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Question 111

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।

रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।

जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"

इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

निम्न में से कौन-सा कथन 'मंगलसूत्र' कहानी की मूल संवेदना के विपरीत है?

  1. AOption (a)

    नारी केवल गृहिणी नहीं, निर्णयकर्ता भी हो सकती है।

  2. BOption (b)

    पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है।

  3. COption (c)

    मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।

  4. DOption (d)

    संवेदनशीलता से ही समाज बदला जा सकता है।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।

Why this answer is correct

निम्न में से 'मंगलसूत्र' कहानी की मूल संवेदना के विपरीत कथन है- मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।

Key Points

  • प्रस्तुत कहानी में रमा द्वारा अपनी विधवा बहन के भविष्य के लिए मंगलसूत्र बेचना उसकी गरिमा, त्याग और नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है।
  • कहानी की मूल संवेदना यह है कि मानवीय मूल्य और संवेदनाएँ किसी भी पारंपरिक आभूषण से ऊपर होते हैं।
  • विकल्प 'मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है' कहानी के संदेश के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि कहानी में रमा के पति ने उसके इस कार्य की सराहना करते हुए उसे 'मंगलमयी' कहा है, जो उसकी मर्यादा और सम्मान में वृद्धि को दर्शाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • नारी केवल गृहिणी नहीं, निर्णयकर्ता भी हो सकती है - यह कथन कहानी के अनुकूल है क्योंकि रमा ने स्वयं निर्णय लेकर मंगलसूत्र बेचा।
  • पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है - यह सत्य है क्योंकि पति ने रमा के निर्णय को समझा और उस पर गर्व किया।
  • संवेदनशीलता से ही समाज बदला जा सकता है - रमा की अपनी बहन के प्रति संवेदना ही समाज की रूढ़ियों (विधवा उपेक्षा) को तोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है।

Important Points 

 

  • प्रेमचंद की कहानियों में नारी पात्र अक्सर रूढ़ियों को तोड़कर मानवीय मूल्यों की स्थापना करते हैं।
  • इस कहानी में 'मंगलसूत्र' का त्याग वैवाहिक अस्मिता का हनन नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा का विस्तार है।
  • कहानी समाज में विधवा विवाह और स्त्रियों के आर्थिक/निर्णयात्मक अधिकारों का समर्थन करती है।

Additional Information 

 

पक्षकहानी में चित्रण
मंगलसूत्र का अर्थकेवल आभूषण नहीं, बल्कि त्याग और नारी-समर्पण की उदात्त भावना।
कुसुम का पात्रसमाज में विधवा स्त्रियों की उपेक्षा और उनके जीवन की रिक्तता का प्रतीक।
पति का दृष्टिकोणसहृदय और प्रगतिशील, जो पत्नी के मानवीय मूल्यों का सम्मान करता है।
मुख्य संदेशस्त्री का विवेकशील और समाज-परिवर्तन का वाहक होना।

Question 112

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

ब्लॉकचेन (Blockchain) एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है, जिसमें सूचना को एक श्रृंखलाबद्ध ढंग से सुरक्षित रखा जाता है। यह डेटा संरचना किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर आधारित होती है, जहाँ हर उपयोगकर्ता एक नोड के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक लेन-देन एक “ब्लॉक” के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है।

इस तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जिससे यह धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बन जाती है। ब्लॉकचेन का उपयोग अब केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चुनावी प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा, और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि ब्लॉकचेन की संभावनाएँ असीम हैं, परंतु इससे जुड़ी तकनीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता इसके व्यापक प्रयोग में बाधा बन रही है। भारत सरकार भी अब ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि यह तकनीक शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा ला सके।

ब्लॉकचेन तकनीक की कौन-सी विशेषता उसे धोखाधड़ी-रोधी बनाती है?

  1. AOption (a)

    इसकी उच्च लागत

  2. BOption (b)

    केंद्रीकृत भंडारण

  3. COption (c)

    अपरिवर्तनीय डेटा श्रृंखला

  4. DOption (d)

    उपयोगकर्ता गोपनीयता

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Correct answer

Answer: (c)C.

अपरिवर्तनीय डेटा श्रृंखला

Why this answer is correct

ब्लॉकचेन तकनीक की अपरिवर्तनीय डेटा श्रृंखला विशेषता उसे धोखाधड़ी-रोधी बनाती है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, ब्लॉकचेन तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता।
  • यही अपरिवर्तनीयता (Immutability) इसे एक धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बनाती है।
  • प्रत्येक लेन-देन एक "ब्लॉक" के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है, जिससे डेटा के साथ छेड़छाड़ करना लगभग असंभव हो जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • इसकी उच्च लागत - यह तकनीक के व्यापक प्रयोग में एक बाधा हो सकती है, लेकिन यह इसे धोखाधड़ी-रोधी नहीं बनाती।
  • केंद्रीकृत भंडारण - ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) नेटवर्क है, न कि केंद्रीकृत। केंद्रीकृत सिस्टम में डेटा चोरी का खतरा अधिक होता है।
  • उपयोगकर्ता गोपनीयता - यद्यपि गोपनीयता एक पहलू है, लेकिन सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव मुख्य रूप से डेटा की अपरिवर्तनीयता से सुनिश्चित होता है।

