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Question 181

REET 2022• Hindi - I

वाक्य के अंग हैं

  1. AOption (a)

    उद्देश्य

  2. BOption (b)

    विधेय

  3. COption (c)

    विकल्प (A) एवं (B) दोनों सही हैं।

  4. DOption (d)

    इनमें से कोई नहीं

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Correct answer

Answer: (c)C.

विकल्प (A) एवं (B) दोनों सही हैं।

Why this answer is correct

सही उत्तर 'विकल्प (A) एवं (B) दोनों' है।

  • ‘उद्देश्य’ और ‘विधेय’ 'वाक्य' के अंग हैं।

Key Points

वाक्य - शब्दों का वह व्यवस्थित रूप जिसमें विचारों का आदान - प्रदान होता है। एक सामान्य वाक्य में कर्ता, कर्म, क्रिया होते हैं।
कर्ता और क्रिया के आधार पर वाक्य के भेद – 1. उद्देश्य - जिसके बारे में बात की जाये उसे उद्देश्य कहते हैं। 2. विधेय - जो बात की जाये उसे विधेय कहते हैं। जैसे - रोहन कलकत्ता में रहता है। उद्देश्य - रोहन विधेय - कलकत्ता में रहता है।

Question 182

REET 2022• Hindi - I

जो वाक्य मुख्य उद्देश्य एवं मुख्य विधेय से बना हो, वह कहलाता है

  1. AOption (a)

    संभावनार्थक वाक्य

  2. BOption (b)

    आश्रित उपवाक्य

  3. COption (c)

    संकेतार्थक वाक्य

  4. DOption (d)

    प्रधान उपवाक्य

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Correct answer

Answer: (d)D.

प्रधान उपवाक्य

Why this answer is correct

सही उत्तर 'प्रधान उपवाक्य' है।

  • किसी वाक्य में जो उपवाक्य किसी पर आश्रित नहीं होता अर्थात् स्वतंत्र होता है एवम् उसकी क्रिया मुख्य होती है, वह मुख्य या प्रधान उपवाक्य कहलाता है।
  • जैसे: मोदी जी ने कहा कि अच्छे दिन आएँगे।
  • इस वाक्य में ‘मोदी जी ने कहा’ प्रधान उपवाक्य है तथा "कि अच्छे दिन आएँगे" आश्रित उपवाक्य है क्योंकि यह उपवाक्य "मोदी जी ने कहा" उपवाक्य पर आश्रित है।

Key Pointsअन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • संभावनार्थक वाक्य: जिन वाक्यों में कार्य के होने में सन्देह अथवा सम्भावना का बोध हो, उन्हें संभावनार्थक वाक्य कहते हैं।
  • उदाहरण:- शायद मैं कल बाहर जाऊँ।
  • आश्रित उपवाक्य:आश्रित उपवाक्य दूसरे उपवाक्य पर आश्रित होता है। आश्रित उपवाक्य क्योंकि, कि, यदि, जो, आदि से आरंभ होते हैं।
  • जैसे: मोदी जी ने कहा कि अच्छे दिन आएँगे।
  • इस वाक्य में "कि अच्छे दिन आएँगे।" आश्रित उपवाक्य है क्योंकि यह उपवाक्य "मोदी जी ने कहा" उपवाक्य पर आश्रित है।
  • संकेतार्थक वाक्य: वे वाक्य, जिनसे किसी प्रकार के संकेत या इशारे का बोध होता है, संकेतार्थक वाक्य कहलाते हैं।
  • जैसे: जो परिश्रम करेगा वह सफल होगा।

Additional Information 

वाक्य - शब्दों का वह व्यवस्थित रूप जिसमें विचारों का आदान - प्रदान होता है। एक सामान्य वाक्य में कर्ता, कर्म, क्रिया होते हैं।
कर्ता और क्रिया के आधार पर वाक्य के भेद – 1. उद्देश्य - जिसके बारे में बात की जाये उसे उद्देश्य कहते हैं। 2. विधेय - जो बात की जाये उसे विधेय कहते हैं। जैसे - रोहन कलकत्ता में रहता है। उद्देश्य - रोहन विधेय - कलकत्ता में रहता है।

Question 183

REET 2022• Hindi - I

'टोपी उछालना' मुहावरे का अर्थ है

  1. AOption (a)

    अपमानित करना

  2. BOption (b)

    छिपकर षड्यंत्र रचना

  3. COption (c)

    रक्षा करना

  4. DOption (d)

    ध्यान रखना

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Correct answer

Answer: (a)A.

