आखेटक (1971), गंधमादन (1972), निषाद बांसुरी (1973), विषद योग (1974), पर्ण-मुकुट (1978), वाणी का क्षीरसागर (1998)​, आगम की नाव,(2002) आदि ।

Question 36

जयशंकर प्रसाद के निम्नलिखित काव्य ग्रंथों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में लगाइए:

A. आँसू

B. लहर

C. झरना

D. चित्राधार

E. महाराणा का महत्व

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    E, D, C, A, B

  2. BOption (b)

    D, A, B, C, E

  3. COption (c)

    E, A, B, C, D

  4. DOption (d)

    D, E, A, C, B

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

E, D, C, A, B

Why this answer is correct

सही उत्तर है - E, D, C, A, B

Key Pointsजयशंकर प्रसाद के काव्य ग्रंथों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम -

  • E. महाराणा का महत्व
  • D. चित्राधार
  • C. झरना
  • A. आँसू
  • B. लहर

Important Points

काव्यप्रकाशन वर्ष
महाराणा का महत्त्व1914 ई.
चित्राधार1918 ई.
झरना1918 ई.
​आँसू​1925 ई.
लहर1933 ई.

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • बाल्य नाम-झारखंडी
  • छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • काव्य रचनाएँ-
  • उर्वशी (1909 ई.)
  • कानन कुसुम (1913 ई.)
  • प्रेमपथिक (1913 ई.)
  • करुणालय (1923 ई.)
  • कामायनी (1936 ई.) आदि।

Question 37

निम्नलिखित वक्तव्यों में से कौन सा/से कथन 'ग्रैंगीन' कहानी से संबंधित है हैं?

A. मालती एक पंखा उठा लाई और मुझे हवा करने लगी। मैंने आपत्ति करते हुए कहा, “नहीं मुझे नहीं चाहिए।"

B. महेश्वर खाना आरम्भ करते हुए मेरी ओर देखकर बोले, “आपको तो खाने का मजा क्या ही आएगा. ऐसे बेवक्त खा रहे हैं?"

C. शहर में आग लगी थी। बात डिब्बे भर के मुसाफिरों को पता चल गई और वे लपक लपक कर खिड़कियों में से आग का दृश्य देखने लगे।

D. ताल के किनारे-किनारे हम चले जा रहे थे। हमारे ओवरकोट तर हो गए थे। बारिश नहीं मालूम होती थी. पर वहाँ तो ऊपर-नीचे हवा से कण-कण में बारिश थी।

E. अनन्त जलनिधि में उषा का मधुर आलोक फूट उठा। सुनहली किरणों और लहरों की कोमल सृष्टि मुस्कुराने लगी।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B

  2. BOption (b)

    केवल A, B, C

  3. COption (c)

    केवल C, D

  4. DOption (d)

    केवल A, D, E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A, B

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B

Key Points'ग्रैंगीन' कहानी से संबंधित कथन है -

  • A. मालती एक पंखा उठा लाई और मुझे हवा करने लगी। मैंने आपत्ति करते हुए कहा, “नहीं मुझे नहीं चाहिए।"
  • B. महेश्वर खाना आरम्भ करते हुए मेरी ओर देखकर बोले, “आपको तो खाने का मजा क्या ही आएगा. ऐसे बेवक्त खा रहे हैं?"

त्रुटि रहित कथन -

  • C. इस कहानी में, शहर में आग लगने की खबर डिब्बे में सफ़र कर रहे मुसाफ़िरों को पता चलती है और वे खिड़कियों से आग का नज़ारा देखने लगते हैं।
  • यह बात, भीष्म साहनी की कहानी 'अमृतसर आ गया है' से ली गई है,
  • D. ताल के किनारे-किनारे हम चले जा रहे थे। हमारे ओवरकोट तर हो गए थे। बारिश नहीं मालूम होती थी. पर वहाँ तो ऊपर-नीचे हवा से कण-कण में बारिश थी।
  • यह बात, जैनेन्द्र कुमार की कहानी 'अपना-अपना भाग्य' से ली गई है,
  • E. अनन्त जलनिधि में उषा का मधुर आलोक फूट उठा। सुनहली किरणों और लहरों की कोमल सृष्टि मुस्कुराने लगी।
  • यह पंक्तियां जयशंकर प्रसाद की कहानी 'आकाशदीप' से ली गई हैं।

Important Pointsग्रैंगीन-

  • रचनाकार- अज्ञेय
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • ​मालती, महेश्वर, टीटी, कथाकार।
  • विषय- 
  • इस कहानी को रोज नाम से भी जाना जाता है।
  • ​नारी जीवन में विवाह के उपरांत आने वाले दायित्व से उत्पन्न नीरसता, यांत्रिकता, घुटन का सजीव चित्रण है।

Additional Informationसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' -

  • जन्म- 1911 - 1987 ई.
  • ये कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं।
  • कहानियाँ:​ -
  • विपथगा (1937)
  • परम्परा (1944)
  • कोठरी की बात (1945)
  • शरणार्थी (1948)
  • जयदोल (1951) आदि।

Question 38

सिय मुख सरद - कमल जिमि किमि कहि जाय।

निसि मलीन वह, निसि दिन यह विगसाय ।।

उपर्युक्त पंक्तियों में कौन सा अलंकार है?

  1. AOption (a)

    प्रतीप

  2. BOption (b)

    रूपक

  3. COption (c)

    व्यतिरेक

  4. DOption (d)

    अनन्वय

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Correct answer

Answer: (c)C.

व्यतिरेक

Why this answer is correct

सिय मुख सरद - कमल जिमि किमि कहि जाय।

निसि मलीन वह, निसि दिन यह विगसाय ।।

उपर्युक्त पंक्तियों में अलंकार है  - व्यतिरेक

Key Points

  • (यहाँ शरद कमल (उपमेय) तो रात्रि में मुरझा जाता है किन्तु सीता का मुख (उपमान) दिन-रात खिला रहता है, अतः उपमेय की उत्कृष्टता होने से यहाँ व्यतिरेक अलंकार है।)
  • जब उपमेय में उपमान की तुलना में कोई अच्छी या बुरी बात अधिक बताई जाय अर्थात जब उपमेय को उपमान से किसी बात में बढ़कर बताया जाय, वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है।

उदाहरण -

  • सम सुबरन सुखमाकर सुखद न थोर।
  • सीय अंग सखि कोमल कनक कठोर।।
  • (यहाँ उपमेय (सीय अंग) को कोमल तथा **उपमान (**कनक) को कठोर बताया गया है।)

Additional Information

प्रतीप - - प्रतीप का अर्थ है – “उल्टा” या विपरीत | जहाँ बड़े को छोटा और छोटे को बड़ा बताया जाता है, अर्थात जब उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया जाता है, तब वहाँ प्रतीप अलंकार होता है।​ उदाहरण - - ’’सिय मुख समता पाव किमी, चन्द्र बापुरो रंक।’’ - (स्पष्टीकरण : उपमेय – सीता का मुख, उपमान – चन्द्रमा सीता के मुख (उपमेय) की तुलना बेचारा चन्द्रमा (उपमान) नहीं कर सकता। यहाँ सीता के मुख (उपमेय) को श्रेष्ठ बताया गया है।) रूपक- - जब एक वस्तु पर दूसरी वस्तु का आरोप किया जाये अर्थात् जब एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दिया जाये तो रूपक अलंकार कहलाता है। उदाहरण - - वन शारद�� चन्द्रिका-चादर ओढ़े। - (यहाँ पर चाँद की रोशनी को चादर के समान ना बताकर चादर ही बता दिया गया है। इस वाक्य में उपमेय - ‘चन्द्रिका’ है एवं उपमान - ‘चादर’ है) अनन्वय - - जब किसी वस्तु की तुलना उसी वस्तु से की जाती है, ताकि किसी अन्य समान वस्तु का अभाव व्यक्त किया जा सके, तो उसे अनन्वय कहते हैं। उदाहरण - - यद्यपि अति आरत-मारत है, भारत के सम भारत है।
(यहां पर वाक्य में भारत उपमेय है जिसकी तुलना करने के लिये कोई उपमान नहीं है ​इसलिए उपमेय को ही उपमान बना दिया गया है अतः यह अनन्वय अलंकार का उदाहरण है।

Question 39

'राग दरबारी' उपन्यास में जिला कार्यालय में आई स्कीम के अन्तर्गत रुपए पाने के लिए इनमें से किस युग्म ने योजना बनाई?

A. सनीचर - छोटे पहलवान

B. सनीचर - रंगनाथ

C. सनीचर - कालिका प्रसाद

D. सनीचर - कुसहर प्रसाद

E. सनीचर - खन्ना मास्टर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, D

  2. BOption (b)

    केवल C

  3. COption (c)

    केवल E

  4. DOption (d)

    केवल B

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C

Key Points

  • सनीचर का असली नाम मंगलदास है लेकिन लोग इसे सनीचर कहते हैं।
  • यह वैद्यजी का सेवक है और बाद में वैद्यजी ने राजनीतिक चालों के इस्तेमाल से इसे गाँव का कठपुतली प्रधान बना दिया।
  • कालिका प्रसाद का पेशा सरकारी ग्रांट और कर्ज खाना था। 
  • वे सरकारी पैसे के द्वारा सरकारी पैसे के लिए जीते थे। उनका पूरा कर्म योग सरकारी स्कीमों की फिलॉसफी पर टिका था।

Important Pointsराग दरबारी-

  • रचनाकार- श्रीलाल शुक्ल
  • प्रकाशन वर्ष- 1968 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • पात्र-
  • ​वैद्य जी,रुप्पन बाबु,बदरी अग्रवाल,.रंगनाथ, सनीचर,छोटा पहलवान,प्रिंसिपल सहिब,लंगड़,जोगीनाथ।
  • विषय-
  • यह ऐसा उपन्यास है जो गाँव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत करता है।
  • शुरू से अन्त तक इतने निस्संग और सोद्देश्य व्यंग्य के साथ लिखा गया हिंदी का शायद यह पहला वृहत् उपन्यास है।

Additional Information श्रीलाल शुक्ल-

  • जन्म-1925-2011 ई.
  • श्रीलाल शुक्ल हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार थे।
  • वह समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिये विख्यात थे।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • सूनी घाट का सूरज (1957 ई.)
  • अज्ञातवास (1962 ई.)
  • ‘राग दरबारी (1968 ई.)
  • आदमी का ज़हर (1972 ई.)
  • सीमाएँ टूटती हैं (1973 ई.)
  • ‘मकान (1976 ई.)
  • ‘पहला पड़ाव’(1987 ई.)
  • ‘विश्रामपुर का संत (1998 ई.) आदि।

Question 40

‘कोसी का घटवार’ कहानी के आधार पर ध्वनि और वस्तु का कौन-सा युग्म सही है?

  1. AOption (a)

    किट - किट - किट - किट : पनचक्की

  2. BOption (b)

    छच्छिर- छच्छिर : मथानी

  3. COption (c)

    खस्सर - खस्सर : चिड़िया

  4. DOption (d)

    खटर - खटर : चक्की

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Correct answer

Answer: (b)B.

छच्छिर- छच्छिर : मथानी

Why this answer is correct

‘कोसी का घटवार’ कहानी के आधार पर ध्वनि और वस्तु का युग्म सही है - छच्छिर- छच्छिर : मथानी

Key Pointsकहानी के आधार -

  • किट-किट-किट-किट खप्पर से दाने गिराने वाली चिड़िया पाट पर टकरा रही थी।
  • छिच्छिर-छिच्छिर की आवाज़ के साथ मथानी पानी को काट रही थी।
  • खस्सर-खस्सर चक्की का पाट चल रहा था।
  • पनचक्की की खटर-पटर और मिहल की छाया में ठंडी चिलम को निष्प्रयोजन गुडग़ुडाता गुसांईं।

Important Pointsकोसी की घटवार-

  • रचनाकार- शेखर जोशी
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र- लक्ष्मा और गोसाई।
  • विषय-  इसमें पहाड़ी जीवन की झलक दिखाई देती है।

Additional Informationशेखर जोशी -                                                                                                  

  • (10 सितम्बर 1932 – 4 अक्तूबर 2022)
  • कथा लेखन को दायित्वपूर्ण कर्म मानने वाले सुपरिचित कथाकारों में से एक थें।
  • शेखर जोशी की कई कहानियों का अंगरेजी, चेक, पोलिश, रुसी और जापानी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
  • अन्य कहानियां –
  • साथ के लोग (1978)
  • हलवाहा (1981)
  • मेरा पहाड़ (1989)
  • नौरंगी बीमार है (1990)
  • डांगरी वाले (1994)

Question 41

प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित रचनाओं पर विचार कीजिए:

A. ध्रुवस्वामिनी - 1931

B. आधे-अधूरे - 1955

C. अंधायुग - 1956

D. सिंदूर की होली - 1934

E. स्कंदगुप्त - 1928

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल C और B

  2. BOption (b)

    केवल C और E

  3. COption (c)

    केवल A और E

  4. DOption (d)

    केवल D और A

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल C और B

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C और B

Confusion Points

  • दिए गए प्रश्न के उत्तर में कोई त्रुटि नहीं है, आयोग ने इस प्रश्न का सही उत्तर  'केवल C और B' को माना है क्योंकि प्रश्न के अनुसार ध्रुवस्वामिनी, आधे-अधूरे और अंधा युग का प्रकाशन वर्ष सही नहीं दिया गया है। जबकि सिंदूर की होली और स्कंदगुप्त का प्रकाशन वर्ष सही दिया गया है। दिए गए विकल्पों के अनुसार हमें या तो दोनों सही प्रकाशन वर्ष वाले ऑप्शन का चयन करना हैं या फिर जिसने दोनों गलत प्रकाशन वर्ष वाले दिए गए है उनका चयन करना है और आयोग ने विकल्प 2 केवल C और E को सही उत्तर इसीलिए माना है क्योंकि सिर्फ एक यही विकल्प ऐसा है जिसमें दोनों C और E प्रकाशन वर्ष के अनुसार गलत दिए है। अन्य विकल्पों का विश्लेषण करने पर पाया गया है की उनमें एक गलत ऑप्शन है और एक सही ऑप्शन है। इसीलिए आयोग ने विकल्प 2 को सही माना है।

Key Pointsप्रकाशन वर्ष के अनुसार -

  • B. आधे-अधूरे - 1955
  • C. अंधायुग - 1956

Important Pointsआधे-अधूरे -

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र-
  • इसमें तीन स्त्री पात्र हैं तथा पाँच पुरुष पात्र।
  • महेंद्रनाथ, सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री, बिन्नी, अशोक, किन्नी आदि।
  • विषय-
  • इस नाटक में पारिवारिक विघटन, स्त्री-पुरुष संबंध, स्त्री जीवन की त्रासदी आदि का प्रभावपूर्ण चित्रण हुआ है।
  • अन्य नाटक: 
  • ​आषाढ़ का एक दिन (1958), लहरों के राजहंस (1963), पैर तले  की जमीन (अधुरा कमलेश्वर जी ने पूरा किया 1975) आदि।

अंधायुग -

  • रचनाकार- धर्मवीर भारती
  • प��रकाशन वर्ष- 1954 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र-
  • अश्वस्थामा, कृष्ण, गांधारी, धृतराष्ट्र, कृतवर्मा आदि।
  • विषय-
  • यह नाटक महाभारत की पौराणिक कथाओं पर आधारित है।

Additional Informationध्रुवस्वामिनी -

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष- 1933 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र-
  • ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा, रामगुप्त, चंद्रगुप्त, शिखरस्वामी, शकराज आदि।
  • विषय-
  • ​इसमें स्त्री-पुनर्विवाह का चित्रण किया गया है।
  • नाटक:
  • चन्द्रगुप्त (1931), स्कन्दगुप्त (1928), जनमेजय का नागयज्ञ (1926), एक घूँट (1909), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922) आदि।

सिंदूर की होली -

  • रचनाकार- प० लक्ष्मी नारायण मिश्र
  • प्रकाशन वर्ष- 1934 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र-
  • रजनीकांत, मनोजशंकर, भगवंत सिंह, चंद्रकला, मनोरमा आदि।
  • विषय-
  • ​भारतीय समाज में होने वाली नारी के समस्याओं का चित्रण विभिन्न पात्रों के माध्यम से किया है।
  • नाटक:
  • ​अशोक (1926), सन्यासी (1930), राक्षस का मंदिर (1931), मुक्ति का रहस्य (1932) राजयोग (1933), आधी रात (1936), (1930), गुडिया का घर(1930)।

स्कंदगुप्त -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1928 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • ​स्कंदगुप्त, कुमारगुप्त, पर्णदत्त, देवकी, जयमाला, कमला आदि।
  • विषय -
  • ​इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संधर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है।
  • नाटक:
  • सज्जन (1911), कल्याणी परिणय (1912), राज्य श्री (1915), विशाखा (1921), अजातशत्रु (1922), एक घूँट (1929), चन्द्रगुप्त (1931)।

Question 42

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए:

सूची I कहानीसूची II पात्र
A.राजा निरबंसियाI.मिस्टर शामनाथ
B.कोसी का घटवारII.शाहनी
C.सिक्का बदल गयाIII.जगपती
D.चीफ की दावतIV.हवलदार धरम सिंह

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - IV, C - II, D - III

  2. BOption (b)

    A - II. B - IV, C - I, D - III

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  4. DOption (d)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - III, B - IV, C - II, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - IV, C - II, D - I

Key Points

सूची I कहानीसूची II पात्र
A.राजा निरबंसियाIII.जगपती
B.कोसी का घटवारIV.हवलदार धरम सिंह
C.सिक्का बदल गयाII.शाहनी
D.चीफ की दावतI.मिस्टर शामनाथ

Additional Informationराजा निरबंसिया -

  • रचनाकार- कमलेश्वर
  • प्रकाशन वर्ष- 1957 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र- बच्चन सिंह, चंदा, जगपती।
  • विषय-​
  • सम्पूर्ण कहानी आधुइक नायक जगपति और चंदा की व्यथा का वर्णन करती है।

कोसी की घटवार -

  • रचनाकार- शेखर जोशी
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • लक्ष्मा और गोसाई, हवलदार धरम सिंह, नरसिंह आदि।
  • विषय-
  • इसमें पहाड़ी जीवन की झलक दिखाई देती है।
  • यह कहानी भाग्य की विडंबना और परिस्थितियों के दुष्चक्र में फंसे दो प्रेमियों की करुण कहानी है।

सिक्का बदल गया -

  • रचनाकार- कृष्णा सोबती
  • प्रकाशन वर्ष- 1948 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र- 
  • शाहनी, शाहजी, शेरा, हुसैना दाऊद।
  • विषय-
  • ​भारत-पाक विभाजन के दर्द को बड़ी गहनता से उकेरने वाली कहानी है।

चीफ की दावत -

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • मिस्टर शामनाथ, उनकी पत्नी, और विधवा बूढ़ी मां।
  • विषय-
  • कहानी भी एक दावत की घटना पर आधारित है।
  • ​इस कहानी में उन्होने मध्यमवगीय समाज के खोखलेपन तथा चदखावटीपन को दर्शाया गया है।

Question 43

निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही है/हैं?

