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UGC NET Paper 2: Hindi 5th Mar 2023 Shift 1 (Previous Year Paper)

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Test (100 questions)

1

‘चन्द्रदेव से मेरी बातें' शीर्षक कहानी सर्वप्रथम किस वर्ष प्रकाशित हुई थी?

  1. ((a))

    सन् 1904

  2. ((b))

    सन् 1907

  3. ((c))

    सन् 1908

  4. ((d))

    सन् 1911

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Answer: ((a))

सन् 1904

‘चन्द्रदेव से मेरी बातें' शीर्षक कहानी सर्वप्रथम सन् 1904 वर्ष प्रकाशित हुई थी। 

Key Pointsचन्द्रदेव से मेरी बातें-

  • रचनाकार- बंग महिला
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1904 ई.
  • इस कहानी को भवदेव पाण्डेय ने प्रथम राजनीतिक कहानी कहा है।
  • विषय-
  • इसमें लेखिका और चंद्र के बीच की बातचीत को लक्षित किया गया है।

Important Pointsबंग महिला-

  • पूरा नाम-राजेन्द्र बाला घोष
  • प्रेमचन्द-पूर्व कहानीकार रही है।
  • हिंदी-नवजागरण की पहली छापामार लेखिका थीं।
  • मुख्य कहानियाँ-
  • कुंभ में छोटी बहू(1906 ई.)
  • दुलाईवाली(1907 ई.) आदि।
2

किस उपन्यास में पारंपरिक गीतों के साथ ही बाबा फ़रीद, शाह लतीफ़ और बुल्लेशाह की कविताओं का बहुतायत से प्रयोग किया गया है?

  1. ((a))

    तमस

  2. ((b))

    झूठा सच

  3. ((c))

    ज़िन्दगीनामा

  4. ((d))

    शेखर एक जीवनी

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Answer: ((c))

ज़िन्दगीनामा

ज़िन्दगीनामा उपन्यास में पारंपरिक गीतों के साथ ही बाबा फ़रीद, शाह लतीफ़ और बुल्लेशाह की कविताओं का बहुतायत से प्रयोग किया गया है। 

ज़िन्दगीनामा-

  • हिन्दी की विख्यात साहित्यकार कृष्णा सोबती द्वारा रचित एक उपन्यास है,
  • जिसके लिये उन्हें सन् 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • इसका प्रकाशन सन् 1979 में हुआ था।
  • जो कि एक आँचलिक उपन्यास है जिसमें पंजाब में रहने वाले लोगों के जिंदगी का यथार्थ चित्रण है।

Key Pointsकृष्णा सोबती -

  • जन्म -1925-2019 ई.
  • उपन्यास -
  • सूरजमुखी अँधेरे के (1972 ई.)
  • दिलोदानिश (1993 ई.)
  • समय सरगम (2000 ई.) आदि।

Important Pointsतमस-

  • रचनाकार-भीष्म साहनी
  • प्रकाशन वर्ष-1973ई.
  • विधा-उपन्यास
  • विषय-
  • ​इस उपन्यास का मुख्य विषय भारत में बढती संप्रदायिकता है।
  • यह कुल पांच दिनों की कहानी है।
  • तमस कथा की परिधि 1947 ई. के समय के पंजाब के जिले को परिवेश के रूप में लिया गया है।

झूठा सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1958 ई.
  • विषय-
  • भारत के राष्ट्रीय व सामाजिक जीवन का चित्रण किया गया है।
  • यह दो भागों में प्रकाशित उपन्यास हैं- वतन और देश तथा देश का भविष्य।

शेखर : एक जीवनी-

  • रचनाकार-अज्ञेय
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-
  • पहला भाग-1940 ई.
  • दूसरा भाग-1944 ई.
  • विषय-
  • इसमें नायक शेखर के व्यक्तित्व को रेखांकित किया गया है।
  • शेखर के बाल,वय: संधि और किशोर मन का मनोवैज्ञानिक अंकन किया गया है।
  • पूर्व दीप्ति शैली में लिखित उपन्यास है।
  • 'प्रकाशमान पुच्छल तारा' कहकर इसकी आलोचना की गई है।

Additional Informationभीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003ई.
  • भीष्म साहनी आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से थे।
  • इन्हें हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • तमस-1973 ई.
  • बसंती-1982 ई.
  • झरोखे-1998 ई.
  • मय्यादास की माडी
  • कुन्तो
  • नीलू निलिमा नीलोफर- 2000ई. आदि।

यशपाल-

  • जन्म-1903-1976 ई.
  • उपन्यास-
  • दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.)
  • मेरी तेरी उसकी बात(1974 ई.) आदि।

अज्ञेय-

  • जन्म-1911-1987 ई.
  • प्रमुख मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • नदी के द्वीप(1951 ई.)
  • अपने-अपने अजनबी(1961 ई.) आदि।
3

‘लाल पान की बेगम' कहानी में बिरजू की माँ किसे 'टीशनवाली' कहकर सम्बोधित करती है?

  1. ((a))

    चम्पिया

  2. ((b))

    जंगी की पुतोहू

  3. ((c))

    लरेना की बीवी

  4. ((d))

    राधे की बेटी सुनरी

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Answer: ((b))

जंगी की पुतोहू

‘लाल पान की बेगम' कहानी में बिरजू की माँ जंगी की पुतोहू को 'टीशनवाली' कहकर सम्बोधित करती है। 

Key Pointsलाल पान की बेगम-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • बिरजू की माँ, बिरजू के पिता, बिरजू, मखनी बुआ, जंगी की पूतोहू आदि।
  • विषय-
  • स्त्री सशक्तिकरण की कहानी है।
  • पूरी कहानी बिरजू के माँ के बैलगाड़ी में बैठकर नाच देखने जाने पर केंद्रित है।
  • बिरजू की माँ को ही 'लालपान की बेगम' कहा गया है।

Important Pointsफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म- 1921-1977ई.
  • कहानी संग्रह-
  • ठुमरी(1959 ई.)
  • आदिम रात्रि की महक(1967 ई.)
  • अगिनखोर(1973 ई.)
  • अच्छे आदमी(1986 ई.) आदि।
4

“आज तक कभी ऐसा न हुआ, न कभी सुना । गजब हो गया, अन्धेर पड़ गया।"-

‘सिक्का बदल गया' कहानी में उपर्युक्त कथन किसने किससे कहा?

  1. ((a))

    नवाब बीबी ने शाहनी से

  2. ((b))

    शेरा ने हुसैना से

  3. ((c))

    शाहनी ने दाऊद खाँ से

  4. ((d))

    रसूली ने शाहनी से

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Answer: ((a))

नवाब बीबी ने शाहनी से

“आज तक कभी ऐसा न हुआ, न कभी सुना । गजब हो गया, अन्धेर पड़ गया।"- ‘सिक्का बदल गया' कहानी में उपर्युक्त कथन नवाब बीबी ने शाहनी से कहा। 

Key Pointsसिक्का बदल गया- 

  • रचनाकार- कृष्णा सोबती
  • प्रकाशन वर्ष- 1948 ईo
  • विधा- कहानी
  • मुख्य पात्र-
  • शाहनी ,शाहजी, शेरा ,हुसैना दाऊद आदि।
  • विषय-
  • भारत पाक विभाजन के कारण होने वाले विस्थापन के दर्द की कहानी।

Important Pointsकृष्णा सोबती-

  • जन्म- 1925 - 2019 ईo
  • कहानी संग्रह-
  • बादलों के घेरे (1980)
  • मेरी माँ कहाँ
  • दादी अम्मा आदि।

Key Pointsपूर्ण कथन-

5

“पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप।"

उपर्युक्त संवाद ‘स्कंदगुप्त' नाटक में किस पात्र के द्वारा कहा गया?

  1. ((a))

    मालिनी

  2. ((b))

    देवसेना

  3. ((c))

    कमला

  4. ((d))

    देवकी

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Answer: ((b))

देवसेना

“पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप।"- उपर्युक्त संवाद ‘स्कंदगुप्त' नाटक में देवसेना पात्र के द्वारा कहा गया। 

Key Pointsस्कंदगुप्त-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय-
  • भारतीय व यूरोपीय नाटकों का समन्वय किया गया है।
  • कुमारगुप्त के विलासी साम्राज्य की आंतरिक स्थिति का चित्रण किया है।
  • पात्र-
  • स्कंदगुप्त, कुमारगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, देवकी, आनंतदेवी, देवसेना, विजया आदि।

Important Pointsजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म- 1889 ई.
  • प्रसिद्ध नाटककार है।
  • नाटक-
  • सज्जन(1910 ई.)
  • कल्याणी परिणय(1912 ई.)
  • करुणालय(1912 ई.)
  • विशाख(1921 ई.)
  • कामना(1927 ई.) आदि।
6

"जिसकी आत्मा कमज़ोर हो, जिसे लालच, स्वार्थ ने घेर रखा हो वह इस बकरी से क्या पाएगा? भगवान के पास खाली हाथ न जाने का मतलब यही है। जो फूल लेकर जाता है वह स्वर्ग लेकर लौटता है। इसीलिए श्रद्धा देना जानती है। आप इस बकरी को जितना दें उतना कम है।"

उपर्युक्त संवाद ‘बकरी' नाटक में किसके द्वारा कहा गया है?

  1. ((a))

    कर्मवीर

  2. ((b))

    सत्यवीर

  3. ((c))

    दुर्जन सिंह

  4. ((d))

    सिपाही

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Answer: ((b))

सत्यवीर

उपर्युक्त संवाद ‘बकरी' नाटक में सत्यवीर के द्वारा कहा गया है। 

Key Pointsबकरी-

  • रचनाकार- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • पात्र-
  • नट और नटी
  • भिश्ती
  • दुर्जन सिंह
  • कर्मवीर सिंह
  • सत्यवीर
  • विपती( एक गरीब स्त्री जिसकी बकरी चोरी होती है)
  • सिपाही
  • काका – काकी
  • विषय-
  • आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है।

Important Pointsसर्वेश्वर दयाल सक्सेना-

  • जन्म- 1927-1983 ई.
  • यह तीसरा सप्तक के कवि है।
  • नाटक-
  • लड़ाई(1979)
  • अब गरीबी हटाओ आदि।
  • काव्य रचनाएँ-
  • काठ की घंटियाँ(1959 ई.)
  • बाँस का पुल(1963 ई.)
  • एक सुनी नाव(1966 ई.)
  • कुआनो नदी(1973 ई.) आदि।
7

"हम दोनों 'एक ही नाव के यात्री' थे" यह कथन किसने किसके बारे में कहा है।

  1. ((a))

    शरत्चन्द्र ने नीरदा के बारे में

  2. ((b))

    तुलसीराम ने गोकुल भैया के बारे में

  3. ((c))

    शिवरानी देवी ने प्रेमचन्द के बारे में

  4. ((d))

    हरिवंशराय ने श्यामा के बारे में

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Answer: ((c))

शिवरानी देवी ने प्रेमचन्द के बारे में

"हम दोनों 'एक ही नाव के यात्री' थे" यह कथन शिवरानी देवी ने प्रेमचन्द के बारे में कहा है।

Key Pointsप्रेमचंद घर में-

  • रचनाकार- शिवरानी देवी
  • विधा-जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
8

"______ कि श्रीपत बेहद गँवार आदमी है। खाने की मेज पर बैठ कर पसीना सुखाता है। मैं कहता हूँ दीदी, मैं इतनी मुद्दत के बाद यहाँ आया हूँ, तुम्हारा छोटा भाई हूँ, तुम लोगों से मिलने की हसरत दिल में लिये हुए न जाने कब से इस महान भारत के नगर-नगर भटक रहा हूँ। और तुम्हें मेरा पल भर को भी यहाँ बैठना नहीं सुहाता।"

उपर्युक्त संवाद ‘अंजो दीदी' नाटक में किसके द्वारा कहा गया है?

  1. ((a))

    श्रीपत

  2. ((b))

    इन्द्रनारायण

  3. ((c))

    नज़ीर

  4. ((d))

    नीरज

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Answer: ((a))

श्रीपत

उपर्युक्त संवाद ‘अंजो दीदी' नाटक में श्रीपत के द्वारा कहा गया है। 

श्रीपत-

  • अंजो दीदी का 27-28 वर्षीय भाई।

Key Pointsअंजो दीदी-

  • रचनाकार-उपेंद्र नाथ अश्क
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1955 ई.
  • पात्र-
  • अंजली / अंजो दीदी (प्रमुख पात्र, लगभग 30 वर्ष)
  • इन्द्रनारायण(अंजो के पति)
  • अनिमा: अंजो की सहेली
  • नीरज: अंजो का पुत्र, 11 वर्ष
  • मुन्नी: नौकरानी, 25 वर्ष
  • विषय-
  • इस नाटक में अंजो(अंजली) के माध्यम से स्त्री-पुरुष संबंधों के साठ साथ वक्त की पाबंदी वर्णित की गई है।

Important Pointsउपेन्द्रनाथ अश्क-

  • ​नाटक-
  • लक्ष्मी का स्वागत(1935 ई.)
  • स्वर्ग की झलक(1940 ई.)
  • छठा बेटा(1940 ई.)
  • जय पराजय(1937 ई.) आदि। ​
9

“मानव कब दानव से भी दुर्द्दन्त, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदय वाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता। अतीत सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूंगा; फिर चिन्ता किस बात की?"

उपर्युक्त संवाद 'चंद्रगुप्त' नाटक में किस के द्वारा कहा गया है?

  1. ((a))

    आंभीक

  2. ((b))

    दाण्डायन

  3. ((c))

    चन्द्रगुप्त

  4. ((d))

    सिंहरण

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Answer: ((d))

सिंहरण

उपर्युक्त संवाद 'चंद्रगुप्त' नाटक में सिंहरण के द्वारा कहा गया है। 

Key Points चन्द्रगुप्त-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष- 1931 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय-
  • चन्द्रगुप्त तथा चाणक्य का अत्याचारी नंद तथा विदेशी यूनानियों से संघर्ष का चित्रण है।
  • पुरुष पात्र-
  • चन्द्रगुप्त, चाणक्य, सिंहरण, सिकंदर, फिलिप्स, गंधार आदि।
  • स्त्री पात्र-
  • अलका, सुवासिनी, कल्याणी, कार्नेलिया आदि।

Important Points जयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावादी प्रमुख स्तम्भ है।
  • काव्य संग्रह-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेम पथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।
  • उपन्यास-
  • कंकाल(1929 ई.)
  • तितली(1934 ई.)
  • इरावती(1936 ई.) आदि।
  • नाटक-
  • सज्जन(1910 ई.)
  • कल्याणी परिणय(1912 ई.)
  • करुणालय(1912 ई.)
  • विशाख(1921 ई.)
  • अजातशत्रु(1922 ई.)
  • स्कंदगुप्त(1928 ई.)
  • ध्रुवस्वामिनी(1933 ई.) आदि।
  • निबंध-
  • काव्य और कला तथा अन्य निबंध(1959 ई.)
  • यथार्थवाद और छायावाद
  • रहस्यवाद
  • नाटकों का आरंभ आदि।
10

‘मैं अब परिधियां लांघ सकती थी, सीमाएँ तोड़ सकती थी। दरअसल सीमा में रहना मुझे सदैव कचोटता है, इसलिए सीमा को तोड़ने मात्र का आभास ही मुझे अत्यधिक सुखकारी लगता है।'

उपर्युक्त कथन किस पुस्तक में हैं?

  1. ((a))

    जामुन का पेड़

  2. ((b))

    आपहुदरी

  3. ((c))

    माटी की मूरतें

  4. ((d))

    प्रेमचन्द घर में

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Answer: ((b))

आपहुदरी

उपर्युक्त कथन आपहुदरी पुस्तक में हैं। 

आपहुदरी-

  • रचनाकार-रमणिका गुप्ता
  • विधा-आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष-2016 ई.
  • विषय-
  • यह इनकी आत्मकथा का दूसरा भाग है।
  • स्त्री जीवन की समस्या का चित्रण किया गया है।
  • आत्मकथा का पहला भाग है- हादसे(2005 ई.)

Key Pointsरमणिका गुप्ता- 

  • जन्म- 1930 - 2019 ईo
  • आदिवासी विमर्श की रचनाएं-
  • आदिवासी शौर्य एवं विद्रोह
  • आदिवासी : साहित्य यात्रा
  • आदिवासी कौन
  • आदिवासी अस्मिता का संकट
  • आदिवासी लेखन : एक उभरती चेतना (2013 ई.)
  • उपन्यास- 
  • सीता मौसी
  • आत्मकथा-
  • आपहुदरी (2015)
  • हादसे(2005)

Important Pointsजामुन का पेड़-

  • रचनाकार-कृष्ण चंदर
  • विधा-कहानी
  • विषय-
  • हास्य व्यंग्यात्मक रचना है।
  • सरकारी विभाग की जीवन शैली ओर भ्रष्टाचारी तंत्र का चित्रण किया गया है।

माटी की मूरतें-

  • प्रकाशन वर्ष-1946ई.
  • रेखाचित्र-संकलन है, जिसमें बारह रेखाचित्रों का संकलन किया गया है।
  • बारह रेखाचित्र हैं-
  • रजिया
  • बलदेव सिंह
  • सरजू भैया
  • मंगर
  • रूपा की आजी
  • देव
  • बालगोबिन भगत
  • भौजी
  • परमेसर
  • बैजू मामा
  • सुभान खाँ
  • बुधिया

प्रेमचंद घर में-

  • विधा-जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1944 ई.
  • विषय-
  • शिवरानी प्रेमचंद जी की पत्नी थी।
  • उन्होंने प्रेमचंद के जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

Additional Informationकृश्नचंदर-

  • जन्म - 23 नवम्बर (1914 ई.)
  • रचनाएँ - 
  • एक गधे की आत्मकथा
  • एक वाइलिन समुन्दर के किनारे
  • एक गधा नेफ़ा में
  • तूफ़ान की कलीआं
  • आसमान रोशन है
  • हम वहशी है
  • कारनीवाल
  • एक गधे की वापसी
  • ग़द्दार आदि।
  • सम्मान- 
  • ​कृश्नचंदर जी को साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1961 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

रामवृक्ष बेनीपुरी-

  • जन्म-1899-1968ई.
  • अन्य रेखाचित्र-
  • गेंहू और गुलाब(1950ई.)
  • लाल तारा(1938ई.)
  • मिल के पत्थर आदि।

हरिशंकर परसाई-

  • जन्म- 1924 - 1995 ईo
  • कहानी संग्रह- 
  • हँसते हैं रोते हैं
  • जैसे उनके दिन फिरे
  • भोलाराम का जीव
  • दो नाकवाले लोग आदि।
11

‘चम्मा’ पात्र का निम्नलिखित में से किसके जीवनकाल में महत्वपूर्ण स्थान रहा?

  1. ((a))

    शरत् चंद्र

  2. ((b))

    हरिवंशराय बच्चन

  3. ((c))

    मन्नू भंडारी

  4. ((d))

    रमणिका गुप्ता

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Answer: ((b))

हरिवंशराय बच्चन

‘चम्मा’ पात्र का हरिवंशराय बच्चन के जीवनकाल में महत्वपूर्ण स्थान रहा। 

Key Pointsहरिवंशराय बच्चन-

  • जन्म-1907-2003 ई.
  • हिन्दी में हालावाद के प्रवर्तक है।
  • काव्य रचनाएं-
  • मधुशाला (1935 ई.)
  • मधुबाला (1936 ई.)
  • मधुकलश (1937 ई.)
  • आत्म परिचय (1937 ई.)
  • निशा निमंत्रण (1938 ई.)
  • एकांत संगीत (1939 ई.)
  • सतरंगिनी (1945 ई.) आदि।

Important Pointsशरत् चंद्र-

  • जन्म-1876-1938ई.
  • शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे।
  • वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं।
  • उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, उनके संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है।
  • इनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • बड़दिदि (1913 ई.)
  • बिराजबौ(1914 ई.)
  • परिणीता(1914 ई.)
  • बैकुन्ठेर उइल(1915 ई.)
  • पल्लीसमाज(1916 ई.) आदि।

मन्नू भंडारी-

  • जन्म-1931-2021ई.
  • मन्नू भंडारी हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार एवं अध्यापिका थी।
  • प्रमुख रचनाएँ-​
  • मैं हार गई (1957 ई.)
  • यही सच है (1966 ई.)
  • एक प्लेट सैलाब (1962 ई.)
  • तीन निगाहों की एक तस्वीर (1968 ई.)
  • आंखों देखा झूठ(1976 ई.)
  • त्रिशंकु (1978 ई.) आदि।

रमणिका गुप्ता-

  • जन्म- 1930 - 2019 ई.
  • उपन्यास- 
  • सीता मौसी
  • आत्मकथा-
  • इनकी आत्मकथा के दो भाग हैं- 
  • पहला भाग हादसे (2015) में प्रकाशित हुआ था
  • दूसरा भाग आपहुदरी ( 2015 ) में प्रकाशित हुआ।
12

अध्यापिका ‘शीला अग्रवाल' ने किसके जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ?

  1. ((a))

    रमणिका गुप्ता

  2. ((b))

    कृष्ण चंदर

  3. ((c))

    मन्नू भंडारी

  4. ((d))

    हरिवंशराय बच्चन

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Answer: ((c))

मन्नू भंडारी

अध्यापिका ‘शीला अग्रवाल' ने मन्नू भंडारी के जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

Key Pointsमन्नू भंडारी-

  • जन्म-1931-2021ई.
  • मन्नू भंडारी हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार एवं अध्यापिका थी।
  • प्रमुख रचनाएँ-​
  • मैं हार गई (1957 ई.)
  • यही सच है (1966 ई.)
  • एक प्लेट सैलाब (1962 ई.)
  • तीन निगाहों की एक तस्वीर (1968 ई.)
  • आंखों देखा झूठ(1976 ई.)
  • त्रिशंकु (1978 ई.) आदि।

Important Pointsरमणिका गुप्ता-

  • जन्म- 1930 - 2019 ई.
  • उपन्यास- 
  • सीता मौसी
  • आत्मकथा-
  • इनकी आत्मकथा के दो भाग हैं- 
  • पहला भाग हादसे (2015) में प्रकाशित हुआ था
  • दूसरा भाग आपहुदरी ( 2015 ) में प्रकाशित हुआ।

कृश्नचंदर-

  • जन्म - 23 नवम्बर (1914 ई.)
  • रचनाएँ - 
  • एक गधे की आत्मकथा
  • एक वाइलिन समुन्दर के किनारे
  • एक गधा नेफ़ा में
  • तूफ़ान की कलीआं
  • आसमान रोशन है
  • हम वहशी है
  • कारनीवाल
  • एक गधे की वापसी
  • ग़द्दार आदि।
  • सम्मान- 
  • ​कृश्नचंदर जी को साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1961 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

हरिवंशराय बच्चन-

  • जन्म-1907-2003 ई.
  • हिन्दी में हालावाद के प्रवर्तक है।
  • काव्य रचनाएं-
  • मधुशाला (1935 ई.)
  • मधुबाला (1936 ई.)
  • मधुकलश (1937 ई.)
  • आत्म परिचय (1937 ई.)
  • निशा निमंत्रण (1938 ई.)
  • एकांत संगीत (1939 ई.)
  • सतरंगिनी (1945 ई.) आदि।
13

“किसी देश में भी सभी पेट भरे हुए नहीं होते, किंतु वे लोग जहाँ खेत जोतते-बोते हैं वहीं उसके साथ यह भी सोचते हैं कि ऐसी कौन नई कल व मसाला बनावें जिससे इस खेत में आगे से दून अनाज उपजे।” उपर्युक्त पंक्ति किस निबंध से उद्धृत है?

  1. ((a))

    भारतवर्षोंन्नति कैसे हो सकती है

  2. ((b))

    शिवशंभु के चिट्ठे

  3. ((c))

    मजदूरी और प्रेम

  4. ((d))

    उठ जाग मुसाफिर

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Answer: ((a))

भारतवर्षोंन्नति कैसे हो सकती है

“किसी देश में भी सभी पेट भरे हुए नहीं होते, किंतु वे लोग जहाँ खेत जोतते-बोते हैं वहीं उसके साथ यह भी सोचते हैं कि ऐसी कौन नई कल व मसाला बनावें जिससे इस खेत में आगे से दून अनाज उपजे।” उपर्युक्त पंक्ति भारतवर्षोंन्नति कैसे हो सकती है निबंध से उद्धृत है। 

भारतवर्षोंन्नति कैसे हो सकती है-

  • रचनाकार- भारतेंदु हरिश्चंद
  • विधा - निबंध
  • विषय -
  • यह भारतेन्दु द्वारा दिया गया भाषण का अंश है।
  • यह भाषण बलिया जिले(1884ई.) में दिया गया था, उस समय रोर्बट साहब बहादुर बलिया जिले के कलेक्टर थे। इस निबंध में भारतेन्दु ने भारतीय के आ​लसी होने पर व्यंग्य किया है।
  • इस निबंध में अंग्रेजों के परिश्रम के प्रति आदर भाव भी व्यक्त किया गया है।
  • भारतेन्दु ने भारतीय लोगों को रेल की गाड़ी कहा है।
  • भाषण में ब्रिटिश शासन ​की मनमानी पर व्यंग्य किया गया है।
  • भारतेन्दु ने भारतीय समाज की रूढ़ियों और गलत जीवनशैली पर प्रहार किया है।
  • जनसंख्या नियंत्रण, श्रम की महत्ता, आत्मबल और त्याग भावना को भारतेन्दु ने उन्नति के लिए अनिवार्य माना है।
  • लेखक ने हमारे देश में निकम्मा रहने को अमीरी का सूचक बताया है।
  • भारतेन्दु ने देश की उन्नति के लिए निम्न उपाय बताए है-
  • जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण।
  • नागरिकों की कर्मठता।
  • आपसी एकता और भाईचारा

Key Pointsभारतेंदु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885 ई.
  • भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के पितामह कहे जाते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873 ई.)
  • सत्य हरिश्चन्द्र(1874 ई.)
  • विषस्य विषमौषधम्(1876 ई.)
  • भारत दुर्दशा(1880 ई.)
  • नीलदेवी(1881ई.)आदि।

Important Pointsमजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार- अध्यापक पूर्ण सिंह
  • निबंध में निम्न वर्ग के लोगों के जीवन तथ्यों को उजागर किया गया है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • मजूरी और कला आदि।

शिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार- बालमुकुन्द गुप्त
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1903-1905ई. के मध्य
  • यह चिट्ठे भारत मित्र पत्र में प्रकाशित हुए थे।
  • विषय-
  • यह लार्ड कर्जन को संबोधित करके लिखा गया है।
  • इसमें 'भारतीयों' की राजनीतिक विवशता को दिखाया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था की आलोचना की गई है।
  • यह निबन्ध प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया है।
  • इसकी शुरुआत स्वप्न के जरिए होती है।
  • इसमें उस समय के कलकत्ता में हो रहे शासन का वर्णन है।

उठ जाग मुसाफिर-

  • रचनाकार- विवेकी राय
  • विधा- निबंध
  • विषय-
  • इस निबंध में गाँवों में शहरी संस्कृति के अनुचित हस्तक्षेप को लेकर लेखक की व्यथित चित्रित की गई है।
  • गाँवों के आर्थिक विकास पर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का विघटन दिखाया गया है।

Additional Informationसरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1 881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन मुख्य निबंधकार है।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्त कवि वाल्ट व्हिटमैन आदि।

बालमुकुन्द गुप्त-

  • जन्म- 1865-1907 ई.
  • ये हिन्दी के निबंधकार और पत्रकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ हैं-
  • हरिदास
  • खिलौना
  • खेलतमाशा
  • स्फुट कविता
  • सन्निपात चिकित्सा आदि।

विवेकी राय-

  • जन्म- 1924-2016 ई.
  • निबंध-
  • किसानों के देश(1956 ई.)
  • त्रिधारा(1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर(1962 ई.)
  • आम रास्ता नहीं है(1988 ई.) आदि।
14

निम्नलिखित में से कौन विद्यानिवास मिश्र कृत निबंध नहीं है?