अपमानित करना

Why this answer is correct

सही उत्तर 'अपमानित करना' है।

  • 'टोपी उछालना' मुहावरे का सही अर्थ: अपमानित करना**।**
  • वाक्य: अनुराग ने शराब की लत में पड़ कर अपने पिता की टोपी सारे मोहल्ले में उछाल दी।

Key Points

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:​

  • नजर रखना–(ध्यान रखना)
  • वाक्य: अच्छा चालक गाड़ी चलाते समय सड़क पर हमेशा नजर रखता है।

Additional Information

मुहावरा परिभाषाउदाहरण
मुहावरा का शाब्दिक अर्थ ‘अभ्यास’ है। मुहावरा शब्द अरबी भाषा का शब्द है। हिन्दी में ऐसे वाक्यांशों को मुहावरा कहा जाता है, जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर  विशेष अर्थ को व्यक्त करते हैं।अंक भरना- स्नेह से लिपटा लेना वाक्य-माँ ने स्नेह से अपने पुत्र को अंक में भर लिया।

Question 184

REET 2022• Hindi - I

'मौज-मस्ती में जीवन बिताना' के अर्थ में उपयुक्त लोकोक्ति है

  1. AOption (a)

    अपना रख पराया चख

  2. BOption (b)

    अपनी करनी पार उतरनी

  3. COption (c)

    आठ कनौजिये नौ चूल्हे

  4. DOption (d)

    आठ वार नौ त्योहार

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Correct answer

Answer: (d)D.

आठ वार नौ त्योहार

Why this answer is correct

सही उत्तर 'आठ वार नौ त्योहार' हैं।

  • “आठ वार नौ त्योहार”, लोकोक्ति का अर्थ 'मौज-मस्ती में जीवन बिताना' हैं।
  • वाक्य प्रयोग- बाप की सम्पत्ति पर अभी कुछ दिन और तुम आठ बार नौ त्यौहार मना लो इसके बाद अपनी औकात पर आ जाओगे।

Key Points

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

लोकोक्तिअर्थवाक्य
अपना रख पराया चखनिजी वस्तु की रक्षा एवं अन्य वस्तु का उपभोगअपना रख पराया चख अब तो संजय की प्रकृति हो गई है।
अपनी करनी पार उतरनीअपने कर्म का फल स्‍वयं भोगना पड़ता हैबुढ़ापे में रमेश की स्थिति बहुत खराब हो गई है आखिर उसने भी तो अपनी बूढ़ी मां को घर से बाहर निकाल दिया था, मोहल्ले वालों ने उसे ताना दिया अपनी करनी पार उतरनी।
आठ कनौजिये नौ चूल्हेअलगाव की स्थितिकश्मीर की वर्तमान स्थिति को देखकर वहां तो यही कहावत सही बैठता है जैसे आठ कनौजिये नौ चूल्हे।

Additional Information

लोकोक्ति परिभाषाउदाहरण
लोकोक्ति का शाब्दिक अर्थ ‘लोक में प्रचलित उक्ति’ है। जब कोई पूर्य कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धृत किया जाता है तो उसे लोकोक्ति कहते हैं।अपनी करनी पर उतरनी अर्थात किए का फल भोगना। वाक्य- एक छोटी सी चोरी के कारण वह आज तक जेल में पश्चचाताप कर रहा है, अपनी करनी पार उतरनी।

Question 185

REET 2022• Hindi - I

विद्यार्थियों को पुस्तकों के माध्यम से भाषा की मूल ध्वनियों एवं लिपि का ज्ञान कराकर उन्हें पढ़ने लिखने के कौशल में दक्ष किया जाता है । इस विधि को कहा जाता है

  1. AOption (a)

    भाषा प्रयोगशाला विधि

  2. BOption (b)

    भाषा संसर्ग विधि

  3. COption (c)

    पाठ्य-पुस्तक विधि

  4. DOption (d)

    खेल विधि

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Correct answer

Answer: (c)C.

