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Question 71

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित में से 'कैवर्त' का तद्भव शब्द बताइए।

  1. AOption (a)

    केवट

  2. BOption (b)

    कचहरी

  3. COption (c)

    कांची

  4. DOption (d)

    कर्तव्य

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवट

Why this answer is correct

कैवर्त का सही उत्तर है: केवट

Key Points

  • 'कैवर्त' शब्द का सही तद्भव रूप 'केवट' होगा।

  • तत्सम शब्द - संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी में अपने मूल रूप में ही प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तत्सम कहते हैं। जैसे- कैवर्त, अग्नि, हस्त।

  • तद्भव शब्द - संस्कृत के वे शब्द जो कुछ भाषाई परिवर्तन के साथ हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। जैसे- केवट, आग, हाथ।

अन्य विकल्प-

शब्दसंबंधित शब्द
कचहरी (तद्भव)कृत्यगृह (तत्सम)।
कर्तव्य (तत्सम)करतब (तद्भव)।
कांची (तद्भव)कांचिका (तत्सम)।

Additional Information

कुछ महत्वपूर्ण संबंधित शब्द -

तत्समतद्भव
कूपकुआँ।
कपाटकिवाड़।
कोकिलकोयल।
कर्पूरकपूर।

Question 72

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्द के सही संधि विच्छेद का विकल्प हो।

जगदंबा

  1. AOption (a)

    जगत् + अंबा

  2. BOption (b)

    जगद + अंबा

  3. COption (c)

    जग + दुंबा

  4. DOption (d)

    जग + अंबा

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Correct answer

Answer: (a)A.

जगत् + अंबा

Why this answer is correct

सही उत्तर है- जगत् + अंबा

Key Points

  • 'जगदंबा' का संधि विच्छेद 'जगत् + अंबा' होता है। इसमें व्यंजन संधि का प्रयोग हुआ है।
  • व्यंजन संधि के नियम के अनुसार, यदि किसी वर्ग के प्रथम वर्ण (जैसे त) के बाद कोई स्वर आता है, तो प्रथम वर्ण अपने ही वर्ग के तृतीय वर्ण (जैसे द) में परिवर्तित हो जाता है। यहाँ 'त्' के बाद 'अ' आने पर 'त्', 'द्' में बदल गया है।
  • इस नियम के अन्य उदाहरण:
  • सद्भावना = सत् + भावना
  • तल्लीन = तत् + लीन

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
जगद + अंबायह विच्छेद अशुद्ध है क्योंकि 'जगद' कोई मूल शब्द नहीं है, व्याकरणिक रूप से 'जगत्' सही है।अशुद्ध रूप
जग + दुंबायह निरर्थक खंड है और संधि नियमों के विरुद्ध है।अशुद्ध रूप
जग + अंबायहाँ व्यंजन लोप या परिवर्तन की स्थिति स्पष्ट नहीं है, अतः यह गलत है।अशुद्ध रूप

Additional Information 

संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

Question 73

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

शिक्षक विद्यार्थी को हिन्दी पढ़ाते हैं- वाक्य में क्रिया का भेद है-

  1. AOption (a)

    प्रेरणार्थक

  2. BOption (b)

    सकर्मक

  3. COption (c)

    अकर्मक

  4. DOption (d)

    पूर्वकालिक

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Correct answer

Answer: (b)B.

सकर्मक

Why this answer is correct

'शिक्षक वि���्यार्थी को हिन्दी पढ़ाते हैं' वाक्य का सही उत्तर है- सकर्मक

Key Points

  • दिए गए वाक्य 'शिक्षक विद्यार्थी को हिन्दी पढ़ाते हैं' में पढ़ाते हैं क्रिया का प्रभाव विद्यार्थी और हिन्दी (दोनों कर्म) पर पड़ रहा है, इसलिए यह सकर्मक क्रिया है।
  • जिस क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है और जिसमें कर्म की उपस्थिति अनिवार्य होती है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • वाक्य में यदि 'क्या' और 'किसको' प्रश्न करने पर उत्तर प्राप्त होता है, तो वह सकर्मक क्रिया होती है। यहाँ 'क्या पढ़ाते हैं' (हिन्दी) और 'किसे पढ़ाते हैं' (विद्यार्थी) दोनों उत्तर मिल रहे हैं। अतः यह द्विकर्मक क्रिया (सकर्मक का एक भेद) है।
  • उदाहरण: राम आम खाता है। मोहन पत्र लिखता है।

