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Showing 10 question(s)
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Question 71

UP Police Constable 2026• General Hindi

निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए -

  1. AOption (a)

    यह सारा काम तुमने करा है।

  2. BOption (b)

    यह सारा काम तुमने किया है।

  3. COption (c)

    तुमने किया है यह सारा काम।

  4. DOption (d)

    तुमने करा है यह सारा काम।

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Correct answer

Answer: (a)A.

यह सारा काम तुमने करा है।

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Question 72

UP Police Constable 2026• General Hindi

निम्नलिखित में से एक अनेकार्थी शब्द है -

  1. AOption (a)

    कृति

  2. BOption (b)

    निपुण

  3. COption (c)

    अर्क

  4. DOption (d)

    छात्र

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Correct answer

Answer: (a)A.

कृति

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Question 73

UP Police Constable 2026• General Hindi

2013 में 'ज्ञानपीठ' पुरस्कार किसे प्राप्त हुआ ?

  1. AOption (a)

    केदारनाथ सिंह

  2. BOption (b)

    रघुवीर चौधरी

  3. COption (c)

    प्रतिभा रे

  4. DOption (d)

    शंख घोष

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Correct answer

Answer: (a)A.

केदारनाथ सिंह

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Question 74

UP Police Constable 2026• General Hindi

'तरनि तनूजा तट तमाल तरुवरबहु छाए', इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?

  1. AOption (a)

    यमक

  2. BOption (b)

    अनुप्रास

  3. COption (c)

    बहुब्रीहि

  4. DOption (d)

    रूपक

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Correct answer

Answer: (a)A.

यमक

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Question 75

UP Police Constable 2026• General Hindi

दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द दीजिए - 'जिसे कोई विकार ना हो'

  1. AOption (a)

    परघाती

  2. BOption (b)

    निर्विकार

  3. COption (c)

    कंजूस

  4. DOption (d)

    स्वार्थी

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Correct answer

Answer: (a)A.

परघाती

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Question 76

UP Police Constable 2026• General Hindi

मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को वह अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।

ऊपर दिए गए गद्यांश के अनुसार अहंकार के कारण मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

  1. AOption (a)

    उसकी बात सभी मानते हैं।

  2. BOption (b)

    वह दूसरों के दोष देखता रहता है।

  3. COption (c)

    वह अपने गुणों का बखान करता है।

  4. DOption (d)

    वह अपने को सर्वश्रेष्ठ समझता है।

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Correct answer

Answer: (a)A.

उसकी बात सभी मानते हैं।

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Question 77

UP Police Constable 2026• General Hindi

मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को वह अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।

गद्यांश के अनुसार अहंकार दूर करने के लिए जरूरी है -

  1. AOption (a)

    आत्मनिरीक्षण करना

  2. BOption (b)

    परछिद्रान्वेषण से बचना

  3. COption (c)

    निरंतर चिंतन-मनन करना

  4. DOption (d)

    मन को शांत रखना

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Correct answer

Answer: (a)A.

आत्मनिरीक्षण करना

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Question 78

UP Police Constable 2026• General Hindi

मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को वह अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।

गद्यांश के अनुसार स्वास्थ्य और सदाचार नष्ट हो जाते हैं -

  1. AOption (a)

    क्रोध के वश में होने पर

  2. BOption (b)

    स्वास्थ्य के नियमों का पालन न करने पर

  3. COption (c)

    अनैतिक कार्य करने पर

  4. DOption (d)

    ईर्ष्या के वश में होने पर

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Correct answer

Answer: (a)A.

क्रोध के वश में होने पर

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Question 79

UP Police Constable 2026• General Hindi

मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को वह अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।

ऊपर दिए गए गद्यांश में किस-किस उपसर्ग से बने शब्दों की अधिकता है ?

  1. AOption (a)

    दुर

  2. BOption (b)

    सद्

  3. COption (c)

    अहं

  4. DOption (d)

    पर

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Correct answer

Answer: (a)A.

दुर

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Question 80

UP Police Constable 2026• General Hindi

मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को वह अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।

गद्यांश के अनुसार दूसरों की उन्नति को मनुष्य क्यों नहीं देखना चाहता ?

  1. AOption (a)

    अपने बड़प्पन के कारण

  2. BOption (b)

    स्वयं गुणी होने के कारण

  3. COption (c)

    ईर्ष्या भाव के कारण

  4. DOption (d)

    स्वयं धनवान होने के कारण

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Correct answer

Answer: (a)A.

अपने बड़प्पन के कारण

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