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UGC NET Paper 2: Hindi 29th June 2025 Shift 1 (Previous Year Paper)

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Question 1

'बीजक' में संकलित रमेनियाँ किस छंद में लिखी गयीं हैं:

  1. AOption (a)

    कड़वक

  2. BOption (b)

    सोरठा

  3. COption (c)

    चौपाई

  4. DOption (d)

    दोहा

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Correct answer

Answer: (c)C.

चौपाई

Why this answer is correct

'बीजक' में संकलित रमेनियाँ चौपाई छंद में लिखी गयीं हैं

Key Pointsचौपाई-

  • चार चरण
  • 16-16 मात्राएं
  • अंत में गुरु
  • सम छंद का एक  भेद
  • चौपाई छंद में अंतिम दो वर्ण की मात्राएं ( 21) नहीं होती है।
  • चौपाई छंद में चरण के अन्त में जगण ( 112 )  अथवा
  • तगण ( 211 )  नहीं होना चाहिए।
  • उदाहरण-
  • बिनु पग चले सुने बिनु काना।

कर बिनु कर्म करे विधि नाना ।।

तनु बिनु परस नयन बिनु देखा।

गहे घ्राण बिनु वास असेखा ॥

Important Points

कबीर-

  • जन्म-1398-1518 ई.
  • गुरु-रामानंद
  • ये सिकन्दर लोदी के समकालीन थे।
  • भाषा-सधुक्कड़ी
  • कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने बीजक(1464 ई.) नाम से किया था।  
  • इसके तीन भाग हैं- रमैनी,सबद और साखी।
  • ​हजारीप्रसाद द्विवेदी-
  • "भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।"

Additional Informationदोहा छंद-

  • दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद है।
  • यह दो पंक्ति का होता है इसमें चार चरण माने जाते हैं।
  • इसके विषम चरणों प्रथम तथा तृतीय में 13-13 मात्राएँ और सम चरणों द्वितीय तथा चतुर्थ में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
  • उदाहरण-
  • बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं,फल लागैं अति दूर।।

सोरठा-

  • सोरठा छंद अर्धसममात्रिक छंद हैं, सोरठा छंद के प्रथम और तृतीय चरणों में 11-11 मात्राएं होती हैं।
  • और दूसरे और चौथे चरणों में 13-13 मत्राएं होती हैं।
  • उदाहरण-
  • कुंद इंदु सम देह , उमा रमन करुनायतन ।

जाहि दीन पर नेह , करहु कृपा मर्दन मयन ॥ (तुलसीदास जी)

कड़वक-

  • चरित काव्यों में प्रत्येक आठ- आठ पंक्ति के बाद एक धत्ता होता है जिसे कड़वक छंद कहा जाता है।

Question 2

'स्त्री आन्दोलन से सम्बंधित निम्नलिखित में से कौन-से सत्य कथन हैं?

A. संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1848 ई में ही नारी मताधिकार को वैधता प्रदान की।

B. 1946 में नारी की दशा पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने विश्व भर की महिलाओं के लिए समान राजनीतिक,आर्थिक और शैक्षिक अधिकार दिलाने के लिए एक आयोग का गठन किया।

C. बेट्टी फ्राइडन कृत 'द फेमिनिन मिस्टिक' अमेरिकी नारीवाद की महत्वपूर्ण पुस्तक है। 

D. केट मिलट की पुस्तक 'द फिमेल यूनक स्त्री आन्दोलन का लैंगिक पाठ है।

E. सुशान बेसनेट की पुस्तक सेक्सुअल पॉलिटिक्स' ने स्त्री आन्दोलन को अतिवादी रूप दिया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    केवल A, B और C

  2. BOption (b)

    केवल A, D और E

  3. COption (c)

    केवल D और E

  4. DOption (d)

    केवल C और B

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल C और B

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल C और B

Key Points'स्त्री आन्दोलन से सम्बंधित सत्य कथन हैं-

  • B. 1946 में नारी की दशा पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने विश्व भर की महिलाओं के लिए समान राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक अधिकार दिलाने के लिए एक आयोग का गठन किया - सत्य
  • ​संयुक्त राष्ट्र ने 1946 में महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) की स्थापना की।
  • C. बेट्टी फ्राइडन कृत 'द फेमिनिन मिस्टिक' अमेरिकी नारीवाद की महत्वपूर्ण पुस्तक है - सत्य
  • ​यह पुस्तक 1963 में प्रकाशित हुई और नारीवाद में मील का पत्थर मानी जाती है।

Additional Information

  • A. संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1848 ई में ही नारी मताधिकार को वैधता प्रदान की - असत्य
  • ​नारी मताधिकार को 1920 में 19वें संशोधन द्वारा वैधता मिली।
  • D. केट मिलट की पुस्तक 'द फिमेल यूनक' स्त्री आंदोलन का लैंगिक पाठ है - असत्य
  • ​सही शीर्षक 'सेक्सुअल पॉलिटिक्स' है, और यह लैंगिक सिद्धांत पर आधारित है, न कि केवल लैंगिक पाठ।
  • E. सुशान बेसनेट की पुस्तक 'सेक्सुअल पॉलिटिक्स' ने स्त्री आंदोलन को अतिवादी रूप दिया - असत्य
  • ​यह पुस्तक केट मिलेट द्वारा लिखी गई थी, और यह अतिवाद का कारण नहीं, बल्कि विश्लेषण थी।

Important Points

  • स्त्री विमर्श उस साहित्यिक आंदोलन को कहा जाता है जिसमें स्त्री अस्मिता को केंद्र में रखकर संगठित रूप से स्त्री साहित्य की रचना की गई।
  • हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श अन्य अस्म���तामूलक विमर्शों के भांति हीं मुख्य विमर्श रहा है जो की लिंग विमर्श पर आधारित है।
  • स्त्री विमर्श को अंग्रेजी में फेमिनिज्म कहा गया है।
  • यह राजनीतिक अवधारणा के रूप में  20वीं शताब्दीमें उभरा।
  • महिला आंदोलन और उससे जुड़ा स्त्री मुक्ति का प्रश्न भी एक आधुनिक परिघटना है।
  • संगठित नारीवादी आंदोलन की शुरुआत फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हुई जब स्त्रियों द्वारा समस्त राजनीतिक एवं सार्वजनिक कार्यवाहियों में खुल कर हिस्सा लिया गया।

Question 3

किस विचारक का सम्बन्ध रुसी रूपवाद से नहीं है: 

  1. AOption (a)

    एफ आर लेविस

  2. BOption (b)

    रोमन जेकोब्सन 

  3. COption (c)

    विक्टर श्लोवस्की

  4. DOption (d)

    बोरिस एकेनबाम

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Correct answer

Answer: (a)A.

एफ आर लेविस

Why this answer is correct

एफ आर लेविस विचारक का सम्बन्ध रुसी रूपवाद से नहीं है। 

Key Pointsएफ. आर. लीविस-

  • जन्म-1895-1978 ई.
  • पाश्चात्य समीक्षक है।
  • रचनाएं-
  • न्यू बेयरिंग्स इन इंग्लिश पोएट्री(1932 ई.)
  • दि ग्रेट ट्रडिशन(1948 ई.)
  • दि कॉमन परसूट(1952 ई.) आदि।

Important Points

  • रूपवाद (अंग्रेज़ी: Formalism) किसी ग्रन्थ की भाषिक संरचना पर केंद्रित साहित्यिक आलोचना और साहित्य सिद्धान्त की एक पद्धति है।
  • रूसी रूपवाद प्राथमिक रूप से 1916 ई. में बोरिस ईकेन बॉम, विक्टर श्कलोवस्की तथा यूरी तान्यनोव द्वारा सेंट पीटर्सबर्ग और फिर पेट्रोग्राद में स्थापित काव्य भाषा अध्ययन समुदाय के कार्यों को कहा जाता है।
  • इसमें 1914 ई. में रोमन जैकोब्सन द्वारा स्थापित द मॉस्को लिंग्विस्टिक सर्कल के कार्य भी शामिल किए जाते हैं।
  • रूपवादी साहित्यिक आलोचना आगे चलकर दो धाराओं में विकसित हुई-
  • रूसी रूपवाद
  • आंग्ल अमेरिकी नई समीक्षा में

Additional Information 

  • रूपवाद का आरंभ प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान रूस में हुआ। इसके 2 मुख्य केंद्र थे- पहला मॉस्को और दूसरा सेंट पीटर्सबर्ग।
  • मॉस्को में यह 1915 में शुरु हुआ।
  • सेंट पीटर्सबर्ग में इसकी शुरुआत अगले वर्ष 1916 से मानी जाती है।
  • इसका लक्ष्य “साहित्य का एक ऐसा विज्ञान जो स्वतंत्र और तथ्यपरक दोनों होगा” जिसे कभी कभी काव्यशास्त्र कहकर भी संबोधित किया जाता है पैदा करना है।
  • भाषाविज्ञान साहित्य के विज्ञान का आधारभूत तत्व होगा।

Question 4

बालमुकुन्द गुप्त द्वारा रचित 'शिवशम्भू के चिट्ठे' में उल्लिखित निम्नलिखित चिट्ठों का सही क्रम क्या है?

A. बनाम लार्ड कर्जन

B. बंग विच्छेद

C. वैसराय का कर्तव्य

D. सर सैय्यद अहमद का खत

E. लार्ड मिन्टो का स्वागत

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    B, A, C, D, E 

  2. BOption (b)

    A, C, B, E, D

  3. COption (c)

    C, B, E, A, D

  4. DOption (d)

    A, D, C, B, E

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Correct answer

Answer: (b)B.

A, C, B, E, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A, C, B, E, D

Key Pointsचिट्ठे व खत -

  • बनाम लार्ड कर्जन (1903 ई.)
  • श्रीमान का स्वागत (1904 ई.)
  • वैसराय का कर्तव्य (1904 ई.)
  • पीछे मत फेंकिए (1905 ई.)
  • आशा का अंत (1905 ई.)
  • एक दुर्दशा (1905 ई.)
  • विदाई-संभाषण (1905 ई.)
  • बंग विच्छेद (1905 ई.)
  • लार्ड मंटो का स्वागत
  • मार्ली साहब के नाम
  • आशीर्वाद
  • शाइस्ताखां का खत - 1
  • शाइस्ताखां का खत - 2
  • सर सैय्यद अहमद का खत

Important Pointsबालमुकुन्द गुप्त-

  • जन्म-1865-1907 ई.
  • ये हिन्दी के निबंधकार और पत्रकार थे।
  • प्रमुख रचनाएँ हैं-
  • हरिदास
  • खिलौना
  • खेलतमाशा
  • स्फुट कविता
  • सन्निपात चिकित्सा आदि।

Additional Informationशिव शंभू के चिट्ठे –

  • रचयिता - बालमुकुंद गुप्त
  • रचनाकाल - 1904-1905 ई. 'भारत मित्र' पत्रिका में।
  • विधा – निबंध
  • अन्य निबंध - चिट्ठे और खत
  • 'शिव शंभू का चिट्ठा' निबंध उन्होंने तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड कर्जन को संबोधित करके लिखा है।
  • इस निबंध को लिखने की प्रेरणा उन्हें लाला लाजपत राय के उर्दू पत्रिका 'कोहिनूर' में छपे राधा कृष्ण के चिट्ठे से मिली।
  • इनके निबंध गुप्त निबंधावली शीर्षक से प्रकाशित है।

Question 5

किस छायावादी रचनाकार ने अपनी कविता के सन्दर्भ में यह कहा है - 'फूलों को खिला देना तो मेरे हाथ में नहीं था, न मैं उन्हें मुरझाने से रोक सकती थी,किन्तु दीपकों को बुझाना जलाना तो मेरे हाथ में था। 

  1. AOption (a)

    महादेवी वर्मा

  2. BOption (b)

    जयशंकर प्रसाद

  3. COption (c)

    सुमित्रानंदन पन्त

  4. DOption (d)

    सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

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Correct answer

Answer: (a)A.

महादेवी वर्मा

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - महादेवी वर्मा

Key Pointsमहादेवी वर्मा -

  • जन्म-1907-1987 ई.
  • छायावाद की प्रसिद्ध कवियित्री है।
  • 'यामा' काव्य कृति के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त है।
  • उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का भारत भारती पुरस्कार भी इन्हें मिला है।
  • कविता संग्रह -
  • ​निहार (1930 ई.)
  • रश्मि (1932 ई.)
  • सांध्यगीत (1936 ई.)
  • दीपशिखा (1942 ई.)
  • प्रथम आयाम (1974 ई.)
  • अग्निरेखा (1990 ई.)

Important Pointsजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • बाल्य नाम-झारखंडी
  • छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • रचनाएँ-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेमपथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।

सुमित्रानंदन पंत-

  • जन्म-1900-1977 ई.
  • छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ है।
  • काव्य रचनाएँ-
  • छायावादी-
  • ग्रंथि(1920 ई.)
  • पल्लव(1926 ई.)
  • वीणा(1927 ई.)
  • गुंजन(1932 ई.)
  • प्रगतिवादी-
  • युगान्त(1936 ई.)
  • युगवाणी(1939 ई.)
  • ग्राम्या(1940 ई.)
  • अरविन्द दर्शन से प्रभावित-
  • स्वर्ण किरण(1947 ई.)
  • स्वर्णधूलि(1947 ई.)
  • युगांतर(1948 ई.)
  • युगपथ(1949 ई.)
  • नवमानवतावादी-
  • उत्तरा(1949 ई.)
  • रजतशिखर(1952 ई.)
  • शिल्पी(1952 ई.)
  • अतिमा(1955 ई.)
  • कला और बूढ़ा चाँद(1959 ई.)
  • लोकायतन(1964 ई.) आदि।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'-

  • जन्म-1896-1961 ई.

  • छायावाद के चार स्तंभों में से एक है।

  • प्रमुख काव्य रचनाएं:

  • जूही की कली (1916)

  • अनामिका(1923)

  • परिमल(1929)

  • गीतिका(1936)

  • राम की शक्ति पूजा(1936)

  • सरोज स्मृति(1935)

  • कुकुरमुत्ता(1942)

  • अणिमा(1942)

  • संध्या काकली (1969)

Question 6

विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित 'आवारा मसीहा' के संदर्भ में कौन सा एक कथन असत्य है ?

  1. AOption (a)

    यह शरतचंद्र चटर्जी की जीवनी है।

  2. BOption (b)

    आवारा मसीहा के प्रथम संस्करण का प्रकाशन 1974 में हुआ था।

  3. COption (c)

    विष्णु प्रभाकर को आवारा मसीहा के लेखन में 14 वर्ष लगे थे।

  4. DOption (d)

    पर्वों का क्रम - 'दिशा की खोज' - 'दिशाहारा- 'दिशांत', है ।

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Correct answer

Answer: (d)D.

पर्वों का क्रम - 'दिशा की खोज' - 'दिशाहारा- 'दिशांत', है ।

Why this answer is correct

विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित 'आवारा मसीहा' के संदर्भ में कथन असत्य है- पर्वों का क्रम - 'दिशा की खोज' - 'दिशाहारा- 'दिशांत' है।

Key Pointsआवारा मसीहा-

  • रचनाकार-विष्णु प्रभाकर
  • विधा: जीवनी
  • प्रकाशन वर्ष-1974ई.
  • पात्र-
  • ​शरतचन्द्र
  • केदारनाथ(नाना)
  • मोतीलाल(पिता)
  • भुवनमोहिनी(माता)
  • सुरेन्द्रनाथ(मामा)आदि।
  • विषय-
  • प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।
  • यह जीवन चरित्र न केवल बहुत विस्तार से उन पर प्रकाश डालता है अपितु उनके जीवन के कई अज्ञात पहलुओं को भी उजागर करता है।
  • तीन खंडों में विभक्त-
  • प्रथम पर्व- 'दिशाहारा'
  • द्वितीय पर्व- 'दिशा की खोज'
  • तृतीय पर्व- 'दिशांत'

Important Pointsविष्णु प्रभाकर-

  • जन्म-1912-2009ई.
  • विष्णु प्रभाकर हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक थे इन्होने अनेकों लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक तथा यात्रा संस्मरण लिखे।
  • उनकी कृतियों में देशप्रेम, राष्ट्रवाद, तथा सामाजिक विकास मुख्य भाव हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-(उपन्यास)
  • ​ढलती रात
  • स्वप्नमयी
  • अर्धनारीश्वर
  • धरती अब भी घूम रही है
  • क्षमादान, दो मित्र
  • पाप का घड़ा
  • होरी आदि।

Question 7

निम्नलिखित काव्य-कृतियों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. परिमल

B. भारत-भारती

C. अकाल में सारस

D. पहाड़ पर लालटेन

E. उर्वशी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    A, E, D, B, C

  2. BOption (b)

    B, C, E, A, D

  3. COption (c)

    D, C, E, A, B

  4. DOption (d)

    B, A, E, C, D

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Correct answer

Answer: (d)D.

B, A, E, C, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- B, A, E, C, D

Key Points

रचनाप्रकाशन वर्षरचनाकार
भारत-भारती1912 ई.मैथिलीशरण गुप्त
परिमल1930 ई.सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
उर्वशी1961रामधारी सिंह 'दिनकर'
अकाल में सारस1988केदारनाथ सिंह
पहाड़ पर लालटेन1981मंगलेश डबराल

Important Pointsभारत भारती-

  • रचनाकार- मैथिलीशरण गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष- 1912 ई.
  • इसकी रचना 'मुसद्दसे-हाली' तथा ब्रजमोहन दत्तात्रेय कैफी कृत 'भारत-दर्पण' की प्रेरणा स्वरूप मानी जाती है।
  • इसकी कथा वस्तु तीन भागों में विभक्त हैं-
  • अतीत खंड
  • वर्तमान खंड
  • भविष्यत खंड

उर्वशी-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • प्रकाशन वर्ष-1961 ई.
  • यह पाँच अंकों में विभक्त है।
  • विधा- काव्य नाटक
  • विषय-
  • इसमें पुरुरवा और उर्वशी की कथा वर्णित है।

Additional Informationरामधारी सिंह 'दिनकर'-

  • जन्म- 1908-1974 ई.
  • हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक, कवि एवं निबंधकार थे।
  • 'राष्ट्रकवि दिनकर' आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।
  • काव्य संग्रह-
  • रेणुका (1935 ई.)
  • इतिहास के आँसू (1951 ई.)
  • नीम के पत्ते (1954 ई.)
  • सूरज का ब्याह (1955 ई.)
  • परशुराम की प्रतीक्षा (1963 ई.)
  • आत्मा की आँखें (1964 ई.)

मैथिलीशरण गुप्त-

  • जन्म-1886-1964 ई.
  • ब्रजभाषा उपनाम-रसिकेन्द्र
  • बांग्ला भाषा उपनाम-मधुप
  • महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी।
  • रचनाएँ-
  • रंग में भंग(1909 ई.)
  • जयद्रथ वध(1910 ई.)
  • भारत-भारती(1912 ई.)
  • किसान(1917 ई.)
  • विकट भट(1929 ई.)
  • झंकार(1929 ई.)
  • द्वापर(1936 ई.) आदि।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'-

  • जन्म-1871-1951ई.
  • मुख्य रचनाएँ-
  • अनामिका(1923ई.)
  • परिमल(1930ई.)
  • गीतिका(1936ई.)
  • तुलसीदास(1939ई.)
  • कुकुरमुत्ता(1942ई.)
  • अणिमा(1943ई.)
  • बेला(1946ई.)
  • नए पत्ते(1946ई.) आदि।

केदारनाथ सिंह-

  • जन्म-1934-2018 ई.
  • तीसरा सप्तक के महत्तवपूर्ण कवि है।
  • रचनाएँ-
  • अभी बिल्कुल अभी (1960 ई.)
  • जमीन पक रही है(1980 ई.)
  • यहाँ से देखो(1983 ई.)
  • बाघ(1996 ई.)
  • अकाल में सारस(1988 ई.)
  • उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ(1995 ई.)
  • तालस्ताय और साइकिल(2005 ई.) आदि।

मंगलेश डबराल-

  • जन्म- 1948 ई.
  • काव्य रचनाएं-
  • पहाड़ पर लालटेन (1981)
  • घर का रास्ता (1988)
  • हम जो देखते हैं (1995)
  • आवाज़ भी एक जगह है (2000)
  • नए युग में शत्रु' (2013)
  • घर का रास्ता' (2017)
  • स्मृति एक दूसरा समय है' (2020) आदि।

Question 8

बिहारी के सन्दर्भ में यह कथन किसने कहा है- बिहारी का काव्य हृदय में किसी ऐसी लय या संगीत का संचार नहीं करता जिसकी स्वरधारा कुछ काल तक गूंजती रहे।'

  1. AOption (a)

    डॉ नगेन्द्र

  2. BOption (b)

    विश्वनाथ प्रसाद मिश्र

  3. COption (c)

    आचार्य रामचंद्र शुक्ल

  4. DOption (d)

    गणपति चन्द्र गुप्त

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Correct answer

Answer: (c)C.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

Why this answer is correct

सही उत्तर है- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

Key Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • गोस्वामी तुलसीदास(1923 ई.)
  • जायसी ग्रंथावली(1924 ई.)
  • भ्रमरगीत सार(1925 ई.)
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास(1929 ई.) आदि।

Important Pointsबिहारी-

  • जन्म-1595-1663 ई.
  • ये रीतिकाल की रीतिसिद्ध शाखा के प्रमुख कवि है।
  • राजा जयसिंह के दरबारी कवि थे।
  • प्रमुख रचना-
  • बिहारी सतसई- दोहा छंद में रचित मुक्तक काव्य है।
  • बिहारी को राधचरण गोस्वामी ने 'पीयूषवर्षी मेघ' कहा है।
  • बिहारी के काव्य को पद्म सिंह शर्मा ने 'शक्कर की रोटी' कहा है।

Additional Informationनगेंद्र-

  • जन्म-1915-1999 ई.
  • आलोचनात्मक ग्रन्थ-
  • सुमित्रानंदन पंत(1938 ई.)
  • साकेत:एक अध्ययन(1939 ई.)
  • रीतिकाव्य की भूमिका(1949 ई.) आदि।

विश्वनाथ प्रसाद मिश्र-

  • जन्म-1906-1982 ई.
  • भारत के महान् क्रांतिकारियों में से एक चन्द्रशेखर आज़ाद के घनिष्ट मित्र थे।
  • ये प्रख्यात साहित्यिक संस्था ‘प्रसाद परिषद’ के सभापति रहे थे।
  • रचनाएँ-
  • हिन्दी साहित्य का अतीत
  • हिन्दी का सामायिक इतिहास
  • हिन्दी नाट्य साहित्य का विकास
  • बिहारी की वाग्विभूति
  • कामांग कौमुदी आदि।

गणपति चंद्र गुप्त-  

  • जन्म- 1928 ई.
  • रचनाएँ- 
  • साहित्य - विज्ञान
  • हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास:भाग:-1 ,2 (1965 )
  • रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन
  • साहित्यिक निबन्ध
  • हिन्दी-काव्य में श्रृंगार-परम्परा
  • महाकवि बिहारी
  • महादेवी: नया मूल्याकंन

Question 9

'आत्मा का धरातल मनुष्य को ऊपर खींचता है और जेव धरातल का आकर्षण नीचे की ओर यह पंक्ति रामधारी सिंह 'दिनकर' ने अपनी किस कृति की भूमिका में लिखी है:

  1. AOption (a)

    संस्कृति के चार अध्याय

  2. BOption (b)

    रश्मिरथी

  3. COption (c)

    उर्वशी

  4. DOption (d)

    वेणुवन

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Correct answer

Answer: (c)C.

उर्वशी

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - उर्वशी 

Key Pointsउर्वशी-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • प्रकाशन वर्ष-1961 ई.
  • यह पाँच अंकों में विभक्त है।
  • विधा- काव्य नाटक
  • विषय-
  • इसमें पुरुरवा और उर्वशी की कथा वर्णित है।

Important Pointsरामधारी सिंह 'दिनकर'-

  • जन्म- 1908-1974 ई.
  • हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक, कवि एवं निबंधकार थे।
  • 'राष्ट्रकवि दिनकर' आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।
  • काव्य संग्रह-
  • रेणुका (1935 ई.)
  • इतिहास के आँसू (1951 ई.)
  • नीम के पत्ते (1954 ई.)
  • सूरज का ब्याह (1955 ई.)
  • परशुराम की प्रतीक्षा (1963 ई.)
  • आत्मा की आँखें (1964 ई.)

Additional Informationसंस्कृति के चार अध्याय -

  • रचनाकार - रामधारी सिंह दिनकर
  • प्रकाशनवर्ष - 1956 ई.
  • पुरस्कार - साहित्य अकादमी पुरस्कार (1959 ई.)।
  • मुख्य -
  • यह विचारोंतेजक पुस्तक भारत के संपूर्ण इतिहास को चार खंडो में बाटकर भारतीय संस्कृति को समझने का सार्थक प्रयास है।
  • यह चार अध्यायों में विभक्त है -
  • भारतीय जनता की रचना और हिंदू संस्कृति का अविर्भाव ( तीन प्रकरण )।
  • प्राचीनतम हिंदूत्व से विद्रोह ( सात प्रकरण )।
  • हिंदू संस्कृति और इस्लाम (बारह प्रकरण)।
  • भारतीय संस्कृति और यूरोपीय ( सतरह प्रकरण)।
  • यह पुस्तक भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को समर्पित है।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी भूमिका लिखी थी।
  • इस पुस्तक में दिन करने भारतीय संस्कृति के उन पड़ाव का जिक्र किया है जिन्होंने भारतीय संस्कृति के रूप निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वे ऐसे चार सोपान मानते हैं। 
  • आर्य आगमन
  • जैन /बौद्ध आंदोलन
  • इस्लाम का आगमन
  • यूरोप का आगमन
  • दिनकर पुस्तक को साहित्य और दर्शन का महल कहते हैं जहां इतिहास की हैसियत किराएदार की है।

रश्मिरथी-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • विधा- खण्डकाव्य
  • प्रकाशन वर्ष- 1952 ई.
  • विषय-
  • रश्मिरथी, जिसका अर्थ "सूर्यकिरण रथ का सवार" है।
  • इसमें कर्ण के चरित्र के सभी पक्षों का सजीव चित्रण किया गया है।
  • इसमें 7 सर्ग हैं।

वेणुवन-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • विधा- निबंध संग्रह
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
  • विषय-
  • जिस तरह बुद्ध का वेणुवन उनकी तप-साधना का स्थल था, यह पुस्तक 'वेणुवन' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के चिन्तन का विरल प्रतिफल है।

Question 10

"उसमें भीतर से प्रेम का एक स्वर्गीय स्वरुप झाँक रहा है केवल झाँक रहा है निर्लज्जता के साथ पुकार या कराह नहीं रहा है", कहानी 'उसने कहा था' के सम्बन्ध में यह टिप्पणी किसकी है:

  1. AOption (a)

    मधुरेश

  2. BOption (b)

    नामवर सिंह

  3. COption (c)

    विजयदेव नारायण साही

  4. DOption (d)

    रामचंद्र शुक्ल

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Correct answer

Answer: (d)D.

रामचंद्र शुक्ल

Why this answer is correct

सही उत्तर है - रामचंद्र शुक्ल

रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • आलोचनात्मक रचनाएँ-
  • गोस्वामी तुलसीदास(1923 ई.)
  • जायसी ग्रंथावली(1924 ई.)
  • भ्रमर-गीतसार(1925 ई.)
  • रस मीमांसा(1949 ई.) आदि।

Key Pointsउसने कहा था-

  • रचनाकार- चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  • प्रकाशन वर्ष- 1915 ई. में  सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित।
  • मुख्य पात्र-
  • लहना सिंह- प्रमुख पात्र,सेना का एक वीर सिपाही,वचन बद्ध व्यक्ति।
  • सूबेदारनी- नारी मुख्य पात्र,लहना सिंह की बचपन की प्रेमिका,सूबेदार की पत्नी।
  • वजीरा सिंह- सूबेदार।
  • बोधा सिंह-  सूबेदार व�� सूबेदारनी का पुत्र।
  • कीरत सिंह- लहना सिंह का मित्र।
  • विषय-
  • प्रथम विश्व-युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी है।
  • कहानी का कथानक प्रेम,त्याग और कर्तव्य निष्ठा को केंद्र में रखकर बुना गया है।
  • देशभक्ति और देशप्रेम की भावना से परिपूर्ण कहानी है।
  • पूर्वदीप्ति शैली(फ़्लैश बेक) का  प्रयोग किया गया है।

Important Pointsचंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'-

  • **जन्म-**1883-1922 ई.
  • कहानियाँ-
  • सुखमय जीवन(1911 ई.)
  • बुद्धू का काँटा(1914 ई.)
  • उसने कहा था(1915 ई.) आदि।

Additional Informationनामवर सिंह-

  • जन्म-1926-2019ई.
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • छायावाद(1955ई.)
  • इतिहास और आलोचना(1957ई.)
  • कहानी:नयी कहानी(1965ई.)
  • कविता के नये प्रतिमान(1968ई.)
  • दूसरी परंपरा की खोज(1982ई.) आदि।

विजयदेव नारायण साही-

  • जन्म-1924-1985 ई.
  • 'तीसरा सप्तक' के महत्त्वपूर्ण कवि रहे हैं।
  • आलोचनात्मक रचनाएँ-
  • साहित्य और साहित्यकार का दायित्व (1987ई.)
  • छठवाँ दशक(1987ई.)
  • साहित्य क्यों?(1988ई.)
  • वर्धमान और पतनशील(1991ई.) आदि।

मधुरेश-

  • प्रकाशित कृतियाँ-
  • आज की हिन्दी कहानी : विचार और प्रतिक्रिया - 1971
  • सिलसिला : समकालीन कहानी की पहचान - 1979
  • देवकीनन्दन खत्री -1980
  • सम्प्रति : समकालीन हिन्दी उपन्यास में संवेदना और सरोकार - 1983
  • रांगेय राघव - 1987

Question 11

निम��नलिखित में से कौन सा कथन मनोविश्लेषण से सम्बंधित है?

A. मनोविश्लेषण शब्द अंग्रेजी के Psycho-analysis का हिंदी पर्याय है।

B. इडीपस कॉम्प्लेक्स ग्रीक नायक इलेक्ट्रा के नाम पर है।

C. फ्रायड का मानना है कि मानव का छोटा से छोटा व्यवहार भी सप्रयोजन होता है।

D. एडलर के अनुसार लिबिडो अथवा कामवृत्ति का उतना महत्त्व नहीं है जितना अहम का।

E. युग ने इड, इगो और सुपर इगो की परिकल्पना प्रस्तुत की।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A और B

  2. BOption (b)

    केवल B, C और D

  3. COption (c)

    केवल A, C और D

  4. DOption (d)

    केवल C और E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C और D

Why this answer is correct

मनोविश्लेषण से सम्बंधित है- केवल A, C और D

Key Pointsमनोविश्लेषण-

  • मनोविश्लेषण मुख्यतः मानव के मानसिक क्रियाओं एवं व्यवहारों के अध्ययन से सम्बंधित है किंतु इसे समाजों के ऊपर भी लागू किया जा सकता है।
  • मनोविश्लेषण के तीन उपयोग हैं:
  • यह मस्तिष्क की परीक्षा की विधि प्रदान करता है।
  • यह मानव व्यापार से संबंधित सिद्धांतों का क्रमबद्ध समूह प्रदान करता है।
  • यह मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक रोगों की चिकित्सा के लिए उपाय सुझाता है।
  • फ्रायड मानस को तीन भागों में बांट कर देखते हैं-
  • इड यानी काम तत्व,
  • ईगो यानी अहम,
  • सुपर ईगो यानी परा-अहम।

Important Pointsमनोविश्लेषणवादी विचारक -

  • सिगमंड फ्रायड-
  • जन्म- 1856 - 1939 ई.
  • फ्रायड मानव मन की मूल परिचालक शक्ति के रूप में लिबिडो (काम भावना) को स्वीकार करता है जब सामाजिक एवं नैतिक बंधनों के कारण इसका मार्ग अवरुद्ध होता है तब कुंठा,मनोग्रंथि, अंह,उन्माद जैसे रोग उत्पन्न हो जाते।
  • एडलर-
  • जन्म- 1870 - 1937 ई.
  • मानव के मन में उत्पन्न 'हीन भावना' को मन की परिचालिका शक्ति माना है हीनता की अनुभूति मनुष्य के मन में अहम भाव को जन्म देती है और इसे परिचालित होकर वह अपने महत्व को अनुभव करने एवं कराने की आवश्यकता अनुभव करते हुए तदनुसार आचरण व्यवहार करता है।
  • जुँग या युंग-
  • जन्म- 1875 - 1961 ई.
  • उनके अनुसार मनुष्य की स्मृतियां मानसिक कार्य व्यापार को चेतन मन में एकत्रित नहीं रख पाती और अचेतन में चली जाती है वह अचेतन मन में दमित रहने वाली अनुभूतियां, स्मृतियां एवं विचार 'अह' को स्वीकार्य नहीं हो पातें परिमाणत :वहा  भय,आशंका,मृत्यु जैसी स्थितिया  उत्पन्न हो जाती है जिसे मनुष्य की जीवन प्रभावित होता है।​

Question 12

'पदमावत' के सन्दर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की निम्नलिखित टिप्पणी को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. ईश्वर न्याय करने बैठेगा और अपने अपराधों के कारण सारे प्राणी थरथर कांपेंगे

B. इसमें इस्लाम की मजहबी किताबों के अनुसार क़यामत के दिनों का लंबा चौड़ा वर्णन है

C. सारे जीव जंतु और फ़रिश्ते भी अपना जीवन समाप्त करेंगे

D. जायसी के दो ग्रंथों की अपेक्षा इसकी रचना बहुत निम्न कोटि की है 

E. किस प्रकार जल प्रलय होगा, सूर्य बहुत निकट आकर पृथ्वी को तपाएगा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    B, E, A, D, C 

  2. BOption (b)

    C, B, E, A, D

  3. COption (c)

    D, A, B, E, C

  4. DOption (d)

    D, B, E, C, А

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Correct answer

Answer: (d)D.

D, B, E, C, А

Why this answer is correct

सही उत्तर है - D, B, E, C, А

Key Points'पदमावत' के सन्दर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की टिप्पणी का सही क्रम है- 

  • जायसी के दो ग्रंथों की अपेक्षा इसकी रचना बहुत निम्न कोटि की है
  • इसमें इस्लाम की मजहबी किताबों के अनुसार क़यामत के दिनों का लंबा चौड़ा वर्णन है
  • किस प्रकार जल प्रलय होगा, सूर्य बहुत निकट आकर पृथ्वी को तपाएगा
  • सारे जीव जंतु और फ़रिश्ते भी अपना जीवन समाप्त करेंगे
  • ईश्वर न्याय करने बैठेगा और अपने अपराधों के कारण सारे प्राणी थरथर कांपेंगे

Important Pointsपद्मावत-

  • रचनाकार- जायसी
  • प्रकाशन वर्ष- 1520 ई.
  • विधा- सूफी काव्य
  • भाषा- अवधी
  • छंद- दोहा-चौपाई
  • विषय-
  • इसमें 57 खंड हैं।
  • उत्प्रेक्षा अलंकार की प्रधानता है।
  • इसमें रत्नसेन,पद्मावती और नागमती की प्रेम कहानी वर्णित है।
  • इसमें सभी पात्र प्रतीक रूप में प्रस्तुत हुए है।

Additional Informationजायसी-

  • जन्म- 1446-1542 ई.
  • पूरा नाम- मलिक मोहम्मद जायसी
  • गुरु- सूफी फकीर शेख मोहिदी
  • रचनाएँ-
  • अखरावट
  • आखिरी कलाम
  • कहरनामा
  • कान्हावत
  • चित्ररेखा आदि।

Question 13

"बालदेव" ने बावनदास की गाँधी जी वाली चिट्ठियों वाला बस्ता क्यों जला दिया ?

  1. AOption (a)

    ताकि बावनदास मिनिस्टर न बन जाएँ

  2. BOption (b)

    ताकि बावनदास गाँव का मुखिया न बन जाएँ

  3. COption (c)

    ताकि बावनदास लक्ष्मी के चित्त से उतर जाएँ

  4. DOption (d)

    ताकि गांगुली जी उससे सवाल-जवाब न करें

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Correct answer

Answer: (a)A.

