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Question 291

Rajasthan Police SI 2021• Test

संधि विच्छेद की दृष्टि से कौन सा विकल्प सही नहीं है?

  1. AOption (a)

    मतैक्य = मत + ऐक्य

  2. BOption (b)

    ऊहापोह = ऊह + अपोह

  3. COption (c)

    अन्वीक्षण = अनु + ईक्षण

  4. DOption (d)

    विवादास्पद = विवाद + अस्पद

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Correct answer

Answer: (d)D.

विवादास्पद = विवाद + अस्पद

Why this answer is correct

संधि विच्छेद की दृष्टि से विकल्प सही नहीं है- विवादास्पद = विवाद + अस्पद

Key Points

  • 'वादास्पद' शब्द का सही संधि-विच्छेद - विवाद + आस्पद है। यह दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है,
  • जहाँ प्रथम शब्द के अंत 'द्' (अ) और द्वितीय शब्द के प्रारंभ 'आ' मिलकर 'आ' का निर्माण करते हैं।
  • जब दो शब्दों की संधि करते समय (अ, आ) के साथ (अ, आ) हो तो ‘आ' बनता है,
  • जब (इ, ई) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ई' बनता है,
  • जब (उ, ऊ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ऊ‘ बनता है, तो उसे दीर्घ संधि कहते है।
  • उदाहरण
  • सीमा + अंत = सीमान्त ('आ' + 'अ' = 'आ')
  • मुनि + इंद्र = मुनींद्र  ('इ' + 'इ' = 'ई')
  • सु + उक्ति = सूक्ति ('उ' + 'उ' = 'ऊ')

अन्य विकल्प -

शब्दसंधि विच्छेदसंधि का नामनियम
मतैक्यमत + ऐक्यवृद्धि संधिअ + ऐ = ऐ
ऊहापोहऊह + अपोहदीर्घ संधिअ + अ = आ
अन्वीक्षणअनु + ईक्षणयण संधिउ + ई = वी

Important Pointsस्वर संधि- 

  • दो स्वरों के मेल से उत्पन्न होने वाले विकार को स्वर संधि कहते हैं। 
  • जैसे - महा + ओजस्वी = महौजस्वी (आ + ओ = औ)।

स्वर संधि के भेद-

  1. दीर्घ संधि
  2. गुण संधि
  3. वृद्धि संधि
  4. यण संधि
  5. अयादि संधि

Additional Information 

संधिपरिभाषाउदाहरण
वृद्धिजब संधि करते समय जब अ , आ  के साथ  ए , ऐ  हो तो 'ऐ' बनता है और जब अ , आ  के साथ ओ , औ हो तो 'औ' बनता है। उसे वृद्धि संधि कहते हैं।महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य (आ + ऐ = ऐ) वन + औषधि = वनौषधि (अ + औ = औ)
यणजब संधि करते समय (इ, ई) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो 'य्' बन जाता है, जब (उ, ऊ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो 'व्' बन जाता है, जब (ऋ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो 'र्' बनता है, तो उसे यण संधि कहते है।व्यवधान = वि + अवधान (इ + अ = य)
पित्राज्ञा = पितृ + आज्ञा (ऋ + आ = रा)
स्वागत = सु + आगत (उ + आ = वा)

Question 292

Rajasthan Police SI 2021• Test

निम्नलिखित में गलत संधि विच्छेद है:

  1. AOption (a)

    निषेध = नि + सेध

  2. BOption (b)

    पद्धति = पद् + हति

  3. COption (c)

    जगदीश = जगत + ईश

  4. DOption (d)

    प्रतिष्ठा = प्रति + स्था

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Correct answer

Answer: (c)C.

