Search Previous Year Questions

Find real questions from previous competitive exam papers with answers and solutions.

Leave the keyword blank to browse saved questions for your selected exam, newest papers first. Add a keyword, year or topic to narrow the results.

Browse complete papers
Showing 10 question(s)
Clear

Question 71

REET 2022• Hindi - I

मौखिक मूल्यांकन के संबंध में उपयुक्त कथन है :

  1. AOption (a)

    मौखिक मूल्यांकन में दीर्घउत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।

  2. BOption (b)

    मौखिक मूल्यांकनकर्त्ता निष्ठावान, सहनशील और विषय विशेषज्ञ होना चाहिए।

  3. COption (c)

    मौखिक मूल्यांकन में समूहनिष्ठता अधिक होनी चाहिए।

  4. DOption (d)

    मौखिक मूल्यांकन में विद्यार्थी को आत्माभिव्यक्ति के अवसर कम मिलने चाहिए।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

मौखिक मूल्यांकनकर्त्ता निष्ठावान, सहनशील और विषय विशेषज्ञ होना चाहिए।

Why this answer is correct

मौखिक अभिव्यक्ति से तात्पर्य मन के विचारों को स्वतंत्र रूप से बोल कर अभिव्यक्त करने से है। वक्ता द्वारा सूचनाओं का श्रोताओं तक प्रभावपूर्ण संप्रेषण मौखिक अभिव्यक्ति को सार्थक सिद्ध करता है।

मौखिक मूल्यांकनकर्त्ता निष्ठावान, सहनशील और विषय विशेषज्ञ होना चाहिए। मौखिक मूल्यांक के लिए प्रत्येक बालक की बात को ध्यान व धैर्य़ से सुनना अनिवार्य होता है। छात्रों की मौखिक अभिव्यक्ति की योग्यता का मूल्यांकन करते समय निम्न ��ौशलों को ध्यान में रखना आवश्यक है:-

  • क्रमबद्ध प्रस्तुति हो
  • मौखिक अभिव्यक्ति सदैव उचित गति में हो
  • मौखिक अभिव्यक्ति में शुद्ध उच्चारण हो
  • स्वाभाविकता एवम् स्पष्टता हो
  • मौखिक अभिव्यक्ति में व्याकरण सम्मत भाषा का प्रयोग हो
  • अवसरानुकूलता एवम् सशक्तता

Question 72

REET 2022• Hindi - I

“मूल्यांकन उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय करने की प्रक्रिया है।" मूल्यांकन की यह परिभाषा किसकी है?

  1. AOption (a)

    माइकेलिस

  2. BOption (b)

    सी.सी. रॉस

  3. COption (c)

    ब्लूम

  4. DOption (d)

    राइटस्टोन

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

माइकेलिस

Why this answer is correct

माइकेलिस के अनुसार - “मूल्यांकन उद्देश्यों की प्राप्ति की सीमा का निर्णय करने की प्रक्रिया है।"

Question 73

REET 2022• Hindi - I

विद्यार्थी की सीखने संबंधी कठिनाइयों को दूर करते हुए करवाये जाने वाला शिक्षण कहलाता है

  1. AOption (a)

    सूक्ष्म शिक्षण

  2. BOption (b)

    ब्लॉक शिक्षण

  3. COption (c)

    अभ्यास शिक्षण

  4. DOption (d)

    उपचारात्मक शिक्षण

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

उपचारात्मक शिक्षण

Why this answer is correct

उपचारात्मक शिक्षण: एक बच्चा सीखने के दौरान जाने-अनजाने या कुछ वैकल्पिक अवधारणाओं के कारण गलतियाँ करता है। यह एक शिक्षक का काम है कि वह छात्रों की उन गलतियों का निदान करने तथा उपचार करने में मदद करें। इसी विधि को उपचारात्मक विधि कहते है।

