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UGC NET Paper 2: Hindi 27th August 2024 Shift 1 (Previous Year Paper)

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Question 1

‘कलम का सिपाही’ जीवनी लिखने में जीवनीकार को निम्नलिखित में से किस स्रोत से मदद नही मिली?

  1. AOption (a)

    प्रेमचंद की डायरी से

  2. BOption (b)

    प्रेमचंद के पत्रों से

  3. COption (c)

    पुस्तक - पत्रिकाओं में प्रकाशित संस्मरणों से

  4. DOption (d)

    मुंशी जी की सर्विस बुक से

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Correct answer

Answer: (a)A.

प्रेमचंद की डायरी से

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‘कलम का सिपाही’ जीवनी लिखने में जीवनीकार को स्रोत से मदद नही मिली - प्रेमचंद की डायरी से

Key Pointsक़लम का सिपाही -

  • रचनाकार - अमृत राय
  • विधा - जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष - 1962 ई.
  • विषय - इसमें प्रेमचंद के चरित्र में अच्छाइयों और बुराइयों को भी उभारा गया है।
  • जिसके लिये उन्हें सन् 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Additional Informationअमृत ​​राय -

  • (3 सितंबर 1921 - 14 अगस्त 1996)
  • हिंदुस्तानी भाषा की हिंदी और उर्दू दोनों शैलियों में एक भारतीय लेखक, कवि और जीवनीकार थे।
  • वे आधुनिक उर्दू साहित्य और हिंदी साहित्य के अग्रदूत मुंशी प्रेमचंद के पुत्र हैं ।

प्रमुख रचनाएं-

  • काव्य कृतियाँ-
  • साहित्य में संयुक्त मोर्चा
  • सुबह का रंग
  • लाल धरती
  • नई समीक्षा
  • नागफनी का देश
  • अग्निशिखा
  • कस्बे का एक दिन
  • उपन्यास-
  • बीज
  • कहानी संग्रह-
  • तिरंगा कफन

Question 2

कला के किस क्षण से फैण्टेसी साहित्यिक कलात्मक अभिव्यक्ति का रूप धारण करने लगती है?

  1. AOption (a)

    कला के उद्रम क्षण से

  2. BOption (b)

    कला के पहले क्षण से

  3. COption (c)

    कला के दूसरे क्षण से

  4. DOption (d)

    कला के तीसरे क्षण से

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Correct answer

Answer: (d)D.

कला के तीसरे क्षण से

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कला के तीसरे क्षण से फैण्टेसी साहित्यिक कलात्मक अभिव्यक्ति का रूप धारण करने लगती है।

Key Points

  • कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में फैण्टेसी, गजानन माधव मुक्तिबोध के अनुसार, कला के तीसरे क्षण (अभिव्यक्ति या शब्दबद्ध होने) में अपना मूर्त रूप धारण करती है।
  • पहले क्षण में जीवन का अनुभव होता है, दूसरे क्षण में वह अनुभव अपने मूल से अलग होकर फैण्टेसी का रूप ले लेता है, और तीसरे क्षण में इसी फैण्टेसी को शब्दों में ढालकर व्यक्त किया जाता है।

Additional Informationमुक्तिबोध-

  • (जन्म: 13 नवंबर, 1917 - मृत्यु: 11 सितंबर, 1964)
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे।
  • उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है – (कविता संग्रह), 1964, भारतीय ज्ञानपीठ
  • नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध (निबंध संग्रह), 1964,
  • एक साहित्यिक की डायरी (निबंध संग्रह), 1964, भारतीय ज्ञानपीठ
  • काठ का सपना (कहानी संग्रह), 1967, भारतीय ज्ञानपीठ
  • विपात्र (उपन्यास), 1970, भारतीय ज्ञानपीठ
  • नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, 1971,
  • सतह से उठता आदमी (कहानी संग्रह), 1971, भारतीय ज्ञानपीठ
  • कामायनी: एक पुनर्विचार, 1973, साहित्य भारती
  • भूरी-भूरी खाक धूल – (कविता संग्रह), 1980

Question 3

‘आगरा बाजार' नाटक में पात्रों के पहले से बाद के संवादों का सही अनुक्रम है :

A. तरबूजवाला

B. ककड़ीवाला

C. पानवाला

D. लड्डूवाला

E. बरफ़वाला

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    D, A, E, B, C

  2. BOption (b)

    D, E, A, C, B

  3. COption (c)

    D, B, A, C, E

  4. DOption (d)

    D, B, E, A, C

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Correct answer

Answer: (a)A.

D, A, E, B, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - D, A, E, B, C

Key Points

  • ‘आगरा बाजार' नाटक में पात्रों के पहले से बाद के संवादों का सही अनुक्रम है :
  • ​फ़कीर, लड्डूवाला, तरबूजवाला, बर्फवाला, ककड़ीवाला, पानवाला, मदारीवाला, बर्तनवाला,
  • अजनबी, शायर, हमजोली, कनमैलिया (कान साफ़ करने वाला), तजकिरानवीस (वृतांत लिखनेवाला), ग्राहक, लड़का,
  • करीमन, चमेली, करीमन (हिजड़ा), चमेली (हिजड़ा), नवासी (नजीर की नवासी)।
  • इस नवासी को लेकर हबीब तनवीर ने कहा है कि यही नवासी विलायती बेगम थी।
  • जिससे नजीर के विषय में बहुत सारी बातों का पता चलता है। तमाशबीन इत्यादि अनेक पात्र है।

Important Pointsआगरा बाजार -

  • रचनाकार - हबीब तनवीर
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1954 ई.
  • विषय - इस नाटक में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं का चित्रण किया गया है ।

Additional Informationहबीब तनवीर - 

  • (1 सितम्बर 1923 – 08 जून 2009)
  • भारत के मशहूर पटकथा लेखक, नाट्य निर्देशक, कवि और अभिनेता थे।
  • अन्य नाटक: 
  • मिट्टी की गाड़ी (1958),
  • चरणदास चोर (1975)
  • आगरा बाजार (1954),
  • शतरंज के मोहरे (1954),
  • लाला शोहरत राय (1954),
  • मिट्टी की गाड़ी (1958) आदि ।

Question 4

गैंग्रीन (रोज) कहानी के संबंध में उचित कथन है।

A. मालती को अपने परिवार और गृहस्थी से सुख का अनुभव होता था।

B. मालती के पति सरकारी डॉक्टर थे।

C. सरकारी अस्पताल और डॉक्टर के प्रति उसके मन में अच्छी भावना थी।

D. मालती ने पिता के द्वारा लाई किताब फाड़ कर फेंक दी थी।

E. मालती के शिशु को चोटें लगती ही रहती है, रोज ही गिर पड़ता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और D

  2. BOption (b)

    केवल B, C और D

  3. COption (c)

    केवल B, D और E

  4. DOption (d)

     केवल A, D और E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल B, D और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, D और E

Key Pointsगैंग्रीन (रोज) कहानी के अंश -

  • मालती के पति का नाम है- महेश्वर।
  • वह एक पहाड़ी गाँव में सरकारी डिस्पेंसरी के डॉक्टर हैं, उसकी हैसियत से इन क्वार्टरों में रहते हैं।
  • पिता ने फिर कहा, तो उद्धत स्वर में बोली**, “किताब मैंने फाड़कर फेंक दी है।** मैं नहीं पढ़ूँगी।”
  • मालती ने रोते हुए शिशु को मुझसे लेने के लिए, हाथ बढ़ाते हुए कहा**, “इसके चोटें लगती ही रहती हैं, रोज़ ही गिर पड़ता है।**

Additional Informationमहत्वपूर्ण जानकारी -

  • गैंग्रीन (रोज) कहानी के लेखक 'अज्ञेय' है।
  • कहानी में नारी जीवन की विवशता का चित्रण किया गया है।
  • नारी जीवन में विवाह के उपरांत आने वाले दायित्व से उत्पन्न नीरसता, यांत्रिकता, घुटन का सजीव चित्रण है।
  • नोट: - पहले संस्करण (1937 ई.) में 'रोज़' नाम से फिर पाँचवें संस्करण (1990 ई.) में 'ग्रैंगीन' नाम से प्रकाशित।

Question 5

‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ में आई पंक्तियों का सही अनुक्रम है:

A. मानहुँ कालराति अँधियारी

B. घोर जंतु सम पुर नरनारी

C. लागति अवध भयावह भारी

D. डरपहिं एकहि एक निहारी

E. घर मसान परिजन जनु भूता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, C, D, E

  2. BOption (b)

    A, C, D, E, B

  3. COption (c)

    C, A, B, D, E

  4. DOption (d)

    C, E, A, D, B

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Correct answer

Answer: (c)C.

C, A, B, D, E

Why this answer is correct

सही अनुक्रम है: - C, A, B, D, E

Key Points‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ में आई पंक्तियों का सही अनुक्रम है:

  • C. लागति अवध भयावह भारी,
  • A. मानहुँ कालराति अँधियारी।
  • B. घोर जंतु सम पुर नरनारी,
  • D. डरपहिं एकहि एक निहारी।
  • E. घर मसान परिजन जनु भूता,

Important Pointsमेरे राम का मुकुट भीग रहा है -

  • रचनाकार - विद्यानिवास मिश्र
  • रचनाकाल - 1974 ई.
  • विधा - निबंध
  • विषय - यह एक ललित निबंध ग्रंथ है।

Additional Informationविद्यानिवास मिश्र -

  • जन्म - 28 जनवरी 926 ई.
  • विद्यानिवास मिश्र को (999 ई.) में भारत सरकार ने साहित्य शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
  • विद्यानिवास मिश्र 'भ्रमरानंद' उपनाम से श्री नारायण चतुर्देदी को पत्र लिखते थे।
  • विद्यानिवास मिश्र का प्रथम निबंध संग्रह 'छितवन की छाँह' है।

विद्यानिवास मिश्र के निबंध -

  • छितवन की छाह (1953 ई.)
  • हल्दी दूब (1955 ई.)
  • कदंब की फूली डाल (1956 ई.)
  • तुम चंदन हम पानी (1957 ई.)
  • आंगन का पक्षी और बनजारा मन (1963 ई.)
  • मैंने सिल पहुंचाई (1966 ई.)
  • कौन फुलवा तू बिनन हारी (1980 ई.)
  • कमाल के झरोखे रोखे से (1981 ई.) आदि।

Question 6

भरतमुनि ने काव्य - गुणों की संख्या कितनी मानी है?

  1. AOption (a)

    8

  2. BOption (b)

    9

  3. COption (c)

    10

  4. DOption (d)

    11

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Correct answer

Answer: (c)C.

10

Why this answer is correct

भरतमुनि ने काव्य - गुणों की संख्या मानी है - 10

Key Points

  • आचार्य भरतमुनि ने काव्य गुणों की संख्या दस मानी है:
  • माधुर्य, ओज, प्रसाद, श्लेष, समता, सुकुमारता, अर्थव्याप्ति, उदारता, क्रांति, समाधि।
  • काव्य गुण: काव्य के सौंदर्य एवं अभिव्यंजना शक्ति को बढ़ाने वाले तत्वों को काव्य गुण कहा जाता है।

Important Points 

  • आचार्य दण्डी- काव्य गुणों की संख्या दस (10) माने हैं।
  • आचार्य वामन- काव्य गुणों की संख्या बीस (20) माने हैं।
  • भोज ने मूलतः काव्य गुणों की संख्या चौबीस (24) माने हैं।
  • भेद और उपभेद सहित उन्होंने बहत्तर (72) काव्य गुण माने हैं।
  • कुंतक ने काव्य गुण दो माने हैं – ‘औचित्य’ और ‘सौभाग्य’

Additional Information

  • भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र नामक ग्रंथ लिखा। इनका समय विवादास्पद है।
  • इन्हें 400 ई॰पू॰ 100 ई॰ सन् के बीच किसी समय का माना जाता है। भरत बड़े प्रतिभाशाली थे।
  • इतना स्पष्ट है कि भरतमुनि नाट्यशास्त्र के गहन जानकार और विद्वान थे ।
  • इनके द्वारा रचित ग्रंथ 'नाट्यशास्त्र' भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ है।
  • इसमें सर्वप्रथम रस सिद्धांत की चर्चा की तथा इसने प्रसिद्ध सूत्र -'विभावानुभाव संचारीभाव संयोगद्रस निष्पति:" की स्थापना की गयी है।
  • इसमें नाट्यशास्त्र, संगीतशास्त्र, छंदशास्त्र, अलंकार, रस आदि सभी का सांगोपांग प्रतिपादन किया गया है।

Question 7

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (परिचय)सूची I (पात्र)
A.रायसाहब का कारकुनI.झिंगुरी सिंह
B.सबसे बड़े महाजनII.श्याम बिहारी तंखा
C.बीमा कंपनी की दलालीIII.पंडित नोखेराम
D.बैंक मैनेजर और शक्कर मिल के मैनेजिंग डायरेक्टरIV.मिस्टर खत्ना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - IV, C - II, D - III

  2. BOption (b)

    A - I, B - II, C - IV, D - III

  3. COption (c)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  4. DOption (d)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I (परिचय)सूची I (पात्र)
A.रायसाहब का कारकुनIII.पंडित नोखेराम
B.सबसे बड़े महाजनI.झिंगुरी सिंह
C.बीमा कंपनी की दलालीII.श्याम बिहारी तंखा
D.बैंक मैनेजर और शक्कर मिल के मैनेजिंग डायरेक्टरIV.मिस्टर खत्ना

Additional Informationगोदान उपन्यास महत्वपूर्ण तथ्य:

  • ‘गोदान’ उपन्यास का प्रकाशन वर्ष 1936 ई. है।
  • ‘गोदान’ की रचना में 4 वर्षों का समय लगा था।
  • ‘गोदान’ प्रेमचंद का अंतिम उपन्यास है।
  • डॉ. गोपाल राय के अनुसार गोदान की पात्रों की संख्या 84 है। जिसमे 56 पुरुष पात्र और 28 स्त्री पात्र हैं।
  • होरी के पास 5 बीघा जमीन थी।
  • सेमरी से बेलारी गाँव की दूरी 5 मिल थी।
  • राय साहब सेमरी के रहनेवाले थे। राय साहब का पूरा नाम- अमरपाल सिंह था।
  • होरी ‘बेलारी’ का रहनेवाला था।
  • ‘सेमरी’ और ‘बेलारी’ दोनों अवध प्रांत का गाँव था।
  • गोदान उपन्यास में झुनिया के पति की बंबई में दूध की दुकान थी।
  • “साईत भिनसार हो रहा है।” इस पंक्ति में ‘भिनसार’ का अर्थ सबेरा है।
  • हीरा की पत्नी का नाम ‘पुन्नी’ था।
  • चौधरी होरी को बाँस लेने के बदले में साढ़े सात रुपये दिए थे।
  • होरी ने मँगरू साह से बैल खरीदने के लिए 60 रुपये लिये थे।
  • पंडित दातादीन 70 वर्ष के थे।
  • झुनिया के पिता का नाम भोला था।
  • ‘गपडू’ एक कश्मीरी था।
  • मिस्टर प्रो. मेहता दर्शनशास्त्र के अध्यापक थे।
  • पंडित ओंकारनाथ बिजली पत्र के संपादक थे।
  • गोदान उपन्यास में श्याम बिहारी तंखा बीमा कंपनी में दलाली का काम करते थे।
  • मिस्टर खन्ना की पत्नी का नाम- कामिनी था।
  • झिंगुरीसिंह और पटेश्वरी गाँव के साहूकार है।
  • मातादीन और दातादीन ब्रह्मण बाप के बेटे है।
  • खन्ना मिल का मालिक है।

Question 8

“योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद वक्रोक्ति: काव्य - जीवितम् का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।” - यह किस आलोचक का कथन है?

  1. AOption (a)

    नन्ददुलारे वाजपेयी

  2. BOption (b)

    शिवदान सिंह चौहान

  3. COption (c)

    रामचंद्र शुक्ल

  4. DOption (d)

    रामविलास शर्मा

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Correct answer

Answer: (c)C.

रामचंद्र शुक्ल

Why this answer is correct

“योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद वक्रोक्ति: काव्य - जीवितम् का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।” - यह रामचंद्र शुक्ल आलोचक का कथन है?

Key Points

  • अभिव्यंजनावाद के प्रवर्तक बेनेदेत्तो क्रोचे थे,
  • वे एक आत्मवादी दार्शनिक थे और उनका मकसद साहित्य में आत्मा की आंतरिक सत्ता स्थापित करना था।
  • क्रोचे के मुताबिक, "अंतःप्रज्ञा के क्षणों में आत्मा की सहजानुभूति ही अभिव्यंजना है।

Important Points रामचंद्र शुक्ल -

  • (4 अक्टूबर 1884 - 2 फरवरी 1941 ई.)
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • सूर, तुलसी, जायसी पर की गई आलोचनाएँ,
  • काव्य में रहस्यवाद,
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद,
  • रसमीमांसा आदि शुक्ल की आलोचनात्मक रचनाएँ हैं।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ -
  • ​उनके निबन्ध चिंतामणि नामक ग्रंथ के दो भागों में संग्रहीत हैं।

Additional Informationनन्ददुलारे वाजपेयी -

  • (4 सितम्बर 1906 - 21 अगस्त, 1967 ई.)
  • हिन्दी के साहित्यकार, पत्रकार, सम्पादक, आलोचक और अंत में प्रशासक भी रहे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ- 
  • ‘हिंदी साहित्य बीसवीं शताब्दी'(1942 ई.),
  • ‘आधुनिक साहित्य'(1950 ई.),
  • ‘सूरदास’ (1953 ई.),
  • ‘नया साहित्य :नए प्रश्न' (1955 ई.),
  • ‘कवि निराला'(1965 ई.)
  • रस सिद्धांत नए संदर्भ (1997 ई.),
  • नयी कविता (1997 ई.) प्रमुख हैं।

शिवदान सिंह चौहान -

  • (1918 ई.-2000 ई.)
  • हिन्दी साहित्य के प्रथम मार्क्सवादी आलोचक के रूप में ख्यात हैं।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • प्रगतिवाद (1946 ई.),
  • साहित्य की परख (1946 ई.),
  • हिंदी साहित्य के अस्सी वर्ष (1954 ई.),
  • साहित्यानुशीलन (1955 ई.),
  • आलोचला के मान (1958 ई.),
  • साहित्य की समस्याएँ (1958 ई.),
  • परिप्रेक्ष्य को सही करते हुए (1999 ई.) ।

रामविलास शर्मा -

  • (10 अक्टूबर 1912 ई.- 30 मई 2000  ई.)
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • 'प्रेमचन्द और उनका युग' (1953 ई.)
  • 'निराला' (1946 ई.)
  • 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र' (1954 ई.)
  • 'प्रगति और परम्परा' (1954 ई.)
  • 'भाषा साहित्य और संस्कृति' (1954 ई.)
  • 'भाषा और समाज' (1961 ई.)
  • 'निराला की साहित्य साधना' (1969 ई.)

Question 9

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (कविता की पंक्तियाँ)सूची II (कवि)
A.अब तक क्या किया जीवन क्या जियाI.अज्ञेय
B.विस्तृत नभ का कोई कोनाII.निराला
C.आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तरIII.महादेवी वर्मा
D.श्रेय नहीं कुछ मेरा, मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में।IV.मुक्तिबोध
  1. AOption (a)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  2. BOption (b)

    A - I, B - II, C - III, D - IV

  3. COption (c)

    A - I, B - II, C - IV, D - III

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - IV, B - III, C - II, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - III, C - II, D - I

Key Points

सूची I (कविता की पंक्तियाँ)सूची II (कवि)
A.अब तक क्या किया जीवन क्या जियाIV.मुक्तिबोध
B.विस्तृत नभ का कोई कोनाIII.महादेवी वर्मा
C.आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तरII.निराला
D.श्रेय नहीं कुछ मेरा, मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में।I.अज्ञेय

Additional Informationपंक्ति - 1

  • 'अब तक क्या किया, जीवन क्या जिया'
  • पंक्तियां, गजानन माधव मुक्तिबोध की कविता 'अंधेरे में' से ली गई हैं,
  • यह कविता मुक्तिबोध की बहुचर्चित और लंबी कविता है।
  • इस कविता के ज़रिए मुक्तिबोध ने निराशा से भरे आम आदमी के जीवन का वर्णन किया है,
  • कविता में मुक्तिबोध ने आत्मतत्व की खोज की है ताकि उससे पूरी मानवता को जोड़ा जा सके।

पंक्ति - 2

  • 'विस्तृत नभ का कोई कोना मेरा न कभी अपना होना'
  • पंक्तियां हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा की कविता 'मैं नीर भरी दुख की बदली' से ली गई हैं।
  • इन पंक्तियों के ज़रिए कवयित्री ने अपने मन की व्यथा को व्यक्त किया है।

पंक्ति - 3

  • 'आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर, तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर'
  • ये पंक्तियां सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'राम की शक्ति पूजा' से ली गई हैं।
  • इस कविता का सार निराला ने यह बताया कि एक दिन राम रावण ��ुद्ध अनवरत जारी था।

पंक्ति - 4

  • 'श्रेय नहीं कुछ मेरा, मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में' यह पंक्ति अज्ञेय की कविता 'असाध्य वीणा' से ली गई है।
  • असाध्य वीणा कविता चीनी(जापानी) लोक कथा पर आधारित है, जो ’ओकाकुरा’ की पुस्तक ’दी बुक ऑफ़ टी’ में संग्रहित है।
  • यह कविता अज्ञेय के काव्य संग्रह ’आँगन के पार द्वार’ (1961) में संकलित है।

Question 10

‘कोसी का घटवार’ के आधार पर गुसाईं के कथनों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए ?

A. कभी चार पेसे जुड़ जाएँ, तो गंगनाथ का जागर लगाकर भूल-चूक की माफी मांग लेना।

B. बच्चा है, भूख लग आई होगी, डाँटने से क्या फायदा ?

C. सुबह से अब तक दस पंसेरी भी नहीं हुआ। सूरज कहाँ का कहाँ चला गया है।

D. पिछले साल पलटन से लौट आया था, वक्त काटने के लिए यह लगवा लिया।

E. लोग ठीक कहते हैं, औरत के हाथ की बनी रोटियों में स्वाद ही दूसरा होता है।"

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, C, D, B, E

  2. BOption (b)

    C, D, B, E, A

  3. COption (c)

    D, C, B, A, E

  4. DOption (d)

    A, C, B, D, A

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Correct answer

Answer: (b)B.

C, D, B, E, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - C, D, B, E, A

Key Points‘कोसी का घटवार’ के आधार पर गुसाईं के कथनों को पहले से बाद के क्रम -

  • C. सुबह से अब तक दस पंसेरी भी नहीं हुआ। सूरज कहाँ का कहाँ चला गया है।
  • D. पिछले साल पलटन से लौट आया था, वक्त काटने के लिए यह लगवा लिया।
  • B. बच्चा है, भूख लग आई होगी, डाँटने से क्या फायदा ?
  • E. लोग ठीक कहते हैं, औरत के हाथ की बनी रोटियों में स्वाद ही दूसरा होता है।
  • A. कभी चार पेसे जुड़ जाएँ, तो गंगनाथ का जागर लगाकर भूल-चूक की माफी मांग लेना।

Additional Informationविशेष जानकारी -

  • 'कोसी का घटवार' कहानी के लेखक शेखर जोशी हैं, इसका प्रकाशन सन् 1958 में हुआ था।
  • 'कोसी का घटवार' इस कहानी का पात्र एक भूतपूर्व सैनिक नायक गुसाईं सिंह है।
  • कोसी की घटवार कहानी निस्वार्थ प्रेम को भावना को दर्शाती है।
  • यह कहानी भाग्य की विडंबना और परिस्थितियों के दुष्चक्र में फंसे दो प्रेमियों की करुण कहानी है।

Question 11

‘मुर्दहिया' किस गाँव की बहूद्देशीय कर्मस्थली थी ?

  1. AOption (a)

    कनैला

  2. BOption (b)

    टड़िया

  3. COption (c)

    धरमपुर

  4. DOption (d)

    दौलताबाद

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Correct answer

Answer: (c)C.

धरमपुर

Why this answer is correct

‘मुर्दहिया' धरमपुर गाँव की बहूद्देशीय कर्मस्थली थी। 

Key Pointsआत्मकथा का अंश -

  • “मुर्दहिया हमारे गाँव धरमपुर (आजमगढ़) की बहुद्देशीय कर्मस्थली थी।
  • चरवाही से लेकर हरवाही तक के सारे रास्ते वहीं से गुजरते थे।
  • इतना ही नहीं, स्कूल हो या दुकान, बाजार हो या मंदिर,
  • यहाँ तक कि मजदूरी के लिए कलकता वाली रेलगाड़ी पकड़ना हो,
  • तो भी मुर्दहिया से ही गुजरना पड़ता था।

Additional Information

  • मुर्दहिया दलित साहित्यकार डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा है,
  • जो हिन्दी साहित्य में मूलतः 'दलित आत्मकथा'. के रूप में प्रसिद्ध है।
  • यह आत्मकथा दो खंडों में लिखी गयी, ‘मुर्दहिया’ (1910 ई.) तथा ‘मणिकर्णिका’ (2014 ई.) में प्रकाशित हुआ।
  • यह आत्मकथा दलित जीवन के विविध पहलुओं से साक्षात्कार करवाती है।
  • इसमें दलितों के संवेदनशील-संघर्षशील जीवन को केंद्र में बनाकर सामजिक यथार्थ को उजागर किया गया है।

Question 12

जहाँ उपमेय स्वयं ही अपना उपमान हो वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?

  1. AOption (a)

    व्यतिरेक

  2. BOption (b)

    प्रतीप

  3. COption (c)

    अनन्वय

  4. DOption (d)

    रूपक

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Correct answer

Answer: (c)C.

अनन्वय

Why this answer is correct

जहाँ उपमेय स्वयं ही अपना उपमान हो वहाँ अनन्वय अलंकार होता है?

Key Points

  • जहाँ उपमेय की तुलना करने के लिए कोई उपमान न हो और उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है, तब वहाँ 'अनन्वय अलंकार' होता है।​
  • उदाहरण- 
  • ​मुख मुख ही के समान सुंदर है।
  • **(**उपर्युक्त पंक्तियों में ‘मुख’ उपमेय है और ‘मुख’ ही को उपमान बना दिया। अर्थात ‘मुख’ को ‘मुख’ से ही उपमा दी गयी है।)

Additional Information

व्यतिरेक - - जहाँ उपमान की अपेक्षा अधिक गुण होने के कारण उपमेय का उत्कर्ष हो, वहाँ 'व्यतिरेक अलंकार' होता है। उदाहरण- - जिनके यश प्रताप के आगे। - ससि मलीन रवि सीतल लागे।। - (यहाँ उपमेय (यश,प्रताप) के समक्ष उपमान (चन्द्रमा व सूर्य) को भी मलीन व शीतल (तेजरहित) बताया गया है, अतः यहाँ व्यतिरेक अलंकार है।) प्रतीप - - प्रतीप का तात्पर्य होता है उल्टा या विपरीत। यहाँ उपमा का उलटा रूप दिखाया जाता है। - जहाँ पर प्रसिद्ध उपमान को उपमेय और उपमेय को उपमान सिद्ध करके - चमत्कारपूर्वक उपमेय या उपमान की उत्कृष्टता दिखायी जाती है, वहाँ पर प्रतीप अलंकार होता है। उदाहरण- - "सिय मुख समता पाव किमी, चन्द्र बापुरो रंक।’’ - (स्पष्टीकरण : उपमेय – सीता का मुख, उपमान – चन्द्रमा - सीता के मुख (उपमेय) की तुलना बेचारा चन्द्रमा (उपमान) नहीं कर सकता। - यहाँ सीता के मुख (उपमेय) को श्रेष्ठ बताया गया है।) रूपक- - जब एक वस्तु पर दूसरी वस्तु का आरोप किया जाये अर्थात् जब एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दिया जाये तो रूपक अलंकार कहलाता है। उदाहरण- - पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। - (यहाँ पर राम रतन को ही धन बता दिया गया है।)

Question 13

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (उपन्यासकार)सूची II

(उपन्यास)
A.ठाकुर प्रसाद सिंहI.भ्रम भंग
B.देवेश ठाकुरII.कुब्जा सुंदरी
C.रामदरश मिश्रIII.मृगान्तक
D.गंगा प्रसाद विमलIV.अपने लोग
  1. AOption (a)

    A - II, B - I, C - III, D - IV

  2. BOption (b)

    A - II, B - I, C - IV, D - III

  3. COption (c)

     A - I, B - III, C - IV, D - II

  4. DOption (d)

     A - I, B - IV, C - II, D - III

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - II, B - I, C - IV, D - III

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - I, C - IV, D - III

Key Points

सूची I (उपन्यासकार)सूची II

(उपन्यास)
A.ठाकुर प्रसाद सिंहII.कुब्जा सुंदरी
B.देवेश ठाकुरI.भ्रम भंग
C.रामदरश मिश्रIV.अपने लोग
D.गंगा प्रसाद विमलIII.मृगान्तक

Additional Informationठाकुर प्रसाद सिंह-

  • ​(जन्म, 01 दिसम्बर 1924. निधन, अक्तूबर 1994)
  • इनका नाम भारत में नवगीत विधा के कवियों में प्रमुखता से लिया जाता है।
  • अपनी कई कृतियों के लेखन के साथ ही इन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • महामानव (1946)
  • वंशी और मादल (1977)
  • कुब्जा सुन्दरी (1963)
  • आदिम (1978)
  • हिन्दी निबंध और निबंधकार (1952)
  • पुराने घर नये लोग (1960)
  • बाबू राव विष्णु प्राणकर (1984)
  • स्वतंत्र आन्दोलन और बनारस (1990) आदि।

देवेश ठाकुर - 

  • हिंदी के बहुचर्चित उपन्यासकार डॉ. देवेश ठाकुर का जन्म 23 जुलाई, 1933 को ननिहाल पैठानी (अल्मोड़ा, उत्तर प्रदेश) में हुआ।
  • उपन्यास -
  • प्रिय शबनम
  • काँचघर
  • अपना-अपना आकाश
  • शून्य से शिखर तक
  • शिखर पुरुष
  • जंगल के जुगनू
  • कातर बेला
  • देवता के गुनाह
  • स्वप्न दंश आदि।

रामदरश मिश्र -

  • (जन्म: 15 अगस्त 1924, ग्राम डुमरी, जिला गोरखपुर)
  • हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। ये जितने समर्थ कवि हैं, उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी।
  • उपन्यास -
  • पानी के प्राचीर
  • जल टूटता हुआ
  • सूखता हुआ तालाब
  • रात का सफर
  • आकाश की छत
  • आदिम राग
  • बिना दरवाजे का मकान
  • दूसरा घर, थकी हुई सुबह आदि। ​

गंगा प्रसाद विमल -

  • (3 जून, 1939 - 23 दिसंबर, 2019)
  • एक भारतीय लेखक थे। वे कवि, कहानीकार, उपन्यासकार और अनुवादक थे ।
  • हिन्दी साहित्य में अकहानी आंदोलन के जनक के रूप में जाने जाते हैं।
  • उपन्यास-
  • अपने से अलग (1969)
  • कहीं कुछ और (1971)
  • मरीचिका (1978)
  • मृगान्तक (1978)
  • मानुषखोर (2013)।

Question 14

“मैं मानता हूँ कि आप लोग कुचले हुए और उपेक्षित हैं, लेकिन आपको अपनी इस ताकत का एहसास होना चाहिए कि अगर आप चाहें तो प्रशासन की इस मशीन का चलना असंभव बना दे सकते हैं। यह आप ही लोग तो हैं जो रेलों और तारघरों को चलाते हैं।” यह कथन किस राष्ट्रीय नेता का है?

