Search Previous Year Questions

Find real questions from previous competitive exam papers with answers and solutions.

Leave the keyword blank to browse saved questions for your selected exam, newest papers first. Add a keyword, year or topic to narrow the results.

Browse complete papers
Showing 10 question(s)
Clear

Question 61

REET 2022• Hindi - I

किण्डरगार्टन शिक्षण विधि के संबंध में सत्य कथन है :

  1. AOption (a)

    यह एक अमनोवैज्ञानिक प्रणाली है।

  2. BOption (b)

    यह उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी है।

  3. COption (c)

    कुक महोदय ने इस विधि को निश्चित रूप प्रदान किया।

  4. DOption (d)

    भाषा के व्याकरण एवं साहित्य की शिक्षा इस विधि से नहीं दी जा सकती।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

भाषा के व्याकरण एवं साहित्य की शिक्षा इस विधि से नहीं दी जा सकती।

Why this answer is correct

किण्डरगार्टन शिक्षण विधि- शिक्षक बच्चों के लिए गतिविधियों के लिए कई विकल्प प्रस्तुत करते हैं, जो उनकी आयु और प्रारंभिक शिक्षण के लिए उपयुक्त होते हैं, इसके लिए समस्याओं का हल किया जाता है, उनके पठन, भाषा, गणित आदि पर ध्यान दिया जाता है। यह योजना आमतौर पर तब बनायीं जाती है जब बच्चे क्लासरूम में जाते हैं। इसके बाद वे इस गतिविधि को "करते" हैं।

  • यहाँ बच्चे भाषा सीखने के लिए प्रेरित होते हैं, शब्दों को पढ़ना सीखते हैं, अर्थग्रहण करते हैं।
  • यहां पर उन्हें पहली बार नियमित रूप से खेलने का और बच्चों के एक ही समूह के साथ बातचीत करने का मौका मिलता है, जिससे उनकी अभिव्यक्ति का विकास होता है।

Key Points

  • किंडरगार्टन शिक्षण विधि में भाषा शिक्षण के उद्देश्य, अर्थग्रहण, अभिव्यक्ति तथा सृजन शक्ति तीनों का साथ-साथ विकास होता है।
  • 'फ्रेडरिक फ्रोबेल' एक जर्मन शिक्षाविद् थे, जिन्हें सबसे पहले 'किंडरगार्टन सिस्टम' के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। जर्मन भाषा में किंडरगार्टन का शाब्दिक अर्थ है "बच्चों का बगीचा" (बालवाड़ी)।
  • किंडरगार्टन की गतिविधियों को इस विचार के आधार पर तैयार किया गया था कि बच्चे खेल के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से सीखते हैं।​
  • छोटे बच्चों के शिक्षण के लिए यह एक मनोवैज्ञानिक प्रणाली है।
  • यह उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, क्योंकि भाषा के व्याकरण एवं साहित्य की शिक्षा इस विधि से नहीं दी जा सकती।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि भाषा के व्याकरण एवं साहित्य की शिक्षा इस विधि से नहीं दी जा सकती। किण्डरगार्टन शिक्षण विधि के संबंध में सत्य कथन है।

Question 62

REET 2022• Hindi - I

बेसिक शिक्षा प्रणाली में भाषा की शिक्षा निम्नलिखित में से किस माध्यम से दी जा सकती है ?

  1. AOption (a)

    केवल किताबी ज्ञान से ।

  2. BOption (b)

    सामाजिक पर्यावरण से।

  3. COption (c)

    प्रगति-सूचक लेखाचित्र से ।

  4. DOption (d)

    इनमें से कोई नहीं।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

सामाजिक पर्यावरण से।

Why this answer is correct

बेसिक शिक्षा प्रणाली- बेसिक शिक्षा मूल रूप से व्यावहारिक होती है तथा बालक एक साथ अनेक विषयो का ज्ञान प्राप्त कर लेता है। बेसिक शिक्षा क्रियाओं तथा अनुभवो पर आधारित है इसीलिए इसका ज्ञान कम समय में ही हो जाता है। 

Important Points बेसिक शिक्षा में बालको की शिक्षण व्यवस्था निम्न माध्यम से दी जा सकती है -

