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Question 201

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

निम्नलिखित शब्दों में से अव्यय नहीं है :

  1. AOption (a)

    अधिक

  2. BOption (b)

    जब

  3. COption (c)

    पूर्व

  4. DOption (d)

    रचना

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Correct answer

Answer: (d)D.

रचना

Why this answer is correct

उपर्युक्त शब्दों में से अव्यय नहीं है- 'रचना'

  • अव्यय शब्द - 'अधिक, जब, पूर्व'

Key Pointsअव्यय:- 

  • ऐसे शब्द जिसमें लिंग, वचन, पुरुष, कारक आदि के कारण कोई विकार उत्पन्न नहीं होता, वह शब्द अव्यय कहलाते हैं।
  • अव्यय सदैव अपरिवर्तित, अविकारी रहते हैं।
  • जैसे- जब, तब, अभी, उधर, वहाँ, इधर, कब, क्यों, वाह, आह, ठीक, अरे, और, तथा, एवं, किन्तु, परन्तु, बल्कि, इसलिए, अतः, अतएव, चूँकि, अवश्य इत्यादि।

उदाहरण-

  • वे यहाँ से चले गये।
  • घोडा तेज दौड़ता है।
  • अब खाना बंद करो।
  • बच्चे धीरे-धीरे चल रहे थे।
  • रोहन प्रतिदिन खेलने जाता है।

Question 202

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'अनुसार' शब्द में कौन सा समास है?

  1. AOption (a)

    अव्ययी-भाव समास

  2. BOption (b)

    तत्पुरुष समास

  3. COption (c)

    द्वंद्व समास

  4. DOption (d)

    द्विगु समास

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Correct answer

Answer: (a)A.

अव्ययी-भाव समास

Why this answer is correct

'अनुसार' शब्द में समास है - 'अव्ययी-भाव समास'

  • समास विग्रह = जैसा सार है वैसा
  • जिस समास का **पहला पद कोई अव्यय (**अविकारी शब्द) होता है, उस समास को अव्ययीभाव समास कहते हैं। अर्थात
  • इस समास में पहला या पूर्वपद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है। अव्यय के संयोग से समस्तपद भी अव्यय बन जाता है। इसमें पूर्वपद प्रधान होता है।
  • अव्ययीभाव समास के प्रथम पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं।
  • उदाहरण- 
  • प्रतिदिन = दिन-दिन

Key Points कुछ अन्य द्वंद्व समास के उदाहरण:-

  • यथारुचि = रूचि के अनुसार
  • प्रतिवर्ष = प्रत्येक वर्ष
  • घर-घर = प्रत्येक घर
  • निस्संदेह = संदेह रहित
  • प्रत्यक्ष = आँखों के सामने

Additional Information

द्विगु समास:- - वह समास जिसका पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है तथा समस्तपद क��सी समूह या फिर किसी समाहार का बोध करता है तो वह द्विगु समास कहलाता है। उदाहरण- - शताब्दी = सौ सालों का समूह - दोपहर = दो पहरों का समाहार कर्मधारय समास:- - जिस समासिक शब्द का उत्तर पद प्रधान हो, पूर्वपद और उत्तरपद में विशेषण और विशेष्य अथवा उपमान - उपमेय का संबंध हो वह कर्मधारय समास कहलाता है। उदाहरण- - नीलकमल = नील है जो कमल। तत्पुरुष समास:- - वह समास जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है। - इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है। उदाहरण- - करुणापूर्ण = करुणा से पूर्ण - रसोईघर = रसोई के लिए घर

Question 203

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचन��त्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'वह' शब्द में सर्वनाम है -

  1. AOption (a)

    निश्चयवाचक सर्वनाम

  2. BOption (b)

    संबंधवाचक सर्वनाम

  3. COption (c)

    निजवाचक सर्वनाम

  4. DOption (d)

    अनिश्चयवाचक सर्वनाम

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Correct answer

Answer: (a)A.

