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UGC NET Paper 2: Hindi Dec 2018 (Previous Year Paper)

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Test (100 questions)

1

''भक्ति के आन्‍दोलन की जो लहर दक्षिण से आयी उसी ने उत्तर भारत की परिस्थिति के अनुरूप हिन्‍दू-मुसलमान दोनो के लिए एक सामान्‍य भक्ति मार्ग की भी भावना कुछ लोगो में जगायी।''

  1. ((a))

    रामचंद्र शुक्‍ल

  2. ((b))

    नंददुलारे वाजपेयी

  3. ((c))

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

  4. ((d))

    विजयदेव नारायण साही

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Answer: ((a))

रामचंद्र शुक्‍ल

यह कथन-1) रामचंद्र शुक्‍ल का है।

Key Points

  • भक्ति आन्दोलन  मध्‍यकालीन भारत का सांस्‍कृतिक इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव था।
  • भक्ति की मूल धारा दक्षिण भारत में छठवीं-सातवीं शताब्दी में ही शुरू हो गई थी।

Important Points

  • हिन्दी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात शुक्ल जी के द्वारा हुआ।
  • शुक्ल जी नागरी प्रचारिणी पत्रिका के संपादक रहे।
  • उन्होंने बहुत से वाक्य तो सूक्ति रूप में प्रयुक्त किये।
  • जैसे - बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है।
  • इनकी प्रमुख रचनायें-चिंतामणि,हिंदी साहित्य का इतिहास,शशांक,विश्वप्रपञ्च,कविता क्या है,तुलसी का भक्ति मार्ग,जायसी ग्रन्थावली आदि हैं।
2

निम्‍नलिखित में से कौन पश्चिमी विचारक बीसवी सदी मे मौजूद नही थे ?

  1. ((a))

    आई. ए. रिचर्ड्स

  2. ((b))

    सैमुअल टेलर कॉलरिज

  3. ((c))

    बेनेदेतो क्रोचे

  4. ((d))

    सिग्‍मंड फ्रॉयड

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Answer: ((b))

सैमुअल टेलर कॉलरिज

पश्चिमी विचारक-2) सैमुअल टेलर कॉलरिज बीसवीं सदी मे मौजूद नहीं थे।

Key Points

  • आई. ए. रिचर्ड्स का समयकाल- 26 फरवरी 1893 - 7 सितम्बर 1979
  • सैमुअल टेलर कॉलरिज का समयकाल- 21 अक्टूबर 1772 - 25 जुलाई 1834
  • बेनेदेतो क्रोचे का समयकाल- 25 फ़रवरी 1866 - 20 नवम्बर 1952
  • सिग्‍मंड फ्रॉयड का समयकाल- 6 मई 1856 - 23 सितम्बर 1939

Important Points

  • आई. ए. रिचर्ड्स ने काव्य के लिए मूल्य सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  • क्रोचे ने अभिव्यंजनावाद सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  • फ्रॉयड ने मनोविश्लेषणवाद सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
3

तननां बुननां तज्‍यौ कबीर।

रांम नांम लिखि लियौ सरीर।।

मुसि मुसि रोवै कबीर की माई।

ए बारिक कैसे जीवहिं खुदाई।।

उक्‍त काव्‍य-पंक्तियों में प्रयुक्‍त 'मुसि मुसि' का भावार्थ है -

I. मन ही मन रोना

II. सिसक सिसक कर रोना

III. दहाड़ मारकर रोना

IV. किसी का गुण-कथन करते हुए रोना

नीचे दिए गए कूट मे से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I, III और IV सही

  2. ((b))

    III और II सही

  3. ((c))

    I और II सही

  4. ((d))

    II और IV सही

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Answer: ((c))

I और II सही

काव्‍य-पंक्तियों में प्रयुक्‍त 'मुसि मुसि' का भावार्थ-3) I और II सही है।

I. मन ही मन रोना

II. सिसक सिसक कर रोना

Key Points

  • उपर्युक्त पक्तियां कवि कबीरदास की हैं।
  • धर्मदास ने उनकी वाणियों का संग्रह "बीजक" नाम के ग्रंथ में किया।
  • जिसके तीन मुख्य भाग हैं-साखी,सबद(पद),रमैनी।
  1. **साखी-**अधिकांश साखियाँ दोहों में लिखी गयी हैं पर उसमें सोरठे का भी प्रयोग मिलता है।
  2. **सबद-**गेय पद है जिसमें पूरी तरह संगीतात्मकता विद्यमान है।
  3. **रमैनी-**चौपाई छंद में लिखी गयी है

Important Points

  • कबीर जी के बारे में कहा जाता है-काशी में परगट भये,रामानंद चेताये
  • कबीर पढ़े-लिखे नहीं थे-'मसि कागद छुयो नहीं,कलम गही नहिं हाथ
  • कबीर के राम अगम हैं और वे संसार के कण-कण में विराजते हैं।
4

यंद्री का लड़बड़ा, जिम्‍भा का फूहड़ा

काछ का जती मुख का सती।

जो सत पुरूष उतमो कथी।

गोरखनाथ की दृष्टि में सच्‍चा साधक वही है, जो-

I. संयमी हो।

II. इंद्रिय दमन करने वाला हो।

III. कूट भाषा बोलने वाला हो।

IV. महासुखवादी हो।

नीचे दिए गए कूट में से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I और III सही

  2. ((b))

    I और IV सही

  3. ((c))

    III और IV सही

  4. ((d))

    I और II सही

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Answer: ((d))

I और II सही

कूट में से सही उत्तर-4) I और II सही है।

I. संयमी हो।

II. इंद्रिय दमन करने वाला हो।

Key Points

  • नाथ योगियों में सबसे अधिक प्रसिद्धि गोरखनाथ को मिली।
  • गोरखनाथ की रचनायें-सबदी,प्राणसंकली,गोरखसत,निरंजनपुराण आदि हैं।
  • गोरखनाथ शून्य के साधक थे।

Important Points

  • मत्स्येंद्रनाथ गोरखनाथ के गुरु थे।
  • नाथ सम्प्रदाय गोरखनाथ को 84 सिद्धों में से दूसरे सिद्ध मानता है।
5

स्‍याम बिनोदी रे मधुबनियॉं।

अब हरि गोकुल काहे को आवहिं चाहत नौ यौवनियॉं।

सूरदास प्रभु तजी कामरी अब हरि भए चिकनियॉं।

'अब हरि भए चिकनियॉं' के द्वारा सूरदास क्‍या कहना चाहते है ?

I. श्रीकृष्‍ण चिकने घड़े हो गए है।

II. श्रीकृष्‍ण चिकने-चुपड़े हो गए है।

III. श्रीकृष्‍ण छैला हो गए है।

IV. श्रीकृष्‍ण सुन्‍दर छवि वाले हो गए हैं।

नीचे दिए गए कूट में से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I और III सही

  2. ((b))

    I और IV सही

  3. ((c))

    II और IV सही

  4. ((d))

    III और IV सही

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Answer: ((d))

III और IV सही

कूट में से सही उत्तर-4) III और IV सही है।

III. श्रीकृष्‍ण छैला हो गए है।

IV. श्रीकृष्‍ण सुन्‍दर छवि वाले हो गए हैं।

Important Points

  • उपर्युक्त पंक्तियाँ सूरदास की विरह पदावली से उद्धृत है।
  • गोपियाँ कृष्ण के न आने का कारण बता रही हैं।
  • सूरदास का जन्म 1478 ई० में रुनकता क्षेत्र में हुआ।

Additional Information

  • वल्लभाचार्य ने उनको पुष्टिमार्ग में दीक्षित करके कृष्णलीला के पद गाने का आदेश दिया।
  • सूरदास की प्रमुख रचनायें-सूरसागर,सूरसारावली,साहित्य-लहरी,नल दमयंती,ब्याहलो आदि हैं।
  • साहित्य लहरी' का रचना काल संवत् 1607 वि० है।
  • सूर ने विनय के पद भी रचे हैं-

​          हमारे प्रभु औगुन चित न धरौ। समदरसी है मान तुम्हारौ,सोई पार करौ।

6

यों ही मन मेरो काम को न रहयो माई,

स��‍याम रंग हवै करि समान्‍यो स्‍याम रंग मैं।

उक्‍त काव्‍य-पंक्तियों मे कोई गोपी या भक्‍त कहना चाहते है-

I. श्रीकृष्‍ण के रंग में रंगकर मेरा रंग काला हो गया है।

II. मेरा रंग पहले से काला है इसलिए श्रीकृष्‍ण के रंग में मिल सका।

III. श्रीकृष्‍ण के रंग में रंग कर मेरा मन उन्‍ही के जैसा हो गया।

IV. मेरा मन श्रीकृष्‍ण के वश में हो गया है।

  1. ((a))

    III और IV सही

  2. ((b))

    II और III सही

  3. ((c))

    I और II सही

  4. ((d))

    I और IV सही

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Answer: ((a))

III और IV सही

उक्‍त काव्‍य-पंक्तियों में कोई गोपी या भक्‍त-1) III और IV सही कहना चाहते हैं।

III. श्रीकृष्‍ण के रंग में रंग कर मेरा मन उन्‍ही के जैसा हो गया।

IV. मेरा मन श्रीकृष्‍ण के वश में हो गया है। 

Key Points

  • उपर्युक्त पंक्तियाँ मीराबाई की पदावली से उद्धृत है।
  • मीराबाई भक्ति कालीन सगुण मार्गी कृष्ण शाखा की अग्रणी कवयित्री तथा उपासक थी।

Important Points

  • मीराबाई के गुरु रविदास जी थे।
  • मीराबाई जोधपुर,राजस्थान के मेड़वा राजकुल की राजकुमारी थीं।
  • इनके प्रमुख संग्रह-बरसी का मायरा,गीत गोविन्द टीका,राग गोविन्द,राग सोरठ हैं।
  • पद-हरी तुम हरो जन की भीर......दुःख जहाँ तहँ पीर।
7

रीतिकालीन वीरकाव्‍य की प्रमुख विशेषताऍं है:

I. रासो काव्‍य की अपेक्षा में अधिक प्रामाणिक है।

II. इसमें तत्‍कालीन इतिहास सुरक्षित है।

III. इनमें चमत्‍कारिक वर्णन और भाषाई खिलवाड़ बहुत अधिक है।

IV. किसी वीर काव्‍य मे फिरंगियों का भी वर्णन किया गया है।

नीचे दिए गए कूट मे से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I और III सही

  2. ((b))

    II और IV सही

  3. ((c))

    I, III और IV सही

  4. ((d))

    I, II और IV सही

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Answer: ((d))

I, II और IV सही

  • दी गयीं विशेषताओं में रीतिकालीन - वीरकाव्य की निम्नलिखित विशेषताएं हैं :-
  1. रासों काव्य की अपेक्षा में अधिक प्रामाणिक है ।
  2. इसमें तत्कालीन इतिहास सुरक्षित है ।
  3. किसी वीर काव्य में फिरंगियों का भी वर्णन किया गया है ।

Key Points

  • रीतिकालीन - वीर काव्य के प्रमुख कवि हैं - भूषण , पद्माकर , सूदन , खुमान , जोधराज , गुरु गोविन्द सिंह आदि ।
  • रीतिकालीन काव्य विशुद्ध वीरकाव्य कहा जा सकता है , जिसमें श्रृंगारिकता  का पुट न के बराबर है ।

Important Points ​

  • रीतिकालीन वीर काव्य में देशभक्ति का गौरव दिखाई पड़ता है ।
  • वीरकाव्य की प्रमुख रचनाएं - छत्र प्रकाश ( लाल कवि ) , सुजान चरित ( सूदन ) , हम्मीर रासो ( जोधराज ) , वीरविनोद ( बाँकीदास ) ।
8

निम्‍नलिखित में से कौन-से युग्‍म सही है ?

I. विष्‍णु प्रिया - खंड काव्‍य

II. सिद्ध राज - खंड काव्‍य

III. साकेत - महा काव्‍य

IV. जय भारत - मुक्तक काव्‍य

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए:

  1. ((a))

    I, III और IV सही

  2. ((b))

    III और IV सही

  3. ((c))

    ​I, II और III सही

  4. ((d))

    I और II सही

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Answer: ((c))

​I, II और III सही

  • निम्‍नलिखित सही युग्म इस प्रकार हैं :-
  1. ​विष्णु प्रिया - खंड काव्य
  2. सिद्ध राज - खंड काव्य
  3. साकेत - महाकाव्य
  4. जय भारत - मुक्तक नहीं महाकाव्य है

Key Points

  • ​मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के महत्वपूर्ण कवि हैं ।
  • गुप्त जी की महत्वपूर्ण काव्यकृति भारत भारती ( 1912 ई . ) है , जो उनके यश का आधार है ।
  • गुप्त जी की पहली कविता हेमंत है , 1905 ई. में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई ।

Important Points

  • साकेत ( 1931 ई. ) रामकथा पर आधारित है , राम को यहाँ आधुनिक मानव के रूप में प्रस्तुत किया गया है और उर्मिला के वियोग का वर्णन भी है।
  • विष्णुप्रिया ( 1957 ई. ) चैतन्य महाप्रभु की पत्नी को आधार बनाकर लिखी गयी।
  • जयभारत ( 1952 ई . ) प्राचीन भारत की हिन्दू संस्कृति का स्वच्छ दर्पण कहलाता है।
  • सिद्ध राज 1936 ई . में लिखा गया था।
9

हरि अनंत हरि कथा अनंता।

कहहि सुनहिं बहुबिधि सब संता।।

रामकथा के प्रसंग में तुलसीदास ने यह बात किससे कहलवाई है ?

  1. ((a))

    शिव

  2. ((b))

    याज्ञवल्‍क्‍य

  3. ((c))

    काग भुसुंडि

  4. ((d))

    तुलसीदास की स्‍वयं की उक्ति

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Answer: ((a))

शिव

राम कथा के प्रसंग में तुलसीदास ने यह बात शिव से कहलवाई  है। अतः विकल्पों में से विकल्प शिव सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥
  • रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥
  • उपयुक्त पद तुलसीदास ने  शिव से कहलवाया है।
  • भावार्थ-
  • हरि अनंत हैं (उनका कोई पार नहीं पा सकता) और उनकी कथा भी अनंत है। सब संत लोग उसे बहुत प्रकार से कहते-सुनते हैं। रामचंद्र के सुंदर चरित्र करोड़ों कल्पों में भी गाए नहीं जा सकते

Additional Information

  • तुलसीदास  की रचनाएँ:- 
  • रामललानहछू(1582), वैराग्यसंदीपनी(1612), रामाज्ञाप्रश्न(1612), जानकी-मंगल(1582), रामचरितमानस(1574), सतसई, पार्वती-मंगल(1582), गीतावली(1571), विनय-पत्रिका(1582), कृष्ण-गीतावली(1571), बरवै रामायण(1612), दोहावली(1583) और कवितावली(1612)
10

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reason) R) है। कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): छायावाद रीतिकाव्य की भांति शुद्ध मांसल प्रेम का काव्य है।

तर्क (Reason) R): क्योंकि छायावादी कविता में व्यक्तिनिष्ठ वासना की अभिव्यक्ति हुई है।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A सही R सही

  4. ((d))

    A सही R ग़लत

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Answer: ((b))

A ग़लत R ग़लत

उपर्युक्त दोनों वाक्यों में से अभी कथन व तर्क दोनों ही गलत हैं। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • छायावाद रीति काव्य की भांति शुद्ध मांसल प्रेम का काव्य है अभी कथन गलत है क्योंकि छायावाद में प्रकृति चित्रण सौंदर्य बोध तथा रहस्यवाद के साथ मांसल प्रेम तथा देश प्रेम की भावना विद्यमान है।
  • तर्क, क्योंकि छायावादी कविता में व्यक्ति निष्ठ वासना की अभिव्यक्ति हुई है।

Additional Information

  • छायावाद हिंदी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की वह काव्य-धारा है जो लगभग ई.स. 1918 से 1936 तक की प्रमुख युगवाणी रही।
  • जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा इस काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं।
  • इसे 'साहित्यिक खड़ीबोली का स्वर्णयुग' कहा जाता है।
  • छायावाद के नामकरण का श्रेय 'मुकुटधर पांडेय' को दिया जाता है। इन्होंने सर्वप्रथम 1920 ई में जबलपुर से प्रकाशित श्रीशारदा (जबलपुर) पत्रिका में 'हिंदी में छायावाद' नामक चार निबंधों की एक लेखमाला प्रकाशित करवाई थी।
11

निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचयिताओं के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)जाके मुँह माथा नहीं नाहीं रूप-कुरूप।i)मलिक मुहम्मद जायसी
b)औ मन जानि कबित अस कीन्हा मकु यह रहै जगत महँ चीन्हा।ii)सूरदास
c)हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।iii)कबीर
d)नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।iv)रामानंद
v)तुलसीदास
  1. ((a))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-v

  3. ((c))

    a-iv, b-v, c-ii, d-i

  4. ((d))

    a-iii, b-i, c-ii, d-v

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Answer: ((d))

a-iii, b-i, c-ii, d-v

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "a-iii, b-i, c-ii, d-v" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

सूची Iसूची II
a)जाके मुँह माथा नहीं नाहीं रूप-कुरूप।i)कबीर
b)औ मन जानि कबित अ��� कीन्हा मकु यह रहै जगत महँ चीन्हा।ii)मलिक मुहम्मद जायसी
c)हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।iii)सूरदास
d)नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।iv)तुलसीदास

Important Points

  • कबीर दास
  • कबीर या भगत कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे।
  • वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे।
  • कृतियां :-  साखी, सबद, रमैनी
  • मलिक मोहम्मद जायसी
  • मलिक मोहम्मद जायसी की रचना पद्मावत है।
  • इनका प्रिय अलंकार उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  • पद्मावत का रचना वर्ष 1540 ईस्वी है।
  • पद्मावत की रचना अवधी भाषा में की गई है।
  • यह चौपाई दोहा छंद में है।
  • चौपाई की प्रत्येक सात अर्धालियों के बाद दोहा आता है और इस प्रकार आए हुए दोहों की संख्या 653 है।
  • पद्मावत में उपसंहार समेत 58 अध्याय हैं।
  • पद्मावत का "नागमती वियोग खंड" हिंदी साहित्य की अनुपम निधि है।
  • सूरदास
  • सूरदास हिंदी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं।
  • वल्लभाचार्य के शिष्य हैं।
  • इन्हें उद्धव का अवतार माना जाता है।
  • सूरदास जी द्वारा लिखित पाँच ग्रन्थ बताए जाते हैं:
  • सूरसागर
  • सूरसारावली
  • साहित्य-लहरी (कूट पद संकलित हैं)
  • नल-दमयन्ती
  • ब्याहलो
  • तुलसीदास  की रचनाएँ:- 
  • रामललानहछू(1582), वैराग्यसंदीपनी(1612), रामाज्ञाप्रश्न(1612), जानकी-मंगल(1582), रामचरितमानस(1574), सतसई, पार्वती-मंगल(1582), गीतावली(1571), विनय-पत्रिका(1582), कृष्ण-गीतावली(1571), बरवै रामायण(1612), दोहावली(1583) और कवितावली(1612)

Additional Information

  • रामानन्दाचार्य
  • रामानन्द सम्प्रदाय के प्रवर्तक श्री रामानन्दाचार्य का जन्म सम्वत् 1236 में हुआ था।
  • रामानन्द के प्रमुख शिष्य-
  • अनन्तानन्द ,कबीर, सुखानन्द, सुर सुरानन्द,पद्मावती, नरहर्यानन्द, पीपा,भावानन्द, रैदास, धना, सेन, और सुरसुरी आदि थे।
  • क्रांतिकारी कबीर ने रामानंद से निर्गुण राम तथा भक्ति का रहस्य सीखा।
12

निम्नलिखित काव्य-कृतियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)अलंकार प्रकाशi)रसलीन
b)अंगदर्पणii)आलम
c)आलम केलिiii)याकूब खाँ
d)रतनजाराiv)रसनिधि
v)भूषण
  1. ((a))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  2. ((b))

    a-v, b-i, c-ii, d-iv

  3. ((c))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-v

  4. ((d))

    a-iii, b-iv, c-v, d-ii

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Answer: ((b))

a-v, b-i, c-ii, d-iv

सही उत्तर-2) a-v, b-i, c-ii, d-iv है। 

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)अलंकार प्रकाश(v)भूषण
(b)अंगदर्पण(i)रसलीन
(c)आलम केलि(ii)आलम
(d)रतनजारा(iv)रसनिधि

Important Points

  • भूषण की अन्य रचनायें-शिवराजभूषण,शिवाबावनी,छत्रसालदशक,भूषण उल्लास,भूषण हजारा,दूषनोल्लासा।
  • रसलीन के दो ग्रंथ अत्यन्त प्रसिद्ध हैं-
  1. ​अंगदर्पण,1737 ई० में हुई और इसमें 180 दोहे हैं।
  2. रस प्रबोध,1747 ई० में हुई और जिसमें 1127 दोहे हैं।
  • आलम के तीन ग्रन्थ हैं- माधवानल-काम-कन्दला,श्याम-सनेही तथा आलम-केलि।
  • रसनिधि की अन्य रचनायें-विष्णुपदकीर्तन,बारहमासी,रसनिधिसागर,गीतिसंग्रह,अरिल्ल और माँझ,हिंडोला।
13

निम्नलिखित आधुनिक प्रबन्ध काव्यों के पुरुष पात्रों को उनकी चारित्रिक विशेषताओं से सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)मृत्यु के प्रश्न से जुझता पात्रi)'कामायनी' का मनु
b)कामाध्यात्म के प्रश्न से जूझता पात्रii)'संशय की एक रात' का राम
c)युद्ध के प्रश्न से जूझता पात्रiii)'उर्वशी' का पुरुरवा
d)अपनी र्बलताओं से संघर्षरत पात्रiv)'आत्मजयी' नचिकेता
v)'जयद्रथ वध' का कर्ण
  1. ((a))

    a-v, b-iv, c-iii, d-ii

  2. ((b))

    a-iv, b-iii, c-ii, d-i

  3. ((c))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  4. ((d))

    a-iv, b-v, c-ii, d-i

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Answer: ((b))

a-iv, b-iii, c-ii, d-i

सही उत्तर-2) a-iv, b-iii, c-ii, d-i है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)मृत्यु के प्रश्न से जूझता पात्र(iv)'आत्मजयी' का नचिकेता
(b)कामाध्यात्म के प्रश्न से जूझता पात्र(iii)'उर्वशी' का पुरुरवा
(c)युद्ध के प्रश्न से जूझता पात्र(ii)'संशय की एक रात' का राम
(d)अपनी दुर्बलताओं से संघर्षरत पात्र(i)'कामायनी' का मनु

Important Points

  • कुँवर नारायण ने आत्मजयी प्रबंध काव्य की रचना की।
  • रामधारीसिंह दिनकर ने उर्वशी काव्य की रचना की जिसके लिए उन्हें 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया।
  • संशय की एक रात श्रीनरेश मेहता द्वारा लिखित पौराणिक गीतिनाट्य है।
  • 'प्रसाद' जी की कामायनी अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई।

Additional Information    

  • ‘आत्मजयी’ का मूल कथासूत्र कठोपनिषद् में नचिकेता के प्रसंग पर आधारित है।
  • पुरुरवा धरती पुत्र है और उर्वशी देवलोक से उतरी हुई नारी है।
  • संशय की एक रात' में कवि ने राम के भीतर युद्ध के प्रति संशय पैदा कर एक आधुनिक मनुष्य की चिन्ता प्रकट की है।
  • 'चिंता' से प्रारंभ कर 'आनंद' तक 15 सर्गों के इस महाकाव्य में मानव मन की विविध अंतर्वृत्तियों का वर्णन किया गया है।
14

निम्नलिखित रचनाकारों को उनकी रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)रामधारी सिंह दिनकरi)एकलव्य
b)रामकुमार वर्माii)पथिक
c)रामनरेश त्रिपाठीiii)ज़मीन पक रही है।
d)केदारनाथ सिंहiv)दिल्ली
v)बात बोलेगी
  1. ((a))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-v, d-iv