A. महादेवी वर्मा - ठकुरी बाबा

B. तुलसीराम - मुर्दहिया

C. दिनकर - जामुन का पेड़

D. विवेकी राय - भोलाराम का जीव

E. रमणिका गुप्ता - आपहुदरी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B

  2. BOption (b)

    केवल A, B, E

  3. COption (c)

    केवल B, C, D

  4. DOption (d)

    केवल B, C, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, E

Key Pointsयुग्म सही -

  • A. महादेवी वर्मा - ठकुरी बाबा
  • B. तुलसीराम - मुर्दहिया
  • E. रमणिका गुप्ता - आपहुदरी

त्रुटि रहित -

  • C. कृष्ण चन्दर - जामुन का पेड़
  • D. हरिशंकर परसाई - भोलाराम का जीव

Important Pointsठकुरी बाबा-

  • रचनाकार - महादेवी वर्मा
  • प्रकाशन वर्ष - 1943 ई.
  • विधा - संस्मरण
  • मुख्य पात्र -
  • ​महादेवी, भक्तिन,ठकुरी बाबा, बेला (ठकुरी बाबा की बेटी), वृद्ध ठकुराईन, काछी (विधुर) सहूआईन,ब्राह्मण दंपति।
  • विषय -
  • ​अपने संपर्क में आनेवाले शोषित व्यक्तियों, दीन-हीन नारियों, साहित्यकारों, जीव-जंतुओं आदि का संवेगात्मक चित्रण किया है।

मुर्दहिया-

  • रचनाकार - तुलसीराम
  • प्रकाशन वर्ष - 1910 ई.
  • विधा - आत्मकथा
  • मुख्य पात्र -
  • ​धीरज, जूठन, मुसरीया, सोम्मर, संकठा सिंह, जेदी काका, देवराज सिंह आदि ।
  • विषय - 
  • ​इसमें दलित स्त्रियों के मार्मिक घरेलु हिंसा का चित्रण है।

आपहुदरी - 

  • रचनाकार - रमणिका गुप्ता
  • प्रकाशन वर्ष - 2015 ई.
  • विधा - आत्मकथा
  • मुख्य पात्र -
  • ​रमणिका गुप्ता आदि ।
  • विषय -
  • ​इस पुस्तक में लेखिका ने पंजाब की एक ‘कुड़ीमार’ नामक कुप्रथा का वर्णन किया है।

Additional Informationजामुन का पेड़ -

  • रचनाकार - कृष्ण चन्दर
  • प्रकाशन वर्ष - 1960 ई.
  • विधा - कहानी
  • मुख्य पात्र -
  • ​माली ,सुपरिंटेंडेंट ,क्लर्क ,चपरासी ,सेक्रेटरी ,चीफ़ सेक्रेटरी आदि ।
  • विषय -
  • ​  यह हास्य-व्यंग्य शैली में रचित सामाजिक-समस्या प्रधान प्रतीकात्मक कहानी है।

भोलाराम का जीव -

  • रचनाकार - हरिशंकर परसाई
  • प्रकाशन वर्ष -
  • ​‘भोलाराम का जीव’ कहानी का प्रकाशन – 1967 ई. में हुआ था।
  • ‘भोलाराम का जीव’ कहानी संग्रह का प्रकाशन – 2016 ई. वाणी प्रकाशन, दिल्ली से हुआ।
  • विधा - कहानी
  • मुख्य पात्र -
  • ​भोलाराम,  चित्गुप्त, धर्मराज, यमदूत, नारद आदि ।
  • विषय -​
  • यह कहानी सामाजिक, व्यंग्यात्मक और फैंटसी शैली में रचित है।
  • सरकारी कर्मचारियों की अमानवीयता, संवेदनहीनता पर भी इस कहानी में प्रहार किया गया है।

Question 44

निम्नलिखित काव्यग्रंथों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में लगाइए:

A. अनुराग बाँसुरी

B. चित्रावली

C. हंस जवाहिर

D. ज्ञानदीप

E. इंद्रावती

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    E, C, D, B, A

  2. BOption (b)

    C, B, A, E, D

  3. COption (c)

    A, C, B, D, E

  4. DOption (d)

    B, D, C, E, A

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

B, D, C, E, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, D, C, E, A

Key Points

क्र.म.काव्यग्रंथप्रकाशन वर्ष
B.चित्रावली1613 ई.
D.ज्ञानदीप1619 ई.
C.हंस जवाहिर1731 ई.
A.अनुराग बाँसुरी1764 ई.

Additional Informationचित्रावली-

  • रचनाकार- उसमान
  • प्रकाशन- 1613 ई.
  • भाषा- अवधी
  • छंद- दोहा-चौपाई
  • विषय- 
  • इस रचना का उद्देश्य अमर होने की इच्छा है।
  • इसमें तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था का वर्णन हुआ है।
  • इसमें सुजान और चित्रावली की प्रेम कथा वर्णित है।

ज्ञानदीप -

  • रचनाकार-  शेखनबी
  • प्रकाशन वर्ष- 1619 ई.
  • विधा- आख्यान काव्य
  • भाषा- अवधी
  • छंद- दोहा-चौपाई
  • विषय-
  • इ​समें ज्ञानदीप और देवजानी का प्रेमकथा वर्णित है।

हंस जवाहिर-

  • रचनाकार- कासिम शाह
  • प्रकाशन वर्ष- 1731 ई.
  • विधा- प्रेमाख्यान काव्य
  • भाषा- अवधी
  • छंद- दोहा-चौपाई
  • विषय-
  • इसमें राजा हंस और रानी जवाहिर की कथा है।

अनुराग बाँसुरी -

  • रचनाकार- नूर मोहम्मद
  • प्रकाशन वर्ष- 1764 ई.
  • विधा- रूपक-काव्य
  • भाषा- अवधी
  • छंद- बरवै-चौपाई
  • विषय-
  • ​इसमें इश्क मजाजी से इश्क हकीकी तक की यात्रा, मानव प्रेम से ईश्वर प्रेम की प्राप्ति की यात्रा दिखाई गई है।

Question 45

निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?

A. दलित चेतना और नारी चेतना ने स्वातंत्र्योत्तर भारत के नौवे दशक में आंदोलन का रूप धारण किया।

B. हिन्दी दलित लेखन में महिला रचनाकारों की समस्या केन्द्र में है।

C. प्रत्येक व्यक्ति का एक मत सिद्धांत नारी सशक्तीकरण और दलित सशक्तीकरण के मूल में है।

D. स्वाधीन भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार ने नारी चेतना को आंदोलन बनाने में अपनी उल्लेखनीय भूमिका अदा की है।

E. हिन्दी दलित लेखन परंपरा में राजेन्द्र यादव, मैत्रेयी पुष्पा, कमलेश्वर प्रमुख हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B और E

  2. BOption (b)

    केवल C और E

  3. COption (c)

    केवल D और B

  4. DOption (d)

    केवल A और E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

केवल B और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B और E

Key Pointsकथन सत्य है -

  • A. दलित चेतना और नारी चेतना ने स्वातंत्र्योत्तर भारत के नौवे दशक में आंदोलन का रूप धारण किया।
  • C. प्रत्येक व्यक्ति का एक मत सिद्धांत नारी सशक्तीकरण और दलित सशक्तीकरण के मूल में है।
  • D. स्वाधीन भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार ने नारी चेतना को आंदोलन बनाने में अपनी उल्लेखनीय भूमिका अदा की है।

त्रुटि रहित कथन -

  • B. दलित महिलाएँ अपनी लेखनी के माध्यम से अपने मुद्दों को साहित्य के केन्द्र में ला रही हैं।
  • E. हिन्दी दलित लेखन परंपरा में ओम प्रकाश वाल्मीकि, तुलसी राम, असंगघोष आदि प्रमुख हैं।

Important Pointsहिंदी: दलित साहित्य और साहित्यकार की रचनाएँ -

  • जूठन (आत्मकथा)- ओम प्रकाश वाल्मीकि
  • मुर्दहिया (आत्मकथा) – तुलसी राम
  • पच्चीस चौका डेढ़ सौ (कहानी) – ओम प्रकाश वाल्मीकि
  • अपना गाँव (कहानी ) – मोहन दास नैमिशराय
  • सुनो ब्राह्मण (कविता ) – मलखान सिंह
  • नो बार (कहानी) – जयप्रकाश कर्दम
  • मैं दूंगा माकूल जवाब (कविता) – असंगघोष
  • दोहरा अभिशाप (आत्मकथा) – कौशल्या वैसन्त्री
  • शिकंजे का दर्द (आत्मकथा ) - सुशीला टाकभौरे

Additional Information

  • दलित साहित्य से तात्‍पर्य दलित जीवन और उसकी समस्‍याओं पर लेखन को केन्‍द्र में रखकर हुए
  • साहित्यिक आंदोलन से है जिसका सूत्रपात दलित पैंथर से माना जा सकता है।
  • दलित साहित्य की शुरूआत मराठी से मानी जाती है
  • जहां दलित पैंथर आंदोलन के दौरान बडी संख्‍या में दलित जातियों से आए
  • रचनाकारों ने आम जनता तक अपनी भावनाओं, पीड़ाओं, दुखों-दर्दों को लेखों,
  • कविताओं, निबन्धों, जीवनियों, कटाक्षों, व्यंगों, कथाओं आदि के माध्‍यम से पहुंचाया।

Question 46

'एक कहानी यह भी' किस विधा की रचना है?

  1. AOption (a)

    आत्मकथा

  2. BOption (b)

    जीवनी

  3. COption (c)

    संस्मरण

  4. DOption (d)

    कहानी

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Correct answer

Answer: (a)A.

आत्मकथा

Why this answer is correct

'एक कहानी यह भी' विधा की रचना है - आत्मकथा

  • साहित्य में आत्मकथा किसी लेखक द्वारा अपने ही जीवन का वर्णन करने वाली कथा को कहते हैं।

Key Pointsएक कहानी यह भी​-

  • रचनाकार- मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष-  2007 ई.
  • विधा- आत्मकथा
  • पात्र- ​
  • ​जीतमल लूणिय, सुशीला (मन्नू भंडारी की बहन), शीला अग्रवाल, डॉ अंबालाल जी, मिस्टर सेठी आदि।
  • विषय-
  • ​इसमें लेखिका ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण तथ्यों को उभारा है।

Important Pointsमन्नू भंडारी -

  • (3 अप्रैल 1931 - 15 नवंबर 2021)
  • एक भारतीय लेखिका, पटकथा लेखक, शिक्षिका और नाटककार थीं।
  • कहानी -
  • एक प्लेट सैलाब (1962)
  • मैं हार गई (1957)
  • तीन निगाहों की एक तस्वीर
  • यही सच है (1966)
  • आंखों देखा झूठ
  • नाटक -
  • बिना दीवारों के घर (1966)
  • महाभोज: नाटकीयता (1981)
  • बिना दीवारों का घर (1965)
  • प्रतिशोध तथा अन्या एकांकी (1987)

Additional Information

  • जीवनी - किसी व्यक्ति के जीवन का विस्तृत विवरण देने वाले लेखन को जीवनी कहते हैं।
  • संस्मरण - स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख संस्मरण कहलाता है।
  • कहानी - इसमें जीवन के किसी एक मार्मिक तथ्य या घटना को पात्रों, संवाद एवं घटनाक्रम के माध्यम से नाटकीय रूप में अभिव्यक्ति दी जाती है।

Question 47

'भारत-भारती' में उद्धृत 'लक्ष्मी, अहल्या, बाजयाबाई, भवानी, पद्मिनी' जिन नगरों की रानी थीं, उन्हें आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए

A. इन्दोर

B. झाँसी

C. ग्वालियर

D. चित्तोर

E. नाटोर (बंगाल)

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    B, C, A, D, E

  2. BOption (b)

    B, A, C, E, D

  3. COption (c)

    B, A, C, D, E

  4. DOption (d)

    B, D, C, A, E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

B, A, C, E, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, A, C, E, D

Key Points

क्रमनगररानी
B.झाँसीलक्ष्मी
A.इन्दोरअहल्या
C.ग्वालियरबाजयाबाई
E.नाटोर (बंगाल)भवानी
D.चित्तोरपद्मिनी

Important Pointsभारत-भारती -

  • रचनाकार- मैथिली शरण गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष-  
  • ​​यह काव्य 1912 में रचा गया और संशोधनों के साथ 1914 में प्रकाशित हुआ।
  • विधा- खण्डकाव्य
  • विषय-
  • यह काव्य स्वदेश-प्रेम को दर्शाता है और उस समय के भारत की दुर्दशा का चित्रण करता है।

Additional Informationमैथिली शरण गुप्त -

  • (3 अगस्त 1886 – 12 दिसम्बर 1964 )
  • हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे।
  • हिन्दी साहित्य के इतिहास में वे खड़ी बोली के प्रथम महत्त्वपूर्ण कवि हैं।
  • उन्हें साहित्य जगत में 'दद्दा' नाम से सम्बोधित किया जाता था।
  • महात्मा गांधी द्वारा राष्ट्र कवि [ 2 ] की उपाधि दी गई थी ।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • महाकाव्य- साकेत (1931),
  • खण्डकाव्य- रंग में भंग (1909), जयद्रथ-वध (1910), शकुंतला (1914), पंचवटी (1915),
  • किसान (1916), सैरंध्री (1927), वकसंहार (1927), वन वैभव (1927), शक्ति (1927), यशोधरा (1932),
  • द्वापर (1936), सिद्धराज (1936), नहुष (1940), कुणाल गीत (1941), कर्बला (1942),
  • अजित (1946), हिडिंबा (1950), विष्णुप्रिया (1957), रत्नावली (1960), उर्मिला (अप्रकाशित, 1908-09)  आदि।

Question 48

'सादे ढ़ंग से केवल कुछ अत्यंत व्यंजक घटनाएँ और थोड़ी बातचीत सामने लाकर क्षिप्र गति से किसी एक गंभीर संवेदना या मनोभाव से पर्यवक्षित होने वाली'

यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किस कहानी के संदर्भ में कहा है?

  1. AOption (a)

    एक टोकरी भर मिट्टी

  2. BOption (b)

    दुलाईवाली

  3. COption (c)

    उसने कहा था

  4. DOption (d)

    कानों में कंगना

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Correct answer

Answer: (c)C.

उसने कहा था

Why this answer is correct

'सादे ढ़ंग से केवल कुछ अत्यंत व्यंजक घटनाएँ और थोड़ी बातचीत सामने लाकर क्षिप्र गति से किसी एक गंभीर संवेदना या मनोभाव से पर्यवक्षित होने वाली'

यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहानी के संदर्भ में कहा है - उसने कहा था

Key Pointsआलोचकों की दृष्टि में– 

  • ‘गुलेरी’ चंद्रधर शर्मा गुलेरी की अमर कहानियों की भूमिका में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस कहानी की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि
  • यह मर्यादा में रहकर प्रेम की व्यंजन करने वाली अद्वितीय कहानी है।

उसने कहा था -

  • रचनाकार- चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1915 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • लहना सिंह, सुबेदारनी, सूबेदार हज़ारा सिंह, बोधा सिंह आदि।
  • विषय- 
  • इस कहानी में लेखक ने इसके केंद्रीय चरित्र लहना सिंह के माध्यम से प्रेम, कर्तव्य तथा आत्म-बलिदान के पारस्परिक संघर्ष का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है।
  • रचनाएँ- कहानी संग्रह- उसने कहा था (1915), सुखमय जीवन (1911), बुद्धू का काँटा (1911) पाटलीपुत्र पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

Important Pointsएक टोकरी भर मिट्टी -

  • रचनाकार- पंडित माधवराव सप्रे
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1901 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • जमींदार और अनाथ विधवा आदि।
  • विषय- 
  • ​यह कहानी वर्ग भेद पर आधारित है। इसमें एक गरीब के शोषण का चित्रण है।

दुलाईवाली -

  • रचनाकार- राजेन्द्र बाला घोष
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1907 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • वंशीधर, नवल किशोर, जानकी देई, सीता, लाठीवान आदि।
  • विषय- 
  • ​काशी और उसके आस-पास के जन-जीवन तथा स्त्री-पुरुष की सोच, उनके मनोभावों का स्वाभाविक चित्रण किया है।

कानों में कंगना -

  • रचनाकार- राधिकारमण प्रसाद सिंह
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1913 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • नरेंद्र या कथावाचक स्वयं, किरण, योगीश्वर, मोहन, किन्नरी तथा जूही आदि।
  • विषय-
  • यह एक मार्मिक कहानी है। मनुष्य के विवेक को जागृत करने वाले स्थलों का सूक्ष्म वर्णन करती है। ���ासना और प्रेम में भेद को स्पष्ट किया गया है।

Additional Information'उसने कहा था' कहानी के बारे -

  • डॉ. नरेंद्र के शब्दों में- “गुलेरी जी की कहानियों का प्रमुख आकर्षण तो रस ही है।
  • यह रस उथली असिकता या मानसिक विलासिता का तरल द्रव्य नहीं है। जीवन के गंभीर उपभोगों से खींचा हुआ गाढ़ा रस है।”
  • डॉ० श्यामसुंदर दास ने - गुलेरी के साहित्य को अमूल्य रत्न माना है,
  • क्योंकि गुलेरी जी ने अपनी कहानियों में पात्रों के भाव, परिस्थिति में सजीवता का समावेश किया है।

Question 49

'सभी संथालों को दामुल हौज हो गया' - 'मैला आँचल' की पंक्ति के आधार पर दामुल होज ' शब्द का अर्थ बताइए:

  1. AOption (a)

    मृत्युदंड

  2. BOption (b)

    नज़रबंद

  3. COption (c)

    आजीवन कारावास

  4. DOption (d)

    देश निकाला

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Correct answer

Answer: (c)C.

आजीवन कारावास

Why this answer is correct

'सभी संथालों को दामुल हौज हो गया' - 'मैला आँचल' की पंक्ति के आधार पर 'दामुल होज' शब्द का अर्थ होगा - आजीवन कारावास

Key Points'मैला आँचल' उपन्यास का अंश -

  • नए भारत में आदिवासी नागरिकों की दशा क्या होने वाली है, इसके तीन संकेत एक साथ आते हैं।
  • सुराज मिलने वाला है, इसकी सूचना आती है और साथ ही मुकदमे का फैसला भी आता है।
  • रेणु लिखते हैं-” मुकदमा में भी सुराज आ गया। सभी संथालों को दामुल हौज (आजीवन कारावास) हो गया।”
  • इस खूनी केस में शिवशक्कर सिंघ, रामकिरपाल सिंह और रामखेलावन सिंह छूूट गए,
  • तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद सिंह का प्रभाव काम आया।

Important Pointsमैला आँचल-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954ई.
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत,कमला,बलदेव,कालीचरन,बावनदास आदि।
  • विषय-
  • इसका कथाकाल 1946 से 1948ई. के बीच का है।
  • पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा है।
  • ग्रामीण अंचल के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक यथार्थ को चित्रित किया गया है।

Additional Information फणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म-1921-1977ई.
  • प्रमुख आंचलिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • परती परिकथा (1957ई.)
  • दीर्घतपा (1964ई.)
  • जुलूस (1965ई.)
  • कितने चौराहे (1966ई.)
  • पल्टूबाबू रोड (1979ई.) आदि।

Question 50

'गोदान' उपन्यास में निम्नलिखित वाक्य किसके संदर्भ में कहा गया है - 'शराब का नशा उनके ऊपर सिंह की भांति झपटा और दबोच बैठा'

  1. AOption (a)

    मिर्जा खुर्शेद

  2. BOption (b)

    ओंकारनाथ

  3. COption (c)

    मिस्टर बी. मेहता

  4. DOption (d)

    श्याम बिहारी

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Correct answer

Answer: (b)B.

