दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:
संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।
रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।
जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"
इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।
निम्न में से कौन-सा कथन 'मंगलसूत्र' कहानी की मूल संवेदना के विपरीत है?
- AOption (a)
नारी केवल गृहिणी नहीं, निर्णयकर्ता भी हो सकती है।
- BOption (b)
पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है।
- COption (c)
मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।
- DOption (d)
संवेदनशीलता से ही समाज बदला जा सकता है।
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Correct answer
मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।
Why this answer is correct
निम्न में से 'मंगलसूत्र' कहानी की मूल संवेदना के विपरीत कथन है- मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है।
Key Points
- प्रस्तुत कहानी में रमा द्वारा अपनी विधवा बहन के भविष्य के लिए मंगलसूत्र बेचना उसकी गरिमा, त्याग और नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है।
- कहानी की मूल संवेदना यह है कि मानवीय मूल्य और संवेदनाएँ किसी भी पारंपरिक आभूषण से ऊपर होते हैं।
- विकल्प 'मंगलसूत्र बेचने से नारी की मर्यादा घट जाती है' कहानी के संदेश के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि कहानी में रमा के पति ने उसके इस कार्य की सराहना करते हुए उसे 'मंगलमयी' कहा है, जो उसकी मर्यादा और सम्मान में वृद्धि को दर्शाता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण -
- नारी केवल गृहिणी नहीं, निर्णयकर्ता भी हो सकती है - यह कथन कहानी के अनुकूल है क्योंकि रमा ने स्वयं निर्णय लेकर मंगलसूत्र बेचा।
- पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है - यह सत्य है क्योंकि पति ने रमा के निर्णय को समझा और उस पर गर्व किया।
- संवेदनशीलता से ही समाज बदला जा सकता है - रमा की अपनी बहन के प्रति संवेदना ही समाज की रूढ़ियों (विधवा उपेक्षा) को तोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है।
Important Points
- प्रेमचंद की कहानियों में नारी पात्र अक्सर रूढ़ियों को तोड़कर मानवीय मूल्यों की स्थापना करते हैं।
- इस कहानी में 'मंगलसूत्र' का त्याग वैवाहिक अस्मिता का हनन नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा का विस्तार है।
- कहानी समाज में विधवा विवाह और स्त्रियों के आर्थिक/निर्णयात्मक अधिकारों का समर्थन करती है।
Additional Information
| पक्ष | कहानी में चित्रण |
|---|---|
| मंगलसूत्र का अर्थ | केवल आभूषण नहीं, बल्कि त्याग और नारी-समर्पण की उदात्त भावना। |
| कुसुम का पात्र | समाज में विधवा स्त्रियों की उपेक्षा और उनके जीवन की रिक्तता का प्रतीक। |
| पति का दृष्टिकोण | सहृदय और प्रगतिशील, जो पत्नी के मानवीय मूल्यों का सम्मान करता है। |
| मुख्य संदेश | स्त्री का विवेकशील और समाज-परिवर्तन का वाहक होना। |