Search Previous Year Questions

Find real questions from previous competitive exam papers with answers and solutions.

Leave the keyword blank to browse saved questions for your selected exam, newest papers first. Add a keyword, year or topic to narrow the results.

Browse complete papers
Showing 10 question(s)
Clear

Question 101

SSC JHT 2025• General Hindi

निम्न में से कौन-सा वाक्य व्यापक विशेषण (समुदायवाचक विशेषण) का उदाहरण है?

  1. AOption (a)

    सभी छात्र उपस्थित थे

  2. BOption (b)

    मेरा घर बड़ा है।

  3. COption (c)

    वह बहुत समझदार है।

  4. DOption (d)

    कुछ फल खराब हो गए।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

सभी छात्र उपस्थित थे

Why this answer is correct

दिए गए वाक्यों में से व्यापक विशेषण (समुदायवाचक विशेषण) का उदाहरण है- सभी छात्र उपस्थित थे

Key Points

  • वाक्य "सभी छात्र उपस्थित थे" में 'सभी' शब्द छात्रों के एक पूरे समूह या समुदाय की व्यापकता को दर्शाता है, इसलिए यह समुदायवाचक विशेषण का उदाहरण है।
  • समुदायवाचक विशेषण: जो विशेषण शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या के समूह या समुदाय का बोध कराते हैं, उन्हें समुदायवाचक विशेषण कहते हैं।
  • यह निश्चित संख्यावाचक विशेषण का ही एक प्रकार माना जाता है क्योंकि यह पूरी संख्या को एक इकाई या समूह के रूप में प्रकट करता है।
  • जैसे- दोनों, तीनों, चारों, पाँचों, सातों, सभी, दसों आदि।
  • दोनों भाई साथ रहते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • मेरा घर बड़ा है - इसमें 'बड़ा' गुणवाचक विशेषण है जो घर के आकार की विशेषता बता रहा है।
  • वह बहुत समझदार है - इसमें 'समझदार' गुणवाचक विशेषण है और 'बहुत' प्रविशेषण है।
  • कुछ फल खराब हो गए - इसमें 'कुछ' अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है, क्योंकि फलों की निश्चित संख्या का पता नहीं चल रहा है।

Important Points 

 

  • संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।
  • विशेषण के मुख्य रूप से चार भेद होते हैं:
  1. गुणवाचक विशेषण
  2. परिमाणवाचक विशेषण (निश्चित और अनिश्चित)
  3. संख्यावाचक विशेषण (निश्चित और अनिश्चित)
  4. सार्वनामिक विशेषण

Additional Information 

 

विशेषण के भेदपरिभाषाउदाहरण
गुणवाचकजो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, आकार आदि का बोध कराते हैं।सुंदर, ईमानदार, लम्बा, काला।
संख्यावाचकजो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध कराते हैं। इसके उपभेदों में गणनावाचक, क्रमवाचक, आवृत्तिवाचक और समुदायवाचक आते हैं।एक, दो, पहला, दुगुना, दोनों, सभी।
परिमाणवाचकजो शब्द किसी वस्तु की नाप या तौल (मात्रा) का बोध कराते हैं।दो किलो चीनी, थोड़ा दूध, बहुत पानी।
सार्वनामिकजब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताता है।वह लड़का, यह किताब, कोई आदमी।

Question 102

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर्निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है—क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?

आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार प��� होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी—जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहाँ तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है?

प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, लेकिन यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।

सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएंगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।

गद्यांश के अनुसार तकनीकी प्रगति का सबसे बड़ा खतरा क्या है?

