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Question 71

MPTET Varg 3 2022• Language 1

प्राथमिक स्तर पर आप कहानियों, कविताओं में किस पक्ष को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं?

  1. AOption (a)

    घटनाओं, शहरों, पदों में दोहराव

  2. BOption (b)

    प्रत्यक्ष उपदेशात्मक

  3. COption (c)

    प्रतिष्ठित लेखकों की कहानियां, कविताएं बच्चों को पढ़ाई जाए

  4. DOption (d)

    कहानियों, कविताओें का व्याकरणिक नियमों की जानकारी की दृष्टि से समृद्ध होना

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Correct answer

Answer: (d)D.

कहानियों, कविताओें का व्याकरणिक नियमों की जानकारी की दृष्टि से समृद्ध होना

Why this answer is correct

कहानियों, कविताओं का व्याकरणिक नियमों की जानकारी की दृष्टि से समृद्ध होना प्राथमिक स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इस स्तर पर बच्चों को भाषा के बुनियादी ढांचे की समझ विकसित करनी होती है।

Key Points

कारण:

  • भाषा का प्रारंभिक विकास: प्राथमिक स्तर पर बच्चों को सही व्याकरण सिखाने का यह सही समय होता है। अगर कहानियों और कविताओं में व्याकरणिक नियमों का सही इस्तेमाल होगा, तो बच्चे धीरे-धीरे भाषा के नियमों को समझने लगते हैं।
  • मूलभूत भाषा कौशल: कहानियों और कविताओं के माध्यम से बच्चे व्याकरणिक संरचनाओं को सहजता से आत्मसात करते हैं। जब व्याकरणिक दृष्टि से समृद्ध सामग्री पढ़ाई जाती है, तो बच्चे नई शब्दावली, सही वाक्य संरचना और सही प्रयोग सीखते हैं।
  • अभिव्यक्ति में सुधार: व्याकरण की सही जानकारी बच्चों की भाषा की अभिव्यक्ति को स्पष्ट और सटीक बनाती है। इससे उनके लेखन और बोलने की क्षमता में सुधार आता है, जो आगे की शिक्षा के लिए आधार तैयार करता है।
  • भविष्य की तैयारी: व्याकरणिक नियमों की समझ बच्चों को उच्च कक्षाओं में जटिल भाषा के अध्ययन के लिए तैयार करती है, जिससे उनकी शैक्षिक नींव मजबूत होती है।

इस प्रकार, व्याकरणिक दृष्टि से समृद्ध कहानियां और कविताएं प्राथमिक स्तर पर बच्चों की भाषा सीखने और समझने की क्षमता को बढ़ाती हैं, इसलिए यह पक्ष महत्वपूर्ण है।

Question 72

MPTET Varg 3 2022• Language 1

‘कपट का व्यवहार’ भाव व्यक्त करने वाली कहावत निम्नांकित कहावतों में से कौन-सी है?

  1. AOption (a)

    हाथ सुमरिनी बगल कतरनी

  2. BOption (b)

    खग जाने खग ही की भाषा

  3. COption (c)

    बाॅबी में हाथ तू डाल, मंत्र मैं पढूँ

  4. DOption (d)

    खोदा पहाड़ निकली चूहिया

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Correct answer

Answer: (a)A.

हाथ सुमरिनी बगल कतरनी

Why this answer is correct

कहावत (Proverb) एक प्रचलित, संक्षिप्त और सारगर्भित वाक्य या वाक्यांश होता है, जो जीवन के किसी अनुभव, सत्य या व्यवहार को संक्षेप में और प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।

Key Points

  • "हाथ सुमरिनी बगल कतरनी" यह कहावत कपट और धोखे का व्यवहार व्यक्त करती है।
  • इस कहावत का मतलब है कि कोई व्यक्ति ऊपर से धार्मिक या ईमानदार दिखने का प्रयास कर रहा है, लेकिन भीतर से वह धोखा देने या कपट करने की योजना बना रहा है।
  • यह कहावत ऐसे लोगों के लिए उपयोग की जाती है जो बाहर से सज्जन या नेकदिल दिखते हैं, लेकिन अंदर से छलपूर्ण होते हैं।

इसलिए, सही उत्तर 'हाथ सुमरिनी बगल कतरनी' है।

Hint

  • खग जाने खग ही की भाषा: यह कहावत इस बात को व्यक्त करती है कि एक जैसा अनुभव रखने वाले या समान स्थिति वाले लोग ही एक-दूसरे की बात या व्यवहार को सही ढंग से समझ सकते हैं।
  • बाँबी में हाथ तू डाल, मंत्र मैं पढ़ूँ: यह कहावत उस स्थिति का वर्णन करती है जिसमें एक व्यक्ति जोखिम उठाने के लिए तैयार हो और दूसरा व्यक्ति बिना जोखिम उठाए अपने लाभ की कोशिश कर रहा हो।
  • खोदा पहाड़, निकली चूहिया: इस कहावत का अर्थ है कि बहुत बड़ा प्रयास किया गया लेकिन परिणाम बहुत छोटा या निराशाजनक निकला।

Question 73

MPTET Varg 3 2022• Language 1

कविता शिक्षण की ______ प्रणाली उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए हितकारी है।

  1. AOption (a)

    समीक्षा

  2. BOption (b)

    अर्थ कथन

  3. COption (c)

    व्याख्या

  4. DOption (d)

    गीत

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Correct answer

Answer: (a)A.

