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UGC NET Paper 2: Hindi 6th January 2026 Shift 2 (Previous Year Paper)

100 questions · 120 minutes · with answers · free

Test (100 questions)

1

किसी के घर कर में न घर कर बैठना इस दारे फानी में।

ठिकाना बेठिकाना और मकाँ वर ला - मकाँ रखना ।।

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस निबंध से ली गई हैं?

  1. ((a))

    कविता क्या है

  2. ((b))

    मेरे राम का मुकुट भीग रहा है

  3. ((c))

    मजदूरी और प्रेम

  4. ((d))

    संस्कृति और सौंदर्य

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Answer: ((c))

मजदूरी और प्रेम

सही उत्तर है- मजदूरी और प्रेम

Key Points

  • दी गई पंक्तियों का अर्थ है कि इस क्षणभंगुर संसार में किसी एक जगह घर बनाकर मत बैठो, बल्कि अपना ठिकाना और निवास ईश्वर के पास रखो (अर्थात मोह-माया से ऊपर उठकर रहो)

Important Pointsमजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार-अध्यापक पूर्ण सिंह
  • निबंध में निम्न वर्ग के लोगों के जीवन तथ्यों को उजागर किया गया है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • मजूरी और कला आदि।

Additional Informationसरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन मुख्य निबंधकार है।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्त कवि वाल्ट व्हिटमैन आदि।
2

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): "सभी औरतों ने आँसू बहाते बहाते भी दबे-दबे, धीमे स्वर में गीत आरम्भ कर दिया आले ते जाले बाबल गुड्डियाँ, मेरा नई खेड्डून ते चाह होये। माँ रोंदी दी अंगिया भिज्ज गई, रोये दरया बहे। मेरा वीर रोये, सारा जग रोये, मेरी भाभियाँ मन चाव होवे।"

कारण (R) : उपर्युक्त गीत में आँसू और खुशी दोनों का कारण यही था कि तारा का विवाह हो रहा है। औरतें हँसी और चुहल के साथ गीत गाते हुए भी आँसू बहा रही है क्योंकि विदाई में यह स्वाभाविक बात है। गीत में उसी चुहल और विदाई की रुलाई के भाव का अंकन है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

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Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

विश्लेषण-

  • अभिकथन (A): यह कथन बिल्कुल सत्य है। इस अंश में विदाई के समय गाए जाने वाले एक पारंपरिक गीत का वर्णन है, जहाँ स्त्रियाँ दुःख और धीमी आवाज़ में विदाई की पीड़ा को व्यक्त कर रही हैं। गीत की पंक्तियाँ ("बाबल गुड़ियाँ", "वीर रोये", "भाभियाँ मन चाव होवे") विदाई के भावपूर्ण माहौल को दर्शाती हैं।
  • कारण (R): यह तर्क भी सही है और अभिकथन की सही व्याख्या करता है। विदाई के समय एक तरफ जहाँ 'तारा' (दुल्हन) के विवाह की खुशी है (चुहल और चाव), वहीं दूसरी तरफ बिछड़ने का गम भी है। गीत में खुशी और विदाई के आँसू, दोनों का ही सजीव चित्रण किया गया है।

Key Points

  • तारा प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास 'झूठा सच' की मुख्य महिला पात्र है, जिसके लेखक यशपाल हैं।
  • 'झूठा सच' उपन्यास भारत-विभाजन (1947) की त्रासदी और लाहौर व दिल्ली के दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें तारा के संघर्ष और प्रगतिशील सोच को दर्शाया गया है। तारा जयदेव पुरी की बहन है।

Important Pointsझूठा-सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • मुख्य पात्र-
  • तार
  • जयदेव आदि।
  • विषय-
  • 'वतन और देश' तथा 'देश का भविष्य' नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उपरान्त चारित्रिक स्खलन एवं विविध विडम्बनाओं का व्यापक फलक पर कलात्मक चित्र उकेरा गया है।
  • झूठा सच (1958-60) हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।

Additional Informationयशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।
3

हरिऔध कृत 'प्रियप्रवास' की भूमिका के अनुसार कौन से कथन सत्य हैं ?

A. मैंने पहले इस ग्रंथ का नाम 'नीलांजना प्रलाप' रखा था।

B. एक सहृदय कवि के मन से मन मिलाकर यह प्रार्थना करता है।

C. यह सत्य है, किंतु लोकभाषा की सेवा करने का अधिकार सभी को तो है।

D. जो महाकाव्य हो; और ऐसी कविता में लिखा गया हो जिसे भिन्नतुकान्त कहते हैं।

E. 'प्रिय प्रवास' की भाषा संस्कृत गर्भित है। उसमें हिन्दी के स्थान पर संस्कृत का रंग अधिक है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल C, E

  2. ((b))

    केवल A, B

  3. ((c))

    केवल C, D

  4. ((d))

    केवल D, E

Show Answer
Answer: ((d))

केवल D, E

सही उत्तर है- केवल D, E

Key Pointsहरिऔध कृत 'प्रियप्रवास' की भूमिका के अनुसार सत्य कथन हैं-

  • D. जो महाकाव्य हो; और ऐसी कविता में लिखा गया हो जिसे भिन्नतुकान्त कहते हैं। हरिऔध जी ने स्वयं भूमिका में लिखा है कि उन्होंने इस ग्रंथ की रचना अतुकान्त कविता (जिसे भिन्नतुकान्त भी कहते हैं) में की है।
  • E. 'प्रिय प्रवास' की भाषा संस्कृत गर्भित है। उसमें हिन्दी के स्थान पर संस्कृत का रंग अधिक है। इस महाकाव्य की भाषा खड़ी बोली है, पर यह संस्कृत-गर्भित है और इसमें संस्कृत के वर्ण-वृत्त (छंद) का प्रयोग अधिक है.

Important Pointsअन्य कथन असत्य हैं-

  • A. उन्होंने पहले इस ग्रंथ का नाम 'ब्रजांगना विलाप' रखने का विचार किया था, 'नीलांजना प्रलाप' नहीं।
  • B. यह कथन भूमिका में नहीं है।
  • C. यह कथन भूमिका में इस संदर्भ में नहीं कहा गया है।

Additional Informationप्रियप्रवास-

  • रचनाकार-अयोध्यासिंह उपध्याय 'हरिऔध'
  • प्रकाशन वर्ष-1914 ई.
  • विधा-प्रबंध काव्य
  • सर्ग-17
  • विषय-
  • यह खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है।
  • अन्य नाम- ब्रजांगना विलाप
  • इसमें कृष्ण के बचपन से लेकर मधुरा प्रस्थान तक का वर्णन किया गया है।

Hintअयोध्यासिंह उपध्याय 'हरिऔध'-

  • जन्म-1865-1947 ई.
  • द्विवेदी युगीन प्रमुख कवि है।
  • रचनाएँ-
  • कृष्ण शतक(1882 ई.)
  • रसिक रहस्य(1899 ई.)
  • प्रेम प्रपंच(1900 ई.)
  • चुभते चौपदे(1924 ई.)
  • पद्म प्रसून(1925 ई.)
  • रस कलश(1931 ई.)
  • चौखे चौपदे(1932 ई.) आदि।
  • प्रबंध काव्य-
  • पारिजात(1937 ई.)
  • वैदेही वनवास(1941 ई.) आदि।
4

निम्नलिखित पंक्तियों को 'शिवशंभु के चिट्ठे' निबंध के आधार पर पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. आज शिवशंभु बुलबुलों का राजा ही नहीं, महाराजा है।

B. आपकी भारत में स्थिति की अवधि के पाँच वर्ष पूरे हो गये।

C. अब यदि आप कुछ दिन रहेंगे तो सूद में, मूलधन समाप्त हो चुका।

D. आपने माई लार्ड ! जब से भारत में पधारे हैं, बुलबुलों का स्वप्न ही देखा है।

E. यहाँ की प्रजा के लिए भी कुछ कर्त्तव्य पालन किया ?

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, D, C, E

  2. ((b))

    A, B, C, D, E

  3. ((c))

    A, D, E, B, C

  4. ((d))

    A, C, D, B, E

Show Answer
Answer: ((c))

A, D, E, B, C

सही उत्तर है-  A, D, E, B, C

Key Points

निबंध की शुरुआत और विकास के आधार पर पंक्तियों का सही क्रम यहाँ दिया गया है-

  1. A. आज शिवशंभु बुलबुलों का राजा ही नहीं, महाराजा है। – यह निबंध के शुरुआती हिस्से में आता है जहाँ शिवशंभु अपनी काल्पनिक दुनिया और बुलबुलों के स्वप्न का वर्णन करता है।
  2. D. आपने माई लॉर्ड ! जब से भारत में पधारे हैं, बुलबुलों का ही स्वप्न देखा है। – यहाँ लेखक लॉर्ड कर्जन को संबोधित करना शुरू करता है और उनके शासन की तुलना अपने बुलबुलों के स्वप्न से करता है।
  3. E. यहाँ की प्रजा के लिए भी कुछ कर्त्तव्य पालन किया? – यह प्रश्न कर्जन के शासनकाल की उपलब्धियों और प्रजा के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है।
  4. B. आपकी भारत में स्थिति की अवधि के पाँच वर्ष पूरे हो गये। – यहाँ कर्जन के पहले कार्यकाल की समाप्ति का जिक्र है।
  5. C. अब यदि आप कुछ दिन रहेंगे तो सूद में, मूलधन समाप्त हो चुका। – यह निबंध के अंत की ओर संकेत करता है, जहाँ लेखक कहता है कि अब कर्जन का समय समाप्त हो चुका है और आगे रुकना नुकसानदेह ही होगा।
5

'निराला की साहित्य साधना-2' (रामविलास शर्मा) पुस्तक में 'विचारधारा' शीर्षक के अन्तर्गत आए उपशीर्षकों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. भाषा और राष्ट्र

B. वेदान्त और विकासवाद

C. वेदान्त और भारतीयता

D. नारी की स्वाधीनता

E. ब्रह्मा और प्रकृति

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, C, D, E

  2. ((b))

    D, E, C, А, В

  3. ((c))

    D, A, C, B, E

  4. ((d))

    A, B, D, C, E

Show Answer
Answer: ((c))

D, A, C, B, E

सही उत्तर है- D, A, C, B, E

Key Points

रामविलास शर्मा की पुस्तक 'निराला की साहित्य साधना-2' के 'विचारधारा' खंड में दिए गए उपशीर्षकों का सही अनुक्रम निम्नलिखित है-

  • D. नारी की स्वाधीनता: इस खंड में निराला के साहित्य में स्त्री अधिकारों और उनकी सामाजिक स्थिति पर चर्चा की गई है।
  • A. भाषा और राष्ट्र: यहाँ राष्ट्र निर्माण में भाषा की भूमिका और निराला के भाषाई दृष्टिकोण का विश्लेषण है।
  • C. वेदान्त और भारतीयता: निराला के दर्शन पर वेदान्त के प्रभाव और उनकी भारतीय दृष्टि को यहाँ स्पष्ट किया गया है।
  • B. वेदान्त और विकासवाद: इसमें वेदान्त दर्शन और आधुनिक विज्ञान/विकासवाद के अंतर्संबंधों पर विमर्श है।
  • E. ब्रह्मा और प्रकृति: यह उपशीर्षक दार्शनिक और प्राकृतिक तत्वों के समन्वय पर आधारित है।
6

"बाला था जब सब को भाया, बड़ा हुआ कुछ काम न आया, खुसरो कह दिया आसका नाँव, अर्थ करो नहीं छोड़ो गाँव"

अमीर खुसरो की उपरोक्त पहेली का उत्तर/हल बताइए।

  1. ((a))

    नाव

  2. ((b))

    धूप

  3. ((c))

    चौकी

  4. ((d))

    दिया

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Answer: ((d))

दिया

इस प्रसिद्ध पहेली का सही उत्तर दीया (दीपक) है।

 

  • यद्यपि आपके द्वारा साझा की गई छवि में ' दीया'  को चुना गया है, लेकिन अमीर खुसरो की इस पहेली का अर्थ और संदर्भ दीया की ओर संकेत करता है।

Key Points

पहेली का विश्लेषण:

"बाला था जब सब को भाया, बड़ा हुआ कुछ काम न आया, खुसरो कह दिया उसका नाँव, अर्थ करो नहीं छोड़ो गाँव"

  • बाला था जब सब को भाया: जब दीया छोटा होता है (यानी जब उसे नया-नया जलाया जाता है), तो वह प्रकाश देता है और सबको अच्छा लगता है।
  • बड़ा हुआ कुछ काम न आया: यहाँ 'बड़ा होने' का तात्पर्य दीये की लौ का बढ़ना या जलकर बुझने की कगार पर पहुँचने (गुल होना) से है। जब दीया बुझ जाता है या उसकी बाती खत्म हो जाती है, तो वह किसी काम का नहीं रहता (अंधेरा हो जाता है)।
  • खुसरो कह दिया उसका नाँव: अमीर खुसरो कहते हैं कि मैंने इसका नाम पहेली में ही बता दिया है।
  • अर्थ करो नहीं छोड़ो गाँव: यदि आप इसका अर्थ नहीं बता पाए, तो आपको गाँव छोड़ना पड़ेगा (यह एक पारंपरिक पहेली कहने का अंदाज़ है)।
7

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कहते हैं कि 'दृश्यों की स्थानगत विशेषता' केशव की रचनाओं में ढूँढना तो व्यर्थ ही है।

कारण (R) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कहते हैं कि केशव के लिए प्राकृतिक दृश्यों में कोई आकर्षण नहीं था। वे उनकी देशगत विशेषताओं का निरीक्षण करने क्यों जाते। दूसरी बात यह है कि केशव के बहुत पहले ही देशगत परंपरा एक प्रकार से उठ चुकी थी।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

Key Points

  • यह प्रश्न हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल के 'हिंदी साहित्य का इतिहास' में कवि केशवदास के प्रति व्यक्त किए गए विचारों पर आधारित है।

Important Points

तथ्यों की जाँच:

  • अभिकथन (A): शुक्ल जी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केशव की रचनाओं में प्रकृति के 'दृश्यों की स्थानगत विशेषता' ढूँढना व्यर्थ है। उनके अनुसार, केशव का प्रकृति वर्णन केवल परंपरा निर्वाह के लिए था, उसमें मौलिकता और स्थानीय जुड़ाव का अभाव था।
  • कारण (R): शुक्ल जी मानते थे कि केशव को प्राकृतिक दृश्यों में वास्तविक अनुराग या आकर्षण नहीं था। वे यह भी तर्क देते हैं कि केशव से बहुत पहले ही हिंदी काव्य में 'देशगत परंपरा' (यानी स्थानीय परिवेश का सूक्ष्म वर्णन) लगभग समाप्त हो चुकी थी, इसलिए केशव ने प्रकृति का वर्णन केवल वस्तुओं की सूची (Names of objects) गिनाने के रूप में किया।

Additional Information

निष्कर्ष:

  • चूँकि अभिकथन (A) में दी गई बात का मुख्य आधार वही है जो कारण (R) में बताया गया है (केशव का प्रकृति के प्रति आकर्षण का अभाव और लुप्त होती देशगत परंपरा), इसलिए (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
8

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (कविता)सूची-II (कवि)
A. विजयिनि विजय वैजयंतिI. प्रेमघन
B. आनंद अरुणोदयII. भारतेन्दु
C. भारत बारहमासाIII. प्रतापनारायण मिश्र
D. महापर्वIV. राधाकृष्ण दास

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-I, В-II, C-IV, D-III

  2. ((b))

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  3. ((c))

    A-I, В-III, C-II, D-IV

  4. ((d))

    A-II, B-III, C-IV, D-I

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Answer: ((b))

A-II, B-I, C-IV, D-III

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Points

सूची-I (कविता)सूची-II (कवि)
A. विजयिनि विजय वैजयंतिII. भारतेन्दु
B. आनंद अरुणोदयI. प्रेमघन
C. भारत बारहमासाIV. राधाकृष्ण दास
D. महापर्वIII. प्रतापनारायण मिश्र

Important Pointsभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885 ई.
  • रचनाएँ-
  • भक्ति सर्वस्व(1870 ई.)
  • प्रेम मालिका(1971 ई.)
  • प्रेम माधुरी(1875 ई.)
  • प्रेम तरंग(1877 ई.)
  • प्रेम प्रलाप(1877 ई.)
  • मधु मुकुल(1881 ई.) आदि।

राधाकृष्ण दास-

  • जन्म-1865-1907 ई.
  • भारतेन्दु युगीन कवि है।
  • रचनाएँ-
  • भारत बारहमासा
  • देश दशा आदि।

प्रताप नारायण मिश्र-

  • जन्म-1856-1894 ई.
  • भारतेन्दु युगीन कवि है।
  • रचनाएँ-
  • मन की लहर
  • लोकोक्ति शतक
  • शृंगार विलास
  • हरगंगा आदि।

बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन-

  • जन्म-1855-1922 ई.
  • रचनाएँ-
  • जीर्ण जनपद
  • आनंद अरुणोदय
  • मयंक महिमा
  • वर्षा बिन्दु आदि।
9

भाषा के संबंध में यह कथन किस कवि का है?

'तुर्की, अरबी, हिंदवी, भाषा तेती आहि।

जामे मारग प्रेम का, सबै सराहैं ताहि ।।'

  1. ((a))

    अमीर खुसरो

  2. ((b))

    मलिक मुहम्मद जायसी

  3. ((c))

    शाही मीराजी

  4. ((d))

    मुल्ला वजही

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Answer: ((b))

मलिक मुहम्मद जायसी

सही उत्तर है- मलिक मुहम्मद जायसी

Key Pointsविवरण-

  • अर्थ: जायसी इन पंक्तियों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि चाहे भाषा तुर्की हो, अरबी हो या हिंदवी (हिंदी), जिस भी भाषा में 'प्रेम का मार्ग' बताया गया है, उसकी सभी सराहना करते हैं। उनके अनुसार, ईश्वर तक पहुँचने का वास्तविक मार्ग प्रेम है, और भाषा केवल उसका माध्यम है।
  • संदर्भ: ये पंक्तियाँ जायसी के प्रसिद्ध महाकाव्य 'पद्मावत' से ली गई हैं।
  • महत्व: यह कथन जायसी के उदार दृष्टिकोण और भाषा के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Important Points

जायसी-

  • जन्म-1446-1542 ई.
  • पूरा नाम-मलिक मोहम्मद जायसी
  • गुरु-सूफी फकीर शेख मोहिदी
  • रचनाएँ-
  • अखरावट
  • आखिरी कलाम
  • कहरनामा
  • कान्हावत
  • चित्ररेखा आदि।

अमीर खुसरो-

  • जन्म-मृत्यु - 1255-1325 ई.
  • जन्मस्थान- पटियाली, एटा उत्तरप्रदेश
  • मूलनाम - अबुल हसन
  • उपनाम- तुर्क-ए-अल्लाह
  • गुरु- निजामुद्दीन औलिया  
  • ( इन्हीं की मृत्यु पर खुसरो ने लिखा था-  "गोरी सोवै सेज पर,मुख पर डारै केस। चल खुसरो घर आपने,रैन भई चहुँ देस।")
  • अमीर खुसरो की पहेलियों और मुकरियों में उक्तिवैचित्र्य की प्रधानता है।
  • इन्होंने दिल्ली के सिंहासन पर ग्यारह राजाओं का आरोहण देखा था।
10

'आपहुदरी' के उपशीर्षकों के आधार पर सही अनुक्रम बतलाइए।

A. कौतूहल

B. सवालों के साये

C. दोहरे मापदंड

D. मिथक ढह गया

E. जब आस्थाएँ टूटीं

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, C, D, E

  2. ((b))

    A, B, D, C, E

  3. ((c))

    E, C, A, B, D

  4. ((d))

    E, A, B, C, D

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Answer: ((c))

E, C, A, B, D

सही उत्तर है- E, C, A, B, D

Key Pointsआपहुदरी-

  • रचनाकार-रमणिका गुप्ता
  • विधा-आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष-2016 ई.
  • विषय-
  • यह इनकी आत्मकथा का दूसरा भाग है।
  • स्त्री जीवन की समस्या का चित्रण किया गया है।
  • आत्मकथा का पहला भाग है- हादसे(2005 ई.)

Important Pointsरमणिका गुप्ता-

  • जन्म- 1930 - 2019 ईo
  • उपन्यास- 
  • सीता मौसी
  • आत्मकथा-
  • इनकी आत्मकथा के दो भाग हैं- 
  • पहला भाग हादसे (2015) में प्रकाशित हुआ था
  • दूसरा भाग आपहुदरी ( 2015 ) में प्रकाशित हुआ।
11

पंक्तियों एवं अलंकार का मिलान कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्तियाँ)सूची-II (अलंकार)
A. पाँय महावर देन को, नाइन बैठी आय। फिरि फिरि जानि महावरी, एड़ी मीड़ति जाय।।I. यमक
B. अस मानस मानस चख चाही, भइ कवि बुद्धि विमल अवगाही।II. अतिशयोक्ति
C. अनियारे दीरघ दृगनि, किति न तरुनि समान, वे नैना औरे कछू, जिहिं बस होत सुजान।III. भ्रान्तिमान
D. मनो कठिन आँगन चली ताते राते पाँय।IV. उत्प्रेक्षा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-I, B-II, C-III, D-IV

  2. ((b))

    A-III, B-I, C-IV, D-II

  3. ((c))

    A-III, B-I, C-II, D-IV

  4. ((d))

    A-II, B-III, C-IV, D-I

Show Answer
Answer: ((c))

A-III, B-I, C-II, D-IV

सही उत्तर है- A-III, B-I, C-II, D-IV

Key Points

A. पाँय महावर देन को, नाइन बैठी आय। फिरि फिरि जानि महावरी, एड़ी मीड़ति जाय।।III. भ्रान्तिमान
B. अस मानस मानस चख चाही, भइ कवि बुद्धि विमल अवगाही।I. यमक
C. अनियारे दीरघ दृगनि, किति न तरुनि समान, वे नैना औरे कछू, जिहिं बस होत सुजान।II. अतिशयोक्ति
D. मनो कठिन आँगन चली ताते राते पाँय।IV. उत्प्रेक्षा

Important Points

व्याख्या-

  • भ्रान्तिमान (A): यहाँ नायिका की एड़ी की स्वाभाविक लालिमा को देखकर नाइन को महावर (रंग) होने का भ्रम हो जाता है, इसलिए वह बार-बार एड़ी को मलती है।
  • यमक (B): इस पंक्ति में 'मानस' शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है और दोनों के अर्थ अलग हैं—एक का अर्थ 'मानसरोवर' या 'रामचरितमानस' है और दूसरे का अर्थ 'मन' है।
  • अतिशयोक्ति (C): बिहारी के इस दोहे में नायिका के नेत्रों की सुंदरता और प्रभाव का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है, जो 'अतिशयोक्ति' अलंकार की श्रेणी में आता है।
  • उत्प्रेक्षा (D): यहाँ 'मनो' वाचक शब्द का प्रयोग हुआ है, जहाँ नायिका के पैरों के लाल होने की संभावना कठिन आँगन पर चलने के कारण की गई।
12

गोदान उपन्यास पर निम्नलिखित टिप्पणी किस हिंदी आलोचक द्वारा की गई है?

"गोदान का रचना - संतुलन ऐसा बेजोड़ है कि उसमें अनवरत संघर्ष, करूणा, सहानुभूति और ट्रैजिक अंत के बावजूद कहीं किसी एक के प्रति कड़वाहट नहीं आती, गहरा असंतोष उमड़ता घुमड़ता है तंत्र के प्रति।"

  1. ((a))

    आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  2. ((b))

    हजारी प्रसाद द्विवेदी

  3. ((c))

    रामस्वरूप चतुर्वेदी

  4. ((d))

    विश्वनाथ त्रिपाठी

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Answer: ((c))

रामस्वरूप चतुर्वेदी

प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास 'गोदान' के संबंध में यह प्रसिद्ध टिप्पणी डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी द्वारा की गई है।

Key Points

प्रमुख विवरण-​

  • कथन का भाव: डॉ. चतुर्वेदी इस कथन के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि 'गोदान' का शिल्प और रचना-विधान इतना संतुलित है कि पाठक के मन में पात्रों के प्रति कड़वाहट पैदा होने के बजाय उस शोषक तंत्र (System) के प्रति गहरा असंतोष और आक्रोश पैदा होता है, जो होरी जैसे किसानों की नियति तय करता है।
  • स्रोत्र: यह आलोचनात्मक टिप्पणी उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास' से ली गई है।
  • महत्व: यह टिप्पणी 'गोदान' की 'ट्रैजिक' (दुखांत) परिणति और उसके सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।​

Important Points

रामस्वरूप चतुर्वेदी-

  • जन्म- 1931-2003 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • हिन्दी नवलेखन(1960 ई.)
  • भाषा और संवेदना(1964 ई.)
  • कामायनी का पुनर्मूल्यांकन(1970 ई.)
  • हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास(1986 ई.) आदि।

रामचन्द्र शुक्ल- 

  • जन्म- 1884 - 1941 ई.
  • आलोचना ग्रंथ-
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • जायसी ग्रंथावली (1924)
  • गोस्वामी तुलसीदास (1923)
  • रसमीमांसा (1949)
  • भ्रमर गीत सार (1925 )
  • काव्य मे रहस्यवाद (1929)

हज़ारी प्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ:-
  • अशोक के फूल (1948ई.)
  • कल्‍पलता (1951ई.)
  • मध्यकालीन धर्मसाधना (1952ई.)
  • विचार और वितर्क (1957ई.)
  • विचार-प्रवाह (1959ई.)
  • कुटज (1964ई.)
  • आलोक पर्व (1972ई.) आदि।

विश्वनाथ त्रिपाठी-

  • आलोचना कृति-
  • हिन्दीआलोचना (1970)
  • लोकवादी तुलसीदास (1974)
  • प्रारम्भिक अवधी (1975)
  • मीरा का काव्य (1979)
  • हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास (1986)
  • देश के इस दौर में (परसाई केन्द्रित) (1989) आदि।
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भ्रमरगीतसार (रामचंद शुक्ल) की पंक्तियों एवं रागों का मिलान कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्तियाँ)सूची-II (राग)
A. नूतन रीति नन्दनन्दन की घर-घर दीजत थाप।I. राग सारंग
B. सूर सीस धुनि चौंकत नावहिं अब काहे न मुख बोलत ?II. राग मलार
C. जेहि विधि मिलन मिलैं वै माधव सो विधि कोउ न बतावे।।III. राग सोरठ
D. धर्म, अधर्म कामना सुनावत सुख औ मुक्ति समेत।।IV. राग धनाश्री

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-III, В-I, C-II, D-IV

  2. ((b))

    A-III, B-IV, C-II, D-I

  3. ((c))

    A-I, B-II, C-III, D-IV

  4. ((d))

    A-I, B-IV, C-III, D-II

Show Answer
Answer: ((a))

A-III, В-I, C-II, D-IV

सही उत्तर है- A-III, В-I, C-II, D-IV

Key Pointsसूरदास के 'भ्रमरगीतसार' (संपादक: रामचंद्र शुक्ल) की पंक्तियों और उनके संबंधित रागों का सही मिलान नीचे दिया गया है-

A. नूतन रीति नन्दनन्दन की घर-घर दीजत थाप।III. राग सोरठ
B. सूर सीस धुनि चौंकत नावहिं अब काहे न मुख बोलत ?IV. राग सारंग
C. जेहि विधि मिलन मिलें वै माधव सो विधि कोउ न बतावे ।।II. राग मलार
D. धर्म, अधर्म कामना सुनावत सुख औ मुक्ति समेत ।।I. राग धनाश्री

Important Points सूरदास-

  • जन्म- 1478-1583 ई.
  • भक्तिकाल की कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुखक कवि है।
  • रचनाएँ-
  • सूरसागर
  • सुरसरावली(1548 ई.)
  • साहित्य लहरी(1550 ई.) आदि।
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'आगरा बाजार' नाटक की निम्नलिखित पंक्तियों को क्रमानुसार लगाएँ।

A. और मोल ले रहा है, सो है वह भी आदमी

B. दुनिया में बादशाह है, सो है वह भी आदमी

C. और वह जो मर गया है, सो है वह भी आदमी

D. टुकड़े जो मांगता है, सो है वह भी आदमी

E. बदशक्लो-बदनुमा है, सो है वह भी आदमी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, C, D, E

  2. ((b))

    B, D, A, E, C

  3. ((c))

    D, E, B, C, A

  4. ((d))

    E, A, C, D, B

Show Answer
Answer: ((b))

B, D, A, E, C

सही उत्तर है- B, D, A, E, C

Key Pointsआगरा बाजार-  

  • रचनाकार- हबीब तनवीर
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1954ई.
  • अंक- 2
  • स्थान- आगरा के ‘किनारी बाजार’ का एक ‘चौराहा’।
  • विषय वस्तु- 
  • नज़ीर अकबराबादी 18 वीं सदी के भारतीय शायर थे, जिन्हें नज्म का पिता कहा जाता है।
  • उनकी सबसे प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक गजल ‘बंजारानामा’ है।
  • वे धर्म-निरपेक्ष व्यक्ति थे।
  • हबीब तनवीर ने ‘नज़ीर अकबराबादी’ को प्रतिष्ठित करने के लिए ही आगरा बाजार नाटक लिखा था।
  • आगरा बाजार’ नाटक का मुख्य तथ्य-
  • इस नाटक में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं का चित्रण किया गया है ।
  • नाटक में स्थानीय संस्क���ति, लोकजीवन और लोकपरम्पराओं का चित्रण है।
  • पुलिस व्यवस्था के कार्य शैली और व्यापारियों के दर्द का चित्रण है।
  • व्यापारियों का दर्द, इतिहास के फलक पर आधुनिक समस्याओं के रूप में चित्रण किया गया है।
  • इस नज्म के पितामह नजीर अकबरावादी को प्रतिष्ठित करना था।
  • इस नाटक को जब ओखला में खेला गया था तब 75 आदमी मंच पर आये थे।
  • अगरा बाजार’ नाटक हबीब तनवीर की मौलिक नाटक नहीं है।
  • यह नाटक नजीर अकबाराबादी के नज्मों पर आधारित है।
  • हबीब तनवीर ने इस नाटक का दो बार संशोधन (1970 और 1989) भी किया है।
  • नाटक में हास्य रस का प्रयोग अधिक है।
  • मुख्य पात्र- 
  • नाटक में कोई भी पात्र मुख्य भूमिका में नही है। दो अंको के इस नाटक में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।
  • पहला अंक के पात्र- 
  • फ़कीर, लड्डूवाला, तरबूजवाला, बर्फवाला, ककड़ीवाला, पानवाला, मदारीवाला, बर्तनवाला, अजनबी, शायर, हमजोली आदि।
  • दूसरे अंक का पात्र- 
  • पतंगवाला, अंधा भिखारी, हमीद (एक बालक), बेनी प्रसाद, होली गाने वाले, पहला सिपाही, दूसरा सिपाही आदि।

Important Pointsहबीब तनवीर-

  • जन्म- 1923 - 2009 ई.
  • हबीब तनवीर को ‘चरणदास चोर’ नाटक के लिए 1982 में ‘एडिनबर्ग इंटरनेश्नल ड्रामा फेस्टिवल’ में पुरस्कृत किया गया था।
  • नाटक- 
  • आगरा बाजार (1954)
  • शतरंज के मोहरे (1954)
  • लाला शोहरत राय (1954)
  • मिट्टी की गाड़ी (1958)
  • गाँव का नाम ससुराल हमार नाम दामाद (1973)
  • हिरमा की अमर कहानी उत्तर रामचरित (1977)
  • पोंगा पण्डित (1990)
  • जिन लाहौर नहीं देख्या (1990)
  • कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना (1993)
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निम्न में से कौन-सा खंड 'मेरी तिब्बत यात्रा' से संबद्ध नहीं है?