  3. ((c))

    a-iii, b-i, c-ii, d-v

  4. ((d))

    a-iv, b-i, c-ii, d-iii

Show Answer
Answer: ((d))

a-iv, b-i, c-ii, d-iii

सही उत्तर-4) a-iv, b-i, c-ii, d-iii है। 

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)रामधारी सिंह दिनकर(iv)दिल्ली
(b)रामकुमार वर्मा(i)एकलव्य
(c)रामनरेश त्रिपाठी(ii)पथिक
(d)केदारनाथ सिंह(iii)ज़मीन पक रही है

Important Points

  • रामधारी सिंह दिनकर की रचनायें-प्रणभंग,रेणुका,हुंकार,कुरुक्षेत्र,नीम के पत्ते,उर्वशी,परशुराम की प्रतीक्षा,रश्मिलोक आदि प्रमुख हैं।
  • रामकुमार वर्मा की रचनायें-रेशमी ताई,पृथ्वीराज की आँखें,जौहर,सप्त किरण,कौमुदी महोत्सव,दीपदान आदि प्रमुख हैं।
  • रामनरेश त्रिपाठी की रचनायें- मिलन,स्वप्न,तरकस,आखों देखी कहानियां,स्वपनों के चित्र,नखशिख आदि प्रमुख हैं।
  • केदारनाथ सिंह की रचनायें- अभी बिल्कुल अभी,कल्पना और छायावाद,मेरे साक्षात्कार,यहाँ से देखो,सृष्टि पर पहरा आदि प्रमुख हैं।

Additional Information

  • दिल्ली-1954
  • एकलव्य- .......
  • पथिक-1920
  • जमीन पक रही है- 1980
15

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इन कथनों को सम्बन्ध कवियों से सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)'अज्ञात प्रिय' की ओर इशारा करने के अतिरिक्त इन्होंने जगत् के अनेक प्रस्तुत रूपों और व्यापारों को भी अपनी सरल भावनाओं के रंग में देखा है।i)महादेवी वर्मा
b)इस वेदना को लेकर इन्होंने ह्रदय की ऐसी अनुभूतियाँ सामने रखी हैं जो लोकोत्तर हैं।ii)रामकुमार वर्मा
c)कवि की रहस्य-दृष्टी प्रकृति की आत्मा - जगत् के रूपों और व्यापारों में व्यक्त होने वाली आत्मा - की ओर जाती है।iii)सुमित्रानदंन पंत
d)इनकी रहस्यवादी रचनाओं को देखकर चाहे तो यह कहें कि इनकी मधु वर्षा के मानस-प्रसार के लिए रहस्यवाद का परदा मिल गया।iv)जयशंकर प्रसाद
v)सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
  1. ((a))

    a-v, b-ii, c-iv, d-iii

  2. ((b))

    a-ii, b-i, c-iii, d-iv

  3. ((c))

    a-v, b-i, c-iii, d-iv

  4. ((d))

    a-i, b-iii, c-ii, d-iv

Show Answer
Answer: ((c))

a-v, b-i, c-iii, d-iv

सही उत्तर-2) a-ii, b-i, c-iii, d-iv है।  

सूची – Iसूची – II
(a)'अज्ञात प्रिय' की ओर इशारा करने के अतिरिक्त इन्होंने जगत् के अनेक प्रस्तुत रूपों और व्यापारों को भी अपनी सरल भावनाओं के रंग में देखा है।(v)सूर्य कान्त त्रिपाठी 'निराला'
(b)इस वेदना को लेकर इन्होंने ह्रदय की ऐसी अनुभूतियाँ सामने रखी हैं जो लोकोत्तर हैं।(i)महादेवी वर्मा
(c)कवि की रहस्य-दृष्टी प्रकृति की आत्मा - जगत् के रूपों और व्यापारों में व्यक्त होने वाली आत्मा की ओर जाती है।(iii)सुमित्रानदंन पंत
(d)इनकी रहस्यवादी रचनाओं को देखकर चाहे तो यह कहें कि इनकी मधु वर्षा के मानस-प्रसार के लिए रहस्यवाद का परदा मिल गया।(iv)जयशंकर प्रसाद

Additional Information

  • "चित्ररेखा" काव्य-संग्रह पर रामकुमार वर्मा को हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ "देव पुरस्कार" मिला है।
  • महादेवी के गीतों की वेदना,प्रणयानुभूति,करुणा और रहस्यवाद काव्यानुरागियों को आकर्षित करते हैं।
  • “युगांत” से “ग्राम्या” तक सुमित्रानन्दन पन्त की काव्ययात्रा प्रगतिवाद के निश्चित व प्रखर स्वरों की उद्घोषणा करती है।
  • प्रसाद जी की प्रारम्भिक रचनाओं का संग्रह 'चित्राधार' था, जिसका पहला संस्करण 1918 ई॰ में प्रकाशित हुआ था।
16

निम्नलिखित उपन्यासों को उनके वर्ण्य विषय के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)नाच्यौ बहुत गोपालi)इलाहाबाद का परिवेश
b)सूरज का सातवां घोड़ाii)सांप्रदायिक उन्माद
c)मुझे चांद चाहिएiii)दलित जीवन
d)गली आगे मुड़ती हैiv)रंगमंच और सिनेमा संसार
v)वाराणसी का शैक्षिक परिसर
  1. ((a))

    a-iii, b-i, c-iv, d-v

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-i, d-iv

  3. ((c))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  4. ((d))

    a-iv, b-iii, c-ii, d-i

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-i, c-iv, d-v

  1. a-iii, b-i, c-iv, d-v

Key Points

क्र. सं.उपन्यासवर्ण्य जीवनलेखक
1.नाच्च्यौ बहुत गोपालदलित जीवनअमृतलाल नागर
2.सूरज का सातवाँ घोडाइलाहबाद का परिवेशधर्मवीर भारती
3.मुझे चाँद चाहिएरंगमंच और सिनेमा संसारसुरेन्द्र वर्मा
4.गली आगे मुडती हैवाराणसी का शैक्षिक परिसरशिवप्रसाद सिंह

Important Points

  • 'नाच्च्यौ बहुत गोपाल' उपन्यास में अमृतलाल ने भंगी समाज का इतिहास एवं उनके वर्तमान जीवन की नरकीयता का गहरी संवेदना के साथ चित्रण किया है I
  • अन्य महत्वपूर्ण उपन्यास -
क्र. सं.उपन्यासलेखकवर्षवर्ण्य विषय
1.अलग - अलग वैतरणीशिवप्रसाद सिंह1967आजादी से पूर्व ग्रामीण जीवन
2.नीला चाँदशिवप्रसाद सिंह1988काशी के मध्यकाल का वर्णन
3.मानस का हंसअमृतलाल नागर1972तुलसीदास पर जीवनीपरक
4.खंजन नयनअमृतलाल नागर1981सूरदास पर जीवनीपरक
5.गुनाहों का देवताधर्मवीर भारती1949किशोर भावुक प्रेम की वर्णन

निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

बिम्बविधान बहुत से विश्रृंखल क्षणों का एक समुच्चय होता है। उसका आधार जीवन और जगत्‌ की 'अनेकता' में है। इस के विपरीत प्रतीक किसी सूक्ष्म और गहरी 'एकता' का बोधक होता है। इसी लिए प्रतीकों की योजना मे जाने-अनजाने एक तार्किक संगति अवश्य रहती है। परन्तु बिम्बविधान में तार्किक संगति का पाया जाना लगभग असम्भव है, और यदि पायी भी जाती है तो वह उसकी तीव्रता को कम करती है, बढ़ाती नहीं। प्रतीक का स्रोत कवि के व्यक्तिगत अनुषंगों में हो सकता है, परन्तु उसका आकलन आनुषंगिक नियमों के आधार पर नहीं होता। उस के निर्माण में, अज्ञात रूप से ही सही, एक प्रकार की अन्तर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा अवश्य रहती है, परन्तु बिम्ब का सम्पूर्ण ढाँचा आनुषंगिक नियमों के द्वारा बुना जाता है। इसलिए उस के संघटन में प्रायः अबौद्धिकता, अन्तर्विरोध और व्यतिक्रम पाया जाता है। प्रतीक मूर्त और अमूर्त दोनों ही हो सकता है।

इसके विपरित बिम्ब के लिए, ज्ञानेन्द्रिय के किसी भी स्तर पर मूर्त होना आवश्यक है। यह मूर्तता केवल दृष्टि-विषयक ही नहीं होती; नाद, घ्राण और स्वादपरक हो सकती है। प्रतीक किसी वस्तु का चित्रांकन नहीं करता, केवल संकेत द्वारा उस की किसी विशेषता को ध्वनित करता है। इसीलिए प्रतीक का ग्रहण सन्दर्भ से अलग और एकान्त रूप से भी सम्भव हो सकता है। पर बिम्ब की प्रेषणीयता उस के पूरे संन्दर्भ के साथ होती है।

17

प्रतीक के आकलन का आधार क्या है?

  1. ((a))

    व्यक्तिगत अनुषंग

  2. ((b))

    अन्तर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा

  3. ((c))

    ज्ञानेन्द्रिय के स्तर पर अनिवार्यतः मूर्त्त होना

  4. ((d))

    वस्तु का चित्रांकन करना

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Answer: ((b))

अन्तर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा

प्रतीक के आकलन का आधार अंतर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा से होता है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प अंतर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा सही है तथा अन्य विकल्प असंगत है।

Key Points

  • प्रतीक का स्रोत कवि के व्यक्तिगत अनुभवों में हो सकता है परंतु उसका आकलन अनुषंगिक नियमों के आधार पर नहीं होता है।
  • उसके निर्माण में अज्ञात रूप से ही सही एक प्रकार की अंतर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा अवश्य रहती है परंतु बिंब का संपूर्ण ढांचा अनुषांगिक नियमों के द्वारा बुना जाता है।

Additional Information

  • अंतर्दृष्टि :- मन की बात समझने की शक्ति, ज्ञानचक्षु, प्रज्ञा।
  • अनुषांगिक :- अनावश्यक रूप से अथवा गौण रूप से किसी के साथ या पीछे होनेवाला।
18

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. ((a))

    बिम्ब ज्ञानेन्द्रिय के स्तर पर मूर्त्त नहीं होता।

  2. ((b))

    बिम्ब-विधान में तार्किक संगति रहती है।

  3. ((c))

    बिम्ब-विधान बहुत-से विश्रृंखल क्षणों का समुच्चय नहीं है।

  4. ((d))

    बिम्ब की प्रेषणीयता उसके पूरे संदर्भ के साथ होती है।

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Answer: ((d))

बिम्ब की प्रेषणीयता उसके पूरे संदर्भ के साथ होती है।

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "बिंब की प्रेषणीयता उसके पूरे संदर्भ के साथ होती है।" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार किसी बिंब की प्रेषणीयता उसके पूरे संदर्भ के साथ होती है।

Additional Information

  • प्रेषणीयता 
  • स्त्रीलिंग
  • यह गुण कि कोई कृति पाठक तक पहुँचती है।
  • संदर्भ
  • पुल्लिंग
  • वर्णित प्रसंग
  • विवेचनात्मक ग्रंथ
19

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. ((a))

    प्रतीक में तार्किक संगति अवश्य रहती है।

  2. ((b))

    प्रतीक संकेत द्वारा वस्तु की विशेषता ध्वनित करता है।

  3. ((c))

    प्रतीक का आधार जीवन की अनेकता है।

  4. ((d))

    प्रतीक का ग्रहण संदर्भ से अलग एकांत रूप में संभव है।

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Answer: ((c))

प्रतीक का आधार जीवन की अनेकता है।

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "प्रतीक का आधार जीवन की अनेकता है" सही नहीं है तथा अन्य विकल्प सही हैं।

Key Points

  • उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार प्रतीक का आधार जीवन और जगत की अनेकता है।
  • बिंब विधान बहुत से विश्रृंखल क्षणों का एक समुच्चय होता है। उसका आधार जीवन और जगत की अनेकता में है।
  • अर्थात बिंब विधान बंधनहीन, जो किसी प्रकार से रोका ना जा सके उन क्षणों का एक समूह है जिसका  आधार वास्तविक जीवन की अनेकता से है।

Additional Information

  • विश्रृंखल
  • जो श्रृंखलित न हो
  • बंधनहीन
  • जो किसी प्रकार दबाया या रोका न जा सके
  • अनेकता शब्द का पर्यायवाची शब्द
  • बहुरूपता, वैविध्य, विविधता अनैक्य, विभिन्नता, नानात्व
20

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. ((a))

    तार्किक संगति बिम्ब की तीव्रता को बढ़ाती है।

  2. ((b))

    प्रतीकों में तार्किक संगति का अभाव होता है।

  3. ((c))

    बिम्ब के संघटन में अबौद्धिकता, अन्तर्विरोध और व्यतिक्रम नहीं होता।

  4. ((d))

    बिम्ब का ढांचा आनुषंगिक नियमों द्वारा बुना जाता है।

Show Answer
Answer: ((d))

बिम्ब का ढांचा आनुषंगिक नियमों द्वारा बुना जाता है।

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "बिंब का ढांचा अनुषांगिक नियमों द्वारा बुना जाता है" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत है।

Key Points

  • उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार बिंब का सम्पूर्ण ढांचा अनुषांगिक नियमों द्वारा बना जाता है।
  • प्रतीक निर्माण में अज्ञात रूप से ही सही एक प्रकार की अंतर्दृष्टि या सूक्ष्म बौद्धिक प्रेरणा अवश्य रहती है परंतु बिंब का संपूर्ण ढांचा अनुषांगिक नियमों के द्वारा बुना जाता है।

Additional Information

  • आनुषंगिक
  • विशेषण
  • आप से आप घटित होनेवाला
  • अनावश्यक रूप से साथ होनेवाला, सहवर्ती
  • बिंब 
  • संज्ञा पुं० 
  • प्रतिबिंब , छाया, अक्स
21

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. ((a))

    बिम्ब की मूर्तता केवल दृष्टी विषयक होती है।

  2. ((b))

    बिम्ब का ज्ञानेन्द्रिय के किसी स्तर पर मूर्त होना अनिवार्य है।

  3. ((c))

    मूर्तता नाद, घ्राण या स्वाद से सम्बन्धित नहीं होती।

  4. ((d))

    बिम्ब ज्ञानेन्द्रिय से असम्बद्ध होता है।

Show Answer
Answer: ((b))

बिम्ब का ज्ञानेन्द्रिय के किसी स्तर पर मूर्त होना अनिवार्य है।

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "बिंब का ज्ञानेंद्रिय के किसी स्तर पर मूर्त होना अनिवार्य है।" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार बिंब का ज्ञानेंद्रिय के किसी स्तर पर मूर्त होना अनिवार्य है।
  • यह मूर्तता केवल दृष्टि विषयक ही नहीं होती नाद, घ्राण और स्वादपरक हो सकती है।

Additional Information

  • ज्ञानेंद्रिय
  • स्त्रीलिंग
  • विषयों का ज्ञान करानेवाली इंद्रियाँ (जैसे—आँख, कान, नाक, जीभ एवं त्वचा ज्ञानेंद्रियाँ हैं)।
  • घ्राण
  • स्त्रीलिंग
  • सूँघने की इंद्रिय, नाक
  • सूँघने की शक्ति
22

निम्नलिखित विकल्पों में से किनका संबंध माखनलाल चतुर्वेदी से है ?

(i) सिपाही 

(ii) आर्द्रा 

(iii) दैनिकी 

(iv) पुष्प की अभिलाषा 

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i) और (iii) सही  

  2. ((b))

    (i) और (iv) सही

  3. ((c))

    (ii) और (iv) सही

  4. ((d))

    (iii) और (iv) सही

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Answer: ((b))

(i) और (iv) सही

  • सही उत्तर - सिपाही एवं पुष्प की अभिलाषा कविताओं के रचयिता माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

Key Points

  • आर्द्रा (कहानी) - मोहन राकेश
  • आर्द्रा कहानी के पात्र - बचन, गणेशन, बिन्नी, कुसुम आदि
  • दैनिकी (डायरी) - सियाराम शरण गुप्त - 1947
  • सिपाही (कविता) और पुष्प की अभिलाषा (कविता) - माखन लाल चतुर्वेदी

Important Points

  • सिपाही और पुष्प की अभिलाषा कविता देशभक्ति पर आधारित हैं।
  • माखन लाल चतुर्वेदी की अन्य रचनाएं -
  1. हिमतरंगिनी
  2. हिमकिरीटनी
  3. अमर राष्ट्र
  4. समर्पण
  5. समय के पांव आदि
  • इन्होंने कर्मवीर पत्र का संपादन किया।

Additional Information

  • सियाराम शरण गुप्त मैथिली शरण गुप्त के अनुज थे।
  • मोहन राकेश की अन्य कहानियां -
  1. एक और जिंदगी
  2. परमात्मा का कुत्ता
  3. मिस पाल
  4. मवाली आदि

 

  • सिपाही नाम से एक कविता की रचना रामधारी सिंह दिनकर ने भी की है।
23

कालक्रम की दृष्टि से निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम है :

  1. ((a))

    सरहपा, पुष्पदंत, अद्दहमाण, हेमचन्द्र

  2. ((b))

    हेमचन्द्र, स���हपा, पुष्पदंत, अद्दहमाण

  3. ((c))

    पुष्पदंत, सरहपा, हेमचन्द्र, अद्दहमाण

  4. ((d))

    सरहपा, हेमचन्द्र, अद्दहमाण, पुष्पदंत

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Answer: ((a))

सरहपा, पुष्पदंत, अद्दहमाण, हेमचन्द्र

सही उत्तर - सरहपा, पुष्पदंत, अद्दहमाण, हेमचन्द्र 

Key Points

सरहपा769 ई.
पुष्पदंत10 वीं शती
अद्दहमाण12 वीं शती
हेमचन्द्र12 वीं शती

Important Points

  • सरहपा 84 सिद्धों में से एक हैं और राहुल सांकृत्यायन ने इन्हें हिंदी का प्रथम कवि माना हैI
  • पुष्पदंत अपभ्रंश के मुख्य कवि हैंI  
  • अद्दहमाण को अब्दुल रहमान भी कहा जाता हैI इन्होंने महत्वपूर्ण ग्रन्थ सन्देशरासक की रचना की हैI
  • हेमचन्द्र जैन आचार्यों में से एक हैंI

Additional Information

विभिन्न इतिहासकारों के अनुसार हिंदी का पहला कवि

  • राहुल सांकृत्यायन के अनुसार – सरहपा (769 ई.)
  • शिवसिंह सेंगर के अनुसार – पुष्प या पुण्ड (10 वीं शताब्दी)
  • गणपति चंद्र गुप्त के अनुसार – शालिभद्र सूरि (1184 ई.)
  • रामकुमार वर्मा के अनुसार – स्वयंभू (693 ई.)
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार- अब्दुल रहमान (13 वीं शताब्दी)
  • बच्चन सिंह के अनुसार – विद्यापति (15 वीं शताब्दी)
  • चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ के अनुसार- राजा मुंज (993 ई.)
  • रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- राजा मुंज व भोज (993 ई.)

नोट:- सर्व सामान्य रूप में राहुल सांकृत्यायन जी द्वारा स्वीकृत सिद्ध कवि ‘ सरहपा या सरहपाद’ को ही हिंदी का सर्वप्रथम कभी माना जाता है|

24

“दृग उरझत टूटत कुटूम जुरत चतुर चित प्रीति।

परति गांठि दुरजन हिये दई नई यह रीति ॥”

उपर्युक्त दोहे के संबंध में कौन-सा कथन सही है ?

(i) इसमें कार्य-कारण संबंध का स्वाभाविक चित्रण हुआ है।

(ii) इसमें प्रेमी-प्रेमिका के प्रेम का स्वाभाविक चित्रण हुआ है।

(iii) इसमें असंगति अलंकार है।

(iv) इसमें विभावना अलंकार है।

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i) और (ii) सही 

  2. ((b))

    (i) और (iv) सही 

  3. ((c))

    (iii) और (iv) सही 

  4. ((d))

    (ii) और (iii) सही 

Show Answer
Answer: ((d))

(ii) और (iii) सही 

सही उत्तर - (ii) और (iii) सही है।

यहां प्रेमी प्रेमिका के प्रेम का स्वाभाविक चित्रण हुआ है और इन पंक्तियों में असंगति अलंकार है।

Key Points

  • रचनाकार - बिहारी
  • यह दोहा बिहारी सत्सई से लिया गया है।
  • अर्थ - जब दो प्रेमियों के नयन मिलते हैं तब परिवार-कुटुंब के सब रिश्ते टूट जाते हैं लेकिन आपस में उनके चित अर्थात मन में प्रेम उत्पन्न होता है। दुष्ट लोगों के हृदय में गांठें पड़ जाती हैं। ईश्वर की यही नई रीति है।

Important Points

  • यहां असंगति अलंकार है। यह तब होता है जब कार्य और कारण के बीच कोई संगत नहीं होती अर्थात कार्य कहीं होता है और कारण कहीं और घटित होता है।
  • यहां प्रेमी प्रेमिका के प्रेम का स्वाभाविक चित्रण हुआ है। यह श्रृंगार रस का दोहा है।

Additional Information

  • बिहारी रीतिकाल के रीतिसिद्ध कवि हैं।
  • इनकी एकमात्र रचना है बिहारी सतसई जिसमें 700 के लगभग दोहे हैं।
  • ये दोहे नीति, श्रृंगार और भक्ति पर आधारित हैं।
  • विभावना अलंकार - जहां कारण न होते हुए भी कार्य का होना पाया जाए वहां विभावना अलंकार होता है।
25

कालक्रम के अनुसार निम्नलिखित आचार्यों का सही अनुक्रम है :

  1. ((a))

    रामानुजाचार्य, निबार्काचार्य, मध्वाचार्य, वल्लभाचार्य      

  2. ((b))

    मध्वाचार्य, रामानुजाचार्य, वल्लभाचार्य, निबार्काचार्य 

  3. ((c))

    निबार्काचार्य, मध्वाचार्य, रामानुजाचार्य, वल्लभाचार्य 

  4. ((d))

    रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, निबार्काचार्य, वल्लभाचार्य 

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Answer: ((a))

रामानुजाचार्य, निबार्काचार्य, मध्वाचार्य, वल्लभाचार्य      

सही उत्तर - रामानुजाचार्य, निम्बकाचार्य, मध्वाचार्य, वल्लभाचार्य  

Key Points

रामानुजाचार्य10 वीं शताब्दी
निम्बकाचार्य13 वीं शताब्दी
मध्वाचार्य14 वीं शताब्दी
वल्लभाचार्य15 वीं शताब्दी

Important Points

  • रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैतवाद के प्रवर्तक , रामभक्ति के आचार्य
  • निम्बकाचार्य - द्वैताद्वैत दर्शन के प्रतिपादक , विष्णु रूप के आचार्य
  • मध्वाचार्य - द्वैतवाद के प्रवर्तक , रामभक्ति के आचार्य
  • वल्लभाचार्य - कृष्णभक्ति में पुष्टिमार्ग के प्रणेता

Additional Information

  • सांख्य-कपिल
  • योग-पतंजलि
  • न्याय-अक्षपाद
  • गौतम-वैशेषिक
  • उलूक -कणद
  • मीमांसा/पूर्व-मीमांसा-जैमिनी
  • वेदांत/उत्तर मीमांसा-बादरायण
  • लोकायत/बार्हस्पत्य-चार्वाक (बृहस्पति का शिष्य)
  • बौद्ध/क्षणिकवाद-गौतम बुद्ध
  • जैन/स्यादवाद-महावीर
  • अद्वैत मत-शंकराचार्य (भक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला)
  • विशिष्टाद्वैत मत (श्री संप्रदाय)-रामानुज आचार्य (भक्ति आंदोलन का प्रारंभिक प्रतिपादक)
  • द्वैताद्वैत/ भेदाभेद मत (सनकादि/रसिक संप्रदाय)निम्बार्क आचार्य
  • द्वैत मत (ब्रह्म संप्रदाय)मध्वाआचार्य
  • शुद्धाद्वैत मत (रूद्र संप्रदाय)विष्णु स्वामी
  • पुष्टिमार्ग/शुद्धाद्वैत मत (रूद्र संप्रदाय)-वल्लभ आचार्य
  • अचिंत्यभेदाभेद मत (गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय)चैतन्य
  • राधा वल्लभ संप्रदाय,हित हरिवंश,रामावत,रामानंदी संप्रदाय-रामानंद
  • उदासी संप्रदाय-श्रीचंद (गुरु नानक के पुत्र)
  • बिश्नुई संप्रदाय-जंभनाथ
  • हरिदासी (सखी) संप्रदाय-स्वामी हरिदास
26