ओंकारनाथ

Why this answer is correct

'गोदान' उपन्यास में वाक्य ओंकारनाथ के संदर्भ में कहा गया है - 'शराब का नशा उनके ऊपर सिंह की भांति झपटा और दबोच बैठा'। 

Key Points

  • 'सहसा मिर्जा खुर्शेद ने मजदूरों के बीच में आ कर ऊँची आवाज से कहा –
  • जिसको छ: आने रोज पर काम करना हो, वह मेरे साथ आए। सबको छ: आने मिलेंगे। पाँच बजे छुट्टी मिलेगी।
  • मिस्टर बी. मेहता ने कहा – मुझे आज एक नया अनुभव हुआ। महिला की सहानुभूति हार को जीत बना सकती है।

Important Pointsगोदान-

  • रचनाकार- प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष- 1936 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र- 
  • ​होरी, राय साहब, मेहता, मालती, गोविंदी आदि।
  • विषय- 
  • ​भारतीय किसान जीवन की महागाथा का वर्णन है।

Additional Informationप्रेमचंद:

  • जन्म-1880-1936 ई.
  • प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे।
  • उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन किया।
  • मूल नाम:- धनपतराय श्रीवास्तव

प्रमुख रचनायें:-

  • उपन्यास:- 
  • सेवासदन (1918) ,
  • प्रेमाश्रम (1922),
  • रंगभूमि (1925),
  • निर्मला (1925),
  • गबन (1928),
  • कर्मभूमि (1932),
  • गोदान (1936) आदि।
  • ​प्रमुख कहानियां:- 
  • ​नमक का दरोगा,
  • पंच परमेश्वर,
  • ठाकुर का कुआँ,
  • ईदगाह,
  • पूस की रात,
  • कफ़न, इत्यादि।

Question 51

'बकरी' नाटक में आए गीतों की पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए:

A. दुर्जन के साथ सबका यहाँ मोल कर चलो।

B. उह करी न अह करी गाँधी जी की बकरी,

हर किला फतह करी गाँधी जी बकरी ।

C. तन मन धन उन्नायक जय हे जय जय बकरी माता !

अन्याय अहिंसा दंभ क्रूरता भुला, करे मन चंगा ।

D. जा-जा के सींच आएगी हर एक की क्यारी,

मरकर के भी बुझाएगी वह प्यास तुम्हारी ।

E. धर्म, ईश्वर, भाग्य सबकी उँगलियों से घूमता,

आदमी मिट्टी का लोदा चाक पर है झूमता ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, C, D, B, E

  2. BOption (b)

    D, B, C, E, A

  3. COption (c)

    D, B, E, C, A

  4. DOption (d)

    C, E, D, B, A

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

D, B, C, E, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - D, B, C, E, A

Key Points'बकरी' नाटक में आए गीतों की पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम -

  • D. जा-जा के सींच आएगी हर एक की क्यारी,
  • मरकर के भी बुझाएगी वह प्यास तुम्हारी ।
  • B. उह करी न अह करी गाँधी जी की बकरी,
  • हर किला फतह करी गाँधी जी बकरी ।
  • C. तन मन धन उन्नायक जय हे जय जय बकरी माता !
  • अन्याय अहिंसा दंभ क्रूरता भुला, करे मन चंगा ।
  • E. धर्म, ईश्वर, भाग्य सबकी उँगलियों से घूमता,
  • आदमी मिट्टी का लोदा चाक पर है झूमता ।
  • A. दुर्जन के साथ सबका यहाँ मोल कर चलो।

Important Pointsबकरी-

  • रचनाकार- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • पात्र-
  • नट और नटी, भिश्ती, दुर्जन सिंह, कर्मवीर सिंह, सत्यवीर, विपती, सिपाही, काका – काकी।
  • विषय-
  • आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है।

Additional Information सर्वेश्वर दयाल सक्सेना-

  • जन्म- 1927-1983 ई.
  • यह तीसरा सप्तक के कवि है।
  • नाटक-
  • लड़ाई (1979)
  • अब गरीबी हटाओ  (1981)आदि।
  • बाल नाटक:
  • भों-भों खों-खों (1975),
  • लाख की नाक (1979)
  • काव्य रचनाएँ-
  • काठ की घंटियाँ (1959 ई.)
  • बाँस का पुल (1963 ई.)
  • एक सुनी नाव (1966 ई.)
  • कुआनो नदी (1973 ई.) आदि।

Question 52

निम्नलिखित समाचार पत्रों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में लगाइए:

A. सुधाकर

B. बनारस अखबार

C. लोक मित्र

D. ज्ञानप्रदायिनी पत्रिका

E. प्रजा हितैषी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    E, C, A, D, B

  2. BOption (b)

    B, E, D, E, A

  3. COption (c)

    B, A, E, C, D

  4. DOption (d)

    B, C, D, E, A

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

B, A, E, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, A, E, C, D

Key Pointsसमाचार पत्रों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम -

क्रमसमाचार पत्रप्रकाशन वर्ष
B.बनारस अखबार1845
A.सुधाकर1850
E.प्रजा हितैषी1855
C.लोक मित्र1863
D.ज्ञानप्रदायिनी पत्रिका1867

Additional Information

सम्पादकपत्रिकाप्रकाशन वर्ष
जुगल किशोरउदन्त मार्तण्ड(1826, साप्ताहिक, कलकत्ता)
राजा राम मोहन रायबंगदूत(1829, साप्ताहिक, कलकत्ता)
राजा शिवप्रसाद सिंहबनारस अखबार(1845, साप्ताहिक, बनारस)
प्रेम नारायणमालवा अखबार1849, साप्ताहिक, मालवा)
बाबू तारामोहन मित्रसुधाकर(1850, साप्ताहिक, काशी)
मुंशी सदासुखलाल नियाजबुद्धि प्रकाश(1852, साप्ताहिक, आगरा)
राजा लक्ष्मण सिंहप्रजा हितैषी(1855, आगरा)
-लोक मित्र(1863, मासिक)
नवीनचंद्र रायज्ञान प्रदायिनी पत्रिका(1867, मासिक, लाहौर)
भारतेंदु हरिश्वंंदकविवचन सुधा(1868, मासिक- पाक्षिक-साप्ताहिक, काशी)
कार्तिक प्रसाद खत्रीहिंदी दीप्ति प्रकाश(1972, कलकत्ता)
केशवराम भट्टबिहार बंधु(1972, मासिक, बांकीपुर)
भारतेंदु हरिश्रंद्रहरिश्वंंद मैगजिन(1873, मासिक, काशी)
भारतेंदु हरिश्रंद्रबाला बोधिनी(1874, मासिक, काशी)
बलदेव प्रसादकाशी पत्रिका(1876, साप्ताहिक, अलीगढ़)
तोतारामभारत बंधु(1876, साप्ताहिक, अलीगढ़)
रुद्रदत्तभारत मित्र(1877, कलकत्ता)

Question 53

'इसका अध्ययन हिंदी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है, यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रन्थ 'रामचरितमानस' की रचना की।' यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा किस रचनाकार के संदर्भ में कहा गया-

  1. AOption (a)

    सूरदास 

  2. BOption (b)

    जायसी

  3. COption (c)

    सरहपा

  4. DOption (d)

    गोरखनाथ

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Correct answer

Answer: (b)B.

जायसी

Why this answer is correct

'इसका अध्ययन हिंदी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है, यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रन्थ 'रामचरितमानस' की रचना की।' यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा रचनाकार के संदर्भ में कहा गया- जायसी

Key Pointsआचार्य रामचन्द्र शुक्ल ग्रंथावली -1

  • 'पद्मावत' हिन्दी के सर्वोत्तम प्रबन्धकाव्यों में है। ठेठ अवधी भाषा के माधुर्य और भावों की गम्भीरता की दृष्टि से यह काव्य निराला है।
  • पर खेद के साथ कहना पड़ता है कि इसके पठनपाठन का मार्ग कठिनाइयों के कारण अब तक बन्द सा रहा।
  • एक तो इसकी भाषा पुरानी और ठेठ अवधी, दूसरे भाव भी गूढ़, अत: किसी शुद्ध अच्छे संस्करण के बिना इसके अध्यनयन का प्रयास कोई कर भी कैसे सकता था?
  • पर इसका अध्ययन हिन्दी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है,
  • यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदासजी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रन्थ 'रामचरितमानस' की रचना की।
  • यही अवधी भाषा और चौपाई दोहे का क्रम दोनों में है, जो आख्यानकाव्यों के लिए हिन्दी में संभवत: पहले से चला आता रहा हो।
  • कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग जायसी और तुलसी को छोड़ और किसी कवि ने नहीं किया है।
  • तुलसी के भाषा के स्वरूप को पूर्णतया समझने के लिये जायसी की भाषा का अध्यायन आवश्यक है।

Important Points आचार्य रामचन्द्र शुक्ल -

  • (4 अक्टूबर 1884 - 2 फरवरी 1941)
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • सूर, तुलसी, जायसी पर की गई आलोचनाएँ, काव्य में रहस्यवाद, काव्य में अभिव्यंजनावाद, रसमीमांसा आदि शुक्ल की आलोचनात्मक रचनाएँ हैं।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ -
  • उनके निबन्ध चिंतामणि नामक ग्रंथ के दो भागों में संग्रहीत हैं।

Additional Informationमलि‍क मुहम्‍मद जायसी -

  • जन्म- 1397-1494 ई.  (भाषा - अवधी)
  • भक्तिकाल की निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा व मलिक वंश के कवि है।
  • जायसी अत्यंत उच्चकोटि के सरल और उदार सूफ़ी महात्मा थे।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • पद्मावत
  • अखरावट
  • आख़िरी कलाम
  • चित्ररेखा
  • कहरानामा आदि।

सूरदास-

  • जन्म - 1478 - 1583 ई. (अनुमानित)
  • हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल में कृष्ण भक्ति के भक्त कवियों में अग्रणी है।
  • महाकवि सूरदास जी वात्सल्य रस के सम्राट माने जाते हैं।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • सूरसागर
  • सूरसारावली
  • साहित्य-लहरी
  • नल-दमयन्ती
  • ब्याहलो आदि।

सरहपा-

  • (8 वीं शती)
  • हिन्दी ,मैथिली, उड़ीया ,बंगाली के प्रथम कवि माने जाते हैं।
  • उनको बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • ​दोहा कोश-गीति
  • दोहाकोश नाम चर्यागीति
  • दोहाकोशोपदेश गीति
  • कायकोशामृतवज्रगीति
  • कायवाक्चित्तामनसिकार
  • दोहाकोश महामुद्रोपदेश आदि।

गोरखनाथ -

  • उत्तर भारत के महान पंडित, संस्कृतज्ञ, भारतीय धर्म-दर्शन के अध्येता और प्रकांड चितंक थे।
  • इसके साथ ही वह नाथ संप्रदाय के संस्थापक और नौ नाथों में से एक थे।
  • गोरखनाथ जी ‘मत्स्येंद्रनाथ’ के शिष्य थे।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • सबदी
  • पद
  • शिष्या दर्शन
  • प्राण संकली
  • नरवै बोध
  • आत्मबोध
  • अभैमात्रा योग
  • पंद्रह तिथि योग आदि।

Question 54

भारतेन्दु ने 'तदीय समाज' की स्थापना किस वर्ष की थी?

  1. AOption (a)

    1836

  2. BOption (b)

    1873

  3. COption (c)

    1871

  4. DOption (d)

    1845

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Correct answer

Answer: (b)B.

1873

Why this answer is correct

भारतेन्दु ने 'तदीय समाज' की स्थापना 1873 वर्ष की थी।

Key Pointsतदीय समाज-

  • संस्थापक- भारतेन्दु हरिश्चंद्र
  • इसकी स्थापना 1873 ई. में हुई थी।
  • वैष्णव भक्ति के प्रचार के लिए इस समाज की स्थापना की गई थी।

Additional Information भारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885 ई.
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह कहा जाता है।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उन��ी उपाधि थी।
  • उन्होंने 1868 में 'कविवचनसुधा', 1873 में 'हरिश्चन्द्र मैगजीन' और 1874 में स्त्री शिक्षा के लिए 'बाला बोधिनी' नामक पत्रिकाएँ निकालीं।
  • काव्य रचनाएँ-
  • प्रेममालिका (1871),
  • प्रेम माधुरी (1875),
  • प्रेम-तरंग (1877),
  • प्रेम-प्रलाप (1877),
  • होली (1879),
  • मधुमुकुल (1881),
  • राग-संग्रह (1880),
  • वर्षा-विनोद (1880),
  • विनय प्रेम पचासा (1881) आदि ।

Question 55

'भेख है यह। आप विचार कर देखिए। जैसे आपका यह खध्धड़ कपड़ा है। मलमल और मारकीन कपड़ा पहनने वाले मन से भले ही महतमा जी के पन्थ को मानें, लेकिन आप उन्हें सुराजी तो नहीं कहिएगा?'

उपरोक्त कथन मैला आँचल के किस पात्र द्वारा कहा गया है-

  1. AOption (a)

    लछमी

  2. BOption (b)

    बालदेव

  3. COption (c)

    सुमरितदास

  4. DOption (d)

    फुलिया

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Correct answer

Answer: (a)A.

लछमी

Why this answer is correct

'भेख है यह। आप विचार कर देखिए। जैसे आपका यह खध्धड़ कपड़ा है। मलमल और मारकीन कपड़ा पहनने वाले मन से भले ही महतमा जी के पन्थ को मानें, लेकिन आप उन्हें सुराजी तो नहीं कहिएगा?'

उपरोक्त कथन मैला आँचल के पात्र द्वारा कहा गया है- लछमी

Key Pointsमैला आँचल उपन्यास के अंश -

  • लगते। लेकिन लछमी शांत होकर कहती है,
  • ''कंठी बाहरी चीज नहीं है बालदेव जी ! भेख है यह।
  • आप विच्चार कर देखिए । जैसे आपका यह खध्घड़ कपड़ा है।
  • मलमल और मारकीन कपड़ा पहननेवाले मन से भले ही महतमा जी के पंथ को मानें,
  • लेकिन आप उन्हें सुराजी तो नहीं कहिएगा ?”
  • 'लछमी की बातों का जवाब देना सहज नहीं।
  • जब-जब लछमी से बातें होती हैं, बालदेव जी को नई बातों की जानकारी होती है।

Important Pointsमैला आंचल -

  • रचनाकार - फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1954 ई.
  • मूख्य पात्र - 
  • ​डॉ. प्रशान्त,कमली, बावनदास, बालदेव, दोहराव, लछमी, सुमरितदास, फुलिया और तहसीलदार विश्वनाथ।
  • विषय -  
  • यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है।
  • इसकी कथावस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया ज़िले के मेरीगंज की ग्रामीण ज़िंदगी से संबद्ध है।

Additional Information फणीश्वरनाथ रेणु -

  • (4 मार्च 1921 - 11 अप्रैल 1977)
  • एक सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार थे।
  • उपन्यास -
  • परती परिकथा (1957 ई.),
  • दीर्घतपा (1964 ई.),
  • कितने चौराहे (1966 ई.),
  • पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) आदि।

Question 56

रासउ असंभु नवरस सरस छंदु चंदु किअ अमिअ सम ।

श्रृंगार वीर करुणा विभछ भय अद्भुत्तह संत सम ।।

उपरोक्त पंक्तियां चंदबरदाई ने किस संदर्भ में लिखी हैं?

  1. AOption (a)

    वीर रस

  2. BOption (b)

    संगीत

  3. COption (c)

    रासउ की व्याख्या

  4. DOption (d)

    भक्ति की व्याख्या

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Correct answer

Answer: (c)C.

रासउ की व्याख्या

Why this answer is correct

रासउ असंभु नवरस सरस छंदु चंदु किअ अमिअ सम ।

श्रृंगार वीर करुणा विभछ भय अद्भुत्तह संत सम ।।

उपरोक्त पंक्तियां चंदबरदाई ने संदर्भ में लिखी हैं - रासउ की व्याख्या

Key Points

  • रासो असंभव नौ रसौ का समूह है।
  • अमृत के समान सरस छन्दों में चन्दबरदायी ने इन नौ रसो की कल्पना की है।
  • रासो, रासा, रास, रासउ समानार्थ शब्द है। इनका विकास रास नामक नृत्य से हुआ है।
  • हर्षचरित मे रास का उल्लेख नृत्य और गान दोनों रूपों में हुआ है।
  • अपभ्रंश के महान कवि स्वयंभु ने रास छंद का लक्षण दिया है। रास नृत्य है, गान है और छंद भी है।
  • गान शब्दो से बनता है। एक बार शब्दों का आगमन हुआ तो कथा का समावेश हो गया और रास प्रबंध काव्य भी बन गया होगा।

Additional Informationचंदबरदाई -

  • (1148 - 1192 ई.)
  • हिन्दी साहित्य के आदिकालीन कवि तथा पृथ्वीराज चौहान के मित्र थे।
  • चंदवरदाई का प्रसिद्ध ग्रंथ "पृथ्वीराजरासो" है।
  • रचनाएँ -
  • बाहुबली रासो
  • प्रेम रासो
  • रास रासो

Question 57

'आगरा बाजार' नाटक के पात्रों को उनके वक्तव्य के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची I वक्तव्यसूची II पात्र
A.आपस में तू-तू, मैं मैं शुरू हो गई। बात-बात में एक अच्छा-खासा हंग��मा शुरू हो गया।I.हमजोली
B.अबे, मैंने तुम लोगों का क्या बिगाड़ा था? एक तो मंदा बाज़ार, ऊपर से यह टोटा।II.ककड़ीवाला
C.बादशाह सलामत के उस्ताद हैं, अगर तारीफ करें तो ज़र्रे को आफताब बना दें।III.बरतनवाला
D.आपका दिमाग जैसे आसमान पर सूरज, मेरी हैसियत जैसे ज़मीन।IV.किताबवाला

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - IV, B - II, C - I, D - III

  2. BOption (b)

    A - I, B - IV. C - III, D - II

  3. COption (c)

    A - IV, B - III, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - IV, B - III, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - III, C - I, D - II

Key Points

सूची I वक्तव्यसूची II पात्र
A.आपस में तू-तू, मैं मैं शुरू हो गई। बात-बात में एक अच्छा-खासा हंगामा शुरू हो गया।IV.किताबवाला
B.अबे, मैंने तुम लोगों का क्या बिगाड़ा था? एक तो मंदा बाज़ार, ऊपर से यह टोटा।III.बरतनवाला
C.बादशाह सलामत के उस्ताद हैं, अगर तारीफ करें तो ज़र्रे को आफताब बना दें।I.हमजोली
D.आपका दिमाग जैसे आसमान पर सूरज, मेरी हैसियत जैसे ज़मीन।II.ककड़ीवाला

Important Pointsआगरा बाजार -

  • रचनाकार - हबीब तनवीर
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1954 ई.
  • मुख्य पात्र -
  • ​फ़कीर, लड्डूवाला, ​हमजोली, तरबूजवाला, बरतनवाला, किताबवाला, ककड़ीवाला, ग्राहक, लड़का, करीमन, चमेली आदि।
  • विषय -
  • ​इस नाटक में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं का चित्रण किया गया है।
  • व्यापारियों का दर्द, इतिहास के फलक पर आधुनिक समस्याओं के रूप में चित्रण किया गया है।

Additional Informationहबीब तनवीर -

  • **जन्म -**1 सितम्बर 1923 – 08 जून 2009
  • भारत के मशहूर पटकथा लेखक, नाट्य निर्देशक, कवि और अभिनेता थे।
  • मुख्य बहुचर्चित नाटक: आगरा बाजार (1954), मिट्टी की गाड़ी (1958), चरणदास चोर (1975)
  • अन्य नाटक: आगरा बाजार (1954), शतरंज के मोहरे (1954), लाला शोहरत राय (1954), मिट्टी की गाड़ी (1958),
  • गाँव का नाम ससुराल हमार नाम दामाद (1973), हिरमा की अमर कहानी उत्तर रामचरित (1977),
  • पोंगा पण्डित (1990), जिन लाहौर नहीं देख्या (1990), कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना (1993),
  • द ब्रोकन ब्रिज (1995), जहरीली हवा (2002), राज रक्त (2006)।

Question 58

अचरज होत तुमहुँ सम गोरे बाजत कारे।

तासो कारे 'कारे' शब्दहु पर है वारे ।।

उपरोक्त पंक्तियाँ प्रेमघन ने किस महापुरुष के अपमान पर लिखी थी:

  1. AOption (a)

    दादा भाई नौरोजी

  2. BOption (b)

    महात्मा गाँधी

  3. COption (c)

    लाला लाजपत राय

  4. DOption (d)

    बालगंगाधर तिलक

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Correct answer

Answer: (a)A.

दादा भाई नौरोजी

Why this answer is correct

अचरज होत तुमहुँ सम गोरे बाजत कारे।

तासो कारे 'कारे' शब्दहु पर है वारे ।।

उपरोक्त पंक्तियाँ प्रेमघन ने महापुरुष के अपमान पर लिखी थी - दादा भाई नौरोजी

Key Points

  • पार्लियामेंट के सदस्य दादाभाई नौरोजी को जब विलायत में 'काला' कहा गया,
  • तब प्रेमघन ने इस पर यह क्षोभ पूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

Important Pointsबदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' -

  • जन्म, 1855 - निधन, 1923 (उपनाम - प्रेमघन)
  • इन्होने कई नाटक लिखे हैं जिनमें "भारत सौभाग्य" 1888 में कांग्रेस महाधिवेशन के अवसर पर खेले जाने के लिए लिखा गया था।
  • प्रेमघनजी की रचनाओं का क्रमश: तीन खंडों में विभाजन किया जाता है -
  1. प्रबंध काव्य
  2. संगीत काव्य
  3. स्फुट निबंध।
  • कृतियाँ-
  • 'जीर्ण जनपद', 'आनंद अरुणोदय', 'हार्दिक हर्षादर्श', 'मयंक-महिमा', 'अलौकिक लीला',
  • 'वर्षा-बिंदु' , भारत सौभाग्य, प्रयाग रामागमन, संगीत सुधासरोवर, भारत भाग्योदय काव्य।

Additional Informationदादा भाई नौरोजी -

  • (4 सितम्बर 1825 - 30 जून 1917)
  • ब्रिटिशकालीन भारत के एक पारसी बुद्धिजीवी, शिक्षाशास्त्री, कपास के व्यापारी तथा आरम्भिक राजनैतिक एवं सामाजिक नेता थे।
  • दादाभाई नौरोजी को 'भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन' के नाम से भी जाना जाता है।
  • दादाभाई नौरोजी ने 1901 ई. में 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई थी।
  • दादाभाई नौरोजी 1886, 1893 और 1906 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
  • इन्होंने 1856 में लंदन इंडियन सोसाइटी का गठन किया।
  • दादाभाई गोपाल कृष्ण गोखले, बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी के गुरु थे।

महात्मा गाँधी -

  • (जन्म: 2 अक्टूबर 1869 - निधन: 30 जनवरी 1948)
  • इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
  • भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे।
  • किताबें: हिंद स्वराज (1909), दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह (1920), सत्य के प्रयोग (1927), गीता बोध (1929), मेरे सपनों का भारत (1942)।
  • कुछ अन्य महात्मा गांधी की पुस्तकों के नाम :
  • अहिंसा के प्रथम चरण (1910) , व्यक्तिगत सत्याग्रह (1920), हरिजन (1933),
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए धर्म (1936), स्वराज्य की ओर (1937)
  • आत्मनिर्भरता (1940), भारत के लिए संविधान (1942), अंतिम संदेश (1948)।

लाला लाजपत राय-

  • (28 जनवरी 1865– 17 नवम्बर 1928)
  • भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे।इन्हें पंजाब केसरी भी कहा जाता है।
  • इन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी।
  • ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे।
  • रचनाएँ -
  • ​मेरे निर्वासन की कहानी (1908), आर्य समाज (1915), संयुक्त राज्य अमेरिका: एक हिंदू छाप (1916),
  • भारत में राष्ट्रीय शिक्षा की समस्या (1920), दुखी भारत (1928), इंग्लैंड का भारत पर ऋण (1917)।

बालगंगाधर तिलक -

  • (23 जुलाई 1856 - 1 अगस्त 1920)
  • एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे।
  • अंग्रेज उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे।
  • उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय पदवी भी प्राप्त हुई, जिसका अर्थ है "लोगों द्वारा स्वीकृत" (उनके नायक के रूप में)।
  • 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' - बाल गंगाधर तिलक का नारा।
  • उन्होंने 'इंडियन होमरूल लीग' की स्थापना सन् 1914 ई. में की।
  • रचनाएँ -
  • ​'द ओरियन' , द नॉर्थियन होम ऑफ द वेदाज (1903), श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य (मांडले जेल में), द हिंदू फिलॉसफी ऑफ लाइफ, एथिक्स एंड रिलिजन (1887 में प्रकाशित)।

Question 59

भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों के संदर्भ में सही कथन कौन सा से है हैं?