  1. ((a))

    नेपाल की ओर

  2. ((b))

    हिमालय की ओर

  3. ((c))

    ल्हासा से उत्तर की ओर

  4. ((d))

    चाङ् की ओर

Show Answer
Answer: ((b))

हिमालय की ओर

'मेरी तिब्बत यात्रा' से संबद्ध नहीं है- हिमालय की ओर

  • राहुल सांकृत्यायन द्वारा रचित प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत 'मेरी तिब्बत यात्रा' (1937) पाँच खंडों में विभाजित है। इस हिमालय की ओर पुस्तक का हिस्सा नहीं है।

Key Pointsमेरी तिब्बत यात्रा- 

  • रचनाकार- राहुल सांकृत्यायन
  • विधा- यात्रावृत्त
  • प्रकाशन वर्ष- 1937 ई.
  • प्रकाशन संस्था- छात्र हितकारी पुस्तक माला, दारागंज प्रयाग (उ. प्र.) ‘डायरी’ शैली में रचित यात्रा वृत्तांत।
  • पृष्ठ संख्या- 167
  • खंड- 5
  • खंड 1- ल्हासा से उत्तर की ओर
  • खंड 2 - चाड की ओर
  • खंड 3-  क्या की ओर
  • खंड 4 - जेनम् की ओर
  • खंड 5 - नेपाल की ओर
  • महत्वपूर्ण तथ्य- 
  • राहुल जी घुमक्कडी प्रवृति के थे।
  • राहुलजी का कहना था कि- ‘उन्होंने ज्ञान को सफर में नाव की तरह लिया है। बोझ की तरह नहीं।’
  • उनकी घुमक्कडी प्रवृत्ति ने कहा-  “घुमक्कडों! संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।”
  • मेरी तिब्बत यात्रा के प्रमुख पात्र- 
  • लक्ष्मी रत्न - लहासा का फोटोग्राफरलोग इसे नाती-ला के नाम से जानते थे।
  • इन-ची-मिन-ची- राहुल जी का साथी, इसे आत्मरक्षा के लिए साथ लिया था यह बंदूक चलाना जानता था
  • सो-नम्-ग्याल-म्छन- (पुण्य ध्वज), खच्चरों का मालिक श्वाम, पूर्वी तिब्बत का निवासी।
  • गेन्-दुन्-छो-फेल- (संघ धर्मवर्धन), यह चित्रकार है। इतिहास और न्यायशास्त्र का जानकार भी, 7 गोलियों वली पिस्तौल और कारतूस की माला धारण किया हुआ था।
  • शाक्य श्री भद्र- कश्मीर के पंडित, विक्रमशिला के अंतिम नायक
  • ट-शी-लामा- भोट के प्रधान धर्माचार्य
  • पंडित गयाधर- वैशाली के कायस्त पंडित
  • सुमित प्रज्ञ- राहुल संकृत्यायन के स्वर्गीय मित्र
  • जोगमान- पाटन (नेपाल) का साहू जिसने राहुल जी को रहने के लिए अपनी दूकान का उपरी भाग (कोठा) दिया था।
  • दलाईमाना- 1933 ई. में फेम्बो पधारे थे।
  • छू-सिन्-शर- खच्चरों का मालिक था।
  • कोन्-चाग- मंगोल भिक्षुक था।
  • प्रशांत चंद्र चौधरी- (I. C. S) राहुल जी के लिए फोटोग्राफी के लिए कैमरा भेजा था।
  • टु-नी-छेन-पो- भोट भाषा के विद्वान थे
  • पुण्य वज्र- चीनी लामा
  • मेरी तिब्बत यात्रा में चित्रित स्थान- 
  • ल्हासा-
  • यहाँ राहल जी 2 माह 11 दिन रहे थे।
  • यहाँ विनयपिटक का अनुवाद राहुल जी द्वारा हुआ।
  • तबचीका-  
  • ल्हासा के बाद यह पहला पड़ाव स्थान था।
  • जोतूका (गो-ला)- 
  • यहाँ की पहाड़ी पर चढ़कर पीछे मुड़कर देखने पर ल्हासा नगरी दिखाई देती है। इसे हित का देश कहा जाता था।
  • चू-ला खंड् गो (बिहार) -
  • यहाँ बुद्ध की विशाल मूर्ति थी। जिसके सामने रोड् सुतोन की प्रतिमा थी।
  • ग्य-ल्ह खंड्-  भारतीय देवालय।
  • रेडिड् विहार-
  • इसे दीपशंकर के शिष्य डव्रोम-स-तोन-पा (1003 – 1065 ई.) में बनवाया था।

Important Pointsराहुल सांकृत्यायन-

  • इन्हें हिन्दी का सबसे बड़ा यायावर माना जाता है।
  • यात्रावृतांत-
  • मेरी लद्दाख यात्रा(1939 ई.)
  • किन्नर देश में(1948 ई.)
  • घुमक्कड़ शास्त्र(1948 ई.)
  • यात्रा के कुछ पन्ने(1952 ई.)
  • चीन में कम्यून(1959 ई.) आदि।
16

"घोर अंधारे चन्दमणि जिमि उज्जोअ करेई।

परम महासुह ऐखु कण, दुरिअ अशेष हरेई।"

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि द्वारा रचित हैं?

  1. ((a))

    सरहपाद

  2. ((b))

    शालिभद्र सूरि

  3. ((c))

    आचार्य देवसेन

  4. ((d))

    लुइपा

Show Answer
Answer: ((a))

सरहपाद

उपर्युक्त पंक्तियाँ सरहपाद (सरहपा) द्वारा रचित हैं।

Key Pointsव्याख्या-

दिए गए दोहे हैं— "घोर अंधारे चन्दमणि जिमि उज्जोअ करेई। परम महासुह ऐखु कण, दुरिअ अशेष हरेई।"

  • यह अपभ्रंश भाषा में रचित दोहा है, जो सिद्ध साहित्य (वज्रयान बौद्ध परंपरा) से संबंधित है।
  • सरहपाद को हिंदी साहित्य के इतिहास में सिद्धों में सर्वोपरि माना जाता है। वे अपभ्रंश में दोहों के प्रमुख रचयिता हैं, और ��ह पंक्ति उनके दोहाकोश या संबंधित चर्यागीतों/दोहों में मिलती है।
  • अर्थ संक्षेप में: घोर अंधकार में चंद्रमा की तरह यह (ज्ञान/सुख) उजाला करता है। परम महासुख यह एक कण है, जो सारी दूरियों/दुखों को हर लेता है। (यहाँ 'महासुह' = महासुख, आध्यात्मिक परम आनंद का प्रतीक है।)

Important Pointsसरहपा-

  • जन्म-9 वीं शती
  • सरहपा हिन्दी के पहले कवि माने जाते हैं।
  • इन्होने मैथिलि, उड़ीया ,बंगाली में भी रचनाएँ की हैं।
  • इनको बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है।
  • उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म‘ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ
  • दोहाकोष
  • चर्यापद \चर्यागीति

देवसेन-

  • देवसेन ने सन् 933 ई० में श्रावकाचार की रचना की।
  • श्रावकाचार में 250 दोहों में श्रावक-धर्म का प्रतिपादन किया है।
  • देवसेन के अन्य ग्रन्थ हैं-
  • 'नयचक्र', 'दर्शन सार', 'भाव संग्रह', 'आराधनासार' और 'तत्त्वसार' तथा 'सावय धम्म दोहा ' ।
  • देवसेन अपने ग्रन्थ में जैन धर्म के अनेक संघों की उत्पत्ति लिखी है जिसे इन्होंने 'जैनाभास' का नाम दिया।

लुइपा-

  • इनका समय 773 ई. है।
  • 84 सिद्धों में इनका स्थान सर्वोपरि माना जाता है।
  • यह  सिद्धो में से सबसे रहस्यवादी थे।
  • यह जाति के कायस्थ थे।
  • उड़ीसा के राजा तथा उनके मंत्री इनके प्रभाव से इनके शिष्य बन गए।

शालिभद्र सूरि-

  • रचना- भरतेश्वर बाहुबली रास
  • प्रकाशन वर्ष- 1184 ई.
  • विषय-
  • 205 छंदों में रचित खंडकाव्य है।
  • इसका सम्पादन मुनि जिनविजय ने किया है।
  • यह हिंदी का प्रथम रास ग्रन्थ है।
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सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्ति)सूची-II (निबंध)
A. ईश्वर महारानी को चिरंजीवी रखे।I. भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है
B. तुम्हें गैरों से कब फुरसत, हम अपने गम से कब खालीII. दिल्ली दरबार दर्पण
C. देते है घुड़की यह अर्थ-ओज भरीIII. शिवशंभु के चिट्ठे
D. जो कुछ खुदा दिखाये, सो लाचार देखनाIV. कविता क्या है

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-II, B-III, C-IV, D-I

  2. ((b))

    A-I, B-III, C-IV, D-II

  3. ((c))

    A-II, B-IV, C-I, D-III

  4. ((d))

    A-I, B-III, C-II, D-IV

Show Answer
Answer: ((a))

A-II, B-III, C-IV, D-I

सही उत्तर है - A-II, B-III, C-IV, D-I

Key Pointsविवरण-

  • ईश्वर महारानी को चिरंजीवी रखे: यह पंक्ति भारतेन्दु हरिश्चंद्र के निबंध 'दिल्ली दरबार दर्पण' से ली गई है, जिसमें तत्कालीन ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के प्रति सम्मान और शासन व्यवस्था पर चर्चा है।
  • तुम्हें गैरों से कब फुरसत...: यह प्रसिद्ध शेर बालमुकुंद गुप्त के निबंध संग्रह 'शिवशंभु के चिट्ठे' में प्रयुक्त हुआ है।
  • देते है घुड़की यह अर्थ-ओज भरी: यह पंक्ति आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रसिद्ध निबंध 'कविता क्या है' से ली गई है, जिसमें वे काव्य के अर्थ और सौंदर्य की व्याख्या करते हैं।
  • जो कुछ खुदा दिखाये, सो लाचार देखना: यह पंक्ति भारतेन्दु हरिश्चंद्र के निबंध 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' में भारतीयों की तत्कालीन स्थिति और आलस्य पर कटाक्ष करने के लिए प्रयोग की गई है।

 

Important Pointsभारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है। -

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1884 ई.
  • विषय -
  • ​लेखक ने इस पाठ में हिंदू-मुसलमान दोनों की कमियों का वर्णन किया है।
  • यह निबंध, बलिया के दादरी मेले में साल 1884 में दिए गए उनके भाषण का अंश है।

दिल्ली दरबार दर्पण-

  • रचनाकार- भारतेंदु हरिश्चन्द्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1877 ई.
  • मुख्य बिन्दु -
  • दिल्ली दरबार भारत में औपनिवेशिक काल में राजसी दरबार होता था।
  • यह इंग्लैण्ड के महाराजा या महारानी के राजतिलक की शोभा में सजाया जाता था।
  • ब्रिटिश साम्राज्य के चरम काल में, सन 1877 से 1971 के बीच तीन दिल्ली दरबार लगे।
  • सन् 1877 का दरबार, जिसे प्रोक्लेमेशन दरवार या घोषणा दरबार कहा गया है, 1 जनवरी 1877 को महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित और राजतिलक करने हेतु लगा था।
  • यद्यपि हरिश्चंद्र ब्रिटिश शासन के अथक आलोचक थे और इसके फलस्वरूप ही उन्हें कभी भी आधिकारिक संरक्षण नहीं मिला, फिर भी उनका अभिजात वर्ग और राजघराने के प्रति सहज सम्मान था।
  • 1877 का दरबार, मुख्यतः एक आधिकारिक घटना मात्र थी, जिसमें 1903 एवं 1911 जैसी रौनक नहीं थी।
  • यह निबन्ध भारतेन्दु जी के भ्रम का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  • भारतेन्द्र जी ने यह निबन्ध क्यों लिखा 1877 के दिल्ली दरवार का वर्णन, जिस का वर्णन, जिस पर क्वीन विक्टोरिया को भारत की की राजराजेश्वरी घोषित किया गया था, भारतेन्दु ने इसलिए किया क्योंकि उसी समय भारतेन्दु ने बनारस के 'प्रिंस ऑफ वेल्स' के मार्गदर्शक के रूप में काम किया था।

��विता क्या है? -

  • रचनाकार - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1909 ई.
  • विषय -
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ - चिंतामणि

शिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार-बालमुकुन्द गुप्त
  • विधा-निबंध
  • प्रकाशन वर्ष-1903-1905ई. के मध्य
  • यह चिट्ठे भारत मित्र पत्र में प्रकाशित हुए थे।
  • विषय-
  • यह लार्ड कर्जन को संबोधितकरके लिखा गया है।
  • इसमें 'भारतीयों' की राजनीतिक विवशता को दिखाया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था की आलोचना की गई है।
  • यह निबन्ध प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया है।
  • इसकी शुरुआत स्वप्न के जरिए होती है।

Additional Informationभारतेंदु-

  • जन्म-1850-1885 ई.
  • निबंध-
  • मणिकर्णिका
  • कश्मीर कुसुम
  • तदीय सर्वस्व
  • संगीत सार
  • भारत-वर्षोंन्नति कैसे हो सकती है? आदि।

बालमुकुन्द गुप्त-

  • जन्म-1865-1907 ई.
  • ये हिन्दी के निबंधकार और पत्रकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ हैं-
  • हरिदास
  • खिलौना
  • खेलतमाशा
  • स्फुट कविता
  • सन्निपात चिकित्सा आदि।

रामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • इनके निबंधों का संग्रह चार भागों में संकलित है-
  • चिंतामणि भाग-1 1939 ई. में रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ही संपादित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-2 1945 ई. में विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-3 नामवर सिंह के संपादन में 1983 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-4 2002 ई. में कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
18

"खो के आत्मगौरव स्वतंत्रता भी, जीते हैं।

मृत्यु सुखदायक है वीरो ! इस जीने से।"-'वियोगी हरि'

इन पंक्तियों में आर्थी व्यंजना का कौन सा प्रकार/रूप है?

  1. ((a))

    वक्तृवैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

  2. ((b))

    बौद्धव्य (श्रोतृ) वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

  3. ((c))

    वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

  4. ((d))

    अन्यसन्निधि वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

Show Answer
Answer: ((c))

वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

सही उत्तर है- वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना

Key Points

  • वियोगी हरि की पंक्तियों— "खो के आत्मगौरव स्वतंत्रता भी, जीते हैं। मृत्यु सुखदायक है वीरो! इस जीने से।" में वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना है।

Important Points

विवरण-

  • वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना: जहाँ 'वाच्य' (कहे गए अर्थ) के वैशिष्ट्य के कारण कोई विशेष व्यंग्यार्थ निकलता है, वहाँ वाच्य वैशिष्ट्य आर्थी व्यंजना होती है।
  • संदर्भ: इन पंक्तियों में वक्ता सीधे तौर पर कह रहा है कि आत्मगौरव और स्वतंत्रता खोकर जीना मृत्यु से भी बदतर है। यहाँ वाच्य अर्थ (जीने की तुलना में मृत्यु का सुखदायक होना) स्वयं में इतना प्रभावशाली है कि वह 'परतंत्र जीवन के प्रति धिक्कार' के व्यंग्यार्थ को पुष्ट करता है।
  • व्यंग्यार्थ: यहाँ वीरों को प्रेरित करने के लिए उनके वर्तमान अपमानजनक जीवन पर चोट की गई है, जो सीधे शब्दों (वाच्य) के माध्यम से एक गहरा अर्थ प्रकट कर रही है।

Additional Information

अन्य विकल्प और संक्षिप्त अर्थ:

  • वक्तृवैशिष्ट्य: जहाँ वक्ता की विशेषता (जैसे उसका स्वभाव, पद आदि) के कारण व्यंग्यार्थ निकले।
  • बोद्धव्य (श्रोतृ) वैशिष्ट्य: जहाँ सुनने वाले (श्रोता) की समझ या स्थिति के कारण अर्थ बदल जाए।
  • अन्यसन्निधि वैशिष्ट्य: जहाँ वक्ता और श्रोता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति के कारण अर्थ में चमत्कार आए।
19

'भारत भारती' की निम्न पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए।

A. यद्यपि सदा परमार्थ ही में स्वार्थ थे हम मानते, पर कर्म से फल-कामना करना न हम थे जानते।

B. जिसकी प्रभा के सामने, रवि-तेज भी फीका पड़ा, अध्यात्म-विद्या का यहाँ आलोक फैला था बड़ा।

C. हम कौन थे, क्या हो गये हैं और क्या होंगे अभी, आओ, विचारे आज मिलकर ये समस्याएँ सभी।

D. सर्वस्व करके दान जो चालीस दिन भूखे रहे, अपने अतिथि सत्कार में फिर भी न जो रूखे रहे।

E. वर्णन उन्होंने जिस विषय का है किया, पूरा किया, मानों प्रकृति ने ही स्वयं साहित्य उनका रच दिया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    B, D, C, A, E

  2. ((b))

    C, E, D, A, B

  3. ((c))

    C, D, E, B, A

  4. ((d))

    B, C, E, D, A

Show Answer
Answer: ((b))

C, E, D, A, B

सही उत्तर है- C, E, D, A, B

Key Pointsभारत भारती-

  • रचनाकार- मैथिलीशरण गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष- 1912 ई.
  • इसकी रचना 'मुसद्दसे-हाली' तथा ब्रजमोहन दत्तात्रेय कैफी कृत 'भारत-दर्पण' की प्रेरणा स्वरूप मानी जाती है।
  • इसकी कथा वस्तु तीन भागों में विभक्त हैं-
  • अतीत खंड
  • वर्तमान खंड
  • भविष्यत खंड

Important Pointsमैथिलीशरण गुप्त-

  • जन्म-1886-1964 ई.
  • ब्रजभाषा उपनाम-रसिकेन्द्र
  • बांग्ला भाषा उपनाम-मधुप
  • महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी।
  • रचनाएँ-
  • रंग में भंग(1909 ई.)
  • जयद्रथ वध(1910 ई.)
  • भारत-भारती(1912 ई.)
  • किसान(1917 ई.)
  • विकट भट(1929 ई.)
  • झंकार(1929 ई.)
  • द्वापर(1936 ई.)आदि।
20

"कबीरदास की वाणी को समझने के लिए यह निहायत जरूरी है कि हम इस बात की जानकारी प्राप्त कर लें कि उन दिनों इस जाति के बचे-खुचे पुराने संस्कार क्या थे।"

कबीर के संदर्भ में उपरोक्त कथन किस आलोचक द्वारा कहा गया है?

  1. ((a))

    नामवर सिंह

  2. ((b))

    श्यामसुंदर दास

  3. ((c))

    रामचन्द्र शुक्ल

  4. ((d))

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

Show Answer
Answer: ((d))

हजारीप्रसाद द्विवेदी

सही उत्तर है- हजारीप्रसाद द्विवेदी

Key Pointsउपर्युक्त कथन "कबीरदास की वाणी को समझने के लिए यह निहायत जरूरी है कि हम इस बात की जानकारी प्राप्त कर लें कि उन दिनों इस जाति के बच्चे-खुचे पुराने संस्कार क्या थे" (या समान रूप में "बचे-खुचे पुराने संस्कार") हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "कबीर" (या कबीर पर उनके अध्ययन/ग्रंथ) में कहा गया है।

  • द्विवेदी जी ने कबीर के जुलाहा (जुलाहा/बुनकर) जाति के संदर्भ में चर्चा की है कि कबीर के समय में यह जाति हाल ही में (एक-दो पीढ़ी पहले) इस्लाम ग्रहण कर चुकी थी, इसलिए उनकी वाणी में हिंदू और मुस्लिम दोनों के पुराने संस्कारों/परंपराओं के अवशेष मिलते हैं।
  • यह वाक्य उनकी पुस्तक में जुलाहा जाति के ऐतिहासिक/सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर चर्चा के दौरान आता है, जहाँ वे कबीर की वाणी को गहराई से समझने के लिए इस जानकारी को अनिवार्य बताते हैं।

Important Points

21

'यह धरती एक चारागाह है, जिसकी घास जितनी ही रौंदों, उतना ही पनपती है। हमें यकीन है कि हम आप सब मिलकर इस हरियाली को खत्म नहीं होने देंगे।'

उपर्युक्त पंक्तियाँ 'बकरी' नाटक के किस पात्र द्वारा कही गई हैं?

  1. ((a))

    सत्यवीर

  2. ((b))

    सिपाही

  3. ((c))

    दुर्जनसिंह

  4. ((d))

    कर्मवीर

Show Answer
Answer: ((d))

कर्मवीर

सही उत्तर है- कर्मवी

नाटक और पात्र का संदर्भ-

  • नाटक: 'बकरी' (1974) स्वातंत्र्योत्तर भारत की भ्रष्ट राजनीति और आम जनता के शोषण पर एक तीखा व्यंग्य है।
  • पात्र: नाटक में दुर्जनसिंह, कर्मवीर और सत्यवीर तीन ऐसे भ्रष्ट नेताओं के रूप में दिखाए गए हैं जो गांधीवादी मूल्यों का ढोंग करके भोली-भाली जनता को लूटते हैं।
  • कथन का अर्थ: 'कर्मवीर' का यह कथन उसकी कुटिल राजनीति और जनता (घास) को निरंतर शोषण (रौंदने) की वस्तु समझने की मानसिकता को दर्शाता है। वह जनता के श्रम और संसाधनों को एक 'चारागाह' की तरह देखता है जिसे वे अपने स्वार्थ के लिए उपयोग करते रहते हैं।

Key Pointsबकरी नाटक- 

  • रचनाकार- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-  1974 ईo
  • अंक- 2
  • कुल दृश्य- 6
  • प्रथम अंक- 3
  • द्वितीय अंक- 3
  • शैली-नौटंकी
  • विषय वस्तु-
  • इस नाटक की रचना उत्तर प्रदेश की नौटंकी शैली में हुई है।
  • इसमें दोहा, चौबोला, बहरेतबील, कहरवा आदि छंदों का प्रयोग किया गया है।
  • इस नाटक में जनवादी चेतना, राजनितिक व्यंग्य, आम आदमी की व्यथा, भ्रष्टाचार और विसंगति का चित्रण है। ‘
  • बकरी’ आम आदमी का प्रतीक है।
  • गांधी जी के नाम पर सत्ता तो हथिया लेते हैं, लेकिन उनके सिद्धांतों को  किस तरह मटियामेट कर देते है उसका वर्णन है।
  • मुख्य पात्र- 
  • नट, नटी और भिश्ती
  • दुर्जनसिंह, कर्मसिंह सत्यवीर- ये तीनों धर्म, शोषण, नेतागिरी का प्रतिनिधित्व करते है।
  • सिपाही
  • विपती- जिसका बकरी होता है।
  • अन्य पात्र - नवयुवक, काका, काकी, चाचा, राम. एक ग्रामीण, दूसरा ग्रामीण।

Important Pointsसर्वेश्वरदयाल सक्सेना-

  • जन्म- 1927-  1983 ई.
  • सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ‘नई कविता’ के चर्चित कवि थे।
  • नाटक-
  • बकरी (1974)
  • लड़ाई (1979)
  • अब गरीबी हटाओ (1981)
  • उपन्यास-
  • पागल कुत्तों का मशीहा (1977)
  • सोया हुआ जल (1977)
  • यात्रा संस्मरण-
  • कुछ रंग कुछ गंध (1971)

Additional Informationअन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण-

  • सिपाही: यह भ्रष्ट नेताओं की कठपुतली बना रहता है और गाँव वालों को लूटने में उनका साथ देता है।
  • दुर्जनसिंह और कर्मवीर: ये सत्यवीर के साथी हैं जो मिलकर 'बकरी संस्थान' और 'बकरी सेवा संघ' जैसे ढोंगी संगठनों के माध्यम से लोगों को छलते हैं।
22

"देखिए, अच्छी किताबें अगर नहीं निकल रही हैं तो आप लोग एक काम कीजिए, पुस्तकालय बन्द कर दीजिए।"

यह पंक्ति किस रचना से ली गई है?

