सायणभाष्यर्ग्वेदसंहितां सम्पाद्य तस्याः प्रकाशनकार्यं प्रथमं केन वैदेशिकेन कृतमस्ति?
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मैक्समूलरेण
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वेवरेण
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जैकोवी महोदयेन
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विण्टरनित्समहोदयेन
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मैक्समूलरेण
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प्रश्नानुवाद- सायण भाष्य सहित ऋग्वेद संहिता का संपादन करके उसका प्रकाशन कार्य किस विदेशी विद्वान के द्वारा किया गया?
स्पष्टीकरण- सायण भाष्य सहित ऋग्वेद संहिता का संपादन करके उसका प्रकाशन कार्य विदेशी विद्वान मैक्समूलर के द्वारा किया गया।
पाश्चात्य संस्कृत विद्वानों में जर्मन विद्वान फ्रेड्रिक मैक्समूलर (1823-1900 ई०) सबसे प्रमुख है। ये परम्परावादी भाष्यकारों की कोटि में आते हैं। यतोहि उन्होंने वेद मंत्रों की व्याख्या में भाषाशास्त्र के साथ-साथ भारतीय परम्परा को भी ध्यान रखा है। इनके विविध कार्यों में दो अमर कृतियां हैं -
- सायणभाष्य के साथ ऋग्वेद का 6 खण्डो में सर्वप्रथम प्रकाशन।
- पचास भागों में पवित्र प्राच्य गंथमाला (Sacred Books of the East) के अंतर्गत प्राच्य धर्मों के समस्त मौलिक साहित्य के अंग्रेजी अनुवाद का सम्पादन प्रकाशन।
Key Points
- मैक्समूलर द्वारा सम्पादित सायण-भाष्य आज भी ग्रन्थ-सम्पदान या पाठ-संशोधन के क्षेत्र में मानदण्ड माना जाता है।
- इस संस्करण की लम्बी भूमिका उनके पाण्डित्य और परिश्रम को प्रकट करती है।
- सायण के प्रति की श्रद्धा इन शब्दों में प्रकट हुई है- “सायण के द्वारा निर्दिष्ट व्याख्या-विधि हमें नहीं मिलती तो इस वेद के दुरूह अर्थ की दिशा में हम एक पग भी नहीं दे सकते थे”।
- सायण के भाष्यों को वे ‘अन्धो की छड़ी’ मानते है। इनके अतिरिक्त इन्होंने वेदों का काल निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किया है।
- मैक्समूलर ने अपने ग्रंथ “A History of Ancient Sanskrit Literature’’ में वेदों के काल-निर्णय का प्रयास किया है।
- उनके अनुसार सर्वप्राचीन ऋग्वेद की रचना 1200 ई० पूर्व में हुई होगी। वेदों के काल-निर्णय का यह प्रथम प्रयास था जो कि भाषाशास्त्र के आधार पर था।