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Question 121

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

लेखक बालगोबिन भगत की किस बात पर सबसे ज्यादा मुग्ध थे?

  1. AOption (a)

    उनकी साहब की सेवा पर

  2. BOption (b)

    उनके मधुर गान पर

  3. COption (c)

    उनके गृहस्थ होते हुए भी साधु होने पर

  4. DOption (d)

    उनके नृत्य पर

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Correct answer

Answer: (b)B.

उनके मधुर गान पर

Why this answer is correct

सही उत्तर - उनके मधुर गान पर

Key Points

  • बालगोबिन भगत' रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध रेखाचित्र है, जो 60 वर्षीय गृहस्थ के माध्यम से साधुता की परिभाषा को पुनर्परिभाषित करता है।
  • कबीरपंथी भगत सादगी, ईमानदारी और मधुर गायन के धनी थे। बेटा, बहू और खेती होने के बावजूद वे नि:स्वार्थ, रूढ़िमुक्त और कबीर के आदर्शों पर चलने वाले सच्चे संत थे।

Question 122

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

सही संधि-विच्छेद पहचानिए:

वातावरण का सही संधि-विच्छेद है -

  1. AOption (a)

    वात + आवरण

  2. BOption (b)

    वाता + वरण

  3. COption (c)

    वाता + अवरण

  4. DOption (d)

    इनमें से कोई नहीं

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Correct answer

Answer: (a)A.

वात + आवरण

Why this answer is correct

वातावरण का सही संधि-विच्छेद है- वात + आवरण

Key Points

  • 'वातावरण' का संधि विच्छेद 'वात + आवरण' होता है।
  • इसमें दीर्घ स्वर संधि का प्रयोग हुआ है।
  • नियम: जब (अ, आ) के बाद (अ, आ) आए तो दोनों मिलकर 'आ' हो जाते हैं।
  • यहाँ वात (त् + अ) + आवरण (आ) मिलकर 'ता' (त् + आ) बनाते हैं।
  • वात का अर्थ है 'वायु' और आवरण का अर्थ है 'ढका हुआ' या 'घेरा'।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण -

  • वाता + वरण - यह विच्छेद सार्थक नहीं है क्योंकि 'वाता' कोई सार्थक शब्द नहीं है।
  • वाता + अवरण - यह व्याकरणिक दृष्टि से अशुद्ध है।

Important Points 

 

  • दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को संधि कहते हैं।
  • संधि के मुख्य तीन भेद होते हैं:
  • स्वर संधि: दो स्वरों के मेल से होने वाला विकार।
  • व्यंजन संधि: व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला विकार।
  • विसर्ग संधि: विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला विकार।

Additional Information 

 

स्वर संधि के भेदपरिभाषा / नियमउदाहरण
दीर्घ संधिसमान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। (अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ)पुस्तकालय (पुस्तक + आलय)
गुण संधिअ/आ के बाद इ/ई आए तो 'ए', उ/ऊ आए तो 'ओ' और ऋ आए तो 'अर्' हो जाता है।सुरेंद्र (सुर + इंद्र)
वृद्धि संधिअ/आ के बाद ए/ऐ आए तो 'ऐ' और ओ/औ आए तो 'औ' हो जाता है।सदैव (सदा + एव)
यण संधिइ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद कोई असमान स्वर आए तो क्रमशः 'य', 'व', 'र' हो जाता है।अत्यधिक (अति + अधिक)

Question 123

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'आत्मकथ्य' कविता के लेखक है ?

  1. AOption (a)

    सूरदास 

  2. BOption (b)

    तुलसीदास 

  3. COption (c)

    सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

  4. DOption (d)

    जयशंकर प्रसाद

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Correct answer

Answer: (d)D.

