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Question 171

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए सबसे उपयुक्त शब्द का चयन करें।

सूर्य उदय के _________ मैं भी जाग जाता हूँ।

  1. AOption (a)

    अंदर बाहर

  2. BOption (b)

    आगे पीछे

  3. COption (c)

    ऊपर नीचे

  4. DOption (d)

    साथ

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

साथ

Why this answer is correct

सही उत्तर साथ है।

Key Points

  • उक्त वाक्य के अनुसार रिक्त स्थान की पूर्ति हेतु 'साथ' शब्द सार्थक है।
  • अत: सही विकल्प 'साथ' है।
  • पूर्ण सार्थक वाक्य - सूर्य उदय के साथ मैं भी जाग जाता हूँ।

Additional Information 

कारक
* संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उनका (संज्ञा या सर्वनाम का) क्रिया से सम्बन्ध सूचित हो, उस रूप को 'कारक' कहते हैं। * संज्ञा अथवा सर्वनाम को क्रिया से जोड़ने वाले चिह्न अथवा परसर्ग ही कारक कहलाते हैं।

Question 172

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए वाक्य का वह भाग ज्ञात करें जिसमें कोई त्रुटि है।

आप सायं मेरे घर अवश्य आएँ मैं तुम लोगों को कुछ कीमती पुस्तकें भेंट करूँगा।

  1. AOption (a)

    मेरे घर अवश्य आएँ

  2. BOption (b)

    मैं तुम लोगों को

  3. COption (c)

    कुछ कीमती पुस्तकें भेट करूँगा |

  4. DOption (d)

    आप सायं

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

मैं तुम लोगों को

Why this answer is correct

दिए गए वाक्य में वाक्य खंड “मैं तुम लोगों को” में सर्वनाम संबंधी त्रुटि है। अन्य सभी वाक्य खंडो में कोई त्रुटि नही हैं।

Key Points

  • अशुद्ध वाक्‍य- आप सायं मेरे घर अवश्य आएँ मैं तुम लोगों को कुछ कीमती पुस्तकें भेंट करूँगा।
  • इस वाक्‍य में तुम शब्‍द का प्रयोग सही नहीं क‍िया गया है।
  • शुद्ध वाक्य- आप सायं मेरे घर अवश्य आएँ मैं आप लोगों को कुछ कीमती पुस्तकें भेंट करूँगा।
  • अन्‍य व‍िकल्‍प असंगत हैं।

Question 173

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

'गीता _____ पढ़ती है।'

रिक्त स्थान के लिए उचित क्रिया विशेषण का चयन कीजिये:

  1. AOption (a)

    ध्यानपूर्वक

  2. BOption (b)

    अकस्मात

  3. COption (c)

    तड़ातड़

  4. DOption (d)

    ज़रा

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Correct answer

Answer: (a)A.

ध्यानपूर्वक

Why this answer is correct

दिए गए विकल्पों में से रिक्त स्थान के लिए उचित क्रिया विशेषण "ध्यानपूर्वक" है।  

Key Points

  • ध्यानपूर्वक क्रिया विशेषण पढ़ने से संबंधी उचित विशेषता बता रहा है।
  • वाक्य होगा - गीता ध्यानपूर्वक पढ़ती है।
  • जो शब्द क्रिया की विशेषता बतलाते है, उन्हें क्रिया विशेषण कहा जाता है।
  • अन्य विकल्प  रिक्त स्थान के लिए उचित नही होंगे।

