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Question 191

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित में से भाषा पुस्���कालय का लाभ कौन सा है?

  1. AOption (a)

    कक्षा शिक्षण में पूर्ति

  2. BOption (b)

    स्वाध्याय के लिए अवसर

  3. COption (c)

    विकल्प (A) एवं (B) दोनों सही हैं।

  4. DOption (d)

    इनमें से कोई नहीं

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Correct answer

Answer: (c)C.

विकल्प (A) एवं (B) दोनों सही हैं।

Why this answer is correct

भाषा पुस्तकालय-

  • भाषा पुस्तकालय में विभिन्न साहित्यिक विधाओं की उपलब्धता होती है।
  • बालको को अपनी रूचि के अनुरूप साहित्य के चयन की स्वतंत्रता होती है।
  • भाषा शिक्षण में साहित्यिक विधाओं से परिचित कराने की प्रक्रिया पर बल दिया जाता है ताकि बच्चों को उनके अनुभवों के आधार पर विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग में सफल बनाया जा सके। बच्चों में भाषाई विकास के लिए साहित्यिक विधाओं जैसे कविता, कहानी, आदि को सबसे अधिक महत्त्व दिया जाता है।

भाषा पुस्तकालय के लाभ- भाषा पुस्तकालय के लाभ निम्नलिखित है-

  • यहाँ बच्चों को अपने लिए अपनी पसंद की किताबें चुनने और आकर्षक तरीके से प्रदर्शित विभिन्न किताबों को पढ़ने की स्वतंत्रता है।
  • यह बच्चों को स्वतंत्ररूप से पढ़ने और साथ ही सामूहिक पठन के अवसर उपलब्ध कराता है।
  • भाषा पुस्तकालय शिक्षकों और बच्चों की साझा जिम्मेदारी है।
  • बाल साहित्य के साथ बच्चों को सम्मिलित कर इसे उनकी पढ़ने लिखने संबंधी प्रतिदिन की प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।
  • नवीन भाषा सीखने के लिए भाषा पुस्तकालय उपयोगी है।
  • सीखने हेतु नियंत्रित वातावरण प्रदान करता है।
  • भाषा पुस्तकालय द्वारा कक्षा शिक्षण की भी पूर्ति होती है।
  • सीखने हेतु विशेष उपकरणो की व्यवस्था होती है।
  • स्वाध्याय के लिए अवसर मिलते है।
  • अनुभवी शिक्षकों का मार्गददर्शन मिलता है।

​अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि ​कक्षा शिक्षण में पूर्ति, स्वाध्याय के लिए अवसर भाषा पुस्तकालय के लाभ है।

Question 192

REET 2022• Hindi - I

इनमें से मौखिक परीक्षाओं का गुण है -

  1. AOption (a)

    एक शिक्षक एक समय में एक ही छात्र की परीक्षा ले सकता है, अतः समय अधिक लगता है।

  2. BOption (b)

    मौखिक परीक्षाओं को वस्तुनिष्ठ नहीं बनाया जा सकता।

  3. COption (c)

    इन परीक्षाओं से विद्यार्थी के तीन भाषायी कौशलों - सुनने, पढ़ने और बोलने का एक साथ मापन किया जा सकता है।

  4. DOption (d)

    इन परीक्षाओं से विद्यार्थी के लेखन कौशल का मापन नहीं कर सकते हैं।

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Correct answer

Answer: (c)C.

इन परीक्षाओं से विद्यार्थी के तीन भाषायी कौशलों - सुनने, पढ़ने और बोलने का एक साथ मापन किया जा सकता है।

Why this answer is correct

मौखिक परीक्षा- मौखिक परीक्षा का सर्वप्रथम उपयोग ग्लेडाइड्स ने शुरू किया था। मौखिक परीक्षा को यूनान के महान दार्शनिक और पश्चिमी दर्शन के जनक सुकरात ने भी महत्वपूर्ण स्थान दिया था। मौखिक परीक्षा में छात्रों से प्रश्न पूछे जाते है और छात्रों को उन प्रश्नों के उत्तर बोलकर (मौखिक) रूप से देने होते हैं।

