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Question 231

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

निम्नलिखित शब्दों में से शब्द-कोश में पहले कौन सा शब्द आएगा?

  1. AOption (a)

    अभ्यस्त

  2. BOption (b)

    अब

  3. COption (c)

    अर्थोन्माद

  4. DOption (d)

    अलग

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Correct answer

Answer: (b)B.

अब

Why this answer is correct

उपर्युक्त शब्दों में से शब्द-कोश में पहले शब्द आएगा - 'अब'

  • शब्द-कोश में शब्दों का सही क्रम - 'अब, अभ्यस्त, अर्थोन्माद, अलग' (अ वर्ग)
  • अभ्यस्त - सतत अभ्यास के द्वारा किसी कार्य को करने में कुशल, दक्ष, निपुण​।
  • अर्थोन्माद - अर्थ के रूप में दी जाने वाली सज़ा, जुरमाना।

Key Points

  • शब्दकोश के लिए स्वीकृत वर्णमाला है-
  • अं, अँ, अ:, अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
  • एवं इसके बाद -
  • 'क' वर्ण से लेकर 'ह' तक के क्रमानुसार वर्ण।
  • क, (क्ष), ख, ग, घ, ङ।
  • च, छ, ज, (ज्ञ), झ, ञ।
  • ट, ठ, ड, (ड़), ढ, (ढ़) ण।
  • त, (त्र), थ, द, ध, न।
  • प, फ, ब, भ, म।
  • य, र, ल, व।
  • श, (श्र), ष, स, ह।

Question 232

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'पवित्र' शब्द का सही संधि-विच्छेद होगा -

  1. AOption (a)

    पव + त्र

  2. BOption (b)

    प + इत्र

  3. COption (c)

    पौ + इत्र

  4. DOption (d)

    पो + इत्र

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

पो + इत्र

Why this answer is correct

'पवित्र' शब्द का सही संधि-विच्छेद होगा - 'पो + इत्र'

  • पवित्र = पो + इत्र, ( ओ + इ= अवि)
  • पवित्र शब्द में अयादि संधि है।
  • अर्थ: स्वच्छ, पुनीत, पाक, साफ, शुद्ध, पावन।

Key Pointsअयादि संधि:-

  • जब संधि करते समय ए , ऐ , ओ , औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो (ए का अय), (ऐ का आय), (ओ का अव), (औ का आव) बन जाता है। यही अयादि संधि कहलाती है।

उदाहरण-

  • ने + अन = नयन (ए + अ = अय)
  • नै + अक = नायक (ऐ + अ = आय)
  • पो + अन = पवन (ओ + अ = अव)
  • पौ + अक = पावक (औ + अ = आव)

Question 233

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, ��ृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'अनर्थ' शब्द में उपसर्ग है -

  1. AOption (a)

    अन

  2. BOption (b)

    अ

  3. COption (c)

    अन्

  4. DOption (d)

    अनर्

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Correct answer

Answer: (c)C.

अन्

Why this answer is correct

'अनर्थ' शब्द में उपसर्ग है - 'अन्'

  • अन् + अर्थ = अनर्थ
  • 'अन्' (नही) उपसर्ग और 'अर्थ' मूलशब्द
  • अर्थ: बुरा, अशुभ, उलटा-पुल्टा, अर्थहीन।
  • विलोम शब्द - 'अर्थ'

Key Points

  • उपसर्ग शब्द के शुरू में जुड़ता है।

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:- 

  • अ (नही) - अछूता, अथाह, अटल, अनादर, अदृश्य, अत्यंत, अधर्म, अज्ञान।​
  • अन (नही) - अनबन, अनपढ़, अनजान, अनहोनी, अनमोल, अनचाहा।​
  • अन् (नही) - अनन्त, अनुपयोगी, अनुपयुक्त, अनागत, अनिष्ट, अनुपम।
  • सम् (अच्छी तरह)- सन्तोष, संगठन,संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप, प्रतिध्वनि।
  • निर् (बिना) - निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर।
  • उत् (श्रेष्ठ) - उत्पत्ति, उत्कंठा, उत्पीड़न, उत्कृष्ट, उन्नत, उल्लेख

Question 234

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'जबरदस्ती' शब्द है -

  1. AOption (a)

    तत्सम

  2. BOption (b)

    देशज

  3. COption (c)

    तद्भव

  4. DOption (d)

    विदेशी

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Correct answer

Answer: (d)D.

