Search Previous Year Questions

Find real questions from previous competitive exam papers with answers and solutions.

Leave the keyword blank to browse saved questions for your selected exam, newest papers first. Add a keyword, year or topic to narrow the results.

Browse complete papers
Showing 10 question(s)
Clear

Question 61

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

रामचरितमानस में कितने कांड हैं?

  1. AOption (a)

    आठ

  2. BOption (b)

    नौ

  3. COption (c)

    सात

  4. DOption (d)

    पांच

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

सात

Why this answer is correct

रामचरितमानस में 7 कांड हैं,अन्य विकल्प असंगत है। अतः  विकल्प 3 ‘सात’ सही उत्तर है।

Key Points

स्पष्टीकरण:

  • रामचरितमानस को तुलसीदास ने सात काण्डों में विभक्त किया है।
  • इन सात काण्डों के नाम हैं -
  • बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड।
  • छन्दों की संख्या के अनुसार बालकाण्ड और किष्किन्धाकाण्ड क्रमशः सबसे बड़े और छोटे काण्ड हैं।

 

अपने 126 वर्ष के दीर्घ जीवन-काल में तुलसीदास ने कालक्रमानुसार निम्नलिखित कालजयी ग्रन्थों की रचनाएँ कीं -

रचनारचना वर्षरचनारचना वर्ष
कृष्ण-गीतावली1571विनय-पत्रिका1582
गीतावली1571दोहावली1583
रामचरितमानस1574वैराग्यसंदीपनी1612
रामललानहछू1582रामाज्ञाप्रश्न1612
जानकी-मंगल1582बरवै रामायण1612
पार्वती-मंगल1582कवितावली1612

Question 62

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

बालगोबिन भगत किन के आदर्शो पर चलते थे? 

  1. AOption (a)

    सूरदास के

  2. BOption (b)

    तुलसीदास के

  3. COption (c)

    कबीरदास के

  4. DOption (d)

    गांधी जी के

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

कबीरदास के

Why this answer is correct

सही उत्तर कबीरदास के है 

  • बालगोबिन भगत रामवृक्ष_बेनीपुरी की रेखाचित्र विधा की रचना है।
  • रामबृक्ष बेनीपुरी बताते हैं कि बालगोविन् भगत कबीर को अपना साहब मानते थे। उन्ही के गीतों को गाते, उनके बताये गये मार्ग का अनुसरण करते थे ।

 

Key Points

  • बालगोबिन भगत में लेखक ने गांव के एक ऐसे व्यक्ति का रेखाचित्र प्रस्तुत किया है जो कबीर का अनुयायी है।
  • वे अपने बेटे की मृत्यु के बाद अपनी पतोहू(बहु) का दूसरा विवाह करवाने के लिए कहते हैं।
  • उनका मुख्य व्यसाय खेती है और जो भी उनके खेत में निकलता है उसका एक हिस्सा वो पहले कबीरमठ में चढाने जाते हैं।

Additional Information

  • जन्म -1899    मुजफ्फरपुर
  • मृत्यु-1968    मुजफ्फरपुर
  • ये लेखक और कवि होने के साथ साथ पत्रकार भी थे।
  • रचनाएँ   -
  • माटी की मूर्ति
  • पतितों के देश में
  • चिता के फूल,लाल तारा
  • कैदी की पत्नी
  • माटी,गेहूँ और गुलाब,
  • जंजीरें और दीवारें
  • नाटक -
  • अम्बपाली,
  • सीता की माँ
  • संघमित्रा -1948-50
  • अमर ज्योति
  • तथागत
  • सिंहल विजय
  • शकुन्तला
  • रामराज्य,
  • नेत्रदान
  • गाँव के देवता
  • इनका जन्म २३ दिसंबर, 1899 को उनके पैतृक गाँव मुजफ्फरपुर जिले (बिहार) के बेनीपुर गाँव के एक भूमिहर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उसी के आधार पर उन्होंने अपना उपनाम 'बेनीपुरी' रखा था।

 

Important Points

  • कबीरपंथ- कबीरपंथी ईश्वर के निर्गुण रूप की उपासना करते हैं और किसी भी प्रकार के पूजा और पाठ से दूर रहकर ईश्वर की भक्ति को ही सर्वोपरी मानते हैं।

Question 63

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निश्चल में कौन सा संधि है?

