अधस्तनेषु किं मेलनं समुचितम्?
- AOption (a)
आ मुक्तेः- आङ्मर्यादाभिविध्योः
- BOption (b)
मुहूर्तसुखम्- यस्य चायामः
- COption (c)
घृतगन्धि- वोपसर्जनात्
- DOption (d)
दम्पती- स्त्रियां संज्ञायाम्
View answer & explanationHide answer & explanation
Correct answer
आ मुक्तेः- आङ्मर्यादाभिविध्योः
Why this answer is correct
प्रश्न का हिंदी भाषांतर : नीचे दिये हुए विकल्पोंं में कौन सा मेलन समुचित है?
प्रस्तुत सूत्र यह पाणिनी के अष्टाध्यायी में उल्लेखित है।
सूत्र - आङ् मर्यादाभिविध्योः (२.१.१२)अनुवृत्ति - विभाषाः, पञ्चम्या, सुप, सह सुपा, समासः, अव्ययीभावः।
अर्थ - मर्यादाभिविध्योः वर्त्तमान आ इत्येष शब्दः समर्थेन पञ्चम्यन्तेन सुबन्तेन सह विकल्पेन समस्यते, अव्ययीभावश्च समासो भवति ॥
उदाहरण - आ पाटलिपुत्रं वृष्टो देवः, आ पाटलिपुत्राद् वृष्टो देवः अभिविधौ -आकुमारं यशः पाणिनेः, आ कुमारेभ्यो यशः पाणिनेः।
भाषार्थः -
- [मर्यादाभिविध्योः ] मर्यादा और अभिविधि अर्थ में वर्त्तमान [आङ्] आङ् शब्द समर्थ पञ्चम्यन्त सुबन्त के साथ विकल्प से समास को प्राप्त होता है, और वह समास अव्ययीभावसंज्ञक होता है । उदाहरण में पूर्व सूत्र के समान पञ्चमी विभक्ति हुई है, तथा आङ्मर्यादावचने (१.४.८८) से आ की कर्मप्रवचनीय संज्ञा हुई है।
अतः स्पष्ट है, की "आ मुक्तेः- आङ्मर्यादाभिविध्योः" यह इस प्रश्न का सही उत्तर है।