ताकि बावनदास मिनिस्टर न बन जाएँ

Why this answer is correct

सही उत्तर है - ताकि बावनदास मिनिस्टर न बन जाएँ

Key Pointsमैला आँचल-

  • रचनाकार-फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954 ई.
  • विषय-
  • इसमें बिहार के पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा का वर्णन है।
  • आजाद भारत के ग्रामीण अंचल को कथा का केंद्र बनाया है।
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत
  • कमला
  • बालदेव
  • कालीचरन
  • मंगलादेवी
  • महंत सेवादास आदि।

Important Pointsफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म-1921-1977 ई.
  • आंचलिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • परती परिकथा(1957 ई.)
  • दीर्घतपा(1964 ई.)
  • जुलूस(1965 ई.)
  • कितने चौराहे(1966 ई.) आदि।

Question 14

'पिउ सौं कहेउ संदेसड़ा, हे भौरा ! हे काग !' किस कवि की पंक्ति है

  1. AOption (a)

    मीराबाई

  2. BOption (b)

    मलिक मुहम्मद जायसी

  3. COption (c)

    तुलसीदास

  4. DOption (d)

    सूरदास

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Correct answer

Answer: (b)B.

मलिक मुहम्मद जायसी

Why this answer is correct

सही उत्तर है - मलिक मुहम्मद जायसी

Key Pointsमलिक मुहम्मद जायसी-

  • ​जन्म- 1446-1542 ई.
  • भक्तिकाल की सूफी काव्यधारा के मुख्य कवि है।
  • रचनाएँ-
  • पद्मावत
  • अखरावट
  • आखिरी कलाम
  • कहरनामा
  • चित्ररेखा
  • कान्हवात आदि।

Important Pointsमीराबाई-

  • जन्म- 1516-1546 ई.
  • सोलहवीं शताब्दी की एक कृष्ण भक्त और कवयित्री थीं।
  • मीरा बाई ने कृष्ण भक्ति के स्फुट पदों की रचना की है।
  • गुरु- संत रैदास या रविदास
  • मीराबाई ने श्री कृष्ण की उपासना पति या प्रियतम रूप में की है।
  • रचनाएँ-
  • गीत गोविंद की टीका
  • नरसी जी रो मायरो
  • राग सोरठा
  • मलार राग
  • राग गोविन्द
  • सत्यभामानुरुषणं
  • मीरां की गरबी
  • रुक्मणी मंगल आदि।
  • मीराबाई की रचनाओं का संकलन ’मीराबाई की पदावली’ के रूप में उपलब्ध है।

तुलसीदास-

  • जन्म- 1532-1623 ई.
  • शिक्षा गुरु- शेष सनातन
  • दीक्षा गुरु- नरहर्यानंद
  • तुलसी पर श्री संप्रदाय का प्रभाव देखा जाता है।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • वैराग्य संदीपनी
  • जानकी मंगल
  • पार्वती मंगल
  • कृष्ण गीतवाली
  • विनय पत्रिका आदि।
  • नाभादास ने इन्हें-
  • "कलिकाल का वाल्मीकि" कहा।
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी-
  • "भारतवर्ष का लोक नायक वही हो सकता है जो समन्वय करने का अपार धैर्य लेकर आया हो।"

सूरदास-

  • जन्म- 1478-1583 ई.
  • भक्तिकाल की कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुखक कवि है।
  • रचनाएँ-
  • सूरसागर
  • सुरसरावली(1548 ई.)
  • साहित्य लहरी(1550 ई.) आदि।

Question 15

"पं. उदयशंकर भट्ट विरचित कमला" के सम्बन्ध में कौन-सा तथ्य सही नहीं है ?

  1. AOption (a)

    कमला भट्ट जी की प्रथम प्रकाशित काव्यकृति है। 

  2. BOption (b)

    यह एक सामाजिक नाटक है। 

  3. COption (c)

    इसमें किसान आंदोलन का वर्णन किया गया है।

  4. DOption (d)

    इसमें सामाजिक असामंजस्य का मार्मिक चित्रण है।

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Correct answer

Answer: (a)A.

कमला भट्ट जी की प्रथम प्रकाशित काव्यकृति है। 

Why this answer is correct

"पं. उदयशंकर भट्ट विरचित कमला" के सम्बन्ध में तथ्य सही नहीं है - कमला भट्ट जी की प्रथम प्रकाशित काव्यकृति है। 

Key Points

  • कमला भट्ट जी की प्रथम प्रकाशित काव्यकृति नहीं है।

Important Pointsउदयशंकर भट्ट-

  • समयकाल- 1898-1966 ई.
  • जन्मस्थान- उत्तर प्रदेश के इटावा में
  • काव्य रचनाएँ - 
  • ​तक्षशिला
  • राका
  • मानसी
  • विसर्जन
  • अमृत और विष
  • इत्यादि
  • युगदीप
  • यथार्थ और कल्पना
  • विजयपथ
  • अन्तर्दर्शन : तीन चित्र
  • मुझमें जो शेष है आदि
  • नाट्य साहित्य-
  • ​विक्रमादित्य
  • दाहर या सिंधपतन
  • मुक्तिपथ
  • शक विजय
  • विद्रोहिणी अम्ब आदि

Question 16

'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबन्ध के सम्बन्ध में कौन-सा एक कथन असत्य है ?

  1. AOption (a)

    निबन्धका शीर्षक लोकगीत से प्रेरित है।

  2. BOption (b)

    भारतीय सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के उदात्त एवं मार्मिक स्वरों की अभिव्यक्ति है।

  3. COption (c)

    निबंधकार ने निबन्ध में जिस मेहमान कन्या का उल्लेख किया है उसका नाम कृष्णा है।

  4. DOption (d)

    यह विद्यानिवास मिश्र का पहला ललित निबन्ध है।

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Correct answer

Answer: (d)D.

यह विद्यानिवास मिश्र का पहला ललित निबन्ध है।

Why this answer is correct

'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबन्ध के सम्बन्ध में कथन असत्य है- यह विद्यानिवास मिश्र का पहला ललित निबन्ध है।

  • विद्यानिवास मिश्र कृत पहला ललित निबंध है -  छितवन की छाँह (1953 ई.)

Key Pointsमेरे राम का मुकुट भीग रहा है -

  • रचनाकार - विद्यानिवास मिश्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1974 ई.
  • विषय - 
  • यह एक ललित निबंध ग्रंथ है।
  • इस निबंध के माध्यम से लेखक की संवेदना द्वारा लोकतंत्र वेदना का सजीव चित्रण हुआ है।

Important Pointsविद्यानिवास मिश्र-

  • जन्म - 1926-2005 ई.
  • संस्कृत के विद्वान, जाने-माने भाषाविद्, हिन्दी साहित्यकार और सफल सम्पादक (नवभारत टाइम्स) थे।
  • निबंध-
  • छितवन की छाँह (1953 ई.)
  • हल्दी धूप (1955 ई.)
  • कदम की फूली डाल (1996 ई.)
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974 ई.)
  • साहित्य के सरोकार (2007 ई.) आदि।

Question 17

निम्नलिखित में से कौन सी कृतियाँ आदिवासी विमर्श से सम्बंधित हैं:

A. जंगली फूल

B. नगाड़े की तरह बजते शब्द

C. मन मांजने की जरुरत

D. मन मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ

E. प्रमथ्यु गाथा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    केवल B, D

  2. BOption (b)

    केवल B, C, E

  3. COption (c)

    केवल A, C

  4. DOption (d)

    केवल A, B,D

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, B,D

Why this answer is correct

आदिवासी विमर्श से सम्बंधित है- केवल A, B, D

Key Points

  • A. जंगली फूल
  • B. नगाड़े की तरह बजते शब्द
  • D. मन मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ

Important Pointsजंगली फूल-

  • रचनाकार- डॉ. जोराम यालाम
  • विधा- उपन्यास
  • विषय-
  • अरुणाचल प्रदेश के 26 मुख्य आदिवासी समाजों में न्यीशी भी शामिल है।
  • न्यीशी समाज में प्रचलित लोक कथाओं में एक प्रसिद्ध पुरखे तानी (पिता) को अनेक पत्नियां रखने वाले, प्रेमविहीन, बलात्कारी और आवारा व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है जो अपनी असाधारण बल-बुद्धि का इस्तेमाल भी सिर्फ औरतें हासिल करने के लिए करता है।
  • लेखिका ने तानी की इस छवि पर सवाल उठाया है।
  • न सिर्फ सवाल उठाया है बल्कि उसकी मूल छवि और उससे जुड़े अन्य मिथकीय प्रसंगों को अपनी कल्पना से फिर से निर्मित करने का बीड़ा उठाया है।

नगाड़े की तरह बजते शब्द-

  • रचनाकार- निर्मला पुतुल
  • विधा-  काव्य
  • विषय- 
  • ​आदिवासी जीवन, विशेषकर स्त्रियों का सुख-दुःख अपनी पूरी गरिमा और ऐश्वर्य के साथ यहाँ व्यक्त हुआ है।

मन मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ-

  • रचनाकार- महुआ माझी
  • विधा- उपन्यास
  • विषय-
  • इस उपन्यास में महुआ माजी यूरेनियम की तलाश से जुड़ी जिस सम्पूर्ण प्रक्रिया को उजागर करती हैं, वह हिन्दी उपन्यास का जोखिम के इलाक़े में प्रवेश है।
  • महुआ माजी ने गहरे शोध, सर्वेक्षण और समाजशास्त्रीय दृष्टि का सहारा लेकर इस उपन्यास के माध्यम से एक ज़रूरी हस्तक्षेप किया है।
  • उपन्यास का केन्द्रीय पात्र सगेन प्रतिरोध की स्थानिकता को बरकरार रखते हुए विकिरणविरोधी वैश्विक आन्दोलन के साथ भी संवाद बनाता है।
  • हिरोशिमा की दहशत और चेरनोबिल व फुकुशिमा सरीखे हादसे उसकी चेतना को लगातार प्रतिरोधी दिशा देते हैं।

 मन मांजने की जरुरत-

  • रचनाकार- अनामिका
  • विषय-  
  • अनामिका की यह पुस्तक मिथकीय आख्यानों की सुप्रतिष्ठित नारियों की अनूठी व्याख्या ही नहीं प्रस्तुत करती, बल्कि पुरातन-मध्ययुगीन-अधुनातन स्त्री के विविध संदर्भों की विलक्षण छानबीन करती हुई स्त्री-विमर्श का एक नया ही सोपान चढ़ती है।
  • पाश्चात्य एवं प्राच्य साहित्य-संदर्भों के बीच पितृसत्ताक (पुरुष-प्रधान) समाज के लिए “मन मांझने की जरूरत” का बड़ी शिद्‌दत से अहसास भी कराती है।

प्रमथ्यु गाथा-

  • रचनाकार- धर्मवीर भारती
  • विधा- काव्य
  • विषय- 
  • ग्रीक पौराणिक कथाओं के प्रोमेथियस (Prometheus) पर आधारित है।
  • यह कविता, "प्रॉमिसियस अनबाउंड" का हिंदी रूपांतरण है।
  • इस कविता में, प्रमथ्यु (प्रोमेथियस का हिंदी नाम) को देवताओं से प्रकाश चुराकर मनुष्यों को देने के कारण पीड़ा सहनी पड़ती है, लेकिन वह अपने कार्य के प्रति दृढ़ रहता है।

Question 18

निम्नलिखित में से कौन सा कथन डॉ.शम्भुनाथ के अनुसार भारतीय नवजागरण के विभिन्न रूपों से सम्बंधित है?

A. बांग्ला नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व बुद्धिवाद है।

B. हिंदी नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व राष्ट्रवाद है (1857 कास्वाधीनता संग्राम) ।

C. महाराष्ट्र नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व ब्रिटिश राज विरोध है।

D. तमिल नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व सुधारवाद है।

E. केरल नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व बुद्धिवाद है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    केवल Aऔर B

  2. BOption (b)

    केवल C और E

  3. COption (c)

    केवल B, D और E

  4. DOption (d)

    केवल A, C और D

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल Aऔर B

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल Aऔर B

Key Pointsडॉ.शम्भुनाथ के अनुसार भारतीय नवजागरण के विभिन्न रूपों से सम्बंधित है-

  • A. बांग्ला नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व बुद्धिवाद है।
  • B. हिंदी नवजागरण का केन्द्रीय सारतत्व राष्ट्रवाद है (1857 कास्वाधीनता संग्राम)।

Important Pointsमहाराष्ट्र नवजागरण-

  • महाराष्ट्र नवजागरण का केंद्रीय तत्व ब्रिटिश राज का विरोध था, लेकिन यह केवल एक पहलू था।
  • महाराष्ट्र नवजागरण में सामाजिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक सुधारों पर भी जोर दिया गया था।

तमिल नवजागरण-

  • तमिल नवजागरण, जिसे तमिल पुनर्जागरण भी कहा जाता है, 19वीं और 20वीं सदी में तमिलनाडु में हुआ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन था।
  • इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक सुधारों को बढ़ावा देना था।

केरल नवजागरण-

  • केरल नवजागरण, जिसे "केरल पुनर्जागरण" भी कहा जाता है, 19वीं और 20वीं सदी में केरल में हुआ एक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आंदोलन था।
  • इस आंदोलन का मुख्य जोर तर्कवाद, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सुधारों पर था।
  • केरल नवजागरण के दौरान, बुद्धिवाद ने लोगों को पारंपरिक अंधविश्वासों और रीति-रिवाजों से मुक्त होने और तर्क और विज्ञान के आधार पर दुनिया को देखने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • इस आंदोलन ने शिक्षा, समानता, और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को बढ़ावा दिया।

Question 19

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I 'भारत दुर्दशा' के अंकसूची-II स्थान
A.पहला अंकI.मैदान
B.दूसरा अंकII.बीथी
C.तीसरा अंकIII.किताबखाना
D.पाँचवाँ अंकIV.श्मशान,टूटे फूटे मंदिर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  2. BOption (b)

    A-II, B-IV, C-I, D-III

  3. COption (c)

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  4. DOption (d)

    A-IV, B-II, C-I, D-III

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

A-II, B-IV, C-I, D-III

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - A-II, B-IV, C-I, D-III

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है - 

सूची-I 'भारत दुर्दशा' के अंकसूची-II स्थान
A.पहला अंकII.बीथी
B.दूसरा अंकIV.श्मशान, टूटे फूटे मंदिर
C.तीसरा अंकI.मैदान
D.पाँचवाँ अंकIII.किताबखाना

Important Pointsभारत दुर्दशा-

  • रचनाकार- भारतेन्दु
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1880ई.
  • पात्र-
  • भारत भाग्य,भारत दुर्दैव,अंधकार,डिसलॉयल्टी,मदिरा,रिपोर्टर,आलस्य आदि।
  • विषय-
  • 6 अंकों का नाट्य रासक है।
  • भारत की दुर्दशा को चित्रित किया गया है।
  • अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर व्यंग किया गया है।
  • मनोभावों का मानवीकरण किया गया है।

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-1850-1885ई.
  • हिन्दी के प्रमुख नाटककार के रूप में विख्यात है।
  • मौलिक नाटक-
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति(1873ई.)
  • चंद्रावली(1876ई.)
  • नील देवी(1881ई.)
  • सती प्रताप(1883ई.) आदि।
  • अनूदित नाटक-
  • रत्नावली(1868ई.)
  • विद्यासुंदर(1868ई.)
  • पाखंड विडंबन(1872ई.)
  • धनंजय विजय(1873ई.)
  • मुद्रा राक्षस(1878ई.) आदि।

Question 20

निम्नलिखित में से कौन-सी पत्रिका/रचना माधव प्रसाद मिश्र से सम्बन्धित नहीं है ?

  1. AOption (a)

    सुदर्शन

  2. BOption (b)

    एक टोकरी भर मिट्टी

  3. COption (c)

    सब मिट्टी हो गया

  4. DOption (d)

    वैश्योपकारक

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Correct answer

Answer: (b)B.

एक टोकरी भर मिट्टी

Why this answer is correct

माधव प्रसाद मिश्र से सम्बन्धित पत्रिका/रचना नहीं है- एक टोकरी भर मिट्टी

Key Pointsएक टोकरी भर मिट्टी-

  • रचनाकार- माधवराव सप्रे
  • प्रकाशन वर्ष- 1901 ई.
  • विधा- कहानी
  • पात्र-
  • ​जमींदार, अनाथ विधवा।
  • विषय-
  • यह एक बहुत ही छोटी और कर्तव्य श्रेष्ठ कहानी है।
  • यह कहानी आज के यथार्थ से जुड़ी हुई है।
  • यह कहानी वर्ग भेद पर आधारित है। इसमें एक गरीब के शोषण का चित्रण है।
  • इस कहानी में अहंकार और स्वार्थ का चित्रण जमींदार के रूप में किया गया है।
  • एक गरीब बुजुर्ग महिला द्वारा जमींदार का हृदय परिवर्तन होना दिखाया गया है।

Important Pointsमाधव प्रसाद मिश्र-

  • जन्म- 1971-1907 ई
  • हिन्दी के विख्यात साहित्यकार थे।
  • कुछ लोगों का विचार है कि हिन्दी के द्विवेदी युग का सही नाम माधव प्रसाद मिश्र युग होना चाहिये।
  • वे सुदर्शन नामक एक हिन्दी पत्र का सम्पादन करते थे।
  • उनका जन्म भिवानी (हरियाणा) में हुआ था।
  • रचनाएँ -
  • 'वैश्योपकारक' और 'सुदर्शन' पत्रिकाओं के संपादक।
  • सब मिट्टी हो गया (निबंध)

Question 21

नन्द किशोर आचार्य निम्नलिखित में से किस सप्तक के कवि हैं:

  1. AOption (a)

    चौथा सप्तक

  2. BOption (b)

    दूसरा सप्तक

  3. COption (c)

    तीसरा सप्तक

  4. DOption (d)

    तार सप्तक

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Correct answer

Answer: (a)A.

चौथा सप्तक

Why this answer is correct

नन्द किशोर आचार्य चौथा सप्तक के कवि है। 

Key Pointsचौथा सप्तक(1979 ई.) के कवि हैं-

  • अवधेश कुमार
  • राजकुमार कुंभज
  • स्वदेश भारती
  • नंदकिशोर आचार्य
  • सुमन राजे
  • श्रीराम वर्मा
  • राजेंद्र किशोर

Important Pointsतार सप्तक(1943 ई.) के कवि हैं-

  • गजानन माधव मुक्तिबोध
  • नेमिचन्द्र जैन
  • भारतभूषण अग्रवाल
  • प्रभाकर माचवे
  • गिरिजाकुमार माथुर
  • रामविलास शर्मा
  • अज्ञेय

दूसरा सप्तक(1951 ई.) के कवि है-

  • शमशेर बहादुर
  • भवानीप्रसाद मिश्र
  • शकुंतला माथुर
  • हरिनारायण घनश्याम व्यास
  • नरेश मेहता
  • धर्मवीर भारती
  • रघुवीर सहाय

तीसरा सप्तक(1959 ई.) के कवि हैं-

  • कुँवर नारायण
  • कीर्ति चौधरी
  • सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • मदन वात्स्यायन
  • प्रयाग नारायण त्रिपाठी
  • केदारनाथ सिंह
  • विजयदेवनरायण साही

Question 22

निम्नलिखित में से किस नाटक में 'झंडा ऊँचा रहे हमारा' तथा 'रघुपति राघव राजाराम' आदि का सृजनात्मक व्यंग्यपरक अर्थ दिया गया है?

  1. AOption (a)

    महाभोज 

  2. BOption (b)

    अंजो दीदी 

  3. COption (c)

    सिन्दूर की होली

  4. DOption (d)

    बकरी

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Correct answer

Answer: (d)D.

बकरी

Why this answer is correct

बकरी नाटक में 'झंडा ऊँचा रहे हमारा' तथा 'रघुपति राघव राजाराम' आदि का सृजनात्मक व्यंग्यपरक अर्थ दिया गया है। 

Key Pointsबकरी-

  • रचनाकार- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1974 ई.
  • पात्र-
  • नट और नटी
  • भिश्ती
  • दुर्जन सिंह
  • कर्मवीर सिंह
  • सत्यवीर
  • विपती( एक गरीब स्त्री जिसकी बकरी चोरी होती है)
  • सिपाही
  • काका – काकी
  • विषय-
  • आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है।

Important Pointsमहाभोज-

  • रचनाकार- मन्नू भण्डारी
  • प्रकाशन वर्ष- 1979 ईo
  • विधा- उपन्यास
  • मुख्य पात्र-
  • बिसेसर उर्फ बिसू (मुख्य पात्र)
  • हीरा (बिसू का पिता)
  • बिंदेश्वरी प्रसाद उर्फ बिंदा
  • रुक्मा (बिंदा की पत्नी)
  • दा साहब (मुख्यमंत्री)
  • सदाशिव अत्रे (सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष)
  • जोरावर (स्थानीय बाहुबली)
  • सुकुल बाबू (सत्ता प्रतिपक्ष)
  • लखनसिंह (सत्ताधारी पार्टी का प्रत्याशी)
  • लोचनभैया (असंतुष्ट विधायकों के मुखिया)
  • सक्सेना (पुलिस अधीक्षक)
  • दत्ता बाबू (मशाल समाचार पत्र के संपादक)
  • जमुना बहन
  • शुकुल बाबू, आदि।
  • विषय-
  • समकालीन राजनीति में मूल्यहीनता, धन और बाहुबल की प्रवृति एवं दोहरे चरित का चित्रण है।
  • चुनावी राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार का यथार्थवादी शैली में चित्रण हुआ है।
  • यह एक राजनीतिक उपन्यास है।

अंजो दीदी-

  • रचनाकार-उपेंद्र नाथ अश्क
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1955 ई.
  • पात्र-
  • अंजली / अंजो दीदी (प्रमुख पात्र, लगभग 30 वर्ष)
  • इन्द्रनारायण (अंजो के पति)
  • श्रीपत (अंजो दीदी का 27-28 वर्षीय भाई)
  • अनिमा: अंजो की सहेली
  • नीरज: अंजो का पुत्र, 11 वर्ष
  • मुन्नी: नौकरानी, 25 वर्ष
  • विषय-
  • इस नाटक में अंजो(अंजली) के माध्यम से स्त्री-पुरुष संबंधों के साठ साथ वक्त की पाबंदी वर्णित की गई है।

सिंदूर की होली - 

  • रचनाकार - लक्ष्मी नारायण मिश्र
  • प्रकाशन वर्ष - 1934 ई.
  • अंक - 2
  • विषय- 
  • सामाजिक समस्या प्रधान नाटकों के क्रम में ‘सिंदूर की होली’ उनका पाँचवा नाटक है।
  • सिंदूर की होली नाटक की भूमिका रामप्रसाद त्रपाठी ने 20 अप्रैल 1934 को लिखी थी।
  • इस नाटक की खास बात यह है कि इस नाटक में एक ही दिन के पूरी घटना का वर्णन किया गया है।
  • इस नाटक में उन्होंने चिरंतन नारित्व की समस्या का प्रतिपादन किया है।
  • नाटककार ने समकालीन भारतीय समाज में स्थित नारी समस्याओं का अंकन विभिन्न पात्रों के द्वारा किया है।

Additional Informationलक्ष्मी नारायण मिश्र - 

  • लक्ष्मी नारायण मिश्र जी को समस्या प्रधान नाटक का ‘जनक’ कहा जाता है।
  • कृतियाँ -
  • सामाजिक नाटक -
  1. अशोक (1926 ई.)
  2. न्यासी (1930 ई.)
  3. राक्षस का मंदिर (1931 ई.)
  4. मुक्ति का रहस्य (1932 ई.)
  5. राजयोग (1933 ई.)
  6. आधी रात (1936 ई.)
  • ऐतिहासिक नाटक -
  1. गरुड़ध्वज (1945 ई.)
  2. वत्सराज (1950 ई.)
  3. दशाश्वमेध (1950 ई.)
  4. वितस्ता की लहरें (1957 ई.)
  5. जगद्गुरु (1958 ई.)
  6. सरयू की धार (1974 ई.)
  7. गंगाद्वार (1974 ई.)
  • पौराणिक नाटक - 
  1. नारद की वीणा (1946 ई.)
  • एकांकी संग्रह -
  1. अशोक वन (1950 ई.)
  2. प्रलय के पंख पर (1951 ई.)
  3. कावेरी में कमल (1961 ई.)
  4. नारी का रंग (1966 ई.)

उपेन्द्रनाथ अश्क-

  • ​नाटक-
  • लक्ष्मी का स्वागत(1935 ई.)
  • स्वर्ग की झलक(1940 ई.)
  • छठा बेटा(1940 ई.)
  • जय पराजय(1937 ई.) आदि।

मन्नू भण्डारी-

  • जन्म- 1931 - 1921 ईo
  • उपन्यास-
  • महाभोज (1979)
  • आपका बंटी (1971)
  • स्वामी (2003)
  • नाटक-
  • बिना दीवारों के घर (1965)

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना-

  • जन्म- 1927-1983 ई.
  • यह तीसरा सप्तक के कवि है।
  • नाटक-
  • लड़ाई(1979)
  • अब गरीबी हटाओ आदि।

Question 23

दुखी मन में उतर आती है पिता की छवि

अभी तक जिन्हें कष्टों से नहीं निष्कृति

उन्हीं अपने पिता की में अनुकृति हूँ

यही में हूँ.

उपर्युक्त पंक्तियों के रचयिता है :

  1. AOption (a)

    धर्मवीर भारती

  2. BOption (b)

    रघुवीर सहाय

  3. COption (c)

    नरेश मेहता

  4. DOption (d)

    हरिनारायण व्यास

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Correct answer

Answer: (b)B.

रघुवीर सहाय

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - रघुवीर सहाय

  • यह पंक्तियाँ 'यही मैं हूँ' कविता की है।

Key Pointsरघुवीर सहाय-

  • जन्म-1929-1990 ई.
  • दूसरा सप्तक(1951 ई.) के मुख्य कवि है।
  • रचनाएँ-
  • सीढ़ियों पर धूप में(1960 ई.)
  • आत्महत्या के विरुद्ध(1967 ई.)
  • हँसो हँसो जल्दी हँसो(1975 ई.)
  • कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ(1989 ई.) आदि।

Important Pointsधर्मवीर भारती-

  • जन्म-1926-1997 ई.
  • इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में इनका जन्म हुआ था।
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे।
  • वे साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक भी रहे।
  • डॉ. धर्मवीर भारती को 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • दूसरा सप्तक के प्रमुख कवि है।
  • काव्य रचनाएँ-
  • ठंडा लोहा (1952 ई.)
  • कनुप्रिया (1959 ई.)
  • सात गीत वर्ष (1959 ई.)
  • देशान्तर (1960 ई.) आदि।

नरेश मेहता-

  • जन्म-1922-2000 ई.
  • यह दूसरा सप्तक के कवि है।
  • रचनाएँ-
  • बनपाखी सुनो(1957 ई.)
  • बोलने दो चीड़ को(1961 ई.)
  • उत्सवा(1979 ई.)
  • अरण्या(1985 ई.) आदि।

हरिनारायण व्यास-

  • दूसरा सप्तक के कवि है।
  • रचनाएं-
  • मृग और तृष्णा(1968)
  • त्रिकोण पर सूर्योदय(1980) आदि।

Additional Information

  • यही मैं हूँ

और जब मैं यही होता हूँ

थका, या उन्हीं के से वस्त्र पहने, जो मुझे प्रिय हैं-

दुखी मन में उतर आती है पिता की छवि

अभी तक जिन्हें कष्टों से नहीं निष्कृति

उन्हीं अपने पिता की मैं अनुकृति हूँ

यही मैं हूँ।

Question 24

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उत्तर-आधुनिकता से संबंधित है:

A. उत्तर आधुनिकता महावृतांत के विरुद्ध है।

B. उत्तर आधुनिकता के चिंतन में ईश्वर सर्वोपरि है।

C. इसमें समतावादी सार्वभौमिक सत्यों का नकार है।

D. उत्तर आधुनिकता स्वच्छंदतावाद की एक शाखा है।

E. इसमें आधुनिकतावाद की सक्षमता का नकार है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A और B

  2. BOption (b)

    केवल B और D

  3. COption (c)

    केवल C, D और E

  4. DOption (d)

    केवल A, C और E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, C और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल A, C और E

Key Pointsउत्तर-आधुनिकता से संबंधित है-

  • A. उत्तर आधुनिकता महावृतांत के विरुद्ध है।
  • C. इसमें समतावादी सार्वभौमिक सत्यों का नकार है।
  • E. इसमें आधुनिकतावाद की सक्षमता का नकार है।

Important Pointsउत्तर-आधुनिकता-

  • उत्तर आधुनिकता का कोई केंद्रवर्ती रूप नहीं बना या बन सकता है क्योंकि उत्तर आधुनिकता एक प्रकार से विकेंद्रीकरण की सतत प्रक्रिया है।
  • इसमें साहित्य, संस्कृति, दर्शन आदि तर्क व सिद्धांतों का विखंडन है।
  • इसमें स्थानीयता के गुण भी मौजूद है।
  • उत्तर -आधुनिकता -संरचनावाद और विखंडनवाद दोनों के मेल से उत्तर आधुनिकतावाद का निर्माण हुआ है।
  • पॉल डी मैन को विखंडनवाद का प्रबल समर्थक माना जाता है।
  • उत्तर आधुनिक शब्द 'उत्तर' व 'आधुनिक' इन दो शब्दों से मिलकर बना जिसका अर्थ है आधुनिक का विकसित परवर्ती रूप भी हो सकता है।
  • उत्तर आधुनिकतावाद का जनक सच्चे अर्थों में ल्योतार को माना जाता है।
  • ल्योतार पुस्तक 'द पोस्टमार्टम कंडीशन:  ए रिपोर्ट ऑन नॉलेज (1979  ई.)।
  • समग्र रूप में उत्तर - आधुनिकता के तीन केंद्रीय तत्व माने जा सकते हैं - समग्रतावादी, सार्वभौमिक सत्यों का नकार, तर्कवाद का नकार, आधुनिकतावाद की सक्षमता का नकार।

Question 25

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I कविसूची-II कृति
A.मोहनलाल महतो 'वियोगी'I.मैदान
B.रामेश्वर शुक्ल 'अंचलII.बीथी
C.भगवतीचरण वर्माIII.निर्माल्य
D.नरेन्द्र शर्माIV.अपराजिता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-I, B-III, C-IV, D-II 

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  3. COption (c)

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  4. DOption (d)

    A-1, B-II, C-IV, D-III

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Correct answer

Answer: (b)B.

A-III, B-IV, C-I, D-II

Why this answer is correct

सही उत्तर है -  A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है - 

सूची-I कविसूची-II कृति
A.मोहनलाल महतो 'वियोगी'III.निर्माल्य
B.रामेश्वर शुक्ल 'अंचलIV.अपराजिता
C.भगवतीचरण वर्माI.मैदान
D.नरेन्द्र शर्माII.बीथी

Question 26

"कीर्ति के द्वार सब के लिए नहीं खुले हैं परन्तु भलाई करने का अवसर सब किसी को जो उसकी खोज रखता हो मिल सकता है." - यह कथन भारतेंदु के किस निबंध से लिया गया है ?

  1. AOption (a)

    भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है

  2. BOption (b)

    दिल्ली दरबार दर्पण

  3. COption (c)

    सरयूपार की यात्रा

  4. DOption (d)

    स्त्री सेवा पद्धति

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Correct answer

Answer: (b)B.

दिल्ली दरबार दर्पण

Why this answer is correct

सही उत्तर है - दिल्ली दरबार दर्पण

Key Pointsदिल्ली दरबार दर्पण-

  • रचनाकार- भारतेंदु हरिश्चंद
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1877 ई.
  • मुख्य बिन्दु -
  • दिल्ली दरबार भारत में औपनिवेशिक काल में राजसी दरबार होता था।
  • यह इंग्लैण्ड के महाराजा या महारानी के राजतिलक की शोभा में सजाया जाता था।
  • ब्रिटिश साम्राज्य के चरम काल में, सन 1877 से 1971 के बीच तीन दिल्ली दरबार लगे।
  • सन् 1877 का दरबार, जिसे प्रोक्लेमेशन दरवार या घोषणा दरबार कहा गया है, 1 जनवरी 1877 को महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित और राजतिलक करने हेतु लगा था।
  • यद्यपि हरिश्चंद्र ब्रिटिश शासन के अथक आलोचक थे और इसके फलस्वरूप ही उन्हें कभी भी आधिकारिक संरक्षण नहीं मिला, फिर भी उनका अभिजात वर्ग और राजघराने के प्रति सहज सम्मान था।
  • 1877 का दरबार, मुख्यतः एक आधिकारिक घटना मात्र थी, जिसमें 1903 एवं 1911 जैसी रौनक नहीं थी।
  • यह निबन्ध भारतेन्दु जी के भ्रम का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  • भारतेन्द्र जी ने यह निबन्ध क्यों लिखा 1877 के दिल्ली दरवार का वर्णन, जिस का वर्णन, जिस पर क्वीन विक्टोरिया को भारत की की राजराजेश्वरी घोषित किया गया था, भारतेन्दु ने इसलिए किया क्योंकि उसी समय भारतेन्दु ने बनारस के 'प्रिंस ऑफ वेल्स' के मार्गदर्शक के रूप में काम किया था।

Important Pointsभारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है। -

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1884 ई.
  • विषय -
  • ​लेखक ने इस पाठ में हिंदू-मुसलमान दोनों की कमियों का वर्णन किया है।
  • यह निबंध, बलिया के दादरी मेले में साल 1884 में दिए गए उनके भाषण का अंश है।

सरयूपार की यात्रा-

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - यात्रा वृतांत
  • प्रकाशन वर्ष - 1871 ई.
  • विषय -
  • यह एक यात्रा वृत्तांत है, जो सरयू नदी के पार की यात्रा का वर्णन करता है।

स्त्री सेवा पद्धति-

  • रचनाकार - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • विधा - व्यंग
  • विषय -
  • महिलाओं के धार्मिक कर्तव्यों और सामाजिक स्थिति से संबंधित है।
  • यह विषय महिलाओं के जीवन, उनके अधिकारों, और समाज में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालता है।

Additional Informationभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म- 1850 - 1885 ईo
  • मौलिक नाटक- 
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873)
  • विषस्य विषमौषधम् (1876)
  • प्रेम जोगिनी (1875)
  • चन्द्रावली (1876)
  • भारत-दुर्दशा (1880)
  • नीलदेवी (1881)
  • अंधेर नगरी (1881)
  • सती प्रताप (1883)
  • अनूदित नाट्य रचनाएँ- 
  • रत्नावली (1868)
  • विद्यासुंदर (1868)
  • पाखंड विडम्बन (1872)
  • धनंजय विजय (1873)
  • मुद्रा राक्षस (1878)
  • दुर्लभ बंधु (1880)
  • कर्पूरमंजरी (1875)
  • सत्य हरिश्चन्द्र (1875)
  • भारत जननी (1877)
  • यात्रा वृत्तान्त- 
  • सरयूपार की यात्रा (1871)
  • हरिद्वार की यात्रा
  • लखनऊ की यात्रा
  • मेहदावल की यात्रा

Question 27

'कामायनी' की निम्नलिखित पंक्तियों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. यही त्रिपुर है देखा तुमने

B. शास्त्र शस्त्र रक्षा में पलते

C. क्षण क्षण परिवर्तन में ढलते

D. ये विज्ञान भरे अनुशासन

E. स्वयं व्यस्त पर शांत बने से

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    A, B, E, C, D

  2. BOption (b)

    A, D, C, B, E

  3. COption (c)

    E, B, D, C, A

  4. DOption (d)

    E, D, B, A, C

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

E, B, D, C, A

Why this answer is correct

सही उत्तर है - E, B, D, C, A

Key Points

  • स्वयं व्यस्त पर शांत बने से

शास्त्र शस्त्र रक्षा में पलते

ये विज्ञान भरे अनुशासन

क्षण क्षण परिवर्तन में ढलते

यही त्रिपुर है देखा तुमने

  • यह कामायनी के रहस्य सर्ग से उद्धृत पंक्तियाँ है।

Important Pointsकामायनी-

  • रचनाकार - जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष -1936 ई.
  • मुख्य पात्र -
  • मनु, श्रद्धा, इड़ा और कुमार।
  • कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं-
  • चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा ,स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य और आनंद।
  • मुख्य रस - निर्वेद(शांत रस)
  • मुख्य छंद - ताटंक
  • विषय-
  • इनकी कथावस्तु का आधार ऋग्वेद, छंदोग्य उपनिषद, शतपथ ब्राह्मण और श्रीमद्भागवात है।
  • इसमें मनोभावों को पात्रों के रूप में रूपांतरित किया है।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि है।
  • रचनाएँ-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेमपथिक(1913 ई.)
  • चित्राधार(1918 ई.)
  • झरना(1918 ई.)
  • आँसू(1925 ई.) आदि।

Question 28

निम्नलिखित काव्य-सिद्धांतों को पहले से बाद के काल क्रम में व्यवस्थित कीजिये :

A. काव्यभाषा का सिद्धांत

B. अभिव्यंजनावाद

C. उदात्तता का सिद्धांत

D. विरेचन सिद्धांत

E. मूल्य सिद्धांत

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    D, A, B, C, E,

  2. BOption (b)

    C, B, A, D, E

  3. COption (c)

    D, C, A, B, E

  4. DOption (d)

    A, B, E, C, D

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Correct answer

Answer: (c)C.