A. आचार्य कुन्तक ने रीति रचना के तीन मार्ग माने हैं सुकुमार, विचित्र और मध्यम ।

B. आचार्य शंकुक ने निष्पत्ति का अर्थ उत्पाद्य उत्पादक सम्बन्ध और संयोग का अर्थ 'अनुभाप्य अनुभापक सम्बन्ध' माना।

C. भट्टनायक ने निष्पत्ति का अर्थ भुक्ति और संयोग का अर्थ - 'भोज्य-भोजक' सम्बन्ध माना ।

D. ध्वनि के तीन भेद माने गए हैं वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि, रस ध्वनि

E. आनन्दवर्धन ने 6 प्रकार के औचित्यों रस, अलंकार, गुण, दोष, संघटन एवं प्रबन्धन की चर्चा की है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, C तथा D

  2. BOption (b)

    केवल A, C तथा D

  3. COption (c)

    केवल A, E तथा D

  4. DOption (d)

    केवल A. B तथा C

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C तथा D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C तथा D

Key Pointsभारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों के संदर्भ में सही कथन है - 

  • A. आचार्य कुन्तक ने रीति रचना के तीन मार्ग माने हैं सुकुमार, विचित्र और मध्यम ।
  • C. भट्टनायक ने निष्पत्ति का अर्थ भुक्ति और संयोग का अर्थ - 'भोज्य-भोजक' सम्बन्ध माना ।
  • D. ध्वनि के तीन भेद माने गए हैं वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि, रस ध्वनि

त्रुटि रहित कथन -

  • B. आचार्य शंकुक ने निष्पत्ति का अर्थ - अनुमिति से लिया है तथा संयोग का अर्थ लिया है - अनुमाप्य-अनुमापक भाव संबंध।
  • **E.**आनंदवर्धन ने औचित्य के मुख्यतः छः प्रकार बताए हैं जिनमें - रस औचित्य अलंकारौचित्य, गुणैचित्य, संघटनौचित्य, प्रबंधौचित्य तथा रीति औचित्य है।

Additional Information

  • काव्यशास्त्र काव्य और साहित्य का दर्शन तथा विज्ञान है।
  • यह काव्यकृतियों के विश्लेषण के आधार पर समय-समय पर उद्भावित सिद्धान्तों की ज्ञानराशि है।
  • काव्यशास्त्र के लिए पुराने नाम 'साहित्यशास्त्र' तथा 'अलंकारशास्त्र' हैं
  • और साहित्य के व्यापक रचनात्मक वाङ्मय को समेटने पर इसे 'समीक्षाशास्त्र' भी कहा जाने लगा।
  • काव्य के विभिन्न अंगों पर महत्त्व तथा बल देने से विभिन्न संप्रदायों की विभिन्न शताब्दियों में उत्पत्ति हुई।
  • मुख्य सम्प्रदायों की संख्या छ: मानी जा सकती है-
  1. रस सम्प्रदाय,
  2. अलंकार सम्प्रदाय,
  3. रीति या गुण सम्प्रदाय,
  4. वक्रोक्ति सम्प्रदाय,
  5. ध्वनि सम्प्रदाय,
  6. औचित्य सम्प्रदाय।

Question 60

“इतने बड़े हो गए, अभी तक पढ़ने जाते हैं। न जाने कब तक पढ़ेंगे और क्या करेंगे इतना पढ़कर।"

उपरोक्त कथन किस कहानी से लिया गया है?

  1. AOption (a)

    अपना अपना भाग्य

  2. BOption (b)

    राही

  3. COption (c)

    ईदगाह

  4. DOption (d)

    चंद्रदेव से मेरी बातें

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Correct answer

Answer: (c)C.

ईदगाह

Why this answer is correct

उपरोक्त कथन कहानी से लिया गया है - ईदगाह

Key Pointsईदगाह कहानी का अंश -

  • बड़ी-बड़ी इमारतें आने लगीं, यह अदालत है, यह कॉलेज है, यह क्लब-घर है,
  • इतने बड़े कॉलेज में कितने लड़के पढ़ते होंगे? सब लड़के नहीं हैं जी! बड़े-बड़े आदमी हैं, सच!
  • उनकी बड़ी-बड़ी मूंछे हैं, इतने बड़े हो गए, अभी तक पढ़ने जाते हैं. न जाने कब तक पढ़ेंगे और क्या करेंगे इतना पढ़कर!
  • हामिद के मदरसे में दो-तीन बड़े-बड़े लड़के हैं, बिल्कुल तीन कौड़ी के. रोज़ मार खाते हैं, काम से जी चुराने वाले,
  • इस जगह भी उसी तरह के लोग होंगे ओर क्या. क्लब-घर में जादू होता है।

Important Pointsईदगाह -

  • रचनाकार- मुंशी प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष- 1933 ई.
  • विधा- कहानी
  • मुख्य पात्र-
  • हमिद, अमीना, मोहमद, मोहसीन, नूरे और सम्मी आदि।
  • विषय-
  • ​यह कहानी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित कहानी है।
  • इस कहानी में दादी और पोते का मार्मिक प्रेम दर्शाया गया है।

Additional Informationअपना अपना भाग्य -

  • रचनाकार- जैनेन्द्र
  • प्रकाशन वर्ष- 1933 ई.
  • विधा- कहानी
  • मुख्य पात्र-
  • दस वर्ष का अनाथ बच्चा, कथानायक और कथानायक का मित्र आदि।
  • विषय-
  • ​ एक पहाड़ी बच्चे की मार्मिक कहानी चित्रण किया है।
  • ​ एक पहाड़ी एक गरीब बच्चे की बड़ा ही मार्मिकता का चित्रण किया है।
  • कहानी संग्रह:
  • फाँसी (1929), वातायन (1930 ), नीलम देश की राज कन्या (1933), एक रात (1934),
  • दो चिड़ियाँ (1935), पाजेब  (1942), ध्रुवयात्रा (1944), जयसंधि (1949 ),  तथा जैनेन्द्र की कहानियाँ (सात भाग)।

Question 61

इनमें से कौन सा/से पात्र 'झूठा सच' उपन्यास में नहीं है/हैं?

A. मुंशी चुन्नीलाल

B. गोपीचन्द भार्गव

C. मिस्टर ब्राइट

D. मास्टर तारा सिंह

E. प्रभुदयाल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, C

  2. BOption (b)

    केवल A, E

  3. COption (c)

    केवल C, D

  4. DOption (d)

    केवल A, C

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C

Key Points

  • 'झूठा सच' उपन्यास के पात्र - तारा, जयदेव, कनक, गिल, डाक्टर नाथ, नैयर, सूद जी, सोमराज, रावत, ईसाक, असद और प्रधान मंत्री भी काल्पनिक पात्र हैं।

Important Pointsझूठा-सच-

  • रचनाकार- यशपाल
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • तार, जयदेव, कनक, गिल, डाक्टर नाथ, नैयर, सूद जी, सोमराज आदि।
  • विषय-
  • स्वतंत्रता पूर्व और प्राप्ति के बाद के यथार्थ को चित्रित किया गया है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।

परीक्षा गुरु -

  • रचनाकार- लाला श्रीनिवास दास
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1882 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • लाला मदन मोहन, लाला ब्रजकिशोर, मुंशी चुन्नीलाल, मिस्टर ब्राइट​ और मास्टर शंभुदयाल आदि।
  • विषय- 
  • ​यह उपन्यास सामाजिक यथार्थ की चेतना का चित्रण करता है।
  • इसमें अपने काल के भारतीय जीवन में आने वाली विकृत्तियों और उनसे उत्पन्न कुछ समस्याओं का चित्रण है।

Additional Information यशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड (1941 ई.)
  • देशद्रोही (1943 ई.)
  • दिव्या (1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड (1946 ई.) आदि।

Question 62

मीरा की काव्य पंक्तियों के संदर्भ में कौन सा/से कथन असत्य हैं?

A.थें तो पलक उघाड़ो दीनानाथ मैं हाजिर नाजिर कब की खड़ी-राजस्थानी भाषा का प्रयोग
B.मन की मैल हिय ते न छूटी दियो तिलक सिर धोय-पंजाबी भाषा का प्रयोग
C.हो काँनाँ किन गूँथी जुल्फाँ कारियाँ-पंजाबी भाषा का प्रयोग
D.प्रेमनी प्रेमनी प्रेमनी रे, मने लागी कटारी प्रेमनी-गुजराती भाषा का प्रयोग
E.दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनावै-गुजराती भाषा प्रयोग

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, E

  2. BOption (b)

    केवल B, D, C

  3. COption (c)

    केवल E, D

  4. DOption (d)

    केवल A, E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

केवल B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, E

Key Pointsमीरा की काव्य पंक्तियों के संदर्भ में कथन सत्य हैं -

A.थें तो पलक उघाड़ो दीनानाथ मैं हाजिर नाजिर कब की खड़ी-राजस्थानी भाषा का प्रयोग
C.हो काँनाँ किन गूँथी जुल्फाँ कारियाँ-पंजाबी भाषा का प्रयोग
D.प्रेमनी प्रेमनी प्रेमनी रे, मने लागी कटारी प्रेमनी-गुजराती भाषा का प्रयोग

त्रुटि रहित वाक्य -

  • मन की मैल हिये ते न छूटी, दियो तिलक सिर धोय। - 
  • भावार्थ - मीरा बाई कह रही हैं कि मन की मलीनता तो ह्रदय से दूर नहीं हुई और सिर धोकर तिलक लगा लिया।
  • दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनावै। - 
  • भावार्थ - मीरा बाई कह रही हैं कि वर्षा ऋतु भी आ चुकी है और मोर अपने पंख फैलाकर नृत्य कर रहे हैं तथा कोयल अपनी मधुर आवाज़ में गीत गा रही है।

Additional Informationमीराबाई -

  • (1498-1547)
  • सोलहवीं शताब्दी की एक कृष्ण भक्त और कवयित्री थीं।
  • मीरा बाई ने कृष्ण भक्ति के स्फुट पदों की रचना की है।
  • रचनाएँ -
  • राग गोविंद
  • गोविंद टीका
  • राग सोरठा
  • मीरा की मल्हार
  • नरसी जी रो माहेरो
  • गर्वागीत
  • फुटकर पद

Question 63

आधुनिकता के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

A. आधुनिकता यथार्थ बोध पर आधारित है।

B. आधुनिकता ईश्वर का चित्रण मनुष्य रूप में करती है।

C. आधुनिकता किसी निर्दिष्ट प्रणाली पर न चलकर अपनी संवेदना आसपास के जीवन से ग्रहण करती है।

D. आधुनिकता सामाजिक उत्तरदायित्व से मुक्त है।

E. आधुनिकता आनंद के साथ कर्म की प्रेरणा देती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और  C

  2. BOption (b)

    केवल A, C और E

  3. COption (c)

    केवल A, D और E

  4. DOption (d)

    केवल B, C और E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C और E

Key Pointsआधुनिकता के संदर्भ में कथन सत्य है-

  • A. आधुनिकता यथार्थ बोध पर आधारित है।
  • C. आधुनिकता किसी निर्दिष्ट प्रणाली पर न चलकर अपनी संवेदना आसपास के जीवन से ग्रहण करती है।
  • E. आधुनिकता आनंद के साथ कर्म की प्रेरणा देती है।

Additional Informationआधुनिकता की कुछ विशेषताएं -

  • आधुनिकता का मतलब है, पुराने के ख़िलाफ़ नए का संघर्ष।
  • आधुनिकता में विज्ञान, तर्क, और बुद्धि का इस्तेमाल किया जाता है।
  • आधुनिकता में व्यक्ति का अर्थ प्रणालियों से अलगाव होता है।
  • आधुनिकता में मानव आत्म विकासवादी इच्छाओं का उत्पाद माना जाता है।
  • आधुनिकता में सामाजिक एकीकरण होता है।
  • आधुनिकता में समाज के तबकों में विशेषज्ञता बढ़ती है।
  • आधुनिकता में राज्य की भूमिका बढ़ती है।
  • आधुनिकता में अनिवार्य सार्वजनिक शिक्षा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य, सार्वजनिक आवास, और सामाजिक नीतियां लागू होती हैं।
  • आधुनिकता में क्षण के यथार्थ के प्रति सापेक्ष दायित्व बोध होता है।
  • आधुनिकता में भविष्य के अनुकूल बनाकर उसे सामाजिक व्यवस्था का रूप दिया जाता है।

Question 64

रचनाकारों का उनके जन्म वर्ष से मिलान कीजिए:

सूची I रचनाकारसूची II जन्म वर्ष
A.मैथिलीशरण गुप्तI.1889
B.सुमित्रानन्दन पंतII.1886
C.महादेवी वर्माIII.1900
D.रामनरेश त्रिपाठीIV.1907

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - I, C - III, D - IV

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - IV, D - I

  3. COption (c)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

  4. DOption (d)

    A - I, B - II, C - III, D - IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - II, B - III, C - IV, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - III, C - IV, D - I

Key Points

सूची I रचनाकारसूची II जन्म वर्ष
A.मैथिलीशरण गुप्तII.1886
B.सुमित्रानन्दन पंतIII.1900
C.महादेवी वर्माIV.1907
D.रामनरेश त्रिपाठीI.1889

Additional Informationमैथिलीशरण गुप्त-

  • हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे।
  • हिन्दी साहित्य के इतिहास में वे खड़ी बोली के प्रथम महत्त्वपूर्ण कवि हैं।
  • उन्हें साहित्य जगत में 'दद्दा' नाम से सम्बोधित किया जाता था।
  • कविता संग्रह -
  • महाकाव्य : साकेत (1931)
  • खंडकाव्य : रंग में भंग (1909), जयद्रथ-वध (1910), शकुंतला (1914), पंचवटी (1915),
  • किसान (1916), सैरंध्री (1927), वकसंहार (1927), वन वैभव (1927), शक्ति (1927),
  • यशोधरा (1932), द्वापर (1936), सिद्धराज (1936), नहुष (1940), कुणाल गीत (1941)।

सुमित्रानंदन पंत-

  • जन्म - 1900 - 1977 ई.
  • हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक हैं।
  • कविता संग्रह -
  • वीणा (1919 ई.)
  • ग्रंथि (1920 ई.)
  • पल्लव (1926 ई.)
  • गुंजन (1932 ई.)
  • युगांत (1937 ई.)
  • युगवाणी (1938 ई.) आदि।

महादेवी वर्मा -

  • जन्म - 1907 - 1987 ई.
  • हिन्दी भाषा की कवयित्री थीं।
  • वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक मानी जाती हैं।
  • कविता संग्रह -
  • नीहार (1930 ई.)
  • रश्मि (1932 ई.)
  • नीरजा (1934 ई.)
  • सांध्यगीत (1936 ई.)
  • दीपशिखा (1942 ई.) आदि।

रामनरेश त्रिपाठी -

  • जन्म- 1889 - 1962 ई.
  • हिन्दी भाषा के 'द्विवेदीयुग' और छायावाद युग' के कवि थे।
  • कविता, कहानी, उपन्यास, जीवनी, संस्मरण, बाल साहित्य सभी पर उन्होंने कलम चलाई।
  • ​काव्य कृतियाँ -​
  • मिलन (1918)
  • पथिक (1920)
  • मानसी (1927)
  • स्वप्न (1929) आदि।

Question 65

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I लेखकसूची II निबंध
A.नामवर सिंहI.मजदूरी और प्रेम
B.कुबेरनाथ रायII.संस्कृति और सौंदर्य
C.सरदार पूर्ण सिंहIII.कविता क्या है
D.रामचन्द्र शुक्लIV.उत्तराफाल्गुनी के आस-पास

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - IV, C - I, D - III

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

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Correct answer

Answer: (a)A.

A - II, B - IV, C - I, D - III

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - IV, C - I, D - III

Key Points

सूची I लेखकसूची II निबंध
A.नामवर सिंहII.संस्कृति और सौंदर्य
B.कुबेरनाथ रायIV.उत्तराफाल्गुनी के आस-पास
C.सरदार पूर्ण सिंहI.मजदूरी और प्रेम
D.रामचन्द्र शुक्लIII.कविता क्या है

Important Pointsसंस्कृति और सौंदर्य-

  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष-1982 ई.
  • विषय-
  • इसमें हजारीप्रसाद द्विवेदी की सौंदर्यात्मक दृष्टि का मूल्यांकन किया गया है।

उत्तराफाल्गुनी के आस-पास-

  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1973 ई.
  • विषय-
  • इसमें वर्षा ऋतु के अंतिम नक्षत्र उत्तरफाल्गुनी के विषय में बताया गया है।

मजदूरी और प्रेम-

  • विधा- निबंध
  • विषय-  
  • किसान जीवन से आरम्भ होकर यह निबंध मजदूरी और मशीन के द्वन्द्व को उजागर करता है।

कविता क्या है-

  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1909 ई.
  • विषय-
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।

Additional Informationनामवर सिंह-

  • जन्म-1926-2019 ई.
  • निबंध-
  • बकलम खुद(1951 ई.)
  • वाद विवाद संवाद(1989 ई.) आदि।

कुबेरनाथ राय-

  • जन्म-1933-1996 ई.
  • निबंध-
  • प्रिया नीलकंठी(1968 ई.)
  • रस आखेटक(1970 ई.)
  • विषाद योग(1973 ई.)
  • निषाद बाँसुरी(1974 ई.) आदि।

सरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म- 1881-1931 ई.
  • भारत के विशिष्ट निबंधकारों में से एक थे।
  • ये देशभक्त, शिक्षाविद, अध्यापक, वैज्ञानिक एवं लेखक भी थे।
  • निबंध-
  • सच्ची वीरता
  • कन्यादान
  • पवित्रता
  • आचरण की सभ्यता
  • अमरीका का मस्ताना योगी वाल्ट व्हिटमैन आदि।

रामचन्द्र शुक्ल -

  • जन्म- 1884 - 1941 ई.
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • निबंध संग्रह-
  • चिंतामणि (1939 ई.)

Question 66

प्रेमचन्द्र की पत्नी शिवरानी देवी ने 'प्रेमचन्द घर में' नाम से उनकी जीवनी लिखी है। इसका प्रकाशन वर्ष निम्नलिखित में से क्या है?

  1. AOption (a)

    1942 ई.

  2. BOption (b)

    1943 ई.

  3. COption (c)

    1944 ई.

  4. DOption (d)

    1950 ई.

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Correct answer

Answer: (c)C.

1944 ई.

Why this answer is correct

प्रेमचन्द्र की पत्नी शिवरानी देवी ने 'प्रेमचन्द घर में' नाम से उनकी जीवनी लिखी है। इसका प्रकाशन वर्ष है- 1944 ई.

Key Pointsप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार - शिवरानी देवी
  • विधा- जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष- 1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

Additional Informationशिवरानी देवी -

  • शिवरानी देवी प्रेमचंद कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जीवन-संगिनी थीं।
  • यह एक समाज सेविका एवं ब्रिटिश शासन के दौरान एक क्रांतिकारी के रूप में कायम रखा।
  • प्रेमचंद ने "बूढ़ी काकी" लिखी तो शिवरानी देवी ने भी "बूढ़ी काकी" नाम से कहानी लिखी थी।
  • ये दोनो कहानियां उनके पहले कहानी संग्रह "नारी हृदय'' (1993) में संकलित है।
  • इस तरह शिवरानी देवी ने पांच ऐसी कहानियां लिखी, जिनके शीर्षक प्रेमचंद की कहानियों से मिलते थे।
  • इनमें "पछतावा", "विमाता'', और "बलिदान" जैसी कहानियां है। "पछतावा" और "विमाता" तो "कौमुदी" (1937) में संकलित है।
  • "बलिदान" कहानी अभी तक असंकलित है। यह कहानी 1937 में चांद में प्रकाशित हुई थी।

Question 67

“मनुष्य को अक्सर सोचने वाला पशु कहा गया है” यह पंक्ति किस पुस्तक से ली गई है -

  1. AOption (a)

    हिन्दू बनाम हिन्दू

  2. BOption (b)

    जाति का विनाश

  3. COption (c)

    रुपए की समस्या और समाधान

  4. DOption (d)

    इतिहास चक्र

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Correct answer

Answer: (d)D.