  1. ((a))

    साहित्य के सरोकार

  2. ((b))

    कविता का देश

  3. ((c))

    छोटे-छोटे सुख

  4. ((d))

    व्यक्तिव्यंजक गद्य

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Answer: ((c))

छोटे-छोटे सुख

छोटे-छोटे सुख विद्यानिवास मिश्र कृत निबंध नहीं है। 

छोटे-छोटे सुख -

  • रचनाकार- रामदरश मिश्र
  • विधा- निबन्ध
  • प्रकाशन वर्ष- 2006 ई.

Key Pointsरामदरश मिश्र-

  • जन्म- 1942 ई.
  • ग्रामीण चेतना के प्रमुख निबंधकार है।
  • प्रमुख निबंध-
  • कितने बजे हैं (1982)
  • बबूल और कैक्टस (1998)
  • घर परिवेश (2003) आदि।

Important Pointsविद्यानिवास मिश्र-

  • जन्म- 1905 - 2005 ईo
  • निबंध- 
  • छितवन की छाँह (1953)
  • कदम की फूली डाल (1956)
  • आँगन का पंछी और बनजारा मन (1963)
  • मैंने सिल पहुँचाई (1966)
  • बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974)
  • परंपरा कोई बन्धन नहीं (1976)
  • तमाल के झरोखे से (1981)
  • शेफाली झर रही है (1989) आदि।
15

“मानव-शरीर का अध्ययन करने वाले प्राणी- विज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव - चित्र की भाँति मानव शरीर में भी बहुत सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ रह गई हैं।” उपर्युक्त पंक्तियाँ निम्न में से किस निबंध से उद्धृत हैं?

  1. ((a))

    शिवशंभु के चिट्ठे

  2. ((b))

    नाखून क्यों बढ़ते हैं

  3. ((c))

    मजदूरी और प्रेम

  4. ((d))

    उठ जाग मुसाफिर

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Answer: ((b))

नाखून क्यों बढ़ते हैं

“मानव-शरीर का अध्ययन करने वाले प्राणी- विज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव - चित्र की भाँति मानव शरीर में भी बहुत सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ रह गई हैं।” उपर्युक्त पंक्तियाँ नाखून क्यों बढ़ते हैं निबंध से उद्धृत हैं

नाखून क्यों बढ़ते हैं-

  • रचनाकार- हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • विधा- निबन्ध
  • प्रकाशन वर्ष- 1951 ई.
  • यह निबन्ध 'कल्पलता' निबन्ध संग्रह में  संकलित है।
  • विषय-
  • प्रसिद्ध ललित निबन्ध है।
  • इस निबन्ध में मनुष्य की दुर्बलताओं के साथ-साथ उनकी शक्ति और रचनाशीलता को दिखाया गया है।
  • प्रतीकात्मक निबन्ध है।

Key Pointsहजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979 ई.
  • अन्य निबन्ध-
  • अशोक के फूल(1948 ई.)
  • कल्पलता(1951 ई.)
  • विचार और वितर्क(1957 ई.)
  • कुटज(1964 ई.)
  • आलोक पर्व(1972 ई.) आदि।

Important Pointsमजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार- अध्यापक पूर्ण सिंह
  • निबंध में निम्न वर्ग के लोगों के जीवन तथ्यों को उजागर किया गया है।
  • निबंध के उपशीर्षक हैं-
  • हल चलाने वाले का जीवन
  • गड़रिये का जीवन
  • मजदूर की मजदूरी
  • मजूरी और कला आदि।

उठ जाग मुसाफिर-

  • रचनाकार-विवेकी राय
  • विधा-निबंध
  • विषय-
  • इस निबंध में गाँवों में शहरी संस्कृति के अनुचित हस्तक्षेप को लेकर लेखक की व्यथित चित्रित की गई है।
  • गाँवों के आर्थिक विकास पर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का विघटन दिखाया गया है।

शिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार- बालमुकुन्द गुप्त
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1903-1905ई. के मध्य
  • यह चिट्ठे भारत मित्र पत्र में प्रकाशित हुए थे।
  • विषय-
  • यह लार्ड कर्जन को संबोधित करके लिखा गया है।
  • इसमें 'भारतीयों' की राजनीतिक विवशता को दिखाया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था की आलोचना की गई है।
  • यह निबन्ध प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया है।
  • इसकी शुरुआत स्वप्न के जरिए होती है।
  • इसमें उस समय के कलकत्ता में हो रहे शासन का वर्णन है।

Additional Informationसरदार पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1 881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन मुख्य निबंधकार है।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्त कवि वाल्ट व्हिटमैन आदि।

विवेकी राय-

  • जन्म-1924-2016 ई.
  • निबंध-
  • किसानों के देश(1956 ई.)
  • त्रिधारा(1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर(1962 ई.)
  • आम रास्ता नहीं है(1988 ई.) आदि।

बालमुकुन्द गुप्त-

  • जन्म- 1865-1907 ई.
  • ये हिन्दी के निबंधकार और पत्रकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ हैं-
  • हरिदास
  • खिलौना
  • खेलतमाशा
  • स्फुट कविता
  • सन्निपात चिकित्सा आदि।
16

“रचनाएँ स्वयं पाठकों से संवाद कर बहुत कुछ बताएँगी; और यह भी बताएँगी कि लेखक का ध्यान रचनाओं में दो ही बिंदुओं पर रहा है, एक तो विचार चिंतन और दूसरा लालित्य, जो कह सके, ललित निबंध ठहरी हुई विधा नहीं है।" - उपर्युक्त कथन किस निबंधकार का है?

  1. ((a))

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

  2. ((b))

    विद्यानिवास मिश्र

  3. ((c))

    विवेकी राय

  4. ((d))

    कुबेरनाथ राय

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Answer: ((c))

विवेकी राय

“रचनाएँ स्वयं पाठकों से संवाद कर बहुत कुछ बताएँगी; और यह भी बताएँगी कि लेखक का ध्यान रचनाओं में दो ही बिंदुओं पर रहा है, एक तो विचार चिंतन और दूसरा लालित्य, जो कह सके, ललित निबंध ठहरी हुई विधा नहीं है।" - उपर्युक्त कथन विवेकी राय निबंधकार का है। 

Key Pointsविवेकी राय-

  • जन्म-1924-2016 ई.
  • निबंध-
  • किसानों के देश(1956 ई.)
  • त्रिधारा(1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर(1962 ई.)
  • आम रास्ता नहीं है(1988 ई.) आदि।

Important Pointsहजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979ई.
  • हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ:-
  • अशोक के फूल (1948ई.)
  • कल्‍पलता (1951ई.)
  • मध्यकालीन धर्मसाधना (1952ई.)
  • विचार और वितर्क (1957ई.)
  • विचार-प्रवाह (1959ई.)
  • कुटज (1964ई.)
  • आलोक पर्व (1972ई.) आदि।

कुबेरनाथ राय-

  • जन्म-1933-1996 ई.
  • निबंध-
  • प्रिया नीलकंठी(1968 ई.)
  • रस आखेटक(1970 ई.)
  • विषाद योग(1973 ई.)
  • निषाद बाँसुरी(1974 ई.)
  • पर्ण मुकुट(1978 ई.)
  • कामधेनु(1980 ई.)
  • आगम की नाव(2002 ई.) आदि।

विद्यानिवास मिश्र-

  • जन्म-1905-2005 ई.
  • निबंध-
  • छितवन की छाँह(1953 ई.)
  • हल्दी दूब(1955 ई.)
  • तुम चंदन हम पानी(1957 ई.)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है(1974 ई.)
  • शेफाली झर रही है(1989 ई.)
  • शिरीष की याद आई(1995 ई.)
  • साहित्य के सरोकार(2007 ई.) आदि।
17

'स्वर' ध्वनि के संबंध में निम्नलिखित तथ्यों पर विचार कीजिए।

A. स्वरों का स्वतंत्र उच्चारण नहीं किया जा सकता।

B. उच्चारण की दृष्टि से मूल स्वर दस हैं।

C. स्वर ध्वनि के उच्चारण में हवा अबाध गति से मुख विवर से निकलती है।

D. सभी स्वर आक्षरिक नहीं होते हैं।

E. मात्रा के आधार पर स्वर दो प्रकार के होते हैं- (1) ह्रस्व (2) दीर्घ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (B), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (B), (C)

  4. ((d))

    केवल (A), (C), (E)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (B), (C), (E)

'स्वर' ध्वनि के संबंध में सही तथ्य हैं-

  • B. उच्चारण की दृष्टि से मूल स्वर दस हैं।
  • C. स्वर ध्वनि के उच्चारण में हवा अबाध गति से मुख विवर से निकलती है।
  • E. मात्रा के आधार पर स्वर दो प्रकार के होते हैं- (1) ह्रस्व (2) दीर्घ

Key Pointsसही हैं-

  • A. स्वरों का स्वतंत्र उच्चारण किया जा सकता।
  • D. सभी स्वर आक्षरिक होते हैं और सभी व्यंजन अनाक्षरिक।

Confusion Points

  • उच्चारण की दृष्टि से मूल स्वर दस हैं-
  • ​अ, आ, इ, ई, उ, ए , ऐ, ओ, औ, ऋ।

Important Pointsस्वर-

  • स्वर उन वर्णों को कहते हैं जिनका उच्चारण बिना किसी अवरोध तथा बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता से होता है।

उत्पत्ति के आधार पर स्वर के भेद-

ह्रस्व स्वर-

  • जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगे अर्थात जिन स्वरों के उच्चारण में कम-से-कम समय लगता हैं, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं।
  • ये संख्या में चार हैं- अ, इ, उ, ऋ।

दीर्घ स्वर- 

  • ऐसे स्वर जिनके उच्चारण में हृस्व स्वर से दोगुना समय लगता है, वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं।
  • हमारी वर्णमाला में सात दीर्घ स्वर है।
  • वे इस प्रकार हैं- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।

उच्चारण के आधार पर स्वरों के दो भेद हैं-

  • लघु स्वर और गुरु स्वर
18

क्रिया' के सम्बंध में निम्नलिखित तथ्य हैं -

A. जिस क्रिया का फल कर्म पर नहीं, कर्त्ता पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।

B. जो क्रियाएँ वाक्य के अंत में रहकर वाक्य को समाप्त करती हैं, वे समापिका क्रियाएँ कहलाती हैं।

C. जिस शब्द के प्रयोग द्वारा किसी वस्तु के विषय में विधान किया जाता है, उसे क्रिया कहते हैं।

D. अकर्मक क्रिया में किसी कर्म का होना अनिवार्य है।

E. क्रिया के मूल अंश को धातु कहते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (E)

  2. ((b))

    केवल (B), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (B), (D)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (B), (C), (E)

क्रिया' के सम्बंध में निम्नलिखित तथ्य सही हैं -

  • B. जो क्रियाएँ वाक्य के अंत में रहकर वाक्य को समाप्त करती हैं, वे समापिका क्रियाएँ कहलाती हैं।
  • C. जिस शब्द के प्रयोग द्वारा किसी वस्तु के विषय में विधान किया जाता है, उसे क्रिया कहते हैं।
  • E. क्रिया के मूल अंश को धातु कहते हैं।

Key Pointsसकर्मक क्रिया-

  • जिस क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है तथा जिसके प्रयोग में कर्म की अनिवार्यता बनी रहती है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • उदाहरण-
  • सतीश ने केले ख़रीदे।

अकर्मक क्रिया-

  • जिस क्रिया का फल कर्म पर नहीं करता पर पड़ता है उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • उदाहरण-
  • कैलाश छत से गिर पड़ा l
19

‘भारतेन्दु युगीन' कविता के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -

A. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 'अब्र' नाम से उर्दू में कविताएँ लिखीं।

B. ‘दशरथ विलाप' और फूलों का गुच्छा खड़ी बोली में रचित हैं।

C. जगमोहन सिंह कानपुर के रंगमंच और वहाँ की संस्था रसिक समाज से जुड़े थे।

D. ‘गीत गोविंदानंद’ और 'वर्षा विनोद' भारतेंदु हरिश्चंद्र की रचनाएँ हैं।

E. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने ‘प्रात समीरन' कविता में बंगला के ‘पयार' छंद का प्रयोग किया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (C), (D), (E)

  2. ((b))

    केवल (B), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (B), (C)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (B), (D), (E)

‘भारतेन्दु युगीन' कविता के  संदर्भ में सही कथन हैं-

  • B. ‘दशरथ विलाप' और फूलों का गुच्छा खड़ी बोली में रचित हैं।
  • D. ‘गीत गोविंदानंद’ और 'वर्षा विनोद' भारतेंदु हरिश्चंद्र की रचनाएँ हैं।
  • E. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने ‘प्रात समीरन' कविता में बंगला के ‘पयार' छंद का प्रयोग किया।

Key Pointsभारतेन्दु युग-

  • समय-1868-1993ई.(शुक्ल के अनुसार)
  • साहित्यिक प्रवृतियाँ-
  • अंतर्विरोधों का साहित्य
  • शृंगारिकता की चेतना
  • भक्ति भावना
  • समस्यापूर्ति आदि।
  • मुख्य कवि-
  • भारतेन्दु हरिश्चंद्र
  • बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
  • प्रतापनारायण मिश्र
  • ठाकुर जगमोहन सिंह
  • अंबिकादत्त व्यास आदि।

Important Pointsकुछ कवियों की रचनाएँ हैं-

कविरचनाएँ
भारतेन्दु हरिश्चंद्रभक्ति सर्वस्व,प्रेम मालिका,प्रेम प्रलाप,प्रेम तरंग,बकरी विलाप आदि।
बदरीनारायण चौधरीजीर्ण जनपद,आनंद अरुणोदय,मयंक महिमा आदि।
प्रतापनारायण मिश्रप्रेम पुष्पांजलि,मन की लहर,लोकोक्ति शतक, हरगंगा आदि।
ठाकुर जगमोहन सिंहप्रेमसंपत्तिलता,श्यामलता,श्यामा सरोजिनी, देवयानी आदि।

Additional Informationसही है-

  • भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 'रसा' नाम से उर्दू में कविताएँ लिखीं।
  • 'प्रेमघन' उर्दू में 'अब्र' नाम से कविताएँ लिखीं।
  • 'अग्रदास' ने 'रसिक संप्रदाय' की स्थापना की।
20

गद्य विधाओं से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए :

A. ‘ऋणजल धनजल’ फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित बाढ़ और सूखे से संबंधित रिपोर्ताज का संकलन है।

B. ‘कलम का मजदूर अमृत राय द्वारा लिखित प्रेमचंद की जीवनी है।

C. ज्ञानमंडल, बनारस द्वारा दो खंडों में प्रकाशित 'साहित्यकोश' के संपादक रामकुमार वर्मा थे।

D. हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने निबंधों में भारत के सांस्कृतिक इतिहास का पुनर्निमाण करते हैं।

E. ‘दूसरी परंपरा की खोज' विश्वनाथ त्रिपाठी द्वारा लिखित आलोचना की पुस्तक है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (A), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (A), (C), (D)

गद्य विधाओं से संबंधित सही कथन हैं -

  • A. ‘ऋणजल धनजल’ फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित बाढ़ और सूखे से संबंधित रिपोर्ताज का संकलन है।
  • C. ज्ञानमंडल, बनारस द्वारा दो खंडों में प्रकाशित 'साहित्यकोश' के संपादक रामकुमार वर्मा थे।
  • D. हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने निबंधों में भारत के सांस्कृतिक इतिहास का पुनर्निमाण करते हैं।

Key Pointsसही है-

  • B. ‘कलम का मजदूर मदन गोपाल द्वारा लिखित प्रेमचंद की जीवनी है। जिसका प्रकाशन 1964 ई. में हुआ।
  • ‘कलम का सिपाही अमृत राय द्वारा लिखित प्रेमचंद की जीवनी है। जिसका प्रकाशन 1962 ई. में हुआ।
  • E. ‘दूसरी परंपरा की खोज' नामवर सिंह द्वारा लिखित आलोचना की पुस्तक है। जिसका प्रकाशन 1982 ई। में हुआ।
  • विश्वनाथ त्रिपाठी द्वारा लिखित आलोचना की पुस्तक है-
  • हिन्दी आलोचना(1970 ई.)
  • लोकवादी तुलसीदास(1974 ई.)
  • मीरा का काव्य(1979 ई.) आदि।
21

आत्मकथा के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए :

A. बनारसीदास जैन की अर्द्धकथानक हिंदी की प्रथम आत्मकथा मानी जाती है।

B. जोश मलीहाबादी की 'यादों की बारात', अमृता प्रीतम की रसीदी टिकट' तथा हंसा वाडेकर की 'सुनो सुनाती हूँ' अनूदित आत्मकथाओं के उदाहरण हैं।

C. ‘कस्तूरी कुंडल बसे” प्रभा खेतान द्वारा रचित आत्मकथा है।

D. अपने-अपने पिंजरे श्योराज सिंह बेचैन द्वारा रचित आत्मकथा है।

E. ‘अपनी खबर' पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' द्वारा रचित आत्मकथा है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (E)

  2. ((b))

    केवल (C), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (B), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (C), (D)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (A), (B), (E)

आत्मकथा के संबंध में सही कथन हैं -

  • A. बनारसीदास जैन की अर्द्धकथानक हिंदी की प्रथम आत्मकथा मानी जाती है। (यह 1641 ई. में ब्रजभाषा में रचित है।)
  • B. जोश मलीहाबादी की 'यादों की बारात', अमृता प्रीतम की रसीदी टिकट' तथा हंसा वाडेकर की 'सुनो सुनाती हूँ' अनूदित आत्मकथाओं के उदाहरण हैं।
  • E. ‘अपनी खबर' पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' द्वारा रचित आत्मकथा है। (1960 ई. में प्रकाशित)

Key Pointsसही कथन हैं-

  • C. ‘कस्तूरी कुंडल बसे” मैत्रेयी पुष्पा द्वारा रचित आत्मकथा है, जिसका प्रकाशन 2002 ई. में हुआ था।
  • D. 'अपने-अपने पिंजरे' मोहनदास नैमिशराय द्वारा रचित आत्मकथा है, यह दो भागों में 1995 ई. में प्रकाशित है।
22

काव्य दोष से संबंधित सही उदाहरण हैं -

A. क्लिष्टत्व दोष – वेद नखताग्रह जोरि अरध करि को बरजे हम खात।

B. अक्रमत्व दोष- मुख मय��क को देखकर विकसा मानस कंज।

C. दुष्क्रमत्व दोष - मारुत नंदन मारुत को, मन को, खगराज को वेग लजायो।

D. ग्राम्यत्व दोष - कसती कटि थी कनिष्ठ माँ, असि देती मँझली घनिष्ठ माँ।

E. अप्रतीत्व दोष – हियतल बसि दुख देत हैं ये तेरे अनुभाव।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (A), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (C), (D), (E)

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Answer: ((b))

केवल (A), (C), (E)

काव्य दोष से संबंधित सही उदाहरण हैं -

  • A. क्लिष्टत्व दोष – वेद नखताग्रह जोरि अरध करि को बरजे हम खात।
  • C. दुष्क्रमत्व दोष - मारुत नंदन मारुत को, मन को, खगराज को वेग लजायो।
  • E. अप्रतीत्व दोष – हियतल बसि दुख देत हैं ये तेरे अनुभाव।

Key Pointsअक्रमत्व दोष-

  • जहाँ कोई पद उचित स्थान पर प्रयुक्त न होकर अनुचित स्थान पर प्रयुक्त हो और उसका क्रम जोडने में कठिनाई हो, वहाँ अक्रमत्व दोष होता है।
  • उदाहरण-
  • विश्व में लीला निरन्तर कर रहे हैं मानवी।
  • यहां मानवी शब्द लीला से पहले प्रयुक्त होना चाहिए। वे प्रभु इस संसार में निरन्तर मानवी लीला कर रहे हैं।

ग्राम्यत्व दोष-

  • जहाँ पर काव्य आदि में ग्रामीण जनों के वाणियों का प्रयोग हो अर्थात साहित्यिक भाषा में ग्रामीण अंचल के देशज शब्दों का
  • प्रयोग हो वहां ग्रामत्व दोष होता है।
  • उदाहरण-
  • सत्य सराहि कछहु बरु देना
  • जानिहु मांगि लेहूँ चबैना।

Important Pointsक्लिष्टत्व दोष-

  • क्लिष्टत्व शब्द का अर्थ है-कठिन अथवा दुर्बोध होना ।
  • काव्य में जहां सरल एवं सुबोध शब्दों का प्रयोग ना करके कठिन और दुर्बोध शब्दों का प्रयोग किया जाता है वहां क्लिष्टतत्व दोष होता है।उदाहरण-
  • ​कहत कत परदेशी की बात।

मन्दिर अरध अवधि बदि हमसौं हरि अहार चलि जात ॥

वेद, नखत, ग्रह जोरि अरध करि सोई बनत अब खाता ॥

  • यह सूरदास का कूट पद है,इसके अर्थ ग्रहण करने में कठिनाई होती है,इसलिए यहाँ क्लिष्टत्व दोष है।

दुष्क्रमत्व दोष-

  • जहाँ शास्त्रों अथवा परम्परा में प्रसिद्ध क्रम के विपरीत किसी बात का वर्णन होता है, वहाँ दुष्क्रमत्व दोष होता है।
  • उदाहरण-
  • "मारुत नन्दन मारुत को, मन को, खगराज को वेग लजायौ।"
  • उपर्युक्त पंक्ति में दुष्क्रमत्व दोष है क्योंकि मन को सही क्रम में नहीं रखा गया है।

अप्रतीतत्व दोष-

  • लोक व्यवहार में न प्रयुक्त होने वाले शास्त्रीय शब्दों का काव्य में प्रयोग होने पर अप्रतीतत्व दोष होता है।
  • उदाहरण-
  • विषमय यह गोदावरी अमृतन को फल देत।
  • यहां विष शब्द का प्रयोग जल के लिए होता है, जो सामान्यतः लोक व्यवहार में प्रयुक्त नहीं होता अतः अप्रतीतत्व दोष है।

Additional Informationकाव्यदोष-

  • जिसके कारन काव्य के रसास्वादन में व्यवधान उत्पन्न हो उसे काव्यदोष कहते हैं।
  • जिस प्रकार काव्य गुण के कारण काव्य का उत्कर्ष होता है उसी प्रकार दोष के कारन काव्य का अपकर्ष होता है।
23

काव्य रीति के संबंध में सही कथन हैं-

A. रीति शब्द का प्रथम प्रयोग आचार्य वामन ने किया।

B. दंडी ने रीति के स्थान पर मार्ग शब्द का प्रयोग किया।

C. आचार्य रुद्रट ने रीति को शब्द संघटना बताया।

D. भोज ने रीतियों की संख्या 105 मानीं।

E. हृदय के रागात्मक भावों की अभिव्यंजना करने वाली रीति गौड़ी रीति है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (C), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (C), (D)

Show Answer
Answer: ((a))

केवल (A), (B), (C)

काव्य रीति के संबंध में सही कथन हैं-

  • A. रीति शब्द का प्रथम प्रयोग आचार्य वामन ने किया।
  • B. दंडी ने रीति के स्थान पर मार्ग शब्द का प्रयोग किया।
  • C. आचार्य रुद्रट ने रीति को शब्द संघटना बताया।

Key Pointsसही है-

  • भोज ने रीतियों की संख्या 6 मानी हैं-
  • वैदर्भी
  • गौड़ी
  • पांचाली
  • लाटी
  • अवन्तिका
  • मागधी
  • गौड़ी रीति-
  • गौडी रीति को 'परुषा' भी कहते हैं। इसमें दीर्घ-समास-युक्त पदावली का प्रयोग उचित माना जाता है।
  • मधुरता और सुकुमारिता का इससे कोई सम्बन्ध नहीं है।
  • इस दृष्टि से वीर रस, रौद्र रस, भयानक रस और वीभत्स रस की निष्पत्ति में गौडी रीति का भरपूर परिपाक होता है।
  • युद्ध आदि वर्णन इस रीति के प्राण हैं। इसमें ललकार, चुनौती और उद्दीपन का बाहुल्य होता है।
  • कर्ण-कटु शब्दावली और महाप्राण जैसे- ट ,ठ ,ड ,ढ ,ण तथा ह आदि का प्रयोग इसमें अधिक होता है।
  • गौडी या परुषा रीति का काव्य कठिन माना जाता है।
  • गौड़ी रीति का उदाहरण-
  • ‘तुलसी’ समिध सौंज, लंक जग्यकुंडु लखि,

जातुधान पुंगीफल जव तिल धान है।

स्रुवा सो लँगूल, बलमूल प्रतिकूल हबि,

स्वाहा महा हाँकि-हाँकि हुनैं हनुमान हैं।

24

कल्पना के संबंध में कॉलरिज के कथनों पर विचार कीजिए -

A. कल्पना को कॉलरिज ने ईश्वरीय शक्ति माना है, जिसका गुण है - सृजन।

B. कॉलरिज कल्पना के दो भेद मानते हैं - मुख्य कल्पना और गौण कल्पना।

C. मुख्य कल्पना की अवस्थिति जन सामान्य के मस्तिष्क में भी होती है, जबकि गौण कल्पना मुख्यतः दार्शनिक तथा कलाकार की विशेषता है।

D. मुख्य कल्पना इच्छाचालित (वालंटरी) होती है।

E. मुख्य कल्पना अधिक सचेत, सक्रिय तथा सायास होती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (A), (B), (C)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (C), (D), (E)

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Answer: ((b))

केवल (A), (B), (C)

कल्पना के संबंध में कॉलरिज के सही कथन है -

  • A. कल्पना को कॉलरिज ने ईश्वरीय शक्ति माना है, जिसका गुण है - सृजन।
  • B. कॉलरिज कल्पना के दो भेद मानते हैं - मुख्य कल्पना और गौण कल्पना।
  • C. मुख्य कल्पना की अवस्थिति जन सामान्य के मस्तिष्क में भी होती है, जबकि गौण कल्पना मुख्यतः दार्शनिक तथा कलाकार की विशेषता है।

Key Pointsमुख्य कल्पना-

  • इसे प्राथमिक कल्पना भी कहा जाता है।
  • प्राथमिक कल्पना संपूर्ण मानवीय ज्ञान का मुख्य होने के कारण वस्तुओं का प्राथमिक ज्ञान कराती है।
  • मुख्य कल्पना ज्ञान की जीवंत शक्ति और प्रमुख माध्यम होती है।

 गौण कल्पना-

  • गौण कल्पना विशिष्ट लोगों में पायी जाती है।
  • गौण कल्पना मुख्य कल्पना की छाया मात्र है।
  • यह कल्पना को सुंदर बनाने के लिए सहयोग करती है।

Important Pointsमुख्य कल्पना और गौण कल्पना में अन्तर -

मुख्य कल्पना के अस्तित्व पर ही गौण कल्पना आश्रित है।कोलरिज ने गौण कल्पना को मुख्य कल्पना का प्रतिध्वनि कहा है।
मुख्य कल्पना अचेतन (अनैच्छिक) रूप में  होती है।गौण कल्पना चेतन (ऐच्छिक) रूप में होती है।
मुख्य कल्पना हमारे चाहे और बिना जाने काम करती रहती हैगौण कल्पना हमारे चाहने पर ही काम करती है।
मुख्य कल्पना केवल निर्माण (संघटन) का काम करती है।गौण कल्पना विनाश (विघटन) का कार्य करती है।

 

Additional Informationकल्पना-

  • कल्पना की व्याख्या करते हुए कॉलरिज ने लिखा है कि –
  • “स्पष्ट रुप से संसार में दो शक्तियाँ कार्य करती हैं, जो एक दूसरे के संबंध में क्रियाशील और निष्क्रिय होती हैं और कार्य बिना किसी मध्यस्थ शक्ति के संभव नहीं है जो एक साथ सक्रिय भी है और निष्क्रिय भी है” दर्शन में इस ‘मध्यस्थ’ शक्ति को कल्पना की संज्ञा दी गई है।
  • मुख्य बिन्दु-
  • कल्पना ईश्वरीय शक्ति है, जिसका प्रधान गुण सृजन है।
  • कल्पना सृजन के साथ-साथ विरोधी तत्त्वों में समन्वय भी करती है।
  • कल्पना ह्रदय और बुद्धि तथा अंतर जगत एवं बाह्य जगत में भी समन्वय करती है।
  • श्रेष्ठ काव्य के लिए ‘कल्पना’ परम आवश्यक है।
  • कल्पना के द्वारा ही काव्य ह्रदयग्राही, मर्मस्पर्शी एवं सजीव बनता है।
  • कल्पना के दो भेद हैं-​
  • मुख्य कल्पना
  • गौण कल्पना
25

अंग्रेज़ी शिक्षा के संबंध में उपर्युक्त विचार हैं :

A. अंग्रेज़ी शिक्षा भारतीयों की धर्म के प्रति आस्था को कमज़ोर करनेवाली थी।

B. अंग्रेज़ी शिक्षा भारतीयों को मानसिक दासता से मुक्त करने वाली थी।

C. अंग्रेज़ी शिक्षा ने सरकारी नौकरियों में भारतीयों के प्रवेश के द्वार खोले।

D. अंग्रेज़ी शिक्षा ने भारतीयों को अपनी परंपराओं से मोह करना सिखाया।

E. अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रसार के लिए सरकार ने नये शिक्षा संस्थान खोले।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (C), (E)

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Answer: ((c))

केवल (A), (C), (E)

अंग्रेज़ी शिक्षा के संबंध में उपर्युक्त सही विचार हैं :

  • A. अंग्रेज़ी शिक्षा भारतीयों की धर्म के प्रति आस्था को कमज़ोर करनेवाली थी।
  • C. अंग्रेज़ी शिक्षा ने सरकारी नौकरियों में भारतीयों के प्रवेश के द्वार खोले।
  • E. अंग्रेज़ी शिक्षा के प्रसार के लिए सरकार ने नये शिक्षा संस्थान खोले।

Key Points

  • B. अंग्रेज़ी शिक्षा भारतीयों को मानसिक दास बनाने वाली थी।
  • D. अंग्रेज़ी शिक्षा ने भारतीयों को अपनी परंपराओं से विमुख होना सिखाया।
26

‘प्रियप्रवास’ किन छन्दों में रची गयी है?