D, C, A, B, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है - D, C, A, B, E

Key Points

  • D. विरेचन सिद्धांत
  • C. उदात्तता का सिद्धांत
  • A. काव्यभाषा का सिद्धांत
  • B. अभिव्यंजनावाद
  • E. मूल्य सिद्धांत

Important Pointsविरेचन सिद्धांत -

  • साहित्य में सर्वप्रथम विरेचन शब्द को प्रयोग करने का श्रेय अरस्तु को प्राप्त है।
  • विरेचन यूनानी शब्द कथार्सिस का हिंदी रूपांतरण है।
  • अरस्तु ने इसका संबंध ट्रेजडी से माना है।
  • अरस्तु द्वारा की गई कथार्सिस की कोई व्याख्या उपलब्ध नहीं है।
  • पूरे काव्यशास्त्र में अरस्तू ने एक बार कथार्सिस शब्द का प्रयोग किया है।
  • काव्यशास्त्र में प्रयुक्त विवेचन शब्द का अर्थ - मानसिक या भावात्मक एवं कलात्मक है।
  • अरस्तु के अनुसार भावों का दमन हानिकारक व अहितकर है उसका संतुलन जीवन के लिए अनिवार्य है।
  • अरस्तु ने करुणा और भय को परस्पर जुड़ा हुआ माना है।
  • विरेचन भावात्मक विश्रांति के साथ-साथ भावात्मक परिष्कार भी करता है।
  • दुखान्त देखने के बाद व्यक्ति को उसके क्लेशकर भावों से मुक्ति मिल जाती है चाहे वह मुक्ति  अकाल्पनिक ही क्यों ना हो।
  • अरस्तु के विरेचन सिद्धांत की तुलना अभिनवगुप्त के अभिव्यक्तिवाद से की जाती है।

काव्य में उदात्त तत्व-

  • लोंजाइनस ने काव्य को श्रेष्ठ बनाने वाले तत्वों पर विचार करते हुए इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है।
  • परिभाषा-
  • अभिव्यक्ति की विशिष्टता और श्रेष्ठता का नाम उदात्त है।
  • उदात्त के तत्व-
  • महान धारणाओं की क्षमता या विचारों की भव्यता।
  • प्रेरणा-प्रसूत आवेग या भावावेश की तीव्रता।
  • समुचित अलंकार योजना।
  • उत्कृष्ट भाषा।
  • गरिमामय रचना विधान।
  • इन पाँचों तत्त्वों में से प्रथम दो जन्मजात अर्थात् कवि-प्रतिभा के अंग हैं और शेष तीन कला सम्बन्धी विशेषताएँ हैं।
  • उदात्त के विरोधी तत्व-
  • बालेयता
  • वागाडम्बर
  • भावाडम्बर
  • शब्दाडम्बर आदि।

काव्यभाषा का सिद्धांत-

  • रिचर्ड्स भाषा की दो श्रेणियां स्वीकार करते हैं, वैज्ञानिक भाषा तथा रागात्मक भाषा।
  • वैज्ञानिक भाषा में सूचनात्मक, तथ्यात्मक अथवा अभिधात्मक भाषा का प्रयोग होता है जबकि काव्य की भाषा रागात्मक होती है।
  • काव्य की भाषा में भावात्मक अर्थ की प्रधानता होती है।
  • ‘रागात्मक’ भाषा का प्रयोग रचनाकार करते हैं। इसमें प्रतीकों, बिंबों और भाव संकेतों को विशेष महत्व दिया जाता है।
  • यही भाषा कवियों और रचनाकारों की अनुभूति को संप्रेषित करने में समर्थ होती है।

अभिव्यंजनावाद- 

  • अभिव्यंजनावाद का सिद्धांत इटली के विचारक बेनेदितो क्रोचे ने किया।
  • क्रोचे के अनुसार-
  • "अंतःप्रज्ञा के क्षणों में आत्मा की सहजानुभूति ही अभिव्यंजना है"।

मूल्य सिद्धांत-

  • रिचर्ड्स का मुख्य सिद्धांत है
  • कोई भी वस्तु जो इच्छा को संतुष्ट करे, मूल्यवान हैI

Question 29

निम्नलिखित कविता अंश को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिये :

A. तब कहीं देखने मिलेंगी बाँहें

B. तोड़ने होंगे ही मठ और गढ़ सब

C. जिनमें कि प्रतिपल कांपता रहता अरुण कमल एक

D. अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे उठाने ही होंगे

E. पहुँचना होगा दुर्गम पहाड़ों के उस पार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    D, C, E, B, A

  2. BOption (b)

    C, B, E, A, D

  3. COption (c)

    D, B, E, A, C

  4. DOption (d)

    A, B, C, D, E

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Correct answer

Answer: (c)C.

D, B, E, A, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है - D, B, E, A, C

Key Pointsगजानन माधव मुक्तिबोध की प्रसिद्ध कविता "अंधेरे में" से उद्धृत पंक्तियाँ है -

  • D. अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे उठाने ही होंगे
  • B. तोड़ने होंगे ही मठ और गढ़ सब
  • E. पहुँचना होगा दुर्गम पहाड़ों के उस पार
  • A. तब कहीं देखने मिलेंगी बाँहें
  • C. जिनमें कि प्रतिपल कांपता रहता अरुण कमल एक

Important Pointsअधेरें में-

  • रचनाकार- गजानन माधव मुक्तिबोध
  • प्रकाशनवर्ष- 1964 ईo
  • काव्य संग्रह- चाँद का मुँह टेढ़ा है
  • विधा- कविता
  • विषय-
  • स्वतंत्रता से पहले की और स्वतंत्रता के बाद की स्थिति का चित्रण किया है।
  • अधेरें में कविता में अंधेरा सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है।
  • जब तक यह अव्यवस्था दूर नहीं होगी तब तक व्यक्ति के व्यक्तित्व का शोधन नहीं हो पाएगा।
  • कविता में "वह" और "मैं" के बीच आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया परस्पर चलती है।
  • व्यक्ति अपने आप को भूलकर "वह" पाने के लिए भटकता फिर रहा है,
  • और "मैं" अपनी सुविधावृति को छोड़ नहीं पाता है क्योंकि उसे अपनी कमजोरियों से लगाव है।

Additional Informationगजानन माधव मुक्तिबोध - 

  • जन्म- 1917 - 1964 ईo
  • आलोचना ग्रंथ- 
  • कामायनी एक पुनर्विचार (1961)
  • एक साहित्यिक की डायरी (1964 )
  • नई कविता का आत्म संघर्ष तथा अन्य निबंध (1964)
  • नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र 1972)
  • समीक्षा की समस्याएं (1982)
  • कविता संग्रह- 
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964)
  • भूरी-भूरी खाक धूल (1980)
  • प्रमुख लंबी कविता- 
  • अंधेरे में
  • भूल गलती
  • ब्रह्मराक्षस

Question 30

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I कविसूची-II काव्य-पंक्तियाँ
A.ठाकुरI.रैन दिना छुटिबो करें प्रान झरें दुखिया अंखियाँ झरना सी
B.मतिरामII.अति छीन मनाल के तारहुते तिहिऊपर पाँव दे आवनो है
C.घनानंदIII.हम तो परनारि भई सो भई तुम तो सुधरी सखियाँ सिगरी
D.बोधाIV.ज्यों-ज्यों निहारिये है नैननि त्यों-त्यों खरी निखरे सी निकाई

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-IV, B-II, C-III, D-I

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  3. COption (c)

    A-III, B-I, C-II, D-IV

  4. DOption (d)

    A-I, B-II, C-III, D-IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A-III, B-IV, C-I, D-II

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है - 

सूची-I कविसूची-II काव्य-पंक्तियाँ
A.ठाकुरIII.हम तो परनारि भई सो भई तुम तो सुधरी सखियाँ सिगरी
B.मतिरामIV.ज्यों-ज्यों निहारिये है नैननि त्यों-त्यों खरी निखरे सी निकाई
C.घनानंदI.रैन दिना छुटिबो करें प्रान झरें दुखिया अंखियाँ झरना सी
D.बोधाII.अति छीन मनाल के तारहुते तिहिऊपर पाँव दे आवनो है

Important Pointsठाकुर-

  • जन्म - 1766-1833 ई.
  • रीतिकाल की रीतिमुक्त शाखा के महत्वपूर्ण कवि रहे है।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • ठाकुर ठसक
  • ठाकुर शतक आदि।

मतिराम-

  • जन्म-1617 ई.
  • रीतिकाल की रीतिबद्ध शाखा के कवि है।
  • रचनाएँ-
  • रसराज(1663 ई.)
  • ललित ललाम(1659-88 ई.)
  • अलंकार पंचाशिका(1690 ई.)
  • वृत्तकौमुदी(1701 ई.)
  • फूलमंजरी आदि।

घनानन्द-

  • जन्म-1689-1739 ई.
  • रीतिकाल की रीतिमुक्त धारा के महत्वपूर्ण कवि है।
  • सम्प्रदाय-निम्बार्क
  • आश्रयदाता-मुहम्मदशाह रंगीले
  • प्रेयसी-सुजान
  • रचनाएँ-
  • वियोगबेलि
  • इश्कलता
  • सुजान हित प्रबंध
  • प्रीतिपावस
  • कृपाकन्द
  • विरह लीला आदि।

बोधा-

  • पुरा नाम-बुद्धि सेन
  • जन्म-1747 ई.
  • यह रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि है।
  • यह 'प्रेम के पीर' के कवि है।
  • प्रेमिका-सुभान
  • रचनाएँ-
  • विरहवारीश
  • इश्कनामा आदि।

Question 31

"योग्यता एक चौथाई व्यक्तित्व का निर्माण करती है। शेष पूर्ति प्रतिष्ठा द्वारा होती है।" उपर्युक्त कथन किसका है?

  1. AOption (a)

    मल्लिका

  2. BOption (b)

    कालिदास

  3. COption (c)

    विलोम

  4. DOption (d)

    निक्षेप

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Correct answer

Answer: (d)D.

निक्षेप

Why this answer is correct

सही उत्तर है- निक्षेप

Key Pointsआषाढ़ का एक दिन- 

  • रचनाकार- मोहन राकेश
  • प्रकाशन वर्ष- 1958 ईo
  • विधा- नाटक
  • मुख्य पात्र- 
  • ​अंबिका, मल्लिका, कालिदास विलोम ,मातुल आदि।
  • विषय- 
  • ​कालिदास के सत्ता एवं सृजनात्मकता के मध्य अन्तः संघर्ष का चित्रण।

Important Pointsमोहन राकेश- 

  • जन्म- 1925 - 1972 ईo
  • नाटक-
  • लहरों के राजहंस(1963 ई.)
  • आधे-अधूरे(1969 ई.)
  • उपन्यास- 
  • अँधेरे बंद कमरे (1961)
  • अन्तराल (1972)
  • न आने वाला कल (1968)

Question 32

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I रचनासूची-II समीक्षा
A.चारू चन्द्रलेखI.हिंदी उपन्यास की एक नई दिशा -नेमिचन्द्र जैन
B.मैला आँचलII.कवि दृष्टि का अभाव - कुँवर नारायण
C.अँधेरे बंद कमरेIII.एक टूटा दर्पण देवी शंकर अवस्थी
D.झूठा सचIV.दूसरों का नरक - श्रीकांत वर्मा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-IV, B-III, C-II, D-I

  2. BOption (b)

    A-I, B-III, C-II, D-IV 

  3. COption (c)

    A-III, B-II, C-IV, D-I

  4. DOption (d)

    A-III, B-I, C-IV, D-II 

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Correct answer

Answer: (d)D.

A-III, B-I, C-IV, D-II 

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - A-III, B-I, C-IV, D-II 

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है - 

सूची-I रचनासूची-II समीक्षा
A.चारू चन्द्रलेखIII.एक टूटा दर्पण देवी शंकर अवस्थी
B.मैला आँचलI.हिंदी उपन्यास की एक नई दिशा-नेमिचन्द्र जैन
C.अँधेरे बंद कमरेIV.दूसरों का नरक - श्रीकांत वर्मा
D.झूठा सचII.कवि दृष्टि का अभाव - कुँवर नारायण

Important Pointsचारू चन्द्रलेख-

  • रचनाकार - आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • विधा - उपन्यास है।
  • रचनाकाल- 1963 ई.
  • विषय -
  • इसमें 12वीं-13वीं सदी के भारत का व्यक्ति और समाज बहुत बारीकी से व्यक्त हुआ है।
  • हजारीप्रसाद द्विवेदी का यह उपन्यास उस युग की जड़ता तोड़ने के बहाने काल निरपेक्ष रूप से देश में नए उत्साह का संचार करता है।

मैला आँचल-

  • रचनाकार-फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा-उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष-1954 ई.
  • विषय-
  • इसमें बिहार के पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा का वर्णन है।
  • आजाद भारत के ग्रामीण अंचल को कथा का केंद्र बनाया है।
  • पात्र-
  • डॉ. प्रशांत
  • कमला
  • बालदेव
  • कालीचरन
  • मंगलादेवी
  • महंत सेवादास आदि।

अँधेरे बंद कमरे-

  • रचनाकार - मोहन राकेश
  • विधा - उपन्यास
  • प्रकाशन वर्ष - 1961
  • विषय - 
  • ​भारतीय अभिजात वर्ग में परंपरा और आधुनिकता के बीच का द्वंद्व, वैवाहिक जीवन में अलगाव, और मानसिक स्वतंत्रता की तलाश है।
  • यह उपन्यास पति-पत्नी के बीच भावनात्मक और मानसिक अलगाव, साथ ही सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच संघर्ष को भी दर्शाता है।

झूठा-सच-

  • रचनाकार-यशपाल
  • मुख्य पात्र-
  • तार
  • जयदेव आदि।
  • विषय-
  • 'वतन और देश' तथा 'देश का भविष्य' नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उपरान्त चारित्रिक स्खलन एवं विविध विडम्बनाओं का व्यापक फलक पर कलात्मक चित्र उकेरा गया है।
  • झूठा सच (1958-60) हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है।
  • यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उ��न्यासों में परिगण्य माना गया है।

Additional Information

हजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979 ई.
  • ऐतिहासिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • बाणभट्ट की आत्मकथा(1946 ई.)
  • पुनर्नवा(1973 ई.)
  • अनामदास का पोथा(1976 ई.) आदि।

फणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म-1921-1977 ई.
  • आंचलिक उपन्यासकार है।
  • उपन्यास-
  • परती परिकथा(1957 ई.)
  • दीर्घतपा(1964 ई.)
  • जुलूस(1965 ई.)
  • कितने चौराहे(1966 ई.) आदि।

मोहन राकेश- 

  • जन्म- 1925 - 1972 ईo
  • नाटक-
  • लहरों के राजहंस(1963 ई.)
  • आधे-अधूरे(1969 ई.)
  • उपन्यास- 
  • अँधेरे बंद कमरे (1961)
  • अन्तराल (1972)
  • न आने वाला कल (1968)

यशपाल-

  • जन्म-1903-1977ई.
  • यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ -
  • ​दादा कामरेड(1941 ई.)
  • देशद्रोही(1943 ई.)
  • दिव्या(1945 ई.)
  • पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।

Question 33

'अंधेर नगरी' नाटक के अंकों के स्थान का सही क्रम क्या है ?

A. बाजार

B. जंगल

C. राज्यसभा

D. अरण्य

E. बाह्य प्रान्त

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    B, C, E, A, D

  2. BOption (b)

    B, A, C, D, E

  3. COption (c)

    E, B, A, D, C

  4. DOption (d)

    E, A, B, C, D

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Correct answer

Answer: (d)D.

E, A, B, C, D

Why this answer is correct

​सही उत्तर है - E, A, B, C, D

Key Pointsअंधेर नगरी- 

  • रचनाकार- भारतेन्दु हरिश्चंद्र
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1881 ईo
  • अंक- 6
  • कुल दृश्य- 6
  • प्रथम अंक- स्थान - बाहरी प्रान्त।
  • द्वितीय अंक- स्थान - बाजार।
  • तृतीय अंक- स्थान - जंगल।
  • चतुर्थ अंक- स्थान - राजसभा।
  • पंचम अंक- स्थान - अरण्य।
  • छठा दृश्य- स्थान - श्मशान।
  • श्रेणी- प्रहसन।
  • विषय वस्तु-
  • 'अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ इस प्रहसन में भारतेंदु जी ने उस समय के राज व्यवस्था, उच्चवर्गों की खुशामदी, जातिप्रथा की आलोचना की है।
  • अंग्रेजी राज्य के सामाजिक और व्यवासायिक स्थिति का चित्रण किया गया है।
  • लालच छोड़कर ज्ञानी और समझदार बनाने का नसीहत है।
  • इस प्रहसन का अंत ‘असत्य पर सत्य’ की विजय के साथ सुखांत है।
  • मुख्य पात्र- 
  • महंत, गोवर्धनदास, नारायनदास, कबाबवाला, घासीराम, नारंगीलाल, हलवाई,
  • कुजड़ीन, मुगल, पाचकवाला, मछलीवाली, जातवाला, बनिया, राजा, मंत्री, माली,
  • दो नौकर, फरियादी, कल्लू, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कस्साई, गड़ेरिया, कोतवाल, चार सिपाही।

Important Pointsभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-  1850 - 1885 ईo
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • भारतेन्दु के वृहत साहित्यिक योगदान के कारण ही 1857 से 1900 तक के काल को भारतेन्दु युग के नाम से जाना जाता है।
  • हिन्दी में नाटकों का प्रारम्भ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना जाता है।
  • भारतेन्दु के नाटक लिखने की शुरुआत बंगला के विद्यासुन्दर (1867) नाटक के अनुवाद से होती है।
  • मौलिक नाटक- 
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873)
  • विषस्य विषमौषधम् (1876)
  • प्रेम जोगिनी (1875)
  • चन्द्रावली (1876)
  • भारत-दुर्दशा (1880)
  • नीलदेवी (1881)
  • अंधेर नगरी (1881)
  • सती प्रताप (1883)
  • अनूदित नाट्य रचनाएँ- 
  • रत्नावली (1868)
  • विद्यासुंदर (1868)
  • पाखंड विडम्बन (1872)
  • धनंजय विजय (1873)
  • मुद्रा राक्षस (1878)
  • दुर्लभ बंधु (1880)
  • कर्पूरमंजरी (1875)
  • सत्य हरिश्चन्द्र (1875)
  • भारत जननी (1877)

Question 34

"लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटावत मान ।

लोभ कभी नहिं कीजिए,या मैं नरक निदान ।"

'अंधेर नगरी' नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

  1. AOption (a)

    नारायणदास

  2. BOption (b)

    गोबरधनदास

  3. COption (c)

    महंत

  4. DOption (d)

    राजा

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Correct answer

Answer: (c)C.

महंत

Why this answer is correct

सही उत्तर है- महंत

Key Pointsअंधेर नगरी- 

  • रचनाकार- भारतेन्दु हरिश्चंद्र
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1881 ईo
  • अंक- 6
  • कुल दृश्य- 6
  • प्रथम अंक- स्थान - बाहरी प्रान्त।
  • द्वितीय अंक- स्थान - बाजार।
  • तृतीय अंक- स्थान - जंगल।
  • चतुर्थ अंक- स्थान - राजसभा।
  • पंचम अंक- स्थान - अरण्य।
  • छठा दृश्य- स्थान - श्मशान।
  • श्रेणी- प्रहसन।
  • विषय वस्तु-
  • 'अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ इस प्रहसन में भारतेंदु जी ने उस समय के राज व्यवस्था, उच्चवर्गों की खुशामदी, जातिप्रथा की आलोचना की है।
  • अंग्रेजी राज्य के सामाजिक और व्यवासायिक स्थिति का चित्रण किया गया है।
  • लालच छोड़कर ज्ञानी और समझदार बनाने का नसीहत है।
  • इस प्रहसन का अंत ‘असत्य पर सत्य’ की विजय के साथ सुखांत है।
  • मुख्य पात्र- 
  • महंत, गोवर्धनदास, नारायनदास, कबाबवाला, घासीराम, नारंगीलाल, हलवाई,
  • कुजड़ीन, मुगल, पाचकवाला, मछलीवाली, जातवाला, बनिया, राजा, मंत्री, माली,
  • दो नौकर, फरियादी, कल्लू, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कस्साई, गड़ेरिया, कोतवाल, चार सिपाही।

Important Pointsभारतेन्दु हरिश्चंद्र-

  • जन्म-  1850 - 1885 ईo
  • आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं।
  • वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे।
  • इनका मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उनकी उपाधि थी।
  • भारतेन्दु के वृहत साहित्यिक योगदान के कारण ही 1857 से 1900 तक के काल को भारतेन्दु युग के नाम से जाना जाता है।
  • हिन्दी में नाटकों का प्रारम्भ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना जाता है।
  • भारतेन्दु के नाटक लिखने की शुरुआत बंगला के विद्यासुन्दर (1867) नाटक के अनुवाद से होती है।
  • मौलिक नाटक- 
  • वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873)
  • विषस्य विषमौषधम् (1876)
  • प्रेम जोगिनी (1875)
  • चन्द्रावली (1876)
  • भारत-दुर्दशा (1880)
  • नीलदेवी (1881)
  • अंधेर नगरी (1881)
  • सती प्रताप (1883)
  • अनूदित नाट्य रचनाएँ- 
  • रत्नावली (1868)
  • विद्यासुंदर (1868)
  • पाखंड विडम्बन (1872)
  • धनंजय विजय (1873)
  • मुद्रा राक्षस (1878)
  • दुर्लभ बंधु (1880)
  • कर्पूरमंजरी (1875)
  • सत्य हरिश्चन्द्र (1875)
  • भारत जननी (1877)

Question 35

"भारत समग्र विश्व का है और सम्पूर्ण वसुंधरा इसके प्रेमपाश में आबद्ध है। अ��ादि काल से ज्ञान की,मानवता की ज्योति यह विकीर्ण कर रहा है।"

उपर्युक्त कथन किसका है?

  1. AOption (a)

    मातृगुप्त

  2. BOption (b)

    प्रख्यातकीर्ति

  3. COption (c)

    भिक्षु

  4. DOption (d)

    धातुसेन

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Correct answer

Answer: (d)D.

धातुसेन

Why this answer is correct

सही उत्तर है- धातुसेन

Key Pointsस्कंदगुप्त-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • विधा- नाटक
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • विषय-
  • भारतीय व यूरोपीय नाटकों का समन्वय किया गया है।
  • कुमारगुप्त के विलासी साम्राज्य की आंतरिक स्थिति का चित्रण किया है
  • पुरुष पात्र-
  • स्कंदगुप्त-- युवराज (विक्रमादित्य)
  • कुमारगुप्त-- मगध का सम्राट
  • गोविन्दगुप्त-- कुमारगुप्त का भाई
  • पर्णदत्त-- मगध का महानायक
  • चक्रपालित-- पर्णदत्त का पुत्र
  • बन्धुवर्मा-- मालव का राजा
  • भीमवर्मा-- उसका भाई
  • मातृगुप्त-- काव्यकर्ता (कालिदास)
  • प्रपंचबुद्धि-- बौद्ध कापालिक
  • शर्वनाग-- अन्तर्वेद का विषयपति
  • कुमारदास (धातुसेन)-- सिंहल का राजकुमार
  • पुरगुप्त-- कुमारगुप्त का छोटा पुत्र
  • भटार्क-- नवीन महाबलाधिकृत
  • पृथ्वीसेन-- मंत्री कुमारामात्य
  • खिगिल-- हूण आक्रमणकारी
  • मुगल-- विदूषक
  • प्रख्यातकीर्ति-- लंकाराज-कुल का श्रमण, महा-बोधिबिहार-स्थविर
  • अन्य-- महाप्रतिहार, महादंडनायक, नन्दी-ग्राम का दंडनायक, प्रहरी, सैनिक इत्यादि।
  • नारी पात्र-
  • देवकी-- कुमारगुप्त की बड़ी रानी, (स्कंद की माता)
  • अनन्तदेवी-- कुमारगुप्त की छोटी रानी (पुरगुप्त की माता)
  • जयमाला-- बंधुवर्मा की स्त्री, (मालव की रानी)
  • देवसेना-- बंधुवर्मा की बहिन
  • विजया-- मालव के धनकुबेर की कन्या
  • कमला-- भटार्क की जननी
  • रामा-- शर्वनाग की स्त्री
  • मालिनी-- मातृगुप्त की प्रणयिनी
  • अन्य-- सखी, दासी इत्यादि।

Important Points

जयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावाद के महत्तवपूर्ण कवि रहे है।
  • इन्हें प्रेम और मस्ती का कवि कहा जाता है।
  • रचनाएँ-
  • काव्य संग्रह-
  • उर्वशी(1909 ई.)
  • वन मिलन(1909 ई.)
  • कानन कुसुम(1913 ई.)
  • प्रेमपथिक(1913 ई.) आदि।
  • नाटक-
  • सज्जन(1910 ई.)
  • कल्याणी परिणय(1912 ई.)
  • करुणालय(1912 ई.)
  • अजात शत्रु(1922 ई.)
  • चन्द्रगुप्त(1931 ई.) आदि।

Question 36

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
A.जातिवाचक से भाववा��क संज्ञाI.राष्ट्र - राष्ट्रीय
B.विशेषण से भाववाचक संज्ञाII.कुरु - कौरव
C.संज्ञा से विशेषणIII.मुनि मौन
D.व्यक्तिवाचक से अपत्यवाचक संज्ञाIV.रक्त - रक्तिमा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-IV, B-III, C-II, D-I

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  3. COption (c)

    A-I, B-III, C-IV, D-II

  4. DOption (d)

    A-II, B-III, C-I, D-IV

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Correct answer

Answer: (b)B.

A-III, B-IV, C-I, D-II

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है-

सूची-Iसूची-II
A.जातिवाचक से भाववाचक संज्ञाIII.मुनि मौन
B.विशेषण से भाववाचक संज्ञाIV.रक्त - रक्तिमा
C.संज्ञा से विशेषणI.राष्ट्र - राष्ट्रीय
D.व्यक्तिवाचक से अपत्यवाचक संज्ञाII.कुरु - कौरव

Question 37

'हिंदी निबंध' से संदर्भित निम्नलिखित मंतव्यों में से कौन से कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के हैं?

A. आधुनिक पाश्चात्य लक्षणों के अनुसार निबंध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात व्यक्तिगत विशेषता हो।

B. निबंध के विभिन्न रूपाकारों का विकास वि��ेष ऐतिहासिक संदर्भ में होता है।

C. संसार की हर बात और सब बातों से संबद्ध है. अपने मानसिक संघटन के अनुसार किसी का मन किसी संबंधसूत्र पर दौड़ता है, किसी का किसी पर। 

D. तत्त्वचिन्तक या वैज्ञानिक से निबंधलेखक की भिन्नता इस बात से भी कि निबंधलेखक जिधर चलता है उधर अपनी सम्पूर्ण मानसिक सत्ता के साथ अर्थात बुद्धि और भावात्मक हृदय दोनों लिए हुए।

E. निबंधों में गद्य माध्यम मात्र नहीं रहता वरन एक विशेष रचना सौष्ठव लेकर आता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और E

  2. BOption (b)

    केवल D और E

  3. COption (c)

    केवल C और B

  4. DOption (d)

    केवल A, C और D

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल A, C और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A, C और D

Key Points

  • A. आधुनिक पाश्चात्य लक्षणों के अनुसार निबंध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात व्यक्तिगत विशेषता हो।
  • C. संसार की हर बात और सब बातों से संबद्ध है. अपने मानसिक संघटन के अनुसार किसी का मन किसी संबंधसूत्र पर दौड़ता है, किसी का किसी पर।
  • D. तत्त्वचिन्तक या वैज्ञानिक से निबंधलेखक की भिन्नता इस बात से भी कि निबंधलेखक जिधर चलता है उधर अपनी सम्पूर्ण मानसिक सत्ता के साथ अर्थात बुद्धि और भावात्मक हृदय दोनों लिए हुए।

Important Pointsरामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म- 1884-1941 ई.
  • निबंध-
  • भाव या मनोविकार
  • श्रद्धा-भक्ति
  • लज्जा और ग्लानि
  • लोभ और प्रीति
  • कविता क्या है?
  • काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था आदि।

Question 38

'तीसरी कसम' कहानी से उद्धृत इन पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. चलो भैयन, जान बचेगी तो ऐसी-ऐसी सग्गड़ गाड़ी बहुत मिलेगी.

B. इस्स! हिरामन को परतीत नहीं, मर्द और औरत के नाम में फर्क होता है.

C. तुम मेरे उस्ताद हो. हमारे शास्तर में लिखा हुआ है, एक अच्छर सिखानेवाला भी गुरु और एक राग सिखानेवाला भी उस्ताद.

D. और इस बार जनानी सवारी औरत है या चंपा का फूल ! जब से गाड़ी मह-मह महक रहा है.

E. इस्स! हरदम रुपैया पैसा ! रखिये रुपैया!क्या करेंगे चादर?

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    A, B, D, E, С

  2. BOption (b)

    A, B, C, D, E

  3. COption (c)

    B, D, E, A, C

  4. DOption (d)

    A, D, B, C, Е

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Correct answer

Answer: (d)D.

A, D, B, C, Е

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A, D, B, C, Е

Key Points

  • A. चलो भैयन, जान बचेगी तो ऐसी-ऐसी सग्गड़ गाड़ी बहुत मिलेगी.
  • D. और इस बार जनानी सवारी औरत है या चंपा का फूल ! जब से गाड़ी मह-मह महक रहा है.
  • B. इस्स! हिरामन को परतीत नहीं, मर्द और औरत के नाम में फर्क होता है.
  • C. तुम मेरे उस्ताद हो. हमारे शास्तर में लिखा हुआ है, एक अच्छर सिखानेवाला भी गुरु और एक राग सिखानेवाला भी उस्ताद.
  • E. इस्स! हरदम रुपैया पैसा ! रखिये रुपैया!क्या करेंगे चादर?

Important Pointsतीसरी कसम-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • विधा- कहानी
  • प्रकाशन वर्ष- 1956 ई.
  • इसका दूसरा नाम 'मारे गए गुलफाम' है।
  • यह ठुमरी कहानी संग्रह में संकलित है।
  • विषय-
  • यह हीरामन और हीराबाई के बैलगाड़ी सफर के माध्यम से लोक संस्कृति उसमें निहित रस और मर्यादित निश्चल प्रेम को व्यक्त करने वाली कहानी है।
  • मुख्य पात्र-
  • गाड़ीवान हीरामन और कंपनी की औरत हीराबाई।
  • गौण पात्र-
  • पलटदास
  • लाल मोहर
  • लाल मोहर का नौकर लहसनवाँ
  • धुन्नीराम आदि।
  • हीरामन की 3 कसमें-
  • चोरबाजरी का माल नही लादेगा।
  • बाँस नहीं ढोयेगा।
  • कम्पनी की औरत नहीं बैठाएगा।

Additional Informationफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म- 1921-1977 ई.
  • कहानी संग्रह-
  • ठुमरी(1959 ई.)
  • एक आदिम रात्रि की महक(1967 ई.)
  • अग्निखोर(1973 ई.)
  • एक श्रावणी दोपहर की धूप(1984 ई.)
  • अच्छे आदमी(1986 ई.) आदि।
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम)
  • पंचलाइट
  • तबे एकला चलो रे
  • ठेस
  • संवदिया आदि।

Question 39

निम्नलिखित रचनाओं को कालक्रम के अनुसार पहले से बाद के क्रम मेंव्यवस्थित कीजिये:

A. कविप्रिया - केशवदास

B. प्रेम वाटिका रसखान

C. हरिचरित्र - लालच दास

D. प्रेमसागर - लल्लूलाल

E. सुदामा चरित - नरोत्तम दास

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    B, A, E, D, C

  2. BOption (b)

    C, E, A, B, D

  3. COption (c)

    D, C, A, E, В

  4. DOption (d)

    C, A, D, B, Е

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Correct answer

Answer: (b)B.

C, E, A, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- C, E, A, B, D

Key Points

  • C. हरिचरित्र - लालच दास
  • E. सुदामा चरित - नरोत्तम दास
  • A. कविप्रिया - केशवदास
  • B. प्रेम वाटिका -रसखान
  • D. प्रेमसागर - लल्लूलाल

Important Pointsलालच दास-

  • रायबरेली के एक हलवाई थे।
  • इन्होंने संवत 1585 में 'हरिचरित' और संवत 1587 में 'भागवत दशम स्कंध भाषा' नाम की पुस्तक अवधी मिश्रित भाषा में लिखी थी।

नरोत्तम दास-

  • समय - संवत् 1602 ( शिव सिंह सरोज के अनुसार)
  • रचनाएं -
  • सुदामा चरित्र
  • खंडकाव्य सवैया में।
  • परिमार्जित व व्यवस्थित भाषा।
  • ध्रुव चरित्र
  • खंडकाव्य।
  • विचार माला

केशवदास-

  • जन्म- 1555-1617 ई.
  • रीतिकाल की रीतिबद्ध शाखा के प्रमुख कवि है।
  • यह निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे।
  • उपनाम- वेदांती मिश्र।
  • ये इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे,'कविप्रिया' ग्रन्थ की रचना इंद्रजीत सिंह की प्रेमिका गणिका प्रवीण राय को शिक्षा देने के लिए की गयी थी।
  • रचनाएँ-
  • रसिकप्रिया(1591 ई.)
  • कविप्रिया(1601 ई.)
  • रामचंद्रिका(1601 ई.)
  • रतनबावनी(1607 ई.) आदि।
  • रामचन्द्र शुक्ल-
  • ​"केशवदास जी संस्कृत के पंडित थे अतः शास्त्रीय पद्धति से साहित्यचर्चा का प्रचार भाषा मे पूर्ण रूप से करने की इच्छा उनके लिए स्वभाविक थी।"

रसखान-

  • जन्म - 1533-1618 ई.
  • मूल नाम - सैयद इब्राहिम
  • गोस्वामी विट्ठलनाथ से इन्होंने दीक्षा प्राप्त की।
  • तुलसीदास के समकालीन थे।
  • मुख्य रचनाएँ-
  • सुजान रसखान
  • प्रेमवाटिका
  • दानलीला
  • अष्टयाम आदि।
  • रसखान के काव्य में श्रृंगार रस की प्रधानता मिलती है।
  • इन्हें 'पीयूषवर्षी' अथवा 'अमृत की वर्षा करने वाला कवि' कहा जाता है।
  • भारतेंदु-
  • "इस मुसलमान हरिजनन पर कोटिन हिंदु वारिए"

लल्लू लाल-

  • कविता में इनका उपनाम लाल कवि था।
  • जन्म - 1763 ई.
  • निधन - 1835 ई.
  • ग्रंथ - 
  • सिंहासन बत्तीसी
  • बैताल पच्चीसी
  • शंकुतला
  • माधवानल
  • प्रेम सागर
  • ब्रज भाषा व्याकरण

Question 40

मोहन राकेश का नाटक 'आधे-अधूरे' सबसे पहले किस पत्रिका के तीन अंकों में छपा था:

  1. AOption (a)

    दिनमान

  2. BOption (b)

    सारिका

  3. COption (c)

    धर्मयुग

  4. DOption (d)

    साप्ताहिक हिन्दुस्तान

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Correct answer

Answer: (c)C.