Important Points 

 

  • विकेंद्रीकरण: डेटा किसी एक सर्वर पर नहीं, बल्कि नेटवर्क के कई नोड्स पर वितरित होता है।
  • पारदर्शिता: सभी लेन-देन नेटवर्क के प्रतिभागियों के लिए दृश्यमान और सुलभ होते हैं।
  • प्रयोग: इसका उपयोग क्रिप्टोकरेंसी के अलावा चुनाव, आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल पहचान में भी किया जा रहा है।

Additional Information 

 

ब्लॉकचेन की विशेषताविवरण
अपरिवर्तनीयताएक बार ब्लॉक में डेटा दर्ज होने के बाद उसे बदला या हटाया नहीं जा सकता।
विकेंद्रीकरणकोई केंद्रीय प्राधिकरण नहीं होता; सूचना पूरे नेटवर्क में फैली होती है।
सुरक्षाक्रिप्टोग्राफ़िक हैशिंग और नोड्स के सर्वसम्मति तंत्र के कारण डेटा सुरक्षित रहता है।
दक्षताबिचौलियों की आवश्यकता को समाप्त कर लेन-देन को सीधा और पारदर्शी बनाता है।

Question 113

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

ब्लॉकचेन (Blockchain) एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है, जिसमें सूचना को एक श्रृंखलाबद्ध ढंग से सुरक्षित रखा जाता है। यह डेटा संरचना किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर आधारित होती है, जहाँ हर उपयोगकर्ता एक नोड के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक लेन-देन एक “ब्लॉक” के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है।

इस तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जिससे यह धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बन जाती है। ब्लॉकचेन का उपयोग अब केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चुनावी प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा, और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि ब्लॉकचेन की संभावनाएँ असीम हैं, परंतु इससे जुड़ी तकनीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता इसके व्यापक प्रयोग में बाधा बन रही है। भारत सरकार भी अब ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि यह तकनीक शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा ला सके।

"विकेंद्रीकरण" का ब्लॉकचेन में क्या तात्पर्य है?

  1. AOption (a)

    डेटा केवल एक सरकारी सर्वर पर रखा जाए

  2. BOption (b)

    सभी जानकारी निजी कंपनी के पास हो

  3. COption (c)

    डेटा को अनेक नोड्स में वितरित करना

  4. DOption (d)

    डेटा ऑफलाइन सुरक्षित रखना

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Correct answer

Answer: (c)C.

डेटा को अनेक नोड्स में वितरित करना

Why this answer is correct

"विकेंद्रीकरण" का ब्लॉकचेन में तात्पर्य है- डेटा को अनेक नोड्स में वितरित करना

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क (Decentralized Network) पर आधारित होती है, जिसका अर्थ है कि यह किसी एक केंद्रीय सर्वर या अधिकारी पर निर्भर नहीं है।
  • इसमें डेटा को अनेक नोड्स (नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर या उपयोगकर्ता) में वितरित कर दिया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ती है।
  • विकेंद्रीकरण के कारण ही किसी एक बिंदु पर डेटा के साथ छेड़छाड़ करना लगभग असंभव हो जाता है, क्योंकि नेटवर्क के हर नोड के पास जानकारी की प्रति होती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • डेटा केवल एक सरकारी सर्वर पर रखा जाए - यह केंद्रीकरण (Centralization) का उदाहरण है, जो ब्लॉकचेन के सिद्धांत के विपरीत है।
  • सभी जानकारी निजी कंपनी के पास हो - यह भी एक प्रकार का केंद्रीकृत नियंत्रण है, जबकि ब्लॉकचेन में नियंत्रण वितरित होता है।
  • डेटा ऑफलाइन सुरक्षित रखना - ब्लॉकचेन मुख्य रूप से एक डिजिटल और ऑनलाइन तकनीक है, जिसमें डेटा नेटवर्क पर सक्रिय रहता है।

Important Points 

 

  • ब्लॉकचेन की कार्यप्रणाली: प्रत्येक लेन-देन एक 'ब्लॉक' के रूप में दर्ज होता है।
  • अपरिवर्तनीयता: एक बार ब्लॉक में जानकारी दर्ज होने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता, जो इसे धोखाधड़ी-रोधी बनाता है।
  • नोड (Node): ब्लॉकचेन नेटवर्क में भाग लेने वाला प्रत्येक कंप्यूटर या उपयोगकर्ता एक 'नोड' कहलाता है।
  • उपयोग: क्रिप्टोकरेंसी के अलावा इसका उपयोग डिजिटल पहचान, आपूर्ति श्रृंखला और स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा में किया जा रहा है।

Additional Information 

 

