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Question 81

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का ��ाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

निम्न में से किस शब्द का प्रयोग उपर्युक्त गद्यांश में नहीं किया गया है?

  1. AOption (a)

    खदबदाहट

  2. BOption (b)

    हड़बड़ाहट

  3. COption (c)

    सनसनाहट

  4. DOption (d)

    चहलकदमी

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Correct answer

Answer: (c)C.

सनसनाहट

Why this answer is correct

सनसनाहट शब्द का प्रयोग उपर्युक्त गद्यांश में नहीं किया गया है।

  • 'सनसनाहट' का अर्थ - सनसन की आवाज़।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार- 
  • कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।
  • समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था।
  • वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा।

Additional Information

  • 'खदबदाहट' का अर्थ - बाल, उफान, जोश।
  • 'हड़बड़ाहट' का अर्थ - हड़बड़ी, जल्दी, घबराहट।
  • 'चहलकदमी' का अर्थ - सूखपूर्वक एवं धीरे-धीरे चलने की क्रिया।

Question 82

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंत��े को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

निम्न मे से कौन-सा शब्द 'अकस्मात' का विलोम शब्द है?

  1. AOption (a)

    जानबूझकर

  2. BOption (b)

    एकाएक

  3. COption (c)

    असमंजस

  4. DOption (d)

    अचानक

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Correct answer

Answer: (a)A.

जानबूझकर

Why this answer is correct

'अकस्मात' का विलोम शब्द है - जानबूझकर

Key Points

  • 'अकस्मात' शब्द का विलोम शब्द 'जानबूझकर' होगा।
  • 'अकस्मात' शब्द का अर्थ है - एकदम से, अचानक, सहसा।
  • 'जानबूझकर' शब्द का अर्थ - सोच समझकर, इरादे या उद्देश्य से संबंधित होना।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

शब्दविलोम
एकाएक, अचानकअपेक्षित
असमंजससमंजस

Additional Information कुछ अन्य महत्वपूर्ण विलोम शब्द -

शब्दविलोम
गुलामआजाद
जागृतिसुषुप्ति
दीर्घायुअल्पायु
निर्मलमलिन
प्रवरअवर
मोक्षबंधन
रहितसहित
लक्ष्णाअभिधा

Question 83

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

उपर्युक्‍त पद्यांश में कवि उन्‍हें नमन कर रहा है जो _________

  1. AOption (a)

    नावें चलाते है।

  2. BOption (b)

    जो लाख दिए जलाते है।

  3. COption (c)

    जो लोग सदियों तक प्‍यास बुझाते है

  4. DOption (d)

    दूसरों को प्रेरणा देकर मरते है।

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Correct answer

Answer: (d)D.

दूसरों को प्रेरणा देकर मरते है।

Why this answer is correct

उपर्युक्‍त पद्यांश में कवि उन्‍हें नमन कर रहा है जो दूसरों को प्रेरणा देकर मरते है।

Key Points

  • ​पद्यांश में कवि उन लोगों को नमन कर रहा है, जो दूसरों की प्रेरणा बनते हैं और मरते समय भी दूसरों की प्रेरणा बने रहते हैं।

Additional Information

  • नावें चलाते है। - पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।
  • जो लाख दिए जलाते है। - पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।
  • जो लोग सदियों तक प्‍यास बुझाते है - पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

Question 84

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

'पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है' पंक्तियों में निम्न में से कौन-सा अलंकार है?

  1. AOption (a)

    अनुप्रास अलंकार

  2. BOption (b)

    यमक अलंकार

  3. COption (c)

    श्लेष अलंक��र

  4. DOption (d)

    उत्प्रेक्षा अलंकार

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Correct answer

Answer: (a)A.

अनुप्रास अलंकार

Why this answer is correct

'पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है' पंक्तियों में अलंकार है - अनुप्रास अलंकार

Key Points

  • (इस काव्य पंक्ति में तीन के वर्णों में 'प' वर्ण आया है, इसलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार होगा।)
  • जब किसी काव्य को सुंदर बनाने के लिए किसी वर्ण की बार-बार आवृति हो तो वह अनुप्रास अलंकार कहलाता है।
  • उदाहरण -
  • मुदित महापति मंदिर आये।  (यहाँ पर ‘म’ वर्ण की आवृति हो रही है।)