  1. ((a))

    ठकुरी बाबा

  2. ((b))

    प्रेमचंद घर में

  3. ((c))

    आवारा मसीहा

  4. ((d))

    एक लेखक की डायरी

Show Answer
Answer: ((c))

आवारा मसीहा

सही उत्तर है- आवारा मसीहा 

Key Pointsएक साहित्यिक की डायरी -

  • विधा - निबन्ध
  • रचनाकाल - 2000
  • रचनाकार - गजानन माधव मुक्तिबोध
  • विषय -
  • ​इसमें साहित्य सम्बन्धी तथ्यों का डायरी विधा में एक काल्पनिक मित्र केशव के साथ हुए संवाद के रूप में प्रकाशित।

ठकुरी बाबा -

  • रचनाकार - महादेवी वर्मा
  • प्रकाशन वर्ष - 1943 ई. ( स्मृति की रेखाएं में संकलित)।
  • विधा - रेखाचित्र
  • मुख्य -
  • अपने रेखा चित्र में महादेवी वर्मा ने अपने संपर्क में आने वाले शोषित व्यक्तियों दीन - हीन नारियों, साहित्यकारों, जीव - जंतुओं आदि का संवेदनात्मक चित्रण किया है।
  • ठकुरी बाबा इनका संस्मरणात्मक रेखाचित्र है।

प्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी
  • विधा- जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष- 1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

आवारा मसीहा-

  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • विधा-जीवनी
  • रचनाकार-विष्णु प्रभाकर
  • आवारा मसीहा प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।

Important Pointsविष्णु प्रभाकर-

  • जन्म- 1912-2009 ई.
  • विष्णु प्रभाकर हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक थे इन्होने अनेकों लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक तथा यात्रा संस्मरण लिखे।
  • उनकी कृतियों में देशप्रेम, राष्ट्रवाद, तथा सामाजिक विकास मुख्य भाव हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-(उपन्यास)
  • ​ढलती रात
  • स्वप्नमयी
  • अर्धनारीश्वर
  • धरती अब भी घूम रही है
  • क्षमादान, दो मित्र
  • पाप का घड़ा
  • होरी आदि।

महादेवी वर्मा-

  • जन्म -1907-1987 ई.
  • अन्य नाम - आधुनिक युग की मीरा
  • छायावादी मुख्य कवयित्री रही है।
  • रचनाएँ-
  • काव्य संग्रह - 
  • ​नीहार(1930 ई.), रश्मि(1932 ई.), नीरजा(1935 ई.), सांध्यगीत(1936 ई.), यामा(1940 ई.) आदि।
  • रेखाचित्र - 
  • ​स्मृति की रेखाएँ(1943 ई.), मेरा परिवार(1972 ई.) आदि।
  • निबन्ध संग्रह - 
  • ​शृंखला की कड़ियाँ(1942 ई.), विवेचनात्मक गद्य(1942 ई.), साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध(1962 ई.), संकल्पिता(1969 ई.) आदि।
  • ललित निबन्धों का संग्रह - क्षणदा(1956 ई.) आदि।
  • कहानी संग्रह - गिल्लू, नीलकंठ आदि।

गजानन माधव मुक्तिबोध-

  • प्रसिद्धि -  हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ -​
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है – (कविता संग्रह) (1964)
  • नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध (निबंध संग्रह) (1964)
  • एक साहित्यिक की डायरी (निबंध संग्रह) (1964)
  • काठ का सपना (कहानी संग्रह) (1967)
  • विपात्र (उपन्यास) (1970)
  • नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र (1971)
  • सतह से उठता आदमी (कहानी संग्रह) (1971)
  • कामायनी: एक पुनर्विचार (1973).
  • भूरी-भूरी खाक धूल – (कविता संग्रह) (1980)
23

पात्र और रचना का सुमेलन करें।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (रचना)
A. सरजूI. आवारा मसीहा
B. जंगबहादूरII. माटी की मूरतें
C. मुनेस्सरIII. मुर्दहिया
D. उपेन्द्रनाथIV. स्मृति की रेखाएँ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  2. ((b))

    A-II, B-III, C-I, D-IV

  3. ((c))

    A-IV, B-I, C-III, D-II

  4. ((d))

    A-IV, B-III, C-I, D-II

Show Answer
Answer: ((a))

A-II, B-IV, C-III, D-I

सही उत्तर है- A-II, B-IV, C-III, D-I

Key Pointsविवरण-

  • सरजू: यह पात्र रामवृक्ष बेनीपुरी के प्रसिद्ध रेखाचित्र संग्रह 'माटी की मूरतें' के एक अध्याय 'सरजू भैया' से है。
  • जंगबहादूर: महादेवी वर्मा के रेखाचित्र संग्रह 'स्मृति की रेखाएँ' में 'जंगबहादुर' एक महत्वपूर्ण पात्र/अध्याय है।
  • मुनेस्सर: यह पात्र डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा 'मुर्दहिया' का हिस्सा है, जो दलित साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है。
  • उपेन्द्रनाथ: यह पात्र विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित शरतचंद्र की जीवनी 'आवारा मसीहा' से संबंधित है।

Important Pointsमाटी की मूरतें-

  • रचनाकार- रामवृक्ष बेनीपुरी
  • प्रकाशन वर्ष-1946ई.
  • रेखाचित्र-संकलन है, जिसमें बारह रेखाचित्रों का संकलन किया गया है।
  • बारह रेखाचित्र हैं-
  • रजिया
  • बलदेव सिंह
  • सरजू भैया
  • मंगर
  • रूपा की आजी
  • देव
  • बालगोबिन भगत
  • भौजी
  • परमेसर
  • बैजू मामा
  • सुभान खाँ
  • बुधिया

स्मृति की रेखाएँ-

  • महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक रेखाचित्रों का दूसरा संग्रह है - स्मृति की रेखाएँ(1943 ई.)
  • इसमें कुल सात रेखाचित्र संकलित हैं-
  • भक्तिन
  • चीनी
  • जंगिया - धनिया
  • मुन्नू की माँ
  • ठकुरी बाबा
  • बिबिया
  • बरेठिन गुंगिया
  • 1943 में प्रकाशित, द्विवेदी - पदक से सम्मानित 'स्मृति की रेखाएँ' के सात रेखाचित्रों में पाँच दलित वर्ग को समर्पित हैं।

मुर्दहिया-

  • रचनाकार - डॉ तुलसीराम
  • रचनाकाल - 2010 ई.
  • विधा - आत्मकथा
  • अन्य - मुर्दहिया आत्मकथा के दो भाग है
  • मुर्दहिया - 1910 ई.
  • मणिकर्णिका - 2014 ई.
  • मुर्दहिया 7 भागों में विभाजित है -
  • भुतही परिवारि पृष्ठभूमि
  • मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन
  • अकाल में अंधविश्वास
  • मुर्दहिया के गीद्ध तथा लोकजीवन
  • भूतनीया नागिन
  • चले बुद्ध की राह
  • आजमगढ़ में फाकाकशी
  • यह हिंदी की पहली आत्मकथा जिसमें केवल दलित ही नहीं अपितु गांव का संपूर्ण लोकजीवन केंद्र में है।
  • मुर्दहिया दलित समाज क��� त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आख्यान है।

आवारा मसीहा-

  • रचनाकार-विष्णु प्रभाकर
  • विधा: जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1974ई.
  • पात्र-
  • ​शरतचन्द्र
  • केदारनाथ(नाना)
  • मोतीलाल(पिता)
  • भुवनमोहिनी(माता)
  • सुरेन्द्रनाथ(मामा)आदि।
  • विषय-
  • प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।
  • यह जीवन चरित्र न केवल बहुत विस्तार से उन पर प्रकाश डालता है अपितु उनके जीवन के कई अज्ञात पहलुओं को भी उजागर करता है।
  • तीन खंडों में विभक्त-
  • प्रथम पर्व- 'दिशाहारा'
  • द्वितीय पर्व- 'दिशा की खोज'
  • तृतीय पर्व- 'दिशांत'

Additional Informationरामवृक्ष बेनीपुरी-

  • जन्म-1899-1968ई.
  • अन्य रेखाचित्र-
  • गेंहू और गुलाब(1950ई.)
  • लाल तारा(1938ई.)
  • मिल के पत्थर आदि।

महादेवी वर्मा-

  • जन्म -1907-1987 ई.
  • अन्य नाम - आधुनिक युग की मीरा
  • छायावादी मुख्य कवयित्री रही है।
  • रचनाएँ-
  • काव्य संग्रह - नीहार(1930 ई.), रश्मि(1932 ई.), नीरजा(1935 ई.), सांध्यगीत(1936 ई.), यामा(1940 ई.) आदि।
  • रेखाचित्र - स्मृति की रेखाएँ(1943 ई.), मेरा परिवार(1972 ई.) आदि।
  • निबन्ध संग्रह - शृंखला की कड़ियाँ(1942 ई.), विवेचनात्मक गद्य(1942 ई.), साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध(1962 ई.), संकल्पिता(1969 ई.) आदि।
  • ललित निबन्धों का संग्रह - क्षणदा(1956 ई.) आदि।
  • कहानी संग्रह - गिल्लू, नीलकंठ आदि।

तुलसीराम-

  • आत्मकथा-
  • मणिकर्णिका(दूसरा भाग-2013 ई.)

विष्णु प्रभाकर-

  • जन्म- 1912-2009 ई.
  • विष्णु प्रभाकर हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक थे इन्होने अनेकों लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक तथा यात्रा संस्मरण लिखे।
  • उनकी कृतियों में देशप्रेम, राष्ट्रवाद, तथा सामाजिक विकास मुख्य भाव हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-(उपन्यास)
  • ​ढलती रात
  • स्वप्नमयी
  • अर्धनारीश्वर
  • धरती अब भी घूम रही है
  • क्षमादान, दो मित्र
  • पाप का घड़ा
  • होरी आदि।
24

"जवानी संचय होती है

बुढ़ापा दान होता है

जवानी सुंदर होती है

बुढ़ापा महान होता है।"

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस निबंध से ली गई है ?

  1. ((a))

    भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है

  2. ((b))

    उठ जाग मुसाफिर

  3. ((c))

    शिवशंभु के चिट्ठे

  4. ((d))

    संस्कृति और सौन्दर्य

Show Answer
Answer: ((b))

उठ जाग मुसाफिर

जवानी संचय होती है

बुढ़ापा दान होता है

जवानी सुंदर होती है।

बुढ़ापा महान होता है।'

प्रस्तुत पंक्ति उठ जाग मुसाफिर निबंध की है।

Key Pointsउठ जाग मुसाफिर -

  • रचनाकार - विवेकी राय
  • विधा - निबंध
  • प्रमुख पंक्ति -
  • "बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफा करें?

लेकिन न आती मौत तो बूढ़े भी क्या करें?"

  • लेकिन, स्थिति ऐसी नहीं थी। वहाँ न तो सेवा करनेवालों का अभाव था और न ही मौत का इंतजार था। मात्र वे बीमार थे। कभी बीमार न पड़ने वाला आदमी बीमार था। यही कारण था कि 'आश्रम एक सुहावन पावन' जैसा वह आवास उदास था।
  • "माता बिन आदर कौन करे?

बरखा बिन सागर कौन भरे?

राम बिना दुःख कौन हरे?"

Important Points विवेकी राय -

  • हिंदी और भोजपुरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
  • वे ग्रामीण भारत के प्रतिनिधि रचनाकार थे।
  • वे ललित निबंध, कथा साहित्य और कविता कर्म में समभ्यस्त थे।
  • आज भी विवेकी राय को ‘कविजी’ उपनाम से जाना जाता है।
  • निबंध-संग्रह -
  • किसानों का देश (1956 ई.)
  • गाँवों की दुनियाँ (1957 ई.)
  • त्रिधारा (1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर (1962 ई.)
  • गंवई गंध गुलाब (1980 ई.)
  • नया गाँवनाम (1984 ई.
  • यह आम रास्ता नहीं है (1988 ई.)
  • आस्था और चिंतन (1991 ई.)
  • जगत् तपोवन सो कियो (1995 ई.)
  • वन तुलसी की गंध (2002 ई.)
  • जीवन अज्ञात का गणित है (2004 ई.)
  • उठ जाग मुसाफ़िर (2012 ई.)
  • रिपोर्ताज -
  • जुलूस रुका है (1977)
  • डायरी -
  • मनबोध मास्टर की डायरी (2006)

Additional Informationभारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है। -

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1884 ई.
  • विषय -
  • ​लेखक ने इस पाठ में हिंदू-मुसलमान दोनों की कमियों का वर्णन किया है।
  • यह निबंध, बलिया के दादरी मेले में साल 1884 में दिए गए उनके भाषण का अंश है।

शिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार-बालमुकुन्द गुप्त
  • विधा-निबंध
  • प्रकाशन वर्ष-1903-1905ई. के मध्य
  • यह चिट्ठे भारत मित्र पत्र में प्रकाशित हुए थे।
  • विषय-
  • यह लार्ड कर्जन को संबोधितकरके लिखा गया है।
  • इसमें 'भारतीयों' की राजनीतिक विवशता को दिखाया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था की आलोचना की गई है।
  • यह निबन्ध प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया है।
  • इसकी शुरुआत स्वप्न के जरिए होती है।

संस्कृति और सौंदर्य निबंध -

  • लेखक - नामवर सिंह
  • प्रकाशन वर्ष  -1982 ई.
  • मुख्य - यह निबंध 'दूसरी परंपरा की खोज'(1982 ई.)संग्रह में संकलित है।
  • इसमें कुल 8 निबंध है।
25

'किसान लाठी से खेत जोतता है' - इस वाक्य में वाक्य की किस विशेषता का अभाव है?

  1. ((a))

    आकांक्षा

  2. ((b))

    योग्यता

  3. ((c))

    क्रम

  4. ((d))

    संक्षिप्तता

Show Answer
Answer: ((b))

योग्यता

सही उत्तर है- योग्यता

Key Points

दिए गए वाक्य: "किसान लाठी से खेत जोतता है।"

  • यहाँ "लाठी से" (करण कारक) प्रयोग किया गया है।
  • लेकिन खेत जोतने का कार्य लाठी से नहीं होता, बल्कि हल से होता है।
  • इसलिए पदों में अर्थगत सामंजस्य नहीं है – लाठी और जोतना का संबंध असंगत/अयोग्य है।
  • इससे योग्यता का अभाव हो जाता है। (यदि "हल से" होता, तो योग्यता पूरी हो जाती।)

Important Points

व्याख्या-

हिंदी व्याकरण में एक पूर्ण वाक्य के लिए मुख्य विशेषताएँ (गुण) निम्नलिखित माने जाते हैं:

  • आकांक्षा (expectation/अपेक्षा): वाक्य के पद एक-दूसरे की पूर्ति की इच्छा रखते हैं (जैसे क्रिया के साथ कर्म, कर्ता आदि)।
  • योग्यता (compatibility/क्षमता): पदों में अर्थगत सामंजस्य होना चाहिए, अर्थात् पदों का आपसी संबंध तार्किक और यथार्थ होना चाहिए।
  • क्रम (sequence/पदक्रम): शब्दों का उचित क्रम।
  • संक्षिप्तता (brevity/संक्षिप्त होना): अनावश्यक शब्दों का अभाव।
26

पात्र और उसकी विशेषता के आधार पर मिलान कीजिए (क्या भूलें क्या याद करूँ)।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (विशेषता)
A. मोहनलालI. अधिक महत्वाकांक्षी
B. सरजूII. खरदिमाग, जिद्दी, घमंडी
C. गणेशप्रसादIII. अन्धे, बिना बाल-बच्चेवाले
D. ठाकुरप्रसादIV. परिवार में एम.ए. तक पहुँचने वाले पहले व्यक्ति

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    А-І, В-II, C-III, D-IV

  2. ((b))

    A-III, B-II, C-IV, D-I

  3. ((c))

    A-II, B-III, C-I, D-IV

  4. ((d))

    A-III, B-IV, C-II, D-I

Show Answer
Answer: ((c))

A-II, B-III, C-I, D-IV

सही उत्तर है- A-II, B-III, C-I, D-IV

Key Pointsपात्रों का संक्षिप्त विवरण-

  • मोहनलाल: ये स्वभाव से काफी जिद्दी और घमंडी किस्म के व्यक्ति थे
  • सरजू: बच्चन जी के वंश वृक्ष में 'सरजू' एक ऐसे पात्र के रूप में वर्णित हैं जो दृष्टिहीन थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।
  • गणेशप्रसाद: इन्हें परिवार में एक बहुत ही महत्वाकांक्षी सदस्य के रूप में चित्रित किया गया है।
  • ठाकुरप्रसाद:  ये बच्चन जी के बड़े भाई थे और उनके खानदान में उच्च शिक्षा (M.A.) प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति बने।

Important Points

क्या भूलूँ क्या याद करूँ-

  • रचनाकार- हरिवंशराय बच्चन
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 1969 ई.
  • विषय-
  • इसमें बच्चन सिंह के बचपन के चित्र प्रस्तुत किए गए है।

Additional Informationहरिवंशराय बच्चन-

  • जन्म-1907-2003 ई.
  • हिन्दी में हालावाद के प्रवर्तक है।
  • प्रेम व मस्ती के कवि है।
  • हिन्दी का 'बायरन' कहा जाता है।
  • आत्मकथा-
  • भाग-1: क्या भूलूँ क्या याद करूँ(1969 ई.)
  • भाग-2: नीड़ का निर्माण फिर(1970 ई.)
  • भाग-3: बसेरे से दूर(1978 ई.)
  • भाग-4: दशद्वार से सोपान तक(1985 ई.)
  • अन्य रचनाएँ-
  • मधुशाला(1935 ई.)
  • मधुबाला(1936 ई.)
  • मधुकलश(1937 ई.)
  • निशा निमंत्रण(1938 ई.)
  • सतरंगिनी(1945 ई.) आदि।
27

त्रासदी के सन्दर्भ में इनमें से कौन सा कथन 'असत्य है ?

  1. ((a))

    अरस्तू ने त्रासदी के तत्वों में सबसे अधिक महत्त्व कथानक और कार्य व्यापार को दिया है।

  2. ((b))

    चरित्रों के अंकन में औचित्त्य तथा एकरूपता या अन्विति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

  3. ((c))

    त्रासदी मात्र पाठ्य ही होती है, अभिनय नहीं। पाठ्य होने से उसका प्रभाव घट जाता है।

  4. ((d))

    अरस्तू गीत को त्रासदी का अनिवार्य अंग मानते हैं।

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Answer: ((c))

त्रासदी मात्र पाठ्य ही होती है, अभिनय नहीं। पाठ्य होने से उसका प्रभाव घट जाता है।

त्रासदी के सन्दर्भ में कथन 'असत्य है- त्रासदी मात्र पाठ्य ही होती है, अभिनय नहीं। पाठ्य होने से उसका प्रभाव घट जाता है।

Key Pointsत्रासदी-

  • त्रासदी के अनिवार्य अंगों के संबंध में अरस्तू का विश्लेषण महत्वपूर्ण है, जिसे उन्होंने अपने ग्रंथ "पोएटिक्स" (Poetics) में किया है।
  • अरस्तू ने त्रासदी को छह प्रमुख अंगों में विभाजित किया है- 
  • कथानक
  • चरित्र
  • विचार
  • भाषाशैली
  • गेय
  • दृश्यावली
  • अरस्तू ने काव्य को शैली के आधार पर दो तरह से बांटा था - 
  • विस्तृत शैली
  • नाटकीय शैली
  • अरस्तू के मुताबिक, काव्य के प्रमुख भेद ये हैं-
  • गीतिकाव्य
  • महाकाव्य
  • नाटक
  • कामदी
  • त्रासदी

Important Pointsअरस्तु-

  • जन्म- 384 - 322 ई.पू.
  • ग्रन्थ-
  • पेरीपोइएतिकेस
  • रिटोरिक
  • पॉलिटिक्स आदि।
  • मुख्य-
  • यूनानी दार्शनिक थे।
  • अरस्तु प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु थे।
  • अरस्तु जन्म स्टेगेरिया नामक नगर में हुआ था।
  • अरस्तु ने भौतिकी, आध्यात्म, कविता, नाटक, संगीत, तर्कशास्त्र, राजनीति शास्त्र, नीतिशास्त्र, जीव विज्ञान सहित कई विषयों पर रचना की।
  • प्लेटो, सुकरात और अरस्तु पश्चिमी दर्शनशास्त्र के सबसे महान दार्शनिकों में एक थे।
  • अरस्तु पश्चिमी दर्शनशास्त्र पर पहली व्यापक रचना की, जिसमें नीति, तर्क, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म का मेलजोल था।
28

निम्नलिखित में से कौन सी पंक्तियाँ तुलसीराम की आत्मकथा 'मुर्दहिया' से संबंधित हैं?

A. दफनाते समय भजन गायकी तथा वाद्य यंत्रों की रफ्तार बेहद तेज हो जाती थी।

B. अगर तुमसे बेहयाई नहीं होती तो रोजाना एक-न एक पंसाखे उड़ा करेंगे।

C. वह उस क्षेत्र के सैकड़ों गाँवों में मशहूर था तथा देखने में बिल्कुल करिया भुजंग लगता था।

D. उनकी इस विद्या का रहस्य यह था कि उनके पास एक फीट लंबी और उसकी आधी-चौड़ाई वाली एक पुस्तिका होती थी।

E. मेरे पिता मुझे इस हालत में देखकर खुश न थे। वे अपने को मिटाकर मुझे सुखी देखना चाहते थे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, B

  2. ((b))

    केवल A, C, D

  3. ((c))

    केवल C, D, E

  4. ((d))

    केवल B, E

Show Answer
Answer: ((b))

केवल A, C, D

सही उत्तर है- केवल A, C, D

Key Pointsमुर्दहिया-

  • रचनाकार - डॉ तुलसीराम
  • रचनाकाल - 2010 ई.
  • विधा - आत्मकथा
  • अन्य - मुर्दहिया आत्मकथा के दो भा��� है
  • मुर्दहिया - 2010 ई.
  • मणिकर्णिका - 2014 ई.
  • मुर्दहिया 7 भागों में विभाजित है -
  • भुतही परिवारि पृष्ठभूमि
  • मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन
  • अकाल में अंधविश्वास
  • मुर्दहिया के गीद्ध तथा लोकजीवन
  • भूतनीया नागिन
  • चले बुद्ध की राह
  • आजमगढ़ में फाकाकशी
  • यह हिंदी की पहली आत्मकथा जिसमें केवल दलित ही नहीं अपितु गांव का संपूर्ण लोकजीवन केंद्र में है।
  • मुर्दहिया दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आख्यान है।
29

निम्नलिखित उपशीर्षकों को 'मजदूरी और प्रेम' निबंध के आधार पर पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. हल चलाने वाले का जीवन

B. गड़रिये का जीवन

C. मजदूरी और कला

D. मजदूर की मजदूरी

E. मजदूरी और फकीरी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, E, D, B, C

  2. ((b))

    A, B, D, C, E

  3. ((c))

    A, C, D, B, E

  4. ((d))

    A, D, B, E, C

Show Answer
Answer: ((b))

A, B, D, C, E

सही उत्तर है- A, B, D, C, E

Key Pointsमजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार-अध्यापक पूर्ण सिंह
  • विधा-निबंध
  • विषय-
  • ​इसके लेखक ने मजदूरों के श्रम तथा उसके सच्चे मूल्य का विवेचन किया है।
  • किसान के खेत में किए गए श्रम तथा गड़रिये द्वारा भेड़ चराने के कार्य का प्रतिदान पैसों से नहीं चुकाया जा सकता।
  • उनका मूल्य परस्पर प्रेम करके ही चुकाया जा सकता है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • प्रेम मजदूरी
  • मजदूरी और कला
  • मजदूरी और फकीरी
  • समाज का पालन करने वाली दूध की धारा
  • पश्चिमी सभ्यता का एक नया आदर्श

Important Pointsसरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन मुख्य निबंधकार है।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्त कवि वाल्ट व्हिटमैन आदि।
30

'रागदरबारी' उपन्यास के पात्रों और उनकी विशेषताओं का मिलान करें।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (विशेषता)सूची-II (पात्र)
A. बेईमानI. प. राधेलाल
B. भीखमखेड़वीII. मास्टर मोतीराम
C. कानाIII. मुन्नू
D. बीएससी पासIV. बाबू रामाधीन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  2. ((b))

    A-IV, B-I, C-III, D-II

  3. ((c))

    A-II, B-I, C-III, D-IV

  4. ((d))

    A-IV, B-III, C-II, D-I

Show Answer
Answer: ((a))

A-III, B-IV, C-I, D-II

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Pointsरागदरबारी-

  • रचनाकार- श्रीलाल शुक्ल
  • विधा- उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष- 1968 ई.
  • विषय- 
  • रागदरबारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी है।

Important Pointsश्रीलाल शुक्ल-

  • अन्य उपन्यास-
  • ​सूनी घाटी का सूरज- 1957 ई.
  • अज्ञातवास - 1962 ई.
  • आदमी का ज़हर (1972 ई.
  • सीमाएँ टूटती हैं - 1973 ई.
  • पहला पड़ाव -1987 ई. आदि।
31

'उसने कहा था' कहानी के आधार पर कौन से कथन सत्य हैं?

A. एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया।

B. वृद्धा से टकराकर अंधे की उपाधि पाई।

C. एक छावड़ीवाले ने दिन भर की कमाई खोई।

D. लड़के पर पत्थर मारा।

E. कुत्ते को मोरी में धकेल दिया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, C

  2. ((b))

    केवल B, D

  3. ((c))

    केवल A, B, C

  4. ((d))

    केवल C, D, E

Show Answer
Answer: ((a))

केवल A, C

सही उत्तर है- केवल A, C

कहानी के मूल पाठ से सीधे उद्धरण-

  • लड़की भाग गई। लड़के ने घर की राह ली। रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया, एक छावड़ी वाले की दिन भर की कमाई खोई, एक कुत्ते पर पत्थर मारा और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उँड़ेल दिया। सामने नहाकर आती हुई किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाई।

Key Pointsउसने कहा था-

  • रचनाकार- चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  • प्रकाशन वर्ष- 1915 ई. में  सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित।
  • मुख्य पात्र-
  • लहना सिंह- प्रमुख पात्र,सेना का एक वीर सिपाही,वचन बद्ध व्यक्ति।
  • सूबेदारनी- नारी मुख्य पात्र,लहना सिंह की बचपन की प्रेमिका,सूबेदार की पत्नी।
  • वजीरा सिंह- सूबेदार।
  • बोधा सिंह-  सूबेदार व् सूबेदारनी का पुत्र।
  • कीरत सिंह- लहना सिंह का मित्र।
  • विषय-
  • प्रथम विश्व-युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी है।
  • कहानी का कथानक प्रेम,त्याग और कर्तव्य निष्ठा को केंद्र में रखकर बुना गया है।
  • देशभक्ति और देशप्रेम की भावना से परिपूर्ण कहानी है।
  • पूर्वदीप्ति शैली(फ़्लैश बेक) का  प्रयोग किया गया है।

Important Pointsचंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'-

  • जन्म-1883-1922 ई.
  • कहानियाँ-

सुखमय जीवन(1911 ई.)

बुद्धू का काँटा(1914 ई.)

उसने कहा था(1915 ई.) आदि।

Additional Informationकहानी के अन्य कथन-

  • "चार दिन तक पलक नहीं झपकी। बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही।" - लहनासिंह
  • "तेरे कुड़माई हो गई?" - लहनासिंह
32

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A) : खड़ी बोली या कौरवी का उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश के उत्तरी रूप से हुआ है। लोक साहित्य की दृष्टि से खड़ी बोली बहुत संपन्न है। इसने हिंदी के विविध रूपों को प्रभावित भी किया है।

कारण (R) : लोक साहित्य की दृष्टि से खड़ी बोली में पवाड़ा, नाटक, लोककथा लोकगीत आदि पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इनका काफी अंश प्रकाशित भी हो चुका है। हिंदी, उर्दू, हिन्दुस्तानी तथा दक्खिनी एक सीमा तक खड़ी बोली पर आधारित है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या है।

Key Points

व्याख्या:

  • अभिकथन (A): सत्य है। खड़ी बोली (या कौरवी) का उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश के उत्तरी रूप से हुआ है। यह हिंदी व्याकरण और भाषा इतिहास के मानक सिद्धांत है (रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी आदि के अनुसार)। लोक साहित्य की दृष्टि से खड़ी बोली बहुत समृद्ध है और इसने हिंदी के विभिन्न रूपों (विशेषकर मानक हिंदी) को प्रभावित किया है।
  • कारण (R): सत्य है। लोक साहित्य (पवाड़ा, नाटक, लोककथा, लोकगीत आदि) में खड़ी बोली में पर्याप्त मात्रा में सामग्री मिलती है और इसका काफी अंश प्रकाशित भी हो चुका है। हिंदी, उर्दू, हिंदुस्तानी तथा दक्खिनी जैसी भाषाएँ/शैलियाँ एक सीमा तक खड़ी बोली पर ही आधारित हैं।
33

निम्नलिखित में कौन सी पंक्तियाँ प्रताप नारायण मिश्र के निबंध 'शिवमूर्ति' से संबंधित हैं ?

  1. ((a))

    इसके पीछे फारेन सेक्रेटरी ने उर्दू में तर्जुमा पढ़ा।

  2. ((b))

    हुनरमन्दों से पूछे जाते हैं बाबे हुनर पहिले।

  3. ((c))

    सारे गाँव में बुलबुले उड़ रही हैं।

  4. ((d))

    वह अपनी सत्ता को लोकसत्ता में लीन किए रहता है।

Show Answer
Answer: ((b))

हुनरमन्दों से पूछे जाते हैं बाबे हुनर पहिले।

प्रताप नारायण मिश्र के निबंध 'शिवमूर्ति' से संबंधित हैं- हुनरमन्दों से पूछे जाते हैं बाबे हुनर पहिले।

Key Pointsव्याख्या-

  • प्रताप नारायण मिश्र के निबंध "शिवमूर्ति" में ईश्वर की प्राप्ति, भक्ति और गुणों की चर्चा करते हुए एक प्रसिद्ध लोकोक्ति/उक्ति का प्रयोग किया गया है:
  • "हुनरमंदों से पूछे जाते हैं बाबे हुनर पहले"
  • यह पंक्ति ईश्वर की प्राप्ति में गुण और हुनर (कौशल/योग्यता) की आवश्यकता पर जोर देती है। लेखक कहते हैं कि ईश्वर निरधन के धन हैं, और धन-गुण से उसकी प्राप्ति नहीं होती। इसी संदर्भ में यह उक्ति आती है कि हुनरमंद (योग्य व्यक्ति) से ही पूछा जाता है कि पहले हुनर (ईश्वर-प्राप्ति का मार्ग) क्या है।
  • यह निबंध में ईश्वर की मूर्ति (शिवमूर्ति) के विभिन्न रूपों, गुणों और भक्ति के संदर्भ में प्रयुक्त है।

Important Pointsशिवमूर्ति- 

  • रचनाकार- प्रताप नारायण मिश्र
  • विधा-  निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में लिखा गया।
  • विषय वस्तु- 
  • प्रताप नारायण मिश्र के अनुसार अक्षरमयी शिवमूर्ति के अगणित नाम हैं। हृदयेश्वर, मंगलेश्वर, भारतेश्वर आदि।
  • वास्‍तव में ईश्‍वर की मूर्ति प्रेम है, पर वह अनिर्वचनीय, मूकास्‍वादनवत्, परमानंदमय होने के कारण लिखने वा कहने में नहीं आ सकता, केवल अनुभव का विषय है।
  • मिश्रजी के निबंधों में विषय की पर्याप्त विविधता है।
  • देव-प्रेम, समाज-सुधार एवं साधारण मनोरंजन आदि मिश्रजी के निबंधों के मुख्य विषय थे।
  • उन्होंने 'ब्राह्मण' मासिक पत्र में हर प्रकार के विषय पर निबंध लिखे।
34

इनमें से कौन सा कथन 'असत्य' है ?

