मैं आपके लिए पुस्तक लाता हूँ इस वाक्य में आपके लिए सम्प्रदान कारक का चिह्न है।
- (यहाँ पर 'के लिए' चिन्ह का प्रयोग किया जा रहा है। इससे हमें पता चल रहा है कि किसी के लिए काम किया जा रहा है।)
सम्प्रदान:-
- सम्प्रदान का अर्थ ‘देना’ होता है।
- जब वाक्य में किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए तो वहां पर सम्प्रदान कारक होता है।
- सम्प्रदान कारक के विभक्ति चिन्ह के लिए या को हैं।
उदाहरण-
- विकास तुषार को किताबें देता है।
- नरेश मीना के लिए फल लाया है।
Key Points हिन्दी में आठ कारक’ हैं -
| कारक | विभक्तियाँ |
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| 1. कर्ता | ने |
| 2. कर्म | को |
| 3. करण | से, द्वारा |
| 4. सम्प्रदान | को, के लिये, हेतु |
| 5. अपादान | से (अलग होने के अर्थ में) |
| 6. सम्बन्ध | का, की, के, रा, री, रे |
| 7. अधिकरण | में, पर |
| 8. सम्बोधन | हे! अरे! ऐ! ओ! हाय! |
Confusion Points करण और अपादान कारक में अंतर:-
- करण और अपादान दोनों ही कारकों में ‘से’ चिन्ह का प्रयोग होता है।
- परन्तु अर्थ के आधार पर दोनों में अंतर होता है।
- करण कारक में जहाँ पर ‘से’ का प्रयोग साधन के लिए होता है
- वहीं पर अपादान कारक में अलग होने के लिए किया जाता है।
Important Points
| कर्ता कारक:- - जो वाक्य में कार्य को करता है, वह कर्ता कहलाता है। कर्ता वाक्य का वह रूप होता है, जिसमे कार्य को करने वाले का पता चलता है। - कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह ‘ने’ होता है। उदाहरण- - विकास ने फुटबॉल खेली। - दिनेश ने पीड़ित की सहायता की। अपादान कारक- - जब संज्ञा या सर्वनाम के किसी रूप से किन्हीं दो वस्तुओं के अलग होने का बोध होता है, तब वहां अपादान कारक होता है। - अपादान कारक का भी विभक्ति चिन्ह 'से' (अलगाव) होता है। उदाहरण- - पेड़ से आम नीचे गिर गया। - सुरेश छत से गिर गया। करणकारक:- - वह साधन जिससे क्रिया होती है, वह करण कहलाता है। यानि, जिसकी सहायता से किसी काम को अंजाम दिया जाता वह करण कारक कहलाता है। - करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते है- से और के द्वारा। उदाहरण- - बच्चे गाड़ियों से खेल रहे हैं। - सुनील ने अपनी पत्नी के द्वारा खाना बनवाया। |
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