समीक्षा

Why this answer is correct

कविता शिक्षण का तात्पर्य है कविता को समझाने और सिखाने की वह प्रक्रिया, जिसके माध्यम से छात्रों को कविता के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि उसके भाव, भाषा, शिल्प, अलंकार, प्रतीक, और छंदों को समझाया जाता है।

Key Points

  • उच्चतर माध्यमिक स्तर पर छात्रों को कविता की गहन समझ के लिए समीक्षा प्रणाली सबसे उपयोगी होती है।
  • इसमें छात्र कविता के विभिन्न पहलुओं जैसे कि कविता का विषय, कवि की भावनाएं, भाषा शैली, अलंकार, छंद, अर्थ, संदेश, कविता का सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ तथा कविता का अन्य साहित्यिक कृतियों से संबंध आदि का गहन विश्लेषण करते हैं।
  • समीक्षा के माध्यम से छात्र कविता की गहन समझ प्राप्त करते हैं। यह उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को विकसित करता है तथा उनकी सृजनात्मकता को बढ़ावा देता है।

इसलिए, सही उत्तर समीक्षा है।

Hint

  • अर्थ कथन: यह एक सरल तरीका है जिसमें छात्र कविता का अर्थ बतात�� हैं। यह प्राथमिक स्तर के लिए अधिक उपयुक्त है।
  • व्याख्या: व्याख्या में भी अर्थ स्पष्ट किया जाता है, लेकिन समीक्षा की तुलना में यह अधिक व्यापक नहीं होती है।
  • गीत: गीत कविता का एक रूप है, लेकिन यह कविता शिक्षण की कोई प्रणाली नहीं है।

Question 74

MPTET Varg 3 2022• Language 1

मातृभाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है

  1. AOption (a)

    ज्ञानात्मक उद्देश्य

  2. BOption (b)

    कौशलात्मक उद्देश्य

  3. COption (c)

    सृजनात्मक उद्देश्य

  4. DOption (d)

    उपदेशात्मक

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Correct answer

Answer: (d)D.

उपदेशात्मक

Why this answer is correct

मातृभाषा का हिंदी में अर्थ होता है माँ की भाषा। यह वह भाषा है जो किसी व्यक्ति को बचपन से ही सीखने को मिलती है और आमतौर पर उसके परिवार और घर में बोली जाती है। मातृभाषा किसी व्यक्ति के सांस्कृतिक और पहचान से जुड़ी होती है।

Key Points

  • मातृभाषा शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में उनकी भाषा की समझ, कौशल, और सृजनात्मकता का विकास करना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भाषा को सहज, स्वाभाविक और जीवन से जुड़ी विधियों से सिखाना होता है, ताकि विद्यार्थी उस भाषा में अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकें।
  • लेकिन उपदेशात्मक उद्देश्य मातृभाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं होता, क्योंकि मातृभाषा शिक्षण में जोर इस बात पर दिया जाता है कि छात्र भाषा को समझें, उसका प्रयोग करें और उसमें रचनात्मक हो सकें, न कि उन्हें केवल उपदेश दिए जाएं।

इसलिए, सही उत्तर उपदेशात्मक है।

Question 75

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौ���्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्‍त गद्यांश के अनुसार, ‘चींटियों के एहसास’ से क्‍या तात्‍पर्य है?

  1. AOption (a)

    चुनचुनाहट होना।

  2. BOption (b)

    पेट के अंदर हड़बड़ाहट होना।

  3. COption (c)

    लोगों को चींटी की तरह खदबदाहट होना।

  4. DOption (d)

    दोहरावों की एकरसता

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Correct answer

Answer: (a)A.

चुनचुनाहट होना।

Why this answer is correct

‘चींटियों के एहसास’ से तात्‍पर्य है - चुनचुनाहट होना।

Key Points

  • 'एहसास’ का अर्थ - अनुभव, प्रतीति, अनुभूति।
  • 'चुनचुनाहट' का अर्थ - ​चुनचुनाने की अवस्था, शरीर पर कुछ जलन लिए चुभने की सी पीड़ा।

Additional Information

  • 'हड़बड़ाहट' का अर्थ - हड़बड़ी, जल्दी, घबराहट।
  • 'खदबदाहट' का अर्थ - उफान, जोश।
  • 'एकरसता' का अर्थ - एक-रस होने की अवस्था या भाव।

Question 76

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नही�� जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार 'हवा को हवा की तरह पहचानना' क्यों मुश्किल था ?