  1. AOption (a)

    व्यंजन संधि

  2. BOption (b)

    विसर्ग संधि

  3. COption (c)

    स्वर संधि

  4. DOption (d)

    व्यंजन संधि एवं विसर्ग संधि दोनों

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

विसर्ग संधि

Why this answer is correct

निश्चल में संधि का सही उदाहरण/उत्तर है- विसर्ग संधि

Key Points

  • 'निश्चल' शब्द का सही संधि-विच्छेद 'निः + चल' है। यहाँ विसर्ग के साथ 'च' का मेल हो रहा है, जिससे विसर्ग 'श' में परिवर्तित हो गया है।
  • विसर्ग संधि का नियम: यदि विसर्ग (ः) के बाद 'च' या 'छ' हो, तो विसर्ग का 'श' हो जाता है; यदि 'ट' या 'ठ' हो तो 'ष' और यदि 'त' या 'थ' हो तो 'स' हो जाता है।
  • इस नियम के अन्य उदाहरण: निः + चित = निश्चित तथा दुः + चरित्र = दुश्चरित्र।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
व्यंजन संधिजहाँ व्यंजन का मेल व्यंजन या स्वर से होता है। जैसे: उत् + लास = उल्लास।व्यंजन संधि
स्वर संधिजहाँ दो स्वरों के आपस में मिलने से विकार उत्पन्न होता है। जैसे: विद्या + आलय = विद्यालय।स्वर संधि

Important Points 

 संधि के भेद-

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
विसर्ग संधिविसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।मनः + हर = मनोहर निः + फल = निष्फल

Question 64

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

सोरठा को किस छन्द का उल्टा कहा जाता है?

  1. AOption (a)

    दोहा

  2. BOption (b)

    छप्पय

  3. COption (c)

    चौपाई

  4. DOption (d)

    सवैया

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

दोहा

Why this answer is correct

सोरठा को जिस छन्द का उल्टा कहा जाता है, वह है- दोहा

Key Points

  • सोरठा एक अर्धसम मात्रिक छन्द है और यह दोहा का ठीक उल्टा होता है।
  • नियम के अनुसार, सोरठा के प्रथम और तृतीय चरण में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं।
  • इसके विषम चरणों के अंत में जगण (।ऽ।) नहीं होना चाहिए।
  • उदाहरण:
  • सुनत सुमंगल बैन, मन प्रमोद तन पुलक भर। (विषम चरणों में 11-11 मात्राएँ)
  • सरद सरोरुह नैन, तुलसी भरे सनेह जल। (सम चरणों में 13-13 मात्राएँ)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविवरणभेद/प्रकार
छप्पययह छह पंक्तियों का छन्द है जो रोला और उल्लाला के योग से बनता है।विषम मात्रिक छन्द
चौपाईइसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।सम मात्रिक छन्द
सवैयायह एक वर्णिक छन्द है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं।वर्णिक छन्द

Important Points 

 छन्द के मुख्य भेद-

  1. मात्रिक छन्द: जिसमें मात्राओं की गणना की जाती है (जैसे- दोहा, सोरठा, चौपाई)।
  2. वर्णिक छन्द: जिसमें वर्णों की गणना और क्रम का ध्यान रखा जाता है (जैसे- सवैया, कवित्त)।
  3. मुक्तक छन्द: जो वर्ण और मात्रा के बंधनों से मुक्त होता है।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
दोहायह एक अर्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम व त���तीय चरण में 13-13 और द्वितीय व चतुर्थ में 11-11 मात्राएँ होती हैं।मेरी भव बाधा हरौ = 13 मात्राएँ राधा नागरि सोइ = 11 मात्राएँ

Question 65

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'नीलकमल' में कौन सा समास है ?