मौखिक परीक्षा का गुण-

  • मौखिक परीक्षा में समय और प्रश्नों की कोई पाबंदी नहीं होती।
  • छात्र प्रश्नों के उत्तर सोच कर दे सकते हैं।
  • मौखिक परीक्षा में अध्यापक छात्रों से मौखिक रूप से प्रश्न करके उनके ज्ञान, अभिव्यक्ति की क्षमता और उनके आत्मविश्वास की परख भी आसानी से कर लेते है।
  • मौखिक परीक्षाओं से विद्यार्थी के तीन भाषायी कौशलों - सुनने, पढ़ने और बोलने का एक साथ मापन किया जा सकता है।
  • मौखिक परीक्षा से छात्र में आत्मविश्वास जागृत होता है।
  • मौखिक परीक्षा निदानात्मक कार्यो के लिए बहुत उपयोगी है।
  • नियमित शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में मौखिक परीक्षा प्रयुक्त किया जा सकता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि इन परीक्षाओं से विद्यार्थी के तीन भाषायी कौशलों - सुनने, पढ़ने और बोलने का एक साथ मापन किया जा सकता है। यह मौखिक परीक्षाओं का गुण है। 

Additional Information मौखिक परीक्षाओं का दोष-

  • एक शिक्षक एक समय में एक ही छात्र की परीक्षा ले सकता है, अतः समय अधिक लगता है।
  • मौखिक परीक्षाओं को वस्तुनिष्ठ नहीं बनाया जा सकता।
  • इन परीक्षाओं से विद्यार्थी के लेखन कौशल का मापन नहीं कर सकते हैं।

Question 193

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित में से उपलब्धि परीक्षण के निर्माण हेतु सम्मिलित पदों में से कौन सा पद नहीं है?

  1. AOption (a)

    परीक्षण योजना बनाना।

  2. BOption (b)

    परीक्षण के प्रारंभिक रूप की रचना करना।

  3. COption (c)

    परीक्षण का पुनर्निरीक्षण

  4. DOption (d)

    परीक्षण का अनुप्रयोग

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Correct answer

Answer: (d)D.

परीक्षण का अनुप्रयोग

Why this answer is correct

उपलब्धि परीक्षण से तात्पर्य उस परीक्षण से है जो एक निश्चित समय सीमा के अन्तर्गत विद्यार्थियों के विषय संबंधी ज्ञान का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। यह किसी विशिष्ट विषय में विद्यार्थियों के ज्ञान एवं समझ संबंधी निपुणता का मापन करता है।

उपलब्धि परीक्षण निर्माण के चरण:

  • स्वरूप योजना (नीतिगत निर्णय) बनाना
  • शैक्षणिक उद्देश्यों को लिखना
  • प्रश्न निर्माण करना
  • कार्य योजना (ब्लू प्रिंट) निर्माण
  • ब्लू प्रिंट आधारित प्रश्न पत्र निर्माण
  • समंकन/अंकन योजना तैयार करना

अतः निष्कर्ष निकलता है कि परीक्षण का अनुप्रयोग उपलब्धि परीक्षण के निर्माण हेतु सम्मिलित पदों में एक नहीं है।

Additional Information

  • परीक्षण का अनुप्रयोग परीक्षा के आयोजन का चरण है।

Question 194

REET 2022• Hindi - I

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली का दोष है :

  1. AOption (a)

    अल्प समयान्तर में होने वाली परीक्षा (टेस्ट) से विद्यार्थी पूरे वर्ष अध्ययनशील रहते हैं।

  2. BOption (b)

    शिक्षक विद्यार्थी को आवश्यक निर्देशन एवं परामर्श निरंतर देते रहते हैं।

  3. COption (c)

    विद्यार्थी को अपनी कमियों का ज्ञान निरंतर होता रहता है।

  4. DOption (d)

    विद्यार्थी पर वर्ष भर परीक्षा का भय बना रहता है, जिससे उसका स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है।

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Correct answer

Answer: (d)D.