  1. ((a))

    'अपभाषा' भाषा का वह रूप है जो परिनिष्ठित एवं शिष्ट भाषा की तुलना में 'विशिष्ट' या 'अतिविशिष्ट' माना जाता है।

  2. ((b))

    जब कोई बोली आदर्श भाषा बनने के बाद उन्नत होकर पूरे राष्ट्र में, अन्य भाषा क्षेत्र तथा अन्य परिवार क्षेत्र में भी सार्वजनिक कार्यों में प्रयुक्त होने लगती है तो वह 'राष्ट्रभाषा' का पद पा जाती है।

  3. ((c))

    पर्यटकों तथा राजनयिकों आदि द्वारा सीमित प्रयोग के लिए सीखी जाने वाली भाषा 'संपूरक' भाषा कहलाती है।

  4. ((d))

    मातृभाषा के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर पूरक के रूप में प्रयुक्त होने वाली भाषा 'परिपूरक' कहलाती है।

Show Answer
Answer: ((a))

'अपभाषा' भाषा का वह रूप है जो परिनिष्ठित एवं शिष्ट भाषा की तुलना में 'विशिष्ट' या 'अतिविशिष्ट' माना जाता है।

असत्य' कथन है- 'अपभाषा' भाषा का वह रूप है जो परिनिष्ठित एवं शिष्ट भाषा की तुलना में 'विशिष्ट' या 'अतिविशिष्ट' माना जाता है।

Key Points

व्याख्या-

  • अपभाषा (Slang): यह भाषा का वह रूप है जो व्याकरणिक दृष्टि से अशुद्ध, अनौपचारिक और अक्सर शिष्ट समाज में वर्जित माना जाता है। इसे 'विशिष्ट' या 'अतिविशिष्ट' नहीं, बल्कि अशिष्ट, बाजारू या निम्न स्तरीय भाषा माना जाता है। यह परिनिष्ठित भाषा के मानकों से गिरी हुई होती है।
  • राष्ट्रभाषा (National Language): कथन 2 पूर्णतः सत्य है। जब कोई बोली व्यापक क्षेत्र में स्वीकृत होकर सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यों की मुख्य भाषा बन जाती है, तो वह 'राष्ट्रभाषा' कहलाती है।
  • संपूरक भाषा (Supplementary Language): कथन 3 सत्य है। पर्यटकों या राजनयिकों द्वारा किसी विशिष्ट और सीमित उद्देश्य (जैसे संवाद की बुनियादी जरूरत) के लिए सीखी जाने वाली भाषा को संपूरक भाषा कहा जा सकता है।
  • परिपूरक भाषा (Complementary Language): कथन 4 भी सत्य है। जो भाषा मातृभाषा की कमियों को सामाजिक या व्यावसायिक स्तर पर पूरा करती है, उसे परिपूरक भाषा के रूप में जाना जाता है।
35

'कानों में कँगना' कहानी में प्रयोग के आधार पर प्रकृति के वर्णन को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. बरसात की रात

B. बिजली का काले कपाट से बार-बार झाँकना

C. रिमझिम बूँदों की झड़ी

D. बादल का मरोड़ से बार-बार चिल्लाना

E. चाँदनी का मेघों से आँख-मुँदौवल खेलना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, C, D, E

  2. ((b))

    A, C, E, B, D

  3. ((c))

    A, D, E, B, C

  4. ((d))

    A, C, B, D, E

Show Answer
Answer: ((b))

A, C, E, B, D

सही अनुक्रम है- A, C, E, B, D

  • A. बरसात की रात: कहानी में वातावरण का निर्माण शुरूआती बरसात की रात के वर्णन से होता है।
  • C. रिमझिम बूँदों की झड़ी: इसके बाद बारिश की निरंतरता को दर्शाने के लिए बूँदों की झड़ी का उल्लेख आता है।
  • E. चाँदनी का मेघों से आँख-मुँदौवल खेलना: अंत में, बादलों के बीच से चाँदनी के लुका-छिपी के खेल का वर्णन आता है।
  • B. बिजली का काले कपाट से बार-बार झाँकना: जैसे-जैसे दृश्य गहराता है, बादलों के बीच से बिजली चमकने का वर्णन किया गया है।
  • D. बादल का मरोड़ से बार-बार चिल्लाना: बिजली के बाद बादलों के गर्जन को 'मरोड़ से चिल्लाना' के रूप में व्यक्त किया गया है।​

Key Pointsकानों में कंगना- 

  • रचनाकार-  राधिकारमण प्रसाद सिंह।
  • प्रकाशन वर्ष- 1913 ई. में “इंदु” में प्रकाशित हुई।
  • विधा- कहानी
  • कथानक- 
  • यह एक मार्मिक कहानी है। मनुष्य के विवेक को जागृत करने वाले स्थलों का सूक्ष्म वर्णन करती है।
  • जिसमें एक स्त्री की दशा का मार्मिक ढंग से वर्णन किया गया है l
  • यह एक तरह की आदर्शवादी कहानी है। इस कहानी में कुल छह पात्र हैं।
  • कहानी में पुरुष की वासना को कथावाचक नरेंद्र के माध्यम से दर्शाया गया है।
  • जो स्त्री (किरण) पर मोहित होकर किन्नरी पर मोहित हो गया हो।
  • इसलिए उसने किरण से प्यार नहीं किया, बल्कि हवस की, लेकिन किरण की मौत के बाद उसे उस प्यार का एहसास हुआ, जो अब तक नहीं था।
  • उद्देश्य- 
  • यहाँ कथावाचक ने स्त्री के प्रति वासना और वैवाहिक प्रेम के बीच की रेखा को स्पष्ट किया है और यह संदेश देना चाहता है कि दाम्पत्य प्रेम घर का रक्षक है, जबकि स्त्री के लिए वासना घर को नष्ट कर देती है।
  • वासना और प्रेम के ताने-बाने पर बुनी गई इस कहानी की शुरुआत तो बड़े अलंकारिक और सजावटी ढंग से हुई है, लेकिन अंत भी उतना ही दुखद और मार्मिक है।

Important Pointsराजा राधिकारमण सिंह- 

  • जन्म- 1890 - 1971 ई.
  • कहानियाँ-
  • गाँधी टोपी (1938 ई.)
  • सावनी समाँ (1938 ई.)
  • नारी क्या एक पहेली? (1951 ई.)
  • हवेली और झोपड़ी’ (1951 ई.)
  • देव और दानव (1951 ई.)
  • वे और हम (1956 ई.)
  • धर्म और मर्म’ (1959 ई.),
  • तब और अब’ (1958 ई.)
  • अबला क्या ऐसी सबला? (1962 ई.)
  • उपन्यास-
  • राम-रहीम (1936 ई.)
  • पुरुष और नारी (1939 ई.)
  • सूरदास (1942 ई.)
  • संस्कार (1944 ई.)
  • पूरब और पश्चिम (1951 ई.)
  • चुंबन और चाँटा (1957 ई.)
36

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्तियाँ)सूची-II (निबंध)
A. मनुष्य को सुख कैसे मिलेगा?I. मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
B. मोरे राम के भींजे मुकुटवाII. नाखून क्यों बढ़ते हैं?
C. माता बिन-आदर कौन करे?III. मजदूरी और प्रेम
D. जो खुदा को देखना हो तो मैं देखता हूँ तुमको।IV. उठ जाग मुसाफिर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-I, B-III, C-II, D-IV

  2. ((b))

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  3. ((c))

    A-II, B-III, C-IV, D-I

  4. ((d))

    A-III, B-I, C-II, D-IV

Show Answer
Answer: ((b))

A-II, B-I, C-IV, D-III

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Points

A. मनुष्य को सुख कैसे मिलेगा?II. नाखून क्यों बढ़ते हैं?
B. मोरे राम के भींजे मुकुटवाI. मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
C. माता बिन-आदर कौन करे?IV. उठ जाग मुसाफिर
D. जो खुदा को देखना हो तो मैं देखता हूँ तुमको।III. मजदूरी और प्रेम

Important Pointsनाखून क्यों बढ़ते हैं-

  • रचनाकार- हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • विधा- निबन्ध
  • प्रकाशन वर्ष- 1951 ई.
  • यह निबन्ध 'कल्पलता' निबन्ध संग्रह में  संकलित है।
  • विषय-
  • प्रसिद्ध ललित निबन्ध है।
  • इस निबन्ध में मनुष्य की दुर्बलताओं के साथ-साथ उनकी शक्ति और रचनाशीलता को दिखाया गया है।
  • प्रतीकात्मक निबन्ध है।

मेरे राम का मुकुट भीग रहा है -

  • रचनाकार - विद्यानिवास मिश्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1974 ई.
  • विषय - 
  • यह एक ललित निबंध ग्रंथ है।
  • इस निबंध के माध्यम से लेखक की संवेदना द्वारा लोकतंत्र वेदना का सजीव चित्रण हुआ है।

उठ जाग मुसाफिर-

  • रचनाकार-विवेकी राय
  • प्रकाशन वर्ष- 2014 ई.
  • विधा-निबंध
  • विषय-
  • इस निबंध में गाँवों में शहरी संस्कृति के अनुचित हस्तक्षेप को लेकर लेखक की व्यथित चित्रित की गई है।
  • गाँवों के आर्थिक विकास पर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का विघटन दिखाया गया है।

मजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार-अध्यापक पूर्ण सिंह
  • निबंध में निम्न वर्ग के लोगों के जीवन तथ्यों को उजागर किया गया है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • मजूरी और कला आदि।

Additional Informationसरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन मुख्य निबंधकार है।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्त कवि वाल्ट व्हिटमैन आदि।

विवेकी राय-

  • जन्म-1924-2016 ई.
  • निबंध-
  • किसानों का देश (1956 ई.)
  • गांवों की दुनिया(1957 ई.)
  • त्रिधारा(1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर (1962 ई.)
  • गँवई गंध गुलाब(1980 ई.)
  • आम रास्ता नहीं है (1988 ई.)
  • आस्था और चिंतन(1991 ई.)
  • जगत तपोवन सो कियो(1995 ई.)
  • जीवन अज्ञात का गणित है (2004 ई.) आदि।

विद्यानिवास मिश्र-

  • जन्म - 1926-2005 ई.
  • संस्कृत के विद्वान, जाने-माने भाषाविद्, हिन्दी साहित्यकार और सफल सम्पादक (नवभारत टाइम्स) थे।
  • निबंध-
  • छितवन की छाँह (1953 ई.)
  • हल्दी धूप (1955 ई.)
  • कदम की फूली डाल (1996 ई.)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974 ई.)
  • साहित्य के सरोकार (2007 ई.) आदि।

हजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979 ई.
  • अन्य निबन्ध-
  • अशोक के फूल(1948 ई.)
  • कल्पलता(1951 ई.)
  • विचार और वितर्क(1957 ई.)
  • कुटज(1964 ई.)
  • आलोक पर्व(1972 ई.) आदि।
37

निम्नलिखित में से कहानियों के कौन से अंश असत्य हैं ?

A. तभी सहसा डंडहरे से उस आदमी के दोनों हाथ छूट गए और वह कटे पेड़ की भांति नीचे जा गिरा। और उसके गिरते ही औरत ने भागना बंद कर दिया, मानों दोनों का सफर एक साथ खत्म हो गया है। - 'अमृतसर आ गया है'

B. इस घटना को याद करके और पिता से प्रसन्न हो जाने पर भी उसने चाहा कि वह खिड़की से पिता को अंदर आकर बैठने के लिए मना कर दे लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। - 'पिता'

C. कंकड़ी जल में जाकर स्थायी विवर फोड़ सकती है। क्षण-भर जल का समतल उलट-पुलट कर इधर-उधर से जल तरंग दौड़कर उस छिद्र का नाम निशान रहने देती। - 'कानों में कंगना'

D. विधवा झोपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। - 'एक टोकरी भर मिट्टी'

E. मिरजापुर में पेटराम की शिकायत शुरू हुई। उसने सुझाया कि इलाहाबाद पहुँचने में अभी देरी है। चलने के झंझट में अच्छी तरह उसकी पूजा किये बिना ही बंशीधर ने बनारस छोड़ा था। - 'दुलाईवाली'

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, B

  2. ((b))

    केवल A, D

  3. ((c))

    केवल A, E

  4. ((d))

    केवल B, C

Show Answer
Answer: ((d))

केवल B, C

सही उत्तर है- केवल B, C

Key Points

व्याख्या-

दिए गए विकल्पों में से असत्य (गलत/गढ़े हुए) अंश निम्न हैं:

  • A: सत्य है। यह भीष्म साहनी की कहानी "अमृतसर आ गया है" से है। बंटवारे की हिंसा में मुस्लिम यात्री की मौत के बाद उसकी पत्नी भागना बंद कर देती है और कहती है "अमृतसर आ गया है" (सफर खत्म)।
  • B: असत्य है। यह ज्ञानरंजन की कहानी "पिता" से है। पुत्र पिता की दयनीय स्थिति (बाहर सोना, पसीना) देखकर खिन्न होता है, लेकिन खिड़की से उन्हें अंदर आने के लिए मना नहीं कर पाता।
  • C: असत्य है। "कानों में कंगना" (राधिकारमण प्रसाद सिंह) में सही पंक्ति है: "कंकड़ी जल में जाकर कोई स्थायी विवर नहीं फोड़ सकती।" (नकारात्मक रूप में)। विकल्प में "फोड़ सकती है" लिखकर अर्थ उल्टा कर दिया गया है। जल में कंकड़ी डालने से स्थायी छेद नहीं रहता – यही कहानी का भाव है।
  • D: सत्य है। "एक टोकरी भर मिट्टी" (माधवराव सप्रे) में विधवा झोपड़ी में जाती है, पुरानी बातें याद करती है और आँसू बहाती है।
  • E: सत्य है। "दुलाईवाली" (राजेंद्रबाला घोष) में मिरजापुर स्टेशन पर पेटराम की शिकायत शुरू होती है।
38

'कला और नैतिकता' के अभिन्न संबंध के संदर्भ में गाँधीवादी विचारधारा पर निम्न में से किनके विचारों का प्रभाव दिखाई देता है?

  1. ((a))

    हीगल

  2. ((b))

    रस्किन एवं टाल्सटॉय

  3. ((c))

    कान्ट

  4. ((d))

    लांजाइनस

Show Answer
Answer: ((b))

रस्किन एवं टाल्सटॉय

सही उत्तर है- रस्किन एवं टालस्टॉय

Key Points

व्याख्या:

  • महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" और अन्य लेखों में स्पष्ट रूप से कहा है कि कला और नैतिकता के अविभाज्य संबंध के विचार पर उन पर जॉन रस्किन (John Ruskin) और लियो टालस्टॉय (Leo Tolstoy) का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था।
  • गांधीजी ने रस्किन की पुस्तक "Unto This Last" को पढ़कर कला, श्रम, नैतिकता और समाज सेवा के संबंध को समझा।
  • टालस्टॉय के विचारों (विशेषकर कला में नैतिकता की प्रधानता, "What is Art?" में कला को नैतिक भावना से जोड़ना) ने भी गांधीजी को प्रभावित किया।
  • गांधीजी ने कला को केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिक उत्थान और सत्य-अहिंसा का साधन माना, जो इन दोनों विचारकों से प्रेरित था।

Important Points

  • हीगल
  • हीगल (Hegel) मुख्य रूप से द्वंद्वात्मक दर्शन, इतिहास दर्शन और सौंदर्यशास्त्र के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • गांधीजी पर हीगल का कोई प्रत्यक्ष या उल्लेखनीय प्रभाव नहीं रहा।
  • गांधीजी ने कभी भी हीगल को कला-नैतिकता के संदर्भ में उद्धृत नहीं किया।
  • कान्ट
  • इम्मानुएल कान्ट (Kant) ने "सौंदर्य का निर्णय" (Judgement of Taste) को नैतिकता से अलग रखा।
  • कान्ट के अनुसार सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) और नैतिकता (Ethics) अलग-अलग क्षेत्र हैं।
  • गांधीजी की "कला और नैतिकता अविभाज्य" वाली सोच कान्ट के विपरीत है।
  • लॉजाइन्स
  • लॉजाइन्स (Longinus) प्राचीन ग्रीक आलोचक हैं, जिन्होंने "उत्कृष्टता" (Sublime) पर लिखा।
  • उनका समय गांधीजी से बहुत पहले का है।
  • गांधीजी पर लॉजाइन्स का कोई प्रभाव या उल्लेख नहीं मिलता।
39

"विश्व इतिहास की प्रक्रिया का मूल लक्ष्य मानव-चेतना का विकास है, जो द्वंद्वात्मक पद्धति पर आधारित है।" यह कथन निम्न में से किसका है?

  1. ((a))

    हीगल

  2. ((b))

    कान्ट

  3. ((c))

    हिरोदोटस

  4. ((d))

    विको

Show Answer
Answer: ((a))

हीगल

सही उत्तर है- हीगल

Key Points

व्याख्या-

  • यह कथन "विश्व इतिहास की प्रक्रिया का मूल लक्ष्य मानव-चेतना का विकास है, जो द्वंद्वात्मक पद्धति पर आधारित है" हीगल के दर्शन से लिया गया है।
  • हीगल ने अपनी पुस्तक "दर्शनशास्त्र का इतिहास" (Lectures on the Philosophy of History) और "फिनोमेनोलॉजी ऑफ स्पिरिट" में विश्व इतिहास को आत्मा (Spirit/Geist) की स्व-प्रकटीकरण की प्रक्रिया बताया है।
  • विश्व इतिहास का उद्देश्य मानव चेतना (Human Consciousness) का विकास और स्वतंत्रता की प्राप्ति है।
  • यह विकास द्वंद्वात्मक प्रक्रिया (Dialectical Process: थीसिस → एंटीथीसिस → सिंथेसिस) द्वारा होता है।

Important Points

 

  • option 2) कान्ट (Immanuel Kant)
  • कान्ट ने इतिहास को मुख्य रूप से नैतिक प्रगति और शाश्वत शांति (Perpetual Peace) के दृष्टिकोण से देखा।
  • उन्होंने द्वंद्वात्मक पद्धति का विकास नहीं किया (यह हीगल की देन है)।
  • कान्ट के अनुसार इतिहास प्रकृति की योजना से चलता है, लेकिन मानव-चेतना का विकास उनका मुख्य लक्ष्य नहीं।
  • option 3) हिरोडोटस (Herodotus)
  • हिरोडोटस को इतिहास का जनक कहा जाता है (5वीं शताब्दी ईसा पूर्व)।
  • उन्होंने इतिहास को घटनाओं का वर्णन माना, न कि दार्शनिक प्रक्रिया।
  • उनके समय में द्वंद्वात्मक पद्धति या मानव-चेतना का विकास जैसा कोई विचार नहीं था।
  • option 4) विको (Giambattista Vico)
  • विको ने "नई विज्ञान" (Scienza Nuova) में इतिहास को चक्रीय (cyclical) प्रक्रिया बताया।
  • उन्होंने तीन युगों (दैवीय, नायकों का, मानवीय) की बात की।
  • द्वंद्वात्मक पद्धति और मानव-चेतना का विकास हीगल से पहले विको में नहीं मिलता।
40

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (आत्मकथा)सूची-II (रचनाकार)
A. एक कहानी यह भीI. प्रभा खेतान
B. अन्या से अनन्याII. मन्नू भंडारी
C. शब्द कायाIII. मैत्रेयी पुष्पा
D. गुड़िया भीतर गुड़ियाIV. सुनीता जैन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  2. ((b))

    A-I, B-II, C-IV, D-III

  3. ((c))

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  4. ((d))

    A-I, B-IV, C-III, D-II

Show Answer
Answer: ((c))

A-II, B-I, C-IV, D-III

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Pointsप्रभा खेतान-

  • उपन्यास-
  • आओ पेपे घर चलें(1990 ई.)
  • तालाबंदी(1991 ई.)
  • अपने-अपने चेहरे(1994 ई.)
  • पीली आँधी(1996 ई.) आदि।

मन्नू भंडारी-

  • जन्म- 3 अप्रैल1931 ई.
  • (भानपुरा, मध्य प्रदेश)
  • कहानी संग्रह-
  • एक प्लेट सैलाब
  • मैं हार गई
  • उपन्यास-
  • आपका बंटी
  • महाभोज
  • नाटक-
  • बिना दीवारों का घर।

मैत्रेयी पुष्पा-

  • उपन्यास-
  • स्मृति दंश(1990 ई.)
  • बेतवा बहती रही(1993 ई.)
  • चाक(1997 ई.)
  • अल्मा कबूतरी(2000 ई.) आदि।

दिए गए अनुच्छेद के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

संसार में धन कमाना सब कुछ नहीं हो सकता, मनुष्य का कर्म और व्यवहार ही उसकी असली पहचान है। धन की पूजा बहुत कम ही जगहों पर होती है और वह भी केवल दिखावा मात्र ही है। संसार का इतिहास देखा जाए और उदाहरण ढूँढे जाएँ तो यह सत्य स्पष्ट दिखाई देगा कि असल में जिनके लिए हम आँखें बिछाते हैं अथवा जिनके स्मारक बनवाते हैं, उन्होंने रुपया कमाने में अपना जीवन न बिताकर कुछ ऐसे कार्य किए जिससे देश को उनपर गर्व हुआ तथा उनके कार्य का महत्त्व रुपये से अधिक मूल्यवान माना गया। जिन भी लागों के जीवन का उद्देश्य केवल धन बटोरना रहा, ज्यादातर स्थितियों में लोगों ने उनको पूछा तक नहीं। जन्म लेकर, रुपया कमाकर वे मर गए पर किसी ने जाना भी नहीं कि वे थे कौन और उनका इतिहास क्या है। मनुष्य समाज कितना भी स्वार्थी हो पर अंत में याद उन्हें ही रखता है जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान करते समय मनुष्यता को केन्द्र में रखा है। राजा भी प्रजा को वही प्यारा है जिसे जनता के मन के भाव की समझ है इतिहास में देखें तो राम और कृष्ण 'जनता के राजा' हैं जबकि स्वयं को 'लॉर्ड' कहने वाले अनेक राजाओं को जनता ने भुला दिया।

41

प्रजा के लिए कौन सा राजा प्यारा होता है ?

  1. ((a))

    जनता के मन की समझ रखनेवाला

  2. ((b))

    जनता को धन देनेवाला

  3. ((c))

    जनता को भुला देनेवाला

  4. ((d))

    जनता को नौकरी देनेवाला

Show Answer
Answer: ((a))

जनता के मन की समझ रखनेवाला

इस प्रश्न का सही उत्तर "जनता के मन की समझ रखनेवाला" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • प्रजा के लिए वही राजा प्यारा होता है जिनके मन में जनता के मनों के भाव की समझ होती है।
  • ऐसा राजा जो जनता की भावनाओं और आवश्यकताओं को समझता और सम्मान करता है, उसे जनता का प्यार और समर्थन मिलता है।
  • इसलिए, सही उत्तर जनता के मन की समझ रखनेवाला है।

Additional Information अन्य विकल्प:

जनता को धन देनेवाला -

  • धन देना महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन यह जनता की सच्ची भावनाओं और समस्याओं को समझने और हल करने का विकल्प नहीं हो सकता।

जनता को भुला देनेवाला -

  • ऐसे राजा को जनता कभी पसंद नहीं करेगी जो उसकी समस्याओं और जरूरतों की उपेक्षा करे।

जनता को नौकरी देनेवाला -

  • नौकरी देना अच्छा कदम है, लेकिन यह तब तक पूरा प्रभाव नहीं डाल सकता जब तक राजा जनता के मन की समझ नहीं रखता।
42

मनुष्य समाज किसे याद रखता है?

  1. ((a))

    स्वार्थी व्यक्ति को

  2. ((b))

    अर्थ को केन्द्र में रखने वाले व्यक्ति को

  3. ((c))

    प्रकृति के लिए जीनेवालों को

  4. ((d))

    मनुष्यता को केन्द्र में रखनेवालों को

Show Answer
Answer: ((d))

मनुष्यता को केन्द्र में रखनेवालों को

इस प्रश्न का सही उत्तर "मनुष्यता को केन्द्र में रखनेवालों" को है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • मनुष्य समाज उन्हीं को याद रखता है जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान करते समय मनुष्यता को केन्द्र में रखा है।
  • ऐसे लोग जिन्होंने अपने कर्म और व्यवहार से मानवता की सेवा की है, उन्हें अत्यधिक सम्मान और स्मरण मिलता है।
  • इसलिए, सही उत्तर मनुष्यता को केन्द्र में रखनेवालों को है।

Additional Information अन्य विकल्प:

स्वार्थी व्यक्ति को -

  • ऐसे व्यक्ति को समाज य���द नहीं रखता क्योंकि उन्होंने केवल अपने लाभ के लिए कार्य किया।

अर्थ को केन्द्र में रखने वाले व्यक्ति को -

  • धन और संपत्ति को केन्द्र में रखने वाले व्यक्ति को भी समाज लंबे समय तक याद नहीं रखता।

प्रकृति के लिए जीनेवालों को -

  • हालांकि ये महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन गद्यांश के संदर्भ में सही उत्तर नहीं है।
43

मनुष्य की असली पहचान क्या है ?

  1. ((a))

    धन कमाना

  2. ((b))

    व्यवहार और धर्म

  3. ((c))

    मनुष्य का कर्म और व्यवहार

  4. ((d))

    देश के लिए गर्व

Show Answer
Answer: ((c))

मनुष्य का कर्म और व्यवहार

इसका सही उत्तर "मनुष्य का कर्म और व्यवहार" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार ,

  • मनुष्य की असली पहचान उसके कर्म और व्यवहार से होती है।
  • धन से अधिक महत्व कर्म और व्यवहार का है, जो समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है।
  • इसलिए, सही उत्तर मनुष्य का कर्म और व्यवहार है।

Additional Information अन्य विकल्प:

धन कमाना -

  • धन कमाना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह इंसान की असली पहचान नहीं है।

व्यवहार और धर्म -

  • व्यवहार का महत्व है, लेकिन कर्म के बिना धर्म का पालन अधूरा है।

देश के लिए गर्व -

  • देश के लिए गर्व महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह मनुष्य की असली पहचान के रूप में पर्याप्त नहीं है।
44

उपयुक्त 'अनुच्छेद' का सबसे सटीक शीर्षक लिखिए।

  1. ((a))

    धन उपार्जन

  2. ((b))

    व्यापार उन्नति

  3. ((c))

    मनुष्यता

  4. ((d))

    स्मारक निर्माण

Show Answer
Answer: ((c))

मनुष्यता

इसका सही उत्तर "मनुष्यता" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार ,

  • गद्यांश का मुख्य बिंदु मनुष्यता पर जोर देता है।
  • इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य की असली पहचान उसके कर्म और व्यवहार से होती है, जो मानवता की सेवा और सामाजिक सुधार के लिए होता है।
  • इसलिए, सबसे सटीक शीर्षक मनुष्यता है।

Additional Information अन्य विकल्प:

धन उपार्जन -

  • गद्यांश में धन से अधिक महत्वपूर्ण मानवता को बताया गया है।

व्यापार उन्नति -

  • गद्यांश में व्यापार की बात नहीं की गई है।

स्मारक निर्माण -

  • गद्यांश में स्मारक निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है।
45

गद्यांश में किसे दिखावा मात्र कहा गया है ?

  1. ((a))

    धन की पूजा

  2. ((b))

    स्मारक की पूजा

  3. ((c))

    जीवन की पहचान

  4. ((d))

    मनुष्य का कर्म

Show Answer
Answer: ((a))

धन की पूजा

इसका सही उत्तर "धन की पूजा" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार ,

  • गद्यांश में धन की पूजा को दिखावा मात्र कहा गया है।
  • ऐसे लोग जो केवल धन की पूजा करते हैं, वे केवल बाहरी दिखावे में उलझे होते हैं और उनकी असली पहचान, जो कि कर्म और व्यवहार से होती है, गौण हो जाती है।
  • इसलिए, सही उत्तर धन की पूजा है।

Additional Information अन्य विकल्प:

स्मारक की पूजा -

  • गद्यांश में स्मारक की पूजा का संबंध नहीं बताया गया है।

जीवन की पहचान -

  • जीवन की पहचान को दिखावा नहीं कहा गया है, बल्कि इसे मनुष्यता के कर्म और व्यवहार से जोड़ा गया है।

मनुष्य का कर्म -

  • मनुष्य का कर्म ही उसकी असली पहचान है, इसे दिखावा नहीं कहा गया है।

दिए गए अनुच्छेद के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

पर्वतीय प्रदेशों में आनेवाले संकट निरन्तर बढ़ते जा रहे हैं। प्रकृति अपना विराट रूप प्रदर्शित कर रही है। जन-सामान्य का जीवन इन आपदाओं के कारण निरन्तर अस्त-व्यस्त हो रहा है। विद्वान नवीन जीवन-शैली, तकनीक के विकास और असंतुलित दबाव को इन समस्याओं का कारण मानते हैं। धरती के इस सौन्दर्य के प्रति मानव का आकर्षण तो स्वाभाविक है, परंतु इस आकर्षण को ही व्यावसायिक दृष्टि के धन-लोलुपों ने पर्यटन के माध्यम से अंधाधुंध भुनाना प्रारंभ कर दिया है। पर्यावरण पर जितनी बहसें की जा रही हैं, व्यावहारिकता अथवा वास्तविकता का उनसे कोई संबंध नहीं है। आधुनिकता के नाम पर परंपरा को अंधविश्वास घोषित करने वाले भारतीय संस्कृति से पूर्णतः अनभिज्ञ हैं, अन्यथा वह इस सत्य को जान पाते कि हमारी प्रत्येक परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य अवश्य है। प्रकृति के प्रति भारतीयों का दृष्टिकोण संवेदनापूर्ण है। नदियाँ, पहाड़, वृक्ष इन सभी को हमारे समाज में पूजनीय माना गया है। फिर न जाने कब हम केवल भोक्ता बनकर रह गए।

46

पर्यावरण पर होने वाली बहसें किस से कोई संबंध नहीं रखती ?

  1. ((a))

    आर्थिक स्थिति से

  2. ((b))

    प्रकृति से

  3. ((c))

    व्यावहारिकता से

  4. ((d))

    भाषा से

Show Answer
Answer: ((c))

व्यावहारिकता से

इस प्रश्न का सही उत्तर "व्यावहारिकता" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • पर्यावरण पर होने वाली बहसें व्यावहारिकता अथवा वास्तविकता से कोई संबंध नहीं रखती हैं।
  • विद्वानों के अनुसार, पर्यावरण संकट का कारण नवीन जीवन-शैली, तकनीक के विकास और असंतुलित दबाव है।
  • इसलिए, सही उत्तर व्यावहारिकता है।

Additional Information अन्य विकल्प:

आर्थिक स्थिति -

  • आर्थिक स्थिति पर्यावरण संकट का कारण हो सकती है, लेकिन गद्यांश में इसका उल्लेख नहीं है।

प्रकृति -

  • प्रकृति पर्यावरण संकट का अवश्य संबंध रखती है, लेकिन बहसों का इससे कोई संबंध नहीं है।

भाषा -

  • भाषा का पर्यावरण संकट से कोई संबंध नहीं है।
47

प्रत्येक भारतीय परंपरा के पीछे क्या होना अनिवार्य है?