उपचारात्मक शिक्षण से तात्पर्य बच्चों की शिक्षण संबंधी कमजोरियों/कठिनाइयों को दूर करते हुए शिक्षण करने से है। यह विद्यार्धियों की त्रुटियों का संसोधन करने से समबन्धित है। यह निदानात्मक शिक्षण से जुड़ा हुआ हैऔर विद्यार्थियों की शिक्षण संबंधी कमियों का सही अवलोकन करने में मदद करता है वहीं उपचारात्मक शिक्षण द्वारा उन कमियों और त्रुटियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है।

Important Points 

उपचारात्मक शिक्षण इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • इसका उपयोग भाषा कौशल में सुधार के लिए किया जा सकता है।
  • किसी विशेष समस्या क्षेत्र को ठीक करने के लिए, इसका उपयोग किया जा सकता है।
  • यह छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं और चुनौतियों की पहचान के बाद किया जाता है।
  • एक शिक्षक को इस पद्धति को लागू करने के लिए छात्रों की गुण और कमजोरियों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए।
  • यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया है क्योंकि शिक्षक पहले छात्रों की समस्या का निदान करता है और फिर उपयुक्त उपचारात्मक तरीके लागू करता है।

अतः हम कह सकते है कि विद्यार्थी की सीखने संबंधी कठिनाइयों को दूर करते हुए करवाये जाने वाला शिक्षण, उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।

Question 74

REET 2022• Hindi - I

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन का दोष है :

  1. AOption (a)

    इसमें विद्यार्थियों का निरंतर मूल्यांकन होता रहता है।

  2. BOption (b)

    विद्यार्थियों को अपनी कमियों का निरंतर ज्ञान होता रहता है।

  3. COption (c)

    इसमें अभिभावकों को विद्यार्थी की निरंतर प्रगति की जानकारी होती रहती है।

  4. DOption (d)

    यह प्रणाली तभी लागू की जा सकती है जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

यह प्रणाली तभी लागू की जा सकती है जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो।

Why this answer is correct

मूल्यांकन वह प्रक्रिया होती है जिससे कार्यक्रम की प्रभावशील तथा सक्षमता का आकलन किया जाता है | एनपीई (राष्ट्रीय शिक्षा नीति), 1986, (1992 में संशोधित) के दिशानिर्देशों के बाद, सीबीएसई द्वारा 2009 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मूल्यांकन की एक स्कूल आधारित प्रणाली के रूप में पेश किया गया |

  • सतत मूल्यांकन- इसका मतलब है कि एक छात्र का वर्ष में एक या दो बार मूल्यांकन की बजाय, लगातार मूल्यांकन किया जाएगा।
  • व्ययापक मूल्यांकन- किसी एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय एक बच्चे के समग्र विकास को संदर्भित करता है। पहले स्कूल और पाठ्यक्रम दोनों ही पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते थे जबकि पाठयक्रम गतिविधियों को पीछे छूट जाती थी।

Key Points

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएँ - 

  • विभिन्‍न विषयों में निश्चित समय उपरांत बच्चों की प्रगति जानना।
  • बच्चों के व्यवहार में हुए परिवर्तनों का पता लगाना।
  • छात्रों के ज्ञानात्मक भावात्मक व क्रियात्मक तीनों पक्षों के विकास का आकलन कर प्रत्येक बच्चे को सीखने और समुचित, चहुँमुखी विकास में मदद करना।
  • सृजनशीलता को बढ़ावा देना।
  • बच्चे की व्यक्तिगत और विशेष जरूरतों का पता लगाना।
  • बच्चों को सीखने में कठिनाइयों को दूर करने के लिए अध्यापन की उपयुक्त योजना बनाकर निदानात्मक व उपचारात्मक शिक्षण में सहायता करना।
  • बच्चों की रुचि जानना।
  • कक्षा में चल रही सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना।
  • छात्रों में निरंतर अध्ययन की आदत का विकास करना।
  • बच्चों में परीक्षा के प्रति व्याप्त भय व दबाव को दूर करना और व स्व-आकलन के लिए प्रोत्साहित करना।
  • इसमें विद्यार्थियों का निरंतर मूल्यांकन तथा भिभावकों को विद्यार्थी की निरंतर प्रगति की जानकारी होती रहती है।