कालक्रम की दृष्टि से निम्नलिखित ग्रंथो का सही अनुक्रम है :

  1. ((a))

    भावविलास, काव्यनिर्णय, रसरहस्य, जगदविनोद     

  2. ((b))

    रसरहस्य, भावविलास, काव्यनिर्णय, जगदविनोद

  3. ((c))

    भावविलास, रसरहस्य, जगदविनोद, काव्यनिर्णय

  4. ((d))

    भावविलास, काव्यनिर्णय, जगदविनोद, रसरहस्य

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Answer: ((b))

रसरहस्य, भावविलास, काव्यनिर्णय, जगदविनोद

कालक्रम की दृष्टि से उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "रस रहस्य, भाव विलास, काव्य निर्णय, जगत विनोद" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

रचनारचना वर्षरचनाकार
रस रहस्य1670कुलपति मिश्र
भाव विलास1689देव
काव्य निर्णय1746भिखारी दास
जगत विनोद1753-1833 के मध्यपद्माकर

Important Points

  • जगत विनोद में छह प्रकाश एवं 731 छंदो  में नव रसों का विवेचन है।
  • काव्य निर्णय में काव्य के भेदोपभेदों का वर्णन है।
  • रस रहस्य में मम्मट के रस रहस्य का  छायानुवाद है।
  • भाव विलास में रस एवं नायक नायिका भेद वर्णन है।

Additional Information 

  • देव 
  • इनके ग्रंथों की संख्या 72 बताते हैं, जिनमें 'भाव-विलास, 'भवानी-विलास, 'कुशल-विलास, 'रस-विलास, 'प्रेम-चंद्रिका, 'सुजान-मणि, 'सुजान-विनोद तथा 'सुख-सागर तरंग आदि 19 ग्रंथ प्राप्त हैं।
  • पद्माकर के ग्रंथ
  • हिम्मतबहादुर विरुदावली, पद्माभरण, जगद्विनोद, रामरसायन (अनुवाद), गंगालहरी, आलीजाप्रकाश, प्रतापसिंह विरूदावली, प्रबोध पचासा, ईश्वर-पचीसी, यमुनालहरी, प्रतापसिंह-सफरनामा, भग्वत्पंचाशिका, राजनीति, कलि-पचीसी, रायसा, हितोपदेश भाषा (अनुवाद), अश्वमेध
  • कुलपति मिश्र
  • रस रहस्य (1670), द्रोण पर्व (1680), युक्ति तरंगिणी (1686),  नख शिख, संग्राम सार
  • भिखारी दास की प्रमुख रचनाएं:-
  • नाम कोश (1738), रस सारांश (1742), छंदार्णव पिंगल (1742), काव्य निर्णय (1746), श्रृंगार निर्णय (1750), विष्णु पुराण भाषा, शतरंज शतिका ,अमरकोश
27

प्रकाशन-वर्ष अनुसार निम्नलिखित रचनाओं का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    एकांतसंगीत, मधुशाला, सतरंगिनी, मिलनयामिनी     

  2. ((b))

    मधुशाला, सतरंगिनी, मिलनयामिनी , एकांतसंगीत

  3. ((c))

    मधुशाला, एकांतसंगीत, सतरंगिनी, मिलनयामिनी 

  4. ((d))

    सतरंगिनी, मधुशाला, मिलनयामिनी , एकांतसंगीत

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Answer: ((c))

मधुशाला, एकांतसंगीत, सतरंगिनी, मिलनयामिनी 

प्रकाशन वर्ष के अनुसार "मधुशाला, एकांत संगीत, सतरंगीनी, मिलन यामिनी" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

रचनाप्रकाशन वर्ष
मधुशाला1935
एकांत संगीत1939
सतरंगीनी1945
मिलन यामिनी1950

Important Points

  • उपर्युक्त सभी रचनाएं हरिवंशराय बच्चन जी की हैं।
  • मधुशाला 
  • इसमें एक सौ पैंतीस रूबाइयां (यानी चार पंक्तियों वाली कविताएं) हैं।
  • मधुशाला में सूफीवाद का दर्शन होता है।
  • सतरंगिनी
  • सतरंगिनी में 50 कविताएं हैं।
  • एक प्रवेश गीत है तथा 49 कविताएं हैं।

Additional Information

  • हरिवंश राय बच्चन के कविता संग्रह :-
  • तेरा हार (1929)मधुशाला (1935),मधुबाला (1936),मधुकलश (1937),आत्म परिचय (1937), निशा निमंत्रण (1938), एकांत संगीत (1939), आकुल अंतर (1943), सतरंगिनी (1945), हलाहल (1946), बंगाल का काल (1946), खादी के फूल (1948), सूत की माला (1948), मिलन यामिनी (1950), प्रणय पत्रिका (1955), धार के इधर-उधर (1957), आरती और अंगारे (1958), बुद्ध और नाचघर (1958), त्रिभंगिमा (1961), चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962), दो चट्टानें (1965), बहुत दिन बीते (1967), कटती प्रतिमाओं की आवाज़ (1968), उभरते प्रतिमानों के रूप (1969),​ जाल समेटा (1973) , नई से नई-पुरानी से पुरानी (1985)
28

जन्म-काल के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    श्रीधर पाठक, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत      

  2. ((b))

    श्रीधर पाठक, जयशंकर प्रसाद, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, सुमित्रानंदन पंत 

  3. ((c))

    अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, श्रीधर पाठक, सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद

  4. ((d))

    अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, श्रीधर पाठक, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत 

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Answer: ((a))

श्रीधर पाठक, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत      

जन्म काल के अनुसार "श्रीधर पाठक, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • श्रीधर पाठक :- 11 जनवरी 1858 - 13 सितंबर 1928
  • अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध':- 15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947
  • जयशंकर प्रसाद :- 30 जनवरी 1890 - 15 नवंबर 1937
  • सुमित्रानंदन पंत :- 20 मई 1900 - 28 दिसम्बर 1977

Additional Information

  • जयशंकर प्रसाद के काव्य-
  • प्रेम-पथिक - (1909) , करुणालय (काव्य नाटक) - 1913 ई, महाराणा का महत्त्व - 1924 ई, चित्राधार - 1918 ई॰ ,कानन कुसुम - 1918 ई , झरना - 1918 ई , आँसू - 1925 ई , लहर - 1933 ई ,कामायनी - 1936 ई
  • सुमित्रानंदन पंत
  • सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि कहे जाते हैं।
  • पंत जी कोमल कल्पना के लिए प्रसिद्ध रहे हैं।
  • पंत जी ने अपने जीवन के 1945-1959 काल को 'नव मानवता का स्वप्न काल' कहा है।
  • सुमित्रानंदन पंत की कुछ काव्य कृतियाँ हैं - ग्रन्थि, गुंजन, ग्राम्या, युगांत, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूलि, कला और बूढ़ा चाँद, लोकायतन, चिदंबरा, सत्यकाम आदि।
  • अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' 
  • प्रिय प्रवास (1914 ई) ,कवि सम्राट,वैदेही वनवास (1940 ई) , पारिजात (1937 ई) , रस-कलश (1940 ई) , चुभते चौपदे (1932 ई), चौखे चौपदे (1924 ई )
  • श्रीधर पाठक 
  • मनोविनोद (भाग-1,2,3), धन विनय (1900), गुनवंत हेमंत (1900), वनाष्टक (1912), देहरादून (1915), गोखले गुनाष्टक (1915)
29

जन्म वर्ष के अनुसार पाश्चात्य विचारों का सही अनुक्रम है :

  1. ((a))

    आई. ए. रिचर्डस, आस्कर वाइल्ड, मैथ्यू आर्नल्ड, सैमुअल टेलर कॉलरिज        

  2. ((b))

    सैमुअल टेलर कॉलरिज, मैथ्यू आर्नल्ड, आस्कर वाइल्ड, आई. ए. रिचर्डस

  3. ((c))

    मैथ्यू आर्नल्ड, सैमुअल टेलर कॉलरिज, आस्कर वाइल्ड, आई. ए. रिचर्डस

  4. ((d))

    आस्कर वाइल्ड, आई. ए. रिचर्डस, सैमुअल टेलर कॉलरिज, मैथ्यू आर्नल्ड

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Answer: ((b))

सैमुअल टेलर कॉलरिज, मैथ्यू आर्नल्ड, आस्कर वाइल्ड, आई. ए. रिचर्डस

  • जन्म वर्ष के अनुसार पाश्चात्य विचारों का सही अनुक्रम है :-

       सैमुअल टेलर कॉलरिज ( 1772-1834 ई. ) , मैथ्यू आर्नल्ड ( 1822 - 1888 ई. ) , आस्कर वाइल्ड ( 1854 - 1900 ई. ) , आई. ए . रिचर्ड्स ( 1893 - 1979 ई. )

Key Points

  • कॉलरिज को अंग्रेज़ी में व्यावहारिक आलोचना का प्रवर्तक माना जाता है ।
  • मैथ्यू आर्नल्ड आधुनिक अंग्रेज़ी के महान आलोचक हैं , उनके अनुसार संस्कृति पूर्णता का ही दूसरा नाम है ।
  • नयी समीक्षा को सैद्धांतिक आधार प्रदान कराने में आई . ए . रिचर्ड्स  का विशेष योगदान है ।

Important Points

  • कॉलरिज की प्रमुख रचनाएँ - बायोग्राफीया लिटरेरिया , लेक्चर ऑन लिटरेचर , आदि ।
  • मैथ्यू आर्नल्ड की प्रमुख रचनाएँ - कल्चर एंड अनार्की , एसेज एंड क्रिटिसिज्म , आदि ।
  • आस्कर वाइल्ड की प्रमुख रचनाएँ - द हैप्पी प्रिंस , द पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे ।
  • आई . ए. रिचर्ड्स की प्रमुख रचनाएँ - द फाउंडेशन ऑफ एस्थेटिक , द मीनिंग ऑफ मीनिंग , प्रिंसिपल ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज्म , आदि ।
30

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं I इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है I कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

अभिकथन (Assertion) (A): काव्यश्रवण या नाट्यदर्शन से आविर्भूत रस आनन्द का ही पर्याय होता है I 

तर्क (Reasons) (R): क्योंकि पश्चिमी शास्त्रों में रस को ब्रम्हानन्द का समानार्थी कहा गया है I

  1. ((a))

    (A) सही (R) गलत  

  2. ((b))

    (A) सही (R) सही 

  3. ((c))

    (A) गलत (R) गलत 

  4. ((d))

    (A) गलत (R) सही 

Show Answer
Answer: ((a))

(A) सही (R) गलत  

  • काव्य श्रवण या नाट्य दर्शन से आविर्भूत रस आनंद का ही पर्याय होता है । यह कथन सत्य है क्योंकि सहृदय को काव्य या नाटक देखने से जो भाव उत्पन्न होता है वह आनंद की अनुभूति कराता है ।
  • भारतीय काव्यशास्त्र में रस को ब्रह्मानंद का समानार्थी कहा गया है पाश्चात्य शास्त्रों में नहीं ।

Key Points

  • रस की सर्वप्रथम व्याख्या भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र में मिलती है ।
  • रस को काव्य की आत्मा माना गया ।
  • रस के चार अंग होते हैं - स्थायी भाव , विभाव , अनुभाव , संचारी भाव ।
  • मुख्यतः नौ रस माने जाते हैं पर भरतमुनि ने आठ रसों को मान्यता दी है ।

Important Points

  • आचार्य भट्टनायक ने रस को ब्रह्मानंद सहोदर कहा ।
  • आचार्य विश्वनाथ ने रस को अखंड , स्वप्रकाश , आनंदमय , चिन्मय , आदि कहा ।
31

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं I इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है I कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

अभिकथन (Assertion) (A): रस न तो निर्विकल्पक ज्ञान का विषय है और न सविकल्पक 

तर्क (Reason) (R): क्योंकि रस की प्रतीति में शृंगार, वीर, हास्य, करुण आदि रस विशेष रूप से आभासित होते हैं, इसलिए रस निर्विकल्पक ज्ञान का विषय नहीं है I

  1. ((a))

    (A) सही (R) सही 

  2. ((b))

    (A) सही (R) गलत 

  3. ((c))

    (A) गलत (R) गलत 

  4. ((d))

    (A) गलत (R) सही 

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Answer: ((b))

(A) सही (R) गलत 

  • रस न तो निर्विकल्पक ज्ञान का विषय है और न सविकल्पक क्योंकि रस की प्रतीति में श्रृंगार , वीर , हास्य , करूँ आदि रस विशेष रूप  से आभासित होते हैं , इसलिए रस निर्विकल्प ज्ञान का विषय है ।श्रृंगार
  • रस संप्रदाय के प्रवर्तक हैं भरतमुनि ।
  • रस को काव्य की आत्मा के रूप में सर्वप्रथम विश्वनाथ ने मान्यता दी ।
  • रस के चार भाग हैं - विभाव , अनुभाव , संचारी भाव , स्थायी भाव ।

Key Points ​

  • अभिनवगुप्त के अनुसार मूलतः रसों की संख्या नौ है ।
  • भाव को संपूर्ण रस का स्रोत माना जाता है ।
  • रस को ब्रह्मानंद सहोदर सर्वप्रथम भट्टनायक ने कहा ।

Important Points

रसस्थायी भाव
श्रृंगाररति
हास्य रसहास
करुणशोक
वीरउत्साह
रौद्रक्रोध
भयानकभय
अद्भुतविस्मय
वीभत्सजुगुप्सा
शांतनिर्वेद
32

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं I इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है I कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

अभिकथन (Assertion) (A): काव्य और कला-सृजन संघर्ष का फल है I  

तर्क (Reasons) (R): क्योंकि सृजनशील व्यक्तित्व गतिशीलता के साथ अपने समय के अभावों और दबावों से जूझता है I

  1. ((a))

    (A) सही (R) गलत  

  2. ((b))

    (A) गलत (R) सही 

  3. ((c))

    (A) गलत (R) गलत 

  4. ((d))

    (A) सही (R) सही 

Show Answer
Answer: ((d))

(A) सही (R) सही 

उपर्युक्त विकल्पों में अभिकथन व तर्क दोनों सही हैं तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • काव्य और कला सृजन संघर्ष का फल है क्योंकि सृजनशील व्यक्तित्व गतिशीलता के साथ अपने समय के अभावों और दबावों से जूझता है।

Additional Information

  • काव्य
  • काव्य, कविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है।
  • कला
  • भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो।
  • यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है।
  • कला एक प्रकार का कृत्रिम निर्माण है जिसमे शारीरिक और मानसिक कौशलों का प्रयोग होता है।
33

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं I इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है I कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

अभिकथन (Assertion) (A): कला भी ज्ञान का एक प्रकार और सत्य की उपलब्धि की एक साधना है I 

तर्क (Reasons) (R): क्योंकि कला-जगत में भी कलाकर के चित्त में जब वस्तु-सत्य उदभासित होता है तभी वह श्रेष्ठ कला-रचना में प्रवृत्त होता है I इसलिए हर महान कलाकृति सत्य से समन्वित होती है I

  1. ((a))

    (A) गलत (R) सही 

  2. ((b))

    (A) सही (R) सही 

  3. ((c))

    (A) गलत (R) गलत 

  4. ((d))

    (A) सही (R) गलत  

Show Answer
Answer: ((b))

(A) सही (R) सही 

उपर्युक्त विकल्पों में अभिकथन व तर्क दोनों सही हैं तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • कला विज्ञान का एक प्रकार और सत्य की उपलब्धि की एक साधना है क्योंकि कला जगत में कभी कलाकार के चित्र में जब वस्तु सत्य उद्भासित होता है तभी वह श्रेष्ठ कला रचना में प्रवृत्त होता है इसलिए हर महान कलाकृति सत्य से समन्वित होती है।

Additional Information

  • कला
  • भारतीय परम्परा के अनु सार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो।
  • यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है।
  • कला एक प्रकार का कृत्रिम निर्माण है जिसमे शारीरिक और मानसिक कौशलों का प्रयोग होता है।
34

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं I इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है I कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए :

अभिकथन (Assertion) (A): मिथकशास्त्र मनुष्य की मानसिक संरचना को समझने की एक भ्रामक विद्या है I 

तर्क (Reasons) (R): क्योंकि यह एक असत्य कथा, मिथ्या अथवा कोरी कल्पना है I

  1. ((a))

    (A) सही (R) सही 

  2. ((b))

    (A) गलत (R) सही 

  3. ((c))

    (A) गलत (R) गलत 

  4. ((d))

    (A) सही (R) गलत  

Show Answer
Answer: ((c))

(A) गलत (R) गलत 

उपर्युक्त अभिकथन वह तर्क दोनों ही गलत हैं। अतः  उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A गलत R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन :- मिथक शास्त्र मनुष्य की मानसिक संरचना को समझने की एक भ्रामक विद्या है गलत है क्योंकि मिथक शास्त्र काल्पनिक संरचना है जो रूढ़िवादी होती है।
  • तर्क :- क्योंकि मिथक शास्त्र में भी कुछ सत्यकथा तथा यथार्थवादी तथ्य होते हैं।

Additional Information

  • मिथक शास्त्र
  • मिथकों का अध्ययन या वह विद्या या शास्त्र जिसके अंतर्गत मिथकों का अध्ययन किया जाता है।
  • उर्वशी हिंदू मिथक शास्त्र की एक पौराणिक नारी पात्र है जो ऋषियों को तपच्युत करती है और सभी मनुष्यों का हृदय चुरा लेती है।
35

''सिद्धों और योगियों की रचनाओं का जीवन की स्‍वाभाविक अनुभूतियों और दशाओं से कोई संबंध नही है। अत: वे शुद्ध साहित्‍य के अंतर्गत नहीं आतीं।'' यह विचार किसका है?

  1. ((a))

    मुनि जिनविजय

  2. ((b))

    रामचंद्र शुक्‍ल

  3. ((c))

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

  4. ((d))

    धीरेन्‍द्र वर्मा

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Answer: ((b))

रामचंद्र शुक्‍ल

उपर्युक्त कथन रामचंद्र शुक्ल जी का है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प रामचंद्र शुक्ल सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • रामचंद्र शुक्ल जी ने सिद्धों और योगियों की रचनाओं को सिद्ध साहित्य नहीं माना है उसकी आलोचना करते हुए को जीवन की स्वाभाविक अनुभूतियों और दशाओं से संबंधित नहीं माना है।

Important Points

  • 8वी सदी में 84 सिद्धों के साथ बौद्ध धर्म के वज्रयान की परम्परा का प्रचलन हुआ।
  • ये सभी नाथ ही थे।
  • बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा के अनुयायी सिद्ध कहलाते थे।
  • सिद्धों की प्रमुख रचनाएं:-
  • सरहपा (769 ई.):- दोहाकोष
  • लुइपा (773 ई. लगभग) :- लुइपादगीतिका
  • शबरपा (780 ई.) :- चर्यापद , महामुद्रावज्रगीति , वज्रयोगिनीसाधना
  • कण्हपा (820 ई. लगभग):-  चर्याचर्यविनिश्चय। कण्हपादगीतिका
  • डोंभिपा (840 ई. लगभग):-  डोंबिगीतिका, योगचर्या, अक्षरद्विकोपदेश

Additional Information

  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (11 अक्टूबर, 1884ईस्वी- 2 फरवरी, 1941ईस्वी)
  • हिन्दी आलोचक, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे।
  • हिन्दी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात उन्हीं के द्वारा हुआ।
  • हिन्दी निबन्ध के क्षेत्र में भी शुक्ल जी का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  • भाव, मनोविकार सम्बंधित मनोविश्लेषणात्मक निबन्ध उनके प्रमुख हस्ताक्षर हैं।
  • मुनि जिन विजय को प्राप्त सम्मान :- 
  • 1961 में भारत सरकार ने पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित किया।
  • 1965 में राजस्थान साहित्य अकादमी ने साहित्य मनीषी सम्मान प्रदान किया।
  • आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास:-
  • बाणभट्ट की आत्‍मकथा (1946)
  • चारु चंद्रलेख(1963)
  • पुनर्नवा(1973)
  • अनामदास का पोथा(1976)
  • डॉ धीरेन्द्र वर्मा (1897-1973), हिन्दी तथा ब्रजभाषा के कवि एवं इतिहासकार थे।
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रस गगन गुफा मे अजर झरै।

अजपा सुमिरन जाप करै।

उक्‍त पंक्तियों में प्रयुक्‍त 'गगन गुफा' का अभिप्राय है-

  1. ((a))

    आसमान में स्थित गुफा

  2. ((b))

    अलौकिक गुफा

  3. ((c))

    सहस्‍त्रार चक्र

  4. ((d))

    मूलाधार चक्र

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Answer: ((c))

सहस्‍त्रार चक्र

उक्त पंक्तियों में प्रयुक्त गगन गुफा से अभिप्राय सहस्त्रार चक्र से है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प सहस्त्रार चक्र सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • गगन गुफा से अभिप्राय सहस्त्रार चक्र से हैं।
  • उपर्युक्त पंक्तियां कबीर दास जी की हैं।

Important Points 

  • अधिकांश तांत्रिक योग सम्रदायों के अनुसार, सहस्रार चक्र को सातवाँ चक्र माना जाता है।
  • सहस्रार चक्र, भिन्न-भिन्न रंग वाली 1000 पंखुड़ियों वाले कमल के समान है।

Additional Information 

  • कबीर दास
  • कबीर या भगत कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे।
  • वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे।
  • कृतियां :-  साखी, सबद, रमैनी
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भारत में अंग्रजों के बढ़ते प्रभाव के प्रति ध्‍यान आकर्षित करते हुए पद्माकर ने किस राजा के दरबार में यह कविता पढ़ा था ?