अन्य विकल्प -

विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
प्रेरणार्थकजहाँ कर्ता कार्य स्वयं न कर किसी अन्य को प्रेरित करे।क्रिया का रूप
अकर्मकजहाँ क्रिया का फल सीधा कर्ता पर पड़ता है।क्रिया का रूप
पूर्वकालिकमुख्य क्रिया से पहले समाप्त होने वाली क्रिया।क्रिया का रूप

Important Points 

 कर्म के आधार पर क्रिया के भेद-

  1. अकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म नहीं होता (जैसे- पक्षी उड़ते हैं)।
  2. सकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म होता है (जैसे- वह फल खाता है)।
  3. द्विकर्मक क्रिया: जिसमें दो कर्म होते हैं (सकर्मक का उपभेद)।

Additional Information

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
सकर्मकजब क्रिया के साथ कर्म जुड़ा हो या उसकी संभावना हो।सीता गाना गाती है। गाना = कर्म
अकर्मकजब क्रिया का व्यापार और फल कर्ता तक ही सीमित रहे।बच्चा सोता है। सोना = अकर्मक

Question 74

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न में से ‘पाप पुण्य’ में कौन सा समास है?

  1. AOption (a)

    अव्ययीभाव समास

  2. BOption (b)

    द्वन्द्व समास

  3. COption (c)

    द्विगु समास

  4. DOption (d)

    कर्मधारय समास

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Correct answer

Answer: (b)B.

द्वन्द्व समास

Why this answer is correct

‘पाप पुण्य’ शब्द का सही उत्तर है- द्वन्द्व समास

Key Points

  • 'पाप पुण्य' का समास विग्रह पाप और पुण्य होता है। इसमें दोनों पद प्रधान हैं और एक-दूसरे के विलोम हैं।
  • जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर उनके बीच 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' लगता है, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं।
  • उदाहरण: माता-पिता (माता और पिता), लाभ-हानि (लाभ या हानि)।

Important Points 

 समास के मुख्य भेद-

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वन्द्व समास
  6. बहुब्रीहि समास

Additional Information

समास का नाममुख्य पहचानउदाहरण
अव्ययीभाव समासपहला पद प्रधान और 'अव्यय' होता है।यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार)
तत्पुरुष समासदूसरा पद प्रधान होता है और कारक चिह्नों का लोप होता है।राजपुत्र (राजा का पुत्र)
कर्मधारय समासविशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है।नीलकमल (नीला है जो कमल)
द्विगु समासपहला पद 'संख्यावाचक' (Number) होता है।त्रिलोक (तीन लोकों का समूह)
बहुव्रीहि समासकोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि किसी 'तीसरे' अर्थ की ओर संकेत होता है।लंबोदर (लंबा है उदर जिनका - गणेश जी)

Question 75

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न में से 'गोधूम' का तद्भव शब्द कौन-सा है ?

  1. AOption (a)

    गोप

  2. BOption (b)

    गोह

  3. COption (c)

    गेहूँ

  4. DOption (d)

    गोदना

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Correct answer

Answer: (c)C.