इतिहास चक्र

Why this answer is correct

“मनुष्य को अक्सर सोचने वाला पशु कहा गया है” यह पंक्ति पुस्तक से ली गई है - इतिहास चक्र

Key Points

पुस्तकलेखक
इतिहास चक्रराम मनोहर लोहिया
हिन्दू बनाम हिन्दूराम मनोहर लोहिया
जाति का विनाश (1936)डॉo भीमराव अंबेडकर
रुपए की समस्या और समाधान (1923)डॉo भीमराव अंबेडकर

Additional Informationराम मनोहर लोहिया-

  • (जन्म - 23 मार्च, 1910 - मृत्यु - 12 अक्टूबर, 1967)
  • भारत के स्वतन्त्रता संग्राम ���े सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता थे।
  • रचनाएँ-
  • अंग्रेजी हटाओ
  • इतिहास चक्र
  • देश, विदेश नीति-कुछ पहलू
  • धर्म पर एक दृष्टि
  • भारतीय शिल्प
  • भारत विभाजन के गुनहगार
  • मार्क्सवाद और समाजवाद
  • समलक्ष्य, समबोध
  • समदृष्टि
  • समाजवादी चिंतन
  • संसदीय आचरण
  • हिंदू बनाम हिंदू

डॉo भीमराव अंबेडकर -

  • (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956)
  • डॉo बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, लेखक और समाजसुधारक थे।
  • वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।[
  • पुस्तकें -
  • भारत में जातियाँ: उनका तंत्र, उत्पत्ति और विकास (1916)
  • बहिष्कृत भारत (भारत बहिष्कृत) - 1927
  • जनता (साप्ताहिक) 1930
  • संघ बनाम स्वतंत्रता (1939)
  • पाकिस्तान पर विचार (1940)
  • रानाडे, गांधी और जिन्ना (1943)
  • श्री गांधी और अछूतों की मुक्ति (1945)
  • पाकिस्तान या भारत का विभाजन (1945)
  • राज्य एवं अल्पसंख्यक (1947)
  • शूद्र कौन थे? (1948)

Question 68

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए:

सूची I कहानीसूची II प्रकाशन वर्ष
A.दुलाईवालीI.सन् 1907
B.इंदुमतीII.सन् 1913
C.कानों में कंगनाIII.सन् 1915
D.उसने कहा थाIV.सन् 1900

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - IV, C - I, D - III

  2. BOption (b)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  3. COption (c)

    A - I, B - II, C - IV, D - III

  4. DOption (d)

    A - I, B - IV, C - II, D - III

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - I, B - IV, C - II, D - III

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - I, B - IV, C - II, D - III

Key Points

सूची I कहानीसूची II प्रकाशन वर्ष
A.दुलाईवालीI.सन् 1907
B.इंदुमतीIV.सन् 1900
C.कानों में कंगनाII.सन् 1913
D.उसने कहा थाIII.सन् 1915

Additional Informationदुलाईवाली -

  • रचनाकार- बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष)
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1907 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • दुलाईवाली, वंशीधर, सीता, इक्केवाला, जानकी देई आदि।
  • विषय-
  • ​दुलाईवाली एक हास्य-व्यंग्य प्रधान कहानी है।
  • इस कहानी में एक मध्यमवर्गीय परिवार की साधारण सी घटना को लेकर कथानक बनाया गया है।

इंदुमती -

  • रचनाकार- किशोरी लाल गोस्वामी
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1900 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • इंदुमती (नायिका), चन्द्रशेखर (नायक), बूढ़ा (इंदुमती का पिता), इब्राहिम लोदी (दिल्ली का शासक) आदि।
  • विषय- 
  • कुछ विद्वानों ने इसे हिन्दी की पहली कहानी माना है।

कानों में कंगना -

  • रचनाकार- ​राधिकारमण प्रसाद सिंह
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1913 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • ​नरेंद्र या कथावाचक स्वयं, किरण, योगीश्वर, मोहन, किन्नरी तथा जूही आदि।
  • विषय- 
  • ​यह एक मार्मिक प्रेम कहानी है।
  • मनुष्य के विवेक को जागृत करने वाले स्थलों का सूक्ष्म वर्णन करती है।
  • वासना और प्रेम में भेद को स्पष्ट किया गया है।

उसने कहा था -

  • रचनाकार- ​चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1915 ई.
  • प्रमुख पात्र - 
  • लहना सिंह, हज़ारा सिंह, सूबेदार, सूबेदारिनी, वज़ीरा सिंह, कीरत सिंह, बोधा आदि।
  • विषय -
  • ​यह प्रेम के पवित्र और उद्धत स्वरूप की कथा है।
  • शुद्ध प्रेम का भावनात्मक अनुभव और इस प्रेम के लिए स्वयं की आहुति देने की कहानी है।

Question 69

'और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं रुपे की क्या कमी है?' 'परीक्षा गुरू' उपन्यास के अंतर्गत यह कथन किसका है?

  1. AOption (a)

    लाला मदनमोहन

  2. BOption (b)

    लाला ब्रजकिशोर

  3. COption (c)

    मास्टर शिंभूदयाल

  4. DOption (d)

    मुंशी चुन्नीलाल

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Correct answer

Answer: (b)B.

लाला ब्रजकिशोर

Why this answer is correct

'और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं रुपे की क्या कमी है?' 'परीक्षा गुरू' उपन्यास के अंतर्गत यह कथन का है - लाला ब्रजकिशोर

Key Pointsमुख्य पात्र:- 

  • लाला मदनमोहन :- ​
  • ​उपन्यास का मुख्य पात्र जो एक धनवान व्यापारी है, लेकिन गलत संगति में फंसा रहता है। अंत में जेल जाता है जहाँ से एक सच्चा मित्र उसे बचाकर लाता है।
  • लाला ब्रजकिशोर :- 
  • लाला मदनमोहन का सच्चा मित्र जो उसे हमेशा सही सलाह देता है। और अंत में निकाले जाने पर भी अपने मित्र को जेल से बचा लाता है। पेशे से वकील एवं समझदार इंसान।
  • मुंशी चुन्नीलालः- 
  • मदनमोहन का चापलूस मित्र जो पहले लाला ब्रजकिशोर के यहाँ 10 रुपये महीने का नौकरी करता था।
  • मास्टर शिंभूदयालः-  
  • ​लाला मदनमोहन को अंग्रेज़ी पढ़ाने के लिये रखा गया था। बाद में उसकी चापलूसी करके अपना उल्लू सीधा करता है।

Important Pointsपरीक्षा गुरु -

  • रचनाकार- लाला श्रीनिवास दास
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1882 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • लाला मदन मोहन, लाला ब्रजकिशोर, मुंशी चुन्नीलाल, मिस्टर ब्राइट​ और मास्टर शंभुदयाल आदि।
  • विषय- 
  • ​यह उपन्यास सामाजिक यथार्थ की चेतना का चित्रण करता है।
  • इसमें अपने काल के भारतीय जीवन में आने वाली विकृत्तियों और उनसे उत्पन्न कुछ समस्याओं का चित्रण है।

Additional Informationलाला श्रीनिवास दास -

  • (1851-1887)
  • हिंदी के उपन्यासकार और नाटककार थे।
  • नाटक लेखन में वे भारतेंदु हरिश्चंद्र के समकक्ष माने जाते थे।
  • रचनाएं -
  • उपन्यास - परीक्षा गुरू (25 नवम्बर 1882)
  • नाटक - प्रह्लाद चरित्र, तप्ता संवरण, रणधीर और प्रेम मोहिनी, संयोगिता स्वयंवर।
  • निबंध - भरतखण्ड की समृद्धि,सदाचरण।

Question 70

वक्रोक्ति सिद्धान्त के संदर्भ में निम्न में से कौन- सा से कथन असत्य है हैं?

A. जब उक्ति में भंगिमा या नयी अर्थ - दीप्ति उत्पन्न करने के उद्देश्य से सर्वनाम आदि से किसी बात को छिपाया जाए तो संवृत्ति वक्रता होती है।

B. क्रिया के विशिष्ट प्रयोगों से चमत्कार की सृष्टि हो, वहाँ लिंग वैचित्र्य वक्रता होती है।

C. समास, तद्धित, कृदन्त आदि के प्रयोगों से चमत्कार की सृष्टि हो, वहाँ वृत्ति वक्रता होती है।

D. जहाँ बहुवचन के स्थान पर एकवचन तथा एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग हो, वहाँ पुरुष वक्रता होती है।

E. धातु-पद के प्रयोग से वैचित्र्य की सृष्टि होने पर उपग्रह वक्रता होती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल C और D

  2. BOption (b)

    केवल B और D

  3. COption (c)

    केवल A और B

  4. DOption (d)

    केवल A और E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल B और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B और D

Key Pointsवक्रोक्ति सिद्धान्त के संदर्भ में कथन सत्य है -

  • A. जब उक्ति में भंगिमा या नयी अर्थ - दीप्ति उत्पन्न करने के उद्देश्य से सर्वनाम आदि से किसी बात को छिपाया जाए तो संवृत्ति वक्रता होती है।
  • C. समास, तद्धित, कृदन्त आदि के प्रयोगों से चमत्कार की सृष्टि हो, वहाँ वृत्ति वक्रता होती है।
  • E. धातु-पद के प्रयोग से वैचित्र्य की सृष्टि होने पर उपग्रह वक्रता होती है।

त्रुटि रहित कथन -

  • B. लिंग के विशिष्ट प्रयोगों से चमत्कार की सृष्टि हो, वहाँ लिंग वैचित्र्य वक्रता होती है।
  • D. जहाँ पुरुष विपर्यय के द्वारा चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ पुरुष वक्रता होती है।

Additional Information

  • वक्रोक्ति सिद्धांत के प्रवर्तक कुन्तक ने अपने ग्रंथ वक्रोक्ति जीवितम् में वक्रोक्ति को काव्य की आत्मा कहा है।
  • उन्होंने वक्रोक्ति के अंतर्गत सभी काव्य सिद्धांतों का समाहार करते हुए समस्त काव्यांगों- वर्ण चमत्कार,
  • शब्द सौंदर्य, विषयवस्तु की रमणीयता, अप्रस्तुत-विधान, प्रबंध कल्पना आदि को उचित स्थान दिया है।
  • आचार्य कुंतक ने वक्रोक्ति के छ: भेद स्वीकार किए हैं -
  • (1) वर्ण-विन्यास वक्रता, (2) पद-पूर्वार्द्ध वक्रता, (3) पद-परार्द्ध वक्रता, (4) वाक्य-वक्रता, (5) प्रकरण-वक्रता, (6) प्रबंध-वक्रता।

Question 71

'दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई' में कबीर का 'अंगिया' से क्या तात्पर्य है?

  1. AOption (a)

    आत्मा

  2. BOption (b)

    जीव

  3. COption (c)

    शरीर

  4. DOption (d)

    जीवन

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Correct answer

Answer: (c)C.

शरीर

Why this answer is correct

'दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई' में कबीर का 'अंगिया' से तात्पर्य है- शरीर

Key Points

  • 'दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई' का भाव है -
  • हे दुल्हिन, तूने अपनी अँगिया क्यों नहीं धुलवाई। यह बचपन की मैली अँगिया है जिस पर विषय-वासना के धब्बे पड़े हुए हैं।

Additional Informationकबीर- 

  • कबीर दास 15वीं सदी के एक महान संत, कवि और समाज सुधारक थे।
  • कबीर अंधविश्वास, व्यक्ति पूजा, पाखंड और ढोंग के विरोधी थे।
  • कबीरदास के विचारों का सबसे प्रामाणिक संग्रह "बीजक" है।

इस ग्रंथ में तीन भाग हैं:

  • रमैनी: यह भाग कबीर के आध्यात्मिक विचारों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इसमें वेदांत तत्व, संसार की अनित्यता, हृदय की शुद्धि, प्रेमसाधना की कठिनता, माया की प्रबलता, आदि विषयों पर विचार किया गया है।
  • सबद:
  • ​यह भाग कबीर के भक्ति गीत हैं। इनमें ईश्वर की महिमा, भक्ति की महिमा, आदि विषयों पर विचार किया गया है।
  • साखी:
  • ​यह भाग कबीर के उपदेशात्मक कथन हैं। इनमें धार्मिक, सामाजिक, और दार्शनिक विषयों पर विचार किया गया है।

Question 72

निम्नलिखित रचनाओं का प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही आरोही क्रम क्या है?

A. प्रेमचंद घर में

B. आवारा मसीहा

C. संस्कृति के चार अध्याय

D. अरे यायावर रहेगा याद

E. एक कहानी यह भी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, D, C, B, E

  2. BOption (b)

    A, D, C, E, B

  3. COption (c)

    D, C, B, A, E

  4. DOption (d)

    C, D, E, A, B,

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Correct answer

Answer: (a)A.

A, D, C, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, D, C, B, E

Key Points

क्रमरचनाप्रकाशन वर्ष
A.प्रेमचंद घर में1944 ई.
D.अरे यायावर रहेगा याद1953 ई.
C.संस्कृति के चार अध्याय1956 ई.
B.आवारा मसीहा1974 ई.
E.एक कहानी यह भी2007 ई.

Additional Informationप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी देवी
  • प्रकाशन वर्ष-  1944 ई.
  • विधा- जीवनी
  • पात्र-  मुंशी प्रेमचंद​ आदि।
  • विषय-
  • ​''मुंशी प्रेमचंद' की पत्नी 'शिवरानी देवी' द्वारा लिखे गए संस्करणों का संकलन है।
  • इसमें उन्होंने प्रेमचंद के साथ अपने घरेलू जीवन के छोटे-छोटे संस्करण दर्ज किए हैं।

अरे यायावर रहेगा याद​-

  • रचनाकार- सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
  • प्रकाशन वर्ष- 1953 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय-
  • ​ इसमें ‘अज्ञेय’ की ‘भारतीय’ यात्राओं का चित्रण है।
  • इसमें अज्ञेय ने ब्रह्मपुत्र के मैदानी भाग से लेकर एलोरा की गुफाओं तक की यात्राओं का वर्णन किया है।
  • ‘एक बूँद सहसा उछली’ में ‘यूरोपीय’ यात्राओं का चित्रण है।

संस्कृति के चार अध्याय-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह दिनकर
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • विधा- निबंध
  • विषय -
  • ​इस रचना में भारत वर्ष के संपूर्ण इतिहास को चार खंडों में बांटकर लिखने का अद्वितीय प्रयास है।
  • ​ इस पुस्तक की प्रस्तावना नेहरू द्वारा लिखा गया है।

आवारा मसीहा -

  • रचनाकार- विष्णु प्रभाकर
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • विधा- जीवनी
  • विषय-
  • ​बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।
  • यह जीवनी शरतचंद्र के जन्म से लेकर मृत्यु तक के जीवन का वर्णन करती है।

एक कहानी यह भी​-

  • रचनाकार- मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष-  2007 ई.
  • विधा- आत्मकथा
  • पात्र- ​
  • ​जीतमल लूणिय, सुशीला (मन्नू भंडारी की बहन), शीला अग्रवाल, डॉ अंबालाल जी, मिस्टर सेठी आदि।
  • विषय-
  • ​इसमें लेखिका ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण तथ्यों को उभारा है।

Question 73

'बुद्धिजीवी वर्ग वह है जो दूरदर्शी होता है, सलाह दे सकता है और नेतृत्व दान कर सकता है।' उपरोक्त पंक्ति किस महापुरुष की है-

  1. AOption (a)

    डॉ. भीमराव अंबेडकर

  2. BOption (b)

    आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

  3. COption (c)

    आचार्य रामचंद्र शुक्ल

  4. DOption (d)

    पंडित मदन मोहन मालवीय

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Correct answer

Answer: (a)A.

डॉ. भीमराव अंबेडकर

Why this answer is correct

'बुद्धिजीवी वर्ग वह है जो दूरदर्शी होता है, सलाह दे सकता है और नेतृत्व दान कर सकता है।' उपरोक्त पंक्ति महापुरुष की है- डॉ. भीमराव अंबेडकर

Key Pointsडॉo भीमराव अंबेडकर -

  • (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956)
  • डॉo बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, लेखक और समाजसुधारक थे।
  • वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।
  • पुस्तकें -
  • भारत में जातियाँ: उनका तंत्र, उत्पत्ति और विकास (1916)
  • संघ बनाम स्वतंत्रता (1939)
  • पाकिस्तान पर विचार (1940)
  • रानाडे, गांधी और जिन्ना (1943)
  • श्री गांधी और अछूतों की मुक्ति (1945)
  • पाकिस्तान या भारत का विभाजन (1945)
  • राज्य एवं अल्पसंख्यक (1947)
  • शूद्र कौन थे? (1948) आदि।

Additional Informationहजारीप्रसाद द्विवेदी -

  • जन्म - 1907 - 1979 ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • आलोचनात्मक -
  • सूर साहित्‍य (1936)
  • हिन्‍दी साहित्‍य की भूमिका (1940)
  • प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद (1952)
  • कबीर (1942)
  • नाथ संप्रदाय (1950)
  • हिन्‍दी साहित्‍य का आदिकाल (1952)
  • आधुनिक हिन्‍दी साहित्‍य पर विचार (1949)
  • साहित्‍य का मर्म (1949) आदि।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म- 1884 - 1941 ई.
  • हिन्���ी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • ​आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • सूर, तुलसी, जायसी पर की गई आलोचनाएँ, काव्य में रहस्यवाद,
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद, रसमीमांसा आदि शुक्ल की आलोचनात्मक रचनाएँ हैं।

पंडित मदन मोहन मालवीय -

  • (25 दिसम्बर 1861 - 12 नवंबर 1946)
  • काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही और इस युग के आदर्श पुरुष भी थे।
  • वे भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया।
  • ​अभ्युदय (साप्ताहिक पत्र) 1907 ई., लीडर और हिन्दुस्तान टाइम्स (समाचार पत्र) 1921 ई. , मर्यादा (पत्रिका)
  • रचनाएँ -
  • महामना पं0 मदनमोहन मालवीय : जीवनचरित (75 वीं वर्षगाँठ का अभिनन्दन ग्रन्थ 1936)
  • पं0 जवाहरलाल नेहरू : ऐन आटोबायोग्रैफी (रिबॉडले हेड लन्दन)
  • महामना पंडित मदनमोहन मालवीय (संस्मरण) 1957,
  • इंडिया विंस फ्रीडम : मौलाना अबुल कलाम आजाद, 1959
  • नेहरू जी अपनी ही भाषा में, 1962 आदि।

Question 74

“तुम जीवन से तटस्थ हो सकते हो, परन्तु मैं तो अब तटस्थ नहीं हो सकती।”

उपरोक्त पंक्तियाँ - आषाढ़ का एक दिन' के कौन से अंक से ली गई हैं?

  1. AOption (a)

    एक 

  2. BOption (b)

    तीन

  3. COption (c)

    चार

  4. DOption (d)

    दो

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Correct answer

Answer: (b)B.

तीन

Why this answer is correct

“तुम जीवन से तटस्थ हो सकते हो, परन्तु मैं तो अब तटस्थ नहीं हो सकती।”

उपरोक्त पंक्तियाँ - आषाढ़ का एक दिन' के अंक से ली गई हैं - तीन

Key Pointsआषाढ़ का एक दिन -

  • रचनाकार - मोहन राकेश
  • प्रकाशन वर्ष - 1958 ई.
  • विधा - नाटक
  • पात्र-
  • अंबिका, मल्लिका, कालिदास, दंतुल, मातुल, प्रियंगुमंजरी आदि।
  • विषय - यह नाटक तीन अंको में विभक्त है।
  • इस नाटक में कवि कालिदास की सता एवं सर्जनात्मकता के मध्य अंत: संघर्ष का चित्रण करता है,
  • यह केवल कालिदास का द्वंद नहीं बल्कि बल्कि आधुनिक मानव का भी अंतर्द्वद्व है।

Important Points

मोहन राकेश -

  • (1925 - 1972 ई.)
  • हिन्दी की नवनाट्य लेखन या नया नाटक परंपरा को ठोस आयाम प्रदान किया।
  • 'नई कहानी आन्दोलन' के साहित्यकार थे।
  • नाटक -
  • आषाढ़ का एक दिन (1958 ई.)
  • लहरों के राजहंस (1963 ई.)
  • आधे - अधूरे (1969 ई.)
  • पैर तले की जमीन (अधूरा)

Additional Information आषाढ़ का एक दिन नाटक के पात्र -

  • प्रमुख पात्र - मल्लिका, कालिदास, अंबिका, विलोम
  • गौण पात्र - दंतुल, मातुल, निक्षेप, रंगिणी,संगिनी, अनुस्वार, अनुनासिक, प्रियंगुमंजरी
  • अंबिका - मल्लिका की मां
  • रंगिणी - नागरी,मृदंग और वीणा वादक तथा सुंदर प्रणय गीत लिखती है।
  • संगिनी - नागरी,नृत्यांगना तथा नाटक लिखने में रुचि।

Question 75

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

'शेखर एक जीवनी' उपन्यास के खंडो का उसके शीर्षकों के साथ मिलान कीजिए:

सूची Iसूची II
A.पहला खंडI.बीज और अंकुर
B.दूसरा खंडII.पुरुष और परिस्थिति
C.तीसरा खंडIII.ऊषा और ईश्वर
D.चतुर्थ खंडIV.प्रकृति और पुरुष

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

  2. BOption (b)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  3. COption (c)

    A - II, B - I, C - IV, D - III

  4. DOption (d)

    A - I, B - II, C - IV, D - III

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Correct answer

Answer: (a)A.