Additional Information 

यमक:- - जब एक ही शब्द ज्यादा बार प्रयोग हो, पर हर बार अर्थ अलग-अलग आये वहाँ पर यमक अलंकार होता है। उदाहरण - - तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है। - (यहाँ ‘बेर’ शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। पहली बार तीन ‘बेर’ दिन में तीन बार खाने की तरफ संकेत कर रहा है तथा दूसरी बार तीन ‘बेर’ का मतलब है तीन फल।) श्लेष- - श्लेष का अर्थ है चिपकाना, - जहां शब्द तो एक बार प्रयुक्त किया जाए पर उसके एक से अधिक अर्थ निकले वहाँ श्लेष अलंकार होता है। उदाहरण- - सुबरन को ढूँढत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर। - (इस दोहे में सुबरन शब्द के तीन अर्थ है। कवि 'सुबरन' अर्थात् अच्छे शब्द, व्यभिचारी 'सुबरन' अर्थात् अच्छा रूप-रंग और चोर भी 'सुबरन' अर्थात् स्वर्ण ढूंढ रहा है।) उत्प्रेक्षा:- - जहाँ उपमेय में उपमान होने की संभावना या कल्पना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। पहचान- जनु, मनु, इव, मानो, मनो, मनहुँ, आदि। उदाहरण- - सिर फट गया उसका वहीं। - मानो अरुण रंग का घड़ा हो।। - (इन पंक्तियों में सिर पर लाल रंग का घड़ा होने कि कल्पना की जा रही है। यहाँ सिर - उपमेय है एवं लाल रंग का घड़ा - उपमान है।)

Question 85

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

निम्नलिखित में से कवि के अनुसार उनका जीवन आसान नहीं है, जो

  1. AOption (a)

    परिश्रम से बीती बहारों को लौटा लाते हैं।

  2. BOption (b)

    देश की सेवा में अपना जीवन गुजारते है।

  3. COption (c)

    दूसरों के अधिकार को प्राप्त कर राज करते है।

  4. DOption (d)

    स्वयं दूसरे के बल पर जीवन यापन करते है।

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Correct answer

Answer: (a)A.

परिश्रम से बीती बहारों को लौटा लाते हैं।

Why this answer is correct

​कवि के अनुसार उनका जीवन आसान नहीं है, जो परिश्रम से बीती बहारों को लौटा लाते हैं।

Key Points

  • पद्यांश में कवि का मानना है कि जो लोग परिश्रम से बीती बहारों को वापस लाते हैं और अपने कामों से सबका हित करते हैं, उनका जीवन आसान नहीं होता।

Additional Informationअन्य विकल्प -

  • देश की सेवा में अपना जीवन गुजारते है। -  पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।
  • दूसरों के अधिकार को प्राप्त कर राज करते है। - पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।
  • स्वयं दूसरे के बल पर जीवन यापन करते है। -  पद्यांश के अनुसार यह विकल्प प्रश्न की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

Question 86

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

मुहावरा "भेड़ियाधसान होना " का निम्न में से क्या अर्थ है?

  1. AOption (a)

    रहस्य प्रकट करना

  2. BOption (b)

    देखा-देखी करना

  3. COption (c)

    सरगर्मी होना

  4. DOption (d)

    दुःख से दिन काटना

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Correct answer

Answer: (b)B.

देखा-देखी करना

Why this answer is correct

मुहावरा "भेड़ियाधसान होना" का अर्थ है - देखा-देखी करना

Key Points

  • 'भेड़ियाधसान होना' का अर्थ - देखा-देखी करना।
  • वाक्य प्रयोग - हमारी कॉलोनी में तो सब "भेड़िया धसान है", एक आदमी जो करेगा, वही सब करने लगेंगे।
  • मुहावरा - ऐसे वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विलक्षण अर्थ को प्रकट करते है, उसे मुहावरा कहते है। 
  • जैसे : एक अनार सौ बीमार - वस्तु एक परंतु लेने वाले बहुत, वाक्य प्रयोग - मोहन दस समोसे लाया लेकिन घर पहुंचा तो देखा "एक अनार सौ बीमार"।

Important Points

मुहावराअर्थ
पोल खोलना, उगल देनारहस्य प्रकट करना।
अंगार बरसनागरमी पड़ना या प्रचंड लू चलना।
पहाड़ होनादिन काटे ना करना।