Additional Information

अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के भेद- 

रीतिवाचक क्रिया विशेषण - ऐसे क्रिया विशेषण शब्द जो किसी क्रिया के होने की विधि या तरीके के बारे में बताते हैं, वह शब्द रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहलाते हैं। जैसे-  सुनील मधुर बोलता है। रीतिवाचक क्रिया-विशेषण शब्द- धीरे, जल्दी, ऐसे, वैसे, कैसे, ध्यानपूर्वक, सुखपूर्वक, शांतिपूर्वक आदि।
परिमाणवाचक क्रियाविशेषण- जो शब्द क्रिया के परिमाण (मात्रा) से सम्बद्ध विशेषता प्रकट करें, उन्हें 'परिमाणवाचक क्रियाविशेषण' कहते है। जैसे- वह कम बोलता है। परिमाणबोधक क्रिया-विशेषण शब्द- थोड़ा, पर्याप्त, जरा, खूब, अत्यन्त, तनिक, बिलकुल, स्वल्प, केवल, सर्वथा, अल्प आदि।
स्थानवाचक क्रिया-विशेषण- जो शब्द क्रिया के स्थान से सम्बद्ध विशेषता बताते हैं, उन्हें स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे- कृपया ऊपर चले जाइए। स्थानवाचक क्रिया-विशेषण शब्द- वहाँ, कहाँ, पास, दूर, अन्यत्र, आसपास आदि।
कालवाचक क्रिया-विशेषण- जो शब्द क्रिया के समय से सम्बद्ध विशेषता बताएँ, उन्हें कालवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे- वह तुरन्त चला गया। कालवाचक क्रिया-विशेषण शब्द- अभी-अभी, आज, कल, परसों, प्रतिदिन, अब, जब, कब, तब, लगातार, बार-बार, पहले, बाद में, निरन्तर, नित्य, दोपहर, सायं आदि।

Question 174

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए वाक्य में उचित परसर्ग का चयन करके रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।

पेड़ ______ पत्ता गिरा।

  1. AOption (a)

    पर

  2. BOption (b)

    में

  3. COption (c)

    से

  4. DOption (d)

    की

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Correct answer

Answer: (c)C.

से

Why this answer is correct

सही उत्तर है - "से" l

Key Points

  • संपूर्ण वाक्य:- पेड़से पत्ता गिरा l इस वाक्य में "से" अपादान कारक का उदाहरण है l
  • अपादान कारक:-
  • ऐसे शब्द जिनके माध्यम से संज्ञा व सर्वनाम के किसी रूप से दो वस्तुओं का अलग-अलग बोध होता हो, उनको अपादान कारक कहा जाता है।
  • अपादान कारक में से विभक्ति चिन्ह का प्रयोग होता है।
  • अपादान कारक के मुख्य उदाहरण:-
  • पेड़ से सेब नीचे गिर गया।
  • ऊपर उदाहरण में ‘से’ विभक्ति चिन्ह का प्रयोग किया गया है। उदाहरण में सेब के पेड़ से अलग हो जाने की बात कही जा रही है। जब दो चीजें अलग होती है तो वह वाक्य अपादान कारक के अंतर्गत आता है। अतः यह उदाहरण अपादान कारक का एक भाग है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण :-

  • पर - अधिकरण कारक का उदाहरण है l
  • में - अधिकरण कारक का उदाहरण है l
  • की - संबंध कारक का उदाहरण है l यह तीनों विकल्प गलत उत्तर है क्योंकि इनमें से किसी को भी रिक्त स्थान में भरने पर वाक्य का कोई अर्थ स्पष्ट नहीं होता l

Additional Information

  • संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके सम्बन्ध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं।
  • हिन्दी में आठ कारक होते हैं -
  • कर्ता,
  • कर्म,
  • करण,
  • सम्प्रदान,
  • अपादान,
  • सम्बन्ध,
  • अधिकरण और
  • सम्बोधन।
  • अधिकरण कारक की परिभाषा:-
  • अधिकरण का मतलब आश्रय होता है, संज्ञा का वह स्वरूप जिसमें किया कि आधार का बोध होता हो, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। अधिकरण कारक में विभक्ति चिन्ह में, भीतर अंदर, ऊपर, बीच, इत्यादि शब्दों का प्रयोग होता है।
  • उदाहरण -
  • ​पानी में मछली रहती है। - इस वाक्य में 'पानी में' अधिकरण कारक है, क्योंकि यह मछली के आधार पानी का बोध करा रहा है।
  • भँवरा फूलों पर मँडरा रहा है।
  • संबंध कारक की परिभाषा:-  ऐसे शब्द जिनके माध्यम से संज्ञा एवं सर्वनाम का वह रूप जो किसी दो वस्तुओं के बीच में संबंध बताता हो, उन्हें संबंध कारक कहते हैं। सम्बन्ध कारक के विभक्ति चिन्ह का, के, की, ना, ने, नो, रा, रे, री आदि हैं।
  • उदाहरण -
  • वह राम का बेटा है।
  • यह सुरेश की बहन है।
  • बच्चे का सिर दुःख रहा है।
  • अपादान कारक के अन्य उदाहरण:-
  • सुरेश छत से गिर गया।
  • राधा के हाथ से रोटी गिर गई।

Question 175

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

"दान" शब्द का विशेषण पहचाहिए।

  1. AOption (a)

    दानी

  2. BOption (b)

    दानेदार

  3. COption (c)

    दानवर

  4. DOption (d)

    देन

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Correct answer

Answer: (a)A.