A. इन्द्रवज्रा

B. द्रुतविलम्बित

C. शार्दूलविक्रीड़ित

D. कनकमंजरी

E. मन्दाक्रान्ता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (D), (E)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (C), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

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Answer: ((b))

केवल (B), (C), (E)

‘प्रियप्रवास’ में प्रयुक्त छन्द हैं- 

  • B. द्रुतविलम्बित
  • C. शार्दूलविक्रीड़ित
  • E. मन्दाक्रान्ता

Key Pointsप्रियप्रवास-

  • रचनाकार-अयोध्यासिंह उपध्याय 'हरिऔध'
  • प्रकाशन वर्ष-1914 ई.
  • विधा-प्रबंध काव्य
  • सर्ग-17
  • विषय-
  • यह खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है।
  • अन्य नाम- ब्रजांगना विलाप
  • इसमें कृष्ण के बचपन से लेकर मधुरा प्रस्थान तक का वर्णन किया गया है।

Important Pointsअयोध्यासिंह उपध्याय 'हरिऔध'-

  • जन्म-1865-1947 ई.
  • द्विवेदी युगीन प्रमुख कवि है।
  • रचनाएँ-
  • कृष्ण शतक(1882 ई.)
  • रसिक रहस्य(1899 ई.)
  • प्रेम प्रपंच(1900 ई.)
  • चुभते चौपदे(1924 ई.)
  • पद्म प्र���ून(1925 ई.)
  • रस कलश(1931 ई.)
  • चौखे चौपदे(1932 ई.) आदि।
  • प्रबंध काव्य-
  • पारिजात(1937 ई.)
  • वैदेही वनवास(1941 ई.) आदि।
27

दलित विमर्श से संबंधित उपयुक्त कथन हैं :

A. डॉ. अंबेडकर ने इतिहास में दलितों की भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया।

B. दलित विमर्शकार गांधी दर्शन को दलित साहित्य का वैचारिक आधार मानते हैं।

C. ज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की।

D. दलित चिंतक वर्णाश्रम व्यवस्था की हिमायत करते हैं।

E. दलित आत्मकथाएँ एक व्यक्ति के बहाने समाज का यथार्थ प्रस्तुत करती हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (C), (D)

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Answer: ((c))

केवल (A), (C), (E)

दलित विमर्श से संबंधित सही कथन हैं-

  • A. डॉ. अंबेडकर ने इतिहास में दलितों की भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया।
  • C. ज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की।
  • E. दलित आत्मकथाएँ एक व्यक्ति के बहाने समाज का यथार्थ प्रस्तुत करती हैं।

Key Points

  • B. दलित विमर्शकार अंबेडकर दर्शन को दलित साहित्य का वैचारिक आधार मानते हैं।
  • D. दलित चिंतक वर्णाश्रम व्यवस्था का विरोध करते हैं।

Important Pointsबाबा साहेब भीमराव अंबेडकर-

  • जन्म-14 अप्रैल 1891 ई.
  • निधन- दिसंबर 1956 ई.
  • इनका जन्म महू, मध्य प्रदेश में हुआ और निधन दिल्ली में।
  • प्रमुख रचनाएं-
  • विच वे टू इमैनसिपेशन (मई 1936)
  • रानडे, गाँधी एंड जिन्नाह (1943)
  • मिस्टर गाँधी एण्ड दी एमेन्सीपेशन ऑफ़ दी अनटचेबल्स (सप्टेबर 1945)
  • हू वेर दी शूद्राज़ ? (अक्तुबर 1946)
  • द बुद्धा एंड हिज धम्मा (भगवान बुद्ध और उनका धम्म) (1957) आदि।
28

‘भ्रमरगीत' पदों में गोपियाँ उद्धव को इन वचनों से संबोधित करती हैं।

A. जोग सिखावन पाँड़े

B. ज्ञान को महल

C. मधुकर! मधुमतवारे!!

D. घोष बड़ो व्योपारी

E. निर्गुन- नदिया माद्दरी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

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Answer: ((c))

केवल (A), (C), (D)

‘भ्रमरगीत' पदों में गोपियाँ उद्धव को इन वचनों से संबोधित करती हैं-

  • A. जोग सिखावन पाँड़े
  • C. मधुकर! मधुमतवारे!!
  • D. घोष बड़ो व्योपारी

Key Pointsभ्रमरगीतसार-

  • रचनाकार - सूरदास
  • प्रकाशन वर्ष-1535 ई.
  • सूरसागर ग्रन्थ में भ्रमरगीत की योजना की गयी है।
  • विषय-
  • प्रेमविरहसक्ति का समावेश है।
  • गोपियों के विरह वर्णन की कथा वर्णित है।

Important Pointsसूरदास-

  • जन्म -1478 ई.
  • अष्टछाप के मुख्य कवि रहे है।
  • रचनाएँ-
  • सूरसागर
  • सूरसारावली(1548 ई.)
  • साहित्य लहरी(1550 ई.)
29

“सतपुड़ा के जंगल' कविता में जंगल के संबंध में कौन से विशेषण प्रयुक्त हैं?

A. जगमगाते जगे जागे

B. नींद में डूबे हुए-से

C. चिलचिलाते जले

D. घिनौने-घने

E. कंप से कनकने

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत���तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (A), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((d))

केवल (B), (D), (E)

“सतपुड़ा के जंगल' कविता में जंगल के संबंध में विशेषण प्रयुक्त हैं-

  • B. नींद में डूबे हुए-से
  • D. घिनौने-घने
  • E. कंप से कनकन

Key Points

  • 'सतपुड़ा के जंगल' कविता गीत फरोश(1956) काव्य संग्रह में संकलित है।

Important Pointsभवानीप्रसाद मिश्र-

  • **जन्म-**1913-1985 ई.
  • भवानीप्रसाद मिश्र दूसरा सप्तक(1951) के महत्त्वपूर्ण कवि हैं।
  • इनकी अधिकांश कविताओं में बोलचाल की शब्दावली तथा बोलचाल के लहजे का प्रयोग हुआ है।
  • इनकी भाषा एवं अभिव्यक्ति में लोक जीवन के प्रभाव स्पष्ट रूप से लक्षित होते हैं।
  • गांधीवादी विचार धारा के कवि है, कहानीकार उदय प्रकाश ने मिश्र जी को 'कविता का गांधी' कहां है।
  • प्रमुख रचनाएं-
  • गीत फरोश(1956)
  • चकित है दुख(1968)
  • बुनी हुई रस्सी(1971)
  • खुशबू के शिलालेख(1973)
  • अनाम तुम आते हो(1979)
  • कालजयी(1980)
  • मानसरोवर दिन(1981) आदि।

Additional Information

  • कुछ पंक्तियाँ-
  • ​"सतपुड़ा के घने जंगल,नींद में डूबे हुए से,ऊंघते अनमने जंगल।"
  • "इन वनों के खूब भीतर,चार मुर्गे,चार तीतर; पाल कर निश्चित बैठे,विजन वन की बीच बैठे,झोपड़ी पर फूस डाले, गोंड तगड़े और काले"
30

'मैला आँचल' की स्त्री पात्र हैं :

A. सुहागी

B. फुलिया

C. मनोरमा

D. आभा रानी

E. मंगला देवी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (C), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (C), (D)

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Answer: ((b))

केवल (B), (D), (E)

'मैला आँचल' की स्त्री पात्र हैं-

  • B. फुलिया
  • D. आभा रानी
  • E. मंगला देवी

Key Pointsमैला आँचल-

  • रचनाकार-फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954ई.
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत, कमला, बलदेव, कालीचरन, बावनदास आदि।
  • विषय-
  • इसका कथाकाल 1946 से 1948ई. के बीच का है।
  • पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा है।
  • ग्रामीण अंचल के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक यथार्थ को चित्रित किया गया है।

Important Pointsफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म-1921-1977ई.
  • प्रमुख आंचलिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • परती परिकथा(1957ई.)
  • दीर्घतपा(1964ई.)
  • जुलूस(1965ई.)
  • कितने चौराहे(1966ई.)
  • पल्टूबाबू रोड(1979ई.) आदि।
31

'तमस' उपन्यास के पात्र हैं :

A. अब्दुल्ला बेग

B. गिरधारी लाल

C. हरनाम सिंह

D. हयात बख्श

E. देवदत्त

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (C), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (B), (D)

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Answer: ((c))

केवल (C), (D), (E)

'तमस' उपन्यास के पात्र हैं-

  • C. हरनाम सिंह
  • D. हयात बख्श
  • E. देवदत्त

Key Pointsतमस-

  • रचनाकार-भीष्म साहनी
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1973 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • ​नत्थू, मुरादअली, बक्श जी, मेहता जी, रिचर्ड, लीजा, हरनाम सिंह, बंतो, राजो आदि।
  • विषय-
  • इसमें लाहौर के आस-पास के पाँच दिनों की कहानी वर्णित है।
  • यह 1947ई. के मार्च-अप्रैल में पंजाब में हुए भयानक सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है।
  • यह उपन्यास 2 खण्डों में विभाजित है- 1)साम्प्रदायिक तनाव की कहानी ; 2)अनेक गाँव उपन्यास की परिधि में आते हैं।
  • इसमें सांप्रदायिक उन्माद के चित्रण के साथ- साथ उन स्थितियों और कारणों का भी चित्रण हुआ है जिनके फलस्वरूप आपसी वैमनस्य ने दंगों का रूप ले लिया।
  • ब्रिटिश शासन और उसके कारिंदों को दंगे भड़काने की योजना का सूत्रधार चित्रित किया गया है।

Important Pointsभीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003 ई.
  • उपन्यास-
  • झरोखा(1967 ई.)
  • कड़ियाँ(1970 ई.)
  • बसंती(1980 ई.)
  • मय्यादास की माड़ी(1988 ई.) आदि।
32

‘मानस का हंस' उपन्यास की रचना में अमृतलाल नागर ने निम्न पुस्तकों से सहयोग लिया :

A. तुलसी काव्य मीमांसा

B. तुलसी आधुनिक वातायन से

C. लोकवादी तुलसीदास

D. काशी का इतिहास

E. अकबर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (A), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (A), (D), (E)

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Answer: ((d))

केवल (A), (D), (E)

‘मानस का हंस' उपन्यास की रचना में अमृतलाल नागर ने निम्न पुस्तकों से सहयोग लिया-

  • A. तुलसी काव्य मीमांसा
  • D. काशी का इतिहास
  • E. अकबर

Key Pointsमानस का हंस -

  • उपन्यासकार - अमृतलाल नागर
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1972 ई.
  • पात्र-
  • मैना कहारिन
  • बतासो
  • रतना
  • श्यामो की बुआ
  • बाबा -तुलसीदास
  • राजा -रजिया नाम से पुकारे जाने वाला पात्र, बाबा से आयु में एक दिन छोटे
  • संत बेनीमाधव (सूकरखेत निवासी शिष्य)- पचास-पचपन वर्षीय
  • रामू द्विवेदी (काशी से आए हुए शिष्य) -बाबा के शिष्य, इकतीस वर्षीय
  • बकरीदी कक्का- बाबा से आयु में चार दिन बड़े
  • पण्डित गणपति उपाध्याय -बाबा के पुराने शिष्य, अड़सठ-उनहत्तर वर्षीय
  • बूढ़ा रमज़ानी - बकरीदी दर्ज़ी का छोटा बेटा, इकसठ-बासठ वर्षीय
  • शिवदीन दुबे, नन्हकू, मनकू- गाँव के लोग
  • हुलसिया-पंडाइन की मुँहबोली ननद
  • पंडाइन
  • पण्डित आत्माराम
  • भैरोसिंह
  • विषय -
  • यह उपन्यास तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।
  • इसमें तुलसी के व्यक्तित्व की विभिन्न परतों को उजागर किया गया है।
  • व्यक्तित्व के साथ-साथ इनके कृतित्व का भी उल्लेख किया गया है।

Important Pointsअमृतलाल नागर-

  • जन्म - 1916-1960  ई.
  • मुख्य उपन्यास -
  • बूंद और समुंद्र(1956 ई.)
  • शतरंज के मोहरे(1959 ई.)
  • सुहाग के नुपूर(1960 ई.)
  • अमृत और विषय(1966 ई.) आदि।
  • खंजन नयन(1981 ई.) उपन्यास सूरदास के जीवन पर आधारित है।
33

“देसिल बअना सब जन मिट्ठा। तें तैसन जंपओं अवहट्ठा।” किसने कहा -

  1. ((a))

    आचार्य देवसेन

  2. ((b))

    गोरखनाथ

  3. ((c))

    विद्यापति

  4. ((d))

    हेमचंद

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Answer: ((c))

विद्यापति

“देसिल बअना सब जन मिट्ठा। तें तैसन जंपओं अवहट्ठा।” यह कहा है - विद्यापति

  • पंक्ति का अर्थ - 
  • ​अपने देश या अपनी भाषा सबको मीठी लगती है।
  • यही जानकर मैंने इसकी रचना की है।

Key Pointsविद्यापति-

  • विद्यापति बिहार प्रान्त के दरभंगा जिले के 'विपसी' नामक गाँव के निवासी थे।
  • विद्यापति शैव संप्रदाय के कवि थे।
  • विद्यापति राजा शिवसिंह और कीर्ति सिंह के राजदरबारी कवि थे।
  • विद्यापति के गुरु का नाम पंडित हरि मिश्र था।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • कीर्तिलता
  • गोरक्ष विजय
  • शैव सर्वस्व सार
  • गंगा वाक्यावली
  • कीर्ति पताका
  • भू परिक्रमा आदि।​

Important Pointsआचार्य देवसेन-

  • जैन आचार्य है।
  • रचनाएँ-
  • श्रावकाचार
  • दर्शनसार
  • आराधनासार
  • तत्वसार
  • लघुनयचक्र
  • आलापपद्धति
  • भावसंग्रह
  • धर्मसंग्रह

गोरखनाथ-

  • यह मत्स्येंद्रनाथ के शिष्य थे।
  • इनका समय राहुल सांकृत्यायन के अनुसार 845 ई. है।
  • मिश्रबंधुओं ने इन्हें हिन्दी का प्रथम गद्य लेखक कहा है।
  • डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल ने गोरख के 14 ग्रंथों को प्रमाणिक मानकर उनका सम्पादन 'गोरखबानी' के नाम से किया।
  • वे ग्रंथ हैं -
  • शब्द
  • पद
  • शिष्या दर्शन
  • प्राणसंकली
  • आत्मबोध
  • पंचमात्र आदि।
  • इनके द्वारा लिखित संस्कृत ग्रंथ हैं-
  • शक्ति संगम तंत्र
  • गोरक्ष शतक
  • योगसिद्धांत पद्धति
  • योग चिंतामणि आदि।
  • आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी-
  • "शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली और इतना महिमान्वित भारतवर्ष में दूसरा नहीं हुआ।"

​हेमचन्द्र-

  • जन्म-1078-1162 ई.
  • महान गुरु, समाज-सुधारक, धर्माचार्य, गणितज्ञ एवं अद्भुत प्रतिभाशाली मनीषी थे।
  • हेमचन्द्र ने 'सिद्धहेमशब्दानुशासनम्' नामक नूतन पंचांग व्याकरण तैयार किया था।
34

राधा के प्रेम-संवेदन के माध्यम से जीवन को समझने का एक सफल प्रयत्न किस रचना में है?

  1. ((a))

    लोकायतन

  2. ((b))

    आत्मजयी

  3. ((c))

    संशय की एक रात

  4. ((d))

    कनुप्रिया

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Answer: ((d))

कनुप्रिया

राधा के प्रेम-संवेदन के माध्यम से जीवन को समझने का एक सफल प्रयत्न कनुप्रिया रचना में है। 

कनुप्रिया-

  • धर्मवीर भारती की कृति 'कनुप्रिया', कनु अर्थात कृष्ण की प्रिया राधा की अनुभूतियों की गाथा है।
  • ऐसा लगता है जैसे धर्मवीर भारती ने नारी के अंतर्मन की एक एक परत खोल कर देखी है।
  • इस रचना में नारी के मन की संवेदनाओं और प्यार के नैसर्गिक सौन्दर्य का अप्रतिम चित्रण है।
  • कनुप्रिया का प्रथम संस्करण सन 1959 में प्रकाशित हुआ था।

Key Points

धर्मवीर भारती-

  • जन्म-1926-1997 ई.
  • दूसरा सप्तक के प्रमुख कवि है।
  • रचनाएँ-
  • ठंडा लोहा(1952 ई.)
  • सात गीत वर्ष(1959 ई.)
  • देशान्तर(1960 ई.) आदि।

Important Points

लोकायतन-

  • रचनाकार-सुमित्रानंदन पंत
  • विधा-काव्य
  • प्रकाश��� वर्ष-1964 ई.
  • विषय-
  • यह काव्य महात्मा गाँधी के जीवन पर आधारित है।
  • इसमें भारतीय समाज की स्वाधीनता के पूर्व एवं पश्चात की कथा कही गई है।

आत्मजयी-

  • रचनाकार-कुँवर नारायण
  • विधा- प्रबंध काव्य
  • प्रकाशन वर्ष-1965 ई.
  • विषय-
  • इसकी कथा-वस्तु 'कठोपनिषद्'  की 'यम-नचिकेता' की कहानी पर आधारित है।
  • जीवन व मृत्यु का मौलिक अर्थ।

संशय की एक रात-

  • रचनाकार-नरेश मेहता
  • प्रकाशन वर्ष-1962 ई.
  • विषय-
  • इस कविता में युद्ध को लेकर 'राम' के मन में उठते हुए द्वन्द का चित्रण किया गया है।

Additional Information

सुमित्रानंदन पंत-

  • जन्म-1900-1977 ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • छायावादी-
  • ग्रंथि(1920 ई.)
  • पल्लव(1926 ई.)
  • वीणा(1929 ई.)
  • गुंजन(1932ई.)
  • प्रगतिवादी-
  • युगांत(1937ई.)
  • युगवाणी(1938ई.) आदि।
  • अरविन्द दर्शन से प्रभावित-
  • स्वर्णकिरण(1947ई.)
  • स्वर्ण धूलि(1947 ई.)
  • युगांतर(1948 ई.) आदि।
  • नवमानवतावादी-
  • उत्तरा(1949 ई.)
  • रजतशिखर(1952 ई.)
  • शिल्पी(1952 ई.)
  • चिदंबरा(1968 ई.) आदि।

कुँवर नारायण-

  • जन्म-1927-2017ई.
  • तीसरा सप्तक के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • चक्रव्यूह (1956ई.)
  • परिवेश:हम तुम (1961ई.)
  • अपने सामने (1979ई.)
  • वाजश्रवा के बहाने (2008ई.) आदि।

नरेश मेहता-

  • जन्म-1922-2000ई.
  • दूसरा सप्तक(1951) के महत्वपूर्ण कवि  रहे है|
  • मुख्य रचनाएँ-
  • बनपाखी सुनो (1957ई.)
  • बोलने दो चिड को (1961ई.)
  • उत्सवा (1979ई.) आदि।
35

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित 'ठेठ हिंदी का ठाठ' किस विधा की रचना है?

  1. ((a))

    कविता

  2. ((b))

    कहानी

  3. ((c))

    उपन्यास

  4. ((d))

    निबंध

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Answer: ((c))

उपन्यास

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित 'ठेठ हिंदी का ठाठ' उपन्यास विधा की रचना है। 

उपन्यास-

  • उपन्यास का अर्थ होता है- सामने रखना। उपन्यास गद्य लेखन की एक विधा है।
  • जिसमें मानव जीवन के किसी तत्व को उक्ति उक्त रूप में समन्वित कर रखा जाये।
  • उपन्यास को मानव जीवन का प्रतिबिंब भी कह सकते है।

Key Pointsठेठ हिंदी का ठाठ-

  • रचनाकार-अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1899 ई.
  • विषय-
  • इस उपन्यास का एक नाम 'देवबाला' भी है।
  • इसमें अनमेल विवाह की समस्या का चित्रण किया गय�� है।
  • इस उपन्यास को 'मुहावरों की पाठ्य-पुस्तक' कहा जाता है।

Important Pointsअयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'-

  • जन्म-1865-1947 ई.
  • अन्य उपन्यास-
  • अधखिला फूल(1907 ई.) आदि।

Additional Informationकहानी-

  • कहानी, हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है।
  • उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ, जिसे कहानी के नाम से जाना गया।
  • जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है।
  • उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास, सब उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

निबन्ध-

  • निबन्ध (Essay) गद्य लेखन की एक विधा है।
  • लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है।
  • निबंध के पर्याय रूप में सन्दर्भ, रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है।
36

“किसी भाषा का साहित्य में व्यवहार न होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उस भाषा का अस्तित्व ही नहीं था ” - यह कथन किस लेखक का है?

  1. ((a))

    रामकुमार वर्मा

  2. ((b))

    रामचंद्र शुक्ल

  3. ((c))

    धीरेंद्र वर्मा

  4. ((d))

    मिश्र बंधु

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Answer: ((b))

रामचंद्र शुक्ल

“किसी भाषा का साहित्य में व्यवहार न होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उस भाषा का अस्तित्व ही नहीं था ” - यह कथन रामचंद्र शुक्ल लेखक का है। 

Key Pointsआचार्य रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म- 1884 - 1941 ई0
  • निबंध- 
  • भाव या मनोविकार
  • उत्साह
  • श्रद्धा-भक्ति
  • करुणा
  • ईर्ष्या
  • क्रोध
  • कविता क्या है?
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था
  • रसात्मक बोध के विविध रूप
  • काव्य में प्रकृतिक दृश्य
  • काव्य में रहस्यवाद
  • काव्य में अभिव्यंजनावाद

Important Pointsरामकुमार वर्मा-

  • जन्म-1905-1990ई.
  • मुख्य नाटक-
  • कौमोदी मोहोत्सव(1954ई.)
  • विजय पर्व(1954ई.) आदि।

धीरेंद्र वर्मा-

  • जन्म- 1897-1973 ई.
  • हिन्दी और ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • हिन्दी राष्ट्र या सूबा हिन्दुस्तान
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • हिन्दी साहित्य कोश
  • सूरसागर सार संग्रह आदि।

मिश्र बंधु-

  • मिश्रबंधु नाम के तीन सहोदर भाई थे-
  • गणेशबिहारी
  • श्यामबिहारी
  • शुकदेवबिहारी
  • रचनाएँ-
  • लवकुश चरित्र
  • हिंदी नवरत्न
  • मिश्रबंधु विनोद(4 भाग- मिश्रबंधुओं द्वारा रचित हिन्दी साहित्य का इ��िहास)
  • नेत्रोन्मीलन आदि।
37

“एशिया के हरे-भरे धर्म, जैसे ही वे पश्चिमी विज्ञान की वास्तविकताओं के संपर्क में लाये जाते हैं, सूखी लकड़ियों का ढेर मात्र रह जाते हैं।" यह कथन किस अंग्रेज़ अधिकारी का है?

  1. ((a))

    मैकॉले

  2. ((b))

    विलियम जोन्स

  3. ((c))

    कैनिंग

  4. ((d))

    हंटर

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Answer: ((d))

हंटर

“एशिया के हरे-भरे धर्म, जैसे ही वे पश्चिमी विज्ञान की वास्तविकताओं के संपर्क में लाये जाते हैं, सूखी लकड़ियों का ढेर मात्र रह जाते हैं।" यह कथन हंटर अंग्रेज़ अधिकारी का है। 

Important Pointsमैकॉले-

  • **पूरा नाम-**थॉमस बैबिंगटन मैकॉले
  • जन्म-1800-1859 ई.
  • वह एक ब्रिटिश इतिहासकार और विग राजनेता थे,जिन्होंने 1839 और 1841 के बीच युद्ध में सचिव के रूप में और 1846 और 1848 के बीच पेमास्टर-जनरल के रूप में कार्य किया।

विलियम जोन्स-

  • **जन्म-**1746-1794 ई.
  • अंग्रेज प्राच्य विद्यापंडित और विधिशास्त्री तथा प्राचीन भारत संबंधी सांस्कृतिक अनुसंधानों का प्रारंभकर्ता।
  • 1774 में "पोएसिअस असिपातिका कोमेंतेरिओरम लिबरीसेम्स" और 1783 में "मोअल्लकात" नामक सात अरबी कविताओं का अनुवाद किया।
  • "आन द ला ऑव बेलमेंट्स" (1781) विशेष प्रसिद्ध है।

कैनिंग-

  • कैनिंग भारत के गवर्नर जनरल रहे थे।
  • कैंनिग के कार्यकाल मे ही भारत के मुख्य क़ानून बने जैसे भारतीय दंड सहिंता आदि विद्रोह के दमन का खर्च वसूलने हेतु आयकर पहली बार लगाया गया था।
38

वैज्ञानिक ज्ञान और आख्यान में विरोध और द्वंद्ध संबंध पर किस चिंतक ने विचार किया है?