विदेशी

Why this answer is correct

'जबरदस्ती' शब्द विदेशी शब्द है |

Key Points

  • जबरदस्ती: 
  • संज्ञा, विदेशी (फ़ारसी)
  • अर्थ : किसी के प्रति बलपूर्वक तथा कड़ाई के साथ किया गया कार्य या व्यवहार

Additional Information

विशेष:

शब्दपरिभाषाउदाहरण
तत्समऐसे शब्द जो संस्कृत से ज्यों के त्यों लिए गए, तत्सम होते हैं।कूप, उष्ट्र, पंचम आदि
तद्भवसंस्कृत से हिंदी में आने पर जिन शब्दों का रूप बदल गया हो, तद्भव कहलाते हैं।आग, काम, पाँच आदि
देशज शब्दवे शब्द जिनकी उत्पत्ति के मूल का पता न हो परन्तु वे प्रचलन में हों।ऐसे शब्द देशज शब्द कहलाते हैं।ये शब्द आम तौर पर क्षेत्रीय भाषा में प्रयोग किये जाते हैं।जैसे - लोटा, कटोरा, डोंगा आदि।
विदेशज शब्दअन्य देश की भाषा से आए हुए शब्द जो हिंदी भाषा में सम्मिलित हुए उन्हें विदेशज शब्द कहते हैं।इन विदेशी भाषाओं में मुख्यतः अरबी, फारसी, तुर्की, उर्दू, अंग्रेजी व पुर्तगाली शामिल हैं।खुष्क, गुब्बारा, जेब, जानवर, गुलाब,  मलाई, लगाम, दर्जी, तबाह, जगह, शेर,  सौदागर, सुल्तान। पतलून, प्याज, मेज । तमाषा, बावर्ची, बेगम, बहादुर, मुगल, लाष, उर्दू ।

Question 235

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'प्रतिष्ठित' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?

  1. AOption (a)

    ठित

  2. BOption (b)

    इत्

  3. COption (c)

    इत

  4. DOption (d)

    ईत

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Correct answer

Answer: (c)C.

इत

Why this answer is correct

'प्रतिष्ठित' शब्द में प्रत्यय है - 'इत'

  • प्रतिष्ठा + इत = प्रतिष्ठित
  • अर्थ: जिसकी प्रतिष्ठा हुई हो, आदर- प्राप्त, इज्जतदार।
  • विलोम शब्द - 'अप्रतिष्ठित'

Key Points

  • प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है।

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द:-

  • इत- पठित, व्यथित, फलित, पुष्पित।
  • ता- उदारता, सफलता,  मनुष्यता, बहता, लघुता समता।
  • इक- वैयक्तिक, राजनैतिक, आर्थिक, साप्ताहिक, धार्मिक।
  • अक- लेखक, पाठक, कारक, गायक, चालक।
  • आई-  पण्डिताई, ठकुराई, लड़ाई, चतुराई, चौड़ाई।
  • अनीय- माननीय, रमणीय, दर्शनीय, पूजनीय।

Question 236

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'पहले' शब्द में क्रिया-विशेषण है

  1. AOption (a)

    स्थानवाचक

  2. BOption (b)

    रीतिवाचक

  3. COption (c)

    परिमाणवाचक

  4. DOption (d)

    कालवाचक

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Correct answer

Answer: (d)D.