निश्चयवाचक सर्वनाम

Why this answer is correct

'वह' शब्द में सर्वनाम है - 'निश्चयवाचक सर्वनाम'

  • जिन सर्वनाम शब्दों से किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान की निश्चितता का बोध हो वे शब्द निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- यह, वह, ये, वे आदि।
  • इस सर्वनाम के अंतर्गत ‘यह’ और ‘वह’ आते हैं।  ‘यह‘ निकट के लिए आता है। ‘वह‘ दूर के लिए प्रयुक्त होता है।

Key Pointsनिश्चयवाचक सर्वनाम के उदाहरण:-

  • यह पुस्तक सोनी की है।
  • ये पुस्तकें रानी की हैं।
  • वह सड़क पर कौन आ रहा है।
  • वे सड़क पर कौन आ रहे हैं।

Additional Information

संबंधवाचक सर्वनाम:- - जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी वस्तु या व्यक्ति का सम्बन्ध बताने के लिए किया जाए वे शब्द सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। - सम्बन्धवाचक सर्वनाम का प्रयोग वाक्य में दो शब्दों को जोड़ने के लिए भी किया जाता है। - जैसे- जैसे-वैसे, जिसकी-उसकी, जितना-उतना, जो-सो आदि। उदाहरण- - जिसकी लाठी उसकी भैंस। - जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा निजवाचक सर्वनाम:- - जिन शब्दों का प्रयोग वक्ता स्वयं के लिए करता है, वे निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। इसके अंतर्गत आप, स्वयं, खुद, स्वतः आदि। - जहाँ ‘आप’ शब्द का प्रयोग श्रोता के लिए हो वहाँ यह आदर-सूचक मध्यम पुरुष होता है और जहाँ ‘आप’ शब्द का प्रयोग अपने लिए हो वहाँ निजवाचक होता है। उदाहरण- - मैंने पूरे पहाड़ को स्वयं तोड़ दिया था। - मैं यह सब अपने आप कर सकता हूँ। अनिश्चयवाचक सर्वनाम:- - जिन सर्वनाम शब्दों से वस्तु, व्यक्ति, स्थान आदि की निश्चितता का बोध नही होता वे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। इसके सर्वनाम के अंतर्गत ‘कोई’ और ‘कुछ’ आते हैं। उदाहरण- - मुझे कोई नज़र आ रहा है। - मैं कुछ फल लाया हूँ।

Question 204

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'लोभ' शब्द में कौन सी संज्ञा है?

  1. AOption (a)

    व्यक्तिवाचक संज्ञा

  2. BOption (b)

    जातिवाचक संज्ञा

  3. COption (c)

    द्रव्यवाचक संज्ञा

  4. DOption (d)

    भाववाचक संज्ञा

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Correct answer

Answer: (d)D.

भाववाचक संज्ञा

Why this answer is correct

'लोभ' शब्द में संज्ञा है - 'भाववाचक संज्ञा'

  • अर्थ: दूसरे की धन-संपत्ति या कोई वस्तु लेने की तीव्र इच्छा, कामना, लालसा, लालच, त्याग में बाधक होने वाला कर्म।
  • (यहाँ पर लोभ शब्द से किसी भाव, अवस्था, गुण, दोष, दशा आदि का पता चल रहा है, अतः लोभ शब्द भाववाचक संज्ञा है।)
  • जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास, उमंग, चढाई, थकावट, परायापन, भूख, प्यास, चोरी, क्रोध, सुन्दरता आदि।

Key Pointsभाववाचक संज्ञा के उदाहरण:-

  • मैं तुम से प्रेम करता हूँ।
  • भारत में गरीबी बढ़ रही है।
  • मेरा बचपन खेलकूद में बीता।
  • मेरे दोस्त की लम्बाई मेरे से अधिक है।
  • विकास की आवाज़ में बहुत मिठास है।