  1. AOption (a)

    बहुव्रीहि

  2. BOption (b)

    तत्पुरुष

  3. COption (c)

    कर्मधारय

  4. DOption (d)

    द्विगु

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

कर्मधारय

Why this answer is correct

सही उत्तर है - कर्मधारय

Key Points

  • "नीलकमल" शब्द में कर्मधारय समास है, क्योंकि यह 'नीला है जो कमल' या 'नीला कमल' के रूप में विग्रह होता है।
  • जिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो, उसे कर्मधारय समास कहलाता है।
  • पहचान: विग्रह करने पर दोनों पद के मध्य में ‘रुपी’ , 'है जो', 'के समान' आदि आते हैं।
  • उदाहरण-
  • महादेव = महान है जो देव
  • चंद्रमुख = चंद्रमा के समान मुख
  • स्त्रीरत्न = स्त्री रूपी रत्न

Important Points समास के भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वंद्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास​

Additional Information 

समासपरिभाषाउदाहरण
बहुव्रीहिजिस समास में प्रथम पद एवं द्वितीय पद दोनों की प्रधानता न हो बल्कि कोई तीसरा पद की प्रधानता हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी (अर्थात् विष्णु जी) नीलकंठ = नीला है कंठ जिनका (अर्थात् शिव जी)
तत्पुरुषतत्पुरुष समास वह होता है, जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है। इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।राहखर्च = राह के लिए खर्च राजमहल = राजा का महल
द्विगुवह समास जिसका पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है तथा समस्तपद किसी समूह या फिर किसी समाहार का बोध करता है तो वह द्विगु समास कहलाता है।चौराहा = चार राहों का समाहार सप्ताह = सात दिनों का समूह

Question 66

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

अकर्मक क्रिया कौन-सी है?

  1. AOption (a)

    देखना

  2. BOption (b)

    चखना

  3. COption (c)

    डरना

  4. DOption (d)

    पढना

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

डरना

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में से अकर्मक क्रिया का सही उदाहरण/उत्तर है- डरना

मुख्य बिंदु

  • डरना एक अकर्मक क्रिया है क्योंकि इस क्रिया के व्यापार का फल सीधे कर्ता पर पड़ता है और इसमें किसी कर्म की आवश्यकता नहीं होती।
  • जिस क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त नहीं होता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। इसमें क्रिया का सीधा प्रभाव कर्ता पर पड़ता है।
  • अकर्मक क्रिया के अन्य उदाहरण: हँसना, रोना, जागना, दौड़ना आदि।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
देखनाकिसी वस्तु को देखने की क्रियासकर्मक क्रिया
चखनाकिसी पदार्थ का स्वाद लेने की क्रियासकर्मक क्रिया
पढ़नाकिसी पुस्तक या लेख को पढ़ने की क्रियासकर्मक क्रिया

महत्वपूर्ण बिंदु

 कर्म के आधार पर क्रिया के भेद-

  1. अकर्मक क्रिया (बिना कर्म के)
  2. सकर्मक क्रिया (कर्म के साथ)

अतिरिक्त जानकारी

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
सकर्मक क्रियाजिस क्रिया के व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है।वह आम खाता है। सीता पत्र पढ़ती है।

Question 67

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्‍नलिखित में से दाँत पीसना, भौहे चढ़ाना, मुख लाल होना, गर्जना, कंप आदि अनुभाव किस रस के है?

  1. AOption (a)

    हास्‍य रस के

  2. BOption (b)

    रौद्र रस के

  3. COption (c)

    शांत रस के

  4. DOption (d)

    श्रृंगार रस के

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

रौद्र रस के

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में दाँत पीसना, भौहे चढ़ाना, मुख लाल होना, गर्जना, कंप आदि अनुभावों का सही उत्तर है- रौद्र रस

Key Points

  • रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध होता है।
  • जब किसी व्यक्ति के द्वारा अपमान, गुरुजन की निंदा या किसी प्रिय वस्तु की हानि होती है, तो हृदय में जो आवेश उत्पन्न होता है, उसे रौद्र रस कहते हैं।
  • साहित्य शास्त्र के अनुसार, मन के भावों को व्यक्त करने वाली शारीरिक चेष्टाओं को अनुभाव कहा जाता है।
  • रौद्र रस के प्रमुख अनुभावों में आँखों का लाल होना, दाँत पीसना, शस्त्र उठाना और गर्जना शामिल हैं।
  • उदाहरण: "श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे। सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे।"
  • (यहाँ 'करतल मलना' और 'क्षोभ' रौद्र रस के लक्षण हैं।)

