Official Paper

Rajasthan Police SI Paper-I Official Paper (Held On: 13 Sept 2021) (Previous Year Paper)

100 questions · 120 minutes · with answers · free

Test (100 questions)

1

इनमें से किस शब्द में 'ईन' प्रत्यय नहीं है?

  1. ((a))

    नमकीन

  2. ((b))

    रंगीन

  3. ((c))

    गमगीन

  4. ((d))

    शौकीन

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Answer: ((c))

गमगीन

सही उत्तर है - गमगीन

Key Points

  • 'गमगीन' शब्द में 'ईन' प्रत्यय नहीं है।
  • यह शब्द 'गम' (मूल शब्द) और 'गीन' (प्रत्यय) के योग से बना है।
  • 'गीन' एक फारसी प्रत्यय है जिसका अर्थ होता है 'युक्त' या 'भरा हुआ'।
  • 'गमगीन' का अर्थ - जिसे गहरा दुख हो;गम में डूबा हुआ, दुःखी।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।

अन्य विकल्प -

  • नमक + ईन = नमकीन।
  • रंग + ईन = रंगीन।
  • शौक + ईन = शौकीन।

Important Points

  • 'गीन’ एक फ़ारसी प्रत्यय है।
  • यह प्रत्यय किसी शब्द के साथ जुड़कर उस गुण या भाव से युक्त / भरा हुआ होने का अर्थ देता है।
  • उदाहरण -
  • रंज + गीन = रंजगीन (रंज से भरा हुआ)
  • ख़ुशी + गीन = ख़ुशगीन (कम प्रचलित)

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द -​

  • ईन - ग्रामीण, प्राचीन, शालीन, कुलीन, नवीन।
  • इक - धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक।
  • अक - पाठक, गायक, लेखक, नायक, धावक।
  • आस - मिठास, खटास, भड़ास, बिंदास।
  • ईय - भारतीय, राजकीय, तरकीय, जातीय।
  • उक - भिक्षुक, भावुक, कामुक, नाजुक।
  • अन - चिंतन, मनन, भवन, मरण, करण।
  • आई - पढ़ाई, लिखाई, बुनाई, सिलाई।
2

किस शब्द में 'ल' प्रत्यय नहीं है?

  1. ((a))

    मंजुल

  2. ((b))

    अतल

  3. ((c))

    मांसल

  4. ((d))

    श्यामल

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Answer: ((b))

अतल

'ल' प्रत्यय नहीं है- अतल

Key Points

  • यहाँ 'ल' प्रत्यय नहीं है। यह 'अ + तल' के योग से बना है,
  • जहाँ 'अ' एक उपसर्��� है जिसका अर्थ है 'नहीं' (अतल = जिसका कोई तल न हो / अथाह)।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।
  • उपसर्ग - जो शब्दांश शब्दों के आदि में जुड़ कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

  • मंजुल: मंजु + ल = मंजुल (इसमें 'ल' प्रत्यय है)।
  • मांसल: मांस + ल = मांसल (इसमें 'ल' प्रत्यय है)।
  • श्यामल: श्याम + ल = श्यामल (इसमें 'ल' प्रत्यय है)।

Additional Information 

 

 

   कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द -

  • अक - गायक, लेखक, नायक, धावक।
  • ईय - भारतीय, राजकीय, तरकीय, जातीय।
  • आस - मिठास, खटास, भड़ास, बिंदास।
  • उक - भिक्षुक, भावुक, कामुक, नाजुक।
  • अन - चिंतन, मनन, भवन, मरण, करण।
  • अक्कड़ - पियक्कड़, भुलक्कड़, घुमक्कड़।
  • आई - पढ़ाई, लिखाई, बुनाई, सिलाई।

कुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:-​​

  • अ (अभाव, नहीं) अज्ञान, अटल, अचल, अयोग्य, अछूता, अमूल्य।
  • परा (विपरीत) - पराभव, पराक्रम, परामर्श, परावर्तन, पराविद्या।
  • वि (भिन्न, विशेष) - विशेष, विकास, विज्ञान, विजय, विदेश, विभाग, ।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप।
  • अनु (पीछे) - अनुचर, अनुकरण, अनुकूल, अनुनाद, अनुभव।
  • उप (सहायक) - उपभोग, उपवन, उपमन्त्री, उपयोग, उपनाम, उपहार।
3

किस शब्द में 'गार' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है?

  1. ((a))

    स्नानागार

  2. ((b))

    यादगार

  3. ((c))

    मददगार

  4. ((d))

    रोजगार

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Answer: ((a))

स्नानागार

'गार' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है- स्नानागार

Key Points

  • 'स्नानागार' शब्द 'गार' प्रत्यय से नहीं, बल्कि 'स्नान' + 'आगार' (स्थान) के मेल से बना है।
  • यहाँ 'आगार' का अर्थ 'स्थान' या 'भवन' होता है, जो कि एक प्रत्यय नहीं है, बल्कि एक मूल शब्द है।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।

अन्य विकल्प -

  • यादगार: याद + गार (याद रखने योग्य)
  • मददगार: मदद + गार (मदद करने वाला)
  • रोजगार: रोज + गार (जीविका या काम)

Important Points

  • 'गार' एक फारसी भाषा का प्रत्यय है जो कर्ता या विशेषता का बोध कराता है।
  • प्रत्यय के रूप में: मदद + गार = मददगार (यहाँ गार का अर्थ है- वाला)।
  • 'गार' प्रत्यय शब्द - गुनाहगार, खिदमतगार, कामगार, दावेदार, सेवागार।
  • शब्द के रूप में (आगार): 'आगार' (जैसे- स्नानागार, कारागार, पुस्तकागार) का अर्थ होता है
  • 'भंडार' या 'स्थान', इसलिए इसे प्रत्यय न समझें।

Additional Information उपसर्ग के प्रकार:

  • संस्कृत के उपसर्ग: प्र, परा, उप, नि, वि, अनु, अति, आदि।
  • हिंदी के उपसर्ग: अ, अन, कु, दु, नि, भर, आदि।
  • उर्दू/फारसी के उपसर्ग: कम, खुश, गैर, बद, ला, हम, आदि।
4

निम्नलिखित में तत्सम शब्द नहीं है :

  1. ((a))

    दुर्बल

  2. ((b))

    आदर

  3. ((c))

    त्योहार

  4. ((d))

    बिंदु

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Answer: ((c))

त्योहार

तत्सम शब्द नहीं है - त्योहार

Key Points

  • '​त्योहार' एक तद्भव शब्द है। इसका तत्सम रूप 'तिथिवार' होता है।​
  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- आम्र, इक्षु, गृह, उष्ट्र आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे- आम, ईंख, घर, ऊँट आदि।​

अन्य विकल्प-​ 

  • दुर्बल: यह एक तत्सम शब्द है। इसका तद्भव रूप 'दुबला' होता है।
  • आदर: यह एक तत्सम शब्द है। इसका तद्भव रूप 'आदर' ही प्रचलित है (संस्कृत के कई शब्द हिंदी में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं)।
  • बिंदु: यह एक तत्सम शब्द है। इसका तद्भव रूप 'बूँद' होता है।

Additional Informationकुछ अन्य तत्सम और तद्भव शब्द -

तत्सम (संस्कृत)तद्भव (हिंदी)
प्रस्तारपत्थर
शलाकासलाई
मक्षिकामक्खी
वर्तिकाबत्ती
उद्वर्तनउबटन
पर्यंकपलंग
कर्कटीककड़ी
बलिर्वदबैल
अट्टालिकाअटारी
धुत्तूरधतूरा
महिषभैंस
5

किस विकल्प में सभी शब्द तत्सम हैं?

  1. ((a))

    विवाह, कहानी, नाच

  2. ((b))

    धैर्य, परख, प्रगट

  3. ((c))

    आग, पत्र, दही

  4. ((d))

    दंड, शिर, शाक

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Answer: ((d))

दंड, शिर, शाक

सही उत्तर है- दंड, शिर, शाक

Key Points

  • इस विकल्प के तीनों शब्द संस्कृत के मूल शब्द हैं जो हिंदी में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं:
  • दंड: इसका तद्भव 'डाँडा' या 'डंडा' होता है।
  • शिर: इसका तद्भव 'सिर' होता है।
  • शाक: इसका तद्भव 'साग' होता है।

अन्य विकल्प-

  • विवाह (तत्सम - तद्भव : ब्याह), कहानी (तद्भव - तत्सम: कथानिका), नाच (तद्भव - तत्सम: नृत्य)।
  • धैर्य (तत्सम - तद्भव : धीरज), परख (तद्भव - तत्सम: परीक्षा), प्रगट (तद्भव - तत्सम: प्रकट)।
  • आग (तद्भव - तत्सम: अग्नि), पत्र (तत्सम - तद्भव : पत्ता), दही (तद्भव - तत्सम: दधि)।

Important Points

  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- अश्रु, ​इक्षु, कर्ण आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे- आँसू, ईंख, कान आदि।​

Additional Informationकुछ अन्य तत्सम और तद्भव शब्द -

तत्समतद्भव
अन्धकारअँधेरा
कूपकुआँ
ग्रन्थिगाँठ
चन्द्रचाँद
दुग्धदूध
पाषाणपत्थर
मस्तकमाथा
मृत्युमौत
रज्जुरस्सी
शृंगारसिंगार
स्वर्णसोना
6

इनमें से किस शब्द में कोई उपसर्ग नहीं है?

  1. ((a))

    बेकार

  2. ((b))

    बेलदार

  3. ((c))

    बेखबर

  4. ((d))

    बेगुनाह

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Answer: ((b))

बेलदार

सही उत्तर है - बेलदार

Key Points

  • बेलदार: इस शब्द में 'बे' उपसर्ग नहीं है। यह 'बेल' (मूल शब्द) + 'दार' (प्रत्यय) के योग से बना है।
  • 'दार' एक फारसी प्रत्यय है जिसका अर्थ होता है 'वाला' या 'रखने वाला'।
  • 'दार' प्रत्यय शब्द- दुकानदार, ईमानदार, चौकीदार, समझदार, मजेदार, मालदार , किरदार

अन्य विकल्प -

  • बेकार: बे + कार = बेकार (यहाँ 'बे' उपसर्ग है, जिसका अर्थ है 'बिना' या 'अभाव')।
  • बेखबर: बे + खबर = बेखबर (यहाँ 'बे' उपसर्ग है)।
  • बेगुनाह: बे + गुनाह = बेगुनाह (यहाँ 'बे' उपसर्ग है)।

Important Points

  • उपसर्ग - जो शब्दांश शब्दों के आदि में जुड़ कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।

Additional Information  कुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:-​​

  • निर् (बिना) - निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिरोध, प्रत्यारोपण, प्रतिस्पर्धा।
  • अनु (पीछे) - अनुचर, अनुकरण, अनुकूल, अनुनाद, अनुभव।
  • उप (सहायक) - उपभोग, उपवन, उपमन्त्री, उपयोग, उपनाम, उपहार।
  • सम् (अच्छी तरह) - सन्तोष, संगठन,संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा।

कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द -​

  • आहट - कड़वाहट, मुस्कुराहट, चिकनाहट, चिल्लाहट।
  • ईला - रसीला, रंगीला, जहरीला, पथरीला, कंकरीला।
  • अक - पाठक, गायक, लेखक, नायक, धावक।
  • आस - मिठास, खटास, भड़ास, बिंदास।
  • ईय - भारतीय, राजकीय, तरकीय, जातीय।
7

किस विकल्प में तत्सम और तद्भव दोनों प्रकार के शब्द समाहित हैं?

  1. ((a))

    आंक, काक, आम

  2. ((b))

    आँवला, अमावस, कबूतर

  3. ((c))

    आसरा, पकवान, दही

  4. ((d))

    गाँव, बाघ, बिच्छू

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Answer: ((a))

आंक, काक, आम

तत्सम और तद्भव दोनों प्रकार के शब्द समाहित हैं - आंक, काक, आम

Key Points

शब्दप्रकारमूल तत्सम/तद्भव
आंकतद्भवतत्सम 'अंक' का तद्भव रूप
काकतत्समसंस्कृत का शब्द (तद्भव 'कौआ')
आमतद्भवतत्सम 'आम्र' का तद्भव रूप

अन्य विकल्प-

  • (आँवला, अमावस, कबूतर): ये तीनों तद्भव हैं (इनके तत्सम क्रमशः 'आमलक', 'अमावस्या', और 'कपोत' हैं)।
  • (आसरा, पकवान, दही): ये तीनों भी तद्भव शब्द हैं (इनके तत्सम क्रमशः 'आश्रय', 'पक्वान्न', और 'दधि' हैं)।
  • (गाँव, बाघ, बिच्छू): ये तीनों भी तद्भव हैं (इनके तत्सम क्रमशः 'ग्राम', 'व्याघ्र', और 'वृश्चिक' हैं)।

Important Points

  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- अक्षि, दधि, व्याघ्र, स्वर्ण आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे- आँख, दही, बाघ, सोना आदि।​

Additional Informationकुछ अन्य तत्सम और तद्भव शब्द -

तत्समतद्भव
​आश्चर्यअचरज
उलूकउल्लू
इष्टिकाईंट
एकादशग्यारह
कृषककिसान
​गोधूमगेहूँ
घोटकघोड़ा
चर्मकारचमार
8

निम्नलिखित में देशज शब्द है :

  1. ((a))

    ओखली

  2. ((b))

    टोटका

  3. ((c))

    टेंटुआ

  4. ((d))

    किवाड़

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Answer: ((c))

टेंटुआ

देशज शब्द है : टेंटुआ

Key Points

  • '​टेंटुआ' एक देशज शब्द है। "टेंटुआ" का प्रयोग आमतौर पर गले के लिए किया जाता है।
  • वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का श्रोत ज्ञात न हो और लेकिन भाषा में उनका प्रचलन भरपूर हो, देशज शब्दों की श्रेणी में आते हैं। 
  • जैसे - लोटा, कटोरा, डोंगा, डिबिया, खिचड़ी, खिड़की, पगड़ी, चिड़िया, जूता, तेंदुआ, फुनगी, कलाई आदि।

अन्य विकल्प -

  • ओखली: यह एक तद्भव शब्द है। (इसका तत्सम 'उलूखल' है)।
  • ​टोटका: यह शब्द भी लोक भाषा में प्रचलित तो है, परंतु मुख्य रूप से इसे तद्भव श्रेणी में रखा जाता है
  • जो 'त्रोटक' या इसी तरह के मूलों से संबंधित माना जाता है। टेंटुआ की तुलना में यह कम स्पष्ट रूप से देशज है।
  • किवाड़: यह एक तद्भव शब्द है।  (इसका तत्सम 'कपाट' है)।

Important Points 

  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- ​प्रहर, मुख, रात्रि, वत्स, सूर्य आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे- पहर, मुँह, रात, बच्चा, सूरज आदि।​

Additional Information विदेशज:- 

  • जो शब्द विदेशी भाषा के हैं, परंतु हिंदी में उन शब्दों का प्रचलन हो रहा है, ऐसे शब्द विदेशज शब्द कहे जाते हैं।
  • विदेशी शब्द अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी इत्यादि भाषाओं से लिए गए है। जैसे - लगाम, वापिस, शराब, हिम्मत आदि।
9

किस वाक्य में विदेशी मूल के शब्द नहीं हैं?