Additional Information

जातिवाचक संज्ञा:- - जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं, उन शब्दों को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। - जैसे- गाँव, स्कूल, शहर, आदमी, जानवर, पशु, पक्षी, गाय, लड़का आदि। उदाहरण- - बच्चे खिलौनों से खेल रहे हैं। - पेड़ों पर पक्षी बैठे हैं। द्रव्यवाचक संज्ञा:- - जो शब्द किसी ठोस, तरल, पदार्थ, धातु, अधातु या द्रव्य का बोध करते हैं, द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं। - जैसे- कोयला, पानी, तेल, घी, लोहा, सोना, चांदी, हीरा, चीनी, फल, सब्ज़ी आदि। उदाहरण- - मुझे पानी पीना है। - लोहा बहुत कठोर पदार्थ है। व्यक्तिवाचक संज्ञा:- - किसी भी विशेष व्यक्ति, वस्त��� या स्थान के नाम का बोध कराने वाली संज्ञा ही व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाती हैं। - जैसे- महात्मा गाँधी, भगत सिंह, रमेश, रामायण, लखनऊ आदि। उदाहरण- - विकास फुटबॉल खेलता है। - राम मेरा दोस्त है।

Question 205

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

'जातियाँ' शब्द का एकवचन होगा :

  1. AOption (a)

    जाती

  2. BOption (b)

    जातीय

  3. COption (c)

    जातीयाँ

  4. DOption (d)

    जाति

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Correct answer

Answer: (d)D.

जाति

Why this answer is correct

'जातियाँ' शब्द का एकवचन होगा - 'जाति'

  • जाति शब्द एकवचन और उसका बहुवचन शब्द जातियाँ है।

Key Pointsएकवचन:-

  • संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या क्रिया शब्द के जिस रूप से किसी एक व��यक्ति या वस्तु का बोध होता है, वहाँ एकवचन होता है।
  • जैसे- लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, बेटे आदि।

बहुवचन:- 

  • जिस विकारी शब्द या संज्ञा के कारण हमें किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, पदार्थ आदि के एक से अधिक या उनके अनेक होने का पता चलता है उसे बहुवचन कहते हैं।
  • जैसे - लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, बेटे आदि।

Question 206

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

'हिमायती' शब्द का अर्थ है :

  1. AOption (a)

    बर्फीला

  2. BOption (b)

    पक्षपाती

  3. COption (c)

    पक्षद्रोही

  4. DOption (d)

    आयातित

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Correct answer

Answer: (b)B.

पक्षपाती

Why this answer is correct

'हिमायती' शब्द का अर्थ है- 'पक्षपाती'

  • 'हिमायती' शब्द का अन्य अर्थ है- तरफ़दारी करने वाला, पक्ष लेने वाला, पक्षधर।

Key Pointsबर्फीला:- 

  • अर्थ: बर्फ से भरा हुआ, बर्फ ये युक्त, बर्फ का।

पक्षद्रोही:-

  • अर्थ: वह साक्षी है जो अपने पूर्ववर्ती कथन से हट रहा है अथवा न्यायालय को सच बताने का इच्छुक नही है।

आयातित:-

  • अर्थ:  आयात किया हुआ, बाहर से मँगाया हुआ।

Question 207

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

“इनका असर भी पड़ रहा है।” इस वाक्य में कौन सा काल है?

  1. AOption (a)

    संभाव्य वर्तमान

  2. BOption (b)

    आज्ञार्थ वर्तमान

  3. COption (c)

    पूर्ण वर्तमान

  4. DOption (d)

    अपूर्ण वर्तमान

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Correct answer

Answer: (d)D.

अपूर्ण वर्तमान

Why this answer is correct

“इनका असर भी पड़ रहा है।” इस वाक्य में काल है - अपूर्ण वर्तमान

  • (यहाँ वाक्य में कार्य के लगातार होने का पता चल रहा है।)

Key Points

  • अपूर्ण का अर्थ होता है – अधुरा। क्रिया के जिस रूप से कार्य के लगातार होने का पता चलता है, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है।
  • जिन वाक्यों के अंत में रहा है, रहे है, रही है, रहा हूँ आदि आते है, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते हैं।