कालवाचक

Why this answer is correct

'पहले' शब्द में क्रिया-विशेषण है- 'कालवाचक'

  • जिन शब्दों से क्रिया के घटित होने के समय का पता चले, उसे कालवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।
  • जैसे - आज, कल, परसों, पहले, अब तक, अभी-अभी, लगातार, बार-बार, प्रतिदिन, अक्सर, बाद में, जब, तब, अभी, कभी, नित्य, सदा, तुरंत, आजकल, कई बार, हर बार आदि।

Key Points

कालवाचक क्रिया-विशेषण के उदाहरण -

  • आज बरसात होगी।
  • राम कल मेरे घर आएगा।
  • तुम अब जा सकते हो।
  • हमारा मित्र अभी आ जायेगा।
  • अब कभी मत आना।
  • वह पहले कभी नहीं आया।

Additional Information

स्थानवाचक:- - वे शब्द जो क्रिया के घटित होने के स्थान का बोध कराते हैं, उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं। - जैसे - यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, सामने, नीचे, ऊपर, आगे, भीतर, बाहर, दूर, पास, अंदर, किधर, इस ओर, उस ओर, इधर, उधर, जिधर, दाएँ, बाएँ, दाहिने आदि। उदाहरण - - बच्चे ऊपर खेलते हैं। - अब वहाँ अकेला मजदूर था। रीतिवाचक:- - जिन अविकारी शब्दों से क्रिया की रीति या विधि का पता चलता है, उसे रीतिवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। - जैसे - सचमुच, ठीक, अवश्य, कदाचित, ऐसे, वैसे, सहसा, तेज, सच, झूठ, धीरे, ध्यानपूर्वक, हंसते हुए, तेजी से, फटाफट आदि। उदाहरण - - अचानक काले बादल घिर आए। - हरीश ध्यान पूर्वक पढ़ रहा है। परिमाणवाचक:- - जिन अविकारी शब्दों से क्रिया के परिमाण और उसकी संख्या का पता चलता है, उसे परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। - जैसे - बहुत, अधिक, पूर्णतया, कुछ, थोडा, काफी, केवल, इतना, उतना, कितना, थोड़ा-थोड़ा, एक-एक करके, जरा, खूब, बिलकुल, ज्यादा, अल्प, बड़ा, भारी, लगभग, क्रमशः आदि। उदाहरण - - अधिक पढो। - ज्यादा सुनो।

Question 237

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'ओं' शब्द लगकर बना हुआ बहुवचन शब्द नहीं है

  1. AOption (a)

    दस्तावेजों

  2. BOption (b)

    गवाहों

  3. COption (c)

    बहसों

  4. DOption (d)

    अर्थोन्माद

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

अर्थोन्माद

Why this answer is correct

'ओं' शब्द लगकर बना हुआ बहुवचन शब्द नहीं है- 'अर्थोन्माद'

  • अर्थोन्माद - अर्थ के रूप में दी जाने वाली सज़ा, जुरमाना,  हरजाना (फ़ाइन)।

Key Points

  • दस्तावेज शब्द एकवचन और इसका बहुवचन शब्द दस्तावेजों होगा।
  • गवाह शब्द एकवचन और इसका बहुवचन शब्द गवाहों होगा।
  • बहस शब्द एकवचन और इसका बहुवचन शब्द बहसों होगा।

Additional Informationबहुवचन:- 

  • जिस विकारी शब्द या संज्ञा के कारण हमें किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, पदार्थ आदि के एक से अधिक या उनके अनेक होने का पता चलता है उसे बहुवचन कहते हैं।
  • जैसे - लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, बेटे आदि।

एकवचन:-

  • संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या क्रिया शब्द के जिस रूप से किसी एक व्यक्ति या वस्तु का बोध होता है, वहाँ एकवचन होता है
  • जैसे- लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, बेटे आदि।

Question 238

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

'जैसा पहले रहा करता था।' वाक्य में काल है -

  1. AOption (a)

    वर्तमान काल

  2. BOption (b)

    भूतकाल

  3. COption (c)

    भविष्य काल

  4. DOption (d)

    हेतुहेतुमद भूतकाल

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Answer: (b)B.