पारिभाषिक शब्दब्लॉकचेन के संदर्भ में अर्थ
केंद्रीय सर्वर (Central Server)एक मुख्य कंप्यूटर जहाँ सारा डेटा जमा होता है (ब्लॉकचेन इसका उपयोग नहीं करता)।
वितरित बहीखाता (Distributed Ledger)एक ऐसा रिकॉर्ड जो नेटवर्क के सभी प्रतिभागियों (Nodes) के बीच साझा किया जाता है।
पारदर्शिता (Transparency)चूँकि डेटा सभी नोड्स पर उपलब्ध है, इसलिए नेटवर्क में होने वाला हर बदलाव सबको दिखाई देता है।
सुरक्षा (Security)डेटा को बदलने के लिए नेटवर्क के अधिकांश नोड्स की सहमति आवश्यक होती है, जो हैकिंग को कठिन बनाता है।

Question 114

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

ब्लॉकचेन (Blockchain) एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है, जिसमें सूचना को एक श्रृंखलाबद्ध ढंग से सुरक्षित रखा जाता है। यह डेटा संरचना किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर आधारित होती है, जहाँ हर उपयोगकर्ता एक नोड के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक लेन-देन एक “ब्लॉक” के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है।

इस तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जिससे यह धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बन जाती है। ब्लॉकचेन का उपयोग अब केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चुनावी प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा, और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि ब्लॉकचेन की संभावनाएँ असीम हैं, परंतु इससे जुड़ी तकनीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता इसके व्यापक प्रयोग में बाधा बन रही है। भारत सरकार भी अब ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि यह तकनीक शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा ला सके।

निम्न में से कौन-सा ब्लॉकचेन तकनीक का पारंपरिक उपयोग नहीं है?

  1. AOption (a)

    क्रिप्टोकरेंसी

  2. BOption (b)

    आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

  3. COption (c)

    सरकारी पेंशन वितरण

  4. DOption (d)

    पारंपरिक कृषि उपकरण

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Correct answer

Answer: (d)D.

पारंपरिक कृषि उपकरण

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में से पारंपरिक कृषि उपकरण ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग नहीं है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग डिजिटल सूचनाओं को सुरक्षित रखने और पारदर्शिता लाने के लिए किया जाता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply Chain Management), और सरकारी डिजिटल सेवाओं (जैसे पेंशन वितरण या डिजिटल पहचान) में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
  • "पारंपरिक कृषि उपकरण" भौतिक औजार (जैसे हल, ट्रैक्टर आदि) होते हैं, जिनका ब्लॉकचेन जैसी डिजिटल लेजर तकनीक से कोई सीधा कार्यात्मक संबंध नहीं है।
  • अतः, पारंपरिक कृषि उपकरण ब्लॉकचेन तकनीक के अनुप्रयोगों के अंतर्गत नहीं आते हैं।

Important Points 

 

  • ब्लॉकचेन की मुख्य विशेषताएं:
  • विकेंद्रीकरण: डेटा किसी एक केंद्रीय सर्वर पर नहीं बल्कि कई नोड्स पर होता है।
  • अपरिवर्तनीयता: एक बार दर्ज जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जो इसे धोखाधड़ी-रोधी बनाता है।
  • पारदर्शिता: प्रत्येक लेन-देन नेटवर्क के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए दृश्यमान होता है।

Additional Information 

 

क्षेत्रब्लॉकचेन का उपयोग
वित्तीय सेवाएंक्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन) और सुरक्षित बैंकिंग लेन-देन।
प्रशासन (Governance)चुनावी मतदान प्रणाली, पेंशन वितरण, और डिजिटल पहचान पत्र।
लॉजिस्टिक्सआपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में वस्तुओं की ट्रैकिंग और पारदर्शिता।
स्वास्थ्य सेवामरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Health Records) की सुरक्षा।

Question 115

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

ब्लॉकचेन (Blockchain) एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है, जिसमें सूचना को एक श्रृंखलाबद्ध ढंग से सुरक्षित रखा जाता है। यह डेटा संरचना किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर आधारित होती है, जहाँ हर उपयोगकर्ता एक नोड के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक लेन-देन एक “ब्लॉक” के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है।

इस तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जिससे यह धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बन जाती है। ब्लॉकचेन का उपयोग अब केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चुनावी प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा, और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि ब्लॉकचेन की संभावनाएँ असीम हैं, परंतु इससे जुड़ी तकनीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता इसके व्यापक प्रयोग में बाधा बन रही है। भारत सरकार भी अब ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि यह तकनीक शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा ला सके।

ब्लॉकचेन की जटिलता को बढ़ाने वाला प्रमुख कारक क्या है?

  1. AOption (a)

    इसकी बहुभाषी संरचना

  2. BOption (b)

    ऊर्जा खपत और तकनीकी ढांचा

  3. COption (c)

    केवल सरकारी अनुमति

  4. DOption (d)

    केवल ऑनलाइन उपस्थिति

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Correct answer

Answer: (b)B.