  1. AOption (a)

    बालगंगाधर तिलक

  2. BOption (b)

    गोपालकृष्ण गोखले

  3. COption (c)

    अरविन्द घोष

  4. DOption (d)

    बिपिन चंद पाल

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Correct answer

Answer: (a)A.

बालगंगाधर तिलक

Why this answer is correct

“मैं मानता हूँ कि आप लोग कुचले हुए और उपेक्षित हैं, लेकिन आपको अपनी इस ताकत का एहसास होना चाहिए कि अगर आप चाहें तो प्रशासन की इस मशीन का चलना असंभव बना दे सकते हैं। यह आप ही लोग तो हैं जो रेलों और तारघरों को चलाते हैं।” यह कथन राष्ट्रीय नेता का है - बालगंगाधर तिलक

Key Points

  • (जन्म- 23 जुलाई, 1856, - मृत्यु- 1 अगस्त, 1920)
  • एक विद्वान, गणितज्ञ, दार्शनिक और उत्साही राष्ट्रवादी थे
  • जिन्होंने ब्रिटिश शासन के प्रति अपनी स्वयं की चुनौती को राष्ट्रीय आंदोलन में बदलकर भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में मदद की ।
  • तिलक स्वराज ('स्व-शासन') के पहले और सबसे मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे और भारतीय चेतना में एक मजबूत कट्टरपंथी थे।
  • उन्हें मराठी में उनके उद्धरण के लिए जाना जाता है: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा!"
  • उन्हें 'भारतीय अशांति का जनक' भी कहा जाता था।

Additional Informationगोपालकृष्ण गोखले -

  • (9 मई 1866 – 19 फरवरी 1915)
  • भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे।
  • वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे प्रसिद्ध नरमपंथी थे।
  • चरित्र निर्माण की आवश्यकता से पूर्णतः सहमत होकर उन्होंने 1905 में सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की स्थापना की
  • ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।
  • महात्मा गांधी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।

अरविन्द घोष -

  • (जन्म - 15 अगस्त 1872 - 5 दिसंबर 1950)
  • एक भारतीय दार्शनिक, योगी, महर्षि, कवि और भारतीय राष्ट्रवादी थे।
  • वे पत्रकार भी थे, जिन्होंने बंदे मातरम जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया।
  • उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ हैं -
  • द लाइफ़ डिवाइन, जो इंटीग्रल योग के दार्शनिक पहलू से संबंधित है;
  • सिंथेसिस ऑफ़ योगा, जो इंटीग्रल योग के सिद्धांतों और विधियों से संबंधित है;
  • और सावित्री: ए लीजेंड एंड ए सिंबल , एक महाकाव्य कविता।

बिपिन चंद पाल -

  • (7 नवंबर 1858 - 20 मई 1932)
  • एकभारतीय राष्ट्रवादी, लेखक, वक्ता, समाज सुधारक औरस्वतंत्रता सेनानी।
  • वे "लाल बाल पाल" तिकड़ी के एक तिहाई थे।
  • वे स्वदेशी आंदोलनके मुख्य वास्तुकारों में से एक थे,
  • ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा बंगाल के विभाजन का भी विरोध किया।

Question 15

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 31 जुलाई 1947 ई. में गठित देवनागरी लिपि सुधार समिति के अध्यक्ष कौन थे ?

  1. AOption (a)

    उदयनारायण तिवारी

  2. BOption (b)

    चंद्रशेखर शास्त्री

  3. COption (c)

    नरेन्द्र देव

  4. DOption (d)

    नारायण चतुर्वेदी

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Correct answer

Answer: (c)C.

नरेन्द्र देव

Why this answer is correct

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 31 जुलाई 1947 ई. में गठित देवनागरी लिपि सुधार समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र देव थे। 

Key Pointsदेवनागरी लिपि सुधार समिति -

  • अध्यक्षता - नरेंद्र देव
  • इस समिति की कुल 9 बैठनें हुई।
  • 25 मई 1949 ई. को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
  • इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर 'लिपि सुधार परिषद' का गठन किया गया और
  • विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और विद्वानों को परिषद में आमंत्रित किया।

Important Points नरेंद्र देव की अध्यक्षता में गठित लिपि सुधार समिति के प्रमुख सुझाव -

  • 'अ' की बारहखड़ी को अस्वीकार करना
  • मात्राओं को यथा स्थान रखना और थोड़ा दाहिनी ओर लिखना
  • अनुस्वार में पंचम अक्षर के स्थान पर बिंदी का इस्तेमाल करना
  • मात्राएं यथास्थान रहे किन्तु उन्हें पड़ा दिनो गहिनी और लिखा जाए।
  • द्विविधि लिखे जाने वाले अक्षरों में से निम्न को सविकार किया जाए - अ,झ, ध, भ, ल
  • संयुक्त वर्ण क्ष,त्र, ज्ञ को वर्णमाला में स्थान दिया जाए।

Additional Information

  • नरेंद्र देव समिति की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 नवंबर (1953 ई.) को
  • नागरी लिपि सुधार संबंधी सुझाव हेतु 'लिपि सुधार परिषद' का गठन किया।
  • इसकी अध्यक्षता डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने की।

Question 16

'राम की शक्ति पूजा की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

A. इसका मूल स्रोत कृतिवास का बंगला रामायण है।

B. शक्तिपूजा के प्रसंगों में राम की पराजय का कहीं भी उल्लेख नहीं है ।

C. अन्याय जिध��� है, शक्ति को भी उधर ही होना चाहिए।

D. पूरी कविता में अंधकार - प्रकाश का द्वंद्वयुद्ध निरंतर चलता रहता है।

E. यह कविता निराशा का महिमामंडन नहीं करती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C

  2. BOption (b)

    केवल A, D, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, D

  4. DOption (d)

    केवल B, C, D

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, D, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, D, E

Key Points'राम की शक्ति पूजा की विशेषताएं हैं-

  • A. इसका मूल स्रोत कृतिवास का बंगला रामायण है।
  • D. पूरी कविता में अंधकार - प्रकाश का द्वंद्वयुद्ध निरंतर चलता रहता है।
  • E. यह कविता निराशा का महिमामंडन नहीं करती है।

Important Points 

  • ‘राम की शक्तिपूजा’ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की महानतम रचनाओं में से है।
  • यह एक लघु पौराणिक आख्यान काव्य है। इसकी रचना 1936 में की गई थी।
  • यह एक लम्बी कविता है। जो राम-रावण युद्ध की पौराणिक घटना पर आधारित है।
  • राम की शक्तिपूजा काव्य के तीन आधारभूत ग्रंथ हैं-
  • संस्कृत में विरचित ‘देवू भागवत’, ‘शिव महिम्न स्त्रोत’ और बांग्ला में कृत्तिवास ओझा कृत  ‘कृत्तिवास रामायण’।

Additional Informationसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' -

  • जन्म- 1899 -1961 ई.
  • हिन्दी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं।
  • निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबन्धकार और कहानीकार थे।
  • कविता संग्रह -
  • अनामिका (1923 ई.)
  • परिमल (1930 ई.)
  • तुलसीदास (1939 ई.)
  • कुकुरमुत्ता (1942 ई.)
  • अणिमा’ (1943 ई.)
  • नए पत्ते (1946 ई.) आदि।

Question 17

किशोरी दास वाजपेयी की पुस्तक 'हिन्दी की वर्तनी तथा शब्द- विश्लेषण' के अध्यायों का सही अनुक्रम है:

A. समास में वर्तनी की स्थिति

B. वाक्य विन्यास में वर्तनी का विवेचन

C. हिंदी की कुछ क्रियाएँ

D. नाम, यानी संज्ञाएँ

E. हिंदी में अनुनासिक वर्ण और अनुस्वार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    C, D, A, B, E

  2. BOption (b)

    C, D, E, A, B

  3. COption (c)

    D, E, C, A, B

  4. DOption (d)

    D, A, B, C, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

C, D, E, A, B

Why this answer is correct

सही अनुक्रम है: C, D, E, A, B

Key Pointsकिशोरी दास वाजपेयी की पुस्तक 'हिन्दी की वर्तनी तथा शब्द- विश्लेषण' के अध्यायों का सही अनुक्रम है:

  • C. हिंदी की कुछ क्रियाएँ
  • D. नाम, यानी संज्ञाएँ
  • E. हिंदी में अनुनासिक वर्ण और अनुस्वार
  • A. समास में वर्तनी की स्थिति
  • B. वाक्य विन्यास में वर्तनी का विवेचन

Additional Informationकिशोरी दास वाजपेयी - 

  • (1898-1981)
  • हिन्दी और संस्कृत के ��ुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं व्याकरणाचार्य थे।
  • उन्हें 'हिन्दी का पाणिनी' कहा जाता है।
  • अन्य प्रमुख पुस्तकें -
  • अच्छी हिन्दी
  • अच्छी हिन्दी का नमूना
  • हिन्दी शब्दानुशासन
  • ब्रजभाषा का व्याकरण
  • हिन्दी की वर्तनी तथा शब्द- विश्लेषण
  • राष्टभाषा का प्रथम व्याकरण
  • हिन्दी शब्द मीमांसा
  • भारतीय भाषा विज्ञान
  • सहित्य जीवन के अनुभव और संस्करण
  • संस्कृति के पाँच अध्याय आदि।

Question 18

'मैला आँचल' के अनुसार सत्य कथन हैं :

A. मैला आँचल' दो खंडो में लिखा गया उपन्यास है।

B. "जवानी की सुन्दरता आग लगाती है और बुढ़ापे की सुन्दरता स्नेह बरसाती है।" यह कथन फुलिया की माँ के बारे में है।

C. इस उपन्यास में कुल 67 खण्ड हैं।

D. इस उपन्यास में कायस्थटोली के लोग राजपूतटोली को क्षत्रिय टोली' कहते हैं।

E. "एक दिन इस गाँव में गिद्ध कौआ उड़ेगा। लक्षण अच्छे नहीं हैं।" कथन बूढ़े जोतखी का है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B C

  2. BOption (b)

    केवल B, C, D

  3. COption (c)

    केवल A, C, E

  4. DOption (d)

    केवल C, D, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A, B C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B C

Key Points'मैला आँचल' के अनुसार सत्य कथन हैं :

  • मैला आँचल' दो खंडो में लिखा गया उपन्यास है।
  • "जवानी की सुन्दरता आग लगाती है और बुढ़ापे की सुन्दरता स्नेह बरसाती है।" यह कथन फुलिया की माँ के बारे में है।
  • इस उपन्यास में कुल 67 खण्ड हैं।

Important Pointsमैला आंचल -

  • रचनाकार - फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1954 ई.
  • विषय -  इसकी कथावस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया ज़िले के मेरीगंज की ग्रामीण ज़िंदगी से संबद्ध है।

Additional Informationफणीश्वरनाथ रेणु -

  • (4 मार्च 1921 - 11 अप्रैल 1977)
  • एक सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार थे।
  • उपन्यास -
  • परती परिकथा (1957 ई.),
  • दीर्घतपा (1964 ई.),
  • कितने चौराहे (1966 ई.),
  • पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) आदि।

Question 19

गुरुपदेशादध्येतुं शास्त्रं जडधियोऽप्यलम्।

काव्यं तु जायते जातु कस्यचित् प्रतिभावतः"

काव्य के संबंध में यह उक्ति किस आचार्य की है ?

  1. AOption (a)

    मम्मट

  2. BOption (b)

    भामह

  3. COption (c)

    दंडी

  4. DOption (d)

    वामन

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Correct answer

Answer: (b)B.

भामह

Why this answer is correct

गुरुपदेशादध्येतुं शास्त्रं जडधियोऽप्यलम्।

काव्यं तु जायते जातु कस्यचित् प्रतिभावतः"

  • काव्य के संबंध में यह उक्ति आचार्य की है - भामह

Key Pointsउक्ति का भाव -

  • गुरू के उपदेश से जड़ बुद्धि वाले के लिए भी शास्त्र अध्ययन करने के लिए सुलभ हो जाता है या उतना ही पर्याप्त होता है।
  • लेकिन काव्य सृजन तो किसी प्रतिभावान की प्रतिभा से ही उत्पन्न होता है।
  • बिना प्रतिभा के कोई भी काव्य रचना में समर्थ नहीं हो सकता है।
  • आगे भामह ने प्रतिभा के परिष्कार और पोषण के लिए काव्य रचना के पहले कवि को यह निर्देश दिया है
  • कि विधिवत् शब्द और अर्थ का निश्चयात्मक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।

Additional Informationकाव्य के संबंध में अन्य विद्वानों की उक्ति -

मम्मट -

  • "शक्तिर्निपुणता लोक काव्यशास्त्राद्यवे क्षणात्। काव्यज्ञ शिक्षयाभ्यास इति हेतुस्तदुद्भवे॥"
  • उक्ति का भाव - मम्मट ने माना है कि शक्ति (प्रतिभा) के अभाव में काव्य का प्रसार संभव नहीं।
  • 'शक्ति कवित्व बीजरूपः यां बिना न काव्यं न प्रसरेत्।'
  • काव्य के उद्भव या निर्माण में शक्ति (प्रतिभा), निपुणता, लोक-काव्य-शास्त्र आदि का अवलोकन,
  • काव्य के जानकारों (कवि और काव्य के सिद्धांत की जानकारी रखने वाले लोगों)
  • द्वारा प्राप्त शिक्षा के अनुसार अभ्यास प्रमुख हेतु या कारण होते हैं।

दंडी -

  • "नैसर्गिकी च प्रतिभा श्रुतं च बहुनिर्मलम्। अमन्दश्चाभियोगोऽस्याः कारणं काव्यसंपदः॥"
  • उक्ति का भाव - यहाँ पर दण्डी काव्य बताते हैं कि काव्य सम्पदा के कारणों में नैसर्गिक प्रतिभा,
  • बहुत सारे शास्त्रों को सुनने से प्राप्त निर्मल बुद्धि और निरन्तर तीव्र अभ्यास आते हैं।
  • काव्य रचना के लिए केवल प्रतिभा से कार्य नहीं होता बल्कि उसके साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण
  • रचनाओं व शास्त्रों के सुनने-पढ़ने से उत्पन्न निर्मल बुद्धि की भी जरूरत होती है।

वामन -

  • "लोको विद्या प्रकीर्णंच काव्यांगानि।"
  • उक्ति का भाव - प्रतिभा को जन्मजात गुण मानते हुए इसे प्रमुख काव्य हेतु स्वीकार किया गया है —
  • "कवित्त बीजम् प्रतिभानम्" प्रतिभा के अतिरिक्त वे लोकव्यवहार, शास्त्रज्ञान,
  • शब्दकोश आदि की जानकारी को भी काव्य हेतुओं में स्थान देते हैं।
  • ध्यातव्य है कि काव्यांग में वामन ने लोक तथा विद्या के पश्चात ही प्रतिभा को महत्व दिया है।

Question 20

‘संस्कृति और सौन्दर्य’ के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में किस नाम से पुस्तक लिख रहे थे?

  1. AOption (a)

    सोन्दर्यशास्त्र

  2. BOption (b)

    लालित्य मीमांसा

  3. COption (c)

    लालित्य योजना

  4. DOption (d)

    आनंदिनी वृत्ति

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Correct answer

Answer: (b)B.

लालित्य मीमांसा

Why this answer is correct

‘संस्कृति और सौन्दर्य’ के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में पुस्तक लिख रहे थे - लालित्य मीमांसा

Key Pointsलालित्य मीमांसा -

  • रचनाकार - हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
  • विधा - आलोचना
  • प्रकाशन वर्ष - 1962 ई.

Additional Informationहज़ारी प्रसाद द्विवेदी -

  • जन्म- 1907 - 1979  ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • आलोचना/साहित्‍येतिहास -
  • कबीर (1942 ई.)
  • सूर साहित्‍य (1936 ई.)
  • हिन्‍दी साहित्‍य की भूमिका (1940 ई.)
  • हिन्‍दी साहित्‍य का आदिकाल (1952 ई.)
  • आधुनिक हिन्‍दी साहित्‍य पर विचार (1949 ई.)
  • साहित्‍य का मर्म (1949 ई.)
  • साहित्‍य सहचर (1965 ई.)
  • कालिदास की लालित्‍य योजना (1965 ई.)
  • मध्‍यकालीन बोध का स्‍वरूप (1970 ई.) आदि।
  • निबन्ध संग्रह -
  • अशोक के फूल (1950 ई.)
  • कल्‍पलता (1951 ई.)
  • मध्यकालीन धर्मसाधना (1952 ई.)
  • विचार और वितर्क (1957 ई.)
  • विचार-प्रवाह (1959 ई.)
  • कुटज (1964 ई.)
  • आलोक पर्व (1972 ई.) आदि।

Question 21

झुनिया को शरण देने पर पंचायत का दंड चुकाने के लिए होरी ने किसके हाथ अपने घर को अस्सी रुपए में गिरो रखा ।

  1. AOption (a)

    झिंगुरी सिंह

  2. BOption (b)

    दातादीन

  3. COption (c)

    लाला पटेश्वरी

  4. DOption (d)

    नोखेराम

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Correct answer

Answer: (a)A.

झिंगुरी सिंह

Why this answer is correct

झुनिया को शरण देने पर पंचायत का दंड चुकाने के लिए होरी ने झिंगुरी सिंह के हाथ अपने घर को अस्सी रुपए में गिरो रखा ।

Key Points

  • प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान' में, झुनिया को शरण देने पर पंचायत का दंड चुकाने के लिए होरी ने झिंगुरी सिंह के हाथ अपने घर को अस्सी रुपए में गिरो रखा ।

Important Points मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान' में कई पात्र हैं: 

  • होरी: उपन्यास का नायक और किसान. होरी की गाय रखने की इच्छा से कहानी की शुरुआत होती है.
  • धनिया: होरी की पत्नी और एक मज़बूत और सुशील महिला. वह अपने पति के साथ खड़ी रहती है और सुख-दुख में उसका साथ देती है.
  • गोबर: होरी का बेटा.
  • झुनिया: गोबर की पत्नी.
  • सोना और रूपा: होरी की बेटियां.
  • रायसाहब: एक ज़मींदार.
  • हीरा और शोभा: होरी के भाई.
  • भोला: झुनिया के पिता.
  • सिलिया: एक चमारिन स्त्री. वह सामाजिक भेदभाव और शोषण का शिकार होती है.
  • मातादीन और दातादीन: ब्राह्मण बाप-बेटे.
  • दुलारी सहुआइन: दुकान की मालकिन.
  • मेहता: दर्शन शास्त्र के प्रोफ़ेसर.
  • मालती: एक आधुनिक नारी और डॉक्टर.
  • खन्ना: मिल मालिक.
  • गोविंदी: खन्ना की पत्नी.

Additional Informationगोदान उपन्यास के महत्वपूर्ण तथ्य:

  • ‘गोदान’ उपन्यास का प्रकाशन वर्ष 1936 ई. है।
  • ‘गोदान’ की रचना में 4 वर्षों का समय लगा था।
  • ‘गोदान’ प्रेमचंद का अंतिम उपन्यास है।
  • डॉ. गोपाल राय के अनुसार गोदान की पात्रों की संख्या 84 है। जिसमे 56 पुरुष पात्र और 28 स्त्री पात्र हैं।
  • इसमें भारतीय ग्रामीण जीवन और उसमें व्याप्त सामाजिक और आर्थिक विषमताओं का जीवंत चित्रण करता है।

Question 22

'अंधेर नगरी' नाटक में तीसरा अंक का स्थान है:

  1. AOption (a)

    जंगल

  2. BOption (b)

    बाजार

  3. COption (c)

    राज सभा

  4. DOption (d)

    श्मशान

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Correct answer

Answer: (a)A.

जंगल

Why this answer is correct

'अंधेर नगरी' नाटक में तीसरा अंक का स्थान है: जंगल

Key Points

  • भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक 'अंधेर नगरी' 1881 ई. में प्रकाशित हुआ है।
  • इस प्रहसन में 6 अंक है - 
  1. बाह्य प्रान्त
  2. बाजार
  3. जंगल
  4. राज सभा
  5. आरण्य
  6. श्मशान

Additional Informationअंधेर नगरी -

  • अँधेर नगरी प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र का सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक है।
  • 6 अंकों के इस नाटक में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए उसे अपने ही कर्मों द्वारा नष्ट होते दिखाया गया है।
  • भारतेंदु ने इसकी रचना बनारस के हिंदू नेशनल थियेटर के लिए एक ही दिन में की थी।
  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (9 सितंबर 1850-6 जनवरी 1885) आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • प्रमुख नाटक -
  • वैदिक हिंसा न भवति, 1873 (वैदिक हिंसा न भवति)
  • सत्य हरिश्चंद्र, 1876 (सत्य हरिश्चंद्र)
  • भारत दुर्दशा (1875)
  • नीलादेवी , 1881 (नीलदेवी)

Question 23

'मेरी तिब्बत यात्रा में सत्य कथन है:

A. भारत के नालंदा के नाम पर जहाँ लंका में एक नालंदा, वहां तिब्बत भी उससे वंचित नहीं है।

B. तिब्बत में गदहेवाले 9 -10 बजाकर चलते हैं, वहां खच्चर वाले दो-तीन घंटा रात रहते ही चल देते हैं।

C. तिब्बत में सुरक्षित भारतीय ग्रंथों की सूची बिहार- उड़ीसा रिसर्च सोसायटी जर्नल के भाग 21 वें में छपी है।

D. इलाके के अफसरों को नेपाल में जोडूपोन कहते हैं और उसके इलाके को जोड़ कहा जाता है।

E. भोटिया लोग छुपे (चोगा) के दामन से खाने पीने की चीजों के छू जाने से बहुत परहेज करते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, D

  2. BOption (b)

    केवल A, C, E

  3. COption (c)

    केवल B, D, E

  4. DOption (d)

    केवल B, C, D

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C, E

Why this answer is correct

सत्य कथन है: केवल A, C, E

Key Points'मेरी तिब्बत यात्रा में सत्य कथन है:

  • A. भारत के नालंदा के नाम पर जहाँ लंका में एक नालंदा, वहां तिब्बत भी उससे वंचित नहीं है।
  • C. तिब्बत में सुरक्षित भारतीय ग्रंथों की सूची बिहार-उड़ीसा रिसर्च सोसायटी जर्नल के भाग 21 वें में छपी है।
  • E. भोटिया लोग छुपे (चोगा) के दामन से खाने पीने की चीजों के छू जाने से बहुत परहेज करते हैं।

Important Pointsमेरी तिब्बत यात्रा -

  • रचनाकार - राहुल सांकृत्यायन
  • विधा - यात्रा वृत्तांत
  • प्रकाशन वर्ष - 1937 ई.
  • विषय - इस वृत्तान्त में राहुल जी ने सैकड़ों वर्षों पुरानी पाण्डुलिपियों का पता लगाया।

Additional Informationराहुल सांकृत्यायन -

  • (9 अप्रैल 1893 – 14 अप्रैल 1963)
  • जिन्हें महापंडित की उपाधि दी जाती है हिंदी के एक प्रमुख साहित्यकार थे।
  • ​यात्रा वृत्तांत साहित्य -
  • लंका, जापान,इरान
  • किन्नर देश की ओर
  • चीन में क्या देखा
  • मेरी जीवन यात्रा ‌‌
  • मेरी लद्दाख यात्रा
  • मेरी तिब्बत यात्रा
  • तिब्बत में सवा वर्ष
  • रूस में पच्चीस मास
  • विश्व की रूपरेखा
  • यूरोप यात्रा
  • ल्हासा की ओर
  • शांतिनिकेतन में

Question 24

‘मानस का हंस' से संबंधित निम्नलिखित तथ्यों में से सही तथ्यों का चयन कीजिए:

A. मानस का हंस' लिखने का विचार नागर जी को महेश कोल के साथ बात करते हुए आया था।

B. दोहावली और गीतावली में तुलसी की जीवन- झांकी खास तौर पर मिलती है।

C. उपन्यास में तुलसी के जन्म स्थान के रूप में राजापुर को चित्रित किया है।

D. इस उपन्यास को लिखने से पहले नागर जी ने कवितावली' और 'विनयपत्रिका को खास तौर पर पढ़ा।

E. रघुबरदास जी मूल गोसाई चरित' के लेखक माने जाते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C

  2. BOption (b)

    केवल A, C, D

  3. COption (c)

    केवल B, C, D

  4. DOption (d)

    केवल C, D, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, D

Key Points‘मानस का हंस' से संबंधित तथ्य -

  • A. मानस का हंस' लिखने का विचार नागर जी को महेश कोल के साथ बात करते हुए आया था।
  • C. उपन्यास में तुलसी के जन्म स्थान के रूप में राजापुर को चित्रित किया है।
  • D. इस उपन्यास को लिखने से पहले नागर जी ने कवितावली' और 'विनयपत्रिका को खास तौर पर पढ़ा।

त्रुटि रहित वाक्य -

  • कवितावली में राम के बाल रूप से लेकर उनके सभी रूपों तक की झांकी प्रस्तुत की गई है।
  • 'गीतावली' तुलसीदास जी द्वारा गीत पद्धति पर लिखी रामायण है, इसमें गीतों में भगवान श्रीराम की कथा कही गयी है।
  • महात्मा बेनी माधव दास ने मूल गोसाईं चरित में मीराबाई और तुलसीदास के पत्राचार का उल्लेख किया है।

Important Points मानस का हंस -

  • 'मानस का हंस' अमृत लाल नागर द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास है।
  • 1972 में प्रकाशित यह उपन्यास रामचरितमानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है।
  • इस उपन्यास में तुलसीदास का जो स्वरूप चित्रित किया गया है, वह एक सहज मानव का रूप है।
  • यही कारण है कि ‘मानस का हंस’ हिन्दी उपन्यासों में ‘क्लासिक’ का सम्मान पा चुका है और हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि माना जाता है।

Additional Informationअमृत लाल नागर -

  • (17 अगस्त, 1916 - 23 फरवरी, 1990) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे।
  • उन्हें भारत सरकार द्वारा 1981 में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
  • उपन्यास :
  • महाकाल (1947) (1970 से ‘भूख’ शीर्षक प्रकाशित),
  • सेठ बांकेलाल (1955), बूँद और समुद्र (1956),
  • शतरंज के मोहरे (1959), सुहाग के नुपूर (1960)
  • अमृत और विष (1966), सात घूँघट वाला मुखड़ा (1968) आदि।

Question 25

क्रोचे के अनुसार अभिव्यंजना के संबंध में कथन है-

A. अंतःप्रज्ञा और अभिव्यंजना में अभेद है।

B. प्रत्येक अंतःप्रज्ञा कला नहीं होती है।

C. कला - सृष्टि केवल आतंरिक है।

D. कला रूप और वस्तु दोनों में होती है।

E. कला अखंड है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, D

  2. BOption (b)

    केवल B, D, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, E

  4. DOption (d)

    केवल B, C, D

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, E

Key Pointsक्रोचे के अनुसार अभिव्यंजना के संबंध में कथन है- 

  • A. अंतःप्रज्ञा और अभिव्यंजना में अभेद है।
  • C. कला - सृष्टि केवल आतंरिक है।
  • E. कला अखंड है।

Important Points अभिव्यंजनावाद की प्रमुख विशेषताएँ/मान्यताएँ –

  1. कला सहज अनुभूति है तथा सहज अनुभूति ही अभिव्यंजना है।
  2. अभिव्यंजना स्वयं प्रकाश ज्ञान है।
  3. यह एक मानसिक क्रिया है तथा अध्यात्म की आवशयकता है।
  4. अभिव्यंजना अखंड है उसे वर्गों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।
  5. अभिव्यंजना पूर्णतः आतंरिक होती है।
  6. ‘कला कला के लिए है’ कला स्वयं साध्य है।
  7. क्रोचे की मान्यता है कि कलाकार के लिए सुन्दर और असुंदर का कोई भेद नहीं होता है।

Additional Information

  • जन्म – 1866 ई. इटली, निधन – 1952 ई.
  • बेनदेतो क्रोचे, इटली के प्रसिद्ध दार्शनिक थे।
  • उन्होंने आत्मवादी दर्शन के आधार पर सौंदर्य-सिद्धांत की व्याख्या किया है,
  • जो अभिव्यंजनावाद के (Expressionism) नाम से प्रसिद्ध है।
  • ‘अभिव्यंजनावाद’ का मूल स्रोत वस्तुतः ‘स्वछंदतावाद’ की उस प्रवृति में है, जो रुढ़ि परंपरा, नियम आदि का विरोध करती है।

Question 26

“प्रत्येक वस्तु की निर्भरता चूँकि प्रौद्योगिकी पर होगी इसलिए विकसित एवं विकासशील समाजों के मध्य दूरी कम नहीं होगी, वरन् बढ़ेगी।” उक्त मंतव्य किस विचारक ने व्यक्त किया हैं ?

  1. AOption (a)

    ल्योतार्द

  2. BOption (b)

    फ्रेडरिक जेमेसन

  3. COption (c)

    टेरी इगलटन

  4. DOption (d)

    देरीदा

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Correct answer

Answer: (a)A.

