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Question 131

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

‘बुरी तरह पराजित होना’ अर्थ के लिए सही मुहावरा क्या है?

  1. AOption (a)

    रफू चक्कर होना

  2. BOption (b)

    मुँह की खाना

  3. COption (c)

    बुखार उतरना

  4. DOption (d)

    नाक का बाल होना

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Correct answer

Answer: (b)B.

मुँह की खाना

Why this answer is correct

'बुरी तरह पराजित होना' का सही उत्तर है: 'मुँह की खाना'

Key Points

  • 'मुँह की खाना' मुहावरे का सही अर्थ 'बुरी तरह पराजित होना' होगा।

  • वाक्य प्रयोग — कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना को भारतीय सेना के सामने मुँह की खानी पड़ी।

  • परिभाषा - जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।

अन्य विकल्प-

मुहावराअर्थ
रफू चक्कर होनाभाग जाना।
बुखार उतरनाक्रोध शांत होना।
नाक का बाल होनाबहुत प्रिय होना।

Additional Information

कुछ महत्वपूर्ण संबंधित शब्द -

मुहावराअर्थ
दाँत खट्टे करनाबुरी तरह हराना।
लोहा लेनायुद्ध करना/मुकाबला करना।
आँखों का ताराअत्यंत प्यारा।
हवा से बातें करनाबहुत तेज दौड़ना।

Question 132

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्‍नलिखित में से कौन-सा शब्‍द अव्‍ययीभाव समास का सही उदाहरण है?

  1. AOption (a)

    कुमार श्रमणा

  2. BOption (b)

    यथासंभव

  3. COption (c)

    लम्‍बोदर

  4. DOption (d)

    राधाकृष्‍ण

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Correct answer

Answer: (b)B.

यथासंभव

Why this answer is correct

अव्‍ययीभाव समास का सही उदाहरण है- यथासंभव

Key Points

  • 'यथासंभव' अव्ययीभाव समास का एक उदाहरण है, जिसका अर्थ है "जैसा संभव हो सके" या "जहाँ तक संभव हो"
  • जहाँ प्रथम पद या पूर्व पद प्रधान हो तथा समस्त पद क्रिया विशेषण अव्यय हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
  • अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।
  • उदाहरण - आजीवन = जीवन भर, यथार्थ = अर्थ के अनुसार।

अन्य विकल्प -

शब्दसमास विग्रहसमास का नाम
कुमारश्रमणाकुमारी है जो श्रमणाकर्मधारय समास
​लम्बोदरलंबा है उदर/पेट जिनका अर्थात् गणेशबहुव्रीहि समास
राधाकृष्णराधा और कृष्णद्वन्द्व समास

Important Points 

 समास के भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास

Additional Information

समासपरिभाषाउदाहरण
कर्मधारयजिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो, उसे कर्मधारय समास कहलाता है। पहचान: विग्रह करने पर दोनों पद के मध्य में ‘रुपी’ , 'है जो', 'के समान' आदि आते हैं।मंदाग्नि = मंद है जो अग्नि चरणकमल = कमल के समान चरण कीर्तिलता = कीर्ति रूपी लता
बहुव्रीहिजिस समास में प्रथम पद एवं द्वितीय पद दोनों की प्रधानता न हो बल्कि कोई तीसरा पद की प्रधानता हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।गिरिधर - गिरि (पर्वत) को धारण करने वाले - कृष्ण चंद्रशेखर - चंद्रमा है शेखर (मस्तक) पर जिनके - शिवजी
द्वंद्वजिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है।धर्म-अधर्म = धर्म या अधर्म गुण-दोष = गुण और दोष

Question 133

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न में से 'आस्तीन का सांप' मुहावरे का सही अर्थ कौन-सा है ?

  1. AOption (a)

    कपटी मित्र

  2. BOption (b)

    थोड़ी सी मदद करना

  3. COption (c)

    सर पर आ जाना

  4. DOption (d)

    इशारे से कुछ कहना

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Correct answer

Answer: (a)A.