  1. ((a))

    इस प्रश्न का उत्तर मुझे मालूम है।

  2. ((b))

    उसने मुझे आवाज दी।

  3. ((c))

    कार-बस की टक्कर में अनेक लोग घायल हो गए।

  4. ((d))

    वह सदैव सच बोलता है।

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Answer: ((d))

वह सदैव सच बोलता है।

वाक्य में विदेशी मूल के शब्द नहीं हैं - वह सदैव सच बोलता है

Key Points

  • वह सदैव सच बोलता है" वाक्य में विदेशी मूल के शब्द नहीं हैं।
  • इसमें प्रयुक्त शब्द सदैव (संस्कृत/तत्सम), सच (हिंदी/तद्भव) और बोलता (हिंदी) हैं,
  • जो हिंदी भाषा के ही मूल शब्द हैं। यह एक पूर्णतः शुद्ध हिंदी का वाक्य है।
  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- ​ओष्ठ, कूप, क्षीर, ग्राम आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे-  होंठ, कुआँ, खीर, गाँव आदि।​

अन्य विकल्प -

  • "इस प्रश्न का उत्तर मुझे मालूम है।"
  • यहाँ 'मालूम' शब्द अरबी भाषा का है।
  • "उसने मुझे आवाज दी।"
  • यहाँ 'आवाज' शब्द फारसी भाषा का है।
  • "कार-बस की टक्कर में अनेक लोग घायल हो गए।"
  • यहाँ 'कार' और 'बस' अंग्रेजी भाषा के शब्द हैं।

Important Points 

 विदेशज:- 

  • जो शब्द विदेशी भाषा के हैं, परंतु हिंदी में उन शब्दों का प्रचलन हो रहा है, ऐसे शब्द विदेशज शब्द कहे जाते हैं।
  • विदेशी शब्द अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी इत्यादि भाषाओं से लिए गए है। जैसे - लगाम, वापिस, शराब, हिम्मत आदि।

देशज:-

  • वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का श्रोत ज्ञात न हो और लेकिन भाषा में उनका प्रचलन भरपूर हो, देशज शब्दों की श्रेणी में आते हैं। 
  • जैसे - लोटा, कटोरा, डोंगा, डिबिया, खिचड़ी, खिड़की, पगड़ी, चिड़िया, जूता, तेंदुआ, फुनगी, कलाई आदि।

Additional Information

भाषाशब्द
अंग्रेजीइंजन, डॉक्टर, सिलेट, अस्पताल, टिकस, कप्तान, तारपीन, बोतल, मील, अपील, आर्डर, इंच, इंटर, इयरिंग, एजेंसी, कंपनी, क्रिकेट, गजट, जेल, चेयरमैन, ट्यूशन, डायरी, डिप्टी, ड्राइवर, पेंसिल, पेन, नंबर, नोटिस, नर्स, थर्मामीटर, पार्टी, प्लेट।
फ़ारसीअफ़सोस, आबरू, आवारा, आमदनी, आईना, उम्मीद, कमीना, कुश्ती, किनारा, खामोश, खरगोश, खुश, खुराक, गवाह, गिरफ्तार, गुलाब, चाबुक, चादर, चिराग, चश्मा, चेहरा, चाशनी, जहर, जिन्दगी, जोश, तमाशा, तीर, दीवार, दस्तूर, दुकान, नाव, पलंग, पैदावार, पलक, पैमाना, बहरा, बेहूदा, बीमार, मुर्दा, मलीदा, यार, रंग, राह, लश्कर, सरदार, सौदागर, हफ्ता, हजार।
​अरबीआदत, आदमी, दावत, इनाम, इस्तीफ़ा, उम्र, एहसान,  औलाद, किस्मत, किताब, ख्याल, ख़राब, खिदमत, गरीब,जहाज, जालिम, जिक्र, तमाम, तकाजा, तारीख, तमाशा, तादात, तरक्की, दिमाग, दफ्तर, दौलत, नतीजा, नकद, फ़कीर, फैसला, मुहावरा, मामूली, मुक़दमा, मुसाफिर, मशहूर, लिफाफा, लियाकत, लायक, वकील, हाकिम।
​पुर्तगालीआलपीन, आलमारी, बाल्टी, चाबी, फीता, तम्बाकू, आया, इस्पात, इस्तिरी, कमीज, कनस्टर, कमरा, काजू, गमला, गोदाम, गोभी, तौलिया, नीलाम, परत, पिस्तौल, मेज, लबादा, साया, पादरी, परात, इस्पात।
तुर्कीउर्दू, मुग़ल, आका, काबू, कालीन, कैंची, कुली, कुर्की, चेचक, चमचा, तोप, तमगा, तलाश, बेगम, बहादुर, लाश, लफंगा, सौगात, सुराग।
10

किस विकल्प में कोई भी शब्द विदेशी मूल का नहीं है?

  1. ((a))

    दोस्त, खुशी

  2. ((b))

    अकेला, साहस

  3. ((c))

    देहात, आसान

  4. ((d))

    चेहरा, मौसम

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Answer: ((b))

अकेला, साहस

कोई भी शब्द विदेशी मूल का नहीं है- अकेला, साहस

Key Points

  • अकेला: यह तद्भव शब्द है (संस्कृत के 'एकल' से विकसित)।
  • साहस: यह तत्सम शब्द है (संस्कृत के 'साहस' से)।
  • इस विकल्प में दोनों शब्द भारतीय मूल (तत्सम/तद्भव) के हैं, कोई विदेशी शब्द नहीं है।

अन्य विकल्प -

  • (दोस्त, खुशी): ये दोनों शब्द फारसी मूल के हैं।
  • (देहात, आसान): ये दोनों शब्द फारसी मूल के हैं।
  • (चेहरा, मौसम): ये दोनों शब्द फारसी/अरबी मूल के हैं।

Important Points 

 विदेशज:- 

  • जो शब्द विदेशी भाषा के हैं, परंतु हिंदी में उन शब्दों का प्रचलन हो रहा है, ऐसे शब्द विदेशज शब्द कहे जाते हैं।
  • विदेशी शब्द अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी इत्यादि भाषाओं से लिए गए है। जैसे - लगाम, वापिस, शराब, हिम्मत आदि।

देशज:-

  • वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का श्रोत ज्ञात न हो और लेकिन भाषा में उनका प्रचलन भरपूर हो, देशज शब्दों की श्रेणी में आते हैं। 
  • जैसे - लोटा, कटोरा, डोंगा, डिबिया, खिचड़ी, खिड़की, पगड़ी, चिड़िया, जूता, तेंदुआ, फुनगी, कलाई आदि।

Additional Information

भाषाशब्द
फ़ारसीअफ़सोस, आबरू, आवारा, आमदनी, आईना, उम्मीद, कमीना, कुश्ती, किनारा, खामोश, खरगोश, खुश, खुराक, गवाह, गिरफ्तार, गुलाब, चाबुक, चादर, चिराग, चश्मा, चेहरा, चाशनी, जहर, जिन्दगी, जोश, तमाशा, तीर, दीवार, दस्तूर, दुकान, नाव, पलंग, पैदावार, पलक, पैमाना, बहरा, बेहूदा, बीमार, मुर्दा, मलीदा, यार, रंग, राह, लश्कर, सरदार, सौदागर, हफ्ता, हजार।
​अरबीआदत, आदमी, दावत, इनाम, इस्तीफ़ा, उम्र, एहसान,  औलाद, किस्मत, किताब, ख्याल, ख़राब, खिदमत, गरीब,जहाज, जालिम, जिक्र, तमाम, तकाजा, तारीख, तमाशा, तादात, तरक्की, दिमाग, दफ्तर, दौलत, नतीजा, नकद, फ़कीर, फैसला, मुहावरा, मामूली, मुक़दमा, मुसाफिर, मशहूर, लिफाफा, लियाकत, लायक, वकील, हाकिम।
11

किस विकल्प के सभी शब्द 'तद्भव' हैं?

  1. ((a))

    सहज, संजोग, समंदर

  2. ((b))

    गात, ग्राहक, गणपति

  3. ((c))

    चाँद, झरना, झुण्ड

  4. ((d))

    छकड़ा, काजल, खेत

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Answer: ((d))

छकड़ा, काजल, खेत

सही उत्तर है - छकड़ा, काजल, खेत

Key Points

  • इस विकल्प के सभी शब्द 'तद्भव' हैं, जो संस्कृत के मूल शब्दों से बदलकर हिंदी में आए हैं:
  • छकड़ा: यह तद्भव शब्द है (संस्कृत के 'शकट' से विकसित)।
  • काजल: यह तद्भव शब्द है (इसका तत्सम 'कज्जल' होता है)।
  • खेत: यह तद्भव शब्द है (इसका तत्सम 'क्षेत्र' होता है)।

अन्य विकल्प-

  • (सहज, संजोग, समंदर): 'सहज' और 'संजोग' (संयोग का तद्भव) तद्भव हैं,लेकिन 'समंदर' मूल रूप से फारसी/अरबी शब्द है।
  • (गात, ग्राहक, गणपति): 'गात' तद्भव है, लेकिन 'ग्राहक' और 'गणपति' शुद्ध तत्सम शब्द हैं।
  • (चाँद, झरना, झुण्ड): 'चाँद' तद्भव है, लेकिन 'झरना' और 'झुण्ड' प्रायः देशज शब्दों की श्रेणी में आते हैं।

Important Points

  • तत्सम - जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। 
  • जैसे- सूर्य, दुग्ध, पुष्प, वत्स आदि।
  • तद्भव - जिन शब्दों में समय और परिस्थितियों के कारण कुछ परिवर्तन होने से जो शब्द बने हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं। 
  • जैसे- सूरज, दूध, फूल, बेटा आदि।​

Additional Informationविदेशज:- 

  • जो शब्द विदेशी भाषा के हैं, परंतु हिंदी में उन शब्दों का प्रचलन हो रहा है, ऐसे शब्द विदेशज शब्द कहे जाते हैं।
  • विदेशी शब्द अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी इत्यादि भाषाओं से लिए गए है। जैसे - औलाद, किस्मत, आईना, उम्मीद, डॉक्टर आदि।

देशज:-

  • वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का श्रोत ज्ञात न हो और लेकिन भाषा में उनका प्रचलन भरपूर हो, देशज शब्दों की श्रेणी में आते हैं। 
  • जैसे - लोटा, कटोरा, डोंगा, डिबिया, खिचड़ी, खिड़की, पगड़ी, चिड़िया, जूता, तेंदुआ, फुनगी, कलाई आदि।
12

इनमें विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा नहीं है :

  1. ((a))

    प्राथमिकता

  2. ((b))

    सुन्दरता

  3. ((c))

    समता

  4. ((d))

    ममता

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Answer: ((d))

ममता

विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा नहीं है : ममता

Key Points

  • ममता: यह शब्द 'मम' (सर्वनाम) से बना है।
  • 'मम' का अर्थ होता है 'मेरा' या 'अपना'।
  • अतः, यह सर्वनाम से बनी भाववाचक संज्ञा है, न कि विशेषण से।

अन्य विकल्प -

  • प्राथमिकता: यह 'प्राथमिक' (विशेषण) शब्द से बना है।
  • सुन्दरता: यह 'सुन्दर' (विशेषण) शब्द से बना है।
  • समता: यह 'सम' (विशेषण) शब्द से बना है।

Important Points

मूल शब्दमूल शब्द का प्रकारबनी भाववाचक संज्ञा
अपनासर्वनामअपनापन
निजसर्वनामनिजता / निजत्व
ममसर्वनामममता / ममत्व
स्वसर्वनामस्वतन्त्रता / स्वत्व
सर्वसर्वनामसर्वस्व
सुन्दरविशेषणसुन्दरता / सौन्दर्य
वीरविशेषणवीरता
मीठाविशेषणमिठास
कठोरविशेषणकठोरता
अच्छाविशेषणअच्छाई

Additional Informationसर्वनाम:- 

  • संज्ञा के स्थान पर जिन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, वह सर्वनाम कहलाते हैं।
  • आप, हम, इस, उस, मै, तू, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ इत्यादि सर्वनाम के कुछ उदाहरण है।
  • हम सब घूमने जाएंगे।

विशेषण:-

  • जो शब्द गुण, दोष, भाव, संख्या, परिणाम आदि से संबंधित विशेषता का बोध कराते हैं, उसे विशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बड़ा, काला, लम्बा, दयालु, भारी, सुंदर, कायर, टेढ़ा-मेढ़ा, एक, दो, वीर पुरुष, गोरा, अच्छा, बुरा, मीठा, खट्टा आदि।
  • जैसे- ​​मीठा आम खाओ।

भाववाचक संज्ञा:-

  • जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास, उमंग, चढाई, थकावट, मानवता, चतुराई, जवानी, लम्बाई, मित्रता, मुस्कुराहट, अपनापन, भूख, आदि। 
  • तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।
13

इनमें क्रिया से बनी भाववाचक संज्ञा नहीं है :

  1. ((a))

    पढ़ाई

  2. ((b))

    दौड़

  3. ((c))

    उतराई

  4. ((d))

    खटाई

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Answer: ((d))

खटाई

सही उत्तर है - खटाई

Key Points

  • खटाई: यह क्रिया से नहीं, बल्कि 'खट्टा' (विशेषण) शब्द से बनी भाववाचक संज्ञा है।
  • यह खट्टे स्वाद या गुण को दर्शाने वाला शब्द है। (खट्टा + आई = खटाई)

अन्य विकल्प -

भाववाचक संज्ञामूल शब्द (क्रिया)
पढ़ाईपढ़ (पढ़ना)
दौड़दौड़ (दौड़ना)
उतराईउतर (उतरना)

Important Points

मूल शब्दमूल शब्द का प्रकारबनी भाववाचक संज्ञा
वीरविशेषणवीरता
साफविशेषणसफाई
चतुरविशेषणचतुराई
गंभीरविशेषणगंभीरता
पागलविशेषणपागलपन
पढ़नाक्रियापढ़ाई
लिखनाक्रियालिखावट
दौड़नाक्रियादौड़
सजानाक्रियासजावट
थकनाक्रियाथकान

Additional Informationविशेषण:-

  • जो शब्द गुण, दोष, भाव, संख्या, परिणाम आदि से संबंधित विशेषता का बोध कराते हैं, उसे विशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बड़ा, काला, लम्बा, दयालु, भारी, सुंदर, कायर, टेढ़ा-मेढ़ा, एक, दो, वीर पुरुष, गोरा, अच्छा, बुरा, मीठा, खट्टा आदि।
  • कमलेश एक ईमानदार नेता है।

क्रिया:-

  • जिस शब्द के द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है उसे क्रिया कहा जाता है।
  • जैसे- पीना, पढ़ना, लिखना, दौड़ना, चलना, जाना आदि।​
  • ​राधा मूर्ति बनाती है।

भाववाचक संज्ञा:-

  • जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास, उमंग, चढाई, थकावट, मानवता, चतुराई, जवानी, लम्बाई, मित्रता, मुस्कुराहट, अपनापन, भूख, आदि।
  • फूलों में कोमलता होती है।
14

गुणवाचक विशेषण से संबंधित वाक्य कौन सा है?

  1. ((a))

    बालक पहली कक्षा में पढ़ता है।

  2. ((b))

    यह पुस्तक मेरी है।

  3. ((c))

    हमें कपटी व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।

  4. ((d))

    समारोह में अनेक लोग उपस्थित थे।

Show Answer
Answer: ((c))

हमें कपटी व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।

गुणवाचक विशेषण से संबंधित वाक्य है- हमें कपटी व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।

Key Points

  • 'कपटी' गुणवाचक विशेषण है, जो 'व्यक्ति' (संज्ञा) के दोष (स्वभाव) को बता रहा है।
  • जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, दशा, अवस्था, रंग, आकार आदि का बोध कराते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं।
  • जैसे - अगला, पिछला, लंबा, चौड़ा, गोल. चौकोर, दुबला, पतला, मोटा, लाल, पीला, उचित, अनुचित, पाप, लखनवी आदि।
  • ​वह ईमानदार व्यक्ति है।

अन्य विकल्प -

वाक्यविशेषण का प्रकारक्यों?
बालक पहली कक्षा में पढ़ता है।संख्यावाचक विशेषण'पहली' क्रम को दर्शाता है।
यह पुस्तक मेरी है।सार्वनामिक विशेषण'यह' यहाँ पुस्तक की ओर संकेत कर रहा है।
समारोह में अनेक लोग थे।अनिश्चित संख्यावाचक'अनेक' अनिश्चित संख्या को दर्शाता है।

Important Points विशेषण के भेद -

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. परिणामवाचक विशेषण
  3. संख्यावाचक विशेषण
  4. सार्वनामिक विशेषण

Additional Information 

  

विशेषणपरिभाषाउदाहरण
परिणामवाचकजो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा या नाप-तौल के परिणाम की विशेषता बताएं उसे परिणामवाचक विशेषण कहते हैं।जैसे- ‘सेर’ भर दूध, ‘तोला’ भर सोना, ‘थोड़ा’ पानी, ‘कुछ’ पानी, ‘सब’ धन, ‘और’ घी लाओ, ‘दो’ लीटर दूध, ‘बहुत’ चीनी इत्यादि। ​यह दो प्रकार के होते हैं: निश्चित (जैसे- 5 लीटर दूध) और अनिश्चित (जैसे- थोड़ा पानी)।मुझे दो किलो चीनी चाहिए।
संख्यावाचकसंज्ञा और सर्वनाम शब्दों से प्राणी, व्यक्ति, वस्तु की संख्या की विशेषता का पता चले, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- दो, चार, कुछ, हज़ारों, कम, एक, दस, ढाई, सवा, दूसरा, तीसरा, हर, प्रत्येक आदि। ​यह भी दो प्रकार के होते हैं: निश्चित (जैसे- चार लड़के) और अनिश्चित (जैसे- कुछ लोग)।कक्षा में दस छात्र बैठे हैं।
सार्वनामिकवे सर्वनाम शब्द संज्ञा के पहले आकर विशेषण का काम करते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे - मेरी पुस्तक, कोई बालक, किसी का महल, वह लड़का, वह बालक, वह पुस्तक आदि।वह घर किसका है?
15

किस वाक्य में क्रिया सकर्मक रूप में प्रयुक्त हुई है?