पाठ्य-पुस्तक विधि

Why this answer is correct

पाठ्य-पुस्तक विधि-

  • इस विधि में व्याकरण की पुस्तक के आधार पर व्याकरण का अध्ययन करवाया जाता है।
  • व्याकरण के लिए एक निर्धारित पाठ्य-पुस्तक होती है। शिक्षक पहले पुस्तक से नियमों की व्याख्या करता है इसके बाद विद्यार्थियों को पुस्तकों के माध्यम से भाषा की मूल ध्वनियों एवं लिपि का ज्ञान कराया जाता है।
  • इसके बाद उन्हें पढ़ने लिखने के कौशल में दक्ष किया जाता है।
  • तदोपरांत विद्यार्थी उन नियमों एवं उदाहरणों को कंठस्थ कर लेते हैं।
  • यह विधि वर्तमान में प्रयोग में नहीं लायी जाती है।
  • इस विधि में शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों सक्रिय रहते हैं।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि विद्यार्थियों को पुस्तकों के माध्यम से भाषा की मूल ध्वनियों एवं लिपि का ज्ञान कराकर उन्हें पढ़ने लिखने के कौशल में दक्ष किया जाता है । इस विधि को पाठ्य-पुस्तक विधि कहा जाता है। 

Additional Information

  • भाषा प्रयोगशाला विधि- यह शिक्षण की पारंपरिक तरीके से अलग भाषा कौशल प्रदान करने की तकनीकी विधि है। इसमें बालक अपनी सूविधा अनुसार भाषा प्रयोगशाला में जाकर टेप सुन सकता है तथा अपनी गति से सही उच्चारण सीख सकता है।
  • भाषा संसर्ग विधि- भाषा संसर्ग विधि शुद्ध व्याकरण के नियमों का ज्ञान तथा शुद्ध भाषा के प्रयोग पर बल देती है।
  • खेल विधि- खेल विधि ज्यादातर "गतिविधि-आधारित" या "हस्त अनुभव" द्वारा सीखना है। बच्चे अलग-अलग लोगों के बीच सीखने के लिए अपने घर और परिचित परिवेश से बाहर निकलते हैं, जिनमें उनके साथी और शिक्षक भी शामिल हैं।

Question 186

REET 2022• Hindi - I

डाल्टन प्रणाली का आविष्कार किसने किया?

  1. AOption (a)

    किलपैट्रिक ने

  2. BOption (b)

    डाल्टन ने

  3. COption (c)

    माण्टेसरी ने

  4. DOption (d)

    पार्कहर्स्ट ने

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Correct answer

Answer: (d)D.

पार्कहर्स्ट ने

Why this answer is correct

डाल्टन प्रयोगशाला योजना या 'डाल्टन योजना' शिक्षण का एक कांसेप्ट है जिसे अमेरिका की शिक्षाशास्त्रिणी कुमारी हेलेन पार्कहर्स्ट ने आरम्भ किया।

 

  • सन्‌ 1912 में अमरीका की शिक्षाशास्त्रिणी कुमारी हेलन पार्खस्ट ने आठ से 12 वर्ष के बीच की अवस्थावाले बालकों के लिए एक नई शिक्षायोजना बनाई।
  • वास्तविक प्रयोग सन्‌ 1913 और 1915 के बीच किया गया।
  • विश्वयुद्ध समाप्त होने के पश्चात्‌ सन्‌ 1920 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अमरीका के मैसाच्यूसेट राज्य के डाल्टन स्थित विद्यालयों में अपनी योजना प्रारंभ की।
  • इसके पश्चात्‌ उन्होंने एक बाल विश्वविद्यालय पाठशाला (चिल्ड्रेंस यूनिवर्सिटी स्कूल) स्थापित करके उसमें अपनी डाल्टन प्रयोगशाला योजना (डाल्टन लैबोरेटरी प्लान) का व्यवहार किया।

Question 187

REET 2022• Hindi - I

ब्लूम उपागम के अनुसार शिक्षा की त्रिपदी प्रक्रिया में सम्मिलित पद है

  1. AOption (a)

    सामान्यीकरण

  2. BOption (b)

    व्यावहारिक प्रयोग

  3. COption (c)

    प्रस्तुतीकरण

  4. DOption (d)

    व्यवहार परिवर्तन

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Correct answer

Answer: (d)D.