कपटी मित्र

Why this answer is correct

'आस्तीन का सांप' मुहावरे का सही अर्थ है- कपटी मित्र

मुख्य बिंदु

  • 'आस्तीन का सांप' मुहावरे का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो हमारे साथ मित्र बनकर रहता है, लेकिन वास्तव में वह हमारा शत्रु होता है और गुप्त रूप से नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है।
  • व्याकरणिक रूप से, जब कोई शब्द समूह अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ की प्रतीति कराए, तो उसे मुहावरा कहते हैं। 'आस्तीन का सांप' एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जिसका संबंध विश्वासघात से है।
  • उदाहरण 1: संचित को मैं अपना सच्चा दोस्त मानता था, लेकिन वह तो आस्तीन का सांप निकला।
  • उदाहरण 2: व्यापार में किसी पर भी अंधा विश्वास न करें, क्योंकि आज के समय में आस्तीन के सांपों की कमी नहीं है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
थोड़ी सी मदद करनाकिसी की अल्प सहायता प्रदान करनावाक्यांश
सर पर आ जानाकिसी कार्य या संकट का अत्यंत निकट होनामुहावरा
इशारे से कुछ कहनासंकेत के माध्यम से अपनी बात प्रकट करनावाक्यांश

महत्वपूर्ण बिंदु 

 मुहावरे की विशेषताएँ-

  1. मुहावरा अपना मूल रूप कभी नहीं बदलता (जैसे 'आस्तीन' की जगह 'कमीज' नहीं लिख सकते)।
  2. मुहावरे का प्रयोग स्वतंत्र रूप से न होकर वाक्य के अंतर्गत किया जाता है।
  3. इसका अर्थ अभिधा (सीधा अर्थ) न होकर लक्षणा (लाक्षणिक अर्थ) होता है।

अतिरिक्त जानकारी

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
मुहावराऐसे वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ के लिए रूढ़ हो गए हों।अंगूठा दिखाना = साफ़ मना कर देना आँखों का तारा = बहुत प्यारा होना

Question 134

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'पवन' का सन्धि विच्छेद है:

  1. AOption (a)

    पा+वन

  2. BOption (b)

    पो+अन

  3. COption (c)

    पौ+अन

  4. DOption (d)

    पाव+अन

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Correct answer

Answer: (b)B.

पो+अन

Why this answer is correct

सही उत्तर है- पो+अन

Key Points

  • 'पवन' का सही संधि विच्छेद पो + अन है। यह अयादि स्वर संधि का उदाहरण है।
  • अयादि संधि के नियमानुसार, जब ओ के साथ कोई अन्य स्वर (जैसे अ) मिलता है, तो ओ का परिवर्तन 'अव' में हो जाता है।
  • यहाँ पो (प् + ओ) + अन (अ + न) के मेल से प् + अव् + अ + न = पवन बनता है।
  • अन्य उदाहरण: भो + अन = भवन, पो + इत्र = पवित्र।

अन्य विकल्प -

विकल्पसंधि पद/अर्थनियम/प्रकार
पौ + अनपावनअयादि संधि (औ+अ=आव)
पा + वनअर्थहीनकोई संधि नहीं
पाव + अनअशुद्ध रूप-

Important Points 

 संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि (दो स्वरों का मेल)
  2. व्यंजन संधि (व्यंजन का व्यंजन या स्वर से मेल)
  3. विसर्ग संधि (विसर्ग का स्वर या व्यंजन से मेल)

Additional Information

प्रकारपरिभाषा (अयादि संधि)उदाहरण
अयादि संधियदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव और औ का आव हो जाता है।ने + अन = नयन गै + अक = गायक

Question 135

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

दिए गए विकल्पों में से तत्सम शब्द की पहचान कीजिए।

  1. AOption (a)

    आखेट

  2. BOption (b)

    अटारी

  3. COption (c)

    अनाड़ी

  4. DOption (d)

    उछाह

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Correct answer

Answer: (a)A.

आखेट

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में तत्सम शब्द का सही उत्तर है: आखेट

Key Points

  • 'आखेट' शब्द का सही तद्भव रूप 'अहेर' होगा।

  • 'आखेट' शब्द का अर्थ — शिकार।

  • तत्सम की परिभाषा - संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी भाषा में बिना किसी परिवर्तन के मूल रूप में प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे: अग्नि, सूर्य, रात्रि आदि।

अन्य विकल्प-

तद्भव शब्दतत्सम शब्द
अटारीअट्टालिका।
अनाड़ीअनार्य।
उछाहउत्साह।

Additional Information

कुछ महत्वपूर्ण संबंधित शब्द -

तद्भवतत्सम
आँखअक्षि।
आमआम्र।
खेतक्षेत्र।
दहीदधि।

Question 136

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित पद्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।