  1. ((a))

    हेबरमास

  2. ((b))

    ल्योतार्द

  3. ((c))

    ग्वात्री

  4. ((d))

    मदन सरूप

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Answer: ((b))

ल्योतार्द

वैज्ञानिक ज्ञान और आख्यान में विरोध और द्वंद्ध संबंध पर ल्योतार्द चिंतक ने विचार किया है। 

Key Pointsज्याँ फ्रांसुआ ल्योतार्द-

  • जन्म- 1924-1998 ई.
  • ल्योतार्द वह प्रमुख विचारक हैं जिन्होंने उत्तर आधुनिक शब्दावली को प्रसिद्धि दिलायी।
  • उनकी पुस्तक दि पोस्टमॉडर्न कंडीशन ने, जो 1979 में फ्रेंच में और 1984 में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई, इस शब्दावली को लोकप्रिय बनाया।

Additional Informationहेबरमास-

  • जन्म- 18 जून 1929 ई.
  • आलोचनात्मक सिद्धांत और व्यावहारिकता (प्रैग्मटिज्म) की परम्परा में एक जर्मन दार्शनिक और समाजशास्त्री हैं।
  • उनकी कृतियाँ संचार तर्कसंगतता और सार्वजनिक क्षेत्र से सम्बन्धित हैं।
  • हैबरमास का कहना है कि उन्नत औद्योगिक समाज के मौलिक अन्तर्विरोधों को पूजीवाद से सम्बन्धित कट्टर मार्क्सवादी सिद्धान्त के आधार पर समझ पाना कठिन है।
  • इसी कारण उन्होंने अपने सिद्धान्त में पँजीवादी समाजो का तीन प्रकारों में बाँटा है-
  • उदार पंजीवाद
  • संगठित पूंजीवाद
  • उत्तर पूँजीवाद

मदन सरूप-

  • **जन्म-**1930-1993 ई.
  • रचनाएं-
  • The Politics Of Multiracial Education
  • Marxism and education
39

“मुझे उन लोगों से ज़रा भी हमदर्दी नहीं है, जो बातें तो करते हैं कम्यूनिस्टों की-सी, मगर जीवन है रईसों का-सा, उतना ही विलासमय, उतना ही स्वार्थ से भरा हुआ।” - यह कथन किस उपन्यास का है?

  1. ((a))

    झूठा सच

  2. ((b))

    गोदान

  3. ((c))

    मैला आँचल

  4. ((d))

    ज़िन्दगीनामा

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Answer: ((b))

गोदान

“मुझे उन लोगों से ज़रा भी हमदर्दी नहीं है, जो बातें तो करते हैं कम्यूनिस्टों की-सी, मगर जीवन है रईसों का-सा, उतना ही विलासमय, उतना ही स्वार्थ से भरा हुआ।” - यह कथन गोदान उपन्यास का है। 

उपर्युक्त संवाद गोदान उपन्यास में मेहता ने रायसाहब को कही है। 

  • गोदान, प्रेमचन्द का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है।
  • कुछ लोग इसे उनकी सर्वोत्तम कृति भी मानते हैं।
  • इसका प्रकाशन 1936 ई. में हिन्दी ग्रन्थ रत्नाकर कार्यालय, बम्बई द्वारा किया गया था। इसमें भारतीय ग्राम समाज एवं परिवेश का सजीव चित्रण है।

Key Pointsगोदान-

  • रचनाकार-प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष-1936 ई.
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र-
  • ​होरी
  • राय साहब
  • मेहता
  • मालती
  • गोविंदी आदि।

Important Pointsप्रेमचंद-

  • जन्म-1880-1936 ई.
  • प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे।
  • उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन किया।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • सेवासदन- (1918)
  • प्रेमाश्रम (1922)
  • रंगभूमि (1925)
  • निर्मला (1925)
  • कायाकल्प (1926)
  • प्रतिज्ञा (1927)
  • गबन (1928)
  • कर्मभूमि (1932)
  • गोदान (1936) आदि।
40

उपन्यास ‘बाणभट्ट की आत्मकथा' के कथामुख' (प्रस्तावना वक्तव्य) के अनुसार मिस कैथराइन किस राष्ट्र की निवासी थीं?

  1. ((a))

    स्वीडन

  2. ((b))

    इटली

  3. ((c))

    बेल्जियम

  4. ((d))

    आस्ट्रिया

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Answer: ((d))

आस्ट्रिया

उपन्यास ‘बाणभट्ट की आत्मकथा' के कथामुख' (प्रस्तावना वक्तव्य) के अनुसार मिस कैथराइन आस्ट्रिया राष्ट्र की निवासी थीं। 

Key Pointsबाणभट्ट की आत्मकथा-

  • रचनाकार-हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1946 ई.
  • प्रमुख पात्र-
  • बाणभट्ट, निपुणिका, भट्टिनी आदि।
  • विषय-
  • इसमें कवि बाणभट्ट के जीवन का आधार लेकर राजा हर्षवर्धन के समय की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक स्थितियों का चित्रण किया गया है।
  • यह  ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित होने पर भी मूलतः कल्पना एवं लोक श्रुति से प्राप्त प्रसंगों के संयोजन से लिखी गई रचना है जो छठी-सातवीं शताब्दी की कथा है।
  • इसमें प्रेम का उद्धार स्वरूप चित्रित हुआ है।

Important Pointsहजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979 ई.
  • ऐतिहासिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • चारुचन्द्रलेख(1963 ई.)
  • पुनर्नवा(1973 ई.)
  • अनामदास का पोथा(1976 ई.) आदि।
41

अध्यापक पूर्णसिंह से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए:

A. हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी में लिखने वाले पूर्ण सिंह ने अंग्रेजी में सर्वाधिक लिखा है।

B. पूर्ण सिंह ने स्वामी रामतीर्थ की जीवनी 1924 में लिखी थी।

C. पूर्ण सिंह पारंपरिक भारतीय उदात्त जीवन-मूल्यों को आधुनिक पाश्चात्य दर्शन एवं विज्ञान के आलोक में नया रूप देकर प्रस्तुत करना चाहते थे।

D. पूर्ण सिंह ने हिंदी में कुल 36 निबंध लिखे।

E. पूर्ण सिंह ने हिंदी में स्वच्छंदतावादी कविताएँ लिखीं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (A), (B), (D)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((a))

केवल (A), (B), (C)

अध्यापक पूर्णसिंह से संबंधित निम्न कथन सही हैं-

  • A. हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी में लिखने वाले पूर्ण सिंह ने अंग्रेजी में सर्वाधिक लिखा है।
  • B. पूर्ण सिंह ने स्वामी रामतीर्थ की जीवनी 1924 में लिखी थी।
  • C. पूर्ण सिंह पारंपरिक भारतीय उदात्त जीवन-मूल्यों को आधुनिक पाश्चात्य दर्शन एवं विज्ञान के आलोक में नया रूप देकर प्रस्तुत करना चाहते थे।

Important Pointsअध्यापक पूर्णसिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युगीन श्रेष्thनिबंधकार है।
  • आधुनिक पंजाबी काव्य के संस्थापकों में इनकी गणना होती है।
  • इनके सभी निबन्ध सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुए।
  • निबंध-
  • आचरण की सभ्यता
  • मजदूरी और प्रेम
  • सच्ची वीरता
  • कन्यादान आदि।
42

निबंधकार प्रताप नारायण मिश्र से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए।

A. प्रतापनारायण मिश्र को हिंदी का 'एडीसन' कहा जाता है।

B. उनके निबंधों में भाषा का स्वरूप अत्यंत औपचारिक है।

C. निबंध के क्षेत्र में उन्हें आत्मव्यंजक निबंधों का जन्मदाता माना जाता है।

D. उन्होंने बहुत से उड़िया निबंधों का हिंदी में अनुवाद किया।

E. उनके निबंधों में संस्कृत और उर्दू के शब्दों के साथ बैसवारे की ग्रामीण कहावतों और शब्दों का भी प्रयोग मिलता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (C)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (A), (C), (E)

निबंधकार प्रताप नारायण मिश्र से संबंधित सही कथन हैं-

  • A. प्रतापनारायण मिश्र को हिंदी का 'एडीसन' कहा जाता है।
  • C. निबंध के क्षेत्र में उन्हें आत्मव्यंजक निबंधों का जन्मदाता माना जाता है।
  • E. उनके निबंधों में संस्कृत और उर्दू के शब्दों के साथ बैसवारे की ग्रामीण कहावतों और शब्दों का भी प्रयोग मिलता है।

Important Pointsप्रताप नारायण मिश्र-

  • जन्म- 1856-1894 ई.
  • भारतेन्दु युगीन कवि है।
  • विषय की दृष्टि से इनके निबंधों में विविधता है।
  • शैली की दृष्टि से इन्होंने चार प्रकार के निबंधों की रचना की हैं-
  • वर्णनात्मक
  • विचारात्मक
  • भावात्मक
  • हास्य-व्यंग्यपरक
  • निबंध -
  • धोखा
  • दाँत
  • वृद्ध
  • भौं
  • मनोयोग
  • ईश्वर की मूर्ति आदि।
  • काव्य रचनाएँ-
  • प्रेम पुष्पावली
  • लोकोक्ति शतक
  • शृंगार विलास
  • हरगंगा आदि।
  • नाटक रचनाएँ-
  • कलि कौतुक रूपक(1886 ई.) आदि।
43

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (समास)सूची - II (उदाहरण)
A.तत्पुरुष समासI.लव-कुश
B.द्वंद्व समासII.यथामति
C.अव्ययीभाव समासIII.शिवालय
D.बहुव्रीहि समासIV.चक्रपाणि
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (IV), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (III)

  2. ((b))

    (A) - (III), (B) - (II), (C) - (I), (D) - (IV)

  3. ((c))

    (A) - (II), (B) - (I), (C) - (III), (D) - (IV)

  4. ((d))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (IV)

Show Answer
Answer: ((d))

(A) - (III), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (IV)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (समास)सूची - II (उदाहरण)
A.तत्पुरुष समासIII.शिवालय
B.द्वंद्व समासI.लव-कुश
C.अव्ययीभाव समासII.यथामति
D.बहुव्रीहि समासIV.चक्रपाणि

Key Points

तत्पुरुष समास-

  • तत्पुरुष समास वह होता है, जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है।
  • इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।
  • उदाहरण-
  • ​भुखमरा = भूख से मरा
  • रसोईघर = रसोई के लिए घर

द्वन्द्व समास-

  • जिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है।
  • उदाहरण-
  • सुख-दुख = सुख या दुःख
  • गौरीशंकर = गौरी और शंकर

अव्ययीभाव समास-

  • इस समास में पहला या पूर्वपद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है और समस्तपद वाक्य में क्रियाविशेषण का काम करता है।
  • अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।
  • उदाहरण- 
  • यथाशक्ति= शक्ति के अनुसार

बहुब्रीहि समास- 

  • जिस समास में दोनों पदों के माध्यम से एक विशेष (तीसरे) अर्थ का बोध होता है, बहुव्रीहि समास कहलाता है
  • उदाहरण- 
  • ​लम्बोदर = लम्बा उदर है जिनका अर्थात् गणेशजी।
44

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (रचना)सूची - II (रचनाकार)
A.मंटो मेरा दुश्मनI.शिवरानी देवी
B.ये और वेII.रामवृक्ष बेनीपुरी
C.जंजीरें और दीवारेंIII.उपेन्द्रनाथ अश्क
D.प्रेमचंद : घर मेंIV.जैनेन्द्रकुमार
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (III), (B) - (II), (C) - (IV), (D) - (I)

  2. ((b))

    (A) - (III), (B) - (IV), (C) - (II), (D) - (I)

  3. ((c))

    (A) - (III), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (II)

  4. ((d))

    (A) - (IV), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (I)

Show Answer
Answer: ((b))

(A) - (III), (B) - (IV), (C) - (II), (D) - (I)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (रचना)सूची - II (रचनाकार)
A.मंटो मेरा दुश्मनIII.उपेन्द्रनाथ अश्क
B.ये और वेIV.जैनेन्द्र कुमार
C.जंजीरें और दीवारेंII.रामवृक्ष बेनीपुरी
D.प्रेमचंद : घर मेंI.शिवरानी देवी
45

देवनागरी लिपि के मानकीकरण के प्रयासों को पहले से बाद के क्रम में लगाएँ :

A. डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित परिषद

B. महादेव गोविंद रानाडे के सुझाव

C. काका कालेलकर की अध्यक्षता में गठित सुधार समिति

D. महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुणे द्वारा गठित लिपि सुधार समिति

E. आचार्य नरेन्द्रदेव की अध्यक्षता में गठित परिषद

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    B, C, D, E, A

  2. ((b))

    B, D, C, E, A

  3. ((c))

    B, E, C, D, A

  4. ((d))

    D, B, E, C, A

Show Answer
Answer: ((b))

B, D, C, E, A

देवनागरी लिपि के मानकीकरण के प्रयासों का सही क्रम हैं-

  • B. महादेव गोविंद रानाडे के सुझाव
  • D. महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुणे द्वारा गठित लिपि सुधार समिति
  • C. काका कालेलकर की अध्यक्षता में गठित सुधार समिति
  • E. आचार्य नरेन्द्रदेव की अध्यक्षता में गठित परिषद
  • A. डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित परिषद

Key Pointsदेवनागरी लिपि-

  • एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं।
  • संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, नेपाली, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं।
  • इसे नागरी लिपि व हिन्दी लिपि भी कहा जाता है।
  • इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमन और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में लिखी जाती हैं।
  • हिन्दी भारतीय गणराज की राजकीय और मध्य भारतीय- आर्य भाषा है।
  • देवनागरी को बाएं से दाहिनी ओर लिखा जाता है।
  • यह लिपि मूलत: वर्णाक्षरीय है, लेकिन उपयोग में यह आक्षरिक है, जिसमें प्रत्येक व्यंजन के अंत में एक लघु ध्वनि को मान लिया जाता है।
  • देवनागरी को स्वर चिह्नों के बिना भी लिखा जाता रहा है।
  • यह एक ध्वन्यात्मक लिपि है जो प्रचलित लिपियों (रोमन, अरबी, चीनी आदि) में सबसे अधिक वैज्ञानिक है।
  • देवनागरी का विकास उत्तर भारतीय ऐतिहासिक गुप्त लिपि से हुआ, हालांकि अंतत: इसकी व्युत्पत्ति ब्राह्मी वर्णाक्षरों से हुई, जिससे सभी आधुनिक भारतीय लिपियों का जन्म हुआ है।
46

निम्न उपन्यासों को, प्रथम प्रकाशन वर्ष के अनुसार, पहले से बाद के क्रम में लगाइये:

A. राग दरबारी

B. मैला आँचल

C. आपका बंटी

D. मानस का हंस

E. झूठा सच

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    E, B, D, A, C

  2. ((b))

    E, B, A, C, D

  3. ((c))

    B, E, A, C, D

  4. ((d))

    B, D, E, A, C

Show Answer
Answer: ((c))

B, E, A, C, D

उपन्यासों का प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही क्रम हैं-

  • B. मैला आँचल
  • E. झूठा सच
  • A. राग दरबारी
  • C. आपका बंटी
  • D. मानस का हंस

Key Pointsमैला आँचल-

  • रचनाकार-फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954ई.
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत,कमला,बलदेव,कालीचरन,बावनदास आदि।
  • विषय-
  • इसका कथाकाल 1946 से 1948ई. के बीच का है।
  • पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा है।
  • ग्रामीण अंचल के सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक यथार्थ को चित्रित किया गया है।

झूठा सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • विधा-उप��्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1958 ई.
  • विषय-
  • भारत के राष्ट्रीय व सामाजिक जीवन का चित्रण किया गया है।

राग दरबारी-

  • रचनाकार-श्रीलाल शुक्ल
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1968 ई.
  • विषय-
  • पूर्वांचल के गाँव शिवपालगंज के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का यथार्थ चित्रण हुआ है।

मानस का हंस -

  • उपन्यासकार - अमृतलाल नागर
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1972 ई.
  • पात्र-
  • मैना कहारिन
  • बतासो
  • रतना
  • श्यामो की बुआ
  • बाबा -तुलसीदास
  • राजा -रजिया नाम से पुकारे जाने वाला पात्र, बाबा से आयु में एक दिन छोटे
  • संत बेनीमाधव (सूकरखेत निवासी शिष्य)- पचास-पचपन वर्षीय
  • ​विषय -
  • यह उपन्यास तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।
  • इसमें तुलसी के व्यक्तित्व की विभिन्न परतों को उजागर किया गया है।
  • व्यक्तित्व के साथ-साथ इनके कृतित्व का भी उल्लेख किया गया है।

आपका बंटी-

  • रचनाकार-मन्नू भंडारी
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1971 ई.
  • विषय-
  • बाल मनोविज्ञान का उपन्यास है।
  • तलाक शुदा दंपति का उसकी संतान पर पड़े प्रभाव का चित्रण किया गया है।

Important Pointsफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म-1921-1977ई.
  • प्रमुख आंचलिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • परती परिकथा(1957ई.)
  • दीर्घतपा(1964ई.)
  • जुलूस(1965ई.)
  • कितने चौराहे(1966ई.)
  • पल्टूबाबू रोड(1979ई.) आदि।

यशपाल-

  • जन्म-1903-1976 ई.
  • उपन्यास-
  • दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.)
  • मेरी तेरी उसकी बात(1974 ई.) आदि।

श्रीलाल शुक्ल-

  • जन्म-1925-2011 ई.
  • उपन्यास-
  • सुनी घाटी का सूरज(1957 ई.)
  • अज्ञातवास(1962 ई.)
  • सीमाएं टूटती हैं(1973 ई.)
  • पहला पड़ाव(1987 ई.)

मन्नू भंडारी-

  • उपन्यास-
  • महाभोज(1979 ई.)
  • स्वामी(2003 ई.) आदि।
47

निम्नलिखित कहानियों को प्रथम प्रकाशन वर्ष के आधार पर पहले से बाद के क्रम में लगाइये :

A. ईदगाह

B. आकाशदीप

C. कानों में कंगना

D. परिंदे

E. राजा निरबंसिया

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    A, B, C, D, E

  2. ((b))

    C, B, A, D, E

  3. ((c))

    A, E, C, B, D

  4. ((d))

    D, A, E, B, C

Show Answer
Answer: ((b))

C, B, A, D, E

कहानियों का प्रथम प्रकाशन वर्ष के आधार पर सही क्रम हैं-

  • C. कानों में कंगना
  • B. आकाशदीप
  • A. ईदगाह
  • D. परिंदे
  • E. राजा निरबंसिया

Key Pointsईदगाह-

  • रचनाकार - प्रेमचंद
  • विधा - कहानी
  • प्रकाशन वर्ष - 1933 ई.
  • विषय -
  • यह एक मनोविश्लेषणवादी कहानी है।
  • इसमें हामिद और उसकी दादी अमीना को मुख्य रूप से चित्रित किया गया है।
  • इस कहानी में एक बच्चे के उसकी उम्र से ज्यादा समझदार होने का वर्णन है।
  • हामिद मैले से खिलौने, मिठाइयों की जगह अपनी दादी के लिए चिमटा लेकर आता है क्योंकि उसकी दादी के हाथ रोटी बनाते हुए अक्सर जल जय करते थे।

आकाशदीप-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • विषय-
  • चम्पा और बुद्धगुप्त के आदर्श प्रेम व त्याग की कहानी है।

कानों में कंगना-

  • रचनाकार- राधिकारमण प्रसाद सिंह
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1913 ई.
  • पात्र-
  • नरेंद्र, किरण, योगीश्वर आदि।
  • विषय-
  • नरेंद्र का किरण से प्रेम, विवाह और प्रेम विमुख हो किन्नरी के प्रेम में पड़कर सब कुछ लुटाने की कहानी है।
  • अंतः में नरेंद्र द्वारा प्रयश्चित दिखाया गया है परंतु तब तक किरण अपने प्राण त्याग चुकी थी।

परिंदे-

  • रचनाकार- निर्मल वर्मा
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1957 ई. 
  • हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
  • परिंदे कहानी संग्रह 1960 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • पात्र-
  • लतिका, डॉ. मुकर्जी, मिस्टर ह्यूबर्ट, गिरीश, मिस वुड आदि।
  • विषय-
  • मध्यवर्गीय जीवन में व्याप्त अकेलेपन का वर्णन किया गया है।

राजा निरबंसिया-

  • रचनाकार- कमलेश्वर
  • प्रकाशन वर्ष- 1957 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • ​जगपति, चंदा, जगपति की मां, दयाराम, बच्चन सिंह आदि।
  • विषय-
  • 'राजा निरबसिया' कहानी कस्बाई जीवन पर आधारित है, जो आम आदमी की ही कथा कहती है।
  • कमलेश्वर ने दो भिन्न युगों की कहानियों को निरबंसिया कहानी आर्थिक विवशताओं, निरुपताओं द्वारा दांपत्य सम्बन्धों की समान्तर रूप से इस कहानी में रख दिया है।
  • एक ही समय में पुराने तथा आधुनिक युग की दो कहानियाँ साथ चलती हैं।

Important Pointsप्रेमचंद-

  • जन्म - 1880-1936 ई.
  • अन्य नाम - धनपत राय, नवाब राय
  • प्रथम उर्दू कहानी संग्रह -
  • सोजे वतन (1908 ई.)
  • प्रेमचंद नाम से पहली कहानी-
  • बड़े घर की बेटी (1910 ई.)
  • प्रथम हिन्दी कहानी संग्रह-
  • सप्त सरोज (1917 ई.)
  • कहानी संग्रह-
  • नवनिधि (1917 ई.)
  • प्रेम पूर्णिमा (1918 ई.)
  • प्रेम प्रसून (1924 ई.)
  • प्रेम द्वादशी (1926 ई.)
  • प्रेम प्रतिमा (1926 ई.)
  • सप्त सुमन (1930 ई.)
  • कफ़न (1936 ई.) आदि।
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • नमक का दारोगा (1913 ई.)
  • सौत (1915 ई.)
  • पंच परमेश्वर (1916 ई.)
  • बूढ़ी काकी (1921 ई.)
  • शतरंज के खिलाड़ी (1925 ई.)
  • सद्गति (1930 ई.)
  • दो बैलों की कथा (1931 ई.)
  • बड़े भाई साहब (1934 ई.) आदि।

जयशंकर प्रसाद-

  • जन्म- 1889-1937 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • छाया(1912 ई.)
  • प्रतिध्वनि(1926 ई।)
  • आँधी(1931 ई.)
  • इन्द्रजाल(1936 ई.) आदि।
  • कहानियाँ-
  • ग्राम
  • देवदासी
  • देवरथ
  • विरामचिह्न
  • मधुआ
  • पुरस्कार
  • गुंडा आदि।

राधिकारमण प्रसाद सिंह-

  • कहानियाँ-
  • गांधी टोपी(1938 ई.)
  • कुसुमांजलि
  • सावनी समाँ आदि।

निर्मल वर्मा-

  • जन्म- 1929-2005 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • जलती झाड़ी(1965 ई.)
  • पिछली गर्मियों में(1968 ई.)
  • बीच बहस में(1973 ई.)
  • कव्वे और काला पानी(1983 ई.) आदि।

कमलेश्वर-

  • जन्म- 1932-2007 ई.
  • कहानियाँ-
  • कस्बे का आदमी(1958 ई.)
  • खोयी हुई दिशाएं(1963 ई.)
  • मांस का दरिया(1966 ई.) आदि।
48

नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन I : ‘बघेली' बोली के अन्य दो नाम 'लरिया' और 'खल्ताही' भी हैं।

कथन II : डॉ. उदय नारायण तिवारी के अनुसार अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी में बहुत कम अंतर है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    कथन I और II दोनों सत्य हैं।

  2. ((b))

    कथन I और II दोनों असत्य हैं।

  3. ((c))

    कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य है।

  4. ((d))

    कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

Show Answer
Answer: ((d))

कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

सही उत्तर है- कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

Key Pointsपूर्वी हिंदी-

  • तीन शाखाएँ हैं -
  • अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी।
  • अवधी-
  • ​अवधी अर्धमागधी प्राकृत की परंपरा में है।
  • यह अवध में बोली जाती है।
  • इसके दो भेद हैं - पूर्वी अवधी और पश्चिमी अवधी।
  • अवधी को बैसवाड़ी भी कहते हैं।
  • तुलसी के रामचरितमानस में अधिकांशत: पश्चिमी अवधी मिलती हैं और जायसी के पदमावत में पूर्वी अवधी।
  • बघेली-
  • ​बघेली बघेलखंड में प्रचलित है।
  • यह अवधी का ही एक दक्षिणी रूप है।
  • छत्तीसगढ़ी-
  • ​छत्तीसगढ़ी पलामू (झारखण्ड) की सीमा से लेकर दक्षिण में बस्तर तक और पश्चिम में बघेलखंड की सीमा से उड़ीसा की सीमा तक फैले हुए भूभाग की बोली है।
  • इसमें प्राचीन साहित्य नहीं मिलता।
  • वर्तमान काल में कुछ लोकसाहित्य रचा गया है।

Important Points

  • खल्टाही -
  • छत्तीसगढ़ की यह बोली रायगढ़ ज़िले के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। यह बोली बालाघाट ज़िले के पूर्वी भाग में, कौड़िया में, साले-टेकड़ी में और भीमलाट में सुनाई देती है।
  • लरिया -
  • छत्तीसगढ़ कीे यह बोली महासमुंद, सराईपाली, बसना, पिथौरा के आस-पास बोली जाती है।

Additional Informationहिंदी की बोलियाँ-

  • हिन्दी की अनेक बोलियाँ (उपभाषाएँ) है-
  • जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, हड़ौती,भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं।
  • हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उपबोलियाँ हैं जो अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं।
49

नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में।

अभिकथन A : गांधीजी के सभी धार्मिक विचार उनके निजी अनुभवों से निकले थे, इसलिए उनकी भाषा में वही वैधकता और सच्चाई मिलती है जो उपनिषदों में दिखाई देती है, जो बुद्ध और ईसा तथा परमहंस रामकृष्ण के उद्गारों में भरी हुई है।

कारण R : गांधी जी ने धार्मिक सत्यों को खोजा नहीं, अपने जीवन में उनकी अनुभूति की थी।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सत्य है लेकिन R सत्य नहीं है।

  4. ((d))

    A असत्य है लेकिन R सत्य है।

Show Answer
Answer: ((a))

A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

सही उत्तर है- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  • गांधीजी के सभी धार्मिक विचार उनके निजी अनुभवों से निकले थे, इसलिए उनकी भाषा में वही वैधकता और सच्चाई मिलती है जो उपनिषदों में दिखाई देती है, जो बुद्ध और ईसा तथा परमहंस रामकृष्ण के उद्गारों में भरी हुई है क्योंकि गांधी जी ने धार्मिक सत्यों को खोजा नहीं, अपने जीवन में उनकी अनुभूति की थी।

Key Pointsगांधी जी-

  • पूरा नाम- मोहनदास करमचन्द गांधी
  • जन्म- 2 अक्टूबर 1869 ई.
  • निधन- 30 जनवरी 1948 ई.
  • भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे।
  • वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे।
  • मौलिक रूप से लिखित पुस्तकें चार हैं-
  • हिंद स्वराज
  • दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास
  • सत्य के प्रयोग (आत्मकथा)
  • गीता पदार्थ कोश सहित संपूर्ण गीता की टीका।
50

नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में ।

अभिकथन A : 'शिवशंभु के चिट्ठे' तथा 'दुबे जी का चिट्ठा' की परंपरा में विद्यानिवास मिश्र ने 'भ्रमरानंद' उपनाम से 'सरस्वती' संपादक श्रीनारायण चतुर्वेदी को चिट्ठियाँ लिखी हैं।

कारण R : ललित निबंध की विविध शैलियाँ विद्यानिवास मिश्र के हाथों में जीवंत हुई हैं।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सही है लेकिन R सही नहीं है।

  4. ((d))

    A सही नहीं है लेकिन R सही है।

Show Answer
Answer: ((b))

A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

सही उत्तर है- A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

Key Pointsविद्यानिवास मिश्र-

  • जन्म- 1905 - 2005 ईo
  • निबंध- 
  • छितवन की छाँह (1953)
  • कदम की फूली डाल (1956)
  • आँगन का पंछी और बनजारा मन (1963)
  • मैंने सिल पहुँचाई (1966)
  • बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974)
  • परंपरा कोई बन्धन नहीं (1976)
  • तमाल के झरोखे से (1981)
  • शेफाली झर रही है (1989) आदि।

Additional Informationललित निबंध-

  • इस प्रकार के निबंधों में निबंधकार सरस, अनुभूति-जन्य, आत्मीय व रोचक अनुभवों का वर्णन करते है।
  • सरस शैली का प्रयोग किया जाता है।
  • ललित निबंधों के बीज भारतेन्दु युग में ही स्पष्ट रूप से दिखाई देते है।
  • हिन्दी साहित्य में मुख्य रूप से हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ललित निबन्ध लिखे है।
  • ललित निबंधकार-
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • विद्यानिवास मिश्र
  • बालकृष्ण भट्ट
  • प्रतापनारायण मिश्र आदि।
51

नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में।

अभिकथन A : यात्राएं यहाँ पर जितनी बाहर की जाती हैं, उतनी ही अंदर की ओर भी।

कारण R : यात्रा संस्मरण 'टूरिस्ट गाइड' का स्थान लेने के लिए नहीं लिखे और पढ़े जाते । ऐसी पुस्तकों में प्रस्तुत ब्यौरा एक व्यक्ति की यात्रा का ब्यौरा होता है, और वह यात्रा जितनी बाहरी होती है उतनी ही भीतरी भी।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सही हैं लेकिन R. A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सही हे लेकि��� R सही नहीं है।

  4. ((d))

    A सही नहीं है लेकिन R सही है।

Show Answer
Answer: ((a))

A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

सही उत्तर है- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  • यात्राएं यहाँ पर जितनी बाहर की जाती हैं, उतनी ही अंदर की ओर भी क्योंकि यात्रा संस्मरण 'टूरिस्ट गाइड' का स्थान लेने के लिए नहीं लिखे और पढ़े जाते । ऐसी पुस्तकों में प्रस्तुत ब्यौरा एक व्यक्ति की यात्रा का ब्यौरा होता है, और वह यात्रा जितनी बाहरी होती है उतनी ही भीतरी भी।

Key Pointsयात्रा वृतांत-

  • इसे यात्रा साहित्य, यात्रा वृतांत या यात्रा संस्मरण भी कहा जाता है।
  • लेखक केवल यात्रा के वृतांत ही नहीं बल्कि अपने यात्रा वर्णन में अमुक स्थान की प्राकृतिक विशिष्ठता, सामाजिक संरचना, समाज, लोगों के रहन सहन संस्कृति, स्थानीय भाषा, आगंतुकों के प्रति उनकी सोच व विचारों को अपने साहित्य में स्थान भी देता हैं।

Confusion Pointsसंस्मरण-

  • स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख संस्मरण कहलाता है।

Additional Informationरामवृक्ष बेनीपुरी-

  • यात्रा वृतांत-
  • उड़ते चलो उड़ते चलो(1954 ई.) आदि।

अज्ञेय- 

  • यात्रा वृतांत-
  • एक बूँद सहसा उछली(1960 ई.) आदि।

कमलेश्वर-

  • यात्रा वृतांत-
  • खंडित यात्राएं(1975 ई.)
  • आँखों देखा पाकिस्तान(2006 ई.) आदि।

राहुल सांकृत्यायन-

  • यात्रा वृतांत-
  • मेरी तिब्बत यात्रा(1937 ई.)
  • किन्नर देश में(1948 ई.)
  • घुमक्कड़ शास्त्र(1948 ई.)
  • यात्रा के पन्ने(1952 ई.) आदि।
52

भाषा के रूप में ‘अवधी' का प्रथम प्रयोग किस रचना में मिलता है?

  1. ((a))

    खालिक बारी

  2. ((b))

    उक्ति व्यक्ति प्रकरण

  3. ((c))

    चन्दायन

  4. ((d))

    मृगावती

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Answer: ((a))

खालिक बारी

भाषा के रूप में ‘अवधी' का प्रथम प्रयोग खालिक बारी रचना में मिलता है। 

खालिक बारी-

  • रचनाकार- अमीर खुसरो
  • यह वस्तुतः फारसी-हिन्दी शब्दकोश है।

Key Pointsअमीर खुसरो-

  • **जन्म-**1253-1325 ई.
  • अमीर खुसरो खड़ी बोली के आदि कवि बोले जाते हैं।
  • अमीर खुसरो निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे।
  • अमीर खुसरो -
  • "मैं हिन्दुस्तान की तूती हूँ , अगर तुम वास्तव में मुझसे कुछ पूछना चाहते हो तो हिन्दवी में पूछो जिसमें कि मैं कुछ अद्भुत बातें बता सकूँ।
  • रचनाएँ- 
  • पहेलियाँ
  • मुकरिया
  • दो सुखने
  • ग़ज़ल आदि।

Important Pointsउक्ति व्यक्ति प्रकरण-

  • **रचनाकार-**दामोदर कवि
  • **समय-**12 वीं
  • यह व्याकरण शास्त्र का ग्रंथ है।

चन्दायन-

  • **रचनाकार-**मुल्ला दाऊद
  • **समय-**1379 ई.
  • इसे लोर कथा भी कहा जाता है।
  • यह अवधी भाषा में रचित है।
  • दोहा-चौपाई में रचित प्रेमाख्यान काव्य है।

मृगावती-

  • **रचनाकार-**कुतुबन
  • **समय-**1501 ई.
  • यह अवधी भाषा में रचित है।
  • दोहा-चौपाई में रचित प्रेमाख्यान काव्य है।
  • इसमें राजकुमार और मृगावती की प्रेमकथा वर्णित है।
53

प्रथम राजभाषा आयोग की स्थापना कब की गई?

  1. ((a))

    7 जून 1951

  2. ((b))

    8 जून 1953

  3. ((c))

    9 जून 1954

  4. ((d))

    7 जून 1955

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Answer: ((d))

7 जून 1955

प्रथम राजभाषा आयोग की स्थापना 7 जून 1955 में की गई। 

Key Points

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 344 में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 7 जून 1955 को राज्य भाषा आयोग का गठन किया गया।
  • बी. जी. खेर उस समय राजभाषा आयोग के अध्यक्ष थे, उन्होंने 1956 में राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • संयुक्त संसदीय समिति द्वारा रिपोर्ट पर विचर करने के उपरांत राष्ट्रपति ने 27 अप्रैल, 1969 को एक आदेश जारी किया, जो इस प्रकार है-
  • वैज्ञानिक, प्रशासनिक एवं कानूनी साहित्य संबंधी हिंदी शब्दावली तैयार करने के लिए तथा अंग्रेजी कृतियों का हिंदी में अनुवाद करने के लिए एक स्थायी आयोग का गठन किया जाए।
  • संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के माध्यम के रूप में अंग्रेजी का प्रयोग चलता रहे और बाद में वैकल्पिक माध्यम के रूप में हिंदी का प्रचलन प्रारंभ किया जाए।
  • संसदीय विधान कार्य अंग्रेजी में चलता रहेगा किंतु इसके प्रामाणिक हिंदी अनुवाद की व्यवस्था की जाए।
54

'चिठिया हो तो हर कोई बांचै' निम्न में से किस साहित्यकार के पत्रों का संग्रह है?

  1. ((a))

    अज्ञेय

  2. ((b))

    विद्यानिवास मिश्र

  3. ((c))

    रेणु

  4. ((d))

    नागार्जुन

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Answer: ((c))

रेणु

'चिठिया हो तो हर कोई बांचै' रेणु साहित्यकार के पत्रों का संग्रह है।

55

मूल धातु से संबंधित वक्रता को कहा जाता है -

  1. ((a))

    वर्ण - विन्यास वक्रता

  2. ((b))

    पद - पूर्वार्ध वक्रता

  3. ((c))

    पद - परार्ध वक्रता

  4. ((d))

    वाक्य वक्रता

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Answer: ((b))

पद - पूर्वार्ध वक्रता

मूल धातु से संबंधित वक्रता को कहा जाता है- पद - पूर्वार्ध वक्रता 

Key Points

पद पूर्वार्ध वक्रता-

  • पद अनेक वर्णों के समुदाय को कहते हैं।
  • पद के दो अंग है -प्रकृति तथा प्रत्यय।
  • कुंतक प्रकृति को पद पूर्वार्ध था प्रत्यय को पद परार्ध की संज्ञा देते हैं।

Important Points

वक्रोक्ति सम्प्रदाय-

  • प्रवर्तक-आचार्य कुंतक
  • इनके अनुसार वक्रोक्ति काव्य की आत्मा है।
  • वक्रोक्ति के 6 भेद हैं-
  • वर्णविन्यास वक्रता
  • पद पूर्वार्द्ध वक्रता
  • पदपरार्ध वक्रता
  • वाक्य वक्रता
  • प्रकरण वक्रता
  • प्रबंध वक्रता

Additional Information

वर्ण विन्यास वक्रता-

  • कुंतक के अनुसार जिसमे एक या दो या बहुत से वर्ण थोड़े थोड़े अंतर पर ग्रथित होते हैं वह वर्ण विन्यास वक्रता अर्थात वर्ण रचना की वक्रता कही जाती है।

पद - परार्ध वक्रता-

  • पद के परार्ध अर्थात् प्रत्यय से उत्पन्न वक्रता।
  • उदाहरण-
  • "पिय सो कहहु संदेसड़ा है भौरा, है काग" - जायसी
  • इसके छः भेद हैं-
  • काल वक्रता
  • कारक वक्रता
  • संख्या वक्रता
  • पुरुष वक्रता
  • प्रत्यय वक्रता
  • उपग्रह वक्रता

वाक्य वक्रता-

  • वाक्य के प्रयोग कौशल के कारण वक्रता।
  • इसे वाच्य वक्रता और वस्तु वक्रता भी कहते हैं।
  • इसके दो भेद हैं-
  • सहजा वस्तुवक्रता
  • अर्थालंकारों के प्रयोग से जन्य वक्रता
56

'गैंग्रीन' कहानी के संदर्भ में विचार कीजिए -

A. इस कहानी में पिता-पुत्र के संघर्ष का चित्रण किया गया है।

B. इस कहानी में 'अज्ञेय' को निम्न मध्यवर्गीय जीवन की विषमताओं को चित्रित करने में सफलता मिली है।

C. इस कहानी में ‘अज्ञेय' ने दाम्पत्य जीवन की सारहीनता और एकरसता को चित्रित किया है।

D. इस कहानी में पूर्वदीप्ति शैली का प्रयोग किया गया है।

E. गैंग्रीन के रोगियों के अक्सर पैर काटे जाने की सूचना जीवन की त्रासदी को अभिव्यक्त करती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (D)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (C), (D)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (B), (C), (E)

'गैंग्रीन' कहानी के संदर्भ में सही हैं -

  • B. इस कहानी में 'अज्ञेय' को निम्न मध्यवर्गीय जीवन की विषमताओं को चित्रित करने में सफलता मिली है।
  • C. इस कहानी में ‘अज्ञेय' ने दाम्पत्य जीवन की सारहीनता और एकरसता को चित्रित किया है।
  • E. गैंग्रीन के रोगियों के अक्सर पैर काटे जाने की सूचना जीवन की त्रासदी को अभिव्यक्त करती है।

Key Pointsगैंग्रीन-

  • रचनाकार-अज्ञेय
  • विधा-कहानी
  • इस कहानी को रोज नाम से भी जाना जाता है।
  • पात्र-
  • मालती, डॉ. महेश्वर, टीटी आदि।
  • विषय-
  • किसी भी प्रकार के नयेपन से रहित जीवन में व्यक्तियों के संबंधों की टूटन की कहानी है।

Important Pointsअज्ञेय-

  • कहानी संग्रह-
  • विपथगा(1937 ई.)
  • परम्परा(1940 ई.)
  • कोठरी की बात(1945 ई.)
  • अमर वल्लरी(1945 ई.) आदि।
57

'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में 'मल्लिका' के कथन कौन से हैं?

A. इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं।

B. कोई भूमि ऐसी नहीं जिसके अन्तर में कोमलता न हो।

C. आज तक का जीवन किसी तरह बीता ही है। आगे का भी बीत जाएगा।

D. यह अवसर देखने के लिए ही तो मैंने आज तक का जीवन जिया है।

E. ये प्रत्तियाँ मैंने उज्जयिनी से आने वाले व्यवसायियों से प्राप्त की हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (B), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (D), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (C), (E)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (B), (C), (E)

'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में 'मल्लिका' के कथन हैं-

  • B. कोई भूमि ऐसी नहीं जिसके अन्तर में कोमलता न हो।
  • C. आज तक का जीवन किसी तरह बीता ही है। आगे का भी बीत जाएगा।
  • E. ये प्रत्तियाँ मैंने उज्जयिनी से आने वाले व्यवसायियों से प्राप्त की हैं।

Key Points A. इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं।-

  • यह प्रियंगु का कथन है।
  • पूर्ण कथन हैं-
  • "इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय हैं। इसे आँखों में व्याप्त करने के लिए जीवन भर का समय भी पर्याप्त नहीं।"

D. यह अवसर देखने के लिए ही तो मैंने आज तक का जीवन जिया है।-

  • यह अंबिका का कथन है।
  • पूर्ण कथन हैं-
  • "यह अवसर देखने के लिए ही तो मैंने आज तक का जीवन जिया है ! इतना बड़ा सौभाग्य हमारे क्षुद्र जीवन में कहा समा सकता है !"

Important Pointsआषाढ़ का एक दिन-

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1958ई.
  • पात्र-
  • अंबिका
  • मल्लिका
  • कालिदास
  • दंतुल
  • मातुल
  • ���्रियंगुमंजरी आदि।
  • विषय-
  • यह कवि कालिदास पर आधारित है।
  • सत्ता एवं सर्जनात्मकता के मध्य द्वन्द्व को दिखाया गया है।

Additional Informationमोहन राकेश-

  • जन्म-1925-1972ई.
  • हिन्दी की नवनाट्य लेखन या नया नाटक परंपरा को ठोस आयाम प्रदान किया।
  • 'नई कहानी आन्दोलन' के साहित्यकार थे।
  • अन्य नाटक-
  • लहरों के राजहंस(1963ई.)
  • आधे-अधूरे(1969ई.)
  • पैर तले जमीन(अधूरा)।
58

मुर्दहिया के संदर्भ में विचार कीजिए -

A. तुलसीराम के गाँव का नाम धरमपुर है।

B. सरजू भैया गाँव के चन्द जिन्दादिल लोगों में से एक हैं।

C. बाबा हरिहर दास ने तुलसीराम का नामकरण किया।

D. कलकत्ता जाकर बलमू ने अपने नाम के आगे 'रविदास' जोड़ लिया था।

E. बाबा को पाँव की चोट ने सक्रिय जीवन के लिए अक्षम कर दिया था।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (E)

  2. ((b))

    केवल (B), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (A), (C), (D)

Show Answer
Answer: ((d))

केवल (A), (C), (D)

मुर्दहिया के संदर्भ में सही विचार हैं -

  • A. तुलसीराम के गाँव का नाम धरमपुर है।
  • C. बाबा हरिहर दास ने तुलसीराम का नामकरण किया।
  • D. कलकत्ता जाकर बलमू ने अपने नाम के आगे 'रविदास' जोड़ लिया था।

Key Pointsमुर्दहिया-

  • रचनाकार- तुलसीराम
  • विधा- आत्मकथा
  • प्रकाशन वर्ष- 2010 ई.
  • पात्र-
  • धीरज(लेखक की माँ)
  • जूठन(दादाजी)
  • मुसडी
  • सोम्मर
  • नग्गर काका
  • मुन्नेसर काका आदि।
  • सात भागों में विभाजित आत्मकथा हैं।
  • मुख्य-
  • 'मुर्दहिया' अनूठी साहित्यिक कृति होने के साथ ही पूरबी उत्तर प्रदेश के दलितों की जीवन स्थितियों तथा साठ और सत्तर के दशक में इस क्षेत्र में वाम आंदोलन की सरगर्मियों का जीवंत खजाना है।
  • दूसरे अंश 'मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन' में शिक्षा के लिए किया जा रहा संघर्ष और उसमें गाँव से थोड़ा दूर स्थित मुर्दहिया की चौंकाने वाली घटनाओं को उदात्त रूप में प्रस्तुत किया है।
  • 'मुर्दहिया' के तीसरे अंश 'अकाल में अंध विश्वास' के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को प्रस्तुत किया है।

Important Pointsडॉ. तुलसीराम-

  • जन्म-1949-2015 ई.
  • डॉ. तुलसीराम हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं दलित च��न्तक थे।
  • इनका जन्म आजमगढ़ में हुआ।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • मुर्दहिया
  • मणिकर्णिका आदि।
59

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (पात्र)सूची - II (कहानी)
A.किरनI.राही
B.लछमाII.कानो में कंगना
C.अनीताIII.चीफ की दावत
D.शामनाथIV.कोसी का घटवार
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (IV), (B) - (II), (C) - (I), (D) - (III)

  2. ((b))

    (A) - (II), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (III)

  3. ((c))

    (A) - (III), (B) - (IV), (C) - (II), (D) - (I)

  4. ((d))

    (A) - (I), (B) - (IV), (C) - (III), (D) - (II)

Show Answer
Answer: ((b))

(A) - (II), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (III)

सूची I का सूची II से सही मिलान हैं-

सूची - I (पात्र)सूची - II (कहानी)
A.किरनII.कानो में कंगना
B.लछमाIV.कोसी का घटवार
C.अनीताI.राही
D.शामनाथIII.चीफ की दावत

Key Pointsकानों में कंगना-

  • रचनाकार-राधिकारमण प्रसाद सिंह
  • विधा-कहानी
  • प्रकाशन वर्ष-1931 ई.
  • पात्र-
  • नरेंद्र, किरण, योगीश्वर आदि।
  • विषय-
  • नरेंद्र का किरण से प्रेम, विवाह और प्रेम विमुख हो किन्नरी के प्रेम में पड़कर सब कुछ लुटाने की कहानी है।
  • अंतः में नरेंद्र द्वारा प्रयश्चित दिखाया गया है परंतु तब तक किरण अपने प्राण त्याग चुकी थी।

कोसी का घटवार-

  • रचनाकार-शेखर जोशी
  • विधा-कहानी
  • प्रकाशन वर्ष-1958 ई.
  • पात्र-
  • फौजी गोसाई, लछमा आदि।
  • विषय-
  • सामाजिक जड़ व्यवस्था के कारण कालातीत में अधूरी प्रेम कहानी का वर्णन है।

राही-

  • रचनाकार-सुभद्रा कुमारी चौहान
  • विधा-कहानी
  • पात्र-
  • राही, अनीता आदि।
  • विषय-
  • जेल का परिवेश है।
  • गरीबी के कारण विवश माँ द्वारा चोरी करने पर जेल की सजा का वर्णन है।
  • गरीबों की सेवा हि वास्तविक देशभक्ति है यह संदेश चित्रित किया गया है।

चीफ की दावत-

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • मुख्य पात्र- 
  • ​मिस्टर शामनाथ, उनकी पत्नी एवं विधवा बूढ़ी मां आदि।
  • विषय-
  • मां के त्याग और बेटे की उपेक्षा का ताना-बाना बुनती है।
  • जो 'पहला पाठ' कहानी संग्रह में संकलित है।

Important Pointsराधिकारमण प्रसाद सिंह-

  • कहानियाँ-
  • गांधी टोपी(1938 ई.)
  • कुसुमांजलि
  • सावनी समाँ आदि।

शेखर जोशी-

  • कहानियाँ-
  • हलवाहा(1981 ई.)
  • नौरंगी बीमार है(1990 ई.)
  • बच्चे का सपना(2004 ई.) आदि।

सुभद्राकुमारी चौहान-

  • कहानियाँ-
  • बिखरे मोती(1932 ई.)
  • उन्मादिनी(1934 ई.) आदि।

भीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003 ई.
  • कहानियाँ-
  • भाग्यरेखा(1953 ई.)
  • पहला पाठ(1957 ई.)
  • भटकती राख(1966 ई.)
  • पटरियाँ(1973 ई.)
  • शोभा यात्रा(1981 ई.) आदि।
60

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (नाटक)सूची - II (पात्र)
A.चंद्रगुप्तI.मुन्नी
B.अंजो दीदीII.राम
C.बकरीIII.जयमाला
D.स्कंदगुप्तIV.लीला
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (III), (B) - (II), (C) - (I), (D) - (IV)

  2. ((b))

    (A) - (IV), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (I)

  3. ((c))

    (A) - (IV), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (III)

  4. ((d))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)

Show Answer
Answer: ((c))

(A) - (IV), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (III)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (नाटक)सूची - II (पात्र)
A.चंद्रगुप्तIV.लीला
B.अंजो दीदीI.मुन्नी
C.बकरीII.राम
D.स्कंदगुप्तIII.जयमाला

Key Pointsचन्द्रगुप्त-

  • रचनाकार-जय��ंकर प्रसाद
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1931 ई.
  • पुरुष पात्र-
  • ​चंद्रगुप्त,चाणक्य,सिंहरण,आम्भिक,सिकंदर आदि।
  • ​स्त्री पात्र-
  • ​अलका,सुवासिनी,कल्याणी,मालविका,कार्नेलिया,एलिस आदि।
  • विषय-
  • चन्द्रगुप्त व चाणक्य का आत्याचारी नन्द तथा विदेशी यूनानियों से संघर्ष का चित्रण है।

स्कंदगुप्त-

  • रचनाकार-जयशंकर प्रसाद
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1928 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • पुरुष पात्र- स्कन्दगुप्त.कुमारगुप्त,पर्णदत्त,चक्रपालित आदि।
  • स्त्री पात्र- देवकी,अनंतदेवी,जयमाल,द्देव्सेना,विजया आदि।
  • विषय-
  • कुमारगुप्त के विलासी साम्राज्य की आंतरिक स्थिति का चित्रण किया गया है।

अंजो दीदी-

  • रचनाकार-उपेंद्र नाथ अश्क
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1955 ई.
  • विषय-
  • इस नाटक में अंजो(अंजली) के माध्यम से स्त्री-पुरुष संबंधों के साठ साथ वक्त की पाबंदी वर्णित की गई है।

बकरी-

  • रचनाकार- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • पात्र-
  • नट और नटी
  • भिश्ती
  • दुर्जन सिंह
  • कर्मवीर सिंह
  • सत्यवीर
  • विपती( एक गरीब स्त्री जिसकी बकरी चोरी होती है)
  • सिपाही
  • काका – काकी
  • विषय-
  • आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है।

Important Pointsजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1890-1937ई.
  • ऐतिहासिक नाटककार के रूप मे विख्यात है।
  • मुख्य नाटक-
  • सज्जन(1910ई.)
  • करुणालय(1912ई.)
  • विशाख(1921ई.)
  • ध्रुवस्वामिनी(1933ई.) आदि।

उपेन्द्रनाथ अश्क-

  • ​नाटक-
  • लक्ष्मी का स्वागत(1935 ई.)
  • स्वर्ग की झलक(1940 ई.)
  • छठा बेटा(1940 ई.)
  • जय पराजय(1937 ई.) आदि।

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना-

  • जन्म-1927-1983ई.
  • नाटक- 
  • बकरी (1978)
  • लड़ाई (1979)
  • अब गरीबी हटाओ आदि।
  • काव्य रचनाएँ-
  • काठ की घंटियाँ(1959 ई.)
  • बाँस का पुल(1963 ई.)
  • एक सुनी नाव(1966 ई.)
  • कुआनो नदी(1973 ई.) आदि।
61

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (निबन्ध संग्रह)सूची - II (संपादक)
A.चिंतामणि प्रथम भागI.आ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
B.चिंतामणि द्वितीय भागII.डॉ. नामवर सिंह
C.चिंतामणि तृतीय भागIII.आ. रामचन्द्र शुक्ल
D.चिंतामणि चतुर्थ भागIV.कुसुम चतुर्वेदी और ओमप्रकाश सिंह
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)

  2. ((b))

    (A) - (I), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (II)

  3. ((c))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (IV)

  4. ((d))

    (A) - (I), (B) - (III), (C) - (II), (D) - (IV)

Show Answer
Answer: ((c))

(A) - (III), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (IV)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (निबन्ध संग्रह)सूची - II (संपादक)
A.चिंतामणि प्रथम भागIII.आ. रामचन्द्र शुक्ल आ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
B.चिंतामणि द्वितीय भागI.आ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
C.चिंतामणि तृतीय भागII.डॉ. नामवर सिंह
D.चिंतामणि चतुर्थ भागIV.कुसुम चतुर्वेदी और ओमप्रकाश सिंह

Key Points

निबन्ध संग्रहप्रकाशन वर्ष
चिंतामणि प्रथम भाग1939 ई.
चिंतामणि द्वितीय भाग1945 ई.
चिंतामणि तृतीय भाग1983 ई.
चिंतामणि चतुर्थ भाग2004 ई.

