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Question 91

REET 2022• Hindi - II

"अत्यंत ईर्ष्या करना।" के अर्थ में उपयुक्त मुहावरा है :

  1. AOption (a)

    जले पर नमक छिड़कना।

  2. BOption (b)

    चूना लगाना।

  3. COption (c)

    जहर उगलना।

  4. DOption (d)

    छाती पर साँप लोटना।

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Correct answer

Answer: (d)D.

छाती पर साँप लोटना।

Why this answer is correct

सही उत्तर 'छाती पर साँप लोटना' हैं।

  • "छाती पर साँप लोटना" के अर्थ में उपयुक्त मुहावरा "अत्यंत ईर्ष्या करना" हैं।
  • वाक्य प्रयोग-  साथी की सफलता से राकेश की छाती पर सांप लोटने लगा है।

Key Points

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

मुहावराअर्थवाक्य
जले पर नमक छिड़कनाऐसा काम करना जिससे दु:खी और दु:खी होअरे तुमने काम ही ऐसा किया है, जो कि जले पर नमक छिड़कने वाला है।
चूना लगानाठगनाकल एक अनजान आदमी गोपाल को 100 रुपए का चूना लगा गया।
कड़ी और कड़वी बातें कहनाजहर उगलनारमेश की चाची कभी मीठे बोल नहीं बोलती। जब देखो ज़हर उगलती रहती है।

Additional Information

मुहावरा परिभाषाउदाहरण
मुहावरा का शाब्दिक अर्थ ‘अभ्यास’ है। मुहावरा शब्द अरबी भाषा का शब्द है। हिन्दी में ऐसे वाक्यांशों को मुहावरा कहा जाता है, जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर  विशेष अर्थ को व्यक्त करते हैं।अंक भरना- स्नेह से लिपटा लेना वाक्य-माँ ने स्नेह से अपने पुत्र को अंक में भर लिया।

Question 92

REET 2022• Hindi - II

हरबर्ट द्वारा स्थापित सहसंबंध विधि के चिंतन को आगे किस विद्वान ने बढ़ाया ?

  1. AOption (a)

    कुक

  2. BOption (b)

    थॉर्नडाइक

  3. COption (c)

    जिलर

  4. DOption (d)

    पावलाव

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Correct answer

Answer: (c)C.

जिलर

Why this answer is correct

हरबर्ट की पञ्चपदी का उपयोग पाठ योजना के निर्माण हेतु किया जाता है। इसके जन्मदाता प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री हरबर्ट है।

  • प्रोफेसर हरबर्ट की अधिगम के संबंध में यह धारणा है कि प्रत्येक छात्र बाहर से मिलने वाले ज्ञान को संचित करता रहता है। यदि नवीन ज्ञान को छोटे-छोटे सोपानों में बांटकर उसे पूर्व संचित ज्ञान से संबंधित करके पढ़ाया जाए तो छात्र उसे अधिक शीघ्रता व सुगमता से ग्रहण करता है।

Key Points

  • हरबर्ट ने उपयुक्त चार सोपानो�� की विवेचना की, जिसे उसके अनुयायियों ने अधिक स्पष्ट व महत्वपूर्ण बनाने का प्रयास किया है।
  • उसके शिष्य जिलर ने सर्वप्रथम स्पष्टता को दो भागों में विभक्त किया। पाठ की प्रस्तावना और प्रस्तुतीकरण।
  • हरबर्ट के एक अन्य शिष्य राइन ने इनमें एक उप कथन और जोड़ा वह था उद्देश्य।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि हरबर्ट द्वारा स्थापित सहसंबंध विधि के चिंतन को आगे जिलर ने बढ़ाया।

Additional Information

इस परिवर्तन के बाद प्रथम पाँच पद इस प्रकार हो गए-

विधि प्रयोग- 

  1. अ )प्रस्तावना - यह छात्रों के पूर्व ज्ञान से सम्बन्धित होती है इसमें पढाए जाने वाले पाठ को सम्बद्ध करने के लिए कुछ सरल प्रश्न पूछे जाते है।.