क्षमा शोभती उस भुजंग को,

जिसके पास गरल हो।

उसको क्या जो दंतहीन,

विषरहित, विनीत, सरल हो।

तीन दिवस तक पंथ माँगते

रघुपति सिंधु किनारे ।

बैठे पढ़ते रहे छंद

अनुनय के प्यारे-प्यारे।।

उत्तर में जब एक नाद भी

उठा नहीं सागर से ।

उठी अधीर धधक पौरुष की

आग राम के शर से ।।

सिंधु देह धर 'त्राहि-त्राहि

करता आ गिरा शरण में।

चरण पूज दासता ग्रहण की,

बँधा मूढ 'बंधन में ।।

सच पूछो तो शर में ही

बसती है दीप्ति विनय की।

संधि-वचन संपूज्य उसी का

जिसमें शक्ति विजय की।।

सहनशीलता, क्षमा, दया को

तभी पूछता जग है,

बल का दर्प चमकता उसके

पीछे जब जगमग है।

प्रस्तुत प्रस्तुत काव्यांश में “संधि वचन संपूर्ण उसी का जिसमें शक्ति विजय की" पंक्ति का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।

  1. AOption (a)

    दुर्बल व्यक्ति का सभी उपह���स करते हैं।

  2. BOption (b)

    दुर्बल व्यक्ति से संधि प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है। 

  3. COption (c)

    दुर्बल व्यक्ति की कोई बात नहीं मानता।

  4. DOption (d)

    दुर्बल व्यक्ति कोई काम नहीं कर सकता।

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

दुर्बल व्यक्ति से संधि प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है। 

Why this answer is correct

काव्यांश में दी गई पंक्ति "संधि-वचन संपूज्य उसी का जिसमें शक्ति विजय की" का सही भाव है- दुर्बल व्यक्ति से संधि प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है।

Key Points

  • प्रस्तुत पंक्ति का अर्थ है कि समाज या शत्रु उसी व्यक्ति के शांति और समझौते (संधि) के प्रस्ताव का सम्मान करता है, जिसके पास विजय प्राप्त करने की शक्ति होती है।
  • कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के अनुसार, यदि कोई अक्षम या शक्तिहीन व्यक्ति संधि की बात करता है, तो उसे उसकी महानता नहीं बल्कि उसकी विवशता या डर समझा जाता है।
  • उदाहरण के लिए, जब तक भगवान राम ने अपना धनुष नहीं उठाया, तब तक समुद्र ने उनकी प्रार्थना नहीं सुनी। जैसे ही राम ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, समुद्र तुरंत उनकी शरण में आ गया।
  • अतः, क्षमा और दया जैसे गुण तभी शोभा देते हैं जब व्यक्ति शक्तिशाली हो।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
दुर्बल व्यक्ति का सभी उपहास करते हैं।इसका अर्थ है कि समाज कमजोर का मजाक उड़ाता है, जो संधि के संदर्भ में नहीं है।सामाजिक स्थिति
दुर्बल व्यक्ति की कोई बात नहीं मानता।यह कथन सामान्य है, जबकि पंक्ति विशेष रूप से संधि और विजय की शक्ति पर केंद्रित है।सामान्य कथन
दुर्बल व्यक्ति कोई काम नहीं कर सकता।यह व्यक्ति की अक्षमता को दर्शाता है, समझौते की गरिमा को नहीं।अक्षमता बोधक

Important Points 

 काव्य में प्रयुक्त रसों के भेद-

  1. वीर रस: जहाँ पौरुष, शक्ति और उत्साह का वर्णन हो (इस पद्य में मुख्य रूप से है)।
  2. रौद्र रस: जहाँ क्रोध का भाव जागृत हो (जैसे राम का क्रोध)।
  3. शांत रस: जहाँ विनीत भाव या विनय का वर्णन हो।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
वीर रस (Veer Ras)युद्ध अथवा कठिन कार्य को करने के लिए हृदय में जो उत्साह जाग्रत होता है, उसे वीर रस कहते हैं।उठी अधीर धधक पौरुष की = आग राम के शर से। बुंदेले हरबोलों के मुँह = हमने सुनी कहानी थी।

Question 137

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित पद्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।