विद्यार्थी पर वर्ष भर परीक्षा का भय बना रहता है, जिससे उसका स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है।

Why this answer is correct

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली- 

  • सतत और व्यापक मूल्यांकन, प्रायः 'CCE' के रूप में जाना जाता है, CBSE द्वारा 2009 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अध्यादेश के साथ मूल्यांकन को एक विद्यालय आधारित प्रणाली के रूप में लाया गया है।
  • सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन का अर्थ छात्रों के विद्यालय आधारित मूल्यांकन की प्रणाली से सम्बंधित है, जिसमे छात्रों के विकास के सभी पक्ष शामिल होते है।
  • यह एक बच्चे की विकास प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमे दोहरे उद्द्येश्यों पर बल दिया जाता है। इसका एक उद्देश्य व्यापक रूप से सीखने के मूल्याङ्कन पर तथा दूसरा व्यवहार के परिणामो पर आधारित है।

​​सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली के दोष- सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली के दोष निम्नलिखित है-

  • सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन में अधिक समय लगता है।
  • शिक्षकों का कार्यभार बढ़ जाता है।
  • विद्यार्थी पर वर्ष भर परीक्षा का भय बना रहता है, जिससे उसका स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है।
  • इसमें बाह्य परीक्षा के बिना मूल्यांकन अधूरा रहता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली का दोष है कि विद्यार्थी पर वर्ष भर परीक्षा का भय बना रहता है, जिससे उसका स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है।

Additional Information सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली का गुण-

  • अल्प समयान्तर में होने वाली परीक्षा (टेस्ट) से विद्यार्थी पूरे वर्ष अध्ययनशील रहते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थी को आवश्यक निर्देशन एवं परामर्श निरंतर देते रहते हैं।
  • विद्यार्थी को अपनी कमियों का ज्ञान निरंतर होता रहता है।

Question 195

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'ट्रेजडी' शब्द उत्पत्ति के आधार पर है -

  1. AOption (a)

    तद्भव

  2. BOption (b)

    तत्सम

  3. COption (c)

    विदेशी

  4. DOption (d)

    देशज

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Correct answer

Answer: (c)C.

विदेशी

Why this answer is correct

'ट्रेजडी' शब्द उत्पत्ति के आधार पर है - 'विदेशी'

  • ट्रेजडी - विदेशी (अंग्रेजी)
  • ट्रेजडी - दुखांत, दुखद घटना जिसमें किसी की मृत्यु तक हो जाए, विपत्ति।

Key Pointsविदेशी शब्द:-

  • विदेशी भाषाओं से हिंदी में आये शब्दों को विदेशी शब्द कहा जाता है। इन विदेशी भाषाओं में मुख्यतः अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी व पुर्तगाली शामिल है।
  • जैसे -
  • अरबी - आदत, आदमी, इनाम, इज्जत, ईमारत, इस्तीफ़ा, इजाज, ईमान, उम्र, एहसान।
  • फारसी - आवारा, आमदनी, आवाज, आफत, आईना, उम्मीद, कबूतर, कमीना, कुश्ती।
  • तुर्की - काबू, कालीन, कैंची, कुली, कुर्की, चेचक, चमचा, तोप, तमगा, तलाश, बेगम, बहादुर, लाश।
  • अंग्रेजी - अफसर, इंजन, डॉक्टर, लालटेन, सिलेट, अस्पताल, टिकस, कप्तान।
  • पुर्तगाली - आलमारी, बाल्टी, चाबी, फीता, तम्बाकू, आया, इस्पात, इस्तिरी, कमीज।