  • इसके अंतर्गत पहले बच्चो को कहानी तथा बातचीत के माध्यम से मातृभाषा का ज्ञान कराया जाता है।
  • मातृभाषा का ज्ञान होने पर बच्चे पहले उसे पढ़ना तथा फिर लिखना सीखते है।
  • पढ़ाई के साथ-साथ बालक किसी आधारभूत शिल्प का ज्ञान भी प्राप्त करते है।
  • जैसे-जैसे बच्चा आगे की कक्षाओं में पहुँचता है वैसे ही उसे विभिन्न विषयो का ज्ञान भी प्राप्त होता रहता है।
  • प्राकृतिक वातावरण, सामाजिक वातावरण तथा हस्तकला के माध्यम से अनेक विषयो का ज्ञान बालको को कराया जाता है।
  • बालक अपनी रूचि के अनुसार हस्तशिल्प का चयन करता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि बेसिक शिक्षा प्रणाली में भाषा की शिक्षा सामाजिक पर्यावरण के माध्यम से दी जा सकती है।

Question 63

REET 2022• Hindi - I

भाषा शिक्षण के संदर्भ में वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली की क्या सीमा है ?

  1. AOption (a)

    इसमें विद्यार्थी को भाषा के तत्त्वों का ज्ञान प्रभावी रूप से करवाया जा सकता है।

  2. BOption (b)

    इसमें विद्यार्थी को भाषायी कौशल में दक्ष किया जा सकता है।

  3. COption (c)

    इसमें वैयक्तिक शिक्षण पर अधिक बल दिया जाता है।

  4. DOption (d)

    यह शिक्षण प्रणाली अधिक विद्यार्थियों वाली बड़ी कक्षा में अध्यापन के लिए उपयोगी नहीं है।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

यह शिक्षण प्रणाली अधिक विद्यार्थियों वाली बड़ी कक्षा में अध्यापन के लिए उपयोगी नहीं है।

Why this answer is correct

वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली- वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली का प्रतिपादन सन 1963 में प्रोफेसर फ्रेंड एस केलर ने अपने सहयोगियों जे सी सेयरमैन, आर ए जी और सी एम बोरी के साथ मिलकर कोलंबिया विश्वविद्यालय में किया था। 

  • वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली ऐसी अनुदेशन प्रणाली है जिसमे विशुद्ध व्यक्तिगत या व्यक्तिगत दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अनुदेशन का नियोजन तथा क्रियान्वयन किया जाता है।
  • इस अनुदेशन में अनुदेशन ग्रहण करने वाला व्यक्ति ही होता है। सम्पूर्ण शिक्षण अधिगम प्रणाली में अनुदेशन ग्रहण करने वाले व्यक्ति का ही वर्चस्व होता है। अनुदेशन को अधिगमकर्ता की व्यक्तिगत योग्यता रूचि एवं आवश्यकता के अनुरूप बनाने की चेष्टा की जाती है।

Important Points वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली की सीमा या दोष-​

  • इस प्रणाली में छात्रों को ग्रेडिंग प्रदान करने में बहुत कठिनाइयां होती है।
  • शीघ्रता से परिवर्तित होने वाले विषयो के शिक्षण के लिए उपयुक्त है।
  • यह शिक्षण प्रणाली अधिक विद्यार्थियों वाली बड़ी कक्षा में अध्यापन के लिए उपयोगी नहीं है।
  • इस प्रणाली का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब निपुणता स्तर तक पहुंचना शिक्षा का उद्द्देश्य हो।
  • पर्याप्त लिखित सामग्री के अभाव में इस प्रणाली का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

Additional Information वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली के लाभ-

  • इस प्रणाली में लिखित सामग्री पर अधिक बल दिया जाता है।
  • इसमें छात्र अपने प्रयासो से तथा अपनी गति से सीखते है।
  • इसमें विद्यार्थी को भाषा के तत्त्वों का ज्ञान प्रभावी रूप से करवाया जा सकता है।
  • इसमें वैयक्तिक शिक्षण पर अधिक बल दिया जाता है।
  • इसमें विद्यार्थी को भाषायी कौशल में दक्ष किया जा सकता है।

​​अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि भाषा शिक्षण के संदर्भ में वैयक्तिक अनुदेशन प्रणाली की सीमा यह है कि यह शिक्षण प्रणाली अधिक विद्यार्थियों वाली बड़ी कक्षा में अध्यापन के लिए उपयोगी नहीं है।

Question 64

REET 2022• Hindi - I

इनमें से कौन सा 'परिवीक्षित अध्ययन उपागम' का सोपान नहीं है?