मीनागढ़ बंबई सुमंद मंदराज बंग,

बंदर को बंद कर‍ि बंदर बसावैगाेे।

कहै पदमाकर कसकि कासमीर हू को,

पिंजर सों घेरि के कलिंजर छुड़ावैगो।

बॉंका नृप (---) अलीजा महाराज कबौं,

साजि दल पकर‍ि फिरंगिन दबावैगो।

दिल्‍ली दहपट्टि, पटना हू को झपटृट करि,

कबहूँक लता कलकता को उड़ावैगो।।

  1. ((a))

    जगत सिंह

  2. ((b))

    अनूप गिरि

  3. ((c))

    दौलत राव सिंघिया

  4. ((d))

    रघुनाथ राव

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Answer: ((c))

दौलत राव सिंघिया

  • यह पंक्ति भारत में अंग्रेज़ों  के बढ़ते प्रभाव के प्रति ध्यान आकर्षित करते हुए  पद्माकर ने राजा दौलत राव सिंधिया के दरबार में सुनाई थी  ।
  • पद्माकर रीतिबद्ध कवि हैं  ।

Key Points

  • पद्माकर ( 1753-1833 ई.) को जयपुर नरेश प्रताप सिंह द्वारा 'कविराज शिरोमणि' की उपाधि दी गयी थी ।
  • पद्माकर ने अपने काव्य में फाग , होली और अन्य त्योहारों का वर्णन किया है ।
  • पद्माकर ने हितोपदेश का अनुवाद ' सरदार अदा ' के कहने पर किया था ।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल का कथन - " पद्माकर की भाषा में वह अनेकरूपता है जो एक बड़े कवि में होनी चाहिए , भाषा की ऐसी अनेकरूपता तुलसीदास जी में दिखाई पड़ती है " ।

Important Points

  • | रचना | विषय | | --- | --- | | पद्माभरण | अलंकार विवेचन | | जगद्विनोद | नवरस निरूपण | | गंगालहरी | जगन्नाथ कृत गंगा लहरी का अनुवाद | | प्रबोध पचासा | भक्ति एवं वैराग्य से सम्बंधित ग्रन्थ | | हिम्मतबहादुर विरुदावली | वीर रस प्रधान प्रबंधकाव्य | | प्रताप सिंह विरुदावली | राजा प्रताप सिंह की वीरता का वर्णन |
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हिन्‍दी में 'ऋतु संहार' के रचयिता है-

  1. ((a))

    भारतेन्‍दु हरिश्‍चंद्र

  2. ((b))

    गुरूभक्‍त सिंह

  3. ((c))

    ठाकुर जगमोहन सिंह

  4. ((d))

    श्रीधर पाठक

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Answer: ((d))

श्रीधर पाठक

  • ऋतु संहार के रचयिता ' श्रीधर पाठक ' ( 1859 - 1928 ई. ) हैं ।
  • श्रीधर पाठक खड़ी बोली के प्रथम स्वच्छंदतावादी कवि हैं ।

Key Points

  • ऋतु संहार के मूल रचनाकार कालिदास हैं , उनकी रचना का अनुवाद श्रीधर पाठक ने किया ।
  • गुनवंत हेमंत श्रीधर पाठक की पहली खड़ी बोली रचना है ।

Important Pointsश्रीधर पाठक द्वारा अनूदित काव्य ग्रन्थ 

अनूदित रचनाअनूदित वर्षमूल रचनामूल रचनाकारअनूदित भाषा
गड़ेरिये और दार्शनिकशेफर्ड एंड फिलॉसफरग्रे
एकांतवास योगी1886हरमिटगोल्डस्मिथखड़ी बोली
उजड़ग्राम1889डेजर्टेड  विलेजगोल्डस्मिथब्रजभाषा
श्रांत पथिक1902ट्रेवलरगोल्डस्मिथखड़ीबोली
  • श्रीधर पाठक की अन्य रचनाएं - कश्मीर सुषमा ( पहली मौलिक रचना ब्रजभाषा में ) , मनोविनोद , देहरादून , भारतगीत , जगत सच्चाई सार आदि ।

Additional Information

  • भारतेंदु हरिश्चंद को आधुनिककाल का प्रवर्तक माना जाता है ।
  • भारतेंदु मंडल के कवि ठाकुर जगमोहन सिंह हैं ।
  • गुरु भक्त सिंह द्विवेदी युग ( ब्रजभाषा काव्य ) के प्रमुख कवि हैं ।
39

''नारी का आकर्षण पुरूष को पुरूष बनाता है, तो उसका अपकर्षण उसे गौतम बुद्ध देता है।'' यह संवाद किस नाटक का है ?

  1. ((a))

    आषाढ़ का एक दिन

  2. ((b))

    आधे अधूरे

  3. ((c))

    लहरों के राजहंस

  4. ((d))

    पैर तले की जमीन

Show Answer
Answer: ((c))

लहरों के राजहंस

यह संवाद-3) लहरों के राजहंस नाटक का है।

Important Points

  • लहरों के राजहंस नाटक का प्रकाशन 1963 में मोहन राकेश ने किया।
  • लहरों के राजहंस में सांसारिक सुखों और आध्यात्मिक शांति के पारस्परिक विरोध तथा उनके बीच खड़े हुए व्यक्ति के द्वारा निर्णय लेने का द्वन्द्व दर्शाया है।
  • इस नाटक के प्रमुख पात्र-नंद,गौतम बुद्ध,सुन्दरी,अलका,श्यामांग,नीहारिका आदि हैं।
  • मोहन राकेश की अन्य कृतियाँ-अंधेरे बंद कमरे,अन्तराल,न आने वाला कल,आखिरी चट्टान तक,आषाढ़ का एक दिन,अण्डे के छिल्के आदि हैं।

Additional Information

  • आषाढ़ का एक दिन(1958) के पात्र-अम्बिका,मल्लिका,कालिदास,दंतुल,मातुल आदि हैं।
  • 1959 में इसे वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नाटक होने के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • आधे अधूरे(1969) नाटक के पात्र-महेंद्रनाथ,सिंघानिया,जगमोहन,जुनेजा,बिन्नी,मनोज आदि हैं।
  • यह मध्यवर्गीय जीवन पर आधारित नाटक है।
  • पैर तले की जमीन के पात्र-अब्दुल्ला,नियामत,पंडित,झुनझुनवाला,नीरा,गुड्डो दीदी आदि हैं।
  • इसमें चारों ओर के बिखराव,अस्त-व्यस्तता,खालीपन,हड़बड़ाहट का चित्रण किया गया है।
40

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reason) R) है। कूट में दिए गए विकल्पो में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): संचारी भावों के उदय होने से रसावस्था को स्थायित्व प्राप्त होता है।

तर्क (Reason) R): क्योंकि विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव स्थायी भावों के सहायक और वर्द्धक होते हैं।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A सही R सही

  3. ((c))

    A ग़लत R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R ग़लत

Show Answer
Answer: ((b))

A सही R सही

उपर्युक्त विकल्पों में से अभिकथन व तर्क दोनों सही हैं तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • संचारी भावों के उदय होने से रसावस्था को स्थायित्व प्राप्त होता है। क्योंकि विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव स्थायी भावों के सहायक और वर्द्धक होते हैं।

Important Points

  • व्यभिचारी या संचारी भाव कहते हैं - वह भाव जो स्थायी भाव की ओर चलते है, जिससे स्थायी भाव रस का रूप धारण कर लेवे।
  • इसे यो भी कह सकते हैं जो भाव रस के उप कारक होकर पानी के बुलबुलों और तरंगों की भांति उठते और विलिन होते है। उन्हें व्यभिचारी या संचारी भाव कहते है।

Additional Information

  • संचारी भाव के भेद है - 
  • भरत मुनि ने 33 संचारी भाव माने है (निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, मद, श्रम, आलस्य, देन्य, चिंता, मोह, स्मृति, घृति, ब्रीडा, चपलता, हर्ष, आवेग, जड़ता, गर्व, विषाद, औत्सुक्य, निद्रा, अपस्मार, स्वप्न, विबोध, अमर्ष, अविहित्था, उग्रता, मति, व्याधि, उन्माद, मरण, वितर्क)
  • महाकवि देव ने 34 वां संचारी भाव छल माना लेकिन वह विद्वानों को मान्य नहीं हुआ।
  • महाराज जसवंत सिंह ने भारतभूषण में 33 संचारी भावों को गीतात्मक रूप में लिखा है।
41

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (A): वीरता का अनुकरण किया जा सकता है, वैसे ही जैसे मन की प्रसन्नता उधार ली जा सकती है।

तर्क (R): क्योंकि वीरता का सम्बन्ध शरीर बल से होता है मनोबल से नहीं।

  1. ((a))

    A सही R सही

  2. ((b))

    A सही R ग़लत

  3. ((c))

    A ग़लत R सही

  4. ((d))

    A ग़लत R ग़लत

Show Answer
Answer: ((d))

A ग़लत R ग़लत

सही विकल्प-4) A ग़लत R ग़लत

  • अभिकथन (A): वीरता का अनुकरण किया जा सकता है, वैसे ही जैसे मन की प्रसन्नता उधार ली जा सकती है।
  • तर्क (R): क्योंकि वीरता का सम्बन्ध शरीर बल से होता है मनोबल से नहीं।
  • यहाँ दोनों गलत है।

Key Points

  • किसी भी साहसपूर्ण कार्य को बहादुरी से करना वीरता कहलाती है।
  • वीरता एक प्रकार की अन्त:प्रेरणा है।
  • सच्चे वीर की सत्य के कारण सदा जीत होती है।
  • अनुकरण शब्द में अनु उपसर्ग है।
  • ऐसे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व में जुड़ कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं उपसर्ग कहलाते हैं।
42

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): उपभोक्तावादी सभ्यता से असंतोष भाववादी बुद्धिजीवियों के लिए स्वाभाविक है।

तर्क (Reason) R): क्योंकि उनके अनुसार इस सभ्यता से मानव-मूल्यों में गिरावट आई है।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A ग़लत R सही

  3. ((c))

    A ग़लत R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R सही

Show Answer
Answer: ((d))

A सही R सही

सही विकल्प-3) A सही R सही है। 

अभिकथन (A): उपभोक्तावादी सभ्यता से असंतोष भाववादी बुद्धिजीवियों के लिए स्वाभाविक है।

तर्क (R): क्योंकि उनके अनुसार इस सभ्यता से मानव-मूल्यों में गिरावट आई है।

Key Points

  • हमारी जीवन-शैली धीरे-धीरे बदल रही है। इसमें उपभोक्तावाद बढ़ता जा रहा है।
  • उपभोक्तावाद का प्रसार सामंती संस्कृति की देन है।
  • उपभोक्तावादी संस्कृति का मुख्य लक्ष्य है बाजार और उपभोक्ता के मध्य सम्बन्ध स्थापित करना।
  • यह संस्कृति व्यक्ति का सम्बन्ध वस्तु के साथ जोड़ने पर बल देती है।
43

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): जयशंकर प्रसाद का 'चन्द्रगुप्त' नाटक स्वतन्त्रता और गणतंत्र का यूटोपिया है।

तर्क (Reason) R): इसलिए उन पर वर्तमान से पलायन और इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने का सही आरोप लगा।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A सही R सही

  3. ((c))

    A सही R ग़लत

  4. ((d))

    A ग़लत R ग़लत

Show Answer
Answer: ((c))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क गलत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन
  • जयशंकर प्रसाद का चंद्रगुप्त नाटक स्वतंत्रता और गणतंत्र का यूटोपिया है।
  • तर्क
  • "इसलिए उन पर वर्तमान से पलायन और इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने का सही आरोप लगा" तर्क गलत है क्योंकि इस वजह से इन पर कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता है।

Additional Information

  • चंद्रगुप्त नाटक में कुल 4 अंक 44 दृश्य है।
  • चंद्रगुप्त नाटक की रचना जयशंकर प्रसाद ने की है।
  • इसका रचना वर्ष 1931 ईस्वी है।
  • नारी पात्र:-  अलका, सुवासिनी, कल्याणी, मालविका, कार्नेलिया, मौर्य, पत्नी, एलिस
  • पुरुष पात्र:-  चंद्रगुप्त, चाणक्य, राक्षस, पर्वतेश्वर, सिंहरण, आम्भिक,वर रुचि, शकटार, सिकंदर, फिलिप्स, देवल, नागदा, गांधार नरेश, मौर्य, सेनापति
44

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): वे शब्द जो आज अमूर्त्त विचारों के वाहक हैं, आरम्भ में अनुभूत वस्तुओं के व्यंजक थे।

तर्क (Reason) R): इसीलिए सादृश्य-विधान भाषा की मूल प्रकृति नहीं है।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A ग़लत R सही

  3. ((c))

    A सही R सही

  4. ((d))

    A ग़लत R ग़लत

Show Answer
Answer: ((a))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क गलत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन
  • वे शब्द जो आज अमूर्त विचारों के वाहक हैं आरंभ में अनुभूत वस्तुओं के व्यंजक थे।
  • तर्क
  • "इसीलिए सादृश्य विधान भाषा की मूल प्रकृति नहीं है।" तर्क गलत है क्योंकि सादृश्य विधान भाषा की मूल प्रकृति है।

Additional Information

  • सादृश्य
  • सादृश्य या अनुरूपता  एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है जिसमें एक विषय के ज्ञान या सूचना को दूसरे विषय में स्थानान्तरित किया जाता है।
45

निम्नलिखित पंक्तियों को उनके रचयिताओं के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)पंडिअ सअल सत्त बक्खाणइi)गोरखनाथ
b)नौ लख पातरि आगे नाचैंii)चन्द बरदाई
c)बारह बरिस लै कूकर जीएंiii)सरहपा
d)बज्जिय घोर निसान रान चौहान चहौं दिसiv)नरपतिनाल्ह
v)जगनिक
  1. ((a))

    a-iii, b-i, c-v, d-ii

  2. ((b))

    a-iv, b-v, c-iii, d-i

  3. ((c))

    a-ii, b-iv, c-i, d-v

  4. ((d))

    a-iv, b-ii, c-v, d-iii

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-i, c-v, d-ii

उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "a-iii, b-i, c-v, d-ii" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

सूची Iसूची II
a)पंडिअ सअल सत्त बक्खाणइi)सरहपा
b)नौ लख पातरि आगे नाचैंii)गोरखनाथ
c)बारह बरिस लै कूकर जीएंiii)जगनिक
d)बज्जिय घोर निसान रान चौहान चहौं दिसiv)चन्दर बरदाई

Important Points

  • सरहपा
  • सरह या सरहपा या सिद्ध सरहपा (8वीं शती) हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं।
  • उनको बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है।
  • उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म‘ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं।
  • गोरखनाथ
  • गोरखनाथ या गोरक्षनाथ जी महाराज प्रथम शताब्दी के पूर्व नाथ योगी  थे।
  • गोरखनाथ का नाथ पंथ बौद्धों की वज्रयान शाखा से निकला हुआ माना जाता है।
  • गोरखनाथ ने पतंजलि के उच्च लक्ष्य, ईश्वर प्राप्ति को लेकर हठयोग का प्रवर्तन किया है।
  • चंदबरदाई
  • चंदबरदाई (जन्म: संवत 1205 तदनुसार 1148 - मृत्यु: संवत 1249 तदनुसार 1192 ई०) हिन्दी साहित्य के आदिकालीन कवि त��ा पृथ्वीराज चौहान के मित्र थे।
  • उन्होने पृथ्वीराज रासो नामक प्रसिद्ध हिन्दी ग्रन्थ की रचना की।
  • जगनिक की रचनाएं:- 
  • आल्ह खण्ड
  • फर्रूखाबाद के कलक्टर सर चार्ल्स इलियट ने 'आल्ह खण्ड' नाम से इसका संग्रह कराया जिसमें कन्नौजी भाषा की बहुलता है।
  • परमाल रासो
  • "बारह बरिस लै कूकर जीएं" पंक्ति परमाल रासो से हैं।

Additional Information

  • नरपतिनाल्ह
  • नरपति नाल्ह पुरानी पश्चमी राजस्थानी की सुप्रसिद्ध रचना "वीसलदेव रासो" के कवि हैं।
  • इस रचना में उन्होंने स्वयं को कहीं "नरपति" लिखा है और कहीं "नाल्ह"।
  • अजमेर शासक बीसलदेव के आश्रय में “बीसलदेव रासौ'' का सृजन वि. सं. 1212 में किया था।
46

निम्नलिखित बोलियों को उनके क्षेत्र के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)पश्चिमी पहाड़ीi)गढ़वाल
b)मध्यवर्ती पहाड़ीii)पटना
c)भोजपुरीiii)शिमला
d)मगहीiv)ग़ाज़ीपुर
v)बिलासपुर
  1. ((a))

    a-iii, b-i, c-iv, d-ii

  2. ((b))

    a-iv, b-iii, c-ii, d-v

  3. ((c))

    a-iii, b-iv, c-v, d-i

  4. ((d))

    a-i, b-iii, c-ii, d-iv

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-i, c-iv, d-ii

सही उत्तर-1) a-iii, b-i, c-iv, d-ii है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)पश्चिमी पहाड़ी(iii)शिमला
(b)मध्यवर्ती पहाड़ी(i)गढ़वाल
(c)भोजपुरी(iv)ग़ाज़ीपुर
(d)मगही(ii)पटना

Important Points

  • हिंदी की अनेक बोलियाँ हैं,भारत में 18 बोलियाँ हैं।
  • हिंदी के दो उपरूप माने जाते हैं-पश्चिमी हिंदी और पूर्वी हिंदी
  • हिंदी प्रदेश की तीन उपभाषाएँ हैं-
  1. ​बिहारी-भोजपुरी, मगही और मैथिली।
  2. राजस्थानी-पंजाब के दक्षिण भाग
  3. पहाड़ी-पूर्वी,मध्यवर्ती और पश्चिमी।

Additional Information

  • पश्चिमी हिंदी- खड़ी बोली,हरियाणवी,ब्रज,कन्नौज,बुंदेली।
  • पूर्वी हिंदी- अवधी,बघेली और छत्तीसगढ़ी।
47

निम्नलिखित ग्रंथों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)भाषा भूषणi)मतिराम
b)अलंकार पंचाशिकाii)पद्माकर
c)विष्णुपद कीर्तनiii)जसवन्त सिंह
d)रस विलासiv)चिन्तामणि
v)रसनिधि
  1. ((a))

    a-ii, b-iv, c-v, d-i

  2. ((b))

    a-iv, b-ii, c-iii, d-v

  3. ((c))

    a-iii, b-i, c-v, d-iv

  4. ((d))

    a-i, b-v, c-ii, d-iii

Show Answer
Answer: ((c))

a-iii, b-i, c-v, d-iv

सही उत्तर-3) a-iii, b-i, c-v, d-iv है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)भाषा भूषण(iii)जसवन्त सिंह
(b)अलंकार पंचाशिका(i)मतिराम
(c)विष्णुपद कीर्तन(v)रसनिधि
(d)रस विलास(iv)चिन्तामणि

Important Points

  • जसवंत सिंह के रचित ग्रंथ-भाषाभूषण,अपरीक्षसिद्धांत,अनुभवप्रकाश,आनंदविलास,सिद्धांतबोध, सिद्धांतसार और प्रबोधचंद्रोदय आदि प्रसिद्ध हैं।
  • मतिराम के द्वारा रचित ग्रंथ-अलंकार पंचासिका,छंदसार (पिंगल) संग्रह या वृत्तकौमुदी,साहित्यसार और लक्षणशृंगार हैं।
  • रसनिधि के द्वारा रचित ग्रंथ-रतनहजारा,विष्णुपदकीर्तन,बारहमासी,रसनिधिसागर,गीतिसंग्रह,अरिल्ल और माँझ,हिंडोला हैं।
  • चिन्तामणि के द्वारा रचित ग्रंथ -काव्यविवेक,कविकुलकल्पतरु,काव्यप्रकाश,छंदविचारपिंगल,रामायण और रस विलास हैं।

Confusion Points

  • रस विलास की रचना चिन्तामणि ने की।
  • देव के ग्रंथों की संख्या 72 बताते हैं,जिनमें भाव-विलास,भवानी-विलास,कुशल-विलास,रस-विलास,प्रेम-चंद्रिका,सुजान-मणि,सुजान-विनोद तथा सुख-सागर तरंग आदि 19 ग्रंथ प्राप्त हैं।
48

निम्नलिखित कहानियों को उनके संबद्ध पात्रों से सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)गदलi)गोमती
b)गुलकी बन्नोii)मिन्नी
c)पिसनहारी का कुआंiii)निहाल
d)एक ठहरा हुआ चाकूiv)मिहिरलाल
v)गजाधर
  1. ((a))

    a-iii, b-iv, c-i, d-ii

  2. ((b))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  3. ((c))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-v

  4. ((d))

    a-iv, b-ii, c-i, d-iii

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-iv, c-i, d-ii

Key Points

क्र.सं .कहानीपात्रलेखक
1.गदलनिहालरांगेय राघव
2.गुल की बन्नीमिहिरलालधर्मवीर भारती
3.पिसनहारी का कुआँगोमतीमुंशी प्रेमचंद
4.एक ठहर हुआ चाक़ूमिन्नीमोहन राकेश

Important Points 

  • आचार्य 'रामचन्द्र शुक्ल' ने किशोरीलाल गोस्वामी कृत 'इंदुमती' को हिंदी की पहली कहानी मानाI
  • हिंदी गद्य की लगभग सभी विधाओ सूत्रपात 'भारतेंदु युग' में हो गया था परन्तु हिंदी कहानी का आविभार्व 'द्विवेदी युग' में हुआI
  • मुंशी प्रेमचंद को हिंदी कहानी का सम्राट कहा जाता है I
क्र. सं.कहानीकारकहानी
1.प्रेमचंदसौत, पंचपरमेश्वर, बलिदान, आत्माराम, बूढी काकी, ठाकुर का कुआँ, पूस की रात, कफ़न, नशा
2.धर्मवीर भारतीमुर्दों का गाँव , चाँद और टूटे हुए लोग , बंद गली का आखिरी माकन
3.रांगेय राघवअभिमान , गाजी , पिसनहारी , डंगर
49

यात्रा-साहित्य से सम्बन्ध निम्नलिखित रचनाओं को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)कितना अकेला आकाशi)नासिरा शर्मा
b)जहां फव्वारे लहू रोते हैंii)कमलेश्वर
c)आखों देखा पाकिस्तानiii)रमेशचंद्र शाह
d)अंतहीन आकाशiv)नरेश मेहता
v)विश्वनाथप्रसाद तिवारी
  1. ((a))

    a-iv, b-i, c-ii, d-v

  2. ((b))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  3. ((c))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-i

  4. ((d))

    a-iii, b-iv, c-v, d-ii

Show Answer
Answer: ((a))

a-iv, b-i, c-ii, d-v

सही उत्तर-1) a-iv, b-i, c-ii, d-v है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)कितना अकेला आकाश(iv)नरेश मेहता
(b)जहां फव्वारे लहू रोते हैं(i)नासिरा शर्मा
(c)आखों देखा पाकिस्तान(ii)कमलेश्वर
(d)अंतहीन आकाश(v)विश्वनाथप्रसाद तिवारी

Important Points

  • नरेश मेहता की रचनायें-अरण्या,उत्तर कथा,एक समर्पित महिला,बोलने दो चीड को,चैत्या,दो एकान्त,धूमकेतुः एक श्रुति आदि हैं।
  • नासिरा शर्मा की रचनायें-सात नदियाँ ��क समन्दर,शाल्मली,ठीकरे की मँगनी,जि़न्दा मुहावरे,अक्षय वट आदि हैं।
  • कमलेश्वर की रचनायें-तीसरा आदमी,काली आँधी,वही बात,कितने पाकिस्तान,आगामी अतीत,रेगिस्तान आदि हैं।
  • विश्वनाथप्रसाद तिवारी की रचनायें-आत्म की धरती,मेरे साक्षात्कार,कविता क्या है,गद्य के प्रतिमान,समकालीन हिंदी कविता आदि हैं।

Additional Information

  • ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्री नरेश मेहता का यह प्रथम यात्रा-संस्मरण ‘कितना अकेला आकाश’ है।
  • आखों देखा पाकिस्तान का विशेष प्रसंग-उन कैदियों के पत्र जो उन्होंने कमलेशवर को लिखे,जो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के जेलों में कई वर्षों से बन्द हैं।
50

सुमित्रानंदन पंत की निम्नलिखित कृतियों में से किन पर अरविंद-दर्शन का प्रभाव पड़ा है ?