Important Points 

 रस के अंगों (अवयवों) के भेद-

  1. स्थायी भाव: जो भाव हृदय में सदैव सुप्त अवस्था में विद्यमान रहते हैं।
  2. विभाव: भावों को जाग्रत करने वाले कारण (आलंबन और उद्दीपन)।
  3. अनुभाव: मनोगत भावों को व्यक्त करने वाली शारीरिक चेष्टाएँ।
  4. संचारी/व्यभिचारी भाव: मन में थोड़े समय के लिए संचरण करने वाले भाव।

Additional Information

रस का नामस्थायी भावअर्थ / पहचानउदाहरण
शृंगार रसरति (प्रेम)नायक-नायिका के प्रेम का वर्णन।बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
हास्य रसहासवेशभूषा या वाणी से हँसी आना।हाथी जैसी देह है, गेंडे जैसी खाल।
करुण रसशोकप्रिय वस्तु या व्यक्ति के विनाश से दुख।शोक विकल सब रोवहिं रानी।
वीर रसउत्साहयुद्ध या कठिन कार्य के लिए उमंग।बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
भयानक रसभयडरावनी वस्तु या दृश्य को देखकर डर।एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय।
वीभत्स रसजुगुप्सा (घृणा)घृणित वस्तुओं या दृश्यों को देखकर ग्लानि।सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत।
अद्भुत रसविस्मय (आश्चर्य)किसी विचित्र वस्तु को देखकर आश्चर्य।देखि यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया।
शांत रसनिर्वेद (वैराग्य)संसार से वैराग्य और ईश्वर भक्ति।मन रे तन कागद का पुतला।
वात्सल्य रसवत्सल (स्नेह)माता-पिता का संतान के प्रति प्रेम।मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।
भक्ति रसअनुराग (देव रति)ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम।मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।

Question 68

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न में से चौपाई के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राऍं होती है?

  1. AOption (a)

    12

  2. BOption (b)

    13

  3. COption (c)

    14

  4. DOption (d)

    16

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

16

Why this answer is correct

चौपाई के प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या का सही उत्तर है- 16

Key Points

  • चौपाई एक सम मात्रिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
  • छंद शास्त्र के अनुसार, चौपाई के चार चरण होते हैं और इसके अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का प्रयोग वर्जित माना जाता है, जबकि अंत में दो गुरु (ऽऽ) होना शुभ माना जाता है।
  • उदाहरण: "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥" (प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ हैं)।
  • उदाहरण: "मूक होई बाचाल पंगु चढ़ई गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

अन्य विकल्प -

संख्या/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
12 मात्राएँबरवै छंद के प्रथम और तृतीय चरण में 12-12 मात्राएँ होती हैं।अर्धसम मात्रिक छंद
13 मात्राएँदोहा छंद के प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं।अर्धसम मात्रिक छंद
11 मात्राएँसोरठा छंद के प्रथम और तृतीय चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।अर्धसम मात्रिक छंद

Important Points 

 छंद के मुख्य भेद-

  1. मात्रिक छंद: जहाँ मात्राओं की गणना के आधार पर पद रचना होती है (जैसे- दोहा, चौपाई)।
  2. वर्णिक छंद: जहाँ वर्णों की संख्या और क्रम के आधार पर रचना होती है (जैसे- सवैया, कवित्त)।
  3. मुक्तक छंद: जहाँ वर्णों या मात्राओं का कोई निश्चित प्रतिबंध नहीं होता (जैसे- आधुनिक कविताएँ)।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
दोहायह अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।मेरी भव बाधा हरौ = 13 मात्राएँ राधा नागरि सोइ = 11 मात्राएँ
सोरठायह दोहा का उल्टा होता है। इसके पहले और तीसरे चरण में 11-11 तथा दूसरे और चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं।जो सुमिरत सिधि होइ = 11 मात्राएँ गन नायक करिवर वदन = 13 मात्राएँ

Question 69

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न विकल्पों में से यण् संधि पहचानिए -

  1. AOption (a)

    सु + अल्प

  2. BOption (b)

    वार्ता + आलाप

  3. COption (c)

    पौ + अन

  4. DOption (d)

    यथा + एव

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

सु + अल्प

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में से यण् संधि का सही उदाहरण/उत्तर है- सु + अल्प