दानी

Why this answer is correct

"दान" शब्द का विशेषण - दानी

Key Points

  • मोहन दानी व्यक्ति है।
  • उपरोक्त वाक्य में दानी विशेषण शब्द है जो कि मोहन की विशेषता बता रहा है।
  • दानी गुणवाचक विशेषण है।

Additional Information  

  • संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने वाले शब्दों को विशेषण कहते है

विशेषण के भेद- 

गुण वाचक विशेषण - जिन विशेषणों से पदार्थ के या व्यक्ति के गुण, आकार, दशा, अवस्था, रंग, काल स्थान, रूप, स्थिति आदि का बोध होता है, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे-अच्छा, दानी, पीला, छोटा, बड़ा, मधुर, नरम, कठोर, उत्तरी, पूर्वी, नया, युवा, देशी, प्राचीन आदि।
परिमाण वाचक विशेषण - जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की माप-तोल संबंधी विशेषता प्रकट करें, उसे परिमाणवाचक कहते हैं। जैसे-थोड़ा दूध, कम चीनी, कुछ घी आदि।
संख्यावाचक विशेषण - जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या विशेषता का बोध कराते हैं, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे तीन लड़के, चतुर्थ वर्ग, दस गुना आदि।
सार्वनामिक विशेषण - जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। जैसे - जैसे: यह विद्यालय, वह बालक, वह खिलाड़ी आदि।

Question 176

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

असल और बनावटी में अंतर धुँधलाने के कारण सेवाएँ या कुछ भी देने के लिए सुपात्र का चयन आजकल चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए विशेष सूझ-बूझ और विवेकशीलता आवश्यक हैं। उपलब्धि या सफलता स्वयं में लक्ष्य नहीं हो सकती बल्कि व्यक्ति के सतत् निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है। मन और निष्ठा से निष्पादित कार्य में व्यक्ति के समूचे कौशल प्रयुक्त होते हैं और उसमें समाज को देने का भाव प्रधान रहता है। लेन-देन में निष्ठा का नियम आशीर्वाद के आदान-प्रदान में भी लागू होता है। अनेक व्यक्ति उन बुजुर्गों से आशीर्वाद पाना अपना अधिकार समझते है जिनकी सुध लेना तो दूर, जिन्हें हेय मानते हुए उनसे सदा दूरी बनाए रखी हो। आशीर्वाद तो बड़ी बात हुई, एक तुच्छ-सी चीज़ आपको यूँ ही कोई क्यों देगा। आशीर्वाद बर्गर या सिमकार्ड सी भौतिक बाज़ार में सहज उपलब्ध होने वाली वस्तु नहीं है। उसे दिल से सम्मान देना होगा। देने वाला आप की मंशाओं और फ़ितरत को समझता है। आप भले ही कुछ न दे, यह भी आवश्यक नहीं कि उसके सानिध्य में रहें। पर उसके विचारों, भावनाओं को श्रेष्ठ समझते हुए वैसा करने का यत्न करेंगे तो वह हृदय से आप पर आशीर्वाद बरसाएगा और आप धन्य हो जाएँगे।

‘असल और बनावटी में अंतर धुंधलाने' का क्या अर्थ है:

  1. AOption (a)

    असली और बनावटी में अंतर करना कठिन है।

  2. BOption (b)

    असली और बनावटी में अंतर करना सरल है।

  3. COption (c)

    असली और बनावटी में अंतर हो ही नहीं सकता है।

  4. DOption (d)

    असली और बनावटी में अंतर करना सहज है।

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Correct answer

Answer: (a)A.