जगदीश = जगत + ईश

Why this answer is correct

गलत संधि विच्छेद है: जगदीश = जगत + ईश

Key Points

  • 'जगदीश' का सही संधि विच्छेद - जगत् + ईश है।
  • चूँकि 'जगदीश' शब्द में 'त्' के बाद स्वर 'ई' आने पर 'त्' अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण 'द्' में परिवर्तित हो जाता है,
  • इसलिए 'जगत' (बिना हलंत) की जगह हलंत युक्त 'जगत्' का प्रयोग शुद्ध माना जाता है।
  • जब त् का मिलन ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या किसी स्वर से हो तो द् बन जाता है।
  • ​उदहारण :
  • भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति
  • तत् + रूप = तद्रूपत
  • सत् + भावना = सद्भावना

अन्य विकल्प -

संधि विच्छेदनियम/प्रक्रियापरिणाम
नि + सेधव्यंजन संधि: इ/उ के बाद 'स' आने पर वह 'ष' में बदल जाता है।निषेध
पद् + हतिव्यंजन संधि: 'द्' के बाद 'ह' आने पर 'ह' का 'ध' हो जाता है।पद्धति
प्रति + स्थाव्यंजन संधि: 'इ' स्वर के बाद 'स्था' आने पर 'स' का 'ष' और 'थ' का 'ठ' हो जाता है।प्रतिष्ठा

Additional Information 

संधि- - संधि के भेद हैं - 1. स्वर, 2. व्यंजन और 3. विसर्ग। - दो या दो से अधिक वर्णों (स्वर या व्यंजन) के मिलने से उत्पन्न विकार (परिवर्तन) को संधि कहते हैं। - जैसे - रवि + इंद्र = रवींद्र (इ + इ = ई)।
संधिपरिभाषाउदाहरण
स्वरदो स्वरों के मेल से उत्पन्न होने वाले विकार को स्वर संधि कहते हैं। इसके इसके पाँच भेद हैं- दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि।हिम + आलय = हिमालय (अ + आ = आ) दीर्घ सन्धि
व्यंजनव्यंजन के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने से उस व्यंजन में जो परिवर्तन होता है, वह व्यंजन संधि कहलाता है।​उत् + ज्वल = उज्ज्वल (त् का ज् में परिवर्तन)
विसर्गविसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।नमः + कार = नमस्कार (विसर्ग का 'स्' होना)

Question 293

Rajasthan Police SI 2021• Test

किस शब्द का संधि विच्छेद सही है?

  1. AOption (a)

    सदाचार = सदा + आचार

  2. BOption (b)

    पित्राज्ञा = पित्र + आज्ञा

  3. COption (c)

    स्वल्प = स्व + अल्प

  4. DOption (d)

    चिदाभास = चित् + आभास

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Correct answer

Answer: (d)D.

चिदाभास = चित् + आभास

Why this answer is correct

संधि विच्छेद सही है- चिदाभास = चित् + आभास

Key Points

  • '​चिदाभास' का सही संधि विच्छेद - चित् + आभास है।
  • यहाँ 'त्' के बाद स्वर 'आ' आने के कारण 'त्' अपने वर्ग के तीसरे वर्ण 'द' में बदल गया।
  • ​जब किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मिलन किसी वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण से या (य्, र्, ल्, व्, ह) से या
  • किसी स्वर से हो जाये तो क् को ग् , च् को ज् , ट् को ड् , त् को द् , और प् को ब् में बदल दिया जाता है।
  • ​उदाहरण -
  • सत् + आशय = सदाशय
  • तत् + अनन्तर = तदनन्तर
  • उत् + घाटन = उद्घाटन

अन्य विकल्प -

दिया गया विच्छेदशुद्ध संधि विच्छेदशब्दसंधि का नियम
सदा + आचारसत् + आचारसदाचारव्यंजन संधि (त् का द होना)
पित्र + आज्ञापितृ + आज्ञापित्राज्ञायण स्वर संधि (ऋ + आ = रा)
स्व + अल्पसु + अल्पस्वल्प =यण स्वर संधि (उ + अ = व)

Additional Informationव्यंजन संधि-

  • जब संधि करते समय व्यंजन के साथ स्वर या कोई व्यंजन के मिलने से जो रूप में परिवर्तन होता है, उसे ही व्यंजन संधि कहते हैं।
  • उदहारण-
  • वाक् + मय = वाङ्मय
  • उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
  • दिक + अंबर = दिगंबर

यण संधि:-

  • जब संधि करते समय (इ, ई) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘य्' बन जाता है,
  • जब (उ, ऊ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘व्' बन जाता है,
  • जब (ऋ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘र्' बनता है, तो उसे यण संधि कहते है।
  • उदाहरण-
  • इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = या )
  • अनु + इत = अन्वित (उ + इ = वि)
  • पितृ + आनंद = पित्रानंद (ऋ + आ = रा)

Question 294

Rajasthan Police SI 2021• Test

किस शब्द की संधि सही है?