व्यवहार परिवर्तन

Why this answer is correct

बी.एस.ब्लूम ने शिक्षा को त्रिपदी प्रक्रिया मानते हुए इस उपागम के तीन पद बताये है। ये तीनो पद निम्नलिखित है-

  1. शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण
  2. उद्देश्यों के लिए उपयुक्त अधिगम-अनुभव प्रदान करना
  3. व्यवहार परिवर्तन या अधिगम का मूल्यांकन

Important Points 

  • व्यवहार परिवर्तन या अधिगम का मूल्यांकन-
  • ​​अधिगम अनुभवों को प्रदान करके विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन किये जा सकते है।
  • व्यवहार में परिवर्तन का मूल्यांकन शैक्षिक उद्देश्यों के निर्धारण को ध्यान में रखकर किया जाता है।
  • विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन को मापने के लिए मापन और मूल्यांकन की व्यवस्था होती है।
  • इसमें विद्यार्थियों के मापन और मूल्यांकन के लिये निबंधात्मक परीक्षाएं, मौखिक निरिक्षण और साक्षात्कार का प्रयोग किया जाता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि ब्लूम उपागम के अनुसार शिक्षा की त्रिपदी प्रक्रिया में सम्मिलित पद व्यवहार परिवर्तन है। 

Additional Information 

  • शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण- बेंजामिन ब्लूम का वर्गीकरण तीन पदानुक्रमित मॉडल का एक समूह है जो शैक्षिक अधिगम उद्देश्यों के वर्गीकरण को संदर्भित करता है।वर्गीकरण में, ब्लूम ने अधिगम के तीन ज्ञान क्षेत्रों की पहचान की जिसमें संज्ञानात्मक, भावात्मक ​और मनो-गामक विकास  शामिल हैं।
  • इन तीन डोमेन को एक तरह से विभाजित किया गया है जो सरलतम प्रक्रिया से जटिल तक बढ़ता है।
  • संज्ञानात्मक ज्ञान क्षेत्र- इस ज्ञान-क्षेत्र  में, एक बच्चा ज्ञान से संबंधित है और इसलिए, रचना , मूल्यांकन, विश्लेषण करना आदि सीखता है।
  • मनो-गामक विकास- यह उन कौशलों को प्राप्त करने से संबंधित है जिन मे मानसिक और शारीरिक गतिविधियों के एकीकरण की आवश्यकता होती है।
  • भावात्मक ज्ञान क्षेत्र- यह  ज्ञान-क्षेत्र उस समय अस्तित्व में आता है जब हम भावनात्मक क्षेत्रों जैसे भावनाओं, दृष्टिकोणों आदि में विकसित होते हैं। यह शामिल करता है कि हम भावनाओं, मूल्यों, प्रशंसा, उत्साह, प्रेरणा और दृष्टिकोण जैसे भावनात्मक चीजों से कैसे व्यवहार करते हैं।
  • उद्देश्यों के लिए उपयुक्त अधिगम-अनुभव प्रदान करना- यह वह अधिगम अनुभव है, जिसके द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

Question 188

REET 2022• Hindi - I

सुन्दर अनुलेख की आवश्यक शर्त क्या है?

  1. AOption (a)

    अनुलेख लिखते वक्त शिक्षक विद्यार्थी की सहायता न करें।

  2. BOption (b)

    अनुलेख सस्वर बोलकर लिखवाया जाए।

  3. COption (c)

    अनुलेख में अक्षरों की बनावट वैसी ही होनी चाहिए जैसी कि आदर्श लेख में हो।

  4. DOption (d)

    उपर्युक्त सभी विकल्प सही हैं।

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Correct answer

Answer: (c)C.