क्षमा शोभती उस भुजंग को,

जिसके पास गरल हो।

उसको क्या जो दंतहीन,

विषरहित, विनीत, सरल हो।

तीन दिवस तक पंथ माँगते

रघुपति सिंधु किनारे ।

बैठे पढ़ते रहे छंद

अनुनय के प्यारे-प्यारे।।

उत्तर में जब एक नाद भी

उठा नहीं सागर से ।

उठी अधीर धधक पौरुष की

आग राम के शर से ।।

सिंधु देह धर 'त्राहि-त्राहि

करता आ गिरा शरण में।

चरण पूज दासता ग्रहण की,

बँधा मूढ 'बंधन में ।।

सच पूछो तो शर में ही

बसती है दीप्ति विनय की।

संधि-वचन संपूज्य उसी का

जिसमें शक्ति विजय की।।

सहनशीलता, क्षमा, दया को

तभी पूछता जग है,

बल का दर्प चमकता उसके

पीछे जब जगमग है।

प्रस्तुत प्रस्तुत काव्यांश की "पौरुष की आग राम के शर से" पंक्ति में निहित अलंकार कौन सा है?

  1. AOption (a)

    अनुप्रास

  2. BOption (b)

    उत्प्रेक्षा

  3. COption (c)

    रूपक

  4. DOption (d)

    यमक

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Correct answer

Answer: (c)C.

रूपक

Why this answer is correct

काव्यांश की पंक्ति "पौरुष की आग राम के शर से" में निहित अलंकार का सही उत्तर है- रूपक अलंकार

Key Points

  • "पौरुष की आग" में रूपक अलंकार है क्योंकि यहाँ 'पौरुष' (उपमेय) पर 'आग' (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है, अर्थात पौरुष को ही आग मान लिया गया है।
  • जहाँ गुण की अत्यंत समानता दर्शाने के लिए उपमेय और उपमान में अभिन्नता बताई जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। इसमें 'सा, सी, से' जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता।
  • उदाहरण:
  • मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों। (यहाँ चंद्रमा को ही खिलौना बताया गया है)
  • चरण-कमल बंदौ हरि राई। (यहाँ चरणों को ही कमल माना गया है)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
अनुप्रासजहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार हो। उदा- ​कालिंदी कूल कदंब की डारन,(यहाँ 'क' वर्ण की आवृत्ति है।)शब्दालंकार
उत्प्रेक्षाजहाँ उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाए (मानो, जानो)। उदा- "मानो अरुण रंग का घड़ा" - फटे सिर में लाल घड़े की कल्पना।अर्थालंकार
यमकजहाँ एक ही शब्द एक से अधिक बार आए और अर्थ भिन्न हों। उदा- ​काली घटा का घमंड घटा। ​पहली 'घटा' का अर्थ 'बादल' है और दूसरी 'घटा' का अर्थ 'कम होना' है।शब्दालंकार

Important Points 

 अलंकार के मुख्य भेद-

  1. शब्दालंकार: जहाँ शब्दों के प्रयोग से काव्य में चमत्कार उत्पन्न हो।
  2. अर्थालंकार: जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में सौंदर्य बढ़े।
  3. उभयालंकार: जहाँ शब्द और अर्थ दोनों के कारण चमत्कार उत्पन्न हो।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
उपमा अलंकारजहाँ दो वस्तुओं की समानता के आधार पर तुलना की जाए। यहाँ सा, सी, से, सम जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।मुख बाल रवि सम लाल होकर। पीपर पात सरिस मन डोला।

Question 138

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित पद्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।

क्षमा शोभती उस भुजंग को,

जिसके पास गरल हो।

उसको क्या जो दंतहीन,

विषरहित, विनीत, सरल हो।

तीन दिवस तक पंथ माँगते

रघुपति सिंधु किनारे ।

बैठे पढ़ते रहे छंद

अनुनय के प्यारे-प्यारे।।

उत्तर में जब एक नाद भी

उठा नहीं सागर से ।

उठी अधीर धधक पौरुष की

आग राम के शर से ।।

सिंधु देह धर 'त्राहि-त्राहि

करता आ गिरा शरण में।

चरण पूज दासता ग्रहण की,

बँधा मूढ 'बंधन में ।।

सच पूछो तो शर में ही

बसती है दीप्ति विनय की।

संधि-वचन संपूज्य उसी का

जिसमें शक्ति विजय की।।

सहनशीलता, क्षमा, दया को

तभी पूछता जग है,

बल का दर्प चमकता उसके

पीछे जब जगमग है।

प्रस्तुत काव्यांश में कौन सा रस है?