  1. AOption (a)

    मनुष्य की रचनात्मकता में वृद्धि

  2. BOption (b)

    मानवीय संवेदनाओं का क्षय

  3. COption (c)

    तकनीकी गति में कमी

  4. DOption (d)

    डेटा संग्रहण की समस्या

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

मानवीय संवेदनाओं का क्षय

Why this answer is correct

गद्यांश के अनुसार तकनीकी प्रगति का सबसे बड़ा खतरा है- मानवीय संवेदनाओं का क्षय

Key Points

  • प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, विज्ञान और तकनीक ने जीवन को गति तो दी है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न और खतरा मानवीय संवेदनाओं के खोने (क्षय) का है।
  • लेखक ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को खो रहे हैं, जो कि मानवता का आधार है।
  • जब निर्णय केवल एल्गोरिदम और डेटा पर आधारित हो जाते हैं, तो उनमें करुणा, सहानुभूति और नैतिकता जैसे गुणों का अभाव हो जाता है।
  • गद्यांश की पंक्ति - "क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?" सीधे तौर पर इस खतरे की ओर संकेत करती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • मनुष्य की रचनात्मकता में वृद्धि - यह तकनीकी प्रगति का सकारात्मक पक्ष हो सकता है, खतरा नहीं।
  • तकनीकी गति में कमी - गद्यांश के अनुसार तकनीक ने गति को बढ़ाया है, कम नहीं किया।
  • डेटा संग्रहण की समस्या - हालांकि यह एक तकनीकी चुनौती हो सकती है, लेकिन लेखक ने इसे मानवीय संवेदनाओं के क्षय की तुलना में मुख्य खतरा नहीं माना है।

Important Points 

 

  • तकनीक बनाम मानवता: तकनीक को विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति नहीं बनना चाहिए।
  • अंतःकरण की भूमिका: लेखक का मानना है कि यंत्रों से गति लेना सही है, परंतु जीवन की दिशा अंतःकरण (मानवीय विवेक) से ही चुनी जानी चाहिए।
  • संतुलन: एक उन्नत समाज के साथ-साथ एक सहृदय समाज बनने के लिए तकनीक और मानवता के बीच संतुलन अनिवार्य है।

Additional Information 

 

महत्वपूर्ण शब्दअर्थगद्यांश में संदर्भ
संवेदनासहानुभूति, महसूस करने की क्षमतातकनीक के कारण इसके नष्ट होने का डर है।
अंतःप्रज्ञाभीतरी ज्ञान या सूझ (Intuition)जहाँ AI प्रवेश कर रहा है, पर मानवीय स्पर्श की कमी है।
गौणद्वितीयक, कम महत्वपूर्ण (Secondary)तर्क के सामने मानवीय मूल्य पीछे छूट रहे हैं।
सहृदयहृदयवान, दयालुबिना मानवता के समाज केवल उन्नत होगा, सहृदय नहीं।

Question 103

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर्निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है—क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?

आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार पर होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी—जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहाँ तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है?

प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, लेकिन यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।

सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएंगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।

“यंत्रों से गति लें, पर दिशा अंतःकरण से चुनें” — इस वाक्य का अभिप्राय है:

  1. AOption (a)

    यंत्रों को नियंत्रित करना असंभव है

  2. BOption (b)

    तकनीक से दिशा तय होती है

  3. COption (c)

    तकनीक सहायक है, निर्णय मानवीय विवेक से होने चाहिए

  4. DOption (d)

    अंतःकरण अप्रासंगिक हो गया है

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

तकनीक सहायक है, निर्णय मानवीय विवेक से होने चाहिए

Why this answer is correct

वाक्य "यंत्रों से गति लें, पर दिशा अंतःकरण से चुनें" का अभिप्राय है- तकनीक सहायक है, निर्णय मानवीय विवेक से होने चाहिए

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार, "यंत्रों से गति लेना" तकनीक की उस क्षमता को दर्शाता है जिसके द्वारा हम कार्यों को तीव्रता और कुशलता (Efficiency) से पूरा करते हैं।
  • "दिशा अंतःकरण से चुनना" का अर्थ है कि किसी भी कार्य का उद्देश्य, उसकी नैतिकता और अंतिम निर्णय मनुष्य को अपने विवेक, मूल्यों और सहानुभूति के आधार पर लेना चाहिए।
  • लेखक स्पष्ट करना चाहता है कि तकनीक केवल एक साधन (Tool) है, साध्य (Goal) नहीं। जीवन की दिशा निर्धारित करने का अधिकार मनुष्य के पास ही रहना चाहिए।
  • यह वाक्य तकनीक और मानवता के बीच एक संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल देता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • यंत्रों को नियंत्रित करना असंभव है - यह गलत है क्योंकि गद्यांश तकनीक के उपयोग की बात करता है, उसकी अनियंत्रणता की नहीं।
  • तकनीक से दिशा तय होती है - यह गद्यांश के मूल भाव के विपरीत है; लेखक कहता है कि दिशा अंतःकरण (मनुष्य) को चुननी चाहिए।
  • अंतःकरण अप्रासंगिक हो गया है - यह भी गलत है, क्योंकि लेखक अंतःकरण को ही सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक मानता है।