जयशंकर प्रसाद

Why this answer is correct

'आत्मकथ्य' कविता के लेखक जयशंकर प्रसाद है।

Key Points

  • अत्मकथ्य कविता जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई है।
  • जयशंकर प्रसाद छायावादी कावी थे।
  • जयशंकर प्रसाद: जन्म- 1889 (वाराणसी),  मृत्यु- 1937 ।
  • जयशंकर प्रसाद की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं - चित्राधार, कानन कुसुम, झरना, आँसू, लहर और कामायनी आदि है।
  • जयशंकर प्रसाद के द्वारा रचित नाटक- अजातशत्रु, चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त और ध्रुवस्वामिनी आदि।
  • जयशंकर प्रसाद के द्वारा रचित उपन्यास- कंकाल, तितली और इरावती आदि।

अन्य विकल्प-

रचनाकाररचना
सूरदाससूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली आदि।
तुलसीदासकवितावली, गीतावली, दोहावली,
कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका आदि।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'अनामिका, परिमल,
गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते आजि।

Question 124

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'आत्मकथ्य' कविता के अनुसार  कवि के सरल स्वभाव के कारण किसने धोखा दिया है? 

  1. AOption (a)

    प्रेमिका ने

  2. BOption (b)

    मित्रों ने

  3. COption (c)

    सम्बन्धियों ने

  4. DOption (d)

    कोई नहीं

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Correct answer

Answer: (b)B.

मित्रों ने

Why this answer is correct

सही उत्तर  मित्रों ने है। 

Key Points

  • कवि के सरल स्वभाव का फायदा उनकी मित्रों ने उठाया।
  • "आत्मकथ्य" जयशंकर प्रसाद जी की रचना ���ै ,जो "हंस" पत्रिका में सम्पादित हुई थी।
  • आत्मकथा कवि के मन की उपज नहीं बल्कि मित्रों के विशेष आग्रह पर असहमति के तर्क से कविता "आत्मकथ्य" है।
  • ​कविता की निम्न पंक्तियों से भाव स्पष्ट होता है:
  • किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले-

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

 Additional Information

कवि परिचय:

  • जयशंकर प्रसाद छायावादी कवि हैं।
  • जीवनकाल: 1889 -1937
  • प्रमुख रचनाएँ - झरना ,आँसू, लहर, कामायनी।
  • नाटक ग्रन्थ - चन्द्रगुप्त, स्कंदगुप्त,अजातशत्रु ,ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग-यज्ञ।
  • उपन्यास - कंकाल ,तितली ,इरावती(अधूरा )।

 

भाषागत विशेषताएं:

  • आत्मकथ्य कविता में खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग है।
  • अलंकार: मानवीकरण, रूपक, पुनरुक्ति, अनुप्रास।
  • बिम्बात्मक शैली का प्रयोग है।

Question 125

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'बालगोबिन भगत' रेखाचित्र के आधार पर बताइए कि लेखक को बालगोबिन किस कारण संन्यासी लगते हैं ?

  1. AOption (a)

    संन्यासियों जैसी वेशभूषा के कारण

  2. BOption (b)

    साधु-संगति के कारण

  3. COption (c)

    मानवीयता के कारण

  4. DOption (d)

    पूजा-पाठ में निमग्न रहने के कारण

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Correct answer

Answer: (c)C.

मानवीयता के कारण

Why this answer is correct

'बालगोबिन भगत' रेखाचित्र के आधार पर लेखक को बालगोबिन संन्यासी लगने का सही उत्तर है- मानवीयता के कारण

Key Points

  • रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित रेखाचित्र 'बालगोबिन भगत' में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि संन्यास का आधार बाहरी वेशभूषा नहीं, बल्कि मानवीय सरोकार होता है।
  • लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत अपनी मानवीयता, लोक संस्कृति और सामूहिक चेतना के कारण संन्यासी प्रतीत होते थे। उनकी वेशभूषा साधारण थी, लेकिन उनके विचार और आचरण एक सच्चे संन्यासी के थे।
  • बालगोबिन भगत कबीर के आदर्शों पर चलते थे और अपनी कमाई पर भी अपना अधिकार नहीं मानते थे, जो उनके निस्वार्थ व्यक्तित्व को दर्शाता है।
  • उदाहरण के लिए, पुत्र की मृत्यु पर शोक मनाने के बजाय उसे 'उत्सव' की तरह मनाना उनकी आध्यात्मिक उच्चता और मानवीयता का प्रतीक है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थविवरण
साधु-संगतिसाधुओं की संगतियद्यपि वे साधु स्वभाव के थे, परंतु केवल संगति मात्र उन्हें संन्यासी नहीं बनाती थी।
पूजा-पाठपूजा और पाठवे केवल रस्मी पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते थे, बल्कि आचरण की शुद्धता पर बल देते थे।