असली और बनावटी में अंतर करना कठिन है।

Why this answer is correct

सही उत्तर 'असली और बनावटी में अंतर करना कठिन है' है।

दिए गए गद्यांश के अनुसार, "असल और बनावटी में अन्तर धुधलाने के कारण सेवाएँ या कुछ भी देने के लिए सुपात्र का चयन आजकल चुनौतीपूर्ण है"।

Key Points

  • असल और बनावटी में अंतर स्पष्ट करने के लिए, विशेष सूझ-बूझ और विवेकशीलता अवश्यक है।
  • असली का विलोम शब्द: कृत्रिम
  • बनावटी का विलोम शब्द: वास्तविक

Question 177

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

असल और बनावटी में अंतर धुँधलाने के कारण सेवाएँ या कुछ भी देने के लिए सुपात्र का चयन आजकल चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए विशेष सूझ-बूझ और विवेकशीलता आवश्यक हैं। उपलब्धि या सफलता स्वयं में लक्ष्य नहीं हो सकती बल्कि व्यक्ति के सतत् निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है। मन और निष्ठा से निष्पादित कार्य में व्यक्ति के समूचे कौशल प्रयुक्त होते हैं और उसमें समाज को देने का भाव प्रधान रहता है। लेन-देन में निष्ठा का नियम आशीर्वाद के आदान-प्रदान में भी लागू होता है। अनेक व्यक्ति उन बुजुर्गों से आशीर्वाद पाना अपना अधिकार समझते है जिनकी सुध लेना तो दूर, जिन्हें हेय मानते हुए उनसे सदा दूरी बनाए रखी हो। आशीर्वाद तो बड़ी बात हुई, एक तुच्छ-सी चीज़ आपको यूँ ही कोई क्यों देगा। आशीर्वाद बर्गर या सिमकार्ड सी भौतिक बाज़ार में सहज उपलब्ध होने वाली वस्तु नहीं है। उसे दिल से सम्मान देना होगा। देने वाला आप की मंशाओं और फ़ितरत को समझता है। आप भले ही कुछ न दे, यह भी आवश्यक नहीं कि उसके सानिध्य में रहें। पर उसके विचारों, भावनाओं को श्रेष्ठ समझते हुए वैसा करने का यत्न करेंगे तो वह हृदय से आप पर आशीर्वाद बरसाएगा और आप धन्य हो जाएँगे।

“उपलब्धि या सफलता व्यक्ति के सतत निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है।” का क्या तात्पर्य है?

  1. AOption (a)

    व्यक्ति द्वारा धन निवेश करके उपलब्धि तथा सफलता प्राप्त होती है।

  2. BOption (b)

    व्यक्ति द्वारा किये गए निरंतर प्रयासों से उपलब्धि या सफलता प्राप्त होती है।

  3. COption (c)

    व्यक्ति द्वारा किये गए निरंतर प्रयासों से सफलता या उपलब्धि प्राप्त नहीं होती है।

  4. DOption (d)

    व्यक्ति द्वारा प्रयास न किये जाने के बावजूद उपलब्धि या सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

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Correct answer

Answer: (b)B.

व्यक्ति द्वारा किये गए निरंतर प्रयासों से उपलब्धि या सफलता प्राप्त होती है।

Why this answer is correct

सही उत्तर 'व्यक्ति द्वारा किये गए निरंतर प्रयासों से उपलब्धि या सफलता प्राप्त होती है' है।

  • “उपलब्धि या सफलता व्यक्ति के सतत निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है” का क्या तात्पर्य व्यक्ति द्वारा किये गए निरंतर प्रयासों से उपलब्धि या सफलता प्राप्त करने से है।
  • दिए गए गद्यांश के अनुसार, "उपलब्धि या सफलता स्वयं में लक्ष्य नहीं हो सकती बल्कि व्यक्ति के सतत् निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है"।
  • अर्थात् किसी व्यक्ति की उपलब्धि या सफलता उसके निरंतर प्रयासों और उसके द्वारा किये गए कार्यों का परिणाम होता है।