Important Points 

 

  • तकनीक (Technology): यह तर्क, डेटा और एल्गोरिदम पर आधारित होती है। यह 'कैसे' (How) का उत्तर देती है।
  • मानवीय संवेदना (Human Sensitivity): यह करुणा, नैतिकता और सहानुभूति पर आधारित होती है। यह 'क्यों' (Why) और 'क्या सही है' का उत्तर देती है।
  • विवेकपूर्ण उपयोग: विज्ञान वरदान तभी है जब उसका नियंत्रण मानवीय मूल्यों के हाथ में हो।

Additional Information 

 

पक्षविशेषताभूमिका
यंत्र / तकनीकगति, गणना, डेटा संग्रहण, सटीकता।कार्य को सरल और तीव्र बनाना।
अंतःकरण / विवेकनैतिकता, सहानुभूति, अंतःप्रज्ञा (Intuition), चरित्र।उचित और अनुचित के बीच निर्णय लेना।

Question 104

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर्निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है—क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?

आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार पर होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी—जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहाँ तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है?

प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, लेकिन यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।

सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएंगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।

लेखक के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का कौन-सा क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है?

  1. AOption (a)

    ऑनलाइन खरीदारी

  2. BOption (b)

    स्वचालित वाहन

  3. COption (c)

    मानसिक परामर्श

  4. DOption (d)

    संगीत रचना

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

मानसिक परामर्श

Why this answer is correct

लेखक के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र मानसिक परामर्श है।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार, "मानसिक परामर्श" एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा (intuition) की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
  • लेखक ने उल्लेख किया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब उन क्षेत्रों में भी प्रवेश कर रही है जो अत्यधिक संवेदनशील हैं, जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था और मानसिक परामर्श।
  • इन क्षेत्रों को संवेदनशील इसलिए माना गया है क्योंकि यहाँ केवल डेटा या एल्गोरिदम पर्याप्त नहीं हैं; यहाँ सहानुभूति, नैतिकता और भावनात्मक गहराई की आवश्यकता होती है, जो मशीनों के पास नहीं होती।
  • गद्यांश में प्रश्न उठाया गया है कि क्या यंत्र उस मानवीय संवेदना को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • ऑनलाइन खरीदारी - यह मुख्य रूप से डेटा और उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर आधारित है, इसमें मानवीय संवेदना की वह गहराई आवश्यक नहीं है जिसका उल्लेख लेखक ने किया है।
  • स्वचालित वाहन - यह तकनीकी कौशल और गणनाओं का क्षेत्र है, यद्यपि यह महत्वपूर्ण है, पर लेखक द्वारा चर्चित "मानवीय संवेदना" के संदर्भ में यह प्राथमिक उदाहरण नहीं है।
  • संगीत रचना - AI संगीत बना सकता है, लेकिन गद्यांश के संदर्भ में "संवेदनशीलता" का अर्थ उन निर्णयों से है जो मानवीय जीवन और नैतिकता को प्रभावित करते हैं।

Important Points

  • तकनीक बनाम संवेदना: लेखक के अनुसार, तकनीक सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि मानवीय विवेक को विस्थापित करने के लिए।
  • अंतःकरण का महत्व: मशीनों से गति ली जा सकती है, लेकिन सही दिशा चुनने का कार्य मनुष्य के अंतःकरण और विवेक का है।
  • संतुलन: एक "सहृदय समाज" बनने के लिए तकनीक और मानवता के बीच संतुलन अनिवार्य है।

Additional Information

बिंदुगद्यांश का सार
AI की सीमाएल्गोरिदम और डेटा भावनाओं, करुणा और नैतिकता की जगह नहीं ले सकते।
जोखिमजब संवेदना मशीनों के हवाले होती है, तो निर्णय 'कुशल' तो हो सकते हैं पर उनमें 'आत्मा' का अभाव होता है।
निष्कर्षतकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनाओं की ऊष्मा को बचाए रखना आवश्यक है।

Question 105

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर्निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है—क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?

आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार पर होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी—जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहाँ तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है?

प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, लेकिन यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।

सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएंगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।

लेखक का तकनीक के प्रति दृष्टिकोण कैसा है?

  1. AOption (a)

    पूर्णतः विरोधात्मक

  2. BOption (b)

    केवल प्रशंसात्मक

  3. COption (c)

    संतुलनवादी और विवेकपूर्ण

  4. DOption (d)

    अनावश्यक आशंका से ग्रस्त

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

संतुलनवादी और विवेकपूर्ण

Why this answer is correct

लेखक का तकनीक के प्रति दृष्टिकोण संतुलनवादी और विवेकपूर्ण है।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार, लेखक विज्ञान और तकनीक के महत्व को स्वीकार करता है लेकिन उसके अंधानुकरण के विरुद्ध चेतावनी देता है।
  • लेखक का मानना है कि हमें यंत्रों से गति लेनी चाहिए, लेकिन दिशा का चुनाव अपने अंतःकरण (विवेक) से करना चाहिए।
  • वह तकनीक और मानवता के बीच संतुलन बनाने पर बल देता है ताकि समाज केवल 'उन्नत' ही नहीं बल्कि 'सहृदय' भी बना रहे।
  • यह दृष्टिकोण न तो तकनीक का पूर्ण विरोध करता है और न ही उसकी केवल प्रशंसा, बल्कि एक तार्किक और विवेकपूर्ण मध्यम मार्ग अपनाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • पूर्णतः विरोधात्मक - यह गलत है क्योंकि लेखक तकनीक द्वारा दी गई 'अभूतपूर्व गति और सुविधा' की सराहना करता है।
  • केवल प्रशंसात्मक - यह गलत है क्योंकि लेखक मानवीय संवेदनाओं के क्षय और एल्गोरिदम पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियों पर गंभीर सवाल उठाता है।
  • अनावश्यक आशंका से ग्रस्त - यह गलत है क्योंकि लेखक की चिंताएँ (जैसे नैतिकता और करुणा का अभाव) तार्किक और मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं।

Important Points 

 

  • संतुलनवादी दृष्टिकोण: जब कोई लेखक किसी विषय के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विचार करते हुए सुधार का मार्ग सुझाता है।
  • विवेकपूर्ण दृष्टिकोण: जब निर्णय केवल भावनाओं या केवल डेटा पर न होकर, उचित-अनुचित के बोध (Conscience) पर आधारित हों।
  • गद्यांश की मुख्य सीख: "तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।"

Additional Information 

 

लेखन शैली/दृष्टिकोणअर्थ
विरोधात्मक (Oppositional)विषय के प्रति पूरी तरह नकारात्मक विचार रखना और उसके लाभों को नकारना।
प्रशंसात्मक (Appreciative)विषय की केवल खूबियों का वर्णन करना और उसकी कमियों को नजरअंदाज करना।
संतुलनवादी (Balanced)लाभ और हानि दोनों का विश्लेषण कर एक सामंजस्यपूर्ण निष्कर्ष पर पहुँचना।
विवेकपूर्ण (Prudent)उचित ज्ञान, तर्क और नैतिक समझ का उपयोग करके अपनी राय व्यक्त करना।

Question 106

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर���निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है—क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?

आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार पर होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी—जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहाँ तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है?

प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, लेकिन यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।

सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएंगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।

गद्यांश के अनुसार समाज कब "दिशा भटकने" लगता है?

  1. AOption (a)

    जब तकनीक सीमित हो जाए

  2. BOption (b)

    जब तकनीक महंगी हो जाए

  3. COption (c)

    जब संवेदना मशीनों के हाथ में चली जाए

  4. DOption (d)

    जब ज्ञान की कमी हो

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

जब संवेदना मशीनों के हाथ में चली जाए

Why this answer is correct

गद्यांश के अनुसार समाज तब "दिशा भटकने" लगता है जब- जब संवेदना मशीनों के हाथ में चली जाए

Key Points

  • प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, जब समाज अपनी संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को पूरी तरह से मशीनों या एल्गोरिदम के भरोसे छोड़ देता है, तो वह अपनी सही दिशा खोने लगता है।
  • लेखक का मानना है कि यंत्रों द्वारा लिए गए निर्णय भले ही गणितीय रूप से 'कुशल' हों, लेकिन उनमें 'आत्मा' और 'सहानुभूति' का अभाव होता है, जो एक सहृदय समाज के लिए आवश्यक है।
  • गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि "समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।"