Additional Information 

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
आग में घी डालनाक्रोध भड़कानामेरे और मेरे मित्र की लड़ाई में उसने "आग में घी डालने का काम किया"।
​आकाश कुसुम होनानामुमकिन कार्य होनाकिसी सामान्य व्यक्ति के लिए प्रधान मंत्री से मिलना "आकाश–कुसुम ही होता है"।
दूध का दूध पानी का पानीउचित निर्णय करना ।राजा सिंदकर ऐसा था कि "दूध का दूध और पानी का पानी कर देता था।"
किला फतह करनाबहुत कठिन कार्य करनारामू ने बारहवीं पास करके "किला फतह कर लिया हैं"।

Question 87

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

दी गई विभक्ति "से,के द्वारा " निम्नलिखित में से किस कारक की है?

  1. AOption (a)

    करण कारक

  2. BOption (b)

    संबंध कारक

  3. COption (c)

    अधिकरण कारक

  4. DOption (d)

    सम्प्रदान कारक

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Correct answer

Answer: (a)A.

करण कारक

Why this answer is correct

विभक्ति "से, के द्वारा" में कारक है - करण कारक

Key Points

  • जिस साधन से अथवा जिसके द्वारा क्रिया पूरी की जाती है, उस संज्ञा को करण कारक कहते हैं।
  • करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते है- से और के द्वारा।
  • उदाहरण - 
  • बच्चे गाड़ियों से खेल रहे हैं।
  • सुनील ने अपनी पत्नी के द्वारा खाना बनवाया।

Important Points

कारकविभक्तियाँ
कर्ताने
कर्मको
करणसे, द्वारा
सम्प्रदानको, के लिये, हेतु
अपादानसे (अलग होने के अर्थ में)
सम्बन्धका, की, के, रा, री, रे
अधिकरणमें, पर
सम्बोधनहे! अरे! ऐ! ओ! हाय!

Additional Information 

संबंध कारक:- - संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो हमें किन्हीं दो वस्तुओं के बीच संबंध का बोध कराता है, वह संबंध कारक कहलाता है। - सम्बन्ध कारक के विभक्ति चिन्ह का, के, की, ना, ने, नो, रा, रे, री आदि हैं। जैसे - - यह सुरेश का भाई है। - सेना के जवान आ रहे हैं। अधिकरण कारक:- - अधिकरण का अर्थ होता है – आश्रय। संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। - इसकी विभक्ति में और पर होती है। भीतर, अंदर, ऊपर, बीच आदि शब्दों का प्रयोग इस कारक में किया जाता है। उदाहरण - - फ्रिज में सेब रखा है। - पुस्तक मेज पर है। सम्प्रदान कारक:- - जब वाक्य में किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए तो वहां पर सम्प्रदान कारक होता है। - सम्प्रदान कारक के विभक्ति चिन्ह के लिए या को हैं। जैसे - - गरीबों को खाना दो। - माँ बेटे के लिए सेब लायी।

Question 88

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

निम्नलिखित में से 'प्रकाश' का पर्यायवाची शब्द क्या है?

  1. AOption (a)

    खग

  2. BOption (b)

    बहुल

  3. COption (c)

    प्रभा

  4. DOption (d)

    झख

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Correct answer

Answer: (c)C.

प्रभा

Why this answer is correct

'प्रकाश' का पर्यायवाची शब्द है - प्रभा

Key Points

  • 'प्रकाश' का पर्यायवाची शब्द - 'प्रभा' होगा।
  • 'प्रकाश' के सभी पर्यायवाची शब्द - रौशनी, ज्योति, आभा, आलोक, द्युति, उजाला, चमक, छवि आदि।
  • पर्यायवाची - ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान हों, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

शब्दपर्यायवाची  शब्द
खगचिड़िया, गगनचर, पखेरू, विहंग, नभचर।
बहुलअधिक, बहुत, ज्यादा, प्रचुर, पर्याप्त, प्रभूत।
झखमीन, मछली, मत्स्य, झष, जलजीवन, शफरी, मकर ।