Important Pointsचिंतामणि-

  • रचनाकार- रामचन्द्र शुक्ल
  • विधा- निबंध
  • प्रकाशन वर्ष- 1939 ई.
  • विषय-
  • चिंतामणि निबंध संग्रह के चार भाग मिलते है।
  • इसमें विभिन्न विषयों पर निबंध लिखे गए है।

Additional Informationरामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म- 1884-1941 ई.
  • निबंध-
  • भाव या मनोविकार
  • श्रद्धा-भक्ति
  • लज्जा और ग्लानि
  • लोभ और प्रीति
  • कविता क्या है?
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था आदि।
62

स्थापना वर्ष के आधार पर निम्नलिखित संस्थाओं को पहले से बाद के क्रम में रखिए :

A. आर्यसमाज

B. थियोसोफिकल सोसायटी

C. रामकृष्ण मिशन

D. ब्रह्म समाज

E. प्रार्थना समाज

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    D, A, E, B, C

  2. ((b))

    D, E, A, B, C

  3. ((c))

    E, D, C, A, B

  4. ((d))

    B, C, A, D, E

Show Answer
Answer: ((b))

D, E, A, B, C

स्थापना वर्ष के आधार पर संस्थाओं का सही क्रम है-

  • D. ब्रह्म समाज
  • E. प्रार्थना समाज
  • A. आर्यसमाज
  • B. थियोसोफिकल सोसायटी
  • C. रामकृष्ण मिशन

Key Pointsसंस्थाओं का स्थापना वर्ष व स्थापना स्थान है-

संस्थास्थापना वर्षस्थानसंस्थापक
ब्रह्म समाज1828 ई.कलकत्ताराजा राममोहन राय
तत्वबोधिनी सभा1839 ई.कलकत्तादेवेन्द्रनाथ ठाकुर
वेद समाज1864 ई.मद्रासश्री धरलू नायडू
प्रार्थना समाज1867 ई.बंबईआत्माराम पांडुरंग
सत्य शोधक समाज1873 ई.पुणेज्योतिबा फुले
आर्य समाज1875 ई.बंबईदयानंद सरस्वती
थियोसोफिकाल सोसायटी1882 ई.मद्रासमदाम ब्लावत्सकी और ओल्कॉट
रामकृष्ण मिशन1897 ई.बेलूरस्वामी विवेकानंद

Important Pointsब्रह्म समाज-

  • इसको प्रभावी बनाने में देवेंद्र नाथ टैगोर और केशवचंद सेन ने प्रमुख भूमिका निभाई है।
  • 1867 ई. में ब्रह्म समाज दो भागों में विभाजित हो गया।
  • आदि ब्रह्म समाज
  • भारतीय ब्रह्म समाज

प्रार्थना समाज-

  • इस समाज की स्थापना केशवचंद्र सेन की प्रेरणा से ने की थी।
  • संबंधित अन्य प्रमुख विचारक-
  • आर. जी.भंडारकर,महादेव गोविंद रानाडे तथा एन.जी. चंदावरकर आदि।

आर्य समाज-

  • यह एक हिंदी सुधार आंदोलन है।
  • दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश(1875 ई.) में अपने विचार प्रकट किए है।
  • आर्य समाज के अनुयायी हिंदी को आर्य भाषा कहते थे।
  • आदर्श वाक्य है-
  • विश्व को आदर्श बनाते चलो।
  • अन्य विचारक-
  • स्वामी श्रद्धानंद,महात्मा हंसराज,लाला लाजपत राय,भाई परमानंद,चौधरी छोटूराम,चौधरी चरणसिंह आदि।

रामकृष्ण मिशन-

  • इसकी स्थापना 1 मई को रामकृष्ण परमहंस के शिष्य विवेकानंद ने की।
  • इसमें वेदांत दर्शन का प्रचार प्रसार किया जाता है।
  • मुख्य विचार-
  • अपने मोक्ष और संसार के हित के लिए कार्य करो।
  • अन्य विचारक-
  • स्वामी ब्रह्मानंद,स्वामी शिवानंद,स्वामी अखंडानंद,स्वामी माधवानंद आदि।
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नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में।

अभिकथन A : 'आपका बंटी' उपन्यास में विवाह की असफलता और तलाक की ट्रेजडी के त्रास को बेगुनाइ बंटी ही सबसे अधिक भोगता है।

कारण R : बंटी पिता के होते हुए भी बिना पिता का और माँ के रहते बिना माँ का हो गया। अंततः उसे मिला भटकाव, असमंजस और अकेलापन।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

  1. ((a))

    A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सत्य है लेकिन R असत्य है।

  4. ((d))

    A असत्य है लेकिन R सत्य है।

Show Answer
Answer: ((a))

A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

सही उत्तर है- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  • 'आपका बंटी' उपन्यास में विवाह की असफलता और तलाक की ट्रेजडी के त्रास को बेगुनाइ बंटी ही सबसे अधिक भोगता है क्योंकि बंटी पिता के होते हुए भी बिना पिता का और माँ के रहते बिना माँ का हो गया। अंततः उसे मिला भटकाव, असमंजस और अकेलापन।

Key Pointsआपका बंटी-

  • रचनाकार-मन्नू भंडारी
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1971 ई.
  • विषय-
  • बाल मनोविज्ञान का उपन्यास है।
  • तलाक शुदा दंपति का उसकी संतान पर पड़े प्रभाव का चित्रण किया गया है।

Important Pointsमन्नू भंडारी-

  • उपन्यास-
  • महाभोज(1979 ई.)
  • स्वामी(2003 ई.) आदि।
64

नीचे दो कथन दिए गए है : एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में।

**अभिकथन A : '**एक और द्रोणाचार्य' नाटक के माध्यम से समकालीन शिक्षा जगत की यथार्थ विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को उजागर किया गया है।

**कारण R : '**एक और द्रोणाचार्य' नाटक वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पक्षपात, शिक्षक समुदाय के पंगु, असहाय, बेबस और अपाहिज चरित्र को पौराणिक कथा के माध्यम से प्रस्तुत करता है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सत्य है लेकिन R असत्य है।

  4. ((d))

    A असत्य है लेकिन R सत्य है।

Show Answer
Answer: ((a))

A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

सही उत्तर है- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

Key Pointsएक और द्रोणाचार्य-

  • प्रकाशन वर्ष- 1977 ई.
  • विधा- नाटक
  • रचनाकार- शंकरशेष
  • विषय-
  • ​इस नाटक में नाटककार ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पक्षपात, राजनितिक घुसपैठ तथा आर्थिक एवं सामाजिक दबावों के चलते निम्न मध्यवार्गीय व्यक्ति के असहाय बेबस चरित्र को उद्घाटित किया है।
  • महाभारत कालीन प्रसिद्ध पात्र द्रोणाचार्य के जीवन प्रसंगों को आधार बनाकर वर्तमान विसंगति को दिखाया गया है।
  • पौराणिक पात्र-​
  • ​द्रोणाचार्य
  • एकलव्य
  • कृपी (द्रोणाचार्य की पत्नी)
  • अश्वस्थामा (द्रोणाचार्य का पुत्र)
  • भीष्म
  • अर्जुन
  • युधिष्ठिर
  • सैनिक
  • आधुनिक पात्र-
  • ​अरविंद: (नाटक का प्रमुख पात्र प्रोफेसर)
  • लीला: अरविंद की पत्नी
  • यदू: अरविंद का साथी
  • जूनियर प्रोफ़ेसर
  • प्रिसपल: 60 वर्ष का है
  • चंदू: अरविंद का छात्र 20 वर्ष
  • अरविंद के कॉलेज का प्रेसिडेंट
  • विमलेंदु: मृत शिक्षक
  • अनुराधा: छात्रा, 20 वर्ष की

Important Pointsशंकरशेष-

  • प्रसिद्धि - हिन्दी के साठोत्तरी पीढ़ी के सुप्रसिद्ध नाटककार थे।
  • प्रमुख रचनाएं -​
  • फंदी (1971)
  • रक्तबीज (1978)
  • बन्धन अपने-अपने (1980)
  • एक और द्रोणाचार्य (1980)
  • अरे! मायावी सरोवर (1981)
  • कोमल गांधार (1983)
  • चेहरे (1983)
  • पोस्टर (1983)
  • बिन बाती के दीप (1970) आदि।

निर्देशः निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

हिन्दी प्रदेश में नवजागरण 1857 ई. के स्वाधीनता संग्राम से शुरू होता है। इस स्वाधीनता संग्राम की पहली विशेषता यह है कि यह सारे देश की एकता को ध्यान में रखकर चलाया गया था। राष्ट्रीय एकता का यह उद्देश्य भारतीय सेना के नेताओं ने अपने सामने रखा था, सामन्तों ने नहीं। इसीलिए जो नवाब स्वतन्त्र बादशाह बन बैठे थे, उन्हें भारतीय सेना के नेतृत्व ने दिल्ली के मातहत करार दिया और इसी शर्त पर उनके साथ संयुक्त मोर्चा बनाया। अपने विघटनकाल में भारतीय सामन्तवाद राष्ट्रीय एकता की पहचान खो चुका था। अलग-अलग बादशाहों, नवाबों और राजाओं की सत्ता कायम करने के बदले सभी सामन्तों को एक ही झंडे के नीचे संगठित करने का प्रयत्न एक सामन्त-विरोधी कार्य था।

इस संग्राम की दूसरी विशेषता यह है कि राज्यसत्ता की मूल समस्या सामन्तों के हित में ��हीं, जनता के हित में हल की गई थी। बहादुरशाह को सारे देश का बादशाह घोषित किया गया था किन्तु वास्तविक सत्ता बादशाह या उसके अनुयाइयों के हाथ में नहीं थी । सैनिक नेतृत्व ने दिल्ली के बादशाह को वही दर्जा दिया था जो ब्रिटेन में वहाँ के बादशाह को हासिल था। वह राज्यतंत्र में मुखिया बनाया गया था पर आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक अधिकार उस 'कोर्ट' के हाथ में थे जिसमें भारतीय सेना के चुने हुए प्रतिनिधि थे।

इस संग्राम की तीसरी विशेषता यह है कि अंग्रेज़ों ने जमींदारों और साहूकारों को जहाँ भी नये अधिकार दिये थे, जहाँ भी किसानों के विरुद्ध इन शोषकों के पक्ष में उन्होंने फ़ैसले किए थे, वहाँ भारतीय सेना का प्रभुत्व कायम होते ही, अथवा अंग्रेज़ों का प्रभुत्व खत्म होते ही, जनता ने अंग्रेज़ों की कायम की हुई व्यवस्था उलट दी। इस तरह की कार्रवाई से इस स्वाधीनता - संग्राम का सामन्तविरोधी पक्ष और पुष्ट होता था।

इस संग्राम की चौथी विशेषता यह है कि इसका नेतृत्व उन किसानों ने किया जो फौज में सिपाहियों और सूबेदारों के रूप में काम कर रहे थे। अनेक छोटे-बड़े सामन्त इनके सहायक थे, संग्राम के नेता नहीं। अक्सर वे देशी सेना के दबाव में आकर अंग्रेज़ों से लड़े। फौज के भीतर वाले किसानों के साथ गाँवों के गैर-फ़ौजी किसान थे, और इन दोनों ने मिलकर जो हथियारबंद लड़ाई चलाई, वैसी लड़ाई न तो सन् 57 से पहले कभी चलाई गई थी, और न उसके बाद कभी चलाई गई। लड़नेवाले किसानों में केवल उच्च वर्ण हिन्दू नहीं थे। उनके साथ निम्न वर्ण के सैकड़ों आदमी थे। हिन्दुओं के साथ हज़ारों मुसलमान थे। धर्म और वर्ण की सीमाएँ तोड़कर लाखों किसान एक ही लड़ाई में शामिल हुए।

65

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के संग्राम के बाद किसे बादशाह बनाया गया?

  1. ((a))

    बहादुर शाह

  2. ((b))

    हुसंग शाह

  3. ((c))

    अहमद खान शाह

  4. ((d))

    बाबू कुँवर सिंह

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Answer: ((a))

बहादुर शाह

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के संग्राम के बाद बहादुर शाह को बादशाह बनाया गया।

निर्देशः निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

हिन्दी प्रदेश में नवजागरण 1857 ई. के स्वाधीनता संग्राम से शुरू होता है। इस स्वाधीनता संग्राम की पहली विशेषता यह है कि यह सारे देश की एकता को ध्यान में रखकर चलाया गया था। राष्ट्रीय एकता का यह उद्देश्य भारतीय सेना के नेताओं ने अपने सामने रखा था, सामन्तों ने नहीं। इसीलिए जो नवाब स्वतन्त्र बादशाह बन बैठे थे, उन्हें भारतीय सेना के नेतृत्व ने दिल्ली के मातहत करार दिया और इसी शर्त पर उनके साथ संयुक्त मोर्चा बनाया। अपने विघटनकाल में भारतीय सामन्तवाद राष्ट्रीय एकता की पहचान खो चुका था। अलग-अलग बादशाहों, नवाबों और राजाओं की सत्ता कायम करने के बदले सभी सामन्तों को एक ही झंडे के नीचे संगठित करने का प्रयत्न एक सामन्त-विरोधी कार्य था।

इस संग्राम की दूसरी विशेषता यह है कि राज्यसत्ता की मूल समस्या सामन्तों के हित में नहीं, जनता के हित में हल की गई थी। बहादुरशाह को सारे देश का बादशाह घोषित किया गया था किन्तु वास्तविक सत्ता बादशाह या उसके अनुयाइयों के हाथ में नहीं थी । सैनिक नेतृत्व ने दिल्ली के बादशाह को वही दर्जा दिया था जो ब्रिटेन में वहाँ के बादशाह को हासिल था। वह राज्यतंत्र में मुखिया बनाया गया था पर आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक अधिकार उस 'कोर्ट' के हाथ में थे जिसमें भारतीय सेना के चुने हुए प्रतिनिधि थे।

इस संग्राम की तीसरी विशेषता यह है कि अंग्रेज़ों ने जमींदारों और साहूकारों को जहाँ भी नये अधिकार दिये थे, जहाँ भी किसानों के विरुद्ध इन शोषकों के पक्ष में उन्होंने फ़ैसले किए थे, वहाँ भारतीय सेना का प्रभुत्व कायम होते ही, अथवा अंग्रेज़ों का प्रभ���त्व खत्म होते ही, जनता ने अंग्रेज़ों की कायम की हुई व्यवस्था उलट दी। इस तरह की कार्रवाई से इस स्वाधीनता - संग्राम का सामन्तविरोधी पक्ष और पुष्ट होता था।

इस संग्राम की चौथी विशेषता यह है कि इसका नेतृत्व उन किसानों ने किया जो फौज में सिपाहियों और सूबेदारों के रूप में काम कर रहे थे। अनेक छोटे-बड़े सामन्त इनके सहायक थे, संग्राम के नेता नहीं। अक्सर वे देशी सेना के दबाव में आकर अंग्रेज़ों से लड़े। फौज के भीतर वाले किसानों के साथ गाँवों के गैर-फ़ौजी किसान थे, और इन दोनों ने मिलकर जो हथियारबंद लड़ाई चलाई, वैसी लड़ाई न तो सन् 57 से पहले कभी चलाई गई थी, और न उसके बाद कभी चलाई गई। लड़नेवाले किसानों में केवल उच्च वर्ण हिन्दू नहीं थे। उनके साथ निम्न वर्ण के सैकड़ों आदमी थे। हिन्दुओं के साथ हज़ारों मुसलमान थे। धर्म और वर्ण की सीमाएँ तोड़कर लाखों किसान एक ही लड़ाई में शामिल हुए।

66

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है :

  1. ((a))

    इसका नेतृत्व किसानों ने किया।

  2. ((b))

    यह एक क्षेत्र विशेष में चलाया गया।

  3. ((c))

    जनता ने सामंतों-अंग्रेजों के गठजोड़ द्वारा बनायी व्यवस्था को अपने लिए उचित समझा।

  4. ((d))

    यह लड़ाई मुख्यतः उच्च वर्णीय जनों द्वारा लड़ी गयी।

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Answer: ((a))

इसका नेतृत्व किसानों ने किया।

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम के संबंध में सत्य कथन है- इसका नेतृत्व किसानों ने किया।

निर्देशः निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

हिन्दी प्रदेश में नवजागरण 1857 ई. के स्वाधीनता संग्राम से शुरू होता है। इस स्वाधीनता संग्राम की पहली विशेषता यह है कि यह सारे देश की एकता को ध्यान में रखकर चलाया गया था। राष्ट्रीय एकता का यह उद्देश्य भारतीय सेना के नेताओं ने अपने सामने रखा था, सामन्तों ने नहीं। इसीलिए जो नवाब स्वतन्त्र बादशाह बन बैठे थे, उन्हें भारतीय सेना के नेतृत्व ने दिल्ली के मातहत करार दिया और इसी शर्त पर उनके साथ संयुक्त मोर्चा बनाया। अपने विघटनकाल में भारतीय सामन्तवाद राष्ट्रीय एकता की पहचान खो चुका था। अलग-अलग बादशाहों, नवाबों और राजाओं की सत्ता कायम करने के बदले सभी सामन्तों को एक ही झंडे के नीचे संगठित करने का प्रयत्न एक सामन्त-विरोधी कार्य था।

इस संग्राम की दूसरी विशेषता यह है कि राज्यसत्ता की मूल समस्या सामन्तों के हित में नहीं, जनता के हित में हल की गई थी। बहादुरशाह को सारे देश का बादशाह घोषित किया गया था किन्तु वास्तविक सत्ता बादशाह या उसके अनुयाइयों के हाथ में नहीं थी । सैनिक नेतृत्व ने दिल्ली के बादशाह को वही दर्जा दिया था जो ब्रिटेन में वहाँ के बादशाह को हासिल था। वह राज्यतंत्र में मुखिया बनाया गया था पर आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक अधिकार उस 'कोर्ट' के हाथ में थे जिसमें भारतीय सेना के चुने हुए प्रतिनिधि थे।

इस संग्राम की तीसरी विशेषता यह है कि अंग्रेज़ों ने जमींदारों और साहूकारों को जहाँ भी नये अधिकार दिये थे, जहाँ भी किसानों के विरुद्ध इन शोषकों के पक्ष में उन्होंने फ़ैसले किए थे, वहाँ भारतीय सेना का प्रभुत्व कायम होते ही, अथवा अंग्रेज़ों का प्रभुत्व खत्म होते ही, जनता ने अंग्रेज़ों की कायम की हुई व्यवस्था उलट दी। इस तरह की कार्रवाई से इस स्वाधीनता - संग्राम का सामन्तविरोधी पक्ष और पुष्ट होता था।

इस संग्राम की चौथी विशेषता यह है कि इसका नेतृत्व उन किसानों ने किया जो फौज में सिपाहियों और सूबेदारों के रूप में काम कर रहे थे। अनेक छोटे-बड़े सामन्त इनके सहायक थे, संग्राम के नेता नहीं। अक्सर वे देशी सेना के दबाव में आकर अंग्रेज़ों से लड़े। फौज के भीतर वाले किसानों के साथ गाँवों के गैर-फ़ौजी किसान थे, और इन दोनों ने मिलकर जो हथियारबंद लड़ाई चलाई, वैसी लड़ाई न तो सन् 57 से पहले कभी चलाई गई थी, और न उसके बाद कभी चलाई गई। लड़नेवाले किसानों में केवल उच्च वर्ण हिन्दू नहीं थे। उनके साथ निम्न वर्ण के सैकड़ों आदमी थे। हिन्दुओं के साथ हज़ारों मुसलमान थे। धर्म और वर्ण की सीमाएँ तोड़कर लाखों किसान एक ही लड़ाई में शामिल हुए।

67

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम में सामंतों की क्या भूमिका थी?

  1. ((a))

    सामंत राष्ट्रीय एकता का उद्देश्य लेकर लड़े थे।

  2. ((b))

    सभी सामंत, सामंतों की व्यापक एकता के पक्षधर थे।

  3. ((c))

    1857 के बाद वास्तविक सत्ता सामंतो के हाथ में आ गयी।

  4. ((d))

    सामंत विद्रोह में नेतृत्वकर्ता किसानों के सहायक थे।

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Answer: ((d))

सामंत विद्रोह में नेतृत्वकर्ता किसानों के सहायक थे।

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम में सामंतों की भूमिका थी- सामंत विद्रोह में नेतृत्वकर्ता किसानों के सहायक थे।

68

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी प्रदेश में नवजागरण कब शुरू हुआ?

  1. ((a))

    अंग्रेज़ीराज स्थापित होने पर

  2. ((b))

    1857 के स्वाधीनता संग्राम से

  3. ((c))

    अंग्रेज़ी शिक्षा - व्यवस्था कायम होने से

  4. ((d))

    किसानों का राज्य स्थापित होने से

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Answer: ((b))

1857 के स्वाधीनता संग्राम से

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी प्रदेश में नवजागरण 1857 के स्वाधीनता संग्राम से शुरू हुआ।

69

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार 1857 के स्वाधीनता संग्राम की विशेषता है:

  1. ((a))

    इसका सामन्त विरोधी पक्ष स्पष्ट और प्रबल था।

  2. ((b))

    इसने वर्ण और धर्म की व्यवस्थाओं को बनाए रखा।

  3. ((c))

    इसने किसानों और सामंतो के द्वंद्व को दबा दिया।

  4. ((d))

    इसने राजतंत्र को पुनः कायम किया।

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Answer: ((a))

इसका सामन्त विरोधी पक्ष स्पष्ट और प्रबल था।

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार 1857 के स्वाधीनता संग्राम की विशेषता है: इसका सामन्त विरोधी पक्ष स्पष्ट और प्रबल था।

70

'हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' नामक ग्रंथ में किस कालावधि का साहित्येतिहास वर्णित है-

  1. ((a))

    700 से 1400 ई.

  2. ((b))

    693 से 1693 ई.

  3. ((c))

    1000 से 1600 ई.

  4. ((d))

    950 से 1700 ई.

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Answer: ((b))

693 से 1693 ई.

'हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' नामक ग्रंथ में 693 से 1693 ई. तक की कालावधि का साहित्येतिहास वर्णित है। 

  • इतिहास लेखन की परम्परा में आचार्य द्विवेदी के बाद डॉ. रामकुमार वर्मा का “हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास” प्रकाशन हुआ।
  • इसमें लेखक ने 693 ई. से 1693 ई.  तक की कालावधि को लेकर भक्तिकाल तक के इतिहास का आलोचनात्मक अध्ययन किया है जो कि ऐतिहासिक, साहित्यिक और भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से सर्वथा अवांछनीय है।

Key Pointsडॉ. राम कुमार वर्मा :

  • जन्म- 1905 - 1990 ई.
  • हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि के रूप में जाने जाते हैं।
  • उन्हें हिन्दी एकांकी का जनक माना जाता है।
  • उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
  • इनके काव्य में 'रहस्यवाद' और 'छायावाद' की झलक है।
  • रचनाएँ (एकांकी-संग्रह)-
  • पृथ्वीराज की आँखें (1938 ई.)
  • चारुमित्रा
  • रेशमी टाई (1941 ई.)।
  • सप्त-किरण
  • कौमुदी महोत्सव
  • दीपदान
  • रजत-रश्मि आदि।
71

आचार्य क्षेमेन्द्र ने काव्य के सूक्ष्मातिसूक्ष्म अवयव से लेकर उसके विशालतम रूप को ध्यान में रखते हुए, औचित्य के कितने भेद निर्धारित किए हैं?

  1. ((a))

    20

  2. ((b))

    26

  3. ((c))

    28

  4. ((d))

    27

Show Answer
Answer: ((d))

27

आचार्य क्षेमेन्द्र ने काव्य के सूक्ष्मातिसूक्ष्म अवयव से लेकर उसके विशालतम रूप को ध्यान में रखते हुए, औचित्य के 27 भेद निर्धारित किए हैं। 

Key Points

आचार्य क्षेमेंद्र-

  • समय-11 वीं शती
  • क्षेमेंद्र को औचित्य संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है।
  • क्षेमेंद्र के शिक्षा गुरु अभिनव गुप्त थे।
  • क्षेमेंद्र का शब्दार्थ  के आधार पर काव्य लक्षण का सूत्र:-
  • "काव्यंविशिष्टशब्दार्थ साहित्यसदलंकृति।"
  • काव्य रचनाएं-
  • औचित्य विचार चर्चा
  • कविकण्ठाभरण
  • सुवृत्ततिलक
  • दशावतार चरित
72

'उदंत मार्तंड' को प्रकाश में लाने का श्रेय, निम्नलिखित में से किस विद्वान को दिया जाता है?

  1. ((a))

    राधाकृष्ण दास

  2. ((b))

    ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय

  3. ((c))

    नारायण दत्त

  4. ((d))

    भगवतीचरण चट्टोपाध्याय

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Answer: ((b))

ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय

'उदंत मार्तंड' को प्रकाश में लाने का श्रेय, ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय विद्वान को दिया जाता है। 

ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय-

  • जन्म-1891-1952 ई.

73

'आवारा मसीहा' के संदर्भ में विचार कीजिए-

A. द्विजेन्द्रलाल राय शरतचन्द्र के कटु आलोचक थे।

B. गांगुली परिवार के किशोर नवहुल्लोड़' के प्रति लोलुप दृष्टि से देखते थे।

C. ‘बड़ी दीदी' कहानी के प्रकाशन के समय शरत्चन्द्र रंगून में थे।

D. 'देवदास' लिखते समय शरत्चन्द्र की आयु सत्रह वर्ष की थी।

E. शरतचन्द्र ने दियासलाई का कारखाना खोलने के लिए प्रमथनाथ भट्टाचार्य को रूपये दिए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (C), (D)

  2. ((b))

    केवल (A), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (D)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (B), (C), (D)

'आवारा मसीहा' के संदर्भ में सही विचार हैं -

  • B. गांगुली परिवार के किशोर नवहुल्लोड़' के प्रति लोलुप दृष्टि से देखते थे।
  • C. ‘बड़ी दीदी' कहानी के प्रकाशन के समय शरत्चन्द्र रंगून में थे।
  • D. 'देवदास' लिखते समय शरत्चन्द्र की आयु सत्रह वर्ष की थी।

Key Pointsआवारा मसीहा-

  • रचनाकार-विष्णु प्रभाकर
  • विधा: जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1974ई.
  • पात्र-
  • ​शरतचन्द्र
  • केदारनाथ(नाना)
  • मोतीलाल(पिता)
  • भुवनमोहिनी(माता)
  • सुरेन्द्रनाथ(मामा)आदि।
  • विषय-
  • प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।
  • यह जीवन चरित्र न केवल बहुत विस्तार से उन पर प्रकाश डालता है अपितु उनके जीवन के कई अज्ञात पहलुओं को भी उजागर करता है।
  • तीन खंडों में विभक्त-
  • प्रथम पर्व- 'दिशाहारा'
  • द्वितीय पर्व- 'दिशा की खोज'
  • तृतीय पर्व- 'दिशांत'

Important Pointsविष्णु प्रभाकर-

  • जन्म-1912-2009ई.
  • विष्णु प्रभाकर हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक थे इन्होने अनेकों लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक तथा यात्रा संस्मरण लिखे।
  • उनकी कृतियों में देशप्रेम, राष्ट्रवाद, तथा सामाजिक विकास मुख्य भाव हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-(उपन्यास)
  • ​ढलती रात
  • स्वप्नमयी
  • अर्धनारीश्वर
  • धरती अब भी घूम रही है
  • क्षमादान, दो मित्र
  • पाप का घड़ा
  • होरी आदि।
74

'कामायनी' के सर्गों को, पहले से बाद के, क्रम में लगाइये:

A. कर्म

B. काम

C. इड़ा

D. लज्जा

E. श्रद्धा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    D, E, B, A, C

  2. ((b))

    D, A, B, C, E

  3. ((c))

    E, D, B, C, A

  4. ((d))

    E, B, D, A, C

Show Answer
Answer: ((d))

E, B, D, A, C

'कामायनी' के सर्गों का सही क्रम हैं-

  • E. श्रद्धा
  • B. काम
  • D. लज्जा
  • A. कर्म
  • C. इड़ा

Key Pointsकामायनी-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष -1936 ई.
  • मुख्य पात्र -
  • मनु, श्रद्धा, इड़ा और कुमार।
  • कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं-
  • चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा ,स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य और आनंद।
  • मुख्य रस - निर्वेद(शांत रस)
  • मुख्य छंद - ताटंक
  • विषय-
  • इनकी कथावस्तु का आधार ऋग्वेद, छंदोग्य उपनिषद, शतपथ ब्राह्मण और श्रीमद्भागवात है।
  • इसमें मनोभावों को पात्रों के रूप में रूपांतरित किया है।

Important Pointsजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • रचनाएँ-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेमपथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।
75

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में।

अभिकथन A : भौगोलिक परिवेश का भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है।

कारण R : भाषा मूलतः सामाजिक उत्पाद है, सामाजिक परिवेश किसी भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करने वाला सबसे सबल कारण है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  2. ((b))

    A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

  3. ((c))

    A सही है लेकिन R सही नहीं है।

  4. ((d))

    A सही नहीं है लेकिन R सही है।

Show Answer
Answer: ((a))

A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

सही उत्तर हैं- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

  • भौगोलिक परिवेश का भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है क्योंकि भाषा मूलतः सामाजिक उत्पाद है, सामाजिक परिवेश किसी भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करने वाला सबसे सबल कारण है।

Key Points

  • भाषा के मानकीकरण का अर्थ
  • मानक भाषा किसी देश अथवा राज्य की वह प्रतिनिधि तथा आदर्श भाषा होती है, जिसका प्रयोग वहाँ के शिक्षित वर्ग के द्वारा अपने सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, व्यापारिक व वैज्ञानिक तथा प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है।
  • किसी भाषा का बोलचाल के स्तर से ऊपर उठकर मानक रूप ग्रहण कर लेना, उसका मानकीकरण कहलाता है।
  • भाषा के मानकीकरण का संबंध भाषा के लिखित रूप से है।
  • भाषा मानकीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से, भाषा प्रणाली एक उच्च स्वीकार्य मानदंड बन जाता है और एक सजातीय इकाई के रूप में है ।
  • मानक भाषा एक भाषा है जो व्यापक संचार के प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है और जो एक समाज के एक बड़े हिस्से को स्वीकार्य हो जाता है के रूप में जाना जाता है।
  • भारत सरकार के शिक्षा विभाग के अधीन स्थापित केंद्रीय हिंदी निदेशालय मानकीकरण के लिए उत्तरदायी संस्था है।
  • इस संस्था ने भारत के भाषाविदों की सहायता से वर्ण तथा वर्तनी दोनों के मानकीकरण के सुझाव दिये हैं।
  • हिन्दी भाषा के मानकीकरण का सचेष्ट प्रयास सरस्वती पत्रिका में किया गया हैं।

Additional Information

  • मानक भाषा
  • यह वह स्तर है जब भाषा के प्रयोग का क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत हो जाता है। वह एक आदर्श रूप ग्रहण कर लेती है। उसका परिनिष्ठित रूप होता है।
  • उसकी अपनी शैक्षणिक, वाणिज्यिक, साहित्यिक, शास्त्रीय, तकनीकी एवं क़ानूनी शब्दावली होती है। इसी स्थिति में पहुँचकर भाषा 'मानक भाषा' बन जाती है। उसी को 'शुद्ध', 'उच्च–स्तरीय', 'परिमार्जित' आदि भी कहा जाता है।
76

‘स्पर्श-संघर्षी’ व्यंजन ध्वनि कौन-सी है?