Additional Information

तद्भव:- - तत्सम शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं उन्हें तद्भव कहते हैं। - तद्भव का शाब्दिक अर्थ है – उससे बने (तत् + भव = उससे उत्पन्न), अर्थात जो उससे (संस्कृत से) उत्पन्न हुए हैं। - यहाँ पर तत् शब्द भी संस्कृत भाषा की ओर इंगित करता है। जैसे - - आग, आम,  मुँह , गाँव, दूध, भाई, खेत, अनजान आदि। तत्सम:- - तत्सम शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों, तत् + सम् से मिलकर बना है। तत् का अर्थ है – उसके, तथा सम् का अर्थ है – समान। अर्थात – ज्यों का त्यों। - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे- - अग्नि, आम्र, मुख, ग्राम, दुग्ध, भ्रातृ, अमूल्य, क्षेत्र, अज्ञान, अन्धकार आदि। देशज:- - वे शब्द जिनकी उत्पत्ति के मूल का पता न हो परन्तु वे प्रचलन में हों। ऐसे शब्द देशज शब्द कहलाते हैं। ये शब्द आम तौर पर क्षेत्रीय भाषा में प्रयोग किये जाते हैं। जैसे- - लोटा, कटोरा, डोंगा, डिबिया, खिचड़ी, खिड़की, पगड़ी, अंटा, चसक, चिड़िया, जूता, ठेठ, ठुमरी, तेंदुआ, फुनगी, कलाई आदि।

Question 196

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'सुधाकर' का पर्यायवाची शब्द है -

  1. AOption (a)

    रसाल

  2. BOption (b)

    प्रभा

  3. COption (c)

    शशांक

  4. DOption (d)

    मलय

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Correct answer

Answer: (c)C.

शशांक

Why this answer is correct

'सुधाकर' का पर्यायवाची शब्द है - 'शशांक'

  • 'सुधाकर' का अन्य पर्यायवाची शब्द है - कलानिधि, निशापति, चंद्रमा, सुधावट, चंद्रमा, चंद्रमा, सुधांशु, कपूर।

Key Points

  • जो शब्द समान अर्थ के कारण किसी दूसरे शब्द की जगह ले लेते हैं उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते है।
  • जैसे -​
  • रसाल - आम, आम्र, सौरभ, मादक, अमृतफल, सहुकार।
  • प्रभा - रश्मि, दीप्ति, मरीचि, किरण, ज्योति।
  • मलय - मलयगिरि, चंदन, गंधसार, चंदन।

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द:-

  • हवा - पवन, वायु, समीर, अनिल, वात, मरुत्, पवमान, बयार, प्रकंपन।
  • साँप - सर्प, नाग, विषधर, व्याल, भुजंग, उरग, अहि पन्नग।
  • जंगल - वन, कानन, बीहड़, विटप, विपिन।
  • घर - गृह, सदन, आवास, आलय, गेह, निवास, निलय, मंदिर।
  • असुर - राक्षस, दैत्य, दानव, निशाचर, दनुज, यातुधान, निशिचर, रजनीचर।
  • अश्व - घोड़ा, हय, तुरंग, वाजी, घोटक, सैंधव, तुरंग।
  • आकाश - गगन, नभ, आसमान, व्योम, अंबर, धौ, अंतरिक्ष, अनंत
  • आँख - नेत्र, दृग, नयन, लोचन, चक्षु, अक्षि, अंबक, दृष्टि, विलोचन।
  • इच्छा - आकांक्षा, चाह, अभिलाषा, कामना, ईप्सा, मनोरथ, स्पृहा, ईहा, वांछा।

Question 197

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य ���ही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

“जिसकी संवेदना के रूप में अनुभूति हुई हो।' वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है -

  1. AOption (a)

    प्रसूत

  2. BOption (b)

    व्यंजनाएँ

  3. COption (c)

    संवेदित

  4. DOption (d)

    संवेग

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Correct answer

Answer: (c)C.