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • जब तकनीक सीमित हो जाए - यह गद्यांश के अनुसार दिशा भटकने का कारण नहीं है; बल्कि लेखक तकनीक के सीमित नहीं, विवेकपूर्ण उपयोग की बात करता है।
  • जब तकनीक महंगी हो जाए - गद्यांश में आर्थिक पक्ष या तकनीक की कीमत की चर्चा नहीं की गई है।
  • जब ज्ञान की कमी हो - गद्यांश का मुख्य केंद्र ज्ञान की कमी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का मशीनीकरण है।

Important Points 

 

  • तकनीक बनाम विवेक: लेखक के अनुसार, तकनीक सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि मानवीय विवेक को विस्थापित करने के लिए।
  • संतुलन का महत्त्व: एक उन्नत समाज बनने के साथ-साथ एक 'सहृदय समाज' बने रहने के लिए तकनीक और मानवता का संतुलन अनिवार्य है।
  • निर्णय प्रक्रिया: यंत्र तर्क और आँकड़ों पर चलते हैं, जबकि मानवीय चरित्र करुणा, नैतिकता और अंतःकरण से विकसित होता है।

Additional Information 

 

पक्ष (Aspect)गद्यांश के अनुसार विशेषता
विज्ञान और तकनीकजीवन को अभूतपूर्व गति, सुविधा और सरलता प्रदान करना (एल्गोरिदम और डेटा आधारित)।
मानवीय संवेदनाआत्मा का मूल गुण, जिसमें करुणा, सहानुभूति, नैतिकता और अंतःप्रज्ञा शामिल हैं।
आदर्श स्थितियंत्रों से गति प्राप्त करना, परंतु दिशा का चुनाव अपने 'अंतःकरण' (विवेक) से करना।

Question 107

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।

रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।

जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"

इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

'मंगलसूत्र' कहानी में मंगलसूत्र का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

  1. AOption (a)

    केवल एक पारंपरिक आभूषण

  2. BOption (b)

    पति की संपत्ति

  3. COption (c)

    सामाजिक बंधन

  4. DOption (d)

    त्याग और नारी-समर्पण की भावना

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

त्याग और नारी-समर्पण की भावना

Why this answer is correct

'मंगलसूत्र' कहानी में मंगलसूत्र का प्रतीकात्मक अर्थ है- त्याग और नारी-समर्पण की भावना

Key Points

  • कहानी में "मंगलसूत्र" केवल एक पारंपरिक आभूषण या वैवाहिक स्थिति का चिह्न नहीं है, बल्कि यह रमा के निःस्वार्थ त्याग और अपनी बहन के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
  • रमा ने अपनी वैवाहिक अस्मिता की निशानी (मंगलसूत्र) को बेचकर एक विधवा के जीवन में प्रकाश लाने का साहस किया, जो उसके उच्च नैतिक चरित्र को दर्शाता है।
  • लेखक ने इसे एक ऐसे बंधन के रूप में परिभाषित किया है जो आत्मिक निष्ठा और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • केवल एक पारंपरिक आभूषण - यह मंगलसूत्र का सतही अर्थ है; कहानी में इसे इससे कहीं अधिक ऊंचा स्थान दिया गया है।

पति की संपत्ति - कहानी इस विचार को नकारती है, क्योंकि रमा स्वयं इसे बेचकर निर्णय लेने की शक्ति दिखाती है।

सामाजिक बंधन - यद्यपि यह एक बंधन है, लेकिन कहानी की मूल संवेदना 'त्याग' पर केंद्रित है।

Important Points 

 

  • प्रेमचंद की कहानियों में अक्सर नारी पात्रों को समाज-परिवर्तन के वाहक के रूप में दिखाया गया है।
  • कहानी के अंत में पति का कथन—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया"—पुष्टि करता है कि वास्तविक मंगलसूत्र मानवीय मूल्यों की रक्षा करना है।
  • यह कहानी नारी को केवल भावुक नहीं, बल्कि विवेकशील और निर्णयशील सिद्ध करती है।

Additional Information 

 