  1. ((a))

  2. ((b))

  3. ((c))

  4. ((d))

Show Answer
Answer: ((d))

‘स्पर्श-संघर्षी’ व्यंजन ध्वनि है- 

Key Pointsस्पर्श-संघर्षी-

  • जिन व्यंजनों के उच्चारण में स्पर्श का समय अपेक्षाकृत अधिक होता है और उच्चारण के बाद वाला भाग संघर्षी हो जाता है, वे स्पर्श संघर्षी कहलाते हैं।
  • हिंदी वर्णमाला में च-वर्ग के प्रथम चार व्यंजनों, अर्थात च, छ, ज, झ को स्पर्श संघर्षी व्यंजन कहते हैं।

Additional Information

  • स- ऊष्म व्यंजन
  • य- अंतस्थ व्यंजन
  • न- स्पर्श व्यंजन
77

चौसरिया के खेल में रे, जुग्ग मिलन की आस।

नर्द अकेली रह गयी रे, नहिं जीवन की आस हो।।"

  • कबीर की इस पंक्ति में 'नर्द' शब्द का अर्थ है :
  1. ((a))

    नंद

  2. ((b))

    आत्मा

  3. ((c))

    गोटी

  4. ((d))

    खिलाड़ी

Show Answer
Answer: ((c))

गोटी

चौसरिया के खेल में रे, जुग्ग मिलन की आस।

नर्द अकेली रह गयी रे, नहिं जीवन की आस हो।।"-

  • कबीर की इस पंक्ति में 'नर्द' शब्द का अर्थ है : गोटी

Key Points

पंक्तियों का भावार्थ हैं-

  • चौसर के खेल में जब दो गोटियाँ एक जगह इकट्ठी हो जाती है तब उसकी आशा में ही भक्त भीतर-भीतर उतरता जाता है।
  • सब कुछ दाँव पर लगता जाता है, बस एक ही आशा रह जाती है कि कोई समय तो आयेगा जब दोनों गोटें एक जगह मिल जायेगे, जहाँ मैं और तू का मिलन होगा।
  • अगर गोटी अकेली रह गई तो जीवन व्यर्थ है,  फिर जीने की कोई आस नहीं है।
  • जीवन में सारी आशा परमात्मा के होने से है। ​

Important Points

कबीर-

  • जन्म-1398-1518 ई.
  • गुरु-रामानंद
  • ये सिकन्दर लोदी के समकालीन थे।
  • भाषा-सधुक्कड़ी
  • कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने बीजक(1464 ई.) नाम से किया था।  
  • इसके तीन भाग हैं-रमैनी,सबद और साखी।
  • ​हजारीप्रसाद द्विवेदी-
  • "भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।"

Additional Information

सम्पूर्ण पद हैं-

  • तन-मन-धन बाजी लागि हो।

चौपड़ खेलूँ पीवसे रे, तन-मन बाजी लगाय। 

हारी तो पियकी भी रे, जीती तो पिय मोर हो

चौसरियाके खेल में रे, जुग्ग मिलन की आस।

नर्द अकेली रह गई रे, नहि जीवन की आस हो। 

चार बरन घर एक है रे, भाँति भाँतिके लोग।

मनसा-बाचा-कर्मना कोई, प्रीति निबाहो ओर हो।

लख चौरासी भरमत भरमत, पौपै अटकी आय।

जो अबके पौ ना पड़ी रे, फिर चौरासी जाय हो।

कहै कबीर धर्मदास रे, जीती बाजी मत हार।

​अबके सुरत चढ़ाय दे रे, सोई सुहागिन नार हो।

78

'अँधेरे में' कविता में काव्य-वाचक किसे 'पितः पितः ओ' कहकर संबोधित करता है?

  1. ((a))

    तॉलस्टॉय

  2. ((b))

    गाँधी जी

  3. ((c))

    सिरफिरा पागल

  4. ((d))

    तिलक

Show Answer
Answer: ((d))

तिलक

'अँधेरे में' कविता में काव्य-वाचक तिलक को 'पितः पितः ओ' कहकर संबोधित करता है।

  • उक्त पंक्तिया 'अँधेरे में' कविता से अवतरित है।
  • 'अँधेरे में' मुक्तिबोध की लंबी कविता है।

Key Pointsमुक्तिबोध-

  • जन्म-1916-1964ई.
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे।
  • इन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964ई.)
  • भूरी-भूरी खाक धूल(1980ई.) आदि।

Additional Informationपूर्ण पंक्तियाँ हैं-

  • हाय, हाय, पितः पितः ओ, 

चिन्ता में इतने न उलझो 

हम अभी ज़िन्दा हैं ज़िन्दा, 

चिन्ता क्या है!! 

मैं उस पाषाण-मूर्ति के ठण्डे 

पैरों की छाती से बरबस चिपका 

रुआँसा-सा होता 

देह में तन गये करुणा के काँटे 

छाती पर, सिर पर, बाँहों पर मेरे 

गिरती हैं नीली 

बिजली की चिनगियाँ 

रक्त टपकता है हृदय में मेरे 

आत्मा में बहता-सा लगता 

ख़ून का तालाब।

79

"भारत दुर्दशा' नाटक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

A. इस नाटक में भारत दुर्देव और उसकी सेना के माध्यम से भारत दुर्दशा के चित्र प्रस्तुत हुए हैं।

B. इसमें मद्यपान को सही सिद्ध करने के लिए 'मदिरा' नामक पात्र को रचा गया है।

C. 'भारत दुर्दशा' नाटक भारतेन्दु के व्यथित हृदय की अभिव्यक्ति है।

D. नाटक में प्रतीकात्मक पात्र 'रोग' कहता है- “निहचे भारत को अब नास"

E. इस नाटक में भारतेन्दु के देशभक्त और समाज सुधारक रूप के दर्शन होते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (D), (E)

  2. ((b))

    केवल (B), (C), (D)

  3. ((c))

    केवल (A), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (A), (C), (E)

"भारत दुर्दशा' नाटक के संबंध में सही कथन हैं-  

  • A. इस नाटक में भारत दुर्देव और उसकी सेना के माध्यम से भारत दुर्दशा के चित्र प्रस्तुत हुए हैं।
  • C. 'भारत दुर्दशा' नाटक भारतेन्दु के व्यथित हृदय की अभिव्यक्ति है।
  • E. इस नाटक में भारतेन्दु के देशभक्त और समाज सुधारक रूप के दर्शन होते हैं।

Key Points

B. इसमें मद्यपान को बुरा सिद्ध करने के लिए 'मदिरा' नामक पात्र को रचा गया है।

D. नाटक में प्रतीकात्मक पात्र 'अंधकार' कहता है-

  • “निहचे भारत को अब नास

जब महराज विमुख उनसो तुम निज मति करी प्रकास।"

Important Pointsभारत दुर्दशा-

  • रचनाकार-भारतेन्दु
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1880ई.
  • पात्र-
  • भारत भाग्य,भारत दुर्दैव,अंधकार,डिसलॉयल्टी,मदिरा,रिपोर्टर,आलस्य आदि।
  • विषय-
  • 6 अंकों का नाट्य रासक है।
  • भारत की दुर्दशा को चित्रित किया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर व्यंग किया गया है।
  • मनोभावों का मानवीकरण किया गया है।

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885ई.
  • हिन्दी के प्रमुख नाटककार के रूप में विख्यात है।
  • मौलिक नाटक-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873ई.)
  • चंद्रावली(1876ई.)
  • नील देवी(1881ई.)
  • सती प्रताप(1883ई.) आदि।
  • अनूदित नाटक-
  • रत्नावली(1868ई.)
  • विद्यासुंदर(1868ई.)
  • पाखंड विडंबन(1872ई.)
  • धनंजय विजय(1873ई.)
  • मुद्रा राक्षस(1878ई.) आदि।
80

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (ग्रंथ का नाम)सूची - II (समय)
A.काव्य प्रकाशI.14वीं शताब्दी
B.चंद्रालोकII.17वीं शताब्दी
C.कुवलयानंदIII.13वीं शताब्दी
D.साहित्य दर्पणIV.11वीं शताब्दी
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (IV), (B) - (II), (C) - (I), (D) - (III)

  2. ((b))

    (A) - (III), (B) - (II), (C) - (I), (D) - (IV)

  3. ((c))

    (A) - (IV), (B) - (III), (C) - (II), (D) - (I)

  4. ((d))

    (A) - (III), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (II)

Show Answer
Answer: ((c))

(A) - (IV), (B) - (III), (C) - (II), (D) - (I)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (ग्रंथ का नाम)सूची - II (समय)
A.काव्य प्रकाशIV.11वीं शताब्दी
B.चंद्रालोकIII.13वीं शताब्दी
C.कुवलयानंदII.17वीं शताब्दी
D.साहित्य दर्पणI.14वीं शताब्दी
81

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (पुस्तक)सूची - II (आलोचक)
A.गोस्वामी तुलसीदासI.उदयभानु सिंह
B.तुलसी काव्य मीमांसाII.रामचन्द्र शुक्ल
C.तुलसी आधुनिक वातायन सेIII.विश्वनाथ त्रिपाठी
D.लोकवादी तुलसीदासIV.रमेश कुंतल मेघ
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (II), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (I)

  2. ((b))

    (A) - (II), (B) - (IV), (C) - (III), (D) - (I)

  3. ((c))

    (A) - (II), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (III)

  4. ((d))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)

Show Answer
Answer: ((c))

(A) - (II), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (III)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (पुस्तक)सूची - II (आलोचक)
A.गोस्वामी तुलसीदासII.रामचन्द्र शुक्ल
B.तुलसी काव्य मीमांसाI.उदयभानु सिंह
C.तुलसी आधुनिक वातायन सेIV.रमेश कुंतल मेघ
D.लोकवादी तुलसीदासIII.विश्वनाथ त्रिपाठी
82

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (शेखर एक जीवनी भाग 1 का खंड)सूची - II (खंड का शीर्षक)
A.प्रथम खंडI.बीज और अंकुर
B.द्वितीय खंडII.पुरुष और परिस्थिति
C.तृतीय खंडIII.उषा और ईश्वर
D.चतुर्थ खंडIV.प्रकृति और पुरुष
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (II), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (I)

  2. ((b))

    (A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)

  3. ((c))

    (A) - (IV), (B) - (I), (C) - (II), (D) - (III)

  4. ((d))

    (A) - (II), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (III)

Show Answer
Answer: ((b))

(A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)

सूची I का सूची II से सही मिलान है-

सूची - I (शेखर एक जीवनी भाग 1 का खंड)सूची - II (खंड का शीर्षक)
A.प्रथम खंडIII.उषा और ईश्वर
B.द्वितीय खंडI.बीज और अंकुर
C.तृतीय खंडIV.प्रकृति और पुरुष
D.चतुर्थ खंडII.पुरुष और परिस्थिति
83

नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन I : 'सिंदूर की होली' नाटक में कुल दो अंक हैं। नज़ीर, माहिर अली चंद्रकला और कृष्णलाल इसके प्रमुख पात्र हैं।

**कथन II : '**सिंदूर की होली' नाटक की कथा प्रातःकाल 9 बजे शुरु होती है तथा कथा की अंतिम घटना लगभग 10 बजे रात्रि में बीत जाती है।

उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    कथन I और II दोनों सत्य हैं।

  2. ((b))

    कथन I और II दोनों असत्य हैं।

  3. ((c))

    कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य है।

  4. ((d))

    कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

Show Answer
Answer: ((d))

कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

सही उत्तर है - कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

Key Pointsसिंदूर की होली - 

  • रचनाकार - लक्ष्मी नारायण मिश्र
  • प्रकाशन वर्ष - 1934 ई.
  • अंक - 2
  • विषय- 
  • सामाजिक समस्या प्रधान नाटकों के क्रम में ‘सिंदूर की होली’ उनका पाँचवा नाटक है।
  • सिंदूर की होली नाटक की भूमिका रामप्रसाद त्रपाठी ने 20 अप्रैल 1934 को लिखी थी।
  • इस नाटक की खास बात यह है कि इस नाटक में एक ही दिन के पूरी घटना का वर्णन किया गया है।
  • इस नाटक में उन्होंने चिरंतन नारित्व की समस्या का प्रतिपादन किया है।
  • नाटककार ने समकालीन भारतीय समाज में स्थित नारी समस्याओं का अंकन विभिन्न पात्रों के द्वारा किया है।

    

Important Pointsलक्ष्मी नारायण मिश्र - 

  • लक्ष्मी नारायण मिश्र जी को समस्या प्रधान नाटक का ‘जनक’ कहा जाता है।
  • कृतियाँ -
  • सामाजिक नाटक -
  1. अशोक (1926 ई.)
  2. न्यासी (1930 ई.)
  3. राक्षस का मंदिर (1931 ई.)
  4. मुक्ति का रहस्य (1932 ई.)
  5. राजयोग (1933 ई.)
  6. आधी रात (1936 ई.)
  • ऐतिहासिक नाटक -
  1. गरुड़ध्वज (1945 ई.)
  2. वत्सराज (1950 ई.)
  3. दशाश्वमेध (1950 ई.)
  4. वितस्ता की लहरें (1957 ई.)
  5. जगद्गुरु (1958 ई.)
  6. सरयू की धार (1974 ई.)
  7. गंगाद्वार (1974 ई.)
  • पौराणिक नाटक - 
  1. नारद की वीणा (1946 ई.)
  • एकांकी संग्रह -
  1. अशोक वन (1950 ई.)
  2. प्रलय के पंख पर (1951 ई.)
  3. कावेरी में कमल (1961 ई.)
  4. नारी का रंग (1966 ई.)

निर्देशः निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनिए:

सूफी साधक ईश्वर को निराकार भी मानते हैं और साकार भी। वे ईश्वर को मनुष्य की आत्मा और मानव-जीवन को उस आत्मा का आवरण मानते हैं। प्रायः, प्रत्येक साधक ईश्वर की कल्पना परम सुन्दरी नारी के रूप में करता है जिस पर वह आसक्त होना चाहता है। सूफी-मत में परमेश्वर साकार सौन्दर्य है और साधक साकार प्रेम।

सूफी-सम्प्रदाय में साधिकाएँ भी हुई हैं, जो परमात्मा को अपना पति समझती थीं। इनमें से, बसरे की राबिया नाम की साधिका बहुत प्रसिद्ध हुईं। कहते हैं, एक बार उन्होंने कहा था कि “मेरा हृदय परमात्मा के प्रेम से ऐसा लबालब भर गया है कि उसमें नबी के भी प्रेम के लिए जगह नहीं रही, फिर शैतान के प्रति घृणा की तो बात ही क्या है। "

सौन्दर्य से प्रेम और प्रेम से मुक्ति, यह सूफी-मत के सिद्धान्तों का निचोड़ है। इसी प्रेम की सिद्धि के लिए सूफियों ने इश्के-मजाजी की भी छूट दी, क्योंकि इश्के-मजाजी से भी इश्के-हकीकी हासिल हो सकता है। वैसे, सूफी-मत यति-वृत्ति, वैराग्य-साधना, योग और संयम, सब पर जोर देता है।

सौन्दर्य और प्रेम के बाद सूफियों में संगीत की प्रधानता है, क्योंकि संगीत में मन को केन्द्रित करके उसे ऊपर ले जाने की शक्ति होती है। उसका उपयोग सूफी सन्त समाधि की सुगमता के लिए किया करते हैं।

मनुष्य के सीमित गुणों को सूफी 'नासूत' कहते हैं और भगवान् की निस्सीमता को 'लाहूत'। इसी प्रकार, जब तक मनुष्य मोक्ष अथवा ईश्वर-मिलन से दूर है, तब तक उसकी स्थिति 'बका' की स्थिति समझी जाती है तथा जब वह मोक्ष अथवा ब्रह्म मिलन को प्राप्त करता है, तब वह 'फना' (विनाश, निःशेषता या निर्वाण) की स्थिति में पहुँच जाता है। सूफियों के दो सम्प्रदाय हैं जिनमें से एक तो यह मानता है कि सृष्टि का उपादान-कारण प्रकाश है और दूसरा यह है कि सृष्टि विचार से निकली हैं। सूफियों में एक सम्प्रदाय और है, जो हुलूल (अवतारवाद), इम्तिज़ाज (अंशावतारवाद) और नस्खे-अरबा यानी आत्मा के आवागमन में विश्वास करता है।

84

राबिया नाम की साधिका शैतान से भी घृणा क्यों नहीं करती थी ?

  1. ((a))

    वह शैतान से दूरी रखना जरूरी मानती थी।

  2. ((b))

    उसके हृदय में परमात्मा के अतिरिक्त किसी दूसरे के लिए जगह ही नहीं थी।

  3. ((c))

    उसने हृदय में नबी को भी स्थान दे रखा था।

  4. ((d))

    उसने हृदय में शैतान को स्थान दे रखा था।

Show Answer
Answer: ((b))

उसके हृदय में परमात्मा के अतिरिक्त किसी दूसरे के लिए जगह ही नहीं थी।

राबिया नाम की साधिका शैतान से भी घृणा इसलिए नहीं करती थी क्योंकि उसके हृदय में परमात्मा के अतिरिक्त किसी दूसरे के लिए जगह ही नहीं थी।

85

सूफीमत के अनुसार मानव जीवन को किसका आवरण माना गया है ?

  1. ((a))

    भक्ति

  2. ((b))

    मनुष्य

  3. ((c))

    आत्मा

  4. ((d))

    संगीत

Show Answer
Answer: ((c))

आत्मा

सूफीमत के अनुसार मानव जीवन को आत्मा का आवरण माना गया है।

निर्देशः निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनिए:

सूफी साधक ईश्वर को निराकार भी मानते हैं और साकार भी। वे ईश्वर को मनुष्य की आत्मा और मानव-जीवन को उस आत्मा का आवरण मानते हैं। प्रायः, प्रत्येक साधक ईश्वर क��� कल्पना परम सुन्दरी नारी के रूप में करता है जिस पर वह आसक्त होना चाहता है। सूफी-मत में परमेश्वर साकार सौन्दर्य है और साधक साकार प्रेम।

सूफी-सम्प्रदाय में साधिकाएँ भी हुई हैं, जो परमात्मा को अपना पति समझती थीं। इनमें से, बसरे की राबिया नाम की साधिका बहुत प्रसिद्ध हुईं। कहते हैं, एक बार उन्होंने कहा था कि “मेरा हृदय परमात्मा के प्रेम से ऐसा लबालब भर गया है कि उसमें नबी के भी प्रेम के लिए जगह नहीं रही, फिर शैतान के प्रति घृणा की तो बात ही क्या है। "

सौन्दर्य से प्रेम और प्रेम से मुक्ति, यह सूफी-मत के सिद्धान्तों का निचोड़ है। इसी प्रेम की सिद्धि के लिए सूफियों ने इश्के-मजाजी की भी छूट दी, क्योंकि इश्के-मजाजी से भी इश्के-हकीकी हासिल हो सकता है। वैसे, सूफी-मत यति-वृत्ति, वैराग्य-साधना, योग और संयम, सब पर जोर देता है।

सौन्दर्य और प्रेम के बाद सूफियों में संगीत की प्रधानता है, क्योंकि संगीत में मन को केन्द्रित करके उसे ऊपर ले जाने की शक्ति होती है। उसका उपयोग सूफी सन्त समाधि की सुगमता के लिए किया करते हैं।

मनुष्य के सीमित गुणों को सूफी 'नासूत' कहते हैं और भगवान् की निस्सीमता को 'लाहूत'। इसी प्रकार, जब तक मनुष्य मोक्ष अथवा ईश्वर-मिलन से दूर है, तब तक उसकी स्थिति 'बका' की स्थिति समझी जाती है तथा जब वह मोक्ष अथवा ब्रह्म मिलन को प्राप्त करता है, तब वह 'फना' (विनाश, निःशेषता या निर्वाण) की स्थिति में पहुँच जाता है। सूफियों के दो सम्प्रदाय हैं जिनमें से एक तो यह मानता है कि सृष्टि का उपादान-कारण प्रकाश है और दूसरा यह है कि सृष्टि विचार से निकली हैं। सूफियों में एक सम्प्रदाय और है, जो हुलूल (अवतारवाद), इम्तिज़ाज (अंशावतारवाद) और नस्खे-अरबा यानी आत्मा के आवागमन में विश्वास करता है।

86

संगीत का उपयोग सूफी संत किसके लिए करते हैं ?

  1. ((a))

    समाधि की सुगमता के लिए

  2. ((b))

    हुलूल के लिए

  3. ((c))

    नस्खे - अरबा के लिए

  4. ((d))

    नासूत के लिए

Show Answer
Answer: ((a))

समाधि की सुगमता के लिए

संगीत का उपयोग सूफी संत समाधि की सुगमता के लिए करते हैं।

87

बका की स्थिति से क्या अभिप्राय है - 

  1. ((a))

    ब्रह्म मिलन की प्राप्ति

  2. ((b))

    आत्मा के आवागमन में विश्वास

  3. ((c))

    निर्वाण की प्राप्ति

  4. ((d))

    ईश्वर - मिलन से दूर की स्थिति

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Answer: ((d))

ईश्वर - मिलन से दूर की स्थिति

बका की स्थिति से अभिप्राय है - ईश्वर - मिलन से दूर की स्थिति

88

ब्रह्म मिलन या मोक्ष की प्राप्ति की दशा सूफियों में क्या कहलाती है -

  1. ((a))

    नासूत

  2. ((b))

    फना

  3. ((c))

    बका

  4. ((d))

    हुलूल

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Answer: ((b))

फना

ब्रह्म मिलन या मोक्ष की प्राप्ति की दशा सूफियों में फना कहलाती है।

89

'अन्याय जिधर, है उधर शक्ति ! - 'राम की शक्तिपूजा का यह संवाद किसने किससे कहा?

  1. ((a))

    राम ने विभीषण से

  2. ((b))

    राम ने हनुमान से

  3. ((c))

    राम ने सुग्रीव से

  4. ((d))

    राम ने लक्ष्मण से

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Answer: ((a))

राम ने विभीषण से

'अन्याय जिधर, है उधर शक्ति ! - 'राम की शक्तिपूजा' का यह संवाद राम ने विभीषण से कहा। 

राम की शक्तिपूजा-

  • विधा-काव्य
  • प्रकाशन वर्ष-1936ई.
  • रचनाकार-सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
  • विषय-
  • इस कविता का मुख्य विषय सीता की मुक्ति है राम-रावण का युद्ध नहीं।

Key Points 

  • 'अनामिका' काव्य-संग्रह में अन्य कविताएं-
  • सच है
  • रेखा
  • वह तोड़ती पत्थर
  • सरोज स्मृति(1935) आदि।
  • महत्वपूर्ण पंक्तियाँ-
  • ​"रवि हुआ अस्त: ज्योति के पत्र पर लिखा अमर,रह गया राम-रावण का अपराजेय समर।"
  • "अन्याय जिधर,हैं उधर शक्ति!"

Important Pointsसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'-

  • जन्म-1899-1961ई.
  • छायावाद के स्तम्भ एवं प्रसिद्ध कवि,कहानीकार एवं  निबंधकार थे।
  • काव्यसंग्रह -
  • अनामिका (1923)
  • परिमल (1930)
  • गीतिका (1936)
  • अनामिका (द्वितीय) (1939) (इसी संग्रह में सरोज स्मृति और राम की शक्तिपूजा जैसी प्रसिद्ध कविताओं का संकलन है।
  • तुलसीदास (1939)
  • कुकुरमुत्ता (1942)
  • अणिमा (1943)
  • बेला (1946)
  • नये पत्ते (1946)
  • अर्चना(1950)
  • आराधना (1953) आदि।
90

'नैन चुवहिं जस महवट नीरु' - 'नागमती-वियोग खंड' की इस पंक्ति में 'महवट' का सटीक अर्थ है :

  1. ((a))

    महावत

  2. ((b))

    महकता वट

  3. ((c))

    माघ की झड़ी

  4. ((d))

    महा वट

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Answer: ((c))

माघ की झड़ी

'नैन चुवहिं जस महवट नीरु' - 'नागमती-वियोग खंड' की इस पंक्ति में 'महवट' का सटीक अर्थ है- माघ की झड़ी

नैन चुवहिं जस जस माँहुट नीरू। 

गियँ नहिं हार रही होइ डोरा ।।-

पंक्तियों का भावार्थ-

  • पति के वियोग में आँखें इस प्रकार बरसती हैं मानो बादल बरस रहे हों ।
  • ठंड के मारे गरदन नहीं हिलती, ऐसा लगता है मानो धागा हिल रहा हो
  • बूंद गिरती है, तो ऐसे लगता है मानो ओले पड़ रहे हों।
  • आँसु का जल अब अन्य अंगों पर पड़ता है तो ऐसा प्रतीत होता है मानो बाण शरीर को चीर रहे हों।

Key Pointsपद्मावत-

  • रचनाकार-जायसी
  • समय-1520 ई.
  • भाषा-अवधी
  • प्रयुक्त छंद-दोहा-चौपाई
  • विषय-
  • इसमें लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम को दर्शाया गया है।
  • विरह परक प्रेमाख्यान काव्य है।
  • इसमें 57 खंड है।
  • नागमती वियोग खंड इसका सबसे प्रसिद्ध खंड है।

Important Pointsजायसी-

  • जन्म-1446-1542 ई.
  • भक्तिकाल की सूफी काव्यधारा के मुख्य कवि है।
  • रचनाएँ-
  • अखरावट
  • आखिरी कलाम
  • कहरनामा
  • चित्ररेखा
  • कान्हावत आदि।
91

'झूठा सच' में किस शहर का वर्णन नहीं है?