  1. AOption (a)

    वृक्षों और पंखों की हवा एक-साथ बह रही थी।

  2. BOption (b)

    वहां किसी प्रकार की कोई हवा नहीं थी ।

  3. COption (c)

    बहुत कुछ एक सा था।

  4. DOption (d)

    धूल बहुत तेज उड़ी रही थी।

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Correct answer

Answer: (c)C.

बहुत कुछ एक सा था।

Why this answer is correct

'हवा को हवा की तरह पहचानना' मुश्किल था  - बहुत कुछ एक सा था।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार-
  • जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे।
  • इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था।
  • स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे।

Additional Information

  • वृक्षों और पंखों की हवा एक-साथ बह रही थी। -  गद्यांश में वृक्षों और पंखों की हवा एक-साथ बहने की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • वहां किसी प्रकार की कोई हवा नहीं थी। - गद्यांश में किसी प्रकार की कोई हवा नहीं​ की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • धूल बहुत तेज उड़ी रही थी। -  गद्यांश में धूल बहुत तेज उड़​ने की चर्चा कही भी नहीं की गयी।

Question 77

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, स्कूली बच्चे किससे खुद को बचा नहीं पा रहे थे ?

  1. AOption (a)

    धूप का हिस्सा होने से

  2. BOption (b)

    स्तंभों से दूर होने से

  3. COption (c)

    हवा से दूर होने से

  4. DOption (d)

    अध्यापकों से दूर होने से

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Correct answer

Answer: (a)A.

धूप का हिस्सा होने से

Why this answer is correct

स्कूली बच्चे धूप का हिस्सा होने से खुद को बचा नहीं पा रहे थे। 

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार-
  • इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था।
  • स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे।
  • तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी-
  • लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें!​

Additional Information

  • स्तंभों से दूर होने से - गद्यांश में स्तंभों से दूर होने की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • हवा से दूर होने से - गद्यांश में हवा से दूर होने की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • अध्यापकों से दूर होने से - गद्यांश में अध्यापकों से दूर होने​ की चर्चा कही भी नहीं की गयी।

Question 78

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, स्तूप की किसी दीवार से क्या आवाज आई ?

  1. AOption (a)

    सभी एक लाइन में एकत्र हो जाए।

  2. BOption (b)

    लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें।

  3. COption (c)

    कोई भी स्तूप की किसी दीवार को हाथ न लगाए ।

  4. DOption (d)

    ​कृपया अनुशासन बनाये रखे।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें।

Why this answer is correct

स्तूप की किसी दीवार से आवाज आई - लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार-
  • स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे।
  • तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार क��� विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी-
  • लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । ​

Additional Information

  • सभी एक लाइन में एकत्र हो जाए। - गद्यांश में सभी को एक लाइन में ​एकत्र होने की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • कोई भी स्तूप की किसी दीवार को हाथ न लगाए । - गद्यांश में किसी भी स्तूप की किसी दीवार को हाथ न लगाए की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • ​कृपया अनुशासन बनाये रखे। - गद्यांश में कृपया अनुशासन बनाये रखे की चर्चा कही भी नहीं की गयी।

Question 79

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा ���कता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, असत्य कथन का चयन कीजिए-

  1. AOption (a)

    लैपटॉप वाला लड़का साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था।

  2. BOption (b)

    स्तूप की किसी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें।

  3. COption (c)

    अकस्मात् लैपटॉप वाले लड़के को प्रतीत हुआ कि उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां बहुत शांति है।

  4. DOption (d)

    स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

अकस्मात् लैपटॉप वाले लड़के को प्रतीत हुआ कि उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां बहुत शांति है।

Why this answer is correct

असत्य कथन होगा - अकस्मात् लैपटॉप वाले लड़के को प्रतीत हुआ कि उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां बहुत शांति है।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार-
  • ​लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था।
  • स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें!
  • स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे।

Additional Information

  • असत्य कथन होगा -  अकस्मात् लैपटॉप वाले लड़के को प्रतीत हुआ कि उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां बहुत शांति है।
  • सत्य कथन होगा - अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है।