  1. AOption (a)

    गुरु + उपदेश = गुरुपदेश

  2. BOption (b)

    उपरि + उक्त = उपरोक्त

  3. COption (c)

    मही + इंद्र = महींद्र

  4. DOption (d)

    मातृ + इच्छा = मातृच्छा

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Correct answer

Answer: (c)C.

मही + इंद्र = महींद्र

Why this answer is correct

संधि सही है- मही + इंद्र = महींद्र

Key Points

  • मही + इंद्र = महींद्र (या महीन्द्र) संधि बिल्कुल सही है। यह दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है,
  • जहाँ प्रथम शब्द के अंत का 'ई' और दूसरे शब्द के प्रारंभ का 'इ' मिलकर दीर्घ 'ई' बनाते हैं।
  • जब दो शब्दों की संधि करते समय (अ, आ) के साथ (अ, आ) हो तो ‘आ‘ बनता है,
  • जब (इ, ई) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ई‘ बनता है,
  • जब (उ, ऊ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ऊ‘ बनता है, तो उसे दीर्घ संधि कहते है।
  • उदाहरण
  • हिमालय = हिम + आलय (अ + आ = आ)
  • कपीन्द्र = कपि + इन्द्र (इ + इ = ई)
  • भानूदय = भानु + उदय (उ + उ = ऊ)

अन्य विकल्प -

शुद्ध संधि विच्छेदशुद्ध शब्दसंधि का नियम
गुरु + उपदेशगुरूपदेशउ + उ = ऊ (दीर्घ संधि)
उपरि + उक्तउपर्युक्तइ + उ = यु (यण संधि)
मातृ + इच्छामात्रिच्छाऋ + इ = रि (यण संधि)

Additional Informationयण संधि:-

  • जब संधि करते समय (इ, ई) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘य' बन जाता है,
  • जब (उ, ऊ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘व' बन जाता है,
  • जब (ऋ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘र्' बनता है, तो उसे यण संधि कहते है।

उदाहरण-

  • प्रति + एक = प्रत्येक (इ + ए = ये)
  • सु + आगत = स्वागत (उ + आ = वा)
  • पितृ + आज्ञा =पित्राज्ञा (ऋ + आ = रा)

Question 295

Rajasthan Police SI 2021• Test

किस विकल्प के सभी शब्द संप्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण हैं?

  1. AOption (a)

    रसोईघर, देशभक्ति

  2. BOption (b)

    गुरुभाई, आशातीत

  3. COption (c)

    राहखर्च, देश निकाला

  4. DOption (d)

    पदच्युत, रोकड़बही

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Correct answer

Answer: (a)A.

रसोईघर, देशभक्ति

Why this answer is correct

सभी शब्द संप्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण हैं- रसोईघर, देशभक्ति

Key Points

  • 'रसोईघर' और 'देशभक्ति' दोनों संप्रदान तत्पुरुष समास के ही उदाहरण हैं।
  • इस समास में 'के लिए' कारक चिह्न का लोप होता है। 
  • रसोईघर: रसोई के लिए घर
  • देशभक्ति: देश के लिए भक्ति

अन्य विकल्प -

शब्दसमास विग्रहसमास का भेद
गुरुभाईगुरु के संबंध से भाईसंबंध तत्पुरुष
आशातीतआशा से अतीत (परे)अपादान तत्पुरुष
राहखर्चराह के लिए खर्चसंप्रदान तत्पुरुष
देश निकालादेश से निकालाअपादान तत्पुरुष
पदच्युतपद से च्युत (अलग)अपादान तत्पुरुष
रोकड़बहीरोकड़ (नकद) के लिए बहीसंप्रदान तत्पुरुष