  1. ((a))

    वह अभी तक सो रहा है।

  2. ((b))

    बच्चा बहुत देर से रो रहा है।

  3. ((c))

    धावक मैदान में दौड़ रहा है।

  4. ((d))

    वह पतंग उड़ा रहा है।

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Answer: ((d))

वह पतंग उड़ा रहा है।

वाक्य में क्रिया सकर्मक रूप में प्रयुक्त हुई है - वह पतंग उड़ा रहा है।

Key Points

  • ​"वह पतंग उड़ा रहा है" वाक्य में 'उड़ा रहा है' क्रिया सकर्मक रूप में प्रयुक्त हुई है।
  • इस वाक्य में 'पतंग' कर्म है, जिस पर क्रिया का फल पड़ रहा है।
  • यहाँ 'उड़ाना' एक सकर्मक क्रिया है क्योंकि यह कर्म के साथ प्रयुक्त होकर अपना अर्थ पूरा कर रही है।
  • जिन क्रियाओं के कार्य का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है उन्हे सकर्मक क्रिया कहते है।
  • सकर्मक क्रिया कर्म के बिना अपना भाव पूर्ण रूप से प्रकट नहीं कर पाती। 
  • ​उदाहरण- वह पत्र लिखता है।

अन्य विकल्प -

  • (सो रहा है): 'सोना' एक अकर्मक क्रिया है। सोने की क्रिया का प्रभाव सीधे कर्ता पर पड़ता है।
  • (रो रहा है): 'रोना' भी एक अकर्मक क्रिया है। इसमें कर्म की आवश्यकता नहीं होती।
  • (दौड़ रहा है): 'दौड़ना' एक अकर्मक क्रिया है। 'मैदान में' यहाँ स्थान का बोध करा रहा है, कर्म नहीं है।

Important Points

 क्रिया के भेद -

  • कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं।
  1. सकर्मक क्रिया
  2. अकर्मक क्रिया

Additional Information 

क्रियापरिभाषाउदाहरण
अकर्मकजिस क्रिया में कार्य का फल कर्ता पर ही पड़े, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं पाया जाता है।
​मोर नाचता है।
16

किस विकल्प में सभी संज्ञा शब्द क्रिया शब्दों से निर्मित हैं?

  1. ((a))

    भूल, हँसी

  2. ((b))

    शिक्षा, अच्छाई

  3. ((c))

    मिठास, चुनाव

  4. ((d))

    पूजा, जवानी

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Answer: ((a))

भूल, हँसी

सही उत्तर है - भूल, हँसी

Key Points

  • वे संज्ञा शब्द जो क्रिया के धातु रूप में प्रत्यय जोड़कर बनाए जाते हैं,
  • उन्हें 'कृदंत संज्ञा' या 'क्रिया से निर्मित भाववाचक संज्ञा' कहते हैं।
  • भूल: यह 'भूलना' क्रिया से बनी है।
  • हँसी: यह 'हँसना' क्रिया से बनी है।

अन्य विकल्प -

  • (शिक्षा, अच्छाई): 'शिक्षा' (शिक्षण) क्रिया से संबंधित है, लेकिन 'अच्छाई' 'अच्छा' (विशेषण) से बनी है।
  • (मिठास, चुनाव): 'चुनाव' (चुनना) क्रिया से बनी है, लेकिन 'मिठास' 'मीठा' (विशेषण) से बनी है।
  • (पूजा, जवानी): 'पूजा' (पूजना) क्रिया से बनी है, लेकिन 'जवानी' 'जवान' (विशेषण/संज्ञा) से बनी है।

Important Points

क्रिया (धातु)भाववाचक संज्ञा
पढ़नापढ़ाई
लिखनालिखावट
​मिलनामिलाप
सजानासजावट
थकनाथकान
विशेषणभाववाचक संज्ञा
सरलसरलता
वीरवीरता
सुन्दरसुन्दरता
अच्छाअच्छाई
चतुरचतुराई

Additional Information���्रिया:-

  • जिस शब्द के द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है उसे क्रिया कहा जाता है।
  • जैसे- पीना, पढ़ना, लिखना, दौड़ना, चलना, जाना आदि।​
  • हम रोज़ सुबह टहलते हैं।

विशेषण:-

  • जो शब्द गुण, दोष, भाव, संख्या, परिणाम आदि से संबंधित विशेषता का बोध कराते हैं, उसे विशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बड़ा, काला, लम्बा, दयालु, भारी, सुंदर, कायर, टेढ़ा-मेढ़ा, एक, दो, वीर पुरुष, गोरा, अच्छा, बुरा, मीठा, खट्टा आदि।
  • चाय ज़्यादा मीठी है।

भाववाचक संज्ञा:-

  • जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास, उमंग, चढाई, थकावट, मानवता, चतुराई, जवानी, लम्बाई, मित्रता, मुस्कुराहट, अपनापन, भूख, आदि। 
  • ​सहिष्णुता से समाज चलता है।
17

क्रिया-विशेषण रहित वाक्य है-

  1. ((a))

    मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनो।

  2. ((b))

    वह अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।

  3. ((c))

    सुबह से वर्षा लगातार हो रही है।

  4. ((d))

    वे अचानक चले गए।

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Answer: ((b))

वह अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।

क्रिया-विशेषण रहित वाक्य है- वह अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।

Key Points

  • इस वाक्य में 'होशियार' शब्द 'विद्यार्थी' (संज्ञा) की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह विशेषण है, न कि क्रिया-विशेषण।
  • जो शब्द गुण, दोष, भाव, संख्या, परिणाम आदि से संबंधित विशेषता का बोध कराते हैं, उसे विशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बड़ा, काला, लम्बा, दयालु, भारी, सुंदर, कायर, टेढ़ा-मेढ़ा, एक, दो, वीर पुरुष, ग��रा, अच्छा, बुरा, मीठा, खट्टा आदि।
  • जैसे- ​मंजू का घर पुराना है।

अन्य विकल्प-

  • "मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनो।"
  • यहाँ 'सुनना' क्रिया है, और 'ध्यानपूर्वक' यह बता रहा है कि क्रिया कैसे हो रही है (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)।
  • "सुबह से वर्षा लगातार हो रही है।"
  • यहाँ 'होना' क्रिया है, और 'लगातार' क्रिया के होने के ढंग को बता रहा है (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)।
  • "वे अचानक चले गए।"
  • यहाँ 'चले जाना' क्रिया है, और 'अचानक' यह बता रहा है कि क्रिया कब या कैसे हुई (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)।

Important Pointsरीतिवाचक क्रिया-विशेषण-

  • जिन अविकारी शब्दों से क्रिया की रीति या विधि का पता चलता है, उसे रीतिवाचक क्रिया-विशेषण अव्यय कहते हैं।
  • जैसे - सचमुच, ठीक, अवश्य, कदाचित, ऐसे, वैसे, सहसा, तेज, सच, झूठ, धीरे, ध्यानपूर्वक, हंसते हुए, तेजी से, फटाफट आदि।
  • कछुआ धीरे-धीरे चलता है।

Additional Informationक्रिया-विशेषण-

  • जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है, उन शब्दों को हम क्रिया-विशेषण कहते हैं।
  • जैसे- ​धीरे-धीरे, तेज, जब, तब, अवश्य, आज, जितना, जैसे, जहां, उतना आदि।
  • खरगोश तेज़ दौड़ता है।
18

किस वाक्य में संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग हुआ है?

  1. ((a))

    अपराधी ने पुलिस के सामने झूठ बोला।

  2. ((b))

    वह बहुत देर से ज्यों का त्यों खड़ा है।

  3. ((c))

    मेरा गाँव पास में ही है।

  4. ((d))

    मैं वहाँ कदापि नहीं जाऊँगा।

Show Answer
Answer: ((a))

अपराधी ने पुलिस के सामने झूठ बोला।

वाक्य में संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग हुआ है- अपराधी ने पुलिस के सामने झूठ बोला।

Key Points

  • यहाँ 'के सामने' शब्द 'पुलिस' (संज्ञा) और शेष वाक्य के बीच संबंध स्थापित कर रहा है। अतः यह संबंधबोधक अव्यय है।
  • ​जो अव्यय (अविकारी शब्द) संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर वाक्य के अन्य शब्दों से उनका संबंध बताते हैं, वे संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं।
  • ये शब्द आमतौर पर 'के', 'की' या 'से' के साथ प्रयोग होते हैं, जैसे: के ऊपर, के पीछे, के साथ, के बिना, के सामने, के पास।
  • उदाहरण: जंगल के पीछे एक नदी बहती है।

अन्य विकल्प -

  • वह बहुत देर से ज्यों का त्यों खड़ा है।: यहाँ 'ज्यों का त्यों' एक रीतिवाचक क्रियाविशेषण है, जो खड़े होने के ढंग को बता रहा है।
  • मेरा गाँव पास में ही है।: यहाँ 'पास' एक स्थानवाचक क्रियाविशेषण के रूप में प्रयुक्त हुआ है जो गाँव की स्थिति बता रहा है।
  • मैं वहाँ कदापि नहीं जाऊँगा।: यहाँ 'कदापि' एक क्रियाविशेषण है, जो जाने की क्रिया की निषेधता/निश्चितता पर जोर दे रहा है।

Important Points क्रियाविशेषण के 4 भेद-

भेदक्या दर्शाता है?प्रश्न (पहचान के लिए)उदाहरण
कालवाचकसमय का बोधकब?आज, कल, अभी, सदा
स्थानवाचकस्थान का बोधकहाँ?यहाँ, वहाँ, भीतर, बाहर
परिमाणवाचकमात्रा का बोधकितना?थोड़ा, बहुत, अधिक, पर्याप्त
रीतिवाचकढंग या विधि का बोधकैसे?धीरे, तेज, ध्यानपूर्वक, अचानक

Additional Information 

अव्यय शब्द - अव्यय शब्दों को अविकारी शब्द भी कहते हैं क्योंकि इनमें लिंग, कारक, वचन, पुरुष आदि के कारण कोई विकार/ परिवर्तन उत्पन्न नहीं होता है। जैसे – आज, कब, इधर, किन्तु आदि। अव्यय के चार भेद हैं -
अव्ययपरिभाषाउदाहरण
क्रिया-विशेषणजिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चले। जहाँ पर यहाँ, तेज, अब, रात, धीरे-धीरे, प्रतिदिन, सुंदर, वहाँ, तक, जल्दी, अभी, बहुत आदि आते हैं, वहाँ पर क्रियाविशेषण अव्यय होता है।वह प्रतिदिन कसरत करता है।
विस्मयादिबोधकजिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, विस्मय, ग्लानी, लज्जा, घर्णा, दुःख, आश्चर्य आदि के भाव का पता चलता है, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। जहाँ पर अरे!, हाय!, शबाश!, ओह!, वाह!, हाँ!, वाह!, हैं!, ऐ!, क्या!, ओहो, अहा!, उफ, हा-हा!आदि आते हैं।हाय! अब मेरा क्या होगा?
समुच्चयबोधकदो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जहाँ पर और, तथा, लेकिन, मगर, व, किन्तु, परन्तु, इसलिए, इस कारण, अत:, क्योंकि, ताकि, या, अथवा, चाहे, यदि, कि, मानो, यानि, तथापि आदि आते हैं।मैंने कहा कि कल आना।
19

विस्मयादिबोधक शब्दों के संबंध में कौन सा कथन सही है?

  1. ((a))

    इनमें वचन के अनुसार विकार होता है।

  2. ((b))

    ये केवल शोक और घृणा का भाव प्रकट करते हैं।

  3. ((c))

    ये वाक्य-रचना के अनिवार्य घटक हैं।

  4. ((d))

    ये प्राय: वाक्य के प्रारंभ में आते हैं।

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Answer: ((d))

ये प्राय: वाक्य के प्रारंभ में आते हैं।

सही उत्तर है - ये प्राय: वाक्य के प्रारंभ में आते हैं।

Key Pointsविस्मयादिबोधक शब्द मुख्य विशेषताएँ -

  • वाक्य के प्रारंभ में: विस्मयादिबोधक शब्द (जैसे- अरे!, वाह!, हाय!)
  • अधिकांशतः वाक्य के सबसे शुरू में ही प्रयुक्त होते हैं और इनके तुरंत बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है।
  • अविकारी: ये 'अव्यय' होते हैं, जिसका अर्थ है कि इनमें लिंग, वचन या कारक के अनुसार कोई परिवर्तन (विकार) नहीं होता। (अतः विकल्प 1 गलत है)।
  • भावों की विविधता: ये केवल शोक या घृणा ही नहीं, बल्कि हर्ष (वाह!), आश्चर्य (अहा!), चेतावनी (सावधान!) जैसे विविध भाव प्रकट करते हैं। (अतः विकल्प 2 गलत है)।
  • अनिवार्य नहीं: ये वाक्य को भावात्मक रूप तो देते हैं, लेकिन ये वाक्य-रचना के 'अनिवार्य' घटक नहीं होते;
  • इनके बिना भी वाक्य व्याकरण की दृष्टि से पूर्ण हो सकता है। (अतः विकल्प 3 गलत है)।

Important Pointsविस्मयादिबोधक अव्यय-

  • जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, विस्मय, ग्लानी, लज्जा, घर्णा, दुःख, आश्चर्य आदि के भाव का पता चलता है, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं।
  • जहाँ पर अरे!, हाय!, शबाश!, ओह!, वाह!, हाँ!, वाह!, हैं!, ऐ!, क्या!, ओहो, अहा!, उफ, हा-हा!आदि आते हैं।
  • उदाहरण - अरे! तुम कब आए?

Additional Information 

 

अव्यय शब्द - अव्यय शब्दों को अविकारी शब्द भी कहते हैं क्योंकि इनमें लिंग, कारक, वचन, पुरुष आदि के कारण कोई विकार/ परिवर्तन उत्पन्न नहीं होता है। जैसे – आज, कब, इधर, किन्तु आदि। अव्यय के चार भेद हैं -
अव्ययपरिभाषाउदाहरण
क्रिया-विशेषणजिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चले। जहाँ पर यहाँ, तेज, अब, रात, धीरे-धीरे, प्रतिदिन, सुंदर, वहाँ, तक, जल्दी, अभी, बहुत आदि आते हैं, वहाँ पर क्रियाविशेषण अव्यय होता है।हम कल दिल्ली जाएंगे।
सम्बन्धबोधकवे शब्द जो संज्ञा, सर्वनाम शब्दों को अन्य संज्ञा, सर्वनाम शब्दों के साथ सम्बन्ध का बोध कराते हैं। जहाँ पर बाद, भर, के ऊपर, की ओर, कारण, ऊपर, नीचे, बाहर, भीतर, बिना, सहित, पीछे, से पहले, से लेकर, तक, के अनुसार, की खातिर, के लिए आदि आते हैं, वहाँ पर संबंधबोधक अव्यय होता है।राम के बिना जीवन व्यर्थ है।
समुच्चयबोधकदो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जहाँ पर और, तथा, लेकिन, मगर, व, किन्तु, परन्तु, इसलिए, इस कारण, अत:, क्योंकि, ताकि, या, अथवा, चाहे, यदि, कि, मानो, यानि, तथापि आदि आते हैं।आज छुट्टी है, क्योंकि रविवार है।
20

किस वाक्य में निपात का प्रयोग नहीं हुआ है?