A - III, B - I, C - IV, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - IV, D - II

Key Points

सूची Iसूची II
A.पहला खंडIII.ऊषा और ईश्वर
B.दूसरा खंडI.बीज और अंकुर
C.तीसरा खंडIV.प्रकृति और पुरुष
D.चतुर्थ खंडII.पुरुष और परिस्थिति

Important Pointsशेखर एक जीवनी -

  • रचनाकार - अज्ञेय
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - प्रथम भाग (उत्थान) 1941 द्वितीय भाग (संघर्ष) 1944
  • विषय - 
  • ​​इसमें अज्ञेय ने बालमन पर पड़ने वाले काम, अहम और भय के प्रभाव तथा उसकी प्रकृति पर मनोवैज्ञानिक ढंग से विचार किया है।
  • पहले खंड के चार भाग इस प्रकार हैं: उषा और ईश्वर (सुबह और भगवान),
  • बीज और अंकुर (बीज और अंकुर), प्रकृति और पुरुष (प्रकृति और मनुष्य) तथा पुरुष और परिस्थिति ।
  • दूसरे खंड के पहले तीन भागों के शीर्षक हैं - पुरुष और परिस्थिति , बंधन और जिज्ञासा, तथा शशि और शेखर।

Additional Informationसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' -

  • (7 मार्च, 1911 - 4 अप्रैल, 1987)
  • हिन्दी में अपने समय के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं।
  • उपन्यास:-
  • शेखर एक जीवनी- प्रथम भाग(उत्थान) 1941 द्वितीय भाग(संघर्ष)1944, नदी के द्वीप 1951, अपने अपने अजनबी 1961

Question 76

निम्न में से किस साधन की सहायता से आर्थी व्यंजना के अन्तर्गत प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति नहीं होती?

  1. AOption (a)

    वाक्य वैशिष्टय

  2. BOption (b)

    प्रस्ताव

  3. COption (c)

    साहचर्य

  4. DOption (d)

    चेष्टा

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Correct answer

Answer: (c)C.

साहचर्य

Why this answer is correct

साहचर्य साधन की सहायता से आर्थी व्यंजना के अन्तर्गत प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति नहीं होती।

Key Pointsव्यंजना-

  • अभिधा और लक्षणा की सीमा के बाहर पड़ने वाले अर्थ को जो शक्ति व्यक्त करती है, उसे व्यंजना कहते हैं।

व्यंजना के भेद -

  • व्यंजना के दो भेद है- शाब्दी व्यंजना और आर्थी व्यंजना।
  • शाब्दी व्यंजना के दो और भेद है - अभिधामूलक व्यंजना और लक्षणामूलक व्यंजना।

शाब्दी व्यंजना -

  • जहाँ शब्द से व्यंग्य की प्रतीति होती है वहां शाब्दी व्यंजना होता है।
  • जैसे:- ऊधो तुम अपनो जतन करो, आयों घोष बड़ो व्यापारी।

आर्थी व्यंजना -

  • जहाँ अर्थ से व्यंग्य की प्रतीति होती है, वहाँ आर्थी व्यंजना।
  • जैसे:- कागज की आजादी मिलती ले लो दो दो आने में।

Additional Informationशब्द शक्तियाँ -

  • शब्द तथा अर्थ के संबंध में विचार करनेवाले तत्व को शब्दशक्ति कहते हैं।
  • इसको व्यापार भी कहा गया हैं। शब्द की तीन शक्तियाँ हैं - अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
  • शब्द तीन प्रकार के होते हैं - वाचक, लक्षक और व्यंजक तथा इनसे क्रमशः तीन प्रकार के अर्थ प्रकट होते हैं - वाच्यार्थ, लक्ष्यार्थ तथा व्यंग्यार्थ।
  • इन तीनों अर्थों की प्रतीति तीन प्रकार की शक्तियों - अभिधा, लक्षणा और व्यंजना द्वारा होती है।

Question 77

निम्नलिखित निबंधों का उनके प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही आरोही क्रम क्या है?

A. भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है।

B. नाखून क्यों बढ़ते हैं

C. शिवशंभु के चिट्ठे

D. कविता क्या है

E. संस्कृति और सौंदर्य

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    B, C, D, A, E

  2. BOption (b)

    A, C, D, B, E

  3. COption (c)

    A, C, B, D, E

  4. DOption (d)

    B, C, D, E, A

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Correct answer

Answer: (b)B.

A, C, D, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, C, D, B, E

Key Points

क्रमनिबंधप्रकाशन वर्ष
A.भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है।1884 ई.
C.���िवशंभु के चिट्ठे1904-1905 ई.
D.कविता क्या है1909 ई.
B.नाखून क्यों बढ़ते हैं1951 ई.
E.संस्कृति और सौंदर्य1982 ई.

Important Pointsभारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है। -

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1884 ई.
  • विषय -
  • ​लेखक ने इस पाठ में हिंदू-मुसलमान दोनों की कमियों का वर्णन किया है।
  • यह निबंध, बलिया के दादरी मेले में साल 1884 में दिए गए उनके भाषण का अंश है।

शिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार- बालमुकुन्द गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष- 1904-1905 ई.
  • विधा- निबन्ध
  • विषय-
  • यह निबन्ध 'भारत मित्र' पत्रिका में प्रकाशित हुए थे।
  • इनमें तत्कालीन गवर्नर जर्नल लार्ड कर्जन पर व्यंग किया गया है।
  • मुख्य-
  • 'श्रीमान् का स्वागत' में शिवशंभु लार्ड कर्जन के बारे में लिखते हैं।
  • ‘बनाम लार्ड कर्जन' नामक चिठ्ठे का प्रकाशन वर्ष 1904 ई. में हुआ है।

कविता क्या है-

  • रचनाकार- आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1909 ई.
  • विषय-
  • ​इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं -

  • रचनाकार - हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1951 ई.
  • विषय - 
  • यह विचार-प्रधान व्यक्तिनिष्ठ निबन्ध है।
  • ​यह निबंध हमें नाखूनों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझने का अवसर प्रदान करता है।

संस्कृति और सौंदर्य - 

  • रचनाकार - नामवर सिंह
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1982 ई.
  • विषय -  
  • संस्कृति और सौंदर्य निबंध मूलत: हजारी प्रसाद द्विवेदी पर आधारित है।
  • यह निबंध द्विवेदीजी के शुद्ध पुष्प-प्रेम का प्रमाण नहीं, बल्कि संस्‍कृति-दृष्टि का अनूठा दस्‍तावेज है।

Question 78

आचार्य मम्मट द्वारा निम्न पंक्तियों में किस प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया गया है?

काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतररक्षतये।

सद्यः परनिर्वृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेश युजे ।

  1. AOption (a)

    अनिष्ट नाश

  2. BOption (b)

    सद्य आनन्द

  3. COption (c)

    लोकोपदेश

  4. DOption (d)

    व्यवहार ज्ञान

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Correct answer

Answer: (c)C.

लोकोपदेश

Why this answer is correct

काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतररक्षतये।

सद्यः परनिर्वृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेश युजे ।

आचार्य मम्मट द्वारा निम्न पंक्तियों में लोकोपदेश प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया गया है।

Key Points

  • काव्य रचना का कारण व्यावहारिकता के धरातल पर अधिक व्यापक रूप में (उपयोगिता की नज़र से) पेश करते हुए मम्मट मानते हैं
  • कि काव्य से यश, धन, व्यवहार ज्ञान, अमंगल का नाश, तुरंत आनंद की प्राप्ति और कांता (प्रेमी, प्रेयसी) की तरह उपदेश मिलता है।
  • कविता रचने पर कालिदास, भारवि, माघ की तरह उत्तम यश मिलता है। धावक कवि की तरह या बिहारी की भांति धन की प्राप्ति होती है।
  • महाभारत, पंचतंत्र हितोपदेश आदि काव्यों से लोकव्यवहार की जानकारी होती है। काव्य से अमंगल का नाश ( रोग, व्याधि या शाप) होता है।
  • जैसे मयूरभट्ट ने सूर्य शतक द्वारा और महाकवि कालिदास ने रघुवंश महाकाव्य की रचना द्वारा कुष्ठ रोग से मुक्ति पायी थी।

Additional Informationमम्मट -

  • संस्कृत काव्यशास्त्र के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से एक समझे जाते हैं।
  • वे अपने शास्त्रग्रंथ काव्यप्रकाश के कारण प्रसिद्ध हुए।
  • कश्मीरी पंडितों की परंपरागत प्रसिद्धि के अनुसार वे नैषधीय चरित के रचयिता कवि श्रीहर्ष के मामा थे।
  • 'काव्यप्रकाश' ग्रंथ के रचयिता आचार्य मम्मट है।
  • आचार्य मम्मट ने काव्य के छ: प्रयोजनों की चर्चा की है - वाक्य ज्ञान, पदार्थ ज्ञान, अन्वय, उद्देश्य, आशय, अलंकार।

Question 79

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का निबंध 'कविता क्या है?' सरस्वती पत्रिका में किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?

  1. AOption (a)

    1907

  2. BOption (b)

    1908

  3. COption (c)

    1909

  4. DOption (d)

    1910

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Correct answer

Answer: (c)C.

1909

Why this answer is correct

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का निबंध 'कविता क्या है?' सरस्वती पत्रिका में 1909 वर्ष प्रकाशित हुआ था।

Key Points

  • कविता क्या है? निबन्ध आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबन्ध संग्रह चिंतामणि(भाग-1) में संकलित है।
  • सरस्वती पत्रिका में 1909 ई. में सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ।

 Important Pointsकविता क्या है-

  • रचनाकार- आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1909 ई.
  • विषय-
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।

Additional Informationआचार्य रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म- 1884 - 1941 ई.
  • निबंध- 
  • भाव या मनोविकार
  • उत्साह
  • श्रद्धा-भक्ति
  • करुणा
  • ईर्ष्या
  • क्रोध
  • कविता क्या है?
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था
  • रसात्मक बोध के विविध रूप
  • काव्य में प्रकृतिक दृश्य
  • काव्य में रहस्यवाद
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद

Question 80

राजभाषा संबंधी संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में कौन सा/से कथन असत्य है हैं?

A. अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी है।

B. अनुच्छेद 350 में भाषागत अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित रखा गया है।

C. अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबंध न करे तब तक न्यायालयों में सभी कार्य द्विभाषी होंगे।

D. अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं तथा हिंदी को सरकारी प्रयोजनों में स्वीकार कर सकेगा।

E. अनुच्छेद 351 के अनुसार हिंदी भाषा के विकास के लिए हिंदी में अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को जोड़ा जाए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल C, D

  2. BOption (b)

    केवल C, E

  3. COption (c)

    केवल A, B

  4. DOption (d)

    केवल A, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C, D

Key Pointsराजभाषा संबंधी संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में कथन सत्य है -

  • A. अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी है।
  • B. अनुच्छेद 350 में भाषागत अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित रखा गया है।
  • E. अनुच्छेद 351 के अनुसार हिंदी भाषा के विकास के लिए हिंदी में अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को जोड़ा जाए।

अन्य त्रुटिरहित तथ्य -

  • C. भारत के संविधान के अनुच्छेद 348(1)(ए) में यह कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी।
  • D. अनुच्छेद 345 में यह व्यवस्था है कि राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं या हिंदी को सरकारी प्रयोजनों के लिए स्वीकार कर सकेगा।

Additional Information 

  • राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है- “राज-काज की भाषा।”
  • ऐसी भाषा जिसे संघ अथवा कोई राज्य अथवा सरकार विधि द्वारा अपने सरकारी कामकाज में प्रयोग के लिए स्वीकार कर ले, राजभाषा कहलाती हैं।
  • भारत में हिन्दी राजभाषा है, संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को हिन्दी को राजभाषा घोषित किया था, इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है
  • अष्टम अनुसूची में भी भाषाओं को राज्य की राजभाषा कहा गया हो।
  • भारतीय संविधान में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए हिन्दी के अतिरिक्त 21 अन्य भाषाएँ राजभाषा स्वीकार की गई हैं।
  • संविधान की अष्टम अनुसूची में कुल 22 भारतीय भाषाओं स्थान प्राप्त हुआ है।

Question 81

'हमने बहुत से अपने वीर हिंदुस्तान में भेजे हैं। परंतु मुझको तुमसे जितनी आशा है उतनी और किसी से नहीं है।'

उपरोक्त कथन 'भारत दुर्दशा' नाटक में किन - किन पात्रों का आपसी संवाद है?

  1. AOption (a)

    अंधकार - भारत दुर्देव

  2. BOption (b)

    भारत दुर्देव - डिसलायल्टी

  3. COption (c)

    भारत दुर्देव - रोग

  4. DOption (d)

    भारत दुर्देव - मंदिरा

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Correct answer

Answer: (d)D.

भारत दुर्देव - मंदिरा

Why this answer is correct

'हमने बहुत से अपने वीर हिंदुस्तान में भेजे हैं। परंतु मुझको तुमसे जितनी आशा है उतनी और किसी से नहीं है।'

उपरोक्त कथन 'भारत दुर्दशा' नाटक में पात्रों का आपसी संवाद है - भारत दुर्देव - मंदिरा

Key Points

  • भारत दुर्देव - हमने बहुत से अपने वीर हिंदुस्तान में भेजे हैं परंतु मु��को तुमसे जितनी आशा है उतनी और किसी से नहीं है।
  • जरा तुम भी हिंदुस्तान की तरफ जाओ और हिंदुओं से समझो तो।
  • मदिरा - हिंदुओ के तो मैं मुद्दत से मुँहलगी हूँ, अब आपकी आज्ञा से और भी अपना जाल फैलाऊँगी और छोटे-बड़े सबके गले का हार बन जाऊँगी।

Important Pointsभारत दुर्दशा-

  • रचनाकार- भारतेन्दु
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1880 ई.
  • पात्र-
  • भारत भाग्य,भारत दुर्दैव,अंधकार,डिसलॉयल्टी,मदिरा,रिपोर्टर,आलस्य आदि।
  • विषय-
  • 6 अंकों का नाट्य रासक है।
  • भारत की दुर्दशा को चित्रित किया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर व्यंग किया गया है।
  • मनोभावों का मानवीकरण किया गया है।

Additional Information भारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म- 1850-1885ई.
  • हिन्दी के प्रमुख नाटककार के रूप में विख्यात है।
  • मौलिक नाटक-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873ई.)
  • चंद्रावली(1876ई.)
  • नील देवी(1881ई.)
  • सती प्रताप(1883ई.) आदि।
  • अनूदित नाटक-
  • रत्नावली(1868ई.)
  • विद्यासुंदर(1868ई.)
  • पाखंड विडंबन(1872ई.)
  • धनंजय विजय(1873ई.)
  • मुद्रा राक्षस(1878ई.) आदि।

Question 82

निम्नलिखित में से किस लेखक/लेखकों का जन्मवर्ष सही सुमेलित है?

A. अज्ञेय - 1911

B. दिनकर - 1905

C. महादेवी - 1904

D. राहुल सांकृत्यायन 1902

E. मुक्तिबोध - 1917

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, E

  2. BOption (b)

    केवल B, C, D

  3. COption (c)

    केवल A, C

  4. DOption (d)

    केवल A, B

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, E

Key Points

क्रमलेखकजन्मवर्ष
A.अज्ञेय1911
B.दिनकर1908
C.महादेवी1907
D.राहुल सांकृत्यायन1893
E.मुक्तिबोध1917

Additional Informationअज्ञेय -

  • जन्म- 1911 - 1987 ई.
  • पूरा नाम - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
  • हिन्दी में अपने समय के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं।
  • कविता संग्रह -
  • हरी घास पर क्षण भर (1949 ई.)
  • बावरा अहेरी (1954 ई.)
  • इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये (1957 ई.)
  • आँगन के पार द्वार (1961 ई.)
  • कितनी नावों में कितनी बार (1967 ई.)
  • पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1974 ई.)
  • नदी की बाँक पर छाया (1981 ई.) आदि।

रामधारी सिंह द‍िनकर-

  • जन्म- 1908 - 1974 ई.
  • जिन्हें उनके उपनाम दिनकर से जाना जाता है ,
  • एक भारतीय हिंदी भाषा के कवि, निबंधकार, स्वतंत्रता सेनानी, देशभक्त और शिक्षाविद थे।
  • कविता संग्रह-
  • प्रणभंग (1929 ई.)
  • रेणुका (1935 ई.)
  • हुंकार (1938 ई.)
  • कुरूक्षेत्र (1946 ई.)
  • रश्मिरथी (1952 ई.)
  • नीम के पत्ते (1954 ई.) आदि। ​

महादेवी वर्मा -

  • जन्म - 1907 - 1987 ई.
  • हिन्दी भाषा की कवयित्री थीं।
  • वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक मानी जाती हैं।
  • कविता संग्रह -
  • नीहार (1930 ई.)
  • रश्मि (1932 ई.)
  • नीरजा (1934 ई.)
  • सांध्यगीत (1936 ई.)
  • दीपशिखा (1942 ई.)

राहुल सांकृत्यायन -

  • जन्म - 1893 -1963 ई.
  • हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक माना जाता है।
  • कृतियाँ -
  • 'सतमी के बच्चे' (कहानी, 1939 ई.)
  • 'जीने के लिए' (1940 ई.)
  • 'सिंह सेनापति' (1944 ई.)
  • 'जय यौधेय' (1944 ई.)
  • 'वोल्गा से गंगा' (कहानी संग्रह, 1944 ई.)
  • 'मधुर स्वप्न' (1949 ई.)
  • 'बहुरंगी मधुपुरी' (कहानी, 1953 ई.)
  • 'विस्मृत यात्री' (1954 ई.)
  • 'कनैला की कथा' (कहानी, 1955-56 ई.)