भूतकाल

Why this answer is correct

'जैसा पहले रहा करता था।' वाक्य में काल है - 'भूतकाल'

  • भूतकाल दो शब्दों के मेल से बना है – भूत + काल। भूत का अर्थ होता है – बीत गया और काल को कहा जाता है – समय अर्थात् जो समय बीत गया हो।
  • जिस क्रिया से कार्य के समाप्त होने का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान वाक्यों के अंत में था, थे, थी आदि से होती है।
  • जैसे - मैं सो गया था।

Key Pointsभूतकाल के कुछ उदाहरण:-

  • वह रो रहा था।
  • मैंने गाना गाया।
  • मैंने समाचार देखा।
  • मैंने खाना पकाया।
  • रमेश पटना गया था।
  • पहले मैं लखनऊ में पढ़ता था।
  • राम ने रावण का वध किया था।

Additional Information

वर्तमान काल:- - क्रिया के जिस रूप से समय का पता चले और क्रिया के होने का वर्तमान समय में पता चले, उसे वर्तमान काल कहते हैं। - जिन वाक्यों के अंत में ता, ती, ते, है, हैं आते हैं, वो वर्तमान काल कहलाता है। जैसे- - अंकित पुस्तक पढ़ता है। - गरिमा गाना गाती है। भविष्य काल:- - क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आने वाले समय में पूरा होने का पता चले उसे भविष्य काल कहते हैं। - जिन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि आते हैं। जैसे- - मैं कल विद्यालय जाउँगा। - खाना कुछ देर में बन जायेगा। हेतुहेतुमद भूतकाल:- - ‘हेतु’ का अर्थ है – कारण। जहाँ भूतकाल में किसी कार्य के न हो सकने का वर्णन कारण के साथ दो वाक्यों में दिया गया हो, वहाँ हेतुहेतुमद् भूतकाल होता है। जैसे - - यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती। - यदि मैं आता तो वह चला जाता।

Question 239

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

निम्नलिखित में से किस समूह में सभी शब्द पुल्लिंग हैं?

  1. AOption (a)

    ज्ञान, सभ्यता, घर।

  2. BOption (b)

    भय, शरीर, बाधा।

  3. COption (c)

    बात, बल, लक्ष्य।

  4. DOption (d)

    दुःख, देश, शासन।

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Correct answer

Answer: (d)D.

दुःख, देश, शासन।

Why this answer is correct

उपर्युक्त में से समूह में सभी शब्द पुल्लिंग हैं - दुःख, देश, शासन।

  • स्त्रीलिंग - बात, बाधा, सभ्यता, ज्ञान
  • पुल्लिंग - शरीर, भय, घर, बल, लक्ष्य

Key Pointsपुल्लिंग शब्द:-

  • वे संज्ञा शब्द जो हमें पुरुष जाति के व्यक्ति, वस्तु आदि का बोध कराते हैं, वे पुल्लिंग शब्द कहलाते हैं।
  • जैसे- लड़का, आदमी, घोड़ा, शेर, बकरा, राजा, कुत्ता, पेड़, सिंह, बैल, घर आदि।

स्त्रीलिंग संज्ञा:-

  • वह संज्ञा शब्द जो हमें स्त्री जाति का बोध कराते हैं, वे शब्द स्त्रीलिंग संज्ञा शब्द कहलाते हैं। 
  • जैसे- बेटी, पुत्री, शिक्षिका, गाय, माता, लड़की, भेद, गाय, भैंस, बकरी, लोमड़ी, बंदरिया आदि।