Important Points

तत्पुरुष समास के छ: भेद होते हैं - - कर्म तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न: 'को') - मतदाता (मत को देने वाला) - गृहगत (गृह को गया हुआ) - करण तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न: 'से, के द्वारा') - पददलित (पद से दलित) - स्वरचित (स्व द्वारा रचित) - सम्प्रदान तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न 'के लिए') - ​ गुरुदक्षिणा (गुरु के लिए दक्षिणा) - सत्याग्रह (सत्य के लिए आग्रह) - अपादान तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न 'से' अलग होने का भाव) - धर्मविमुख (धर्म से विमुख) - गुणरहित (गुणों से रहित) - संबंध तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न 'का, के, की') - देवमूर्ति (देव की मूर्ति) - पवनपुत्र (पवन का पुत्र) - ​अधिकरण तत्पुरुष (विभक्ति चिह्न 'में, पर') - पुरुषोत्तम (पुरुषों में उत्तम) - आपबीती (आप (स्वयं) पर बीती)

Additional Information

 

तत्पुरुष समास -

  • समास का वह रूप जिसमें द्वितीय पद या उत्तर पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
  • इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।

उदाहरण -

  • धनहीन = धन से हीन
  • राष्ट्रप्रेम = राष्ट्र के लिए प्रेम

Question 296

Rajasthan Police SI 2021• Test

किस शब्द में द्वंद्व समास नहीं है?

  1. AOption (a)

    बोलचाल

  2. BOption (b)

    तैंतालीस

  3. COption (c)

    भलामानस

  4. DOption (d)

    लेनदेन

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Correct answer

Answer: (c)C.

भलामानस

Why this answer is correct

द्वंद्व समास नहीं है- भलामानस

Key Points

  • 'भलामानस' में कर्मधारय समास है। इसका विग्रह है- 'भला है जो मानस (मनुष्य)'। यहाँ 'भला' विशेषण है और 'मानस' विशेष्य है।
  • जहाँ पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है
  • अथवा इसके पूर्वपद और उत्तर पद में उपमान और उपमेय का संबंध होता है, कर्मधारय समास कहलाता है।
  • विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच में ‘के सामान’, ‘है जो’, ‘रुपी’ में से किसी एक शब्द का प्रयोग होता है।
  • उदाहरण -
  • कापुरुष = कायर है जो पुरुष
  • मृगनयनी = मृग के समान नयनों वाली
  • विद्याधन = विद्या रूपी धन

अन्य विकल्प-

  • बोलचाल: इसमें द्वंद्व समास है। इसका विग्रह है— 'बोलना और चलना' (या बोलना, चाल-ढाल आदि)।
  • तैंतालीस: इसमें भी द्वंद्व समास है। संख्यावाची शब्दों में (जैसे 43) द्वंद्व समास होता है। इसका विग्रह है— 'तीन और चालीस'।
  • लेनदेन: इसमें द्वंद्व समास है। इसका विग्रह है— 'लेना और देना'।

Important Pointsसमास के भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास​

Additional Information 

समासपरिभाषाउदाहरण
द्वंद्वजिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वन्द्व समास कहलाता है।हानि-लाभ = हानि और लाभ
सच-झूठ = सच या झूठ

Question 297

Rajasthan Police SI 2021• Test

'चंद्रमौलि' शब्द में कौन सा समास है?

  1. AOption (a)

    तत्पुरुष

  2. BOption (b)

    अव्ययीभाव

  3. COption (c)

    द्वंद्व

  4. DOption (d)

    बहुव्रीहि

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Correct answer

Answer: (d)D.

