दिए गए विकल्पों में दाँत पीसना, भौहे चढ़ाना, मुख लाल होना, गर्जना, कंप आदि अनुभावों का सही उत्तर है- रौद्र रस
Key Points
- रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध होता है।
- जब किसी व्यक्ति के द्वारा अपमान, गुरुजन की निंदा या किसी प्रिय वस्तु की हानि होती है, तो हृदय में जो आवेश उत्पन्न होता है, उसे रौद्र रस कहते हैं।
- साहित्य शास्त्र के अनुसार, मन के भावों को व्यक्त करने वाली शारीरिक चेष्टाओं को अनुभाव कहा जाता है।
- रौद्र रस के प्रमुख अनुभावों में आँखों का लाल होना, दाँत पीसना, शस्त्र उठाना और गर्जना शामिल हैं।
- उदाहरण: "श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे। सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे।"
- (यहाँ 'करतल मलना' और 'क्षोभ' रौद्र रस के लक्षण हैं।)
Important Points
रस के अंगों (अवयवों) के भेद-
- स्थायी भाव: जो भाव हृदय में सदैव सुप्त अवस्था में विद्यमान रहते हैं।
- विभाव: भावों को जाग्रत करने वाले कारण (आलंबन और उद्दीपन)।
- अनुभाव: मनोगत भावों को व्यक्त करने वाली शारीरिक चेष्टाएँ।
- संचारी/व्यभिचारी भाव: मन में थोड़े समय के लिए संचरण करने वाले भाव।
Additional Information
| रस का नाम | स्थायी भाव | अर्थ / पहचान | उदाहरण |
|---|
| शृंगार रस | रति (प्रेम) | नायक-नायिका के प्रेम का वर्णन। | बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। |
| हास्य रस | हास | वेशभूषा या वाणी से हँसी आना। | हाथी जैसी देह है, गेंडे जैसी खाल। |
| करुण रस | शोक | प्रिय वस्तु या व्यक्ति के विनाश से दुख। | शोक विकल सब रोवहिं रानी। |
| वीर रस | उत्साह | युद्ध या कठिन कार्य के लिए उमंग। | बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। |
| भयानक रस | भय | डरावनी वस्तु या दृश्य को देखकर डर। | एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय। |
| वीभत्स रस | जुगुप्सा (घृणा) | घृणित वस्तुओं या दृश्यों को देखकर ग्लानि। | सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत। |
| अद्भुत रस | विस्मय (आश्चर्य) | किसी विचित्र वस्तु को देखकर आश्चर्य। | देखि यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया। |
| शांत रस | निर्वेद (वैराग्य) | संसार से वैराग्य और ईश्वर भक्ति। | मन रे तन कागद का पुतला। |
| वात्सल्य रस | वत्सल (स्नेह) | माता-पिता का संतान के प्रति प्रेम। | मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो। |
| भक्ति रस | अनुराग (देव रति) | ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम। | मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। |