'बीजक' में संकलित रमेनियाँ किस छंद में लिखी गयीं हैं:
- ((a))
कड़वक
- ((b))
सोरठा
- ((c))
चौपाई
- ((d))
दोहा
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चौपाई
'बीजक' में संकलित रमेनियाँ चौपाई छंद में लिखी गयीं हैं

Key Pointsचौपाई-
- चार चरण
- 16-16 मात्राएं
- अंत में गुरु
- सम छंद का एक भेद
- चौपाई छंद में अंतिम दो वर्ण की मात्राएं ( 21) नहीं होती है।
- चौपाई छंद में चरण के अन्त में जगण ( 112 ) अथवा
- तगण ( 211 ) नहीं होना चाहिए।
- उदाहरण-
- बिनु पग चले सुने बिनु काना।
कर बिनु कर्म करे विधि नाना ।।
तनु बिनु परस नयन बिनु देखा।
गहे घ्राण बिनु वास असेखा ॥

Important Points
कबीर-
- जन्म-1398-1518 ई.
- गुरु-रामानंद
- ये सिकन्दर लोदी के समकालीन थे।
- भाषा-सधुक्कड़ी
- कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने बीजक(1464 ई.) नाम से किया था।
- इसके तीन भाग हैं- रमैनी,सबद और साखी।
- हजारीप्रसाद द्विवेदी-
- "भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।"

Additional Informationदोहा छंद-
- दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद है।
- यह दो पंक्ति का होता है इसमें चार चरण माने जाते हैं।
- इसके विषम चरणों प्रथम तथा तृतीय में 13-13 मात्राएँ और सम चरणों द्वितीय तथा चतुर्थ में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
- उदाहरण-
- बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं,फल लागैं अति दूर।।
सोरठा-
- सोरठा छंद अर्धसममात्रिक छंद हैं, सोरठा छंद के प्रथम और तृतीय चरणों में 11-11 मात्राएं होती हैं।
- और दूसरे और चौथे चरणों में 13-13 मत्राएं होती हैं।
- उदाहरण-
- कुंद इंदु सम देह , उमा रमन करुनायतन ।
जाहि दीन पर नेह , करहु कृपा मर्दन मयन ॥ (तुलसीदास जी)
कड़वक-
- चरित काव्यों में प्रत्येक आठ- आठ पंक्ति के बाद एक धत्ता होता है जिसे कड़वक छंद कहा जाता है।