हिंदी वर्णमाला में ऊष्म व्यंजन कौन-से हैं ?
- AOption (a)
श, ष, स, ह
- BOption (b)
प, थ, ब, म
- COption (c)
ग, न, र, ढ
- DOption (d)
य, र, ज, ज्ञ
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Correct answer
श, ष, स, ह
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Browse complete papersहिंदी वर्णमाला में ऊष्म व्यंजन कौन-से हैं ?
श, ष, स, ह
प, थ, ब, म
ग, न, र, ढ
य, र, ज, ज्ञ
Correct answer
श, ष, स, ह
मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ ।
जा तन की झाँईं परै, स्याम हरित दुति होई ॥
इस काव्य-पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
यमक अलंकार
श्लेष अलंकार
Correct answer
रूपक अलंकार
लाठी में गुण बहुत हैं, सदा राखिये संग ।
गहरि, नदी, नारी जहाँ, तहाँ बचावै अंग ॥
तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारै ।
दुश्मन दावागिर, होयँ तिनहूँ को झारै ॥
कह 'गिरिधर कविराय' सुनो हो धूर के बाठी ॥
सब हथियारन छाँड़ि, हाथ महँ लीजै लाठी ॥ 1 ॥
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा छंद है ?
दोहा
दोही
रोला
कुण्डलिया
Correct answer
दोहा
'वान' प्रत्यय किस शब्द में प्रयोग नहीं हुआ है ?
धनवान
गाड़ीवान
लुभावना
कोचवान
Correct answer
धनवान
'सापेक्ष' का विलोम शब्द चयन कीजिए :
निरपेक्ष
प्रमुख
विमुख
निरामिश
Correct answer
निरपेक्ष
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न] निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
यह घटना सन् 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज़ होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला “स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों को नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है। जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं तो वे पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।
कोलकाता में कौन-सी महामारी फैली थी ?
प्लेग
हैजा
स्वाइन फ्लू
चेचक
Correct answer
प्लेग
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न] निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
यह घटना सन् 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज़ होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला “स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों को नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है। जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं तो वे पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।
गद्यांश के अनुसार, मंडली के मुखिया के मतानुसार प्लेग क्यों फैला था ?
लोगों की लापरवाही के कारण
ईश्वर द्वारा लोगों को दंड देने के कारण
डॉक्टरों की कमी के कारण
मौसम में अचानक बदलाव के कारण
Correct answer
लोगों की लापरवाही के कारण
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न] निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
यह घटना सन् 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज़ होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला “स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों को नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है। जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं तो वे पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।
स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य प्लेग के समय क्या कर रहे थे ?
रोगियों की सेवा कर रहे थे और गलियाँ साफ़ कर रहे थे
बीमारी फैलाने वालों को दंड दे रहे थे
शहर छोड़कर गाँव चले गए थे
अपने आश्रम में प्रार्थना कर रहे थे
Correct answer
रोगियों की सेवा कर रहे थे और गलियाँ साफ़ कर रहे थे
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न] निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
यह घटना सन् 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज़ होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला “स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों को नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है। जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं तो वे पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।
स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार उनके तथा कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जा रहा कार्य था :
पाप कर्म
समाज सेवा
पुण्य का कार्य
मानवोचित कर्म
Correct answer
पाप कर्म
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न] निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
यह घटना सन् 1899 की है। उन दिनों कोलकाता में प्लेग फैला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा घर बचा था, जहाँ यह बीमारी न पहुँची हो। ऐसी विकट स्थिति में भी स्वामी विवेकानंद और उनके शिष्य रोगियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटे हुए थे। वे अपने हाथों से नगर की गलियाँ और बाज़ार साफ़ करते थे और जिस घर में प्लेग का कोई मरीज़ होता था, उसे दवा आदि देकर उसका उपचार करते थे। उसी दौरान कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के पास आए। उनका मुखिया बोला “स्वामी जी, इस धरती पर पाप बहुत बढ़ गया है इसीलिए प्लेग की महामारी के रूप में भगवान लोगों को दंड दे रहे हैं पर आप ऐसे लोगों को बचाने का यत्न कर रहे हैं। ऐसा करके आप भगवान के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” मंडली के मुखिया की कील जैसी बातें सुनकर स्वामी जी गंभीरता से बोले, “सबसे पहले तो मैं आप सब विद्वानों को नमस्कार करता हूँ।” इसके बाद स्वामी जी बोले, “आप यह तो जानते ही होंगे कि मनुष्य इस जीवन में अपने कर्मों के कारण कष्ट और सुख पाता है। जो व्यक्ति कष्ट से पीड़ित है और तड़प रहा है, यदि दूसरा व्यक्ति उसके घावों पर मरहम लगा देता है तो वह स्वयं ही पुण्य का अधिकारी बन जाता है। आज यदि आपके अनुसार प्लेग से पीड़ित लोग पाप के भागी हैं और हमारे कार्यकर्ता इन लोगों की मदद कर रहे हैं तो वे पुण्य के भागी बन रहे हैं। बताइए कि इस संदर्भ में आपको कहना है?” उनकी बात सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए और चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चले गए।
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक हो सकता है :
दंड
पाप और पुण्य
कर्मों का फल
महामारी
Correct answer
दंड