ल्योतार्द

Why this answer is correct

“प्रत्येक वस्तु की निर्भरता चूँकि प्रौद्योगिकी पर होगी इसलिए विकसित एवं विकासशील समाजों के मध्य दूरी कम नहीं होगी, वरन् बढ़ेगी।” उक्त मंतव्य ल्योतार्द विचारक ने व्यक्त किया हैं 

Key Pointsज्याँ फ्रांसुआ ल्योतार्द (1924 – 1998) :

  • उत्तर आधुनिकता आत्मा का द्वंद्व है। इन्होने सार्वभौम वैदता का समर्थन किया।
  • महिला एवं पुरुषों की समानता पर भी बल दिया। विभिन्नता का समर्थन किया।

Additional Information फ्रेडरिक जेमेसन (1934 - 2024):

  • फ्रेडरिक जेम्सन ड्यूक विश्वविद्यालय में स्थित एक प्रभावशाली अमेरिकी मार्क्सवादी साहित्यिक आलोचक हैं।
  • फ्रेडरिक जेम्सन के अनुसार उत्तर-आधुनिकता 'परवर्ती पूंजीवाद' की उपज है।
  • अतः उसका प्रसार ज्ञान के सभी क्षेत्रों में होने का दावा किया गया।

टेरेंस फ्रांसिस ईगलटन (जन्म 22 फरवरी 1943) :

  • एक अंग्रेजी दार्शनिक, साहित्यिक सिद्धांतकार, आलोचक और सार्वजनिक बुद्धिजीवी हैं।
  • वह वर्तमान में लैंकेस्टर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं ।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • द न्यू लेफ्ट चर्च (1966)
  • शेक्सपियर और समाज: शेक्सपियर नाटक में आलोचनात्मक अध्ययन (1967)
  • निर्वासित और प्रवासी: आधुनिक साहित्य में अध्ययन (1970)
  • भाषा के रूप में शरीर: एक नए वामपंथी धर्मशास्त्र की रूपरेखा (1970)
  • सत्ता के मिथक: ब्रोंटेस का एक मार्क्सवादी अध्ययन (1975) आदि।

जैक देरिदा (1930 – 2004):

  • जैक देरिदा फ्रांसीसी दार्शनिक थे। इन्होंने यथार्थवाद पर बल दिया।
  • विरोधी तत्वों में सामंजस्य पर बल दिया। एक विश्व भाषा का इन्होने समर्थन किया।
  • ये विखंडनवाद के प्रवर्तक हैं। इनके विचार से तार्किकता सीमित होना चाहिए।

Question 27

'प्रेमचंद घर में' में उल्लिखित निम्नलिखित तथ्यों को सही क्रम में लगाएं :

A. प्रेमचंद द्वारा •मोटेराम शास्त्री' नाम की कहानी लिखने पर एक शास्त्री महाशय ने केस दायर किया।

B. शिवरानी देवी की पहली कहानी साहस हंस में प्रकाशित हुई।

C. शिवरानी देवी पिकेटिंग करते हुए गिरफ्तार हुईं।

D. लखनऊ के गवर्नर हेली धनपत राय जी को रायसाहबी देना चाहते थे क्योंकि वे भारत के सबसे बड़े राइटर थे।

E. साहित्य सभा की मीटिंग के लिए प्रेमचंद पहली बार दिल्ली जाते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, D, C, B, E

  2. BOption (b)

    A, B, D, E, C

  3. COption (c)

    B, A, D, C, E

  4. DOption (d)

    B, D, A, C, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

A, D, C, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, D, C, B, E

Key Points'प्रेमचंद घर में' में उल्लिखित तथ्यों को सही क्रम में लगाएं :

  • A. प्रेमचंद द्वारा 'मोटेराम शास्त्री' नाम की कहानी लिखने पर एक शास्त्री महाशय ने केस दायर किया।
  • D. लखनऊ के गवर्नर हेली धनपत राय जी को रायसाहबी देना चाहते थे क्योंकि वे भारत के सबसे बड़े राइटर थे।
  • C. शिवरानी देवी पिकेटिंग करते हुए गिरफ्तार हुईं।
  • B. शिवरानी देवी की पहली कहानी साहस हंस में प्रकाशित हुई।
  • E. साहित्य सभा की मीटिंग के लिए प्रेमचंद पहली बार दिल्ली जाते हैं।

Important Pointsप्रेमचंद घर में -

  • रचनाकार - शिवरानी देवी
  • विधा - जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष - 1944 ई.
  • विषय - इसमें उन्होंने प्रेमचंद के साथ अपने घरेलू जीवन के छोटे-छोटे संस्करण दर्ज किए हैं।

Additional Information

  • शिवरानी देवी प्रेमचंद कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जीवन-संगिनी थीं।
  • 'प्रेमचंद : घर में' यह किताब शिवरानी देवी द्वारा संस्मरणों की एक शृंखला के रूप में लिखी गई किताब है।

Question 28

फोर्ट विलियम कॉलेज के संबंध में सही कथन हैं-

A. ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रशासनिक सुविधा के लिए सन 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की।

B. 1802 में भाषा मुंशी के पद पर सदासुख लाल 'नियाज' नियुक्त हुए।

C. फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना अंग्रेज अफसरों को भारतीय रहन-सहन, सभ्यता, संस्कृति ओर देशी भाषा का ज्ञान कराने के लिए हुई थी।

D. जॉन गिलक्राइस्ट हिन्दुस्तानी विभाग के प्रोफेसर नियुक्त हुए थे।

E. फोर्ट विलियम कॉलेज में कार्य करते हुए इंशा अल्ला खां ने रानी केतकी की कहानी लिखी ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और E

  2. BOption (b)

    केवल A, C और D

  3. COption (c)

    केवल B, C और E

  4. DOption (d)

    केवल B, D और E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, C और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C और D

Key Pointsफोर्ट विलियम कॉलेज के संबंध में सही कथन हैं-

  • A. ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रशासनिक सुविधा के लिए सन 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की।
  • C. फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना अंग्रेज अफसरों को भारतीय रहन-सहन, सभ्यता, संस्कृति ओर देशी भाषा का ज्ञान कराने के लिए हुई थी।
  • D. जॉन गिलक्राइस्ट हिन्दुस्तानी विभाग के प्रोफेसर नियुक्त हुए थे।

अन्य त्रुटिरहित वाक्य -

  • B. 1802 ई. में इस कालेज में भाषा मुंशी के पद पर लल्लू जी लाल की नियुक्ति की गई।
  • E. फोर्ट विलियम कॉलेज का कार्य आरंभ करने से पहले मुंशी सदासुखलाल 'ज्ञानोपदेश' और सैय्यद इंशा अल्ला खाँ ''रानी केतकी की कहानी' लिख चुके थे।

Additional Information

  • फोर्ट विलियम कॉलेज कोलकाता में स्थित प्राच्य विद्याओं एवं भाषाओं के अध्ययन का केन्द्र है।
  • इसकी स्थापना 10 जुलाई सन् 1800 ई. को तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली के द्वारा की गई थी।
  • इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य था भारत में आने वाले नए ब्रिटिश व्यापारियों, शासकों और कर्मचारियों को भारतीय रहन-सहन,
  • संस्कृति, भाषा, एवं प्रशासनिक ज्ञान से परिचित करवाना तथा सिविल अधिकारियों को भारतीय भाषा, राजनीति आदि का ज्ञान तथा भाषिक आदान-प्रदान करना था।

Question 29

शेखर द्वारा एक महीने के परिश्रम के बाद पहली पुस्तक तैयार करने का प्रसंग किस खंड में है?

  1. AOption (a)

    उषा और ईश्वर

  2. BOption (b)

    बीज और अंकुर

  3. COption (c)

    प्रकृति और पुरुष

  4. DOption (d)

    पुरुष और परिस्थिति

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Correct answer

Answer: (a)A.

उषा और ईश्वर

Why this answer is correct

शेखर द्वारा एक महीने के परिश्रम के बाद पहली पुस्तक तैयार करने का प्रसंग खंड में है - उषा और ईश्वर

Key Points

  • 'शेखर एक जीवनी' के प्रथम खंड के दूसरे खंड में शेखर द्वारा एक महीने के परिश्रम के बाद पहली पुस्तक तैयार करने का प्रसंग है,
  • 'शेखर एक जीवनी', सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय का मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है,
  • इस उपन्यास के पहले भाग का नाम 'उत्थान' है.
  • उत्थान को चार खंडों में बांटा गया है: 
  • प्रथम खंड - उषा और ईश्वर
  • द्वितीय खंड - बीज और अंकुर
  • तृतीय खंड - प्रकृति और पुरुष
  • चतुर्थ खंड - पुरुष और परिस्थिति

Important Points

  • पहले खंड का शीर्षक उत्थान (उठना) है, दूसरे का संघर्ष (संघर्ष)।
  • दोनों खंडों को चार भागों ( हिंदी में खंड ) में विभाजित किया गया है।
  • इन आठ भागों में से सात में दो सामान्य शब्द हैं जो संयोजन 'और' से जुड़े हैं,
  • जो एंजेलिका मालिनार के अनुसार, विरोध के साथ-साथ आत्मीयता का भी संकेत दे सकते हैं।
  • पहले खंड के चार भागों के शीर्षक हैं: उषा और ईश्वर (भोर और भगवान), बीज और अंकुर (बीज और अंकुर),
  • प्रकृति और पुरुष (प्रकृति और मनुष्य) और पुरुष और परिस्थिति (मनुष्य और परिस्थिति)।
  • दूसरे खंड के पहले तीन भाग पुरुष और परिस्थिति, बंधन और जिज्ञासा तथा शशि और शेखर शीर्षक से हैं ।
  • केवल पहला प्रारंभिक अध्याय प्रवेश और धागे, रस्सियाँ, गुँझर शीर्षक से दूसरे खंड का अंतिम भाग इस योजना से अलग है।

Additional Informationसच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय -

  • (7 मार्च, 1911 - 4 अप्रैल, 1987)
  • हिन्दी में अपने समय के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं।
  • प्रमुख कृतियां -
  • कविता संग्रह:- भग्नदूत-1933, चिन्ता-1942, इत्यलम्-1946, हरी घास पर क्षण भर-1949, बावरा अहेरी-1954, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये-1957 आदि।
  • कहानियाँ:- विपथगा 1937 परम्परा 1944 कोठरी की बात 1945 शरणार्थी 1948 जयदोल 1951 आदि।
  • उपन्यास:- शेखर एक जीवनी- प्रथम भाग(उत्थान)1941 द्वितीय भाग(संघर्ष)1944 नदी के द्वीप 1951 अपने अपने अजनबी 1961 आदि।
  • यात्रा वृतान्त:- अरे यायावर रहेगा याद? 1953 एक बूँद सहसा उछली 1960 आदि।
  • निबंध संग्रह: - सबरंग त्रिशंकु 1945 आत्मनेपद 1960 आधुनिक साहित्य: एक आधुनिक परिदृश्य आलवाल 1971 सब रंग और क��छ राग 1956 लिखी कागद कोरे 1972 आदि।

Question 30

किस कहानी में घनश्याम नगर, कुल्लू, दिल्ली एंपोरियम, घूमनगंज आदि स्थानों का उल्लेख हुआ है ? 

  1. AOption (a)

    पिता

  2. BOption (b)

    परिंदे

  3. COption (c)

    अमृतसर आ गया

  4. DOption (d)

    कोसी का घटवार

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Correct answer

Answer: (a)A.

पिता

Why this answer is correct

पिता कहानी में घनश्याम नगर, कुल्लू, दिल्ली एंपोरियम, घूमनगंज आदि स्थानों का उल्लेख हुआ है।

Key Pointsपिता -

  • रचनाकार - ज्ञान र॑जन
  • प्रकाशन वर्ष - 1965 ई.
  • विधा - कहानी
  • पात्र -
  • पिता - मुख्य पात्र जो की पुरानी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर पात्र है।
  • पुत्र - वह यह भी एक महत्वपूर्ण पात्र है जो की आधुनिक पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • मुख्य विषय-
  • पिता कहानी ज्ञान रंजन की महत्वपूर्ण कहानियों में से एक है।
  • इस कहानी में पारिवारिक संबंधों के बदलते स्वरूप को दर्शाया है।
  • इन और नई वीडियो के सच में आए बदलाव का चित्रण है।

Important Pointsज्ञानर॑जन -

  • (जन्म : 21 नवंबर, 1936 )
  • हिन्दी साहित्य के एक प्रसिद्ध कहानीकार तथा हिन्दी की सुप्रसिद्ध पत्रिका पहल के संपादक हैं।
  • (2013 ई.) में जबलपुर विश्वविद्यालय द्वारा मानक 'डॉक्टर ऑफ लिटरेचर' की उपाधि प्रदान की।
  • कहानी संग्रह -
  • फैंस के इधर-उधर (968 ई.)
  • क्षणजीवी (1977)
  • यात्रा (1971)
  • सपना नहीं (1977)
  • प्रतिनिधि कहानियाँ
  • ज्ञानर॑जन की प्रमुख कहानियाँ -
  • ​घंटा
  • बहिर्गमन
  • अमरूद
  • पिता
  • सीमाएँ

Additional Information

रचनाविधारचनाकार
परिंदे (1960 ई.)कहानीनिर्मल वर्मा
अमृतसर आ गया (1973 ई.)कहानीभीष्म साहनी
कोसी का घटवार (1958 ई.)कहानीशेखर जोशी

Question 31

मारे गये गुलफाम उर्फ तीसरी कसम' कहानी में हीराबाई को ले जा रही बेलगाड़ी के रास्ते में उल्लिखित स्थानों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए।

A. फारबिसगंज

B. चम्पानगर

C. सीताधार

D. तेगछिया

E. नननपुर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, C, B, D, E

  2. BOption (b)

    B, D, E, C, A

  3. COption (c)

    B, E, D, A, C

  4. DOption (d)

    D, E, C, B, A

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, D, E, C, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, D, E, C, A

Key Points मारे गये गुलफाम उर्फ तीसरी कसम' कहानी में हीराबाई को ले जा रही

बेलगाड़ी के रास्ते में उल्लिखित स्थानों को पहले से बाद के क्रम -

  • B. चम्पानगर
  • D. तेगछिया
  • E. नननपुर
  • C. सीताधार
  • A. फारबिसगंज

Important Points 

  • विषय- यह हीरामन और हराबाई के बैलगाड़ी सफर के माध्यम से लोक संस्कृति उसमें
  • निहित रस और मर्यादित निश्चल प्रेम को व्यक्त करने वाली कहानी है।
  • मुख्य पात्र- गाड़ीवान हीरामन और कंपनी की औरत हीराबाई।
  • गौण पात्र- पलटदास,लाल मोहर,लाल मोहर का नौकर लहसनवाँ,धुन्नीराम आदि।
  • हीरामन की 3 कसमें-
  • चोरबाजरी का माल नही लादेगा।
  • बांस नहीं ढोयेगा।
  • कम्पनी की औरत नहीं बैठाएगा।

Additional Information

  • तीसरी कसम (1956) कहानी फणीश्वर नाथ रेणु (1921-1977ई.) द्वारा लिखित है।
  • इसका दूसरा नाम 'मारे गए गुलफाम' है।
  • यह 'ठुमरी' कहानी संग्रह में संकलित है।
  • फणीश्वर नाथ रेणु की कथा-संग्रह -
  • ठुमरी, (1959)
  • एक आदिम रात्रि की महक,(1967)
  • अग्निखोर,(1973)
  • एक श्रावणी दोपहर की धूप,(1984)
  • अच्छे आदमी,(1986)

Question 32

"बागबाँ आया गुलिस्ताँ में कि सैय्याद आया,

जो कोई आया मेरी जान को जल्लाद आया।"

अंग्रेजी राज्य के सन्दर्भ में यह कथन भारतेंदु के किस निबंध का है ?

  1. AOption (a)

    बादशाह - दर्पण

  2. BOption (b)

    वैष्णवता और भारतवर्ष

  3. COption (c)

    अथ अंग्रेज स्तोत्र लिख्यते

  4. DOption (d)

    पाँचवा पैगम्बर

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Correct answer

Answer: (a)A.

बादशाह - दर्पण

Why this answer is correct

"बागबाँ आया गुलिस्ताँ में कि सैय्याद आया,

जो कोई आया मेरी जान को जल्लाद आया।"

अंग्रेजी राज्य के सन्दर्भ में यह कथन भारतेंदु के निबंध का है - बादशाह - दर्पण

Key Points

  • अंग्रेजी राज्य के सन्दर्भ में यह कथन भारतेंदु 'बादशाह - दर्पण' के निबंध का है।
  • 'बादशाह दर्पण' इतिहास की जानकारी प्रदान करने वाला ग्रंथ है।

Important Pointsनिबंध-

पुरातत्व संबंधीइतिहास संबंधीकला संबंधीधर्म संबंधीविचारात्मक निबंधभावात्मक निबंधआत्मव्यंजक निबंधवर्णनात्मक निबंधकथात्मक निबंध
1. रामायण का समय 2. काशी 3. मणिकर्णिका4. कश्मीर कुसुम 5. बादशाह दर्पण 6. उदयपुरोदय7. संगीत सार 8. जातीय संगीत9. तदीयसर्वस्व 10. वैष्णवता और भारतवर्ष11. नाटकों का इतिहास12. सूर्योदय13. ईश्वर बड़ा विलक्षण है14. बसंत 15. ग्रीष्म ऋतु 16. वर्षा काल 17. बद्रीनाथ की यात्रा18. एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चन्द्र -

  • (9 सितंबर 1850-6 जनवरी 1885)
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • हिन्दी भाषा की सेवा में उन्होंने दो पत्रिकाएँ 'कवि वचन सुधा' (1924) तथा 'हरिश्चंद्र मैगजीन' (1930) का प्रकाशन किया।
  • निबंध संग्रह -
  • कालचक्र (जर्नल)
  • लेवी प्राण लेवी
  • भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?
  • कश्मीर कुसुम
  • जातीय संगीत
  • हिंदी भाषा
  • स्वर्ग में विचार सभा आदि।

Question 33

‘दुलाईवाली' कहानी में सीता नामक बालिका की आयु है:

  1. AOption (a)

    आठ वर्ष

  2. BOption (b)

    नौ वर्ष

  3. COption (c)

    दस वर्ष

  4. DOption (d)

    ग्यारह वर्ष

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Correct answer

Answer: (c)C.

दस वर्ष

Why this answer is correct

‘दुलाईवाली' कहानी में सीता नामक बालिका की आयु है**: दस वर्ष**

Key Pointsकहानी का अंश -

  • मकान के पहले खंड में बहुत अँधेरा था, पर ऊपर की जगह मनुष्य के वासोपयोगी थी।
  • नवागत मनुष्य धड़धड़ाता हुआ ऊपर चढ़ गया।
  • वहाँ एक कोठरी में हाथ की चीजें रख दीं और ‘सीता! सीता' कहकर पुकारने लगा।
  • “क्या है?” कहती हुई एक दस बरस की बालिका आ खड़ी हुई। तब उस पुरुष ने कहा,
  • “सीता! ज़रा अपनी बहन को बुला ला।” “अच्छा,” कहकर सीता चली गई
  • और कुछ देर में एक नवीना स्त्री आकर उपस्थित हुई।
  • उसे देखते ही पुरुष ने कहा, “लो, हम लोगों को तो आज ही जाना होगा।”

Additional Informationमहत्वपूर्ण जानकारी -

  • 'दुलाईवाली' राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला) द्वारा लिखित एक कहानी है।
  • 'दुलाईवाली' एक हास्य-व्यंग्य प्रधान कहानी है।
  • इस कहानी का प्रकाशन सन् 1907 ई. में हुआ था।
  • रेलयात्रा के माध्यम से इस कहानी में लेखिका ने हास्य के कई रंग उकेरे हैं।

Question 34

बच्चन सिंह के अनुसार रामचंद्र शुक्ल की सीमाओं का उद्घाटन सर्वप्रथम किस आलोचक ने किया ?

  1. AOption (a)

    हजारी प्रसाद द्विवेदी

  2. BOption (b)

    नंददुलारे वाजपेयी

  3. COption (c)

    रामविलास शर्मा

  4. DOption (d)

    शांतिप्रिय द्विवेदी

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Correct answer

Answer: (b)B.

नंददुलारे वाजपेयी

Why this answer is correct

बच्चन सिंह के अनुसार रामचंद्र शुक्ल की सीमाओं का उद्घाटन सर्वप्रथम आलोचक ने किया - नंददुलारे वाजपेयी

Key Points

  • बच्चन सिंह के अनुसार रामचंद्र शुक्ल की सीमाओं का उद्घाटन सर्वप्रथम आलोचक ने किया - नंददुलारे वाजपेयी
  • बच्चन सिंह ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल की सीमाओं का उद्घाटन सर्वप्रथम किया था,
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, आदिकाल की समय सीमा संवत 1050 से संवत 1375 तक थी,
  • उन्होंने पूर्व मध्य काल (भक्तिकाल) की समय सीमा 1375-1700 ई.
  • और उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल) की समय सीमा 1700-1900 ई. मानी थी,
  • आधुनिक काल (गद्यकाल) की समय सीमा 1900-1984 ई. थी,

Important Pointsनन्ददुलारे वाजपेयी -

  • (4 सितम्बर 1906 - 21 अगस्त, 1967 ई.)
  • हिन्दी के साहित्यकार, पत्रकार, सम्पादक, आलोचक और अंत में प्रशासक भी रहे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ- 
  • ‘हिंदी साहित्य बीसवीं शताब्दी'(1942 ई.),
  • ‘आधुनिक साहित्य'(1950 ई.),
  • ‘सूरदास’ (1953 ई.),
  • ‘नया साहित्य :नए प्रश्न' (1955 ई.),
  • ‘कवि निराला'(1965 ई.)
  • रस सिद्धांत नए संदर्भ (1997 ई.),
  • नयी कविता (1997 ई.) प्रमुख हैं।

Additional Informationहज़ारी प्रसाद द्विवेदी -

  • जन्म- 1907 - 1979  ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • सूर साहित्‍य (1936)
  • हिन्‍दी साहित्‍य की भूमिका (1940)
  • प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद (1952)
  • कबीर (1942)
  • नाथ संप्रदाय (1950)
  • हिन्‍दी साहित्‍य का आदिकाल (1952)
  • आधुनिक हिन्‍दी साहित्‍य पर विचार (1949)
  • साहित्‍य का मर्म (1949)
  • मेघदूत: एक पुरानी कहानी (1957) आदि।

रामविलास शर्मा -

  • (10 अक्टूबर 1912 ई.- 30 मई 2000  ई.)
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • 'प्रेमचन्द और उनका युग' (1953 ई.)
  • 'निराला' (1946 ई.)
  • 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र' (1954 ई.)
  • 'प्रगति और परम्परा' (1954 ई.)
  • 'भाषा साहित्य और संस्कृति' (1954 ई.)
  • 'भाषा और समाज' (1961 ई.)
  • 'निराला की साहित्य साधना' (1969 ई.)

शांतिप्रिय द्विवेदी -

  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • हमारे साहित्य निर्माता (1934)
  • कवि और काव्य (1936)
  • साहित्यिक (1938)
  • संचारिणी (1939)
  • युग और साहित्य (1941)
  • सामयिकी (1944) आदि।

Question 35

मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी । नाहिं त काह छार भरि मूठी ।

पद्मावत में यह कथन किसके द्वारा कहा गया है -

  1. AOption (a)

    अलाउद्दीन

  2. BOption (b)

    रत्नसेन

  3. COption (c)

    हीरामन शुक

  4. DOption (d)

    नागमती

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Correct answer

Answer: (c)C.

हीरामन शुक

Why this answer is correct

मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी । नाहिं त काह छार भरि मूठी ।

पद्मावत में यह कथन के द्वारा कहा गया है - हीरामन शुक

Key Points 

  • पद्मावत आद्यांत 'मानुष प्रेम' अर्थात् मानवीय प्रेम की महिमा व्यंजित करता है।
  • हीरामन शुक शुरू में कहता है: 'मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी। नाहि त काहे छार भरि मूठी।

Important Points पद्मावत -

  • पद्मावत हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत सूफी परम्परा का प्रसिद्ध महाकाव्य है।
  • इसके रचनाकार मलिक मोहम्मद जायसी हैं।
  • इसकी रचना सन् 947 हिजरी. (संवत् 1540) में हुई थी।
  • दोहा और चौपाई छन्द में लिखे गए इस महाकाव्य की भाषा अवधी है।
  • यह हिन्दी की अवधी बोली में है और चौपाई, दोहों में लिखी गई है।
  • चौपाई की प्रत्येक सात अर्धालियों के बाद दोहा आता है और इस प्रकार आए हुए दोहों की संख्या 653 है।
  • जो 1303 में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चित्तौड़ की ऐतिहासिक घेराबंदी की कहानी का वर्णन करने वाली एक कविता है।
  • इस रचना में उन्होंने नायक रतनसेन और नायिका पद्मिनी की प्रेमकथा को विस्तारपूर्वक कहते हुए प्रेम की साधना का संदेश दिया है।

Additional Informationमलिक मोहम्मद जायसी -

  • (1492 - 1548)
  • हिन्दी साहित्य के भक्ति काल की निर्गु ण प्रेमाश्रयी धारा के कवि थे।
  • वे अत्यंत उच्चकोटि के सरल और उदार सूफ़ी महात्मा थे। जायसी मलिक वंश के थे।
  • प्रमुख कृतियाँ - पद्मावत, अखरावट, आख़िरी कलाम, कहरनामा, चित्ररेखा, कान्हावत आदि।

Question 36

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I ('मुर्दहिया' में प्रयुक्त शब्द)सूची II (आशय)
A.डांगरI.लाल कपड़े में रखी हुई हस्तलिखित पाण्डुलिपि
B.अन्यासII.शवयात्रा के दौरान गाया जाने वाला विशेष भजन
C.परवानाIII.मरे हुए पशुओं का मांस
D.बिस्टोरियाIV.चांदी का सिक्का
  1. AOption (a)

    A - II, B - III, C - IV, D - I

  2. BOption (b)

    A - III, B - II, C - IV, D - I

  3. COption (c)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  4. DOption (d)

     A - II, B - I, C - III, D - IV

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I ('मुर्दहिया' में प्रयुक्त शब्द)सूची II (आशय)
A.डांगरIII.मरे हुए पशुओं का मांस
B.अन्यासII.लाल कपड़े में रखी हुई हस्तलिखित पाण्डुलिपि
C.परवानाII.शवयात्रा के दौरान गाया जाने वाला विशेष भजन
D.बिस्टोरियाIV.चांदी का सिक्का

Additional Information

  • मुर्दहिया दलित साहित्यकार डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा है,
  • जो हिन्दी साहित्य में मूलतः 'दलित आत्मकथा'. के रूप में प्रसिद्ध है।
  • यह आत्मकथा दो खंडों में लिखी गयी, ‘मुर्दहिया’ (1910 ई.) तथा ‘मणिकर्णिका’ (2014 ई.) में प्रकाशित हुआ।
  • यह आत्मकथा दलित जीवन के विविध पहलुओं से साक्षात्कार करवाती है।
  • इसमें दलितों के संवेदनशील-संघर्षशील जीवन को केंद्र में बनाकर सामजिक यथार्थ को उजागर किया गया है।

Question 37

राजभाषा' के संबंध में निम्नलिखित तथ्य मिलते हैं;

A. अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी

B. 17 जून, 1957 को राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग का गठन किया गया।

C. अनुच्छेद 350 में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों आदि की भाषा की व्यवस्था है।

D. अनुच्छेद 344 के अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रथम पांच और दस वर्ष के बाद राजभाषा आयोग नियुक्त कर सकता है।

E. अनुच्छेद 345 में यह व्यवस्था है कि राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं या हिंदी को सरकारी प्रयोजनों के लिए स्वीकार कर सकेगा।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, D

  2. BOption (b)

    केवल A, C, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, D

  4. DOption (d)

    केवल A, D, E

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, D, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, D, E

Key Points'राजभाषा' के संबंध में तथ्य मिलते हैं -

  • A. अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी
  • D. अनुच्छेद 344 के अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रथम पांच और दस वर्ष के बाद राजभाषा आयोग नियुक्त कर सकता है।
  • E. अनुच्छेद 345 में यह व्यवस्था है कि राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं या हिंदी को सरकारी प्रयोजनों के लिए स्वीकार कर सकेगा।

अन्य त्रुटिरहित तथ्य -

  • भारत के राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 344 के तहत 7 जून, 1955 को राजभाषा आयोग का गठन किया था।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 348(1)(ए) में यह कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 के तहत, शिकायतों के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयुक्त की जाने वाली भाषा से जुड़ी व्यवस्था है।

Additional Information

  • राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है- “राज-काज की भाषा।”
  • ऐसी भाषा जिसे संघ अथवा कोई राज्य अथवा सरकार विधि द्वारा अपने सरकारी कामकाज में प्रयोग के लिए स्वीकार कर ले, राजभाषा कहलाती हैं।
  • भारत में हिन्दी राजभाषा है, संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को हिन्दी को राजभाषा घोषित किया था, इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है
  • अष्टम अनुसूची में भी भाषाओं को राज्य की राजभाषा कहा गया हो।
  • भारतीय संविधान में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए हिन्दी के अतिरिक्त 21 अन्य भाषाएँ राजभाषा स्वीकार की गई हैं।
  • संविधान की अष्टम अनुसूची में कुल 22 भारतीय भाषाओं स्थान प्राप्त हुआ है।

Question 38

निम्नलिखित विचारकों को जन्म वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में लगाइए।

A. फ्रायड

B. किर्केगार्द

C. कार्ल मार्क्स

D. महात्मा गाँधी

E. जोतीराव फुले

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    C, B, E, D, A

  2. BOption (b)

    B, C, E, A, D

  3. COption (c)

    B, D, A, E, C

  4. DOption (d)

    E, D, C, A, B

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, C, E, A, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, C, E, A, D

Key Pointsविचारकों को जन्म वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम -

क्र.म.विचारकजन्म वर्ष
B.किर्केगार्द5 मई,1813 (कोपेनहेगन,डेनमार्क)
C.कार्ल मार्क्स5 मई 1818 (जर्मनी)
E.जोतीराव फुले11 अप्रैल, 1827  (महाराष्ट्र)
A.फ्रायड6 मई, 1856 (ऑस्ट्रिया के मोरोबिया)
D.महात्मा गाँधी2 अक्टूबर 1869 (गुजरात के पोरबंदर)

Additional Informationकिर्केगार्द-

  • {जन्म 5 मई 1813 - मृत्यु 11 नवम्बर 1855 (उम्र 42 वर्ष)}
  • अस्तित्ववादी दर्शन के पहले समर्थक हालांकि उन्होंने अस्तित्ववाद शब्द का प्रयोग नहीं किया।
  • "व्यक्तिपरकता" और "विश्वास की छलांग" उनके दो प्रभावशाली विचार है।

कार्ल मार्क्स-

  • ( जर्मन: 5 मई 1818 - 14 मार्च 1883)
  • एक जर्मन मूल के दार्शनिक , राजनीतिक सिद्धांतकार, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, समाजशास्त्री, पत्रकार और क्रांतिकारी समाजवादी थे।
  • उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ 1848 की पैम्फलेट द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो और उनकी तीन-खंड वाली दास कैपिटल (1867-1894) हैं।
  • द अठारहवें ब्रूमेयर ऑफ़ लुई बोनापार्ट (1852) और दास कैपिटल (1867)
  • मार्क्स इंटरनेशनल वर्किंगमेन एसोसिएशन (फर्स्ट इंटरनेशनल) 1864

जोतीराव फुले -

  • (11 अप्रैल 1827 - 28 नवम्बर 1890)
  • एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे।
  • निर्धन तथा निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने 'सत्यशोधक समाज' 1873 मे स्थापित किया।
  • उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं-गुलामगिरी, तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, किसान का कोड़ा,
  • अछूतों की कैफियत, महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया।
  • गांधी जी की 9 पुस्तकों में सत्य के प्रयोग अथवा आत्म कथा,मेरी जीवन कथा, रामनाम, मेरे सपनों का भारत,
  • संक्षिप्त आत्मकथा, दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास, गीता बोध, बापू की सीख, हिंद स्वराज, शामिल हैं।

फ्रायड-

  • (6 मई 1856 - 23 सितम्बर 1939)
  • आस्ट्रिया के तंत्रिकाविज्ञानी (neurologist) तथा मनोविश्लेषण के संस्थापक थे।
  • प्रमुख रचनाएँ
  • द इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स,
  • "इंटर प्रटेशन ऑफ़ ड्रीम्स",
  • "ग्रुप साइकोलोजी एंड द एनेलेसिस ऑफ़ दि इगो"
  • "सिविलाईजेसन एंड इट्स डिसकानटेंट्स"
  • "द इंट्रोडक्शन ऑफ साइकॉलजी 1893"।

महात्मा गाँधी -

  • (2 अक्टूबर 1869 - 30 जनवरी 1948)
  • जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है,
  • भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे।

Question 39

"भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' के अनुसार सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (प्रयोग की वस्तु)सूची II (निर्यातक देश)
A.मारकीन की धोतीI.फरांसीस (फ्रांस)
B.लाकलाट का अंगाII.अमेरिका
C.कंघीIII.इंग्लैण्ड
D.चरबी की बत्तीIV.जर्मनी
  1. AOption (a)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - II, B - I, C - IV, D - III

  4. DOption (d)

    A - II, B - IV, C - I, D - III

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - II, B - III, C - I, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - III, C - I, D - IV

Key Points

सूची I (प्रयोग की वस्तु)सूची II (निर्यातक देश)
A.मारकीन की धोतीII.अमेरिका
B.लाकलाट का अंगाIII.इंग्लैण्ड
C.कंघीI.फरांसीस (फ्रांस)
D.चरबी की बत्तीIV.जर्मनी

Important Points भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है -

  • यह भारतेंदु हरिश्चंद्र का प्रसिद्ध निबंध है।
  • दिसंबर, 1884 में हरिश्चंद्र चंद्रिका के अंक में प्रकाशित हुआ था।
  • यह निबंध बलिया के ददरी मेले में भाषण देने के लिए लिखा गया था,
  • इस पाठ में एक तरफ ब्रिटिश सरकार की मनमानी पर व्यंग्य किया है,
  • तो दूसरी तरफ उन्होंने अंग्रेजों के काम के प्रति समर्पण और परिश्रम की तारीफ़ भी की है।
  • लेखक ने इस लेख में भारत के लोगों की कमियों के बारे में भी बताया है।

Additional Informationभारतेंदु हरिश्चंद्र -

  • (9 सितंबर 1850-6 जनवरी 1885)
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • निबंध संग्रह -
  • कालचक्र (जर्नल)
  • लेवी प्राण लेवी
  • कश्मीर कुसुम
  • जातीय संगीत
  • संगीत सार
  • हिंदी भाषा
  • स्वर्ग में विचार सभा।

Question 40

कोई भी हो वह क्या बोले, पागल बन नर निर्भर न करे। अपनी दुर्बलता बल सम्हाल गंतव्य मार्ग पर पैर धरे । कामायनी के किस सर्ग से उद्धृत है -

  1. AOption (a)

    स्वप्न

  2. BOption (b)

    इड़ा

  3. COption (c)

    आशा

  4. DOption (d)

    संघर्ष

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Correct answer

Answer: (b)B.