ऊर्जा खपत और तकनीकी ढांचा

Why this answer is correct

ब्लॉकचेन की जटिलता को बढ़ाने वाला प्रमुख कारक ऊर्जा खपत और तकनीकी ढांचा है।

Key Points

  • दिए गए अनुच्छेद के अनुसार, ब्लॉकचेन तकनीक की संभावनाएँ असीम हैं, लेकिन इसके व्यापक प्रयोग में कुछ चुनौतियाँ भी हैं।
  • अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "तक��ीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता" इसके उपयोग में मुख्य बाधाएं और जटिलता के कारक हैं।
  • चूँकि ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क है जहाँ प्रत्येक लेन-देन को सत्यापित करने के लिए भारी गणना (computation) की आवश्यकता होती है, इसलिए इसमें ऊर्जा की खपत बहुत अधिक होती है।
  • इसके साथ ही, इसके लिए एक उन्नत और जटिल तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होती है, जो इसे अपनाने की प्रक्रिया को कठिन बनाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • इसकी बहुभाषी संरचना - अनुच्छेद में ब्लॉकचेन की जटिलता के लिए भाषाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  • केवल सरकारी अनुमति - सरकारी अनुमति एक नियामक पहलू हो सकता है, लेकिन यह तकनीक की आंतरिक जटिलता को बढ़ाने वाला प्रमुख कारक नहीं है।
  • केवल ऑनलाइन उपस्थिति - ऑनलाइन होना किसी भी डिजिटल तकनीक की सामान्य विशेषता है, यह विशेष रूप से जटिलता का कारण नहीं है।

Important Points

  • ब्लॉकचेन (Blockchain): यह एक डिजिटल तकनीक है जहाँ डेटा को 'ब्लॉक' के रूप में सुरक्षित रखा जाता है।
  • अपरिवर्तनीयता (Immutability): एक बार डेटा दर्ज होने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता, जो इसे धोखाधड़ी-रोधी बनाता है।
  • विकेंद्रीकरण: इसमें कोई केंद्रीय सर्वर नहीं होता, बल्कि डेटा नेटवर्क के सभी नोड्स (उपयोगकर्ताओं) में वितरित रहता है।
  • अनुप्रयोग: क्रिप्टोकरेंसी के अलावा इसका उपयोग डिजिटल पहचान, आपूर्ति श्रृंखला और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए किया जा रहा है।

Additional Information

ब्लॉकचेन की बाधाएंविवरण
ऊर्जा खपतडेटा को माइन (Verify) करने के लिए शक्तिशाली कंप्यूटरों को चलाने में भारी बिजली की खपत होती है।
तकनीकी ढांचाउच्च गति इंटरनेट और उन्नत कंप्यूटिंग हार्डवेयर की निरंतर आवश्यकता।
नियामकीय अस्पष्टताकानूनी नियमों और वैश्विक मानकों की कमी के कारण इसके उपयोग में संशय बना रहता है।
स्केलेबिलिटीएक साथ लाखों लेन-देन को संसाधित करने की गति पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में कभी-कभी धीमी हो सकती है।

Question 116

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

ब्लॉकचेन (Blockchain) एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है, जिसमें सूचना को एक श्रृंखलाबद्ध ढंग से सुरक्षित रखा जाता है। यह डेटा संरचना किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर आधारित होती है, जहाँ हर उपयोगकर्ता एक नोड के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक लेन-देन एक “ब्लॉक” के रूप में दर्ज होता है और पिछले ब्लॉक से जुड़कर एक अखंड और पारदर्शी श्रृंखला बनाता है।

इस तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बार दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकता, जिससे यह धोखाधड़ी-रोधी और भरोसेमंद प्रणाली बन जाती है। ब्लॉकचेन का उपयोग अब केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चुनावी प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्वास्थ्य डेटा सुरक्षा, और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि ब्लॉकचेन की संभावनाएँ असीम हैं, परंतु इससे जुड़ी तकनीकी जटिलता, ऊर्जा खपत, और नियामकीय अस्पष्टता इसके व्यापक प्रयोग में बाधा बन रही है। भारत सरकार भी अब ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि यह तकनीक शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा ला सके।

भारत सरकार द्वारा ब्लॉकचेन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है?

  1. AOption (a)

    खेलों में स्कोर गिनने के लिए

  2. BOption (b)

    डिजिटल पहचान और पारदर्शिता लाने के लिए

  3. COption (c)

    केवल बैंकिंग लेन-देन के लिए

  4. DOption (d)

    राष्ट्रीय गीत संग्रह के लिए

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Correct answer

Answer: (b)B.