(i) गुंजन 

(ii) सौवर्ण  

(iii) रजत शिखर  

(iv) ग्राम्या  

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i) और (iii) सही  

  2. ((b))

    (iii) और (iv) सही

  3. ((c))

    (ii) और (iii) सही  

  4. ((d))

    (i) और (ii) सही  

Show Answer
Answer: ((c))

(ii) और (iii) सही  

  • सौवर्ण और रजत शिखर पर अरविन्द दर्शन का प्रभाव पड़ा ।
  • सुमित्रानंदन पन्त ( 1900 - 1977 ई. ) को ' संवेदनशील इंद्रिय बोध का कवि ' कहा जाता है ।

Key Points

  • सुमित्रानंदन पन्त छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं । अन्य स्तंभ - जयशंकर प्रसाद , सूर्यकांत त्रिपाठी  निराला , महादेवी वर्मा ।
  • **'समाजवाद '**और ' गांधीवाद ' दोनों के प्रति पन्त जी की रूचि दिखी है ।
  • ' पल्लव ' की भूमिका को छायावाद का घोषणापत्र कहा जाता है ।

Important Points

  • सुमित्रानंदन पन्त की महत्वपूर्ण पंक्ति - " वयोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान , निकलकर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान " ।​
  • शुक्ल के अनुसार - " छायावाद के भीतर सब कवियों में प्रकृति के साथ सीधा प्रेम सम्बन्ध पन्त जी का ही दिखाई पड़ता है । प्रकृति के अत्यंत रमणीय खंड के बीच उनके हृदय ने रूपरंग पकड़ा । ​​

Additional Information

  • श्री अरविन्द आश्रम के योगमुक्त अन्तःसंगठित वातावरण के प्रभाव से उध्र्व मान्यताओं सम्बन्धी मेरी अनेक शंकाएँ दूर हुई है।’’ पन्त जी की इस युग की रचनाएँ
    1. स्वर्ण किरण (1946-47 ई.)
    1. स्वर्ण धूलि (1947-48 ई.)
  • काव्य का चतुर्थ चरण नवमानवतावादी कविताओं का युग है।
  • इस की युग रचनाएँ निम्नलिखित है।
    1. उत्तरा (1949 ई.) 2. कला और बूढ़ा चाँद (1959 ई.)
    1. अतिमा (1955 ई.) 4. लोकायतन (1961 ई.)
    1. चिदम्बरा 6. अभिषेकिता
    1. समाधिका
51

जैनेन्द्र की कहानियों के पात्र हैं - 

(i) शमशेर 

(ii) जुलेका 

(iii) बेंजिलो  

(iv) ईश्वर चन्द्र  

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को ��ुनिए :

  1. ((a))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  2. ((b))

    (ii), (iii) और (iv) सही 

  3. ((c))

    (i), (ii) और (iv) सही 

  4. ((d))

    (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((a))

(i), (ii) और (iii) सही 

  • सही उत्तर - शमशेर, बेजिलो और जुलैका जैनेंद्र की कहानियों के पात्र हैं। ​

Key Points

  • जैनेन्द्र की कहानियाँ मनोविश्लेषण और अवचेतन मन पर आधारित हैंI

Important Points

जैनेन्द्र के कहानी संग्रहः 

फाँसी (1929)

वातायन (1930)

नीलम देश की राजकन्या (1933)

एक रात (1934)

दो चिड़ियाँ (1935)

पाजेब (1942)

52

निम्नलिखित में से कौन-से नाटक लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा रचित नहीं हैं ?

(i) अंधा कुआँ

(ii) ओरे मायावी सरोवर

(iii) सिंहासन खाली है

(iv) राम की लड़ाई

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  2. ((b))

    (ii), (iii) और (iv) सही 

  3. ((c))

    (ii) और (iii) सही 

  4. ((d))

    (i), (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((c))

(ii) और (iii) सही 

सही उत्तर - ओ रे मायावी सरोवर और सिंहासन खाली है नाटक लक्ष्मीनारायण लाल के नहीं हैं।

Key Points

  • ओरे मायावी सरोवर - शंकर शेष - 1980 - पौराणिक कथानक पर आधारित
  • सिंहासन खाली है - सुशील कुमार सिंह
  • अंधा कुआं - लक्ष्मी नारायण लाल -1955
  • राम की लड़ाई - लक्ष्मी नारायण लाल -1979

Important Points

  • शंकर शेष विसंगति बोध के नाटककार हैं।
  • इनके प्रमुख नाटक -
  1. घरौंदा 1978
  2. एक और द्रोणाचार्य 1977
  3. रक्तबीज
  4. कोमल गांधार
  5. बंधन अपने अपने आदि
  • लक्ष्मीनारायण लाल समकालीन नाटककार हैं।
  • इनके प्रमुख नाटक -
  • अंधा कुआं 1955
  • सूखा सरोवर 1960
  • कर्फ्यू 1972
  • यक्ष प्रश्न 1976 आदि

Additional Information

  • ओरे मायावी सरोवर - शंकर शेष - 1980 - पौराणिक कथानक पर आधारित
  • रत्नगर्भ’, ‘रक्तबीज’, ‘बाढ़ का पानी’, ‘पोस्टर’, ‘चेहरे’, ‘राक्षस’, ‘मूर्तिकार’, ‘घरौंदा’
  • जैसे नाटक सामाजिक यथार्थ को यथाकथित अनावृत्त करने वाली रचनाएँ हैं।
  • इन नाटकों में नाटककार ने जहाँ एक ओर समकालीन मानव की त्रासदी, निराशा और घुटन का यथार्थ वर्णन किया है,
  • वहीं दूसरी ओर सामाजिक दायित्व का निर्वाह करते हुए मानवता को नए मूल्य और प्रतिमान देने का प्रयास भी किया है।​
53

निम्नलिखित में से कौन-से प्रगतिवादी मूल्य नहीं हैं ?

(i) ब्यष्टि-चेतना

(ii) यथार्थ चेतना

(iii) इतिहास-बोध

(iv) एकेश्वरवाद

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i) और (iv) सही 

  2. ((b))

    (ii) और (iii) सही 

  3. ((c))

    (iii) और (iv) सही 

  4. ((d))

    (i), (ii) और (iii) सही 

Show Answer
Answer: ((a))

(i) और (iv) सही 

सही उत्तर - ब्यष्टि-चेतना और एकेश्वरवाद प्रगतिवादी मूल्य नहीं हैं।

Key Points

  • प्रगतिवाद का समय -1936 से 1956 ई.
  • छायावाद के बाद प्रगतिवाद आता हैI
  • प्रगतिवाद की शुरुआत 1936 में हुए प्रगतिशील लेखक संघ के लखनऊ अधिवेशन से मानी जाती है।
  • इसके अध्यक्ष प्रेमचंद थे।

Important Pointsप्रगतिवाद की विशेषताएं -

  • सामाजिक ठोस यथार्थ का चित्रण
  • मुक्त छंद और मुक्तक काव्य का प्रयोग
  • बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के लिए कविता रचना
  • मूल आधार - मार्क्सवादी दर्शन​

मुख्य कवि

  • केदारनाथ अग्रवाल
  • नागार्जुन
  • शिवमंगल सिंह सुमन
  • त्रिलोचन
  • धूमिल
  • केदारनाथ सिंह

Additional Information

  • 1935 में ई एम फोस्टर ने प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन की स्थापना पेरिस में की।
  • इसी को देखते हुए सज्जाद ज़हीर और मुल्क राज आनंद ने भारत में 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना की।
54

प्रकाशन-वर्ष अनुसार जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    आँसू, लहर, कामायनी, प्रेमपथिक     

  2. ((b))

    प्रेमपथिक, लहर, आँसू, कामायनी     

  3. ((c))

    प्रेमपथिक, आँसू, लहर, कामायनी     

  4. ((d))

    लहर, प्रेमपथिक, कामायनी, आँसू     

Show Answer
Answer: ((c))

प्रेमपथिक, आँसू, लहर, कामायनी     

प्रकाशन वर्ष के अनुसार जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का अनुक्रम विकल्प "प्रेम पथिक, आंसू, लहर , कामायनी" है। तथा अन्य विकल्प असंगत है।

Key Points

रचनारचना वर्ष
प्रेम पथिक1914
आंसू1925
लहर1933
कामायनी1935

Important Points

  • कामायनी
  • कामायनी हिंदी भाषा का एक महाकाव्य है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिंदी महाकाव्य है।
  • 'प्रसाद' जी की यह अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई, परंतु इसका प्रणयन प्राय: 7-8 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ हो गया था।
  • 'चिंता' से प्रारंभ कर 'आनंद' तक 15 सर्ग

Additional Information

  • जयशंकर प्रसाद के काव्य-
  • प्रेम-पथिक - (1909) , करुणालय (काव्य नाटक) - 1913 ई, महाराणा का महत्त्व - 1924 ई, चित्राधार - 1918 ई॰ ,कानन कुसुम - 1918 ई , झरना - 1918 ई , आँसू - 1925 ई , लहर - 1933 ई ,कामायनी - 1936 ई
55

प्रकशन-वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानी-संग्रहों का सही अनुक्रम है :  

  1. ((a))

    सतह से उठता आदमी, इंसान के खंडहर, परिन्दे, पीली छतरी वाली लड़की     

  2. ((b))

    पीली छतरी वाली लड़की, परिन्दे, सतह से उठता आदमी, इंसान के खंडहर

  3. ((c))

    परिन्दे, इंसान के खंडहर, सतह से उठता आदमी, पीली छतरी वाली लड़की  

  4. ((d))

    इंसान के खंडहर, परिन्दे, सतह से उठता आदमी, पीली छतरी वाली लड़की  

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Answer: ((d))

इंसान के खंडहर, परिन्दे, सतह से उठता आदमी, पीली छतरी वाली लड़की  

  • प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानी संग्रहों का सही क्रम है :-

       इंसान के खंडहर ( 1950 ई. ) , परिंदे ( 1960 ई. ) , सतह से उठता आदमी ( 1971 ई. ) , पीली छतरी वाली लड़की ( 2001 ई. )

Key Points

  • इंसान के खंडहर कहानी संग्रह मोहन राकेश का है | मोहन राकेश नयी कहानी आन्दोलन के प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं ।
  • नामवर सिंह ने निर्मल वर्मा के प्रथम कहानी संग्रह परिंदे  को नयी कहानी की पहली कृति माना है
  • मुक्तिबोध का पहला कहानी संग्रह काठ का सपना है ।
  • उदय प्रकाश तिरिछ कहानी के लिए जाने जाते हैं ।

Important Points

  • मोहन राकेश के कहानी संग्रह -  इंसान के खंडहर, नए बादल , जानवर और जानवर , एक और ज़िन्दगी , फौलाद का आकाश ।
  • मुक्तिबोध के कहानी संग्रह - काठ का सपना, सतह से उठता आदमी।
  • निर्मल वर्मा के कहानी संग्रह - परिन्दे, जलती झाड़ी , पिछली गर्मियों में , बीच बहस में , कव्वे और कालापानी , सूखा तथा अन्य कहानियां।
  • उदय प्रकाश के कहानी संग्रह - दरयाई घोड़ा, तिरिछ, और अंत में प्रार्थना, पाल गोमरा का स्कूटर, पीली छतरी वाली लड़की, मोहनदास।
56

प्रकाशन-वर्ष के अनुसार विद्यानिवास मिश्र के निबंध संग्रहों का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    तमाल के झरोखे से, शेफाली झर रही है, शिरीष की याद आई, रथयात्रा     

  2. ((b))

    तमाल के झरोखे से, शिरीष की याद आई, रथयात्रा, शेफाली झर रही है

  3. ((c))

    शेफाली झर रही है, रथयात्रा, तमाल के झरोखे से, शिरीष की याद आई

  4. ((d))

    शिरीष की याद आई, तमाल के झरोखे से, शेफाली झर रही है, रथयात्रा

Show Answer
Answer: ((a))

तमाल के झरोखे से, शेफाली झर रही है, शिरीष की याद आई, रथयात्रा     

  • विद्यानिवास मिश्र ललित निबंधकार हैं , प्रकाशन वर्ष के अनुसार उनके निबंध संग्रह हैं :-

        तमाल के झरोखे से ( 1981 ई. ) , शेफाली झर रही है ( 1989 ई. ) , शिरीष की याद आई ( 1995 ई. ) , रथयात्रा ( 2002 ई. )

Key Points

  • विद्यानिवास मिश्र ( 1905 - 2005 ई. ) पर हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का प्रभाव देखा जा सकता है ।
  • विद्यानिवास मिश्र के निबंधों में मौलिक चिंतन और भारतीय लोक संस्कृति का चित्रण देखने को मिलता है ।
  • इनका भाई नामक निबंध अज्ञेय की जीवनी पर आधारित है

Important Points

  • ​विद्यानिवास मिश्र ने साधारण विषयों को लेकर उन्हें पौराणिक , ऐतिहासिक एवं साहित्यिक सन्दर्भों से युक्त करके प्रभावशाली बना दिया ।
  • इनके प्रमुख निबंध हैं - तुम चन्दन हम पानी , आँगन का पंछी और बंजारा मन , छितवन की छाँह , मैंने सिल पहुँचाई आदि ।

 

​​​

Additional Information

  • ललित निबंध में सरस शैली पर बल दिया जाता है ।
  • ललित निबंधकार अपने भावात्मक व्यक्तित्व को प्रस्तुत इस प्रकार करता है कि वह रोचक लगे ।
  • ललित निबंधकार - हजारीप्रसाद द्विवेदी , कुबेरनाथ राय , विवेकी राय , विद्यानिवास मिश्र , शिवप्रसाद सिंह , रामवृक्ष बेनीपुरी ।
57

'अंधायुग' नाटक के अंक-शीर्षको का सही अनुक्रम है :  

  1. ((a))

    कौरव नगरी, अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य, पशु का उदय, गांधारी का शाप      

  2. ((b))

    कौरव नगरी, पशु का उदय, गांधारी का शाप, अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य

  3. ((c))

    पशु का उदय, कौरव नगरी, अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य, गांधारी का शाप  

  4. ((d))

    कौरव नगरी, पशु का उदय, अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य, गांधारी का शाप 

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Answer: ((d))

कौरव नगरी, पशु का उदय, अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य, गांधारी का शाप 

  • अंधा युग नाटक धर्मवीर भारती द्वारा लिखित है ।

       अंधा युग नाटक के अंक - शीर्षकों का सही अनुक्रम है :-  कौरव नगरी , पशु का उदय , अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य  , गांधारी का शाप ।

Key Points

  • यह नाटक 1954 ई. में लिखा गया था ।
  • इस नाटक में 5 अंक हैं - कौरव नगरी , पशु का उदय , अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य , अंतराल , गाँधारी का शाप , विजय : एक क्रमिक आत्महत्या , समापन ( प्रभु की मृत्यु ) 
  • अंधा युग के प्रमुख पात्र हैं - कृष्ण , गाँधारी , विदुर , धृतराष्ट्र , कृतवर्मा , अश्वत्थामा , कृपाचार्य , संजय , भिखारी , गूंगा , व्यास , वृद्ध याचक , प्रहरी 1 एवं 2 , युयुत्सु , बलराम ।

Important Points

  • यह नाटक महाभारतकालीन युद्ध की पृष्ठभूमि में लिखा गया एक आ���ुनिक नाटक है ।
58

काव्यशास्त्रीय ग्रंथो का कालक्रमानुसार सही अनुक्रम है :  

  1. ((a))

    काव्यादर्श, काव्यमीमांसा, वक्रोत्किजीवितम्, ध्वन्यालोक      

  2. ((b))

    ध्वन्यालोक, वक्रोत्किजीवितम्, काव्यमीमांसा, काव्यादर्श

  3. ((c))

    काव्यादर्श, ध्वन्यालोक, काव्यमीमांसा, वक्रोक्तिजीवितम् 

  4. ((d))

    काव्यमीमांसा, काव्यादर्श, ध्वन्यालोक, वक्रोत्किजीवितम्

Show Answer
Answer: ((c))

काव्यादर्श, ध्वन्यालोक, काव्यमीमांसा, वक्रोक्तिजीवितम् 

  • काव्यशास्त्रीय ग्रंथों का कालक्रमानुसार सही अनुक्रम है :-

       काव्यादर्श , ध्वन्यालोक , काव्यमीमांसा , वक्रोक्तिजीवितम् 

Key Points

  • दंडी अलंकार सम्प्रदाय से सम्बद्ध थे और उन्होंने काव्यादर्श नामक ग्रन्थ लिखा ।
  • आनंदवर्धन ने काव्यशास्त्र में ध्वनि सम्प्रदाय का प्रवर्तन किया और ध्वन्यालोक  ग्रन्थ की रचना की ।
  • राजशेखर ने काव्यमीमांसा ग्रन्थ की रचना की ।
  • वक्रोक्तिजीवितम् कुंतक की प्रसिद्ध कृति हैं , कुंतक को वक्रोक्ति सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है ।

Important Points 

आचार्यसमयग्रन्थ
भरतमुनिदूसरी शतीनाट्यशास्त्र
भामहछठी शतीकाव्यालंकार
आनंदवर्धन9 वीं शतीध्वन्यालोक
राजशेखर10 वीं शतीकाव्य मीमांसा
अभिनवगुप्त10 वीं शतीतन्त्रालोक
कुंतक10 वीं शतीवक्रोक्तिजीवितम्
मम्मट11 वीं शतीकाव्य प्रकाश
59

इनमे से कौन-सी बोली 'बिहारी हिन्‍दी' वर्ग में नही आती है ?

  1. ((a))

    भोजपुरी

  2. ((b))

    मगही

  3. ((c))

    मैथिली

  4. ((d))

    छतीसगढ़ी

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Answer: ((d))

छतीसगढ़ी

निम्नलिखित में से छत्तीसगढ़ी बोली, बिहारी हिंदी वर्ग में नहीं आती है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प छत्तीसगढ़ी सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • छत्तीसगढ़ी बिहारी हिंदी वर्ग में नहीं आती है।
  • यह पूर्वी हिन्दी की प्रमुख बोली है और छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख भाषा है।

Important Points

  • पूर्वी हिंदी में तीन बोलियाँ- अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी  मानी जाती हैं।
  • यह भारत के मध्य -पूर्व उत्तर प्रदेश, पूर्वी- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में बोली जाती हैं।

Additional Information 

  • बिहारी हिंदी का विकास मागधी अपभ्रंश से हुआ है।
  • जिसे दो भागों- पूर्वी बिहारी और पश्चिमी बिहारी में विभाजित किया जा सकता है।
  • पूर्वी बिहारी की दो बोलियाँ हैं- मगही और मैथिली।
  • पश्चिमी बिहारी के अंतर्गत भोजपुरी बोली आती है।
60

''संस्‍कृत का कोई भी शब्‍द मनचाहे ढंग से तोड़-मरोड़कर 'तद्भव' नही बनाया जा सकता ।''

उपर्युक्‍त विचार किस विद्वान का है ?

  1. ((a))

    सुनीति कुमार चटर्जी

  2. ((b))

    जार्ज ग्रियर्सन

  3. ((c))

    नामवर सिंह

  4. ((d))

    रामविलास शर्मा

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Answer: ((d))

रामविलास शर्मा

उपर्युक्त विचार रामविलास शर्मा का है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प रामविलास शर्मा सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • "संस्कृत का कोई भी शब्द मनचाहे ढंग से तोड़ मरोड़ कर तद्भव नहीं बनाया जा सकता।"
  • उपर्युक्त कथन रामविलास शर्मा का है।

Important Points

  • तद्भव शब्द: तद्भव शब्द दो शब्दों तत् + भव से मिलकर बना है। जिसका अर्थ है – उससे उत्पन्न
  • अत: कहा जा सकता है कि संस्कृत भाषा के वे शब्द जो कुछ परिवर्तन के साथ हिंदी शब्दावली में आ गए हैं, उसे तद्भव शब्द कहा जाता है।
  • जैसे:- अकाज, कचौड़ी, काजल, चाम, चमड़ा, चितेरा, कौड़ी, गहरा आदि।

Additional Information

  • डॉ॰ रामविलास शर्मा (10 अक्टूबर, 1912- 30 मई, 2000)
  • प्रथम आलोचनात्मक लेख 'निरालाजी की कविता' लिखा जो चर्चित पत्रिका 'चाँद' में प्रकाशित हुआ।
  • हिंदी जाति की अवधारणा रामविलास शर्मा के जातीय चिंतन का केंद्रीय बिंदु है।
  • ग्रियर्सन के कार्य 
  • पद्मावती का संपादन (1902) महामहोपाध्याय सुधाकर द्विवेदी की सहकारिता में
  • बिहारीकृत सतसई (लल्लूलालकृत टीका सहित) का संपादन
  • नोट्स ऑन तुलसीदास
  • दि माडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑव हिंदुस्तान (1889)
  • सुनीति कुमार चटर्जी
  • इनकी बांग्ला भाषा का उद्भव तथा विकास ("ओरिजिन एंड डिवलपमेंट ऑफ़ द बेंगाली लेंगुएज") नामक पुस्तक है।
  • नामवर सिंह 
  • साक्षात्कार-
  • कहना न होगा - 1994
  • बात बात में बात - 2006
  • पत्र-संग्रह-
  • काशी के नाम - 2006
61

निम्‍नलिखित मे से कौन-सी रचना गयाप्रसाद शुक्‍ल 'सनेही' की नहीं है ? 

  1. ((a))

    प्रेमपचीसी

  2. ((b))

    स्‍वप्‍न

  3. ((c))

    कुसुमांजलि

  4. ((d))

    कृषक क्रंदन

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Answer: ((b))

स्‍वप्‍न

  • स्वप्न रचना रामनरेश त्रिपाठी ( 1889 - 1962 ई. ) द्वारा रचित है ।
  • रामनरेश त्रिपाठी और गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' ( 1883-1972 ई. ) दोनों द्विवेदी युग के कवि हैं ।

Key Points

  • गया प्रसाद शुक्ल राष्ट्रीय भावनाओं की कविताएँ ' त्रिशूल ' उपनाम से लिखते थे ।
  • गयाप्रसाद शुक्ल खड़ी बोली में सवैया और कवित्त छंदों का प्रयोग करने में कुशल थे ।
  • रामनरेश त्रिपाठी स्वछंदतावाद के प्रसिद्ध कवि हैं ।

Important Points

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार -
  • " गयाप्रसाद शुक्ल ' सनेही'  हिंदी के एक बड़े ही भावुक और सरस हृदय कवि हैं " ।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार -
  • **" त्रिपाठीजी की कल्पना मानव हृदय के सामान्य मर्मपथ पर चलने वाली है | "**​

Additional Information

कवि ​रचना
रामनरेश त्रिपाठीमिलन
गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'कृषक क्रंदन
गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'प्रेमपचीसी
गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'कुसुमांजलि
रामनरेश त्रिपाठीपथिक , मानसी

Important Points

  • प्रकाशित रचनाएँ
  • प्रेम पचीसी (1905 ई० के आसपास)
  • गप्पाष्टक
  • कुसुमांजलि (1915)
  • कृषक-क्रन्दन (1916)
  • त्रिशूल तरंग (1919)
  • राष्ट्रीय मंत्र (1921)
  • संजीवनी (सम्पादित) [1921]
  • राष्ट्रीय वीणा (सम्पादित) [1922]
62

तपेदिक की मरीज 'मन्नों' की कथा किस कहानी में चित्रित है ?