धर्मयुग

Why this answer is correct

सही उत्तर है- धर्मयुग

Key Pointsआधे-अधूरे-

  • रचनाकार-मोहन राकेश
  • विधा-नाटक
  • प्रकाशन वर्ष-1969 ई.
  • मुख्य पात्र-
  • सावित्री, किन्नी, बिन्नी, अशोक, महेन्द्रन���थ, जगमोहन आदि।
  • विषय-
  • इसमें स्त्री-पुरुष संबंधों के खोखलेपन और पारिवारिक विघटन की समस्या को चित्रित किया गया है।

Important Pointsमोहन राकेश-

  • नाटक-
  • आषाढ़ का एक दिन(1958 ई.)
  • लहरों के राजहंस(1963 ई.) आदि।

Question 41

"जैसे वीरकर्म से पृथक वीरत्व कोई पदार्थ नहीं, वैसे ही सुन्दर वस्तु से पृथक सौन्दर्य कोई पदार्थ नहीं" यह स्थापना रामचन्द्र शुक्ल ने अपने निबन्ध 'कविता क्या है' के किस उप शीर्षक के अंतर्गत दी है ? 

  1. AOption (a)

    मार्मिक तथ्य

  2. BOption (b)

    सभ्यता के आवरण और कविता

  3. COption (c)

    सौन्दर्य

  4. DOption (d)

    मनुष्यता की उच्च भूमि

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Correct answer

Answer: (c)C.

सौन्दर्य

Why this answer is correct

सही उत्तर है- सौन्दर्य

Key Pointsकविता क्या है? -

  • रचनाकार - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • विधा - निबंध
  • प्रकाशन वर्ष - 1909 ई.
  • विषय -
  • ​ इस निबंध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यताएँ प्रस्तुत की है, जिसमें भाषा संदर्भ महत्त्वपूर्ण है।
  • निबन्धात्मक ग्रन्थ - चिंतामणि

Important Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • इनके निबंधों का संग्रह चार भागों में संकलित है-
  • चिंतामणि भाग-1 1939 ई. में रामचन्द्र शुक्ल द्वारा ही संपादित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-2 1945 ई. में विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के संपादन में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-3 नामवर सिंह के संपादन में 1983 ई. में प्रकाशित हुआ था।
  • चिन्तामणि भाग-4 2002 ई. में कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह के संपादन में प्रकाशित हुआ था।

Question 42

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
A.प्राप्तोदकI.व्यधिकरण बहुब्रीहि
B.वीणापाणिII.समानाधिकरण बहुब्रीहि
C.मारामारीIII.तुल्ययोग बहुब्रीहि
D.सचेतIV.व्यतिहार बहुब्रीहि

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-IV, B-I, C-II, D-III 

  2. BOption (b)

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  3. COption (c)

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  4. DOption (d)

    A-III, B-II, C-I, D-IV

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Correct answer

Answer: (c)C.

A-II, B-I, C-IV, D-III

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Pointsसूची-I का सूची-II से सही सुमेलन है - 

सूची-Iसूची-II
A.प्राप्तोदकII.समानाधिकरण बहुब्रीहि
B.वीणापाणिI.व्यधिकरण बहुब्रीहि
C.मारामारीIV.व्यतिहार बहुब्रीहि
D.सचेतIII.तुल्ययोग बहुब्रीहि

Question 43

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित निम्नलिखित कृतियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिये :

A. दो पंक्तियों के बीच

B. मुझे चाँद चाहिए

C. आंगन के पार द्वार

D. टोकरी में दिगंत

E. कविता के नए प्रतिमान

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    C, E, B, A, D

  2. BOption (b)

    B, A, E, D, C

  3. COption (c)

    C, A, E, B, D

  4. DOption (d)

    A, E, C, D, В

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Correct answer

Answer: (a)A.

C, E, B, A, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- C, E, B, A, D

Key Points

रचनाप्रकाशन वर्षरचनाकारविधा
आंगन के पार द्वार1961 ई.अज्ञेयकाव्य
कविता के नए प्रतिमान1968 ई.नामवर सिंहआलोचना
मुझे चाँद चाहिए1993 ई.सुरेन्द्र वर्माउपन्यास
दो पंक्तियों के बीच2000 ई.राजेश जोशीकाव्य
टोकरी में दिगंत2014 ई.अनामिकाकाव्य

Important Pointsअज्ञेय-

  • **जन्म-**1911-1987ई.
  • 'अज्ञेय' हिन्दी के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, न���बन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर एवं अध्यापक रहे हैं।
  • इन्हें कविता में नये प्रयोग के लिए जाना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • भग्नदूत 1933ई.)
  • चिन्ता 1942ई.)
  • इत्यलम्1946ई.)
  • हरी घास पर क्षण भर (1949ई.)
  • बावरा अहेरी (1954ई.)
  • इन्द्रधनुष रौंदे हुये ये (1957ई.) आदि।

नामवर सिंह-

  • जन्म- 1926-2019 ई.
  • शुक्लोत्तर युग के महत्त्वपूर्ण आलोचक है।
  • आलोचनात्मक ग्रंथ-
  • छायावाद(1955ई.)
  • इतिहास और आलोचना(1957ई.)
  • कहानी:नयी कहानी(1965ई.)
  • कविता के नये प्रतिमान(1968ई.)
  • दूसरी परंपरा की खोज(1982ई.) आदि।

सुरेन्द्र वर्मा-

  • उपन्यास-
  • अँधेरे से परे(1980 ई.)
  • दो मुर्दों के लिये गुलदस्ता(1998 ई.) आदि।

राजेश जोशी-

  • जन्म-1946-2014 ई.
  • काव्य संग्रह-
  • एक दिन बोलेंगे पेड़
  • मिट्टी का चेहरा
  • समरगाथा
  • चाँद की वर्तनी आदि।

अनामिका-

  • जन्म- 1961 ई.
  • रचनाएं -
  • गलत पते की चिट्ठी (1979 ई.)
  • बीजाक्षर (1993 ई.)
  • समय के शहर में (1990 ई.)
  • कविता में औरत (2004 ई.)
  • खुरदरी हथेलियां (2005 ई.)
  • दुबधान (2007 ई.)
  • टोकरी में दिगंत: थेरी गाथा (2014 ई.)

Question 44

निम्नलिखित में से किस पत्रिका का सम्पादन बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' ने किया था:

  1. AOption (a)

    सरस्वती

  2. BOption (b)

    सुदर्शन

  3. COption (c)

    जासूस

  4. DOption (d)

    आनंद कादम्बिनी

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Correct answer

Answer: (d)D.

आनंद कादम्बिनी

Why this answer is correct

सही उत्तर है- आनंद कादम्बिनी

Key Pointsआनंद कादम्बिनी-

  • संपादक-बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
  • प्रकाशन वर्ष-1881ई.
  • प्रकाशन स्थान-मिर्जापुर
  • यह मासिक पत्रिका थी।
  • पुस्तकों की आलोचना सर्वप्रथम इसी पत्रिका में छपी।

Important Pointsबदरीनारायण चौधरी प्रेमघन-

  • जन्म-1855-1922 ई.
  • भारतेन्दु युगीन कवि हैं।
  • ये उर्दू में अब्र नाम से कवितायेँ ��िखते थे।
  • रचनाएँ-
  • जीर्ण जनपद
  • आनंद अरुणोदय
  • मयंक महिमा
  • वर्षा बिन्दु
  • लालित्य लहरी आदि।
  • इनकी समस्त कविताओं का संकलन 'प्रेमघन-सर्वस्व' शीर्षक से किया गया है।

Question 45

दलित आन्दोलन से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सत्य है?

A. महात्मा फुले ने 1863 में सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी।

B. 1913 में गुजरात विधानसभा ने दलितों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं और संस्थाओं के उपयोग का समान अधिकार दिलाने के लिए प्रस्ताव पारित किया।

C. डॉ अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने साइमन कमीशन का समर्थन किया।

D. गोलमेज सम्मलेन में अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी।

E. गाँधी जी सिद्धान्ततः पृथक निर्वाचक मंडल के समर्थक थे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    केवल A और B

  2. BOption (b)

    केवल B और E

  3. COption (c)

    केवल C और E

  4. DOption (d)

    केवल C और D

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल C और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है - केवल C और D

Key Pointsदलित आन्दोलन से संबंधित तथ्य सत्य है-

  • C. डॉ अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने साइमन कमीशन का समर्थन किया।
  • D. गोलमेज सम्मलेन में अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी।

Important Points

  • A. महात्मा फुले ने 1863 में सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी - असत्य
  • ​सत्य शोधक समाज की स्थापना 1873 में हुई थी।
  • B. 1913 में गुजरात विधानसभा ने दलितों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं और संस्थाओं के उपयोग का समान अधिकार दिलाने के लिए प्रस्ताव पारित किया - असत्य
  • ​ऐसा कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं है; यह 1930 के दशक में अंबेडकर के प्रयासों से संबंधित हो सकता है।
  • C. डॉ अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने साइमन कमीशन का समर्थन किया - सत्य
  • ​अंबेडकर ने साइमन कमीशन का समर्थन किया था, हालांकि बाद में उन्होंने इसकी सीमाओं को स्वीकारा।
  • D. गोलमेज सम्मेलन में अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी - सत्य
  • ​अंबेडकर ने 1932 में गोलमेज सम्मेलन में यह मांग रखी थी।
  • E. गाँधी जी सिद्धान्ततः पृथक निर्वाचक मंडल के समर्थक थे - असत्य
  • ​गाँधी जी इसके खिलाफ थे और इसके बजाय संयुक्त निर्वाचन की वकालत की थी।

Question 46

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I निबंधसूची-II पंक्ति
A.उठ जाग मुसाफिरI.हल चलाने वाले ओर भेड़ चराने वाले स्वभाव से साधु होते हैं।
B.उत्तराफाल्गुनी के आस-पासII.जवानी की आँखों में ज्वाला होती है, बुढ़ापे की आँखों में प्रकाश होता है।
C.मजदूरी और प्रेमIII.अल्पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है।
D.नाखून क्यों बढ़ते हैंIV.जवानी एक चमाचम धारदार खड्ग है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-IV, C-I, D-III 

  2. BOption (b)

    A-IV, B-I, C-II, D-III 

  3. COption (c)

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  4. DOption (d)

    A-III, B-IV, C-II, D-I

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Correct answer

Answer: (a)A.

A-II, B-IV, C-I, D-III 

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-II, B-IV, C-I, D-III

Key Points

  • दिए गए विकल्पों का सही मिलान इस प्रकार है:
निबंधपंक्ति
उठ जाग मुसाफिरजवानी की आँखों में ज्वाला होती है, बुढ़ापे की आँखों में प्रकाश होता है।
उत्तराफाल्गुनी के आस-पासजवानी एक चमाचम धारदार खड्ग है।
मजदूरी और प्रेमहल चलाने वाले ओर भेड़ चराने वाले स्वभाव से साधु होते हैं।
नाखून क्यों बढ़ते हैंअल्पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है।

Important Pointsउठ जाग मुसाफिर-

  • रचनाकार-विवेकी राय
  • विधा-ललित निबंध
  • विषय-इस निबंध में लेखक ने गाँव की संस्कृति, लोक जीवन और समय के साथ आते बदलावों का चित्रण किया है।

उत्तराफाल्गुनी के आस-पास-

  • रचनाकार-कुबेरनाथ राय
  • विधा-ललित निबंध
  • विषय-यह निबंध मनुष्य की आयु के विभिन्न पड़ावों, विशेषकर प्रौढ़ावस्था (40 से 45 वर्ष) का दार्शनिक विवेचन करता है।

मजदूरी और प्रेम-

  • रचनाकार-अध्यापक पूर्ण सिंह
  • विधा-निबंध
  • विषय-इसमें श्रम की महत्ता और मजदूर के प्रति प्रेम व सम्मान को रेखांकित किया गया है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं-

  • रचनाकार-हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • विधा-ललित निबंध
  • विषय-यह निबंध मनुष्य की पाशविक प्रवृत्तियों और मानवीयता के संघर्ष को नाखूनों के माध्यम से व्यक्त करता है।

Additional Informationविवेकी राय-

  • जन्म-1924-2016 ई.
  • हिन्दी के प्रसिद्ध ललित निबंधकार और आंचलिक उपन्यासकार।
  • प्रमुख कृतियाँ-फिर बैतलवा डाल पर, जुलूस रुका है, गवईं गंध गुलाब आदि।

कुबेरनाथ राय-

  • जन्म-1933-1996 ई.
  • भारतीय संस्कृति और मिथकों के प्रकांड विद्वान ललित निबंधकार।
  • प्रमुख कृतियाँ-प्रिया नीलकंठी, रस आखेटक, गंधमादन, निषाद बाँसुरी आदि।

अध्यापक पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युग के श्रेष्ठ निबंधकार जिन्होंने केवल 6 निबंध लिखकर ख्याति प्राप्त की।
  • प्रमुख निबंध-आचरण की सभ्यता, सच्ची वीरता, पवित्रता, कन्यादान, अमेरिका का मस्त योगी वाल्ट व्हिटमैन।

हजारी प्रसाद द्विवेदी-

  • जन्म-1907-1979 ई.
  • हिन्दी के शीर्षस्थ निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार।
  • प्रमुख निबंध संग्रह-अशोक के फूल, कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज, आलोक पर्व।

Question 47

'मुर्दहिया' आत्मकथा को तुलसीराम ने विभिन्न उपशीर्षकों में विभाजित किया है, इन उपशीर्षकों का सही क्रम क्या है ?

A. मुर्दहिया के गिद्ध तथा लोकजीवन

B. भुतही पारिवारिक पृष्ठभूमि

C. भुतनिया नागिन

D. मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन

E. अकाल में अंधविश्वास

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    A, B, C, D, Е

  2. BOption (b)

    B, C, A, D, E

  3. COption (c)

    B, D, E, A, C

  4. DOption (d)

    A, D, C, B, Е

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Correct answer

Answer: (c)C.

B, D, E, A, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है- B, C, A, D, E

Key Pointsमुर्दहिया-

  • रचनाकार- तुलसीराम
  • प्रकाशन वर्ष-2010 ई.
  • यह तुलसीराम की आत्मकथा का प्रथम भाग है।
  • विधा-आत्मकथा
  • विषय-
  • इसमें आजमगढ़ के धरमपुर गाँव की दलित बस्ती के जीवन का यथार्थ चित्रण है।
  • लेखक ने अपने बचपन और स्कूली जीवन के संघर्षों को इसमें उकेरा है।
  • अध्यायों (उपशीर्षकों) का सही क्रम-
    1. भुतही पारिवारिक पृष्ठभूमि
    1. मुर्दहिया के गिद्ध तथा लोकजीवन
    1. अकाल में अंधविश्वास
    1. मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन
    1. अकाल में अंधविश्वास
    1. मुर्दहिया के स्कूल की होली
    1. तथागत की राह में

Important Pointsतुलसीराम की आत्मकथा के भाग-

  • मुर्दहिया (2010)- प्रथम भाग, जिसमें बचपन से लेकर हाईस्कूल तक की कथा है।
  • मणिकर्णिका (2013)- द्वितीय भाग, जिसमें उच्च शिक्षा और उसके बाद के जीवन का वर्णन है।

मुर्दहिया के प्रमुख उपशीर्षक (क्रमशः)-

  • भुतही पारिवारिक पृष्ठभूमि- इसमें लेखक ने अपने परिवार और अंधविश्वासों का वर्णन किया है।
  • मुर्दहिया के गिद्ध तथा लोकजीवन- गाँव के श्मशान 'मुर्दहिया' और वहाँ के सामाजिक परिवेश का चित्रण।
  • भुतनिया नागिन- गाँव में व्याप्त लोक-कथाओं और डरावने किस्सों का वर्णन।
  • अकाल में अंधविश्वास- सूखे के समय समाज में व्याप्त कुरीतियों का वर्णन।
  • मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन- लेखक की प्राथमिक शिक्षा और संघर्ष की कहानी।

Additional Informationतुलसीराम-

  • जन्म-1949-2015 ई.
  • ये जेएनयू (JNU) में प्रोफेसर रहे और रूसी मामलों के विशेषज्ञ थे।
  • दलित साहित्य में इनकी आत्मकथा 'मुर्दहिया' मील का पत्थर मानी जाती है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-
  • मुर्दहिया गाँव का वह स्थान था जहाँ मरे हुए जानवरों को फेंका जाता था और जहाँ श्मशान भी था।
  • लेखक ने अपनी आत्मकथा में व्यंग्य और यथार्थ का अद्भुत संतुलन बनाया है।

Question 48

'मैला आँचल' के अनुसार मेरीगंज गाँव से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. मेरीगंज गाँव का नाम अंग्रेज अधिकारी ने अपनी बहन के नाम पर रखा था।

B. मेरीगंज गाँव में सोलह बरन के लोग रहते हैं।

C. गाँव में तीन प्रमुख दल हैं: कायस्थ,राजपूत और यादव ।

D. उपन्यास के अनुसार ब्राह्मण लोग तृतीय शक्ति हैं।

E. गाँव के अन्य जाति के लोगों का अपना पृथक दल है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और D

  2. BOption (b)

    केवल A, B और E

  3. COption (c)

    केवल C और D

  4. DOption (d)

    केवल C और E

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल C और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल C और E

Key Pointsमैला आँचल (मेरीगंज गाँव)-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ 'रेणु'
  • प्रकाशन वर्ष-1954 ई.
  • यह हिन्दी का प्रथम 'आंचलिक उपन्यास' माना जाता है।
  • गाँव का नामकरण- मेरीगंज गाँव का नाम अंग्रेज अधिकारी (मार्टिन) ने अपनी पत्नी (मेरी) के नाम पर रखा था, न कि बहन के नाम पर। (अतः कथन A असत्य है)
  • जनसंख्या संरचना- मेरीगंज गाँव में बारह बरन (बारह वर्ण/जाति) के लोग रहते हैं, न कि सोलह बरन के। (अतः कथन B असत्य है)
  • प्रमुख दल- गाँव में तीन प्रमुख दल हैं: कायस्थ, राजपूत और यादव। (अतः कथन C सत्य है)
  • शक्तियों का विभाजन- उपन्यास के अनुसार गाँव में कायस्थ और राजपूत दो प्रमुख शक्तियाँ हैं। ब्राह्मणों का कोई स्वतंत्र प्रभावशाली दल नहीं है। (अतः कथन D असत्य है)
  • अन्य दल- गाँव के अन्य जाति के लोगों का अपना पृथक दल है, जिसे 'ग़ैर-दल' या अन्य समूहों के रूप में देखा जाता है। (अतः कथन E सत्य है)

Important Pointsमैला आँचल की विशेषताएँ-

  • विषय-वस्तु- इसमें पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन के बाद के ग्रामीण भारत की विसंगतियों, राजनीति और पिछड़ेपन का चित्रण है।
  • मुख्य पात्र-
  • डॉ. प्रशांत (नायक)
  • कमली (नायिका)
  • बावनदास
  • बालदेव
  • कालीचरण
  • विश्वनाथ प्रसाद
  • मठ के महंत सेवादास
  • भाषा-शैली- इसमें आंचलिक शब्दों, लोकगीतों, मुहावरों और स्थानीय संस्कृति का व्यापक प्रयोग किया गया है।

Additional Informationफणीश्वरनाथ 'रेणु'-

  • जन्म-1921-1977 ई.
  • हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध आंचलिक कथाकार हैं।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • परती परिकथा (1957 ई.)
  • दीर्घतपा (1963 ई.)
  • जुलूस (1965 ई.)
  • कितने चौराहे (1966 ई.)
  • पलटू बाबू रोड (1979 ई.)
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • तीसरी कसम (उर्फ मारे गए गुलफाम)
  • लाल पान की बेगम
  • रसप्रिया
  • संवदिया

Question 49

'हिन्दुस्तानी ग्रामर' से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. 'हिन्दुस्तानी ग्रामर' जोहन जोसुआ केटेलर द्वारा डच भाषा में लिखित हिन्दुस्तानी व्याकरण की पुस्तक है।

B. 'हिन्दुस्तानी ग्रामर' पुस्तक 1689 में लिखी गई।

C. 'हिन्दुस्तानी ग्रामर' पुस्तक डच ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों के स्थानीय भाषा के ज्ञान हेतु लिखी गई थी।

D. यह पुस्तक देवनागरी लिपि में लिखी गई है।

E. इसमें ब्राह्मणों द्वारा व्यवहत लिपि का नाम उन्होंने अक्षर नागरी बताया है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A और B

  2. BOption (b)

    केवल A और C

  3. COption (c)

    केवल B, D और E

  4. DOption (d)

    केवल C, D और E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A और C

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सही उत्तर है- केवल A और C

Key Points'हिन्दुस्तानी ग्रामर' (जोहन जोसुआ केटेलर)-

  • लेखक- जोहन जोसुआ केटेलर (John Joshua Ketelaar)
  • रचना काल- 1715 ई. के आसपास (कथन B गलत है क्योंकि इसमें 1689 दिया गया है)।
  • भाषा- यह मूल रूप से डच भाषा में लिखी गई थी। (कथन A सत्य है)
  • उद्देश्य- यह पुस्तक डच ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारिय���ं को स्थानीय भाषा (हिन्दुस्तानी) सिखाने के उद्देश्य से लिखी गई थी ताकि वे व्यापारिक कार्य सुगमता से कर सकें। (कथन C सत्य है)
  • लिपि- यह पुस्तक देवनागरी में नहीं बल्कि लैटिन लिपि में लिखी गई थी। (कथन D गलत है)

Important Pointsहिन्दुस्तानी व्याकरण का इतिहास-

  • जोहन जोसुआ केटेलर को प्रथम हिन्दुस्तानी व्याकरणकार माना जाता है।
  • केटेलर की इस पुस्तक का संपादन 'डेविड मिल' ने 1743 ई. में लैटिन भाषा में किया था।
  • कथन E के संदर्भ में, केटेलर ने लिपियों का वर्गीकरण इस प्रकार नहीं किया था; यह तथ्य अन्य परवर्ती व्याकरणों से संबंधित हो सकता है।
  • ग्रियर्सन ने अपने 'भाषाई सर्वेक्षण' (Linguistic Survey of India) में केटेलर के व्याकरण का उल्लेख किया है।

Additional Informationअन्य प्रमुख व्याकरण ग्रंथ-

  • ए ग्रामर ऑफ द हिन्दुस्तानी लैंग्वेज (1772)- बेंजामिन शुल्ज़।
  • ए ग्रामर ऑफ द हिन्दुस्तानी लैंग्वेज (1788)- जॉन गिलक्राइस्ट।
  • हिन्दी व्याकरण (1920)- कामताप्रसाद गुरु (इसे हिन्दी का सबसे प्रामाणिक व्याकरण माना जाता है)।
  • हिन्दी शब्दानुशासन- किशोरीदास वाजपेयी।

निष्कर्ष-

  • कथन A सही है (डच भाषा में लिखित)।
  • कथन C सही है (डच ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों हेतु)।
  • अतः विकल्प B (केवल A और C) सही उत्तर है।

Question 50

अज्ञेय की निम्नलिखित कहानियों को उनके प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित करें :

A. गैंग्रीन

B. जयदोल

C. हीली बोन की बत्तखें

D. कलाकार की मुक्ति

E. विपथगा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    E, A, C, B, D

  2. BOption (b)

    A, C, B, E, D

  3. COption (c)

    B, C, E, D, А

  4. DOption (d)

    B, A, C, D, E

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Correct answer

Answer: (a)A.

E, A, C, B, D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- E, A, C, B, D

Key Points

  • अज्ञेय की कहानियों का प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही अनुक्रम निम्नलिखित है:
  • विपथगा- 1937 ई.
  • गैंग्रीन- 1934 ई. (यह 'विपथगा' संग्रह में संकलित है, परन्तु संग्रह का प्रकाशन 1937 में हुआ)
  • हीली बोन की बत्तखें- 1948 ई. (यह 'शरणार्थी' संग्रह में संकलित है)
  • जयदोल- 1951 ई.
  • कलाकार की मुक्ति- 1954 ई. (यह 'ये तेरे प्रतिरूप' संग्रह में संकलित है)

Important Pointsसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'-

  • जन्म- 1911-1987 ई.
  • विधा- कवि, शैलीकार, कथा-साहित्यकार, ललित-निबंधकार, संपादक और अध्यापक।
  • अज्ञेय को 'प्रयोगवाद' एवं 'नई कविता' का प्रवर्तक माना जाता है।
  • कहानी संग्रह-
  • विपथगा (1937 ई.)
  • परम्परा (1940 ई.)
  • कोठरी की बात (1945 ई.)
  • शरणार्थी (1948 ई.)
  • जयदोल (1951 ई.)
  • अमर वल्लरी (1954 ई.)
  • ये तेरे प्रतिरूप (1961 ई.)

गैंग्रीन (कहानी)-

  • यह अज्ञेय की सर्वाधिक चर्चित कहानी है।
  • इसका अन्य नाम 'रोज' है।
  • मुख्य पात्र- मालती, महेश्वर (मालती का पति) और अतिथि (लेखक)।
  • यह कहानी मध्यमवर्गीय भारतीय समाज की घरेलू स्त्री के जीवन की एकरसता और ऊब को चित्रित करती है।

विपथगा (कहानी संग्रह)-

  • यह अज्ञेय का प्रथम कहानी संग्रह है।
  • इसमें क्रांतिकारी जीवन से संबंधित कहानियाँ संकलित हैं।

Additional Informationअज्ञेय की अन्य महत्वपूर्ण कृतियाँ-

  • उपन्यास-
  • शेखर: एक जीवनी (भाग-1, 1941 ई.; भाग-2, 1944 ई.)
  • नदी के द्वीप (1951 ई.)
  • अपने-अपने अजनबी (1961 ई.)
  • काव्य संग्रह-
  • भग्नदूत (1933 ई.)
  • इत्यलम् (1946 ई.)
  • हरी घास पर क्षण भर (1949 ई.)
  • इंद्रधनुष रौंदे हुए ये (1954 ई.)
  • अरी ओ करुणा प्रभामय (1959 ई.)
  • आँगन के पार द्वार (1961 ई.) - इस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • कितनी नावों में कितनी बार (1967 ई.) - इस पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
  • यात्रा वृत्तांत-
  • अरे यायावर रहेगा याद (1953 ई.)
  • एक बूँद सहसा उछली (1960 ई.)
  • संपादन- तार सप्तक (1943), दूसरा सप्तक (1951), तीसरा सप्तक (1959), चौथा सप्तक (1979)।

Question 51

निम्नलिखित में से कौन सी काव्य पंक्तियाँ अमीर खुसरो द्वारा रचित हैं:

A. एकनार पिया को भानी। तन वाको सगरा ज्यों पानी ॥

B. सूनि सेज पिय साल रे, पिय बिनु घर मोए आजि।

C. एक नार ने अचरजकिया। सांप मार पिंजरे में दिया ।

D. अगिन जो लागी नीर में कंदो जलिया झारि।

E. चाम मांस वाके नहीं नेक । हाड़ हाड़ में वाके छेद ॥

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल B, D

  2. BOption (b)

    केवल B,C, E

  3. COption (c)

    केवल A, C, E

  4. DOption (d)

    केवल A, B,D

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Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A, C, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A, C, E

Key Pointsअमीर खुसरो की काव्य पंक्तियाँ-

  • A. एकनार पिया को भानी। तन वाको सगरा ज्यों पानी ॥ - यह अमीर खुसरो की प्रसिद्ध पहेली है। (उत्तर: परछाईं)
  • C. एक नार ने अचरज किया। सांप मार पिंजरे में दिया ॥ - यह भी खुसरो की पहेली है। (उत्तर: दीया और बाती)
  • E. चाम मांस वाके नहीं नेक। हाड़ हाड़ में वाके छेद ॥ - यह खुसरो की पहेली है। (उत्तर: बाँसुरी)

Important Pointsअन्य पंक्तियों का परिचय-

  • B. सूनि सेज पिय साल रे, पिय बिनु घर मोए आजि।
  • यह पंक्ति विद्यापति की है।
  • यह मैथिली भाषा में रचित विरह वर्णन की पंक्ति है।
  • D. अगिन जो लागी नीर में कंदो जलिया झारि।
  • यह पंक्ति कबीरदास की है।
  • यह कबीर की उलटबाँसियों के अंतर्गत आती है।

Additional Informationअमीर खुसरो-

  • समय- 1253-1325 ई.
  • खुसरो को 'हिन्द का तोता' (तूतिये-ए-हिन्द) कहा जाता है।
  • इन्होंने खड़ी बोली हिन्दी के आदि कवि के रूप में ख्याति प्राप्त की।
  • प्रमुख विधाएँ- पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सखुने, ढकोसला, गजल आदि।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • खालिकबारी (कोश ग्रंथ)
  • पहेलियाँ
  • मुकरियाँ
  • दो सखुने
  • नूह सिपिहर
  • खुसरो निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे।

विद्यापति-

  • इन्हें 'मैथिल कोकिल' कहा जाता है।
  • रचनाएँ- पदावली (मैथिली), कीर्तिलता, कीर्तिपताका (अवहट्ट)।

कबीरदास-

  • भक्तिकालीन निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख कवि।
  • रचना- बीजक (साखी, सबद, रमैनी)।
  • इनकी भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है।

Question 52

'सिक्का बदल गया' कहानी का पात्र नहीं है?

  1. AOption (a)

    शेरे

  2. BOption (b)

    दाउद खां

  3. COption (c)

    शाहनी

  4. DOption (d)

    ददन मियां

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Correct answer

Answer: (d)D.

ददन मियां

Why this answer is correct

सही उत्तर है- ददन मियां

Key Pointsसिक्का बदल गया-

  • रचनाकार- कृष्णा सोबती
  • प्रकाशन वर्ष-1948 ई.
  • यह कहानी भारत-विभाजन की त्रासदी पर आधारित है।
  • विधा-कहानी
  • विषय-
  • इसमें विभाजन के समय मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों के टूटने का चित्रण है।
  • मुख्य पात्र-
  • शाहनी (मुख्य पात्र, गाँव की मालकिन)
  • शेरे (शाहनी का पाला हुआ लड़का, जो बाद में विद्रोही हो जाता है)
  • दाउद खां (थानेदार)
  • हसैना (शेरे की पत्नी)
  • बेगू
  • जिलानी

Important Pointsददन मियां-

  • ददन मियां 'सिक्का बदल गया' कहानी का पात्र नहीं है।
  • यह फणीश्वरनाथ 'रेणु' के उपन्यास 'मैला आँचल' का एक गौण पात्र है।

शेरे-

  • यह शाहनी का विश्वासपात्र था जिसे शाहनी ने अपने बच्चे की तरह पाला था।
  • विभाजन की साम्प्रदायिक आग में वह शाहनी को ही मारने की योजना बनाता है।

शाहनी-

  • कहानी की केंद्रीय पात्र है।
  • वह गाँव की एक प्रतिष्ठित और उदार महिला है जिसे अंततः अपना घर छोड़कर कैंप में जाना पड़ता है।

Additional Informationकृष्णा सोबती-

  • जन्म-1925-2019 ई.
  • हिन्दी की विशिष्ट कथाकार हैं।
  • इन्हें 2017 में भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • डार से बिछुड़ी (1958 ई.)
  • मित्रो मरजानी (1967 ई.)
  • सूरजमुखी अँधेरे के (1972 ई.)
  • ज़िन्दगीनामा (1979 ई.)
  • ऐ लड़की (1991 ई.)
  • समय सरगम (2000 ई.)
  • बादलों के घेरे (कहानी संग्रह)
  • हम हशमत (शब्दचित्र-संस्मरण)

फणीश्वरनाथ 'रेणु'-

  • जन्म-1921-1977 ई.
  • हिन्दी के प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासकार हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • मैला आँचल (1954 ई.)
  • परती परिकथा (1957 ई.)
  • दीर्घतपा (1963 ई.)
  • जुलूस (1965 ई.)
  • कितने चौराहे (1966 ई.)
  • ठुमरी (कहानी संग्रह)
  • आदिम रात्रि की महक (कहानी संग्रह)

Question 53

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
A.देह दुलहिया की बढ़ेI.हाँसी - बिनु मुसकानि
B.कानन-चारी नैन-मृगII.नैननु ही सब बात
C.भरे भीन में करत हैंIII.ज्यों ज्यों जोबन जोति
D.चितवनि रूखे दृगन कीIV.नागर नरनु सिकार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-III, B-II, C-I, D-IV 

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-II, D-I

  3. COption (c)

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  4. DOption (d)

    A-IV, B-III, C-II, D-I

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Correct answer

Answer: (b)B.

A-III, B-IV, C-II, D-I

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-II, D-I

Key Points

  • प्रस्तुत प्रश्न में दी गई काव्य पंक्तियाँ रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि बिहारीलाल द्वारा रचित 'बिहारी सतसई' से उद्धृत हैं।
  • सही सुमेलन इस प्रकार है-
सूची-I (पंक्ति का प्रथम भाग)सूची-II (पंक्ति का द्वितीय भाग)
देह दुलहिया की बढ़ेज्यों ज्यों जोबन जोति (A-III)
कानन-चारी नैन-मृगनागर नरनु सिकार (B-IV)
भरे भीन में करत हैंनैननु ही सब बात (C-II)
चितवनि रूखे दृगन कीहाँसी - बिनु मुसकानि (D-I)

Important Pointsबिहारीलाल-

  • काल-रीतिकाल (रीतिसिद्ध काव्यधारा)
  • प्रमुख रचना-बिहारी सतसई (एकमात्र रचना)
  • भाषा-ब्रजभाषा
  • छंद-दोहा
  • विशेषता-
  • बिहारी को 'गागर में सागर' भरने वाला कवि कहा जाता है।
  • इनकी सतसई में लगभग 713 दोहे संकलित हैं।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- "बिहारी का एक-एक दोहा हिंदी साहित्य में एक-एक रत्न माना जाता है।"

Additional Informationबिहारी सतसई की प्रमुख पंक्तियाँ-

  • "सतसैया के दोहरे, ज्यों नाविक के तीर। देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर।।"
  • "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सौंह करै भौहनु हँसै, दैन कहै नटि जाय।।"
  • "कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन में करत हैं नैननु ही सब बात।।"
  • "मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परै, स्याम हरित दुति होइ।।"

Question 54

भाषा की विशेषताओं के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य है:

A. भाषा पैतृक सम्पदा है।

B. भाषा परम्परा है,व्यक्ति उसका अर्जन कर सकता है, उसे उत्पन्न नहीं कर सकता।

C. भाषा सूक्ष्मता से स्थूलता और प्रौढ़ता से अप्रोढ़ता की और जाती है।

D. प्रत्येक भाषा की एक भौगोलिक सीमा होती है।

E. प्रत्येक भाषा की व्याकरणिक संरचना समान होती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल E, C और A

  2. BOption (b)

    केवल C और A

  3. COption (c)

    केवल B और D

  4. DOption (d)

    केवल B, E और D

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

केवल B और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल B और D

Key Points

  • भाषा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  • भाषा अर्जित संपत्ति है- मनुष्य इसे अपने वातावरण और समाज से सीखता है, यह पैतृक संपत्ति नहीं है। (अतः कथन A असत्य है)
  • भाषा सामाजिक संस्था है- भाषा का जन्म समाज में होता है और उसका विकास भी समाज में ही होता है।
  • भाषा परंपरा है- व्यक्ति उसका अर्जन कर सकता है, उसे उत्पन्न नहीं कर सकता। भाषा परंपरा से चली आ रही है, व्यक्ति उसमें केवल परिवर्तन कर सकता है। (अतः कथन B सत्य है)
  • भाषा का कोई अंतिम स्वरूप नहीं होता- भाषा हमेशा परिवर्तनशील होती है।
  • भाषा स्थूलता से सूक्ष्मता और अप्रोढ़ता से प्रौढ़ता की ओर जाती है- भाषा का विकास हमेशा सरलता और स्पष्टता की ओर होता है। (अतः कथन C असत्य है क्योंकि इसमें विपरीत क्रम दिया गया है)
  • प्रत्येक भाषा की एक भौगोलिक सीमा होती है- एक निश्चित क्षेत्र के बाद भाषा का स्वरूप बदलने लगता है। (अतः कथन D सत्य है)
  • प्रत्येक भाषा की संरचना पृथक होती है- हर भाषा का अपना व्याकरण, ध्वनि समूह और वाक्य विन्यास होता है, जो दूसरी भाषा से भिन्न होता है। (अतः कथन E असत्य है)

Important Pointsभाषा के विविध रूप-

  • बोली- भाषा के क्षेत्रीय रूप को बोली कहते हैं।
  • परिनिष्ठित भाषा- जब कोई बोली व्याकरण से परिष्कृत होकर एक मानक रूप धारण कर लेती है।
  • राजभाषा- जिस भाषा में सरकारी कामकाज किया जाता है।
  • राष्ट्रभाषा- वह भाषा जिसका प्रयोग देश के अधिकांश नागरिकों द्वारा किया जाता है।

Additional Informationहिन्दी भाषा की स्थिति-

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी है।
  • हिन्दी भारोपीय (Indo-European) परिवार की भाषा है।
  • हिन्दी की जननी संस्कृत है। संस्कृत से पालि, पालि से प्राकृत, प्राकृत से अपभ्रंश और अपभ्रंश से आधुनिक हिन्दी का विकास हुआ।
  • भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से हिन्दी और उर्दू एक ही भाषा की दो शैलियाँ हैं।

Question 55

"छायावादी कवियों की कल्पना लोक की उड़ान अपनी अक्षमता की पूर्ति का प्रयास है। यह किसका कथन है?