डिजिटल पहचान और पारदर्शिता लाने के लिए

Why this answer is correct

भारत सरकार द्वारा ब्लॉकचेन का उपयोग डिजिटल पहचान और पारदर्शिता लाने के लिए किया जा रहा है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, भारत सरकार ब्लॉकचेन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है ताकि शासन और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • इसका एक मुख्य उद्देश्य डिजिटल पहचान (Digital Identity) को सुरक्षित बनाना और सरकारी कार्यों में जवाबदेही लाना है।
  • ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से डेटा के साथ छेड़छाड़ करना असंभव है, जो इसे सरकारी रिकॉर्ड और पहचान पत्रों के लिए एक आदर्श तकनीक बनाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • खेलों में स्कोर गिनने के लिए - यह ब्लॉकचेन का मुख्य या प्राथमिक सरकारी उद्देश्य नहीं है।
  • केवल बैंकिंग लेन-देन के लिए - अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि ब्लॉकचेन अब केवल क्रिप्टोकरेंसी या बैंकिंग तक सीमित नहीं है।
  • राष्ट्रीय गीत संग्रह के लिए - अनुच्छेद में इसका कोई उल्लेख नहीं है और न ही यह इस तकनीक का मुख्य उपयोग है।

Important Points 

 

  • ब्लॉकचेन (Blockchain): यह एक वितरित बहीखाता (Distributed Ledger) तकनीक है जहाँ सूचनाओं को 'ब्लॉक' में सुरक्षित रखा जाता है।
  • विकेंद्रीकरण: इसमें कोई एकल नियंत्रण केंद्र नहीं होता, जिससे डेटा अधिक सुरक्षित और लोकतांत्रिक रहता है।
  • अपरिवर्तनीयता: एक बार डेटा दर्ज होने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता, जो भ्रष्टाचार को रोकने में सहायक है।

Additional Information 

 

ब्लॉकचेन के क्षेत्रप्रमुख उपयोग
प्रशासन (Governance)पारदर्शिता लाना, सब्सिडी का सीधा हस्तांतरण और रिकॉर्ड प्रबंधन।
स्वास्थ्य (Healthcare)मरीजों के डेटा को सुरक्षित रखना और दवाओं की सप्लाई चेन ट्रैक करना।
शिक्षा (Education)डिजिटल डिग्री और प्रमाणपत्र जारी करना ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)उत्पादों की उत्पत्ति और उनके वितरण के हर चरण की निगरानी करना।

Question 117

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

भारत का भूगर्भीय स्वरूप अत्यंत जटिल, बहुरूपी और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इस देश की भौगोलिक रचना में पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल और तटीय क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इसे प्रकृति की दृष्टि से एक समृद्ध राष्ट्र बनाते हैं। देश की कुल भूमि का लगभग 43% भाग पठारी है, जिनमें विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन पठार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ये पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं। दूसरी ओर, 23% भूमि मैदानी क्षेत्र है जो मुख्यतः गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बनी है और अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। भारत का 10.7% भ��भाग वनाच्छादित है, जो न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक है बल्कि जैव विविधता और मानसून नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में अग्रणी है, जहाँ सघन जंगल और राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी नदियाँ भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये नदियाँ न केवल सिंचाई के लिए जल प्रदान करती हैं, बल्कि जनसंख्या की जलापूर्ति और जलविद्युत उत्पादन में भी सहायक हैं। जलवायु, कृषि, जीवनशैली और लोकसंस्कृति—इन सभी पर इन नदियों का गहरा प्रभाव पड़ता है। भारतीय उपमहाद्वीप को तीन प्रमुख भूगर्भिय खंडों में बाँटा गया है— हिमालय पर्वतीय क्षेत्र: यह भारत के उत्तर में स्थित है और बर्फ से आच्छादित श्रृंखलाएँ तथा जलवायु नियंत्रण की प्रमुख भूमिका निभाता है। उत्तरी मैदानी क्षेत्र: यह गंगा और ब्रह्मपुत्र के जलोढ़ मैदान हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। दक्कन का पठार: यह प्राचीन चट्टानों से बना दक्षिण भारत का हिस्सा है, जो खनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर है। इन भूगर्भिय संरचनाओं का भारत की जलवायु, कृषि व्यवस्था और जैव विविधता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, हिमालय पर्वत उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत सम बनी रहती है — न ही अत्यधिक ठंड और न ही अत्यधिक गर्मी का प्रभाव पूरे देश में होता है। इसी प्रकार, पठारी और मैदानी क्षेत्रों का मिश्रण भारत को जल, खनिज, ऊर्जा और कृषि की दृष्टि से विविद्यतापूर्ण संसाधन प्रदान करता है।

भारत की कुल भूमि का लगभग कितना प्रतिशत पठारी क्षेत्र है?

  1. AOption (a)

    23%

  2. BOption (b)

    10.7%

  3. COption (c)

    43%

  4. DOption (d)

    61%

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Correct answer

Answer: (c)C.