  1. ((a))

    सुहागिनें

  2. ((b))

    बादलों के घेरे

  3. ((c))

    जिंदगी और गुलाब

  4. ((d))

    मैं हार गयी

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Answer: ((b))

बादलों के घेरे

  • तपेदिक की मरीज मन्नो बादलों के घेरे कहानी में चित्रित है ।
  • यह कहानी कृष्णा सोबती( 1925 - 2019 ई. ) द्वारा लिखित है ।

Key Points

  • 2017 में कृष्ण  सोबती को ज्ञानपीठ पुरस्कारसंपूर्ण साहित्य के लिए ) से सम्मानित किया गया ।
  • यह कहानी उनके काव्य संग्रह बादलों ( 1980 ई. )  के घेरे में संकलित है ।

Additional Information

  • सुहागिनें - मोहन राकेश
  • जिंदगी और गुलाब - उषा प्रियंवदा
  • मैं हार गयी - मन्नू भंडारी
63

राही मासूम रजा के द्वारा रचित उपन्‍यास नहीं है-

  1. ((a))

    टोपी शुक्‍ला

  2. ((b))

    दिल एक सादा कागज

  3. ((c))

    ��मर शेष है

  4. ((d))

    कटरा बी आर्जू

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Answer: ((c))

��मर शेष है

राही मासूम रजा के द्वारा रचित-3) समर शेष है उपन्‍यास नहीं है।

Important Points

  • समर शेष है : आत्मकथात्मक उपन्यास : अब्दुल बिस्मिलाह
  • समर शेष है : विवेकी राय उपन्यास
  • समर शेष है : रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित कविता है।
  • अंग्रेजों से युद्ध तो ख़त्म हो गया था पर अपने ही देश में रह रहे अपने ही भाईयों से समर (युद्ध) अभी बाकी था। इसी का वर्णन करते हुए कवि लिखते हैं-समर शेष है।
  • रामधारी सिंह दिनकर की अन्य रचनायें-रेणुका,हुंकार,कुरुक्षेत्र,रश्मिरथी,उर्वशी,परशुराम की प्रतीक्षा,मेरी यात्राएँ,आधुनिक बोध आदि हैं।

Additional Information

  • राही मासूम रजा ने क्रांति कथा महाकाव्य 1857 में लिखा।
  • 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए वीर अब्दुल हमीद की जीवनी छोटे आदमी की बड़ी कहानी लिखी।
  • राही मासूम रजा के अन्य उपन्यास-आधा गाँव,हिम्मत जौनपुरी,ओस की बूँद,नीम का पेड़ आदि हैं।
64

'रासपंचाध्‍यायी' की प्रमुख विशेषताऍं हैं-

I. यह रोला छंद में लिखी गई है।

II. इसमें कृष्‍ण की रासलीला का विस्‍तार के साथ वर्णन किया गया है।

III. इसमें अनुप्रसादियुक्‍त साहित्‍यक भाषा का प्रयोग किया गया है।

IV. इसमें दूरारूढ़ कल्‍पना दिखाई पड़ती है।

नीचे दिए गए कूट मे से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I, II और IV सही

  2. ((b))

    I, II और III सही

  3. ((c))

    II, III और IV सही

  4. ((d))

    I, III और IV सही

Show Answer
Answer: ((b))

I, II और III सही

  • कृष्ण भक्त कवियों में प्रसिद्ध अष्टछाप कवि नंददास द्वारा रचित ग्रन्थ रासपंचाध्यायी है ।
  • रासपंचाध्यायी की प्रमुख विशेषताएं हैं :-
  1. यह रोला छंद में लिखी गयी है ।
  2. इसमें कृष्ण की रासलीला का विस्तार के साथ वर्णन हुआ है ।
  3. इसमें अनुप्रसादियुक्त भाषा का प्रयोग किया गया है ।

Key Points

  • नंददास को जड़िया कहा जाता है ।
  • काव्य सौष्ठव और भाषा की प्रांजलता नंददास को अष्टछाप कवियों में विशेष स्थान दिलाती है ।
  • वियोगी हरि ने रासपंचाध्यायी को हिंदी का गीत गोविन्द कहा है  

Important Points

नंददास के ग्रन्थ , पद संख्या और विषय 

ग्रन्थपद संख्याविषय
अनेकार्थ मंजरी228पर्याय कोश
रसमंजरी270नायिका भेद
रूपमंजरीलघु प्रेमाख्यानक काव्य
सुदामा चरितसुदामा - कृष्ण के सख्य भाव का वर्णन
विरह मंजरी147नायिकाओं  का विरह वर्णन
श्यामसगाई63श्यामा - श्याम की सगाई
भंवरगीत216सगुण - निर्गुण पर गोपी और उद्वव का संवाद

  • हिंदी के समस्त भ्रमरगीतों में नंददास का भंवरगीत दार्शनिक दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है ।
  • अन्य अष्टछाप कवि हैं - कुभंदास , सूरदास , परमानंद दास , कृष्णदास , गोविन्द स्वामी , छीत स्वामी , चतुर्भुजदास  ।
65

रहीम की कविता 'नगर शोभा' की मुख्‍य विशेषताऍं है:

I. इसमें नगर का संकुचित वर्णन किया गया है।

II. इसमें वर्ण व्‍यवस्‍था के अनुसार अनके जाति की स्त्रियो का वर्णन किया गया है।

III. इसमें स्त्रियों को उत्‍कृष्‍ट कोटि का बताया गया है।

IV. ये स्त्रियॉं अपना उत्‍पाद बेचने का काम करती है।

नीचे दिए गए कूट में से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I, II और IV सही

  2. ((b))

    I, II और III सही

  3. ((c))

    I, III और IV सही

  4. ((d))

    I और IV सही

Show Answer
Answer: ((a))

I, II और IV सही

  • रहीमदास ( 1553 - 1626 ई. ) भक्तिकाल के नीति काव्य के प्रमुख कवि हैं ।
  • नगर शोभा की भाषा ��्रजभाषा है जो 144 छंदों में लिखा गया है ।

Key Points

  • नगर शोभा की मुख्या विशेषताएं :-
  1. नगर का संकुचित वर्णन ।
  2. विभिन्न जाति की स्त्रियों का वर्णन ।
  3. स्त्रियाँ अपना उत्पाद बेचने का काम करती थी ।
  • रहीम अकबर के दरबारी कवि थे ।

Important Points

  • रहीमदास की मुख्य रचनाएं हैं - दोहावली , मदनाष्टक , बरवै नायिका भेद , खेल कौतुकम आदि ।
  • बरवै नायिका भेद  अवधी  भाषा में लिखा पहला रीति निरूपक ग्रन्थ है ।
  • संस्कृत , फ़ारसी और हिंदी मिश्रित भाषा में खेल कौतुक जातकम लिखा गया ।
  • खड़ी बोली में मदनाष्टक लिखा गया ।
66

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): भ्रम, कल्पना और प्रातिभ ज्ञान के विरुद्ध प्रत्यक्ष और ठोस अनुभव को महत्त्व देना आधु निक बोध का प्रमुख लक्षण माना जा सकता है।

तर्क (Reason) R): इस अनुभववादी दृष्टिकोण का प्रभाव काव्य की रचना-प्रकिया और रसास्वादन की प्रणाली पर भी पड़ता है।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A सही R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R सही

Show Answer
Answer: ((d))

A सही R सही

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क सही है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R सही" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • भ्रम कल्पना और प्रतिभा ज्ञान के विरुद्ध प्रत्यक्ष और ठोस अनुभव को महत्व देना आधुनिक बोध का प्रमुख लक्षण माना जा सकता है।
  • क्योंकि इस अनुभव वादी दृष्टिकोण का प्रभाव काव्य की रचना प्रक्रिया और रसास्वादन की प्रणाली पर भी पड़ता है।

Additional Information

  • रामधारी सिंह दिनकर कहते हैं कि आधुनिकता का लक्षण यह है कि सत्य की खोज में वह एकमात्र प्रमाण बुद्धि का मानती है और अन्धविश्वास अथवा क्च्चे विश्वास के साथ वह कभी भी समझौता नहीं करती।
67

निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)अष्टयामi)स्वामी हरिदास
b)वीरसिंह देव चरितii)नाभादास
c)रस मंजरीiii)केशवदास
d)केलिकालiv)रसखान
v)नंददास
  1. ((a))

    a-ii, b-iii, c-v, d-i

  2. ((b))

    a-i, b-iv, c-ii, d-iii

  3. ((c))

    a-v, b-i, c-iii, d-iv

  4. ((d))

    a-iii, b-ii, c-i, d-v

Show Answer
Answer: ((a))

a-ii, b-iii, c-v, d-i

सही उत्तर-1) a-ii, b-iii, c-v, d-i है। 

Key Points 

सूची – Iसूची – II
(a)अष्टयाम(ii)नाभादास
(b)वीरसिंह देव चरित(iii)केशवदास
(c)रस मंजरी(v)नंददास
(d)केलिकाल(i)स्वामी हरिदास

Important Points

  • नाभादास की तीन कृतियाँ उपलब्ध हैं-भक्तमाल,अष्टयाम,रामभक्ति संबंधी स्फुट पद।
  • केशवदास रचित प्रामाणिक ग्रंथ नौ हैं-रसिकप्रिया,कविप्रिया,रामचंद्रिका,रतनबावनी,जहाँगीर जसचंद्रिका,विज्ञानगीता,नखशिख,छन्दमाला,वीरसिंह देव चरित।
  • नंददास की रचनायें-रास पंचाध्यायी,सिद्धान्त पंचाध्यायी,अनेकार्थ मंजरी,मान मंजरी,रूप मंजरी,रस मंजरी,विरह मंजरी.भँवर गीत,गोवर्धन लीला,स्याम सगाई,रुक्मिणी मंगल,सुदामा चरित,भाषा दशमस्कन्ध,पदावली।

Additional Information

  • अष्टयाम ब्रजभाषा गद्य और पद्य दोनों में पृथक्‌-पृथक्‌ उपलब्ध है।
  • रसिकप्रिया केशव की प्रौढ़ रचना है जो काव्यशास्त्र संबंधी ग्रंथ हैं। इसमें रस,वृत्ति और काव्यदोषों के लक्षण उदाहरण दिए गए हैं।
  • स्वामी जी ने एक नवीन पंथ सखी-सम्प्रदाय का प्रवर्तन किया।
68

निम्नलिखित निबंध-संग्रहों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)बकलम ख़ुदi)हजारीप्रसाद द्विवेदी
b)बबूल और कैक्टसii)नंददुलारे वाजपेयी
c)विचार और वितर्कiii)नामवर सिंह
d)कन्यादानiv)रामदरश मिश्र
v)अध्यापक पूर्णसिंह
  1. ((a))

    a-iii, b-iv, c-i, d-v

  2. ((b))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  3. ((c))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-v

  4. ((d))

    a-iv, b-v, c-ii, d-i

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-iv, c-i, d-v

सही उत्तर-1) a-iii, b-iv, c-i, d-v है। 

Key Points

सूची – Iसूची – IIप्रकाशन वर्ष
(a)बकलम ख़ुद(iii)नामवर सिंह1951
(b)बबूल और कैक्टस(iv)रामदरश मिश्र1997
(c)विचार और वितर्क(i)हजारीप्रसाद द्विवेदी1954
(d)कन्यादान(v)अध्यापक पूर्णसिंह- -

 

Important Points

  • बकलम ख़ुद में 17 व्यक्ति व्यंजक निबंध हैं।
  • रामदरश मिश्र जी के प्रमुख निबंध-कितने बजे हैं,घर-परिवेश,छोटे-छोटे सुख हैं।
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के प्रमुख निबंध-अशोक के फूल,कल्पलता,कुटज,कल्पतरु,नाख़ून क्यूँ बढ़ते हैं आदि हैं।
  • सरदार पूर्णसिंह जी के प्रमुख निबंध-सच्ची वीरता,आचरण की सभ्यता,मजदूरी और प्रेम,पवित्रता आदि हैं।

Additional Information

  • नामवर सिंह ने 1965 से 1967 तक जनयुग(साप्ताहिक) और 1967 से 1990 तक आलोचना(त्रैमासिक) नामक पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।
  • रामदरश मिश्र का पहला काव्य संग्रह पंथ के गीत(1951) में प्रकाशित हुआ था।
  • 1957 में हजारीप्रसाद द्विवेदी को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • अध्यापक पूर्णसिंह ने पंजाबी में कुछ रचनायें लिखीं-अविचल जोत,खुले मैदान,खुले घुंड,मेरा साईकविदा दिल कविता,चुप प्रीतदा शहंशाह विओपारी,खुले लेख,निबंध आदि।
69

विदेशी पृष्ठभूमि पर आधारित हिन्दी उपन्यास है -  

(i) वे दिन 

(ii) रुकोगी नहीं राधिका 

(iii) सात नदियां एक समुन्दर 

(iv) उस शहर तक 

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (ii), (iii) और (iv) सही     

  2. ((b))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  3. ((c))

    (i), (iii) और (iv) सही 

  4. ((d))

    (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((b))

(i), (ii) और (iii) सही 

  • विदेशी पृष्ठभूमि पर लिखित उपन्यास हैं - वे दिन , रुकोगी नहीं राधिका और सात नदियाँ एक समुन्दर
  • वे दिन - निर्मल वर्मा
  • रुकोगी नहीं राधिका - उषा प्रियंवदा
  • सात नदिया एक समुन्दर - नासीरा शर्मा

Key Points

  • ' रुकोगी नहीं राधिका ' ( 1967 ई . ) में राधिका के माध्यम से आधुनिक स्त्री  की जटिल मानसिकता , पीड़ा एवं विद्रोह का अंकन है ।
  • ' वे दिन '( 1964 ई . )  में चेकोस्लोवाकिया की पृष्ठभूमि पर आधारित ।
  • 'सात नदियाँ एक समुन्दर '( 1984 ई .  ईरान की पृष्ठभूमि पर आधारित ।​​

Additional Information

निर्मल वर्मालाल टिन की छत , एक चिथड़ा सुख , रात का रिपोर्टर , अंतिम अरण्य आदि
उषा प्रियंवदापचपन खम्भे लाल दीवारें , शेष यात्रा , भए कबीर उदास , अल्पविराम आदि
नासिरा शर्माठीकरे की मंगनी , जिंदा मुहावरें , अक्षयवट , जीरो रोड , पारिजात आदि

Important Points

  • तेजिंदर के समक्ष चलते फिरते ये दलित यथार्थपरक पात्रों को इन्होनें कुशलता से उपन्यास के कलेवर में पाठकों के समक्ष बिना किसी हेर-फेर के प्रस्तुत किया है।
  • ‘‘उस शहर तक’’ और ‘‘हैलो सुजीत’’ तेजिंदर की दलित पृष्ठभूमि पर रचित ऐसे सशक्त उपन्यास है जो रह रहकर हमसे पूछती है चीखती है चित्कारती है और सवाल करती है,
  • कि ‘‘आखिर हम ही क्यों’’ तेजिंदर के अपने इन दोनों अद्भुत उपन्यास दलित विमर्श के लिए एक मील का पत्थर हैं जिसमें उसके पात्रों के भाव इन उपन्यासों की आत्मा है।
70

हरिशंकर परसाई के निबंध संग्रह हैं -

() आओ बैठ लें कुछ देर

(ii) सदाचार का ताबीज

(iii) तुलसीदास चंदन घिसें

(iv) आवारा भीड़ के खतरे

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i) और (ii) सही 

  2. ((b))

    (i), (iii) और (iv) सही 

  3. ((c))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  4. ((d))

    (ii), (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((d))

(ii), (iii) और (iv) सही 

सही उत्तर -

हरिशंकर परसाई के संग्रह हैं -

तुलसीदास चंदन घिसे

सदाचार का ताबीज

आवारा भीड़ के खतरे

Key Points

  • हरिशंकर परसाई व्यंग्य विधा के लिए प्रचलित हैं।
  • अपने निबंध संग्रहों में इन्होंने प्रासंगिक व्यंग्यों का संकलन किया है।

Important Points

  • कहानी–संग्रह : हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे, भोलाराम का जीव
  • उपन्यास: रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज, ज्वाला और जल।
  • संस्मरण: तिरछी रेखाएँ।
  • निबंध संग्रह: तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेइमानी की परत, अपनी अपनी बीमारी, प्रेमचन्द के फटे जूते, माटी कहे कुम्हार से, काग भगोड़ा, ऐसा भी सोचा जाता है, वैष्णव की फिसलन, पगडण्डियों का जमाना, शिकायत मुझे भी है, उखड़े खंभे, सदाचार का ताबीज, विकलांग श्रद्धा का दौर, , हम एक उम्र से वाकिफ हैं, बस की यात्रा।

Additional Information

  • विकलांग श्रद्धा का दौर के लिए 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • आओ बैठ लें कुछ देर श्रीलाल शुक्ल द्वारा लिखा गया व्यंग्य संग्रह है जिसमें 1992/93 के दौरान नवभारत टाइम्स अखबार के लिए लिखे गए चुनिंदा स्तंभों का संकलन है।​
  • प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाएँ हैं-
  • अंगद का पाँव (1958)
  • यहाँ से वहाँ (1970)
  • मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ (1979)
  • उमरावनगर में कुछ दिन (1986)
  • कुछ जमींन में कुछ हवा में (1990)
  • आओ बैठ ले कुछ देर (1995)
  • अगली शताब्दी का शहर (1996)
  • जहालत के पचास साल (2003)
  • खबरों की जुगाली (2005)
71

निम्नलिखित में आत्मकथाएँ कौन-कौन-सी हैं ?

(i) तिरस्कृत

(ii) अपनी धरती अपने लोग

(iii) वसंत से पतझर तक

(iv) सहचर है समय

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (ii), (iii) और (iv) सही 

  2. ((b))

    (i), (ii) और (iv) सही 

  3. ((c))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  4. ((d))

    (i), (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((b))

(i), (ii) और (iv) सही 

सही उत्तर - 1, 2 और 4 आत्मकथाएं हैं। तिरस्कृत, अपनी धरती अपने लोग, सहचर है समय

Key Points

  • तिरस्कृत - 2000 - सूरजपाल चौहान
  • अपनी धरती अपने लोग -1996 - रामविलास शर्मा
  • सहचर है समय - 1991 - रामदरश मिश्र

Important Points

  • तिरस्कृत दलित आत्मकथा है।
  • अपनी धरती अपने लोग तीन खंडों में हैं।

Additional Information

  • बसंत से पतझड़ तक रवींद्रनाथ त्यागी का हास्य काव्य संग्रह है।
  • यह उनके मरणोपरांत 2005 में प्रकाशित हुआ।
  • ये व्यंग्य निबंधकार रहे हैं।
72

'प्रेमशतक' के रचनाकार है-

  1. ((a))

    जगन्‍नाथदास रत्‍नाकर

  2. ((b))

    दुलारेलाल भार्गव

  3. ((c))

    वियोगी हरि

  4. ((d))

    अंबिकादत व्‍यास

Show Answer
Answer: ((c))

वियोगी हरि

प्रेमशतक के रचनाकार वियोगी हरि हैं ।

  • ये आधुनिक ब्रजभाषा के प्रमुख कवि हैं ।
  • वीर सतसई के लिए इन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला था ।

Key Points

  • वियोगी हरि गांधीवादी थे ।
  • कुछ प्रमुख कृतियाँ - भावना , प्रार्थना अंतर्नाद , देशद्रोह , व्यर्थ गर्व आदि ।

Important Points

  • आचार्य शुक्ल के अनुसार - " ब्रजभूमि , ब्रजभाषा , ब्रजपति के अनन्य उपासक श्री वियोग हरि हैं । ऐसे रसिक जीव इस रूखे ज़माने में कम दिखाई पड़ते हैं । "
  • आचार्य शुक्ल के अनुसार - " वियोग हरि ने अधिकतर पुराने कृष्णभक्त कवियों की पद्धति पर बहुत से रसीले तथा भक्तिभावपू��्ण पदों की रचना की जिन्हें सुनकर आजकल के रसिक भक्त भी बलिहारी हैं ।"

Additional Information

  • अम्बिकादास व्यास की रचनाएं - पावस पचासा , सुकवि सतसई  , हो हो होरी , बिहारी बिहार ।
  • जगन्नाथ रत्नाकर की रचनाएं - हिंडोला , हरिश्चंद्र , कलकाशी , गंगावतरण , उद्धव शतक ।
73

'वटवृक्ष की छाया में' किस लेखक की स्‍मृति को सुरक्षित रखने के लिए लिखी गई है ?

  1. ((a))

    कमलेश्‍वर

  2. ((b))

    अमृतलाल नागर

  3. ((c))

    अमृतराय

  4. ((d))

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

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Answer: ((b))

अमृतलाल नागर

'वटवृक्ष की छाया में'-2) अमृतलाल नागर की स्‍मृति को सुरक्षित रखने के लिए लिखी गई है।

Important Points 

  • कुमुद नागर ने 'वटवृक्ष की छाया में'(अमृतलाल नागर, 2004) जीवनी लिखी।
  • हिंदी के प्रथम जीवनीकार गोपाल शर्मा शास्त्री माने जाते हैं।
  • अमृतलाल नागर की प्रमुख रचनायें-महाकाल,बूँद और समुद्र,सुहाग के नुपूर,अमृत और विष,सात घूँघट वाला मुखड़ा,मेरी प्रिय कहानियाँ,सिकंदर हार गया आदि हैं।
  • नागर जी को 1981 में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • इन्होंने मानस का हंस 1972 में तुलसीदास का वर्णन किया।
  • अमृत और विष पर वर्ष 1967 का साहित्य अकादमी पुरस्काकर से सम्मानित किया गया।
74

सूरदास के बारे में आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल द्वारा लिखित कौन-से कथन सही हैं ?

I. उन्‍होंने विट्ठलनाथ की आज्ञा से श्रीमदभागवत की कथा को पदों में गाया।

II. उन्‍होने भागवत के दशम स्‍कंध की कथा इतिवृत के रूप में कह दी है।

III. भिन्न-भिन्न लीलाओंं को अत्‍यंत मधुर और मनोहर पदों में गाया।

IV. उनके पद अत्‍यंत प्रगल्‍भ और काव्‍यपूर्ण है।

नीचे दिए गए कूट में से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I, II और III सही

  2. ((b))

    I, II और IV सही

  3. ((c))

    II, III और IV सही

  4. ((d))

    I और II सही

Show Answer
Answer: ((c))

II, III और IV सही

  • सूरदास के बारे में आचार्य शुक्ल के द्वारा लिखित कथन हैं :-
  1. उन्होंने भागवत के दशम स्कंध की कथा इतिवृत के रूप में कह दी है ।
  2. उन्होंने भिन्न - भिन्न लीलाओं को अत्यंत मधुर और मनोहर पदों में गाया है ।
  3. उनके पद अत्यंत प्रगल्भ और काव्यपूर्ण हैं ।

Key Points

  • हिंदी साहित्य में भ्रमरगीत काव्य परंपरा का प्रवर्तक सूरदास ( 1478 - 1583 ई. ) को माना जाता है ।
  • आचार्य शुक्ल ने लिखा है - " आचार्यों की छाप लगी हुई आठ वीणाएं श्री कृष्ण की प्रेमलीला कीर्तन करने उठी , जिनमें सबसे ऊँची , सुरीली और मधुर झंकार अन्धे कवि सूरदास की है ।
  • सूरदास के गुरु वल्लभाचार्य थे

Important Points

  • सूरदास के मुख्य 3 ग्रन्थ हैं - सूरसागर , सूरसारावली , साहित्य लहरी ।
  • भ्रमरगीत में कुल 700 पद हैं , भ्रमरगीत को उपालंभ काव्य भी कहते हैं ।
  • सूरसारावली की रचना संसार को होली मानकर की गयी है ।1107 छंद सूरसारावली में हैं ।
  • साहित्य लहरी(1550 ई. ) में नायिका भेद और अलंकर के उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं ।

Additional Information

  • सूरदास की रचनाओं का सर्वप्रथम संपादन कलकत्ता में 1841 ई. में रागकल्पद्रुम नाम से हुआ ।
75

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): प्रगतिवादी कवियों ने अधिकांशतः प्रकति के उन्हीं रूपों का चित्रण किया है जिनमें उन्हें मनुष्य के सामाजिक जीवन की कोई गहरी अर्थच्छाया दिखाई पड़ी।

तर्क (Reason) R): इसीलिए इसमें सुपरिचित ग्राम्य-प्रकृति के स्थान पर प्रकृति का वन्य और पर्वतीय रूप चित्रित हुआ है।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A सही R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R सही

Show Answer
Answer: ((c))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क गलत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन
  • "प्रगतिवादी कवियों ने अधिकांशत है प्रकृति के इन्हीं रूपों का चित्रण किया है जिनमें उन्हें मनुष्य के सामाजिक जीवन की कोई गहरी अर्थ छाया दिखाई पड़ी।" अभिकथन सही है।
  • तर्क
  • "इसीलिए इसमें सुपरिचित ग्राम में प्रकृति के स्थान पर प्रकृति का वन्य और पर्वतीय रूप चित्रित हुआ है।' तर्क गलत है।

Additional Information

  • प्रगतिवादी
  • प्रगतिवादी काव्य एक सीधी-सहज-तेज प्रखर, कभी व्यंग्यपूर्ण आक्रामक काव्य-शैली का वाचक है। प्रगतिवाद साहित्य को सोद्देश्य मानता है और उसका उद्देश्य है 'जनता के लिए जनता का चित्रण करना' दूसरे शब्दो में, वह कला 'कला के लिए' के सिद्धांत में यकीन नहीं करता बल्कि उसका यकीन तो 'कला जीवन के लिए' के फलसफे में है।
  • प्रगतिवाद के प्रमुख कवि
  • केदारनाथ सिंह अग्रवाल, नागार्जुन, शिवमंगल सिंह 'सुमन', वासुदेव सिंह 'त्रिलोचन', रांगेय राघव
76

