आचार्यकपिलदेवद्विवेदिमतानुसारेण ध्वनिपरिवर्तनस्य आभ्यन्तरकारणानामयं क्रमः विद्यते -
A. अशिक्षा
B. अनुकरणस्यापूर्णता
C. भावावेशः
D. लघूकरणप्रवृत्तिः
E. शीघ्रभाषणम्
अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-
- AOption (a)
A, B, C, D, E
- BOption (b)
B, D, A, C, E
- COption (c)
D, B, A, E, C
- DOption (d)
D, C, A, B, E
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Correct answer
D, B, A, E, C
Why this answer is correct
प्रश्नार्थ- आचार्य कपिलदेव द्विवेदी के अनुसार ध्वनि परिवर्तन के आंतरिक कारणों का क्रम इस प्रकार है:
उत्तर- D, B, A, E, C
Important Pointsध्वनिपरिवर्तन के आभ्यंतर कारणों का क्रम D, B, A, E, C आचार्य कपिलदेव द्विवेदी के मतानुसार निम्नलिखित प्रकार से व्याख्यायित किया जा सकता है:
- लघूकरणप्रवृत्तिः (D) – यह ध्वनि परिवर्तन का प्रमुख कारण है, जिसमें उच्चारण को सरल और संक्षिप्त करने की प्रवृत्ति देखी जाती है।
- अनुकरणस्यापूर्णता (B) – जब किसी ध्वनि का अनुकरण पूर्ण रूप से नहीं किया जाता, तो उसमें परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है।
- अशिक्षा (A) – भाषा और उच्चारण की उचित शिक्षा न होने के कारण ध्वनि परिवर्तन होता है।
- शीघ्रभाषणम् (E) – अत्यधिक तेजी से बोलने पर ध्वनि में परिवर्तन आ सकता है, जिससे शब्दों का उच्चारण प्रभावित होता है।
- भावावेशः (C) – जब व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक स्थिति में होता है, तो उसकी ध्वनि में परिवर्तन देखा जाता है।
यह क्रम भाषा-विज्ञान और उच्चारण परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।