मुक्तिबोध-

  • (13 नवंबर 1917 - 11 सितंबर 1964)
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है – (कविता संग्रह), 1964
  • नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध (निबंध संग्रह), 1964
  • एक साहित्यिक की डायरी (निबंध संग्रह), 1964
  • काठ का सपना (कहानी संग्रह), 1967
  • सतह से उठता आदमी (कहानी संग्रह), 1971
  • भूरी-भूरी खाक धूल – (कविता संग्रह), 1980

Question 83

'अंधायुग' नाटक के संबंध में सत्य कथन है हैं -

A. 'अंधायुग' का घटना काल महाभारत के अट्ठारहवें दिन के पूर्व से लेकर प्रभास तीर्थ में कृष्ण की मृत्यु की घोषणा तक है।

B. 'अंधायुग' के पहले अंक का शीर्षक 'कौरव नगरी और दूसरे अंक का शीर्षक पशु का उदय है।

C. 'अंधायुग' के पाँचवें अंक का शीर्षक विजय: एक क्रमिक आत्महत्या' है।

D. 'गांधारी का शाप' अंक के अन्तर्गत धृतराष्ट्र एवं गांधारी द्वारा युयुत्सु व कृष्ण को दिए शाप की कथा वर्णित है।

E. कृतवर्मा युयुत्सु की आज्ञा को अश्वत्थामा की सहायता से पूर्ण करता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B

  2. BOption (b)

    B, C

  3. COption (c)

    D, C

  4. DOption (d)

    E, B

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, C

Key Points'अंधायुग' नाटक के संबंध में सत्य कथन हैं -

  • B. 'अंधायुग' के पहले अंक का शीर्षक 'कौरव नगरी और दूसरे अंक का शीर्षक पशु का उदय है।
  • C. 'अंधायुग' के पाँचवें अंक का शीर्षक विजय: 'एक क्रमिक आत्महत्या' है।

त्रुटि रहित कथन -

  • A. 'अंधायुग' की घटनाएं महाभारत के 18वें दिन की शाम से लेकर प्रभास तीर्थ में कृष्ण की मृत्यु तक की हैं।
  • D. 'गांधारी का शाप' अंक में गांधारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को दिए गए शाप की कथा वर्णित है।
  • E. कृतवर्मा ने शतधंवा की सहायता करना अस्वीकार किया था।

Important Pointsअंधा युग-

  • रचनाकार- धर्मवीर भारती
  • प्रकाशन वर्ष- 1955 ईo
  • विधा- गीति नाट्य
  • शैली- वक्ता श्रोता
  • मुख्य पात्र-
  • कृष्ण,अश्वत्थामा ,गांधारी , धृतराष्ट्र ,विदुर,
  • युधिष्ठिर ,कीर्ति वर्मा ,कृपाचार्य, संजय युयुत्सु आदि।
  • विषय-
  • ​महाभारत के 18 वें दिन की संध्या से लेकर प्रभास तीर्थ में श्री कृष्ण की मृत्यु के क्षण का वर्णन है।
  • अंक- पाँच :
  • पहला अंक- कौरव नगरी
  • दूसरा अंक- पशु का उदय
  • तृतीय अंक- अश्वत्थामा का अर्ध सत्य
  • अंतराल- पंख पहिए और पटियां
  • चतुर्थ अंक- गांधारी का शाप
  • पंचम अंक- विजय एक क्रमिक आत्महत्या
  • समापन- प्रभु की मृत्यु

Additional Information धर्मवीर भारती-

  • जन्म- 1926 - 1997 ईo
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे।
  • वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे।
  • उपन्यास-
  • गुनाहों का देवता (1949)
  • सूरज का सातवाँ घोडा (1952)
  • ग्यारह सपनों का देश (1960)
  • निबंध-
  • ठेले पर हिमालय (1958)
  • कहनी अनकहनी (1970)
  • पश्यंती (1969)
  • साहित्य विचार और स्मृति (2003)
  • कविता-
  • ठंडा लोहा (1952)
  • सात गीत वर्ष (1959)
  • कनुप्रिया (1959)
  • सपना अभी भी (1993)
  • आद्यन्त (1999)
  • कहानी संग्रह-
  • मुर्दों का गाँव (1946)
  • स्वर्ग और पृथ्वी (1949)
  • चाँद और टूटे हुए लोग (1955)
  • बंद गली का आख़िरी मकान (1969)
  • साँस की क़लम से (2000)

Question 84

'अमृतसर आ गया' कहानी में बाबू की मुस्कान 'वीभत्स' होने के पीछे क्या कारण हो सकता है?

  1. AOption (a)

    अन्य धर्म के व्यक्ति को मारने के कारण

  2. BOption (b)

    पठान द्वारा किए जाने वाले अपमान के बदले के कारण

  3. COption (c)

    घर छूटने के डर का प्रभाव

  4. DOption (d)

    विभाजन की विभीषिका का प्रभाव

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Correct answer

Answer: (d)D.

विभाजन की विभीषिका का प्रभाव

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'अमृतसर आ गया' कहानी में बाबू की मुस्कान 'वीभत्स' होने के पीछे कारण हो सकता है - विभाजन की विभीषिका का प्रभाव

  • संदर्भ पाठ की पंक्ति:
  • "अपने सामने बैठा देख कर सरदार दुबला बाबू के साथ बतियाने लगा – ‘बड़े जीवट वाले हो बाबू, दुबले-पतले हो, पर बड़े गुर्दे वाले हो। बड़ी हिम्मत दिखाई है। तुमसे डर कर ही वे पठान डिब्बे में से निकल गए।’... दुबला बाबू जवाब में मुसकराया – एक वीभत्स–सी मुस्कान, और देर तक सरदार जी के चेहरे की ओर देखता रहा।"

Key Pointsअमृतसर आ गया- 

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • प्रकाशन वर्ष- 1973 ईo
  • विधा- कहानी
  • कहानी संग्रह- पटरियाँ (कुल चौदह कहानियाँ)।
  • कहानी के पात्र-
  • कथानायक, सरदार, तीन पठान, एक दुबला बाबू, एक बुढ़िया जो माला जपती है।
  • लटकती मुछों वाला नया गरीब मुसाफिर, उसकी पत्नी और उसकी बेटी।
  • एक मुस्लिम गरीब मुसाफिर और उसकी पत्नी तथा अन्य मुसाफिर।
  • विषय-
  • शरणार्थियों के एक समूह का पाकिस्तान से भारत के सीमावर्ती शहर अमृतसर की ओर यात्रा के दौरान के भयावहता और विनाश का वर्णन हैं।
  • यह कहानी देश विभाजन के त्रासदी पर आधारित है।
  • ट्रेन में शर्णार्थियों का एक समूह अमृतसर की यात्रा कर रहा है।
  • लेखक ने ‘ट्रेन’ के दृश्य को उभारते हुए साप्रदायिक तनाव और अमानवीयता को कहानी का मुख्य विषय बनाया है।
  • इस कहानी में 1947 के भारत-पाक बंटवारे के बाद की सामाजिक स्थितियों की झलक है।

Additional Information भीष्म साहनी- 

  • जन्म-  1915 - 2003 ईo
  • कहानी संग्रह- 
  • भाग्यरेखा (1953 ई.)
  • पहला पाठ (1957 ई.)
  • पटरियाँ (1973 ई.)
  • निशाचर (1983 ई.)
  • वाङ्चू (1978 ई.)
  • पा���ी (1988 ई.)
  • भटकती राख (1966 ई.)
  • शोभा यात्रा (1981 ई.)
  • डायन (1998 ई.)
  • नाटक-
  • हानूश (1977)
  • कबिरा खड़ा बजार में (1981)
  • माधवी (1985)
  • मुआवजे (1993)
  • रंग दे बसंती चोला (1998)
  • आलमगीर (1999)
  • उपन्यास- 
  • झरोखे (1967)
  • बसंती (1979)
  • मय्यादास की माड़ी (1987)
  • कुंतो (1993)
  • नीलू नीलिमा निलोफर (2000)।

Additional Information

  • बाबू की वीभत्स मुस्कान उस मानसिक परिवर्तन को दर्शाती है, जो विभाजन की त्रासदी, साम्प्रदायिक तनाव, और हिंसा के माहौल से उत्पन्न हुआ।
  • वह एक सहमे हुए व्यक्ति से हिंसक और साम्प्रदायिक मानसिकता वाले व्यक्ति में बदल जाता है, जो विभाजन के अमानवीय प्रभाव का प्रतीक है।
  • यह मुस्कान उसकी आंतरिक कुंठा, क्रोध और साम्प्रदायिकता के जहर का परिणाम है, जो कहानी का केंद्रीय विषय है।

Question 85

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची Iसूची II
A.बैकुंठमणि शुक्लI.श्रृंगाररस मंडन
B.गोकुलनाथII.चंद छंद बरनन की महिमा
C.बिट्ठलनाथIII.चौरासी वैष्णवों की वार्त्ता
D.गंग कविIV.अगहन माहात्म्य

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - I, C - IV, D - III

  2. BOption (b)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  3. COption (c)

    A - IV, B - II, C - III, D - I

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - I, D - II

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - IV, B - III, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - III, C - I, D - II

Key Points 

सूची Iसूची II
A.बैकुंठमणि शुक्लIV.अगहन माहात्म्य
B.गोकुलनाथIII.चौरासी वैष्णवों की वार्त्ता
C.बिट्ठलनाथI.श्रृंगाररस मंडन
D.गंग कविII.चंद छंद बरनन की महिमा

Additional Informationबैकुंठ मणि शुक्ल-

  • इन्होंने 'अगहन माहात्म्य' और 'वैशाख महात्म्य' नामक पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 1623 ई. में हुआ है।

गोकुलनाथ गोस्वामी -

  • (जन्म- विक्रम संवत 1608; मृत्यु- संवत 1697)
  • वल्लभ सम्प्रदाय की आचार्य परम्परा के प्रसिद्ध प्रचारक थे।
  • इन्होंने अपनी सरस व्याख्यान-शैली से भक्तों को मुग्ध बना रखा था।
  • ये गोसाई विट्ठलनाथ जी के चतुर्थ पुत्र थे।
  • मुख्य रचनाएँ - उपदेशों के दो संकलन प्रसिद्ध हैं-
  • चौरासी वैष्णवन की वार्ता और दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता।

विट्ठलनाथ -

  • (जन्म- 1515 वाराणसी; मृत्यु- 1585 गिरिराज)
  • वल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक और 'अष्टछाप' के संस्थापक थे।
  • विट्ठलनाथ संगीत और चित्रकला में भी प्रवीण थे।
  • विट्ठलनाथ अपने पिता के चार शिष्य कुंभनदास, सूरदास, परमानंद दास और कृष्णदास तथा
  • अपने चार शिष्य चतुर्भुजदास, गोविन्द स्वामी, छीतस्वामी और नंददास को मिलाकर इन्होंने 'अष्टछाप' की स्थापना की।
  • विट्ठलनाथ जी के लिखे ग्रंथों में अणुभाष्य, यमुनाष्टक, सुबोधिनी की टीका, विद्वन्मंडल, भक्तिनिर्णय और शृंगाररसमंडन प्रसिद्ध हैं।

गंग कवि -

  • (1538 -1625 ई.) हिन्दी के कवि थे।
  • उनका वास्तविक नाम गंगाधर था। वे अकबर के दरबारी कवि थे।
  • 'चंद छंद बरनन की महिमा' नाटक खड़ी बोली का एक ग्रंथ भी इनका लिखा बताया जाता है
  • इनके मुख्य ग्रंथ हैं -'गंग पदावली, 'गंग पचीसी' तथा 'गंग रत्नावली।
  • भिखारीदासजी ने इनके विषय में कहा है- 'तुलसी गंग दुवौ भए, सुकविन में सरदार।'

Question 86

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I उपन्याससूची II प्रकाशन वर्ष
A.झूठा सचI.1935
B.मैला आँचलII.1958
C.गोदानIII.1974
D.मानस का हंसIV.1954

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  2. BOption (b)

    A - IV, B - II, C - I, D - III

  3. COption (c)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  4. DOption (d)

    A - II, B - IV, C - I, D - III

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Answer: (d)D.

A - II, B - IV, C - I, D - III

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सही उत्तर है - A - II, B - IV, C - I, D - III

Key Points

सूची I उपन्याससूची II प्रकाशन वर्ष
A.झूठा सचII.1958
B.मैला आँचलIV.1954
C.गोदानI.1935
D.मानस का हंसIII.1974

Additional Informationझूठा-सच-

  • रचनाकार- यशपाल
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • तार, जयदेव, कनक, गिल, डाक्टर नाथ, नैयर, सूद जी, सोमराज आदि।
  • विषय-
  • स्वतंत्रता पूर्व और प्राप्ति के बाद के यथार्थ को चित्रित किया गया है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।

मैला आँचल-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954ई.
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत,कमला,बलदेव,कालीचरन,बावनदास आदि।
  • विषय-
  • इसका कथाकाल 1946 से 1948ई. के बीच का है।
  • पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा है।
  • ग्रामीण अंचल के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक यथार्थ को चित्रित किया गया है।

गोदान-

  • रचनाकार- प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष- 1936 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र- 
  • ​होरी, राय साहब, मेहता, मालती, गोविंदी आदि।
  • विषय- 
  • ​भारतीय किसान जीवन की महागाथा का वर्णन है।

मानस का हंस -

  • रचनाकार- अमृत लाल नागर
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र- 
  • ​मैना कहारिन, बतासो, रतना, श्यामो की बुआ, बाबा-तुलसीदास आदि।
  • विषय- 
  • इस​में तुलसीदास जी को एक समान्य मनुष्य के रूप में दिखाया गया है।

Question 87

'तमस' उपन्यास में आई घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में लगाइए:

A. शिष्टमंडल का रिचर्ड से मिलना और कर्फ्यू लगाने की अपील करना। बंगले से बाहर आते ही एक दूसरे से बोलना बन्द कर देना ।

B. रिचर्ड द्वारा बुद्ध की मूर्ति की चमक का वर्णन लीजा के सामने करना और लीजा द्वारा आदमियों के पत्थरों और खंडहरों में रस लेने के विषय पर आश्चर्य व्यक्त करना ।

C. थिंगलियों में लिपटे कंकड़, गुथे आटे का पुतला और उसमें खोंसी हुई लकड़ियों की खपच्ची पर नत्थू का पैर पड़ना और उसका खीझ उठना ।

D. लीजा द्वारा रिचर्ड से झगड़ा रुकवाने के लिए कहना पर रिचर्ड का यह उत्तर देना कि यह लोग मेरे खिलाफ लड़ें, उससे बेहतर है कि यह आपस में लड़ें।

E. करीम खान द्वारा हाकिम की दूरदेशी का जिक्र करते हुए मूसा और खिज़र की कहानी सुनाना ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    C, B, A, E, D

  2. BOption (b)

    C, A, B, D, E

  3. COption (c)

    C, A, B, E, D

  4. DOption (d)

    B, A, E, D. C

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Correct answer

Answer: (a)A.

C, B, A, E, D

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सही उत्तर है - C, B, A, E, D

Key Points'तमस' उपन्यास में आई घटनाओं को पहले से बाद के क्रम -

  • C. थिंगलियों में लिपटे कंकड़, गुथे आटे का पुतला और उसमें खोंसी हुई लकड़ियों की खपच्ची पर नत्थू का पैर पड़ना और उसका खीझ उठना ।
  • B. रिचर्ड द्वारा बुद्ध की मूर्ति की चमक का वर्णन लीजा के सामने करना और लीजा द्वारा आदमियों के पत्थरों और खंडहरों में रस लेने के विषय पर आश्चर्य व्यक्त करना ।
  • A. शिष्टमंडल का रिचर्ड से मिलना और कर्फ्यू लगाने की अपील करना। बंगले से बाहर आते ही एक दूसरे से बोलना बन्द कर देना ।
  • E. करीम खान द्वारा हाकिम की दूरदेशी का जिक्र करते हुए मूसा और खिज़र की कहानी सुनाना ।
  • D. लीजा द्वारा रिचर्ड से झगड़ा रुकवाने के लिए कहना पर रिचर्ड का यह उत्तर देना कि यह लोग मेरे खिलाफ लड़ें, उससे बेहतर है कि यह आपस में लड़ें।

Important Pointsतमस -

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1973 ई.
  • पात्र-
  • नत्थू, बख्शीजी, अज़ीज़, मास्टर रामदास, मेहता, अजीतसिंह, देसराज, शकर, कश्मीरीलाल, जरनैल आदि।
  • विषय-
  • ​'तमस' कुल पांच दिनों की कहानी को ले���र बुना गया उपन्यास है।
  • साम्प्रदायिकता की आग में झुलसते हुए पंजाब का चित्रण है।

Additional Informationभीष्म साहनी- 

  • जन्म-  1915 - 2003 ईo
  • एक भारतीय लेखक, हिंदी नाटककार और अभिनेता थे।
  • उपन्यास- 
  • झरोखे (1967)
  • कादियान (1971)
  • बसंती (1979)
  • मय्यादास की माड़ी (1987)
  • कुंतो (1993)
  • नीलू नीलिमा निलोफर (2000)।
  • कहानी संग्रह- 
  • भाग्यरेखा (1953 ई.)
  • पहला पाठ (1957 ई.)
  • पटरियाँ (1973 ई.)
  • निशाचर (1983 ई.)
  • वाङ्चू (1978 ई.)
  • पाली (1988 ई.)
  • भटकती राख (1966 ई.)
  • शोभा यात्रा (1981 ई.)
  • डायन (1998 ई.)
  • नाटक-
  • हानूश (1977)
  • कबिरा खड़ा बजार में (1981)
  • माधवी (1985)
  • मुआवजे (1993)
  • रंग दे बसंती चोला (1998)
  • आलमगीर (1999)

Question 88

निम्नलिखित निबंधकारों का जन्म वर्ष के अनुसार सही आरोही क्रम क्या है?

A. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

B. सरदार पूर्ण सिंह

C. रामचंद्र शुक्ल

D. नामवर सिंह

E. विद्यानिवास मिश्र

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, C, D, E

  2. BOption (b)

    B, C, A, E, D

  3. COption (c)

    A, B, C, E, D

  4. DOption (d)

    C, A, B, D, E

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Correct answer

Answer: (c)C.

A, B, C, E, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, B, C, E, D

Key Points

क्रमनिबंधकारजन्म वर्ष
A.भारतेन्दु हरिश्चन्द्र9 सितंबर 1850
B.सरदार पूर्ण सिंह17 फ़रवरी, 1881
C.रामचंद्र शुक्ल4 अक्टूबर 1884
E.विद्यानिवास मिश्र14 जनवरी 1926
D.नामवर सिंह28 जुलाई 1926

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चन्द्र-

  • जन्म- 1850 - 1885 ईo
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • निबंध -​
  • कालचक्र (जर्नल)
  • लेवी प्राण लेवी
  • भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?
  • कश्मीर कुसुम
  • जातीय संगीत
  • संगीत सार
  • हिंदी भाषा
  • स्वर्ग में विचार सभा

सरदार पूर्ण सिंह- 

  • जन्म- 1881 - 1931 ईo
  • द्विवेदी युगीन निबंधकार हैं।
  • निबंध - 
  • सच्ची वीरता (1909 ईo)
  • कन्यादान (1909 ईo)
  • पवित्रता (1909 ईo)
  • आचरण की सभ्यता (1912 ईo)
  • मजदूरी और प्रेम (1912 ईo)
  • अमेरिका का मस्ताना योगी वाल्ट हिवट मैंन (1913 ईo)

आचार्य रामचंद्र शुक्ल- 

  • जन्म- 1884 - 1941 ईo
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार थे।
  • उनके द्वारा लिखी गई सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पुस्तक हिन्दी साहित्य का इतिहास है।
  • हिन्दी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात भी उन्हीं के द्वारा हुआ।
  • निबंध- 
  • भाव या मनोविकार
  • श्रद्धा-भक्ति
  • करुणा
  • ईर्ष्या
  • क्रोध
  • कविता क्या है?
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था
  • साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद
  • रसात्मक बोध के विविध रूप
  • काव्य में प्रकृतिक दृश्य
  • काव्य में रहस्यवाद
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद

विद्यानिवास मिश्र -

  • जन्म- 1926 - 2005 ईo
  • संस्कृत के विद्वान, जाने-माने भाषाविद्, हिन्दी साहित्यकार और सफल सम्पादक (नवभारत टाइम्स) थे।
  • निबंध- 
  • छितवन की छाँह(1953 ई.)
  • हल्दी दूब (1955 ई.)
  • कदम की फूली डाल (1956 ई.)
  • तुम चंदन हम पानी (1957 ई.)
  • आंगन का पंछी और बंनजारा मन (1963 ई.)
  • मैंनें सिल पहुंचाई (1966 ई.)
  • बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972 ई.)

नामवर सिंह - 

  • जन्म- 1926 - 2019 ईo
  • एक भारतीय साहित्यिक आलोचक, भाषाविद्, शिक्षाविद और सिद्धांतकार थे।
  • निबंध -
  • बकलम खुद (1951 ई.)
  • संस्कृति और सौंदर्य (1982 ई.)
  • वाद विवाद संवाद (1989 ई.)

Question 89

विद्यानिवास मिश्र के निबंध - 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' का प्रकाशन वर्ष क्या है?

  1. AOption (a)

    1972

  2. BOption (b)

    1973

  3. COption (c)

    1974

  4. DOption (d)

    1975

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Correct answer

Answer: (c)C.

1974

Why this answer is correct

विद्यानिवास मिश्र के निबंध - 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' का प्रकाशन वर्ष है - 1974

Key Pointsमेरे राम का मुकुट भीग रहा है-

  • रचनाकार- विद्यानिवास मिश्र
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ईo
  • निबंध संग्रह- 
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974 ईo)
  • इस निबंध संग्रह में 17 निबंध हैं।
  • 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' इस संग्रह का अंतिम निबंध है।
  • प्रमुख पात्र-
  • लेखक
  • लेखक का पुत्र चिरंजीव
  • मेहमान लड़की कृष्णा
  • उद्देश्य-
  • आधुनिक चिंताओं के साथ भारतीय लोक संस्कृति की व्याख्या।
  • राम का मुकुट- प्रतिष्ठा का प्रतीक।
  • सीता का सिंदूर- सौभाग्य का प्रतीक।

Additional Information विद्यानिवास मिश्र- 

  • जन्म- 1926 - 2005 ईo
  • ये शुक्लोत्तर युग के ललित निबंधकार थे।
  • निबंध- 
  • छितवन की छाँह (1953)
  • कदम की फूली डाल (1956)
  • आँगन का पंछी और बनजारा मन (1963)
  • मैंने सिल पहुँचाई (1966)
  • बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974)
  • परंपरा कोई बन्धन नहीं (1976)
  • तमाल के झरोखे से (1981)
  • शेफाली झर रही है (1989)

Question 90

पंचनि के देखत प्रपंच करि दूर सबै, पंचन को स्वत्व पंचतत्व में मिलैही में,

हरि-पन-हारी जस धारिके धरों हों सांत, सांतनु को सुभट सुपूत कहिवैहों में ।।

उपर्युक्त पंक्ति में ‘वीर रस' के किस भेद का उल्लेख है?