गेहूँ

Why this answer is correct

'गोधूम' का सही उत्तर है: गेहूँ

Key Points

  • 'गोधूम' शब्द का सही तद्भव रूप 'गेहूँ' होगा।
  • 'गोधूम' संस्कृत भाषा का एक तत्सम शब्द है, जिसका विकास हिंदी में 'गेहूँ' के रूप में हुआ है।
  • परिभाषा - संस्कृत के ऐसे शब्द जो हिंदी में बिना किसी परिवर्तन के प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। उन्हीं तत्सम शब्दों के परिवर्तित रूप को तद्भव शब्द कहा जाता है।

अन्य विकल्प-

तत्सम / तद्भवसंबंधित शब्द
गोप (तत्सम)ग्वाला (तद्भव)
गोह (तद्भव)गोधिका (तत्सम)
गोदना (तद्भव)कुट्टन / क्रोडन (तत्सम)

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण तत्सम-तद्भव शब्द -

तत्समतद्भव
अग्निआग
कर्पूरकपूर
ओष्ठओठ
दुग्धदूध

Question 76

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दें-

भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में आकर भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है और सूर के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है। इन कृष्ण-भक्त कवियों ने कृष्ण को न तो महाभारत की प्रेरणा पर सूत्रधार के रूप में चित्रित किया और न ही गीता में अभिव्यक्त कृष्ण के ज्ञानी-रूप में। वे भागवत् से प्रेरणा ग्रहण करते हैं। भागवत् में कृष्ण-लीला का उत्स मौजूद है, लेकिन राधा अनुपस्थित। आगे चलकर ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा कृष्ण की लीला में सहगामिणी बन जाती हैं। वहीं से प्रेरणा ग्रहण करती हुई राधा-कृष्ण की माधुर्योपासना की परम्परा का आगे चलकर विकास होता है। मध्य काल में कृष्ण-भक्त कवि उसी परम्परा का विस्तार व विकास करते हुए आते हैं

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के गीत-गोविन्द से होती है, लेकिन जयदेव एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में जाने जाते हैं। आगे चलकर जयदेव की माधुर्योपासना की इस परम्परा का विस्तार व विकास हमें आदिकालीन कवि विद्यापति के यहाँ देखने को मिलता है।

उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक होगा -

  1. AOption (a)

    परमानन्द सागर

  2. BOption (b)

    महाभारत

  3. COption (c)

    कृष्ण-भक्ति काव्यधारा

  4. DOption (d)

    राधा-कृष्ण की लीला

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Correct answer

Answer: (c)C.

कृष्ण-भक्ति काव्यधारा

Why this answer is correct

इसका सही उत्तर 'कृष्ण-भक्ति काव्यधारा' है।

मुख्य बिंदु

गद्यांश के विश्लेषण के अनुसार:

  • प्रस्तुत गद्यांश मुख्य रूप से कृष्ण-भक्ति काव्यधारा के उद्भव, उसके वैचारिक आधार और विकास यात्रा पर केंद्रित है।
  • इसमें बताया गया है कि कैसे भक्ति आन्दोलन निर्गुण से सगुण की ओर मुड़ा और सूरदास के नेतृत्व में इस विशिष्ट काव्यधारा का सूत्रपात हुआ।
  • गद्यांश में इस धारा के प्रमुख प्रेरणा स्रोतों जैसे भागवत् पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण का उल्लेख है, साथ ही जयदेव और विद्यापति जैसे कवियों के योगदान की चर्चा की गई है।
  • चूँकि पूरा अनुच्छेद इस पूरी साहित्यिक परम्परा की व्याख्या करता है, इसलिए 'कृष्ण-भक्ति काव्यधारा' इसका सबसे सटीक शीर्षक है।

अतिरिक्त जानकारी

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

परमानन्द सागर -

  • यह एक विशिष्ट रचना का संकेत हो सकता है, लेकिन गद्यांश किसी एक पुस्तक तक सीमित न रहकर पूरी काव्य परम्परा की बात करता है।

महाभारत -

  • गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन कवियों ने कृष्ण को महाभारत के सूत्रधार के रूप में चित्रित नहीं किया है, अतः यह शीर्षक अनुपयुक्त है।

राधा-कृष्ण की लीला -

  • यह इस काव्यधारा का एक प्रमुख वर्ण्य-विषय (Subject matter) है, लेकिन शीर्षक के रूप में यह पूरे गद्यांश के ऐतिहासिक और साहित्यिक विकास क्रम को पूरी तरह समाहित नहीं करता है।