  1. AOption (a)

    जैनेन्द्र

  2. BOption (b)

    अज्ञेय

  3. COption (c)

    देवराज

  4. DOption (d)

    इलाचंद्र जोशी

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

इलाचंद्र जोशी

Why this answer is correct

सही उत्तर है- इलाचंद्र जोशी

Key Pointsइलाचंद्र जोशी-

  • कथन- "छायावादी कवियों की कल्पना लोक की उड़ान अपनी अक्षमता की पूर्ति का प्रयास है।"
  • इलाचंद्र जोशी हिंदी साहित्य के प्रमुख मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार और आलोचक हैं।
  • उन्होंने छायावाद की प्रवृत्तियों का विश्लेषण मनोवैज्ञानिक धरातल पर किया है।
  • उनका मानना था कि छायावादी कवियों का पलायनवाद और कल्पनाप्रियता उनकी वास्तविक जीवन की कुंठाओं और अक्षमताओं का परिणाम है।

Important Pointsजैनेन्द्र-

  • परिचय- हिंदी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार।
  • प्रमुख उपन्यास- परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, सुखदा आदि।
  • इन्हें हिंदी का 'गोर्की' भी कहा जाता है।

अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)-

  • परिचय- प्रयोगवाद एवं नई कविता के प्रवर्तक।
  • संपादन- तार सप्तक (1943 ई.)।
  • प्रमुख कृतियाँ- आंगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार, शेखर: एक जीवनी।

डॉ. देवराज-

  • परिचय- मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार और विचारक।
  • प्रमुख रचना- 'अजय की डायरी' (उपन्यास), 'छायावाद का पतन' (आलोचना)।
  • इन्होंने छायावाद के ह्रास के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला है।

Additional Informationइलाचंद्र जोशी की प्रमुख रचनाएँ-

  • उपन्यास-
  • लज्जा (1929 ई.)
  • संन्यासी (1940 ई.)
  • परदे की रानी (1942 ई.)
  • प्रेत और छाया (1944 ई.)
  • जिप्सी (1952 ई.)
  • जहाज का पंछी (1954 ई.)
  • आलोचना-
  • साहित्य सर्जना
  • विश्लेषण
  • देखा-परखा

छायावाद के संबंध में अन्य महत्वपूर्ण कथन-

  • डॉ. नगेंद्र- "छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है।"
  • जयशंकर प्रसाद- "जब वेदना के आधार पर स्वानुभूतिमयी अभिव्यक्ति होने लगी, तब हिंदी में उसे छायावाद के नाम से अभिहित किया गया।"
  • रामचंद्र शुक्ल- "छायावाद का प्रयोग दो अर्थों में समझना चाहिए- एक तो रहस्यवाद के अर्थ में... दूसरा काव्य शैली या पद्धति विशेष के व्यापक अर्थ में।"
  • महादेवी वर्मा- "छायावाद तत्वतः प्रकृति के बीच जीवन का उद्गीथ है।"

Question 56

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I रचनाकारसूची-II रचना
A.अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔधI.प्रह्लाद चरित्र
B.लाला श्रीनिवास दासII.प्रयुम्न विजय
C.राधाचरण गोस्वामीIII.दमयंती स्वयंवर
D.बालकृष्ण भट्टIV.अमरसिंह राठौर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-I, C-IV, D-III

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-I, D-II

  3. COption (c)

    A-IV, B-II, C-I, D-III

  4. DOption (d)

    A-II, B-III, C-I, D-IV

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

A-II, B-I, C-IV, D-III

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-II, B-I, C-IV, D-III

Key Points

  • सही मिलान इस प्रकार है:
सूची-I (रचनाकार)सूची-II (रचना)
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'प्रद्युम्न विजय
लाला श्रीनिवास दासप्रह्लाद चरित्र
राधाचरण गोस्वामीअमरसिंह राठौर
बालकृष्ण भट्टदमयंती स्वयंवर

Important Pointsप्रद्युम्न विजय-

  • रचनाकार- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  • प्रकाशन वर्ष- 1893 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय- इसमें श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के विजय की कथा वर्णित है।

प्रह्लाद चरित्र-

  • रचनाकार- लाला श्रीनिवास दास
  • प्रकाशन वर्ष- 1888 ई.
  • विधा- नाटक
  • विषय- यह पौराणिक नाटक है जिसमें भक्त प्रह्लाद की कथा का चित्रण है।

अमरसिंह राठौर-

  • रचनाकार- राधाचरण गोस्वामी
  • प्रकाशन वर्ष- 1895 ई.
  • विधा- ऐतिहासिक नाटक
  • विषय- इसमें अमरसिंह राठौर की वीरता और स्वाभिमान की ऐतिहासिक कथा है।

दमयंती स्वयंवर-

  • रचनाकार- बालकृष्ण भट्ट
  • विधा- नाटक
  • विषय- यह नल-दमयंती की पौराणिक कथा पर आधारित नाटक है।

Additional Informationअयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'-

  • जन्म- 1865-1947 ई.
  • इन्हें 'कवि सम्राट' और 'आधुनिक काल का सूरदास' कहा जाता है।
  • अन्य नाटक- रुक्मिणी परिणय (1894 ई.)।

लाला श्रीनिवास दास-

  • जन्म- 1850-1907 ई.
  • इन्होंने हिंदी का प्रथम उपन्यास 'परीक्षा गुरु' (1882 ई.) लिखा।
  • अन्य नाटक- रणधीर-प्रेममोहिनी, तप्ता संवरण, संयोगिता स्वयंवर।

बालकृष्ण भट्ट-

  • जन्म- 1844-1914 ई.
  • इन्हें 'हिंदी का स्टील' कहा जाता है।
  • अन्य नाटक- बाल-विवाह, कलिराज की सभा, रेल का विकट खेल, वृहन्नला आदि।

राधाचरण गोस्वामी-

  • जन्म- 1859-1925 ई.
  • ये भारतेंदु मंडल के प्रमुख कवि और लेखक थे।
  • अन्य नाटक- सती चंद्रावली, श्रीदामा, तन-मन-धन गोसाईं जी के अर्पण (प्रहसन)।

Question 57

'चीफ की दावत' कहानी से दिए गये निम्नलिखित संवादों में से कौन से संवाद शामनाथ की पत्नी के हैं ?

A. इन्हें पिछवाड़े इनकी सहेली के घर भेज दो,रात-भर बेशक वहीं रहें. कल आ जाएँ।

B. तो इन्हें कह देंगे कि अंदर से दरवाजा बंद कर लें।

C. कोई ढंग की बात हो, तो भी कोई कहे. अगर कोई उलटी-सीधी बात हो गई,चीफ को बुरा लगा, तो सारा मजा जाता रहेगा।

D. वाह कोई बढ़िया टप्पे सुना दो. दो पत्तर अनारों दे।

E. जो वह सो गयीं और नींद में खरट लेने लगी तो? साथ ही बरामदा है, जहाँ लोग खाना खाएँगे।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    केवल A, B और C

  2. BOption (b)

    केवल A और E

  3. COption (c)

    केवल E और D

  4. DOption (d)

    केवल C, D और B

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A और E

Key Pointsचीफ की दावत (कहानी)-

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • प्रकाशन वर्ष-1956 ई. (पहला कहानी संग्रह 'भाग्यरेखा' में संकलित)
  • विधा-कहानी
  • विषय-
  • यह मध्यवर्गीय समाज की दिखावे की प्रवृत्ति और वृद्धों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है।
  • कहानी में शामनाथ अपने चीफ को खुश करने के लिए अपनी बूढ़ी माँ को छिपाने का प्रयास करता है।
  • शामनाथ की पत्नी के संवाद-
  • "इन्हें पिछवाड़े इनकी सहेली के घर भेज दो, रात-भर बेशक वहीं रहें. कल आ जाएँ।" (संवाद A)
  • "जो वह सो गयीं और नींद में खर्राटे लेने लगी तो? साथ ही बरामदा है, जहाँ लोग खाना खाएँगे।" (संवाद E)

Important Pointsअन्य संवादों का विश्लेषण-

  • संवाद B- "तो इन्हें कह देंगे कि अंदर से दरवाजा बंद कर लें।" - यह शामनाथ का संवाद है।
  • संवाद C- "कोई ढंग की बात हो, तो भी कोई कहे. अगर कोई उलटी-सीधी बात हो गई, चीफ को बुरा लगा, तो सारा मजा जाता रहेगा।" - यह शामनाथ का संवाद है।
  • संवाद D- "वाह कोई बढ़िया टप्पे सुना दो. दो पत्तर अनारों दे।" - यह चीफ (मिस्टर शामनाथ के बॉस) का संवाद है, जब वह माँ से गाना सुनने की फरमाइश करता है।

Additional Informationभीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003 ई.
  • प्रगतिशील विचारधारा के प्रमुख कहानीकार और उपन्यासकार हैं।
  • प्रमुख कहानी संग्रह-
  • भाग्यरेखा (1953 ई.)
  • पहला पाठ (1957 ई.)
  • भटकती राख (1966 ई.)
  • पटरियाँ (1973 ई.)
  • वाङ्चू (1978 ई.)
  • शोभायात्रा (1981 ई.)
  • निशाचर (1983 ई.)
  • प्रमुख उपन्यास-
  • झरोखे (1967 ई.)
  • कड़ियाँ (1970 ई.)
  • तमस (1973 ई.) - साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त
  • बसन्ती (1980 ई.)
  • मैयादास की माढ़ी (1988 ई.)
  • कुन्तो (1993 ई.)

Question 58

निम्नलिखित में से कौन-कौन से शब्द स्त्रीलिंग हैं:

A. भिडंत

B. धनिया

C. रेणु

D. बुझोवल

E. रज्जु

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, C, E

  2. BOption (b)

    केवल B, D

  3. COption (c)

    केवल A, D, E

  4. DOption (d)

    केवल B, C

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

केवल B, C

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A, C, E

Key Points

  • दिए गए शब्दों का लिंग निर्धारण इस प्रकार है:
  • A. भिडंत- स्त्रीलिंग (जैसे- 'दोनों सेनाओं के बीच भिडंत हुई')
  • C. रेणु- स्त्रीलिंग (इसका अर्थ 'धूल' या 'मिट्टी' होता है, जो स्त्रीलिंग है)
  • E. रज्जु- स्त्रीलिंग (इसका अर्थ 'रस्सी' होता है, जो स्त्रीलिंग है)
  • अतः A, C और E स्त्रीलिंग शब्द हैं।

Important Points

  • B. धनिया- पुल्लिंग (मसालों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, परंतु धनिया, जीरा, नमक, केसर पुल्लिंग के अंतर्गत आते हैं)
  • D. बुझोवल- पुल्लिंग (पहेली बुझाने की क्रिया या खेल पुल्लिंग माना जाता है)

स्त्रीलिंग की पहचान-

  • जिन संज्ञा शब्दों के अंत में 'अ' 'आ' 'इ' 'ई' 'उ' 'ऊ' 'ऋ' आदि आते हैं, उनमें से कई स्त्रीलिंग होते हैं।
  • नदियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं (जैसे- गंगा, यमुना)।
  • तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं (जैसे- प्रथमा, द्वितीया)।
  • भाषाओं और बोलियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं (जैसे- हिन्दी, संस्कृत, अवधी)।
  • जिन शब्दों के अंत में 'वट', 'हट', 'ता', 'आई' प्रत्यय जुड़ते हैं, वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।

Additional Information

पुल्लिंग की पहचान-

  • देशों के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- भारत, चीन)।
  • पर्वतों के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- हिमालय, विंध्याचल)।
  • महीनों के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- चैत्र, वैशाख, जनवरी, फरवरी)।
  • दिनों के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- सोमवार, मंगलवार)।
  • धातुओं के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- सोना, ताँबा, लोहा), अपवाद- चाँदी (स्त्रीलिंग)।
  • अनाजों के नाम पुल्लिंग होते हैं (जैसे- गेहूँ, चावल, चना, बाजरा), अपवाद- मकई, ज्वार, मूँग (स्त्रीलिंग)।

Question 59

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I कृतिसूची-II पंक्ति
A.आवारा मसीहाI.जब मैं तीन साल का हुआ, गाँव में चेचक की महामारी आई। मेरे ऊपर गहरा प्रकोप पड़ा।
B.क्या भूलूँ क्या याद करूँII.लेखन एक अनवरत यात्रा जिसका न कोई अंतहै, न मंजिल । बस, निरंतर चलते जाना ही जिसकी अनिवार्यता है, शायद नियति भी।
C.मुर्दहियाIII.बाग में पहुंचकर पेड़ों के पास घूमते-घूमते वह मानो मन ही मन उनसे विदा लेने लगा। शायद वह सोच रहा था कि अब वापस आना हो या न हो।
D.एक कहानी यह भीIV.लेखन द्वारा अपने को अभिव्यक्त करते हुए मुझे चालीस वर्षों से ऊपर हो चुके हैं। इतने दिनों में में अपने हृदय पर हाथ रखकर कह सकता हूँ और कलाकार के लिए इससे बड़ी सौगंध नहीं कि मैंने कुछ भी ऐसा नहीं लिखा जो मेरे अंतर से नहीं उठा, जो उसमें नहीं उमड़ा घुमड़ा - अनुवादों के मामलों में भी।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-IV, C-III, D-I

  2. BOption (b)

    A-IV, B-I, C-III, D-II

  3. COption (c)

    A-II, B-III, C-I, D-IV

  4. DOption (d)

    A-III, B-IV, C-I, D-II

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

A-III, B-IV, C-I, D-II

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Points

  • सुमेलित रूप-
सूची-I (कृति)सूची-II (पंक्ति)
(A) आवारा मसीहा(III) बाग में पहुंचकर पेड़ों के पास घूमते-घूमते वह मानो मन ही मन उनसे विदा लेने लगा। शायद वह सोच रहा था कि अब वापस आना हो या न हो।
(B) क्या भूलूँ क्या याद करूँ(IV) लेखन द्वारा अपने को अभिव्यक्त करते हुए मुझे चालीस वर्षों से ऊपर हो चुके हैं। इतने दिनों में में अपने हृदय पर हाथ रखकर कह सकता हूँ... कि मैंने कुछ भी ऐसा नहीं लिखा जो मेरे अंतर से नहीं उठा।
(C) मुर्दहिया(I) जब मैं तीन साल का हुआ, गाँव में चेचक की महामारी आई। मेरे ऊपर गहरा प्रकोप पड़ा।
(D) एक कहानी यह भी(II) लेखन एक अनवरत यात्रा जिसका न कोई अंत है, न मंजिल। बस, निरंतर चलते जाना ही जिसकी अनिवार्यता है, शायद नियति भी।

Important Pointsआवारा मसीहा-

  • रचनाकार-विष्णु प्रभाकर
  • प्रकाशन वर्ष-1974 ई.
  • विधा-जीवनी
  • विषय-यह प्रसिद्ध बांग्ला कथाकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है।

क्या भूलूँ क्या याद करूँ-

  • रचनाकार-हरिवंश राय बच्चन
  • प्रकाशन वर्ष-1969 ई.
  • विधा-आत्मकथा (प्रथम खंड)
  • विषय-इसमें बच्चन जी ने अपने पूर्वजों और अपने प्रारंभिक जीवन का चित्रण किया है।

मुर्दहिया-

  • रचनाकार-डॉ. तुलसीराम
  • प्रकाशन वर्ष-2010 ई.
  • विधा-आत्मकथा
  • विषय-यह दलित जीवन के संघर्षों और लोक संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है।

एक कहानी यह भी-

  • रचनाकार-मन्नू भंडारी
  • प्रकाशन वर्ष-2007 ई.
  • विधा-आत्मकथात्मक लेख
  • विषय-इसमें लेखिका ने अपने लेखकीय जीवन और व्यक्तित्व के निर्माण की परिस्थितियों को उकेरा है।

Additional Informationविष्णु प्रभाकर-

  • जन्म-1912-2009 ई.
  • गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित लेखक।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • ढलती रात (उपन्यास)
  • अर्धनारीश्वर (उपन्यास - साहित्य अकादमी पुरस्कृत)
  • टूटते परिवेश (नाटक)

हरिवंश राय बच्चन-

  • जन्म-1907-2003 ई.
  • हालावाद के प्रवर्तक कवि।
  • आत्मकथा के चार खंड-
  • क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969)
  • नीड़ का निर्माण फिर (1970)
  • बसेरे से दूर (1977)
  • दशद्वार से सोपान तक (1985)

मन्नू भंडारी-

  • जन्म-1931-2021 ई.
  • नई कहानी आंदोलन की प्रमुख लेखिका।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • आपका बंटी (उपन्यास)
  • महाभोज (उपन्यास)
  • यही सच है (कहानी संग्रह)

Question 60

निम्नलिखित में कौन-सी पंक्तियाँ प्रताप नारायण मिश्र के निबंध 'शिव मूर्ति से सम्बन्धित हैं?

A. चारों ओर आँख उठाकर देखिये तो बिना काम करने वालों की ही चारों और बढ़ती है।  

B. यह मूर्तियाँ किस प्रकार के स्मृतिचिन्ह हैं? इस दरिद्र देश के बहुत-से धन की एक ढेरी है, जो किसी काम नहीं आ सकती।

C. उनके साथ जिस प्रकार का जितना सम्बन्ध हम रख सकें उतना ही हमारा मन बुद्धि शरीर संसार परमारथ के लिए मंगल है।

D. पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है. वह एक नया आदर्श देख रही है. अब उसकी चाल बदलने लगी हैं।

E. मूर्ति बहुधा पाषाण की होती है जिसका प्रयोजन यह है कि उनसे हमारा दृढ़ सम्बन्ध है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल C और E

  2. BOption (b)

    केवल D, B और A

  3. COption (c)

    केवल B और E

  4. DOption (d)

    केवल A, C और D

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

केवल C और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल C और E

Key Pointsशिव मूर्ति (निबंध)-

  • रचनाकार- प्रताप नारायण मिश्र
  • यह निबंध मिश्र जी के प्रसिद्ध निबंधों में से एक है जिसमें उन्होंने ईश्वर के सगुण और निर्गुण रूप की व्याख्या शिव मूर्ति के माध्यम से की है।
  • संबंधित पंक्तियाँ-
  • "उनके साथ जिस प्रकार का जितना सम्बन्ध हम रख सकें उतना ही हमारा मन बुद्धि शरीर संसार परमारथ के लिए मंगल है।"
  • "मूर्ति बहुधा पाषाण की होती है जिसका प्रयोजन यह है कि उनसे हमारा दृढ़ सम्बन्ध है।"
  • विषय-
  • इस निबंध में लेखक ने बताया है कि शिव की मूर्ति के विभिन्न अंग और सामग्रियाँ (जैसे गंगा, चंद्रमा, विष आदि) किन मानवीय और आध्यात्मिक गुणों के प्रतीक हैं।
  • लेखक के अनुसार मूर्ति पूजा का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के प्रति प्रेम और दृढ़ संबंध स्थापित करना है।

Important Pointsअन्य विकल्पों का विश्लेषण-

  • पंक्ति A: "चारों ओर आँख उठाकर देखिये तो बिना काम करने वालों की ही चारों और बढ़ती है।" - यह पंक्ति बालकृष्ण भट्ट के निबंध से प्रेरित जान पड़ती है।
  • पंक्ति B: "यह मूर्तियाँ किस प्रकार के स्मृतिचिन्ह हैं? इस दरिद्र देश के बहुत-से धन की एक ढेरी है..." - यह पंक्ति बालमुकुंद गुप्त कृत 'शिवशंभु के चिट्ठे' (विदाई संभाषण) से संबंधित है।
  • पंक्ति D: "पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है... अब उसकी चाल बदलने लगी हैं।" - यह विचार अध्यापक पूर्ण सिंह के निबंधों (जैसे 'आचरण की सभ्यता') में देखने को मिलता है।

Additional Informationप्रताप नारायण मिश्र-

  • जन्म-1856-1894 ई.
  • ये भारतेंदु मंडल के प्रमुख लेखक और कवि हैं।
  • इन्होंने 'ब्राह्मण' नामक पत्र का संपादन किया।
  • प्रमुख निबंध-
  • धोखा
  • बात
  • वृद्ध
  • भौं
  • आप
  • मुच्छ
  • ह
  • दाँत आदि।
  • विशेषता- इनके निबंधों में विनोदप्रियता, व्यंग्य और ग्रामीण कहावतों का सुंदर प्रयोग मिलता है।

बालमुकुंद गुप्त-

  • जन्म-1865-1907 ई.
  • भारतेंदु युग और द्विवेदी युग की जोड़ने वाली कड़ी के कवि माने जाते हैं।
  • प्रसिद्ध कृति- 'शिवशंभु के चिट्ठे' (लॉर्ड कर्जन को संबोधित व्यंग्यात्मक निबंध)।

अध्यापक पूर्ण सिंह-

  • जन्म-1881-1931 ई.
  • द्विवेदी युग के श्रेष्ठ निबंधकार।
  • इन्होंने कुल 6 निबंध लिखे जो हिंदी साहित्य में अत्यंत प्रसिद्ध हैं:
  • आचरण की सभ्यता
  • मजदूरी और प्रेम
  • सच्ची वीरता
  • पवित्रता
  • कन्यादान
  • अमेरिका का मस्ताना योगी वाल्ट व्हिटमैन

Question 61

हिंदी ध्वनियों के संबंध में कौन-सा तथ्य सही नहीं है? 

  1. AOption (a)

    ध्वनियों का सबसे प्रचलित और प्राचीन वर्गीकरण 'स्वर' और 'व्यंजन' रूप में मिलता है

  2. BOption (b)

    स्वर ध्वनि है, जिसके उच्चारण में हवा अबाधगति से मुख विवर से निकल जाती है

  3. COption (c)

    व्यंजन वह ध्वनि, जिसके उच्चारण में हवा अबाध गति से नहीं निकल पाती

  4. DOption (d)

    जो दीर्घ से कुछ स्व हो, उसेप्लुत स्वर कहते हैं

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Correct answer

Answer: (d)D.

जो दीर्घ से कुछ स्व हो, उसेप्लुत स्वर कहते हैं

Why this answer is correct

सही उत्तर है- जो दीर्घ से कुछ स्व हो, उसेप्लुत स्वर कहते हैं

Key Pointsप्लुत स्वर-

  • परिभाषा- वे स्वर जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय (तीन मात्रा का समय) लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं।
  • अतः विकल्प D गलत है क्योंकि इसमें प्लुत स्वर को दीर्घ से 'स्व' (छोटा) बताया गया है, जबकि वह दीर्घ से बड़ा होता है।
  • इसका प्रयोग प्रायः किसी को पुकारने, रोने या संगीत के आलाप में किया जाता है।
  • चिह्न- इसका चिह्न '३' होता है, जैसे- ओ३म्।

Important Pointsहिंदी ध्वनियों का वर्गीकरण-

  • स्वर और व्यंजन- ध्वनियों का सबसे प्रचलित और प्राचीन वर्गीकरण 'स्वर' और 'व्यंजन' के रूप में ही किया जाता है।
  • स्वर (Vowels)- स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में फेफड़ों से आने वाली हवा बिना किसी रुकावट (अबाध गति) के मुख विवर से बाहर निकल जाती है।
  • व्यंजन (Consonants)- व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में हवा अबाध गति से नहीं निकल पाती, बल्कि मुख के अंगों (कंठ, तालु, मूर्धा आदि) द्वारा कहीं न कहीं बाधित होती है।

स्वरों के प्रकार-

  • ह्रस्व स्वर- जिनके उच्चारण में कम समय लगता है (अ, इ, उ, ऋ)।
  • दीर्घ स्वर- जिनके उच्चारण में ह्रस्व से दुगुना समय लगता है (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ)।
  • प्लुत स्वर- जिनके उच्चारण में दीर्घ से भी अधिक समय लगता है।

Additional Informationध्वनि विज्ञान के अन्य तथ्य-

  • वर्ण- ध्वनि के लिखित रूप को वर्ण कहते हैं।
  • उच्चारण स्थान- ध्वनियों का वर्गीकरण उनके उच्चारण स्थान (कंठ्य, तालव्य, मूर्धन्य, दंत्य, ओष्ठ्य) के आधार पर भी किया जाता है।
  • प्रयत्न- ध्वनियों के उच्चारण की रीति को प्रयत्न कहते हैं, जो आभ्यंतर और बाह्य दो प्रकार के होते हैं।
  • घोष और अघोष- स्वरतंत्रियों के कंपन के आधार पर ध्वनियाँ घोष (सघोष) और अघोष कहलाती हैं।
  • अल्पप्राण और महाप्राण- उच्चारण में वायु की मात्रा के आधार पर ध्वनियाँ अल्पप्राण और महाप्राण में विभाजित होती हैं।

Question 62

"अमिय हलाहल, मदभरे, स्वेत,स्याम रतनार,

जियत,मरत, झुकि झुकि परत, जेहि चितवत इक बार।"

उपयुक्त दोहा किस कृति में संकलित है?

  1. AOption (a)

    बिहारी सतसई

  2. BOption (b)

    अंगदर्पण

  3. COption (c)

    रस प्रबोध

  4. DOption (d)

    काव्य कलाधर

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Correct answer

Answer: (b)B.

अंगदर्पण

Why this answer is correct

सही उत्तर है- अंगदर्पण

Key Pointsअंगदर्पण-

  • रचनाकार- सैयद गुलाम नबी 'रसलीन'
  • प्रकाशन वर्ष-1737 ई.
  • यह रीति काल की प्रसिद्ध रचना है।
  • विधा-काव्य
  • विषय-
  • इसमें नायिका के अंगों का उपमा, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों के माध्यम से चमत्कारपूर्ण वर्णन किया गया है।
  • प्रस्तुत दोहा "अमिय हलाहल, मदभरे..." इसी कृति से उद्धृत है।

Important Pointsबिहारी सतसई-

  • रचनाकार-बिहारी लाल
  • प्रकाशन वर्ष-1662 ई. के लगभग
  • विधा-मुक्तक काव्य
  • दोहे-713 (कुछ विद्वानों के अनुसार 719 या 723)
  • विषय-
  • यह रीतिसिद्ध काव्यधारा की सर्वश्रेष्ठ रचना है।
  • इसमें श्रृंगार, भक्ति और नीति की त्रिवेणी प्रवाहित होती है।
  • इसके बारे में कहा गया है- "सतसैया के दोहरे, ज्यों नाविक के तीर।"

रस प्रबोध-

  • रचनाकार-रसलीन
  • प्रकाशन वर्ष-1741 ई.
  • विधा-लक्षण ग्रंथ (काव्य)
  • विषय-
  • इसमें 1155 दोहे हैं।
  • इसमें रसों का विस्तृत विवेचन किया गया है।
  • यह रसलीन की दूसरी महत्वपूर्ण कृति है।

काव्य कलाधर-

  • रचनाकार- रघुनाथ बंदीजन
  • विधा-रीति ग्रंथ
  • विषय-इसमें काव्य के विभिन्न अंगों का निरूपण किया गया है।

Additional Informationरसलीन-

  • पूरा नाम-सैयद गुलाम नबी
  • ये बिलग्राम (हरदोई) के रहने वाले थे।
  • रीतिकाल के रीतिबद्ध कवियों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।
  • विशेषता-
  • इनके दोहे बिह���री के दोहों के समान ही प्रभावशाली माने जाते हैं।
  • "अमिय हलाहल..." वाला दोहा अक्सर भ्रमवश बिहारी का मान लिया जाता है, किंतु यह रसलीन की रचना है।

बिहारी लाल-

  • जन्म-1595-1663 ई. लगभग
  • रीतिकाल की 'रीतिसिद्ध' काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं।
  • जयपुर नरेश महाराज जयसिंह के दरबारी कवि थे।
  • प्रमुख कृति-
  • बिहारी सतसई (एकमात्र ग्रंथ जो इनकी ख्याति का आधार बना)।

Question 63

प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण नहीं है?

  1. AOption (a)

    माँ बच्चे को खिलाती है।

  2. BOption (b)

    पिताजी अपने पुत्र को अध्यापक से पढ़वाते हैं।

  3. COption (c)

    आइसक्रीम देखते ही बच्चे उस पर टूट पड़ते हैं।

  4. DOption (d)

    लड़के ने कपड़ा सिलवाया।

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Correct answer

Answer: (c)C.

आइसक्रीम देखते ही बच्चे उस पर टूट पड़ते हैं।

Why this answer is correct

सही उत्तर है- आइसक्रीम देखते ही बच्चे उस पर टूट पड़ते हैं।

Key Pointsप्रेरणार्थक क्रिया-

  • परिभाषा- जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, तो उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
  • उदाहरण- लिखवाना, पढ़वाना, खिलवाना आदि।
  • विकल्पों का विश्लेषण-
  • माँ बच्चे को खिलाती है- यहाँ माँ बच्चे को खाने के लिए प्रेरित कर रही है (प्रथम प्रेरणार्थक)।
  • पिताजी अपने पुत्र को अध्यापक से पढ़वाते हैं- यहाँ पिताजी स्वयं न पढ़ाकर अध्यापक से पढ़वाने का कार्य करवा रहे हैं (द्वितीय प्रेरणार्थक)।
  • लड़के ने कपड़ा सिलवाया- यहाँ लड़के ने स्वयं कपड़ा न सिलकर किसी और से सिलवाया है (द्वितीय प्रेरणार्थक)।
  • आइसक्रीम देखते ही बच्चे उस पर टूट पड़ते हैं- यह प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य क्रिया/संयुक्त क्रिया का उदाहरण है जहाँ बच्चे स्वयं कार्य कर रहे हैं।

Important Pointsप्रेरणार्थक क्रिया के रूप-

  • प्रथम प्रेरणार्थक- इसमें कर्ता स्वयं प्रेरक बनकर कार्य में सम्मिलित होता है। जैसे- माँ बच्चे को सुलाती है।
  • द्वितीय प्रेरणार्थक- इसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। जैसे- माँ नौकरानी से बच्चे को सुलवाती है।
  • पहचान-
  • प्रथम प्रेरणार्थक में मूल धातु के साथ 'आ' प्रत्यय जुड़ता है।
  • द्वितीय प्रेरणार्थक में मूल धातु के साथ 'वाना' प्रत्यय जुड़ता है।

संयुक्त क्रिया-

  • परिभाषा- जब दो या दो से अधिक क्रियाएँ मिलकर किसी पूर्ण क्रिया का बोध कराती हैं, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं।
  • उदाहरण- टूट पड़ना, खा लेना, सो जाना आदि।
  • प्रश्नगत विकल्प 'C' में 'टूट पड़ना' एक संयुक्त क्रिया है।

Additional Informationक्रिया के अन्य भेद-

  • सकर्मक क्रिया- जिस क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है। जैसे- राम आम खाता है।
  • अकर्मक क्रिया- जिस क्रिया का फल सीधे कर्ता पर पड़ता है। जैसे- बच्चा रोता है।
  • नामधातु क्रिया- जो क्रिया संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनती है। जैसे- हाथ से हथियाना, बात से बतियाना।
  • पूर्वकालिक क्रिया- जब कर्ता एक क्रिया समाप्त कर दूसरी क्रिया शुरू करता है, तो पहली क्रिया पूर्वकालिक कहलाती है। जैसे- वह पढ़कर सो गया।

Question 64

निम्नलिखित पत्रिकाओं को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. आलोचना

B. तद्भव

C. बालाबोधिनी

D. इंदु

E. धर्मयुग

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    C, A, D, B, Е

  2. BOption (b)

    C, D, E, A, В

  3. COption (c)

    A, B, D, C, Е

  4. DOption (d)

    B, A, C, D, Е

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Correct answer

Answer: (b)B.

C, D, E, A, В

Why this answer is correct

सही उत्तर है- C, D, E, A, B

Key Points

  • पत्रिकाओं का प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही अनुक्रम इस प्रकार है:
पत्रिकाप्रकाशन वर्षसंपादकस्थान
बालाबोधिनी1874 ई.भारतेंदु हरिश्चंद्रबनारस
इंदु1909 ई.अम्बिका प्रसाद गुप्तकाशी
धर्मयुग1950 ई.धर्मवीर भारतीमुंबई
आलोचना1951 ई.शिवदान सिंह चौहानदिल्ली
तद्भव1999 ई.अखिलेशलखनऊ

Important Pointsबालाबोधिनी-

  • संपादक-भारतेंदु हरिश्चंद्र
  • प्रकाशन वर्ष-1874 ई.
  • विशेष-यह केवल महिलाओं के लिए निकाली गई पहली पत्रिका थी।

इंदु-

  • संपादक-अम्बिका प्रसाद गुप्त
  • प्रकाशन वर्ष-1909 ई.
  • विशेष-यह छायावाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पत्रिका थी। जयशंकर प्रसाद की आरंभिक रचनाएँ इसी में प्रकाशित हुईं।

धर्मयुग-

  • संपादक-धर्मवीर भारती (मुख्यतः)
  • प्रकाशन वर्ष-1950 ई.
  • विशेष-यह टाइम्स ऑफ इंडिया समूह द्वारा प्रकाशित एक लोकप्रिय साप्ताहिक पत्रिका थी।

आलोचना-

  • संपादक-शिवदान सिंह चौहान (प्रथम संपादक)
  • प्रकाशन वर्ष-1951 ई.
  • विशेष-यह एक त्रैमासिक समीक्षा पत्रिका है जिसने हिं��ी आलोचना के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए।

तद्भव-

  • संपादक-अखिलेश
  • प्रकाशन वर्ष-1999 ई.
  • विशेष-यह समकालीन हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण अनियतकालीन पत्रिका है।

Additional Informationभारतेंदु हरिश्चंद्र की अन्य पत्रिकाएँ-

  • कविवचन सुधा-1868 ई.
  • हरिश्चंद्र मैगजीन-1873 ई. (बाद में हरिश्चंद्र चंद्रिका)

अन्य महत्वपूर्ण पत्रिकाएँ-

  • सरस्वती-1900 ई. (संपादक: चिंतामणि घोष, बाद में महावीर प्रसाद द्विवेदी)
  • हंस-1930 ई. (संपादक: प्रेमचंद)
  • प्रतीक-1947 ई. (संपादक: अज्ञेय)
  • नया ज्ञानोदय-2002 ई. (संपादक: प्रभाकर श्रोत्रिय)

Question 65

'तुम सभ्य हो 'मार्केट' जिनका सात सागर पार है,

पर ग्राम की वह हाट ही उनका बड़ा बाज़ार है।'

ये काव्य-पंक्तियाँ 'भारत भारती' के निम्नलिखित में से किस भाग से हैं :

  1. AOption (a)

    दारिद्रय

  2. BOption (b)

    दुर्भिक्ष

  3. COption (c)

    व्यापार

  4. DOption (d)

    कृषि और कृषक

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Correct answer

Answer: (d)D.

