निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
हाथी से हाथी जूझ पड़े, भिड़ गये सवार सवारों से।
घोड़े पर घोड़े टूट पड़े, तलवार लड़ी तलवारों से।
हय रुण्ड गिरे, गज मुण्ड गिरे, कट कट अवनी पर शुण्ड गिरे।
लड़ते लड़ते अरि झुण्ड गिरे, भू पर हय विकल वितुण्ड गिरे।
मेवाड़ केसरी देख रहा, केवल रण का न तमाशा था।
वह दौड़ दौड़ करता था रण, वह मान रक्त का प्यासा था।
चढ़कर चेतक पर घूम-घूम, करता सेना रखवाली था।
ले महामृत्यु को साथ-साथ, मानो साक्षात कपाली था।
रण-बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से, पड़ गया हवा का पाला था।
गिरता न कभी चेतक तन पर, राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था ।
महाराणा प्रताप किसके रक्त के प्यासे थे?
- AOption (a)
स्वाभिमान के संरक्षक के।
- BOption (b)
सम्मान के आकांक्षी के।
- COption (c)
मुगल सेनानायक मान सिंह के।
- DOption (d)
अपमान से पीड़ित के।
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Correct answer
मुगल सेनानायक मान सिंह के।
Why this answer is correct
महाराणा प्रताप मुगल सेनानायक मान सिंह के रक्त के प्यासे थे।
- पद्यांश के अनुसार:-
- कविता में पंक्ति 'वह मान रक्त का प्यासा था।' अर्थात महाराणा प्रताप मुगल सेनानायक मान सिंह के रक्त के प्यासे थे।
Key Pointsस्वाभिमान:-
- अर्थ: स्वयं की प्रतिष्ठा या अभिमान, आत्मगौरव, निज गौरव, आत्मसम्मान।
संरक्षक:-
- अर्थ: वह जो भरण-पोषण, देख-रेख आदि करता हो।
सम्मान:-
- अर्थ: प्रतिष्ठा, मान, रुतबा, आदर, गौरव।
- विलोम शब्द - 'अपमान'
आकांक्षी:-
- इच्छा रखनेवाला, अपेक्षा रखनेवाला, खोजी।