Key Points

  • सु + अल्प का संधि रूप 'स्वल्प' होता है। इसमें 'उ' और 'अ' के मेल से 'व्' बना है, जो यण् संधि का नियम है।
  • यण् संधि का नियम: जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान स्वर (भिन्न स्वर) आता है, तो 'इ/ई' का 'य्', 'उ/ऊ' का 'व्' और 'ऋ' का 'र्' हो जाता है।
  • यण् संधि के अन्य उदाहरण:
  • इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = या)
  • अनु + अय = अन्वय (उ + अ = व)
  • ​पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा (ऋ + आ = रा)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
वार्ता + आलापवार्तालाप (आ + आ = आ)दीर्घ संधि
पौ + अनपावन (औ + अ = आव)अयादि संधि
यथा + एवयथैव (आ + ए = ऐ)वृद्धि संधि

Important Points 

 स्वर संधि के भेद-

  1. दीर्घ स्वर संधि
  2. गुण स्वर संधि
  3. वृद्धि स्वर संधि
  4. यण स्वर संधि
  5. अयादि स्वर संधि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
दीर्घ संधिदो समान ह्रस्व या दीर्घ स्वरों के मिलने से उनके स्थान पर दीर्घ स्वर हो जाता है।हिम + आलय = हिमालय विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
अयादि संधियदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो वे क्रमशः अय, आय, अव, आव में बदल जाते हैं।ने + अन = नयन भो + अन = भवन
वृद्धि संधिजहाँ 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आने पर **'ऐ'**और 'ओ' या 'औ' आने पर 'औ' हो जाता है।महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य जल + ओघ = जलौघ

Question 70

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

गो. तुलसीदास की इन रचनाओं में से किस रचना में ब्रजभाषा का प्रयोग है ?

  1. AOption (a)

    कवितावली

  2. BOption (b)

    रामललानहछू

  3. COption (c)

    रामचरितमानस

  4. DOption (d)

    जानकीमंगल

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

कवितावली

Why this answer is correct

गो. तुलसीदास की कवितावली रचना में ब्रजभाषा का प्रयोग है।

कवितावली-

  • समय-सं.-1631-80
  • भाषा-ब्रज
  • **प्रयुक्त छंद-**कवित्त,छप्पय
  • **काव्य रूप-**मुक्तक
  • विषय-
  • सात कांडों में राम कथा का वर्णन।
  • उत्तराखंड  में काशी की  महामारी का वर्णन।
  • 'हनुमानबाहुक' इसी का एक भाग है।

Key Points

  • रामललानहछू,रामचरितमानस और जानकीमंगल रचनाओं की भाषा अवधी है।

Important Pointsरामललानहछू-

  • **समय-**सं.-1628-29
  • भाषा-ठेठ अवधी
  • **प्रयुक्त छंद-**सोहर(60)
  • **काव्य रूप-**प्रबंध
  • विषय-
  • इसमें राम विवाह व् यज्ञोपवीत संस्कार  के समय  नहछू का वर्णन है।
  • तुलाई का श्रृंगारी व रसिक पक्ष प्रकट हुआ है।

रामचरितमानस-

  • **समय-**सं.-1631
  • भाषा-अवधी
  • **प्रयुक्त छंद-**दोहा चौपाई (1074 कड़वक)
  • **काव्य रूप-**प्रबंध
  • विषय-
  • सात कांडों में राम कथा का वर्णन हैं।
  • यह ग्रन्थ 2 वर्ष 7 माह व 26 दिन में पूर्ण हुआ था।
  • सात काण्ड हैं-बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुंदरकांड,लंकाकाण्ड और उत्तरकांड।

जनकीमंगल-

  • **समय-**सं.-1629-30
  • भाषा-अवधी
  • **प्रयुक्त छंद-**सोहर (216)
  • **काव्य रूप-**प्रबंध
  • विषय-
  • राम-सीता  के विवाह का वर्णन है।
  • इसका आधार वाल्मीकि रामायण है।

Additional Informationतुलसीदास-

  • **जन्म-**1532-1623 ई.
  • स्मार्त सम्प्रदाय में दीक्षित थे।
  • **दीक्षा गुरु-**नरहर्यानन्द
  • **शिक्षा गुरु-**शेष सनातन
  • अन्य रचनाएँ-
  • वैराग्य संदीपनी,रामाज्ञाप्रश्न,पार्वती मंगल,कृष्ण गीतावली,गीतावली,विनयपत्रिका,दोहावली और बरवै रामायण।