‘कोंपल' शब्द का पर्यायवाची है :
- AOption (a)
किशल
- BOption (b)
जड़
- COption (c)
फूल
- DOption (d)
शाखा
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Correct answer
किशल
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Browse complete papers‘कोंपल' शब्द का पर्यायवाची है :
किशल
जड़
फूल
शाखा
Correct answer
किशल
‘चस्का लगना' मुहावरे का अर्थ है :
नाक रगड़ना
बहुत पीटना
आदत पड़ना
बहुत क्रोध आना
Correct answer
नाक रगड़ना
नीचे दिए गए विकल्पों में से शुद्ध वाक्य पहचानिए :
मेरे को नहीं चाहिए आपकी सलाह।
मुझे नहीं चाहिए आपकी सलाह।
मेरे को आपकी सलाह नहीं चाहिए।
मुझे आपकी सलाह नहीं चाहिए।
Correct answer
मेरे को नहीं चाहिए आपकी सलाह।
‘तट' शब्द का पर्यायवाची है :
कालिंदी
किनारा
नीर
गर्दभ
Correct answer
कालिंदी
‘मरने की फुर्सत न होना' मुहावरे का अर्थ है :
निर्मल होना
अत्यधिक व्यस्त होना
बिल्कुल स्वच्छ होना
छल-कपट से रहित होना
Correct answer
निर्मल होना
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।
निर्भयता आदि गुणों को सीखने के लिए आवश्यक है :
अनुशासन
बचपन में सैनिक शिक्षा का अभ्यास
बचपन से ही अहिंसात्मक प्रवृत्ति का अभ्यास
युवावस्था में ब्रह्मचर्य का आचरण
Correct answer
अनुशासन
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।
उपर्युक्त गद्यांश में फौज की गतिविधियों का उल्लेख इसलिए किया गया है क्योंकि :
फौज का महत्त्व निरूपित किया जाए
अहिंसात्मक अभ्यास की उससे पृथकता प्रतिपादित की जा सके
फौज के क्रिया-कलापों को बताया जा सके
सैनिक शिक्षा की अनिवार्यता संकेतित की जाए
Correct answer
फौज का महत्त्व निरूपित किया जाए
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।
धर्मग्रंथों में सर्वाधिक बल दिया गया है :
अनुशासन पर
अहिंसा पर
संयम पर
भक्ति और ज्ञान पर
Correct answer
अनुशासन पर
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।
अहिंसात्मक अभ्यास का मुख्य साधन क्या है ?
संयम
युद्ध कौशल
ध्यान
शक्ति प्रदर्शन
Correct answer
संयम
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।
‘व्यवहृत' शब्द का पर्याय है :
आचरित
लेन-देन
विवरण
चरित्र
Correct answer
आचरित