''भक्ति के आन्दोलन की जो लहर दक्षिण से आयी उसी ने उत्तर भारत की परिस्थिति के अनुरूप हिन्दू-मुसलमान दोनो के लिए एक सामान्य भक्ति मार्ग की भी भावना कुछ लोगो में जगायी।''
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रामचंद्र शुक्ल
- ((b))
नंददुलारे वाजपेयी
- ((c))
हजारीप्रसाद द्विवेदी
- ((d))
विजयदेव नारायण साही
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रामचंद्र शुक्ल
यह कथन-1) रामचंद्र शुक्ल का है।

Key Points
- भक्ति आन्दोलन मध्यकालीन भारत का सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।
- भक्ति की मूल धारा दक्षिण भारत में छठवीं-सातवीं शताब्दी में ही शुरू हो गई थी।

Important Points
- हिन्दी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात शुक्ल जी के द्वारा हुआ।
- शुक्ल जी नागरी प्रचारिणी पत्रिका के संपादक रहे।
- उन्होंने बहुत से वाक्य तो सूक्ति रूप में प्रयुक्त किये।
- जैसे - बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है।
- इनकी प्रमुख रचनायें-चिंतामणि,हिंदी साहित्य का इतिहास,शशांक,विश्वप्रपञ्च,कविता क्या है,तुलसी का भक्ति मार्ग,जायसी ग्रन्थावली आदि हैं।