Question 80

MPTET Varg 3 2022• Language 1

निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

उस रोज बहुत से लोग एक साथ थे- मैदान में बैठे, गुनगुनी धूप का आनन्द लेते हुए । ढलते सूरत के साथ बौद्ध स्तूप की लम्बी होती छाया धूप के एक बड़े हिस्से को लपक चुकी थी। कुछ देर धूप सेक लेने के बाद पीठ पर चींटियों का अहसास जिन्हें होने लगता, बौद्ध स्तुप की छाया में सिमट आते। कई युवा जोड़े छाया की ठंडक का हाथ पकड़ते हुए स्तूप की जड़ तक सरक आए थे। स्तूप के भीतर नंगे पैर चलने के कारण शरीर के भीतर तक घुस चुकी ठंड को बाहर फेंकने के लिए पारिवारिक किस्म के समूहों ने मैदान के उन हिस्सों पर, जहां धूप अपने पूरे ताप के साथ गिर रही थी, दरी बिछाकर खाने के छोटे-बड़े न जाने कितने ही डिब्बे खोले हुए थे। इतना कुछ एक साथ था कि हवा को हवा की तरह अलग से पहचानना भी मुश्किल था। स्कूली बच्चों के कितने ही समूह अध्यापिकाओं के दिशानिर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर भी अपने को धूप का हिस्सा होने से बचा नहीं पा रहे थे। तभी न जाने कहां से, स्तूप की कौन सी दीवार से उठती एक आवाज उस बौद्ध विहार के विहार करने के नियम कायदे निर्देशित करने लगी- लड़का-लड़की मैदान में एक साथ न बैठें! बिना लय ताल के उच्चारित होते कितने ही दोहरावों की एकरसता चुभने वाली थी । दोहराने वाली आवाज को भी उसका बेसुरापन अखरा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। पर मात्राओं को घटाते-बढ़ाते हुए निर्देश का मजमून थोड़ा बदल चुका था लड़के-लड़की का मैदान में बैठना एक साथ मना है। कितने ही युवा जोड़े इस कर्कश उद्घोषणा रूपी गीत के स्थायी के बाद कर्णकटु होकर उठते अंतरे को सुनने से पहले ही खड़े हो चुके थे और यूं ही टहलने लगे थे। यूं ही टहलते हुए एक दूसरे से अचानक सट जाने या अनचाहे टकरा जाने वाली स्थितियाँ भी उन्हें सचेत करने लगी थीं कि नियम की कोई नयी धारा प्रताड़ना की तरह उनके कानों में न पड़ जाए।

लेकिन गोद में सिर रखकर लेटा वह लड़का जो अपने पेट पर लेपटॉप रखे हुए है; लेपटॉप की पीठ उसके मुड़े हुए घुटनों पर टिर्की हुई है; आंखे बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल पर जमी हुई है; वह वैसे ही लेटे-लेटे अपनी साथिन को मंत्रों के अर्थ बता रहा है। काफी देर से सुने जा रहे बौद्ध मंत्रों से विषयांतर करते हुए साथिन एक किस्सा बयां करने लगी थी कि एक बार, यह किसी और जगह की बात है, दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था। पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा। समय तो साथिन के पास भी भरपूर था पर लड़का उसकी आंखें में एक तरह की हड़बड़ाहट को देख रहा था। लड़के को लगा कि शायद साथिन साथ नहीं। क्या उसके मन को भी उद्घोषणा के तीर ने बींध दिया है या साथिन का मन विहग कहीं गगन विहार करने लगा है ? वह उठ कर बैठ गया और चहलकदमी करते दूसरे युवा जोड़ों को देखने लगा। अब जाकर उद्घोषणा के अर्थ उसके भीतर स्पष्ट होने लगे थे। अकस्मात् उसे प्रतीत हुआ उसे पराई दुनिया में फेंक दिया गया है। यहां अशांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा लेकिन युवा मन की खदबदाहट का रव मानो कर्णपटों को चाक कर देगा।

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, लड़के ने एक क्लिक से क्या हटा दिया था ?

  1. AOption (a)

    मंत्रों की पुस्तक

  2. BOption (b)

    मंत्रों की पीडीएफ फाइल

  3. COption (c)

    मीडिया प्लेयर

  4. DOption (d)

    धूल के कण

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Correct answer

Answer: (b)B.

मंत्रों की पीडीएफ फाइल

Why this answer is correct

उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार, लड़के ने एक क्लिक से मंत्रों की पीडीएफ फाइल हटा दिया था। 

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार-
  • दो घुटे सिर वाले मुझे लाइन मार रहे थे। लड़के के पास समय भरपूर था
  • वह साथिन के साथ का हर छोटे से छोटा क्षण भी समृतियों में कैद कर लेना चाहता था।
  • पेट और घुटनों के बीच खुली बौद्ध मंत्रों की पीडीएफ फाइल को उसने एक क्लिक से हटा दिया और तिरछी निगाहों से साथिन को ताकने लगा।

Additional Information

  • मंत्रों की पुस्तक - गद्यांश में मंत्रों की पुस्तक की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • मीडिया प्लेयर - गद्यांश में मीडिया प्लेयर की चर्चा कही भी नहीं की गयी।
  • धूल के कण - गद्यांश में धूल के कण की चर्चा कही भी नहीं की गयी।