Key Points 

  • प्रतिफल में 'प्रति' उपसर्ग है और सफलता में 'ता' प्रत्यय है।
  • उपसर्ग: उपसर्ग उस अक्षर या अक्षर समूह को कहते हैं जो किसी शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाता है।
  • जैसे - प्र, सु, अति, अधि, अनु, निप्र + हार = प्रहार
  • प्रत्यय: शब्द के उपरांत जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है वह प्रत्यय है।
  • जैसे - ता, औना, अन, अतश्रो + ता = श्रोता

Question 178

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

असल और बनावटी में अंतर धुँधलाने के कारण सेवाएँ या कुछ भी देने के लिए सुपात्र का चयन आजकल चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए विशेष सूझ-बूझ और विवेकशीलता आवश्यक हैं। उपलब्धि या सफलता स्वयं में लक्ष्य नहीं हो सकती बल्कि व्यक्ति के सतत् निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है। मन और निष्ठा से निष्पादित कार्य में व्यक्ति के समूचे कौशल प्रयुक्त होते हैं और उसमें समाज को देने का भाव प्रधान रहता है। लेन-देन में निष्ठा का नियम आशीर्वाद के आदान-प्रदान में भी लागू होता है। अनेक व्यक्ति उन बुजुर्गों से आशीर्वाद पाना अपना अधिकार समझते है जिनकी सुध लेना तो दूर, जिन्हें हेय मानते हुए उनसे सदा दूरी बनाए रखी हो। आशीर्वाद तो बड़ी बात हुई, एक तुच्छ-सी चीज़ आपको यूँ ही कोई क्यों देगा। आशीर्वाद बर्गर या सिमकार्ड सी भौतिक बाज़ार में सहज उपलब्ध होने वाली वस्तु नहीं है। उसे दिल से सम्मान देना होगा। देने वाला आप की मंशाओं और फ़ितरत को समझता है। आप भले ही कुछ न दे, यह भी आवश्यक नहीं कि उसके सानिध्य में रहें। पर उसके विचारों, भावनाओं को श्रेष्ठ समझते हुए वैसा करने का यत्न करेंगे तो वह हृदय से आप पर आशीर्वाद बरसाएगा और आप धन्य हो जाएँगे।

मन और पूर्ण निष्ठा से किये गए कार्य में कौनसा भाव प्रमुख होता है?

  1. AOption (a)

    परमार्थ का

  2. BOption (b)

    स्वार्थ का

  3. COption (c)

    भक्ति का

  4. DOption (d)

    स्वहित का

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Correct answer

Answer: (a)A.

परमार्थ का

Why this answer is correct

सही उत्तर 'परमार्थ का' है।

  • मन और पूर्ण निष्ठा से किये गए कार्य में परमार्थ का भाव प्रमुख होता है।
  • दिए गए गद्यांश के अनुसार, "मन और निष्ठा से निष्पादित कार्य में व्यक्ति के समूचे कौशल प्रयुक्त होते हैं और उसमें समाज को देने का भाव प्रधान रहता है"।
  • मन और निष्ठा साथ कार्य करने वाले व्यक्ति में समाज को देने का भाव प्रधान होता है अर्थात् उसमें परमार्थ का भाव होगा और परमार्थी व्यक्ति दूसरों का भला ही चाहता है, जबकि स्वार्थी व्यक्ति स्वंय का भला चहता है।

 Key Points

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • स्वार्थ का अर्थ है:  ऐसी बात, जिसमें स्वयं अपना लाभ या हित हो।
  • भक्ति का अर्थ है: पूर्ण समर्पण।
  • स्वहित का अर्थ है: जो अपने लिये हितकर हो।