उदाहरण-

  • श्याम गेंद खेल रहा है।
  • वह घर जा रहा है।

Additional Information

संभाव्य वर्तमान:- - संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो। इससे वर्तमान काल में काम के पूरे होने की संभावना होती है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं। उदाहरण- - वह लौटा हो। - वह आया हो। आज्ञार्थ वर्तमान:- - क्रिया के द्वारा वर्तमान समय में ही चलाने की आज्ञा का बोध करने वाला रूप आज्ञार्थ वर्तमान काल कहलाता है। उदाहरण- - राधा तू पढ़। - रमेश आप भी सुनिए। पूर्ण वर्तमान:- - क्रिया के जिस रूप से कार्य के अभी पूरे होने का पता चलता है। उसे पूर्ण वर्तमान काल कहते है। इसमें हमें कार्य की पूर्ण सिद्धि का पता चलता है। उदाहरण- - मैंने फल खाए हैं। - उसने गेंद खेली है।

Question 208

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

'विधा' शब्द है -

  1. AOption (a)

    उभयलिंग

  2. BOption (b)

    पुल्लिंग

  3. COption (c)

    नपुंसकलिंग

  4. DOption (d)

    स्त्रीलिंग

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Correct answer

Answer: (d)D.

स्त्रीलिंग

Why this answer is correct

'विधा' शब्द है - स्त्रीलिंग

  • अर्थ: रीति, ढंग, प्रकार, भाँति।
  • वाक्य प्रयोग - आत्मकथा अभिव्यक्ति की बहुत मुश्किल विधा है।

Key Points

  • वह संज्ञा शब्द जो हमें स्त्री जाति का बोध कराते हैं, वे शब्द स्त्रीलिंग संज्ञा शब्द कहलाते हैं। 
  • जैसे- बेटी, पुत्री, शिक्षिका, बुढिया, शेरनी, नारी, रानी, राजकुमारी, बहन आदि।

Additional Informationउभयलिंग:- 

  • वह संज्ञा जिसका उपयोग स्त्रीलिंग और पुल्लिंग दोनों में होता है, वे शब्द उभयलिंग संज्ञा शब्द कहलाते हैं। 
  • ​जैसे-  केंचुआ, तारामीन, फीताकृमि।

पुल्लिंग:-

  • जिन संज्ञा शब्दों से पुरूष जाति का बोध होता है, उसे पुलिंग संज्ञा कहते है।
  • ​जैसे-  लड़का, आदमी, घोड़ा, शेर, बकरा, राजा, कुत्ता, पेड़, सिंह, बैल, घर आदि।

नपुंसकलिंग:-

  • जिन संज्ञा शब्दों से न तो पुल्लिंग हो और न स्त्री लिंग उसे नपुंसकलिंग कहा जाता है।
  • ​जैसे-  फल, पुष्प, कमल, मोटरयान, वायुयान आदि शब्द नपुंसलिंग होते है।

Question 209

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

'व्यक्ति' शब्द का बहुवचन रूप होगा :

  1. AOption (a)

    व्यक्तिक

  2. BOption (b)

    व्यक्तित्व

  3. COption (c)

    व्यक्तियों

  4. DOption (d)

    वैयक्तिक

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Correct answer

Answer: (c)C.

व्यक्तियों

Why this answer is correct

'व्यक्ति' शब्द का बहुवचन रूप होगा- 'व्यक्तियों'

  • 'व्यक्ति' शब्द एकवचन और उसका का बहुवचन शब्द 'व्यक्तियों' होगा।

Key Pointsबहुवचन:-

  • जिस विकारी शब्द या संज्ञा के कारण हमें किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, पदार्थ आदि के एक से अधिक या उनके अनेक होने का पता चलता है उसे बहुवचन कहते हैं।
  • जैसे - लडके, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, स्त्रियाँ, बेटे, बेटियाँ, केले, गमले, चूहे, तोते, घोड़े, हम, वे, ये, लताएँ, गाड़ियाँ, रुपए आदि।

एकवचन:- 

  • संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, पदार्थ आदि के एक होने का बोध हो या पता चलता है उसे एकवचन कहते हैं।
  • जैसे- लड़का, गाय, सिपाही घोड़ा, बच्चा, कपड़ा, माला, पुस्तक, स्त्री, टोपी, मोर आदि।