  1. AOption (a)

    दानवीर

  2. BOption (b)

    धर्मवीर

  3. COption (c)

    युद्धवीर

  4. DOption (d)

    दयावीर

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Correct answer

Answer: (c)C.

युद्धवीर

Why this answer is correct

पंचनि के देखत प्रपंच करि दूर सबै, पंचन को स्वत्व पंचतत्व में मिलैही में,

हरि-पन-हारी जस धारिके धरों हों सांत, सांतनु को सुभट सुपूत कहिवैहों में ।।

उपर्युक्त पंक्ति में ‘वीर रस' के भेद का उल्लेख है - युद्धवीर

Key Points

  • जब किसी रचना या वाक्य से वीरता जैसे स्थायी भाव की अनुभूति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है।
  • वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' होता है।
  • वीर रस प्रधान रचना में 'ओज गुण' प्रधान होता है।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल वीर रस को चारणों की पारिवारिक सम्पत्ति मानते थे।
  • वीर रस के चार भेद होते हैं - युद्धवीर, धर्मवीर, दयावीर, दानवीर।

Important Pointsरस एवं उनके स्थाई भाव -

रसस्थाई भाव
श्रृंगाररति / प्रेम
हास्‍यहास
करुणशोक
वीरउत्‍साह
रौद्रक्रोध
भयानकभय
वीभत्‍सजुगुप्‍सा  / घ्रणा
अदभुतविस्‍मय  / या आश्‍चर्य
शांतशम / निर्वेद  / वैराग्‍य  / वीतराग
वत्‍सलवात्‍सल रति
भक्ति रसरति / अनुराग

आचरण का विकास जीवन का परमोद्देश्य है। आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रि��ों का, जो संसार-संभूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान है, उन सभी का किसी मनुष्य अथवा जाति के आचरण के विकास के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए। आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं, उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए. वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं। आचरण को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक ही पथ नहीं बताया जा सकता। आचरणशील महात्मा स्वयं तो किसी बनी-बनाई सड़क से नहीं आया, उसने भी अपनी सड़क स्वयं बनायी थी। हर किसी को अपने देश- काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी। प्राकृतिक सभ्यता के आने पर ही मानसिक सभ्यता आती है और मानसिक सभ्यता के आने पर आचरण सभ्य बनता है।

Question 91

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार एक आचरणशील महात्मा का कार्य होना चाहिए -

  1. AOption (a)

    निश्चित किए गए पथ की पुनः व्याख्या करना

  2. BOption (b)

    देश-काल के अनुसार राम-प्राप्ति के मार्ग का निर्माण करना

  3. COption (c)

    अपने लिए स्वयं सड़क का निर्माण करना

  4. DOption (d)

    शिष्यों को राह दिखाने के लिए व्यवस्था निर्माण करना

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Correct answer

Answer: (c)C.

अपने लिए स्वयं सड़क का निर्माण करना

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार एक आचरणशील महात्मा का कार्य होना चाहिए - अपने लिए स्वयं सड़क का निर्माण करना

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • आचरण को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक ही पथ नहीं बताया जा सकता।
  • आचरणशील महात्मा स्वयं तो किसी बनी-बनाई सड़क से नहीं आया, उसने भी अपनी सड़क स्वयं बनायी थी।
  • हर किसी को अपने देश- काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए
  • अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • निश्चित किए गए पथ की पुनः व्याख्या करना - 
  • ​अनुच्छेद में, आचरण को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक ही पथ नहीं बताया जा सकता।
  • देश-काल के अनुसार राम-प्राप्ति के मार्ग का निर्माण करना - 
  • ​अनुच्छेद में, हर किसी को अपने देश-काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी।
  • शिष्यों को राह दिखाने के लिए व्यवस्था निर्माण करना - 
  • अनुच्छेद में, चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए, वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं।

आचरण का विकास जीवन का परमोद्देश्य है। आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों का, जो संसार-संभूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान है, उन सभी का किसी मनुष्य अथवा जाति के आचरण के विकास के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए। आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं, उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए. वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं। आचरण को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक ही पथ नहीं बताया जा सकता। आचरणशील महात्मा स्वयं तो किसी बनी-बनाई सड़क से नहीं आया, उसने भी अपनी सड़क स्वयं बनायी थी। हर किसी को अपने देश- काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी। प्राकृतिक सभ्यता के आने पर ही मानसिक सभ्यता आती है और मानसिक सभ्यता के आने पर आचरण सभ्य बनता है।

Question 92

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार सबसे अधिक बल किस तत्व पर दिया गया है?

  1. AOption (a)

    कर्म को ही धर्म मानने पर

  2. BOption (b)

    प्राकृतिक सभ्यता के विकास पर

  3. COption (c)

    आध्यात्मिक उन्नति पर

  4. DOption (d)

    संघटनकर्ता धर्म की भूमिका पर

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Correct answer

Answer: (a)A.

कर्म को ही धर्म मानने पर

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार सबसे अधिक बल कर्म को ही धर्म मानने पर दिया गया है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • ​उन सभी का किसी मनुष्य अथवा जाति के आचरण के विकास के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए।
  • आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं, उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए।
  • चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए  वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • प्राकृतिक सभ्यता के विकास पर - 
  • ​अनुच्छेद में, प्राकृतिक सभ्यता के आने पर ही मानसिक सभ्यता आती है और मानसिक सभ्यता के आने पर आचरण सभ्य बनता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति पर -
  • ​​अनुच्छेद में, आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों का, जो संसार-संभूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान है।
  • संघटनकर्ता धर्म की भूमिका पर -
  • अनुच्छेद में, ​आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं, उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए।

Question 93

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार आचरण को बेहतर बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

  1. AOption (a)

    अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार अपने पथ का निर्माण करना चाहिए।

  2. BOption (b)

    एक निश्चित पथ का गमन करना चाहिए।

  3. COption (c)

    किसी महात्मा द्वारा बनाए गए पथ पर चलना चाहिए।

  4. DOption (d)

    अपने पथ का निर्माण स्वयं करना चाहिए।

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Correct answer

Answer: (d)D.

अपने पथ का निर्माण स्वयं करना चाहिए।

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार आचरण को बेहतर बनाने के लिए अपने पथ का निर्माण स्वयं करना चाहिए।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • ��चरण को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक ही पथ नहीं बताया जा सकता।
  • आचरणशील महात्मा स्वयं तो किसी बनी-बनाई सड़क से नहीं आया, उसने भी अपनी सड़क स्वयं बनायी थी।
  • हर किसी को अपने देश- काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए
  • अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार अपने पथ का निर्माण करना चाहिए। 
  • अनुच्छेद में, आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों का, जो संसार-संभूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान है।
  • एक निश्चित पथ का गमन करना चाहिए।
  • ​अनुच्छेद में 'एक निश्चित पथ में गमन' की चर्चा कही भी नहीं की गयी है।
  • किसी महात्मा द्वारा बनाए गए पथ पर चलना चाहिए।
  • अनुच्छेद में, चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए. वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं।

Question 94

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार धर्म की प्राप्ति और आचरण के विकास के लिए इनमें से क्या करना अनिवार्य है?

  1. AOption (a)

    नए-नए रास्तों की खोज करना

  2. BOption (b)

    प्राकृतिक सभ्यता की सराहना

  3. COption (c)

    कर्म के प्रति समर्पण

  4. DOption (d)

    आध्यात्मिक विकास

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Correct answer

Answer: (c)C.

कर्म के प्रति समर्पण

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार धर्म की प्राप्ति और आचरण के विकास के लिए इनमें से कर्म के प्रति समर्पण अनिवार्य है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • उन सभी का किसी मनुष्य अथवा जाति के आचरण के विकास के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए।
  • आचरण के विकास के लिए जितने भी कर्म निर्धारित किए गए हैं, उन सभी को संघटनकर्ता धर्म का अंग मानना चाहिए।
  • चाहे कोई कितना भी बड़ा महात्मा हो जाए. वह निश्चयपूर्वक यह नहीं बता सकता कि यही रास्ता सही है, दूसरा नहीं। ​

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • नए-नए रास्तों की खोज करना -
  • ​​अनुच्छेद में 'नए-नए रास्तों की खोज' की चर्चा कही भी नहीं की गयी है।
  • प्राकृतिक सभ्यता की सराहना -
  • अनुच्छेद में, ​प्राकृतिक सभ्यता के आने पर ही मानसिक सभ्यता आती है और मानसिक सभ्यता के आने पर आचरण सभ्य बनता है।
  • आध्यात्मिक विकास - 
  • अनुच्छेद में, आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों का, जो संसार-संभूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान है।

Question 95

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार इनमें से कौन सा उदाहरण प्राकृतिक सभ्यता और मानसिक विकास वास्तविक उदाहरण है?

  1. AOption (a)

    खुले समुद्र में बड़े जहाज पर लोगों के साथ बैठकर समुद्र की आध्यात्मिक शोभा का विचार

  2. BOption (b)

    भूख लगने पर चाँद और सूर्य को देखकर रोटी का विचार

  3. COption (c)

    आँधी, पानी, गरमी सरदी झेलकर कर्म रूपी धर्म की रक्षा

  4. DOption (d)

    किसी स्थान पर बैठकर धूप, आँधी और बर्फ की दिव्य शोभा का विचार

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Correct answer

Answer: (c)C.

आँधी, पानी, गरमी सरदी झेलकर कर्म रूपी धर्म की रक्षा

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार इनमें से प्राकृतिक सभ्यता और मानसिक विकास वास्तविक उदाहरण है - आँधी, पानी, गरमी सरदी झेलकर कर्म रूपी धर्म की रक्षा

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -​
  • हर किसी को अपने देश- काल के अनुसार राम-प्राप्ति की इच्छा रखते हुए
  • अपनी नेया खुद ही बनानी होगी और अपने आप ही चलानी भी होगी।
  • प्राकृतिक सभ्यता के आने पर ही मानसिक सभ्यता आती है
  • और मानसिक सभ्यता के आने पर आचरण सभ्य बनता है।

Additional Informationअनुच्छेद में नीचे दिए गये पंक्तियों की चर्चा कही भी नहीं की गयी -

  • खुले समुद्र में बड़े जहाज पर लोगों के साथ बैठकर समुद्र की आध्यात्मिक शोभा का विचार
  • भूख लगने पर चाँद और सूर्य को देखकर रोटी का विचार
  • किसी स्थान पर बैठकर धूप, आँधी और बर्फ की दिव्य शोभा का विचार

दक्षिण की ओर से जो भक्तिधारा आई, उसने उत्तर भारत को पूरी तरह प्रभावित किया। रामानन्द दक्षिण से भक्ति का बीज लेकर आए जो उत्तर भारत में आकर वृक्ष बन गया। नाथों और संतों की काव्यधारा से विकसित होने वाले ज्ञान और मुस्लिम एकेश्वरवाद से प्राप्त होने वाले प्रेम से निर्गुण ईश्वर को पाने का स्वप्न कबीर, जायसी ने देखा वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की। सभी धाराओं के केन्द्र में लोकभाषा ने सदा स्थान बनाए रखा। अवधी, ब्रज, सधुक्कड़ी के साथ दक्षिण भारत की ओर देखें तो अनेक सूफी संतों ने दक्खिनी में विपुल साहित्य लिखा शाह मीराजी, शाह बुरहानुद्दीन द्वारा दक्खिनी में लिखित काव्य को आगे चलकर खड़ी बोली का ही एक रूप माना गया। हिंदी को देश भर में प्रचलित करने का कार्य वैष्णव धर्म ने किया। रामानन्द एवं वल्लभाचार्य ने हिंदी के माध्यम से ही भक्ति आन्दोलन को सशक्त बनाया। साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से भी हिंदी समृद्ध भाषा है। समान उद्गम स्रोत वाली भाषाओं, मराठी, गुजराती, बंगाली, उड़िया से समानता के कारण भी हिंदी को प्रोत्साहन मिला। मुगलकाल में व्यापार केन्द्र उत्तर भारत में रहे। हिंदीतर प्रदेशों के व्यापारी भी लेनदेन के लिए हिंदी का प्रयोग करते थे। राजनैतिक कारणों से भी हिंदी को इस काल में पर्याप्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।

Question 96

उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी से समान उद्गम के संदर्भ में किन भाषाओं का उल्लेख किया गया है? 

  1. AOption (a)

    मराठी, गुजराती, उड़िया एवं दक्खिनी

  2. BOption (b)

    दक्खिनी, अवधी, गुजराती एवं मराठी

  3. COption (c)

    गुजराती, बंगाली एवं उड़िया

  4. DOption (d)

    गुजराती, उड़िया एवं अवधी

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Correct answer

Answer: (c)C.

गुजराती, बंगाली एवं उड़िया

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी से समान उद्गम के संदर्भ में गुजराती, बंगाली एवं उड़िया भाषाओं का उल्लेख किया गया है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से भी हिंदी समृद्ध भाषा है।
  • समान उद्गम स्रोत वाली भाषाओं, मराठी, गुजराती, बंगाली,
  • उड़िया से समानता के कारण भी हिंदी को प्रोत्साहन मिला।
  • मुगलकाल में व्यापार केन्द्र उत्तर भारत में रहे।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • मराठी, गुजराती, उड़िया एवं दक्खिनी - 
  • ​अनुच्छेद में, 'मराठी, गुजराती, उड़िया' को उद्गम स्रोत माना गया, लेकिन दक्खिनी को उद्गम स्रोत नहीं माना गया है।
  • दक्खिनी, अवधी, गुजराती एवं मराठी  - 
  • ​अनुच्छेद में, 'दक्खिनी, अवधी' को उद्गम स्रोत नहीं माना गया, लेकिन 'मराठी एवं गुजराती' को उद्गम स्रोत माना गया है।
  • गुजराती, उड़िया एवं अवधी - 
  • अनुच्छेद में, 'गुजराती, उड़िया' को उद्गम स्रोत माना गया, लेकिन अवधी को उद्गम स्रोत नहीं माना गया है।

Question 97

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार मुस्लिम एकेश्वरवाद का प्रभाव किस धारा पर दिखाई देता है?

  1. AOption (a)

    संतकाव्य धारा

  2. BOption (b)

    सूफी काव्य धारा

  3. COption (c)

    राम काव्य धारा

  4. DOption (d)

    कृष्ण काव्य धारा

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Correct answer

Answer: (b)B.

सूफी काव्य धारा

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार मुस्लिम एकेश्वरवाद का प्रभाव सूफी काव्य धारा पर दिखाई देता है।

Key Points 

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • नाथों और संतों की काव्यधारा से विकसित होने वाले ज्ञान
  • और मुस्लिम एकेश्वरवाद से प्राप्त होने वाले प्रेम से निर्गुण ईश्वर को पाने का स्वप्न कबीर,
  • जायसी ने देखा वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की।
  • सभी धाराओं के केन्द्र में लोकभाषा ने सदा स्थान बनाए रखा।

Important Points

  • निर्गुण भक्ति काव्‍य धारा के प्रमुख कवि है:- कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, कुंभनदास, नंददास आदि। ​
  • निर्गुण भक्ति की शाखाओं को दो भागों में विभाजित किया गया है :-
  1. सन्त काव्यधारा/ज्ञानमार्गी धारा
  2. सूफी काव्यधारा/प्रेममार्गी धारा

Additional Information अन्य विकल्प -

  • राम काव्य धारा - अनुच्छेद में 'राम काव्य धारा' की चर्चा कही भी नहीं की गयी है। ​
  • कृष्ण काव्य धारा - अनुच्छेद में 'कृष्ण काव्य धारा' की चर्चा कही भी नहीं की गयी है। ​ ​

Question 98

उपर्युक्त अनुच्छेद में भक्तिकालीन हिंदी के संदर्भ में कौन सा कथन नहीं कहा गया है?

  1. AOption (a)

    नाथों और संतों की विचारधारा ने ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी।

  2. BOption (b)

    तुलसीदास ओर सूरदास ने क्रमशः राम एवं कृष्ण की उपासना को केन्द्र में रखा।

  3. COption (c)

    दक्खिनी हिंदी खड़ी बोली के ही एक रूप या शैली के संदर्भ में मान्य हुई।

  4. DOption (d)

    मुगलकाल में हिंदी व्यापार की भाषा के रूप में विकसित हुई।

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Correct answer

Answer: (a)A.

नाथों और संतों की विचारधारा ने ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी।

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद में भक्तिकालीन हिंदी के संदर्भ में कथन नहीं कहा गया है - नाथों और संतों की विचारधारा ने ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार - 
  • वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की।
  • शाह मीराजी, शाह बुरहानुद्दीन द्वारा दक्खिनी में लिखित काव्य को आगे चलकर खड़ी बोली का ही एक रूप माना गया।
  • मुगलकाल में व्यापार केन्द्र उत्तर भारत में रहे। हिंदीतर प्रदेशों के व्यापारी भी लेनदेन के लिए हिंदी का प्रयोग करते थे।

Additional Informationत्रुटि रहित कथन -

  • नाथों और संतों की काव्यधारा से विकसित होने वाले ज्ञान और मुस्लिम
  • एकेश्वरवाद** से प्राप्त होने वाले **प्रेम से निर्गुण ईश्वर को पाने का स्वप्न कबीर,
  • जायसी ने देखा वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की।

Question 99

उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी के विकास के किस रूप की चर्चा नहीं की गई है?

  1. AOption (a)

    आर्थिक विकास

  2. BOption (b)

    राजनैतिक विकास

  3. COption (c)

    साहित्यिक विकास

  4. DOption (d)

    आध्यात्मिक विकास

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Correct answer

Answer: (d)D.

आध्यात्मिक विकास

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी के विकास के आध्यात्मिक विकास की चर्चा नहीं की गई है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • रामानन्द एवं वल्लभाचार्य ने हिंदी के माध्यम से ही भक्ति आन्दोलन को सशक्त बनाया। साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से भी हिंदी समृद्ध भाषा है।
  • मुगलकाल में व्यापार केन्द्र उत्तर भारत में रहे। हिंदीतर प्रदेशों के व्यापारी भी लेनदेन के लिए हिंदी का प्रयोग करते थे।
  • राजनैतिक कारणों से भी हिंदी को इस काल में पर्याप्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • 'आर्थिक' का अर्थ - अर्थ संबंधी, रुपये-पैसे का।
  • 'राजनैतिक' का अर्थ - सरकारी नीति-निर्माण में शामिल या उससे संबंधित।
  • 'साहित्यिक' का अर्थ - विशेष रूप से साहित्य के रूप में वर्गीकृत।
  • 'आध्यात्मिक' का अर्थ - परमात्मा और आत्मा से संबंध रखनेवाला।

Question 100

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार दक्षिण भारत से भक्ति की धारा उत्तर भारत में लाने का श्रेय इसमें से किसे दिया जाता है?

  1. AOption (a)

    शाह मीराजी

  2. BOption (b)

    आचार्य रामानन्द

  3. COption (c)

    शाह बुरहानुद्दीन

  4. DOption (d)

    तुलसीदास

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Correct answer

Answer: (b)B.

आचार्य रामानन्द

Why this answer is correct

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार दक्षिण भारत से भक्ति की धारा उत्तर भारत में लाने का श्रेय आचार्य रामानन्द दिया जाता है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार -
  • हिंदी को देश भर में प्रचलित करने का कार्य वैष्णव धर्म ने किया।
  • रामानन्द एवं वल्लभाचार्य ने हिंदी के माध्यम से ही भक्ति आन्दोलन को सशक्त बनाया।
  • साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से भी हिंदी समृद्ध भाषा है।
  • समान उद्गम स्रोत वाली भाषाओं, मराठी, गुजराती, बंगाली, उड़िया से समानता के कारण भी हिंदी को प्रोत्साहन मिला।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • शाह मीराजी - अनुच्छेद में, शाह मीराजी, शाह बुरहानुद्दीन द्वारा दक्खिनी में लिखित काव्य को आगे चलकर खड़ी बोली का ही एक रूप माना गया।
  • शाह बुरहानुद्दीन - अनुच्छेद में, शाह मीराजी, शाह बुरहानुद्दीन द्वारा दक्खिनी में लिखित काव्य को आगे चलकर खड़ी बोली का ही एक रूप माना गया।
  • तुलसीदास - अनुच्छेद में, प्रेम से निर्गुण ईश्वर को पाने का स्वप्न कबीर, जायसी ने देखा वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की।

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