Question 240

REET 2022• Hindi - II

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

भय की इस वासना का परिहार क्रमशः होता चलता है। ज्यों-ज्यों नाना रूपों से अभ्यस्त होता है त्यों-त्यों उसकी धड़क खुलती जाती है। इस प्रकार अपने ज्ञान-बल, हृदय-बल और शरीर-बल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानो हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्य के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं। उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया है। अब इस बात की आशंका तो नहीं रहती कि कोई जबरदस्ती आकर हमारे घर, खेत, बाग-बगीचे, रुपये-पैसे छीन न ले, पर इस बात का खटका रहता है कि कोई नकली दस्तावेजों, झूठे गवाहों और कानूनी बहसों के बल से इन वस्तुओं से वंचित न कर दे। दोनों बातों का परिणाम एक ही है। सभ्यता की वर्तमान स्थिति में एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वैसा भय तो नहीं रहा जैसा पहले रहा करता था, पर एक जाति को दूसरी जाति से, एक देश को दूसरे देश से, भय के स्थायी कारण प्रतिष्ठित हो गए हैं। सबल और सबल देशों के बीच अर्थ-संघर्ष की, सबल और निर्बल देशों के बीच अर्थ-शोषण की प्रक्रिया अनवरत चल रही है; एक क्षण का विराम नहीं है। इस सार्वभौम वणिग्वृत्ति से उसका अनर्थ कभी न होता यदि क्षात्रवृत्ति उसके लक्ष्य से अपना लक्ष्य अलग रखती। पर इस युग में दोनों का विलक्षण सहयोग हो गया है। वर्तमान अर्थोन्माद को शासन के भीतर रखने के लिए क्षात्रधर्म के उच्च और पवित्र आदर्श को लेकर क्षात्रसंघ की प्रतिष्ठा आवश्यक है।

“उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया।” वाक्य में प्रयुक्त ‘बहुत' शब्द है

  1. AOption (a)

    निश्चित परिमाणवाचक विशेषण।

  2. BOption (b)

    संकेतवाचक विशेषण।

  3. COption (c)

    अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण।

  4. DOption (d)

    संख्यावाचक विशेषण।

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Correct answer

Answer: (c)C.

अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण।

Why this answer is correct

“उसका क्षोभकारक रूप बहुत-से आवरणों के भीतर ढक गया।” वाक्य में प्रयुक्त ‘बहुत' शब्द है- 'अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण'।

  • वे विशेषण शब्द जो विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध न कराते हों, वे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
  • जैसे- कई, कुछ, सब, थोड़, सैकड़ों, अरबों आदि।

Key Pointsअन्य उदाहरण-

  • बम के भय से कुछ लोग बेहोश हो गए।
  • कक्षा में बहुत कम छात्र उपस्थित थे।
  • कुछ फल खाकर ही मेरी भूख मिट गई।
  • कुछ देर बाद हम चले जाएँगे।
  • जयपुर बहुत सारे लोग आते हैं।

Additional Information

निश्चित परिमाणबोधक विशेषण:- - वो विशेषण शब्द जो हमें किसी वस्तु की निश्चित मात्रा या परिमाण का बोध कराते हैं, वे निश्चित परिमाणबोधक विशेषण कहलाते हैं। - जैसे- एक बीघा ज़मीन, चार मीटर कपड़ा, दो किलो चीनी, तीन लीटर पेट्रोल, सौ सेंटीमीटर, दो सेर गेहूँ, पाँच मीटर कपड़ा, एक लीटर दूध आदि। - मैंने दो बीघा ज़मीन खरीदी है। संकेतवाचक विशेषण:- - जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की ओर संकेत करते है या जो शब्द सर्वनाम होते हुए भी किसी संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता को प्रकट करें, उन्हें संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहते है। - जैसे- - वह गाय दूध देती है। - यह पुस्तक मेरी है। संख्यावाचक विशेषण:- - ऐसे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध कराते हैं, वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं। - जैस���-​ - हमारे परिवार में पांच सदस्य हैं। - मैं रोज़ चार केले खाता हूँ।