पात्र/तत्वप्रतीकात्मक अर्थविशेषता
रमासाहस और विवेक की प्रतीकस्वयं निर्णय लेने वाली सशक्त नारी।
कुसुमविधवाओं की सामाजिक उपेक्षा की प्रतीकसमाज की रूढ़िवादिता की शिकार।
रमा के पतिभावनात्मक परिपक्वता के प्रतीकपत्नी के नैतिक कार्यों का समर्थन करने वाला पुरुष।
मंगलसूत्र बेचनास्त्री सशक्तिकरण का प्रतीकपुरानी परंपराओं को मानवीयता के लिए त्यागना।

Question 108

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।

रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।

जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"

इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

प्रेमचंद ने रमा के पति को किस दृष्टिकोण से चित्रित किया है?

  1. AOption (a)

    रूढ़िवादी और कठोर

  2. BOption (b)

    उपेक्षापूर्ण और निष्क्रिय

  3. COption (c)

    सहृदय और भावनात्मक रूप से परिपक्व

  4. DOption (d)

    आर्थिक रूप से निर्भर

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

सहृदय और भावनात्मक रूप से परिपक्व

Why this answer is correct

प्रेमचंद ने रमा के पति को सहृदय और भावनात्मक रूप से परिपक्व दृष्टिकोण से चित्रित किया है।

Key Points

  • प्रस्तुत कहानी में रमा के पति का चरित्र एक आदर्श और प्रगतिशील पुरुष के रूप में उभरता है, जो अपनी पत्नी के त्याग को गहराई से समझता है।
  • जब रमा ने अपनी विधवा बहन के भविष्य के लिए अपना मंगलसूत्र बेच दिया, तो उसके पति ने क्रोधित होने के बजाय उसकी सराहना की, जो उसकी भावनात्मक परिपक्वता को दर्शाता है।
  • वह रमा की संवेदना और उसके साहसिक निर्णय का सम्मान करता है, जो यह सिद्ध करता है कि वह सहृदय है और केवल पारंपरिक रूढ़ियों में बँधा हुआ नहीं है।
  • पति का कथन—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया"—उसके उच्च चरित्र और संवेदनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • रूढ़िवादी और कठोर - यदि वह ऐसा होता, तो वह मंगलसूत्र बेचने पर रमा का तिरस्कार करता या उसे घर से निकाल देता।
  • उपेक्षापूर्ण और निष्क्रिय - उसने रमा के कृत्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया, बल्कि सक्रिय रूप से उसकी प्रशंसा की और गर्व महसूस किया।
  • आर्थिक रूप से निर्भर - पूरी कहानी में उसकी आर्थिक स्थिति की निर्भरता पर कोई चर्चा नहीं की गई है, बल्कि उसकी मानसिक सोच पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

Important Points

  • प्रेमचंद की विशेषता: प्रेमचंद ने अक्सर अपने साहित्य में ऐसे पुरुष पात्रों का सृजन किया है जो सामाजिक कुरीतियों (जैसे विधवा समस्या) के विरुद्ध स्त्रियों का साथ देते हैं।
  • संवेदना का महत्त्व: कहानी यह संदेश देती है कि रिश्तों में वस्तु (गहना) से अधिक महत्त्व भावनाओं और त्याग का होता है।
  • परिवर्तन का वाहक: पति का समर्थन यह दर्शाता है कि समाज में परिवर्तन तभी संभव है जब पुरुष भी स्त्रियों के विवेकपूर्ण निर्णयों में उनके सहभागी बनें।

Additional Information

चरित्रभूमिका और विशेषता
रमाविवेकशील, निर्णयकर्ता और मानवीय संवेदना से ओत-प्रोत नारी।
कुसुमविधवा स्त्रियों की सामाजिक उपेक्षा और मौन पीड़ा का प्रतीक।
रमा का पतिउदात्त, सहृदय और प्रगतिशील पुरुष पात्र जो वैचारिक परिपक्वता रखता है।
मंगलसूत्र (प्रतीक)केवल आभूषण नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और आत्मिक निष्ठा का प्रतीक।

Question 109

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।

रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।

जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"

इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

रमा द्वारा मंगलसूत्र बेचना किस प्रकार का निर्णय है?