  1. ((a))

    केवल विश्वास

  2. ((b))

    केवल आस्था

  3. ((c))

    वैज्ञानिक तथ्य

  4. ((d))

    कल्पना

Show Answer
Answer: ((c))

वैज्ञानिक तथ्य

इस प्रश्न का सही उत्तर "वैज्ञानिक तथ्य" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • भारतीय संस्कृति में प्रत्येक परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य अवश्य होता है।
  • इस दृष्टिकोण से हमारी परंपराएँ केवल अंधविश्वास नहीं बल्कि उनके पीछे गहन वैज्ञानिक आधार होते हैं।
  • इसलिए, सही उत्तर वैज्ञानिक तथ्य है।

Additional Information अन्य विकल्प:

केवल विश्वास -

  • भारतीय परंपराएँ केवल विश्वास पर आधारित नहीं होतीं, उनके पीछे वैज्ञानिक तथ्य होते हैं।

केवल आस्था -

  • भारतीय परंपराएँ केवल आस्था पर भी आधारित नहीं होतीं, उनमें वैज्ञानिक तथ्य भी सम्मिलित होते हैं।

कल्पना -

  • भारतीय परंपराएँ केवल कल्पना पर आधारित नहीं होतीं, उनके पीछे वैज्ञानिक तथ्य होते हैं।
48

आधुनिकता के नाम पर परंपरा को अंधविश्वास घोषित करनेवाले किससे अनभिज्ञ हैं ?

  1. ((a))

    धर्म से

  2. ((b))

    राजनीति विज्ञान से

  3. ((c))

    आधुनिकता से

  4. ((d))

    भारतीय संस्कृति से

Show Answer
Answer: ((d))

भारतीय संस्कृति से

इसका सही उत्तर "भारतीय संस्कृति" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • आधुनिकता के नाम पर परंपरा को अंधविश्वास घोषित करनेवाले भारतीय संस्कृति से पूर्णतः अनभिज्ञ हैं।
  • अगर वे भारतीय संस्कृति से परिचित होते तो जान पाते कि प्रत्येक परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य अवश्य होता है।
  • इसलिए, सही उत्तर भारतीय संस्कृति से है।

Additional Information अन्य विकल्प:

धर्म -

  • आधुनिकता के नाम पर परंपरा को अंधविश्वास घोषित करने वाले धर्म के प्रति अनभिज्ञ हो सकते हैं, लेकिन गद्यांश में इस बात का उल्लेख नहीं है।

राजनीति विज्ञान -

  • राजनीति विज्ञान का यहाँ उल्लेख नहीं है।

आधुनिकता -

  • आधुनिकता के प्रति वे अनभिज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे परंपरा और भारतीय संस्कृति के प्रति अनभिज्ञ हैं।
49

धरती के सौंदर्य के प्रति आकर्षण का लाभ किस व्यावसायिक इकाई ने सबसे अधिक उठाया है?

  1. ((a))

    चमड़ा उद्योग

  2. ((b))

    खादी ग्राम उद्योग

  3. ((c))

    पर्यटन उद्योग

  4. ((d))

    हस्तकरघा

Show Answer
Answer: ((c))

पर्यटन उद्योग

इसका सही उत्तर "पर्यटन उद्योग" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • धरती के सौंदर्य के प्रति आकर्षण ने पर्यटन उद्योग को सबसे अधिक लाभ पहुँचाया है।
  • प्राकृतिक स्थलों की सुंदरता के कारण पर्यटन उद्योग में बढ़ोतरी हुई है और इसने कई लोगों को रोजगार भी प्रदान किया है।
  • इसलिए, सही उत्तर पर्यटन उद्योग है।

Additional Information अन्य विकल्प:

चमड़ा उद्योग -

  • चमड़ा उद्योग का धरती के सौंदर्य के प्रति आकर्षण से कोई संबंध नहीं है।

खादी ग्राम उद्योग -

  • खादी ग्राम उद्योग का भी धरती के सौंदर्य से सीधा संबंध नहीं है।

हस्तकरघा -

  • हस्तकरघा उद्योग भी धरती के सौंदर्य से प्रभावित नहीं है।
50

विद्वान प्रकृति के अँसतुलन का कारण क्या मानते हैं ?

  1. ((a))

    जनसंख्या वृद्धि

  2. ((b))

    अशिक्षा

  3. ((c))

    अनभिज्ञता

  4. ((d))

    तकनीक का विकास

Show Answer
Answer: ((c))

अनभिज्ञता

इसका सही उत्तर "अनभिज्ञता" है।

Key Points

गद्यांश के अनुसार,

  • विद्वान मानते हैं कि प्रकृति के असंतुलन का कारण मनुष्य की अनभिज्ञता है।
  • मनुष्य प्रकृति के नियमों और उसकी संतुलित व्यवस्था के प्रति अनभिज्ञ रहते हुए अपने स्वार्थी कार्यों द्वारा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
  • इसलिए, सही उत्तर अनभिज्ञता है।

Additional Information अन्य विकल्प:

जनसंख्या वृद्धि -

  • जनसंख्या वृद्धि भी एक समस्या है, लेकिन विद्वान मुख्य कारण अनभिज्ञता को मानते हैं।

अशिक्षा -

  • अशिक्षा भी एक समस्या हो सकती है, लेकिन गद्यांश में अनभिज्ञता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

तकनीक का विकास -

  • तकनीक का विकास भी एक कारक हो सकता है, लेकिन मुख्य मुद्दा अनभिज्ञता है।
51

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): किसी देवता का प्रतीक सामने आने पर जिस प्रकार उसके स्वरूप और उसकी विभूति की भावना मन में आ जाती है, उसी प्रकार काव्य में आयी हुई कुछ वस्तुएँ विशेष मनोविकारों या भावनाओं को जाग्रत कर देती हैं।

कारण (R) : यीट्स ने मात्र दो प्रकार के प्रतीकों की चर्चा की है ध्वनि प्रतीक और विचार प्रतीक। पहले प्रकार के प्रतीक संवेगात्मक होते हैं और दूसरे प्रकार के बौद्धिक।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((b))

दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

Key Pointsविश्लेषण-

  • अभिकथन (A): यह कथन सत्य है। जिस प्रकार किसी देवता का प्रतीक (जैसे मूर्ति या चिह्न) सामने आने पर भक्त के मन में उस देवता के स्वरूप और उनकी महिमा (विभूति) का विचार स्वतः आ जाता है, उसी प्रकार का���्य में प्रयुक्त बिम्ब और वस्तुएँ पाठक के मन में विशिष्ट मनोविकारों या संवेदनाओं को जाग्रत करती हैं। यह काव्य की व्यंजना शक्ति का उदाहरण है।
  • कारण (R): यह कथन भी सत्य है। डब्ल्यू.बी. यीट्स (W.B. Yeats) ने अपने प्रसिद्ध निबंध 'द सिम्बोलिज्म ऑफ पोएट्री' (The Symbolism of Poetry) में प्रतीकों के मुख्य रूप से दो भेदों की चर्चा की है: भाववाचक या संवेगात्मक प्रतीक (Emotional Symbols) और बौद्धिक प्रतीक (Intellectual Symbols)। संवेगात्मक प्रतीक वे हैं जो भावनाओं और संवेदनाओं को जाग्रत करते हैं, जबकि बौद्धिक प्रतीक विचारों और अमूर्त धारणाओं को प्रकट करते हैं।
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'मानस का हंस' उपन्यास के आधार पर निम्न में से कौन से कथन सही हैं ?

A. थोड़ी देर तक तो उन्हें अपने मस्तिष्क की सनसनाहट और हृदय की धड़कनों के आगे बहुत कुछ सुनाई देने लगा। फिर मन मचलने लगा, पत्नी की लुभावनी काया का स्पर्श उन्हें आनंदित करने लगा।

B. प्रेमाश्रु और ज्ञानी बहावे? अरे, भरी जवानी में हमारी दुइ दुइ पत्नियाँ मरीं, और कैसी रहीं कि रस की गगरियाँ, मदनमोहिनी, जिन पर आठों पहर हम प्रेम से अपने प्राण निछावर करते रहे पर हम एक्कौ आँसू न बहाय।

C. अहंकार और उससे उत्पन्न होने वाले सुखों-दुखों की ओर ध्यान देने से ही अब काम चलेगा तुलसीदास। चाकर की अपनी भी कोई इच्छा होती है।

D. मैं जब चाहूं किसी भी छंद में रस और भावों की, असमानता की व्याख्या नहीं करूंगा क्योंकि यह मेरी कमाई हुई सिद्ध नहीं है, आज की है।

E. तुम कवि लोग अपनी कल्पनाशीलता में अति पर पहुंच जाते हो। यह शकुन शुभ न होते तो पुराने ज्योतिषाचार्य लोग क्या यों ही इन्हें गिना जाते ?

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, D

  2. ((b))

    केवल C, B

  3. ((c))

    केवल B, E

  4. ((d))

    केवल B, A

Show Answer
Answer: ((c))

केवल B, E

सही उत्तर है - केवल B, E

Key Pointsमानस का हंस -

  • उपन्यासकार - अमृतलाल नागर
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1972 ई.
  • पात्र-
  • मैना कहारिन
  • बतासो
  • रतना
  • श्यामो की बुआ
  • बाबा -तुलसीदास
  • राजा -रजिया नाम से पुकारे जाने वाला पात्र, बाबा से आयु में एक दिन छोटे
  • संत बेनीमाधव (सूकरखेत निवासी शिष्य)- पचास-पचपन वर्षीय
  • रामू द्विवेदी (काशी से आए हुए शिष्य) -बाबा के शिष्य, इकतीस वर्षीय
  • बकरीदी कक्का- बाबा से आयु में चार दिन बड़े
  • पण्डित गणपति उपाध्याय -बाबा के पुराने शिष्य, अड़सठ-उनहत्तर वर्षीय
  • बूढ़ा रमज़ानी - बकरीदी दर्ज़ी का छोटा बेटा, इकसठ-बासठ वर्षीय
  • शिवदीन दुबे, नन्हकू, मनकू- गाँव के लोग
  • हुलसिया-पंडाइन की मुँहबोली ननद
  • पंडाइन
  • पण्डित आत्माराम
  • भैरोसिंह
  • विषय -
  • यह उपन्यास तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।
  • इसमें तुलसी के व्यक्तित्व की विभिन्न परतों को उजागर किया गया है।
  • व्यक्तित्व के साथ-साथ इनके कृतित्व का भी उल्लेख किया गया है।

Important Pointsअमृतलाल नागर-

  • जन्म - 1916-1960  ई.
  • मुख्य उपन्यास -
  • बूंद और समुंद्र(1956 ई.)
  • शतरंज के मोहरे(1959 ई.)
  • सुहाग के नुपूर(1960 ई.)
  • अमृत और विषय(1966 ई.) आदि।
  • खंजन नयन(1981 ई.) उपन्यास सूरदास के जीवन पर आधारित है।
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'दुनिया का सबसे अनमोल रत्न' कहानी के विविध कथनों का पात्र से मिलान कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (कथन)
A. दिलफिगारI. अगर तू मेरा सच्चा प्रेमी है, तो जा और दुनिया की सबसे अनमोल चीज लेकर मेरे दरबार में आ।
B. हज़रते खिज़्र (एक बुजुर्ग)II. मजबूत इरादा मोहब्बत के रास्ते की पहली मंजिल है।
C. दिलफरेबIII. दुनिया में जरूर इनसे भी महँगी, इनसे भी अनमोल चीजें मौजूद हैं, मगर वह क्या हैं?
D. घायल सिपाहीIV. तू यहाँ ऐसे वक्त में आया, जब हम तेरा आतिथ्य सत्कार करने योग्य नहीं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-III, B-II, C-I, D-IV

  2. ((b))

    A-II, B-I, C-III, D-IV

  3. ((c))

    A-IV, B-III, C-II, D-I

  4. ((d))

    A-I, B-II, C-III, D-IV

Show Answer
Answer: ((a))

A-III, B-II, C-I, D-IV

सही उत्तर है- A-III, B-II, C-I, D-IV ।  

Key Pointsदुनिया का सबसे अनमोल रतन-

  • रचनाकार- प्रेमचंद
  • विधा- कहानी (पहली कहानी)
  • प्रकाशन वर्ष- 1907 ई.
  • विषय- 
  • यह कहानी सच्चे प्रेमी के देश-प्रेम परीक्षा की कहानी है।
  • यह प्रेमचंद के कहानी संग्रह 'सोज़े वतन' (1908 उर्दू कहानी संग्रह) में संकलित है।

Important Pointsप्रेमचंद-

  • जन्म- 1880-1936 ई.
  • भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं।
  • अन्य कहानी-
  • दो बैलों की कथा
  • ईदगाह
  • पंच परमेश्वर
  • पूस की रात
  • कप्तान साहब
  • र्स्वग की देवी आदि।
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"मुझे इस बन्दीगृह से मुक्त करो, अब तो बाली, जावा और सुमात्रा का वाणिज्य केवल तुम्हारे ही अधिकार में है महानाविक !" जयशंकर प्रसाद कृत 'आकाश-दीप' कहानी के किस पात्र द्वारा यह कथन कहा गया है?

  1. ((a))

    बन्दी

  2. ((b))

    जया

  3. ((c))

    बुधगुप्त

  4. ((d))

    चम्पा

Show Answer
Answer: ((d))

चम्पा

सही उत्तर है- चम्पा

Key Points

व्याख्या-

  • जयशंकर प्रसाद की कहानी "आकाश-दीप" में यह कथन "मुझे इस बंदीगृह से मुक्त करो, अब तो बाली, जावा और सुमात्रा का वाणिज्य केवल तुम्हारे ही अधिकार में है महानाविक!" चंपा (चंपा रानी) द्वारा बुधगुप्त (महानाविक) से कहा गया है।
  • कहानी में बुधगुप्त एक शक्तिशाली महानाविक है, जिसके अधीन बाली, जावा, सुमात्रा आदि द्वीपों का वाणिज्य आ गया है।
  • चंपा (द्वीप की अधीश्वरी/रानी) बुधगुप्त को "महानाविक" कहकर संबोधित करती है और बंदीगृह (जिसे वह अपना कैदघर मानती है) से मुक्ति मांगती है।
  • बुधगुप्त चंपा के प्रेम में पड़ जाता है और उसकी बात मानकर उसे मुक्त करने की स्थिति में आता है।
  • अन्य पात्र जैसे  जया (चंपा की सेविका), बंदी (या अन्य सहायक), चम्पा स्वयं नहीं, बल्कि बुधगुप्त से संवाद करती है।​

Important Points

आकाशदीप-

  • रचनाकार-जयशंकर प्रसाद
  • विधा-कहानी
  • प्रकाशन वर्ष-1928 ई.
  • विषय-
  • चम्पा और बुद्धगुप्त के आदर्श प्रेम व त्याग की कहानी है।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1890-1937 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • छाया(1912 ई.)
  • प्रतिध्वनि(1926 ई.)
  • आकाशदीप(1928 ई.)
  • आँधी(1931 ई.) आदि।
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • देवदासी
  • देवरथ
  • संदेश
  • मधुआ
  • पुरस्कार
  • गुंडा आदि।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A) : "मृत्यु के गह्वर में प्रवेश करने के समय में भी तुम्हारी ज्योति बनकर बुझ जाने की कामना रखती हूँ और भी एक विनोद, प्रलय का परिहास, देख सकूँगी। मेरी सहचरी।"

कारण (R) : ध्रुवस्वामिनी इस कारण से उपर्युक्त पंक्तियाँ कहती है क्योंकि वह जानती है कि राजा दोनों से एक साथ ही छुटकारा चाहता है और मृत्यु ही उन दोनों को मिलन का सुख दे सकती है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

 

  • दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक 'ध्रुवस्वामिनी' (1933) के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं।

Key Points

अभिकथन (A) का विश्लेषण-

  • संदर्भ: ये पंक्तियाँ ध्रुवस्वामिनी अपनी दासी (सहचरी) से तब कहती है जब वह शकराज के शिविर में जाने की तैयारी कर रही होती है।
  • भाव: यहाँ ध्रुवस्वामिनी का गौरव और उसके बलिदान की भावना झलकती है। वह जानती है कि वह एक भयानक संकट (मृत्यु के गह्वर) में जा रही है, लेकिन वह इसे एक 'प्रलय के परिहास' (विनाश के मज़ाक) की तरह देखती है। वह अपनी गरिमा को बचाते हुए मिट जाने की कामना रखती है।

Important Point

कारण (R) का विश्लेषण-

  • तर्क: कारण (R) अभिकथन की सटीक व्याख्या करता है। ध्रुवस्वामिनी का पति, कायर राजा रामगुप्त, उसे अपनी रक्षा के लिए शत्रु शकराज को उपहार स्वरूप सौंप देता है।
  • व्याख्या: ध्रुवस्वामिनी भली-भाँति जानती है कि रामगुप्त उससे और शकराज दोनों से एक साथ मुक्ति चाहता है। इस अपमानजनक जीवन से तो मृत्यु ही बेहतर है, जहाँ कम से कम वह अपने सम्मान के साथ आत्म-बलिदान कर सके। इसलिए वह मृत्यु को एक 'मिलन के सुख' या मुक्ति के रूप में देखती है।
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हिन्दी साहित्य का इतिहास (डॉ. नगेन्द्र, डॉ. हरदयाल) के आधार पर निम्न रचनाकारों (कवियों) को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. रसिकगोविन्द

B. चिंतामणि

C. देव

D. कुमारमणि

E. ग्वाल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    E, A, B, D, C

  2. ((b))

    B, D, C, A, E

  3. ((c))

    A, B, C, D, E

  4. ((d))

    B, A, C, D, E

Show Answer
Answer: ((b))

B, D, C, A, E

सही उत्तर है- B, D, C, A, E

Important Pointsदेव-

  • जन्म- 1673 ई.
  • पुरा नाम- देवदत्त
  • रीतिकाल की रीतिबद्ध शाखा के प्रमुख कवि है।
  • रचनाएँ-
  • भाव विलास
  • अष्टयाम
  • भवानी विलास
  • प्रेमचंद्रिका
  • रस विलास
  • सुखसागर तरंग
  • देवमाया प्रपंच
  • सुजान विनोद आदि।

आचार्य चिंतामणि त्रिपाठी-

  • समय - 1609 - 1685 ई.
  • जन्म स्थान - तिकवांपुर
  • आश्रयदाता - शाहजी भोंसले और शाहजहां
  • रचनाएं -
  • कविकुल कल्पतर (1650 ई.)
  • रसविलास
  • श्रृंगार मंजरी(1653 ई.)
  • छंद विचार
  • कवित विचार
  • काव्य विवेक
  • काव्य प्रकाश
  • रामाश्वमेध
  • रामायण
  • कृष्णचरित (प्रबंध काव्य)

ग्वाल कवि –

  • यह मथुरा के रहने वाले बंदीजन सेवाराम के पुत्र थे।
  • रचनाएं –
  • यमुना लहरी 1879
  • ससिकानंद (अलंकार ग्रंथ)
  • रसरंग 1904
  • कृष्ण जु को लखशिख 1884
  • दूषण दर्पण 1891
  • हमीर हठ 1881
  • गोपी पच्चीसी
  • भक्त भावना 1919
  • राधा माधव मिलन
  • राधा अष्टक

रसिक गोविन्द -

  • रीतिकाल के कवि थे।
  • वे निंबार्क संप्रदाय के एक महात्मा हरिव्यास की गद्दी के शिष्य थे|
  • मुख्य ग्रन्थ- 
  • रामायण सूचनिका, रसिक गोविंदानंद घन, लछिमन चंद्रिका, अष्टदेशभाषा, पिंगल आदि।

कुमारमणि-

  • जन्म: लगभग 1680 ई.
  • ये रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवि हैं और कालक्रम में चिंतामणि के पश्चात आते हैं।
57

पंक्तियों को रचनाकारों से सुमेलित कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्ति)सूची-II (रचनाकार)
A. श्रुति क्यों न हो, प्रतिकूल हैं जो स्थल वही प्रक्षिप्त हैं, विक्षिप्त-से हम दम्भ में आपाद-मस्तक लिप्त हैं।I. अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
B. प्रशस्त शाखा तरू-वृन्द की उन्हें प्रतीत होती उस हस्त तुल्य थी।II. सुमित्रानंदन पंत
C. नभ सागर के अंतस्तल में जैसे छिप जाता महा मीन, मृद मरूत लहर में फेनोपम तारागण झिल मिल हुए दीन।III. मैथिलीशरण गुप्त
D. स्वर्ग की सुषमा जब साभार धरा पर करती थी अभिसार। प्रसूनों के शाश्वत-शृंगार, स्वर्ण-भृंगों के गंध-विहारIV. जयशंकर प्रसाद

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-III, B-I, C-IV, D-II

  2. ((b))

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  3. ((c))

    A-IV, B-III, C-II, D-I

  4. ((d))

    A-IV, B-II, C-III, D-I

Show Answer
Answer: ((a))

A-III, B-I, C-IV, D-II

सही उत्तर है- A-III, B-I, C-IV, D-II

Key Points विवरण-

  • मैथिलीशरण गुप्त (A): ये पंक्तियाँ उनके प्रसिद्ध महाकाव्य 'साकेत' के नौवें सर्ग से ली गई हैं, जो उर्मिला के विरह और दार्शनिक विचारों को दर्शाती हैं।
  • अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (B): यह पंक्ति उनके खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रियप्रवास' से है, जिसमें प्रकृति चित्रण का अनूठा उदाहरण मिलता है।
  • जयशंकर प्रसाद (C): यह 'छायावाद' के प्रवर्तक प्रसाद जी की रचना 'कामायनी' (श्रद्धा सर्ग) से संबंधित है, जहाँ वे प्रकृति और सितारों की तुलना अत्यंत सूक्ष्मता से करते हैं।
  • सुमित्रानंदन पंत (D): 'प्रकृति के सुकुमार कवि' पंत जी की यह पंक्ति उनकी सुप्रसिद्ध कविता 'परिवर्तन' से ली गई है, जो प्रकृति और समय के बदलते स्वरूप का वर्णन करती है।

Important Pointsमैथिलीशरण गुप्त-

  • जन्म-1886-1964 ई.
  • ब्रजभाषा उपनाम-रसिकेन्द्र
  • बांग्ला भाषा उपनाम-मधुप
  • महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी।
  • रचनाएँ-
  • रंग में भंग(1909 ई.)
  • जयद्रथ वध(1910 ई.)
  • भारत-भारती(1912 ई.)
  • किसान(1917 ई.)
  • विकट भट(1929 ई.)
  • झंकार(1929 ई.)
  • द्वापर(1936 ई.)आदि।

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'-

  • जीवनकाल- 1865-1947 ई.
  • प्रमुख काव्य संग्रह-
  • कृष्ण शतक (1882 ई.)
  • रसिक रहस्य (1899 ई.)
  • प्रेम प्रपंच (1900 ई.)
  • चुभते चौपदे (1924 ई.)
  • चोखे चौपदे (1932 ई.)
  • रस कलश (1931 ई.)
  • प्रबंध काव्य-
  • प्रियप्रवास (1914 ई.)
  • पारिजात (1937 ई.) -15 सर्ग
  • वैदेही वनवास (1941 ई.) -18 सर्ग।

सुमित्रानंदन पंत-

  • जन्म-1900-1977 ई.
  • छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ है।
  • काव्य रचनाएँ-
  • छायावादी-
  • ग्रंथि(1920 ई.)
  • पल्लव(1926 ई.)
  • वीणा(1927 ई.)
  • गुंजन(1932 ई.)
  • प्रगतिवादी-
  • युगान्त(1936 ई.)
  • युगवाणी(1939 ई.)
  • ग्राम्या(1940 ई.)
  • अरविन्द दर्शन से प्रभावित- 
  • स्वर्ण किरण(1947 ई.)
  • स्वर्णधूलि(1947 ई.)
  • युगांतर(1948 ई.)
  • युगपथ(1949 ई.)
  • नवमानवतावादी-
  • उत्तरा(1949 ई.)
  • रजतशिखर(1952 ई.)
  • शिल्पी(1952 ई.)
  • अतिमा(1955 ई.)
  • कला और बूढ़ा चाँद(1959 ई.)
  • लोकायतन(1964 ई.) आदि।

जयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावादी प्रमुख स्तम्भ है।
  • काव्य संग्रह-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेम पथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।
58

"प्रेमकथा एहि भांति विचारहु।

बुझि लेउ जौ बूझै पारहु।"

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस ग्रन्थ से उधृत हैं?

  1. ((a))

    मधुमालती

  2. ((b))

    पद्मावत

  3. ((c))

    अखरावट

  4. ((d))

    छिताई वार्ता

Show Answer
Answer: ((b))

पद्मावत

सही उत्तर है- पद्मावत 

  • भावार्थ- इन पंक्तियों के माध्यम से कवि जायसी पाठकों को संदेश देते हैं कि इस 'प्रेमकथा' (पद्मावत की कहानी) पर इस प्रकार विचार करो और इसके गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को समझने का प्रयास करो। वे इसे मात्र एक लौकिक कहानी न मानकर ईश्वर के प्रति अलौकिक प्रेम की साधना के रूप में देखने का आग्रह करते हैं।

Key Pointsपद्मावत-

  • रचनाकार- जायसी
  • प्रकाशन वर्ष-1520 ई.
  • विधा-सूफी काव्य
  • भाषा-अवधी
  • छंद-दोहा-चौपाई
  • विषय-
  • इसमें 57 खंड हैं।
  • उत्प्रेक्षा अलंकार की प्रधानता है।
  • इसमें रत्नसेन,पद्मावती और नागमती की प्रेम कहानी वर्णित है।
  • इसमें सभी पात्र प्रतीक रूप में प्रस्तुत हुए है।

Important Pointsजायसी-

  • जन्म-1446-1542 ई.
  • पूरा नाम-मलिक मोहम्मद जायसी
  • गुरु-सूफी फकीर शेख मोहिदी
  • रचनाएँ-
  • अखरावट
  • आखिरी कलाम
  • कहरनामा
  • कान्हावत
  • चित्ररेखा आदि।
59

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): उन्नीसवीं सदी में प्रजाति सिद्धान्त (रेस थियरी) जब भारत पर लागू हुआ तब दो अलग-अलग भाषाओं के कारण, अलग भाषा परिवार के कारण आर्य और द्रविड़ों को अलग जाति का बता दिया गया। भारतवासियों को यह बात जब पता चली तो वे अत्यन्त खिन्न हुए क्योंकि उनके अनुसार ये बात सही नहीं थी।

कारण (R) : आर्यों और द्राविड़ों को परस्पर भिन्न बताने का कारण यह बताया गया कि आर्य और द्राविड़ भाषाएँ दो अलग परिवारों की भाषाएँ मानी जाती हैं, किन्तु भाषा भिन्न होने मात्र से आदमी अलग जाति का हो जाता है, यह अनुमान असत्य है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है

Key Points

व्याख्या:

यह प्रश्न आर्य-द्रविड़ जाति-विभाजन सिद्धांत (Aryan-Dravidian Race Theory) और 19वीं सदी के भाषाई/प्रजाति सिद्धांत (Race Theory) से संबंधित है।

  • अभिकथन (A): सत्य है। 19वीं सदी (विशेष रूप से 19वीं सदी के मध्य से अंत तक) में यूरोपीय विद्वानों (मैक्स मूलर, रॉबर्ट कैल्डवेल आदि) द्वारा प्रजाति सिद्धांत (Race Theory) के आधार पर भारत में आर्यों और द्रविड़ों को दो अलग-अलग प्रजातियों (races) के रूप में प्रस्तुत किया गया। भाषा-परिवार (Indo-European vs Dravidian) के आधार पर आर्यों को उत्तरी (श्वेत/आर्यन) और द्रविड़ों को दक्षिणी (काला/द्रविड़ियन) बताया गया, और भाषाई अंतर को प्रजातीय अंतर का प्रमाण मान लिया गया। जब यह सिद्धांत भारत में लोकप्रिय हुआ, तो भारतीयों (विशेषकर दक्षिण भारतीयों) ने इसका विरोध किया क्योंकि वे इसे गलत और विभाजनकारी मानते थे।
  • कारण (R): सत्य है और (A) की सही व्याख्या भी करता है। आर्यों और द्रविड़ों को अलग-अलग प्रजाति बताने का मुख्य आधार भाषाई अंतर (Indo-Aryan vs Dravidian language families) था। भाषा-परिवार अलग होने को ही प्रजाति अलग होने का प्रमाण मान लिया गया, जबकि भाषा और प्रजाति (race) का सीधा संबंध नहीं होता। यही कारण है कि भारतीय विद्वानों ने इसे असत्य माना – केवल भाषा भिन्न होने से लोग अलग प्रजाति/जाति नहीं हो जाते। यह अनुमान गलत और असत्य है।
60

'भारतीय काव्यशास्त्र सत्यदेव चौधरी' में आए भारतीय विद्वानों के कालक्रम के अनुसार पहले से बाद के क्रम में उन्हें व्यवस्थित कीजिए।

A. महिमभट्ट

B. जयदेव

C. धनंजय

D. दण्डी

E. उद्भट

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    D, E, C, B, A

  2. ((b))

    D, E, C, А, В

  3. ((c))

    D, A, B, C, E

  4. ((d))

    D, C, A, B, E

Show Answer
Answer: ((b))

D, E, C, А, В

सही उत्तर है- D, E, C,  A, B

Key Pointsविद्वानों का कालक्रम (समय)-

  1. D. दण्डी (7वीं शता��्दी का उत्तरार्ध): ये संस्कृत के महान आचार्य थे। इनकी सुप्रसिद्ध रचना 'काव्यादर्श' है।
  2. E. उद्भट (8वीं शताब्दी का उत्तरार्ध): ये राजा जयापीड के सभा-पंडित थे। इनका प्रमुख ग्रंथ 'काव्यालंकार सार-संग्रह' है।
  3. C. धनंजय (10वीं शताब्दी का उत्तरार्ध): ये राजा मुंज के दरबारी कवि थे। इन्होंने 'दशरूपक' नामक महत्वपूर्ण नाट्यशास्त्रीय ग्रंथ की रचना की।
  4. B. जयदेव (12वीं-13वीं शताब्दी): इन्हें 'पीयूषवर्ष' भी कहा जाता है। इनकी प्रमुख रचना 'चन्द्रालोक' है।
  5. A. महिमभट्ट (11वीं शताब्दी का मध्य): ये ध्वनि-विरोधी आचार्य माने जाते हैं। इनकी प्रसिद्ध रचना 'व्यक्ति-विवेक' है।
61

सर्वनाम में इनमें से कौन सा 'कारक' नहीं होता ?