निम्नलिखित कवियों को उनके जन्म स्थान के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)गुरु नानकi)अहमदाबाद
b)दादू दयालii)दौसा
c)धर्मदासiii)बांधवगढ़
d)सुन्दरदासiv)तलवंडी
v)अमृतसर
  1. ((a))

    a-iv, b-ii, c-iii, d-i

  2. ((b))

    a-v, b-iii, c-i, d-iv

  3. ((c))

    a-i, b-iii, c-ii, d-iv

  4. ((d))

    a-iv, b-i, c-iii, d-ii

Show Answer
Answer: ((d))

a-iv, b-i, c-iii, d-ii

सही उत्तर-4) a-iv, b-i, c-iii, d-ii है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)गुरु नानक(iv)तलवंडी
(b)दादू दयाल(i)अहमदाबाद
(c)धर्मदास(iii)बांधवगढ़
(d)सुन्दरदास(ii)दौसा

Important Points

  • नानक (कार्तिक पूर्णिमा 1469- 22 सितंबर 1539) सिखों के प्रथम (आदि)गुरु हैं।
  • दादू का जन्म फाल्गुनी सुदी 8 गुरुवार 1601 वि.(1544 ईस्वी ) में भारतवर्ष के गुजरात राज्य के अहमदाबाद नगर में हुआ था।
  • धर्मदास का पूर्व नाम 'जुड़ावन' था और ये कसौघन बनिया थे, इनका निवास स्थान बांधवगढ़ था।
  • सुन्दरदास का जन्म जयपुर राज्य की पुरानी राजधानी देवनगरी दौसा में भूसर गोत्र के खंडेलवाल वैश्य कुल में चैत्र शुक्ल नवमी संवत 1656 में हुआ।

Additional Information

  • तलवंडी पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त का एक शहर है।
  • दादू भक्तिकाल में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख सन्त कवि थे।
  • धर्मदास को छत्तीसगढ़ी के आदि कवि का दर्जा प्राप्त है।
  • सुन्दरदास की प्रमुख रचनायें-ज्ञान समुद्र,सुंदर विलास,सर्वांगयोगप्रदीपिका,पंचेंद्रिय चरित्र,सुख समाधि आदि हैं।
77

निम्नलिखित कविताओं को उनके रचयिताओं के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)नदी की बाँक पर छायाi)सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
b)आज नदी बिल्कुल उदास थीii)अज्ञेय
c)ठंडा लोहाiii)केदारनाथ अग्रवाल
d)कुआनो नदीiv)धर्मवीर भारती
v)नरेन्द्र शर्मा
  1. ((a))

    a-ii, b-i, c-iii, d-v

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-i

  3. ((c))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  4. ((d))

    a-iii, b-i, c-ii, d-v

Show Answer
Answer: ((b))

a-ii, b-iii, c-iv, d-i

सही उत्तर-2) a-ii, b-iii, c-iv, d-i है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)नदी की बाँक पर छाया(ii)अज्ञेय
(b)आज नदी बिल्कुल उदास थी(iii)केदारनाथ अग्रवाल
(c)ठंडा लोहा(iv)धर्मवीर भारती
(d)कुआनो नदी(i)सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Important Points

  • अज्ञेय की अन्य रचनायें-भग्नदूत,चिन्ता,कितनी नावों में कितनी बार,क्योंकि मैं उसे जानता हूँ,आंगन के पार द्वार आदि हैं।
  • केदारनाथ अग्रवाल की अन्य रचनायें-गुलमेंहदी,हे मेरी तुम,जमुन जल तुम,जो शिलाएँ तोड़ते हैं,कहें केदार खरी खरी,ओस की बूंद कहती है,हम और सड़कें आदि हैं।
  • धर्मवीर भारती की अन्य रचनायें-सात गीत वर्ष,कनुप्रिया,सपना अभी भी,आद्यन्त,बंद गली का आखिरी मकान,ठेले पर हिमालय आदि हैं।
  • सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की अन्य रचनायें-तीसरा सप्तक,काठ की घंटियां,बांस का पुल,एक सूनी नाव,गर्म हवाएं,जंगल का दर्द आदि हैं।

Additional Information

  • नदी की बाँक पर छाया का प्रकाशन वर्ष -1981
  • ठंडा लोहा - 1952
  • कुआनो नदी -1973
78

निम्नलिखित उपन्यासों को संबंधित परिवेश के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)राग दरबारीi)बहादुरगंज
b)अंतिम अरण्यii)बस्तर, मध्यप्रदेश
c)बसंतीiii)गंगौली
d)कोरजाiv)शिवपालगंज
v)महानगर दिल्ली
  1. ((a))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-v

  3. ((c))

    a-iii, b-iv, c-v, d-i

  4. ((d))

    a-iv, b-i, c-v, d-ii

Show Answer
Answer: ((d))

a-iv, b-i, c-v, d-ii

Key Points

क्र. सं.उपन्यासलेखकपरिवेशवर्ष
1.राग दरबारीश्रीलाल शुक्लशिवपाल गंज1968
2.बसंतीभीष्मसाहनीमहानगर दिल्ली1980
3.अंतिम अरण्यनिर्मल वर्माबहादुर गंज2000
4.कोरजामेहरुन्निसा परवेजबस्तर, मध्यप्रदेश1977

Important Points

  • 'कोरजा' उपन्यास में बस्तर के हांशिये के लोगो तथा मुस्लिम समाज के स्त्रियों के दुःख दर्द व संघर्ष का वर्णन किया गया हैI
  • अंतिम अरण्य उपन्यास निर्मल वर्मा का अंतिम उपन्यास है निर्मल वर्मा का यह उपन्यास प्रथम पुरुष शैली में लिखा गया हैI
  • बसंती उपन्यास में भीष्म साहनी ने दिल्ली के झुग्गी झोपड़ियों की गंदगी का वर्णन किया हैI
  • राग दरबारी में शिवपाल गंज की जिन्दगी का यथार्थ चित्रण किया गया हैI

Additional Information 

क्र. सं .उपन्यासवर्षलेखकवर्ण्य विषय
1.सूनीघाटी का सुराज1957श्रीलाल शुक्लछात्र संघर्ष की गाथा
2.अज्ञातवास1962श्रीलाल शुक्लपति- पत्नी के जीवन का वर्णन
3.पहला पड़ाव1976श्रीलाल शुक्लअफसरशाही का वर्णन
4.झरोखा1967भीष्म साहनीआर्यसमाजी मध्यमवर्गीय परिवार का वर्णन
5.तमस1973भीष्म साहनीभरत विभाजन पर
6.वे दिन1962निर्मल वर्माचेकोस्लोवाकिया पर आधारित
7.लालटिन की छत1974निर्मल वर्मालड़की का मानसिक चित्रण
8.आँखों की दहलीज1969मेहरुन्निसा परवेजस्त्री जीवन  पर आधारित
79

निम्नलिखित नाटककारों को उनके द्वारा रचित नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)सुरेन्द्र वर्माi)इतिहास चक्र
b)हमीदुल्लाii)पोस्टर
c)मुद्राराक्षसiii)सेतुबन्ध
d)शंकर शेषiv)मरजीवा
v)दरिन्दे
  1. ((a))

    a-iii, b-v, c-iv, d-ii

  2. ((b))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  3. ((c))

    a-v, b-iii, c-ii, d-i

  4. ((d))

    a-ii, b-iv, c-i, d-v

Show Answer
Answer: ((a))

a-iii, b-v, c-iv, d-ii

सही उत्तर-1) ​a-iii, b-v, c-iv, d-ii है। 

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)सुरेन्द्र वर्मा(iii)सेतुबन्ध
(b)हमीदुल्ला(v)दरिन्दे
(c)मुद्राराक्षस(iv)मरजीवा
(d)शंकर शेष(ii)पोस्टर

Important Points

  • ‘सेतुबंध’(1972 ई.) नाटक नायक चन्द्रगुप्त की महत्त्वाकांक्षाओं का बिम्ब है।
  • 9 दिसम्बर,1973 को मावलंकर ऑडिटोरियम नयी दिल्ली में सर्वभाषा नाटक प्रतियोगिता में दरिन्दे नाटक को प्रदर्शित किया गया।
  • मुद्राराक्षस के मरजीवा नाटक में आदर्श का बूढ़ा बाप मनोविक्षिप्तता मनोवृति से ग्रस्त दिखाई देता है।
  • पोस्टर नाटक मजदूरों को इकट्ठे होने का संदेश देता है,ताकि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी जा सके तथा मालिकों के शोषण से बचा जा सके।

Additional Information

  • सुरेन्द्र वर्मा को उपन्यास मुझे चाँद चाहिए के लिये 1996 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 'ज्ञानोदय' और 'अनुव्रत' जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का कुशल सम्पादन कार्य मुद्राराक्षस जी ने किया।
80

निम्नलिखित सिद्धान्तों को संबंधित विचारकों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)संरचनावादi)आई.ए. रिचर्ड्स (I.A. Richards)
b)अस्तित्ववादii)क्लाड लेवी स्ट्रास (Claude Levi-strauss)
c)मूल्य सिद्धान्तiii)अल्बर्ट कामू (Albert Camus)
d)यथार्थवादiv)बेनेदेतो क्रोचे (Benedetto Croce)
v)जार्ज लूकास (G. Lukacs)
  1. ((a))

    a-v, b-i, c-iv, d-ii

  2. ((b))

    a-ii, b-iii, c-i, d-v

  3. ((c))

    a-ii, b-iv, c-iii, d-i

  4. ((d))

    a-i, b-ii, c-iv, d-iii

Show Answer
Answer: ((b))

a-ii, b-iii, c-i, d-v

सही उत्तर-2) a-ii, b-iii, c-i, d-v है।

Key Points 

सूची – Iसूची – II
(a)संरचनावाद(ii)क्लाड लेवी स्ट्रास
(b)अस्तित्ववाद(iii)अल्बर्ट कामू
(c)मूल्य सिद्धान्त(i)आई.ए. रिचर्ड्स
(d)यथार्थवाद(v)जार्ज लूकास

Important Points

  • 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध में संरचनावाद को शिक्षा में शामिल किया गया।
  • फर्डिनेन्ड डी सौसर के ���ाषा शास्त्र से संबंधित कार्य को साधारण तौर पर संरचनावाद का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है।
  • 1940 व 1950 के दशक में अस्तित्ववाद पूरे यूरोप में एक विचारक्रांति के रूप में उभरा।
  • मूल्यांकन सम्बन्धी धारणाओं का सम्बन्ध मानसिक उद्वेगों से है। इसके दो रूप हैं-
  1. प्रवृत्तिमूलक
  2. निवृत्तिमूलक
  • यथार्थवाद प्रत्यक्ष जगत में ही विश्वास करते हैं उनके अनुसार अस्तित्व प्रत्यक्ष में हैं।
81

प्रकाशन-वर्ष अनुसार निम्नलिखित रचनाओं का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    अनामिका, झरना, पल्लव, नीहार    

  2. ((b))

    पल्लव, नीहार, झरना, अनामिका    

  3. ((c))

    झरना, अनामिका, पल्लव, नीहार    

  4. ((d))

    झरना, पल्लव, अनामिका, नीहार    

Show Answer
Answer: ((c))

झरना, अनामिका, पल्लव, नीहार    

प्रकाशन वर्ष के अनुसार विकल्प 'झरना, अनामिका, पल्लव, नीहार" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

रचनारचना वर्षरचनाकार
झरना1918जयशंकर प्रसाद
अनामिका1923निराला
पल्लव1928सुमित्रानंदन पंत
नीहार1930महादेवी वर्मा

Important Points

  • झरना
  • छायावाद का प्रारम्भ झरना के प्रकाशन से ही माना जाता है।
  • झरना का प्रकाशन 1918 ई० में हुआ।
  • अनामिका 
  • इस कविता संग्रह में 9 कविताएँ थीं।
  • अध्यात्म फल, माया, जलद, अधिवास, तुम और मैं, जुही की कली, पंचवटी प्रसंग, सच्चा प्यार, लज्जित
  • पल्लव
  • पल्लव सुमित्रानंदन पंत का तीसरा कविता संग्रह है जो 1928 में प्रकाशित हुआ था।
  • पल्लव में सुमित्रानंदन पंत की सबसे कलात्मक ऐसी 32 कविताओं का संग्रहीत हैं जो 1918 से 1925 के बीच लिखी गई थीं।
  • नीहार
  • नीहार महादेवी वर्मा का पहला कविता-संग्रह है।
  • इसका प्रथम संस्करण सन् 1930 ई० में गाँधी हिन्दी पुस्तक भण्डार, प्रयाग द्वारा प्रकाशित हुआ।
  • इसकी भूमिका अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ने लिखी थी।
  • इस संग्रह में महादेवी वर्मा की 1923 ई० से लेकर 1929 ई० तक के बीच लिखी कुल 47 कविताएँ संग्रहीत हैं।

Additional Information

  • जयशंकर प्रसाद के काव्य-
  • प्रेम-पथिक - (1909) , करुणालय (काव्य नाटक) - 1913 ई, महाराणा का महत्त्व - 1924 ई, चित्राधार - 1918 ई॰ ,कानन कुसुम - 1918 ई , झरना - 1918 ई , आँसू - 1925 ई , लहर - 1933 ई ,कामायनी - 1936 ई
  • सुमित्रानंदन पंत की कुछ काव्य कृतियाँ हैं - ग्रन्थि, गुंजन, ग्राम्या, युगांत, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूलि, कला और बूढ़ा चाँद, लोकायतन, चिदंबरा, सत्यकाम आदि।
  • निराला के काव्यसंग्रह
  • अनामिका (1923), परिमल (1930), गीतिका (1936), अनामिका (द्वितीय) (1938), तुलसीदास (1938), कुकुरमुत्ता (1942), अणिमा (1943), बेला (1946), नये पत्ते (1946), अर्चना(1950), आराधना (1953), गीत कुंज (1954), सांध्य काकली (1969), अपरा (संचयन)
  • महादेवीवर्मा के कविता संग्रह
  • नीहार (1930), रश्मि (1932), नीरजा (1934), सांध्यगीत (1936) , दीपशिखा (1942), सप्तपर्णा (अनूदित-1949), प्रथम आयाम (1974),.अग्निरेखा (1990)
82

हरिदासी संप्रदाय के राधा - कृष्‍ण हैं-

  1. ((a))

    लोकहितरक्षक

  2. ((b))

    लोकनिरपेक्ष

  3. ((c))

    आत्‍मनिष्‍ठ

  4. ((d))

    जीवन सापेक्ष

Show Answer
Answer: ((b))

लोकनिरपेक्ष

हरिदासी संप्रदाय के राधा कृष्ण लोक निरपेक्ष हैं। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प लोक निरपेक्ष सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • हरिदासी संप्रदाय के राधा कृष्ण ने लोकनिरपेक्ष हैं।
  • इस संप्रदाय के राधा कृष्ण तटस्थ हैं।
  • इनमें लोक के प्रति अपेक्षा लगाव व राग का अभाव है।

Additional Information

  • हरिदासी सम्प्रदाय, निम्बार्क मत की एक शाखा है जिसकी स्थापना स्वामी हरिदास (जन्म सम० 1441 वि०) ने की थी।
  • इसे सखी संप्रदाय भी कहते हैं।
  • इसमें भक्त अपने आपको श्रीकृष्ण की सखी मानकर उसकी उपासना तथा सेवा करते हैं और प्रायः स्त्रियों के भेष में रहकर उन्हीं के आचारों, व्यवहारों आदि का पालन करते हैं।
83

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): क्लासिक नाटक देशकालातीत नहीं होता।

तर्क (Reason) R): क्योंकि क्लासिक नाट्य-रचना एक गतिशील पाठ है।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A ग़लत R सही

  3. ((c))

    A ग़लत R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R सही

Show Answer
Answer: ((b))

A ग़लत R सही

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन गलत है व तर्क सही है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A गलत R सही" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन
  • क्लासिक नाटक देशकालातीत नहीं होता गलत है क्योंकि क्लासिक नाटक देशातीत होता है।
  • तर्क
  • क्योंकि क्लासिक नाट्य रचना एक गतिशील पाठ है।

Additional Information

  • क्लासिक
  • क्लासिक मूलत: प्राचीन यूनान और रोम के लेखकों और उनकी कृतियों, किंतु अब, किसी भी देश और युग के कालजित्‌ कीर्तिलब्ध, सर्वमान्य या प्रतिष्ठित लेखकों और उनकी कृतियों के लिये प्रयुक्त शब्द।
  • नाट्यशास्त्र
  • नाटकों के संबंध में शास्त्रीय जानकारी को नाट्यशास्त्र कहते हैं।
  • इस जानकारी का सबसे पुराना ग्रंथ भी नाट्यशास्त्र के नाम से जाना जाता है जिसके रचयिता भरत मुनि थे।
84

निम्नलिखित आलोचकों को उनकी कृतियों के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)लक्ष्मीकान्त वर्माi)भक्तिकाव्य और लोक जीवन
b)रामस्वरूप चतुर्वेदीii)नई कविता के प्रतिमान
c)शिवदान सिंह चौहानiii)कामायनी का पुनर्मूल्यांकन
d)शिवकुमार मिश्रiv)नये साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र
v)हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष
  1. ((a))

    a-ii, b-iii, c-v, d-i

  2. ((b))

    a-iii, b-i, c-iv, d-ii

  3. ((c))

    a-i, b-v, c-ii, d-iii

  4. ((d))

    a-iv, b-ii, c-i, d-v

Show Answer
Answer: ((a))

a-ii, b-iii, c-v, d-i

सही उत्तर-1) a-ii, b-iii, c-v, d-i है।

Key Points

सूची – I आलोचकसूची – II आलोचनात्मक कृति
(a)लक्ष्मीकान्त वर्मा(ii)नई कविता के प्रतिमान
(b)रामस्वरूप चतुर्वेदी(iii)कामायनी का पुनर्मूल्यांकन
(c)शिवदान सिंह चौहान(v)हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष
(d)शिवकुमार मिश्र(i)भक्तिकाव्य और लोक जीवन

Important Points

  • लक्ष्मीकान्त वर्मा की प्रमुख रचनायें-खाली कुर्सी की आत्मा,सफेद चेहरे,तीसरा प्रसंग,मुंशी रायजादा,सीमान्त के बादल,अपना-अपना जूता आदि हैं।
  • रामस्वरूप चतुर्वेदी की प्रमुख रचनायें-हिन्‍दी नवलेखन,भाषा और संवेदना,अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्‍या,हिन्‍दी साहित्‍य की अधुनातन प्रवृत्तियां आदि हैं।
  • शिवदान सिंह चौहान की प्रमुख रचनायें-प्रगतिवाद,साहित्य की परख,हिंदी गद्य साहित्य,साहित्य की समस्याएँ,आलोचना के सिद्धांत आदि हैं।
  • शिवकुमार मिश्र की प्रमुख रचनायें-नया हिन्दी काव्य,प्रगतिवाद,प्रेमचंद:विरासत का सवाल,मार्क्सवाद और साहित्य,यथार्थवाद आदि हैं।

Additional Information 

  • नई कविता के प्रतिमान-1968
  • कामायनी का पुनर्मूल्यांकन-1970
  • हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष-1954 (राजकमल प्रकाशन, दिल्ली व बंबई से)
  • भक्तिकाव्य और लोकजीवन-1983(इस नाम से वाणी प्रकाशन से; संशोधित-परिवर्धित संस्करण-2010 में भक्ति-आन्दोलन और भक्ति-काव्य नाम से लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद से)
85

देश-विभाजन के प्रसंग पर आधारित उपन्यास हैं - 

(i) झूठा सच 

(ii) तमस 

(iii) कितने पाकिस्तान  

(iv) छोटे-छोटे महायुद्ध   

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :

  1. ((a))

    (i), (ii) और (iii) सही 

  2. ((b))

    (i) और (ii) सही 

  3. ((c))

    (ii) और (iii) सही 

  4. ((d))

    (iii) और (iv) सही 

Show Answer
Answer: ((a))

(i), (ii) और (iii) सही 

  • सही उत्तर - झूठा सच, तमस और कितने पाकिस्तान उपन्यास भारत विभाजन पर आधारित हैं।

Key Points

झूठा सच -

  • लेखक - यशपाल
  • दो भागों में विभाजित उपन्यास -  1)वतन और देश 1958 , 2)देश और भविष्य 1960
<br>

कितने पाकिस्तान - कमलेश्वर - 2000

तमस - भीष्म साहनी -1973

Important Points

  • झूठा सच उपन्यास के पात्र - जयदेव पुरी, तारा, कनक आदि
  • तमस के पात्र- नत्थू, बख्शी जी, अजीत सिंह, मास्टर रामदास, लीजा, रिचर्ड आदि
  • तमस में मात्र 5 दिन की कहानी है।
  • कितने पाकिस्तान के पात्र - अदीब, सलमा, अर्दली आदि

Additional Information

  • कितने पाकिस्तान -साहित्य अकादमी, 2003
  • तमस- साहित्य अकादमी, 1975​
  • छोटे छोटे महायुद्ध के लेखक रमाकांत हैं। यह उनका पहला उपन्यास है। ​
86

कि आरे ! नव जौवन अभिरामा।

जत देखल तत कहए न पारिअ, छओ अनुपम एक ठामा।।

उक्‍त काव्‍य-पंक्तियों में कवि कहना चाहता है कि वह -

  1. ((a))

    रूप - वर्णन करने मे संभ्रम की स्थिति में है।

  2. ((b))

    आंशिक रूप से रूप- वर्णन करने में समर्थ है।

  3. ((c))

    रूप - वर्णन करने में समर्थ है।

  4. ((d))

    रूप - वर्णन करने में असमर्थ है।

Show Answer
Answer: ((d))

रूप - वर्णन करने में असमर्थ है।

उपर्युक्त पंक्ति में कवि कहना चाहते हैं कि वह रूप वर्णन करने में असमर्थ हैं। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "रूप वर्णन करने में असमर्थ है" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • उपर्युक्त पंक्ति में कवि रूप वर्णन करने में असमर्थ हैं।
  • यह पंक्तियां महाकवि विद्यापति की है।
  • यह पद नखशि‍ख वर्णन का है।
  • नखशि‍ख का अर्थ हुआ नीचे पैर के अंगूठे के नाखून से लेकर ऊपर शि‍खर तक के अंग-प्रत्‍यंग का सौन्‍दर्य वर्णन।

Additional Information

  • विद्यापति भारतीय साहित्य की 'शृंगार-परम्परा' के साथ-साथ 'भक्ति-परम्परा' के प्रमुख स्तंभों मे से एक और मैथिली के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं।
  • इनके काव्यों में मध्यकालीन मैथिली भाषा के स्वरूप का दर्शन किया जा सकता है।
  • इन्हें वैष्णव , शैव और शाक्त भक्ति के सेतु के रूप में भी स्वीकार किया गया है।
  • मिथिला के लोगों को 'देसिल बयना सब जन मिट्ठा' का सूत्र दे कर इन्होंने उत्तरी-बिहार में लोकभाषा की जनचेतना को जीवित करने का महान् प्रयास किया है।
  • विद्यापति की कृतियाँ :-    
  • संस्कृत में    
  • भूपरिक्रमा ,पुरुषपरीक्षा ,लिखनावली, विभागसार ,शैवसर्वस्वसार, दानवाक्यावली, गंगावाक्यावली,दुर्गाभक्तितरंगिणी, गयापत्तलक, वर्षकृत्य, मणिमञ्जरी नाटक , गोरक्षविजय नाटक
  • अवहट्ठ में    
  • कीर्तिलता
  • कीर्तिपताका
87

निम्‍नलिखित में से कवि ने सतसई की रचना नहीं की ?