  1. AOption (a)

    वात्सल्य रस

  2. BOption (b)

    श्रृंगार रस

  3. COption (c)

    वीभत्स रस

  4. DOption (d)

    वीर रस

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

वीर रस

Why this answer is correct

प्रस्तुत काव्यांश में 'रस' का सही उत्तर है- वीर रस

Key Points

  • दिए गए काव्यांश में कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने शक्ति और पौरुष का वर्णन किया है।
  • इसमें राम के क्रोध और उनकी शक्ति के माध्यम से विजय प्राप्ति का उत्साह दिखाया गया है, इसलिए यहाँ वीर रस है।
  • जब किसी रचना या वाक्य से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है। इसका स्थायी भाव उत्साह होता है।
  • अन्य उदाहरण: "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"

अन्य विकल्प -

विकल्पविग्रह/अर्थस्थायी भाव
वात्सल्य रसजहाँ माता-पिता का संतान के प्रति प्रेम व्यक्त हो।वत्सल (स्नेह)
श्रृंगार रसजहाँ नायक और नायिका के सौंदर्य तथा प्रेम का वर्णन हो।रति
वीभत्स रसजहाँ घृणित वस्तुओं या दृश्यों को देखकर मन में ग्लानि उत्पन्न हो।जुगुप्सा (घृणा)

Important Points 

 काव्य शास्त्र के अनुसार रस के मुख्य भेद-

  1. श्रृंगार रस
  2. हास्य रस
  3. करुण रस
  4. रौद्र रस
  5. वीर रस
  6. भयानक रस
  7. वीभत्स रस
  8. अद्भुत रस
  9. शांत रस

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
वीर रसयुद्ध अथवा कठिन कार्य को करने के लिए मन में जो उत्साह जाग्रत होता है, उसे वीर रस कहते हैं।"मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।"
रौद्र रसविरोधी पक्ष द्वारा अपमान करने या किसी पूज्य व्यक्ति की निंदा से जो क्रोध उत्पन्न होता है।"श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे।"

Question 139

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित पद्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।

क्षमा शोभती उस भुजंग को,

जिसके पास गरल हो।

उसको क्या जो दंतहीन,

विषरहित, विनीत, सरल हो।

तीन दिवस तक पंथ माँगते

रघुपति सिंधु किनारे ।

बैठे पढ़ते रहे छंद

अनुनय के प्यारे-प्यारे।।

उत्तर में जब एक नाद भी

उठा नहीं सागर से ।

उठी अधीर धधक पौरुष की

आग राम के शर से ।।

सिंधु देह धर 'त्राहि-त्राहि

करता आ गिरा शरण में।

चरण पूज दासता ग्रहण की,

बँधा मूढ 'बंधन में ।।

सच पूछो तो शर में ही

बसती है दीप्ति विनय की।

संधि-वचन संपूज्य उसी का

जिसमें शक्ति विजय की।।

सहनशीलता, क्षमा, दया को

तभी पूछता जग है,

बल का दर्प चमकता उसके

पीछे जब जगमग है।

कौनसा विकल्प व्याल का पर्यायवाची शब्द नहीं है?

  1. AOption (a)

    भुजंग

  2. BOption (b)

    उरग

  3. COption (c)

    काग

  4. DOption (d)

    नाग

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

काग

Why this answer is correct

'व्याल' का पर्यायवाची शब्द नहीं है का सही उत्तर है- काग

Key Points

  • 'व्याल' शब्द का अर्थ सर्प (साँप) होता है।
  • दिए गए विकल्पों में 'काग' का अर्थ 'कौआ' होता है, इसलिए यह 'व्याल' का पर्यायवाची नहीं है।
  • शेष तीनों विकल्प (भुजंग, उरग, नाग) सर्प के ही समानार्थी हैं।
  • पद्य में प्रयुक्त 'भुजंग' शब्द भी सर्प के लिए ही आया है (क्षमा शोभती उस भुजंग को...)।
  • वे शब्द जो समान अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहा जाता है।
  • व्याल के अन्य पर्यायवाची: अहि, फणी, विषधर, पन्नग।
  • काग के अन्य पर्यायवाची: काक, वायस, पिशुन, करठ।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
भुजंगवह जो भुजाओं (बाँहों) के समान टेढ़ा-मेढ़ा चलता है।पर्यायवाची (सर्प)
उरगउर (छाती) के बल चलने वाला जीव।पर्यायवाची (सर्प)
नागविषैला फणधारी सर्प।पर्यायवाची (सर्प)