इड़ा

Why this answer is correct

कोई भी हो वह क्या बोले, पागल बन नर निर्भर न करे। अपनी दुर्बलता बल सम्हाल गंतव्य मार्ग पर पैर धरे। कामायनी के सर्ग से उद्धृत है - इड़ा

Key Points

  • 'कामायनी' 15 - सर्ग (अध्यायों) का महाकाव्य है। ये सर्ग हैं-
    1. चिन्ता 2. आशा 3. श्रद्धा 4. काम 5. वासना 6. लज्जा 7. कर्म 8. ईर्ष्या 9.
  • इड़ा (तर्क, बुद्धि) 10. स्वप्न 11. संघर्ष 12. निर्वेद (त्याग) 13. दर्शन 14. रहस्य 15. आनन्द।
  • सूत्र :- (1) चिंता की आशा से श्रद्धा ने काम वासना को लज्जित किया।
  • (2) कर्म की ईर्ष्या से बुद्धि/तर्क ने स्वप्न में संघर्ष किया।
  • (3) निर्वेद (निद्रा)/ मोह माया का त्याग कर ईश्वरीय दर्शन द्वारा रहस्य मय आनंद की प्राप्ति होगी।

Important Pointsकामायनी-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - काव्य (महाकाव्य)
  • प्रकाशन वर्ष - 1936 ई.
  • विषय - इसमें मनु और श्रद्धा, पुरुष और नारी की और उसके मनोंभावों के विकास की कथा है।

Additional Information जयंशकर प्रसाद-

  • जन्म - 1889 -1937 ई.
  • हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे।
  • कविता संग्रह -
  • प्रेम-पथिक (1909 ई.)
  • चित्राधार (1918 ई.)
  • कानन कुसुम (1913 ई.)
  • झरना (1918 ई.)
  • आँसू (1925 ई.)
  • लहर (1935 ई.)

Question 41

रामचंद्र शुक्ल ने 'सरस्वती' में प्रकाशित निम्नलिखित कहानियों को मार्मिकता की दृष्टि से भाव प्रधान कहानियों के रूप में माना है-

A. इंदुमती - किशोरीलाल गोस्वामी

B. प्लेग की चुड़ैल - मास्टर भगवान दास

C. दुलाई वाली - बंग महिला

D. ग्यारह वर्ष का समय रामचंद्र शुक्ल

E. पंडित और पंडितानी - गिरिजा दत्त वाजपेयी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, D, E

  2. BOption (b)

    केवल A, B, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, E

  4. DOption (d)

    केवल A, C, D

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, D

Key Points

  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में सरस्वती में प्रकाशित कहानियों का वर्णन करते हुए
  • तीन कहानियों को मार्मिकता की दृष्टि से भावप्रधान कहानियों के रूप में चुना है-
  • (A) इंदुमती - किशोरीलाल गोस्वामी
  • (C) दुलाईवाली - बंगमहिला
  • (D) ग्यारह वर्ष का समय - रामचन्द्र शुक्ल

अन्य विकल्प -

  • प्लेग की चुड़ैल (1902) - मास्टर भगवान दास
  • पंडित और पंडितानी (1903) - गिरिजा दत्त वाजपेयी

Additional Informationआचार्य रामचंद्र शुक्ल- 

  • जन्म-  1884 - 1941 ईo
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार थे।
  • उनके द्वारा लिखी गई सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पुस्तक हिन्दी साहित्य का इतिहास है।
  • हिन्दी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात भी उन्हीं के द्वारा हुआ।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • जायसी ग्रंथावली (1924)
  • गोस्वामी तुलसीदास (1923)
  • रसमीमांसा (1949)
  • भ्रमर गीत सार (1925 )
  • काव्य मे रहस्यवाद (1929)
  • निबंध- 
  • भाव या मनोविकार
  • उत्साह
  • श्रद्धा-भक्ति
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था
  • रसात्मक बोध के विविध रूप
  • काव्य में प्रकृतिक दृश्य
  • काव्य में रहस्यवाद
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद

Question 42

मुक्तिबोध की कविता है.

A. ब्रह्मराक्षस

B. भूरी भूरी खाक धूलि

C. भूलगलती

D. टूटने का सुख

E. भग्नदूत

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, D, E

  2. BOption (b)

    केवल B, C, E

  3. COption (c)

    केवल A, B, C

  4. DOption (d)

    केवल A, C, E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, B, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, C

Key Pointsमुक्तिबोध की कविता है -

  • A. ब्रह्मराक्षस
  • यह बनारस की एक लघु पत्रिका 'कवि' (1954) में सर्वप्रथम प्रकाशित हुई।
  • यह कविता ‘चाँद का मुँह टेढ़ा’ में संकलित है, जो सनˎ1964 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • इस कविता में ब्रह्मराक्षस नाम के एक पौराणिक प्��ाणी की कहानी बताई गई है।
  • B. भूरी भूरी खाक धूलि 
  • यह कविता संग्रह ​1980 में प्रकाशित हुई थी।
  • C. भूलगलती
  • यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा’ में 1964 में प्रकाशित हुई थी।
  • इस कविता संग्रह की भूमिका में शमशेरबहादुर सिंह जी ने संकेत किया है।

अन्य -

  • D. टूटने का सुख  
  • यह भवानीप्रसाद मिश्र की कविता ​है।
  • E. भग्नदूत 
  • यह अज्ञेय जी की कविता है।
  • इसका प्रकाशन वर्ष (1933) है।

Additional Informationमुक्तिबोध-

  • (जन्म: 13 नवंबर, 1917 - मृत्यु: 11 सितंबर, 1964)
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे।
  • उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है – (कविता संग्रह), 1964,
  • नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध (निबंध संग्रह), 1964,
  • एक साहित्यिक की डायरी (निबंध संग्रह), 1964,
  • काठ का सपना (कहानी संग्रह), 1967,
  • विपात्र (उपन्यास), 1970,
  • नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, 1971,
  • सतह से उठता आदमी (कहानी संग्रह), 1971
  • कामायनी: एक पुनर्विचार, 1973,
  • भूरी-भूरी खाक धूल – (कविता संग्रह), 1980

Question 43

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (आलोचक)सूची II (आलोचना ग्रन्थ)
A.शांतिप्रिय द्विवेदीI.हिंदी साहित्य
B.हजारी प्रसाद द्विवेदीII.साहित्य का समाजशास्त्न और रूपवाद
C.बच्चन सिंहIII.आधुनिक कविता का मूल्यांकन
D.इंद्रनाथ मदानIV.युग और साहित्य
  1. AOption (a)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - IV, B - II, C - I, D - III

  3. COption (c)

    A - IV, B - I, C - II, D - III

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - IV, B - I, C - II, D - III

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - I, C - II, D - III

Key Points

सूची I (आलोचक)सूची II (आलोचना ग्रन्थ)
A.शांतिप्रिय द्विवेदीIV.युग और साहित्य
B.हजारी प्रसाद द्विवेदीI.हिंदी साहित्य
C.बच्चन सिंहII.साहित्य का समाजशास्त्न और रूपवाद
D.इंद्रनाथ मदानIII.आधुनिक कविता का मूल्यांकन

Additional Informationशांतिप्रिय द्विवेदी -

  • आलोचनात्मक ग्रंथ -
  • हमारे साहित्य निर्माता (1934)
  • कवि और काव्य (1936)
  • साहित्यिक (1938)
  • संचारिणी (1939)
  • युग और साहित्य (1941)
  • सामयिकी (1944) आदि।

हज़ारी प्रसाद द्विवेदी -

  • जन्म- 1907 - 1979 ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • सूर साहित्‍य (1936)
  • हिन्‍दी साहित्‍य की भूमिका (1940)
  • प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद (1952)
  • हिन्‍दी साहित्‍य का आदिकाल (1952)
  • आधुनिक हिन्‍दी साहित्‍य पर विचार (1949)
  • साहित्‍य का मर्म (1949)
  • मेघदूत: एक पुरानी कहानी (1957) आदि।

बच्चन सिंह-

  • (जन्म: 2 जुलाई 1919 मृत्यु: 5 अप्रैल 2008)
  • एक हिन्दी साहित्यकार, आलोचक एवं इतिहासकार थे।
  • हिन्दी साहित्य में बच्चन सिंह की ख्याति सैद्धान्तिक लेखन के क्षेत्र में असंदिग्ध है।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • क्रान्तिकारी कवि निराला (1947)
  • भारतेंदु की कविता (1951)
  • रीतिकालीन कवियों की प्रेम व्यंजना (1956)
  • बिहारी का नया मूल्यांकन (1957)
  • समकालीन साहित्य:आलोचना को चुनौती (1968)
  • आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास (1978)
  • हिंदी आलोचना के बीज शब्द (1983)
  • साहित्य का समाजशास्त्र (1984) आदि।

इंद्रनाथ मदान -

  • हिन्‍दी साहित्य में समीक्षा को एक नया आयाम देने वाले समीक्षकों में प्रसिद्ध नाम।
  • पंजाब यूनीवर्सिटी में हिन्‍दी विभाग के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रहे।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ- 
  • ​आधुनिक कविता का मूल्यांकन

Question 44

मजदूरी और प्रेम' निबंध में आई पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. आपने चार आने पैसे मजदूर के हाथ में रखकर कहा “यह लो दिन भर की अपनी मजदूरी।” वाह क्या दिल्लगी है !

B. हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं।

C. पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है।

D. मुझे तो मनुष्य के हाथ से बने कामों में उनकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है।

E. आदमियों की तिजारत करना मूर्खों का काम है। सोने और लोहे के बदले मनुष्य को बेचना मना है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, D, C, E

  2. BOption (b)

    B, A, D, E, C

  3. COption (c)

    B, A, C, D, E

  4. DOption (d)

    C, A, D, E, B

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, A, D, E, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, A, D, E, C

Key Pointsमजदूरी और प्रेम' निबंध में आई पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम -

  • B. हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं।
  • A. आपने चार आने पैसे मजदूर के हाथ में रखकर कहा “यह लो दिन भर की अपनी मजदूरी।” वाह क्या दिल्लगी है !
  • D. मुझे तो मनुष्य के हाथ से बने कामों में उनकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है।
  • E. आदमियों की तिजारत करना मूर्खों का काम है। सोने और लोहे के बदले मनुष्य को बेचना मना है।
  • C. पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है।

Important Points मजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार - सरदार पूर्ण सिंह
  • विधा - निबंध
  • विषय-
  • ​इसके लेखक ने मजदूरों के श्रम तथा उसके सच्चे मूल्य का विवेचन किया है।
  • किसान के खेत में किए गए श्रम तथा गड़रिये द्वारा भेड़ चराने के कार्य का प्रतिदान पैसों से नहीं चुकाया जा सकता।
  • उनका मूल्य परस्पर प्रेम करके ही चुकाया जा सकता है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • प्रेम मजदूरी
  • मजदूरी और कला
  • मजदूरी और फकीरी
  • समाज का पालन करने वाली दूध की धारा
  • पश्चिमी सभ्यता का एक नयाआदर्श

Additional Informationसरदार पूर्ण सिंह -

  • (जन्म- 17 फ़रवरी, 1881, मृत्यु- 31 मार्च, 1931)
  • भारत के विशिष्ट निबंधकारों में से एक थे।
  • ये देशभक्त, शिक्षाविद, अध्यापक, वैज्ञानिक एवं लेखक भी थे।
  • हिंदी निबंध - ‘सच्ची वीरता’, ‘कन्यादान’, ‘पवित्रता’, ‘आचरण की सभ्यता’, ‘मजदूरी और प्रेम’ तथा अमेरिका का मस्ताना योगी वाल्ट हिवट मैंन।
  • पंजाबी कृतियां - ‘अवि चल जोत’, ‘खुले मैदान’, ‘खुले खुंड’, ‘मेरा सांई’, ‘कविदा दिल कविता’।
  • अंंग्रेज़ी कृतियां - ‘दि स्टोरी ऑफ स्वामी राम’, ‘दि स्केचेज फ्राम सिक्ख हिस्ट्री', हिज फीट’, ‘शार्ट स्टोरीज’, ‘सिस्टर्स ऑफ दि स्पीनिंग हवील’, ‘गुरु तेगबहादुर’ लाइफ’, प्रमुख हैं।

Question 45

हिंदी निबंध और निबंधकार का सही युग्म है:

A. सब मिट्टी हो गया - माधव प्रसाद मिश्र

B. धरती और धान - रामवृक्ष बेनीपुरी

C. मुझे मेरे मित्रों से बचाइए - पद्म सिंह शर्मा

D. उजड़ा स्वर्ग - रघुवीर सिंह

E. नगर वधू - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र'

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, D

  2. BOption (b)

    केवल A, C, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, D

  4. DOption (d)

    केवल B, D, E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C, D

Key Pointsहिंदी निबंध और निबंधकार का सही युग्म है:

  • A. सब मिट्टी हो गया - माधव प्रसाद मिश्र
  • C. मुझे मेरे मित्रों से बचाइए - पद्म सिंह शर्मा
  • D. उजड़ा स्वर्ग - रघुवीर सिंह

अन्य विकल्प -

  • B. धरती और धान - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (आत्मकथा)
  • E. नगर वधू - आचार्य चतुरसेन शास्त्री (उपन्यास)

Additional Information

निबंधनिबंधकार
​म्युनिसिपैलिटी के कारनामे, जनकस्य दण्ड, रसज्ञ रंजन, कवि और कविता, लेखांजलि​महावीर प्रसाद द्विवेदी
​शिवशंभू के चिट्ठे, चिट्ठं और खतबालमुकुंद गुप्त
​निबंध नवनीत, खुशामद, आप, बात, भौं, प्रताप पीयूषप्रतापनारायण मिश्र
​साहित्य सरोज, भट्ट निबंधावली (आँसू, रुचि, जात पाँत, सीमा रहस्य, आशा, चलन आदि)बालकृष्ण भट्ट
पाँचवें पैगम्बरभारतेंदु
​मजदूरी और प्रेम, सच्ची वीरता, अमरीका का मस्त जोगी वाल्ट हिटमैन, पवित्रता, कन्यादान, आचरण की सभ्यतासरदार पूर्णसिंह
फिर निराशा क्यों, ठलुआ क्लब, मन की बातें, मेरी असफलताएँ, कुछ उथले कुछ गहरेबाबू गुलाबराय
चिंतामणि (चार भाग) में संकलित निबंध, कविता क्‍या है, साधारणीकरण और व्यक्तिरामचंद्र शुक्ल
साहित्य देवता, अमीर देवता, गरीब देवतामाखनलाल चतुर्वेदी
काव्य कला तथा अन्य निबंध, यथार्थवाद और छायावाद, रंगमंच, मौर्यों का राज्य परिवर्तनप्रसाद
साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध, श्रृंखला की कड़ियाँ, क्षणदा, संधिनी, चिंतन के क्षणमहादेवी वर्मा
जड़ की बात, सोच विचार, मंथन, मैं और वे, साहित्य का श्रेय और प्रेय, इतस्तत:, पूर्वोदियजैनेंद्र
गेहूँ और गुलाब, वंदे वाणी विनायकौ, लाल तारारामवृक्ष बेनीपुरी

Question 46

हिंदी की सार्वदेशिक व्यापकता के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथन मिलते हैं :

A. हिंदी की व्यापकता और लोकप्रियता का एक कारण साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से उसकी संपन्नता भी है।

B. हिंदी को देशव्यापी बनाने में वैष्णव धर्म, सूफी संतों, निर्गुण - सगुण कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

C. सभी रीतिकालीन हिंदी कवि राज्याश्रित थे।

D. हिंदी के विकास में राजनीतिक परिस्थितियों और गतिविधियों का बड़ा हाथ रहा है।

E. अहिंदी प्रदेश व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं थे, इसलिए हिंदी की सार्वदेशिकता का विकास अवरुद्ध हुआ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, E

  2. BOption (b)

    केवल A, B, D

  3. COption (c)

    केवल B, D, E

  4. DOption (d)

    केवल B, C, D

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, D

Key Pointsहिंदी की सार्वदेशिक व्यापकता के सम्बन्ध में कथन -

  • A. हिंदी की व्यापकता और लोकप्रियता का एक कारण साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से उसकी संपन्नता भी है।
  • B. हिंदी को देशव्यापी बनाने में वैष्णव धर्म, सूफी संतों, निर��गुण - सगुण कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • D. हिंदी के विकास में राजनीतिक परिस्थितियों और गतिविधियों का बड़ा हाथ रहा है।

Additional Informationहिन्दी की सार्वदेशिक व्यापकता इस प्रकार है: 

  • हिन्दी को जनतांत्रिक आधार पर विश्व भाषा माना जाता है, दुनिया भर में हिन्दी बोलने-समझने वालों की संख्या तीसरी है।
  • हिन्दी, भारत की पहचान है और यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति, और संस्कारों को दर्शाती है।
  • हिन्दी, दुनिया की सबसे वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है।
  • हिन्दी, एशियाई संस्कृति में अपनी खास भूमिका के कारण, एशिया की प्रतिनिधि भाषा है।
  • हिन्दी, सदियों से सम्पर्क भाषा और राष्ट्रभाषा रही है।
  • हिन्दी को 14 सितंबर, 1949 को भारत की राजभाषा घोषित किया गया था।
  • हिन्दी, आंतरिक स्तर पर अपनी बोलियों के बीच संपर्क स्थापित करती रही है।
  • बाहरी स्तर पर, हिन्दी अन्य भारतीय भाषा बोलने वाले समुदायों के बीच एकमात्र संपर्क भाषा है।

Question 47

लौन्जाइनस उदात्त के पांच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम है ?

A. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता

B. रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव

C. प्रबल तथा अंतःप्रेरित भाव

D. अलंकारों - विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग

E. भव्य शब्द - योजना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, C, D, E, B

  2. BOption (b)

    C, D, B, A, E

  3. COption (c)

    B, D, C, E, A,

  4. DOption (d)

    E, A, C, D, B

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Correct answer

Answer: (a)A.

A, C, D, E, B

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, C, D, E, B

Key Pointsलौन्जाइनस उदात्त के पांच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम है -

  • A. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता
  • C. प्रबल तथा अंतःप्रेरित भाव
  • D. अलंकारों - विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग
  • E. भव्य शब्द - योजना
  • B. रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव

Additional Information

  • ‘लोंजाइनस’ का यूनानी नाम ‘लिगिनुस’ है। (उदात्त का अर्थ - ‘महान’ है।)
  • समय - ईसा की प्रथम से तृतीय शताब्दी के बीच
  • रचना - पेरिइप्सुस/ पेरिहुप्सुस (यह भाषण शास्त्र से संबंधित रचना है।)
  • यह यूनानी भाषा में ‘पत्रात्मक’ शैली में रचित है।
  • इस रचना में कुल 44 अध्ययन है।
  • अरस्तू के बाद लोंजाइनस यूनान के एक महान विचारक और काव्यशास्त्री माने  जाते हैं।

Question 48

“किसी चीज को न जानना यदि ग��त है, तो जान बूझकर न भूल पाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है।” परिंदे' कहानी का उक्त कथन किसने कहा?

  1. AOption (a)

    ह्यूबर्ट

  2. BOption (b)

    करीमुद्दीन

  3. COption (c)

    मिस लतिका

  4. DOption (d)

    डॉक्टर मुकर्जी

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Correct answer

Answer: (d)D.

डॉक्टर मुकर्जी

Why this answer is correct

“किसी चीज को न जानना यदि गलत है, तो जान बूझकर न भूल पाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है।” परिंदे' कहानी का उक्त कथन कहा - डॉक्टर मुकर्जी

Key Pointsपरिंदे -

  • रचनाकार - निर्मल वर्मा
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1959 ई.
  • प्रमुख पात्र - लतिका, गिरीश नेगी, सुधा, प्रिंसिपल मिस गुड, मिस्टर ह्यूबर्ट, डॉक्टर मुखर्जी, करीमुद्दीन, जूली।
  • विषय - इस कहानी में दो तरह के प्रेम प्रसंग और यथार्थ जीवन की कहानी एक साथ चलती है।

Additional Informationनिर्मल वर्मा-

  • (3 अप्रैल 1929 - 25 अक्टूबर 2005)
  • एक हिंदी लेखक, उपन्यासकार, कार्यकर्ता और अनुवादक थे।
  • कहानी संग्रह -
  • जलती झाड़ी (1965)
  • पिछली गर्मियों में (1968)
  • बीच बहस में (1973)
  • मेरी प्रिय कहानियाँ (1973)
  • प्रतिनिधि कहानियाँ (1988)
  • कव्वे और काला पानी (1983)
  • सूखा तथा अन्य कहानियाँ (1995) आदि।

Question 49

'बलरामपुर' नामक स्थान का उल्लेख किस कहानी में हुआ है?

  1. AOption (a)

    राजा निरबंसिया

  2. BOption (b)

    लाल पान की बेगम

  3. COption (c)

    आकाशदीप

  4. DOption (d)

    मारे गये गुलफ़ाम उर्फ़ तीसरी कसम

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Correct answer

Answer: (b)B.

लाल पान की बेगम

Why this answer is correct

'बलरामपुर' नामक स्थान का उल्लेख कहानी में हुआ है - लाल पान की बेगम

Key Pointsलाल पान की बेगम -

  • रचनाकार - फ़णीश्वर नाथ रेणु
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1957 ई.
  • मुख्य पात्र - बिरजू, बिरजू की माँ, बिरजू के पिता, चंपिया, मखनी आदि।
  • विषय - इस कहानी के माध्यम से रेणु जी ने नारी के स्वाभिमान और आत्मसम्मान के चाह को जग-जाहिर किया है।

Important Pointsफ़णीश्वर नाथ रेणु - 

  • (4 मार्च 1921, - 11अप्रैल 1977)
  • एक हिन्दी भाषा के साहित्यकार थे।
  • इनके पहले उपन्यास मैला आंचल को बहुत ख्याति मिली थी,
  • प्रसिद्ध कहानियाँ -
  • मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम)
  • एक आदिम रात्रि की महक
  • लाल पान की बेगम
  • पंचलाइट
  • तबे एकला चलो रे
  • ठेस
  • संवदिया

Additional Informationराजा निरबंसिया -

  • रचनाकार - कमलेश्वर
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1957 ई.
  • मुख्य पात्र - बच्चन सिंह, चंदा, जगपती, राजा निरबंसिया, दयाराम आदि।
  • विषय - यह कहानी लोक कथात्मक शैली पर आधारित है। राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वार की बहुचर्चित कहानी है।
  • कहानी संग्रह -
  • कस्बे का आदमी (1958), खोयी हुई दिशाएं (1963), मांस का दरिया (1966),
  • आज़ादी मुबारक (2002), जिन्दा मुर्दे (1969), इतने अच्छे दिन (1970), कोहरा (1969) आदि।

आकाशदीप -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1929 ई.
  • मुख्य पात्र - चम्पा, बुद्धगुप्त आदि।
  • विषय - यह कहानी लोक कथात्मक शैली पर आधारित है। राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वार की बहुचर्चित कहानी है।
  • कहानी संग्रह - छाया - (1912 ई.), प्रतिध्वनि - (1926 ई.), आँधी - (1932 ई.), इन्द्रजाल - (1936 ई.) आदि।

मारे गये गुलफ़ाम उर्फ़ तीसरी कसम -

  • रचनाकार - फ़णीश्वर नाथ रेणु
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1957 ई.
  • मुख्य पात्र -  हिरामन, हीराबाई आदि।
  • विषय - यह मानवीय संवेदना की उत्कृष्ट कहानी है।

Question 50

“पृथ्वीराज रासो” मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।" यह कथन किसका है ?

  1. AOption (a)

    धीरेन्द्र वर्मा

  2. BOption (b)

    माता प्रसाद गुप्त

  3. COption (c)

    शिव प्रसाद सिंह

  4. DOption (d)

    हजारी प्रसाद द्विवेदी

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Correct answer

Answer: (a)A.

धीरेन्द्र वर्मा

Why this answer is correct

“पृथ्वीराज रासो” मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।" यह कथन का है - धीरेन्द्र वर्मा

Key Pointsपथ्वीराज रासो -

  • रचनाकार :- चंद्रवरदाई
  • छंद संख्या :- 1300
  • इसे "छंदों का अजायबघर" भी कहा जाता है।
  • इसके 4 संस्करण है।
  • यह हिंदी का प्रथम महाकाव्य है।
  • इसके वृहद संस्करण में 69 सर्ग हैं।

Important Pointsधीरेन्द्र वर्मा -

  • (17 मई 1897 - 23 अप्रैल 1973)
  • हिन्दी और ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे।
  • मुख्य रचनाएँ - 'ब्रजभाषा व्याकरण', 'सूरसागर-सार', 'मध्यदेश', 'हिन्दी साहित्य कोश' 'यूरोप के पत्र' आदि।

Additional Informationहज़ारीप्रसाद द्विवेदी -

  • (19 अगस्त 1907 - 19 मई 1979)
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बाङ्ला भाषाओं के विद्वान थे।
  • मुख्य रचनाएँ - सूर साहित्य, बाणभट्ट, कबीर, अशोक के फूल, हिन्दी साहित्य की भूमिका, हिन्दी साहित्य का आदिकाल, नाथ सम्प्रदाय, पृथ्वीराज रासो आदि।

माता प्रसाद गुप्त -

  • (1909 -  1969 ई.)
  • हिन्दी भाषा एवं साहित्य के सर्वप्रमुख अनुसन्धानकर्ताओं में से एक तथा पाठालोचन के सर्वमान्य विशेषज्ञ थे।
  • मुख्य रचनाएँ - तुलसी संदर्भ (1935), तुलसीदास (1942), हिंदी पुस्तक साहित्य (1945), रामचरितमानस (1949) जायसी ग्रंथावली (1951) आदि।

शिव प्रसाद सिंह -

  • (19 अगस्त 1928 - 28 सितंबर 1998)
  • एक भारतीय लेखक, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और हिंदी भाषा के विद्वान थे।
  • वे हिंदी में उपन्यास, लघु कथाएँ और समालोचनाएँ लिखने के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • मुख्य रचनाएँ - वैश्वानर (2004), उत्तरयोगी श्री अरविंद (2008), नीला चांद (2010), गली आगे मुड़ती है (2010), दादी माँ (2011), अलग अलग वैतरणी (2015) आदि।

Question 51

निम्नलिखित राजनीतिक घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में लगाइए ?

A. अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का पहला अधिवेशन

B. अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना

C. सार्वजनिक गणपति पूजा का आरम्भ

D. असहयोग आन्दोलन का आरम्भ

E. बंग विभाजन की घोषणा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    C, B, E, D, A

  2. BOption (b)

    B, C, A, E, D

  3. COption (c)

    C, E, B, A, D

  4. DOption (d)

    E, B, C, A, D

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Correct answer

Answer: (c)C.

C, E, B, A, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - C, E, B, A, D

Key Pointsराजनीतिक घटनाओं को पहले से बाद के क्रम - 

  • C. सार्वजनिक गणपति पूजा का आरम्भ
  • E. बंग विभाजन की घोषणा
  • B. अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना
  • A. अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का पहला अधिवेशन
  • D. असहयोग आन्दोलन का आरम्भ

Additional Informationविशेष जानकारी -

  • लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में पुणे में पहली बार सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाया।
  • बंग विभाजन की घोषणा 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया था।
  • ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन 1906 में ढाका स्थान पर अमल में आया।
  • प्रथम अखिल भारतीय हिंदू महासभा सम्मेलन 1915 में हरिद्वार में आयोजित किया गया था।
  • असहयोग आंदोलन 5 सितंबर 1920 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) द्वारा शुरू किया गया था।

Question 52

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए 

सूची I (काव्य - लक्षण)सूची II (आचार्य)
A.वाक्यं रसात्मकं काव्यम्I.वामन
B.शब्दार्थो सहितो काव्यं गद्यं-पद्यं च तत द्विधाII.विश्वनाथ
C.रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्III.भामह
D.काव्य शब्दोऽयं गुणालंकार संस्कृतयो: शब्दार्थ योर्वततIV.पंडित राज जगन्नाथ

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - II, C - IV, D - III

  2. BOption (b)

    A - II, B - III, C - IV, D - I

  3. COption (c)

    A - IV, B - II, C - I, D - III

  4. DOption (d)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - II, B - III, C - IV, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - III, C - IV, D - I

Key Points

सूची I (काव्य - लक्षण)सूची II (आचार्य)
A.वाक्यं रसात्मकं काव्यम्II.विश्वनाथ
B.शब्दार्थो सहितो काव्यं गद्यं-पद्यं च तत द्विधाIII.वामन
C.रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्IV.भामह
D.काव्य शब्दोऽयं गुणालंकार संस्कृतयो: शब्दार्थ योर्वततI.पंडित राज जगन्नाथ

Additional Informationविश्वनाथ -

  • (पूरा नाम आचार्य विश्वनाथ महापात्र) संस्कृत काव्य शास्त्र के मर्मज्ञ और आचार्य थे।
  • वे साहित्य दर्पण सहित अनेक साहित्यसम्बन्धी संस्कृत ग्रन्थों के रचयिता हैं।
  • उन्होंने आचार्य मम्मट के ग्रंथ काव्य प्रकाश की टीका भी की है जिसका नाम "काव्यप्रकाश दर्पण" है।
  • ​कृतियाँ - राघव विलास, संस्कृत महाकाव्य, कुवलयाश्वचरित्प्रा, कृत भाषाबद्ध काव्य, नरसिंहविजय आदि।

वामन -

  • (8वीं शताब्दी का उत्तरार्ध - 9वीं शताब्दी का पूर्वार्ध) प्रसिद्ध अलंकारशास्त्री थे।
  • उनके द्वारा प्रतिपादित काव्यलक्षण को रीति-सिद्धान्त कहते हैं।
  • वामन द्वारा रचित काव्यालङ्कारसूत्र, काव्यशास्त्र का दर्शन निर्माण का प्रथम प्रयास है।
  • यह ग्रन्थ सूत्र रूप में है। वे रीति को काव्य की आत्मा कहते हैं।

भामह -

  • आचार्य भामह काव्यशास्त्र के सुप्रसिद्ध आचार्य थे।
  • इन्हें अलंकार संप्रदाय का जनक कहते हैं।
  • "शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्" इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य परिभाषा है।
  • आचार्य भामह की कीर्तिपताका को फहराने वाला यही काव्यालङ्कार ग्रन्थ है।
  • इसमें कुल 6 परिच्छेद तथा 400 श्लोक हैं ,
  • जिसमें उन्होंने मुख्यरूप से 5 विषयों का प्रतिपादन किया है –
  • काव्य शरीर , अलङ्कार , दोष , न्याय और शब्द शुद्धि।

पंडित राज जगन्नाथ -

  • (1590-1670)
  • उच्च कोटि के कवि, समालोचक, साहित्यशास्त्रकार तथा वैयाकरण थे।
  • कवि के रूप में उनका स्थान उच्च कोटि के उत्कृष्ट कवियों में कालिदास के अनंतर, कुछ विद्वान् रख���े हैं।
  • "रसगंगाधर"कार के रूप में उनके साहित्यशास्त्रीय पांडित्य और उक्त ग्रंथ का पंडितमंडली में बड़ा आदर है।
  • ​कृतियाँ - ​
  • भामिनीविलास - विभिन्न अवसरों पर रचित विविध काव्यों का संग्रह।
  • "रस गंगाधरम" (अलंकार शास्त्रम),
  • गंगा लहरी,
  • पांच विलासम

Question 53

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (नाटक)सूची II (पात्र)
A.चन्द्रगुप्तI.अनिमा
B.स्कंदगुप्तII.प्रियंगुमंजरी
C.अंजो दीदीIII.मालिनी
D.आषाढ़ का एक दिनIV.लीला

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - IV, B - I, C - III, D - II

  2. BOption (b)

    A - IV, B - III, C - II, D - I

  3. COption (c)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

  4. DOption (d)

    A - IV, B - III, C - I, D - II

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Correct answer

Answer: (d)D.