Question 77

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दें-

भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में आकर भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है और सूर के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है। इन कृष्ण-भक्त कवियों ने कृष्ण को न तो महाभारत की प्रेरणा पर सूत्रधार के रूप में चित्रित किया और न ही गीता में अभिव्यक्त कृष्ण के ज्ञानी-रूप में। वे भागवत् से प्रेरणा ग्रहण करते हैं। भागवत् में कृष्ण-लीला का उत्स मौजूद है, लेकिन राधा अनुपस्थित। आगे चलकर ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा कृष्ण की लीला में सहगामिणी बन जाती हैं। वहीं से प्रेरणा ग्रहण करती हुई राधा-कृष्ण की माधुर्योपासना की परम्परा का आगे चलकर विकास होता है। मध्य काल में कृष्ण-भक्त कवि उसी परम्परा का विस्तार व विकास करते हुए आते हैं

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के गीत-गोविन्द से होती है, लेकिन जयदेव एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में जाने जाते हैं। आगे चलकर जयदेव की माधुर्योपासना की इस परम्परा का विस्तार व विकास हमें आदिकालीन कवि विद्यापति के यहाँ देखने को मिलता है।

सूरदास के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की किस काव्यधारा का सूत्रपात होता है ?

  1. AOption (a)

    कृष्ण-भक्ति काव्यधारा

  2. BOption (b)

    राम-भक्ति काव्यधारा

  3. COption (c)

    शिव-भक्ति काव्यधारा

  4. DOption (d)

    शक्ति-भक्ति काव्यधारा

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Correct answer

Answer: (a)A.

कृष्ण-भक्ति काव्यधारा

Why this answer is correct

इस प्रश्न का सही उत्तर option 1 है , निचे दिए उत्तर के फॉर्मेट मे html code में उत्तर दे

इसका सही उत्तर 'कृष्ण-भक्ति काव्यधारा' है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार ,

  • भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में जब भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है, तब सूरदास के नेतृत्व में कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है।
  • इन कवियों ने महाभारत के सूत्रधार या गीता के ज्ञानी कृष्ण के बजाय भागवत् के कृष्ण को अपना आधार बनाया।
  • कृष्ण-भक्ति काव्य की यह परम्परा जयदेव के गीत-गोविन्द से शुरू होकर विद्यापति और फिर मध्यकाल के कवियों तक विकसित हुई।
  • अतः, सूरदास के नेतृत्व में कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का उदय हुआ।

Additional Information अन्य विकल्प:

राम-भक्ति काव्यधारा -

  • इस काव्यधारा के केंद्र में भगवान राम हैं और इसके सबसे प्रमुख कवि तुलसीदास माने जाते हैं।

शिव-भक्ति काव्यधारा -

  • यह भगवान शिव की उपासना पर आधारित है, जिसे शैव मत के कवियों ने आगे बढ़ाया।

शक्ति-भक्ति काव्यधारा -

  • इसमें शक्ति (देवी) के विभिन्न रूपों की उपासना की जाती है, जिसे शाक्त काव्य भी कहा जाता है।

Question 78

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दें-

भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में आकर भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है और सूर के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है। इन कृष्ण-भक्त कवियों ने कृष्ण को न तो महाभारत की प्रेरणा पर सूत्रधार के रूप में चित्रित किया और न ही गीता में अभिव्यक्त कृष्ण के ज्ञानी-रूप में। वे भागवत् से प्रेरणा ग्रहण करते हैं। भागवत् में कृष्ण-लीला का उत्स मौजूद है, लेकिन राधा अनुपस्थित। आगे चलकर ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा कृष्ण की लीला में सहगामिणी बन जाती हैं। वहीं से प्रेरणा ग्रहण करती हुई राधा-कृष्ण की माधुर्योपासना की परम्परा का आगे चलकर विकास होता है। मध्य काल में कृष्ण-भक्त कवि उसी परम्परा का विस्तार व विकास करते हुए आते हैं

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के गीत-गोविन्द से होती है, लेकिन जयदेव एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में जाने जाते हैं। आगे चलकर जयदेव की माधुर्योपासना की इस परम्परा का विस्तार व विकास हमें आदिकालीन कवि विद्यापति के यहाँ देखने को मिलता है।

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव की किस रचना से होती है ?