कृषि और कृषक

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सही उत्तर है- व्यापार

Key Pointsभारत-भारती (व्यापार खंड)-

  • रचनाकार- मैथिलीशरण गुप्त
  • पंक्ति का संदर्भ- प्रस्तुत पंक्तियाँ भारत-भारती के 'वर्तमान खंड' के अंतर्गत 'व्यापार' उपशीर्षक से ली गई हैं।
  • इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने भारतीय व्यापार की दुर्दशा और विदेशी बाजार के प्रभुत्व पर कटाक्ष किया है।
  • भावार्थ- कवि कहते हैं कि जो लोग स्वयं को सभ्य कहते हैं, उनका बाजार (मार्केट) सात समुद्र पार तक फैला है, जबकि भारतीय ग्रामीणों के लिए उनकी छोटी सी हाट ही सबसे ��ड़ा बाजार है।

Important Pointsभारत-भारती-

  • प्रकाशन वर्ष-1912 ई.
  • मुख्य भाग- यह तीन खंडों में विभक्त है:
  • अतीत खंड
  • वर्तमान खंड
  • भविष्यत खंड
  • महत्व- इस रचना के कारण महात्मा गांधी ने मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी।
  • यह रचना मुसद्दस-ए-हाली तथा ब्रजमोहन दत्तात्रेय कैफी की 'भारत दर्पण' से प्रभावित है।

अन्य विकल्पों का परिचय (भारत-भारती के वर्तमान खंड के भाग)-

  • कृषि और कृषक- इसमें भारतीय किसानों की दयनीय स्थिति और कृषि के पिछड़ेपन का वर्णन है।
  • दुर्भिक्ष- इसमें देश में पड़ने वाले अकाल और उससे होने वाली जनहानि का चित्रण है।
  • दारिद्रय- इसमें भारत की बढ़ती हुई गरीबी और आर्थिक विपन्नता पर प्रकाश डाला गया है।

Additional Informationमैथिलीशरण गुप्त-

  • जन्म-1886-1964 ई.
  • ये द्विवेदी युग के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि माने जाते हैं।
  • प्रमुख काव्य कृतियाँ-
  • रंग में भंग (1909 ई.)
  • जयद्रथ वध (1910 ई.)
  • पंचवटी (1925 ई.)
  • साकेत (1931 ई.)
  • यशोधरा (1932 ई.)
  • द्वापर (1936 ई.)
  • जयभारत (1952 ई.)
  • विष्णुप्रिया (1957 ई.)
  • इन्होंने 'मधुप' उपनाम से भी रचनाएँ लिखी हैं।

Question 66

"प्रेम ने मनुष्य को मनुष्य बनाया

भय ने उसे समाज का रूप दिया !

अहंकार ने उसे राष्ट्र में संगठित कर दिया।"

उपर्युक्त उद्धरण शेखर: एक जीवनी, भाग एक के किस खंड से उद्धृत है ?

  1. AOption (a)

    उषा और ईश्वर

  2. BOption (b)

    बीज और अंकुर

  3. COption (c)

    प्रकृति और पुरुष 

  4. DOption (d)

    पुरुष और परिस्थिति

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Correct answer

Answer: (a)A.

उषा और ईश्वर

Why this answer is correct

सही उत्तर है- बीज और अंकुर

Key Pointsबीज और अंकुर-

  • प्रस्तुत पंक्तियाँ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' के उपन्यास 'शेखर: एक जीवनी' (भाग-1) के प्रथम खंड 'बीज और अंकुर' से ली गई हैं।
  • रचनाकार- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
  • प्रकाशन वर्ष-1941 ई. (प्रथम भाग)
  • 'शेखर: एक जीवनी' का प्रथम भाग चार खंडों में विभक्त है।
  • विषय-
  • इसमें शेखर नामक पात्र के बचपन से लेकर उसकी युवावस्था तक के मानसिक विकास और विद्रोही चेतना का चित्रण है।
  • प्रथम भाग के चार खंड-
  • उषा और ईश्वर
  • बीज और अंकुर
  • प्रकृति और पुरुष
  • पुरुष और परिस्थिति

Important Pointsशेखर: एक जीवनी-

  • विधा-मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास
  • भाग-दो भाग (प्रथम भाग- 1941, द्वितीय भाग- 1944)
  • मुख्य पात्र-
  • शेखर (नायक)
  • शशि (शेखर की मौसेरी बहन और उसकी प्रेरणा)
  • सरस्वती (शेखर की बहन)
  • शांति
  • विशेषता-
  • यह उपन्यास 'फ्लैशबैक' (पूर्वदीप्ति) पद्धति पर लिखा गया है।
  • इसमें व्यक्ति के अंतर्मन की गुत्थियों और सामाजिक बंधनों के प्रति विद्रोह को दिखाया गया है।

उषा और ईश्वर-

  • यह उपन्यास का प्रथम खंड है।
  • इसमें शेखर के बचपन के भय, जिज्ञासा और ईश्वर के प्रति उसके प्रारंभिक दृष्टिकोण का वर्णन है।

प्रकृति और पुरुष-

  • यह उपन्यास का तृतीय खंड है।
  • इसमें शेखर के किशोर मन के विकास और प्रकृति के साथ उसके संबंधों को दर्शाया गया है।

पुरुष और परिस्थिति-

  • यह उपन्यास का चतुर्थ खंड है।
  • इसमें शे���र के क्रांतिकारी विचारों और परिस्थितियों के साथ उसके संघर्ष का चित्रण है।

Additional Informationसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'-

  • जन्म-1911-1987 ई.
  • प्रयोगवाद और नई कविता के प्रवर्तक माने जाते हैं।
  • इन्होंने 'तार सप्तक' का संपादन किया।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • शेखर: एक जीवनी (1941, 1944)
  • नदी के द्वीप (1951 ई.)
  • अपने-अपने अजनबी (1961 ई.)
  • पुरस्कार-
  • 'आँगन के पार द्वार' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (1964)।
  • 'कितनी नावों में कितनी बार' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार (1978)।

Question 67

"भई, सरकारी पैसे का मामला है.पेंशन का केस बीसों दफ्तरों में जाता है. देर लग जाती है. बीस बार एक ही बात को बीस जगह लिखना पड़ता है, तब पक्की होती है. जितनी पेंशन मिलती है, उतनी ही स्टेशनरी लग जाती है."- 'भोलाराम का जीव' में यह वार्तालाप किन चरित्रों के मध्य हुआ है ? 

  1. AOption (a)

    भोलाराम का जीव और चपरासी

  2. BOption (b)

    नारद और चपरासी

  3. COption (c)

    नारद और साहब

  4. DOption (d)

    भोलाराम की पत्नी और साहब

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Correct answer

Answer: (c)C.

नारद और साहब

Why this answer is correct

सही उत्तर है- नारद और चपरासी

Key Pointsभोलाराम का जीव-

  • रचनाकार- हरिशंकर परसाई
  • विधा-व्यंग्य कहानी
  • विषय-
  • यह कहानी सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर करारा प्रहार करती है।
  • प्रस्तुत कथन चपरासी द्वारा नारद से तब कहा जाता है जब नारद भोलाराम की पेंशन के बारे में पूछताछ करने दफ्तर पहुँचते हैं।
  • मुख्य पात्र-
  • नारद
  • चित्रगुप्त
  • यमराज
  • भोलाराम (मृतक)
  • चपरासी
  • साहब (ऑफिसर)

Important Pointsकहानी का सारांश-

  • भोलाराम नाम का एक व्यक्ति पाँच साल पहले रिटायर हुआ था, लेकिन उसकी पेंशन नहीं बनी थी।
  • गरीबी और अभाव में उसकी मृत्यु हो जाती है, परंतु उसका जीव यमदूत को चकमा देकर गायब हो जाता है।
  • नारद मुनि पृथ्वी पर उसकी तलाश में आते हैं और सरकारी दफ्तर पहुँचते हैं।
  • वहाँ उन्हें पता चलता है कि भोलाराम का जीव कहीं और नहीं, बल्कि अपनी पेंशन की फाइलों में अटका हुआ है।
  • यह कहानी दर्शाती है कि एक साधारण आदमी को अपने हक के लिए भी व्यवस्था से कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है।

हरिशंकर परसाई-

  • जन्म-1924-1995 ई.
  • हिंदी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • कहानी संग्रह- हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे।
  • उपन्यास- रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज।
  • निबंध संग्रह- तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेईमानी की परत, पगडंडियों का जमाना, सदाचार का ताबीज आदि।

Additional Informationव्यंग्य विधा-

  • व्यंग्य वह विधा है जिसमें उपहास, मजाक और आलोचना के माध्यम से समाज या व्यवस्था की बुराइयों को उजागर किया जाता है।
  • परसाई जी ने व्यंग्य को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे सामाजिक परिवर्तन के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
  • 'भोलाराम का जीव' में 'जीव' का फाइलों में अटकना व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक है।

Question 68

निम्नलिखित काव्यान्दोलनों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

A. नयी कविता

B. हालावाद

C. प्रगतिवाद

D. प्रयोगवाद

E. अकविता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    B, E, C, A, D

  2. BOption (b)

    B, C, D, A, E

  3. COption (c)

    D, C, A, B, E

  4. DOption (d)

    C, A, E, D, B

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Correct answer

Answer: (b)B.

B, C, D, A, E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- B, C, D, A, E

Key Pointsकाव्यान्दोलनों का सही कालक्रम-

  • हालावाद (1933-1936 ई.)- इसके प्रवर्तक हरिवंश राय बच्चन माने जाते हैं। यह छायावादोत्तर काल का प्रारंभिक चरण है।
  • प्रगतिवाद (1936-1943 ई.)- यह मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित काव्य आंदोलन है। 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना से इसका आरंभ माना जाता है।
  • प्रयोगवाद (1943-1953 ई.)- अज्ञेय द्वारा संपादित 'तार सप्तक' (1943) के प्रकाशन से इसका प्रारंभ हुआ।
  • नयी कविता (1954 ई. से)- जगदीश गुप्त द्वारा संपादित 'नयी कविता' पत्रिका के प्रकाशन से इसे एक स्वतंत्र आंदोलन के रूप में पहचान मिली।
  • अकविता (1960 ई. के बाद)- यह साठोत्तरी कविता के दौर का एक प्रमुख आंदोलन है, जिसके प्रवर्तक जगदीश चतुर्वेदी माने जाते हैं।

Important Pointsहालावाद-

  • प्रवर्तक-हरिवंश राय बच्चन
  • मुख्य रचनाएँ-मधुशाला (1935), मधुबाला (1936), मधुकलश (1937)
  • विशेषता-इसमें वैयक्तिक प्रेम और मस्ती की प्रधानता है।

प्रगतिवाद-

  • प्रमुख कवि-पंत, निराला (बाद की रचनाएँ), केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन, त्रिलोचन।
  • विशेषता-
  • शोषक वर्ग के प्रति घृणा और शोषितों के प्रति सहानुभूति।
  • सामाजिक यथार्थवाद का चित्रण।

प्रयोगवाद-

  • प्रवर्तक-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
  • विशेषता-
  • नवीन उपमानों का प्रयोग।
  • अतिशय बौद्धिकता और व्यक्तिवाद।
  • 'तार सप्तक' के माध्यम से सात कवियों का समूह।

नयी कविता-

  • प्रमुख कवि- मुक्तिबोध, धर्मवीर भारती, कुँवर नारायण, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना।
  • विशेषता-लघु मानव की प्रतिष्ठा और क्षणवाद का महत्व।

Additional Informationअकविता-

  • समय-1960 के बाद (साठोत्तरी कविता)
  • प्रवर्तक-जगदीश चतुर्वेदी, श्याम परमार आदि।
  • विशेषता-
  • परंपरागत मूल्यों का पूर्ण निषेध।
  • यौन वर्जनाओं का खुला चित्रण और विद्रोह का स्वर।

छायावादोत्तर काल के अन्य आंदोलन-

  • नकेनवाद (प्रपद्यवाद)-1956 ई. (नलिन विलोचन शर्मा, केसरी कुमार, नरेश)।
  • बीट पीढ़ी-1963 ई. (राजकमल चौधरी)।
  • युयुत्सावादी कविता-1965 ई. (शलभ श्रीराम सिंह)।

Question 69

लेखक की मृत्यु की घोषणा किसने की ?

  1. AOption (a)

    नीत्शे

  2. BOption (b)

    डेनियल बेल

  3. COption (c)

    देरिदा

  4. DOption (d)

    रोला बार्थ

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Correct answer

Answer: (d)D.

रोला बार्थ

Why this answer is correct

सही उत्तर है- रोला बार्थ

Key Pointsलेखक की मृत्यु (The Death of the Author)-

  • विचारक- रोला बार्थ (Roland Barthes)
  • प्रकाशन वर्ष-1967 ई. (फ्रेंच में), 1968 ई. (अंग्रेजी में)
  • यह एक प्रसिद्ध आलोचनात्मक निबंध है।
  • मुख्य अवधारणा-
  • बार्थ के अनुसार, किसी कृति का अर्थ लेखक की मंशा या उसकी जीवनी से तय नहीं होना चाहिए।
  • लेखक की मृत्यु के साथ ही 'पाठक' का जन्म होता है।
  • पाठ (Text) का अर्थ पाठक की व्याख्या पर निर्भर करता है, न कि लेखक के नियंत्रण पर।

Important Pointsनीत्शे (Friedrich Nietzsche)-

  • प्रसिद्ध घोषणा- "ईश्वर की मृत्यु" (God is Dead)
  • विचारधारा-अस्तित्ववाद और निहिलिज्म (शून्यवाद) के अग्रदूत।
  • इन्होंने पारंपरिक नैतिकता और धार्मिक मूल्यों को चुनौती दी।

डेनियल बेल (Daniel Bell)-

  • प्रसिद्ध घोषणा- "विचारधारा का अंत" (The End of Ideology)
  • विचारधारा-समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण।
  • इन्होंने उत्तर-औद्योगिक समाज (Post-industrial society) की अवधारणा दी।

देरिदा (Jacques Derrida)-

  • सिद्धांत- विखंडनवाद (Deconstruction)
  • मुख्य विचार-पाठ के अर्थ की अनिश्चितता और भाषा की सीमाओं पर बल दिया।

Additional Informationरोला बार्थ-

  • जन्म-1915-1980 ई.
  • फ्रांसीसी साहित्यिक सिद्धांतकार, दार्शनिक और भाषाविद् थे।
  • संरचनावाद (Structuralism) और उत्तर-संरचनावाद (Post-structuralism) के प्रमुख स्तंभ।
  • प्रमुख कृतियाँ-
  • Writing Degree Zero (1953)
  • Mythologies (1957)
  • S/Z (1970)
  • The Pleasure of the Text (1973)

उत्तर-आधुनिकतावाद और घोषणाएँ-

  • इतिहास का अंत-फ्रांसिस फुकुयामा
  • मनुष्य की मृत्यु-मिशेल फूको
  • महाख्यानों का अंत-ज्याँ-फ्रांस्वा ल्योतार

Question 70

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
A.जले ठूंठ पर बैठकर गयी कोकिला कूकI.महादेवी वर्मा
B.सिंधुसेज पर धरावधू अब तनिक संकुचित बैठी-सीII.गजानन माधव मुक्तिबोध'
C.ऐसा तेरा लोक वेदना नहीं नहीं जिसमें तेरा अवसादIII.जयशंकर प्रसाद
D.चमकते हैं खड़े हथियार उसके दूर तक आँखें चिलकती हैं नुकीले तेज पत्थर-सीIV.नागार्जुन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-III, B-II, C-I, D-IV

  2. BOption (b)

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  3. COption (c)

    A-I, B-IV, C-III, D-II

  4. DOption (d)

    A-IV, B-I, C-II, D-III

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Correct answer

Answer: (b)B.

A-IV, B-III, C-I, D-II

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-IV, B-III, C-I, D-II

Key Points

  • सुमेलन-
काव्य पंक्तिरचनाकार
जले ठूंठ पर बैठकर गयी कोकिला कूकनागार्जुन
सिंधुसेज पर धरावधू अब तनिक संकुचित बैठी-सीजयशंकर प्रसाद
ऐसा तेरा लोक वेदना नहीं नहीं जिसमें तेरा अवसादमहादेवी वर्मा
चमकते हैं खड़े हथियार उसके दूर तक आँखें चिलकती हैं नुकीले तेज पत्थर-सीगजानन माधव मुक्तिबोध

Important Pointsनागार्जुन-

  • जन्म-1911-1998 ई.
  • मूल नाम-वैद्यनाथ मिश्र
  • ये प्रगतिवादी धारा के प्रमुख कवि हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • युगधारा (1953 ई.)
  • सतरंगे पंखों वाली (1959 ई.)
  • प्यासी पथराई आँखें (1962 ई.)
  • भस्मांकुर (1971 ई.)

जयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावाद के प्रवर्तक माने जाते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • झरना (1918 ई.)
  • आँसू (1925 ई.)
  • लहर (1933 ई.)
  • कामायनी (1935 ई.)
  • प्रस्तुत पंक्ति 'सिंधुसेज पर धरावधू...' उनकी प्रसिद्ध रचना 'कामायनी' (श्रद्धा सर्ग) से उद्धृत है।

महादेवी वर्मा-

  • जन्म-1907-1987 ई.
  • इन्हें 'आधुनिक मीरा' के नाम से जाना जाता है।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • नीहार (1930 ई.)
  • रश्मि (1932 ई.)
  • नीरजा (1934 ई.)
  • सांध्यगीत (1936 ई.)

गजानन माधव 'मुक्तिबोध'-

  • जन्म-1917-1964 ई.
  • ये प्रयोगवाद और नई कविता के प्रमुख कवि हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964 ई.)
  • भूरी-भूरी खाक धूल (1980 ई.)
  • प्रस्तुत पंक्ति उनकी प्रसिद्ध लंबी कविता 'अंधेरे में' से ली गई है।

Additional Information

  • प्रगतिवाद- नागार्जुन इस धारा के प्रतिनिधि कवि हैं जिन्होंने शोषित वर्ग की पीड़ा को स्वर दिया।
  • छायावाद- प्रसाद और महादेवी वर्मा इसके चार स्तंभों में से दो हैं, जहाँ वैयक्तिकता और प्रकृति चित्रण प्रमुख है।
  • नई कविता- मुक्तिबोध ने फैंटेसी के माध्यम से आधुनिक जीवन के संघर्षों और अंतर्द्वंद्वों को चित्रित किया है।

Question 71

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I स्थापना/प्रकाशनसूची-II वर्ष
A.उदंत मार्तंड का प्रकाशनI.1910
B.सरस्वती पत्रिका का प्रकाशनII.1893
C.हिंदी साहित्य सम्मलेन,प्रयाग की स्थापनाIII.1826
D.नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापनाIV.1900

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-III, B-IV, C-I, D-II 

  2. BOption (b)

    A-III, B-IV, C-II, D-I

  3. COption (c)

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  4. DOption (d)

    A-IV, B-III, C-II, D-I

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Correct answer

Answer: (a)A.

A-III, B-IV, C-I, D-II 

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-III, B-IV, C-I, D-II

Key Points

  • उदंत मार्तंड-
  • प्रकाशन वर्ष- 1826 ई. (30 मई)
  • संपादक- पंडित जुगल किशोर शुक्ल
  • यह हिंदी का प्रथम समाचार पत्र था।
  • यह कलकत्ता से साप्ताहिक रूप में प्रकाशित होता था।
  • सरस्वती पत्रिका-
  • प्रकाशन वर्ष- 1900 ई.
  • संपादक- प्रथम संपादक चिंतामणि घोष थे। (1903 से 1920 तक महावीर प्रसाद द्विवेदी ने इसका संपादन किया)
  • यह काशी से प्रकाशित होती थी।
  • हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग-
  • स्थापना वर्ष- 1910 ई.
  • प्रथम अध्यक्ष- मदन मोहन मालवीय
  • इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार करना था।
  • नागरी प्रचारिणी सभा-
  • स्थापना वर्ष- 1893 ई. (16 जुलाई)
  • संस्थापक- श्यामसुंदर दास, रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह।
  • इसकी स्थापना काशी (वाराणसी) में हुई थी।

Important Points

उदंत मार्तंड-

  • 30 मई को इसी पत्र के प्रकाशन के कारण 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।
  • यह पत्र धन के अभाव में 1827 में बंद हो गया था।

सरस्वती पत्रिका-

  • इस पत्रिका ने हिंदी भाषा के मानकीकरण और खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इसे 'बीसवीं शताब्दी के आरंभिक काल का विश्वकोश' भी कहा जाता है।

Additional Information

अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएं और पत्र-

  • बनारस अखबार (1845 ई.)- राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिंद' द्वारा प्रकाशित।
  • कविवचन सुधा (1867 ई.)- भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा संपादित।
  • दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (1918 ई.)- महात्मा गांधी द्वारा मद्रास में स्थापित।
  • राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा (1936 ई.)- हिंदी के प्रचार हेतु स्थापित।

Question 72

रामधारी सिंह दिनकर' की पुस्तक 'संस्कृति के चार अध्याय' के संदर्भ में कौन सा एक तथ्य असत्य है ?

  1. AOption (a)

    इसकी प्रस्तावना जवाहरलाल नेहरू ने लिखी है।

  2. BOption (b)

    तीसरे अध्याय का शीर्षक भारतीय संस्कृति और यूरोप है।

  3. COption (c)

    पुस्तक का समर्पण डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम है।

  4. DOption (d)

    पहला संस्करण 1956 में प्रकाशित हुआ।

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Correct answer

Answer: (b)B.

तीसरे अध्याय का शीर्षक भारतीय संस्कृति और यूरोप है।

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सही उत्तर है- तीसरे अध्याय का शीर्षक भारतीय संस्कृति और यूरोप है।

Key Pointsसंस्कृति के चार अध्याय-

  • रचनाकार- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • प्रकाशन वर्ष-1956 ई.
  • यह पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है।
  • विधा-इतिहास और संस्कृति विषयक ग्रंथ
  • पुरस्कार-इस कृति के लिए दिनकर जी को 1959 में 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' प्राप्त हुआ।
  • प्रस्तावना-इसकी प्रस्तावना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लिखी है।
  • समर्पण-यह पुस्तक भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को समर्पित है।

Important Pointsअध्यायों का विवरण-

  • प्रथम अध्याय-भारतीय जनता की रचना और हिंदू संस्कृति का आविर्भाव।
  • द्वितीय अध्याय-प्राचीन हिंदुत्व से विद्रोह (जैन धर्म, बौद्ध धर्म आदि)।
  • तृतीय अध्याय-हिन्दू संस्कृति और इस्लाम (विकल्प B में दिया गया शीर्षक 'भारतीय संस्कृति और यूरोप' चौथे अध्याय का विषय है)।
  • चतुर्थ अध्याय-भारतीय संस्कृति और यूरोप।

रचना का उद्देश्य-

  • दिनकर जी ने इस पुस्तक में भारत के सांस्कृतिक इतिहास को चार बड़े परिवर्तनों (क्रांतियों) के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है।
  • लेखक के अनुसार भारतीय संस्कृति का निर्माण विभिन्न संस्कृतियों के मिलन और समन्वय से हुआ है।

Additional Informationरामधारी सिंह 'दिनकर'-

  • जन्म-1908-1974 ई.
  • इन्हें 'अधैर्य का कवि' और 'समय सूर्य' भी कहा जाता है।
  • प्रमुख काव्य रचनाएँ-
  • रेणुका (1935 ई.)
  • हुंकार (1939 ई.)
  • रसवंती (1940 ई.)
  • कुरुक्षेत्र (1946 ई.)
  • रश्मिरथी (1952 ई.)
  • उर्वशी (1961 ई.) - इसके लिए 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
  • परशुराम की प्रतीक्षा (1963 ई.)
  • प्रमुख गद्य रचनाएँ-
  • मिट्टी की ओर (1946 ई.)
  • अर्धनारीश्वर (1952 ई.)
  • रेती के फूल (1954 ई.)
  • वेणु वन (1958 ई.)

Question 73

"जिसके आगे-पीछे भाई-बहिन, माई-बाप नहीं, परदेश में बन्दूक की नोक पर जान रखने वाले को छोकरी कैसे दे दें." कहानी 'कोसी का घटवार' का यह कथन किस पात्र का है ?

  1. AOption (a)

    गोसाई

  2. BOption (b)

    लछमा का बाप

  3. COption (c)

    हवलदार धरमसिंह

  4. DOption (d)

    लछमा

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Correct answer

Answer: (b)B.

लछमा का बाप

Why this answer is correct

सही उत्तर है- लछमा का बाप

Key Pointsकोसी का घटवार-

  • रचनाकार- शेखर जोशी
  • प्रकाशन वर्ष-1958 ई.
  • यह कहानी 'कल्पना' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
  • विधा-कहानी
  • विषय-
  • यह एक आंचलिक कहानी है जो कुमाऊँ क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
  • इसमें गोसाई और लछमा के अधूरे प्रेम की मार्मिक कथा वर्णित है।
  • प्रस्तुत कथन लछमा के पिता का है, जो गोसाई के अनाथ होने और फौज की नौकरी के कारण अपनी बेटी का विवाह उससे नहीं करना चाहते थे।
  • मुख्य पात्र-
  • गोसाई (मुख्य पात्र, पूर्व सैनिक)
  • लछमा (नायिका)
  • लछमा का पति (रामसिंह)
  • लछमा का बेटा
  • नरसिंह

Important Pointsगोसाई-

  • परिचय-कहानी का नायक जो फौज से रिटायर होकर कोसी नदी के किनारे 'घट' (चक्की) चलाता है।
  • वह एकाकी जीवन व्यतीत कर रहा है और अतीत की स्मृतियों में खोया रहता है।
  • उसका चरित्र धैर्य और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

लछमा-

  • परिचय-कहानी की नायिका जिसका विवाह गोसाई से नहीं हो पाता।
  • वह सामाजिक बंधनों और पारिवारिक दबाव के कारण अपनी इच्छाओं का त्याग कर देती है।
  • वर्षों बाद जब वह गोसाई से मिलती है, तो उसके मन में पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं।

कहानी की विशेषताएँ-

  • फ्लैशबैक तकनीक- यह कहानी पूर्वदीप्ति (Flashback) पद्धति पर लिखी गई है।
  • परिवेश-पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण।

Additional Informationशेखर जोशी-

  • जन्म-1932-2022 ई.
  • नई कहानी आंदोलन के प्रमुख कथाकार हैं।
  • इन्हें 'पहल सम्मान' से सम्मानित किया गया था।
  • प्रमुख कहानी संग्रह-
  • कोसी का घटवार (1958 ई.)
  • साथ के लोग (1978 ई.)
  • हलवाहा (1981 ई.)
  • नौरंगी बीमार है (1990 ई.)
  • डांगरी वाले (1994 ई.)
  • बच्चे का सपना (2004 ई.)
  • प्रसिद्ध कहानी-
  • दाज्यू (इस पर फिल्म भी बनी है)
  • बदबू
  • मेंटल आदि।

Question 74

'तमस' से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. तमस की रचना रावलपिंडी शहर से जुड़ी भीष्म साहनी की स्मृतियोंके आधार पर हुई है।

B. तमस की ज्यादातर घटनाएँ और उनसे जुड़े चरित्र वास्तविक हैं।

C. इस उपन्यास में नत्थू और उसकी पत्नी दोनों वास्तविक पात्र हैं।

D. अंग्रेज अधिकारी रिचर्ड फसाद रुकवाने का हरसंभव प्रयास करता है।

E. तमस प्रथमविश्व युद्ध के समय की कथा है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A और B

  2. BOption (b)

    केवल A, B और C

  3. COption (c)

    केवल B, C और E

  4. DOption (d)

    केवल C, D और E

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Correct answer

Answer: (a)A.

केवल A और B

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A और B

Key Pointsतमस-

  • रचनाकार- भीष्म साहनी
  • प्रकाशन वर्ष-1973 ई.
  • यह उपन्यास भारत विभाजन की त्रासदी पर आधारित है।
  • कथन A: तमस की रचना रावलपिंडी शहर से जुड़ी भीष्म साहनी की स्मृतियों के आधार पर हुई है। (सत्य)
  • कथन B: तमस की ज्यादातर घटनाएँ और उनसे जुड़े चरित्र वास्तविक हैं। (सत्य)
  • कथन C: इस उपन्यास में नत्थू और उसकी पत्नी दोनों वास्तविक पात्र हैं। (असत्य - नत्थू और उसकी पत्नी काल्पनिक पात्र हैं।)
  • कथन D: अंग्रेज अधिकारी रिचर्ड फसाद रुकवाने का हरसंभव प्रयास करता है। (असत्य - रिचर्ड दंगों को रोकने के बजाय उन्हें मूकदर्शक बनकर देखता रहता है।)
  • कथन E: तमस प्रथम विश्व युद्ध के समय की कथा है। (असत्य - यह 1947 के विभाजन के समय की कथा है।)

Important Pointsतमस उपन्यास की विशेषताएँ-

  • विषय-
  • इसमें विभाजन से ठीक पहले के 5 दिनों की कहानी वर्णित है।
  • यह सांप्रदायिकता और राजनीति के गठजोड़ को उजागर करता है।
  • उपन्यास दो भागों में विभक्त है - पहले भाग में सांप्रदायिक तनाव और दूसरे भाग में गाँवों में फैली हिंसा का वर्णन है।
  • मुख्य पात्र-
  • नत्थू (चमार)
  • रिचर्ड (डिप्टी कमिश्नर)
  • लीजा (रिचर्ड की पत्नी)
  • बख्शी जी
  • जरनैल
  • मुराद अली
  • हरनाम सिंह और बंतो

पुरस्कार-

  • भीष्म साहनी को 'तमस' के लिए 1975 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • इस पर गोविंद निहलानी ने एक प्रसिद्ध दूरदर्शन धारावाहिक और फिल्म भी बनाई है।

Additional Informationभीष्म साहनी-

  • जन्म-1915-2003 ई.
  • ये प्रगतिशील विचारधारा के प्रमुख उपन्यासकार और कहानीकार हैं।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • झरोखे (1967 ई.)
  • कड़ियाँ (1970 ई.)
  • बसन्ती (1980 ई.)
  • मय्यादास की माड़ी (1988 ई.)
  • कुन्तो (1993 ई.)
  • नीलू नीलिमा नीलोफर (2000 ई.)
  • प्रमुख नाटक-
  • हनूश (1977 ई.)
  • कबीरा खड़ा बज़ार में (1981 ई.)
  • माधवी (1985 ई.)
  • मुआवजे (1993 ई.)

Question 75

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I मैला आँचल में प्रयुक्त शब्दसूची-II आशय
A.हँसेरीI.डम्मी कैंडिडेट
B.डोलडालII.नित्यक्रिया
C.कमसलIII.आजीवन कारावास
D.दामुल होजIV.बलवा करने वाला दल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-IV, B-II, C-III, D-I

  2. BOption (b)

    A-II, B-IV, C-I, D-III

  3. COption (c)

    A-IV, B-II, C-I, D-III

  4. DOption (d)

    A-II, B-IV, C-III, D-I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A-IV, B-II, C-I, D-III

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-IV, B-II, C-I, D-III

Key Points

  • फणीश्वरनाथ रेणु कृत 'मैला आँचल' उपन्यास में प्रयुक्त आंचलिक शब्दों का सही मिलान इस प्रकार है:
सूची-I (शब्द)सूची-II (आशय)
A. हँसेरीIV. बलवा करने वाला दल
B. डोलडालII. नित्यक्रिया
C. कमसलI. डम्मी कैंडिडेट
D. दामुल होजIII. आजीवन कारावास

Important Pointsमैला आँचल-

  • रचनाकार- फणीश्वरनाथ रेणु
  • प्रकाशन वर्ष- 1954 ई.
  • विधा- उपन्यास (आंचलिक)
  • विषय-
  • यह हिन्दी का प्रथम महत्वपूर्ण आंचलिक उपन्यास माना जाता है।
  • इसमें पूर्णिया जिले के 'मेरीगंज' गाँव की कथा वर्णित है।
  • इसमें अंचल विशेष की भाषा, संस्कृति, लोकगीत और सामाजिक कुरीतियों का सजीव चित्रण है।
  • मुख्य पात्र-
  • डॉ. प्रशांत
  • कमली
  • बावनदास
  • बलदेव
  • कालीचरण
  • लक्ष्मी

Additional Informationफणीश्वरनाथ रेणु-

  • जन्म- 1921-1977 ई.
  • हिन्दी साहित्य के प्रमुख आंचलिक उपन्यासकार और कहानीकार हैं।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • परती परिकथा (1957 ई.)
  • दीर्घतपा (1963 ई.)
  • जुलूस (1965 ई.)
  • कितने चौराहे (1966 ई.)
  • पलटू बाबू रोड (1979 ई.)
  • प्रमुख कहानियाँ-
  • तीसरी कसम (उर्फ मारे गए गुलफाम)
  • लाल पान की बेगम
  • रसप्रिया
  • ठेस
  • संवदिया

Question 76

"भिन्न-भिन्न शाखाओं के हजारों कवियों की केवल कालक्रम से गुंथी उपर्युक्त वृत्त मालाएँ साहित्य के इतिहास के अध्ययन में कहाँतक सहायता पहुंचा सकती थीं? सारे रचनाकाल को केवल आदि, मध्य, पूर्व, उत्तर इत्यादि खण्डों में आँख मूदकर बाँट देना यह भी न देखना कि किस खंड के भीतर क्या आता है, क्या नहीं,किसी वृत्त संग्रह को इतिहास नहीं बना सकता." उपर्युक्त पंक्तियाँ हिंदी साहित्य के किस इतिहास लेखक की हैं ?

  1. AOption (a)

    रामचन्द्र शुक्ल

  2. BOption (b)

    रामस्वरूप चतुर्वेदी

  3. COption (c)

    बच्चन सिंह

  4. DOption (d)

    हजारीप्रसाद द्विवेदी

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Correct answer

Answer: (a)A.

रामचन्द्र शुक्ल

Why this answer is correct

सही उत्तर है- रामचन्द्र शुक्ल

Key Pointsरामचन्द्र शुक्ल-

  • कथन का संदर्भ- यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' (1929 ई.) की भूमिका (काल-विभाग) में कहा है।
  • शुक्ल जी ने इस कथन के माध्यम से पूर्ववर्ती इतिहासकारों (विशेषकर शिवसिंह सेंगर, ग्रियर्सन और मिश्रबंधु) द्वारा अपनाई गई केवल कालक्रमिक और वर्णानुक्रमिक पद्धति की आलोचना की है।
  • उनका मानना था कि केवल कवियों का विवरण इकट्ठा कर लेना 'इतिहास' नहीं है, बल्कि उन प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना आवश्यक है जिनके कारण साहित्य का स्वरूप बदलता है।
  • मुख्य विचार-
  • इतिहास में काल-विभाजन का आधार साहित्यिक प्रवृत्तियाँ होनी चाहिए, न कि केवल समय के खंड।
  • इतिहास लेखक को यह देखना चाहिए कि किसी विशेष कालखंड में किस प्रकार की रचनाओं की प्रधानता रही है।

Important Pointsरामस्वरूप चतुर्वेदी-

  • प्रमुख ग्रंथ- हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास (1986 ई.)।
  • इन्होंने शुक्ल जी के इतिहास दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए भाषाई विकास और संवेदना के द्वंद्व को रेखांकित किया है।
  • इन्हें व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया था।

बच्चन सिंह-

  • प्रमुख ग्रंथ- हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास (1996 ई.), आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास।
  • इन्होंने शुक्ल जी के कई निष्कर्षों पर पुनर्विचार किया है और अपभ्रंश को हिंदी से अलग मानने पर बल दिया है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी-

  • प्रमुख ग्रंथ- हिंदी साहित्य की भूमिका (1940 ई.), हिंदी साहित्य: उद्भव और विकास (1952 ई.), हिंदी साहित्य का आदिकाल (1952 ई.)।
  • इन्होंने शुक्ल जी की कई मान्यताओं को चुनौती दी, विशेषकर भक्ति आंदोलन के उदय और आदिकाल के स्वरूप को लेकर।
  • द्विवेदी जी ने साहित्य को 'मानव-मूल्यों' की दृष्टि से देखने पर बल दिया।

Additional Informationआचार्य रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • हिंदी के सर्वोपरि आलोचक और इतिहासकार माने जाते हैं।
  • इतिहास ग्रंथ- हिंदी साहित्य का इतिहास (1929 ई.) जो मूलतः 'हिंदी शब्दसागर' की भूमिका के रूप में लिखा गया था।
  • काल विभाजन-
  • वीरगाथा काल (संवत् 1050-1375)
  • भक्ति काल (संवत् 1375-1700)
  • रीति काल (संवत् 1700-1900)
  • गद्य काल (संवत् 1900-1984)
  • प्रसिद्ध कथन- "प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब होता है।"

Question 77

"एक तरफ देखा जाय तो परिदे' की लतिका की समस्या स्वतन्त्रता या मुक्ति की समस्या है! अतीत से मुक्ति,स्मृति से मुक्ति, उस चीज से मुक्ति जो हमें चलाये चलती है और अपने रेले में हमें घसीट ले जाती है." यह कथन किस आलोचक का है?

  1. AOption (a)

    राजेंद्र यादव

  2. BOption (b)

    सुरेन्द्र चौधरी

  3. COption (c)

    देवीशंकर अवस्थी

  4. DOption (d)

    नामवर सिंह

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Correct answer

Answer: (d)D.