  1. ((a))

    वह कल ही चला जाएगा।

  2. ((b))

    मैं भी उसके साथ जाऊँगा।

  3. ((c))

    मुझे एक गिलास दूध चाहिए।

  4. ((d))

    वह तो आज जाएगा।

Show Answer
Answer: ((c))

मुझे एक गिलास दूध चाहिए।

वाक्य में निपात का प्रयोग नहीं हुआ है- मुझे एक गिलास दूध चाहिए।

Key Points

  • "मुझे एक गिलास दूध चाहिए" वाक्य में निपात का प्रयोग नहीं हुआ है।
  • यह एक साधारण वाक्य है जिसमें किसी भी शब्द पर विशेष बल देने के लिए 'भी',
  • 'ही', 'तो', 'तक', 'मात्र' जैसे अतिरिक्त अव्यय (निपात) नहीं जोड़े गए हैं।

अन्य विकल्प-

  • (वह कल ही चला जाएगा।): यहाँ 'ही' निपात है, जो 'कल' पर विशेष बल दे रहा है (अर्थात कल के अलावा किसी और दिन नहीं)।
  • (मैं भी उसके साथ जाऊँगा।): यहाँ 'भी' निपात है, जो 'मैं' पर बल दे रहा है (अर्थात दूसरों के साथ-साथ मैं भी)।
  • (वह तो आज जाएगा।): यहाँ 'तो' निपात है, जो वाक्य में बल प्रदान कर रहा है।

Additional Informationनिपात- 

  • जब किसी भी बात पर अधिक बल दिया जाता है
  • या उस बात पर अतिरिक्त जोर देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उसे निपात कहते है।
  • ये वाक्य के भाव को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाते हैं, लेकिन इनका अपना कोई स्वतंत्र लिंग या वचन नहीं होता है।
  • जैसे- मत, क्यों, नहीं, काश, जल्दी, केवल, हां, यथा- तक, मत, क्या, हाँ, भी, केवल, जी, नहीं, न, काश।
  • गांधी जी को बच्चे तक जानते हैं।
21

किस वाक्य में क्रिया अकर्मक रूप में प्रयुक्त हुई है?

  1. ((a))

    वह बिना बात ही हँस रही है।

  2. ((b))

    बच्चों ने बहुत सुंदर चित्र बनाए।

  3. ((c))

    माँ पुत्र को समझाती है।

  4. ((d))

    मदारी भालू को नचाता है।

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Answer: ((a))

वह बिना बात ही हँस रही है।

वाक्य में क्रिया अकर्मक रूप में प्रयुक्त हुई है - वह बिना बात ही हँस रही है।

Key Points

  • हँसना एक स्वाभाविक क्रिया है। यदि हम प्रश्न पूछें— "वह क्या हँस रही है?", तो हमें कोई सार्थक उत्तर नहीं मिलता। अतः यहाँ 'हँसना' अकर्मक क्रिया है।
  • जिस क्रिया में कार्य का फल कर्ता पर ही पड़े, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं पाया जाता है।
  • ​अकर्मक क्रियाएँ: रोना, चलना, सोना, उठना, हँसना, दौड़ना, बैठना। 
  • ​उदाहरण - ​सिपाही गिर गया।

अन्य विकल्प -

  • "बच्चों ने बहुत सुंदर चित्र बनाए।"
  • प्रश्न: क्या बनाए? -  उत्तर: चित्र (सकर्मक क्रिया)।
  • "माँ पुत्र को समझाती है।"
  • प्रश्न: किसको समझाती है? - उत्तर: पुत्र (सकर्मक क्रिया)।
  • "मदारी भालू को नचाता है।"
  • प्रश्न: किसको नचाता है? - उत्तर: भालू (सकर्मक क्रिया - यहाँ 'नचाना' प्रेरणार्थक सकर्मक क्रिया है)।

Important Points 

 

 क्रिया के भेद -

  • कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं।
  1. सकर्मक क्रिया
  2. अकर्मक क्रिया

Additional Information 

क्रियापरिभाषाउदाहरण
सकर्मकजिन क्रियाओं के कार्य का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है उन्हे सकर्मक क्रिया कहते है।सकर्मक क्रिया कर्म के बिना अपना भाव पूर्ण रूप से प्रकट नहीं कर पाती। सकर्मक क्रियाएँ: खाना, खेलना, देना, काटना, देखना, पीना, सीखना, बेचना, पढ़ाना, खरीदना, बुलाना।​ ​मां खाना बना रही है।
22

किस विकल्प में सभी विशेषण शब्द संज्ञा शब्दों से रचित हैं?

  1. ((a))

    शिक्षित, कमाऊ

  2. ((b))

    भीतरी, आपसी

  3. ((c))

    पीड़ित, दयनीय

  4. ((d))

    वार्षिक, निचला

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Answer: ((c))

पीड़ित, दयनीय

सभी विशेषण शब्द संज्ञा शब्दों से रचित हैं- पीड़ित, दयनीय

Key Pointsसंज्ञा शब्दों से विशेषण बनाने की प्रक्रिया -

  • पीड़ित: यह 'पीड़ा' (संज्ञा) शब्द में 'इत' प्रत्यय लगने से बना है।
  • दयनीय: यह 'दया' (संज्ञा) शब्द में 'ईय' प्रत्यय लगने से बना है।
  • अतः दोनों शब्द संज्ञा से रचित हैं।

अन्य विकल्प -

  • शिक्षित: यह 'शिक्षा' (संज्ञा) से बना है। (सही)
  • कमाऊ: यह 'कमाना' (क्रिया) से बना है। (गलत - यह क्रिया से रचित है)
  • भीतरी: यह 'भीतर' (अव्यय/स्थानवाचक शब्द) से बना है। (गलत)
  • आपसी: यह 'आप' (सर्वनाम) से बना है। (गलत)
  • वार्षिक: यह 'वर्ष' (संज्ञा) से बना है। (सही)
  • निचला: यह 'नीचे' (अव्यय) से बना है। (गलत)

Important Points

संज्ञा शब्दप्रत्ययविशेषण शब्द
समाजइकसामाजिक
धर्मइकधार्मिक
भारतईयभारतीय
राष्ट्रईयराष्ट्रीय
नमकईननमकीन
प्यासप्यासा
ग्रामईणग्रामीण
अंकइतअंकित
भूखभूखा
दिनएकदैनिक

Important Pointsसंज्ञा:-

  • किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या प्राणी के नाम को संज्ञा कहते हैं।
  • उदाहरण के लिए: राम, दिल्ली, मेज, खुशी, गाय, हिमालय आदि। 
  • राकेश के दफ्तर के सामने डाकघर है।

विशेषण:-

  • संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण आदि) बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं।
  • जैसे- बड़ा, काला, लम्बा, दयालु, भारी, सुंदर, कायर, एक, दो, वीर पुरुष, गोरा, अच्छा, बुरा, मीठा, खट्टा, आदि।
  • जैसे-  वह लड़का अत्यधिक परिश्रमी है।
23

निम्नलिखित में ‘नदी’ का पर्यायवाची नहीं है:

  1. ((a))

    सरसी 

  2. ((b))

    आपगा

  3. ((c))

    पयस्विनी

  4. ((d))

    तटिनी

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Answer: ((a))

सरसी 

‘नदी’ का पर्यायवाची नहीं है: सरसी 

Key Points

  • '​नदी' के मुख्य पर्यायवाची शब्द- सरिता, तटिनी, तरंगिणी, पयस्विनी, निर्झरिणी, आपगा, वाहिनी, और स्रोतस्विनी।
  • ​तालाब के मुख्य पर्यायवाची शब्द- सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, पोखरा, तड़ाग, ताल, सरसी और पद्माकर हैं।
  • पर्यायवाची - जो शब्द समान अर्थ के कारण किसी दूसरे शब्द की जगह ले लेते हैं, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

Additional Information 

 कुछ अन्य महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द:-

शब्दपर्यायवाची शब्द
पक्षीविहग, खग, विहंगम, पतंग, नभचर, द्विज ।
देवदेवता, अमर, वसु, आदित्य, निर्जर, त्रिदश, गीर्वाण।
साँपसर्प, नाग, विषधर, व्याल, भुजंग, उरग, अहि पन्नग।
जंगलवन, कानन, बीहड़, विटप, विपिन।
गृहघर, निकेतन, भवन, आलय, निवास, आवास, निलय।
दानवदैत्य, राक्षस, निशाचर, दनुज, यातुधान, निशिचर।
घोड़ाअश्व, घोटक, तुरंग, तुरग, बाजि, वाजि, सैंधव, हय।
24

किस विकल्प में सभी शब्द ‘पेड़’ के पर्यायवाची हैं?

  1. ((a))

    वृक्ष, अरण्य

  2. ((b))

    रसाल, पादप

  3. ((c))

    पुहुप, तरु

  4. ((d))

    विटप, द्रुम

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Answer: ((d))

विटप, द्रुम

'पेड़’ के पर्यायवाची हैं- विटप, द्रुम

Key Points

  • ‘पेड़’ के सभी पर्यायवाची हैं- वृक्ष, तरु**, विटप**, पादप, द्रुम, दरख्त, रुख, गाछ, बूटा।
  • पर्यायवाची - ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान हों, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

शब्दपर्यायवाची शब्द
जंगलअरण्य, वन, कानन, अटवी, कान्तार, विपिन।
आमआम्र, रसाल, अमृतफल, सौरभ, पिकबंधु, अतिसौरभ।
फूलपुष्प, कुसुम, सुमन, प्रसून, पुहुप और मंजरी।

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द -

शब्दपर्यायवाची शब्द
बादलजलधर, वारिद,  मेघ, पयोद, अंबुद, घन, अभ्र।
धरतीज़मीन, धरा, ‌‌‌भूमि, पृथिवी, पृथु, वसुधा, रत्नवती।
पर्वतपहाड़, गिरि, महीधर, भूधर, अचल, शैल, नग।
पुत्रीतनया, आत्मजा, दुहिता, सुता, बेटी।
बंदरकपि, मर्कट ,वानर, कपीस ,शाखामृग।
रात्रिनिशा, रजनी, यामिनी, विभावरी।
वस्त्रपट , परिधान, अम्बर, वसन, चीर।
सूरजदिनकर, सूर्य, दिवाकर, भानु, भास्कर, मार्तंड।
25

किस विकल्प में परस्पर पर्यायवाची शब्द नहीं हैं?

  1. ((a))

    इच्छा, अभीप्सा

  2. ((b))

    कपोत, पिक

  3. ((c))

    रात, यामिनी

  4. ((d))

    ऊँट, करभ

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Answer: ((b))

कपोत, पिक

परस्पर पर्यायवाची शब्द नहीं हैं- कपोत, पिक

Key Points

  • कपोत: यह 'कबूतर' का पर्यायवाची है।
  • (कबूतर के अन्य पर्यायवाची: पारावत, परेवा, रक्तलोचन (लाल आँखें), हारिल)।​
  • पिक: यह 'कोयल' का पर्यायवाची है।
  • (कोयल के अन्य पर्यायवाची: कोकिला, वनप्रिया, बसंतदूत, श्यामा, काकपाली)।
  • पर्यायवाची - जो शब्द समान अर्थ के कारण किसी दूसरे शब्द की जगह ले लेते हैं, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

अन्य विकल्प-

  • (इच्छा, अभीप्सा): ये दोनों शब्द 'चाह' या 'अभिलाषा' के पर्यायवाची हैं।
  • 'अभिलाषा' के अन्य पर्यायवाची शब्द - आकांक्षा, कामना, चाह, लालसा, मनोरथ, लिप्सा, अरमान, ईहा, वांछा।
  • (रात, यामिनी): ये दोनों शब्द 'रात्रि' के पर्यायवाची हैं।
  • ​'रात्रि' के अन्य पर्यायवाची शब्द- निशा, रजनी, विभावरी, रैन, निशि, क्षणदा हैं।
  • (ऊँट, करभ): ये दोनों शब्द 'उष्ट्र' या ऊँट के पर्यायवाची हैं।
  • 'ऊंट' के अन्य पर्यायवाची शब्द उष्ट्र, करभ, लंबोष्ठ, क्रमेलक, मरुभूमिचर और साँड़िया हैं।

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द -

शब्दपर्यायवाची शब्द
आँखनेत्र, नयन, चक्षु, दृग, लोचन, अक्षि, नजर, अक्ष।
ऐश्वर्यवैभव, संपन्नता, धन-संपत्ति, समृद्धि, दौलत।
कर्णसूर्यपुत्र, राधेय, कौन्तेय, पार्थ, अंगराज, सूतपुत्र।
खड़गतलवार, कृपाण, चन्द्रहास, शमशीर, खंजर।
गधाखर, वैशाखनन्दन, गर्दभ, रासभ,  धूसर।
पर्वतभूधर, गिरी, महीधर, शैल, नग, मेरु।
नौकानाव, तरिणी, जलयान, जलपात्र, तरी, पतंग।
असुरदनुज, दैत्य, दानव, राक्षस, तमीचर, निशाचर।
26

किस वाक्य में ‘निपात’ का प्रयोग हुआ है?

  1. ((a))

    वह पटना गया था।

  2. ((b))

    मुझे आने तो दो।

  3. ((c))

    संभवतः वह आएगा।

  4. ((d))

    मैं कल आ सकता हूँ।

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Answer: ((b))

मुझे आने तो दो।

वाक्य में ‘निपात’ का प्रयोग हुआ है - मुझे आने तो दो।

Key Points

  • वह पटना गया था। 'तो' निपात है:
  • इस वाक्य में 'तो' का प्रयोग 'आने' की क्रिया पर विशेष बल देने के लिए किया गया है।
  • यदि आप 'तो' हटा देंगे (मुझे आने दो), तो वाक्य का अर्थ तो वही रहेगा,
  • लेकिन वह 'विशेष जोर' या 'प्रभाव' समाप्त हो जाएगा।

Additional Information निपात- 

  • जब किसी भी बात पर अधिक बल दिया जाता है
  • या उस बात पर अतिरिक्त जोर देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उसे निपात कहते है।
  • ये वाक्य के भाव को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाते हैं, लेकिन इनका अपना कोई स्वतंत्र लिंग या वचन नहीं होता है।
  • जैसे- मत, क्यों, नहीं, काश, जल्दी, केवल, हां, यथा- तक, मत, क्या, हाँ, भी, केवल, जी, नहीं, न, काश।
  • वह कल ही चला जाएगा।
27

किस विकल्प में विलोम-शब्द-युग्म नहीं है?

