निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :
क्रोध शांति भंग करने वाला मनोविकार है। एक का क्रोध दूसरे में भी क्रोध का संचार करता है। जिसके प्रति क्रोध प्रदर्शन होता है वह तत्काल अपमान का अनुभव करता है और इस दुःख पर उसकी भी त्योरी चढ़ जाती है। यह विचार करने वाले बहुत थोड़े निकलते हैं कि हम पर जो क्रोध प्रकट किया जा रहा है वह उचित या अनुचित । इसी से धर्म, नीति और शिष्टाचार तीनों में क्रोध के निरोध का उपदेश पाया जाता है। संत लोग तो खलों के वचन सहते ही हैं, दुनियादार लोग भी न जाने कितनी ऊँची-नीची पचाते रहते हैं। सभ्यता के व्यवहार में भी क्रोध नहीं, क्रोध के चिह्न दबाये जाते हैं । इस प्रकार का प्रतिबंध समाज की सुख-शांति के लिए बहुत आवश्यक है । पर इस प्रतिबंध की भी सीमा है। यह परपीड़कोन्मुख क्रोध तक नहीं पहुँचता। क्रोध के निरोध का उपदेश अर्थपरायण और धर्मपरायण दोनों देते हैं । पर दोनों में जिसे अति से अधिक सावधान रहना चाहिए वही कुछ भी नहीं रहता। बाकी रुपया वसूल करने का ढंग बताने वाला चाहे कड़े पड़ने की शिक्षा दे भी दे, पर धज के साथ धर्म की ध्वजा लेकर चलने वाला धोखे में भी क्रोध को पाप का रूप ही कहेगा । क्रोध रोकने का अभ्यास ठगों और स्वार्थियों को सिद्धों और साधकों से कम नहीं होता।
'खल' शब्द का अर्थ है:
- AOption (a)
साधु
- BOption (b)
दुष्ट
- COption (c)
चालाक
- DOption (d)
सज्जन
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Correct answer
दुष्ट
Why this answer is correct
'खल' शब्द का अर्थ है- 'दुष्ट'
- 'खल' शब्द का अन्य अर्थ है- शठ, धूर्त, दुर्जन, कुटिल, नालायक, अधम।
- विलोम शब्द - 'सज्जन'
Key Pointsसाधु:-
- अर्थ: योगी, सज्जन, भद्र, संत, सभ्य, शिष्ट, कुलीन, महात्मा, संन्यासी, तपस्वी।
- विलोम शब्द - 'असाधु'
चालाक:-
- अर्थ: चतुर, छलिया, पटु, होशियार, चालबाज, फुरतीला, दक्ष, प्रवीण, निपुण।
- विलोम शब्द -'बुद्धू'