A - IV, B - III, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - III, C - I, D - II

Key Points

सूची I (नाटक)सूची II (पात्र)
A.चन्द्रगुप्तIV.लीला
B.स्कंदगुप्तIII.मालिनी
C.अंजो दीदीI.अनिमा
D.आषाढ़ का एक दिनIV.प्रियंगुमंजरी

Additional Informationचन्द्रगुप्त -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1931 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • ​पुरुष पात्र: चंद्रगुप्त, चाणक्य, राक्षस, पर्वतेश्वर, सिंहरण, वररुचि, सिकंदर, फ़िलिप्स आदि। 

महिला पात्र: अलका, सुवासिनी, कल्याणी, नीला, लीला, मालविका, कार्नेलिया, एलिस आदि।

  • विषय - 
  • चन्द्रगुप्त 'नाटक' मौर्य साम्राज्य के उत्थान और मगध के राजा घनानंद के पतन की कहानी है।

स्कंदगुप्त -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1928 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पृथ्वीसेन, देवकी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी आदि।
  • विषय -  
  • यह नाटक गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के जीवन पर आधारित है।

अंजो दीदी -

  • रचनाकार - उपेन्द्रनाथ अश्क
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1955 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • अंजली, श्रीपात, इन्द्रनारायण, अनिमा, नीरज, मुन्नी, राधू आदि।
  • विषय - 
  • यह नाटक पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक हैं। इसमें यांत्रिक ढाँचे में ढालने की प्रवृति है।
  • यह मनोविकारों के घात-प्रतिघात और उनकी प्रतिक्रिया की कहानी है।

आषाढ़ का एक दिन -

  • रचनाकार - मोहन राकेश
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष -  1958 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • कालिदास, मल्लिका, अंबिका, प्रियंगुमंजरी, विलोम आदि।
  • विषय - यह नाटक कालिदास जी की कीर्ति और उन्ही के जीवन पर आधारित है।

Question 54

पालि के प्रसिद्ध वैयाकरण कच्चायन के अनुसार पालि में कितनी ध्वनियाँ थीं ?

  1. AOption (a)

    40

  2. BOption (b)

    41

  3. COption (c)

    42

  4. DOption (d)

    43

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Correct answer

Answer: (b)B.

41

Why this answer is correct

सही उत्तर है - 41

Key Points

  • पाली भाषा के प्रसिद्ध वैयाकरण कच्चायन के मुताबिक, पालि भाषा में कुल 41 ध्वनियां थीं।
  • कच्चायन व्याकरण, पालि भाषा का सबसे पुराना उपलब्ध व्याकरण है, इसमें कुल 675 सूत्र हैं।
  • इसकी रचना में संस्कृत के कातंत्र व्याकरण और अष्टाध्यायी का अनुसरण किया गया है।

Important Pointsपालि के ध्वनि समूह का परिचय -

  • कच्चायन के अनुसार पालि में 41 ध्वनियाँ थीं,
  • लेकिन मोग्गलायन इसमें 43 ध्वनियाँ मानते हैं।
  • लेकिन कहा जाता है कि पालि में कुल 47 ध्वनियाँ हैं।

Additional Informationपाली भाषा के बारे में कुछ और बातें: 

  • पालि भाषा को पाली-मगधी के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप की एक शास्त्रीय मध्य इंडो-आर्यन भाषा है।
  • यह बौद्ध पाली कैनन या टिपिटका की भाषा है।
  • यह थेरवाद बौद्ध धर्म की पवित्र भाषा भी है।
  • पालि भाषा में ऋ, ऐ, औ जैसे स्वरों का प्रयोग नहीं मिलता है।
  • पालि भाषा में दो नए स्वर हृस्व ए और ओ मिलते हैं।
  • पालि भाषा में श, ष नहीं मिलते।
  • पालि भाषा सहित सभी प्राकृत भाषाएं 'मध्य भारतीय आर्य भाषाएँ' हैं।
  • इन भाषाओं का काल लगभग ईसा पूर्व 500 से 1000 ईस्वी तक माना जाता है।

Question 55

सिंदूर की होली नाटक में मनोरमा के कथन हैं :

A. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूंगी ।

B. तुम जानती हो मैं किसे प्रेम करती हूँ, प्रेम दो - चार से तो नहीं हो सकता और फिर अब प्रथम दर्शन में प्रेम का समय भी नहीं रहा।

C. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती ? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है । कला का आधार तो हे विश्वास और शिक्षा का संदेह ।

D. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष ।

E. तुम कहते हो कि तुम जीवन भर अविवाहित रहोगे। इतना ही नहीं कितनी अनर्गल बातें तुम कह जाते हो । दस वर्ष का समय बीत गया। मेरा व्यवहार तुम्हारे साथ कैसा रहा, तुम स्वयं जानते हो।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और D

  2. BOption (b)

    केवल B, D और E

  3. COption (c)

    केवल B, C और D

  4. DOption (d)

    केवल A, C और D

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, C और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C और D

Key Points'सिंदूर की होली' नाटक में मनोरमा के कथन हैं :

  • A. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूंगी ।
  • C. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती ? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है । कला का आधार तो हे विश्वास और शिक्षा का संदेह ।
  • D. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष ।

Important Pointsसिंदूर की होली -

  • रचनाकार - पण्डित लक्ष्मीनारायण मिश्र
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1934 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • ​इस नाटक में कुल नौ (9) पात्र है। जिसमें सात (7) पुरुष और दो (2) स्त्री पात्र है।
  • पुरुष पात्र: रजनीकांत, मनोजशंकर, मुरारीलाल, माहिरअली, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह, डॉक्टर।
  • स्त्री पात्र: चंद्रकला, मनोरमा।
  • विषय - 
  • यह एक समस्या प्रधान नाटक है।
  • इस नाटक में उन्होंने चिरंतन नारित्व की समस्या का प्रतिपादन किया है।

Additional Informationपण्डित लक्ष्मीनारायण मिश्र -

  • (17 दिसंबर 1903 – 19 अगस्त 1987)
  • भारत के एक भारतीय राष्ट्रवादी , शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ और लेखक थे।

कृतियाँ:

  • सामाजिक नाटक: अशोक (1926), सन्यासी (1930), राक्षस का मंदिर (1931), मुक्ति का रहस्य (1932),
  • राजयोग (1933), सिंदूर की होली (1934), आधी रात (1936), (1930), गुडिया का घर(1930)।
  • ऐतिहासिक नाटक: गरुड़ध्वज (1945), वत्सराज (1950) दशाश्वमेध (1950), वितस्ता की लहरें (1957),
  • जगद्गुरु (1958), सरयू की धार (1974), गंगाद्वार (1974)।
  • पौराणिक नाटक: नारद की वीणा (1946 ), चक्रव्यूह (1954) चित्रकूट, अपराजित, प्रतिज्ञा का योग।

Question 56

'कविता क्या है?" निबंध से संबंधित सत्य कथन हैं:

A. इस शीर्षक से शुक्ल जी ने 1909 में एक छोटा सा लेख लिखा था ।

B. निरंतर संशोधन - परिवर्धन के द्वारा अंततः 1929 में इसे अंतिम रूप प्राप्त हुआ।

C. कविता का अंतिम लक्ष्य मनुष्य हृदय से सामंजस्य स्थापन करके उनके साथ जगत के मार्मिक पक्षों का प्रत्यक्षीकरण है।

D. सौन्दर्य बाहर और मन के भीतर की वस्तु है।

E. मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करनेवाली मूल प्रवृत्ति भावात्मिका है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. AOption (a)

    केवल A, B, E

  2. BOption (b)

    केवल A, B, D

  3. COption (c)

    केवल B, C, D

  4. DOption (d)

    केवल B, D, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, E

Key Points'कविता क्या है?" निबंध से संबंधित सत्य कथन हैं:

  • A. इस शीर्षक से शुक्ल जी ने 1909 में एक छोटा सा लेख लिखा था ।
  • B. निरंतर संशोधन - परिवर्धन के द्वारा अंततः 1929 में इसे अंतिम रूप प्राप्त हुआ।
  • E. मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करनेवाली मूल प्रवृत्ति भावात्मिका है।

Important Pointsकविता क्या है? -

  • रचनाकार - रामचंद्र शुक्ल
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1909 ई.
  • विषय - 
  • यह निबंध 'चिंतामणि' के भाग - 1 में संकलित है। ​
  • कविता, किसी संवेदनशील व्यक्ति की भावनाओं की पद्यात्मक अभिव्यक्ति है।

Additional Informationरामचंद्र शुक्ल -

  • (4 अक्टूबर 1884 - 2 फरवरी 1941)
  • हिन्दी आलोचक, कहानीकार, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • मौलिक कृतियाँ -
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ - उनके निबन्ध 'चिंतामणि' नामक ग्रंथ के दो भागों में संग्रहीत हैं।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ - सूर, तुलसी, जायसी पर की गई आलोचनाएँ, काव्य में रहस्यवाद,
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद, रसमीमांसा आदि शुक्ल की आलोचनात्मक रचनाएँ हैं।
  • ऐतिहासिक ग्रन्थ - हिंदी साहित्य का इतिहास उनका अनूठा ऐतिहासिक ग्रंथ है।

Question 57

अरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत के अंगों का सही अनुक्रम है -

A. कथानक

B. विचार

C. चरित्र

D. गीत

E. पदयोजना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    D, E, B, A, C

  2. BOption (b)

    C, A, E, D, B

  3. COption (c)

    E, A, D, B, C

  4. DOption (d)

    A, C, B, E, D

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Correct answer

Answer: (d)D.

A, C, B, E, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, C, B, E, D

Key Pointsअरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत के अंगों का सही अनुक्रम है -

  • A. कथानक
  • C. चरित्र
  • B. विचार
  • E. पदयोजना
  • D. गीत

Additional Informationअरस्तू के त्रासदी के सिद्धांत -

  • त्रासदी का अर्थ: ‘त्रासदी’ अंग्रेजी के ‘ट्रेजडी’ शब्द का हिंदी रूपांतरण है।
  • इसका आशय है- दुखांतक या दुःखपूर्ण रचना अथार्त जिस रचना का अंत दुःखपूर्ण हो।
  • अरस्तू ने ‘पेरिपोइतिकेस’ (पायटिक्स) के 6 से 19 वें तक के अध्यायों में त्रासदी की विस्तार से विवेचन किया है।
  • अरस्तू के अनुसार- “त्रासदी गंभीर स्वतःपूर्ण रचना है, जिसका एक निश्चित आयाम होता है।
  • यह दुःखपूर्ण कार्य व्यापार है जिसका मूल लक्ष्य दूषित विचारों का शमन है।”
  • अरस्तु ने त्रासदी के अंगों का विवेचन संरचनात्मक-विश्लेषणात्मक पद्धति से किया है।
  • अरस्तू के मुताबिक, त्रासदी के प्रमुख अंगों का सही क्रम है:
  • कथानक, चरित्र, पदयोजना (भाषा), विचार, दृश्य विधान, गीत।
  • अरस्तु के अनुसार: त्रासदी के तीन उद्देश्य हैं -
  • भाव्यंतर चित्रण (घटना और नायक दोनों भव्य होना चाहिए)
  • विचारों का शुद्धिकरण (सकारात्मक विचारों का शुद्धिकरण)
  • दूषित विचारों का उत्तेजना के माध्यम से शांत करना।

Question 58

बाणभट्ट की आत्मकथा' में आई पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. विहार से जब में बाहर निकला, तो चित्त प्रसन्न था।आती बार मैंने रास्ते की ओर दृष्टि ही नहीं दी थी।

B. निपुणिका आंगन के बाहर मेरी प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी सखी बनकर मैं जब बाहर आया, तो ......

C. यद्यपि बाणभट्ट नाम से ही मेरी प्रसिद्धि है; पर यह मेरा वास्तविक नाम नहीं है।

D. निपुणिका ने अपनी स्वामिनी को छिपा रखने के लिए जिस स्थान को चुना था, उसके दर्शन - मात्र से मेरा ह्रदय बेठ गया।

E. भावी जीवन की रंगीन कल्पनाओं में डूबते - उतराते मनुष्य को आस पास देखने की फुरसत कहाँ होती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    B, E, C, A, D

  2. BOption (b)

    C, E, B, D, A

  3. COption (c)

    C, B, E, D, A

  4. DOption (d)

    B, C, E, A, D

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Correct answer

Answer: (b)B.

C, E, B, D, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - C, E, B, D, A

Key Pointsबाणभट्ट की आत्मकथा' में आई पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम - 

  • C. यद्यपि बाणभट्ट नाम से ही मेरी प्रसिद्धि है; पर यह मेरा वास्तविक नाम नहीं है।
  • E. भावी जीवन की रंगीन कल्पनाओं में डूबते - उतराते मनुष्य को आस पास देखने की फुरसत कहाँ होती है।
  • B. निपुणिका आंगन के बाहर मेरी प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी सखी बनकर मैं जब बाहर आया, तो......
  • D. निपुणिका ने अपनी स्वामिनी को छिपा रखने के लिए जिस स्थान को चुना था, उसके दर्शन - मात्र से मेरा ह्रदय बेठ गया।
  • A. विहार से जब में बाहर निकला, तो चित्त प्रसन्न था।आती बार मैंने रास्ते की ओर दृष्टि ही नहीं दी थी।

Important Pointsबाणभट्ट की आत्मकथा -

  • रचनाकार - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1946 ई.
  • मुख्य पात्र -  बाणभट्ट, अघोर, भैरव, विरतिव्रज, निपुणिका, भट्टिनी, महामाया।
  • विषय - कवि बाणभट्ट के जीवन का आधार लेकर राजा हर्षवर्द्धन के समय की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक स्थितियों का चित्रण किया है।

Additional Informationआचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी -

  • (19 अगस्त 1907 - 19 मई 1979)
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बाङ्ला भाषाओं के विद्वान थे।
  • उपन्‍यास - बाणभट्ट की आत्‍मकथा (1946), चारु चंद्रलेख(1963), पुनर्नवा(1973), अनामदास का पोथा (1976)।
  • निबन्ध संग्रह - अशोक के फूल (1948), कल्‍पलता (1951), विचार और वितर्क (1957), विचार-प्रवाह (1959), आलोक पर्व (1972) आदि।
  • आलोचनात्मक - सूर साहित्‍य (1936), हिन्‍दी साहित्‍य की भूमिका (1940), कबीर (1942), हिन्‍दी साहित्‍य का आदिकाल (1952), साहित्‍य का मर्म (1949) आदि।

Question 59

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (पत्र - पत्रिकाएँ)सूची II (संपादक)
A.सज्जन कीर्ति सुधाकरI.सीताराम
B.प्रयाग समाचारII.केशव राम भट्ट
C.शुभचिंतकIII.वंशीधर
D.बिहार बंधुIV.देवकीनंदन त्रिपाठी

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  2. BOption (b)

    A - II, B - IV, C - III, D - I

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - IV, B - I, C - III, D - II

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

A - III, B - IV, C - I, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - IV, C - I, D - II

Key Points

सूची I (पत्र - पत्रिकाएँ)सूची II (संपादक)
A.सज्जन कीर्ति सुधाकर (1879)III.वंशीधर
B.प्रयाग समाचार  (1940)IV.देवकीनंदन त्रिपाठी
C.शुभचिंतक (1940)I.सीताराम
D.बिहार बंधु (1929)III.केशव राम भट्ट

Additional Information

क्र.म.पत्रिकाएँप्रकाशन वर्षस्थानसंपादक
1उदन्त मार्तंड- साप्ताहिक30 मई 1826कलकत्ताजुगल किशोर
2बंगदूत- साप्ताहिक1829कलकत्ताराजा राम मोहन राय
3बनारस अख़बार-साप्ताहिक1845बनारसराजा शिव प्रसाद सिंह
4सुधाकर- साप्ताहिक1850काशीबाबु तारा मोहन मित्र
5बुद्ध‌‍ि प्रकाश1852आगरामुंशी सदासुखलाल
6प्रजा हितैषी1855आगराराजा लक्ष्मण सिंह
7कवि वचन सुधा- मासिक1868काशीभारतेंदु
8हरिश्चन्द्र मैगजीन- मासिक1873बनारसभारतेंदु
9बाल बोधनी- मासिक1874बनारसभारतेंदु
10भारत मित्रकलकत्तारूद्र दत्त
11हिंदी प्रदीप- मासिक1877प्रयागबाल कृष्ण भट्ट
12आनंद कादम्बिनी- मासिक1881मिर्जापुरबदरी नारायण चौधरी
13ब्राह्मण- मासिक1883कानपुरप्रताप नारायण मिश्र
14उपन्यास- मासिक1898काशीगोपाल राम गहमरी
15सुदर्शन- मासिक1900काशीदेवकीनंदन/माधव
16समालोचक- मासिक1902जयपुरगुलेरी
17सुधा- मासिक1929लखनऊदुलारेलाल भार्गव
18विशाल भारत- मासिक1928कलकत्ताबनारसीदास चतुर्वेदी
19साहित्य सन्देश- मासिक1937आगराबाबू गुलाब राय
20नवजीवन- साप्ताहिक1921अहमदाबादगाँधी
21देश- साप्ताहिक1920पटनाराजेन्द्र प्रसाद
22कर्मवीर- साप्ताहिक1924जबलपुरमाखनलाल चतुर्वेदी
23प्रतीक-दृमासिक1947इलाहाबादअज्ञेय
24धर्मयुग- साप्ताहिक1950बम्बईधर्मवीर भारती
25ज्ञानोदय- मासिक1955कलकत्ताकन्हैया लाल मिश्र
26कृति1958दिल्लीनरेश मेहता
27समालोचक- मासिक1958आगरारामविलास शर्मा
28पहल-त्रैमासिक1960जयपुरज्ञानरंजन

Question 60

'ध्रुवस्वामिनी' नाटक में ध्रुवस्वामिनी के संवादों को पहले से बाद के क्रम में लगाएँ :

A. लौट जाओ, इस तुच्छ नारी - जीवन के लिए इतने महान उत्सर्ग की आवश्यकता नहीं।

B. चन्द्रे ! तुम मुझे दोनों ओर से नष्ट न करो। यहाँ से लोट जाने पर भी क्या मैं गुप्तकुल के अन्तःपुर में रहने पाऊँगी?

C. तो फिर मेरा और तुम्हारा जीवन - मरण साथ ही होगा।

D. चन्द्रे ! मेरे भाग्य के आकाश में धूमकेतु - सी अपनी गति बंद करो।

E. अपनी कामना की वस्तु न पाकर यह आत्महत्या जैसा प्रसंग तो नहीं है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, D, E, C

  2. BOption (b)

    A, E, B, D, C

  3. COption (c)

    B, E, A, C, D

  4. DOption (d)

    B, A, E, D, C

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

A, E, B, D, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A, E, B, D, C

Key Points'ध्रुवस्वामिनी' नाटक में ध्रुवस्वामिनी के संवादों को पहले से बाद के क्रम -

  • A. लौट जाओ, इस तुच्छ नारी - जीवन के लिए इतने महान उत्सर्ग की आवश्यकता नहीं।
  • E. अपनी कामना की वस्तु न पाकर यह आत्महत्या जैसा प्रसंग तो नहीं है।
  • B. चन्द्रे ! तुम मुझे दोनों ओर से नष्ट न करो। यहाँ से लोट जाने पर भी क्या मैं गुप्तकुल के अन्तःपुर में रहने पाऊँगी?
  • D. चन्द्रे ! मेरे भाग्य के आकाश में धूमकेतु - सी अपनी गति बंद करो।
  • C. तो फिर मेरा और तुम्हारा जीवन - मरण साथ ही होगा।

Important Pointsध्रुवस्वामिनी -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1933 ई.
  • विषय - इसमें स्त्री की स्वाधीनता और समता की, उसके सम्मान और अधिकारों की रक्षा की जरूरत को उजागर करना है।

Additional Informationजयंशकर प्रसाद-

  • जन्म- 1889-1937 ई.
  • हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे।
  • कहानी-संग्रह- छाया (1912 ई.), प्रतिध्वनि (1926 ई.), आकाशदीप (1929 ई.), आँधी (1931 ई.), इन्द्रजाल (1936 ई.) आदि।
  • नाटक - चन्द्रगुप्त (1931 ई.), स्कन्दगुप्त (1928 ई.), जनमेजय का नागयज्ञ (1926 ई.), एक घूँट (1930 ई.), विशाख (1921 ई.), अजातशत्रु (1922 ई.) आदि।

Question 61

‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं?' के अनुसार सत्य कथन हैं:

A. देवताओं के राजा का वज्र, जो दधीचि मुनि की हड्डियों से बना था ।

B. नखधर मनुष्य अब एटम बम पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है।

C. मेरे निर्बोध बालक ने मानो मनुष्य जाति से ही प्रश्न किया है जानते हो, नाख़ून क्यों बढ़ते हैं ?

D. एक बूढ़ा कहता था - बाहर नहीं, भीतर की ओर देखो। हिंसा को मन से दूर करो ....

E. महावीर ने ठीक ही कहा था कि मनुष्य की मनुष्यता यही है कि वह सबके दुःख सुख को सहानुभूति के साथ देखता है ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, E

  2. BOption (b)

    केवल A, B, D

  3. COption (c)

    केवल B, C, D

  4. DOption (d)

    केवल B, C, E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, D

Key Points‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं?' के अनुसार सत्य कथन हैं: 

  • A. देवताओं के राजा का वज्र, जो दधीचि मुनि की हड्डियों से बना था ।
  • B. नखधर मनुष्य अब एटम बम पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है।
  • D. एक बूढ़ा कहता था - बाहर नहीं, भीतर की ओर देखो। हिंसा को मन से दूर करो ....

Important Points नाख़ून क्यों बढ़ते हैं? -

  • रचनाकार - हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1951 ई.
  • विषय - 
  • यह विचार-प्रधान व्यक्तिनिष्ठ निबन्ध है।
  • इसमें नाखून का बढ़ना पशुता का प्रतीक है और नाखून का काटना मानवता का प्रतीक माना गया है।

Additional Informationहज़ारीप्रसाद द्विवेदी -

  • (19 अगस्त 1907 - 19 मई 1979)
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बाङ्ला भाषाओं के विद्वान थे।
  • निबन्ध संग्रह - अशोक के फूल (1948), कल्‍पलता (1951), मध्यकालीन धर्मसाधना (1952),
  • विचार और वितर्क (1957), विचार-प्रवाह (1959), कुटज (1964), आलोक पर्व (1972)।
  • कुछ निबन्ध -
  • कल्पतरु
  • गतिशील चिंतन
  • साहित्य सहचर
  • अशोक के फूल
  • देवदारू
  • बसंत आ गया
  • वर्षा घनपति से घनश्याम तक
  • मेरी जन्मभूमि
  • घर जोड़ने की माया ​

Question 62

‘शिवमूर्ति’ निबंध के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा मूर्तियों का मुख्य रंग नहीं है?

  1. AOption (a)

    श्वेत

  2. BOption (b)

    लाल

  3. COption (c)

    काला

  4. DOption (d)

    हरा

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Correct answer

Answer: (d)D.

हरा

Why this answer is correct

‘शिवमूर्ति’ निबंध के अनुसार मूर्तियों का मुख्य रंग नहीं है - हरा

Key Pointsनिबंध का अंश -

  • मुख्य रंग तीन हैं। श्वेत जिसका अर्थ यह है कि परमात्मा शुद्ध है, स्वच्छ है;
  • उसकी किसी बात में किसी का कुछ मेल नहीं है।
  • पर सभी उसके ऐसे आश्रित हो सकते हैं जैसे उजले रंग पर सब रंग।
  • वह त्रिगुणातीत तो हुई, पर त्रिगुणालय भी उसके बिना कोई नहीं।
  • यदि हम सतोगुणमय भी कहें तो बेअदबी नहीं करते! दूसरा लाल रंग है जो रजोगुण का वर्ण है।
  • ऐसा कौन कह सकता है कि यह संसार भर का ऐश्वर्य किसी और का है।
  • और लीजिये कविता के आचार्यों ने अनुराग का रंग लाल कहा है। फिर अनुराग देव का रंग और क्या होगा?
  • तीसरा रंग काला है। उसका भाव सब सोच सकते हैं कि सबसे पक्का यही रंग है, इस पर दूसरा रंग नहीं चढ़ता।

Important Pointsशिवमूर्ति -

  • रचनाकार - प्रतापनारायण मिश्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - (19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में लिखा गया)
  • विषय - 
  • इसमें प्रतीकों के माध्यम से बड़े सरल और सहज ढंग से इस बात को रेखांकित किया गया है
  • कि भारत का शिक्षित वर्ग भारतीयता. भारतीय संस्कृति और भारतीय प्रतीकों के प्रति कितना उदासीन हैं।

Additional Informationप्रतापनारायण मिश्र -

  • (24 सितंबर, 1856 - 6 जुलाई, 1894)
  • भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख लेखक, कवि और पत्रकार थे।
  • हिंदी, हिंदू, हिदुस्तान उनका प्रसिद्ध नारा था।
  • निबंध संग्रह - निबंध नवनीत, प्रताप पीयूष, प्रताप समीक्षा।
  • नाटक: गो संकट, कलिकौतुक, कलिप्रभाव, हठी हम्मीर। जुआरी-खुआरी (प्रहसन)। संगीत शाकुंतल (कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुंतम्' का अनुवाद)।
  • कविता : प्रेम पुष्पावली, मन की लहर, कानपुर महात्म्य, ब्रैडला स्वागत, दंगल खंड, तृप्यन्ताम्, लोकोक्तिशतक, दीवो बरहमन (उर्दू)।

Question 63

"जितना ग्राम गीत शीघ्र फैलते हैं और जितना काव्य को संगीत द्वारा सुनकर चित्त पर प्रभाव पड़ता है उतना साधारण शिक्षा से नहीं होता।” उक्त कथन किस लेखक का है?

  1. AOption (a)

    शिव प्रसाद 'सितारे हिन्द'

  2. BOption (b)

    राधाकृष्ण दास

  3. COption (c)

    भारतेंदु हरिश्चंद्र

  4. DOption (d)

    प्रताप नारायण मिश्र

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Correct answer

Answer: (c)C.

भारतेंदु हरिश्चंद्र

Why this answer is correct

"जितना ग्राम गीत शीघ्र फैलते हैं और जितना काव्य को संगीत द्वारा सुनकर चित्त पर प्रभाव पड़ता है उतना साधारण शिक्षा से नहीं होता।” उक्त कथन लेखक का है - भारतेंदु हरिश्चंद्र

Key Pointsभारतेन्‍दु हर‍िश्‍चन्‍द्र -

  • जन्म- 1850 - 1885 ई.
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • भारतेन्दु हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • नाटक-
  • वैदिक हिंसा हिंसा न भवति, 1873 ई. (वैदिक हिंसा हिंसा न भवति)
  • सत्य हरिश्चंद्र, 1876 ई. (सत्य हरिश्चंद्र)
  • भारत दुर्दशा, 1875 ई.
  • नीलादेवी, 1881 ई. (नीलदेवी)
  • अंधेर नगरी (अंधेर नगरी, अंधेरे का शहर), 1881 ई.

Additional Informationशिव प्रसाद 'सितारे हिन्द' -

  • (3 फरवरी 1823 - 23 मई 1895)
  • एक भारतीय विद्वान, भाषाविद् और इतिहासकार थे।
  • उन्हें राजा की उपाधि दी गई थी और पुराने दस्तावेज़ों में उनके नाम या उपसर्ग "बाबू" का इस्तेमाल किया गया है,
  • रचनाएँ - मानव धर्मसार, वामा मनरंजन, आतसियों का कोड़ा, विद्यांकर, राजा भोज का सपना।

राधाकृष्ण दास -

  • (जन्म- 1865, मृत्यु- 2 अप्रैल, 1907)
  • हिन्दी के प्रमुख सेवक तथा साहित्यकार थे। वे भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के फुफेरे भाई थे।
  • वे प्रसिद्ध सरस्वती पत्रिका के सम्पादक मंडल में रहे। वे नागरी प्रचारिणी सभा के प्रथम अध्यक्ष भी थे।
  • रचनाएँ - 'धर्मालाप', 'दुःखिनी बाला', 'पद्मावती', 'निस्सहाय हिंदू' तथा 'महाराणा प्रताप' आदि।

प्रताप नारायण मिश्र -

  • (24 सितंबर, 1856 - 6 जुलाई, 1894)
  • भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख लेखक, कवि और पत्रकार थे।
  • रचनाएँ - 
  • नाटक : गो संकट, कलिकौतुक, कलिप्रभाव, हठी हम्मीर। जुआरी-खुआरी (प्रहसन)। संगीत शाकुंतल (कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुंतम्' का अनुवाद)।
  • निबंध संग्रह :  निबंध नवनीत, प्रताप पीयूष, प्रताप समीक्षा।
  • कविता : प्रेम पुष्पावली, मन की लहर, कानपुर महात्म्य, ब्रैडला स्वागत, दंगल खंड, तृप्यन्ताम्, लोकोक्तिशतक, दीवो बरहमन (उर्दू)।

Question 64

दिनकर के गीति - नाट्य 'उर्वशी' में निम्नलिखित विशेषताएँ दृष्टिगत होती हैं -

A. उर्वशी में स्त्री - देह के प्रति उपेक्षा का भाव है।

B. उर्वशी प्रेम और श्रृंगार के आवेग का काव्य है।

C. उर्वशी और पुरुरवा के बीच प्रेम बहुत आध्यात्मिक स्तर का है।

D. उर्वशी अपने नवजात शिशु की देखभाल स्वयं करती है।

E. उर्वशी में रति चित्रों की पुनरावृत्ति बहुत है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C

  2. BOption (b)

    केवल B, C, D

  3. COption (c)

    केवल B, D, E

  4. DOption (d)

    केवल A, C, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A, B, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, C

Key Pointsदिनकर के गीति - नाट्य 'उर्वशी' में दृष्टिगत होती हैं -

  • A. उर्वशी में स्त्री - देह के प्रति उपेक्षा का भाव है।
  • B. उर्वशी प्रेम और श्रृंगार के आवेग का काव्य है।
  • C. उर्वशी और पुरुरवा के बीच प्रेम बहुत आध्यात्मिक स्तर का है।

Important Pointsउर्वशी-

  • रचनाकार - रामधारी सिंह द‍िनकर
  • विधा - कविता (महाकव्य)
  • प्रकाशन वर्ष - 1961 ई.
  • विषय - उर्वशी प्रेम और सौन्दर्य का काव्य है।

Additional Information रामधारी सिंह द‍िनकर-

  • जन्म- 1908 - 1974 ई.
  • जिन्हें उनके उपनाम दिनकर से जाना जाता है ,
  • एक भारतीय हिंदी भाषा के कवि, निबंधकार, स्वतंत्रता सेनानी, देशभक्त और शिक्षाविद थे।
  • कविता संग्रह-
  • प्रणभंग (1929 ई.)
  • रेणुका (1935 ई.)
  • हुंकार (1938 ई.)
  • कुरूक्षेत्र (1946 ई.)
  • रश्मिरथी (1952 ई.)
  • नीम के पत्ते (1954 ई.) आदि। ​

Question 65

जिमि लोण विलिज्जइ पाणिएहि तिम घरिणी लइ चित्त।

समरस जाई तक्खणे जइ पुणु ते सम णिन्त।

इन काव्य - पंक्तियों के रचनाकार सिद्ध कवि हैं -

  1. AOption (a)

    कण्हपा

  2. BOption (b)

    कमरिपा

  3. COption (c)

    सरहपा

  4. DOption (d)

    डोम्बिपा

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Correct answer

Answer: (a)A.