  1. ((a))

    ऋजु - वक्र

  2. ((b))

    सघन - विरल

  3. ((c))

    संग्रह - परिग्रह

  4. ((d))

    सम्मुख - विमुख

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Answer: ((c))

संग्रह - परिग्रह

विलोम-शब्द-युग्म नहीं है- संग्रह - परिग्रह

Key Points

  • संग्रह और परिग्रह: ये दोनों शब्द विलोम नहीं हैं, बल्कि ये पर्यायवाची के समान (समानार्थी) अर्थ रखते हैं।
  • 'संग्रह' का अर्थ होता है इकट्ठा करना और 'परिग्रह' का अर्थ भी किसी वस्तु को ग्रहण करना या इकट्ठा करना ही होता है।
  • 'संग्रह' का सही विलोम 'त्याग' या 'अपव्यय' होता है।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

  • ऋजु - वक्र: 'ऋजु' का अर्थ होता है सीधा, और 'वक्र' का अर्थ होता है टेढ़ा। (सही विलोम)
  • सघन - विरल: 'सघन' का अर्थ होता है घना, और 'विरल' का अर्थ होता है दूर-दूर या फैला हुआ। (सही विलोम)
  • सम्मुख - विमुख: 'सम्मुख' का अर्थ होता है सामने, और 'विमुख' का अर्थ होता है मुँह मोड़ा हुआ या विपरीत दिशा में। (सही विलोम)

Additional Information

शब्दविलोम
अतिवृष्टिअनावृष्टि
इतिअथ
उपचयअपचय
ऋजुवक्र
मृषणरूक्ष
अभिज्ञअनभिज्ञ
सृष्टिप्रलय
आहूतअनाहूत
जेष्ठकनिष्ठ
उद्धतविनीत
28

निम्नलिखित में विलोम युग्म है:

  1. ((a))

    सामिष-आमिष

  2. ((b))

    विज्ञ-अभिज्ञ

  3. ((c))

    मूढ़-विमूढ़

  4. ((d))

    सुकर-दुष्कर

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Answer: ((d))

सुकर-दुष्कर

विलोम युग्म है: सुकर-दुष्कर

Key Points

  • 'सुकर' शब्द का विलोम शब्द 'दुष्कर' होगा।
  • 'सुकर' का अर्थ है- जिसे करना आसान हो।
  • 'दुष्कर' का अर्थ है- जिसे करना कठिन हो।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

शब्द युग्मस्पष्टीकरण
सामिष - आमिषये दोनों समानार्थी हैं। दोनों का अर्थ है 'मांस सहित भोजन'। इनका सही विलोम 'निरामिष' होता है।
विज्ञ - अभिज्ञये दोनों भी लगभग समानार्थी हैं। 'विज्ञ' और 'अभिज्ञ' दोनों का अर्थ 'जानकार' होता है। इनका विलोम 'अज्ञ' या 'अनभिज्ञ' होता है।
मूढ़ - विमूढ़ये दोनों समानार्थी हैं। दोनों का अर्थ 'मूर्ख' या 'बुद्धिहीन' होता है।

Additional Information कुछ अन्य महत्वपूर्ण विलोम शब्द -

शब्दविलोम (विपरीत)
स्थावरजंगम
अभिज्ञअनभिज्ञ
व्यष्टिसमष्टि
उद्धतविनीत / सौम्य
अर्वाचीनप्राचीन
उन्मीलननिमीलन
पाश्चात्यपौरस्त्य / पोरवात्य
उत्कर्षअपकर्ष
29

किस विकल्प में समश्रुत-भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ भेद सही नहीं है?

  1. ((a))

    वृंत-वृंद = समूह-डंठल

  2. ((b))

    शोथ-शोध = सूजन-शुद्धि संस्कार

  3. ((c))

    वसन-व्यसन = कपड़ा-बुरी लत

  4. ((d))

    ऋत-ऋतु = सही/सच्चा - मौसम/वर्ष का एक भाग

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Answer: ((a))

वृंत-वृंद = समूह-डंठल

समश्रुत-भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ भेद सही नहीं है- वृंत-वृंद = समूह-डंठल

Key Points

  • सही अर्थ इस प्रकार होना चाहिए:
  • वृंत : डंठल (फूल का डंठल)
  • वृंद : समूह (जैसे- 'नारी वृंद' या 'शिक्षक वृंद')
  • चूँकि प्रश्न में 'वृंत' पहले और 'वृंद' बाद में है, इसलिए अर्थ भी 'डंठल-समूह' के क्रम में होना चाहिए था। विकल्प 1 में इन्हें उलट दिया गया है।
  • ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, समभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

शब्द-युग्मअर्थ भेद (सही)
शोथ - शोधसूजन - शुद्धि/संस्कार (खोज)
वसन - व्यसनकपड़ा - बुरी लत (आदत)
ऋत - ऋतुसही/सत्य - मौसम/समय

Additional Information

शब्द-युग्मअर्थ भेद (क्रमशः)
कपि - कपीबंदर - कसाई/सुग्रीव
अभिज्ञ - अनभिज्ञजानकार - अनजान
स्वर्ण - सवर्णसोना - उच्च वर्ण (समान वर्ण)
अतुल - अतलजिसका मिलान न हो - गहरा/पाताल
कथा - कत्थाकहानी - खैर का सार (पान में लगाने वाला)
लक्ष्य - लक्षणउद्देश्य - निशान/विशेषता
शकल - सकलटुकड़ा/अंश - संपूर्ण/सारा
व्यजन - व्यंजनपंखा - वर्णमाला का अक्षर/पकवान
प्रसाद - प्रासादकृपा/भोग - महल
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किन समश्रुत शब्दों का अर्थ भेद सही नहीं है?

  1. ((a))

    हरण - हरिण = चुराना-मृग

  2. ((b))

    स्रोत-श्रोत = धारा-कान

  3. ((c))

    चिर-चीर = वस्त्र-दीर्घकाल

  4. ((d))

    द्रव-द्रव्य = तरल-पदार्थ

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Answer: ((c))

चिर-चीर = वस्त्र-दीर्घकाल

समश्रुत शब्दों का अर्थ भेद सही नहीं है- चिर-चीर = वस्त्र-दीर्घकाल

Key Points

  • सही अर्थ इस प्रकार होना चाहिए:
  • चिर : दीर्घकाल (बहुत समय तक)
  • चीर : वस्त्र (कपड़ा)
  • चूँकि प्रश्न में 'चिर' पहले है और 'चीर' बाद में, इसलिए अर्थ भी 'दीर्घकाल-वस्त्र' के क्रम में होना चाहिए था। यहाँ 'वस्त्र-दीर्घकाल' दिया गया है, जो त्रुटिपूर्ण है।
  • ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, समभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

शब्द-युग्मअर्थ भेद (सही)
हरण - हरिणचुराना - मृग (हिरण)
स्रोत - श्रोतधारा - कान (सुनने का साधन)
द्रव - द्रव्यतरल - पदार्थ (धन/संपत्ति)

Additional Information

शब्द-युग्मअर्थ भेद (क्रमशः)
अविराम - अभिरामलगातार - सुंदर
तरणि - तरणीसूर्य - नाव
अनल - अनिलआग - हवा
कुल - कूलवंश - किनारा
प्रणाम - प्रमाणनमस्कार - साक्ष्य/सबूत
सूत - सूतधागा - सारथी (पुत्र)
द्वीप - दीपटापू - दीया
वसन - व्यसनवस्त्र - बुरी आदत
जग - जागसंसार - जागना (क्रिया)
31

‘परिच्छद-परिच्छेद’ शब्दों का सही अर्थ भेद है-

  1. ((a))

    आवरण - अनुभाग

  2. ((b))

    काटना - साज-सामान

  3. ((c))

    सीमा - नौकर-चाकर

  4. ((d))

    अनुभाग - आवरण

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Answer: ((a))

आवरण - अनुभाग

‘परिच्छद-परिच्छेद’ शब्दों का सही अर्थ भेद है- आवरण - अनुभाग

Key Points

  • परिच्छद : इसका अर्थ होता है 'आवरण', पोशाक, वस्त्र या साज-सामान।
  • परिच्छेद : इसका अर्थ होता है 'अनुभाग' (भाग), टुकड़ा या किसी लेख/ग्रंथ का एक अंश।
  • शब्द युग्म - ऐसे शब्द जिनका उच्चारण प्राय: समान होता है किन्तु उनके अर्थ भिन्न होते हैं, शब्द युग्म कहलाते हैं।

Additional Information 

शब्द-युग्मअर्थ (क्रमशः)
अनल - अनिलआग - हवा
अविराम - अभिरामलगातार - सुंदर
तरणि - तरणीसूर्य - नाव
श्रुति - स्मृतिसुनना - याद रखना
कुल - कूलवंश - किनारा
प्रणाम - प्रमाणनमस्कार - सबूत/साक्ष्य
अंश - अंसभाग/हिंसा - कंधा
सूत - सूतधागा - सारथी (पुत्र)
द्वीप - दीपटापू - दीया (प्रकाश)
वसन - व्यसनवस्त्र - बुरी आदत
32

किस विकल्प के शब्द परस्पर विलोम नहीं हैं?

  1. ((a))

    साम्य - वैषम्य

  2. ((b))

    सापेक्ष - निरपेक्ष

  3. ((c))

    ऋत - अनृत

  4. ((d))

    श्लाघनीय - प्रशंसनीय

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Answer: ((d))

श्लाघनीय - प्रशंसनीय

परस्पर विलोम नहीं हैं- श्लाघनीय - प्रशंसनीय

Key Points

  • श्लाघनीय - प्रशंसनीय: ये दोनों शब्द पर्यायवाची हैं, विलोम नहीं।
  • 'श्लाघनीय' का अर्थ होता है 'प्रशंसा के योग्य' और 'प्रशंसनीय' का अर्थ भी 'प्रशंसा के योग्य' ही होता है।
  • श्लाघनीय का सही विलोम 'निंदनीय' (निंदा के योग्य) होता है।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प-

  • साम्य - वैषम्य: 'साम्य' का अर्थ समानता है, और 'वैषम्य' का अर्थ असमानता या विषमता है।
  • सापेक्ष - निरपेक्ष: 'सापेक्ष' का अर्थ किसी के संदर्भ में होना है, जबकि 'निरपेक्ष' का अर्थ किसी से स्वतंत्र होना है।
  • ऋत - अनृत: 'ऋत' का अर्थ सत्य या प्राकृतिक नियम होता है, और 'अनृत' का अर्थ असत्य या झूठ होता है।

Additional Information कुछ अन्य महत्वपूर्ण विलोम शब्द -

शब्दविलोम
अतिवृष्टिअनावृष्टि
विग्रहअनुग्रह
इहलोकपरलोक
कदाचारसदाचार
प्रसारसंकोच
मृषणरूक्ष
विपुलस्वल्प
समष्टिव्यष्टि
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‘ऐसा रोग जो छूने मात्र से फैलता हो’ – के लिए सार्थक शब्द होगा :

  1. ((a))

    संक्रामक रोग

  2. ((b))

    चर्म रोग

  3. ((c))

    असाध्य रोग

  4. ((d))

    घातक रोग

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Answer: ((a))

संक्रामक रोग

‘ऐसा रोग जो छूने मात्र से फैलता हो’ – के लिए सार्थक शब्द होगा : संक्रामक रोग

Key Points

  • ‘ऐसा रोग जो छूने मात्र से फैलता हो’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है- संक्रामक रोग
  • वाक्यांश के लिएइन्द्रपुरी की वेश्यउपयुक्त शब्द - अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को प्रयुक्त करना ही वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।

अन्य विकल्प -

वाक्यांशशब्द
​त्वचा के किसी भाग के असामान्य अवस्थाचर्म रोग
जिस रोग का इलाज करना बहुत कठिन या असंभव होअसाध्य रोग
जो रोग जानलेवा होते हैंघातक रोग

Additional Information 

 

 कुछ महत्वपूर्ण वाक्यांश के लिए एक शब्द -

वाक्यांशएक शब्द
जो छाती के बल चलता होउरग
जो पृथ्वी से संबंधित होपार्थिव
जो कानून के प्रतिकूल होअवैध
जिस पर विश्वास किया जा सकेविश्वसनीय
जिसे ईश्वर में विश्वास न होनास्तिक
जो बहुत समय तक बना रहेचिरस्थायी
जो तर्क के आधार पर सही होतर्कसंगत
जिसका कोई शत्रु न होअजातशत्रु
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‘ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाला’ – वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है

  1. ((a))

    तपस्वी

  2. ((b))

    संन्यासी

  3. ((c))

    जिज्ञासु

  4. ((d))

    पिपासु

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Answer: ((c))

जिज्ञासु

‘ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाला’ – वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है- जिज्ञासु

Key Points

  • ‘ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है- जिज्ञासु
  • वाक्यांश के लिएइन्द्रपुरी की वेश्यउपयुक्त शब्द - अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को प्रयुक्त करना ही वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।

अन्य विकल्प -

वाक्यांशशब्द
जो तपस्या (कठिन साधना) करता है।तपस्वी
जिसने सांसारिक मोह-माया को त्याग दिया हो।संन्यासी
जिसे प्यास लगी हो।पिपासु

Additional Information 

 कुछ महत्वपूर्ण वाक्यांश के लिए एक शब्द -

वाक्यांशएक शब्द
जो मोक्ष पाने की इच्छा रखता होमुमुक्षु
जो युद्ध करने का इच्छुक होयुयुत्सु
जो कुछ भी न जानता होअज्ञ
जो बहुत कम जानता होअल्पज्ञ
जिसे समझना कठिन होदुर्बोध
जिसका कोई उपाय न होनिरुपाय
जो हमेशा रहने वाला होशाश्वत
जो पृथ्वी से संबंधित होपार्थिव
35

‘कही हुई बात को फिर-फिर कहना’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है

  1. ((a))

    पूर्वग्रह

  2. ((b))

    पिष्टपेषण

  3. ((c))

    तार्किक

  4. ((d))

    वाचाल

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Answer: ((b))

पिष्टपेषण

‘कही हुई बात को फिर-फिर कहना’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है- पिष्टपेषण

Key Points

  • ‘कही हुई बात को फिर-फिर कहना’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है- पिष्टपेषण
  • वाक्यांश के लिएइन्द्रपुरी की वेश्यउपयुक्त शब्द - अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को प्रयुक्त करना ही वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।

अन्य विकल्प -

वाक्यांशशब्द
किसी के प्रति पहले से ही मन में बनी हुई धारणा।पूर्वग्रह
जो तर्क पर आधारित हो।तार्किक
जो बहुत अधिक बोलता हो।वाचाल

Additional Information कुछ महत्वपूर्ण वाक्यांश के लिए एक शब्द -

वाक्यांशएक शब्द
जो बात लोगों से सुनी गई होजनश्रुति
जो शोक करने योग्य न होअशोच्य
जिस पर विजय प्राप्त कर ली गई होविजित
जो कम बोलता होमितभाषी
जिसके पास कुछ न होअकिंचन
जिसका कोई आकार न होनिराकार
जो स्त्री अभिनय करती होअभिनेत्री
36

निम्नलिखित में से किस वाक्य में ‘संप्रदान कारक’ के परसर्ग (विभक्ति चिह्न) का प्रयोग हुआ है ?

  1. ((a))

    राम के हित लक्ष्मण वन गए थे।

  2. ((b))

    वह घर से बाहर आया।

  3. ((c))

    लड़का अब अपने पाँव से चलता है।

  4. ((d))

    उस जगह एक सभा होने जा रही है।

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Answer: ((a))

राम के हित लक्ष्मण वन गए थे।

वाक्य में ‘संप्रदान कारक’ के परसर्ग (विभक्ति चिह्न) का प्रयोग हुआ है - राम के हित लक्ष्मण वन गए थे।

Key Points

  • ​"राम के हित लक्ष्मण वन गए थे" वाक्य में संप्रदान कारक का प्रयोग हुआ है।
  • यहाँ "के हित" (के लिए) संप्रदान कारक का परसर्ग (विभक्ति चिह्न) है, जो दर्शाता है कि क्रिया राम के लिए (लाभार्थी) की गई है।
  • संप्रदान कारक में "के लिए", "को", "के वास्ते" या "के हित" चिन्हों का प्रयोग होता है।
  • जब वाक्य में किसी को कुछ दिया जाए या किसी के लिए कुछ किया जाए तो वहां पर सम्प्रदान कारक होता है।
  • सम्प्रदान कारक के विभक्ति चिन्ह के लिए या को हैं।
  • जैसे -
  • मैंने गरीब को खाना दिया।
  • वह मेरे लिए चाय बना रहा है।

अन्य विकल्प -

वाक्यकारकस्पष्टीकरण
वह घर से बाहर आया।अपादानयहाँ 'से' का प्रयोग 'अलग होने' के अर्थ में हुआ है।
लड़का पाँव से चलता है।करणयहाँ 'से' का प्रयोग 'साधन' के अर्थ में हुआ है।
उस जगह सभा होने जा रही है।अधिकरण'जगह' शब्द स्थान का बोध कराता है, अतः यहाँ अधिकरण कारक है।

Important Pointsहिन्दी में आठ कारक’ हैं -

कारकविभक्तियाँ
कर्ताने
कर्मको
करणसे, द्वारा
सम्प्रदानको, के लिये, हेतु
अपादानसे (अलग होने के अर्थ में)
सम्बन्धका, की, के, रा, री, रे
अधिकरणमें, पर
सम्बोधनहे! अरे! ऐ! ओ! हाय!