  1. AOption (a)

    सामाजिक विद्रोह

  2. BOption (b)

    धार्मिक अपमान

  3. COption (c)

    निजी बलिदान और स्त्री सशक्तिकरण

  4. DOption (d)

    विधि-विरुद्ध कार्य

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

निजी बलिदान और स्त्री सशक्तिकरण

Why this answer is correct

रमा द्वारा मंगलसूत्र बेचना निजी बलिदान और स्त्री सशक्तिकरण का निर्णय है।

Key Points

  • प्रस्तुत कहानी के अनुसार, रमा के लिए उसका मंगलसूत्र केवल एक आभूषण नहीं था, बल्कि उसकी वैवाहिक अस्मिता, पहचान और सुहाग का प्रतीक था। उसे बेचना उसके लिए अपने अस्तित्व के एक भाग को त्यागने जैसा था, जो उसके निजी बलिदान को दर्शाता है।
  • रमा ने अपनी विधवा बहन कुसुम के पुनर्विवाह और भविष्य के लिए किसी से बिना सलाह लिए स्वयं स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लिया। यह कार्य दर्शाता है कि वह समाज की रूढ़ियों से ऊपर उठकर निर्णय लेने में सक्षम है, जो स्त्री सशक्तिकरण का परिचायक है।
  • गद्यांश स्पष्ट करता है कि नारी केवल भावुक नहीं होती, बल्कि वह विवेकशील और निर्णयकर्ता भी हो सकती है।

Important Points 

  • कहानी की मूल संवेदना: प्रेमचंद ने इस कथानक के माध्यम से विधवा विवाह जैसी सामाजिक समस्या और उसमें परिवार के सहयोग को रेखांकित किया है।
  • पात्रों का चित्रण: यहाँ रमा को एक साहसी निर्णयकर्ता और उसके पति को एक सहृदय एवं प्रगतिशील व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है, जो नारी के त्याग का सम्मान करता है।
  • प्रतीकात्मकता: 'मंगलसूत्र' यहाँ केवल वैवाहिक बंधन का नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक बनकर उभरा है।

Additional Information 

विकल्पविश्लेषण
सामाजिक विद्रोहयद्यपि यह परंपरा के विरुद्ध था, किंतु इसका उद्देश्य विद्रोह से अधिक 'त्याग' और 'कल्याण' था।
धार्मिक अपमानपति द्वारा रमा की सराहना यह सिद्ध करती है कि यह धार्मिक अपमान नहीं, बल्कि धर्म के सच्चे स्वरूप (परोपकार) का पालन था।
विधि-विरुद्ध कार्ययह किसी कानून का उल्लंघन नहीं था, बल्कि एक व्यक्तिगत संपत्ति का मानवीय हित में उपयोग था।

Question 110

SSC JHT 2025• General Hindi

दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें:

संध्या का समय था। घर में दीया जल चुका था, लेकिन रमा की आँखों में चिंता की लौ अभी बुझी नहीं थी। रमा एक विवाहित स्त्री थी, जो अपने पारिवारिक दायित्वों को न केवल निभा रही थी, बल्कि अपने अंदर एक गहरा मानवीय संवेदना का संसार भी सँजोए हुए थी। उसके घर में उसकी विधवा बहन कुसुम आई हुई थी—एक ऐसी स्त्री, जिसने पति की मृत्यु के बाद जीवन से सभी रंग खो दिए थे। कुसुम के चेहरे पर मौन, आँखों में गहन पीड़ा और शब्दों में रिक्तता थी।

रमा इस स्थिति से व्याकुल थी। वह जानती थी कि समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता, लेकिन वह बहन को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थी। उसी समय रमा के मन में एक विचार उभरा—क्या वह अपने मंगलसूत्र को बेचकर बहन के भविष्य के लिए कुछ कर सकती है? यह मंगलसूत्र केवल एक गहना नहीं था, बल्कि रमा के लिए उसका सुहाग, उसकी पहचान और उसकी वैवाहिक अस्मिता की निशानी था। उसे बेच देना, स्वयं के अस्तित्व के एक भाग को छोड़ देने जैसा था। लेकिन रमा ने अपने हृदय की आवाज़ सुनी। उसने न किसी से पूछा, न किसी से सलाह ली—चुपचाप मंगलसूत्र बेचकर बहन के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर दी।