          ब )उद्देश्य कथन - इस में विषय का उद्दिष्ट क्या है ये स्पष्ट किया जाता है। 

       2.प्रस्तुतीकरण - इस में उद्देश्य कथन के साथ विषय का प्रस्तुतिकरण किया जाता है।

       3.तुलना - जिन जिन स्थलों पर कठिनाई होती है उन शब्दों एवं भावों को स्पष्ट करने के लिए दृश्य श्रव्य सामग्री का प्रयोग किया जाता हैं तथा तुलना करवाते हुए 

           विषय स्पष्ट किया जाता है।

      4.सामान्यीकरण - सार शिक्षक द्वारा बताना तथा छात्रों से प्रश्नों द्वारा मुख्य भाव ज्ञात करना. समान भाव की कविता के आधार पर प्रश्न पूछना आदि।

      5.प्रयोग  - छात्रों से अभ्यास कार्य करवाया जाता हैं. यह अभ्यास कार्य कक्षा कार्य तथा गृहकार्य के माध्यम से सम्पन्न होता हैं. इसका मुख्य उद्धेश्य छात्रों के प्राप्त ज्ञान को परिपुष्ट करना है।

Question 93

REET 2022• Hindi - II

मॉण्टेसरी शिक्षण विधि के संबंध में सत्य कथन है :

  1. AOption (a)

    मॉण्टेसरी फ्रांस की शिक्षाशास्त्री थी।

  2. BOption (b)

    मॉण्टेसरी प्रणाली को पाँच भागों में विभाजित किया गया है।

  3. COption (c)

    मॉण्टेसरी फ्रोबेल की विचारधारा से अप्रभावित थी।

  4. DOption (d)

    मॉण्टेसरी विधि में पढ़ने से पहले लिखना सिखाया जाता है ।

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Correct answer

Answer: (d)D.

मॉण्टेसरी विधि में पढ़ने से पहले लिखना सिखाया जाता है ।

Why this answer is correct

मारिया मॉण्टेसरी ने शिक्षा की मॉण्टेसरी शिक्षण विधि को प्रतिपादित किया था जो:

  • सीखने की प्रक्रिया को को मज़ेदार और बोझ-मुक्त बनाती है।
  • बच्चों को विभिन्न स्व-निर्देशित गतिविधियों में शामिल करती है।
  • बच्चे को जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने में मदद करती  है।
  • उनके अनुसार शिक्षार्थियो को लिखना पढ़ने से पूर्व सिखाना चाहिए।

Question 94

REET 2022• Hindi - II

अभिक्रमित अनुदेशन विधि का सिद्धांत है :

  1. AOption (a)

    ज्ञान की पूर्ण इकाई का सिद्धांत।

  2. BOption (b)

    सामाजिक सहयोग का सिद्धांत ।

  3. COption (c)

    क्रमित लघु पदों का सिद्धांत।

  4. DOption (d)

    व्यष्टित्व का सिद्धांत।

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Correct answer

Answer: (c)C.

क्रमित लघु पदों का सिद्धांत।

Why this answer is correct

स्वगति, स्वमूल्यांकन, प्रतिपुष्टि आदि से सम्बन्धित विधि अभिक्रमित अनुदेशन विधि है।

  • एन.एस.मावी- "अभिक्रमित अनुदेशन, अनुदेशनात्मक क्रिया को अनुदेशन एवं स्व-अधिगम में परिवर्तित करने की तकनीक है। इसमें विषय वस्तु को छोटी-छोटी श्रृंखलाओं मे विभाजित किया जाता है। अधिगमकर्ता इन्हें पढ़कर सही या गलत अनुक्रिया करता है। गलत अनुक्रियाओं को ठीक करता है, सही अनुक्रियाओं की पृष्टि करता है। वह सूक्ष्म रे��ीय में पारंगत होने का प्रयास करता है।"
  • स्मिथ एवं मूरे- "अभिक्रमित अनुदेशन किसी अधिगम सामग्री को क्रमिक पदों की श्रृंखला में व्यवस्थित करने वाली प्रक्रिया है और प्रायः इसके द्वारा किसी विद्यार्थी को उसकी परिचित पृष्ठभूमि से संप्रत्ययों, प्रनियमों और बोध के एक जटिल और नवीन स्तर पर लाया जाता है ।"

Important Points 

अभिक्रमित अनुदेशन के सिद्धान्त या नियम-

  • क्रमिक लघु पदों का सिद्धान्त
  • सक्रिय प्रतिभागिता के सिद्धान्त
  • प्रतिपुष्टि का सिद्धांत
  • स्व-गति का सिद्धान्त
  • स्व-परिक्षण का सिद्धांत

अतः निष्कर्ष लिकलता है कि क्रमित लघु पदों का सिद्धांत, अभिक्रमित अनुदेशन विधि का सिद्धांत है।

Question 95

REET 2022• Hindi - II

सूक्ष्म-शिक्षण उपागम का उद्देश्य एवं लक्ष्य होता है :

  1. AOption (a)

    विद्यार्थी के व्यवहार में परिवर्तन करना।

  2. BOption (b)

    शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों के व्यवहार में परिवर्तन करना।

  3. COption (c)

    संस्था प्रधान के व्यवहार में परिवर्तन करना।

  4. DOption (d)

    विकल्प (A) और (B) दोनों

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Correct answer

Answer: (b)B.

शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों के व्यवहार में परिवर्तन करना।

Why this answer is correct

शिक्षकों में शिक्षण कौशल के विकास के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है, इस प्रशिक्षण को सूक्ष्म शिक्षण कहते है। सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण कौशल विकसित करने के लिए अनुकरण तकनीक की तरह है।

Important Points 

सूक्ष्म शिक्षण एक शिक्षक प्रशिक्षण के लिए अनिवार्य​ तकनीक है जो शिक्षक प्रशिक्षु को शिक्षण कौशल में निपुणता प्राप्त करने में मदद करती है। इसके लिए शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों को निम्नलिखित आवश्यकता है:

  • विषयवस्तु की सूक्ष्म अवधारणा का शिक्षण करने की
  • एक निर्दिष्ट शिक्षण कौशल का उपयोग करने की
  • कम समय की
  • विद्यार्थियों के बहुत छोटे समूह की

सूक्ष्म-शिक्षण उपागम का उद्देश्य एवं लक्ष्य -

  • शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों के आत्मविश्वास में वृद्धि करना।
  • शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों को एक - एक करके विभिन्न कौशल शिक्षण में निपुणता प्राप्त करना।
  • शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों द्वारा जो त्रुटियाँ शिक्षण में की गई हैं उनको दूर करने का पूर्ण अवसर देना।
  • शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों को तुरंत ही पृष्ठपोषण देना।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि शिक्षक-प्रशिक्षणार्थियों के व्यवहार में परिवर्तन करना। सूक्ष्म-शिक्षण उपागम का उद्देश्य एवं लक्ष्य होता है।

Question 96

REET 2022• Hindi - II

इनमें से भाषा शिक्षण के मूल उद्देश्यों में भाषायी दक्षताएँ प्राप्त करने का आधार होती हैं :

  1. AOption (a)

    समूहवार भाषायी दक्षताएँ ।

  2. BOption (b)

    लैंगिक समूहवार भाषायी दक्षताएँ ।

  3. COption (c)

    कक्षावार भाषायी दक्षताएँ ।

  4. DOption (d)

    पारिवारिक पृष्ठभूमि की भाषायी द��्षताएँ ।

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Correct answer

Answer: (d)D.

पारिवारिक पृष्ठभूमि की भाषायी द��्षताएँ ।

Why this answer is correct

भाषा शिक्षण- भाषा शिक्षण एक प्रक्रिया है या हम कह सकते है कि एक माध्यम है जिसकी सहायता से इस बात पर बल दिया जाता है कि बालक को किस प्रकार से पढ़ना लिखना सिखाया जाये जिससे बालक भाषा का समझ के साथ प्रयोग करना सीख सके। 

भाषा शिक्षण के मूल उद्देश्य-

  • बच्चो को अपने शब्दों में (मौखिक व लिखित) अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराना इससे बच्चो में भाषायी दक्षता का विस्तार होता है।
  • सुनना, बोलना, पढ़ना, तथा लिखना, ये सभी कौशल एक दूसरे से अन्तः संबंधित होते हैं तथा मानव में भाषाई विकास को विस्तार देते हैं।
  • भाषायी दक्षता को प्राप्त करने का आधार पारिवारिक पृष्ठभूमि है क्योकि बच्चे सबसे पहले अपने परिवार की भाषा अर्जित करते है और वही भाषा सीखते है।
  • बच्चो को प्रश्न पूछने और अपनी बात कहने के भरपूर अवसर उपलब्ध करने से भी बच्चो की भाषायी दक्षता का विकास किया जा सकता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि की भाषायी दक्षता भाषा शिक्षण के मूल उद्देश्यों में भाषायी दक्षताएँ प्राप्त करने का आधार होती हैं।

Question 97

REET 2022• Hindi - II

इनमें से द्रुत वाचन किसका प्रकार है?

  1. AOption (a)

    सस्वर वाचन का।

  2. BOption (b)

    अनुकरण वाचन का।

  3. COption (c)

    सामूहिक वाचन का।

  4. DOption (d)

    मौन वाचन का।

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Correct answer

Answer: (d)D.