43%

Why this answer is correct

भारत की कुल भूमि का लगभग 43% पठारी क्षेत्र है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, भारत की कुल भूमि का लगभग 43% भाग पठारी है।
  • इन पठारी क्षेत्रों में मुख्य रूप से विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन का पठार सम्मिलित हैं।
  • ये क्षेत्र अपनी खनिज संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Important Points 

  • मैदानी क्षेत्र: देश की 23% भूमि मैदानी है, जो गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलोढ़ निक्षेप से बनी है।
  • वन क्षेत्र: भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जिसमें मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है।
  • नदियों का महत्व: गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ कृषि, सिंचाई और जलविद्युत के लिए आधार हैं।
  • हिमालय का प्रभाव: हिमालय उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं को रोककर भारत की जलवायु को सम बनाए रखता है।

Additional Information 

भूगर्भीय स्वरूपप्रतिशत / विस्तारविशेषता
पठारी क्षेत्र43%खनिज, ऊर्जा और प्राचीन चट्टानों (दक्कन पठार) से भरपूर।
मैदानी क्षेत्र23%अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, कृषि की रीढ़।
वनाच्छादित क्षेत्र10.7%पारिस्थितिकी संतुलन और जैव विविधता हेतु महत्वपूर्ण।
हिमालय क्षेत्रउत्तर सीमाजलवायु नियंत्रण और बारहमासी नदियों का स्रोत।

Question 118

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

भारत का भूगर्भीय स्वरूप अत्यंत जटिल, बहुरूपी और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इस देश की भौगोलिक रचना में पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल और तटीय क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इसे प्रकृति की दृष्टि से एक समृद्ध राष्ट्र बनाते हैं। देश की कुल भूमि का लगभग 43% भाग पठारी है, जिनमें विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन पठार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ये पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं। दूसरी ओर, 23% भूमि मैदानी क्षेत्र है जो मुख्यतः गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बनी है और अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जो न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक है बल्कि जैव विविधता और मानसून नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में अग्रणी है, जहाँ सघन जंगल और राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी नदियाँ भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये नदियाँ न केवल सिंचाई के लिए जल प्रदान करती हैं, बल्कि जनसंख्या की जलापूर्ति और जलविद्युत उत्पादन में भी सहायक हैं। जलवायु, कृषि, जीवनशैली और लोकसंस्कृति—इन सभी पर इन नदियों का गहरा प्रभाव पड़ता है। भारतीय उपमहाद्वीप को तीन प्रमुख भूगर्भिय खंडों में बाँटा गया है— हिमालय पर्वतीय क्षेत्र: यह भारत के उत्तर में स्थित है और बर्फ से आच्छादित श्रृंखलाएँ तथा जलवायु नियंत्रण की प्रमुख भूमिका निभाता है। उत्तरी मैदानी क्षेत्र: यह गंगा और ब्रह्मपुत्र के जलोढ़ मैदान हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। दक्कन का पठार: यह प्राचीन चट्टानों से बना दक्षिण भारत का हिस्सा है, जो खनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर है। इन भूगर्भिय संरचनाओं का भारत की जलवायु, कृषि व्यवस्था और जैव विविधता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, हिमालय पर्वत उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत सम बनी रहती है — न ही अत्यधिक ठंड और न ही अत्यधिक गर्मी का प्रभाव पूरे देश में होता है। इसी प्रकार, पठारी और मैदानी क्षेत्रों का मिश्रण भारत को जल, खनिज, ऊर्जा और कृषि की दृष्टि से विविद्यतापूर्ण संसाधन प्रदान करता है।

गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित मैदानों को क्या कहा जाता है?

  1. AOption (a)

    मरुस्थल

  2. BOption (b)

    पठार

  3. COption (c)

    जलोढ़ मैदान

  4. DOption (d)

    तटीय क्षेत्र

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Correct answer

Answer: (c)C.

जलोढ़ मैदान

Why this answer is correct

गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित मैदानों को जलोढ़ मैदान कहा जाता है।

Key Points

  • दिए गए अनुच्छेद के अनुसार, भारत का 23% भूमि क्षेत्र मैदानी है, जो मुख्यतः गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप (Alluvial deposits) से निर्मित है।
  • इन्हें 'उत्तरी मैदानी क्षेत्र' के रूप में जाना जाता है, जो अपनी उर्वरता के कारण कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।
  • ये नदियाँ अपने साथ हिमालय से महीन मिट्टी और गाद बहाकर लाती हैं, जो मैदानी इलाकों में जमा होकर अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का निर्माण करती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • मरुस्थल - यह शुष्क क्षेत्र होता है (जैसे थार का मरुस्थल), जो नदियों द्वारा निर्मित उपजाऊ मैदान नहीं है।
  • पठार - अनुच्छेद के अनुसार, भारत का 43% भाग पठारी है (जैसे दक्कन का पठार), जो प्राचीन चट्टानों और खनिजों से बना है।
  • तटीय क्षेत्र - ये समुद्र के किनारे स्थित संकीर्ण पट्टियाँ होती हैं, न कि गंगा-ब्रह्मपुत्र के विशाल आंतरिक मैदान।

Important Points 

 

  • कृषि की रीढ़: गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी नदियाँ भारत की कृषि व्यवस्था का आधार हैं।
  • भूगर्भीय खंड: भारतीय उपमहाद्वीप को मुख्य रूप से तीन खंडों में बाँटा गया है: हिमालय पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी मैदानी क्षेत्र और दक्कन का पठार।
  • वन क्षेत्र: भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जिसमें मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है।

Additional Information 

 