Additional Information 

अपादान कारक:- - जब संज्ञा या सर्वनाम के किसी रूप से किन्हीं दो वस्तुओं के अलग होने का बोध होता है, तब वहां अपादान कारक होता है। - अपादान कारक का भी विभक्ति चिन्ह 'से' (अलगाव) होता है। उदाहरण - - हिमालय से गंगा निकलती है। - संगीता घर से चल पड़ी। करण कारक:- - वह साधन जिससे क्रिया होती है, वह करण कहलाता है। यानि, जिसकी सहायता से किसी काम को अंजाम दिया जाता, वह करण कारक कहलाता है। - करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते है- से और के द्वारा। उदाहरण - - राम ने चाकू से फल काटा। - सीता ने कलम के द्वारा पत्र लिखा। अधिकरण कारक:- - अधिकरण का अर्थ होता है – आश्रय। संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। - इसकी विभक्ति में और पर होती है। भीतर, अंदर, ऊपर, बीच आदि शब्दों का प्रयोग इस कारक में किया जाता है। उदाहरण - - ​पहाड़ों के बीच में (स्थान) एक घर है। - वह गंगा किनारे (स्थान/अवस्था) बैठा है।
37

‘जिसका आचरण अच्छा हो’ – वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द होगा

  1. ((a))

    सद्भावी

  2. ((b))

    सज्जन

  3. ((c))

    साधु

  4. ((d))

    सदाचारी

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Answer: ((d))

सदाचारी

‘जिसका आचरण अच्छा हो’ – वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द होगा-सदाचारी

Key Points

  • ‘जिसका आचरण अच्छा हो’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द होगा- सदाचारी
  • वाक्यांश के लिएइन्द्रपुरी की वेश्यउपयुक्त शब्द - अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को प्रयुक्त करना ही वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।

अन्य विकल्प -

वाक्यांशएक शब्द
अच्छी नीयत रखने वाला व्यक्तिसद्भावी
अच्छा व्यक्ति, भला आदमीसज्जन
​जिसमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार न होसाधु

Additional Information   कुछ महत्वपूर्ण वाक्यांश के लिए एक शब्द -

वाक्यांशएक शब्द
जिसके आने की तिथि न होअतिथि
जो किए गए उपकार को न मानता होकृतघ्न
जिसे जीतना कठिन होदुर्जेय
जिसका कोई शत्रु न जन्मा होअजातशत्रु
जो सब कुछ जानता होसर्वज्ञ
जो देखने में प्रिय लगेप्रियदर्शी
जिसके पास कुछ भी न होअकिंचन
जिसका जन्म बाद में हुआ होअनुज
38

इनमें से किस विकल्प के सभी शब्द स्त्रीलिंग हैं ?

  1. ((a))

    हाथी, बालू, आलू

  2. ((b))

    भलाई, हलवाई, ईसाई

  3. ((c))

    इमली, चाँदी, लौकी

  4. ((d))

    साथी, घी, शक्कर

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Answer: ((c))

इमली, चाँदी, लौकी

सभी शब्द स्त्रीलिंग हैं - इमली, चाँदी, लौकी

Key Points

  • इमली, चाँदी, और लौकी तीनों शब्द स्त्रीलिंग हैं।
  • हिंदी व्याकरण में, निर्जीव वस्तुओं का लिंग निर्धारण प्रत्ययों या वाक्य प्रयोग से होता है।
  • इन शब्दों के अंत में 'ई' या 'ी' का प्रयोग इन्हें स्त्रीलिंग बनाता है। 
  • इमली: (उदा: इमली खट्टी है) - स्त्रीलिंग।
  • चाँदी: (उदा: चाँदी महंगी है) - धातु होने के बावजूद स्त्रीलिंग।
  • लौकी: (उदा: लौकी की सब्जी) - स्त्रीलिंग।

अन्य विकल्प-

  • हाथी (पुल्लिंग), बालू (स्त्रीलिंग), आलू (पुल्लिंग)।
  • भलाई (स्त्रीलिंग), हलवाई (पुल्लिंग), ईसाई (पुल्लिंग)।
  • साथी (पुल्लिंग), घी (पुल्लिंग), शक्कर (स्त्रीलिंग)।

Important Points

नियम का आधारपुल्लिंग शब्दस्त्रीलिंग शब्द
आकारांत (अंत में 'आ')कमरा, लड़का, जूता(अक्सर पुल्लिंग)
इकारांत (अंत में 'इ/ई')हाथी, पानी, घी (अपवाद)नदी, टोपी, साड़ी
नदियों के नामगंगा, यमुना, गोदावरी
तिथियों के नामपूर्णिमा, एकादशी, अमावस
अनाजों के नामगेहूँ, चावल, चनाज्वार, मक्का, अरहर
भाषाओं के नामहिंदी, अंग्रेजी, उर्दू
ग्रहों के नामसूर्य, मंगल, शुक्रपृथ्वी (अपवाद)
पेड़ों के नामआम, पीपल, बरगदनाशपाती (अपवाद)
आवट/आहट/ई/ता प्रत्ययलिखावट, घबराहट, बुराई, ममता
द्रव्य/पदार्थसोना, ताँबा, लोहाचाँदी, स्याही, कॉफी

Additional Informationलिंग दो प्रकार के होते हैं-

  • पुल्लिंग - शब्द के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
  • ​जैसे- बकरा, घोड़ा, लड़का, आदमी, शेर, बन्दर, बालक, शिशु, राजा, राजकुमार आदि।
  • स्त्रीलिंग - शब्द के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
  • जैसे - माता, लड़की, भेड़, गाय, बंदरिया, शेरनी, नारी, रानी, राजकुमारी, बहन आदि।
39

किस विकल्प में कोई भी शब्द स्त्रीलिंग नहीं है ?

  1. ((a))

    नदी, झील, सरोवर

  2. ((b))

    नींबू, दही, केला

  3. ((c))

    प्रतिपदा, मंगलवार, टोपी

  4. ((d))

    पानी, ज्ञानी, नानी

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Answer: ((b))

नींबू, दही, केला

कोई भी शब्द स्त्रीलिंग नहीं है - नींबू, दही, केला

Key Points

  • नींबू, दही, और केला - ये तीनों शब्द हिंदी व्याकरण के अनुसार पुल्लिंग हैं। 
  • नींबू: खट्टा नींबू (पुल्लिंग)
  • दही: गाढ़ा दही (अक्सर लोग इसे स्त्रीलिंग समझते हैं, लेकिन यह अपवाद के तौर पर पुल्लिंग है)
  • केला: मीठा केला (पुल्लिंग)
  • चूँकि तीनों ही शब्द पुल्लिंग हैं, इसलिए इनमें से कोई भी स्त्रीलिंग नहीं है।

अन्य विकल्प -

शब्दलिंग (स्त्रीलिंग शब्दों को चिह्नित किया गया है)
नदी, झील, सरोवरनदी (स्त्रीलिंग), झील (स्त्रीलिंग), सरोवर (पुल्लिंग)
प्रतिपदा, मंगलवार, टोपीप्रतिपदा (स्त्रीलिंग), मंगलवार (पुल्लिंग), टोपी (स्त��रीलिंग)
पानी, ज्ञानी, नानीपानी (पुल्लिंग), ज्ञानी (पुल्लिंग), नानी (स्त्रीलिंग)

Important Points

नियम का आधारपुल्लिंग (उदाहरण)स्त्रीलिंग (उदाहरण)
अहंकार/भाववाचक (त्व)पुरुषत्व, देवत्व
अहंकार/भाववाचक (पन)बचपन, लड़कपन
महीनों के नामवैशाख, चैत्र, सावन
वार (दिनों के नाम)सोमवार, मंगलवार
धातुओं के नामलोहा, सोना, तांबाचांदी (अपवाद)
समुद्र के नामप्रशांत, हिंद महासागर
वर्णमाला के अक्षरअ, आ, क, खई, ऊ, ऋ
आभूषणों के नामहार, कंगन, मुकुटअंगूठी, चूड़ी
शरीर के अंगहाथ, पैर, कान, सिरआँख, नाक, उंगली, जीभ
'त' और 'न' अंत वालेदांत, कान, धनरात, बात, शान

Additional Informationलिंग दो प्रकार के होते हैं-

  • पुल्लिंग - शब्द के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
  • ​जैसे- बकरा, घोड़ा, लड़का, आदमी, शेर, बन्दर, बालक, शिशु, राजा, राजकुमार आदि।
  • स्त्रीलिंग - शब्द के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
  • जैसे - माता, लड़की, भेड़, गाय, बंदरिया, शेरनी, नारी, रानी, राजकुमारी, बहन आदि।
40

कौन सा शब्द सदैव एकवचन में प्रयुक्त होता है ?

  1. ((a))

    आकाश

  2. ((b))

    बाल

  3. ((c))

    आँसू

  4. ((d))

    होश

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Answer: ((a))

आकाश

सदैव एकवचन में प्रयुक्त होता है- आकाश

Key Points

  • 'आकाश' शब्द सदैव एकवचन में ही रहता है।
  • इसके साथ प्रयुक्त होने वाली क्रिया भी एकवचन की होती है (जैसे: "आकाश नीला है")।

अन्य विकल्प-

  • बाल: यह शब्द सदैव बहुवचन में आता है (जैसे: "मेरे बाल सफेद हो गए हैं")।
  • आँसू: यह भी सदैव बहुवचन के रूप में प्रयुक्त होता है (जैसे: "उसके आँखों से आँसू बह रहे हैं")।
  • होश: यह भी हमेशा बहुवचन में ही आता है (जैसे: "उसे होश आ गए")।

Important Points

  • कुछ शब्द सदैव बहुवचन के रूप में ही प्रयोग होते हैं, 
  • जैसे - आँसू, दर्शन, प्राण, अक्षत, बाल, लोग, हस्ताक्षर, होश, नेत्र, समाचार, दाम आदि।
  • कुछ शब्द सदैव एकवचन के रूप में ही प्रयोग होते हैं,
  • जैसे - बारिश, पानी, दूध, घी, दही, आकाश, जनता, भीड़, सत्य, प्रेम आदि।

Additional Information

वचन - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध हो उसे वचन कहते हैं।
वचन के दो प्रकार हैं - 1. एकवचन, 2. बहुवचन
वचनपरिभाषाउदाहरण
एकवचनशब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु आदि के एक होने का बोध हो, उसे एकवचन कहते हैंस्त्री, घोड़ा, नदी, रुपया, कपड़ा, माता, माला, पुस्तक, टोपी बंदर, मोर आदि।
बहुवचनशब्द के जिस रूप से एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं आदि का बोध हो, उसे बहुवचन कहते हैं।स्त्रियाँ, घोड़े, नदियाँ, रुपये, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, लताएँ, बेटे आदि।
41

किस वाक्य में ‘मध्यमपुरुष’ का प्रयोग नहीं हुआ है ?

  1. ((a))

    आपको यही उचित लगता है, तो ठीक है।

  2. ((b))

    यह बात आप ही कह दीजिए।

  3. ((c))

    हम अपने आपको भूल गए।

  4. ((d))

    इस विषय में आपकी क्या राय है ?

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Answer: ((c))

हम अपने आपको भूल गए।

वाक्य में ‘मध्यमपुरुष’ का प्रयोग नहीं हुआ है- हम अपने आपको भूल गए।

Key Points

  • यहाँ 'अपने आपको' शब्द 'निजवाचक सर्वनाम' के अंतर्गत आता है, न कि मध्यम पुरुष। इसमें वक्ता स्वयं (खुद) के बारे में बात कर रहा है।
  • जिन शब्दों का प्रयोग वक्ता स्वयं के लिए करता है, वे निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। इसके अंतर्गत आप, स्वयं, खुद, स्वतः आदि।
  • उदाहरण - मैं अपना काम स्वयं कर लूँगा। वह अपने आप घर चला गया।

अन्य विकल्प:

  • (आपको): यहाँ 'आपको' (सामने वाले व्यक्ति) का संबोधन है। (मध्यम पुरुष)
  • (आप ही): यहाँ 'आप' का प्रयोग सामने वाले व्यक्ति को कोई कार्य करने के लिए कहा जा रहा है। (मध्यम पुरुष)
  • (आपकी): यहाँ 'आपकी' का प्रयोग सामने वाले व्यक्ति की राय जानने के लिए हुआ है। (मध्यम पुरुष)

Additional Information पुरुषवाचक सर्वनाम-

  • जिन सर्वनामों का प्रयोग कहने, सुनने वाले के स्थान पर किया जाता है, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम से जाना जाता है।
  • पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद हैं-
  • उत्तमपुरुष- मैं, हम, मुझे, मेरा, हमारा, हमें।
  • मध्यमपुरुष- तू, तुम, तुझे, तुम्हें, तेरा, आप, आपका, आपको।
  • अन्यपुरुष- वह, वे, यह, ये, उन्हें, उसे, इसे, उसका, इसका।
42

‘हिमालय से अनेक नदियाँ निकलती हैं।’ इस वाक्य में किस कारक के परसर्ग का प्रयोग हुआ है ?

  1. ((a))

    संबंध कारक

  2. ((b))

    अधिकरण कारक

  3. ((c))

    अपादान कारक

  4. ((d))

    करण कारक

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Answer: ((c))

अपादान कारक

सही उत्तर है - अपादान कारक

Key Points

  • वाक्य: "हिमालय से अनेक नदियाँ निकलती हैं।"
  • यहाँ नदियों का हिमालय से अलग होने या उत्पन्न होकर दूर जाने का बोध हो रहा है, इसलिए यहाँ अपादान कारक है।
  • जब संज्ञा या सर्वनाम के किसी रूप से किन्हीं दो वस्तुओं के अलग होने का बोध होता है, तब वहां अपादान कारक होता है।
  • अपादान कारक का भी विभक्ति चिन्ह से होता है। 
  • उदाहरण - दूल्हा घोड़े से गिर पड़ा। चूहा बिल से बाहर निकला।

Important Pointsहिन्दी में आठ कारक’ हैं -

कारकविभक्तियाँ
कर्ताने
कर्मको
करणसे, द्वारा
सम्प्रदानको, के लिये, हेतु
अपादानसे (अलग होने के अर्थ में)
सम्बन्धका, की, के, रा, री, रे
अधिकरणमें, पर
सम्बोधनहे! अरे! ऐ! ओ! हाय!

Additional Information 

 

संबंध कारक:- - संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो हमें किन्हीं दो वस्तुओं के बीच संबंध का बोध कराता है, वह संबंध कारक कहलाता है। - सम्बन्ध कारक के विभक्ति चिन्ह का, के, की, ना, ने, नो, रा, रे, री आदि हैं। जैसे - - बच्चे का सिर दुःख रहा है। - यह सुनील की किताब है। अधिकरण कारक:- - अधिकरण का अर्थ होता है – आश्रय। संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। - इसकी विभक्ति में और पर होती है। भीतर, अंदर, ऊपर, बीच आदि शब्दों का प्रयोग इस कारक में किया जाता है। उदाहरण - - फ्रिज में सेब रखा है। - पुस्तक मेज पर है। करण कारक:- - वह साधन जिससे क्रिया होती है, वह करण कहलाता है। यानि, जिसकी सहायता से किसी काम को अंजाम दिया जाता, वह करण कारक कहलाता है। - करण कारक के दो विभक्ति चिन्ह होते है- से और के द्वारा। उदाहरण - - बच्चे मिट्टी से खेल रहे हैं। - रजत के द्वारा वह काम इतनी जल्दी हुआ।
43

किस विकल्प में 'समश्रुत भिन्नार्थक' शब्दों के अर्थ सुमेलित हैं?

