अर्थसङ्ग्रहानुसारम् अधस्तनाः वेदविधाः यथाक्रमं लेखनीयाः -
A. अर्थवादः
B. मन्त्रः
C. निषेधः
D. नामधेयः
अधस्तनेषु समुचितं विकल्पं चिनुत-
- AOption (a)
A, B, C, D
- BOption (b)
D, C, B, A
- COption (c)
A, D, C, B
- DOption (d)
B, D, C, A
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Correct answer
B, D, C, A
Why this answer is correct
उत्तर- B, D, C, A
अर्थसंग्रह के अनुसार चार प्रमुख रूपों में वर्गीकृत किए जाते हैं।
- मन्त्रः (B)- यह वेदविधाओं का मूल भाग है।
- मन्त्र वह वाक्य होता है जिससे देवताओं की स्तुति, प्रार्थना या यज्ञ में आह्वान किया जाता है।
- यह क्रिया को प्रेरित करता है और यज्ञीय कर्मों का आधार होता है।
- उदाहरण: “ॐ अग्नये स्वाहा” — अग्नि को समर्पित मन्त्र।
- नामधेयः (D)- यह विधि कर्म या वस्तु का नामकरण करती है।
- नामधेय से कर्म का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
- उदाहरण: “अग्निहोत्र” — अग्नि में आहुति देने वाला कर्म।
- निषेधः (C)- यह वर्जन या निषेध को दर्शाता है।
- निषेध से यह बताया जाता है कि कौन-सा कर्म नहीं करना चाहिए।
- उदाहरण: “न ब्राह्मणः मद्यं पिबेत्” — ब्राह्मण को मद्यपान नहीं करना चाहिए।
- अर्थवादः (A)- यह प्रशंसा, निंदा या कथा के रूप में होता है।
- अर्थवाद का उद्देश्य मुख्य विधि को बल देना होता है।
- यह स्वतः विधि नहीं होता, बल्कि अन्य विधियों को समर्थन देता है।
- उदाहरण: “अग्निहोत्रं सर्वपापं शमयति” - अग्निहोत्र सभी पापों को नष्ट करता है।