  1. AOption (a)

    माधुर्योपासना

  2. BOption (b)

    भँवर गीत

  3. COption (c)

    मणिकांचन योग

  4. DOption (d)

    गीत-गोविन्द

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Correct answer

Answer: (d)D.

गीत-गोविन्द

Why this answer is correct

इस प्रश्न का सही उत्तर option (4) है, नीचे दिए गए प्रारूप में उत्तर है:

इसका सही उत्तर 'गीत-गोविन्द' है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार:

  • गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के 'गीत-गोविन्द' से होती है।
  • यद्यपि जयदेव को एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में स्वीकार किया गया है, तथापि उनकी रचना ने ही इस काव्यधारा का आधार निर्मित किया।
  • जयदेव द्वारा स्थापित माधुर्योपासना की इसी परम्परा को आगे चलकर विद्यापति और फिर मध्यकाल के कृष्ण-भक्त कवियों ने विस्तार दिया।

Additional Information अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

माधुर्योपासना -

  • यह भक्ति की एक पद्धति या भाव है जिसमें ईश्वर (कृष्ण) को प्रियतम के रूप में पूजा जाता है, यह किसी विशिष्ट रचना का नाम नहीं है।

भँवर गीत -

  • यह काव्य परम्परा का एक अंग है जिसे मुख्य रूप से नंददास ने लिखा है। इसी से मिलता-जुलता 'भ्रमरगीत' सूरदास की रचना है।

मणिकांचन योग -

  • साहित्य में यह शब्द प्रायः दो विशिष्ट शैलियों या गुणों (जैसे संस्कृत और ब्रजभाषा का मेल) के सुंदर संयोग के लिए प्रयुक्त होता है, यह जयदेव की रचना नहीं है।

Question 79

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दें-

भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में आकर भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है और सूर के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है। इन कृष्ण-भक्त कवियों ने कृष्ण को न तो महाभारत की प्रेरणा पर सूत्रधार के रूप में चित्रित किया और न ही गीता में अभिव्यक्त कृष्ण के ज्ञानी-रूप में। वे भागवत् से प्रेरणा ग्रहण करते हैं। भागवत् में कृष्ण-लीला का उत्स मौजूद है, लेकिन राधा अनुपस्थित। आगे चलकर ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा कृष्ण की लीला में सहगामिणी बन जाती हैं। वहीं से प्रेरणा ग्रहण करती हुई राधा-कृष्ण की माधुर्योपासना की परम्परा का आगे चलकर विकास होता है। मध्य काल में कृष्ण-भक्त कवि उसी परम्परा का विस्तार व विकास करते हुए आते हैं

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के गीत-गोविन्द से होती है, लेकिन जयदेव एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में जाने जाते हैं। आगे चलकर जयदेव की माधुर्योपासना की इस परम्परा का विस्तार व विकास हमें आदिकालीन कवि विद्यापति के यहाँ देखने को मिलता है।

'कृष्ण' का पर्यायवाची शब्द है-

  1. AOption (a)

    वायस

  2. BOption (b)

    कर्दम

  3. COption (c)

    शुनक

  4. DOption (d)

    दामोदर

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Correct answer

Answer: (d)D.