  1. ((a))

    अश्व-अश्म = घोड़ा-खच्चर

  2. ((b))

    जलद-जलज = कमल-बादल

  3. ((c))

    सर्वथा-सर्वदा = सब तरह से-सदैव/हमेशा

  4. ((d))

    अनिल-अनल = आग-हवा

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Answer: ((c))

सर्वथा-सर्वदा = सब तरह से-सदैव/हमेशा

सही उत्तर है - सर्वथा-सर्वदा = सब तरह से-सदैव/हमेशा

Key Points

  • ​'समश्रुत भिन्नार्थक' शब्दों के अर्थ सुमेलित -
  • सर्वथा : सब तरह से
  • सर्वदा : सदैव/हमेशा
  • यहाँ दोनों शब्दों के अर्थ उनके क्रमानुसार बिल्कुल सही हैं।
  • ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, समभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

शब्द-युग्मसही अर्थ (क्रमशः)क्यों गलत है?
अश्व-अश्मघोड़ा-पत्थरविकल्प में 'खच्चर' दिया है, जबकि 'अश्म' का अर्थ 'पत्थर' होता है।
जलद-जलजबादल-कमलयहाँ अर्थों का क्रम उलट दिया गया है (जलद=बादल, जलज=कमल)।
अनिल-अनलहवा-आगयहाँ भी अर्थों का क्रम उलट दिया गया है (अनिल=हवा, अनल=आग)।

Additional Information

शब्द-युग्मअर्थ भेद (क्रमशः)
अवलंब - अविलंबसहारा - तुरंत (बिना देरी के)
उदार - उधारदयालु - ऋण (कर्ज)
कठिन - कठीनमुश्किल - कठोर (सख्त)
कली - कलिफूल की अधखिली अवस्था - कलियुग
गृह - ग्रहघर - नक्षत्र (जैसे: मंगल)
चरम - चरमअंतिम - चमड़ा
पाणि - पानीहाथ - जल
मूल - मूल्यजड़ - कीमत
शक - शकसंदेह - एक प्राचीन जाति
44

'निश्चयार्थ वृत्ति' का प्रयोग किस वाक्य में हुआ है?

  1. ((a))

    हमें सदैव सच बोलना चाहिए।

  2. ((b))

    बच्चे ने पुस्तक पढ़ ली है।

  3. ((c))

    भगवान सबका भला करे।

  4. ((d))

    शायद वह आज आ जाए।

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Answer: ((b))

बच्चे ने पुस्तक पढ़ ली है।

'निश्चयार्थ वृत्ति' का प्रयोग वाक्य में हुआ है- बच्चे ने पुस्तक पढ़ ली है।

Key Points

  • "बच्चे ने पुस्तक पढ़ ली है।" — यहाँ क्रिया के होने की पूर्णता और वास्तविकता प्रकट हो रही है।
  • यह एक निश्चित तथ्य है, इसलिए यह निश्चयार्थ वृत्ति है।

अन्य विकल्प -

वाक्यवृत्ति का प्रकारक्यों?
हमें सदैव सच बोलना चाहिए।आज्ञार्थकयह एक उपदेश है।
भगवान सबका भला करे।इच्छार्थकयहाँ वक्ता की इच्छा प्रकट हो रही है।
शायद वह आज आ जाए।संभाव्यर्थकयहाँ कार्य के होने की संभावना है।

Important Pointsवृत्ति -

  • क्रिया के उस रूप को कहते हैं
  • जो वक्ता (बोलने वाले) के मनोभावों, इच्छाओं, आज्ञा या संभावना को प्रकट करता है।
  • मुख्य रूप से वृत्ति के 5 भेद माने जाते हैं: निश्चयार्थ, आज्ञार्थ, संभावना/संभावनार्थ, संकेतार्थ, और सामर्थ्यार्थ

Additional Information

वृत्ति का नामपरिभाषाउदाहरण
निश्चयार्थककार्य के होने या न होने का सामान्य बोध।वह पढ़ता है।
संकेतार्थकएक कार्य का होना दूसरे पर निर्भर हो।यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।
आज्ञार्थकआज्ञा, प्रार्थना या उपदेश का बोध।तुम घर जाओ। / कृपया मदद करें।
संदेहार्थककार्य में अनिश्चितता या संदेह हो।शायद वह आ रहा होगा।
संभाव्यर्थककार्य के होने की संभावना का बोध।शायद आज धूप निकले।
45

'आवृत्तिमूलक पक्ष' से संबंधित वाक्य है -

  1. ((a))

    मोहन अध्यापक है।

  2. ((b))

    बालक पुस्तक पढ़ रहा है।

  3. ((c))

    बच्ची सो चुकी है।

  4. ((d))

    वह स्कूल जाता है।

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Answer: ((d))

वह स्कूल जाता है।

'आवृत्तिमूलक पक्ष' से संबंधित वाक्य है - वह स्कूल जाता है।

Key Points

  • "वह स्कूल जाता है।" - यह क्रिया उसकी दिनचर्या या आदत को दर्शाती है,
  • जो बार-बार दोहराई जाती है। इसलिए यह आवृत्तिमूलक पक्ष का उदाहरण है।

अन्य विकल्प -

वाक्यपक्ष का प्रकार
मोहन अध्यापक है।स्थितिबोधक - यह केवल अवस्था बताता है।
बालक पुस्तक पढ़ रहा है।सातत्यबोधक- कार्य जारी है।
बच्ची सो चुकी है।पूर्णताबोधक - कार्य समाप्त हो चुका है।

Important Pointsपक्ष-

  • क्रिया के कार्य की अवस्था या रूप को व्यक्त करने वाले भेद को ‘पक्ष’ कहा जाता है।

Additional Informationहिंदी में मुख्य रूप से 7 पक्ष माने जाते हैं:

पक्ष का नामपरिभाषाउदाहरण
नित्यताबोधककार्य का हमेशा होना।सूर्य पूर्व में उगता है।
सातत्यबोधककार्य का लगातार जारी रहना।वह पढ़ रहा है।
प्रगतिबोधककार्य का धीरे-धीरे आगे बढ़ना।वह बड़ा होता जा रहा है।
पूर्णताबोधककार्य का समाप्त हो जाना।मैंने पत्र लिख लिया है।
आवृत्तिमूलककार्य का बार-बार या आदत के रूप में होना।वह रोज टहलने जाता है।
आसन्नबोधककार्य के तुरंत होने का बोध।वह अभी-अभी सोया है।
सन्निकटबोधककार्य के शुरू होने ही वाला होने का बोध।वह जाने ही वाला है।
46

'कर्तृवाच्य' से संबंधित वाक्य है -

  1. ((a))

    चोर पकड़ा गया है।

  2. ((b))

    यह बात उससे पता चली।

  3. ((c))

    लड़का पढ़ रहा है।

  4. ((d))

    किसान द्वारा फसल काट ली गई।

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Answer: ((c))

लड़का पढ़ रहा है।

'कर्तृवाच्य' से संबंधित वाक्य है - लड़का पढ़ रहा है।

Key Points

  • "लड़का पढ़ रहा है।" - यहाँ क्रिया 'पढ़ रहा है' सीधे 'लड़का' (कर्ता) के अनुसार है। यदि कर्ता 'लड़की' होता, तो क्रिया 'पढ़ रही है' हो जाती।

अन्य विकल्प -

वाक्यवाच्य का प्रकारक्यों?
चोर पकड़ा गया है।कर्मवाच्ययहाँ क्रिया 'पकड़ा गया' कर्म (चोर) के अनुसार है।
यह बात उससे पता चली।कर्मवाच्य/भावयहाँ क्रिया का सीधा संबंध कर्ता से नहीं है।
किसान द्वारा फसल काट ली गई।कर्मवाच्य'द्वारा' का प्रयोग और क्रिया का कर्म (फसल) के साथ संबंध कर्मवाच्य दर्शाता है।

Additional Information

वाच्य:- - क्रिया के जिस रूपान्तर से यह ज्ञात हो कि वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का प्रधान विषय कर्ता, कर्म अथवा भाव है, उसे वाच्य कहते हैं। वाच्य के तीन भेद हैं- - कर्तृवाच्य - कर्मवाच्य - भाववाच्य
वाच्यपरिभाषाउदाहरण
​कर्तृवाच्यजिस वाक्य में कर्ता मुख्य हो और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन एवं पुरूष के अनुसार हो, उसे कर्तृवाच्य कहते है।सीता पुस्तक पढ़ती है।
कर्मवाच्यजिस वाक्य में कर्म मुख्य हो तथा इसकी सकर्मक क्रिया के लिंग, वचन व पुरूष कर्म के अनुसार हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।चित्रकार द्वारा चित्र बनाया गया।
भाववाच्यजब वाक्य में न तो कर्ता की प्रधानता होती है और न कर्म की, बल्कि क्रिया का भाव प्रधान होता है, उसे भाववाच्य कहते हैं।​धूप में बैठा नहीं जाता।
47

किस विकल्प में 'समश्रुत भिन्नार्थक' शब्दों के अर्थ सुमेलित नहीं हैं?

  1. ((a))

    पथ-पथ्य = मार्ग/रास्ता - बीमार को दिया जाने वाला हितकर भोजन आदि

  2. ((b))

    जठर-जरठ = ज्येष्ठ/बड़ा - बूढ़ा

  3. ((c))

    निर्माण-निर्वाण = रचना-मोक्ष

  4. ((d))

    तर्क-तक्र = बहस-छाछ

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Answer: ((b))

जठर-जरठ = ज्येष्ठ/बड़ा - बूढ़ा

'समश्रुत भिन्नार्थक' शब्दों के अर्थ सुमेलित नहीं हैं- जठर-जरठ = ज्येष्ठ/बड़ा - बूढ़ा

Key Points

  • यह विकल्प गलत सुमेलित है, क्योंकि यहाँ 'जठर' का अर्थ गलत दिया गया है।
  • जठर : इसका सही अर्थ 'पेट' होता है (जैसे- जठराग्नि = पेट की आग)।
  • जरठ : इसका सही अर्थ 'बूढ़ा' होता है।
  • अतः, 'जठर-जरठ' का सही अर्थ भेद 'पेट-बूढ़ा' होगा।
  • ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, समभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

शब्द-युग्मअर्थ भेद
पथ - पथ्यमार्ग - बीमार का भोजन (हितकर)
निर्माण - निर्वाणरचना - मोक्ष
तर्क - तक्रबहस - छाछ

Additional Information

शब्द-युग्मअर्थ भेद (क्रमशः)
अनल - अनिलआग - हवा
कुल - कूलवंश/सब - किनारा
अतुल - अतलजिसकी तुलना न हो - जिसका तल न हो (गहरा)
दवा - दवातऔषधि - स्याही रखने का पात्र
प्रसाद - प्रासादकृपा/भोग - महल
सूत - सूतधागा - सारथी (पुत्र)
बली - बलिशक्तिशाली - बलिदान/भेंट
तरणी - तरुणीसूर्य - युवती
अवधि - अवधीसमय की सीमा - अवध (लखनऊ) की भाषा
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कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. ((a))

    प्रेरणार्थक क्रियाएँ सदैव सकर्मक ही होती हैं।

  2. ((b))

    'भाववाच्य' केवल अकर्मक क्रियाओं में ही होता है।

  3. ((c))

    'कर्मवाच्य' अकर्मक और सकर्मक दोनों क्रियाओं में होता है।

  4. ((d))

    'कर्तृवाच्य' भी अकर्मक और सकर्मक दोनों क्रियाओं में होता है।

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Answer: ((c))

'कर्मवाच्य' अकर्मक और सकर्मक दोनों क्रियाओं में होता है।

कथन सही नहीं है- 'कर्मवाच्य' अकर्मक और सकर्मक दोनों क्रियाओं में होता है।

Key Points

  • (गलत कथन): 'कर्मवाच्य' अकर्मक और सकर्मक दोनों में होता है।
  • तथ्य: कर्मवाच्य में क्रिया का लिंग और वचन कर्म के अनुसार बदलता है। यदि कर्म ही नहीं होगा (अकर्मक), तो कर्मवाच्य बन ही नहीं सकता।
  • सकर्मक उदाहरण: "राम के द्वारा आम (कर्म) खाया गया।" (सही)
  • अकर्मक स्थिति: "राम के द्वारा सोया गया।" (यह अकर्मक है, इसलिए इसे कर्मवाच्य न कहकर भाववाच्य कहा जाता है)।

Additional Information(सही कथन): प्रेरणार्थक क्रियाएँ सदैव सकर्मक ही होती हैं।

  • तथ्य: जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने की प्रेरणा देता है, तो कार्य किसी न किसी पर (कर्म पर) घटित ��ोता है।
  • उदाहरण: मूल क्रिया: 'हँसना' (अकर्मक)
  • प्रेरणार्थक: 'हँसाना' (सकर्मक - जैसे: जोकर बच्चों को हँसाता है।)

(सही कथन): 'भाववाच्य' केवल अकर्मक क्रियाओं में ही होता है।

  • तथ्य: भाववाच्य में क्रिया का अर्थ (भाव) प्रधान होता है, कर्ता या कर्म नहीं। यह प्रायः निषेधात्मक (नहीं) वाक्यों में आता है।
  • उदाहरण: "अब चला नहीं जाता।" (यहाँ 'चलना' अकर्मक क्रिया है)।

(सही कथन): 'कर्तृवाच्य' अकर्मक और सकर्मक दोनों में होता है।

  • तथ्य: इसमें कर्ता प्रधान होता है, चाहे क्रिया के साथ कर्म हो या न हो।
  • सकर्मक उदाहरण: "लड़का किताब पढ़ता है।"
  • अकर्मक उदाहरण: "लड़का सोता है।"
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कौन सा कथन गलत है?

  1. ((a))

    रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रमुख भेद किये जाते हैं : 1. साधारण, 2. मिश्र और 3. संयुक्त वाक्य।

  2. ((b))

    वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को 'उद्देश्य' और कर्ता को 'विधेय' कहते हैं।

  3. ((c))

    साधारण वाक्य में एक उद्देश्य और एक विधेय होता है।

  4. ((d))

    मिश्रवाक्य में मुख्य उपवाक्य एक ही रहता है, लेकिन आश्रित उपवाक्य एक से अधिक हो सकते हैं।

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Answer: ((b))

वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को 'उद्देश्य' और कर्ता को 'विधेय' कहते हैं।

कथन गलत है- वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को 'उद्देश्य' और कर्ता को 'विधेय' कहते हैं।

Key Points

  • यह कथन व्याकरण की दृष्टि से गलत है क्योंकि इसमें 'उद्देश्य' और 'विधेय' की परिभाषा को आपस में बदल दिया गया है।
  • वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे 'उद्देश्य' (Subject) कहते हैं (अर्थात कर्ता)।
  • उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाता है, उसे 'विधेय' (Predicate) कहते हैं (अर्थात क्रिया और उसका विस्तार)।

उदाहरण-

वाक्यउद्देश्यविधेय
राम पत्र लिखता है।रामपत्र लिखता है।
सफेद घोड़ा तेज दौड़ता है।सफेद घोड़ातेज दौड़ता है।
परिश्रमी व्यक्ति सफल होते हैं।परिश्रमी व्यक्तिसफल होते हैं।
हिमालय भारत का गौरव है।हिमालयभारत का गौरव है।

Additional Informationरचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद- 

  • रचना के आधार पर वाक्य को उसकी बनावट के अनुसार बाँटा जाता है:
  • साधारण (सरल) वाक्य: "राम स्कूल जाता है।" (एक ही क्रिया)
  • संयुक्त वाक्य: "राम स्कूल गया और वह वापस आ गया।" (दो स्वतंत्र वाक्य 'और' से जुड़े हैं)
  • मिश्र वाक्य: "शिक्षक ने कहा कि कल छुट्टी है।" (एक मुख्य और एक आश्रित वाक्य)

साधारण वाक्य: एक उद्देश्य और एक विधेय-

  • किसी भी सरल वाक्य में एक ही कर्ता (उद्देश्य) और उसके द्वारा की गई एक ही मुख्य क्रिया (विधेय) होती है।
  • उदाहरण: "परिश्रमी बालक (उद्देश्य) सदा सफल होते हैं (विधेय)।"
  • यहाँ 'परिश्रमी बालक' के बारे में बात हो रही है, इसलिए यह उद्देश्य है। उनके बारे में जो कहा गया (सफल होना), वह विधेय है।

मिश्र वाक्य: मुख्य और आश्रित उपवाक्य -

  • मिश्र वाक्य में एक प्रधान वाक्य होता है और दूसरा उस पर निर्भर (आश्रित)।
  • उदाहरण: "वही बच्चा पास होगा (मुख्य), जिसने कड़ी मेहनत की है (आश्रित)।"
  • यहाँ 'वही बच्चा पास होगा' अपने आप में मुख्य बात है, लेकिन 'जिसने कड़ी मेहनत की है' उस पर टिका हुआ है।
  • एक मिश्र वाक्य में एक से अधिक आश्रित वाक्य भी हो सकते हैं।
  • उदाहरण: "यदि वर्षा अच्छी होती (आश्रित 1) और खाद समय पर मिलती (आश्रित 2), तो फसल बहुत अच्छी होती (मुख्य)।"
50

किस विकल्प में सभी शब्द शुद्ध हैं?