नामवर सिंह

Why this answer is correct

सही उत्तर है- नामवर सिंह

Key Pointsपरिंदे (कहानी)-

  • रचनाकार- निर्मल वर्मा
  • प्रकाशन वर्ष-1960 ई.
  • विधा-कहानी
  • कथन विश्लेषण-
  • प्रस्तुत कथन नामवर सिंह का है।
  • उन्होंने अपनी पुस्तक 'नई कहानी' में निर्मल वर्मा की कहानी 'परिंदे' की समीक्षा करते हुए यह बात कही है।
  • नामवर सिंह ने 'परिंदे' को 'नई कहानी' की पहली कहानी माना है।
  • मुख्य पात्र-
  • लतिका (मुख्य पात्र)
  • मिस्टर ह्यूबर्ट
  • डॉ. मुखर्जी
  • गिरीश
  • करीमुद्दीन

Important Pointsनामवर सिंह-

  • परिचय-हिन्दी के शीर्षस्थ आलोचक और विद्वान।
  • प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ-
  • हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग (1952)
  • पृथ्वीराज रासो की भाषा (1956)
  • कविता के नये प्रतिमान (1968) - इस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • दूसरी परंपरा की खोज (1982)
  • वाद विवाद संवाद (1989)

राजेंद्र यादव-

  • परिचय-नई कहानी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और 'हंस' पत्रिका के संपादक।
  • प्रमुख कृतियाँ-
  • सारा आकाश (उपन्यास)
  • उखड़े हुए लोग (उपन्यास)
  • जहाँ लक्ष्मी कैद है (कहानी संग्रह)
  • कहानी: स्वरूप और संवेदना (आलोचना)

देवीशंकर अवस्थी-

  • परिचय- नई कहानी के दौर के महत्वपूर्ण आलोचक।
  • प्रमुख कृति-विवेक के रंग, आलोचना और आलोचना।

Additional Informationनिर्मल वर्मा-

  • जन्म-1929-2005 ई.
  • नई कहानी आंदोलन के महत्वपूर्ण कथाकार।
  • कहानी संग्रह-
  • परिंदे (1960 ई.)
  • जलती झाड़ी (1965 ई.)
  • पिछली गर्मियों में (1968 ई.)
  • बीच बहस में (1973 ई.)
  • कौवे और काला पानी (1983 ई.) - साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • उपन्यास-
  • वे दिन (1964 ई.)
  • लाल टीन की छत (1974 ई.)
  • एक चिथड़ा सुख (1979 ई.)
  • रात का रिपोर्टर (1989 ई.)
  • अंतिम अरण्य (2000 ई.)

Question 78

'मानस का हंस' के आमुख के अनुसार, इस उपन्यास को लिखने से पहले नागर जी ने निम्नलिखित में से किस रचना को खास तौर से पढ़ा था:

  1. AOption (a)

    रामचरितमानस

  2. BOption (b)

    दोहावली

  3. COption (c)

    विनयपत्रिका

  4. DOption (d)

    हनुमानबाहुक

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Correct answer

Answer: (c)C.

विनयपत्रिका

Why this answer is correct

सही उत्तर है- विनयपत्रिका

Key Pointsमानस का हंस-

  • रचनाकार- अमृतलाल नागर
  • प्रकाशन वर्ष-1972 ई.
  • यह उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।
  • विधा-जीवनीपरक उपन्यास
  • विषय-
  • अमृतलाल नागर ने इसके आमुख में स्पष्ट किया है कि इस उपन्यास को लिखने से पहले उन्होंने 'विनयपत्रिका' को खास तौर से और बार-बार पढ़ा था।
  • लेखक के अनुसार, तुलसीदास के अंतर्मन को समझने के लिए विनयपत्रिका सबसे महत्वपूर्ण स्रोत रही है।

Important Pointsविनयपत्रिका-

  • रचनाकार-गोस्वामी तुलसीदास
  • भाषा-ब्रजभाषा
  • विधा-गीतिकाव्य (भक्ति काव्य)
  • विषय-
  • इसमें तुलसीदास की भक्ति-भावना और आत्मनिवेदन की पराकाष्ठा देखने को मिलती है।
  • यह कलयुग के विरुद्ध राम के दरबार में भेजी गई एक अर्जी के रूप में लिखी गई है।

रामचरितमानस-

  • रचनाकार-गोस्वामी तुलसीदास
  • प्रकाशन वर्ष-1574 ई. (संवत 1631)
  • भाषा-अवधी
  • विषय-
  • यह हिंदी साहित्य का सबसे लोकप्रिय महाकाव्य है।
  • इसमें 7 कांड हैं: बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड।

हनुमानबाहुक-

  • रचनाकार- गोस्वामी तुलसीदास
  • विषय-बाहु पीड़ा से मुक्ति के लिए रचित स्तुति काव्य।

Additional Informationअमृतलाल नागर-

  • जन्म-1916-1990 ई.
  • हिंदी के प्रमुख उपन्यासकार और कहानीकार हैं।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • बूँद और समुद्र (1956 ई.)
  • सुहाग के नूपुर (1960 ई.)
  • अमृत और विष (1966 ई.) - साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त।
  • खंजन नयन (1981 ई.) - सूरदास के जीवन पर आधारित।
  • नाच्यौ बहुत गोपाल (1978 ई.)

गोस्वामी तुलसीदास-

  • जन्म-1532-1623 ई. (लगभग)
  • भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • दोहावली
  • कवितावली
  • गीतावली
  • कृष्ण गीतावली
  • वैराग्य संदीपनी
  • बरवै रामायण आदि।

Question 79

निम्नलिखित में से कौन सा कथन अस्तित्ववाद से संबंधित है?

A. अस्तित्ववाद का मूलाधार ही वैयक्तिक स्वछंदता है।

B. नीशे ने कहा था- ईश्वर की मृत्यु हो चुकी है।

C. 'अस्तित्ववाद शब्द को 1940 के दशक में कीकेंगार्द ने गढ़ा था।

D. युद्ध और शांति एक अस्तित्ववादी कृति है।

E. सार्त्र अस्तित्ववादी लेखक और चिंतक दोनोंहैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और D

  2. BOption (b)

    केवल A, B और E

  3. COption (c)

    केवल C और D

  4. DOption (d)

    केवल C और E

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Correct answer

Answer: (b)B.

केवल A, B और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A, B और E

Key Pointsअस्तित्ववाद (Existentialism)-

  • मूलाधार- अस्तित्ववाद का मूलाधार वैयक्तिक स्वतंत्रता और स्वछंदता है। यह दर्शन व्यक्ति की विशिष्टता और उसके चयन की स्वतंत्रता पर बल देता है।
  • नीशे का कथन- प्रसिद्ध दार्शनिक फ्रेडरिक नीशे ने घोषणा की थी कि "ईश्वर की मृत्यु हो चुकी है" (God is dead), जो अस्तित्ववाद की एक महत्वपूर्ण वैचारिक पृष्ठभूमि है।
  • जॉं पॉल सार्त्र- सार्त्र एक प्रमुख अस्तित्ववादी लेखक और चिंतक दोनों हैं। उन्होंने 'अस्तित्व सार से पहले है' (Existence precedes essence) का सिद्धांत दिया।

Important Pointsकथनों का विश्लेषण-

  • कथन A- यह सही है क्योंकि अस्तित्ववाद व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोपरि मानता है।
  • कथन B- यह सही है, नीशे ने पारंपरिक नैतिकता और ईश्वर के अंत की बात कर अस्तित्ववाद का मार्ग प्रशस्त किया।
  • कथन C- यह गलत है। यद्यपि सोरेन कीकेंगार्द को अस्तित्ववाद का जनक माना जाता है, लेकिन 'अस्तित्ववाद' (Existentialism) शब्द को 1940 के दशक में फ्रांसीसी दार्शनिक गैब्रियल मार्शल ने गढ़ा था।
  • कथन D- यह गलत है। 'युद्ध और शांति' (War and Peace) लियो टॉल्स्टॉय की कृति है, जो यथार्थवादी परंपरा की रचना है, न कि अस्तित्ववादी।
  • कथन E- यह सही है, सार्त्र ने अपने उपन्यासों, नाटकों और दार्शनिक ग्रंथों के माध्यम से अस्तित्ववाद को लोकप्रिय बनाया।

Additional Informationप्रमुख अस्तित्ववादी विचारक-

  • सोरेन कीकेंगार्द- इन्हें अस्तित्ववाद का प्रवर्तक माना जाता है।
  • मार्टिन हाइडेगर- इन्होंने 'बीइंग एंड टाइम' (Being and Time) के माध्यम से अस्तित्व की व्याख्या की।
  • अल्बेयर कामू- इन्होंने 'विसंगतिवाद' (Absurdism) के माध्यम से अस्तित्ववादी चेतना को विस्तार दिया।
  • हिन्दी साहित्य में प्रभाव- हिन्दी में 'अज्ञेय' की रचनाओं (जैसे- अपने-अपने अजनबी) पर अस्तित्ववाद का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है।

Question 80

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-Iसूची-II
A.शब्दार्थो सहितो काव्यंI.आनंदवर्धन
B.पद संघटना रीतिःII.अभिनव गुप्त
C.ध्वन्यालोक लोचनIII.रामचंद्र शुक्ल
D.रस मीमांसाIV.भामह

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-IV, C-I, D-III

  2. BOption (b)

    A-III, B-I, C-II, D-IV

  3. COption (c)

    A-IV, B-I, C-II, D-III 

  4. DOption (d)

    A-II, B-III, C-IV, D-I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A-IV, B-I, C-II, D-III 

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-IV, B-I, C-II, D-III

Key Points

  • सही सुमेलन इस प्रकार है-
सूची-I (कथन/रचना)सूची-II (आचार्य/लेखक)
शब्दार्थो सहितो काव्यंभामह
पद संघटना रीतिःआनंदवर्धन
ध्वन्यालोक लोचनअभिनव गुप्त
रस मीमांसारामचंद्र शुक्ल

Important Pointsभामह-

  • समय- छठी शताब्दी।
  • ग्रंथ- काव्यालंकार।
  • इन्हें अलंकार संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है।
  • कथन- "शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्" (शब्द और अर्थ का सहभाव ही काव्य है)।

आनंदवर्धन-

  • समय- नौवीं शताब्दी।
  • ग्रंथ- ध्वन्यालोक।
  • इन्हें ध्वनि संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है।
  • कथन- "पद संघटना रीतिः" (पदों की विशिष्ट रचना ही रीति है - यह विचार इन्होंने ध्वनि के संदर्भ में स्पष्ट किया)।

अभिनव गुप्त-

  • समय- दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी।
  • ग्रंथ- ध्वन्यालोक लोचन (ध्वन्यालोक की टीका), अभिनवभारती (नाट्यशास्त्र की टीका)।
  • इन्होंने रस सूत्र की व्याख्या 'अभिव्यक्तिवाद' के नाम से की।

रामचंद्र शुक्ल-

  • समय- 1884-1941 ई.।
  • ग्रंथ- रस मीमांसा (सैद्धांतिक आलोचना)।
  • इन्होंने चिंतामणि (निबंध संग्रह) और 'हिंदी साहित्य का इतिहास' (1929) जैसी कालजयी कृतियाँ लिखीं।

Additional Informationअन्य महत्वपूर्ण काव्य लक्षण-

  • मम्मट- तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि।
  • विश्वनाथ- वाक्यं रसात्मकं काव्यम्।
  • जगन्नाथ- रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्।
  • दण्डी- शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली।

Question 81

"भीख मांगो तुम जो भिखमंगे की जात हो । हम तो मजूर ठहरे,जहां काम करेंगे,वहीं चार पैसे पाएंगे।" गोदान में दातादीन के प्रति यह उद्गार किसके हैं?

  1. AOption (a)

    होरी

  2. BOption (b)

    धनिया

  3. COption (c)

    गोबर

  4. DOption (d)

    सिलिया

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Correct answer

Answer: (b)B.

धनिया

Why this answer is correct

सही उत्तर है- गोबर

Key Pointsगोबर-

  • पात्र परिचय- गोबर (गोवर्धन) प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान' का एक प्रमुख पात्र है।
  • वह होरी और धनिया का पुत्र है।
  • कथन का संदर्भ- यह कथन गोबर ने पंडित दातादीन से तब कहा था जब वह शहर से लौटकर आता है और गाँव की रूढ़िवादी व्यवस्था तथा शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाता है।
  • विशेषता-
  • गोबर नई पीढ़ी का प्रतीक है जो पुरानी मर्यादाओं और शोषण को स्वीकार नहीं करता।
  • वह विद्रोही स्वभाव का है और आर्थिक स्वावलंबन में विश्वास रखता है।

Important Pointsगोदान-

  • रचनाकार-मुंशी प्रेमचंद
  • प्रकाशन वर्ष-1936 ई.
  • विधा-उपन्यास
  • विषय-
  • यह भारतीय किसान के जीवन की त्रासदी और शोषण का महाकाव्य है।
  • इसमें ग्रामीण और शहरी जीवन की दो समानांतर कथाएँ चलती हैं।
  • मुख्य समस्या ऋणग्रस्तता, धार्मिक पाखंड और सामाजिक मर्यादा है।

होरी-

  • परिचय-उपन्यास का नायक और भारतीय किसान का प्रतिनिधि पात्र।
  • विशेषता-
  • वह मर्यादावादी और धर्मभीरु है।
  • उसकी जीवन भर की अभिलाषा एक 'गाय' पालने की है।
  • वह अंत तक ऋण के बोझ तले दबा रहता है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है।

धनिया-

  • परिचय- होरी की पत्नी और उपन्यास की सशक्त नारी पात्र।
  • विशेषता-वह साहसी, स्पष्टवादी और अन्याय का विरोध करने वाली महिला है।

Additional Informationमुंशी प्रेमचंद-

  • जन्म-1880-1936 ई.
  • इन्हें 'उपन्यास सम्राट' और 'कथा सम्राट' कहा जाता है।
  • प्रमुख उपन्यास-
  • सेवासदन (1918 ई.)
  • प्रेमाश्रम (1922 ई.)
  • रंगभूमि (1925 ई.)
  • कायाकल्प (1926 ई.)
  • निर्मला (1927 ई.)
  • गबन (1931 ई.)
  • कर्मभूमि (1932 ई.)
  • मंगलसूत्र (अपूर्ण)

दातादीन-

  • परिचय-गाँव का ब्राह्मण और शोषक वर्�� का प्रतिनिधि।
  • वह धर्म की आड़ में किसानों का शोषण करता है और सूदखोरी का धंधा करता है।
  • उसका पुत्र मातादीन है जिसका संबंध सिलिया (चमारिन) से होता है।

सिलिया-

  • वह दलित वर्ग की पात्र है।
  • वह मातादीन से प्रेम करती है और सामाजिक प्रताड़ना सहती है।
  • वह उपन्यास में दलित चेतना और संघर्ष का प्रतीक है।

Question 82

'पृथ्वीराज रासो के संदर्भ में कौन सा तथ्य सही नहीं है:

A. ढाई हजार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रन्थ है।

B. मुख्य छंद - कवित्त (छप्पय), दूहा, तोमर, त्रोटक, गाहा, और आर्या है।

C. 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं।

D. पृथ्वीराज रासो को चंद बरदाई के पुत्र कल्हड़ ने पूरा किया था।

E. पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा रासो में वर्णित घटनाओं तथा संवतों को भाटों की कल्पना नहीं मानते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, C और E

  2. BOption (b)

    केवल B और C

  3. COption (c)

    केवल B, D और A

  4. DOption (d)

    केवल D और E

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Correct answer

Answer: (d)D.

केवल D और E

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल D और E

Key Pointsपृथ्वीराज रासो-

  • रचनाकार- चंदबरदाई
  • प्रकाशन वर्ष-12वीं शताब्दी (मूल रचना)
  • यह हिन्दी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है।
  • इसमें 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं।
  • यह लगभग ढाई हजार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रन्थ है।
  • मुख्य छंद- कवित्त (छप्पय), दूहा (दोहा), तोमर, त्रोटक, गाहा और आर्या आदि।
  • चंदबरदाई को 'छप्पय छंद' का विशेषज्ञ माना जाता है।

Important Pointsअसत्य कथनों का विश्लेषण-

  • कथन D: पृथ्वीराज रासो को चंदबरदाई के पुत्र जल्हण ने पूरा किया था, न कि कल्हड़ ने।
  • कथन E: पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा पृथ्वीराज रासो को 'पूर्णतः जाली' ग्रन्थ मानते हैं। वे इसमें वर्णित घटनाओं तथा संवतों को भाटों की कल्पना मानते हैं।

प्रामाणिकता पर विद्वानों के मत-

  • अप्रामाणिक मानने वाले- आचार्य रामचंद्र शुक्ल, देवी प्रसाद, कविराज श्यामलदान, गौरीशंकर हीराचंद ओझा, बुल्लर।
  • प्रामाणिक मानने वाले- श्यामसुंदर दास, मिश्र बंधु, कर्नल टॉड, मोहनलाल विष्णुलाल पंड्या।
  • अर्द्ध-प्रामाणिक मानने वाले- हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी, मुनि जिन विजय।

Additional Informationचंदबरदाई-

  • जन्म-1148-1192 ई. (अनुमानित)
  • ये दिल्ली के अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के सामंत और राजकवि थे।
  • आचार्य शुक्ल के अनुसार- "ये हिंदी के प्रथम महाकवि माने जाते हैं और इनका पृथ्वीराज रासो हिंदी का प्रथम महाकाव्य है।"
  • इनकी भाषा को विद्वानों ने 'डिंगल' कहा है, जिसमें अपभ्रंश मिश्रित पुरानी हिंदी का प्रयोग है।

पृथ्वीराज रासो की विषय-वस्तु-

  • इसमें पृथ्वीराज चौहान के शौर्य, वीरता और संयोगिता के साथ उनके प्रेम का वर्णन है।
  • इसमें वीर रस और श्रृंगार रस की प्रधानता है।
  • रेवा तट और कनवज्ज समय इसके महत्वपूर्ण अध्याय हैं।

Question 83

'यह सारस्वत देश तुम्हारा तुम हो रानी' इड़ा को संबोधित यह पंक्ति कामायनी के किस सर्ग में किसने कही है :

  1. AOption (a)

    स्वप्न सर्ग में मनु ने

  2. BOption (b)

    स्वप्न सर्ग में श्रद्धा ने

  3. COption (c)

    संघर्ष सर्ग में श्रद्धा ने

  4. DOption (d)

    संघर्ष सर्ग में मनु ने

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Correct answer

Answer: (d)D.

संघर्ष सर्ग में मनु ने

Why this answer is correct

सही उत्तर है- स्वप्न सर्ग में मनु ने

Key Pointsकामायनी-

  • रचनाकार- जयशंकर प्रसाद
  • प्रकाशन वर्ष-1935 ई.
  • यह 15 सर्गों में विभक्त महाकाव्य है।
  • विधा-महाकाव्य
  • विषय-
  • इसमें मनु और श्रद्धा के माध्यम से मानव सभ्यता के विकास की मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक कथा वर्णित है।
  • प्रस्तुत पंक्ति 'स्वप्न' सर्ग से ली गई है, जहाँ मनु इड़ा को संबोधित करते हुए कहते हैं- "यह सारस्वत देश तुम्हारा तुम हो रानी"।
  • मुख्य पात्र-
  • मनु (मन का प्रतीक)
  • श्रद्धा (हृदय का प्रतीक)
  • इड़ा (बुद्धि का प्रतीक)
  • कुमार (मानव का प्रतीक)

Important Pointsस्वप्न सर्ग-

  • कामायनी का दसवाँ सर्ग है।
  • इसमें मनु के अंतर्द्वंद्व और उनके द्वारा इड़ा के प्रति आकर्षण का चित्रण है।
  • मनु इड़ा के शासन और सारस्वत नगर की व्यवस्था को देखकर उसे वहाँ की स्वामिनी स्वीकार करते हैं।

संघर्ष सर्ग-

  • कामायनी का ग्यारहवाँ सर्ग है।
  • इसमें मनु और प्रजा के बीच युद्ध का वर्णन है।
  • मनु द्वारा इड़ा पर अधिकार करने की चेष्टा के कारण संघर्ष उत्पन्न होता है।

कामायनी के सर्गों का क्रम-

  • चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनंद।

Additional Informationजयशंकर प्रसाद-

  • जन्म-1889-1937 ई.
  • छायावाद के प्रवर्तक और आधार स्तंभ माने जाते हैं।
  • काव्य रचनाएँ-
  • उर्वशी (1909 ई.)
  • वन मिलन (1909 ई.)
  • झरना (1918 ई.)
  • आँसू (1925 ई.)
  • लहर (1933 ई.)
  • कामायनी (1935 ई.)
  • नाटक-
  • स्कंदगुप्त
  • चंद्रगुप्त
  • ध्रुवस्वामिनी
  • अजातशत्रु आदि।

Question 84

नागरी प्रचारिणी सभा के संदर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल का अभिमत नहीं है- 

  1. AOption (a)

    संवत् 1950 में कई उत्साही छात्रों के उद्योग से काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई.

  2. BOption (b)

    इस सभा की सारी समृद्धि और कीर्ति बाबू श्यामसुन्दर जीके त्याग और सतत परिश्रम का फल है.

  3. COption (c)

    इसके प्रथम सभापति भारतेंदु के फुफेरे भाई बाबू राधा कृष्णदास हुए.

  4. DOption (d)

    नागरी प्रचारिणी पत्रिका की प्रारम्भिक संख्याओं को यदि हम निकाल कर देखें तो उसमें अनेक विषयों के लेखों के अतिरिक्त कहीं भी कविताएँ नहीं मिलती.

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Correct answer

Answer: (d)D.

नागरी प्रचारिणी पत्रिका की प्रारम्भिक संख्याओं को यदि हम निकाल कर देखें तो उसमें अनेक विषयों के लेखों के अतिरिक्त कहीं भी कविताएँ नहीं मिलती.

Why this answer is correct

सही उत्तर है- नागरी प्रचारिणी पत्रिका की प्रारम्भिक संख्याओं को यदि हम निकाल कर देखें तो उसमें अनेक विषयों के लेखों के अतिरिक्त कहीं भी कविताएँ नहीं मिलती.

Key Pointsनागरी प्रचारिणी सभा और आचार्य शुक्ल-

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' में नागरी प्रचारिणी सभा के योगदान की विस्तृत चर्चा की है।
  • स्थापना- संवत् 1950 (1893 ई.) में काशी में हुई।
  • संस्थापक- बाबू श्यामसुंदर दास, पंडित रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह।
  • शुक्ल जी का मत- शुक्ल जी के अनुसार, "इस सभा की सारी समृद्धि और कीर्ति बाबू श्यामसुन्दर दास जी के त्याग और सतत परिश्रम का फल है।"
  • प्रथम सभापति- बाबू राधाकृष्ण दास (भारतेंदु हरिश्चंद्र के फुफेरे भाई)।
  • विकल्प D की असत्यता- शुक्ल जी ने यह नहीं कहा कि पत्रिका में कविताएँ नहीं मिलती थीं, बल्कि उन्होंने पत्रिका के शोधपरक और गंभीर स्वरूप की प्रशंसा की थी।

Important Pointsनागरी प्रचारिणी पत्रिका-

  • प्रकाशन प्रारंभ-1896 ई.
  • स्वरूप- यह सभा की मुखपत्र थी और हिंदी की प्रथम शोध पत्रिका मानी जाती है।
  • संपादक मंडल- प्रारंभ में बाबू श्यामसुंदर दास, राधाकृष्ण दास, जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' आदि इसके संपादक रहे।
  • विषय-
  • इसमें प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की खोज, इतिहास, पुरातत्व और भाषा विज्ञान पर गंभीर लेख प्रकाशित होते थे।
  • शुक्ल जी ने इसकी सराहना करते हुए इसे हिंदी साहित्य की उन्नति का मुख्य साधन माना है।

बाबू श्यामसुंदर दास-

  • योगदान- नागरी प्रचारिणी सभा के प्राण और आधार स्तंभ।
  • प्रमुख कार्य- हिंदी शब्दसागर का संपादन, हस्तलिखित ग्रंथों की खोज का कार्य।
  • शुक्ल जी का कथन- "बाबू श्यामसुंदर दास की हिंदी सेवा अद्वितीय है।"

Additional Informationआचार्य रामचंद्र शुक्ल-

  • जन्म-1884-1941 ई.
  • हिंदी के सर्वश्रेष्ठ आलोचक, निबंधकार और इतिहासकार।
  • प्रमुख ग्रंथ-
  • हिंदी साहित्य का इतिहास (1929 ई.)
  • चिंतामणि (निबंध संग्रह)
  • रस मीमांसा (शास्त्रीय आलोचना)
  • भ्रमरगीत सार (संपादन)

बाबू राधाकृष्ण दास-

  • परिचय- भारतेंदु हरिश्चंद्र के फुफेरे भाई और नागरी प्रचारिणी सभा के प्रथम अध्यक्ष।
  • रचनाएँ-
  • भारत बारहमासा
  • देश दशा
  • महारानी पद्मावती (नाटक)
  • महाराणा प्रताप (नाटक)

सभा के अन्य महत्वपूर्ण कार्य-

  • हिंदी शब्दसागर का निर्माण।
  • हिंदी व्याकरण का मानकीकरण (पंडित कामताप्रसाद गुरु द्वारा)।
  • आर्यभाषा पुस्तकालय की स्थापना।
  • प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों की खोज और उनका संरक्षण।

Question 85

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I रचनाकारसूची-II रचना
A.महामहोपाध्याय हर प्रसाद शास्त्रीI.दोहा कोश
B.राहुल सांकृत्यायनII.ले शा मिस्तोक्स
C.प्रबोधचंद्र बागचीIII.हिंदी काव्यधारा
D.डॉ. मुहम्मद शहीदुल्लाIV.बौद्धगान ओ दूहा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-III, B-IV, C-II, D-I

  2. BOption (b)

    A-I, B-II, C-III, D-IV

  3. COption (c)

    A-IV, B-III, C-I, D-II

  4. DOption (d)

    A-II, B-III, C-IV, D-I

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Correct answer

Answer: (c)C.

A-IV, B-III, C-I, D-II

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-IV, B-III, C-I, D-II

Key Points

  • सुमेलित सूची इस प्रकार है-
सूची-I (रचनाकार)सूची-II (रचना)
महामहोपाध्याय हर प्रसाद शास्त्रीबौद्धगान ओ दूहा
राहुल सांकृत्यायनहिंदी काव्यधारा
प्रबोधचंद्र बागचीदोहा कोश
डॉ. मुहम्मद शहीदुल्लाले शा मिस्तोक्स (Les Chants Mystiques)

Important Pointsबौद्धगान ओ दूहा-

  • संपादक- महामहोपाध्याय हर प्रसाद शास्त्री
  • प्रकाशन वर्ष- 1916 ई.
  • विषय- इसमें सिद्धों की रचनाओं का संग्रह है। यह बांग्ला अक्षरों में प्रकाशित हुआ था।

हिंदी काव्यधारा-

  • संपादक- राहुल सांकृत्यायन
  • प्रकाशन वर्ष- 1944 ई.
  • विषय- इसमें अपभ्रंश और पुरानी हिंदी की कविताओं का संग्रह है। राहुल जी ने सिद्ध साहित्य को हिंदी साहित्य का अंग माना है।

दोहा कोश-

  • संपादक- प्रबोधचंद्र बागची
  • प्रकाशन वर्ष- 1938 ई.
  • विषय- इसमें सरहपा, तिलोपा और कण्हपा के दोहों का संपादन किया गया है।

ले शा मिस्तोक्स (Les Chants Mystiques)-

  • संपादक- डॉ. मुहम्मद शहीदुल्ला
  • प्रकाशन वर्ष- 1928 ई.
  • विषय- इसमें सरहपा और कण्हपा के पदों का संपादन किया गया है।

Additional Informationराहुल सांकृत्यायन-

  • जन्म- 1893-1963 ई.
  • इन्हें 'महापंडित' की उपाधि दी गई है।
  • इन्होंने हिंदी साहित्य के आदिकाल को 'सिद्ध-सामंत काल' कहा है।
  • प्रमुख कृतियाँ-
  • वोल्गा से गंगा (कहानी संग्रह)
  • मध्य एशिया का इतिहास
  • मेरी लद्दाख यात्रा
  • घुमक्कड़ शास्त्र

हर प्रसाद शास्त्री-

  • ये प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान, पुरालेखविद् और पांडुलिपि संग्रहकर्ता थे।
  • इन्होंने नेपाल की यात्रा के दौरान सिद्धों की पांडुलिपियों की खोज की थी।

Question 86

निम्नलिखित संस्थाओं को उनके स्थापना वर्ष अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यस्थित कीजिए:

A. भारतीय ज्ञानपीठ

B. हिन्दुस्तानी एकेडमी, इलाहाबाद

C. फोर्ट विलियम कॉलेज

D. दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा

E. संगीत नाटक अकादमी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    B, A, D, E, C

  2. BOption (b)

    C, D, E, B, А

  3. COption (c)

    D, B, E, C, А

  4. DOption (d)

    C, D, B, E, А

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

C, D, B, E, А

Why this answer is correct

सही उत्तर है- C, D, B, E, A

Key Points

  • संस्थाओं का उनके स्थापना वर्ष के अनुसार सही अनुक्रम निम्नलिखित है:
संस्था का नामस्थापना वर्षस्थान
फोर्ट विलियम कॉलेज (C)1800 ई.कलकत्ता
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (D)1918 ई.मद्रास (चेन्नई)
हिन्दुस्तानी एकेडमी (B)1927 ई.इलाहाबाद (प्रयागराज)
संगीत नाटक अकादमी (E)1953 ई.नई दिल्ली
भारतीय ज्ञानपीठ (A)1961 ई.नई दिल्ली

Important Points

फोर्ट विलियम कॉलेज-

  • संस्थापक- लॉर्ड वेलेजली
  • उद्देश्य- ब्रिटिश अधिकारियों को भारतीय भाषाओं का ज्ञान देना।
  • जॉन गिलक्राइस्ट इसके हिंदुस्तानी विभाग के अध्यक्ष थे।

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-

  • संस्थापक- महात्मा गांधी
  • इसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।
  • इसका उद्देश्य दक्षिण भारत में हिंदी का प्रचार-प्रसार करना था।

हिन्दुस्तानी एकेडमी-

  • इसकी स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई थी।
  • यह हिंदी और उर्दू साहित्य के संरक्षण और विकास के लिए समर्पित है।

Additional Information

संगीत नाटक अकादमी-

  • यह भारत सरकार द्वारा स्थापित संगीत और नाटक की राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी अकादमी है।
  • इसका उद्घाटन 28 जनवरी 1953 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था।

भारतीय ज्ञानपीठ-

  • संस्थापक- साहू शांति प्रसाद जैन
  • यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार (ज्ञानपीठ पुरस्कार) प्रदान करने वाली संस्था है��
  • इसकी स्थापना 18 फरवरी 1961 को हुई थी।

Question 87

खड़ी बोली की निम्नलिखित रचनाओं के सम्बन्ध में कौन-सा एक कथन असत्य है?

  1. AOption (a)

    अकबर के समय में गंग कवि ने 'छंद छंद बरनन की कीर्ति' नामक एक काव्य पुस्तक खड़ी बोली में लिखी थी

  2. BOption (b)

    संवत् 1798 में रामप्रसाद निरंजनी ने 'भाषा योग वाशिष्ठ नामक ग्रन्थ खड़ी बोली में लिखा

  3. COption (c)

    खड़ी बोली में लिखित पहला महाकाव्य हरिऔध कृत 'प्रिय प्रवास' है

  4. DOption (d)

    लल्लूलाल विरचित प्रेमसागर खड़ी बोली की आरम्भिक रचनाओं में परिगणित है

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Correct answer

Answer: (a)A.

अकबर के समय में गंग कवि ने 'छंद छंद बरनन की कीर्ति' नामक एक काव्य पुस्तक खड़ी बोली में लिखी थी

Why this answer is correct

सही उत्तर है- अकबर के समय में गंग कवि ने 'छंद छंद बरनन की कीर्ति' नामक एक काव्य पुस्तक खड़ी बोली में लिखी थी

Key Pointsचन्द छन्द बरनन की महिमा-

  • रचनाकार- गंग कवि
  • समय-अकबर कालीन (16वीं शताब्दी)
  • यह खड़ी बोली गद्य की एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।
  • विशेषता- विकल्प A में इसे 'काव्य पुस्तक' कहा गया है, जबकि यह मूलतः गद्य रचना है। साथ ही इसका सही नाम 'चन्द छन्द बरनन की महिमा' है।
  • गंग कवि अकबर के दरबारी कवि थे।

Important Pointsभाषा योग वाशिष्ठ-

  • रचनाकार-रामप्रसाद निरंजनी
  • प्रकाशन वर्ष-1741 ई. (संवत् 1798)
  • महत्व-इसे परिमार्जित खड़ी बोली गद्य की प्रथम रचना माना जाता है।
  • रामचंद्र शुक्ल ने रामप्रसाद निरंजनी को प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक माना है।

प्रियप्रवास-

  • रचनाकार-अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  • प्रकाशन वर्ष-1914 ई.
  • विधा-महाकाव्य
  • विषय-
  • यह खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है।
  • इसमें 17 सर्ग हैं।
  • इसमें कृष्ण के मथुरा गमन और गोपियों के विरह का वर्णन है।

प्रेमसागर-

  • रचनाकार- लल्लूलाल
  • प्रकाशन वर्ष-1810 ई. के आसपास
  • महत्व-यह फोर्ट विलियम कॉलेज के दौरान लिखी गई खड़ी बोली की प्रारंभिक गद्य रचनाओं में से एक है।

Additional Informationखड़ी बोली गद्य के अन्य प्रमुख स्तंभ-

  • सदासुखलाल 'नियाज'- रचना: सुखसागर
  • इन्शा अल्ला खाँ- रचना: रानी केतकी की कहानी (उदयभान चरित)
  • सदल मिश्र- रचना: नासिकेतोपाख्यान
  • इन चारों लेखकों को आधुनिक खड़ी बोली गद्य का प्रवर्तक माना जाता है।

गंग कवि-

  • ये रीतिकाल के कवि थे।
  • इनका पूरा नाम गंगाधर था।
  • ये बीरबल के मित्र और अकबर के कृपापात्र थे।
  • इनकी अन्य रचनाओं में 'गंग पदावली', 'गंग पचीसी' और 'गंग रत्नावली' प्रसिद्ध हैं।

Question 88

सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :

सूची-I स्त्री पात्रसूची-II कहानी
A.सीताI.राही
B.किरनII.दुलाईवाली
C.चंदाIII.कानों में कंगना
D.अनीताIV.राजा निरबंसिया

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें

  1. AOption (a)

    A-II, B-III, C-IV, D-I

  2. BOption (b)

    A-III, B-II, C-I, D-IV

  3. COption (c)

    A-I, B-II, C-IV, D-III

  4. DOption (d)

    A-I, B-III, C-II, D-IV

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

A-II, B-III, C-IV, D-I

Why this answer is correct

सही उत्तर है- A-II, B-III, C-IV, D-I

Key Points

  • सुमेलन-
स्त्री पात्रकहानी
सीतादुलाईवाली
किरनकानों में कंगना
चंदाराजा निरबंसिया
अनीताराही

Important Pointsदुलाईवाली-

  • रचनाकार- बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष)
  • प्रकाशन वर्ष-1907 ई.
  • विषय-
  • यह हिंदी की प्रथम मौलिक कहानियों में से एक मानी जाती है।
  • इसमें तत्कालीन समाज के रीति-रिवाजों और रेल यात्रा का रोचक वर्णन है।
  • मुख्य पात्र-नवल किशोर, वंशीधर, जानकी, सीता।

कानों में कंगना-

  • रचन���कार-राधिका रमण प्रसाद सिंह
  • प्रकाशन वर्ष-1913 ई.
  • विषय-
  • यह कहानी वासना और प्रेम के द्वंद्व को चित्रित करती है।
  • इसमें पुरुष की चंचलता और स्त्री के त्याग को दिखाया गया है।
  • मुख्य पात्र-किरण, योगेश्वर, नरेंद्र।

राजा निरबंसिया-

  • रचनाकार-कमलेश्वर
  • प्रकाशन वर्ष-1957 ई.
  • विषय-
  • इसमें दो कथाएँ साथ-साथ चलती हैं - एक लोककथा और दूसरी आधुनिक मध्यवर्गीय जीवन की कथा।
  • यह कहानी आधुनिक जीवन की विसंगतियों और आर्थिक संकट के बीच पिसते रिश्तों को दर्शाती है।
  • मुख्य पात्र-जगपति, चंदा, राजा, रानी।

राही-

  • रचनाकार-सुभद्रा कुमारी चौहान
  • विषय-
  • यह कहानी गरीबी और भूख के कारण किए गए अपराध तथा जेल जीवन की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
  • इसमें सत्याग्रही और एक गरीब अपराधी के बीच के संवाद के माध्यम से सच्ची सेवा का अर्थ समझाया गया है।
  • मुख्य पात्र-अनीता, राही।

Additional Informationबंग महिला-

  • वास्तविक नाम-राजेन्द्र बाला घोष
  • हिंदी की प्रथम महिला कहानीकार मानी जाती हैं।
  • प्रमुख कहानियाँ-चंद्रदेव से मेरी बातें, कुंभ में छोटी बहू आदि।

कमलेश्वर-

  • 'नई कहानी' आंदोलन के प्रमुख स्तंभ।
  • प्रमुख रचनाएँ-खोई हुई दिशाएँ, मांस का दरिया, कितने पाकिस्तान (उपन्यास)।

सुभद्रा कुमारी चौहान-

  • राष्ट्रीय चेतना की कवयित्री और कहानीकार।
  • कहानी संग्रह-बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र।

Question 89

'ऐतिहासिक भौतिकवाद' से सम्बंधित निम्नलिखित में से कौन-से सत्य कथन हैं?