संवेदित

Why this answer is correct

“जिसकी संवेदना के रूप में अनुभूति हुई हो।' वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है - 'संवेदित'

  • शिशु को जन्म देना - प्रसूत
  • भाव प्रकट करने की एक से अधिक शब्द शक्ति - व्यंजनाएँ
  • सुख, दुःख, भय, क्रोध, प्रेम, ईर्ष्या, घृणा आदि का अनुभव - संवेग

Key Points

  • जब अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को प्रयुक्त करना ही वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण वाक्यांश के लिए एक शब्द:-

  • जिस पुस्तक में आठ अध्याय हो - अष्टाध्यायी
  • जिसका भाषा द्वारा वर्णन असंभव हो - अनिर्वचनीय
  • आगे का विचार न कर सकने वाला - अदूरदर्शी
  • जो आज तक से सम्बन्ध रखता है - अद्यतन
  • कठिनाई से प्राप्त होने वाला - दुर्लभ
  • किसी पद का उम्मीदवार - प्रत्याशी
  • दूसरे के पीछे चलने वाला - अनुचर
  • द्रुत गमन करनेवाला - द्रुतगामी
  • जो बहुत समय तक ठहर सके - चिरस्थायी

Question 198

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'आवश्यक' शब्द का विलोम शब्द बनाने के लिए कौन सा उपसर्ग प्रयुक्त होगा?

  1. AOption (a)

    अ

  2. BOption (b)

    अन

  3. COption (c)

    अना

  4. DOption (d)

    अन्

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Correct answer

Answer: (d)D.

अन्

Why this answer is correct

आवश्यक' शब्द का विलोम शब्द बनाने के लिए उपसर्ग प्रयुक्त होगा- 'अन्'

  • 'आवश्यक' शब्द का विलोम शब्द 'अनावश्यक' है।
  • अन् + आवश्यक = अनावश्यक
  • 'अन्' उपसर्ग और 'आवश्यक' मूलशब्द
  • अर्थ: जिसकी आवश्यकता न हो; गैरज़रूरी, बेमतलब, व्यर्थ, फालतू।

Key Points

  • उपसर्ग शब्द के शुरू में जुड़ता है।

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:- 

  • अ (नही) - अछूता, अथाह, अटल, अनादर, अदृश्य, अत्यंत, अधर्म, अज्ञान।​
  • अन (नही) - अनबन, अनपढ़, अनजान, अनहोनी, अनमोल, अनचाहा।​
  • अन् (नही) - अनन्त, अनुपयोगी, अनुपयुक्त, अनागत, अनिष्ट, अनुपम।
  • सम् (अच्छी तरह)- सन्तोष, संगठन,संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप, प्रतिध्वनि।
  • निर् (बिना) - निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर।
  • उत् (श्रेष्ठ) - उत्पत्ति, उत्कंठा, उत्पीड़न, उत्कृष्ट, उन्नत, उल्लेख।

Question 199

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'सामयिक' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है -

  1. AOption (a)

    इय

  2. BOption (b)

    क

  3. COption (c)

    इक

  4. DOption (d)

    यिक

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इक

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'सामयिक' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है - 'इक'

  • समय + इक = सामयिक
  • अतः ‘सामयिक’ में ‘इक’ प्रत्यय और ‘समय’ मूल शब्द है।
  • अर्थ: वर्तमान समय या परिस्थिति आदि के विचार से उपयुक्त दृष्टिकोण या सोच।

Key Points

  • प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है।

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द:-

  • इक- वैयक्तिक, राजनैतिक, आर्थिक, साप्ताहिक, धार्मिक।
  • इत- पठित, व्यथित, फलित, पुष्पित।
  • ता- उदारता, सफलता,  मनुष्यता, बहता, लघुता समता।
  • अक- लेखक, पाठक, कारक, गायक, चालक।
  • आई-  पण्डिताई, ठकुराई, लड़ाई, चतुराई, चौड़ाई।
  • अनीय- माननीय, रमणीय, दर्शनीय, पूजनीय।