जब यह बात उसके पति को पता चली, तो आशंका थी कि वह क्रोधित होगा। पर प्रेमचंद ने यहाँ पुरुष पात्र को भी उदात्त बनाया है। पति ने रमा की ओर देखा, और गर्व से कहा—"तुमने मेरे नाम को आज सच्चे अर्थों में मंगलमयी बना दिया।"

इस कथानक के माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि नारी केवल भावुक नहीं, बल्कि निर्णयशील, विवेकशील और समाज-परिवर्तन की वाहक होती है। "मंगलसूत्र" प्रतीक बन जाता है उस बंधन का, जो केवल गले की डोरी नहीं, बल्कि आत्मिक निष्ठा, त्याग और संबंधों की गहराई से जुड़ा होता है।

'मंगलसूत्र' में कुसुम का चरित्र किस सामाजिक समस्या का प्रतीक है?

  1. AOption (a)

    अशिक्षा

  2. BOption (b)

    विधवा स्त्रियों की उपेक्षा

  3. COption (c)

    बाल विवाह

  4. DOption (d)

    बहुविवाह

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

विधवा स्त्रियों की उपेक्षा

Why this answer is correct

'मंगलसूत्र' में कुसुम का चरित्र विधवा स्त्रियों की उपेक्षा की सामाजिक समस्या का प्रतीक है।

Key Points

  • अनुच्छेद के अनुसार, कुसुम रमा की विधवा बहन है, जिसके पति की मृत्यु के बाद उसके जीवन के सभी रंग खो गए हैं।
  • लेखक ने स्पष्ट किया है कि "समाज विधवा स्त्री को पुनः जीवन में स्थापित करने के पक्ष में नहीं खड़ा होता", जो सीधे तौर पर समाज में विधवाओं की उपेक्षा और उनकी दयनीय स्थिति को दर्शाता है।
  • कुसुम के चेहरे का मौन और आँखों की पीड़ा उस सामाजिक संरचना की देन है जहाँ एक विधवा को मुख्यधारा से अलग कर दिया जाता है।
  • रमा का अपनी बहन के पुनर्विवाह के लिए मंगलसूत्र बेचना इसी सामाजिक उपेक्षा और रूढ़िवादिता के विरुद्ध एक बड़ा कदम है।

अन्य विकल्प -

  • अशिक्षा - कहानी में कुसुम की शिक्षा या अशिक्षा पर कोई चर्चा नहीं की गई है, अतः यह गलत है।

बाल विवाह - यद्यपि बाल विवाह एक समस्या है, किंतु इस गद्यांश का मुख्य केंद्र कुसुम का विधवा होना और उसकी उपेक्षा है।

बहुविवाह - गद्यांश में एक पुरुष की कई पत्नियों (बहुविवाह) जैसी किसी समस्या का उल्लेख नहीं है।

Important Points 

 

  • प्रेमचंद का दृष्टिकोण: प्रेमचंद ने कुसुम के माध्यम से विधवा जीवन की त्रासदी और रमा के माध्यम से उस समस्या के समाधान (पुनर्विवाह और आर्थिक सहयोग) को प्रस्तुत किया है।
  • नारी सशक्तिकरण: रमा का स्वयं निर्णय लेना कि वह अपना मंगलसूत्र बेच देगी, यह दर्शाता है कि नारी केवल परंपराओं का पालन करने वाली नहीं, बल्कि परिस्थितियों को बदलने वाली शक्ति भी है।
  • पुरुष पात्र की भूमिका: रमा के पति का समर्थन यह संकेत देता है कि समाज में बदलाव तभी संभव है जब पुरुष भी मानवीय संवेदनाओं को रूढ़ियों से ऊपर रखें।

Additional Information 

 

पात्र/तत्वप्रतीकात्मक अर्थ / भूमिका
रमाविवेकशील, निर्णयकर्ता और मानवीय संवेदना से ओत-प्रोत नारी।
कुसुमसामाजिक उपेक्षा की शिकार विधवा स्त्री और उसकी पीड़ा का प्रतीक।
मंगलसूत्रकेवल आभूषण नहीं, बल्कि त्याग, आत्मिक निष्ठा और संबंधों की गहराई का प्रतीक।
रमा का पतिसहृदय, भावनात्मक रूप से परिपक्व और प्रगतिशील पुरुष पात्र।