  1. ((a))

    संप्रदान

  2. ((b))

    अधिकरण

  3. ((c))

    संबोधन

  4. ((d))

    संबंध

Show Answer
Answer: ((c))

संबोधन

सही उत्तर है- सम्बोधन

Key Points

व्याख्या-

  • हिन्दी व्याकरण में संज्ञा के आठ कारक होते हैं, लेकिन सर्वनाम के केवल सात कारक होते हैं।
  • सर्वनाम में 'संबोधन' कारक का प्रयोग नहीं किया जाता क्योंकि किसी सर्वनाम (जैसे - वह, यह, तुम) के द्वारा किसी को पुकारा नहीं जा सकता।

Important Points

कारककारक का अर्थ होता है किसी कार्य को करने वाला। यानी जो भी क्रिया को करने में भूमिका निभाता है, वह कारक कहलाता है। इसके निम्न भेद हैं -वह रोज़ सुबह गंगा किनारे जाता है।
भेदपरिभाषाविभक्ति
कर्ता कारकजो वाक्य में कार्य को करता है, वह कर्ता कहलाता है। कर्ता वाक्य का वह रूप होता है, जिसमे कार्य को करने वाले का पता चलता है।ने
कर्म कारकवह वस्तु या व्यक्ति जिस पर वाक्य में की गयी क्रिया का प्रभाव पड़ता है वह कर्म कहलाता है।को
करण कारकवह साधन जिससे क्रिया होती है, वह करण कहलाता है। यानि, जिसकी सहायता से किसी काम को अंजाम दिया जाता वह करण कारक कहलाता है।से, के द्वारा
सम्प्रदान कारकजब वाक्य में किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए तो वहां पर सम्प्रदान कारक होता है।के लिए
अपादान कारकजब संज्ञा या सर्वनाम के किसी रूप से किन्हीं दो वस्तुओं के अलग होने का बोध होता है, तब वहां अपादान कारक होता है।से (अलग होना)
संबंध कारकसंज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो हमें किन्हीं दो वस्तुओं के बीच संबंध का बोध कराता है, वह संबंध कारक कहलाता है।का, के, की
अधिकरण कारकसंज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं।में, पर
संबोधन कारकसंज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जिससे किसी को बुलाने, पुकारने या बोलने का बोध होता है, तो वह सम्बोधन कारक कहलाता है।हे!, अरे!

Additional Information

  • विकल्प 3 (संबोधन): यह सही उत्तर है क्योंकि सर्वनाम के रूपों में संबोधन (जैसे- हे!, अरे!) का अभाव होता है।
  • ❌ विकल्प 1 (संप्रदान): यह सर्वनाम का एक कारक है। उदाहरण: "उसके लिए", "मेरे लिए"।
  • ❌ विकल्प 2 (अधिकरण): यह भी सर्वनाम का एक कारक है। उदाहरण: "मुझमें", "उसपर"।
  • ❌ विकल्प 4 (संबंध): यह सर्वनाम का एक प्रमुख कारक है। उदाहरण: "मेरा", "तुम्हारा", "उसका"।
62

उपन्यासकार पंडित गौरीदत्त के विषय में निम्नलिखित टिप्पणी किस आलोचक ने लिखी है-

"भारतेन्दु के अस्त होने के कुछ पहले ही नागरी प्रचार का झण्डा पं. गौरीदत्त ने उठाया।"

  1. ((a))

    हजारी प्रसाद द्विवेदी

  2. ((b))

    आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  3. ((c))

    रामस्वरूप चतुर्वेदी

  4. ((d))

    डॉ. नगेन्द्र

Show Answer
Answer: ((b))

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

सही उत्तर है- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

Key Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • गोस्वामी तुलसीदास(1923 ई.)
  • जायसी ग्रंथावली(1924 ई.)
  • भ्रमरगीत सार(1925 ई.)
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास(1929 ई.) आदि।

Important Pointsपंडित गौरीदत्त-

  • जन्म-1836-1906ई.
  • पंडित गौरीदत्त हिंदी के प्रथम उपन्यास के रचयिता है।
  • इन्होने बच्चों को नागरी लिपि सिखाने के अलावा आप गली-गली में घूमकर उर्दू, फारसी और अंग्रेजी की जगह हिंदी और देवनागरी लिपि के प्रयोग की प्रेरणा दिया करते थे।
  • हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में पंडित गौरीदत्त जी ने जो उल्लेखनीय कार्य किया था उससे उनकी ध्येयनिष्ठा और कार्य-कुशलता का परिचय मिलता है।
63

नीचे दिए गए शब्दों को संज्ञा के भेदों के साथ मिलान कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

(सूची-I) शब्द(सूची-II ) संज्ञा के भेद
A. वाराणसीI. द्रव्यवाचक संज्ञा
B. सोनाII. भाववाचक संज्ञा
C. लड़कपनIII. जातिवाचक संज्ञा
D. जुलाहाIV. व्यक्तिवाचक संज्ञा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-I, В-II, C-III, D-IV

  2. ((b))

    A-IV, B-I, C-II, D-III

  3. ((c))

    A-II, B-IV, C-I, D-III

  4. ((d))

    А-III, В-I, C-II, D-IV

Show Answer
Answer: ((b))

A-IV, B-I, C-II, D-III

सही उत्तर है- A-IV, B-I, C-II, D-III

Key Points

  • वाराणसी: यह एक विशेष स्थान (शहर) का नाम है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
  • सोना: यह एक धातु या द्रव्य का बोध कराता है, इसलिए यह द्रव्यवाचक संज्ञा है।
  • लड़कपन: यह एक अवस्था या भाव को दर्शाता है जिसे छुआ नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है।
  • जुलाहा: यह एक विशेष व्यवसाय या पूरी जाति/वर्ग का बोध कराता है, इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा है।

Important Points

संज्ञा - किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण या भाव के नाम को संज्ञा कहते है। संज्ञा के प्रकार -
व्यक्तिवाचकजो शब्द केवल एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं उन शब्दों को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।राम, गंगा, पटना
जातिवाचकजो संज्ञा एक ही प्रकार की वस्तुओं का (पूरी जाति का) बोध कराती है।नदी, पर्वत, लड़की
द्रव्यवाचकजिस संज्ञा शब्द से उस सामग्री या पदार्थ का बोध होता है जिससे कोई वस्तु बनी है।सोना, चाँदी, पानी
समूहवाचकजो संज्ञा शब्द किसी एक व्यक्ति का वाचक न होकर पूरे समूह या समुदाय का वाचक हो।वर्ग, सभा
भाववाचकजो संज्ञा किसी भाव, गुण, दशा आदि का बोध कराती है।क्रोध, मिठास, यौवन
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रसात्मकता की मध्यम कोटि को लक्ष्य में रखकर साधारणीकरण के प्रसंग में यह मान्यता किस विद्वान ने प्रस्तुत की ?

"साधारणीकरण न तो आश्रय (राम) का होता है, न आलम्बन (सीता) का होता है अपितु 'यह कवि की अनुभूति' का होता है।"

  1. ((a))

    डॉ. नगेन्द्र

  2. ((b))

    आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  3. ((c))

    अभिनवगुप्त

  4. ((d))

    धनञ्जय

Show Answer
Answer: ((a))

डॉ. नगेन्द्र

सही उत्तर है- डॉ. नगेन्द्र 

Key Pointsनगेंद्र-

  • जन्म-1915-1999 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रन्थ-
  • सुमित्रानंदन पंत(1938 ई.)
  • साकेत:एक अध्ययन(1939 ई.)
  • रीतिकाव्य की भूमिका(1949 ई.) आदि।

Important Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • गोस्वामी तुलसीदास(1923 ई.)
  • जायसी ग्रंथावली(1924 ई.)
  • भ्रमरगीत सार(1925 ई.)
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास(1929 ई.) आदि।

अभिनवगुप्त-

  • समय-10 वीं शती
  • मुख्य ग्रन्थ-
  • अभिनवभारती
  • तन्त्रालोक
  • ध्वन्यालोक आदि।

धनञ्जय-(10वीं शती)

  • इनका प्रमुख ग्रन्थ दशरूपक है।
  • संस्कृत के विद्वान साहित्यकार।
65

उत्तर आधुनिकता के बारे में निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?

A. उत्तर-आधुनिकता तार्किकता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाती है।

B. उत्तर-आधुनिकता के चिंतन में भाषा की पारदर्शिता के प्रश्न का केन्द्रीय स्थान है।

C. उत्तर-आधुनिकता मनुष्य के केन्द्रीय स्थान को स्वीकारती है।

D. मनुष्य की चेतना भी स्थिर तथा निश्चित हो सकती है।

E. यह पाठ को एक निश्चित शक्ति नहीं देती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, B

  2. ((b))

    केवल C, D

  3. ((c))

    केवल D, E

  4. ((d))

    केवल C, E

Show Answer
Answer: ((a))

केवल A, B

सही उत्तर है - केवल A, B

Key Pointsव्याख्या (प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण)-

  • उत्तर-आधुनिकता (Postmodernism) की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं:
  • आधुनिकता के महावृत्तांतों (grand narratives), तर्कवाद, केंद्रीयता (centrism), सार्वभौमिक सत्य, इतिहास की रैखिक प्रगति, और मनुष्य-केंद्रवाद का खंडन।
  • विखंडन (fragmentation), बहुलता (plurality), हाशिए की आवाज़ें (marginal voices), स्थानीयता, असमता, और पाठक/व्याख्या की प्रधानता।
  • मनुष्य को केंद्रीय स्थान नहीं दिया जाता; लेखक की मृत्यु, पाठक का उदय, और चेतना की अस्थिरता/अनिश्चितता पर बल।

Important Pointsउत्तर-आधुनिकता-

  • उत्तर आधुनिकता का कोई केंद्रवर्ती रूप नहीं बना या बन सकता है क्योंकि उत्तर आधुनिकता एक प्रकार से विकेंद्रीकरण की सतत प्रक्रिया है।
  • इसमें साहित्य, संस्कृति, दर्शन आदि तर्क व सिद्धांतों का विखंडन है।
  • इसमें स्थानीयता के गुण भी मौजूद है।
  • उत्तर -आधुनिकता -संरचनावाद और विखंडनवाद दोनों के मेल से उत्तर आधुनिकतावाद का निर्माण हुआ है।
  • पॉल डी मैन को विखंडनवाद का प्रबल समर्थक माना जाता है।
  • उत्तर आधुनिक शब्द 'उत्तर' व 'आधुनिक' इन दो शब्दों से मिलकर बना जिसका अर्थ है आधुनिक का विकसित परवर्ती रूप भी हो सकता है।
  • उत्तर आधुनिकतावाद का जनक सच्चे अर्थों में ल्योतार को माना जाता है।
  • ल्योतार पुस्तक 'द पोस्टमार्टम कंडीशन:  ए रिपोर्ट ऑन नॉलेज (1979  ई.)।
  • समग्र रूप में उत्तर - आधुनिकता के तीन केंद्रीय तत्व माने जा सकते हैं - समग्रतावादी, सार्वभौमिक सत्यों का नकार, तर्कवाद का नकार, आधुनिकतावाद की सक्षम��ा का नकार।
66

'मोचीराम' के आधार पर पंक्तियों का सही अनुक्रम बताइए।

A. चोट जब पेशे पर पड़ती है, तो कहीं-न-कहीं एक चोर कील दबी रह जाती है।

B. आजकल कोई आदमी जूते की नाप से बाहर नहीं है।

C. और पेशे के बीच कहीं-न-कहीं एक अदद आदमी है, जिस पर टाँके पड़ते हैं।

D. यहाँ तरह-तरह के जूते आते, और आदमी की अलग-अलग 'नवैयत' बतलाते है।

E. असल में वह एक दिलचस्प गलतफहमी का शिकार है, जो यह सोचता है कि पेशा एक जाति है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    B, D, A, C, E

  2. ((b))

    B, A, C, D, E

  3. ((c))

    A, B, C, D, E

  4. ((d))

    A, D, C, B, E

Show Answer
Answer: ((a))

B, D, A, C, E

सही उत्तर है- B, D, A, C, E

Key Pointsमोचीराम-

  • रचनाकार-सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
  • प्रकाशन वर्ष-1972ई.
  • विधा-कविता

Important Pointsसुदामा पाण्डेय 'धूमिल'-

  • जन्म-1936-1975ई.
  • सुदामा पाण्डेय धूमिल हिंदी की समकालीन कविता के दौर के मील के पत्थर कवियों में एक है।
  • उनकी कविताओं में आजादी के सपनों के मोहभंग की पीड़ा और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है।
  • व्यवस्था जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों धूमिल की कविताओं का परम लक्ष्य है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • संसद से सड़क तक-(1972ई.)
  • कल सुनना मुझे-(1976ई.)
  • सुदामा पांडे का प्रजातंत्र- (1984ई.) आदि।
67

'कविता क्या है' निबंध के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य है ?

A. भावों से सीधा और पुराना लगाव रखनेवाले रूप ही मिलेंगे।

B. काव्य में बिम्ब ग्रहण से काम नहीं चलता, अर्थग्रहण आवश्यक है।

C. यह बिम्बग्रहण निर्दिष्ट, गोचर और मूर्त विषय का ही हो सकता है।

D. हम मूर्ख, बलहीन और आलसी हो गए हैं, सारा धन विदेश चला जाता है।

E. इससे अधिकांश जनता घी खा पाती है, चुपड़ी रोटी पा जाती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, D

  2. ((b))

    केवल C, D

  3. ((c))

    केवल B, E

  4. ((d))

    केवल E, A

Show Answer
Answer: ((b))

केवल C, D

सही उत्तर है- केवल C, D

Key Pointsकविता क्या है? -

  • रचनाकार - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1909 ई.
  • विषय -
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ - चिंतामणि

Important Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • इनके निबंधों का संग्रह चार भागों में संकलित है-
  • चिंतामणि भाग-1 1939 ई. में रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ही संपादित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-2 1945 ई. में विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-3 नामवर सिंह के संपादन में 1983 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-4 2002 ई. में कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
68

'नयी कविता' पत्रिका के प्रकाशन सम्बन्धी इलाहाबाद में हुई बैठक में भाग लेने वाले व्यक्तियों में से 'आलोचना' त्रैमासिक के 'संपादक मंडल' में कौन शामिल नहीं थे ?

  1. ((a))

    धर्मवीर भारती

  2. ((b))

    रघुवंश

  3. ((c))

    ओमप्रकाश

  4. ((d))

    ब्रजेश्वर वर्मा

Show Answer
Answer: ((c))

ओमप्रकाश

सही उत्तर है- ओमप्रकाश

Key Pointsव्याख्या-

  • 'नई कविता' (नई कविता) हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण पत्रिका थी, जिसका प्रकाशन इलाहाबाद से हुआ और जिसने प्रयोगवाद और नई कविता आंदोलन को दिशा दी। इस पत्रिका के प्रकाशन संबंधी इलाहाबाद में हुई बैठक (1950 के दशक में) में प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया, जिसमें 'आलोचना' त्रैमासिक के संपादक मंडल की चर्चा हुई।
  • धर्मवीर भारती (आलोचना के संस्थापक संपादक) बैठक में शामिल थे।
  • रघुवंश (कवि और आलोचक) भी बैठक में उपस्थित थे।
  • ब्रजेश्वर वर्मा (साहित्यकार) भी इस संदर्भ में शामिल थे।
  • ओमप्रकाश (ओमप्रकाश वाल्मीकि या अन्य ओमप्रकाश) इस बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख साहित्यकारों में शामिल नहीं थे, और न ही वे 'आलोचना' त्रैमासिक के संपादक मंडल में थे। 'आलोचना' का संपादन मुख्य रूप से धर्मवीर भारती ने किया, और बैठक में नई कविता के प्रचार-प्रसार के लिए सहयोग देने वाले अन्य लोग थे, लेकिन ओमप्रकाश उसमें शामिल नहीं थे।
69

"पुरुष का कर्म क्षेत्र में असंयम जीवन में कैसी विषमताएँ उत्पन्न करता है, इसका चित्रण 'पृथ्वीराज रासउ' का उपजीव्य है। पृथ्वीराज की वीरता चमत्कृत करती है तो विलासिता उतनी ही संकुचित करती है", पृथ्वीराज रासो के संदर्भ में उपर्युक्त कथन किस आलोचक का है?

  1. ((a))

    आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  2. ((b))

    रामस्वरूप चतुर्वेदी

  3. ((c))

    डॉ. नगेन्द्र

  4. ((d))

    डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी

Show Answer
Answer: ((b))

रामस्वरूप चतुर्वेदी

पृथ्वीराज रासो के संदर्भ में यह प्रसिद्ध कथन— "पुरुष का कर्म क्षेत्र में असंयम जीवन में कैसी विषमताएँ उत्पन्न करता है, इसका चित्रण 'पृथ्वीराज रासउ' का उपजीव्य है। पृथ्वीराज की वीरता चमत्कृत करती है तो विलासिता उतनी ही संकुचित करती है" —आचार्य रामस्वरूप चतुर्वेदी का है।

Key Points

कथन का विश्लेषण-

  • भावार्थ: डॉ. चतुर्वेदी इस कथन के माध्यम से पृथ्वीराज चौहान के व्यक्तित्व के दो विपरीत पहलुओं को उजागर करते हैं। एक ओर जहाँ पृथ्वीराज की अद्भुत वीरता पाठक को विस्मित करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी अत्यधिक विलासिता और व्यक्तिगत जीवन का असंयम उनके पतन का कारण बनकर मन को छोटा (संकुचित) करती है।
  • उपजीव्य: यहाँ 'उपजीव्य' का अर्थ है कि काव्य का मुख्य आधार या प्रेरणा स्रोत यही जीवन की विडंबना है कि कैसे एक महान वीर अपने ही असंयम के कारण संकट में पड़ता है।
  • स्रोत: यह आलोचनात्मक विचार उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास' से लिया गया है, जिसमें उन्होंने आदिकालीन साहित्य का गहरा विश्लेषण किया है।

Important Pointsरामस्वरूप चतुर्वेदी-

  • जन्म-1931-2003 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • हिन्दी नवलेखन(1960 ई.)
  • भाषा और संवेदना(1964 ई.)
  • कामायनी का पुनर्मूल्यांकन(1970 ई.)
  • हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास(1986 ई.) आदि।

रामचन्द्र शुक्ल- 

  • जन्म- 1884 - 1941 ईo
  • आलोचना ग्रंथ-
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • जायसी ग्रंथावली (1924)
  • गोस्वामी तुलसीदास (1923)
  • रसमीमांसा (1949)
  • भ्रमर गीत सार (1925 )
  • काव्य मे रहस्यवाद (1929)

नगेंद्र-

  • जन्म-1915-1999 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रन्थ-
  • सुमित्रानंदन पंत(1938 ई.)
  • साकेत:एक अध्ययन(1939 ई.)
  • रीतिकाव्य की भूमिका(1949 ई.) आदि।

हज़ारी प्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ:-
  • अशोक के फूल (1948ई.)
  • कल्‍पलता (1951ई.)
  • मध्यकालीन धर्मसाधना (1952ई.)
  • विचार और वितर्क (1957ई.)
  • विचार-प्रवाह (1959ई.)
  • कुटज (1964ई.)
  • आलोक पर्व (1972ई.) आदि।
70

आचार्य विश्वनाथ के 'रस का स्वरूप' सम्बन्धी रससूत्र 'सत्वोद्रेक....' के आधार पर 'रस' के वैशिष्ट्य को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. रस ब्रह्यास्वाद सहोदर है।

B. रस स्वप्रकाशित है।

C. रस अखण्ड है।

D. रस वेद्यान्तर स्पर्श शून्य है।

E. रस आनन्दमय है एवं लोकोत्तर चमत्कार प्राण है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, B, D, C, E

  2. ((b))

    A, B, C, D, E

  3. ((c))

    C, B, D, A, E

  4. ((d))

    C, D, E, A, B

Show Answer
Answer: ((c))

C, B, D, A, E

सही उत्तर है- C, B, D, A, E

Key Pointsआचार्य विश्वनाथ ने साहित्यदर्पण में रस के स्वरूप का वर्णन रससूत्र की व्याख्या के साथ किया है-

  • "सत्त्वोद्रेकादखण्डस्वप्रकाशानन्दचिन्मयः। वेद्यान्तरस्पर्शशून्यो ब्रह्मास्वादसहोदरः॥"

"लोकोत्तरचमत्कारप्राणः कैश्चित्प्रमातृभिः। स्वाकारवदभिन्नत्वेनायमास्वाद्यते रसः॥"

Important Pointsविशेष विवरण-

  • अखण्ड: रस की प्रतीति पूर्ण रूप में होती है, इसे टुकड़ों में नहीं बाँटा जा सकता।
  • स्वप्रकाश: रस स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होता है, इसे जानने के लिए किसी अन्य बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती।
  • वेद्यान्तरस्पर्शशून्य: रसानुभूति के समय अन्य किसी भी ज्ञान (जैसे सांसारिक विषयों) का स्पर्श नहीं रहता।
  • ब्रह्मास्वादसहोदर: रस का आनंद ब्रह्मानंद (ईश्वर प्राप्ति का आनंद) के समान होता है, इसलिए इसे उसका 'भाई' (सहोदर) कहा जाता है
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'हिन्दी का गद्य साहित्य' रामचन्द्र तिवारी में उल्लिखित निम्नलिखित उपन्यासों को उनके प्रकाशन के आधार पर पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित करें।

A. कृष्णकली

B. दिलो-दानिश

C. मरजीवा

D. अन्तर्वशी

E. महाभोज

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    E, A, C, B, D

  2. ((b))

    D, A, C, B, E

  3. ((c))

    A, E, B, C, D

  4. ((d))

    B, C, D, E, A

Show Answer
Answer: ((c))

A, E, B, C, D

सही उत्तर है- A, E, B, C, D

Key Points

व्याख्या:

रामचन्द्र तिवारी की पुस्तक "हिन्दी का गद्य-साहित्य" में प्रेमचंदोत्तर हिंदी उपन्यास के विकास के संदर्भ में इन उपन्यासों का उल्लेख और क्रम प्रकाशन वर्ष के आधार पर निम्नलिखित है (मानक साहित्य इतिहास और परीक्षा संदर्भों के अनुसार):

  • A. कृष्णकली → इलाचन्द्र जोशी द्वारा → 1947 में प्रकाशित (प्रेमचंदोत्तर प्रारंभिक चरण का उपन्यास)।
  • E. महाभोज → मन्नू भंडारी द्वारा → 1979 में प्रकाशित।
  • B. दिलो-दानिश → अब्दुल बिस्मिल्लाह द्वारा → 1986 में प्रकाशित।
  • C. मरजीवा → उदय प्रकाश द्वारा → 1990 के आसपास (उदय प्रकाश की प्रमुख रचना, 1980-90 के दशक में चर्चित)।
  • D. अंतर्वशी → असग़र वजाहत द्वारा → 1990 के बाद (उत्तर-आधुनिक/नई कहानी के बाद का चरण)।
72

डॉ. सामर सेट ने 'सैडनेस इन शेक्सपीरियन ट्रेजेडी' में शेक्सपीयर के पात्रों की आलोचना निम्न में से किस सिद्धान्त के आधार पर की है?

  1. ((a))

    समाजवादी

  2. ((b))

    यथार्थवादी

  3. ((c))

    मनोविश्लेषणवादी

  4. ((d))

    आदर्शवाद

Show Answer
Answer: ((c))

मनोविश्लेषणवादी

सही उत्तर है- मनोविश्लेषणवादी

Key Points

व्याख्या-

  • डॉ. समर सेट (Dr. Samar Set) ने अपनी पुस्तक "Sadness in Shakespearean Tragedy" (सेलनेस इन शेक्सपियरियन ट्रेजडी) में शेक्सपियर के पात्रों (जैसे हैमलेट, ओथेलो, लियर, मैकबेथ आदि) की आलोचना मुख्य रूप से मनोविश्लेषणवादी सिद्धांत (Psychoanalytical theory) के आधार पर की है।
  • यह पुस्तक शेक्सपियर की ट्रेजडी में दुख (sadness), अंतर्मन की संघर्ष, अवचेतन (unconscious), दमित इच्छाएँ (repressed desires), ओडिपस कॉम्प्लेक्स जैसी अवधारणाओं पर केंद्रित है।
  • डॉ. समर सेट ने फ्रायड (Freud) और अन्य मनोविश्लेषकों के सिद्धांतों का उपयोग करके पात्रों के व्यवहार, निर्णय, और ट्रेजिक फॉल (tragic fall) की व्याख्या की है।
  • उदाहरण: हैमलेट में अवचेतन संघर्ष और मदर-फिक्सेशन (Oedipal conflict), ओथेलो में ईर्ष्या की मनोवैज्ञानिक जड़ें, लियर में वृद्धावस्था का मनोवैज्ञानिक संकट आदि।
73

"दो-तीन दिन बीतने पर पंडितजी ने तीन-चार खांची मछलियाँ भेजी और साथ में एक दोहा"

'प्रेमचंद घर में' से उधृत उपरोक्त पंक्तियाँ कौन से उपशीर्षक से ली गई हैं?

  1. ((a))

    यह सन् 14 की बात है

  2. ((b))

    जुलाई 1915

  3. ((c))

    चार साल पहले की बात है... फिर बस्ती

  4. ((d))

    सन् 1916

Show Answer
Answer: ((a))

यह सन् 14 की बात है

सही उत्तर है- यह सन् 14 की बात है

 

Key Points

विवरण-

  • संदर्भ: इस संस्मरण में शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के जीवन के विभिन्न पड़ावों को छोटे-छोटे शीर्षकों (उपशीर्षकों) में बाँटा है।
  • प्रसंग: जब प्रेमचंद बस्ती में थे, तब पंडितजी ने उन्हें उपहार स्वरूप मछलियाँ और एक दोहा भेजा था, जिसका उल्लेख 'जुलाई 1915' वाले भाग में मिलता है।
  • महत्व: यह पुस्तक प्रेमचंद के निजी जीवन, उनके संघर्षों और उनकी सादगी का एक जीवंत दस्तावेज है

Important Pointsप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी
  • विधा- जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष- 1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
74

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पंक्तियाँ)सूची-II (रचनाकार)
A. नाद न बिन्दु न रवि न शशि मंडलI. डोम्भिपा
B. गंगा जउना माझेरे बहर नाइII. सरहपा
C. क्राआ तरुबर पंच विडाल चंचल चीए पइठो कालIII. शबरपा
D. हेरि ये मेरि तइला बाड़ी खसमें समतूलाIV. लुइपा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-I, В-II, C-III, D-IV

  2. ((b))

    A-I, B-III, C-II, D-IV

  3. ((c))

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  4. ((d))

    A-II, B-III, C-I, D-IV

Show Answer
Answer: ((c))

A-II, B-I, C-IV, D-III

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Pointsडोम्भिपा-

  • जन्म-840ई.
  • गुरु-विरूपा
  • प्रमुख ग्रन्थ-
  • डोम्बि-गीतिका
  • योगचर्या
  • अक्षरद्विकोपदेश आदि।

सरहपा-

  • जन्म - 769 ई.
  • हिंदी के प्रथम कवि।
  • अन्य नाम-
  • सरोजवज्र,राहुल भद्र आदि।
  • इनके 32 ग्रन्थ बताये जाते हैं,परन्तु दोहोकोश प्रसिद्ध है।
  • बच्चन सिंह-
  • "आक्रोश की भाषा का पहला प्रयोग सरहपा में ही दिखाई देता है।"

शबरपा-

  • जन्म-780ई.
  • गुरु-सरहपा
  • प्रसिद्ध ग्रन्थ-चर्यापद
  • चर्यापद एक प्रकार का गीत है जो अनुष्ठानों के समय गाया जाता है।
  • यह दृष्टिकूट पदों में लिखी गयी है।

लुइपा-

  • इनका समय 773 ई. है।
  • 84 सिद्धों में इनका स्थान सर्वोपरि माना जाता है।
  • यह  सिद्धो में से सबसे रहस्यवादी थे।
  • यह जाति के कायस्थ थे।
  • उड़ीसा के राजा तथा उनके मंत्री इनके प्रभाव से इनके शिष्य बन गए।
75

"मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल,

चिंता का भार बनी अविरल

रज-कण पर जल-कण हो बरसी

नवजीवन-अंकुर बन निकली।"

उपरोक्त पंक्तियाँ किस कविता से ली गई है?