मौन वाचन का।

Why this answer is correct

वाचन दो प्रकार के होते हैं: सस्वर वाचन, मौन वाचन।

  • सस्वर वाचन- सस्वर वाचन, पठन का एक प्रकार है जो बच्चों द्वारा पाठ को स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने से सम्बन्धित है। यह बच्चों में वाचन कौशल का विकास करता है जिससे बच्चे उचित हावभाव के साथ पाठ का वाचन करना सीखते हैं। पद्य का उद्देश्य रसानुभूति कराना होता है, जो मौन-वाचन के द्वारा नहीं कराया जा सकता है।
  • मौन वाचन- जब लिखित सामग्री को बिना आवाज निकाले मन ही मन पढ़ते है तो इस प्रकार के पठन को मौन पठन कहते हैं। मौन वाचन दो प्रकार का होता है गहन वाचन तथा द्रुत वाचन।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि द्रुत वाचन मौन वाचन का प्रकार है।

Additional Information 

सस्वर वाचन निम्न प्रकार का होता है-

  • आदर्श वाचन- सस्वर वाचन के इस प्रकार में अध्यापक छात्रों के समक्ष आदर्श वाचन प्रस्तुत करते हैं।आदर्श वाचन के तहत जब शिक्षक कक्षा में किसी पाठ को पढ़ कर बच्चों को सुनाता है तो वह पाठ को पढ़ते वक्त शुद्ध उच्चारण, विराम चिन्हों, उचित हावभाव एवम् उतार चढ़ाव के साथ पाठ का सस्वर वाचन करता है। इसके द्वारा शिक्षक बच्चों को भाषा के उच्चारण से संबंधित आरोह-अवरोह से परिचित कराता है तथा उनमें श्रवण कौशल का भी विकास कराता है।
  • अनुकरण वाचन- आदर्श वाचन (शिक्षक द्वारा किया जाने वाला वाचन) के पश्चात् छात्रों द्वारा कक्षा में किया जाने वाला सस्वर वाचन अनुकरण वाचन कहलाता है। अनुकरण वाचन एक प्रकार का सस्वर वाचन है।
  • वौयक्तिक वाचन- एक बालक अथवा व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला सस्वर वाचन वौयक्तिक वाचन कहलाता है। यह एक प्रकार का निदानात्मक परीक्षण भी है। वौयक्तिक वाचन के द्वारा शिक्षक बच्चों की उच्चारण संबंधी त्रुटियों का पता लगाकर उनका उपचार करता है।
  • सामूहिक वाचन- दो से अधिक बालको द्वारा किया जाने वाला सस्वर वाचन सामूहिक वाचन कहलाता है। यह वाचन वालको की झिझक दूर करने तथा उन्में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए किया जाता है।

Question 98

REET 2022• Hindi - II

इनमें से अशुद्ध वर्तनी का कारण है -

  1. AOption (a)

    लिपि का पूर्ण ज्ञान।

  2. BOption (b)

    लेखन में सावधानी।

  3. COption (c)

    शुद्ध उच्चारण।

  4. DOption (d)

    व्याकरण का अधूरा ज्ञान।

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Correct answer

Answer: (d)D.

व्याकरण का अधूरा ज्ञान।

Why this answer is correct

वर्तनी गत अशुद्धियां

हिंदी भाषा में वर्तनी संबंधी त्रुटियों के अनेक कारण हैं। कुछ कारण निम्नलिखित

  • लिपि का सही ज्ञान न होना,
  • उच्चारण की अशुद्धता एवं एकरूपता का अभाव,
  • व्याकरण का अधूरा ज्ञान,
  • व्याकरणिक रूपों में अनभिज्ञता,
  • कुछ शब्दों में वर्तनी गत सर्वमान्य एकरूपता का अभाव

अतः निष्कर्ष निकलता है कि व्याकरण का अधूरा ज्ञान अशुद्ध वर्तनी का कारण है।

Additional Information

वर्तनी- शब्द के वर्ण, उनका क्रम तथा उच्चारण विधि।

Question 99

REET 2022• Hindi - II

भाषा-शिक्षण में पाठ्य-पुस्तक है :

  1. AOption (a)

    साध्य

  2. BOption (b)

    साधन

  3. COption (c)

    विकल्प (A) और (B) दोनों

  4. DOption (d)

    इनमें से कोई नहीं

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Correct answer

Answer: (b)B.