बहुव्रीहि

Why this answer is correct

'चंद्रमौलि' शब्द में समास है- बहुव्रीहि

Key Points

  • 'चंद्रमौलि' - 'वह जिनके मोली पर चंद्र है' (शिव) पद में 'बहुव्रीहि' समास है।
  • जिस समास में प्रथम पद एवं द्वितीय पद दोनों की प्रधानता न हो बल्कि कोई तीसरा पद की प्रधानता हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
  • उदाहरण - चक्रपाणि = चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके (विष्णु)। लंबोदर = लंबा है उदर (पेट) जिसका (गणेश)।

Important Points समास के भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास

Additional Information 

समासपरिभाषाउदाहरण
तत्पुरुषजिस समास में उत्तरपद यानी अंतिम पद प्रधान होता है और पूर्वपद यानी पहला पद गौण होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।देशभक्ति =  देश के लिए भक्ति पदच्युत = पद से च्युत (अलग होना)
अव्ययीभावजहाँ प्रथम पद या पूर्व पद प्रधान हो तथा समस्त पद क्रिया विशेषण अव्यय हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।निडर = डर के बिना रातोंरात = रात ही रात में
द्वंद्वजिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है।धर्मार्ध = धर्म या अधर्म दाल-रोटी = दाल और रोटी

Question 298

Rajasthan Police SI 2021• Test

एकाधिक उपसर्गों से निर्मित शब्द है:

  1. AOption (a)

    व्यवहार

  2. BOption (b)

    आलोचना

  3. COption (c)

    परियोजना

  4. DOption (d)

    अधिनायक

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Correct answer

Answer: (a)A.

व्यवहार

Why this answer is correct

एकाधिक उपसर्गों से निर्मित शब्द है: व्यवहार

Key Points

  • 'व्यवहार' एकाधिक उपसर्गों से निर्मित शब्द है,
  • वि + अव + हार = व्यवहार।
  • जिसमें दो उपसर्ग 'वि' और 'अव' तथा मूल शब्द 'हार' का प्रयोग हुआ है।
  • 'व्यवहार' का अर्थ - ​किसी व्यक्ति, जीव या वस्तु का आचरण, बर्ताव या प्रतिक्रिया।
  • उपसर्ग - वे शब्दांश जो किसी शब्द के पहले/पूर्व जुड़कर अर्थ को परिवर्तित कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

शब्दविच्छेद (उपसर्ग + मूल शब्द)उपसर्गों की संख्या
आलोचनाआ + लोचना1
परियोजनापरि + योजना1
अधिनायकअधि + नायक1

Important Pointsएकाधिक उपसर्ग वाले अन्य उदाहरण:

  • व्याकरण = वि + आ + करण
  • समालोचन = सम् + आ + लोचन
  • दुर्व्यवहार = दुर् + वि + अव + हार

Additional Informationकुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:-​

  • वि (विशेष/भिन्न) - विज्ञान, विदेश, वियोग, विभाग, विकास।
  • अव (नीचे/हीन): अवगुण, अवनति, अवतार, अवसर।
  • अभि (पास/सामने) - अभिमान, अभिभाषण, अभिनव।
  • उप (निकट/सहायक)- उपकार, उपवन, उपदेश, उपनगर।
  • दुस्/दुर् (कठिन/बुरा) - दुर्जन, दुर्बल, दुस्साहस, दुर्लभ।
  • नि (अभाव/विशेष) - निर्बल, निर्दोष, नियम, निडर।
  • प्रति (हर/उल्टा) - प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिनिधि, प्रत्यक्ष।
  • सु (अच्छा/सरल): सुपुत्र, सुगम, सुयश, सुशिक्षित, सुविचार।

Question 299

Rajasthan Police SI 2021• Test

निम्नलिखित में कौन सा शब्द उपसर्ग रहित है?

  1. AOption (a)

    आस्था

  2. BOption (b)

    आहत

  3. COption (c)

    आस्तिक

  4. DOption (d)

    आपदा

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Correct answer

Answer: (c)C.