Important Points 

 'बालगोबिन भगत' पाठ के मुख्य तत्व-

  1. सामाजिक कुरीतियों का विरोध: बालगोबिन भगत ने विधवा-विवाह का समर्थन कर समाज की रूढ़ियों को तोड़ा।
  2. कबीरपंथ का प्रभाव: वे कबीर को 'साहब' मानते थे और उनके पदों का गायन करते थे।
  3. मृत्यु के प्रति दृष्टिकोण: वे मृत्यु को विरहिणी आत्मा का परमात्मा से मिलन मानते थे।

Additional Information

विधा/अवधारणापरिभाषाविशेषता
रेखाचित्र (Sketch)जब किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना का शब्दों के माध्यम से ऐसा चित्रण किया जाए कि पाठक के सामने चित्र उपस्थित हो जाए।सजीवता = शब्दों का प्रभाव यथार्थवाद = वास्तविक जीवन का चित्रण

Question 126

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

'लखनवी अंदाज' व्यंग्य के रचनाकार हैं:

  1. AOption (a)

    यशपाल

  2. BOption (b)

    रांगेय राघव

  3. COption (c)

    स्वयंप्रकाश

  4. DOption (d)

    हरिशंकर परसाई

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Correct answer

Answer: (a)A.

यशपाल

Why this answer is correct

सही उत्तर है -यशपाल

  • लखनवी अंदाज की विधा व्यंग्य है।

Key Points

  • यशपाल जी की प्रमुख कहानियां  -दूसरी नाक, परदा ,मक्रील

Additional Information हरिशंकर परसाई​

  • वे हिंदी के पहले रचनाकार है¸ जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दरजा दिलाया
  • प्रमुख रचनाएं
  • कहानी–संग्रह: हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे, भोलाराम का जीव।
  • उपन्यास: रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज, ज्वाला और जल।
  • संस्मरण: तिरछी रेखाएँ।
  • हरिशंकर परसाई के व्यंग्य 'शिकायत मुझे भी है'
  • व्यंग्य लेखन से हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने और हरिशंकर परसाई बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया

​ ​ 

​​रांगेय राघव की प्रमुख रचनाएँ 

  • -विषाद मठ, उबाल, राह न रुकी, बारी बरणा खोल दो, देवकी का बेटा, रत्ना की बात, भारती का सपूत, यशोधरा जीत गयी, घरौंदा, लोई का ताना, लखिमा की आँखें, मेरी भव बाधा हरो,

स्वयं प्रकाश

  • प्रमुख रचनाएँ: स्वयं प्रकाश अपने समय के प्रसिद्ध कहानीकार हैं। ...
  • कहानी संग्रह: मात्रा और भार (1975), सूरज कब निकलेगा (1981), आसमां कैसे-कैसे (1982), अगली किताब (1988), आएंगे अच्छे दिन भी (1991), आदमी जात का आदमी (1994), अगले जनम (2002), संधान (2006), छोटू उस्ताद (2015)।

Question 127

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के ’राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद‘ में निम्‍न में से किस रस का प्रयोग किया है ?

  1. AOption (a)

    वीर रस

  2. BOption (b)

    हास्‍य रस

  3. COption (c)

    क्रोध रस

  4. DOption (d)

    भयानक रस

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Correct answer

Answer: (a)A.

वीर रस

Why this answer is correct

सही उत्तर है- वीर रस

Key Points

  • तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के 'बालकांड' से उद्धृत इस संवाद में लक्ष्मण और परशुराम के बीच वीरता और ओजपूर्ण संवाद हुआ है।
  • साहित्य में जहाँ उत्साह नामक स्थायी भाव जागृत होता है, वहाँ वीर रस होता है। इसमें ओज गुण की प्रधानता होती है।
  • उदाहरण: "वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।"
  • उदाहरण: "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
हास्य रसकिसी की विचित्र वेशभूषा, चेष्टा आदि को देखकर हृदय में जो हास का भाव उत्पन्न होता है।काव्य रस
क्रोध (रौद्र रस)अपराध या अपमान के कारण हृदय में उत्पन्न क्रोध का भाव। (विकल्प में क्रोध भाव दिया गया है, जिसका रस 'रौद्र' है)।काव्य रस
भयानक रसकिसी भयानक वस्तु या अनिष्टकारी व्यक्ति को देखने से उत्पन्न भय की स्थिति।काव्य रस