  1. AOption (a)

    अध्ययन कार्य का आवंटन।

  2. BOption (b)

    अध्ययन हेतु निर्देश।

  3. COption (c)

    विद्यार्थियों द्वारा स्वाध्याय एवं शिक्षक द्वारा मार्गदर्शन।

  4. DOption (d)

    कलात्मक प्रायोजना।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

कलात्मक प्रायोजना।

Why this answer is correct

परिवीक्षित अध्ययन उपागम- 

  • 'परिवीक्षित अध्ययन उपागम का प्रतिपादन अमेरिका के महान शिक्षाविद मॉरिसन के द्वारा किया गया।
  • बाइनिंग व बाइनिंग के अनुसार," मेज या दराजो के चारो ओर बैठे हुए कार्यरत समूह या कक्षा के शिष्यों का शिक्षक द्वारा पर्यवेक्षीण करना ही पर्यवेक्षित अध्ययन है।"
  • पर्यवेक्षित अध्ययन विधि माध्यमिक स्तर पर गद्य शिक्षण के लिए एक उपयोगी विधि है।
  • इस विधि में अध्यापक पर्यवेक्षिक की भूमिका मे तथा छात्र मौन रहकर विषय वस्तु का अध्ययन करते हैं।
  • इस विधि में शिक्षक बालको को सभी प्रकार से संतुष्ट करता है यदि बालको को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती है तो वह शांतिपूर्वक कक्षा का निरिक्षण करता है कि वास्तव में बालक कार्यरत है या नहीं। ​

Important Points

परिवीक्षित अध्ययन उपागम के सोपान-

परिवीक्षित अध्ययन उपागम के सोपान निम्नलिखित है-

  • उद्द्येश्य निर्धारण।
  • अध्ययन कार्य का आवंटन।
  • अध्ययन हेतु निर्देश।
  • विद्यार्थियों द्वारा स्वाध्याय एवं शिक्षक द्वारा मार्गदर्शन ।
  • विषयवस्तु का स्पस्टीकरण तथा दोहरान
  • मूल्याङ्कन।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि कलात्मक प्रायोजना 'परिवीक्षित अध्ययन उपागम' का सोपान नहीं है।

Question 65

REET 2022• Hindi - I

'सर्वप्रथम सरल तथा समान आकृति के वर्णों को लिखवाना प्रारंभ कराएँ।' उल्लेखित बात किस स्तर के विद्यार्थियों हेतु कही गयी है?

  1. AOption (a)

    प्राथमिक स्तर के।

  2. BOption (b)

    माध्यमिक स्तर के।

  3. COption (c)

    उच्च प्राथमिक स्तर के।

  4. DOption (d)

    उच्च माध्यमिक स्तर के।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

प्राथमिक स्तर के।

Why this answer is correct

लेखानारम्भ की तैयारी:- लेखनारंभक की तैयारी वर्ण लिखना सिखाने की प्रथम पीढ़ी हैI लेखानारम्भ की तैयारी का अभिप्राय है बालक मे उन गुणों का विकास करना जो वर्ण, शब्द तथा वाक्य लिखने की क्रिया मे सहायक होते हैI​

  • लेखानारम्भ की तैयारी पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक स्तर के शिक्षण के उद्देश्यों में आता है, जैसे-
  • चित्र बनाना, चित्रों में रंग भरने का अभ्यास;
  • फूलों की माला बनाने का अभ्यास;
  • लेखन सामग्री के उचित रख-रखाव का अभ्यास;
  • देवनागरी लिपि के वर्णों आकृति- विभेद कर सकने का अभ्यास;
  • उचित लेखन मुद्रा मे बैठने का अभ्यास;
  • वर्णों की आकारगत सुडौलता की पहचान करने के अभ्यास;
  • सर्वप्रथम सरल तथा समान आकृति के वर्णों को लिखवाने का अभ्यास।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि 'सर्वप्रथम सरल तथा समान आकृति के वर्णों को लिखवाना प्रारंभ कराएँ ।' उल्लेखित बात प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों हेतु कही गयी है।

Question 66

REET 2022• Hindi - I

भाषा-कौशलों में से अभिव्यक्ति कौशल है:

  1. AOption (a)

    सुनना और बोलना ।

  2. BOption (b)

    लिखना और पढ़ना।

  3. COption (c)

    बोलना और लिखना।

  4. DOption (d)

    पढ़ना और बोलना।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

बोलना और लिखना।

Why this answer is correct

भाषा शिक्षण का सामान्य रूप से श्रवण, वाचन, पठन एवं लेखन इन भाषा कौशलों का विकास करना - उद्देश्य है।

भाषा कौशलों का वर्गीकरण

  • भाषा के चार कौशल को दो समूह में वर्गीकृत किया गया है- 
  • ग्रहणात्मक कौशल - अर्थ को ग्रहण करने का कौशल
  • अभिव्यक्तात्मक कौशल या उत्पादक कौशल - विचारों को अभिव्यक्त करने का कौशल
ग्रहणात्मक कौशल​ऐसे कौशल जिन्हें ग्रहण किया जाता है।​श्रवण (सुनना) कौशल पठन (पढ़ना) कौशल
अभिव्यक्तात्मक कौशलजिनका प्रयोग अपने विचारों, भावों आदि की अभिव्यक्ति के लिए किया जाता है।वाचन (बोलना) कौशल लेखन (लिखना) कोशल

अतः निष्कर्ष निकलता है कि लिखना और बोलना भाषा-कौशलों में से अभिव्यक्ति कौशल है।

Question 67

REET 2022• Hindi - I

अनुलेख किस भाषा कौशल से संबंधित है?

  1. AOption (a)

    श्रवण

  2. BOption (b)

    वाचन

  3. COption (c)

    लेखन

  4. DOption (d)

    वादन

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

लेखन

Why this answer is correct

अनुलेखन का अर्थ है किसी के पीछे या बाद में लिखना। जैसे- प्रारम्भिक कक्षाओं में काॅपी में अध्यापक द्वारा दिये गये अक्षरों की बनावट का अनुकरण करना अथवा अध्यापक के लिखने के बाद श्यामपट्ट से जैसे का तैसा लिखना।

Important Points 

लेखन के प्रकार- लेखन तीन प्रकार का होता है।

  1. अनुलेख- किसी आदर्श लिखावट का जैसा का तैसा अनुकरण, अनुलेख कहलाता है।
  2. प्रतिलेख- प्रतिलेख में छात्र स्वतंत्र रूप से किसी पुस्तक या पत्र-पत्रिका के किसी भाग का अनुकरण करके अपनी काॅपी में लिखता है।
  3. श्रुतिलेख- श्रुतिलेख सुना हुआ लेख है। इसमें अध्यापक बोलता जाता है और छात्र सुनकर बोली हुई सामग्री लिखता है।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि अनुलेख भाषा के लेखन कौशल से संबंधित है।

Question 68

REET 2022• Hindi - I

लिंग्वाफोन (रिकॉर्ड प्लेयर) किस प्रकार की अधिगम सामग्री है ?

  1. AOption (a)

    प्रक्षेपक सामग्री

  2. BOption (b)

    दृश्य सामग्री

  3. COption (c)

    दृश्य-श्रव्य सामग्री

  4. DOption (d)

    श्रव्य सामग्री

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

श्रव्य सामग्री

Why this answer is correct

श्रव्य-दृश्य उपकरण वह होते हैं, जो श्रव्य (कान) के साथ-साथ दृश्य (आँखे) ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग कर शिक्षण अधिगम को सरल व सफल बनाया जाता है। श्रव्य-दृश्य उपकरण निम्न तीन प्रकार के होते हैं-

  • दृश्य उपकरण का अर्थ है, ऐसी अधिगम सहायक सामग्री जिसमें केवल आँखों का प्रयोग करके शिक्षण को सहज बनाया जाता है। उदाहरण- ओ.एच.पी., माॅडल, चित्र, पोस्टर, अखबार, श्यामपट्ट, स्लाइड, प्रोजेक्टर, रेखाचित्र, मानचित्र, चार्ट, ग्राफ, ग्लोब, प्रत्यक्ष वस्तुएँ।
  • श्रव्य उपकरण का अर्थ है, ऐसी अधिगम सहायक सामग्री जिसमें केवल कानों का प्रयोग करके शिक्षण को सहज बनाया जाता है। उदाहरण- मौखिक प्रश्नोत्तर, रेडियो, टेपरिकार्डर, लिंग्वाफोन, भाषा-प्रयोगशाला, आडियो काॅन्फैसिंग, ग्रामोफोन आदि।
  • श्रव्य-दृश्य उपकरण वह होते हैं, जो श्रव्य (कान) के साथ-साथ दृश्य (आँखे) ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग कर शिक्षण अधिगम को सरल व सफल बनाया जाता है।उदाहरण-  चलचित्र, दूरदर्शन, ड्रामा, कठपुतली, टेलिविजन, इंटरनेट, कम्प्युटर आदि।
  • लिंग्वाफोन एक ऐसा उपकरण है जिसमे हम उपकरण से कोई भाषा ध्यान से सुन कर सीखते है।