कण्हपा

Why this answer is correct

जिमि लोण विलिज्जइ पाणिएहि तिम घरिणी लइ चित्त।

समरस जाई तक्खणे जइ पुणु ते सम णिन्त।

इन काव्य - पंक्तियों के रचनाकार सिद्ध कवि हैं - कण्हपा

Key Pointsकण्हपा -

  • कण्हपा का समय विवादास्पद है,समय विक्रमी संवत् 810 माना जाता है। डॉ रामकुमार वर्मा इससे सहमत नहीं है।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ नगेन्द्र, राहुल सांकृत्यायन तथा नागरी प्रचारिणी सभा, काशी 820 ई० माना है।
  • इनका मूल नाम कर्णपा था। कृष्ण वर्ण होने के कारण ये कृष्णपा के नाम से प्रसिद्ध थे।
  • कण्हपा के गुरु का नाम जालंधरपा था। कण्हपा महाराज देवपाल के समकालीन थे
  • डॉ नगेन्द्र के अनुसार इनकी चौहत्तर (74) रचनाएँ मानी जाती है।
  • राहुल सांकृत्यायन इनकी रचनाओं की संख्या 32 मानते हैं।
  • रचनाएँ - 1. चर्याचर्याविनिश्चय 2. कण्हपाद गीतिका।

Additional Informationकुक्कुरिपा -

  • कपिलवस्तु के ब्राह्मण कुल में इनका जन्म हुआ। चर्पटीया इनके गुरु थे। इनके द्वारा रचित 16 ग्रंथ माने गए हैं।

सरहपा-

  • एक तिब्बती जनश्रुति के अनुसार उनका जन्म स्थान ‘उड़ीसा’ में था।
  • एक और जनश्रुति के अनुसार उनका जन्म स्थान सहरसा भागलपुर जिले के पंचगछिया ग्राम बताया जाता है।
  • सरहपा को कोशी अंचल का कवि माना जाता है।
  • विषयवस्तु और कलापक्ष की दृष्टि से सरहपा को सिद्ध साहित्य का प्रतिनिधि कवि माना जा सकता है।
  • सरहपा को बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध कवि माना जाता है।
  • राहुल सांकृत्यायन ने इन्हें हिन्दी का प्रथम कवि माना है।
  • रचनाएँ: इनकी 32 रचनाएँ है। जिसमे ‘दोहाकोश’ सबसे बेहतर मानी जाती है।

डोम्बिपा -

  • अधिकतर विद्वानों ने इनका समय 840 ई० माना है।
  • इनका जन्म मगध के क्षत्रिय वंश में हुआ था।
  • गुरु: इन्होने दो गुरु बनाया था।
  • इनके पहले गुरु का नाम ‘वीणापा’ तथा दूसरे गुरु ‘वुरुपा’ थे।
  • इनकी कूल 21 रचनाएँ मानी जाती है।
  • रचनाएँ: डोबिगीतिका, अक्षरद्विकोपदेश और योगचार्य इनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना अक्षरद्विकोपदेश है।

Question 66

कामायनी के सर्गों का सही अनुक्रम क्या है ?

A. संघर्ष

B. स्वप्न

C. निर्वेद

D. दर्शन

E. कर्म

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, C, D, E

  2. BOption (b)

    E, B, A, C, D

  3. COption (c)

    B, C, D, A, E

  4. DOption (d)

    D, E, A, B, C

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Correct answer

Answer: (b)B.

E, B, A, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - E, B, A, C, D

कामायनी के सर्गों का सही अनुक्रम है -

  • E. कर्म
  • B. स्वप्न
  • A. संघर्ष
  • C. निर्वेद
  • D. दर्शन

Key Points

  • 'कामायनी' 15 - सर्ग (अध्यायों) का महाकाव्य है। ये सर्ग हैं-
    1. चिन्ता 2. आशा 3. श्रद्धा 4. काम 5. वासना 6. लज्जा 7. कर्म 8. ईर्ष्या 9.
  • इड़ा (तर्क, बुद्धि) 10. स्वप्न 11. संघर्ष 12. निर्वेद (त्याग) 13. दर्शन 14. रहस्य 15. आनन्द।
  • सूत्र :- (1) चिंता की आशा से श्रद्धा ने काम वासना को लज्जित किया।
  • (2) कर्म की ईर्ष्या से बुद्धि/तर्क ने स्वप्न में संघर्ष किया।
  • (3) निर्वेद (निद्रा)/ मोह माया का त्याग कर ईश्वरीय दर्शन द्वारा रहस्य मय आनंद की प्राप्ति होगी।

Important Points कामायनी-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - काव्य (महाकाव्य)
  • प्रकाशन वर्ष -
  • विषय - इसमें मनु और श्रद्धा, पुरुष और नारी की और उसके मनोंभावों के विकास की कथा है।

Additional Information जयंशकर प्रसाद-

  • जन्म - 1889 -1937 ई.
  • हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे।
  • कविता संग्रह -
  • प्रेम-पथिक (1909 ई.)
  • चित्राधार (1918 ई.)
  • कानन कुसुम (1913 ई.)
  • झरना (1918 ई.)
  • आँसू (1925 ई.)
  • लहर (1935 ई.)

Question 67

‘दयाराम’ नामक पात्र का वर्णन किस कहानी में हुआ है?

  1. AOption (a)

    अपना अपना भाग्य

  2. BOption (b)

    राजा निरबंसिया

  3. COption (c)

    लाल पान की बेगम

  4. DOption (d)

    राही

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Correct answer

Answer: (b)B.

राजा निरबंसिया

Why this answer is correct

‘दयाराम’ नामक पात्र का वर्णन कहानी में हुआ है - राजा निरबंसिया

Key Pointsराजा निरबंसिया -

  • रचनाकार - कमलेश्वर
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1957 ई.
  • मुख्य पात्र - बच्चन सिंह, चंदा, जगपती, राजा निरबंसिया, दयाराम आदि।
  • विषय - यह कहानी लोक कथात्मक शैली पर आधारित है। राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वार की बहुचर्चित कहानी है।

Important Pointsकमलेश्वर -

  • (6 जनवरी 1932 - 27 जनवरी 2007)
  • हिन्दी लेखक कमलेश्वर बीसवीं शती के सबसे सशक्त लेखकों में से एक समझे जाते हैं।
  • कहानी संग्रह -
  • कस्बे का आदमी (1958)
  • खोयी हुई दिशाएं (1963)
  • मांस का दरिया (1966)
  • आज़ादी मुबारक (2002)
  • जिन्दा मुर्दे (1969)
  • इतने अच्छे दिन (1970)
  • कोहरा (1969) आदि।

Additional Information

रचनाविधारचनाकारविषय
अपना अपना भाग्य (1931 ई.)कहानी​जैनेन्द्रएक पहाड़ी बच्चे की मार्मिम चित्रण किया है।
लाल पान की बेगम (1957 ई.)कहानीफणीश्वर नाथ रेणुइसमें नारी सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर लिखी गयी है।
राही (1947 ई.)कहानीसुभद्रा कुमारी चौहानइसमें गरीबों के पीड़ा का वर्णन किया है।

Question 68

‘आधे अधूरे' नाटक में पहले मंचन के सम्बन्ध में निम्नलिखित तथ्य मिलते हैं -

A. बड़ी लड़की की भूमिका ऋचा व्यास ने निभाई।

B. इसका पहला मंचन - दिशांतर' नाट्य संस्था द्वारा किया गया।

C. इसका निर्देशन श्री ओम शिवपुरी ने किया।

D. छोटी लड़की की भूमिका अनुराधा कपूर ने निभाई।

E. इसका मंचन फरवरी 1969 ई. में हुआ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, C और E

  2. BOption (b)

    केवल B. C और D

  3. COption (c)

    केवल B, C और E

  4. DOption (d)

    केवल A, B और E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

केवल B, C और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, C और E

Key Points‘आधे अधूरे' नाटक में पहले मंचन के सम्बन्ध में तथ्य:

  • B. इसका पहला मंचन - दिशांतर' नाट्य संस्था द्वारा किया गया।
  • C. इसका निर्देशन श्री ओम शिवपुरी ने किया।
  • E. इसका मंचन फरवरी 1969 ई. में हुआ।

Important Pointsआधे अधूरे-  

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र- सावित्री, महेन्द्रनाथ, सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, बिन्नी, अशोक, किन्नी, मनोज आदि।
  • विषय- मध्यवार्गीय जीवन की विडंबनाओं का चित्रण।

Additional Informationमोहन राकेश- 

  • जन्म- 1925 - 1972 ई.
  • उपन्यास- 
  • अँधेरे बंद कमरे (1961)
  • अन्तराल (1972)
  • न आने वाला कल (1968)
  • नाटक- 
  • लहरों के राजहंस (1963 ईo)
  • आषाढ़ का एक दिन (1958 ईo)
  • आधे-अधूरे (1969 ईo)
  • पैर तले  की जमीन (अधुरा कमलेश्वर जी ने पूरा किया 1975 ईo)

Question 69

'मानव कब दानव से भी दुर्छंत, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदय वाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता।" - 'चन्द्रगुप्त' नाटक का उक्त संवाद किसका है?

  1. AOption (a)

    चाणक्य

  2. BOption (b)

    अलका

  3. COption (c)

    सिंहरण

  4. DOption (d)

    चन्द्रगुप्त

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Correct answer

Answer: (c)C.

सिंहरण

Why this answer is correct

सही उत्तर है - सिंहरण

Key Points'चन्द्रगुप्त' नाटक का उक्त संवाद सिंहरण का है -

  • मानव कब दानव से भी दुर्दान्त, पशु से भी बर्बर, और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदयवाला हो जाएगा, नही जाना जा सकता।
  • अतीत सुखो के लिए सोच क्यो, अनागत भविष्य के लिए भय क्यो और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूँँगा , फिर चिन्ना किस वान की?

अन्य विकल्प -

  • चाणक्य -
  • सौम्य, कुलपति ने मुझे गृहस्थजीवन में प्रवेश करने की आज्ञा दे दी। केवल तुम्हीं लोगों को अर्थशास्त्र पढ़ाने के लिए ठहरा था;
  • क्योंकि इस वर्ष के भावी स्नातकों को अर्थशास्त्र का पाठ पढ़ा कर मुझ अकिञ्चन को गुरु-दक्षिणा चुका देनी थी।
  • अलका -
  • नहीं, मैं तुम्हारी सुख-शान्ति के लिए चिन्तित हूँ। भाई ने तुम्हारा अपमान किया है,
  • पर वह अकारण न था; जिसका जो मार्ग है उसपर वह चलेगा। तुमने अनधिकार चेष्टा की थी!
  • देखती हूँ कि प्राय मनुप्य, दूसरो को अपने मार्ग पर चलाने के लिए रुक जाता हैं, और अपना चलना वन्द कर देता है।
  • चन्द्रगुप्त -
  • ठीक है, प्रत्येक निरपराध आर्य्य स्वतन्त्र हैं, उसे कोई बन्दी नहीं बना सकती है। यह क्या राजकुमार! खड्ग को कोश में स्थान नही है क्या?​

Important Pointsचन्द्रगुप्त -

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • विधा - नाटक
  • प्रकाशन वर्ष - 1931 ई.
  • मुख्य पात्र - 
  • ​चाणक्य (विष्णुगुप्त), चन्द्रगुप्त, नन्द, राक्षस, वररुचि (कात्यायन), शकटार, आम्भिक, सिंहरण, सिकंदर, अलका आदि।
  • विषय - 
  • चन्द्रगुप्त 'नाटक' मौर्य साम्राज्य के उत्थान और मगध के राजा घनानंद के पतन की कहानी है।
  • इस नाटक में कुल चार (4) अंक और चौआलीस (44) दृश्य है। इनमे गीतों की संख्या तेरह (13) है।

**Additional Informationजयशंकर प्रसाद -**​

  • (30 जनवरी 1889- 15 नवंबर 1937)
  • हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे।
  • वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
  • नाटक: सज्जन (1911), कल्याणी परिणय (1912), प्रायश्चित (1913), करुणालय (1913),
  • राज्य श्री (1915), विशाखा (1921), अजातशत्रु (1922), जनमेजय का नागयज्ञ (1926),
  • स्कंदगुप्त (1928), एक घूँट (1929), ध्रुवस्वामिनी (1933) आदि।

Question 70

'बच्चे प्रत्याशा में होंगें, नीड़ों से झाँक रहें होंगे।

यह ध्यान परों में चिड़िया के भरता, कितनी चंचलता है।'

यह पक्तियाँ किस काव्य संग्रह से है -

  1. AOption (a)

    विषादराग

  2. BOption (b)

    एकांत संगीत

  3. COption (c)

    निशा - निमंत्रण

  4. DOption (d)

    आकुल - अंतर

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Correct answer

Answer: (c)C.

निशा - निमंत्रण

Why this answer is correct

'बच्चे प्रत्याशा में होंगें, नीड़ों से झाँक रहें होंगे।

यह ध्यान परों में चिड़िया के भरता, कितनी चंचलता है।'

यह पक्तियाँ काव्य संग्रह से है - निशा - निमंत्रण

Key Pointsनिशा - निमंत्रण -

  • रचनाकार - हरिवंशराय बच्चन
  • विधा - कविता
  • प्रकाशन वर्ष - 1938 ई.
  • विषय - इस गीत में कवि ने एकाकी जीवन की कुंठा तथा प्रेम की व्याकुलता का वर्णन किया है।

Important Pointsपक्तियाँ की व्याख्या-

  • कवि प्रकृति के माध्यम से उदाहरण देता है कि चिड़ियाँ भी दिन ढलने पर चंचल हो उठती हैं।
  • वे शीघ्रातिशीघ्र अपने घोंसलों में पहुँचना चाहती हैं।
  • उन्हें ध्यान आता है कि उनके बच्चे भोजन आदि की आशा में घोंसलों से बाहर झाँक रहे होंगे।

Additional Informationहरिवंश राय बच्चन -

  • (27 नवम्बर 1907 – 18 जनवरी 2003)
  • हिंदी भाषा के एक कवि और लेखक थे।
  • वे हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक थे ।
  • कविता संग्रह
  • तेरा हार (1929)
  • मधुशाला (1935)
  • मधुबाला (1936)
  • मधुकलश (1937),
  • एकांत संगीत (1939)
  • आकुल अंतर (1943)
  • विषादराग
  • सतरंगिनी (1945)
  • हलाहल (1946) आदि।

Question 71

“जब आप अपने को राजनीतिक अधिकारों की तुला पर कमजोर पाते हैं, तो आप सामाजिक व्यवस्था भी अच्छी नहीं बना सकते। और जब तक आपकी सामाजिक व्यवस्था तर्क और न्याय पर आधारित नहीं है, तब तक आप राजनीतिक अधिकारों का उपयोग करने के योग्य भी नहीं हो सकते।” कथन किस समाज सुधारक का है?

  1. AOption (a)

    राजाराम मोहन राय

  2. BOption (b)

    केशव चन्द्र सेन

  3. COption (c)

    स्वामी दयानंद सरस्वती

  4. DOption (d)

    महादेव गोविन्द रानाडे

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Correct answer

Answer: (d)D.

महादेव गोविन्द रानाडे

Why this answer is correct

सही उत्तर है - महादेव गोविन्द रानाडे

Key Points

  • सामाजिक सुधार और राजनीति के बीच अंटूट सम्बन्ध की व्याख्या करते हुए, रानाडे ने कहा,
  • “जब आप अपने को राजनीतिक अधिकारों की तुला पर कमजोर पाते हैं
  • तो आप सामाजिक व्यवस्था भी अच्छी नहीं बना सकते
  • और जब तक आपकी सामाजिक व्यवस्था तर्क और न्याय पर आधारित नहीं है,
  • तब तक आप राजनीतिक अधिकारों का उपयोग करने के योग्य भी नहीं हो सकते"।
  • यदि आपकी सामाजिक व्यवस्था अच्छी नहीं है, तो आप अच्छी आर्थिक व्यवस्था की स्थापना नहीं कर सकते।

Important Pointsमहादेव गोविन्द रानाडे -

  • ( 18 जनवरी 1842-16 जनवरी 1901)
  • राव बहादुर महादेव गोविंद रानाडे को न्यायमूर्ति रानाडे के नाम से जाना जाता है,
  • एक भारतीय विद्वान, समाज सुधारक , न्यायाधीश और लेखक थे ।
  • वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
  • उन्होंने बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य और केंद्र में वित्त समिति के सदस्य जैसे कई पद संभाले ।
  • उन्होंने पूना सार्वजनिक सभा, महाराष्ट्र ग्रंथोत्तेजक सभा और प्रार्थना समाज की स्थापना में मदद की।
  • रानाडे ने नारी जाति के उद्धार के लिए विधवाओं के पुनर्विवाह पर विशेष जोर दिया।

Additional Informationराजाराम मोहन राय -

  • (22 मई 1772 - 27 सितंबर 1833)
  • इन्हें भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है।
  • भारतीय सामाजिक और धार्मिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में उनका विशिष्ट स्थान है।
  • वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक,
  • जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में नव-जागरण युग के पितामह थे।
  • बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया।

केशव चन्द्र सेन -

  • (19 नवम्बर 1838 - 8 जनवरी 1884)
  • बंगाल के हिन्दू दार्शनिक, धार्मिक उपदेशक एवं समाज सुधारक थे।
  • केशवचंद्र के प्रेरक नेतृत्व में भारत का ब्रह्मसमाज देश की एक महती शक्ति बन गया।
  • केशवचन्द्र सेन ने ही आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती को सलाह दी की वे सत्यार्थ प्रकाश की रचना हिन्दी में करें।
  • केशवचन्द्र सेन के द्वारा टेबरनेकल ऑफ न्यू डिस्पेंसेशन (1868) तथा इण्डियन रिफार्म एसोसिएशन (1870) की स्थापना की गयी।

स्वामी दयानंद सरस्वती -

  • (1824-1883)
  • आधुनिक भारत के चिन्तक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। उनके बचपन का नाम 'मूलशंकर' था।
  • उन्होंने वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए मुम्बई में आर्यसमाज (श्रेष्ट जीवन पद्धति) की स्थापना की।
  • 'वेदों की ओर लौटो' यह उनका ही दिया हुआ प्रमुख नारा था ।
  • उन्होंने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म तथा सन्यास को अपने दर्शन के स्तम्भ बनाये।
  • उन्होंने ही सबसे पहले १८७६ में 'स्वराज्य' का नारा दिया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया।
  • मुख्य कृतियाँ - सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदाद���भाष्यभूमिका,ऋग्वेद भाष्य, यजुर्वेद भाष्य, चतुर्वेदविषयसूची आदि।

Question 72

‘गोदान’ में आए प्रसंगों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. शिकार प्रसंग

B. भोला का होरी को गाय देना

C. सुंदरिया गाय की हत्या

D. दमड़ी बंसोड़ का प्रसंग

E. रायसाहब के यहाँ धनुष यज्ञ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A, B, D, E, C

  2. BOption (b)

    B, D, E, A, C

  3. COption (c)

    B, E, D, A, C

  4. DOption (d)

    A, E, C, D, B

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, D, E, A, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - B, D, E, A, C

Key Points‘गोदान’ में आए प्रसंगों को पहले से बाद के क्रम -

  • B. भोला का होरी को गाय देना
  • D. दमड़ी बंसोड़ का प्रसंग
  • E. रायसाहब के यहाँ धनुष यज्ञ
  • A. शिकार प्रसंग
  • C. सुंदरिया गाय की हत्या

Important Pointsगोदान -

  • रचनाकार - प्रेमचंद
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1936 ई.
  • प्रमुख पात्र-
  • ​होरी, रायसाहब, अमरपाल सिंह, प्रोफ़ेसर मेहता, गोबर, पंडित दातादीन, धनिया, मालती, झुनिया, गोविंदी।
  • विषय - 
  • ​भारतीय ग्रामीण जीवन और उसमें व्याप्त सामाजिक और आर्थिक विषमताओं का जीवंत चित्रण करता है।

Additional Informationमुंशी प्रेमचंद (1880 - 1936) -

  • धनपत राय श्रीवास्तव जो प्रेमचंद नाम से जाने जाते हैं,
  • वो हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे।
  • उपन्यास - 
  • सेवासदन (1918),
  • प्रेमाश्रम (1922),
  • रंगभूमि (1925),
  • ​कायाकल्प (1926),
  • गबन (1928),
  • कर्मभूमि (1932),
  • गोदान (1936) आदि।

Question 73

‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध के अनुसार सूची 1 के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (फकीर)सूची II मजदूरी का जीवन)
A.जोन ऑफ आर्कI.जूते गांठना
B.टालस्टायII.रंगमहलों में चटाई आदि बुनना
C.उमर खैयामIII.भेड़ें चराना
D.खलीफा उमरIV.तम्बू सीना

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - II, B - I, C - IV, D - III

  2. BOption (b)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - I, D - II

  4. DOption (d)

    A - II, B - IV, C - I, D - III

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - III, B - I, C - IV, D - II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - IV, D - II

Key Points

सूची I (फकीर)सूची II (मजदूरी का जीवन)
A.जोन ऑफ आर्कIII.भेड़ें चराना
B.टालस्टायI.जूते गांठना
C.उमर खैयामIV.तम्बू सीना
D.खलीफा उमरII.रंगमहलों में चटाई आदि बुनना

Additional Informationमजदूरी और प्रेम -

  • रचनाकार - सरदार पूर्��� सिंह
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 2015 ई.
  • विषय - इसमें किसान तथा श्रमिकों को ईश्वर का सच्चा प्रतिनिधि बताया गया है तथा श्रम की महत्ता प्रतिपादित की गई है।
  • (जन्म- 17 फ़रवरी, 1881 - मृत्यु- 31 मार्च, 1931)
  • भारत के विशिष्ट निबंधकारों में से एक थे। ये देशभक्त, शिक्षाविद, अध्यापक, वैज्ञानिक एवं लेखक भी थे।
  • इसके साथ ही वे पंजाबी के जाने माने कवि भी थे। आधुनिक पंजाबी काव्य के संस्थापकों में पूर्ण सिंह की गणना होती है।
  • हिंदी निबंध - ‘सच्ची वीरता’, ‘कन्यादान’, ‘पवित्रता’, ‘आचरण की सभ्यता’, ‘मजदूरी और प्रेम’ तथा अमेरिका का मस्ताना योगी वाल्ट हिवट मैंन।
  • पंजाबी कृतियां - ‘अवि चल जोत’, ‘खुले मैदान’, ‘खुले खुंड’, ‘मेरा सांई’, ‘कविदा दिल कविता’।

Question 74

काव्य भाषा के संदर्भ में वर्ड्सवर्थ के उपयुक्त कथन हैं -

A. प्रशांत मनोदशा में भावों का अनुस्मरण आवश्यक नहीं है।

B. काव्य प्रबल भावों का सहज उच्छलन है ।

C. भावदीप्त मनोदशा में रचना का आरंभ होता है।

D. भाव चाहे जिन कारणों से उत्पन्न हों, मन को आनंदित करते हैं।

E. ग्रामीण भाषा काव्य के लिए उपयुक्त नहीं है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल B, C, D

  2. BOption (b)

    केवल A, B, E

  3. COption (c)

    केवल A, D, E

  4. DOption (d)

    केवल B, D, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल B, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, C, D

  • B. काव्य प्रबल भावों का सहज उच्छलन है ।
  • C. भावदीप्त मनोदशा में रचना का आरंभ होता है।
  • D. भाव चाहे जिन कारणों से उत्पन्न हों, मन को आनंदित करते हैं।

Key Pointsकाव्य भाषा के संदर्भ में विलियम वर्ड्सवर्थ के कुछ उपयुक्त कथन -

  • वास्तविक काव्यात्मक शब्दावली में भावनाओं का स्वाभाविक प्रवाह होता है।
  • प्राकृतिक काव्यात्मक शब्दावली को आनंद देने का गुण भी माना।
  • कविता की भाषा और गद्य की भाषा में कोई अंतर नहीं है।
  • कवि को इस कल्पित ऊँचाई से नीचे उतरना होगा और उसे अन्य लोगों की भाँति ही अपने भावों को अभिव्यक्त करना होगा।
  • कवि के भाव और विचार मानव के सामान्य भाव और विचार होते हैं।
  • कविता मानव और प्रकृति का प्रतिबिम्ब होती है।
  • कविता शक्तिशाली भावनाओं का स्वतःस्फूर्त प्रवाह है।
  • कविता शांति में स्मरण की गई भावना से उत्पन्न होती है।

Additional Informationविलियम वर्ड्सवर्थ -

  • (7 अप्रैल 1770 - 23 अप्रैल 1850) एक अंग्रेजी रोमांटिक कवि थे,
  • जिन्होंने सैमुअल टेलर कोलरिज के साथ मिलकर अपने संयुक्त प्रकाशन
  • लिरिकल बैलाड्स (1798) के साथ अंग्रेजी साहित्य में रोमांटिक युग की शुरुआत करने में मदद की ।
  • वर्ड्सवर्थ की महान कृति को आम तौर पर द प्रील्यूड माना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • साईमन ली
  • वी आर सेवन
  • लाईन्स रिटन इन अर्ली स्प्रिगं
  • लाईन्स क्म्पोस्ड अ फ्यू माइल्स अबव टिन्टर्न ऐबे
  • गीतात्मक गाथागीत की प्रस्तावना
  • ओड टू ड्यूटी (1807)
  • द सोलिटरी रीपर
  • लन्दन (1802)
  • द वर्ल्ड इज़ टू मच वित अस
  • माई हार्ट लीप्स अप

Question 75

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I प्रकरण (परीक्षा गुरु)सूची II शीर्षक
A.प्रकरण 1I.मित्रमिलाप
B.प्रकरण 2II.सौदागर की दुकान
C.प्रकरण 3III.अकाल मैं अधिकमास
D.प्रकरण 4IV.संगति का फल

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - I, B - III, C - IV, D - II

  2. BOption (b)

    A - I, B - IV, C - III, D - II

  3. COption (c)

    A - II, B - III, C - IV, D - I

  4. DOption (d)

    A - II, B - IV, C - III, D - I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A - II, B - III, C - IV, D - I

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - II, B - III, C - IV, D - I

Key Points

सूची I प्रकरण (परीक्षा गुरु)सूची II शीर्षक
A.प्रकरण 1II.सौदागर की दुकान
B.प्रकरण 2III.अकाल मैं अधिकमास
C.प्रकरण 3IV.संगति का फल
D.प्रकरण 4I.मित्रमिलाप

Additional Information

  • लाला श्रीनिवास द्वारा रचित रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार हिन्दी की प्रथम औपन्यासिक कृति है।
  • जिसकी रचना भारतेन्दु युग के प्रसिद्ध नाटककार लाला श्रीनिवास दास ने 25 नवम्बर,1882 की थी।
  • लाला श्रीनिवास दास के 'परीक्षा गुरु' को हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास माना जाता है।
  • इसके लेखक श्रीनिवास दास थे उपन्यास में नव-निर्मित मध्य वर्ग की अंदरूनी एंव बाहरी दुनिया का चित्रण किया गया है।
  • देशी संस्कृति और औपनिवेशिक शासन के बीच तालमेल की समस्या इस उपन्यास का मूल कथ्य है।

Question 76

‘रुपैया को बजाकर देखा जाता है और आदमी को एक ही बोली से पहचाना जाता है।' - यह उक्ति किस पात्र से संबद्ध है?

  1. AOption (a)

    प्रशांत

  2. BOption (b)

    बालदेव

  3. COption (c)

    कालीचरण

  4. DOption (d)

    बावनदास

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Correct answer

Answer: (b)B.

बालदेव

Why this answer is correct

‘रुपैया को बजाकर देखा जाता है और आदमी को एक ही बोली से पहचाना जाता है।' - यह उक्ति पात्र से संबद्ध है - बालदेव

Hintउपन्यास का कथन-

  • "लक्ष्मी के आँसू थम चुके थे बालदेव जी ठीक समय पर आ गए महन्थ साहेब बालदेव जी को बहुत प्यार करने लगे थे पाँच-सात दिनों की जान-पहचान में ही महन्थ साहेब ने बालदेव जी को अच्छी तरह पहचान लिया था रुपैया को बजाकर देखा जाता है और आदमी को एक ही बोली से पहचाना जाता है महन्थ साहेब कहते थे, “सुद्ध विचार का आदमी है संसकार बहुत अच्छा है "

Key Pointsफ़णीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास 'मैला आंचल' में कई पात्र हैं: 

  • डॉ॰ प्रशांत, कमली, बावनदास, बालदेव, दोहराव, लछ्मी, तहसीलदार विश्वनाथ, कालीचरण, मंगला, चर्खा सेंटर की मंगलादेवी।

Important Pointsमैला आंचल -

  • रचनाकार - फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1954 ई.
  • विषय -  
  • इसकी कथावस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया ज़िले के मेरीगंज की ग्रामीण ज़िंदगी से संबद्ध है।
  • इसमें वहाँ के जीवन का अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है।

Additional Information फणीश्वरनाथ रेणु -

  • (4 मार्च 1921 - 11 अप्रैल 1977)
  • एक सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार थे।
  • उपन्यास -
  • परती परिकथा (1957 ई.),
  • दीर्घतपा (1964 ई.),
  • कितने चौराहे (1966 ई.),
  • पल्टू बाबू रोड (1979 ई.) आदि।

Question 77

‘चीफ की दावत' कहानी के आधार पर शामनाथ के संबंध में सटीक कथन हैं:

A. शामनाथ की भारतीयता में गहरी आस्था थी।

B. शामनाथ ने माँ को सफ़ेद कमीज और सफ़ेद सलवार पहनने के लिए कहा।

C. शामनाथ अपने चीफ को नापसंद करते थे।

D. शामनाथ पार्टी की कामयाबी सुनिश्चित कर लेना चाहते थे।

E. शामनाथ को दुनिया के कहे की चिंता होती थी ।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और D

  2. BOption (b)

    केवल B, C और E

  3. COption (c)

    केवल B, D और E

  4. DOption (d)

    केवल A, C और E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल B, D और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल B, D और E

Key Points‘चीफ की दावत' कहानी के आधार पर शामनाथ के संबंध में सटीक कथन हैं:

  • B. शामनाथ ने माँ को सफ़ेद कमीज और सफ़ेद सलवार पहनने के लिए कहा।
  • D. शामनाथ पार्टी की कामयाबी सुनिश्चित कर लेना चाहते थे।
  • E. शामनाथ को दुनिया के कहे की चिंता होती थी ।

Important Points चीफ़ की दावत-

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • ​मिस्टर शामनाथ, उनकी पत्नी एवं विधवा बूढ़ी मां आदि।
  • विषय-
  • मां के त्याग और बेटे की उपेक्षा का ताना-बाना बुनती है।
  • जो 'पहला पाठ' कहानी संग्रह में संकलित है।

Additional Information भीष्म साहनी- 

  • जन्म- 1915- 2003 ई.
  • एक हिंदी लेखक, अभिनेता, शिक्षक, अनुवादक और बहुभाषी थे।
  • अन्य कहानी संग्रह-
  • भाग्य रेखा (1953)
  • पहला पाठ (1956)
  • भटकती राख (1966)
  • पटरियाँ (1973)
  • 'वांङ चू' (1978)
  • शोभायात्रा  (1981)आदि।

Question 78

निम्नलिखित में से किशोरीलाल गोस्वामी का उपन्यास नहीं है :

  1. AOption (a)

    तारा

  2. BOption (b)

    कुसुम कुमारी

  3. COption (c)

    श्यामा स्वप्न

  4. DOption (d)

    रज़िया बेग़म

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Correct answer

Answer: (c)C.