  1. ((a))

    चिंतामणि

  2. ((b))

    मतिराम

  3. ((c))

    रामसहाय

  4. ((d))

    अमीरदास

Show Answer
Answer: ((a))

चिंतामणि

  • चिंतामणि ने सतसई की रचना नहीं की है ।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने चिंतामणि को रीतिकाल का प्रवर्तक माना है ।

Key Points 

  • सतसई का अर्थ है - सात सौ पदों  का समूह सतसई कहलाता है जैसे बिहारी सतसई ।
  • चिंतामणि , मतिराम ,अमीरदास , रामसहाय रीतिबद्ध कवि हैं ।

Important Points

  • चिंतामणि की प्रमुख कृतियाँ - रसविलास , काव्यविवेक , काव्यप्रकाश , रामायण आदि ।
  • मतिराम की प्रमुख कृतियाँ - फूलमंजरी , साहित्य सार , रसराज , सतसई , अलंकर पंचाशिका , वृत्त कौमुदी ।
  • अमीरदास की प्रमुख कृतियाँ - सभा मंडन , व्रजविलास सतसई , शेर सिंह प्रकाश  , वृत्त चंद्रोदय , आदि ।
  • रामसहाय की प्रमुख कृतियाँ - वृत्त तरंगिणी , अलंकार प्रकाश , वाणी भूषण , राम सतसई ।

Additional Information

  • रीतिकाल तीन भागों में विभक्त है - रीतिबद्ध , रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त ( आचार्य विश्वनाथ मिश्र ) ।
  • रीतिबद्ध - लक्षण ग्रंथों की रचना करना ।
88

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): कहानी छोटे मुँह बड़ी बात करती है।

तर्क (Reason) R): लेकिन लघु आकार के कारण कहानी सम्पूर्ण जीवनबोध और सामाजिक सत्य को प्रकाशित नहीं कर सकती।

  1. ((a))

    A सही R सही

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A ग़लत R सही

  4. ((d))

    A सही R ग़लत

Show Answer
Answer: ((d))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क गलत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • अभिकथन
  • कहानी छोटे मुंह बड़ी बात करती है अभिकथन सही है।
  • कहानी में कल्पना भाव प्रवणता अत्यधिक होने से हमें वास्तविक जगत एवं मिथ्या जगत को समझने में सहायक तो है किंतु कहानी में अपनी क्षमता से अधिक भाव तथा दशा बताई जाती है अतः कहानी छोटे मुंह बड़ी बात की लोकोक्ति को सत्य करती है।
  • तर्क 
  • लेकिन लघु आकार के कारण कहानी संपूर्ण जीवन बोध और सामाजिक सत्य को प्रकाशित कर सकती है।

Additional Information

  • कहानी
  • कहानी, हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। बंगला में इसे गल्प कहा जाता है।
  • हिंदी कहानी का उद्भव द्विवेदी युग से माना जाता है।
  • राजेंद्र बाला घोष "बंग महिला" को हिंदी की प्रथम कहानी लेखिका स्वीकार किया जाता है।
89

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): नारीवाद पितृसत्तात्मक समाज से संघर्ष का विमर्श है।

तर्क (Reason) R): इसीलिए हिन्दी का सम्पूर्ण स्त्रीलेखन अपने लिए पुरुषों के अस्तित्व को नकारता है।

  1. ((a))

    A ग़लत R सही

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A सही R ग़लत

  4. ((d))

    A सही R सही

Show Answer
Answer: ((c))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क गलत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • नारीवाद पितृसत्तात्मक समाज में संघर्ष का विमर्श है। इसलिए हिंदी का संपूर्ण स्त्री लेखन अपने लिए पुरुषों के अस्तित्व को स्वीकार तो करता है किंतु पुरुष अस्तित्व की विसंगतियों में नारी की स्थिति तथा सामाजिक दशा को दर्शाता है ना कि नकारता है।

Additional Information

  • हिंदी की प्रथम महिला कहानीकार बंग महिला राजेंद्र बाला घोष हैं।
  • हिंदी की प्रमुख महिला कहानीकार निम्नलिखित हैं:-
  • सुभद्रा कुमारी चौहान :- बिखरे मोती (1932), उन्मादीनी (1934)
  • कमला चौधरी :-  उन्माद (1934)
  • सुमित्रा कुमारी सिन्हा :- अचल सुहाग (1939) वर्षगांठ (1942)
  • होमवती :- निसर्ग (1939)
90

निम्नलिखित कवियों को उनकी प्रवृत्ति के आधार पर सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर को चुनिए:

सूची Iसूची II
a)स्वामी हरिदासi)निर्गुणोपासक
b)मलूकदासii)निरीश्वरवादी
c)कण्हपाiii)मधुरोपासक
d)कुतुबनiv)भोगवादी
v)एकेश्वरवादी
  1. ((a))

    a-i, b-ii, c-iii, d-iv

  2. ((b))

    a-iii, b-i, c-ii, d-v

  3. ((c))

    a-ii, b-iii, c-iv, d-i

  4. ((d))

    a-iv, b-v, c-ii, d-iii

Show Answer
Answer: ((b))

a-iii, b-i, c-ii, d-v

सही उत्तर-2) a-iii, b-i, c-ii, d-v है।

Key Points

सूची – Iसूची – II
(a)स्वामी हरिदास(iii)मधुरोपासक
(b)मलूकदास(i)निर्गुणोपासक
(c)कण्हपा(ii)निरीश्वरवादी
(d)कुतुबन(v)एकेश्वरवादी

Important Points

  • स्वामी हरिदास प्राचीन शास्त्रीय संगीत के विद्वान एवम् चतुष् ध्रुपदशैली के रचयिता हैं।
  • केलिमाल’ में हरिदास जी के सौ से अधिक पद संग्रहित हैं।
  • संत मलूकदास की प्रमुख रचनायें-अलखबानी,गुरुप्रताप,ज्ञानबोध,पुरुषविलास,भगत बच्छावली,भगत विरुदावली,रतनखान,रामावतार लीला,साखी,सुखसागर तथा दसरत्न हैं।

Additional Information 

  • सिध्दों की परंपरा में कण्हपा ने तंत्र और योग की बातें कही हैं।
  • कुतुबन सूफी प्रेम काव्य परम्परा के कवि थे। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ मृगावती है।
91

प्रकाशन-वर्ष अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    कठगुलाब, शेषयात्रा, सूरजमुखी अंधेरे के, ठीकरे की मंगनी       

  2. ((b))

    कठगुलाब, सूरजमुखी अंधेरे के, शेषयात्रा , ठीकरे की मंगनी 

  3. ((c))

    सूरजमुखी अंधेरे के, शेषयात्रा, ठीकरे की मंगनी, कठगुलाब

  4. ((d))

    कठगुलाब, ठीकरे की मंगनी, शेषयात्रा, सूरजमुखी अंधेरे के,

Show Answer
Answer: ((c))

सूरजमुखी अंधेरे के, शेषयात्रा, ठीकरे की मंगनी, कठगुलाब

प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही क्रम है :- 

  • सूरजमुखी अँधेरे में ( 1972 ई. ) , शेषयात्रा ( 1984 ई. ) , ठीकरे की मंगनी ( 1989 ई. ), कठगुलाब ( 1996 ई. )

Key Points

  • मृदुला गर्ग ने नारी की जटिलता एवं अस्मिता के संघर्ष को लेकर अपने उपन्यासों की रचना की ।
  • जिंदगीनामा उपन्यास के लिए कृष्णा सोबती को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ।
  • उषा प्रियंवदा ने अपने उपन्यासों में आधुनिक स्त्री की पीड़ा का वर्णन किया है ।
  • नासिरा शर्मा को पारिजात उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ।
  • मृदुला गर्ग को कठगुलाब के लिए व्यास सम्मान मिला ।

Important Points

  • बदलते हुए मानसिक परिवेश , महानगरीय सभ्यता के कारण व्यक्ति यांत्रिक , अनजबी मिसफिट और अकेला हो गया है इसकी अभिव्यक्ति साठोत्तरी साहित्य में होती है ।
मृदुला गर्गउसके हिस्से की धूप , वंशराज , चित्तकोबरा , कठगुलाब , अनित्य आदि
कृष्णा सोबतीमित्रो मरजानी , सूरजमुखी अँधेरे में , जिंदगीनामा , दिलोदानिश , समय सरगम आदि
उषा प्रियंवदापचपन खम्बे लाल दीवारें , रुकोगी नहीं राधिका , शेषयात्रा , भए कबीर उदास आदि
नासिरा शर्मासात नदियाँ एक समुन्दर , ठीकरे की मंगनी , जिंदा मुहावरे , जीरो रोड आदि
92

प्रकाशन-वर्ष के अनुसार निम्नलिखित आत्मकथाओं का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    आज के अतीत, सहचर है समय, टुकड़े-टुकड़े दास्तान, क्या भूलूं क्या याद करूं      

  2. ((b))

    क्या भूलूं क्या याद करूं, टुकड़े-टुकड़े दास्तान, सहचर है समय, आज के अतीत

  3. ((c))

    क्या भूलूं क्या याद करूं, आज के अतीत, सहचर है समय, टुकड़े-टुकड़े दास्तान

  4. ((d))

    सहचर है समय, आज के अतीत, टुकड़े-टुकड़े दास्तान, क्या भूलूं क्या याद करूं

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Answer: ((b))

क्या भूलूं क्या याद करूं, टुकड़े-टुकड़े दास्तान, सहचर है समय, आज के अतीत

  • प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित आत्मकथाओं का सही अनुक्रम है :-

       क्या भूलूं क्या याद करूं ( 1969 ई. ) , टुकड़े - टुकड़े दास्तान ( 1986 ई. ) , सहचर है समय ( 1991 ई. ) , आज के अतीत ( 2003 ई. )

Key Points

  • हरिवंश राय बच्चन - 1) क्या भूलूँ क्या याद करूं ( भाग 1 ) - 1969 ई.

​                                         2 ) नीड़ का निर्माण फ़िर ( भाग 2 ) - 1970 ई.​

                                         3) बसेरे से दूर ( भाग 3 ) - 1978 ई. 

                                         4 ) दशद्वार से सोपान तक ( भाग 4 ) ​​1985 ई.

  • अमृतलाल नगर ने टुकड़े टुकड़े दास्तान लिखी ।
  • आज के अतीत भीष्म साहनी द्वारा लिखित आत्मकथा है ।
  • समय सहचर है और फुरसत के दिन ( 2000 ई. ) में लिखी रामदरश मिश्र की आत्मकथाएँ हैं ।

Important Points

  • रामदरश मिश्र की आत्मकथा के चारों भाग समय है सहचर में संकलित हैं ।
  • क्या भूलूँ क्या याद करूं के सम्बन्ध में धर्मवीर भारती लिखते हैं - " यह हिंदी के हज़ार वर्षों के इतिहास में ऎसी पहली घटना है जिसमें अपने बारे में सब कुछ इतनी बेबाकी , साहस और सदभावना से कह दिया गया है । "
93

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): सौन्दर्यकारक धर्मों को अलंकार कहते हैं।

तर्क (Reason) R): लेकिन इनका कल्पना से कोई सम्बन्ध नहीं होता।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A सही R सही

  3. ((c))

    A ग़लत R ग़लत

  4. ((d))

    A ग़लत R सही

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Answer: ((a))

A सही R ग़लत

सही विकल्प-1) A सही R ग़लत है।  

अभिकथन (A): सौन्दर्यकारक धर्मों को अलंकार कहते हैं।

तर्क (R): लेकिन इनका कल्पना से कोई सम्बन्ध नहीं होता।

Key Points

  • अलंकार,कविता कामिनी के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले तत्व होते हैं।
  • 'अलंकरोति इति अलंकारः' अर्थात् जो अलंकृत करता है, वही अलंकार है।
  • वामन के अनुसार व्यापक रूप में सौंदर्य मात्र को अलंकार कहते हैं और उसी से काव्य ग्रहण किया जाता है।
  • उदाहरण- बिन पद चलै,सुने बिन काना।
  • जहाँ उपमेय में उपमान की कल्पना की जाती है वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
  • उत्प्रेक्षा अलंकार के कुछ वाचक शब्द इस प्रकार हैं- जाने,ज्यों,जनु,मनु,मानो,मनहु आदि।
  • उदाहरण-सिर फट गया उसका वही मानो अरुण रंग का घड़ा।
94

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): मैथिलीशरण गुप्त भारतीय संस्कृति के आख्याता हैं।

तर्क (Reason) R): इसलिए उन के काव्यों में आधुनिक दृष्टिबोध नहीं मिलता।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A ग़लत R सही

  3. ((c))

    A सही R सही

  4. ((d))

    A ग़लत R ग़लत

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Answer: ((a))

A सही R ग़लत

उपर्युक्त अभिकथन व तर्क में अभिकथन सही है व तर्क ग़लत है। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प "A सही R गलत" सही है तथा अन्य विकल्प असंगत हैं।

Key Points

  • मैथिलीशरण गुप्त भारतीय संस्कृति के आख्याता हैं।
  • इसलिए उनके काव्य में आधुनिक दृष्टिकोण नहीं मिलता, गलत है  क्योंकि उनके काव्य में आधुनिकता का दृष्टिकोण विद्यमान है।

Additional Information

  • मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) के काव्य:- 
  • रंग में भंग(1909), भारत भारती (1912), तिलोत्तमा (1915), चंद्रहास (1916),  किसान(1916) , वैतालिक (1916)
  • उन्हें साहित्य जगत में 'दद्दा' नाम से सम्बोधित किया जाता था।
  • उनकी जयन्ती 3 अगस्त को हर वर्ष 'कवि दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
  • सन 1954 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया।
  • महात्मा गांधी ने उन्हें 'राष्ट्रकवि' की पदवी भी दी थी।
95

'मुरारी और नर्गिस' के प्रेम पर आधरित उपन्‍यास है-

  1. ((a))

    आदर्श दंपति

  2. ((b))

    चंद हसीनों के खतून

  3. ((c))

    पाप और पुण्‍य

  4. ((d))

    सत्‍याग्रह

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Answer: ((b))

चंद हसीनों के खतून

  • ' मुरारी और नर्गिस ' के प्रेम पर आधारित उपन्यास ' चंद हसीनों के खतूत ' ( 1927 ई. ) पाण्डेय बेचन शर्मा ' उग्र ' का उपन्यास है ।
  • इस उपन्यास में सांप्रदायिक सदभाव  का चित्रण हुआ है ।

Key Points 

  • चंद हसीनों के खतूत पत्रात्मक प्रविधि में लिखा हुआ पहला उपन्यास है ।
  • बनारसीदास चतुर्वेदी ( विशाल भारत पत्रिका के संपादक ) ने बेचन शर्मा ' उग्र ' के उपन्यासों को ' घासलेटी साहित्य ' कहा था ।
  • उग्र ने सर्वप्रथम हिंदी उपन्यास में पत्रात्मक प्रविधि का प्रवर्तन किया ।

 

Important Points

बेचैन शर्मा ' उग्र ' के अन्य उपन्यास 

उपन्यासवर्ष
दिल्ली का दलाल1927 ई.
चॉकलेट1927 ई.
बुधुआ की बेटी1928 ई.
शराबी1930 ई.
सरकार तुम्हारी आँखों में1937 ई .
जीजीजी1943 ई.
फागुन के चार दिन1960 ई.
जुहू1963 ई .

 

Additional Information

  • आदर्श दंपत्ति  ( 1904 ई . ) लेखक लज्जा राम मेहता हैं ।
96

''अनुभूति के द्वंद्व से प्राणी के जीवन का आरंभ होता है। उच्‍चप्राणी मनुष्‍य भी केवल एक जोड़ी अनुभूति लेकर इस संसार मे आता है।''

उक्त पंक्तियॉं किस निबंध से उद्धृत है ?

  1. ((a))

    श्रद्धा-भक्ति

  2. ((b))

    करूणा

  3. ((c))

    भाव या मनोविकार

  4. ((d))

    उत्‍साह

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Answer: ((c))

भाव या मनोविकार

  • यह पंक्ति भाव या मनोविकार निबंध से ली गयी है ।
  • भाव या मनोविकार निबंध आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित है ।

Key Points

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लिखा है -  " यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है । भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंधों में ही सबसे अधिक संभव है ।"
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल चिंतामणि ( भाग 1 ) नामक निबंध संग्रह के संपादक है ।
  • आचार्य शुक्ल को भाषा और शैली के आधार पर कलात्मक निबंध का जन्मदाता माना जाता है ।

Important Points

  • भाव और मनोविकार निबंध चिंतामणि भाग 1 में संकलित है ।
  • चिंतामणि भाग 1 का प्रकाशन वर्ष 1939 ई. है ।
  • अन्य संकलित निबंध - उत्साह , लोभ और प्रीति , लज्जा और ग्लानी , श्रद्धा और भक्ति , भय , क्रोध , तुलसी का भक्ति मार्ग , काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था ।
  • चिंतामणि भाग 2 के संपादक -  विश्वनाथप्रसाद मिश्र , भाग 3 के संपादक - नामवर सिंह , भाग 4 के संपादक - कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह ।

Additional Information

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कुछ प्रमुख निबंधों की महत्वपूर्ण पंक्तियां
  1.  यदि प्रेम स्वप्न है तो श्रद्धा जागरण ।
  2. वैर क्रोध का आचार या मुरब्बा है ।
  3. गुण प्रत्यक्ष नहीं होता , उसके आश्रय और परिणाम प्रत्यक्ष होते हैं ।
  4. मनुष्य और पशु में मूल अंतर यही है कि मनुष्य चैतन्य तक पंहुचा है जबकि वह नहीं ।
97

प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): बिम्बविधान और चित्रात्मकता काव्य में महत्त्वपूर्ण उपादान हैं। इनसे कविता में सौन्दर्य की वृद्धि होती है, किन्तु ये साध्य नहीं हैं।

तर्क (Reason) R): क्योंकि कला की शक्ति का मूल स्त्रोत मिट्टी और जीवन है। कोरे बिम्बों का खेल कोरी आ तिशबाजी का काम है।

  1. ((a))

    A सही R सही

  2. ((b))

    A सही R ग़लत

  3. ((c))

    A ग़लत R ग़लत

  4. ((d))

    A ग़लत R सही

Show Answer
Answer: ((a))

A सही R सही

सही विकल्प-3) A सही R सही है।

अभिकथन (A): बिम्बविधान और चित्रात्मकता काव्य में महत्त्वपूर्ण उपादान हैं। इनसे कविता में सौन्दर्य की वृद्धि होती है, किन्तु ये साध्य नहीं हैं।

तर्क (R): क्योंकि कला की शक्ति का मूल स्त्रोत मिट्टी और जीवन है। कोरे बिम्बों का खेल कोरी आ तिशबाजी का काम है।

Key Points

  • काव्यकृति मूलतः तिहरे आयाम से जुड़ी है-काव्य,काव्यकर्ता,काव्यानुशीलक।
  • काव्य में बिम्ब को वह शब्द चित्र माना जाता है जो कल्पना द्वारा ऐन्द्रिय अनुभवों के आधार पर निर्मित होता है।
  • बिम्ब के तीन मूलभूत तत्त्व हैं-
  1. ​कल्पना
  2. भाव
  3. ऐन्द्रिकता
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प्रश्न में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A) है और दूसरा तर्क (Reasons) R) है। कूट में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

अभिकथन (Assertion) A): परम्परा रूढ़ि पालन नहीं, आधुनिकता की पक्षधर है।

तर्क (Reason) R): क्योंकि परम्परा में अतीत के प्रति आसक्ति और परिवर्तन का निषेध होता है।

  1. ((a))

    A सही R ग़लत

  2. ((b))

    A ग़लत R ग़लत

  3. ((c))

    A सही R सही

  4. ((d))

    A ग़लत R सही

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Answer: ((a))

A सही R ग़लत

सही विकल्प-1 (A सही R ग़लत)

Key Points

  • परम्परा का अर्थ-सम्पूर्ण विचारों,आदतों और प्रथाओं के योग से है जो एक समूह की विशेषता है।
  • परम्परा की विशेषतायें-
  • उनमें निरंतरता रहती है।
  • पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती हैं।
  • परम्पराओं में परिवर्तन धीमी गति से होता है।
  • परम्पराओं में कठोरता पायी जाती है।
99

रीतिकालीन आचार्यों की तीन श्रेणियाँ हैं-

I. उदभावक आचार्य

II. व्‍याख्‍याता आचार्य

III. उदगाता आचार्य

IV. कवि-शिक्षक

नीचे दिए गए कूट मे से सही उतर को चुनिए:

  1. ((a))

    I, II और III सही

  2. ((b))

    I, III और IV सही

  3. ((c))

    I, II और IV सही

  4. ((d))

    II, III और IV सही

Show Answer
Answer: ((c))

I, II और IV सही

रीतिकालीन आचार्यों की तीन श्रेणियाँ -3) I,II और IV सही हैं।

I. उदभावक आचार्य

II. व्‍याख्‍याता आचार्य

IV. कवि-शिक्षक

Key Points

हिन्दी में लक्षण ग्रन्थों की रचना करने वाले ये सैकङों कवि शुद्ध रूप से आचार्य कोटि में नहीं आते, वे कवि ही हैं।

डाॅ. नगेन्द्र ने आचार्यों की तीन कोटियाँ मानी हैं-

    1. उद्भावक आचार्य – जो किसी नवीन सिद्धान्त का प्रतिपादन करे।
    1. व्याख्याता आचार्य – जो स्थापित मत की व्याख्या करे।
    1. कवि शिक्षक आचार्य – जो काव्यशास्त्र को सरस रूप में अवतरित करे।

Important Points

  • संवत् 1700 से 1900 के मध्य को रीतिकाल या उत्तर-मध्यकाल के नाम से जाना जाता है।
  • मिश्रबंधुओं ने रीतिकाल को ‘अलंकृत’ काल कहा।
  • रीतिकाल में शृंगार की प्रधानता रही।
  • ​रीतिकाल के कवियों को तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-रीतिबद्ध,रीतिमुक्त,रीतिसिद्ध।

Additional Information

  • रीतिबद्ध कवि-केशव,चिंतामणि,भिखारीदास,देव,मतिराम और पद्माकर आदि हैं।
  • रीतिमुक्त कवि-घनानंद,बोधा,द्विजदेव ठाकुर आदि हैं।
  • रीतिसिद्ध कवि-बिहारी,सेनापति,वृन्द,बेनी वाजपेयी आदि हैं।
100

कालक्रम की दृष्टि से साहित्य-सिद्धान्तों का सही अनुक्रम है : 

  1. ((a))

    अलंकार, रस, ध्वनि, रीति    

  2. ((b))

    रस, अलंकार, रीति, ध्वनि    

  3. ((c))

    ध्वनि, रीति, रस, अलंकार    

  4. ((d))

    रीति, रस, ध्वनि, अलंकार    

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Answer: ((b))

रस, अलंकार, रीति, ध्वनि    

  • कालक्रम की दृष्टि से साहित्य - सिद्धांतों का सही अनुक्रम है - रस , अलंकार  , रीति , ध्वनि ।

Key Points

  • रस सम्प्रदाय का प्रवर्तक भरतमुनि को माना जाता है । काव्यशास्त्र में रस को काव्यानंद के अर्थ में समझा जाता है ।
  • अलंकार सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भामह को माना जाता है , इन्होंने सभी अलंकारों के मूल में वक्रोक्ति को माना ।
  • रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक वामन माने जाते हैं ।
  • ध्वनि सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य आनंदवर्धन माने जाते हैं ।

Important Points

  • व्याकरण के स्फोट से आनंदवर्धन ने ध्वनि , व्यंजक और व्यंग्य शब्द ग्रहण कर उन्हें नए सन्दर्भ में प्रयोग किया ।
  • वामन के अनुसार 3 रीतियाँ हैं - वैदर्भी , गौड़ी , पांचाली ।
  • आचार्य भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र में 4 अलंकारों का उल्लेख किया है - उपमा , रूपक , दीपक , यमक ।
  • ​रस का अर्थ है आस्वाद , काव्य को पढने , सुनने और देखने से प्रा���्त होने वाला आनंद ही रस है ।

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