Additional Information 

 कुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द -

शब्दपर्यायवाची शब्द
प्रणालीसाधन, तरीका, पद्धति, व्यवस्था, परम्परा, रीति, प्रथा।
अनुपमअनोखा, अनूठा, अपूर्व, अद्भुत, अद्वितीय, अतुल।
अटलस्थिर, अचल, दृढ, अडिग, चिरस्थायी, पक्का।
निरादरउपेक्षा, अपमान, अनादर, लापरवाही, तिरस्कार।
उत्थानउत्कर्ष, प्रगति, उत्क्रमण, आरोह, आरोहण, ऊर्ध्वगमन।
ऐश्वर्यवैभव, संपन्नता, धन-संपत्ति, समृद्धि, दौलत।
उपहारभेंट, तोहफा, सौगात, पुरस्कार, नजराना।
कपटदगा, दगाबाजी, ठगी, फरेब, छल, धोखा, धूर्त्तता।

Question 89

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

हवा चले अनुकूल तो नावें नौसिखिए भी खे लेते हैं,

सहज डगर पर लँगड़े भी चल बैसाखी से लेते हैं।

मिट जाते जो दीप स्वयं रोशन कर लाख चिरागों को

नमन उन्हें है, जो लौटा लाते हैं गई बहारों को ।

फैलाकर के हाथ किसी के सम्मुख झुकना आसाँ है,

बहती नदिया से पानी पी प्यास बुझाना आसाँ है,

नित्‍य खोदकर नए कुऍं जो सबकी प्‍यास बुझाते है,

वही लोग हैं जो सदियों तक जग में पूजे जाते हैं।

_______ में प्रथम और तृतीय चरणों में तेरह एवं दूसरे तथा चौथे चरणों में ग्यारह ग्यारह मात्राएँ होती हैं।

  1. AOption (a)

    चौपाई छंद

  2. BOption (b)

    दोहा छंद

  3. COption (c)

    कुण्डलिया छंद

  4. DOption (d)

    हरिगीतिका छंद

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Correct answer

Answer: (b)B.

दोहा छंद

Why this answer is correct

दोहा छंद में प्रथम और तृतीय चरणों में तेरह एवं दूसरे तथा चौथे चरणों में ग्यारह ग्यारह मात्राएँ होती हैं।

Key Pointsदोहा छंद-

  • यह अर्धसममात्रिक छंद होता है। ये सोरठा छंद के विपरीत होता है।
  • इसमें पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
  • इसमें चरण के अंत में लघु (।) होना जरूरी होता है।
  • जैसे:- 
  • राम  नाम मणि  दीप धरि, जीह देहरी द्वार ।
  • S I   S I   I  I   S I   I I   S I  S I S  S I = 13 + 11 = 24
  • तुलसी भीतर बाहिरहु , जो चाहसि उजियार ।।

Additional Informationचौपाई:-

  • इस चौपाई में चार चरण होते हैं,
  • प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
  • चरण के अन्त में जगण (I I S)  अथवा तगण (S I I)  नहीं होना चाहिए,
  • अन्तिम दो वर्ण गुरु-लघु (S I) भी नहीं होने चाहिए।

कुण्डलिया:-

  • दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है।
  • इस छंद के 6 चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में 24 मात्राएँ होती है।
  • कुंडलिया के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला से बने होते है।
  • दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

हरिगीतिका-

  • हरिगीतिका चार चरणों वाला एक सम मात्रिक छंद है।
  • इसके प्रत्येक चरण में 16 व 12 के विराम से 28 मात्रायें होती हैं।
  • अंत में लघु गुरु आना अनिवार्य है।

Question 90

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निम्‍न में से कौन-सा जन्‍मजात अभिप्रेरक नहींहै?

  1. AOption (a)

    आकांक्षा

  2. BOption (b)

    भूख

  3. COption (c)

    प्‍यास

  4. DOption (d)

    भूख एवं प्‍यास

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Correct answer

Answer: (a)A.

आकांक्षा

Why this answer is correct

जन्मजात अभिप्रेरक वे होते हैं जो व्यक्ति के जन्म से ही स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं, जैसे भूख, प्यास, नींद, आदि।

Key Points

  • ये हमारी शारीरिक आवश्यकताओं से संबंधित होते हैं और इनकी पूर्ति के लिए स्वाभाविक प्रेरणा होती है।
  • भूख और प्यास जन्मजात अभिप्रेरक हैं क्योंकि ये शारीरिक आवश्यकताएँ हैं जो जन्म से ही होती हैं और हमारे जीवित रहने के लिए जरूरी होती हैं।
  • आकांक्षा एक मानसिक या सामाजिक अभिप्रेरक है, जो व्यक्ति के विकास के साथ जुड़ा होता है और यह जन्मजात नहीं होता।

इसलिए, सही उत्तर आकांक्षा है ।