Important Points 

 रस के प्रमुख भेद-

  1. शृंगार रस
  2. हास्य रस
  3. करुण रस
  4. रौद्र रस
  5. वीर रस
  6. भयानक रस
  7. बीभत्स रस
  8. अद्भुत रस
  9. शांत रस
  10. वत्सल रस
  11. भक्ति रस

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
रौद्र रसजब किसी काव्य में किसी व्यक्ति के द्वारा क्रोध के प्र��र्शन का वर्णन होता है, तो वहाँ रौद्र रस होता है।श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे। सब शील अपना भूलकर करतल युगल मलने लगे।

Question 128

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

असुमेलित विकल्प का चयन कीजिए -

  1. AOption (a)

    मुक्तावली = मुक्त + अवली = दीर्घ स्वर संधि

  2. BOption (b)

    मनोविकार = मनः + विकार = विसर्ग संधि

  3. COption (c)

    भवन्नाम = भवत् + नाम = व्यंजन संधि

  4. DOption (d)

    षडानन = षट् + आनन = व्यंजन संधि

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Correct answer

Answer: (a)A.

मुक्तावली = मुक्त + अवली = दीर्घ स्वर संधि

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में से 'असुमेलित' विकल्प का सही उत्तर है- मुक्तावली = मुक्त + अवली = दीर्घ स्वर संधि

Key Points

  • 'मुक्तावली' का सही संधि विच्छेद मुक्ता + अवली होता है, न कि 'मुक्त + अवली'।
  • यहाँ 'मुक्ता' (मोती) और 'अवली' (पंक्ति) के मेल से 'मुक्तावली' (मोतियों की माला) शब्द बना है। इसमें दीर्घ स्वर संधि का नियम लागू होता है।
  • नियम: जब ह्रस्व या दीर्घ 'अ, इ, उ' के बाद समान स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आएँ, तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ (दीर्घ) हो जाते हैं। यहाँ आ + अ = आ का मेल हुआ है।
  • अन्य उदाहरण:
  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (आ + अ = आ)
  • हिम + आलय = हिमालय (अ + आ = आ)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
मनोविकारमनः + विकार (विसर्ग का 'ओ' में परिवर्तन)विसर्ग संधि
भवन्नामभवत् + नाम (त् का न् में परिवर्तन)व्यंजन संधि
षडाननषट् + आनन (ट् का ड् में परिवर्तन)व्यंजन संधि

Important Points 

 संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि: दो स्वरों के मेल से होने वाला परिवर्तन।
  2. व्यंजन संधि: व्यंजन का व्यंजन या स्वर से मेल होने पर उत्पन्न विकार।
  3. विसर्ग संधि: विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला विकार।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
दीर्घ संधिदो समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं।भानु + उदय = भानूदय कपि + ईश = कपीश
व्यंजन संधियदि पहले शब्द के अंत में व्यंजन हो और दूसरे के आदि में स्वर या व्यंजन हो।वाक् + ईश = वागीश उत् + लास = उल्लास

Question 129

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

निम्न में से गणों की संख्या कितनी है?

  1. AOption (a)

    आठ

  2. BOption (b)

    चार

  3. COption (c)

    छ:

  4. DOption (d)

    दस

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Correct answer

Answer: (a)A.

आठ

Why this answer is correct

गणों की संख्या का सही उत्तर है- आठ

Key Points

  • छन्द शास्त्र के अनुसार तीन वर्णों के समूह को गण कहा जाता है। वर्णिक छन्दों की गणना 'गण' के आधार पर ही की जाती है।
  • गणों की कुल संख्या आठ होती है, जिन्हें याद करने का प्रसिद्ध सूत्र 'यमाताराजभानसलगा' है। इस सूत्र के पहले आठ वर्ण आठ गणों के सूचक हैं।
  • लघु वर्ण को 'l' (एक मात्रा) और गुरु वर्ण को 'S' (दो मात्रा) के रूप में दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: यगण (यमाता - ISS) और मगण (मातारा - SSS)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
चारछन्द में सामान्यतः चार चरण होते हैं, परन्तु यह गणों की संख्या नहीं है।संख्या वाचक
छ:कुण्डलिया और छप्पय जैसे छन्दों में छ: चरण होते हैं।संख्या वाचक
दससूत्र 'यमाताराजभानसलगा' में कुल दस वर्ण हैं, लेकिन गण केवल आठ ही होते हैं।संख्या वाचक