  1. ((a))

    मैं नीर भरी दुख की बदली

  2. ((b))

    श्रद्धा

  3. ((c))

    बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ

  4. ((d))

    प्रथम रश्मि

Show Answer
Answer: ((a))

मैं नीर भरी दुख की बदली

सही उत्तर है- मैं नीर भरी दुख की बदली

Key Pointsमहादेवी वर्मा - 

  • जन्म-1907-1987 ई.
  • छायावाद की प्रसिद्ध कवियित्री है।
  • 'यामा' काव्य कृति के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है।
  • उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का भारत भारती पुरस्कार भी इन्हें मिला है।
  • कविता संग्रह -
  • ​निहार (1930 ई.)
  • रश्मि (1932 ई.)
  • सांध्यगीत (1936 ई.)
  • दीपशिखा (1942 ई.)
  • प्रथम आयाम (1974 ई.)
  • अग्निरेखा (1990 ई.)
  • रेखाचित्र - 
  • ​अतीत के चलचित्र (1941 ई.)
  • स्मृति की रेखाएं (1943 ई.)
  • मेरा परिवार
  • संस्मरण - 
  • ​ पथ के साथी (1956 ई.)
  • निबंध- 
  • ​शृंखला की कड़ियाँ(1942 ई.)
  • विवेचनात्मक गद्य (1942 ई.)
  • साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध (1962 ई.)
  • संकल्पिता (1969 ई.)
  • कहानी - 
  • ​बिन्दा
  • गिल्लू
76

'काव्यलक्षण' से सम्बन्धित कौन से युग्म सही हैं।

A. मम्मट - ध्वनिरात्मा काव्यस्य

B. दण्डी - शरीरं तावद् इष्टार्थव्यवच्छिन्ना पदावली

C. वामन - ननु शब्दार्थों काव्यम्

D. भामह - शब्दार्थो सहितौ काव्यम्

E. रुद्रट - रीतिरात्मा काव्यस्य

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल D, E

  2. ((b))

    केवल B, E

  3. ((c))

    केवल A, C

  4. ((d))

    केवल D, B

Show Answer
Answer: ((d))

केवल D, B

सही उत्तर है- केवल D, B

Key Pointsआचार्य मम्मट के अनुसार-

  • समय-11वीं शती
  • 'काव्यप्रकाश' में ध्वनि-विरोधी मतों का खंडन करते हुए ध्वनि का महत्तव प्रकट किया।
  • मम्मट ने ध्वनि के तीन भेद स्वीकार किए हैं-
  • वस्तु ध्वनि
  • अलंकार ध्वनि
  • रस ध्वनि

दण्डी -

  • दण्डी संस्कृत के प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
  • ये छठी शताब्दी अंत और सातवीं शताब्दी के प्रारम्भ में सक्रिय थे।
  • दण्डी की तीन र���नाएँ प्रसिद्ध हैं- 
  • काव्यादर्श
  • दशकुमार चरित
  • अवन्तिसुन्दरी कथा
  • काव्यादर्श अलंकार शास्त्राचार्य दण्डी द्वारा रचित संस्कृत काव्यशास्त्र सम्बन्धी प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
  • काव्यादर्श में तीन परिच्छेद मिलते हैं।

आचार्य वामन-

  • समय- 8वीं शताब्दी का उतरार्द्ध, कश्मीर के निवासी थे
  • रचना- ‘काव्यालंकार सूत्रवृति’
  • इसमें 5 अध्याय है, जिन्हें परिच्छेद और 319 सूत्र है।
  • इन्होने ‘काव्य हेतु’ के लिए ‘काव्यांग’ शब्द का प्रयोग किया है।
  • “लोको विद्या प्रकीर्णंच काव्यांगानि।” (काव्यालंकारसूत्रवृत्ति, 1/3/1)
  • ‘लोक व्यवहार’ ‘विद्या’ और ‘प्रकीर्ण’ को काव्य हेतु माना है।
  • प्रतिभा को जन्मजात गुण मानते हुए इसे प्रमुख काव्य हेतु स्वीकार किया गया है-
  • “कवित्व बीजं प्रतिभानं कवित्वस्य बीजम्”।
  • कविता और कविता का बीज प्रतिभा है ‘लोक विद्या प्रकीर्ण’ व ‘प्रतिभा’ को काव्य हेतु माना तथा प्रतिभा को सबसे अधिक महत्व दिया है।

आचार्य भामह-

  • समय- 6 ठी शताब्दी के पूर्वार्द्ध, कश्मीर के निवासी थे।
  • ये अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक थे।
  • रचना- ‘काव्यालंकार’
  • यह अलंकार शास्त्र का ग्रंथ है।
  • इसमें 6 अध्याय है जिन्हें परिच्छेद कहा गया है।
  • “गुरूपदेशादध्येतुं शास्त्रं जडधियोऽप्यलम्।

​काव्यं तु जायते जातुं कस्यचित् प्रतिभावतः॥” (काव्यालंकार-1-14)

  • गुरु के उपदेश से श्रेष्ठ शास्त्रों का मुर्ख बुद्धि भी अध्ययन कर सकता है काव्य तो कोई प्रतिभाशाली ही बना सकता है।
  • इन्होंने काव्य ‘प्रतिभा’ को काव्य हेतु माना है।

रुद्रट-

  • समय-9 वीं शती
  • ग्रंथ-
  • काव्यालंकार
  • काव्य लक्षण-
  • ननु शब्दार्थो काव्यम्।
77

"शेखर निस्सन्देह एक व्यक्ति का अभिन्नतम निजी दस्तावेज (a record of personal suffering) है, यद्यपि यह साथ ही उस व्यक्ति के युग - संघर्ष का प्रतिबिम्ब भी है।"

यह टिप्पणी किस लेखक द्वारा उपन्यास की 'भूमिका' में की गई है?

  1. ((a))

    यशपाल

  2. ((b))

    अज्ञेय

  3. ((c))

    इलाचन्द्र जोशी

  4. ((d))

    जैनेन्द्र

Show Answer
Answer: ((b))

अज्ञेय

सही उत्तर है- अज्ञेय

Key Pointsप्रमुख विवरण-

  • संदर्भ: अज्ञेय ने यह बात अपने सुप्रसिद्ध मनोव��ज्ञानिक उपन्यास 'शेखर : एक जीवनी' के प्रथम भाग (1941) की भूमिका में लिखी थी।
  • कथन का अर्थ: इस टिप्पणी के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि यद्यपि यह उपन्यास 'शेखर' नामक पात्र के अत्यंत निजी अनुभवों, दुखों और मानसिक द्वंद्वों का लेखा-जोखा है, लेकिन यह केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह उस दौर के सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों (युग-संघर्ष) को भी गहराई से प्रतिबिंबित करता है।

Important Pointsअज्ञेय-

  • जन्म-1911-1987 ई.
  • काव्य रचनाएँ-
  • भग्नदूत (1933 ई.)
  • चिंता (1942 ई.)
  • हरी घास पर क्षण भर (1949 ई.)
  • बावरा अहेरी (1954 ई.)
  • आंगन के पार द्वार (1961 ई.)
  • कितनी नावों में कितनी बार (1967 ई.) आदि।

यशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।

इलाचंद्र जोशी-

  • जन्म- 1903-1982 ई.
  • हिन्दी हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
  • इलाचन्द्र जोशी भाषा हिंदी प्रसिद्धि मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार, काहानीकार व्आलोचक थे।
  • उपन्यास-
  • घृणामयी(1929ई.)
  • संन्यासी(1940ई.)
  • पर्दे की रानी(1942ई.)
  • प्रेत और छाया(1944ई.)
  • निर्वासित(1946ई.)
  • जिप्सी(1952ई.) आदि।

जैनेंद्र -

  • जन्म- 1905-1990 ई.
  • जन्म स्थान - अलीगढ़ के कौड़ीयागंज गांव में
  • अन्य नाम- उत्तर भारत का शरदचन्द्र।
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख मनोविश्लेषणवादी रचनाकार है।
  • प्रमुख निबंध-
  • प्रस्तुत प्रश्न
  • जड़ की बात
  • पूर्वोदय
  • साहित्य का श्रेय-प्रेय
  • सोच विचार आदि।
  • कहानी संग्रह- 
  • फाँसी (1929 ई.)
  • वातायन (1930 ई.)
  • नीलम देश की राजकन्या (1933 ई.)
  • एक रात (1934 ई.)
  • दो चिड़ियाँ (1935 ई.)
  • पाजेब (1942 ई.) आदि।
78

'आधे अधूरे' नाटक के आधार पर कौन से कथन सत्य हैं?

A. महेंद्र भी एक आदमी है जिसके अपना घर-बार है, पत्नी है, यह बात महेंद्र को अपना कहने वालों को शुरू से ही रास नहीं आई।

B. जो-जो बातें तुमने कहीं हैं अभी, वे बिल्कुल गलत हैं अपने में। लेकिन बाईस साल साथ जीकर ही, जानी हुई बातें हैं।

C. पर तुम लोग इससे बड़े होते हो, तो मैं छोड़ दूँगी कोशिश। हाँ इतना कहकर कि मैं अकेले दम ही इस घर की पूरी जिम्मेदारी उठा लूँगी।

D. उतावली क्यों होती हो? मुझे बात कह लेने दो। मुझसे उस वक्त तुम क्या चाहती थीं, मैं ठीक-ठीक नहीं जानता।

E. आपका पता नहीं था कि आप आने वाले हैं। पर आप तो हमेशा पीछे के दरवाज़े से ही आते हैं, इसलिए...।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल A, D

  2. ((b))

    केवल B, C

  3. ((c))

    केवल C, D

  4. ((d))

    केवल A, E

Show Answer
Answer: ((a))

केवल A, D

सही उत्तर है- केवल A, D

Key Pointsकथनों का विश्लेषण-

  • A. महेंद्र भी एक आदमी है... (सत्य): यह कथन महेंद्रनाथ की स्थिति को दर्शाता है जो अपनी पत्नी और बच्चों के बीच खुद को उपेक्षित महसूस करता है।
  • B. जो-जो बातें तुमने कहीं हैं अभी... (असत्य): यह विशिष्ट संवाद इस रूप में नाटक का मुख्य प्रतिपाद्य या प्रमाणित संवाद नहीं माना जाता है।
  • C. पर तुम लोग इससे बड़े होते हो... (असत्य): सावित्री अकेले जिम्मेदारी उठाने की बात तो करती है, लेकिन यह विशिष्ट वाक्यांश इस क्रम में उपलब्ध नहीं है।
  • D. उतावली क्यों होती हो? मुझे बात कह लेने दो... (सत्य): यह संवाद 'काले कपड़ों वाले पुरुष' (पुरुष-1/महेंद्रनाथ) और सावित्री के बीच के तनावपूर्ण संवादों का हिस्सा है।
  • E. आपका पता नहीं था कि आप आने वाले हैं... (असत्य): यह कथन इस नाटक के प्रमाणित संवादों की सूची में फिट नहीं बैठता है

Important Pointsआधे-अधूरे-

  • रचनाकार-मोहन राकेश
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1969 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • सावित्री, किन्नी, बिन्नी, अशोक, महेन्द्रनाथ, जगमोहन आदि।
  • विषय-
  • इसमें स्त्री-पुरुष संबंधों के खोखलेपन और पारिवारिक विघटन की समस्या को चित्रित किया गया है।
79

कमलेश्वर ने 'राजा निरबंसिया' की भूमिका में नयी कहानी की उपलब्धि रूप में किसका उल्लेख किया है?

  1. ((a))

    नयी भावभूमियों का सृजन

  2. ((b))

    नयी भूमिकाओं का सृजन

  3. ((c))

    नयी प्रेरणाओं का सृजन

  4. ((d))

    नयी आशाओं का सृजन

Show Answer
Answer: ((a))

नयी भावभूमियों का सृजन

सही उत्तर है- नयी भावभूमियों का सृजन

Key Pointsराजा निरबंसिया-

  • रचनाकार-कमलेश्वर
  • प्रकाशन वर्ष-1957ई.
  • विधा-कहानी
  • विषय-
  • 'राजा निरबसिया' कहानी कस्बाई जीवन पर आधारित है, जो आम आदमी की ही कथा कहती है।
  • कमलेश्वर ने दो भिन्न युगों की कहानियों को निरबंसिया कहानी आर्थिक विवशताओं, निरुपताओं द्वारा दांपत्य सम्बन्धों की समान्तर रूप से इस कहानी में रख दिया है।
  • एक ही समय में पुराने तथा आधुनिक युग की दो कहानियाँ साथ चलती है।

Important Pointsकमलेश्वर-

  • जन्म-1932-2007ई.
  • कमलेश्वर हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक एवं सशक्त लेखकों में से एक हैं।
  • इन्होने कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फिल्म पटकथा जैसी अनेक विधाओं में रचनाएँ की।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • नीली झील
  • तलाश
  • बयान
  • नागमणि
  • अपना एकांत
  • आसक्ति
  • ज़िंदा मुर्दे
  • जॉर्ज पंचम की नाक
  • मुर्दों की दुनिया
  • कस्बे का आदमी आदि।
80

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): डॉ. अम्बेडकर के अनुसार "सकारात्मक दृष्टि से मेरा समाजदर्शन तीन शब्दों में अन्तर्निहित कहा जा सकता है - स्वतंत्रता, समता तथा भ्रातृ-भाव ।... मैंने उनका अनुसरण अपने शिक्षक बुद्ध की शिक्षाओं से किया है।

कारण (R) : डॉ. अम्बेडकर की मान्यताएँ वास्तव में पश्चिमी क्रांति पर आधारित हैं, भारतीय दर्शन पर नहीं।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((c))

(A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

सही उत्तर है- (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

Key Pointsविश्लेषण-

  • अभिकथन (A): यह सत्य है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनका समाजदर्शन तीन शब्दों— स्वतंत्रता (Liberty), समता (Equality) और भ्रातृ-भाव (Fraternity)—में निहित है。 उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने ये सिद्धांत फ्रांसीसी क्रांति से उधार नहीं लिए हैं, बल्कि इनकी जड़ें धर्म में हैं और उन्होंने इन्हें अपने गुरु बुद्ध की शिक्षाओं से ग्रहण किया है。 3 अक्टूबर 1954 को ऑल इंडिया रेडियो पर दिए गए अपने भाषण "मेरा समाजदर्शन" में उन्होंने यही बात दोहराई थी。
  • कारण (R): यह असत्य है। कारण में कहा गया है कि डॉ. अम्बेडकर की मान्यताएँ पश्चिमी क्रांति पर आधारित हैं, भारतीय दर्शन पर नहीं। यह डॉ. अम्बेडकर के स्वयं के बयानों के विपरीत है। यद्यपि वे पश्चिमी उदारवाद और जॉन ड्यूई जैसे विचारकों से प्रभावित थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके जीवन के मुख्य दर्शन (स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व) का स्रोत भारतीय दर्शन, विशेष रूप से बुद्ध का धम्म है。 उन्होंने बुद्ध के धम्म को एक ऐसी सामाजिक क्रांति माना जो समानता और नैतिकता पर आधारित थी
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हिन्दी भाषा के संदर्भ में 'वैज्ञानिक लिपि' के गुणों से सम्बद्ध कौन से कथन 'असत्य' हैं-

A. वैज्ञानिक लिपि में लिपि चिह्न भाषा में प्रयुक्त हर व्यंजन और स्वर के लिए अलग-अलग होने चाहिए।

B. एक चिह्न से केवल एक ध्वनि व्यक्त होनी चाहिए, एकाधिक नहीं।

C. एक ध्वनि के लिए एक से अधिक लिपिचिह्न हो सकते हैं।

D. लेखन में लिपि चिह्नों का उच्चारण की दृष्टि से क्रम बद्ध होना आवश्यक नहीं है।

E. दो चिह्नों को एक पढ़े जाने का भ्रम नहीं होना चाहिए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    केवल C, D

  2. ((b))

    केवल A, B

  3. ((c))

    केवल B, D

  4. ((d))

    केवल C, E

Show Answer
Answer: ((a))

केवल C, D

सही उत्तर है- केवल C, D

Key Pointsकथनों का विश्लेषण-

एक वैज्ञानिक लिपि (जैसे देवनागरी) के आदर्श गुण निम्नलिखित होते हैं-

  • A. (सत्य): हर व्यंजन और स्वर के लिए अलग-अलग और स्पष्ट लिपि चिह्न होने चाहिए।
  • B. (सत्य): 'एक चिह्न-एक ध्वनि' का सिद्धांत अनिवार्य है, अर्थात एक चिह्न से केवल एक ही ध्वनि व्यक्त होनी चाहिए।
  • C. (असत्य): एक वैज्ञानिक लिपि में एक ध्वनि के लिए एक से अधिक लिपि चिह्न नहीं होने चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो वह लिपि की वैज्ञानिकता में दोष माना जाता है (जैसे देवनागरी में पहले 'झ' या 'अ' के दो रूप प्रचलित थे, जिन्हें अब मानकीकृत कर एक कर दिया गया है)।
  • D. (असत्य): लेखन में लिपि चिह्नों का उच्चारण की दृष्टि से क्रमबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिस क्रम में ध्वनि उच्चारित होती है, उसी क्रम में उसे लिखा जाना चाहिए।
  • E. (सत्य): लिपि में स्पष्टता होनी चाहिए ताकि दो चिह्नों को एक पढ़े जाने का भ्रम न हो (जैसे 'र' और 'व' को मिलाकर 'ख' जैसा भ्रम नहीं होना चाहिए)।
82

'बंग महिला' कहानी के आधार पर निम्न अंग्रेजी शब्दों को कहानी में पहले से बाद के क्रम में आने के आधार पर व्यवस्थित कीजिए।

A. इलेक्ट्रिसिटी (बिजली)

B. एप्लीकेशन (निवेदन पत्र)

C. डिपार्टमेण्ट (महकमा)

D. हॉलिडे (छुट्टी)

E. ट्राँसफर (बदली)

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A, D, B, C, E

  2. ((b))

    C, E, B, D, A

  3. ((c))

    A, B, C, D, E

  4. ((d))

    B, C, D, A, E

Show Answer
Answer: ((b))

C, E, B, D, A

कहानी के मूल पाठ के अनुसार, सही क्रम C, E, B, D, A है।

Key Points

  1. C. डिपार्टमेण्ट (महकमा): कहानी के प्रारंभ में वंशीधर के काम और उसके विभाग के संदर्भ में 'डिपार्टमेण्ट' शब्द का उल्लेख आता है।
  2. E. ट्रांसफर (बदली): इसके पश्चात वंशीधर की 'बदली' या तबादले की चर्चा होती है, जहाँ 'ट्रांसफर' शब्द का प्रयोग किया गया है।
  3. B. एप्लीकेशन (निवेदन पत्र): यात्रा और छुट्टी की व्यवस्था के लिए 'एप्लीकेशन' देने की बात आती है।
  4. D. हॉलिडे (छुट्टी): 'एप्लीकेशन' के संदर्भ में ही छुट्टियों या 'हॉलिडे' का जिक्र किया गया है।
  5. A. इलेक्ट्रिसिटी (बिजली): कहानी के अंतिम भाग में, जब पात्र इलाहाबाद स्टेशन या शहर के आधुनिक वातावरण के संपर्क में आते हैं, तब 'इलेक्ट्रिसिटी' (बिजली) का उल्लेख मिलता है।

Important Pointsदुलाईवाली-

  • रचनाकार- बंग महिला
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1907 ई.
  • पात्र-
  • बंशीधर, जानकी देई, नकल किशोर आदि।
  • विषय-
  • दो मित्रों का द्वारा किए गए मजाक का चित्रण किया गया है।

Additional Informationराजेन्द्रबाला घोष-

  • जन्म-1882-1951 ई.
  • छद्मनाम-बंग महिला
  • कहानियाँ-
  • चंद्रदेव से मेरी बातें(1904 ई.)
  • कुंभ में छोटी बहू(1906 ई.)
  • दालिया(1909 ई.) आदि।
83

निम्नलिखित पंक्तियाँ कामायनी (जयशंकर प्रसाद) के कौन से सर्ग से उधृत हैं?

"पहेली-सा जीवन है व्यस्त, उसे सुलझाने का अभिमान बताता है विस्मृति का मार्ग, चल रहा हूँ बनकर अनजान।"

  1. ((a))

    लज्जा

  2. ((b))

    श्रद्धा

  3. ((c))

    इड़ा

  4. ((d))

    आशा

Show Answer
Answer: ((b))

श्रद्धा

सही उत्तर है- श्रद्धा 

Key Pointsव्याख्या और संदर्भ-

  • प्रसंग: ये पंक्तियाँ नायक मनु द्वारा कही गई हैं। प्रलय के बाद जब मनु अकेले और हताश बैठे होते हैं, तब वे अपने जीवन की अनिश्चितता और जटिलता को एक 'पहेली' के समान बताते हैं।
  • भावार्थ: मनु कहते हैं कि मानव जीवन एक उलझी हुई पहेली की तरह है। इसे सुलझाने का अहंकार मनुष्य को अक्सर सत्य से दूर ले जाता है और वह विस्मृति (भूल) के मार्ग पर अनजान बनकर भटकता रहता है।
  • सर्ग: 'श्रद्धा' कामायनी का तीसरा सर्ग है, जहाँ मनु और श्रद्धा का प्रथम मिलन होता है और श्रद्धा मनु के जीवन में आशा का संचार करती है।

Important Pointsकामायनी-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष -1936 ई.
  • मुख्य पात्र -
  • मनु, श्रद्धा, इड़ा और कुमार।
  • कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं-
  • चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा ,स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य और आनंद।
  • मुख्य रस - निर्वेद(शांत रस)
  • मुख्य छंद - ताटंक
  • विषय-
  • इनकी कथावस्तु का आधार ऋग्वेद, छंदोग्य उपनिषद, शतपथ ब्राह्मण और श्रीमद्भागवात है।
  • इसमें मनोभावों को पात्रों के रूप में रूपांतरित किया है।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • रचनाएँ-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेमपथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।
84

"असल बात इतनी ही कि महेंद्र की जगह इनमें से कोई भी आदमी होता तुम्हारी जिंदगी में, तो साल-दो साल बाद तुम यही महसूस करती कि तुमने गलत आदमी से शादी कर ली है।" यह संवाद 'आधे-अधूरे' नाटक के किस पुरुष पात्र द्वारा कहा गया है?

  1. ((a))

    पुरुष एक

  2. ((b))

    पुरुष दो

  3. ((c))

    पुरुष तीन

  4. ((d))

    पुरुष चार

Show Answer
Answer: ((d))

पुरुष चार

सही उत्तर है- पुरुष चार

Key Pointsआधे-अधूरे-

  • रचनाकार-मोहन राकेश
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1969 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • सावित्री, किन्नी, बिन्नी, अशोक, महेन्द्रनाथ, जगमोहन आदि।
  • विषय-
  • इसमें स्त्री-पुरुष संबंधों के खोखलेपन और पारिवारिक विघटन की समस्या को चित्रित किया गया है।

Important Pointsमोहन राकेश-

  • नाटक-
  • आषाढ़ का एक दिन(1958 ई.)
  • लहरों के राजहंस(1963 ई.) आदि।
85

हिन्दी निबंध से संदर्भित निम्नलिखित मन्तव्यों में से कौन-सा कथन आचार्य शुक्ल के निबंध 'कविता क्या है' से लिया गया है ?

  1. ((a))

    काव्य में अर्थग्रहण मात्र से काम नहीं चलता, बिम्बग्रहण अपेक्षित होता है।

  2. ((b))

    मनुष्य की बर्बरता घटी कहाँ है, वह तो बढ़ती जा रही है।

  3. ((c))

    महीनों से मन बेहद बेहद उदास है। उदासी की कोई खास वजह नहीं।

  4. ((d))

    हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं।

Show Answer
Answer: ((a))

काव्य में अर्थग्रहण मात्र से काम नहीं चलता, बिम्बग्रहण अपेक्षित होता है।

आचार्य शुक्ल के निबंध 'कविता क्या है' से लिया गया है- काव्य में अर्थग्रहण मात्र से काम नहीं चलता, बिम्बग्रहण अपेक्षित होता है।

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस निबंध में स्पष्ट किया है कि कविता का प्रभाव पाठक के हृदय पर तब तक पूरी तरह नहीं पड़ता, जब तक कि शब्दों के माध्यम से उसके मन में एक स्पष्ट बिम्ब (Image) या मानसिक चित्र न बन जाए। वे मानते हैं कि केवल शब्दों का अर्थ समझ लेना (अर्थग्रहण) पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस दृश्य या भाव का सजीव रूप (बिम्बग्रहण) आँखों के सामने आना आवश्यक है

Key Pointsअन्य विकल्पों का विश्लेषण-

  • विकल्प 2: "मनुष्य की बर्बरता घटी कहाँ है, वह तो बढ़ती जा रही है।" — यह कथन आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' से लिया गया है।
  • विकल्प 3: "महीनों से मन बेहद बेहद उदास है। उदासी की कोई खास वजह नहीं।" — यह पंक्तियाँ विद्यानिवास मिश्र के प्रसिद्ध ललित निबंध 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' की शुरुआती पंक्तियाँ हैं।
  • विकल्प 4: "हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं।" — यह कथन सरदार पूर्ण सिंह के निबंध 'मजदूरी और प्रेम' (अध्याय: 'हल चलाने वाले का जीवन') से संबंधित है।

Important Pointsकविता क्या है? -

  • रचनाकार - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1909 ई.
  • विषय -
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ - चिंतामणि

Additional Informationरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • इनके निबंधों का संग्रह चार भागों में संकलित है-
  • चिंतामणि भाग-1 1939 ई. में रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ही संपादित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-2 1945 ई. में विश्वनाथ प्रस���द मिश्र के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-3 नामवर सिंह के संपादन में 1983 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-4 2002 ई. में कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
86

'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के निम्नलिखित गीत की पंक्तियों को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए :

A. शीतलता फैलाता बह जा

B. बनकर विनम्र अभिमान मुझे

C. मेरा अस्तित्व बता, रह जा

D. ये कसक अरे आँसू सह जा

E. बन प्रेम छलक कोने-कोने

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    D, B, C, E, A

  2. ((b))

    E, A, C, B, D

  3. ((c))

    A, C, E, B, D

  4. ((d))

    C, A, B, E, D

Show Answer
Answer: ((a))

D, B, C, E, A

सही उत्तर है- D, B, C, E, A

Key Points

गीत की पंक्तियों का क्रमानुसार व्यवस्थित रूप-

  1. D. ये कसक अरे आँसू सह जा
  2. B. बनकर विनम्र अभिमान मुझे
  3. C. मेरा अस्तित्व बता, रह जा
  4. E. बन प्रेम छलक कोने-कोने
  5. A. शीतलता फैलाता बह जा

Important Points

व्याख्या-

  • प्रसंग: यह गीत नाटक के दूसरे अंक के प्रारंभ में 'मंदाकिनी' द्वारा गाया जाता है, जो नाटक के गंभीर और विद्रोही स्वर के बीच प्रेम और करुणा की अभिव्यक्ति करता है।
  • भावार्थ: इन पंक्तियों के माध्यम से नायिका अपने हृदय की पीड़ा और प्रेम को आँसुओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास करती है। वह अपने आँसुओं से कहती है कि वे चुपचाप बहकर उसे शीतलता प्रदान करें और उसके अस्तित्व को बनाए रखें।

Additional Informationध्रुवस्वामिनी-

  • रचनाकार-जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष-1933 ई.
  • विषय-
  • यह नाटक 3 अंकों में विभक्त है।
  • इसमें स्त्री-पुनर्विवाह का चित्रण किया गया है।
  • साथ ही स्त्री-पात्रों की सशक्तिकरण का चित्रण भी किया गया है।
  • पुरुष पात्र-
  • चन्द्रगुप्त,रामगुप्त,शिखरस्वामी,शकराज आदि।
  • स्त्री पात्र-
  • ध्रुवस्वामिनी,मन्दाकिनी,कोमा आदि।
87

रूपवादी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले आलोचकों में इनमें से कौन शामिल नहीं हैं?

  1. ((a))

    बोरिस इकनेबाम

  2. ((b))

    जीन मोरेआस

  3. ((c))

    विक्टर श्क्लोवस्की

  4. ((d))

    रोमन जेकोब्सन

Show Answer
Answer: ((b))

जीन मोरेआस

सही उत्तर है- जीन मोरेआस

Key Pointsप्रमुख विवरण-

  • जीन मोरेआस : ये प्रसिद्ध फ्रांसीसी कवि थे जिन्होंने 1886 में 'ली फिगारो' (Le Figaro) में 'प्रतीकवाद का घोषणापत्र' प्रकाशित किया था। वे प्रतीकवादी आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार माने जाते हैं, न कि रूपवाद के।
  • रूपवादी आंदोलन: यह 20वीं सदी की शुरुआत (लगभग 1915-1930) में रूस में विकसित हुआ एक साहित्यिक आलोचना आंदोलन था।

Important Pointsरूपवाद के प्रमुख नेतृत्वकर्ता-

रूपवाद मुख्य रूप से दो समूहों में संगठित था, जिनके प्रमुख नेता निम्नलिखित थे-

  1. विक्टर श्क्लोवस्की (Viktor Shklovsky): इन्होंने 'ओपोजाज' (OPOJAZ - काव्य भाषा अध्ययन समिति) की स्थापना की और 'विप्रतीतीकरण' (Defamiliarization) का प्रसिद्ध सिद्धांत दिया।
  2. रोमन जेकोब्सन (Roman Jakobson): इन्होंने 'मॉस्को लिंग्विस्टिक सर्कल' की स्थापना की और भाषा विज्ञान तथा संरचनावाद में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  3. बोरिस इकनेबाम (Boris Eichenbaum): ये 'ओपोजाज' के सक्रिय सदस्य थे और इन्होंने रूपवादी पद्धति के सिद्धांतों की व्याख्या करने वाले महत्वपूर्ण निबंध लिखे।
88

जैनेन्द्र द्वारा रचित कहानी 'अपना-अपना भाग्य' में "हिन्दुस्तानी नौनिहालों" की आंखों का रंग कौन-सा है ?