Question 200

REET 2022• Hindi - I

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

वस्तुतः रचना जब सामयिक प्रसंग पर आधारित होती है तो लेखक पर एक ओर समय की मांग, आदर्श के आग्रह, रूढ़ हो रहे समकालीन प्रयोगों की ललक और लोकप्रियता के लोभ का दबाव रहता है तो दूसरी ओर रचनात्मकता का दबाव रहता है। जितना अधिक वह रचनाधर्मी होगा, उतना ही अधिक वह इतर दबावों का प्रतिरोध करते हुए रचेगा, रचना उतनी ही अधिक सफल होगी। इसके अनुसार यहाँ पर एक बात यह भी समझनी चाहिए कि जब रचनाकार विचार को संवेदित करेगा, तब यह आवश्यक नहीं रहेगा कि प्रसूत रचना केवल उतनी ही और वैसी ही रहे जैसी कि रचने से पूर्व की रूपरेखा में कल्पित की गई थी। कारण यह है कि संवेदित होने की प्रक्रिया में ही उस पर अवचेतन का दबाव भी आयेगा। अब यह दबाव उसे कितना और कैसे बदल जायेगा, यह जान लिए जाने का कोई साधन नहीं होता। यह तो रचने के बाद ही जाना जाता है कि क्या रचा गया है। प्रायः हर कलाकृति में ऐसे निहितार्थ रहते हैं, और उसमें ऐसी व्यंजनाएँ भी होती हैं, जिनके प्रति स्वयं रचनाकार सजग हो ही, यह आवश्यक नहीं। यह जो कहा जाता है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रचना वही और उतना ही बोले जितना लेखक ने चाहा है, वह कुछ कम या अधिक भी बोल सकती है और कभी-कभार विपरीत भी बोल सकती है, उसका रहस्य यही है। याने अवचेतन का दबाव इस श्रेणी की रचनाओं पर भी अपने प्रभाव डालता है। तुलसी जो कहते हैं कि “लिखत सुधाकर, लिखिया राहू" वह यही है। राष्ट्रीय फलक की समस्या उठाये जाने के बाद भी, भीष्म साहनी के अनजाने ही 'तमस' पंजाब की भीषण ट्रेजडी बनकर रह गया।

'निहितार्थ' शब्द में संधि है -

  1. AOption (a)

    यण संधि

  2. BOption (b)

    गुण संधि

  3. COption (c)

    दीर्घ संधि

  4. DOption (d)

    वृद्धि संधि

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दीर्घ संधि

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'निहितार्थ' शब्द में संधि है - 'दीर्घ संधि'

  • निहित + अर्थ = निहितार्थ (अ + अ = आ)
  • अर्थ: छिपा हुआ अर्थ, अभिप्रेत अर्थ।

Key Pointsदीर्घ संधि:- 

  • जब दो शब्दों की संधि करते समय (अ, आ) के साथ (अ, आ) हो तो ‘आ‘ बनता है, जब (इ, ई) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ई‘ बनता है, जब (उ, ऊ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ऊ‘ बनता है।
  • जैसे:-
  • विद्या + अभ्यास = विद्याभ्यास (आ + अ = आ)
  • कवि + ईश्वर = कवीश्वर (इ + ई = ई)
  • वधु + उत्सव = वधूत्सव (उ + उ = ऊ)

Additional Information

गुण संधि:- - जब संधि करते समय (अ, आ) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ए‘ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ओ‘ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (ऋ) हो तो ‘अर्‘ बनता है तो यह गुण संधि कहलाती है। जैसे- - महा + ईश = महेश (आ + ई = ए) - ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश (अ + उ = ओ) - देव + ऋषि = देवर्षि (अ + ऋ = अर्) यण संधि:- - जब संधि करते समय (इ, ई) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘य‘ बन जाता है, जब (उ, ऊ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो   ‘व्‘ बन जाता है , जब (ऋ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘र' बन जाता है। जैसे- - अधि + अयन = अध्ययन (इ + अ = य) - अनु + एषण = अन्वेषण (उ + ए = व) वृद्धि संधि:- - जब संधि करते समय जब (अ , आ)  के साथ  (ए , ऐ)  हो तो ‘ऐ'  बनता है और जब अ , आ  के साथ (ओ , औ) हो तो ‘औ‘ बनता है। उसे वृद्धि संधि कहते हैं। जैसे- - सदा + एव = सदैव (आ + ए = ऐ)​ - परम + औषध = परमौषध (अ + औ = औ)