Important Points 

 छन्द के प्रमुख अंगों के भेद-

  1. चरण या पद
  2. वर्ण और मात्रा
  3. संख्या और क्रम
  4. गण (तीन वर्णों का समूह)
  5. गति (छन्द के पढ़ने का प्रवाह)
  6. यति (विराम)
  7. तुक (समान उच्चारण वाले शब्द)

Additional Information​आठ गण और उनके मात्रा-स्वरूप (यमाताराजभानसलगा):

  1. यगण (यमाता): I S S (लघु-गुरु-गुरु) - आदि लघु
  2. मगण (मातारा): S S S (गुरु-गुरु-गुरु) - सर्व गुरु
  3. तगण (ताराज): S S I (गुरु-गुरु-लघु) - अंत लघु
  4. रगण (राजभा): S I S (गुरु-लघु-गुरु) - मध्य लघु
  5. जगण (जभान): I S I (लघु-गुरु-लघु) - मध्य गुरु
  6. भगण (भानस): S I I (गुरु-लघु-लघु) - आदि गुरु
  7. नगण (नसल): I I I (लघु-लघु-लघु) - सर्व लघु
  8. सगण (सलगा): I I S (लघु-लघु-गुरु) - अंत गुरु

Question 130

MP ESB Hospital Assistant 2026• Test

सोक बिकल सब रोवहिं रानी, रूपु सीलु बलु तेजु बखानी ।

करहि बिलाप अनेक प्रकारा, परहिं भूमितल बारहिं बारा ॥

इन काव्य पंक्तियों में कौन-सा रस है ?

  1. AOption (a)

    अद्भुत

  2. BOption (b)

    भयानक

  3. COption (c)

    करुण

  4. DOption (d)

    वात्सल्य

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Correct answer

Answer: (c)C.

करुण

Why this answer is correct

दी गई काव्य पंक्तियों "सोक बिकल सब रोवहिं रानी..." में निहित रस का सही उत्तर है- करुण रस

Key Points

  • इन काव्य पंक्तियों में राजा दशरथ की मृत्यु के बाद उनकी रानियों के विलाप और शोक का वर्णन किया गया है,
  • जहाँ रानियाँ उनके रूप, शील और बल का बखान करते हुए बार-बार भूमि पर गिरकर विलाप कर रही हैं।
  • जहाँ किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति के विनाश, अनिष्ट या वियोग से हृदय में जो क्षोभ उत्पन्न होता है, वहाँ करुण रस होता है। इसका स्थायी भाव शोक है।
  • उदाहरण: "अभी तो मुकुट बँधा था माथ, हुए कल ही हल्दी के हाथ।"

Important Points 

 हिंदी साहित्य में रस के भेद-

  1. शृंगार रस (स्थायी भाव: रति)
  2. हास्य रस (स्थायी भाव: हास)
  3. करुण रस (स्थायी भाव: शोक)
  4. रौद्र रस (स्थायी भाव: क्रोध)
  5. वीर रस (स्थायी भाव: उत्साह)
  6. भयानक रस (स्थायी भाव: भय)
  7. बीभत्स रस (स्थायी भाव: जुगुप्सा/घृणा)
  8. अद्भुत रस (स्थायी भाव: विस्मय)
  9. शांत रस (स्थायी भाव: निर्वेद)

Additional Information-

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थउदाहरण
अद्भुतकिसी अलौकिक या आश्चर्यजनक वस्तु को देखकर उत्पन्न विस्मय का भाव। स्थायी भाव - विस्मय​बिनु पद चलै सुनै बिनु काना।
कर बिनु कर्म करै विधि नाना।।
भयानककिसी डरावनी वस्तु या व्यक्ति को देखने से उत्पन्न भय की स्थिति। स्थायी भाव - भय​चीख रही थी रात भयानक, सन्नाटा था मौन अपार।
काले बादलों की ओट से, गूँज रही थी मौत की पुकार।।
वात्सल्यमाता-पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम या स्नेह का भाव। स्थायी भाव - वत्सलता​मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।
भोर भये गयौनि के पाछे, मधुवन मोहि पठायो॥