भूगर्भीय क्षेत्रविशेषता (अनुच्छेद के अनुसार)
हिमालय क्षेत्रउत्तर में स्थित, बर्फ से आच्छादित, ठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को सम बनाता है।
उत्तरी मैदानगंगा और ब्रह्मपुत्र के जलोढ़ मैदान, जो कृषि के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं।
दक्कन पठारप्राचीन चट्टानों से निर्मित, खनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर।

Question 119

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

भारत का भूगर्भीय स्वरूप अत्यंत जटिल, बहुरूपी और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इस देश की भौगोलिक रचना में पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल और तटीय क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इसे प्रकृति की दृष्टि से एक समृद्ध राष्ट्र बनाते हैं। देश की कुल भूमि का लगभग 43% भाग पठारी है, जिनमें विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन पठार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ये पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं। दूसरी ओर, 23% भूमि मैदानी क्षेत्र है जो मुख्यतः गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बनी है और अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जो न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक है बल्कि जैव विविधता और मानसून नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में अग्रणी है, जहाँ सघन जंगल और राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी नदियाँ भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये नदियाँ न केवल सिंचाई के लिए जल प्रदान करती हैं, बल्कि जनसंख्या की जलापूर्ति और जलविद्युत उत्पादन में भी सहायक हैं। जलवायु, कृषि, जीवनशैली और लोकसंस्कृति—इन सभी पर इन नदियों का गहरा प्रभाव पड़ता है। भारतीय उपमहाद्वीप को तीन प्रमुख भूगर्भिय खंडों में बाँटा गया है— हिमालय पर्वतीय क्षेत्र: यह भारत के उत्तर में स्थित है और बर्फ से आच्छादित श्रृंखलाएँ तथा जलवायु नियंत्रण की प्रमुख भूमिका निभाता है। उत्तरी मैदानी क्षेत्र: यह गंगा और ब्रह्मपुत्र के जलोढ़ मैदान हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। दक्कन का पठार: यह प्राचीन चट्टानों से बना दक्षिण भारत का हिस्सा है, जो खनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर है। इन भूगर्भिय संरचनाओं का भारत की जलवायु, कृषि व्यवस्था और जैव विविधता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, हिमालय पर्वत उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत सम बनी रहती है — न ही अत्यधिक ठंड और न ही अत्यधिक गर्मी का प्रभाव पूरे देश में होता है। इसी प्रकार, पठारी और मैदानी क्षेत्रों का मिश्रण भारत को जल, खनिज, ऊर्जा और कृषि की दृष्टि से विविद्यतापूर्ण संसाधन प्रदान करता है।

भारत में सर्वाधिक वन क्षेत्र किस राज्य में स्थित है?

  1. AOption (a)

    असम

  2. BOption (b)

    मध्य प्रदेश

  3. COption (c)

    झारखंड

  4. DOption (d)

    केरल

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Correct answer

Answer: (b)B.

मध्य प्रदेश

Why this answer is correct

भारत में सर्वाधिक वन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है।

Key Points

  • दिए गए अनुच्छेद के अनुसार, मध्य प्रदेश वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में अग्रणी राज्य है।
  • यहाँ सघन जंगल और कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं, जो जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • वन न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं, बल्कि मानसून नियंत्रण और जैव विविधता के लिए भी अनिवार्य हैं।
  • अनुच्छेद में उल्लेख है कि भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है (यद्यपि वास्तविक वन सर्वेक्षण रिपोर्ट के आँकड़े भिन्न हो सकते हैं, परन्तु अनुच्छेद के आधार पर यही तथ्य है)।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • असम - यह राज्य अपने चाय के बागानों और काजीरंगा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन कुल वन क्षेत्र में मध्य प्रदेश से पीछे है।
  • झारखंड - 'झार' (झाड़ियों) का खंड होने के कारण यहाँ प्रचुर वन हैं, लेकिन क्षेत्रफल की दृष्टि से यह मध्य प्रदेश से कम है।
  • केरल - यह अपने पश्चिमी घाट के सदाबहार वनों के लिए जाना जाता है, परन्तु इसका भौगोलिक क्षेत्रफल छोटा होने के कारण कुल वन क्षेत्र सीमित है।

Important Points

  • वन आच्छादन का महत्त्व: यह मिट्टी के कटाव को रोकता है, कार्बन सोखता है और वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।
  • भारत का भौगोलिक विभाजन: अनुच्छेद के अनुसार भारत को तीन मुख्य खंडों में बाँटा गया है:
  • हिमालय पर्वतीय क्षेत्र
  • उत्तरी मैदानी क्षेत्र
  • दक्कन का पठार

Additional Information

क्षेत्र/विशेषताप्रतिशत/विवरणमुख्य लाभ
पठारी क्षेत्र43%खनिज संपदा (विंध्य, सतपुड़ा, दक्कन)
मैदानी क्षेत्र23%अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, कृषि की रीढ़
हिमालयउत्तर दिशाठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को सम बनाना
वनाच्छादित क्षेत्र10.7%पारिस्थितिकी संतुलन और जैव विविधता