अनुलेख में अक्षरों की बनावट वैसी ही होनी चाहिए जैसी कि आदर्श लेख में हो।

Why this answer is correct

सुन्दर अनुलेख- 

  • किसी आदर्श लिखावट का जैसा का तैसा अनुकरण अनुलेख कहलाता है। अनुलेख को सुन्दर लेख में लिखने को सुन्दर अनुलेख कहते है।
  • इसमें छात्र शिक्षक के आदर्श लेख का बिलकुल हूबहू अनुकरण करते है।
  • शिक्षक तख्ती या कॉपी पर वर्ण या शब्द लिख देते है और छात्र अक्षर की बनावट वैसी ही करते है जैसा कि शिक्षक आदर्श लेख में लिखते है।
  • अनुलेख लिखते समय शिक्षक विद्यार्थी की सहायता करते है।
  • अनुलेख को सस्वर बोलकर नहीं लिखवाया जा सकता है।

​​अतः निष्कर्ष निकलता है कि अनुलेख में अक्षरों की बनावट वैसी ही होनी चाहिए जैसी कि आदर्श लेख में हो। यह सुन्दर अनुलेख की आवश्यक शर्त है।

Question 189

REET 2022• Hindi - I

भाषा-शिक्षण का दृश्य-श्रव्य साधन है -

  1. AOption (a)

    चित्र विस्तारक यंत्र

  2. BOption (b)

    ग्रामोफोन

  3. COption (c)

    चार्ट

  4. DOption (d)

    नाटकीकरण

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Correct answer

Answer: (d)D.

नाटकीकरण

Why this answer is correct

सहायक सामग्री शिक्षण को सहज एवं सुगम बनाने के लिए किया जाता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किसी चीज को सीखने में हमारी ज्ञानेन्द्रियों (आँख, नाक, कान, त्वचा, जीभ) का जितना अधिक उपयोग होता है, वो ज्ञान उतना ही अधिक स्थायी होता है। सहायक सामग्री हमारी ज्ञानेन्ग्रियों के माध्यम से शिक्षण को स्थायी बनाने का कार्य करती हैं।

Key Points 

श्रव्य-दृश्य सहायक सामग्री- श्रव्य-दृश्य सहायक सामग्री वो सहायक सामग्री है जिसमें हम अपने कान व आँखों का प्रयोग शिक्षण के दौरान करते हैं। जैसे- नाटक, चलचित्र, टेलीविजन।

  • नाटक- किसी भी विषय को रंगमंच पर नाटक के माध्यम से सजीव बनाया जा सकता है। नाटक को देखने में हम अपनी आँखो का व नाटक के संवाद को सुनने में कानों का प्रयोग करते हैं।
  • चलचित्र- चलचित्र में छात्र व्यक्तियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करते हुए देखतें व सुनतें है। यह मूवी देखने जैसा ही होता है। शिक्षाप्रद चलचित्रों को छात्रों को देखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • टेलीविजन- टेलीविजन जनसंपर्क का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है, जिसके द्वारा समाचार-पत्रों, रेडियो, सिनेमा आदि की एकसाथ पूर्ति हो सकती है। इससे प्राप्त जानकारी को हम सुनने के साथ देखते भी हैं।

अतः हम कह सकते हैं कि नाटकीकरण भाषा-शिक्षण का दृश्य-श्रव्य साधन है।

Question 190

REET 2022• Hindi - I

इनमें से पाठ्यपुस्तक के आन्तरिक रूप में सम्मिलित तत्त्व नहीं है -

  1. AOption (a)

    भाषा

  2. BOption (b)

    विषय सामग्री

  3. COption (c)

    जिल्द

  4. DOption (d)

    शैली

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Correct answer

Answer: (c)C.