  1. ((a))

    जालंधर

  2. ((b))

    कानपुर

  3. ((c))

    लखनऊ

  4. ((d))

    नैनीताल

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Answer: ((b))

कानपुर

'झूठा सच' में कानपुर शहर का वर्णन नहीं है। 

Key Pointsझूठा-सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • मुख्य पात्र-
  • तार
  • जयदेव आदि।
  • विषय-
  • 'वतन और देश' तथा 'देश का भविष्य' नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उपरान्त चारित्रिक स्खलन एवं विविध विडम्बनाओं का व्यापक फलक पर कलात्मक चित्र उकेरा गया है।
  • झूठा सच (1958-60) हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।

Important Pointsयशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प��रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।
92

'तीसरी कसम' कहानी के पात्र हैं -

A. लाल मोहर

B. पलटदास

C. महेश्वर

D. धुन्नीराम

E. बेगू पटवारी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (B), (D), (E)

  2. ((b))

    केवल (A), (D), (E)

  3. ((c))

    केवल (A), (B), (D)

  4. ((d))

    केवल (A), (C), (D)

Show Answer
Answer: ((c))

केवल (A), (B), (D)

'तीसरी कसम' कहानी के पात्र हैं -

  • A. लाल मोहर
  • B. पलटदास
  • D. धुन्नीराम

Key Pointsतीसरी कसम-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • इसका दूसरा नाम 'मारे गए गुलफाम' है।
  • यह ठुमरी कहानी संग्रह में संकलित है।
  • विषय-
  • यह हीरामन और हीराबाई के बैलगाड़ी सफर के माध्यम से लोक संस्कृति उसमें निहित रस और मर्यादित निश्चल प्रेम को व्यक्त करने वाली कहानी है।
  • मुख्य पात्र-
  • गाड़ीवान हीरामन और कंपनी की औरत हीराबाई।
  • गौण पात्र-
  • पलटदास
  • लाल मोहर
  • लाल मोहर का नौकर लहसनवाँ
  • धुन्नीराम आदि।
  • हीरामन की 3 कसमें-
  • चोरबाजरी का माल नही लादेगा।
  • बाँस नहीं ढोयेगा।
  • कम्पनी की औरत नहीं बैठाएगा।

Important Pointsफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म- 1921-1977 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • ठुमरी(1959 ई.)
  • एक आदिम रात्रि की महक(1967 ई.)
  • अग्निखोर(1973 ई.)
  • एक श्रावणी दोपहर की धूप(1984 ई.)
  • अच्छे आदमी(1986 ई.) आदि।
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम)
  • पंचलाइट
  • तबे एकला चलो रे
  • ठेस
  • संवदिया आदि।
93

'अंधेर नगरी' नाटक में पहले से बाद में आए संवादों का क्रम निर्धारित कीजिए :

A. चना चुरमुर चुरमुर बोले, बाबू खाने को मुंह खोले।।

B. लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटाव। 

C. चूरन जब से हिन्द में आया। इसका धन बल सभी घटाया।।

D. चूरन साहेब लोग जो खाता । सारा हिन्द हजम कर जाता ।।

E. चना खाते मियाँ जुलाहे । दाढ़ी हिलती गाहे बगाहे।।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    B, E, A, D, C

  2. ((b))

    B, C, E, A, D

  3. ((c))

    A, B, E, D, C

  4. ((d))

    B, A, E, C, D

Show Answer
Answer: ((d))

B, A, E, C, D

'अंधेर नगरी' नाटक में पहले से बाद में आए संवादों का सही क्रम हैं-

  • B. लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटाव।
  • A. चना चुरमुर चुरमुर बोले, बाबू खाने को मुंह खोले।।
  • E. चना खाते मियाँ जुलाहे । दाढ़ी हिलती गाहे बगाहे।।
  • C. चूरन जब से हिन्द में आया। इसका धन बल सभी घटाया।।
  • D. चूरन साहेब लोग जो खाता । सारा हिन्द हजम कर जाता ।।

Key Pointsअंधेर नगरी-

  • रचनाकार-भारतेन्दु
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1881ई.
  • विषय-
  • 6 अंकों का प्रहसन है।
  • तत्कालीन समय मे सत्ता की विसंगतियों,मूर्खताओं और उससे उत्पन्न परिस्थितियों का व्यंग्यात्मक चित्रण है।

Important Pointsभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885ई.
  • हिन्दी के प्रमुख नाटककार के रूप में विख्यात है।
  • मौलिक नाटक-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873ई.)
  • चंद्रावली(1876ई.)
  • नील देवी(1881ई.)
  • सती प्रताप(1883ई.) आदि।
  • अनूदित नाटक-
  • रत्नावली(1868ई.)
  • विद्यासुंदर(1868ई.)
  • पाखंड विडंबन(1872ई.)
  • धनंजय विजय(1873ई.)
  • मुद्रा राक्षस(1878ई.) आदि।
94

प्रथम प्रकाशन वर्ष के अनुसार रामविलास शर्मा द्वारा रचित कृतियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. भाषा और समाज

B. आस्था और सौंदर्य

C. नयी कविता और अस्तित्ववाद

D. महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण

E. प्राचीन भारत के भाषा परिवार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    A, B, E, D, C

  2. ((b))

    A, B, D, E, C

  3. ((c))

    B, A, D, C, E

  4. ((d))

    B, A, C, E, D

Show Answer
Answer: ((c))

B, A, D, C, E

कृतियाँप्रकाशन वर्ष
आस्था और सौंदर्य1961 ई.
भाषा और समाज1961 ई.
महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण1977 ई.
नयी कविता और अस्तित्ववाद1978 ई.
प्राचीन भारत के भाषा परिवार1979 ई.

प्रथम प्रकाशन वर्ष के अनुसार रामविलास शर्मा द्वारा रचित कृतियों का सही क्रम हैं-

Key Pointsरामविलास शर्मा-

  • जन्म- 1912-2000 ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • प्रेमचन्द(1941)
  • भारतेन्दु युग(1943)
  • निराला(1946)
  • प्रेमचन्द और उनका युग(1952)
  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र(1953)
  • प्रगतिशील साहित्य की समस्याएँ (1954)
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और हिन्दी आलोचना(1955) आदि।
95

बघेली बोली किस अपभ्रंश से विकसित हुई है?

  1. ((a))

    शौरसेनी

  2. ((b))

    मागधी

  3. ((c))

    अर्धमागधी

  4. ((d))

    व्राचड

Show Answer
Answer: ((c))

अर्धमागधी

बघेली बोली अर्धमागधी अपभ्रंश से विकसित हुई है। 

अर्धमागधी-

  • मध्य भारतीय आर्य परिवार की भाषा अर्धमागधी संस्कृत और आधुनिक भारतीय भाषाओं के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
  • यह प्राचीन काल में मगध की साहित्यिक एवं बोलचाल की भाषा थी।
  • हेमचंद्र आचार्य ने अर्धमागधी को 'आर्ष प्राकृत' कहा है।
  • अर्धमागधी शब्द का कई तरह से अर्थ किया जाता है-
  • जो भाषा मगध के आधे भाग में बोली जाती हो।
  • जिसमें मागधी भाषा के कुछ लक्षण पाए जाते हों, जैसे पुलिंग में प्रथमा के एकवचन में एकारांत रूप का होना (जैसे धम्मे)।
  • इस भाषा में विपुल जैन एवं लौकिक साहित्य की रचना की गई।

Key Pointsबघेली-

  • यह उपभाषा पूर्वी हिन्दी की बोली है।
  • इसे बघेलखंडी भी कहा जाता है।
  • यह मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, सीधी,सिंगरौली, उमरिया, एवं शहडोल,अनूपपुर में; उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिलों में तथा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर एवं कोरिया जनपदों में बोली जाती है।

Additional Informationशौरसेनी-

  • शौरसेनी नामक प्राकृत मध्यकाल में उत्तरी भारत की एक प्रमुख भाषा थी।
  • यह नाटकों में प्रयुक्त होती थी (वस्तुतः संस्कृत नाटकों में, विशिष्ट प्रसंगों में)।
  • बाद में इससे हिंदी-भाषा-समूह व पंजाबी विकसित हुए।
  • दिगंबर जैन परंपरा के सभी जैनाचार्यों ने अपने महाकाव्य शौरसेनी में ही लिखे जो उनके आदृत महाकाव्य हैं।
  • इससे राजस्थानी हिन्दी, पहाड़ी हिन्दी और पश्चिमी हिन्दी का विकास हुआ है।

मागधी-

  • मागधी उस प्राकृत का नाम है जो प्राचीन काल में मगध (दक्षिण बिहार) प्रदेश में प्रचलित थी।
  • इस भाषा के उल्लेख महावीर और बुद्ध के काल से मिलते हैं।
  • जैन आगमों के अनुसार तीर्थकर महावीर का उपदेश इसी भाषा अथवा उसी के रूपांतर अर्धमागधी प्राकृत में होता था।
  • पालि त्रिपिटक में भी भगवान्‌ बुद्ध के उपदेशों की भाषा को मागधी कहा गया है।
  • इससे बिहारी हिन्दी का विकास हुआ है।

व्राचड-

  • मार्कण्डेय के अनुसार यह अपभ्रंश का एक भेद है।
96

'लिरिकल बैलेड्स' (1798) किन दो कवियों की कविताओं का संग्रह है-

  1. ((a))

    प्लेटो एवं अरस्तू

  2. ((b))

    वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज

  3. ((c))

    इलियट एवं रिचर्ड्स

  4. ((d))

    क्रोचे एवं मेथ्यू आर्नल्ड

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Answer: ((b))

वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज

'लिरिकल बैलेड्स' (1798) वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज कवियों की कविताओं का संग्रह है। 

Key Points

  • लिरिकल बैलेड्स को स्वच्छंदतावादी काव्य आंदोलन का घोषणा पत्र माना जाता है।
  • लिरिकल बैलेड्स के 4 संस्करण प्रकाशित हुए और उसकी भूमिका को वर्ड्सवर्थ की आलोचना का मूल माना जाता है।

लिरिकल बैलेड्स के संस्करण निम्नलिखित हैं:- 

संस्करणरचना वर्षभूमिका के शीर्षक
प्रथम1798एडवरटिजमेंट
द्वितीय1800प्रिफेस
तृतीय1802प्रिफेस
चतुर्थ1815प्रिफेस

Important Points

वर्ड्सवर्थ-

  • जन्म-1770-1850 ई.
  • पूरा नाम-विलियम वर्ड्सवर्थ
  • मुख्य रचनाएँ-
  • लिरिकल बैलेड्स(1798 ई.)
  • दप्रिल्युड(1799 ई.) आदि।

कॉलरिज-

  • जन्म-1772-1834 ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • लिरिकल बैलेड्स(1798 ई.)
  • बायोग्राफिआ लिटरेरिया(1817ई.)
  • द फ्रेंड(1969 ई.) आदि।
  • कॉलरिज के अनुसार-
  • "कविता रचना का वह प्रकार है जो वैज्ञानिक कृतियों से इस अर्थ में भिन्न है कि उसका तात्कालिक प्रयोजन आनन्द है, सत्य नहीं।

Additional Information

प्लेटो-

  • जन्म-427-347 ई.पू.
  • मुख्य ग्रन्थ-
  • रिपब्लिक
  • स्टेट्समैन
  • इयोन
  • सिम्पोजियम
  • फ़ीडो
  • क्रीटो आदि।

अरस्तु-

  • जन्म-384-322 ई.पू.
  • मुख्य ग्रन्थ-
  • पेरीपोइएतिकेस
  • रिटोरिक
  • पॉलिटिक्स आदि।

टी. एस. इलियट-

  • जन्म-(1888-1965ई.)
  • निर्वैयक्तिकता के सिद्धांत के जनक माने जाते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • सेलेक्टेड एसेंज(1932)
  • पोएट्री  एंड ड्रामा(1951)
  • द सैक्रेड वुड(1920)
  • द वेस्टलैंड(1922)आदि।

आई. ए. रिचर्ड्स-

  • जन्म-(1893-1979ई.)
  • अंग्रेजी के प्रभावशाली समालोचक तथा बीसवीं सदी के मूल्यवादी समीक्षक हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • प्रिंसिपल्स ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज्म (साहित्य आलोचना ) ( 1924 )
  • साइन्स एंड पोयट्री (विज्ञान और कविता) (1925)
  • प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म (व्यवहारिक आलोचना) (1929)
  • कॉलरिज आ्न इमैजिनेशन (कॉलेरिज की कल्पना शक्ति) (1935)
  • द फिलॉसफी ऑफ रिटोरिक (शब्दता का दर्शन) ( 1936) आदि।

 क्रोचे-

  • जन्म-1866-1952 ई.
  • रचनाएँ-
  • एस्थेटिक(1909 ई.)
  • लॉजिक(1917 ई.) आदि।

मैथ्यू आर्नल्ड-

  • जन्म-1822-1888 ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • एसेज इन क्रिटिसिज्म(1865 ई.)
  • ऑन द स्टडी  ऑफ सेलिट्क लिटरेचर(1867 ई.)
  • लिटरेचर एंड डोग्मा(1873 ई.) आदि।
97

सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची - I (संप्रदाय का नाम)सूची - II (प्रवर्तक)
A.श्री संप्रदायI.रामानुजाचार्य
B.ब्रह्म संप्रदायII.निम्बार्काचार्य
C.रुद्र संप्रदायIII.मध्वाचार्य
D.सनकादि संप्रदायIV.विष्णु स्वामी
<br>

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. ((a))

    (A) - (I), (B) - (IV), (C) - (III), (D) - (II)

  2. ((b))

    (A) - (II), (B) - (III), (C) - (I), (D) - (IV)

  3. ((c))

    (A) - (I), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (II)

  4. ((d))

    (A) - (II), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (III)

Show Answer
Answer: ((c))

(A) - (I), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (II)

सूची I का सूची II से सही मिलान हैं-

सूची - I (संप्रदाय का नाम)सूची - II (प्रवर्तक)
A.श्री संप्रदायI.रामानुजाचार्य
B.ब्रह्म संप्रदायIII.मध्वाचार्य
C.रुद्र संप्रदायIV.विष्णु स्वामी
D.सनकादि संप्रदायII.निम्बार्काचार्य

Key Pointsश्री सम्प्रदाय-

  • अन्य नाम- रामानंदी सम्प्रदाय
  • सिद्धांत- विशिष्टाद्वैतवाद
  • मुख्य आचार्य-
  • रंगनाथ मुनि
  • पुण्डरीकाक्ष
  • राम मिश्र
  • यामुनाजाचार्य
  • रामानंद
  • राघवानंद
  • रामानुजाचार्य आदि।
  • इस संप्रदाय में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

ब्रह्म संप्रदाय-

  • मध्वाचार्य ने अद्वैतवाद का घोर विरोध करते हुए द्वैतवाद की स्थापना की।
  • इनके अनुसार जगत सत्य है;ईश्वर और जीव का भेद,जीव का जीव से भेद तथा जड़ का जीव से भेद वास्तविक है।
  • सभी जीव हरि के अनुत्तर है।
  • विष्णु ही ब्रह्म है।
  • वेद का समस्त तात्पर्य विष्णु ही है।

वल्लभ सम्प्रदाय-

  • अन्य नाम- रुद्र सम्प्रदाय
  • दार्शनिक मत- शुद्धाद्वैतवाद
  • प्रवर्तक- विष्णु स्वामी,वल्लभाचार्य
  • इस सम्प्रदाय में कृष्ण पूर्णानंद स्वरूप पूर्ण पुरूषोत्तम परब्रह्म हैं।
  • इनकी भक्ति पुष्टि मार्ग की है।
  • 'पुष्टि' भगवान के आग्रह या कृपा को कहा जाता है।
  • अनुयायी-
  • कुम्भनदास, सूरदास, परमानंद दास, कृष्णदास, छित स्वामी, नंददास आदि।

निम्बार्क सम्प्रदाय-

  • अन्य नाम-सनकादि सम्प्रदाय
  • दार्शनिक मत-द्वैताद्वैतवाद
  • इस सम्प्रदाय में कृष्ण के वामांग में सुशोभित राधा के स्वकीय रूप का विधान है।
  • इस सम्प्रदाय की सबसे बड़ी गद्दी राजस्थान के सलेमाबाद स्थान पर है।
  • अनुयायी-
  • श्री भट्ट,परशुराम आदि।

Important Pointsरामानुजाचार्य-

  • इन्हें दक्षिण में 'विष्णु का अवतार' माना जाता है।
  • इनके अनुसार-
  • ईश्वर और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है।
  • ईश्वर के सगुण रूप की उपासना की है।
  • सत्, चित् और आनंद उसके गुण है।
  • आत्मा और जगत ईश्वर के अंश है।

मध्वाचार्य-

  • इनका जन्म दक्षिण भारत के बेलिग्राम नामक स्थान पर हुआ था।
  • दार्शनिक मत-द्वैतवाद
  • तत्ववाद के प्रवर्तक है।

विष्णुस्वामी-

  • जन्म-1300 ई.
  • सम्प्रदाय-रुद्र सम्प्रदाय
  • सिद्धांत-शुद्धाद्वैतवाद

निम्बार्काचार्य-

  • जन्म- 1250 ई.
  • वैष्णव सम्प्रदाय के प्रवर्तक व इसे निम्बार्क संप्रदाय भी कहा जाता है।

Additional Informationविशिष्टाद्वैतवाद-

  • इसके अनुसार यद्यपि जगत् और जीवात्मा दोनों कार्यतः ब्रह्म से भिन्न हैं फिर भी वे ब्रह्म से ही उदभूत हैं और ब्रह्म से उसका उसी प्रकार का संबंध है जैसा कि किरणों का सूर्य से है, अतः ब्रह्म एक होने पर भी अनेक हैं।

द्वैतवाद-

  • इस दर्शन के अनुसार प्रकृति, जीव तथा परमात्मा तीनों का अस्तित्त्व मान्य है।
  • द्वैतवादियों का मानना है कि विश्व में तीन चीजों का अस्तित्व है : ईश्वर, प्रकृति तथा जीवात्मा।
  • ईश्वर, प्रकृति तथा जीवात्मा तीनों ही नित्य हैं परन्तु प्रकृति और जीवात्मा में परिवर्तन होते रहते हैं जबकि ईश्वर में कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात् वो शाश्वत है।
  • द्वैतवादी मानते हैं कि ईश्वर सगुण है अर्थात् उसमे गुण विद्यमान हैं, जैसे दयालुता, न्याय, शक्ति इत्यादि।

​शुद्धाद्वैतवाद-

  • यह एक वैष्णव सम्प्रदाय है जो श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करता है।
  • शुद्धाद्वैत मत में माया सम्बन्धरहित नितान्त शुद्ध ब्रह्म को जगत् का कारण माना जाता है।
  • इनके मार्ग को पुष्टि मार्ग कहा जाता है।
  • बल्लभाचार्य विष्णु स्वामी के शिष्य थे। उनके बाद इन्होंने ही इस मार्ग को आगे बढ़ाया।

द्वैताद्वैतवाद-

  • इस सम्प्रदाय को हंस सम्प्रदाय, कुमार सम्प्रदाय और निम्बार्क सम्प्र्दक भी कहा जाता है।
  • उनके दर्शन को भेदाभेदवाद (भेद+अभेद वाद) भी कहते हैं। ईश्वर, जीव व जगत् के मध्य भेदाभेद सिद्ध करते हुए द्वैत व अद्वैत दोनों की समान रूप से प्रतिष्ठा करना ही निम्बार्क दर्शन (द्वैताद्वैत) की प्रमुख विशेषता है।
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निम्नलिखित निबंधों को कालक्रमानुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(A) त्रिधारा 

(B) गँवई गंध गुलाब 

(C) आम रास्ता नहीं है

(D) उठ जाग मुसाफिर

(E) जीवन अज्ञात का गणित है 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    (A), (B), (C), (D), (E)

  2. ((b))

    (A), (C), (D), (E), (B)

  3. ((c))

    (B), (C), (E), (A), (D)

  4. ((d))

    (B), (E), (C), (A), (D)

Show Answer
Answer: ((a))

(A), (B), (C), (D), (E)

निबंधों को कालक्रमानुसार सही आरोही क्रम है-

  • (A) त्रिधारा
  • (B) गँवई गंध गुलाब
  • (C) आम रास्ता नहीं है
  • (D) उठ जाग मुसाफिर
  • (E) जीवन अज्ञात का गणित है ​

उपर्युक्त सभी निबंध विवेकी राय द्वारा रचित है। 

Key Pointsविवेकी राय-

  • जन्म-1924-2016 ई.
  • निबंध-
  • किसानों का देश (1956 ई.)
  • गांवों की दुनिया(1957 ई.)
  • त्रिधारा(1958 ई.)
  • फिर बैतलवा डाल पर (1962 ई.)
  • गँवई गंध गुलाब(1980 ई.)
  • आम रास्ता नहीं है (1988 ई.)
  • आस्था और चिंतन(1991 ई.)
  • जगत तपोवन सो कियो(1995 ई.)
  • जीवन अज्ञात का गणित है (2004 ई.)
  • उठ जाग मुसाफिर(2012 ई.)आदि।

Additional Information

  • 'चली फगुनहट बौरे आम' ललित निबंध है। यह धर्मयुग पत्रिका के होली अंक में 1975 ई. में प्रकाशित हुआ था।
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रस की निष्पत्ति मूल ऐतिहासिक पात्रों में ही संभव है। यह निम्नलिखित में से किसका मानना था?

  1. ((a))

    भट्ट लोल्लट

  2. ((b))

    भट्ट नायक

  3. ((c))

    शंकुक

  4. ((d))

    अभिनवगुप्त

Show Answer
Answer: ((a))

भट्ट लोल्लट

रस की निष्पत्ति मूल ऐतिहासिक पात्रों में ही संभव है। यह भट्ट लोल्लट का मानना था। 

भट्टलोल्लट का उत्पत्तिवाद-

  • इनके सिद्धांत को आरोपवाद भी कहा जाता है।
  • इनके अनुसार स्थायी भाव अनुपचित होता है, किन्तु वह विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से उपचित हो जाता है।
  • स्थायी भाव का विभाव के साथ 'उत्पाद्य-उत्पादक संबंध', अनुभाव के साथ 'गम्य-गमक संबंध' और संचारी भाव के साथ 'पोष्य-पोषक संबंध' माना है।

Key Pointsरस निष्पत्ति-

  • अर्थ-काव्य आस्वाद की प्रक्रिया।
  • रस की सर्वप्रथम व्याख्या भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र में मिलती है।
  • रस सिद्धांत-
  • "विभावानुभाव संचारीभाव संयोगद्रस निष्पति:"
  • विभाव, अनिभाव और व्यभिचारी भावों के संयोग से हि रस की निष्पत्ति होती है।

Important Pointsभट्ट नायक -

  • भट्ट नायक ने भरतमुनि के रस सूत्र की व्याख्या भुक्तिवाद या भोगवाद के रूप में की।
  • सर्वप्रथम साधारणीकरण का सूत्रपात इन्होंने किया।
  • काव्य में रस निष्पत्ति के तीन व्यापार माने-
  • अभिधा
  • भावकत्व
  • भोजकत्व
  • इन्होंने भावकत्व व्यापार को 'निज-मोह-संकटता-निवारण' भी कहा है।
  • साधारणीकरण को रस स्वाद से पहले की प्रक्रिया कहा है।

आचार्य शंकुक का अनुमितिवाद-

  • इन्होंने रस और विभावादि के बीच 'अनुमाप्य-अनुमापक' अम्बन्ध माना है।
  • सामाजिक अपनी वासना से नट पर रामादि का अनुमान करते हुए उस रस को प्राप्त करता है जिसे स्वयं रामादि ने प्राप्त किया होगा।
  • इन्होंने अनुमान की विलक्षणता के प्रतिपादन के लिए 'चित्र-तुरंग-न्याय' का आश्रय लिया है।

अभिनवगुप्त का अभिव्यक्तिवाद-

  • इनके अनुसार स्थायी भाव व्यंग्य है और विभावादि व्यंजक।
  • इनके संयोग से रस की अभिव्यक्ति होती है।
  • स्थायी भाव हृदय में वासना के रूप में हमेशा होते हैं।
  • वे रति आदि स्थायी भाव हि साधरणीकृत' विभावादि के द्वारा व्यंजित होकर शृंगार आदि रस के रूप में अभिव्यक्त हो जाते है।

Additional Informationभरतमुनि के रस सूत्र की विभिन्न व्याख्या-

आचार्यदर्शनव्याख्यानिष्पत्ति
भट्ट लोल्लटमीमांसाउत्पत्तिवादउत्पत्ति
शंकुकन्यायअनुमितिवादअनुमिति
भट्ट नायकसांख्यभुक्तिवादभुक्ति
अभिनवगुप्तशैवअभिव्यक्तिवादअभिव्यक्ति
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'शिवशंभु के चिट्ठे' से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए:

A. 'शिवशंभु शर्मा' एक कल्पित चरित्र है।

B. 'श्रीमान् का स्वागत' में शिवशंभु लार्ड मिंटो के बारे में लिखते हैं।

C. इन निबंधों में वे व्यंग्य-विनोद भाव का बड़ी सहजता से प्रयोग करते हैं।

D. ‘बनाम लार्ड कर्जन' नामक चिठ्ठे का प्रकाशन वर्ष 1901 है।

E. शिवशंभु अपने को वायसराय के समक्ष 'गूंगी प्रजा का एक वकील' (एक दुराशा) मानता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. ((a))

    केवल (A), (B), (D)

  2. ((b))

    केवल (A), (C), (E)

  3. ((c))

    केवल (B), (C), (E)

  4. ((d))

    केवल (B), (D), (E)

Show Answer
Answer: ((b))

केवल (A), (C), (E)

'शिवशंभु के चिट्ठे' से संबंधित सही कथन हैं-

  • A. 'शिवशंभु शर्मा' एक कल्पित चरित्र है।
  • C. इन निबंधों में वे व्यंग्य-विनोद भाव का बड़ी सहजता से प्रयोग करते हैं।
  • E. शिवशंभु अपने को वायसराय के समक्ष 'गूंगी प्रजा का एक वकील' (एक दुराशा) मानता है।

Key Pointsशिवशंभु के चिट्ठे-

  • रचनाकार-बालमुकुन्द गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष- 1904-1905 ई.
  • विधा- निबन्ध
  • विषय-
  • यह निबन्ध 'भारत मित्र' पत्रिका में प्रकाशित हुए थे।
  • इनमें तत्कालीन गवर्नर जर्नल लार्ड कर्जन पर व्यंग किया गया है।
  • मुख्य-
  • 'श्रीमान् का स्वागत' में शिवशंभु लार्ड कर्जन के बारे में लिखते हैं।
  • ‘बनाम लार्ड कर्जन' नामक चिठ्ठे का प्रकाशन वर्ष 1904 ई. में हुआ है।

Important Pointsबालमुकुन्द गुप्त-

  • जन्म-1865-1907 ई.
  • द्विवेदी युगीन प्रमुख निबंधकार थे।
  • इनके निबन्धों की आत्मा भारतेंदु युगीन थी और शरीर द्विवेदी युगीन।
  • रचनाएँ-
  • शिवशम्भु के चिट्ठे, चिट्ठे औए खत आदि।

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