Question 120

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

भारत का भूगर्भीय स्वरूप अत्यंत जटिल, बहुरूपी और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इस देश की भौगोलिक रचना में पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल और तटीय क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इसे प्रकृति की दृष्टि से एक समृद्ध राष्ट्र बनाते हैं। देश की कुल भूमि का लगभग 43% भाग पठारी है, जिनमें विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन पठार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ये पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं। दूसरी ओर, 23% भूमि मैदानी क्षेत्र है जो मुख्यतः गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बनी है और अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जो न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक है बल्कि जैव विविधता और मानसून नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में अग्रणी है, जहाँ सघन जंगल और राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी नदियाँ भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये नदियाँ न केवल सिंचाई के लिए जल प्रदान करती हैं, बल्कि जनसंख्या की जलापूर्ति और जलविद्युत उत्पादन में भी सहायक हैं। जलवायु, कृषि, जीवनशैली और लोकसंस्कृति—इन सभी पर इन नदियों का गहरा प्रभाव पड़ता है। भारतीय उपमहाद्वीप को तीन प्रमुख भूगर्भिय खंडों में बाँटा गया है— हिमालय पर्वतीय क्षेत्र: यह भारत के उत्तर में स्थित है और बर्फ से आच्छादित श्रृंखलाएँ तथा जलवायु नियंत्रण की प्रमुख भूमिका निभाता है। उत्तरी मैदानी क्षेत्र: यह गंगा और ब्रह्मपुत्र के जलोढ़ मैदान हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। दक्कन का पठार: यह प्राचीन चट्टानों से बना दक्षिण भारत का हिस्सा है, जो खनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर है। इन भूगर्भिय संरचनाओं का भारत की जलवायु, कृषि व्यवस्था और जैव विविधता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, हिमालय पर्वत उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत सम बनी रहती है — न ही अत्यधिक ठंड और न ही अत्यधिक गर्मी का प्रभाव पूरे देश में होता है। इसी प्रकार, पठारी और मैदानी क्षेत्रों का मिश्रण भारत को जल, खनिज, ऊर्जा और कृषि की दृष्टि से विविद्यतापूर्ण संसाधन प्रदान करता है।

हिमालय का भारत की जलवायु पर प्रमुख प्रभाव क्या है?

  1. AOption (a)

    मानसून को रोकता है

  2. BOption (b)

    वर्षा को बढ़ावा देता है

  3. COption (c)

    ठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को सम बनाता है

  4. DOption (d)

    रेगिस्तान का विस्तार करता है

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Correct answer

Answer: (c)C.

ठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को सम बनाता है

Why this answer is correct

हिमालय का भारत की जलवायु पर प्रमुख प्रभाव ठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को सम बनाना है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, हिमालय पर्वत उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी शीत हवाओं को रोकता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत सम बनी रहती है।
  • यह अवरोध यह सुनिश्चित करता है कि पूरे देश में न तो अत्यधिक ठंड का प्रभाव हो और न ही अत्यधिक गर्मी का।
  • हिमालय न केवल एक भौतिक बाधा है, बल्कि यह मानसून को नियंत्रित करने और उत्तर भारत की नदियों को जल (बर्फ के पिघलने से) प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • मानसून को रोकता है - यद्यपि हिमालय मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराने में सहायक है, लेकिन प्रश्न के संदर्भ में 'जलवायु को सम बनाने' वाला उत्तर अनुच्छेद के अनुसार सटीक है।
  • वर्षा को बढ़ावा देता है - यह सत्य है, परंतु अनुच्छेद में ठंडी हवाओं के प्रभाव पर अधिक बल दिया गया है।
  • रेगिस्तान का विस्तार करता है - यह पूर्णतः गलत है; इसके विपरीत, हिमालय वर्षा सुनिश्चित कर रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में सहायक होता है।

Important Points

  • भारत के भूगर्भीय स्वरूप को मुख्य रूप से तीन खंडों में बाँटा गया है: हिमालय पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी मैदानी क्षेत्र और दक्कन का पठार।
  • मैदानी क्षेत्र (23%): यह गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है।
  • पठारी क्षेत्र (43%): यह भाग खनिज संपदा (विंध्य, सतपुड़ा और दक्कन) के लिए प्रसिद्ध है।
  • वन क्षेत्र: भारत का 10.7% भूभाग वनाच्छादित है, जिसमें मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है।

Additional Information

भूगर्भीय खंडप्रमुख विशेषतामहत्व
हिमालय पर्वतीय क्षेत्रबर्फ से आच्छादित श्रृंखलाएँजलवायु नियंत्रण और बारहमासी नदियों का स्रोत।
उत्तरी मैदानी क्���ेत्रजलोढ़ मैदान (गंगा-ब्रह्मपुत्र)अत्यधिक उपजाऊ, कृषि व्यवस्था की रीढ़।
दक्कन का पठारप्राचीन चट्टानेंखनिज, ऊर्जा और वन संपदा से भरपूर।