अत: उपरोक्त विवरण से हम यह कह सकते है की लिंग्वाफ़ोन श्रव्य सामग्री है |

Question 69

REET 2022• Hindi - I

भाषा प्रयोगशाला के अनुभाग में सम्मिलित नहीं है :

  1. AOption (a)

    परामर्श कक्ष।

  2. BOption (b)

    श्रवण कक्ष।

  3. COption (c)

    नियंत्रण कक्ष।

  4. DOption (d)

    विश्राम कक्ष।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

विश्राम कक्ष।

Why this answer is correct

भाषा-प्रयोगशाला- यह शिक्षण की पारंपरिक तरीके से अलग भाषा कौशल प्रदान करने की तकनीकी विधि है। इसमें बालक अपनी सूविधा अनुसार भाषा प्रयोगशाला में जाकर टेप सुन सकता है तथा अपनी गति से सही उच्चारण सीख सकता है।

  • भाषा प्रयोगशाला में माइक्रोफोन, टेप रिकॉर्डर, वीडियो रिकॉर्डर, हार्डकॉपी, सोफ्टकॉपी जैसे अन्य उपकरणों की मदद से भाषा शिक्षण का कार्य होता है।
  • इन उपकरणों के माध्यम से अध्यापक द्वारा रिकॉर्ड की गई सामग्री को सुनते हैं तथा मौखिक अनुक्रिया रिकॉर्डेड रूप में व्यक्त करता हैं।

Key Points

भाषा प्रयोगशाला के घटक

  • परामर्श कक्ष: छात्र सांत्वना एक मास्टर सांत्वना से जुड़ा रहता है (शिक्षकों सांत्वना),
  • नियंत्रण कक्ष: छात्र सांत्वना देने के लिए वेब कैमरा, फोन्स सेट।
  • श्रवण कक्ष: अध्ययन सामग्री ( हार्डकॉपी और सॉफ्ट कॉपी ), समस्या निवारण गाइड।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि विश्राम कक्ष भाषा प्रयोगशाला के अनुभाग में सम्मिलित नहीं है।

Question 70

REET 2022• Hindi - I

सस्वर वाचन का गुण है:

  1. AOption (a)

    अस्पष्ट उच्चारण

  2. BOption (b)

    क्षिप्रता

  3. COption (c)

    उचित ध्वनि निर्गम

  4. DOption (d)

    अस्वाभाविकता

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

उचित ध्वनि निर्गम

Why this answer is correct

सस्वर वाचन पठन का एक प्रकार है जो बच्चों द्वारा पाठ को स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने से सम्बन्धित है। यह बच्चों में वाचन कौशल का विकास करता है जिससे बच्चे उचित हावभाव के साथ पाठ का वाचन करना सीखते हैं। सस्वर वाचन, वाचन की प्रारम्भिक अवस्था होती है। 

  • शब्द और वाक्यों को शुद्ध उच्चारण के साथ उचित गति से पढ़ने का अभ्यास सस्वर वाचन के द्वारा ही कराया जाता है। सस्वरवाचन 2 प्रकार का होता है जिनमे आदर्श वाचन और अनुकरण वाचन शामिल हैं।

Key Points

सस्ववाचन के गुण/विशेषताएं:

  • शुद्ध उच्चारण करना
  • स्पष्ट उच्चारण
  • स्वर माधुर्य के साथ वाचन
  • उचित वाचन मुद्रा का प्रयोग
  • स्वभाविकता
  • उचित बल एवं विराम प्रयोग
  • उचित ध्वनि निर्गम
  • उचित लय एवं गति का प्रयोग
  • उचित हाव भाव के साथ वाचन
  • विरामादि चिहृों का सही प्रयोग

अतः निष्कर्ष निकलता है कि उचित ध्वनि निर्गम सस्वर वाचन का गुण है।

क्षिप्रता का अर्थ है, शीघ्रता, जल्दी-जल्दी।