जिल्द

Why this answer is correct

पाठ्यपुस्तक के दो पक्ष होते हैं- अंतः पक्ष तथा बाह्य पक्ष 

  • अंतः पक्ष- पाठ्य-पुस्तक का अध्ययन पक्ष अथवा अंतः पक्ष पाठय-पुस्तक में दी जाने वाली विषय-सामग्री की ओर संकेत करता है। इसके अंतर्गत विषय-सामग्री सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
  • बाह्य पक्ष- पाठ्य पुस्तक के बाहय अथवा रूपात्मक पक्ष में पाठ्य पुस्तक का स्वरूप, अच्छी जिल्द, आवरण पृष्ठ, मुद्रण, शीर्षक अध्ययन-पक्ष का मूल संदर्भ पाठ्यसामग्री से है।

अतः हम कह सकते हैं कि जिल्द पाठ्यपुस्तक के आन्तरिक रूप में सम्मिलित तत्त्व नहीं है।

Additional Information 

आंतरिक गुण या आंतरिक विशेषताएँ :- पाठ्यपुस्तक के आंतरिक गुण ही उत्तम पुस्तक के मानदण्ड होते हैं, जो निम्न है-

विषयवस्तु- ज्ञान का विकास, बोधगम्यता, मौलिकता, साहित्यिक रसानुभूति, साहित्यिक रुचि का विकास एवं वांछित अभिवृत्तियों का पोषण करने वाली विषय सामग्री का चयन पाठ्यपुस्तक का आंतरिक गुण है।

भाषा- पाठ्यपुस्तक की भाषा छात्रों के स्तर के अनुकूलन होनी चाहिए। किसी भी स्थिति में पाठ्यपुस्तक की भाषा इतनी विलष्ट होनी चाहिए की छात्र उसे समझ ही ना सके।

  • भाषा व्याकरण की दृष्टि से शुध्द होनी चाहिए।
  • भाषा सरल व सुबोध होनी चाहिए।
  • पाठ्यपुस्तक की भाषा ऐसी होकी सरल से कठिन व ज्ञान से अज्ञान के क्रम में छात्रों का शब्द एक सूक्ति-भंडार विकसित हो।

शैली- पाठ्यपुस्तक की लेखन शैली भी पाठ्यपुस्तक को आकर्षक बनाने में सहायक होती है शैली की प्राप्ति से निम्न बातो को ध्यान देने योग्य है।

  • पाठ्यपुस्तक की शैली छात्रो के स्तरानुकुल होनी चाहिए।
  • पाठ्यपुस्तक की शैली में विविधता होनी चाहिए। इसमें पाठ्यपुस्तक में एकरसता हो जाती है।
  • शैली में माधुर्य, ओज एवं प्रसाद गुण आवश्यक है।
  • शैलियों में संतुलन भी होना चाहिए

व्याख्या एवं सामग्री- पाठ्यपुस्तक की सामग्री के प्रत्येक पाठ में कुछ नवीन शब्द अवन वाक्वंश प्रयुक्त होती है जिसकी व्याख्या करना आवश्क होता है।

  • प्रत्येक पाठ के अंत में या पुस्तक के अंत में पाठों के क्रमकसार उन पाठो में आए कठिन शब्दों ,सूक्तियो तथा मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करना चाहिए।
  • शब्दों को व्याख्या के साथ-साथ पाठ में आए नवीन नामों, वस्तुओ , स्थानों एंव तथ्यों आदि को टिप्पणी देकर स्पष्ट करनी चाहिए।
  • पाठ में आए पारिभाषिक  शब्दों को स्पष्ट करना चाहिए।
  • चित्र- बच्चों चित्र देखने में बहुत रूचि लेते है अंत प्रत्येक पाठ में पाठ्यवस्तु से सम्बन्धित श्वेत-श्याम या रंगीन चित्र का भी समावेश करना चाहिए।
  • अभ्यासार्थ प्रश्न- प्रत्येक पाठ के अंत में अभ्यास करने के लिए विभिन्न प्रकार के वस्तुपरक , लघु-उत्तर एवं निश्न्धात्मक प्रश्न दिए जाने चाहिए | इससे छात्र पाठ को पढ़ने के उपरांत अपना मुल्यांकन कर सकेंगे पाठ को दोहराने में भी सहायता मिलेगी