साधन

Why this answer is correct

पाठ्य पुस्तकें भाषा शिक्षण में महत्वपूर्ण साधन है साध्य नहीं।  

Important Points

  • भाषा की पाठ्य-पुस्तकें शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को व्यवस्थित कर शिक्षक तथा विद्यार्थियों को उनके शिक्षण का उद्देश्य बताती हैं।
  • सामूहिक शिक्षण व्यवस्था में पाठ्य-पुस्तक बहुत ही आवश्यक एवं उत्तम शैक्षिक साधन है।
  • हिन्दी भाषा की पाठ्य-पुस्तक हिंदी भाषा शिक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण औजार है।
  • हिन्दी भाषा की पाठ्य-पुस्तकों में उन रचनाओं को स्थान दिया जाना चाहिए जो बच्चों के परिवेश से जुड़ी हों और जिनमें भाषा की अलग-अलग छटाएँ हों अर्थात् प्राथमिक स्तर की पाठ्य-पुस्तकों का निर्माण करते समय हिन्दी भाषा के वैविध्यपूर्ण रूप शामिल होना अनिवार्य है।

अतः निष्कर्ष निकलता है कि भाषा-शिक्षण में पाठ्य-पुस्तकें साधन हैं।

Question 100

REET 2022• Hindi - II

भाषा-शिक्षण में सबसे कम महत्त्व की अधिगम सामग्री है :

  1. AOption (a)

    चित्र कथाएँ

  2. BOption (b)

    शब्द पट्टी

  3. COption (c)

    मानचित्र

  4. DOption (d)

    वाक्य पट्टी

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Correct answer

Answer: (c)C.

मानचित्र

Why this answer is correct

शिक्षण सामग्री- अध्यापन अधिगम की प्रक्रिया को सरल प्रभावकारी एवं रुचिकर बनाने वाले उपकरणों को शिक्षण सहायक सामग्री कहते है।  इन्द्रियों के प्रयोग के आधार पर शिक्षण सहायक सामग्री को तीन भागो में विभाजित किया जा सकता  है-

  • दृश्य सहायक सामग्री (visual aids)- दृश्य सहायक सामग्री का तात्पर्य उन साधनो से है जिनमे केवल देखने वाली इन्द्रियों (आँखों) का प्रयोग होता है। इसमें शामिल हैं- ब्लैकबोर्ड, , मानचित्र, चित्र कथाएँ, शब्द पट्टी, वाक्य पट्टी। 
  • ​ब्लैकबोर्ड- कक्षा अध्यापन में दृश्य साधन के रूप में ब्लैकबोर्ड का ही प्रयोग सर्वाधिक होता है। इसका उचित एवं विधिपूर्वक उपयोग पाठ को प्रभावशाली बनाने में बहुत सहायक होता है।
  • चित्र कथाएँ- बच्चो को भाषा सीखाने के लिए चित्र कथा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। चित्र कथा के माध्यम से सिखाई गयी बाते अधिक समय तक याद रहती है। चित्रों को आसानी से कक्षा में दिखाया जा सकता है।
  • शब्द पट्टी/वाक्य पट्टी- वाक्य पट्टी और शब्द पट्टी बच्चों के लेखन और पठन कौशल में सुधार करने के लिए एक गतिविधि है। यह पट्टी बच्चों को यह समझने में मदद करती है कि वाक्य कैसे बनते हैं और वाक्यों में शब्दों का प्रयोग कैसे किया जा सकता है।
  • मानचित्र-  मानचित्र का प्रयोग प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं तथा भौगोलिक तथ्यों अथवा स्थानों के अध्ययन करने के लिए मानचित्र उपयोगी साधन है। हिंदी भाषा-शिक्षण में मानचित्र के उपयोग को महत्वहीन मानते है। किन्तु ऐसा नहीं है। हिंदी भाषा के ऐतिहासिक पाठों के अध्ययन में मानचित्र का प्रयोग किया जा सकता है।

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि मानचित्र भाषा-शिक्षण में सबसे कम महत्त्व की अधिगम सामग्री है। 

Additional Information

  • श्रव्य सामग्री (audio aids)- श्रव्य सहायक सामग्री का तात्पर्य उन साधनो से है जिनमे केवल श्रव्य इन्द्रियों (कानो) का प्रयोग होता है। इसमें शामिल हैं - टेलीफ़ोनिक वार्तालाप, ऑडियो डिस्क / टेप, ग्रामोफोन रिकॉर्ड, रेडियो प्रसारण।
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री (audio-visual aids)- श्रव्य-दृश्य सहायक सामग्री का तात्पर्य उन साधनो से है जिनमे श्रवण और दृश्य इंद्रियों(कान और आँख) दोनों का उपयोग करते हैं। इसमें शामिल हैं- चलचित्र, टेलीविज़न, कंप्यूटर।