Question 179

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

असल और बनावटी में अंतर धुँधलाने के कारण सेवाएँ या कुछ भी देने के लिए सुपात्र का चयन आजकल चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए विशेष सूझ-बूझ और विवेकशीलता आवश्यक हैं। उपलब्धि या सफलता स्वयं में लक्ष्य नहीं हो सकती बल्कि व्यक्ति के सतत् निवेशों का स्वाभाविक प्रतिफल होती है। मन और निष्ठा से निष्पादित कार्य में व्यक्ति के समूचे कौशल प्रयुक्त होते हैं और उसमें समाज को देने का भाव प्रधान रहता है। लेन-देन में निष्ठा का नियम आशीर्वाद के आदान-प्रदान में भी लागू होता है। अनेक व्यक्ति उन बुजुर्गों से आशीर्वाद पाना अपना अधिकार समझते है जिनकी सुध लेना तो दूर, जिन्हें हेय मानते हुए उनसे सदा दूरी बनाए रखी हो। आशीर्वाद तो बड़ी बात हुई, एक तुच्छ-सी चीज़ आपको यूँ ही कोई क्यों देगा। आशीर्वाद बर्गर या सिमकार्ड सी भौतिक बाज़ार में सहज उपलब्ध होने वाली वस्तु नहीं है। उसे दिल से सम्मान देना होगा। देने वाला आप की मंशाओं और फ़ितरत को समझता है। आप भले ही कुछ न दे, यह भी आवश्यक नहीं कि उसके सानिध्य में रहें। पर उसके विचारों, भावनाओं को श्रेष्ठ समझते हुए वैसा करने का यत्न करेंगे तो वह हृदय से आप पर आशीर्वाद बरसाएगा और आप धन्य हो जाएँगे।

निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तु बाजार से नहीं खरीदी जा सकती है?

  1. AOption (a)

    सिमकार्ड

  2. BOption (b)

    मोबाइल

  3. COption (c)

    बर्गर

  4. DOption (d)

    आशीर्वाद

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Correct answer

Answer: (d)D.

आशीर्वाद

Why this answer is correct

सही उत्तर 'आशीर्वाद' है।

  • दिए गए विकल्पों में से आशीर्वाद को बाजार से नहीं खरीदा जा सकता है।
  • दिए गए गद्यांश के अनुसार,"आशीर्वाद बर्गर या सिमकार्ड सी भौतिक बाज़ार में सहज उपलब्ध होने वाली वस्तु नहीं है। उसे दिल से सम्मान देना होगा"।​

Key Points

  • बर्गर, सिमकार्ड या मोबाइल भौतिक वस्तुए है जिसे आप बाजार से आसानी से खरीद सकते है लेकिन आशीर्वाद बाजार में मिलने वाली कोई वस्तु नहीं है। इसलिए आप इसे बाजार से नहीं खरीद सकते है।

Question 180

DSSSB MTS 2026• Test of Hindi Language and Comprehension

बगीचे में _____ फूल खिले हैं। रिक्त स्थान के लिए उचित गुणवाचक विशेषण है-

  1. AOption (a)

    दो

  2. BOption (b)

    चालीस

  3. COption (c)

    सुंदर

  4. DOption (d)

    कई

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Correct answer

Answer: (c)C.

सुंदर

Why this answer is correct

बगीचे में सुंदर फूल खिले हैं। रिक्त स्थान के लिए उचित गुणवाचक विशेषण है।

Key Points

  • वाक्य - बगीचे में सुंदर फूल खिले हैं। यहाँ पर 'सुंदर' शब्द 'फूल' का गुण बता रहा है, अत: यहाँ गुणवाचक विशेषण होगा।
  • जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण के रूप की विशेषता बताते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं।
  • जैसे - कालिदास विद्वान् व्यक्ति थे।

अन्य विकल्प -

  • संख्यावाचक विशेषण - 'दो, चालीस', 'कई'

Important Pointsविशेषण के भेद -

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. परिणामवाचक विशेषण
  3. संख्यावाचक विशेषण
  4. सार्वनामिक विशेषण

Additional Information

विशेषणपरिभाषाउदाहरण
संख्यावाचकसंज्ञा और सर्वनाम शब्दों से प्राणी, व्यक्ति, वस्तु की संख्या की विशेषता का पता चले, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।‘पाँच’ विद्यार्थी दौड़ते हैं।
परिणामवाचकजो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा या नाप-तौल के परिणाम की विशेषता बताएं उसे परिणामवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- ‘सेर’ भर दूध, ‘तोला’ भर सोना, ‘थोड़ा’ पानी, ‘कुछ’ पानी, ‘सब’ धन, ‘और’ घी लाओ, ‘दो’ लीटर दूध, ‘बहुत’ चीनी इत्यादि।मुझे थोड़ा पानी चाहिए।
​सार्वनामिकवे सर्वनाम शब्द संज्ञा के पहले आकर विशेषण का काम करते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।मेरी पुस्तक, वह बालक, वह पुस्तक आदि।