  1. ((a))

    पीली-पीली

  2. ((b))

    लाल-लाल

  3. ((c))

    भूरी-भूरी

  4. ((d))

    काली-काली

Show Answer
Answer: ((a))

पीली-पीली

सही उत्तर है- पीली-पीली

Key Points

  • "भागते, खेलते, हंसते, शरारत करते लाल-लाल अंग्रेज बच्चे थे और पीली-पीली आंखें फाड़े, पिता की उंगली पकड़कर चलते हुए अपने हिन्दुस्तानी नौनिहाल भी थे"।

Important Pointsअपना-अपना भाग्य-

  • रचनाकार- जैनेन्द्र
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • लेखक, लेखक का मित्र, 10 वर्षीय बालक
  • विषय-
  • कहानी द्वारा लेखक ने अपने-अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर नैतिकता, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया है।
  • कहानी का बालक केवल इसलिए मृत्यु को प्राप्त हो जाता है क्योंकि कोई उसकी मदद नहीं करता।
  • यह मनोवैज्ञानिक कहानी है।

Additional Informationजैनेन्द्र-

  • जन्म-1905-1988 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • फाँसी(1929 ई.)
  • वातायन(1930 ई.)
  • नीलम देश की राजकन्या(1933 ई.)
  • दो चिड़िया(1935 ई.)
  • पाजेब(1942 ई.) आदि।
89

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): उर्वशी और पुरूरवा की कथा कई रूपों में मिलती है और उसकी व्याख्या भी कई प्रकार से की गई है। इस कथा का प्राचीनतम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। किन्तु उस सूक्त से इतना ही विदित होता है कि उर्वशी पुरूरवा को छोड़कर चली गई थी।

कारण (R) : उर्वशी काव्य के आधार पर अंततः पुरूरवा और उर्वशी का मिलन हो जाता है। जिसके पश्चात् वह सदा के लिए साथ रहते हैं। उनके क्षणभर के वियोग की भी सूचना नहीं मिलती।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((c))

(A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

सही उत्तर है- (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

Key Points

  • अभिक्थन (A): यह कथन सत्य है।
  • उर्वशी और पुरूरवा की प्रेम-कथा का प्राचीनतम उल्लेख ऋग्वेद के 10वें मंडल के 95वें सूक्त में मिलता है。
  • यह सूक्त एक संवाद सूक्त के रूप में है, जिसमें पुरूरवा और उर्वशी के बीच बातचीत होती है。
  • ऋग्वेद के इस सूक्त से स्पष्ट होता है कि उर्वशी कुछ शर्तों के साथ पुरूरवा के साथ रही थी, लेकिन शर्तों के टूटने पर वह उन्हें छोड़कर चली गई थी。 पुरूरवा उसके पीछे-पीछे जाते हैं और उसे लौटने के लिए मनाते हैं, लेकिन उर्वशी वापस नहीं आती。
  • कारण (R): यह कथन असत्य है।
  • रामधारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध महाकाव्य 'उर्वशी' के आधार पर, पुरूरवा और उर्वशी का मिलन शाश्वत या सदा के लिए नहीं होता。
  • दिनकर की रचना में भी अंततः वियोग दिखाया गया है। उर्वशी अपने देवलोक के कर्तव्यों के कारण पुरूरवा से बिछड़ जाती है。
  • पुरूरवा इस वियोग की वेदना से विह्वल होकर अंततः संन्यास के मार्ग पर चले जाते हैं。 अतः यह कहना गलत है कि वे सदा के लिए साथ रहते हैं और उनके वियोग की क��ई सूचना नहीं मिलती।

Important Pointsउर्वशी काव्य-

  • जयशंकर प्रसाद कृत प्रथम रचना।
  • प्रकाशन वर्ष-1909 ई.
  • विषय-
  • ‘उर्वशी’ का केंद्रीय तत्व काम है।
  • मुख्य पात्र-
  • पुरुरवा-रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द से मिलने वाले सुखों से उद्वेलित मनुष्य।
  • उर्वशी-चक्षु, रसना तथा घ्राण की कामनाओं का प्रतीक है।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
  • काव्य रचनाएं-
  • प्रेम-पथिक (1909 ई.)
  • कानन कुसुम (1918 ई.)
  • झरना (1918 ई.)
  • आँसू (1925 ई.)
  • लहर (1933 ई.)
  • कामायनी (1936 ई.) आदि।
90

"अब तो भारत की सामाजिक संस्कृति की दिन-रात माला जपने वाले बहुतेरे हो गए हैं।"

उपर्युक्त वाक्य किस निबंध से लिया गया है?

  1. ((a))

    दिल्ली दरबार दर्पण

  2. ((b))

    मजदूरी और प्रेम

  3. ((c))

    संस्कृति और सौन्दर्य

  4. ((d))

    मेरे राम का मुकुट भीग रहा है

Show Answer
Answer: ((c))

संस्कृति और सौन्दर्य

सही उत्तर है- संस्कृति और सौन्दर्य

Key Pointsप्रमुख विवरण-

  • निबंधकार: डॉ. नामवर सिंह हिंदी के प्रख्यात आलोचक हैं।
  • विषय-वस्तु: इस निबंध में नामवर सिंह ने हजारी प्रसाद द्विवेदी के 'अशोक के फूल' और अन्य रचनाओं के आलोक में भारतीय संस्कृति की बहुआयामी और मिश्रित (सामासिक) प्रकृति की व्याख्या की है।
  • संदर्भ: लेखक इस पंक्ति के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष करते हैं जो भारतीय संस्कृति की विविधता और सामासिकता की गहरी समझ रखे बिना केवल उसका सतही प्रचार (माला जपना) करते हैं।

Important Pointsसंस्कृति और सौंदर्य-

  • लेखक - नामवर सिंह
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष  -1982 ई.
  • मुख्य - यह निबंध 'दूसरी परंपरा की खोज'(1982 ई.)संग्रह में संकलित है।
  • इसमें कुल 8 निबंध है।

Additional Informationरामविलास शर्मा-

  • जन्म- 1912-2000 ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • प्रेमचन्द(1941)
  • भारतेन्दु युग(1943)
  • निराला(1946)
  • प्रेमचन्द और उनका युग(1952)
  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र(1953)
  • प्रगतिशील साहित्य की समस्याएँ (1954)
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और हिन्दी आलोचना(1955) आदि।
91

'ईदगाह' कहानी के आधार पर सम्मी ने मेले से क्या खरीदा ?

  1. ((a))

    भिश्ती

  2. ((b))

    बंदूक

  3. ((c))

    खंजरी

  4. ((d))

    वकील साहब

Show Answer
Answer: ((c))

खंजरी

सही उत्तर है- खंजरी

 

ईदगाह-

  • रचनाकार-प्रेमचंद
  • विधा-कहानी
  • प्रकाशन वर्ष-1933 ई.
  • पात्र-
  • हामिद, अमीना, महमूद, मोहसिन, नूरे, सम्मी आदि।
  • विषय-
  • बालमनोविज्ञान पर लिखी गई कहानी है।
  • गरीबी और अभावों में किस प्रकार बचपन की मासूमियत खत्म हो जाती है और बच्चे समय से पहले परिपक्व हो जाते है, इसका यथार्थ चित्रण किया गया है।

Important Pointsप्रेमचंद-

  • जन्म-1880-1936 ई.
  • अन्य नाम-
  • धनपत राय, नवाब राय
  • कहानियाँ-
  • बड़े घर की बेटी(1910 ई.)
  • नमक का दारोगा(1913 ई.)
  • सौत(1915 ई.)
  • पंच परमेश्वर(1916 ई.)
  • पुस की रात(1930 ई.) आदि।
92

'पैरों के नीचे जलधर हों, बिजली से उनका खेल चले,

संकीर्ण कगारों के नीचे, शत-शत झरने बेमेल चले'।

उपरोक्त पंक्ति प्रसाद के किस नाटक से ली गईं है?

  1. ((a))

    स्कंदगुप्त

  2. ((b))

    चंद्रगुप्त

  3. ((c))

    ध्रुवस्वामिनी

  4. ((d))

    कामना

Show Answer
Answer: ((c))

ध्रुवस्वामिनी

सही उत्तर है- ध्रुवस्वामिनी

Key Pointsप्रमुख विवरण-

  • पात्र और प्रसंग: यह गीत नाटक के प्रथम अंक के अंत में मंदाकिनी द्वारा गाया जाता है। यह एक वीर और ओजस्वी गीत है जो साहसी पथिकों और वीरों को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
  • भावार्थ: पंक्तियों का अर्थ है कि चाहे पैरों के नीचे बादल (जलधर) उमड़ रहे हों और बिजली उनके साथ खेल रही हो, और संकीर्ण रास्तों के नीचे सैकड़ों झरने बह रहे हों, फिर भी एक वीर को अपनी मंजिल की ओर बढ़ते र���ना चाहिए।
  • नाटक का संदेश: 'ध्रुवस्वामिनी' नाटक मुख्य रूप से नारी-अस्मिता, राजधर्म और तत्कालीन समाज के प्रति विद्रोही स्वर को मुखरित करता है

Important Pointsध्रुवस्वामिनी-

  • रचनाकार-जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष-1933 ई.
  • विषय-
  • यह नाटक 3 अंकों में विभक्त है।
  • इसमें स्त्री-पुनर्विवाह का चित्रण किया गया है।
  • साथ ही स्त्री-पात्रों की सशक्तिकरण का चित्रण भी किया गया है।
  • पुरुष पात्र-
  • चन्द्रगुप्त,रामगुप्त,शिखरस्वामी,शकराज आदि।
  • स्त्री पात्र-
  • ध्रुवस्वामिनी,मन्दाकिनी,कोमा आदि।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937ई.
  • अन्य नाटक-
  • सज्जन(1910 ई.)
  • कल्याणी परिणय(1912 ई.)
  • करुणालय(1912 ई.)
  • विशाख(1921 ई.)
  • कामना(1927 ई.) आदि।
93

महाभोज (नाट्य रूपान्तर) में पात्र और उसकी भूमिका का मिलान कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (भूमिका)
A. नरोत्तमI. ‘मशाल’ का सहायक सम्पादक
B. मोहन सिंहII. प्रेस रिपोर्टर
C. दत्ता साहबIII. ‘मशाल’ साप्ताहिक के सम्पादक
D. भवानीIV. पुलिस कांस्टेबल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  2. ((b))

    A-I, B-II, C-III, D-IV

  3. ((c))

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  4. ((d))

    A-IV, B-III, C-II, D-I

Show Answer
Answer: ((a))

A-II, B-IV, C-III, D-I

सही उत्तर है- A-II, B-IV, C-III, D-I

Key Pointsविवरण-

  • दत्ता साहब (C-III): ये 'मशाल' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के सम्पादक ह���ं, जो अक्सर सत्ता पक्ष (दा साहब) के इशारों पर खबरें छापते हैं।
  • भवानी (D-I): ये 'मशाल' समाचार पत्र में सहायक सम्पादक की भूमिका में हैं और दत्ता साहब के साथ काम करते हैं।
  • नरोत्तम (A-II): नरोत्तम इस नाटक में एक प्रेस रिपोर्टर है जो 'मशाल' अखबार के लिए खबरें जुटाता है।
  • मोहन सिंह (B-IV): यह पात्र पुलिस विभाग में एक कांस्टेबल है।

Important Pointsमहाभोज-

  • रचनाकार- मन्नू भण्डारी
  • प्रकाशन वर्ष- 1982 ईo
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र-
  • दासाहब, विसू, लखन ,जमुना बहन ,शुकुल बाबू, सक्सेना, जोरावर, रुकमा ,बिंदेश्वरी, आदि।
  • विषय-
  • चुनावी राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार का यथार्थवादी शैली में चित्रण हुआ है।
  • यह एक राजनीतिक नाटक है।

Additional Informationमन्नू भण्डारी-

  • जन्म- 1931 - 1921 ईo
  • उपन्यास-
  • महाभोज (1979)
  • आपका बंटी (1971)
  • स्वामी (2003)
  • नाटक-
  • बिना दीवारों के घर (1965)
94

"फूल के बड़े कटोरे में बाजरे का दलिया और दूध छोटी थाली में सत्तू, गुड़ या पुये, रंगीन डलिया में भुरभुरे चने या भुने शकरकन्द आदि के रूप में जो जलपान मिलता था उसे पंचायती कहना चाहिए।" उपरोक्त पंक्तियाँ किस रचना से ली गई हैं ?

  1. ((a))

    ठकुरी बाबा

  2. ((b))

    माटी की मूरतें

  3. ((c))

    जामुन का पेड़

  4. ((d))

    एक कहानी यह भी

Show Answer
Answer: ((a))

ठकुरी बाबा

सही उत्तर है- ठकुरी बाबा

Key Pointsप्रमुख विवरण-

  • संदर्भ: इन पंक्तियों में लेखिका ने ग्रामीण परिवेश में मेहमाननवाजी और खान-पान की सादगी का सजीव चित्रण किया है। यहाँ 'पंचायती' जलपान का अर्थ एक ऐसे सामूहिक भोज से है जहाँ विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन (जैसे बाजरे का दलिया, सत्तू, पुये आदि) सभी के लिए उपलब्ध होते थे।
  • रचनाकार: महादेवी वर्मा, जो 'छायावाद' के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। 'ठकुरी बाबा' उनके प्रसिद्ध संस्मरण संग्रह 'स्मृति की रेखाएँ' में संकलित है।
  • पात्र: 'ठकुरी बाबा' इस रेखाचित्र के मुख्य पात्र हैं, जो अपनी भावुकता, सरलता और सभी के प्रति स्नेह के लिए जाने जाते हैं

Important Pointsठकुरी बाबा -

  • रचनाकार - महादेवी वर्मा
  • प्रकाशन वर्ष - 1943 ई. ( स्मृति की रेखाएं में संकलित)।
  • विधा - रेखाचित्र
  • मुख्य -
  • अपने रेखा चित्र में महादेवी वर्मा ने अपने संपर्क में आने वाले शोषित व्यक्तियों दीन - हीन नारियों, साहित्यकारों, जीव - जंतुओं आदि का संवेदनात्मक चित्रण किया है।
  • ठकुरी बाबा इनका संस्मरणात्मक रेखाचित्र है।
<br>

महादेवी वर्मा-

  • जन्म -1907-1987 ई.
  • अन्य नाम - आधुनिक युग की मीरा
  • छायावादी मुख्य कवयित्री रही है।
  • रचनाएँ-
  • काव्य संग्रह - 
  • ​नीहार(1930 ई.)
  • रश्मि(1932 ई.)
  • नीरजा(1935 ई.)
  • सांध्यगीत(1936 ई.)
  • यामा(1940 ई.) आदि।
  • रेखाचित्र - 
  • ​स्मृति की रेखाएँ(1943 ई.)
  • मेरा परिवार(1972 ई.) आदि।
  • निबन्ध संग्रह - 
  • ​शृंखला की कड़ियाँ(1942 ई.)
  • विवेचनात्मक गद्य(1942 ई.)
  • साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध(1962 ई.)
  • संकल्पिता(1969 ई.) आदि।
  • ललित निबन्धों का संग्रह - क्षणदा(1956 ई.) आदि।
  • कहानी संग्रह - गिल्लू, नीलकंठ आदि।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): सजनवा वैरी हो गए हमार। सजनवा.... अरे चिठिया हो ते सब कोई बाँचे चिठिया हो तो हाय करमवा, हाय करमवा।

कारण (R) : इस गीत को गाने का भाव/कारण यह है कि गायक इस गीत को उस सजनवा की याद में गा रहा है, जो उसे अब नहीं मिल रहा। चिट्ठी को सब पढ़ सकते हैं, करम की कौन कहे। यह छोकरा नाच का गीत है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((a))

दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

Key Pointsव्याख्या-

  • अभिकथन (A): यह सत्य है। "सजनवा बैरी हो गए हमार... चिठिया हो ते सब कोई बाँचे... हाय करमवा" फिल्म 'तीसरी कसम' (1966) का एक विरह-प्रधान लोकगीतनुमा गीत है। यह गीत गाड़ीवान हीरामन (राज कपूर) द्वारा फिल्म में अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए गाया जाता है।
  • कारण (R): यह सत्य है और व्याख्या करता है। इस गीत की मूल संवेदना विरह और नियति (भाग्य) पर आधारित है। गीत की पंक्तियों का अर्थ है कि यदि विरह का कारण कोई संदेश या पत्र (चिठ्ठी) होता, तो उसे पढ़कर समाधान निकाला जा सकता था, परंतु जब भाग्य (करमवा) ही रूठ जाए, तो उसे कोई नहीं पढ़ सकता।
  • संदर्भ: यह एक 'छोकरा नाच' का गीत है। कहानी में इस गीत का प्रयोग ग्रामीण अंचल की मासूमियत और एक तरफा प्रेम की टीस को दिखाने के लिए किया गया है। कारण (R) गीत के भाव और उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि (छोकरा नाच) दोनों को स्पष्ट करता है, जो अभिकथन (A) में उद्धृत पंक्तियों का आधार है।
96

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में है।

अभिकथन (A): भारतेन्दु के 'जाति विवेकिनी सभा' और 'सबै जाति गोपाल की' लेखों में सामाजिक व्यंग्य है। काशी के पंडित जो किसी लोभ वश जाति व्यवस्था किया करते थे, वे ही इसके लक्ष्य हैं।

कारण (R) : भारतेन्दु-युग में इस प्रकार की नाटकीय शैली का बड़ा प्रचार था किन्तु आगे चलकर हिन्दी के लेखकों ने जाने क्यों इसका परित्याग कर दिया।

उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    दोनों (A) और (R) सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है

  2. ((b))

    दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

  3. ((c))

    (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है

  4. ((d))

    (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है

Show Answer
Answer: ((b))

दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

सही उत्तर है- दोनों (A) और (R) सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

Key Pointsविश्लेषण-

  • अभिकथन (A): यह सत्य है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के लेख 'जाति विवेकिनी सभा' और 'सबै जाति गोपाल की' (जिसे 'सवैयजात गोपाल की' भी कहा जाता है) तीखे सामाजिक व्यंग्य हैं। इन लेखों का मुख्य लक्ष्य काशी के वे पंडित और धर्माधिकारी थे जो अपने निजी स्वार्थ और लोभ के वशीभूत होकर जाति-व्यवस्था के कठोर और मनमाने नियम बनाया करते थे। उदाहरण के तौर पर, 'जाति विवेकिनी सभा' में एक गड़ेरिये को दक्षिणा के बदले क्षत्रिय होने की व्यवस्था (सर्टिफिकेट) मिलने का हास्यपूर्ण चित्रण है।
  • कारण (R): यह सत्य है, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है। भारतेन्दु-युग में इस प्रकार की नाटकीय और संवादात्मक शैली (पत्रों के संवाद जैसी) का निबंधों में बहुत अधिक प्रचलन था। भारतेन्दु ने स्वयं कई निबंध इसी शैली में लिखे थे ताकि वे जनसामान्य के लिए अधिक प्रभावी और मनोरंजक हों। आगे चलकर हिन्दी गद्य के विकास के साथ, विशेषकर द्विवेदी युग में, लेखकों ने इस अनौपचारिक और व्यंग्यात्मक शैली का परित्याग कर अधिक गम्भीर, विचारात्मक और मानकीकृत शैली को अपना लिया।
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'प्रेमचंद घर में' के आधार पर पंक्तियों का सही अनुक्रम व्यवस्थित कीजिए।

A. उमर में वह मुझसे ज्यादा थीं। जब मैंने उसकी सूरत देखी तो मेरा खून सूख गया।

B. मैं स्वयं तकलीफ सहने को तैयार हूँ; परंतु स्त्री जाति की तकलीफ़ मैं नहीं देख सकती।

C. कुछ पूरब का रीति-रिवाज ऐसा है कि जब मुझे घर में लोगों ने बुलाया।

D. जब तक इन्सान अंधेरी रात न देखे तब तक रोशनी की वक़्त उसे कैसे मालूम हो।

E. जब हम ऊँट गाड़ी से उतरे, मेरी स्त्री ने हाथ पकड़कर चलना शुरू किया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    E, C, B, A, D

  2. ((b))

    E, C, A, B, D

  3. ((c))

    C, E, D, A, B

  4. ((d))

    C, E, A, D, B

Show Answer
Answer: ((d))

C, E, A, D, B

सही उत्तर है- C, E, A, D, B

Key Pointsसही अनुक्रम की व्याख्या-

  1. C. कुछ पूरब का रीति-रिवाज ऐसा है कि जब मुझे घर में लोगों ने बुलाया: इसके बाद घर के भीतर के सामाजिक और पारंपरिक परिवेश का वर्णन आता है।
  2. E. जब हम ऊँट गाड़ी से उतरे, मेरी स्त्री ने हाथ पकड़कर चलना शुरू किया: यह पंक्ति प्रेमचंद और उनकी पत्नी के किसी यात्रा से लौटने या घर पहुँचने के प्रारंभिक दृश्य को दर्शाती है।
  3. A. उमर में वह मुझसे ज्यादा थीं। जब मैंने उसकी सूरत देखी तो मेरा खून सूख गया: यह प्रेमचंद के अपनी पत्नी (शिवरानी देवी) के प्रति शुरुआती संकोच और उनके प्रभाव का व्यक्तिगत चित्रण है।
  4. D. जब तक इन्सान अंधेरी रात न देखे तब तक रोशनी की वक़्त उसे कैसे मालूम हो: यह जीवन के दार्शनिक पक्ष को उजागर करने वाली पंक्ति है, जो अक्सर संस्मरण के अंत में या किसी गहरे विचार के साथ आती है।
  5. B. मैं स्वयं तकलीफ सहने को तैयार हूँ; परंतु स्त्री जाति की तकलीफ़ मैं नहीं देख सकती: यह प्रेमचंद के उदार व्यक्तित्व और महिलाओं के प्रति उनके गहरे सम्मान को प्रकट करने वाला प्रसिद्ध कथन है।​

Important Pointsप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी देवी
  • विधा-जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
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"नर-नारी एक दूसरे के पूरक और भाग्यविधाता हैं, वे परस्पर की रीझ और खीझ में अपने-अपने अभावों और उनकी पूर्ति के लिए ही पूर्व कर्मानुसार मिलते हैं।"

उपरोक्त कथन 'मानस के हंस' उपन्यास के किस पात्र द्वारा कहा गया है ?

  1. ((a))

    रत्नावली

  2. ((b))

    रामू

  3. ((c))

    तुलसीदास

  4. ((d))

    बेनीमाधव

Show Answer
Answer: ((c))

तुलसीदास

सही उत्तर है- तुलसीदास

Key Pointsमानस का हंस -

  • उपन्यासकार - अमृतलाल नागर
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1972 ई.
  • पात्र-
  • मैना कहारिन
  • बतासो
  • रतना
  • श्यामो की बुआ
  • बाबा -तुलसीदास
  • राजा -रजिया नाम से पुकारे जाने वाला पात्र, बाबा से आयु में एक दिन छोटे
  • संत बेनीमाधव (सूकरखेत निवासी शिष्य)- पचास-पचपन वर्षीय
  • रामू द्विवेदी (काशी से आए हुए शिष्य) -बाबा के शिष्य, इकतीस वर्षीय
  • बकरीदी कक्का- बाबा से आयु में चार दिन बड़े
  • पण्डित गणपति उपाध्याय -बाबा के पुराने शिष्य, अड़सठ-उनहत्तर वर्षीय
  • बूढ़ा रमज़ानी - बकरीदी दर्ज़ी का छोटा बेटा, इकसठ-बासठ वर्षीय
  • शिवदीन दुबे, नन्हकू, मनकू- गाँव के लोग
  • हुलसिया-पंडाइन की मुँहबोली ननद
  • पंडाइन
  • पण्डित आत्माराम
  • भैरोसिंह
  • विषय -
  • यह उपन्यास तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।
  • इसमें तुलसी के व्यक्तित्व की विभिन्न परतों को उजागर किया गया है।
  • व्यक्तित्व के साथ-साथ इनके कृतित्व का भी उल्लेख किया गया है।

Additional Informationअमृतलाल नागर-

  • जन्म - 1916-1960  ई.
  • मुख्य उपन्यास -
  • बूंद और समुंद्र(1956 ई.)
  • शतरंज के मोहरे(1959 ई.)
  • सुहाग के नुपूर(1960 ई.)
  • अमृत और विषय(1966 ई.) आदि।
  • खंजन नयन(1981 ई.) उपन्यास सूरदास के जीवन पर आधारित है।
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यह पंक्ति किस उपन्यास की प्रस्तावना में लिखी गई है -

"1969 में एक सुविख्यात समीक्षक ने अपनी बहुत लम्बी समीक्षा इस वाक्य पर समाप्त की अपठित रह जाना ही इसकी नियति है।"

  1. ((a))

    धरती धन न अपना

  2. ((b))

    तमस

  3. ((c))

    झूठा सच

  4. ((d))

    राग दरबारी

Show Answer
Answer: ((d))

राग दरबारी

सही उत्तर है- राग दरबारी

Key Pointsधरती धन न अपना-

  • रचनाकार-जगदीशचंद्र
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1972 ई.
  • विषय-
  • इसमें स्वाधीनता पूर्व पंजाब के ग्रामीण दलित जीवन की कथा कही गई है।
  • दलितों के नारकीय जीवन एवं उच्च वर्गीय समाज द्वारा उनके शोषण का चित्रण हुआ है।

तमस-

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1973 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • ​नत्थू, मुरादअली, बक्श जी, मेहता जी, रिचर्ड, लीजा, हरनाम सिंह, बंतो, राजो आदि।
  • विषय-
  • इसमें लाहौर के आस-पास के पाँच दिनों की कहानी वर्णित है।
  • यह 1947ई. के मार्च-अप्रैल में पंजाब में हुए भयानक सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है।
  • यह उपन्यास 2 खण्डों में विभाजित है-
  • 1)साम्प्रदायिक तनाव की कहानी
  • 2)अनेक गाँव उपन्यास की परिधि में आते हैं।
  • इसमें सांप्रदायिक उन्माद के चित्रण के साथ- साथ उन स्थितियों और कारणों का भी चित्रण हुआ है जिनके फलस्वरूप आपसी वैमनस्य ने दंगों का रूप ले लिया।
  • ब्रिटिश शासन और उसके कारिंदों को दंगे भड़काने की योजना का सूत्रधार चित्रित किया गया है।

झूठा-सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • मुख्य पात्र-
  • तार
  • जयदेव आदि।
  • विषय-
  • 'वतन और देश' तथा 'देश का भविष्य' नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उपरान्त चारित्रिक स्खलन एवं विविध विडम्बनाओं का व्यापक फलक पर कलात्मक चित्र उकेरा गया है।
  • झूठा सच (1958-60) हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।

राग दरबारी-

  • रचनाकार-श्रीलाल शुक्ल
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1968 ई.
  • विषय-
  • पूर्वांचल के गाँव शिवपालगंज के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का यथार्थ चित्रण हुआ है।

Additional Informationजगदीशचंद्र-

  • जन्म-19396 ई.
  • उपन्यास-
  • यादों का पहाड़(1966 ई.)
  • आधा-पुल(1973 ई.)
  • नरक कुंड में बास(1994 ई.) आदि।

भीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003 ई.
  • उपन्यास-
  • झरोखा(1967 ई.)
  • कड़ियाँ(1970 ई.)
  • बसंती(1980 ई.)
  • मय्यादास की माड़ी(1988 ई.) आदि।

यशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।

श्रीलाल शुक्ल-

  • जन्म-1925-2011 ई.
  • उपन्यास-
  • सुनी घाटी का सूरज(1957 ई.)
  • अज्ञातवास(1962 ई.)
  • सीमाएं टूटती हैं(1973 ई.)
  • पहला पड़ाव(1987 ई.)
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'गोदान' उपन्यास के पात्रों को उनकी विशेषताओं के आधार पर सुमेलित कीजिए।

सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (विशेषता)
A. होरीI. मैली, ढीठ और रोनी
B. सोनाII. साँवला, लम्बा, इकहरा युवक
C. गोबरIII. साँवला, पिचका हुआ चेहरा
D. रूपाIV. साँवली, सुडौल, प्रसन्न और चपल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A-II, B-I, C-III, D-IV

  2. ((b))

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  3. ((c))

    A-III, B-IV, C-II, D-I

  4. ((d))

    A-I, B-II, C-III, D-IV

Show Answer
Answer: ((c))

A-III, B-IV, C-II, D-I

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-II, D-I

Key Pointsगोदान-

  • रचनाकार-प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष-1936 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र-
  • ​होरी
  • राय साहब
  • मेहता
  • मालती
  • गोविंदी आदि।
  • विषय-
  • भारतीय किसान जीवन की महागाथा का वर्णन है।

Important Pointsप्रेमचंद-

  • जन्म-1880-1936 ई.
  • प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे।
  • उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन किया।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • सेवासदन- (1918)
  • प्रेमाश्रम (1922)
  • रंगभूमि (1925)
  • निर्मला (1925)
  • कायाकल्प (1926)
  • प्रतिज्ञा (1927)
  • गबन (1928)
  • कर्मभूमि (1932)
  • गोदान (1936) आदि।

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