आस्तिक

Why this answer is correct

उपसर्ग रहित है- आस्तिक

Key Points

  • (अस्ति + इक = आस्तिक)
  • ​'आस्तिक' शब्द उपसर्ग रहित है।
  • 'आस्तिक' का अर्थ ईश्वर में विश्वास रखने वाला होता है,
  • और यह 'अस्ति' (है) मूल शब्द में 'इक' प्रत्यय लगने से बनता है**।**

अन्य विकल्प -​

शब्दविच्छेद (उपसर्ग + मूल शब्द)अर्थ
आस्थाआ + स्थागहरी श्रद्धा या विश्वास
आहतआ + हतजिसे चोट पहुँचाई गई हो (घायल)
आपदाआ + पद (आपद्)अचानक आई विपत्ति या संकट

Important Points

  • उपसर्ग - वे शब्दांश जो किसी शब्द के पहले/पूर्व जुड़कर अर्थ को परिवर्तित कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।

Additional Information

कुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:-​​​​

  • अधि (श्रेष्ठ' या प्रधान) - अधिकार, अधिपति, अधिनायक, अधिराज ।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिरोध, प्रत्यारोपण, प्रतिस्पर्धा।
  • अव (नीचे, बुरा) - अवनति, अवतार, अवसान, अवशेष, अवरोध।
  • अनु (पीछे) - अनुचर, अनुकरण, अनुकूल, अनुनाद, अनुभव।
  • निर् (बिना) - निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर।
  • उप (सहायक) - उपभोग, उपवन, उपमन्त्री, उपयोग, उपनाम।
  • सम् (अच्छी तरह) - सन्तोष, संगठन,संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा।

कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द -

  • आ - ​भूखा, प्यासा, सूखा, मेला, झूला।
  • इक - सामाजिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक।
  • ता - प्रसन्नता, सफलता, उत्कृष्टता, कुशलता।
  • तन - अद्यतन, पुरातन, सनातन, ​नूतन।
  • अक - गायक, लेखक, नायक, धावक।
  • उक - भिक्षुक, भावुक, कामुक, नाजुक।
  • अन - चिंतन, मनन, भवन, मरण, करण।
  • अक्कड़ - पियक्कड़, भुलक्कड़, घुमक्कड़।
  • आई - पढ़ाई, लिखाई, बुनाई, सिलाई।

Question 300

Rajasthan Police SI 2021• Test

'यावज्जीवन' सामासिक पद में कौन सा समास है?

  1. AOption (a)

    तत्पुरुष

  2. BOption (b)

    अव्ययीभाव

  3. COption (c)

    कर्मधारय

  4. DOption (d)

    द्वंद्व

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Correct answer

Answer: (b)B.

अव्ययीभाव

Why this answer is correct

'यावज्जीवन' सामासिक पद में समास है- अव्ययीभाव

Key Points

  • 'यावज्जीवन' सामासिक पद में अव्ययीभाव समास है।
  • इसका समास विग्रह: जीवन भर या जीवन पर्यंत।
    • जिस समास में प्रथम पद अव्यय होता है और जिसका अर्थ प्रधान होता है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
  • इसमें अव्यय पद का प्रारूप लिंग, वचन, कारक, में नहीं बदलता है वो हमेशा एक जैसा रहता है।
  • अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।
  • उदाहरण -​ 
  • आजन्म = जन्म से लेकर
  • यथामति = मति के अनुसार

Important Points समास के क���ल भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. अव्ययीभाव समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. कर्मधारय समास
  6. बहुव्रीहि समास

Additional Information

तत्पुरुष समास:- - वह समास जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है। - इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है। उदाहरण -​ - भयाकुल = भय से आकुल - रसोईघर = रसोई के लिए घर कर्मधारय समास:- - वह समास जिसका पहला पद विशेषण एवं दूसरा पद विशेष्य होता है अथवा पूर्वपद एवं उत्तरपद में उपमान - उपमेय का सम्बन्ध माना जाता है कर्मधारय समास कहलाता है। - समास विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच में ‘के सामान’, ‘है जो’, ‘रुपी’ में से किसी एक शब्द का प्रयोग होता है। उदाहरण - - लालमणि = लाल है जो मणि - लौहपुरुष = लौह के समान पुरुष - गुरुदेव = गुरु रूपी देव द्वंद्व समास:- - जिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है। उदाहरण -​​ - ​माता-पिता = माता और पिता - पाप-पुण्य = पाप या पुण्य