A. मार्क्स के अनुसार समाज का आर्थिक ढांचा ही इतिहास का मूलभूत निर्धारक तत्व है।

B. उत्पादन के साधनों का स्वरूप सामाजिक संबंधों को निर्धारित नहींकरता है।

C. द्वंद्वात्मक भौतिकवाद यह बतलाता है कि समाज की उत्पादक शक्तियां निरंतर स्थिर रहती हैं।

D. मार्स के अनुसार अब तक का सारा मानव इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।

E. मार्क्स के अनुसार सामंतवाद,पूंजीवाद की चरम अवस्था होती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल A, B और C

  2. BOption (b)

    केवल B, D और E

  3. COption (c)

    केवल A और D 

  4. DOption (d)

    केवल C और E

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A और D 

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A और D

Key Pointsऐतिहासिक भौतिकवाद-

  • प्रतिपादक- कार्ल मार्क्स
  • मुख्य विचार- मार्क्स के अनुसार समाज का आर्थिक ढांचा ही इतिहास का मूलभूत निर्धारक तत्व है। (कथन A सत्य है)
  • मार्क्स का मानना है कि भौतिक जीवन की उत्पादन पद्धति ही सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक जीवन की प्रक्रिया का निर्धारण करती है।
  • वर्ग संघर्ष- मार्क्स और एंगेल्स ने 'कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' में लिखा है कि "अब तक का सारा मानव इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।" (कथन D सत्य है)
  • इतिहास के विभिन्न चरणों (आदिम साम्यवाद, दासता, सामंतवाद, पूंजीवाद) में हमेशा दो विरोधी वर्ग रहे हैं।

Important Pointsअन्य कथनों का विश्लेषण-

  • कथन B- मार्क्स के अनुसार उत्पादन के साधनों का स्वरूप ही सामाजिक संबंधों को निर्धारित करता है। अतः यह कथन गलत है।
  • कथन C- द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के अनुसार समाज की उत्पादक शक्तियां निरंतर गतिशील और परिवर्तनशील रहती हैं, स्थिर नहीं। अतः यह कथन गलत है।
  • कथन E- मार्क्स के अनुसार पूंजीवाद, सामंतवाद के बाद की अवस्था है और 'साम्राज्यवाद' पूंजीवाद की चरम अवस्था है (जैसा कि बाद में लेनिन ने स्पष्ट किया)। सामंतवाद पूंजीवाद की चरम अवस्था नहीं है। अतः यह कथन गलत है।

Additional Informationकार्ल मार्क्स-

  • जन्म-1818-1883 ई.
  • जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाजशास्त्री।
  • प्रमुख रचनाएँ-
  • द होली फैमिली (1845 ई.)
  • द पावर्टी ऑफ फिलॉसफी (1847 ई.)
  • कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (1848 ई.)
  • दास कैपिटल (1867 ई.)
  • सिद्धांत-
  • द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
  • अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत
  • वर्ग संघर्ष का सिद्धांत
  • अलगाववाद का सिद्धांत

Question 90

'इन्स्पेक्टर मातादीन चाँद पर' से संदर्भित निम्नलिखित पंक्तियों में से कौन से कथन इन्स्पेक्टर मातादीन के हैं ?

A. मैं समझ गया कि आपकी पुलिस मुस्तेद क्यों नहीं है।

B. मैं जीवन भर इन श्रीचरणों में पड़ा रहना चाहता हूँ।

C. आप बाकी टर्म का वेतन ले जाइये - डबल ले जाइये, तिबल ले जाइये।

D. हमारा सिद्धांत है: हमें पैसा नहीं काम प्यारा है।

E. आप बेफिक्र रहें पेक्टसा ! मैं अपने मकान (पत्नी) को भी भेज दूंगा खिदमत के लिए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

  1. AOption (a)

    केवल C, D और E

  2. BOption (b)

    केवल B और C

  3. COption (c)

    केवल A और D

  4. DOption (d)

    केवल A, B और E 

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

केवल A और D

Why this answer is correct

सही उत्तर है- केवल A और D

Key Pointsइन्स्पेक्टर मातादीन चाँद पर (कहानी)-

  • रचनाकार- हरिशंकर परसाई
  • विधा- व्यंग्य कहानी
  • यह कहानी परसाई जी के व्यंग्य संग्रह 'ठिठुरता हुआ गणतंत्र' में संकलित है।
  • विषय-
  • इस कहानी में भारतीय पुलिस व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है।
  • कहानी में दिखाया गया है कि कैसे भारतीय पुलिस का भ्रष्टाचार और कार्यशैली चाँद जैसी आदर्श व्यवस्था को भी तहस-नहस कर देती है।
  • इन्स्पेक्टर मातादीन के कथन-
  • "मैं समझ गया कि आपकी पुलिस मुस्तैद क्यों नहीं है।" (कथन A) - यह मातादीन तब कहते हैं जब वे चाँद की पुलिस व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं।
  • "हमारा सिद्धांत है: हमें पैसा नहीं काम प्यारा है।" (कथन D) - यह मातादीन का व्यंग्यात्मक कथन है जो उनकी कार्यशैली को दर्शाता है।

Important Pointsकहानी के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-

  • पात्र- इन्स्पेक्टर मातादीन, चाँद की सरकार के मंत्री, चाँद के पुलिस अधिकारी।
  • कथन B और C का संदर्भ-
  • ये कथन चाँद के पुलिस अधिकारियों या वहां के प्रशासन से संबंधित हैं जो मातादीन की 'विशेषज्ञता' से प्रभावित होकर या त्रस्त होकर कहे गए हैं।
  • विकल्प C (वेतन ले जाइये) चाँद के मंत्री द्वारा मातादीन को वापस भेजने की जल्दी में कहा गया भाव है।
  • कथन E का संदर्भ-
  • यह कथन कहानी के मूल पाठ में मातादीन का नहीं है, बल्कि यह चाटुकारिता की पराकाष्ठा को दर्शाने वाला एक अन्य पात्र का संवाद है।

Additional Informationहरिशंकर परसाई-

  • जन्म- 1924-1995 ई.
  • हिंदी के पहले रचनाकार जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया।
  • प्रमुख व्यंग्य संग्रह-
  • तट की खोज
  • जैसे उनके दिन फिरे
  • भोलाराम का जीव
  • सदाचार का ताबीज
  • पगडंडियों का जमाना
  • शिकायत मुझे भी है
  • विकलांग श्रद्धा का दौर (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त)
  • परसाई जी ने 'वसुधा' नामक पत्रिका का संपादन भी किया।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से ही कोई आख्यान बुना जाता है। किसी सभ्यता में, बल्कि किसी भी भाषिक संस्कृति में, आख्यान को आगे बढ़ाने के कितने और केसे विकल्प उत्पन्न हो सकते हैं, इसी से उस सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि आंकी जा सकती है। जब भी कोई लेखक ऐसे किसी प्रश्न पर आ ठिठकता है तब उसकी कल्पनाशीलता कहाँ कहाँ तक और किस तरह से जा सकती है, वह कितनी उड़ान भर सकती हैं इसकी एक अदृश्य मर्यादा हर भाषा के रेशों के भीतर ही स्पन्दित होती रहती है उस मर्यादा की बहुलता ही किसी भाषिक संस्कृति की शक्ति होती है। तभी वाल्मीकि ने नल नामक वानर सैनिक को शिल्पकर्ता विश्वकर्मा के वरदान से युक्त किया होगा। और यह देखा होगा कि उसके बनाये सेतु बन ���कता है। पहले वाल्मीकि इस पर रुके होंगे लेकिन फिर इस रास्ते उन्होंने समुद्र पर सेतुबन्ध करने का निश्चय किया होगा. यही निश्चय रामायण के पन्नों पर फेल गया है। इस तरह राम, वानर सेना और रामकथा को आगे ले जाने के लिए नल के देवीय कोशल के सहारे वाल्मीकि ने समुद्र की विराट जलराशि पर सो योजन का सेतु बनाकर तैयार किया होगा। संयोग से यही पुल गोस्वामी तुलसीदास को ऐसा मालूम दिया होगा, मानो वह तैर रहा हो।

Question 91

Based on Passage: View directions & passage

इस गद्यांश का मुख्य उद्देश्य है:

  1. AOption (a)

    यह स्पष्ट करना कि आख्यान केवल कथा-कहानी नहीं, बल्कि कल्पना से बुना परिष्कृत जीवन यथार्थ है, जिसमें किसी सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि फलीभूत होती है

  2. BOption (b)

    वाल्मीकि रामायण का धार्मिक महत्व बताना

  3. COption (c)

    संस्कृति के बनिस्पत सभ्यता को सूक्ष्म बताना

  4. DOption (d)

    भाषिक संस्कृति में मर्यादा को स्थापित करना

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

यह स्पष्ट करना कि आख्यान केवल कथा-कहानी नहीं, बल्कि कल्पना से बुना परिष्कृत जीवन यथार्थ है, जिसमें किसी सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि फलीभूत होती है

Why this answer is correct

सही उत्तर है - यह स्पष्ट करना कि आख्यान केवल कथा-कहानी नहीं, बल्कि कल्पना से बुना परिष्कृत जीवन यथार्थ है, जिसमें किसी सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि फलीभूत होती है

Key Points

  • गद्यांश का मुख्य उद्देश्य - आख्यान को एक सृजनात्मक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करना, जो कल्पना और भाषिक संस्कृति की समृद्धि को दर्शाता है।
  • यह बताता है कि वाल्मीकि ने नल के माध्यम से सेतुबन्ध की कल्पना करके रामकथा को आगे बढ़ाया, जो सभ्यता की सृजनात्मकता का प्रमाण है।
  • भाषा और कल्पनाशीलता की मर्यादा को आख्यान के विकास से जोड़ा गया है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 2) वाल्मीकि रामायण का धार्मिक महत्व बताना - असत्य, क्योंकि गद्यांश का फोकस धार्मिकता पर नहीं, बल्कि आख्यान की सृजनात्मकता पर है।
  • विकल्प 3) संस्कृति के बनिस्पत सभ्यता को सूक्ष्म बताना - असत्य, क्योंकि गद्यांश में सभ्यता और संस्कृति को परस्पर जोड़ा गया है, न कि तुलना की गई है।
  • विकल्प 4) भाषिक संस्कृति में मर्यादा को स्थापित करना - असत्य, क्योंकि मर्यादा को शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है, न कि स्थापित करने का उद्देश्य है।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से ही कोई आख्यान बुना जाता है। किसी सभ्यता में, बल्कि किसी भी भाषिक संस्कृति में, आख्यान को आगे बढ़ाने के कितने और केसे विकल्प उत्पन्न हो सकते हैं, इसी से उस सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि आंकी जा सकती है। जब भी कोई लेखक ऐसे किसी प्रश्न पर आ ठिठकता है तब उसकी कल्पनाशीलता कहाँ कहाँ तक और किस तरह से जा सकती है, वह कितनी उड़ान भर सकती हैं इसकी एक अदृश्य मर्यादा हर भाषा के रेशों के भीतर ही स्पन्दित होती रहती है उस मर्यादा की बहुलता ही किसी भाषिक संस्कृति की शक्ति होती है। तभी वाल्मीकि ने नल नामक वानर सैनिक को शिल्पकर्ता विश्वकर्मा के वरदान से युक्त किया होगा। और यह देखा होगा कि उसके बनाये सेतु बन सकता है। पहले वाल्मीकि इस पर रुके होंगे लेकिन फिर इस रास्ते उन्होंने समुद्र पर सेतुबन्ध करने का निश्चय किया होगा. यही निश्चय रामायण के पन्नों पर फेल गया है। इस तरह राम, वानर सेना और रामकथा को आगे ले जाने के लिए नल के देवीय कोशल के सहारे वाल्मीकि ने समुद्र की विराट जलराशि पर सो योजन का सेतु बनाकर तैयार किया होगा। संयोग से यही पुल गोस्वामी तुलसी��ास को ऐसा मालूम दिया होगा, मानो वह तैर रहा हो।

Question 92

Based on Passage: View directions & passage

गद्यांश में लेखक ने वाल्मीकि को किस रूप में देखा है ?

  1. AOption (a)

    देवीय शक्तिसम्पन्न कवि के रूप में

  2. BOption (b)

    एक अपूर्व कल्पनाशील कवि के रूप में जिसने रामकथा को आगे ले जाने हेतु समुद्र पर सी योजन का सेतु तैयार किया होगा

  3. COption (c)

    तुलसीदास के सहयोगी कवि के रूप में

  4. DOption (d)

    नल नामक वानर सैनिक को वरदान देने वाले के रूप में

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

एक अपूर्व कल्पनाशील कवि के रूप में जिसने रामकथा को आगे ले जाने हेतु समुद्र पर सी योजन का सेतु तैयार किया होगा

Why this answer is correct

लेखक ने वाल्मीकि को देखा है - 'एक अपूर्व कल्पनाशील कवि के रूप में जिसने रामकथा को आगे ले जाने हेतु समुद्र पर सी योजन का सेतु तैयार किया होगा'

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार:-
  • लेखक ने वाल्मीकि को एक कल्पनाशील कवि के रूप में चित्रित किया है, जो नल के माध्यम से सेतुबन्ध की कल्पना कर रामकथा को नई दिशा देता है।
  • यह दर्शाता है कि वाल्मीकि की रचनात्मकता ने सभ्यता की समृद्धि को बढ़ाया।

Important Points

  • वाल्मीकि की कल्पनाशीलता -
  • गद्यांश में वाल्मीकि को एक ऐसे कवि के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने नल को विश्वकर्मा के वरदान से जोड़कर सेतुबन्ध की अवधारणा को जन्म दिया।
  • रामकथा का विकास -
  • सेतुबन्ध की कल्पना के माध्यम से रामकथा को आगे बढ़ाने का श्रेय वाल्मीकि की सृजनात्मक सोच को दिया गया है।
  • कल्पनाशीलता -
  • अर्थ: रचनात्मक सोच, जो नई और अनूठी अवधारणाओं को जन्म देती है।
  • सेतुबन्ध -
  • अर्थ: समुद्र पर बना पुल, जो रामायण में वानर सेना द्वारा बनाया गया था।
  • सभ्यता की समृद्धि -
  • अर्थ: सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रगति, जो आख्यानों के माध्यम से व्यक्त होती है।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से ही कोई आख्यान बुना जाता है। किसी सभ्यता में, बल्कि किसी भी भाषिक संस्कृति में, आख्यान को आगे बढ़ाने के कितने और केसे विकल्प उत्पन्न हो सकते हैं, इसी से उस सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि आंकी जा सकती है। जब भी कोई लेखक ऐसे किसी प्रश्न पर आ ठिठकता है तब उसकी कल्पनाशीलता कहाँ कहाँ तक और किस तरह से जा सकती है, वह कितनी उड़ान भर सकती हैं इसकी एक अदृश्य मर्यादा हर भाषा के रेशों के भीतर ही स्पन्दित होती रहती है उस मर्यादा की बहुलता ही किसी भाषिक संस्कृति की शक्ति होती है। तभी वाल्मीकि ने नल नामक वानर सैनिक को शिल्पकर्ता विश्वकर्मा के वरदान से युक्त किया होगा। और यह देखा होगा कि उसके बनाये सेतु बन सकता है। पहले वाल्मीकि इस पर रुके होंगे लेकिन फिर इस रास्ते उन्होंने समुद्र पर सेतुबन्ध करने का निश्चय किया होगा. यही निश्चय रामायण के पन्नों पर फेल गया है। इस तरह राम, वानर सेना और रामकथा को आगे ले जाने के लिए नल के देवीय कोशल के सहारे वाल्मीकि ने समुद्र की विराट जलराशि पर सो योजन का सेतु बनाकर तैयार किया होगा। संयोग से यही पुल गोस्वामी तुलसीदास को ऐसा मालूम दिया होगा, मानो वह तैर रहा हो।

Question 93

Based on Passage: View directions & passage

भाषिक संस्कृति की शक्ति से क्या आशय है:

  1. AOption (a)

    एक ही भाषा को अधिकाधिक बोलने वाले लोग

  2. BOption (b)

    मिथकीय कथा को मर्यादित भाषामें कल्पना और यथार्थ के बहुमेल से प्रस्तुत करना

  3. COption (c)

    भाषा का एकीकरण और दृढ़ीकरण

  4. DOption (d)

    लयात्मक भाषा की खोज

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (b)B.

मिथकीय कथा को मर्यादित भाषामें कल्पना और यथार्थ के बहुमेल से प्रस्तुत करना

Why this answer is correct

सही उत्तर है - मिथकीय कथा को मर्यादित भाषामें कल्पना और यथार्थ के बहुमेल से प्रस्तुत करना

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - भाषिक संस्कृति की शक्ति उसकी मर्यादा की बहुलता से उत्पन्न होती है, जो कल्पना और यथार्थ के मेल से मिथकीय कथाओं को समृद्ध करती है।
  • वाल्मीकि द्वारा सेतुबन्ध की कल्पना इसका उदाहरण है, जो रामकथा को भाषा की सीमाओं में आगे बढ़ाता है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण-​

  • अधिकाधिक - अत्यधिक, बहुत अधिक।
  • बोलने वाले - जो भाषा का प्रयोग करते हैं।
  • ​मिथकीय - पौराणिक, काल्पनिक कथाओं से संबंधित।
  • कथा - कहानी या आख्यान।
  • मर्यादित - सीमित या नियंत्रित, यहाँ भाषा की संरचना की सीमा।
  • भाषा - संचार का माध्यम।
  • कल्पना - रचनात्मक सोच या अनोखी अवधारणाएँ।
  • यथार्थ - वास्तविकता या सत्य।
  • बहुमेल - कई तत्वों का सुंदर संयोजन (यहाँ कल्पना और यथार्थ का मेल)।
  • प्रस्तुत करना - दिखाना या व्यक्त करना।
  • एकीकरण - एक साथ मिलाना या एक करने की प्रक्रिया।
  • दृढ़ीकरण - मजबूती या सुदृढ़ता प्रदान करना।
  • लयात्मक - संगीतात्मक या तालबद्ध।
  • खोज - नई चीज़ की खोज या अन्वेषण।

Question 94

Based on Passage: View directions & passage

लेखक के अनुसार किसी सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि कैसे आंकी जा सकती है?

  1. AOption (a)

    आख्यानों को आगे बढ़ाने वाली बहुवैकल्पिक संभावनाओं की मौजूदगी से।

  2. BOption (b)

    भाषा में स्पन्दित अदृश्य मर्यादा के रेशों से

  3. COption (c)

    दैवीय कौशल के सहारे

  4. DOption (d)

    समुद्र पर सेतुबंध के निश्चय से

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

आख्यानों को आगे बढ़ाने वाली बहुवैकल्पिक संभावनाओं की मौजूदगी से।

Why this answer is correct

सही उत्तर है - आख्यानों को आगे बढ़ाने वाली बहुवैकल्पिक संभावनाओं की मौजूदगी से

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - किसी सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि का मूल्यांकन आख्यान को आगे बढ़ाने के लिए उपलब्ध बहुवैकल्पिक संभावनाओं से होता है।
  • यह वाल्मीकि द्वारा रामकथा में सेतुबन्ध की कल्पना के माध्यम से दर्शाया गया है, जो नई दिशाओं की संभावना को प्रदर्शित करता है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 2) भाषा में स्पन्दित अदृश्य मर्यादा के रेशों से - असत्य, क्योंकि यह शक्ति का स्रोत है, न कि समृद्धि का मापदंड।
  • विकल्प 3) दैवीय कौशल के सहारे - असत्य, क्योंकि गद्यांश में दैवीयता का उल्लेख नहीं है, बल्कि मानवीय कल्पना पर जोर है।
  • विकल्प 4) समुद्र पर सेतुबंध के निश्चय से - असत्य, क्योंकि सेतुबंध एक उदाहरण है, न कि समृद्धि मापने का आधार।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से ही कोई आख्यान बुना जाता है। किसी सभ्यता में, बल्कि किसी भी भाषिक संस्कृति में, आख्यान को आगे बढ़ाने के कितने और केसे विकल्प उत्पन्न हो सकते हैं, इसी से उस सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि आंकी जा सकती है। जब भी कोई लेखक ऐसे किसी प्रश्न पर आ ठिठकता है तब उसकी कल्पनाशीलता कहाँ कहाँ तक और किस तरह से जा सकती है, वह कितनी उड़ान भर सकती हैं इसकी एक अदृश्य मर्यादा हर भाषा के रेशों के भीतर ही स्पन्दित होती रहती है उस मर्यादा की बहुलता ही किसी भाषिक संस्कृति की शक्ति होती है। तभी वाल्मीकि ने नल नामक वानर सैनिक को शिल्पकर्ता विश्वकर्मा के वरदान से युक्त किया होगा। और यह देखा होगा कि उसके बनाये सेतु बन सकता है। पहले वाल्मीकि इस पर रुके होंगे लेकिन फिर इस रास्ते उन्होंने समुद्र पर सेतुबन्ध करने का निश्चय किया होगा. यही निश्चय रामायण के पन्नों पर फेल गया है। इस तरह राम, वानर सेना और रामकथा को आगे ले जाने के लिए नल के देवीय कोशल के सहारे वाल्मीकि ने समुद्र की विराट जलराशि पर सो योजन का सेतु बनाकर तैयार किया होगा। संयोग से यही पुल गोस्वामी तुलसीदास को ऐसा मालूम दिया होगा, मानो वह तैर रहा हो।

Question 95

Based on Passage: View directions & passage

गद्यांश के अनुसार आख्यान को कैसे बुना जाता है?

  1. AOption (a)

    सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि से

  2. BOption (b)

    साहित्य को डूबकर रचने या पढ़ने से

  3. COption (c)

    आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से

  4. DOption (d)

    किसी प्रश्न पर लेखक के ठिठकने से

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (c)C.

आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से

Why this answer is correct

सही उत्तर है - आख्यान को कैसे आगे ले जाया जाए, ऐसे प्रश्नों के नैरन्तर्य से

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - आख्यान को बुना जाना उस प्रक्रिया से होता है जिसमें लेखक लगातार यह प्रश्न करता है कि आख्यान को कैसे आगे बढ़ाया जाए।
  • यह नैरन्तर्य (सततता) लेखक की कल्पना को नई दिशाओं में ले जाता है, जैसे वाल्मीकि ने सेतुबन्ध की कल्पना की।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 1) सभ्यता की सृजनात्मक समृद्धि से - असत्य, क्योंकि यह समृद्धि का स्रोत है, न कि आख्यान बुनने की प्रक्रिया।
  • विकल्प 2) साहित्य को डूबकर रचने या पढ़ने से - असत्य, क्योंकि गद्यांश में इस तरह की प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है।
  • विकल्प 4) किसी प्रश्न पर लेखक के ठिठकने से - असत्य, क्योंकि ठिठकना एक अस्थायी स्थिति है, न कि पूर्ण प्रक्रिया।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

रचना का सच रचना के भीतरी पाठ में वास करता है, जिसे जोराबरी ऊपर से खींच कर नहीं पाया जा सकता। इसलिए औसत आलोचक रचना की प्रशंसा या निंदा करके ही ठहर जाता है। वह रचना का वास्तविक यथार्थ मूल्य बताने में असमर्थ रहता है । मर्मज्ञ आलोचक एक खास तरह से रचना की पुनर्रचना करता है। इससे पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति का परिष्करण के साथ सर्जनात्मक विस्तार होता है। अच्छा पाठक और आलोचक वही है जो कविता की पहले बिना किसी दुराग्रह के 'क्लोज रीडिंग करता है। उसके बाद कला वस्तु के कथ्य और रूप का विश्लेषण करता है- रचना-संवाद के साथ रचना-संवाद से रचना की धातु का पता चल जाता है और रचना की प्रभाव क्षमता की पकड़ भी बढ़ जाती है। इस क्रिया से रचना के मूल्य निर्धारण में सुगमता हो जाती है। कई बार रचना इतनी जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है कि रचना के रागदीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनोती होती है। कविता का कार्य हे भावों का परिष्करण, उदात्तीकरण । कविता को 'पद्य का पर्याय न मानना । कविता तो पद्य का एक प्रकार विशेष है। कविता की अनेक परिभाषाएँ आलोचक गढ़ते रहते हैं। वे प्रायः आयातित होती हैं। तुक ओर लय के विश्राम का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है। ध्यान रहे कि आलोचना सिद्धांत अटल धर्म नहीं है, उसमें निरन्तर परिवर्तन की अपेक्षा रहती है।

Question 96

Based on Passage: View directions & passage

"आलोचना का सिद्धांत अटल धर्म नहीं है, इस पंक्ति के आलोक में आलोचना का आदर्श है ?

  1. AOption (a)

    यह तय कर लेना कि रचना निंदा करने योग्य है

  2. BOption (b)

    बिना किसी दुराग्रह के पाठ की 'क्लोज रीडिंग' और रचना-संवाद के साथ कला-वस्तु के कथ्य और रूप का विश्लेषण

  3. COption (c)

    कृति की प्रशंसा का पूर्व निर्धारण कर मानदंड बनाना

  4. DOption (d)

    बिक्री के आधार पर कृति के सम्बन्ध में अपना फैसला सुनाना

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Correct answer

Answer: (b)B.

बिना किसी दुराग्रह के पाठ की 'क्लोज रीडिंग' और रचना-संवाद के साथ कला-वस्तु के कथ्य और रूप का विश्लेषण

Why this answer is correct

सही उत्तर है - बिना किसी दुराग्रह के पाठ की 'क्लोज रीडिंग' और रचना-संवाद के साथ कला-वस्तु के कथ्य और रूप का विश्लेषण

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - आलोचना का सिद्धांत अटल नहीं है, बल्कि इसमें परिवर्तन की अपेक्षा रहती है।
  • आदर्श आलोचना में बिना दुराग्रह के 'क्लोज रीडिंग' और रचना-संवाद के माध्यम से कथ्य और रूप का विश्लेषण शामिल है, जो रचना के मूल्य को समझने में सहायक होता है।
  • मर्मज्ञ आलोचक रचना की पुनर्रचना करता है, जिससे पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति का परिष्करण होता है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 1) यह तय कर लेना कि रचना निंदा करने योग्य है - असत्य, क्योंकि गद्यांश औसत आलोचक की निंदा को सीमित मानता है।
  • विकल्प 3) कृति की प्रशंसा का पूर्व निर्धारण कर मानदंड बनाना - असत्य, क्योंकि यह दुराग्रह को बढ़ावा देता है, जो गद्यांश के खिलाफ है।
  • विकल्प 4) बिक्री के आधार पर कृति के सम्बन्ध में अपना फैसला सुनाना - असत्य, क्योंकि आलोचना का आधार व्यावसायिकता नहीं, बल्कि रचनात्मकता है।

Question 97

Based on Passage: View directions & passage

गद्यांश के अनुसार रचना के सच को कैसे पाया जा सकता है ?

  1. AOption (a)

    रचना के भीतरी पाठ में प्रवेश कर

  2. BOption (b)

    जोराबरी ऊपर से खींच कर

  3. COption (c)

    आलोचक की नजर से देखकर

  4. DOption (d)

    पाठालोचन के सहारे

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (a)A.

रचना के भीतरी पाठ में प्रवेश कर

Why this answer is correct

सही उत्तर है - रचना के भीतरी पाठ में प्रवेश कर

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - रचना का सच उसके भीतरी पाठ में वास करता है, जो जोरबरी से ऊपर से खींचकर नहीं पाया जा सकता।
  • इसके लिए गहन समझ और विश्लेषण की आवश्यकता होती है, जो मर्मज्ञ आलोचक द्वारा रचना की पुनर्रचना के माध्यम से संभव है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 2) जोरबरी ऊपर से खींच कर - असत्य, क्योंकि गद्यांश स्पष्ट करता है कि यह तरीका रचना के सच को प्रकट नहीं कर सकता।
  • विकल्प 3) आलोचक की नजर से देखकर - असत्य, क्योंकि औसत आलोचक रचना का यथार्थ मूल्य बताने में असमर्थ है।
  • विकल्प 4) पाठालोचन के सहारे - असत्य, क्योंकि यह एक अमान्य शब्द या संदर्भ हो सकता है; गद्यांश में 'पाठालोचन' का उल्लेख नहीं है।

निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिये :

रचना का सच रचना के भीतरी पाठ में वास करता है, जिसे जोराबरी ऊपर से खींच कर नहीं पाया जा सकता। इसलिए औसत आलोचक रचना की प्रशंसा या निंदा करके ही ठहर जाता है। वह रचना का वास्तविक यथार्थ मूल्य बताने में असमर्थ रहता है । मर्मज्ञ आलोचक एक खास तरह से रचना की पुनर्रचना करता है। इससे पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति का परिष्करण के साथ सर्जनात्मक विस्तार होता है। अच्छा पाठक और आलोचक वही है जो कविता की पहले बिना किसी दुराग्रह के 'क्लोज रीडिंग करता है। उसके बाद कला वस्तु के कथ्य और रूप का विश्लेषण करता है- रचना-संवाद के साथ रचना-संवाद से रचना की धातु का पता चल जाता है और रचना की प्रभाव क्षमता की पकड़ भी बढ़ जाती है। इस क्रिया से रचना के म��ल्य निर्धारण में सुगमता हो जाती है। कई बार रचना इतनी जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है कि रचना के रागदीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनोती होती है। कविता का कार्य हे भावों का परिष्करण, उदात्तीकरण । कविता को 'पद्य का पर्याय न मानना । कविता तो पद्य का एक प्रकार विशेष है। कविता की अनेक परिभाषाएँ आलोचक गढ़ते रहते हैं। वे प्रायः आयातित होती हैं। तुक ओर लय के विश्राम का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है। ध्यान रहे कि आलोचना सिद्धांत अटल धर्म नहीं है, उसमें निरन्तर परिवर्तन की अपेक्षा रहती है।

Question 98

Based on Passage: View directions & passage

गद्यांश के अनुसार कविता के सम्बन्ध में असत्य कथन है ?

  1. AOption (a)

    कविता का कार्य है भावों का परिष्करण, उदात्तीकरण

  2. BOption (b)

    कविता पद्य का एक प्रकार विशेष है

  3. COption (c)

    आलोचक कविता की अनेक आयातित परिभाषाएँ गढ़ते रहते है

  4. DOption (d)

    तुक और लय की गतिशीलता का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है

View answer & explanation

Correct answer

Answer: (d)D.

तुक और लय की गतिशीलता का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है

Why this answer is correct

सही उत्तर है - तुक और लय की गतिशीलता का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - कविता का कार्य भावों का परिष्करण और उदात्तीकरण है, और यह पद्य का एक विशेष प्रकार है।
  • आलोचक कविता की अनेक आयातित परिभाषाएँ गढ़ते हैं, लेकिन तुक और लय के विश्राम का सृजन संदर्भ के रूप में उल्लेख है, न कि गतिशीलता का।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 1) कविता का कार्य है भावों का परिष्करण, उदात्तीकरण - सत्य, क्योंकि गद्यांश में यह कविता का उद्देश्य माना गया है।
  • विकल्प 2) कविता पद्य का एक प्रकार विशेष है - सत्य, क्योंकि गद्यांश में कविता को पद्य का विशेष रूप बताया गया है।
  • विकल्प 3) आलोचक कविता की अनेक आयातित परिभाषाएँ गढ़ते रहते हैं - सत्य, क्योंकि गद्यांश में आयातित परिभाषाओं का उल्लेख है।
  • विकल्प 4) तुक और लय की गतिशीलता का भी कविता में अलग तरह का सृजन संदर्भ रहता है - असत्य, क्योंकि गद्यांश में तुक और लय के विश्राम का उल्लेख है, न कि गतिशीलता का।

Question 99

Based on Passage: View directions & passage

रचना के राग-दीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनौती कैसे है ?

  1. AOption (a)

    क्योंकि प्रत्येक रचना राग बद्ध होती है और रागों का सटीक ज्ञान सबको नहीं होता

  2. BOption (b)

    साक्षात्कार एक जटिल विधा है जिसमें अपना सच लोग कम बताते हैं

  3. COption (c)

    प्रायः रचना जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है, इसीलिए रचना के राग-दीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनौती है

  4. DOption (d)

    आज के अधिकांश आलोचक चुनौतियों का सामना करने से कतराने लगे हैं

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Correct answer

Answer: (c)C.

प्रायः रचना जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है, इसीलिए रचना के राग-दीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनौती है

Why this answer is correct

सही उत्तर है - प्रायः रचना जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है, इसीलिए रचना के राग-दीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनौती है

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - रचना के राग-दीप्त सच से साक्षात्कार एक चुनौती है क्योंकि कई बार रचना जटिल, दुरूह और संश्लिष्ट होती है।
  • इस जटिलता के कारण गहन विश्लेषण और समझ की आवश्यकता पड़ती है, जो इसे चुनौतीपूर्ण बनाता है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 1) क्योंकि प्रत्येक रचना राग बद्ध होती है और रागों का सटीक ज्ञान सबको नहीं होता - असत्य, क्योंकि गद्यांश में राग का तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि रचना की जटिलता पर जोर है।
  • विकल्प 2) साक्षात्कार एक जटिल विधा है जिसमें अपना सच लोग कम बताते हैं - असत्य, क्योंकि यह रचना के संदर्भ से हटकर व्यक्तिगत साक्षात्कार की बात करता है।
  • विकल्प 4) आज के अधिकांश आलोचक चुनौतियों का सामना करने से कतराने लगे हैं - असत्य, क्योंकि गद्यांश में आलोचकों की प्रवृत्ति का उल्लेख नहीं है।

Question 100

Based on Passage: View directions & passage

मर्मज्ञ आलोचक द्वारा रचना की पुनर्रचना से पाठक कैसे लाभान्वित होता है ?

  1. AOption (a)

    पाठक में आलोचक की प्रतिभा जाग उठती है

  2. BOption (b)

    पाठक की पढ़ने की भूख बढ़ जाती है

  3. COption (c)

    पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति के परिष्करण के साथ उसका सर्जनात्मक विस्तार हो जाता है

  4. DOption (d)

    पाठक बहुधा बहुआयामी लेखक बन जाता है

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Correct answer

Answer: (c)C.

पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति के परिष्करण के साथ उसका सर्जनात्मक विस्तार हो जाता है

Why this answer is correct

सही उत्तर है - पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति के परिष्करण के साथ उसका सर्जनात्मक विस्तार हो जाता है

Key Points

  • गद्यांश के अनुसार - मर्मज्ञ आलोचक द्वारा रचना की पुनर्रचना से पाठक की रसानुभूति और सौंदर्यानुभूति का परिष्करण होता है।
  • इस प्रक्रिया से पाठक का सर्जनात्मक विस्तार भी संभव होता है, जो उसे रचना को गहराई से समझने में सहायक बनता है।

Additional Informationविकल्पों का विश्लेषण -

  • विकल्प 1) पाठक में आलोचक की प्रतिभा जाग उठती है - असत्य, क्योंकि गद्यांश में आलोचक की प्रतिभा का हस्तांतरण का उल्लेख नहीं है।
  • विकल्प 2) पाठक की पढ़ने की भूख बढ़ जाती है - असत्य, क्योंकि यह लाभ का सीधा परिणाम नहीं है, बल्कि एक सामान्य प्रभाव हो सकता है।
  • विकल्प 4) पाठक बहुधा बहुआयामी लेखक बन जाता है - असत्य, क्योंकि गद्यांश में पाठक के लेखक बनने का उल्लेख नहीं है।

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