श्यामा स्वप्न

Why this answer is correct

किशोरीलाल गोस्वामी का उपन्यास नहीं है : श्यामा स्वप्न 

Key Points

  • किशोरीलाल गोस्वामी का उपन्यास - 
  • तारा, कुसुम कुमारी, रज़िया बेग़म
  • 'श्यामा स्वप्न' उपन्यास के बारे में जानकारी -
  • 'श्यामा स्वप्न' उपन्यास के लेखक जगमोहन सिंह हैं।
  • यह उपन्यास साल 1888 में प्रकाशित हुआ था
  • जगमोहन सिंह हिन्दी के भारतेन्दुयुगीन कवि, आलोचक और उपन्यासकार थे।

Additional Informationकिशोरी लाल गोस्वामी -

  • (1865-1932)
  • एक भारतीय लेखक और उपन्यासकार थे।
  • इन्होंने 60 से अधिक उपन्यास लिखे हैं।
  • इनमें तारा, चपला, लवंग लता आदि प्रमुख हैं।
  • उपन्यास -
  • त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी,
  • हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी,
  • लवंगलता वा आदर्श बाला (हृदयहारिणी उपन्यास का उपसंहार),
  • हीराबाई वा बेहयाई का बोरका (ऐतिहासिक उपन्यास),
  • गुलबहार वा आदर्श भ्रातृस्नेह,
  • तारा वा क्षत्र-कुल-कमलिनी (ऐतिहासिक उपन्यास),
  • तरुण तपस्विनी वा कुटीर वासिनी,
  • जिंदे की लाश (जासूसी उपन्यास),

ठाकुर जगमोहन सिंह -

  • (1857 - 1899 ई.)
  • हिन्दी के भारतेन्दुयुगीन कवि, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • कविता संग्रह -
  • प्रेम सम्पत्ति लता (1885 ई.)
  • श्यामा लता (1885 ई.)
  • श्यामा-सरोजिनी (1886 ई.)
  • उपन्यास : श्यामास्वप्न

Question 79

विष्णु प्रभाकर के अनुसार गांधी जी के आदेश पर महादेव देसाई ने शरतचन्द्र की किन रचनाओं का गुजराती में अनुवाद किया था?

A. विराजबहू

B. राम की सुमति

C. चरित्रहीन

D. मंझली दीदी

E. अभिमान

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B, C

  2. BOption (b)

    केवल A, B, D

  3. COption (c)

    केवल A, C. E

  4. DOption (d)

    केवल B, C, D

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, B, D

  • A. विराजबहू
  • B. राम की सुमति
  • D. मंझली दीदी

Key Points

  • गुजराती में सबसे पहले सन् 1925 के आसपास महात्मा गाँधी के आदेश पर
  • उनकी कुछ रचनाओं का अनुवाद श्री महादेव देसाई ने किया था।
  • वे रचनाएँ थीं - 'विराज बहू', 'बिन्दो का लल्ला', 'राम की सुमति', और 'मंझली दीदी'।

Additional Informationश्री महादेव देसाई -

  • (1 जनवरी, 1892 - 15 अगस्त, 1942)
  • एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, विद्वान, और लेखक थे।
  • वे महात्मा गांधी के निजी सचिव के तौर पर जाने जाते हैं।
  • उन्होंने अनेक पुस्तकों की रचना की जैसे-
  • विद गांधी जी इन सीलोन, द स्टोरी ऑफ़ बारदोली, स्वदेशी ट्रू एण्ड फ़ॉल्स,
  • अनवर्दी ऑफ़ वर्धा, दि नेशंस वॉइस, गांधी सेवा संघ, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद,
  • दि गीता एकार्डिंग टु गांधीजी, वीर वल्लभ भाई, ख़ुदाई ख़िदमतगार, एक धर्मयुद्ध आदि।

Question 80

शिवपालगंज के बारे में किसे ऐसा लगने लगता है कि महाभारत की तरह, जो कहीं नहीं है वह यहाँ है, और जो यहाँ नहीं है वह कहीं नहीं है?

  1. AOption (a)

    रुप्पन बाबू

  2. BOption (b)

    वैद्य जी

  3. COption (c)

    रंगनाथ

  4. DOption (d)

    बद्री

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Correct answer

Answer: (c)C.

रंगनाथ

Why this answer is correct

शिवपालगंज के बारे में रंगनाथ ऐसा लगने लगता है कि महाभारत की तरह, जो कहीं नहीं है वह यहाँ है, और जो यहाँ नहीं है वह कहीं नहीं है।

Key Points

  • राग दरबारी उपन्यास के पात्र रंगनाथ को शिवपालगंज के बारे में ऐसा लगने लगता है
  • कि महाभारत की तरह, जो कहीं नहीं है वह यहाँ है, और जो यहाँ नहीं है वह कहीं नहीं है,
  • रंगनाथ, वैद्यजी का भतीजा है, जो इतिहास में एम.ए. करने के बाद शिवपालगंज आता है।

अन्य विकल्प -

  • रुप्पन बाबू: वैद्यजी के छोटे बेटे और कॉलेज के छात्रों के नेता, रुप्पन बाबू पिछले कई सालों से 10 वीं कक्षा में रहे हैं,
  • उसी कॉलेज में, जहां उनके पिता प्रबंधक हैं रुप्पन सक्रिय रूप से सभी गांवों की राजनीति में शामिल है
  • और गांव समुदाय द्वारा उनके शानदार गणिता के कारण उनका सम्मान किया जाता है।
  • उपन्यास के अंत में, उसके व्यवहार में एक क्रमिक परिवर्तन देखा जा सकता है।
  • वैद्यजी: वह सभी गांवों की राजनीति के पीछे का मास्टरमाइंड है
  • अपने वाक्य तैयार करने और उसके शब्दों को चुनने में बहुत स्पष्ट,
  • वैद्यजी भी आधिकारिक तौर पर स्थानीय कॉलेज के प्रबंधक हैं।
  • बद्री पहलवान: रुप्पन बाबू के बड़े भाई बद्री अपने पिता की सहभागिता से दूर रहते हैं
  • और खुद को शरीर-निर्माण के अभ्यास में व्यस्त रखते हैं तथा अपने आश्रय की देखभाल करते हैं।

Important Points राग दरबारी -

  • रचनाकार - श्रीलाल शुक्ल
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1968  ई.
  • विषय -
  • ​इसमें गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत किया गया है।

Additional Informationश्रीलाल शुक्ल -

  • (जन्म-31 दिसम्बर 1925 - निधन- 28 अक्टूबर 2011)
  • हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार थे।
  • वह समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिये विख्यात थे।
  • उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं -
  • सूनी घाट का सूरज (1957)
  • अज्ञातवास (1962)
  • आदमी का ज़हर (1972)
  • सीमाएँ टूटती हैं (1973)
  • ‘मकान (1976)
  • ‘पहला पड़ाव’(1987)
  • ‘विश्रामपुर का संत (1998)
  • बब्बरसिंह और उसके साथी (1999)
  • ‘यह घर मेरी नहीं (1979) आदि।

Question 81

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (निबंध)सूची II (निबंधकार)
A.साहित्य की महत्ताI.बाबू गुलाबराय
B.साहित्य के मूल्यII.माखनलाल चतुर्वेदी
C.साहित्य देवताIII.महावीर प्रसाद द्विवेदी
D.साहित्य, कला और प्रेमIV.यशपाल

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  3. COption (c)

    A - IV, B - II, C - I, D - III

  4. DOption (d)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

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Correct answer

Answer: (a)A.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I (निबंध)सूची II (निबंधकार)
A.साहित्य की महत्ताI.महावीर प्रसाद द्विवेदी
B.साहित्य के मूल्यII.बाबू गुलाबराय
C.साहित्य देवताIII.माखनलाल चतुर्वेदी
D.साहित्य, कला और प्रेमIV.यशपाल

Additional Informationमहावीर प्रसाद द्विवेदी -

  • (1864–1938)
  • हिन्दी के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगप्रवर्तक थे।
  • हिन्दी नवजागरण में उनकी महान भूमिका रही।
  • निबन्ध संग्रह- संपत्तिशास्त्र (1907ई.),रसज्ञ रंजन (1920ई.), कवि और कविता,
  • महाकवि माघ का प्रभात वर्णन, म्युनिसिपैलिटी के कारनामे, आत्म निवेदन आदि।

बाबू गुलाबराय -

  • (जन्म- 17 जनवरी, 1888; मृत्यु- 13 अप्रैल, 1963)
  • भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार, निबंधकार और व्यंग्यकार थे।
  • गुलाबराय जी ने दो प्रकार की रचनाएँ की हैं- दार्शनिक और साहित्यिक।
  • निबंध संग्रह- प्रकार प्रभाकर, जीवन-पशु, ठलुआ क्लब, मेरी असफलताएँ, मेरे मानसिक उपादान आदि।

माखनलाल चतुर्वेदी -

  • (4 अप्रैल 1889 - 30 जनवरी 1968)
  • भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे।
  • निबंध संग्रह - साहित्य देवता (1942 ई.), अमीर इरादे गरीब इरादे (1960ई०)।

यशपाल -

  • (जन्म- 3 दिसम्बर, 1903 ई., मृत्यु- 26 दिसंबर, 1976)
  • हिन्दी के यशस्वी कथाकार और निबन्ध लेखक हैं।
  • यशपाल राजनीतिक तथा साहित्यिक, दोनों क्षेत्रों में क्रान्तिकारी हैं।
  • निबंध संग्रह - न्याय का संघर्ष (1940 ई.), चक्कर क्लब (1942 ई.), बात-बात में बात (1950 ई.), देखा, सोचा, समझा (951 ई.) आदि।

Question 82

राजा राममोहन राय के संबंध में उचित कथन है :

A. राजा राममोहन राय भारत में राष्ट्रीय पत्रकारिता के संस्थापक माने जाते हैं।

B. बहुदेववाद में उनकी गहरी आस्था थी।

C. राजा राममोहन राय पश्चिमी ढंग की शिक्षा के विरोधी थे।

D. उन्होंने संवाद कौमुदी' और 'अल अकबर' अखबार की स्थापना की ।

E. राजा राममोहन राय ने सेंसरशिप कानूनों के विरुद्ध सशक्त आन्दोलन चलाया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और E

  2. BOption (b)

    केवल B, C और E

  3. COption (c)

    केवल B, D और E

  4. DOption (d)

    केवल A, D और E

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, D और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, D और E

Key Pointsराजा राममोहन राय के संबंध में उचित कथन है :

  • A. राजा राममोहन राय भारत में राष्ट्रीय पत्रकारिता के संस्थापक माने जाते हैं।
  • D. उन्होंने संवाद कौमुदी' और 'अल अकबर' अखबार की स्थापना की ।
  • E. राजा राममोहन राय ने सेंसरशिप कानूनों के विरुद्ध सशक्त आन्दोलन चलाया।

अन्य त्रुटिरहित -

  • राम मोहन राय पश्चिमी आधुनिक विचारों से बहुत प्रभावित थे और बुद्धिवाद तथा आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर बल देते थे।
  • राजा राममोहन राय नास्तिकता को प्रोत्साहन न देकर विश्वास के स्थान पर विवेकी सृजन के समर्थक थे ।

Additional Informationराजा राममोहन रॉय -

  • (22 मई 1772 - 27 सितंबर 1833)
  • भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है।
  • बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया।
  • वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक,
  • जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में नव-जागरण युग के पितामह थे।
  • राजा राम मोहन राय को राय की उपाधि अकबर द्वितीय ने दी थी।
  • राजा राममोहन राय ने 'ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन', 'संवाद कौमुदी 1821',
  • मिरात-उल-अखबार 1822 , बंगदूत जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया।

Question 83

भारत सरकार के राजभाषा विभाग का सी - डैक की सहायता से लीला हिंदी प्रबोध' नामक सॉफ्टवेयर किसने तैयार किया ?

  1. AOption (a)

    बालेन्दु शर्मा दाधीच

  2. BOption (b)

    हेमंत शर्मा  

  3. COption (c)

    विजय मल्होत्रा

  4. DOption (d)

    हेमंत दरबारी

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Correct answer

Answer: (d)D.

हेमंत दरबारी

Why this answer is correct

भारत सरकार के राजभाषा विभाग का सी - डैक की सहायता से लीला हिंदी प्रबोध' नामक सॉफ्टवेयर तैयार किया - हेमंत दरबारी

Key Points

  • हेमंत दरबारी को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग ( सी-डैक ) का नया कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है।
  • यह पद अब तक खाली था और सी-डैक के महानिदेशक राजन टी जोसेफ इसका अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
  • दरबारी वर्तमान में सी-डैक में एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एएआई) और एडवांस्ड कंप्यूटिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल ( एसीटीएस ) समूह के प्रमुख हैं।
  • दरबारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में विशेषज्ञ हैं। उनके नेतृत्व में सी-डैक द्वारा हाल ही में विभिन्न भाषा अनुप्रयोग उपकरण लॉन्च किए गए।

Additional Informationबालेन्दु शर्मा दाधीच-

  • तकनीकविद् बालेन्दु शर्मा दाधीच को इंटरनेट डोमेन नामों का संचालन करने वाली
  • वैश्विक संस्था आइकैन (ICANN) का युनिवर्सल एक्सेस एंबेसडर नियुक्त किया गया है।
  • उनसे पूर्व भारत में पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा भी यूएएसजी एंबेसडर नियुक्त किए गए थे।
  • दाधीच माइक्रोसॉफ़्ट में निदेशक- भारतीय भाषाएं और सुगम्यता के पद पर कार्यरत हैं।
  • वे इंटरनेट सहित डिजिटल माध्यमों पर स्थानीय भाषाओं का प्रयोग निरंतर सुगम बनाने संबंधी वैश्विक प्रयासों में योगदान देंगे।
  • राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित श्री दाधीच केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की बहुभाषीय इंटरनेट गवर्निंग काउंसिल के भी सदस्य हैं।

हेमंत शर्मा -

  • प्रिंट मीडिया के पत्रकार रह चुके हेमंत शर्मा ने कैलास मानसरोवार पर भी एक किताब 'द्वितीयोनास्ति' लिखी है,
  • जिसमें कैलास मानसरोवर की आश्चर्यजनक सुंदरता को वर्णित किया गया है और यह भी काफी चर्चित किताब रही।
  • उनकी अन्य रचनाओं में शामिल ‘तमाशा मेरे आगे’ जीवन और समाज पर लेखों का एक संग्रह है।
  • हेमंत शर्मा ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन रजत शर्मा के पुराने सहयोगी हैं
  • और वे गृह मंत्री अमित शाह के भी काफी करीब माने जाते हैं।
  • हेमंत शर्मा को हिंदी पत्रकारिता का पर्यायवाची कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।

विजय मल्होत्रा-

  • श्री मल्होत्रा ​​ने 2019 तक केपीएमजी लोअर गल्फ नेटवर्क के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।
  • केएमपीजी में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, श्री मल्होत्रा ​​ने केपीएमजी -
  • मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया (एमईएसए) के अध्यक्ष का पद, केपीएमजी इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष,
  • केपीएमजी यूरोप मध्य पूर्व अफ्रीका के बोर्ड सदस्य, केएमपीजी अंतर्राष्ट्रीय मानव संसाधन
  • कार्यकारी समिति के सदस्य, अन्य नेतृत्व भूमिकाओं के अलावा कार्य किया है।
  • उन्हें 01 जून 2022 को बोर्ड में स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।

Question 84

‘संस्कृति के चार अध्याय के अध्याय एवं प्रकरण के आधार पर सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (अध्याय)सूची II (प्रकरण)
A.भारतीय जनता की रचना और हिन्दू संस्कृति का आविर्भावI.अमृत और हलाहल का संघर्ष
B.प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोहII.मुस्लिम - नवोत्थान
C.हिन्दू - संस्कृति और इस्लामIII.बौद्ध आन्दोलन के सामाजिक प्रसंग
D.भारतीय संस्कृति और यूरोपIV.आर्य - द्रविड़ समस्याएं

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - IV, B - I, C - III, D – II

  2. BOption (b)

    A - IV, B - III, C - I, D – II

  3. COption (c)

    A - II, B - III, C - I, D – IV

  4. DOption (d)

    A - II, B - I, C - III, D - IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - IV, B - III, C - I, D – II

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - IV, B - III, C - I, D – II

Key Points

सूची I (अध्याय)सूची II (प्रकरण)
A.भारतीय जनता की रचना और हिन्दू संस्कृति का आविर्भावI.आर्य - द्रविड़ समस्याएं
B.प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोहII.बौद्ध आन्दोलन के सामाजिक प्रसंग
C.हिन्दू - संस्कृति और इस्लामIII.अमृत और हलाहल का संघर्ष
D.भारतीय संस्कृति और यूरोपIV.मुस्लिम - नवोत्थान

Important Points संस्कृति के चार अध्याय -

  • रचनाकार- रामधारी सिंह ‘दिनकर’
  • विधा- गद्य
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • विषय- इस पुस्तक की प्रस्तावना नेहरू द्वारा लिखी गई है।

Additional Informationइसमें चार प्रकरण है –

  • प्रथम अध्याय: भारतीय जनता की रचना और हिंदू-संस्कृति का वर्णन। इस अध्याय में 3 प्रकरण –
  1. भारतीय जनता की रचना
  2. आर्य-द्रविड़ समस्याएँ
  3. आर्य और आर्येत्तर संस्कृति का मिलन
  • द्वितीय अध्याय: प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोह। इस अध्याय में 7 प्रकरण है –
  1. बुद्ध से पहले का हिंदुत्व
  2. जैन धर्म
  3. बौद्ध धर्म
  4. वैदिक वनाम बौद्धमत
  5. प्राचीन भारत और बाह्य विश्व
  6. बौद्ध साधना का शाक्त प्रभाव
  7. बौद्ध आन्दोलन के सामाजिक प्रसंग
  • तृतीय अध्याय: हिन्दू संस्कृति और इस्लाम। तृतीय अध्याय में कुल 12 प्रकरण हैं –
  1. हिंदू-मुस्लिम प्रश्न की भूमिका
  2. इस्लाम धर्म
  3. मुस्लिम आक्रमण और हिंदू समाज
  4. हिंदू मुस्लिम संबंध
  5. इस्लाम का हिंदुत्व पर प्रभाव
  6. भक्ति आदोलन और इस्लाम
  7. अमृत और हलाहल का संघर्ष
  8. सिक्ख धर्म
  9. कला और शिल्प पर इस्लाम का प्रभाव
  10. साहित्य और भाषा का प्रभाव
  11. उर्दू का जन्म
  12. सामाजिक संस्कृति के कुछ और रूप
  • चतुर्थ अध्याय: भारतीय संस्कृति और यूरोप। चतुर्थ अध्याय में कुल 17 प्रकरण है –
  1. भारत में यूरोप का आगमन
  2. शिक्षा में क्रांति
  3. ईसाई धर्म और भारतीय जनता
  4. हिन्दू- नवोत्थान
  5. ब्रह्म समाज
  6. महाराष्ट्र में नवोत्थान
  7. आर्य समाज
  8. थियोसोफिकल सोसायटी या ब्रह्म विद्दा समाज
  9. धर्म के जीते-जागते स्वरुप परमहंस रामकृष्ण
  10. कर्मठ वेदान्त: स्वामी विवेकानंद
  11. प्रवृत्ति का उत्थान: लोकमान्य तिलक
  12. स्वर्ग का भूमिकरण: महायोगी अरविंद
  13. भूमि का स्वर्गीकरण: महात्मा गाँधी का प्रयोग
  14. विश्व दर्शन के प्रवर्तक श्री सर्वपल्लीराधा कृष्णन
  15. मुस्लिम-नवोत्सव
  16. सर मुहम्मद इकबाल
  17. भारतीय राष्ट्रीयता और मुसलमान

Question 85

‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध के अनुसार पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ कर जिस नए आदर्श को उन्मुख है उस आदर्श को दर्शाने वाले देवता कौन हैं?

  1. AOption (a)

    वर्ड्सवर्थ

  2. BOption (b)

    इलियट

  3. COption (c)

    टॉलस्टॉय

  4. DOption (d)

    गोर्की

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Correct answer

Answer: (c)C.

टॉलस्टॉय

Why this answer is correct

‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध के अनुसार पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ कर जिस नए आदर्श को उन्मुख है उस आदर्श को दर्शाने वाले देवता हैं - टॉलस्टॉय

Key Pointsनिबंध का अंश -

  • पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है।
  • वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है।
  • इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।
  • वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं।
  • प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्‍यों न?

Important Pointsमजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार - सरदार पूर्ण सिंह
  • विधा - निबंध
  • विषय-
  • ​इसके लेखक ने मजदूरों के श्रम तथा उसके सच्चे मूल्य का विवेचन किया है।
  • किसान के खेत में किए गए श्रम तथा गड़रिये द्वारा भेड़ चराने के कार्य का प्रतिदान पैसों से नहीं चुकाया जा सकता।
  • उनका मूल्य परस्पर प्रेम करके ही चुकाया जा सकता है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • प्रेम मजदूरी
  • मजदूरी और कला
  • मजदूरी और फकीरी
  • समाज का पालन करने वाली दूध की धारा
  • पश्चिमी सभ्यता का एक नयाआदर्श

Additional Information सरदार पूर्ण सिंह -

  • (जन्म- 17 फ़रवरी, 1881, मृत्यु- 31 मार्च, 1931)
  • भारत के विशिष्ट निबंधकारों में से एक थे।
  • ये देशभक्त, शिक्षाविद, अध्यापक, वैज्ञानिक एवं लेखक भी थे।
  • हिंदी निबंध - ‘सच्ची वीरता’, ‘कन्यादान’, ‘पवित्रता’, ‘आचरण की सभ्यता’,
  • ‘मजदूरी और प्रेम’ तथा अमेरिका का मस्ताना योगी वाल्ट हिवट मैंन।
  • पंजाबी कृतियां - ‘अवि चल जोत’, ‘खुले मैदान’, ‘खुले खुंड’, ‘मेरा सांई’, ‘कविदा दिल कविता’।
  • अंंग्रेज़ी कृतियां - ‘दि स्टोरी ऑफ स्वामी राम’, ‘दि स्केचेज फ्राम सिक्ख हिस्ट्री', हिज फीट’,
  • ‘शार्ट स्टोरीज’, ‘सिस्टर्स ऑफ दि स्पीनिंग हवील’, ‘गुरु तेगबहादुर’ लाइफ’, प्रमुख हैं।

Question 86

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (अंधायुग अंक)सूची II (शीर्षक)
A.दूसरा अंकI.अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य
B.तीसरा अंकII.गांधारी का शाप
C.चौथा अंकIII.पशु का उदय
D.पांचवां अंकIV.विजयः एक क्रमिक आत्महत्या

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  4. DOption (d)

    A - I, B - III, C - II, D - IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I (अंधायुग अंक)सूची II (शीर्षक)
A.दूसरा अंकIII.पशु का उदय
B.तीसरा अंकI.अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य
C.चौथा अंकII.गांधारी का शाप
D.पांचवां अंकIV.विजयः एक क्रमिक आत्महत्या

Important Pointsअंधायुग-

  • रचनाकार- धर्मवीर भारती
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1954 ई.
  • विषय-
  • युद्ध उपरांत होने वाली भीषण विभीषिका को दर्शाया गया है तथा महाभारत के युद्ध के अंतिम की कथा पर आधारित है।
  • अंक-5
  1. कौरव नगरी
  2. पशु का उदय
  3. अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य
  4. गांधारी का श्राप
  5. विजय:एक क्रमिक आत्महत्या
  • पात्र-
  • अश्वत्थामा, गान्धारी, धृतराष्ट्र, कृतवर्मा, संजय, वृद्ध याचक, प्रहरी-1, व्यास, विदुर, युधिष्ठिर, कृपाचार्य, युयुत्सु आदि।

Additional Informationधर्मवीर भारती -

  • (1926 - 1997 ई.)
  • धर्मवीर भारती दूसरा सप्तक के कवि है।
  • वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे।
  • कविता - ठंडा लोहा (1952), सात गीत वर्ष (1959), कनुप्रिया (1959), सपना अभी भी (1993), आद्यन्त (1999) आदि।
  • पद्यनाटक - अंधायुग (1954), एकांकी नाटक - नदी प्यासी थी (1954)।
  • निबंध संग्रह : ठेले पर हिमालय (1958 ई.), पश्यन्ती (1969 ई.), कहनी-अनकहनी (1970 ई.), कुछ चेहरे कुछ चिन्तन (1995 ई.) आदि।
  • कहानी संग्रह : मुर्दों का गाँव (1946), स्वर्ग और पृथ्वी (1949) , चाँद और टूटे हुए लोग (1955), बंद गली का आखिरी मकान (1969) आदि।

Question 87

“इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय भी पर्याप्त नहीं।” - आषाढ़ का एक दिन' नाटक का उक्त संवाद किसका है?

  1. AOption (a)

    प्रियंगुमंजरी

  2. BOption (b)

    मल्लिका

  3. COption (c)

    कालिदास

  4. DOption (d)

    विलोम

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Correct answer

Answer: (a)A.

प्रियंगुमंजरी

Why this answer is correct

“इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय भी पर्याप्त नहीं।” - आषाढ़ का एक दिन' नाटक का उक्त संवाद का है - प्रियंगुमंजरी 

Key Points

  • प्रियंगुमंजरी : वह राजकुमारी जिससे कालिदास ने विवाह किया।

अन्य विकल्प -

  • मल्लिका - "आषाढ़ का पहला दिन और ऐसी वर्षा माँ! ... ऐसी धारासार वर्षा! दूर-दूर तक की उपत्यकाएं भींग गयीं। ... और मैं भी तो! देखो न माँ, कैसी भीग गयी हूँ!"
  • कालिदास - "मैं तुम्हारी प्रशंसा करने के लिए अवश्य बाध्य हूँ। तुम दूसरों के घर में नहीं, उनके जीवन में भी अनधिकार प्रवेश कर जाते हो।"
  • विलोम - "अनधिकार प्रवेश? मैं? क्यों अम्बिका, तुम्हें कालिदास की यह बात कहाँ तक संगत प्रतीत होती है कि मैं, विलोम, दूसरों के जीवन में अनधिकार प्रवेश कर जाता हूँ?"

Important Pointsआषाढ़ का एक दिन-

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1958ई.
  • पात्र-
  • अंबिका, मल्लिका, कालिदास, दंतुल, मातुल, प्रियंगुमंजरी आदि।
  • विषय-
  • यह कवि कालिदास पर आधारित है।
  • सत्ता एवं सर्जनात्मकता के मध्य द्वन्द्व को दिखाया गया है।
  • सन् 1959 में इस नाटक को सर्वश्रेष्ठ नाटक होने का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

Additional Information मोहन राकेश-

  • जन्म-1925-1972ई.
  • हिन्दी की नवनाट्य लेखन या नया नाटक परंपरा को ठोस आयाम प्रदान किया।
  • 'नई कहानी आन्दोलन' के साहित्यकार थे।
  • अन्य नाटक-
  • लहरों के राजहंस (1963ई.)
  • आधे-अधूरे (1969ई.)
  • पैर तले जमीन (अधूरा)।

Question 88

कोऊ नहिं पकरत मेरो हाथ ।

बीस कोटि सुत होत फिरत मैं हा हा होय अनाथ ।। 'भारत दुर्दशा' नाटक में उक्त गीत किस अंक में है?

  1. AOption (a)

    पहिला अंक

  2. BOption (b)

    दूसरा अंक

  3. COption (c)

    तीसरा अंक

  4. DOption (d)

    चौथा अंक

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Correct answer

Answer: (b)B.

दूसरा अंक

Why this answer is correct

कोऊ नहिं पकरत मेरो हाथ ।

बीस कोटि सुत होत फिरत मैं हा हा होय अनाथ ।। 'भारत दुर्दशा' नाटक में उक्त गीत अंक में है - दूसरा अंक

Key Points‘भारत दुर्दशा’ में छः अंक है-

  • पहले अंक में एक योगी लावनी गाता हुआ देश के अतीत गौरव के परिप्रेक्ष्य में उसकी वर्तमान हीन दशा का ब्योरा देता है।
  • दूसरे अंक में श्मशान में कुत्तों, कौओं, स्यारों के बीच फटेहाल भारत का प्रवेश होता है।
  • तीसरे अंक में 'भारत दुर्दैव' एवं 'सत्यानाश फौजदार' अपने भारत दुर्दशामूलक प्रयोजनों को स्पष्ट करते हैं।
  • चौथे अंक में गुलाम, हीन एवं हतदर्प बनने के कारणों का उल्लेख है।
  • पाँचवें अंक में भारत दुर्दैव के हमले से बचने के लिए पढ़े-लिखे भारतीयों की बैठक का उल्लेख है।
  • छठवें अंक में भारतभाग्य नामक केवल एक पात्र का संवाद एवं कार्य व्यापार चित्रित है।

Important Pointsभारत दुर्दशा-

  • रचनाकार- भारतेन्दु
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1880ई.
  • पात्र-
  • भारत भाग्य,भारत दुर्दैव,अंधकार,डिसलॉयल्टी,मदिरा,रिपोर्टर,आलस्य आदि।
  • विषय-
  • 6 अंकों का नाट्य रासक है।
  • भारत की दुर्दशा को चित्रित किया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर व्यंग किया गया है। ​

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म- 1850-1885ई.
  • हिन्दी के प्रमुख नाटककार के रूप में विख्यात है।
  • मौलिक नाटक-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873ई.)
  • चंद्रावली(1876ई.)
  • नील देवी(1881ई.)
  • सती प्रताप(1883ई.) आदि।
  • अनूदित नाटक-
  • रत्नावली(1868ई.)
  • विद्यासुंदर(1868ई.)
  • पाखंड विडंबन(1872ई.)
  • धनंजय विजय(1873ई.)
  • मुद्रा राक्षस(1878ई.) आदि।

Question 89

निम्नलिखित में से किस कृति को 'जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र' कहा गया है?