Important Points 

 पर्यायवाची शब्द के मुख्य भेद-

  1. पूर्ण पर्याय: जब एक शब्द के स्थान पर दूसरा शब्द रखने से अर्थ में कोई अंतर न आए।
  2. पूर्णापूर्ण पर्याय: जब एक कार्य के लिए तो शब्द समान हो पर दूसरे के लिए न हो।
  3. अपूर्ण पर्याय: जब शब्दों के अर्थ में सूक्ष्म अंतर विद्यमान हो।

Additional Information

शब्दपर्यायवाची शब्द
इंद्रशक्र, मघवा, बिडौजा, जीमूतवाहन, सुनासीर, पुरुहूत।
चोरखनक, मोषक, कुंभिल, साहसिक, तस्कर, रजनीचर।
तोताकीर, शुक, सुआ, सुग्गा, रक्ततुंड, दाड़िमप्रिय।
पर्वतशैल, नग, भूधर, मेरु, महीधर, अचल, तुंग।
यमराजकीनाश, कृतांत, शमन, जीवितेश, दंडधर, धर्मराज।
राजामहीप, भूपाल, नरेशा, नरेंद्र, क्षितीश, भूप।
विष्णुदामोदर, मुकुंद, ऋषिकेश, गोपीनाथ, जलशायी, उपेंद्र।
हाथीद्विरद, कुंभी, गयंद, सिंदूर, वितुंड, मतंग, नाग।

Question 140

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्नलिखित पद्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें।

क्षमा शोभती उस भुजंग को,

जिसके पास गरल हो।

उसको क्या जो दंतहीन,

विषरहित, विनीत, सरल हो।

तीन दिवस तक पंथ माँगते

रघुपति सिंधु किनारे ।

बैठे पढ़ते रहे छंद

अनुनय के प्यारे-प्यारे।।

उत्तर में जब एक नाद भी

उठा नहीं सागर से ।

उठी अधीर धधक पौरुष की

आग राम के शर से ।।

सिंधु देह धर 'त्राहि-त्राहि

करता आ गिरा शरण में।

चरण पूज दासता ग्रहण की,

बँधा मूढ 'बंधन में ।।

सच पूछो तो शर में ही

बसती है दीप्ति विनय की।

संधि-वचन संपूज्य उसी का

जिसमें शक्ति विजय की।।

सहनशीलता, क्षमा, दया को

तभी पूछता जग है,

बल का दर्प चमकता उसके

पीछे जब जगमग है।

"दीप्ति" शब्द का विलोम शब्द बताइए।

  1. AOption (a)

    अंधकार

  2. BOption (b)

    आकाश

  3. COption (c)

    सूर्य

  4. DOption (d)

    जल

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

अंधकार

Why this answer is correct

उपर्युक्त पद्य के संदर्भ में "दीप्ति" शब्द का विलोम शब्द का सही उत्तर है- अंधकार

Key Points

  • 'दीप्ति' शब्द का अर्थ है - प्रकाश, चमक, आभा या प्रभा। चूँकि इसका अर्थ उजाले से संबंधित है, इसलिए इसका ठीक विपरीत अर्थ 'अंधकार' होगा।
  • व्याकरण के अनुसार, जो शब्द किसी शब्द का उल्टा या विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलोम शब्द कहते हैं।
  • अन्य उदाहरण: आलोक का विलोम तिमिर, उजाला का विलोम अँधेरा।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविलोम शब्दअर्थ
आकाशपातालनभ या गगन
सूर्यचंद्रमादिनकर या रवि
जलथल / अग्निनीर या पानी

Important Points 

 विलोम शब्द (Antonyms) के निर्माण के मुख्य तरीके-

  1. उपसर्ग जोड़कर (जैसे: मान - अपमान)
  2. उपसर्ग परिवर्तन द्वारा (जैसे: सुलभ - दुर्लभ)
  3. लिंग परिवर्तन द्वारा (जैसे: राजा - रानी)
  4. नञ् समास द्वारा (जैसे: सार्थक - निरर्थक)

Additional Information

शब्दविलोम शब्द
ऋतअनृत
एकांतअनेकांत
कर्कशकोमल
चीरन्तननश्वर
प्रफुल्लम्लान
बरबरसभ्य
युयुत्सामैत्री
श्लाघ्यअश्लाघ्य