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के दोष निम्नलिखित हैं-

  • अधिक समय लगना- सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन में समय अधिक लगता है।
  • शिक्षकों को बाहरी काम का बोझ- अल्पावधि मूल्यांकन में शिक्षकों के काम का बोझ बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त यह शिक्षकों के प्रशिक्षणा, दक्षता एवं कुशलता की माँग करता है।
  • यह प्रणाली तभी लागू की जा सकती है जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि यह प्रणाली तभी लागू की जा सकती है जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो। सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन का दोष है।

Question 75

REET 2022• Hindi - I

उपलब्धि परीक्षण के निर्माण में कितने पदों का प्रयोग किया जाता है?

  1. AOption (a)

    दो

  2. BOption (b)

    तीन

  3. COption (c)

    एक

  4. DOption (d)

    चार

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

चार

Why this answer is correct

उपलब्धि परीक्षण से तात्पर्य उस परीक्षण से है जो एक निश्चित समय सीमा के अन्तर्गत विद्यार्थियों के विषय संबंधी ज्ञान का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। यह किसी विशिष्ट विषय में विद्यार्थियों के ज्ञान एवं समझ संबंधी निपुणता का मापन करता है।

उपलब्धि परीक्षण निर्माण के चरण:

  • स्वरूप योजना (नीतिगत निर्णय) बनाना
  • शैक्षणिक उद्देश्यों को लिखना
  • कार्य योजना (ब्लू प्रिंट) निर्माण
  • ब्लू प्रिंट आधारित प्रश्न पत्र निर्माण

अतः निष्कर्ष निकलता है कि उपलब्धि परीक्षण के निर्माण में चार पदों का प्रयोग किया जाता है।

Question 76

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:

मनुष्य का मन सदैव गतिशील रहता है। ऐसा होता है कि विरोधी शक्तियाँ उसे अपनी ओर खींचती हैं। जो मनुष्य मन की विपरीत परिस्थितियों में अपने को मजबूती से खड़ा नहीं रख सकते और उस धारा के साथ बह जाते हैं, वे कभी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेंगे। उनके लिए तो यह कहना चाहिए कि वे जीवित रहते हुए मुर्दे के समान हैं। मन की अवस्था तो सभी को पलटती है। जो व्यक्ति समय एवं परिस्थिति को समझ लेते हैं, वे कभी धोखा नहीं उठा सकते और कठिनाइयों के बीच भी अपना रास्ता निकाल लेते हैं। कारण जानकर वे उसके विषैले और दूषित प्रभाव से भी बचने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों की भी संख्या मिलेगी जो अपनी मनोदशा से त्रस्त हो जाते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनसे उनके शांतिमय जीवन में अशांति का विष घुल जाता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उद्देश्य होना चाहिए। यदि तुम्हारा कोई उद्देश्य नहीं है, तो तुम सफल न होगे। 'क्या करोगे ?' इसको तुम्हें जानना आवश्यक है। उद्देश्यहीन मनुष्य बिना पतवार की नाव की तरह है।

'सदैव' शब्द का सही संधि-विच्छेद है :

  1. AOption (a)

    सद् + एव

  2. BOption (b)

    सदा + ऐव

  3. COption (c)

    सद् + ऐव

  4. DOption (d)

    सदा + एव

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

सदा + एव

Why this answer is correct

'सदैव' शब्द का सही संधि-विच्छेद है- 'सदा + एव'

  • 'सदैव' शब्द का उचित संधि विच्छेद 'सदा + एव (आ + ए = ऐ)' होगा।
  • सदैव में "वृद्धि स्वर संधि" संधि है।
  • सदैव - हमेशा, सदा, सर्वदा, हरदम।

Key Pointsवृद्धि  संधि:-

  • जब संधि करते समय जब (अ , आ) के साथ (ए , ऐ)  हो तो ‘ ऐ ‘ बनता है और जब (अ , आ) के साथ (ओ , औ) हो तो ‘ औ ‘ बनता है। उसे वृद्धि  संधि कहते हैं।

