'ऊँट के गले में बिल्ली' - इस लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
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बेमेल संबंध
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अच्छी दोस्ती
- COption (c)
खतरनाक
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तमाशा का खेल
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Correct answer
बेमेल संबंध
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'ऊँट के गले में बिल्ली' - इस लोकोक्ति का अर्थ है- बेमेल संबंध
Key Points
- 'ऊँट के गले में बिल्ली' का अर्थ - बेमेल संबंध।
- वाक्य प्रयोग- अगर कोई व्यक्ति कोई ऐसा काम करने की कोशिश करता है जो उसे पता है कि वह मुश्किल या खतरनाक है, तो आप कह सकते हैं कि वह "ऊँट के गले में बिल्ली" बांध रहा है।
- लोकोक्ति - जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धत किया जाता है, लोकोक्ति कहलाता है। इसी को कहावत कहते है।
- जैसे -'न रहेगी बाँस न बजेगी बाँसुरी' का अर्थ - मूल कारण को जड़ से नष्ट करना।
- वाक्य प्रयोग- देवांग के लिए खतों को स्तुति ने जलाकर राख कर दिया, अब "न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी"।
Additional Information
| लोकोक्ति | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| अस्सी की आमद, चौरासी खर्च | आमदनी से अधिक खर्च | राजू के तो "अस्सी की आमद, चौरासी खर्च हैं"। इसलिए उसके वेतन में घर का खर्च नहीं चलता। |
| कंगाली में आटा गीला | परेशानी पर परेशानी आना | पिता जी की बीमारी की वजह से घर में वैसे ही आर्थिक तंगी चल रही है, ऊपर से बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी बढ़ गया। इसे कहते हैं- "कंगाली में आटा गीला"। |
| खोदा पहाड़ निकली चुहिया | बहुत कठिन परिश्रम का थोड़ा लाभ | बच्चा बेचारा दिन भर लाल बत्ती पर अख़बार बेचता रहा, परंतु उसे कमाई मात्र बीस रुपये की हुई। यह वही बात है- "खोदा पहाड़ निकली चुहिया"। |
| गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है | अपराधियों के साथ निर्दोष व्यक्ति भी दण्ड पाते हैं। | मैंने कालू से कहा था कि चोर-डाकुओं के साथ मत रहो। लेकिन उसने मेरी एक न सुनी। इसी कारण आज जेल काट रहा है। कहावत भी है- "गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है"। |