  1. AOption (a)

    मुर्दहिया

  2. BOption (b)

    एक कहानी यह भी

  3. COption (c)

    क्या भूलूँ क्या याद करूँ

  4. DOption (d)

    आपहुदरी

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Correct answer

Answer: (b)B.

एक कहानी यह भी

Why this answer is correct

एक कहानी यह भी कृति को 'जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र' कहा गया है।

Key Points

  • 'एक कहानी यह भी' पुस्तक में लेखिका मन्नू भंडारी ने अपने लेखकीय जीवन की कहानी उतार दी है।
  • कवयित्री कहती है कि जिस तरह कहानी ज़िन्दगी का एक अंश मात्र ही होती है,
  • एक पक्ष... एक पहलू, उसी तरह यह भी मेरी ज़िन्दगी का एक टुकड़ा मात्र ही है,
  • जो मुख्यतः मेरे लेखन और मेरी लेखकीय यात्रा पर केन्द्रित है।

Important Pointsएक कहानी यह भी -

  • रचनाकार- मन्नू भंडारी
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 2007 ई.
  • विषय- प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण तथ्यों को उभारा है।

Additional Informationमुर्दहिया -

  • रचनाकार-  डॉ. तुलसीराम
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 2010 ई.
  • विषय- 
  • ​जो हिन्दी साहित्य में मूलतः 'दलित आत्मकथा'. के रूप में प्रसिद्ध है।
  • इसमें दलितों के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक जीवन की बहुमुखी तस्वीर दिखाई पड़ती है।

क्या भूलूँ क्या याद करूँ -

  • रचनाकार- हरिवंश राय बच्चन
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • विषय- 
  • ​इस आत्मकथा में तत्कालीन समय के संयुक्त परिवार और गरीबी में भी लोगों के एक साथ रहने का वर्णन है।

आपहुदरी -

  • रचनाकार- रमणिका गुप्ता
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 2015 ई.
  • विषय- 
  • ​इस आत्मकथा में रमणिका गुप्ता ने स्त्री-स्वातंत्र्य के लिए लड़ाई की अपनी कहानी बताई है।
  • इस पुस्तक में लेखिका ने पंजाब की एक ‘कुड़ीमार’ नामक कुप्रथा का वर्णन किया है।

Question 90

सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए

सूची I (हिंदी व्यंजन)सूची II (उच्चारण स्थान)
A.प्, फ्, ब्, भ्I.वर्स्य
B.न्, न्ह, ल, ल्ह्,II.कोमलतालव्य
C.क्, ख्, ग्, घ्III.द्वयोष्ठय
D.च्, छ्, ज्, झ़IV.तालव्य

 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. AOption (a)

    A - III, B - I, C - II, D - IV

  2. BOption (b)

    A - III, B - I, C - IV, D - II

  3. COption (c)

    A - III, B - IV, C - II, D - I

  4. DOption (d)

    A - III, B - II, C - I, D - IV

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Correct answer

Answer: (a)A.

A - III, B - I, C - II, D - IV

Why this answer is correct

सही उत्तर है - A - III, B - I, C - II, D - IV

Key Points

सूची I (हिंदी व्यंजन)सूची II (उच्चारण स्थान)
A.प्, फ्, ब्, भ्III.द्वयोष्ठय
B.न्, न्ह, ल, ल्ह्,I.वर्स्य
C.क्, ख्, ग्, घ्II.कोमलतालव्य
D.च्, छ्, ज्, झ़IV.तालव्य

Additional Information

  • द्वयोष्ठय - ऐसा व्यंजन होता है जिसे उच्चारित करने के लिए दोनों ओष्ठों को एक-दूसरे से जोड़ा या स्पर्श किया जाता है।
  • इसमें 'प', 'फ', 'ब', 'भ', और 'म' शामिल हैं।
  • वर्स्य - जिन वर्णों का उच्चारण वर्क्स यानी मसूड़े और जिह्वाग्र की सहायता से होता. है उन्हें वर्स्य कहते हैं। 
  • जैसे - न, र, ल, स।
  • कोमलतालव्य - अलिजिह्वा (कौवा) तथा मूर्धा के बीच का स्थान कोमल तालु है, तथा जिह्वापश्च द्वारा कोमल तालु स्पर्श किए जाने से उच्चरित ध्वनियाँ कोमल तालव्य हैं।
  • जैसे- क, ख, ग, घ, ञ, ख़, ग़ आदि।
  • तालव्य - जिन वर्णों का उच्चारण तालु से होता है, उन्हें तालव्य व्यंजन कहते हैं। 
  • तालव्य व्यंजन ये हैं - च, छ, ज, झ, ञ, य, श।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

सर्वोदय गांधी का सामाजिक आदर्श है। सर्वोदय का अर्थ है सबकी उन्नति और उसका ध्येय है, हृदय परिवर्तन। हृदय परिवर्तन अन्यायी, शोषक और अत्याचारी का। गांधीवाद के मूल स्तम्भ दो हैं, सत्य और अहिंसा। सत्य का ही दूसरा नाम उन्होंने परमेश्वर माना है तथा समस्त सृष्टि में एक ही तत्त्व की व्याप्ति स्वीकार कर ईश्वर और मनुष्य तथा मनुष्य एवं अन्य जीवधारियों की एकता स्वीकार की है। अहिंसा में केवल द्वेष का अभाव ही नहीं, प्रेम की संप्राप्ति भी है। यह प्रेम स्वार्थ, मोह, आसक्ति आदि से भिन्न होता है। इस अहिंसा में बेर-त्याग, चराचर प्रेम और पूर्ण निष्काम भाव का समन्वय है। इस समन्वय का पहला तत्त्व जैन, बौद्ध अहिंसा का है, दूसरा वैष्णव भावना का प्रसाद है और तीसरा तो स्पष्टतः गीता का प्रभाव है। ऐसी अहिंसा की प्राप्ति के लिए गांधी ने आत्मशुद्धि को आवश्यक माना है और आत्मशुद्धि के लिए अन्य संतों की भांति अहं के त्याग को अनिवार्य माना है।

इस तरह गांधी के जीवनदर्शन में त्याग और तप का प्राधान्य है तथा भोग और आनंद का तिरस्कार। कला में भी उन्होंने शिव और सत्य पर ही बल दिया, सुन्दर को उन्होंने इन दोनों से या तो अभिन्न माना या अस्वीकार किया।

इसी कारण कला कला के लिए जैसे सिद्धांतो के प्रति गांधी दर्शन में कोई सहानुभूति नहीं मिलती। अस्तु कला कुछ लोगों के आधिपत्य में ही न रहे, उसकी अपील सार्वभौम हो, तभी वह प्रकृति के सन्निकट पहुँच सकेगी, यह गांधी जी का आग्रह था। कलाकार जनता के प्रति अपने कर्तव्यों के विषय में सदैव जागरूक रहे, तभी कला अपनी सार्थकता प्रमाणित कर सकती है। कला की श्रेष्ठता की कसौटी गांधी ने उसकी उपयोगिता स्वीकार की, कला का सम्बन्ध नीति, हितकारिता और उपयोगिता से नहीं है, केवल सौन्दर्य से है - यह कहना सौन्दर्य और कला को न समझने जैसा है। सत्य ही ऊँची से ऊँची कला और श्रेष्ठ सौन्दर्य है और वह नीति, हितकारिता और उपयोगिता से भिन्न नहीं हो सकता। गांधी के अनुसार संगीत इसलिए श्रेष्ठ है कि वह प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है"।

Question 91

Based on Passage: View directions & passage

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर संगीत सर्वश्रेष्ठ क्यों होता है?

  1. AOption (a)

    संगीत सर्वश्रेष्ठ कला है।

  2. BOption (b)

    संगीत कर्णप्रिय होता है।

  3. COption (c)

    संगीत मानसिक शांति प्रदान करता है।

  4. DOption (d)

    प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है।

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर संगीत सर्वश्रेष्ठ होता है - प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है।

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • केवल सौन्दर्य से है - यह कहना सौन्दर्य और कला को न समझने जैसा है।
  • सत्य ही ऊँची से ऊँची कला और श्रेष्ठ सौन्दर्य है और वह नीति, हितकारिता और उपयोगिता से भिन्न नहीं हो सकता।
  • गांधी के अनुसार संगीत इसलिए श्रेष्ठ है कि वह प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है"।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • संगीत सर्वश्रेष्ठ कला है। - अवतरण में गांधी के अनुसार संगीत इसलिए श्रेष्ठ है कि वह प्रार्थना और नैतिक उन्नति में सहायक है"।
  • संगीत कर्णप्रिय होता है। - अवतरण में 'संगीत कर्णप्रिय' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • संगीत मानसिक शांति प्रदान करता है। - अवतरण में 'संगीत मानसिक शांति' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।

Question 92

Based on Passage: View directions & passage

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अहिंसा के संबंध में उपयुक्त विचार कौन सा है?

  1. AOption (a)

    किसी भी जीव की हत्या न की जाए

  2. BOption (b)

    जीवों से प्रेम किया जाए

  3. COption (c)

    बेर त्याग, चराचर प्रेम और पूर्ण निष्काम भाव

  4. DOption (d)

    सभी को जीवन का अधिकार

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

बेर त्याग, चराचर प्रेम और पूर्ण निष्काम भाव

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अहिंसा के संबंध में उपयुक्त विचार है - बेर त्याग, चराचर प्रेम और पूर्ण निष्काम भाव

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • ​यह प्रेम स्वार्थ, मोह, आसक्ति आदि से भिन्न होता है।
  • इस अहिंसा में बेर-त्याग, चराचर प्रेम और पूर्ण निष्काम भाव का समन्वय है।
  • इस समन्वय का पहला तत्त्व जेन, बोद्ध अहिंसा का है,
  • दूसरा वेष्णव भावना का प्रसाद हे ओर तीसरा तो स्पष्टतः गीता का प्रभाव है।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • किसी भी जीव की हत्या न की जाए - अवतरण में 'किसी भी जीव की हत्या न की जाए' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • जीवों से प्रेम किया जाए - अवतरण में 'जीवों से प्रेम किया जाए' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • सभी को जीवन का अधिकार - अवतरण में 'सभी को जीवन का अधिकार' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।

Question 93

Based on Passage: View directions & passage

उपर्युक्त अवतरण के अनुसार मनुष्य एवं अन्य जीवधारियों की एकता का स्वीकार कब होता है?

  1. AOption (a)

    समस्त सृष्टि का ज्ञान अर्जित करने से

  2. BOption (b)

    समस्त सृष्टि को एक विधान से संचालित करना

  3. COption (c)

    समस्त सृष्टि में एक ही तत्त्व की व्याप्ति

  4. DOption (d)

    समस्त सृष्टि के परम्परावलम्बी होने से

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

समस्त सृष्टि में एक ही तत्त्व की व्याप्ति

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के अनुसार मनुष्य एवं अन्य जीवधारियों की एकता का स्वीकार समस्त सृष्टि में एक ही तत्त्व की व्याप्ति होता है।

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • ​गांधीवाद के मूल स्तम्भ दो हैं, सत्य और अहिंसा।
  • सत्य का ही दूसरा नाम उन्होंने परमेश्वर माना है तथा समस्त सृष्टि में एक ही तत्त्व की व्याप्ति स्वीकार कर
  • ईश्वर और मनुष्य तथा मनुष्य एवं अन्य जीवधारियों की एकता स्वीकार की है।
  • अहिंसा में केवल द्वेष का अभाव ही नहीं, प्रेम की संप्राप्ति भी है।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • समस्त सृष्टि का ज्ञान अर्जित करने से - अवतरण में 'समस्त सृष्टि का ज्ञान अर्जित करने से​' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • समस्त सृष्टि को एक विधान से संचालित करना - अवतरण में 'समस्त सृष्टि को एक विधान से संचालित करना​' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • समस्त सृष्टि के परम्परावलम्बी होने से - अवतरण में 'समस्त सृष्टि के परम्परावलम्बी' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।

Question 94

Based on Passage: View directions & passage

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अहिंसा की प्राप्ति के लिए आवश्यक माना गया है ?

  1. AOption (a)

    मोह का त्याग

  2. BOption (b)

    धन का त्याग

  3. COption (c)

    कर्तव्य का त्याग

  4. DOption (d)

    अहं का त्याग

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

अहं का त्याग

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अहिंसा की प्राप्ति के लिए आवश्यक माना गया है - अहं का त्याग

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • इस समन्वय का पहला तत्त्व जैन, बौद्ध अहिंसा का है,
  • दूसरा वैष्णव भावना का प्रसाद है और तीसरा तो स्पष्टतः गीता का प्रभाव है।
  • ऐसी अहिंसा की प्राप्ति के लिए गांधी ने आत्मशुद्धि को आवश्यक माना है
  • और आत्मशुद्धि के लिए अन्य संतों की भांति अहं के त्याग को अनिवार्य माना है।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • मोह का त्याग - अवतरण में, यह प्रेम स्वार्थ, मोह, आसक्ति आदि से भिन्न होता है।
  • धन का त्याग - अवतरण में 'धन का त्याग​' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • कर्तव्य का त्याग - अवतरण में 'कर्तव्य का त्याग​' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।

Question 95

Based on Passage: View directions & passage

‘कला कला के लिए’ सिद्धांत से गांधी दर्शन में कोई सहानुभूति क्यों नहीं हैं?

  1. AOption (a)

    कला का उद्देश्य अद्वितीयता है।

  2. BOption (b)

    कलाकार अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नही होता है।

  3. COption (c)

    कला का सौन्दर्य से सम्बन्ध होता है।

  4. DOption (d)

    नीति, हितकारिता, उपयोगिता को कसौटी माना जाता है।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

नीति, हितकारिता, उपयोगिता को कसौटी माना जाता है।

Why this answer is correct

‘कला कला के लिए’ सिद्धांत से गांधी दर्शन में कोई सहानुभूति नहीं हैं क्योंकि नीति, हितकारिता, उपयोगिता को कसौटी माना जाता है।

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • कलाकार जनता के प्रति अपने कर्तव्यों के विषय में सदैव जागरूक रहे,
  • तभी कला अपनी सार्थकता प्रमाणित कर सकती है।
  • कला की श्रेष्ठता की कसौटी गांधी ने उसकी उपयोगिता स्वीकार की,
  • कला का सम्बन्ध नीति, हितकारिता और उपयोगिता से नहीं है,
  • केवल सौन्दर्य से है - यह कहना सौन्दर्य और कला को न समझने जैसा है।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • कला का उद्देश्य अद्वितीयता है। - अवतरण में 'कला का उद्देश्य अद्वितीयता​' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • कलाकार अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नही होता है। - अवतरण में 'कलाकार अपने कर्तव्यों के प्रति सजग' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।
  • कला का सौन्दर्य से सम्बन्ध होता है। - अवतरण में 'कला का सौन्दर्य से सम्बन्ध' की चर्चा कही भी नहीं की गयी हैं।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

जब अंग्रेज आए, भारत का बहुत ही बुरा हाल था। भारतवासी अपने इतिहास को भूल चुके थे; वे बाहर का तो क्या, अपने देश का भी भूगोल ठीक से नहीं जानते थे। वैयक्तिता का विष जो भारत में बहुत दिनों से चला आ रहा था, इस काल में आकर और भी बढ़ गया था। समाज और देश के प्रति भी हमारा कोई कर्तव्य है, इस बात को लोग बिल्कुल ही भूल बैठे थे। इस अवस्था के बीच पहले-पहल अंग्रेजी शिक्षा के द्वारा ही वह दल आविर्भूत हुआ, जिसका उद्देश्य सामाजिक था, जो केवल अपने को ही नहीं, अपने देश और समाज को भी पहचानने की इच्छा रखता था। समाज और देश के प्रति जो नवीन चेतना जगी, उसी के भीतर से हमारी राजनैतिक, सामाजिक और धार्मिक क्रांतियों का जन्म हुआ है। सामाजिक चेतना ही वह गुण है जो आज के औसत भारतवासी को प्राचीन अथवा मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है और यह चेतना भारत को यूरोपीय संपर्क से मिली है। यह ठीक है कि भारतीय जनता को अशिक्षा एवं अंधविश्वास की जकड़बंदी से छुड़ाने अथवा उसके भीतर प्रगतिशील विचारों को प्रेरित करने का काम अंग्रेज शासकों ने नहीं किया, किन्तु, नई विद्या के प्रचार से ये सारे कार्य आप से आप हो गए। नई शिक्षा का एक अन्य श्रेष्ठतम परिणाम यह हुआ कि अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों का सेवन करते - करते शिक्षित भारतवर्ष की मानसिक एकता में वृद्धि हुई। संस्कृत के सार्वदेशिक भाषा होने के कारण, पहले भी सारा भारत एक था, किन्तु संस्कृत का भारत में जितना अन्तःप्रांतीय प्रचार था, उससे कुछ अधिक प्रचार अब अंग्रेजी का हो गया।

सबसे बड़ी बात यह हुई कि जब अंग्रेजी भाषा भारत में अपना पाँव फैला रही थी. ठीक उसी समय, यूरोप में स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, प्रजातंत्र और उदार भावनाओं के जोरदार आन्दोलन चल रहे थे। अठारहवीं सदी के यूरोप के क्रांतिकारी विचारों के जो नेता उत्पन्न हुए, अनेक हलचलों और क्रांतियों के बाद उन्नीसवीं सदी में आकर उनके विचारों ने दर्शन का रूप ले लिया और वे यूरोप को आंदोलित करने लगे। विचारों का यह आन्दोलन सहस्त्र धाराओं में चल रहा था एवं कविता, नाटक, उपन्यास, आलोचना, निबंध, दर्शन, भाषण और शास्त्रार्थ तथा राजनैतिक दलों एवं सरकारों के संगठनों में से, सब - के - सब, इन विचारों से, ओत - प्रोत हो रहे थे। फ्रांसीसी क्रांति का ‘स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व वाला महान उद्घोष अब पिघलकर उदारतावाद में ढल गया था। खुद इंग्लैण्ड में उस समय क़ानूनी सुधारों को लेकर घमासान आन्दोलन चल रहा था। राज्य वही अच्छा है जिसमें अधिक - से - अधिक लोगों का अधिक - से - अधिक कल्याण हो, ये और ऐसे अनेक अन्य विचार इंग्लैण्ड में भी गृहीत होते जा रहे थे।

Question 96

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उपर्युक्त अवतरण के आधार पर वह कौन-सा गुण है जो औसत भारतवासी को प्राचीन और मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है?

  1. AOption (a)

    विद्रोही चेतना

  2. BOption (b)

    मानसिक चेतना

  3. COption (c)

    आर्थिक चेतना

  4. DOption (d)

    सामाजिक चेतना

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

सामाजिक चेतना

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर वह सामाजिक चेतना गुण है जो औसत भारतवासी को प्राचीन और मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है।

Key Pointsअवतरण के अनुसार -

  • समाज और देश के प्रति जो नवीन चेतना जगी, उसी के भीतर से हमारी राजनैतिक,
  • सामाजिक और धार्मिक क्रांतियों का जन्म हुआ है। सामाजिक चेतना ही वह गुण है
  • जो आज के औसत भारतवासी को प्राचीन अथवा मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है
  • और यह चेतना भारत को यूरोपीय संपर्क से मिली है।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

जब अंग्रेज आए, भारत का बहुत ही बुरा हाल था। भारतवासी अपने इतिहास को भूल चुके थे; वे बाहर का तो क्या, अपने देश का भी भूगोल ठीक से नहीं जानते थे। वैयक्तिता का विष जो भारत में बहुत दिनों से चला आ रहा था, इस काल में आकर और भी बढ़ गया था। समाज और देश के प्रति भी हमारा कोई कर्तव्य है, इस बात को लोग बिल्कुल ही भूल बैठे थे। इस अवस्था के बीच पहले-पहल अंग्रेजी शिक्षा के द्वारा ही वह दल आविर्भूत हुआ, जिसका उद्देश्य सामाजिक था, जो केवल अपने को ही नहीं, अपने देश और समाज को भी पहचानने की इच्छा रखता था। समाज और देश के प्रति जो नवीन चेतना जगी, उसी के भीतर से हमारी राजनैतिक, सामाजिक और धार्मिक क्रांतियों का जन्म हुआ है। सामाजिक चेतना ही वह गुण है जो आज के औसत भारतवासी को प्राचीन अथवा मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है और यह चेतना भारत को यूरोपीय संपर्क से मिली है। यह ठीक है कि भारतीय जनता को अशिक्षा एवं अंधविश्वास की जकड़बंदी से छुड़ाने अथवा उसके भीतर प्रगतिशील विचारों को प्रेरित करने का काम अंग्रेज शासकों ने नहीं किया, किन्तु, नई विद्या के प्रचार से ये सारे कार्य आप से आप हो गए। नई शिक्षा का एक अन्य श्रेष्ठतम परिणाम यह हुआ कि अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों का सेवन करते - करते शिक्षित भारतवर्ष की मानसिक एकता में वृद्धि हुई। संस्कृत के सार्वदेशिक भाषा होने के कारण, पहले भी सारा भारत एक था, किन्तु संस्कृत का भारत में जितना अन्तःप्रांतीय प्रचार था, उससे कुछ अधिक प्रचार अब अंग्रेजी का हो गया।

सबसे बड़ी बात यह हुई कि जब अंग्रेजी भाषा भारत में अपना पाँव फैला रही थी. ठीक उसी समय, यूरोप में स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, प्रजातंत्र और उदार भावनाओं के जोरदार आन्दोलन चल रहे थे। अठारहवीं सदी के यूरोप के क्रांतिकारी विचारों के जो नेता उत्पन्न हुए, अनेक हलचलों और क्रांतियों के बाद उन्नीसवीं सदी में आकर उ��के विचारों ने दर्शन का रूप ले लिया और वे यूरोप को आंदोलित करने लगे। विचारों का यह आन्दोलन सहस्त्र धाराओं में चल रहा था एवं कविता, नाटक, उपन्यास, आलोचना, निबंध, दर्शन, भाषण और शास्त्रार्थ तथा राजनैतिक दलों एवं सरकारों के संगठनों में से, सब - के - सब, इन विचारों से, ओत - प्रोत हो रहे थे। फ्रांसीसी क्रांति का ‘स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व वाला महान उद्घोष अब पिघलकर उदारतावाद में ढल गया था। खुद इंग्लैण्ड में उस समय क़ानूनी सुधारों को लेकर घमासान आन्दोलन चल रहा था। राज्य वही अच्छा है जिसमें अधिक - से - अधिक लोगों का अधिक - से - अधिक कल्याण हो, ये और ऐसे अनेक अन्य विचार इंग्लैण्ड में भी गृहीत होते जा रहे थे।

Question 97

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उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों ने किसमें वृद्धि की ?

  1. AOption (a)

    मानसिक एकता

  2. BOption (b)

    जातीय एकता

  3. COption (c)

    भौगोलिक एकता

  4. DOption (d)

    सांस्कृतिक एकता

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

मानसिक एकता

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों ने मानसिक एकता में वृद्धि की। 

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • नई शिक्षा का एक अन्य श्रेष्ठतम परिणाम यह हुआ
  • कि अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों का
  • सेवन करते - करते शिक्षित भारतवर्ष की मानसिक एकता में वृद्धि हुई।
  • संस्कृत के सार्वदेशिक भाषा होने के कारण, पहले भी सारा भारत एक था,
  • किन्तु संस्कृत का भारत में जितना अन्तःप्रांतीय प्रचार था,
  • उससे कुछ अधिक प्रचार अब अंग्रेजी का हो गया।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • जातीय एकता - अवतरण में 'जातीय एकता' की चर्चा कही भी नहीं की गई है।
  • भौगोलिक एकता - अवतरण में 'भौगोलिक एकता' की चर्चा कही भी नहीं की गई है।
  • सांस्कृतिक एकता - अवतरण में 'सांस्कृतिक एकता' की चर्चा कही भी नहीं की गई है।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

जब अंग्रेज आए, भारत का बहुत ही बुरा हाल था। भारतवासी अपने इतिहास को भूल चुके थे; वे बाह�� का तो क्या, अपने देश का भी भूगोल ठीक से नहीं जानते थे। वैयक्तिता का विष जो भारत में बहुत दिनों से चला आ रहा था, इस काल में आकर और भी बढ़ गया था। समाज और देश के प्रति भी हमारा कोई कर्तव्य है, इस बात को लोग बिल्कुल ही भूल बैठे थे। इस अवस्था के बीच पहले-पहल अंग्रेजी शिक्षा के द्वारा ही वह दल आविर्भूत हुआ, जिसका उद्देश्य सामाजिक था, जो केवल अपने को ही नहीं, अपने देश और समाज को भी पहचानने की इच्छा रखता था। समाज और देश के प्रति जो नवीन चेतना जगी, उसी के भीतर से हमारी राजनैतिक, सामाजिक और धार्मिक क्रांतियों का जन्म हुआ है। सामाजिक चेतना ही वह गुण है जो आज के औसत भारतवासी को प्राचीन अथवा मध्ययुगीन भारतवासी से विभक्त करता है और यह चेतना भारत को यूरोपीय संपर्क से मिली है। यह ठीक है कि भारतीय जनता को अशिक्षा एवं अंधविश्वास की जकड़बंदी से छुड़ाने अथवा उसके भीतर प्रगतिशील विचारों को प्रेरित करने का काम अंग्रेज शासकों ने नहीं किया, किन्तु, नई विद्या के प्रचार से ये सारे कार्य आप से आप हो गए। नई शिक्षा का एक अन्य श्रेष्ठतम परिणाम यह हुआ कि अंग्रेजी के भीतर से यूरोप के तेजपूर्ण विचारों का सेवन करते - करते शिक्षित भारतवर्ष की मानसिक एकता में वृद्धि हुई। संस्कृत के सार्वदेशिक भाषा होने के कारण, पहले भी सारा भारत एक था, किन्तु संस्कृत का भारत में जितना अन्तःप्रांतीय प्रचार था, उससे कुछ अधिक प्रचार अब अंग्रेजी का हो गया।

सबसे बड़ी बात यह हुई कि जब अंग्रेजी भाषा भारत में अपना पाँव फैला रही थी. ठीक उसी समय, यूरोप में स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, प्रजातंत्र और उदार भावनाओं के जोरदार आन्दोलन चल रहे थे। अठारहवीं सदी के यूरोप के क्रांतिकारी विचारों के जो नेता उत्पन्न हुए, अनेक हलचलों और क्रांतियों के बाद उन्नीसवीं सदी में आकर उनके विचारों ने दर्शन का रूप ले लिया और वे यूरोप को आंदोलित करने लगे। विचारों का यह आन्दोलन सहस्त्र धाराओं में चल रहा था एवं कविता, नाटक, उपन्यास, आलोचना, निबंध, दर्शन, भाषण और शास्त्रार्थ तथा राजनैतिक दलों एवं सरकारों के संगठनों में से, सब - के - सब, इन विचारों से, ओत - प्रोत हो रहे थे। फ्रांसीसी क्रांति का ‘स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व वाला महान उद्घोष अब पिघलकर उदारतावाद में ढल गया था। खुद इंग्लैण्ड में उस समय क़ानूनी सुधारों को लेकर घमासान आन्दोलन चल रहा था। राज्य वही अच्छा है जिसमें अधिक - से - अधिक लोगों का अधिक - से - अधिक कल्याण हो, ये और ऐसे अनेक अन्य विचार इंग्लैण्ड में भी गृहीत होते जा रहे थे।

Question 98

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उपर्युक्त अवतरण के आधार पर फ्रांसीसी क्रांति के महान उद्घोष में शामिल नहीं है।

  1. AOption (a)

    भातृत्व 

  2. BOption (b)

    स्वतंत्रता

  3. COption (c)

    समानता

  4. DOption (d)

    राष्ट्रीयता

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Correct answer

Answer: (d)D.

राष्ट्रीयता

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर फ्रांसीसी क्रांति के महान उद्घोष में शामिल नहीं है - राष्ट्रीयता

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • सब - के - सब, इन विचारों से, ओत - प्रोत हो रहे थे।
  • फ्रांसीसी क्रांति का ‘स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व वाला महान उद्घोष अब पिघलकर उदारतावाद में ढल गया था।
  • खुद इंग्लैण्ड में उस समय क़ानूनी सुधारों को लेकर घमासान आन्दोलन चल रहा था।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • 'भातृत्व' का अर्थ - भाई होने का भाव या धर्म, भाईपन��
  • 'स्वतंत्रता' का अर्थ - स्वतंत्र होने का भाव, आज़ादी, स्वाधीनता।
  • 'समानता' का अर्थ - सभी के साथ समान व्यवहार करना।

Question 99

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उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अपने देश और समाज को पहचानने की इच्छा किस कारण उत्पन्न हुई?

  1. AOption (a)

    अंग्रेजी शासन से

  2. BOption (b)

    अंग्रेजी शिक्षा से

  3. COption (c)

    अंग्रेजी कानूनों से

  4. DOption (d)

    अंग्रेज अधिकारियों से

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Correct answer

Answer: (b)B.

अंग्रेजी शिक्षा से

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर अपने देश और समाज को पहचानने की इच्छा अंग्रेजी शिक्षा से कारण उत्पन्न हुई।

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • समाज और देश के प्रति भी हमारा कोई कर्तव्य है, इस बात को लोग बिल्कुल ही भूल बैठे थे।
  • इस अवस्था के बीच पहले-पहल अंग्रेजी शिक्षा के द्वारा ही वह दल आविर्भूत हुआ,
  • जिसका उद्देश्य सामाजिक था, जो केवल अपने को ही नहीं,
  • अपने देश और समाज को भी पहचानने की इच्छा रखता था।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • अंग्रेजी शासन से - अवतरण में 'अंग्रेजी शासन' की चर्चा कही भी नहीं किया गया है।
  • अंग्रेजी कानूनों से - अवतरण में 'अंग्रेजी कानूनों' की चर्चा कही भी नहीं किया गया है।
  • अंग्रेज अधिकारियों से - अवतरण में 'अंग्रेज अधिकारियों' की चर्चा कही भी नहीं किया गया है।

Question 100

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उपर्युक्त अवतरण के आधार पर भारतवासी समाज और देश के प्रति कर्तव्य किस कारण भूले हुए थे?

  1. AOption (a)

    साम्प्रदायिकता

  2. BOption (b)

    वैचारिकत

  3. COption (c)

    क्षेत्रीयता

  4. DOption (d)

    वैयक्तिकता

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Correct answer

Answer: (d)D.

वैयक्तिकता

Why this answer is correct

उपर्युक्त अवतरण के आधार पर भारतवासी समाज और देश के प्रति कर्तव्य वैयक्तिकता कारण भूले हुए थे।

Key Points

  • अवतरण के अनुसार -
  • जब अंग्रेज आए, भारत का बहुत ही बुरा हाल था। भारतवासी अपने इतिहास को भूल चुके थे;
  • वे बाहर का तो क्या, अपने देश का भी भूगोल ठीक से नहीं जानते थे।
  • वैयक्तिता का विष जो भारत में बहुत दिनों से चला आ रहा था, इस काल में आकर और भी बढ़ गया था।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • 'वैयक्तिकता' का अर्थ - वैयक्तिक होने की अवस्था या भाव।
  • 'वैचारिक' का अर्थ - विचार से सं���ंध रखने वाला।
  • 'साम्प्रदायिकता' का अर्थ - सांप्रदायिक होने का भाव।
  • 'क्षेत्रीयता' का अर्थ - किसी क्षेत्र-विशेष का गुण अथवा गुणों का समाहार।

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