उदाहरण-

  • महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य (आ + ऐ = ऐ)
  • महा + ओजस्वी = महौजस्वी (आ + ओ = औ)
  • एक + एक = एकैक (अ + ए = ऐ)
  • महा + औषध = महौषद (आ + औ = औ

Question 77

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:

मनुष्य का मन सदैव गतिशील रहता है। ऐसा होता है कि विरोधी शक्तियाँ उसे अपनी ओर खींचती हैं। जो मनुष्य मन की विपरीत परिस्थितियों में अपने को मजबूती से खड़ा नहीं रख सकते और उस धारा के साथ बह जाते हैं, वे कभी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेंगे। उनके लिए तो यह कहना चाहिए कि वे जीवित रहते हुए मुर्दे के समान हैं। मन की अवस्था तो सभी को पलटती है। जो व्यक्ति समय एवं परिस्थिति को समझ लेते हैं, वे कभी धोखा नहीं उठा सकते और कठिनाइयों के बीच भी अपना रास्ता निकाल लेते हैं। कारण जानकर वे उसके विषैले और दूषित प्रभाव से भी बचने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों की भी संख्या मिलेगी जो अपनी मनोदशा से त्रस्त हो जाते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनसे उनके शांतिमय जीवन में अशांति का विष घुल जाता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उद्देश्य होना चाहिए। यदि तुम्हारा कोई उद्देश्य नहीं है, तो तुम सफल न होगे। 'क्या करोगे ?' इसको तुम्हें जानना आवश्यक है। उद्देश्यहीन मनुष्य बिना पतवार की नाव की तरह है।

निम्नलिखित में से 'विष' शब्द का पर्यायवाची शब्द है :

  1. AOption (a)

    वसु

  2. BOption (b)

    अर्णव

  3. COption (c)

    उरग

  4. DOption (d)

    गरल

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

गरल

Why this answer is correct

उपरोक्त में से 'विष' शब्द का पर्यायवाची शब्द है- 'गरल'

  • 'विष' शब्द का अन्य पर्यायवाची शब्द है- विषैला, जहर, हलाहल, कालकूट, माहुर। 
  • विलोम शब्द - 'अमृत'

Key Points

  • ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान हों, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।
  • जैसे-
  • वसु- ​आदित्य, लेख, देवता, सुर, देव, अमर।
  • अर्णव- जलधाम, अकूपाद, समुद्र, सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि।
  • उरग- साँप, सर्प, नाग, विषधर, व्याल, भुजंग, अहि, पन्नग।

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द:-

  • आकाश - व्योम, शून्य, गगन, अम्बर, आसमान, अंतरिक्ष, नभ, अनंत।
  • हवा - पवन, वायु, समीर, अनिल, वात, मरुत्, पवमान, बयार, प्रकंपन।
  • जंगल - वन, कानन, बीहड़, विटप, विपिन।
  • घर - गृह, सदन, आवास, आलय, गेह, निवास, निलय, मंदिर।
  • अमृत - सुधा, सोम, पीयूष, अमिय, जीवनोदक।
  • असुर - राक्षस, दैत्य, दानव, निशाचर, दनुज, यातुधान, निशिचर, रजनीचर।
  • अग्नि - आग, अनल, पावक, वह्नि।
  • अश्व - घोड़ा, हय, तुरंग, वाजी, घोटक, सैंधव, तुरंग।

Question 78

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:

मनुष्य का मन सदैव गतिशील रहता है। ऐसा होता है कि विरोधी शक्तियाँ उसे अपनी ओर खींचती हैं। जो मनुष्य मन की विपरीत परिस्थितियों में अपने को मजबूती से खड़ा नहीं रख सकते और उस धारा के साथ बह जाते हैं, वे कभी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेंगे। उनके लिए तो यह कहना चाहिए कि वे जीवित रहते हुए मुर्दे के समान हैं। मन की अवस्था तो सभी को पलटती है। जो व्यक्ति समय एवं परिस्थिति को समझ लेते हैं, वे कभी धोखा नहीं उठा सकते और कठिनाइयों के बीच भी अपना रास्ता निकाल लेते हैं। कारण जानकर वे उसके विषैले और दूषित प्रभाव से भी बचने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों की भी संख्या मिलेगी जो अपनी मनोदशा से त्रस्त हो जाते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनसे उनके शांतिमय जीवन में अशांति का विष घुल जाता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उद्देश्य होना चाहिए। यदि तुम्हारा कोई उद्देश्य नहीं है, तो तुम सफल न होगे। 'क्या करोगे ?' इसको तुम्हें जानना आवश्यक है। उद्देश्यहीन मनुष्य बिना पतवार की नाव की तरह है।

'विरोधी' शब्द का विलोम होगा :

  1. AOption (a)

    वैरी

  2. BOption (b)

    अवरोधी

  3. COption (c)

    शत्रु

  4. DOption (d)

    समर्थक

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

समर्थक

Why this answer is correct

'विरोधी' शब्द का विलोम होगा- समर्थक

  • विरोधी' शब्द का अर्थ-  विपक्षी, अवरोधी, विरोधक, शत्रु, झगड़ालू, विरुद्ध, प्रतिस्पर्धी, वैरी, विपरीत, प्रतिरोधी।

Key Points

  • एक-दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्दों को, विलोम शब्द कहते है।

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण विलोम शब्द:-

  • शब्द - विलोम
  • उत्कृष्ट - निकृष्ट
  • उत्तम - अधम
  • आदर्श - यथार्थ
  • स्वाधीन - पराधीन
  • आहार - निराहार
  • दाता - याचक
  • खेद - प्रसन्नता
  • गुप्त - प्रकट
  • प्रत्यक्ष - परोक्ष
  • सजीव - निर्जीव
  • सुगंध - दुर्गन्ध

Question 79

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:

मनुष्य का मन सदैव गतिशील रहता है। ऐसा होता है कि विरोधी शक्तियाँ उसे अपनी ओर खींचती हैं। जो मनुष्य मन की विपरीत परिस्थितियों में अपने को मजबूती से खड़ा नहीं रख सकते और उस धारा के साथ बह जाते हैं, वे कभी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेंगे। उनके लिए तो यह कहना चाहिए कि वे जीवित रहते हुए मुर्दे के समान हैं। मन की अवस्था तो सभी को पलटती है। जो व्यक्ति समय एवं परिस्थिति को समझ लेते हैं, वे कभी धोखा नहीं उठा सकते और कठिनाइयों के बीच भी अपना रास्ता निकाल लेते हैं। कारण जानकर वे उसके विषैले और दूषित प्रभाव से भी बचने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों की भी संख्या मिलेगी जो अपनी मनोदशा से त्रस्त हो जाते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनसे उनके शांतिमय जीवन में अशांति का विष घुल जाता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उद्देश्य होना चाहिए। यदि तुम्हारा कोई उद्देश्य नहीं है, तो तुम सफल न होगे। 'क्या करोगे ?' इसको तुम्हें जानना आवश्यक है। उद्देश्यहीन मनुष्य बिना पतवार की नाव की तरह है।

गद्यांश में प्रयुक्त 'मनोदशा' शब्द से आशय है :

  1. AOption (a)

    मन से दशा ।

  2. BOption (b)

    मन पर दशा ।

  3. COption (c)

    मन की दशा ।

  4. DOption (d)

    मन को दिशा ।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

मन की दशा ।

Why this answer is correct

गद्यांश में प्रयुक्त 'मनोदशा' शब्द से आशय है-  'मन की दशा। '

  • मनोदशा = मन: + दशा (विसर्ग संधि)

Key Pointsविसर्ग संधि:-

  • जब संधि करते समय  विसर्ग के बाद स्वर या व्यंजन वर्ण के आने से जो विकार उत्पन्न होता है, हम उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

उदाहरण-

  • नि: + संदेह = निस्संदेह
  • अंतः + ध्यान = अंतर्ध्यान​

Question 80

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:

मनुष्य का मन सदैव गतिशील रहता है। ऐसा होता है कि विरोधी शक्तियाँ उसे अपनी ओर खींचती हैं। जो मनुष्य मन की विपरीत परिस्थितियों में अपने को मजबूती से खड़ा नहीं रख सकते और उस धारा के साथ बह जाते हैं, वे कभी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेंगे। उनके लिए तो यह कहना चाहिए कि वे जीवित रहते हुए मुर्दे के समान हैं। मन की अवस्था तो सभी को पलटती है। जो व्यक्ति समय एवं परिस्थिति को समझ लेते हैं, वे कभी धोखा नहीं उठा सकते और कठिनाइयों के बीच भी अपना रास्ता निकाल लेते हैं। कारण जानकर वे उसके विषैले और दूषित प्रभाव से भी बचने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों की भी संख्या मिलेगी जो अपनी मनोदशा से त्रस्त हो जाते हैं और ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनसे उनके शांतिमय जीवन में अशांति का विष घुल जाता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उद्देश्य होना चाहिए। यदि तुम्हारा कोई उद्देश्य नहीं है, तो तुम सफल न होगे। 'क्या करोगे ?' इसको तुम्हें जानना आवश्यक है। उद्देश्यहीन मनुष्य बिना पतवार की नाव की तरह है।

''मनुष्य' शब्द है :

  1. AOption (a)

    अव्यय

  2. BOption (b)

    भाववाचक संज्ञा

  3. COption (c)

    जातिवाचक संज्ञा

  4. DOption (d)

    व्यक्तिवाचक संज्ञा

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

जातिवाचक संज्ञा

Why this answer is correct

''मनुष्य' शब्द है - जातिवाचक संज्ञा

  • प्रदुषण से मनुष्यों में तरह तरह की बीमारियां उत्पन्न होती हैं।
  • जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं, उन शब्दों को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
  • जैसे- आदमी, जानवर, पशु, पक्षी, गाय, लड़का, स्कूल, शहर, बगीचा, नदी  आदि।

Key Pointsजातिवाचक संज्ञा के कुछ उदाहरण:- 

  • दिल्ली प्रदेश की जनसंख्या बढ़ रही है।
  • मेरे पिता को जानवर पालना बहुत पसंद है।
  • मुझे लम्बी दूरी तक जाने के लिए, कार का सफर पसंद है।
  • निदियाँ धीरे धीरे बहुत प्रदूषित होती जा रही हैं।
  • हिन्द महासागर बहुत प्रदूषित हो रहा है।
  • मानव पृथ्वी पर उपस्थित सबसे पुरानी प्रजाति है।

Additional Information

अव्यय:- - जब किसी शब्द में लिंग, वचन, कारक, के प्रयोग से भी कोई परिवर्तन नहीं होता तो उन शब्दों को अव्यय कहा जाता है। - अव्यय  को अविकारी शब्द भी कहा जाता है। उदाहरण- - जब, तब, अभी, उधर, वहाँ, इधर, कब, क्यों, वाह, आह, ठीक, अरे, और, तथा, एवं, किन्तु, परन्तु, बल्कि, इसलिए, अतः, अतएव, चूँकि, अव्यय, अर्थात इत्यादि। भाववाचक संज्ञा:- - जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं। - जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास, उमंग, चढाई, थकावट, मानवता, चतुराई, जवानी, लम्बाई, मित्रता, मुस्कुराहट, अपनापन, परायापन, भूख, प्यास, चोरी, क्रोध, सुन्दरता आदि। उदाहरण- - भारत में गरीबी बढ़ रही है। - मेरा बचपन खेलकूद में बीता। व्यक्तिवाचक संज्ञा:- - किसी भी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम का बोध कराने वाली संज्ञा ही व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाती हैं। - जैसे- महात्मा गाँधी, भगत सिंह, रमेश, पवन, सीमा, विकास, बाइबल, रामायण, मुंबई, लखनऊ आदि। उदाहरण- - विकास फुटबॉल खेलता है। - प्रेमचंद एक उपन्यासकार हैं।