दामोदर

Why this answer is correct

इस प्रश्न का सही उत्तर option 4 है , निचे दिए उत्तर के फ़ॉर्मेट मे html code में उत्तर दे

इसका सही उत्तर 'दामोदर' है।

Key Points

दिए गए विकल्पों में 'कृष्ण' का सही पर्यायवाची शब्द 'दामोदर' है।

  • दामोदर: यह शब्द दो शब्दों के योग से बना है - 'दाम' (रस्सी) और 'उदर' (पेट)।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब यशोदा माँ ने बालक कृष्ण को रस्सी से ओखल के साथ बाँध दिया था, तब से उनका नाम 'दामोदर' पड़ा।
  • कृष्ण के अन्य प्रमुख पर्यायवाची: घनश्याम, गिरधर, माधव, केशव, वासुदेव, मुरारी, नन्दनन्दन, राधारमण आदि।

Additional Information अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

वायस -

  • यह कौआ का पर्यायवाची शब्द है। इसके अन्य पर्यायवाची शब्द काग, काण, पिशुन, करठ हैं।

कर्दम -

  • यह कीचड़ का पर्यायवाची शब्द है। इसके अन्य पर्यायवाची शब्द पंक, कीच, चहला, गारा हैं।

शुनक -

  • यह कुत्ता का पर्यायवाची शब्द है। इसके अन्य पर्यायवाची शब्द श्वान, कुक्कुर, सारमेय, गंडक हैं।

Question 80

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दें-

भक्ति आन्दोलन के उत्तरार्द्ध में आकर भक्ति की भावधारा निर्गुण से सगुण की ओर उन्मुख होती है और सूर के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन की कृष्ण-भक्ति काव्यधारा का सूत्रपात होता है। इन कृष्ण-भक्त कवियों ने कृष्ण को न तो महाभारत की प्रेरणा पर सूत्रधार के रूप में चित्रित किया और न ही गीता में अभिव्यक्त कृष्ण के ज्ञानी-रूप में। वे भागवत् से प्रेरणा ग्रहण करते हैं। भागवत् में कृष्ण-लीला का उत्स मौजूद है, लेकिन राधा अनुपस्थित। आगे चलकर ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा कृष्ण की लीला में सहगामिणी बन जाती हैं। वहीं से प्रेरणा ग्रहण करती हुई राधा-कृष्ण की माधुर्योपासना की परम्परा का आगे चलकर विकास होता है। मध्य काल में कृष्ण-भक्त कवि उसी परम्परा का विस्तार व विकास करते हुए आते हैं

कृष्ण-भक्ति काव्य-परम्परा की शुरूआत जयदेव के गीत-गोविन्द से होती है, लेकिन जयदेव एक भक्त से कहीं अधिक श्रृंगारी कवि के रूप में जाने जाते हैं। आगे चलकर जयदेव की माधुर्योपासना की इस परम्परा का विस्तार व विकास हमें आदिकालीन कवि विद्यापति के यहाँ देखने को मिलता है।

'विकास' का विलोम शब्द है-

  1. AOption (a)

    निषेध

  2. BOption (b)

    विवाद

  3. COption (c)

    अनुग्रह

  4. DOption (d)

    ह्रास

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

ह्रास

Why this answer is correct

इस प्रश्न का सही उत्तर option 4 है , निचे दिए उत्तर के फॉ र्मेट मे html code में उत्तर दे

इसका सही उत्तर 'ह्रास' है।

Key Points

  • विकास शब्द का सामान्य अर्थ प्रगति, उन्नति, बढ़ोत्तरी या फैलाव होता है।
  • ह्रास शब्द का अर्थ कमी, गिरावट, क्षय या अवनति होता है।
  • व्याकरणिक दृष्टि से, किसी शब्द का विलोम उसका पूर्णतः विपरीत अर्थ प्रकट करने वाला शब्द होता है, अतः विकास का विलोम ह्रास है।

Additional Information अन्य विकल्पों का विवरण:

निषेध -

  • इसका अर्थ किसी कार्य की मनाही या रोक होता है। इसका विलोम शब्द विधि या स्वीकृति है।

विवाद -

  • इसका अर्थ तर्क-वितर्क, झगड़ा या मतभेद होता है। इसका विलोम शब्द निर्विवाद या सहमति होता है।

अनुग्रह -

  • इसका अर्थ कृपा, दया या मेहरबानी होता है। इसका विलोम शब्द विग्रह, कोप या दंड होता है।