Additional Informationव्यक्तित्व:-

  • व्यक्ति (मूल शब्द) + त्व (प्रत्यय)|
  • अर्थ: व्यक्ति की विशेषता या गुण।
  • पुल्लिंग शब्द

वैयक्तिक:-

  • व्यक्ति + इक = वैयक्तिक
  • 'व्यक्ति' मूलशब्द और 'इक' प्रत्यय
  • अर्थ: व्यक्ति विशेष से संबंधित, व्यक्तिगत, निजी, (पर्सनल)।
  • विशेषण शब्द

Question 210

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

भाषा, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्र की भावना को राष्ट्रीय रूप देकर ही संकीर्णता से बचा जा सकता है। सभी कुछ राष्ट्र का है या राष्ट्र से है क्योंकि इन सभी घटकों का अस्तित्व राष्ट्र के कारण ही संभव है। राष्ट्र है तो विभिन्न भाषाएँ हैं, धर्म हैं, राज्य हैं और जातियाँ हैं, अत: राष्ट्र के हित में हमें स्थानीय समस्याओं को अत्यधिक तूल नहीं देना चाहिए। साहित्य द्वारा यह कार्य संभव है क्योंकि साहित्य मानवीय मूल्यों का तथा मनुष्य का हिमायती है। वह व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में विभाजित नहीं करता। ‘कविता की भाषा' में आदमी होने की तमीज़ है, तब कविता या साहित्य की अन्य विधाओं द्वारा आदमी को आदमी से जोड़ा जा सकता है। यह कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर इसका व्यापक प्रभाव अभी दिखाई नहीं देता। कला और साहित्य का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। सर्वभाषा कवि-सम्मेलन, संवाद, सेमिनार तथा चर्चा-वार्ताओं के द्वारा समूचे देश में परस्पर सद्भाव और समझ का वातावरण बनाना श्रेयस्कर है। समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म आदि माध्यम यह कार्य कर रहे हैं और इनका असर भी पड़ रहा है। 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' शीर्षक गीत व्यक्ति को अनुप्राणित करता है तथा राष्ट्र के प्रति हमें संचेतन होने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार के प्रयास यदि सार्वजनिक संस्थाएँ, साहित्य संस्थाएँ करें तो पूरे राष्ट्र को हम एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं।

राजस्थानी के 'भासा' शब्द का मानक हिन्दी रूप है :

  1. AOption (a)

    भासा

  2. BOption (b)

    भाषा

  3. COption (c)

    भाशा

  4. DOption (d)

    भाखा

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Correct answer

Answer: (b)B.

भाषा

Why this answer is correct

राजस्थानी के 'भासा' शब्द का मानक हिन्दी रूप है- 'भाषा'

  • भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर, सुनकर, लिखकर या पढ़कर अपने मन के भावों या विचारों को दूसरो के समक्ष प्रकट करता है।

Key Points

  • राजस्थानी भाषा मुख्य रूप से राजस्थान राज्य में बोली जाती हैं, लेकिन गुजरात, हरियाणा और पंजाब में भी बोली जाती हैं।
  • राजस्थानी भाषा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर और मुल्तान क्षेत्रों और सिंध के थारपारकर जिले में भी बोली जाती हैं।
  • यह क्रमशः बहावलपुर और मुल्तान क्षेत्रों में रियासी और सरायकी में विलीन हो जाती है।

Additional Informationराजस्थानी की भाषा शब्द का मानक हिन्दी रूप है-

  • वीरा - भाई
  • भावज -  भाभी
  • डांगरा - पशु
  • ढोर - भेड़ बकरी
  • बींद - पती/दुल्हा
  • बींदणी - बहू/दुल्हन
  • लालजी - देवर
  • बटेऊ - मेहमान
  • पावना - जवाई
  • सुतली - रस्सी
  • ठूंगा - लिफ़ाफ़ा
  • भंवर -  बड़ा लड़का
  • भवरी -  बड़ी लड़की
  • छोरा-छोरी - लड़का-लड़की