  1. ((a))

    मध्येनजर, चारागाह, तंदुरुस्त

  2. ((b))

    तंदुरुस्त, मद्देनजर, चरागाह

  3. ((c))

    चरागाह, तंदुरस्त, मध्येनजर

  4. ((d))

    मद्देनजर, चारागाह, तंदुरस्त

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Answer: ((b))

तंदुरुस्त, मद्देनजर, चरागाह

सभी शब्द शुद्ध हैं- तंदुरुस्त, मद्देनजर, चरागाह

Key Points

  • शुद्ध शब्द - 'तंदुरुस्त, मद्देनजर, चरागाह'
  • तंदुरुस्त (अर्थ : जिसको कोई रोग न हो)।
  • मद्देनजर (अर्थ : ध्यान में रखते हुए)।
  • चरागाह (अर्थ :वह स्थान जहाँ पशु चरते हैं)।
  • अन्य सभी विकल्प वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।
  • वर्तनी - भाषा के किसी शब्द को को लिखने में प्रयुक्त वर्णों के सही क्रम को वर्तनी कहते हैं।

Additional Information 

अशुद्ध रूपशुद्ध रूप
अशिर्वाद / आर्शिवादआशीर्वाद
उज्वल / उजवलउज्ज्वल
कवयत्रीकवयित्री
त्यौहारत्योहार
सन्यासीसंन्यासी
श्रृंगारशृंगार
प्रज्जवलितप्रज्वलित
अनुग्रहितअनुगृहीत
निरोगनीरोग
अगामीआगामी
51

किस वाक्य में 'भाववाच्य' नहीं है?

  1. ((a))

    मुझसे सुबह जल्दी नहीं उठा जाता।

  2. ((b))

    वह प्रतिदिन स्कूल नहीं जाता है।

  3. ((c))

    छोटे बच्चों से सीढ़ियाँ नहीं चढ़ीं जातीं।

  4. ((d))

    कमजोरी के कारण लड़के से चला नहीं जाता।

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Answer: ((b))

वह प्रतिदिन स्कूल नहीं जाता है।

वाक्य में 'भाववाच्य' नहीं है- वह प्रतिदिन स्कूल नहीं जाता है।

Key Points

  • "वह प्रतिदिन स्कूल नहीं जाता है।" — यह एक कर्तृवाच्य वाक्य है।
  • यहाँ क्रिया 'जाता है' का सीधा संबंध कर्ता 'वह' से है।
  • इसमें कर्ता को हटाया नहीं जा सकता और न ही यह असमर्थता का भाव दर्शा रहा है।

अन्य विकल्प -

वाक्यभाववाच्य
मुझसे सुबह जल्दी नहीं उठा जाता।इसमें 'उठना' क्रिया अकर्मक है और यहाँ असमर्थता का भाव है।
छोटे बच्चों से सीढ़ियाँ नहीं चढ़ीं जातीं।यह असमर्थता प्रकट कर रहा है (भले ही सीढ़��याँ कर्म है, पर यहाँ जोर चढ़ने की क्रिया/असमर्थता पर है)।
कमजोरी के कारण लड़के से चला नहीं जाता।इसमें 'चलना' अकर्मक क्रिया है और 'चला नहीं जाता' भाव प्रधान है।

Additional Information

वाच्य:- - क्रिया के जिस रूपान्तर से यह ज्ञात हो कि वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का प्रधान विषय कर्ता, कर्म अथवा भाव है, उसे वाच्य कहते हैं। वाच्य के तीन भेद हैं- - कर्तृवाच्य - कर्मवाच्य - भाववाच्य
वाच्यपरिभाषाउदाहरण
​कर्तृवाच्यजिस वाक्य में कर्ता मुख्य हो और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन एवं पुरूष के अनुसार हो, उसे कर्तृवाच्य कहते है।रमेश केला खाता है।
कर्मवाच्यजिस वाक्य में कर्म मुख्य हो तथा इसकी सकर्मक क्रिया के लिंग, वचन व पुरूष कर्म के अनुसार हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।कवियों द्वारा कविताएँ लिखी गई।
भाववाच्यजब वाक्य में न तो कर्ता की प्रधानता होती है और न कर्म की, बल्कि क्रिया का भाव प्रधान होता है, उसे भाववाच्य कहते हैं।​मोहन से टहला भी नहीं जाता।
52

इनमें वर्तनी की दृष्टि से कौन सा शब्द शुद्ध नहीं है?

  1. ((a))

    मत्स्य

  2. ((b))

    वापस

  3. ((c))

    सृष्टि

  4. ((d))

    दृष्टा

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Answer: ((d))

दृष्टा

शब्द शुद्ध नहीं है- दृष्टा

Key Points

  • वर्तनी की दृष्टि से 'दृष्टा' अशुद्ध शब्द है।
  • इसका सही और मानक रूप 'द्रष्टा' होता है,जिसका अर्थ 'देखने वाला', 'प्रेक्षक' या 'साक्षी' है।
  • 'दृष्टा' में 'ऋ' की मात्रा का गलत प्रयोग होता है, जबकि सही शब्द में 'द्र' (द + र) का प्रयोग होता है।
  • अन्य सभी विकल्प वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
  • वर्तनी - भाषा के किसी शब्द को को लिखने में प्रयुक्त वर्णों के सही क्रम को वर्तनी कहते हैं।

Additional Information

अशुद्ध शब्दशुद्ध शब्द
अतिथीअतिथि
दिपावलीदीपावली
परिक्षापरीक्षा
रचीयतारचयिता
उन्नतीउन्नति
कालीदासकालिदास
श्रीमतिश्रीमती
दुरावस्थादुरवस्था
बाल्मीकीबाल्मीकि
तत्कालिकतात्कालिक
पुर्नजन्मपुनर्जन्म
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वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है :

  1. ((a))

    बुद्धवार

  2. ((b))

    दम्पती

  3. ((c))

    द्वितिय

  4. ((d))

    वयस्क

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Answer: ((d))

वयस्क

वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है : वयस्क

Key Points

  • वर्तनी की दृष्टि से 'वयस्क' शब्द पूरी तरह शुद्ध है।
  • जिसका अर्थ है 'उम्रदराज' या 'अडल्ट'।
  • अन्य सभी विकल्प वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।
  • वर्तनी - भाषा के किसी शब्द को को लिखने में प्रयुक्त वर्णों के सही क्रम को वर्तनी कहते हैं।

अन्य विकल्प-

  • बुद्धवार (अशुद्ध): शुद्ध शब्द 'बुधवार' है।
  • दम्पती (अशुद्ध): मानक हिंदी वर्तनी के अनुसार शुद्ध शब्द 'दंपति' है।
  • द्वितिय (अशुद्ध): शुद्ध शब्द 'द्वितीय' है।

Additional Information

अशुद्धशुद्ध
ज्योत्सनाज्योत्स्ना
निरोगनीरोग
अंताक्षरीअंत्याक्षरी
घरोंदाघरौंदा
परिपेक्ष्यपरिप्रेक्ष्य
अद्धितीयअद्वितीय
कल्यानकल्याण
रामायनरामायण
दिपावलीदीपावली
54

इनमें विलोम-शब्द-युग्म नहीं है :

  1. ((a))

    स्थावर-जंगम

  2. ((b))

    मूक-वाचाल

  3. ((c))

    व्यष्टि-समष्टि

  4. ((d))

    हार-परिहास

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Answer: ((d))

हार-परिहास

विलोम-शब्द-युग्म नहीं है : हार-परिहास

Key Points

  • 'हार-परिहास' विलोम युग्म नहीं है। 'हार' का सही विलोम 'जीत' होता है।
  • 'परिहास' का अर्थ हंसी-मजाक होता है, जिसका विलोम 'रुदन' या 'गंभीरता' हो सकता है।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

  • स्थावर-जंगम: यह एक सही विलोम युग्म है (स्थावर का अर्थ स्थिर, जंगम का अर्थ गतिशील)।
  • मूक-वाचाल: यह भी सही विलोम युग्म है (मूक का अर्थ चुप रहने वाला, वाचाल का अर्थ अधिक बोलने वाला)।
  • व्यष्टि-समष्टि: यह भी सही विलोम युग्म है (व्यष्टि का अर्थ व्यक्तिगत, समष्टि का अर्थ सामूहिक)।

Additional Information

शब्दविलोम
अल्पज्ञसर्वज्ञ
उन्मूलनरोपण
कृपणउदार
निरामयआमय
पाश्चात्यपौरस्त्य
प्रसारसंकोच
मौनमुखर
विज्ञअज्ञ
सकर्मकअकर्मक
सदाचारकदाचार
सृष्टिप्रलय
55

इनमें विलोम-शब्द-युग्म नहीं है :

  1. ((a))

    हर्ष-विषाद

  2. ((b))

    स्वकीय-परकीय

  3. ((c))

    वैतनिक-सवैतनिक

  4. ((d))

    जड़-चेतन

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Answer: ((c))

वैतनिक-सवैतनिक

विलोम-शब्द-युग्म नहीं है : वैतनिक-सवैतनिक

Key Points

  • 'वैतनिक-सवैतनिक' विलोम युग्म नहीं है, क्योंकि ये दोनों समानार्थी (पर्यायवाची) शब्द हैं।
  • 'वैतनिक' और 'सवैतनिक' दोनों का अर्थ एक ही है- वेतन पाने वाला।
  • वैतनिक का सही विलोम अवैतनिक (बिना वेतन के काम करन�� वाला) होता है।
  • विलोम - जो शब्द किसी एक शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं, वे विलोम शब्द कहलाते हैं।

अन्य विकल्प -

  • हर्ष-विषाद: यह सही विलोम युग्म है (हर्ष का अर्थ खुशी, विषाद का अर्थ दुख)।
  • स्वकीय-परकीय: यह भी सही विलोम युग्म है (स्वकीय का अर्थ अपना, परकीय का अर्थ दूसरे का)।
  • जड़-चेतन: यह भी सही विलोम युग्म है (जड़ का अर्थ निर्जीव, चेतन का अर्थ सजीव)।

Additional Information कुछ अन्य महत्वपूर्ण विलोम शब्द -

शब्दविलोम
कर्कशमधुर
इहलोकपरलोक
उन्मूलनरोपण
आमिषनिरामिश
तिमिरआलोक
नैसर्गिककृत्रिम
अनाहूतआहूत
प्राचीनअर्वाचीन
56

किस विकल्प में सभी शब्द अशुद्ध हैं?

  1. ((a))

    भवनिष्ठ, ध्यातव्य

  2. ((b))

    भवनिष्ठ, धातव्य

  3. ((c))

    भावनिष्ठ, ध्यातव्य

  4. ((d))

    ध्यातव्य, भवनिष्ठ

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Answer: ((b))

भवनिष्ठ, धातव्य

सभी शब्द अशुद्ध हैं- भवनिष्ठ, धातव्य

Key Points

  • 'भवनिष्ठ' शब्द अशुद्ध है। सही शब्द 'भवनिष्ठ' नहीं,
  • बल्कि 'भवनिष्ठ' के स्थान पर 'भावनिष्ठ' (जो भाव में निष्ठा रखे) का प्रयोग संदर्भानुसार किया जा सकता है,
  • लेकिन मानक हिंदी वर्तनी में यह शब्द अशुद्ध माना जाता है।
  • 'धातव्य' शब्द भी अशुद्ध है। शुद्ध शब्द 'ध्यातव्य' होता है (जिसका ध्यान किया जाना चाहिए)।
  • अन्य सभी विकल्प वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।
  • वर्तनी - भाषा के किसी शब्द को को लिखने में प्रयुक्त वर्णों के सही क्रम को वर्तनी कहते हैं।

Additional Information 

अशुद्धशुद्ध
आट्टालिकाअट्टालिका
कृत्यकृत्यकृतकृत्य
तरुछायातरुच्छाया
निवारननिवारण
पुष्पावलिपुष्पावली
मृत्युन्जयमृत्युञ्जय
विरहणीविरहिणी
हतोबुद्धिहतबुद्धि
युधिष्ठरयुधिष्ठिर
57

संयुक्त वाक्य का उदाहरण है -

  1. ((a))

    उन्होंने जो कुछ दिया, उसी से मुझे परम संतोष है।

  2. ((b))

    वह ऐसी बातें कहता है, जिनसे सबको बुरा लगता है।

  3. ((c))

    मैं आगे बढ़ गया और वह पीछे रह गया।

  4. ((d))

    वहाँ जो कुछ देखने योग्य था, मैंने सब देख लिया।

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Answer: ((c))

मैं आगे बढ़ गया और वह पीछे रह गया।

संयुक्त वाक्य का उदाहरण है - मैं आगे बढ़ गया और वह पीछे रह गया।

Key Points

  • "मैं आगे बढ़ गया" और "वह पीछे रह गया" दोनों ही स्वतंत्र वाक्य हैं,
  • जिन्हें 'और' योजक के माध्यम से जोड़ा गया है। अतः यह संयुक्त वाक्य है।

अन्य विकल्प -

  • "उन्होंने जो कुछ दिया, उसी से मुझे परम संतोष है।" यह एक मिश्रित वाक्य है, क्योंकि इसमें 'जो...उसी' का प्रयोग आश्रित उपवाक्य बनाने के लिए किया गया है।
  • "वह ऐसी बातें कहता है, जिनसे सबको बुरा लगता है।" यह भी एक मिश्रित वाक्य है, जहाँ 'जिनसे' आश्रित उपवाक्य को जोड़ रहा है।
  • "वहाँ जो कुछ देखने योग्य था, मैंने सब देख लिया।" यह भी मिश्रित वाक्य है, क्योंकि 'जो कुछ' के द्वारा वाक्य का दूसरा हिस्सा पहले हिस्से पर आश्रित हो गया है।

Important Pointsरचना के आधार पर वाक्य भेद -

  • रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं।
  • सरल वाक्य
  • मिश्रित वाक्य
  • संयुक्त वाक्य

Additional Information 

वाक्यपरिभाषाउदाहरण
सरलऐसा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।राम स्कूल जाता है।
मिश्रऐसे वाक्य जिनमें सरल वाक्य के साथ-साथ कोई दूसरा उपवाक्य भी हो, वे वाक्य मिश्र वाक्य कहलाते हैं। मिश्र वाक्य में प्रधान वाक्य को आश्रित उपवाक्य से जोड़ने के लिए जो आपस में कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, अगर/यदि, तो, यद्यपि, तथापि आदि का प्रयोग किया जाता है।​ मैंने देखा कि राम स्कूल जा रहा था।
संयुक्त​ऐसा वाक्य जिसमे दो या दो से अधिक उपवाक्य हो एवं सभी उपवाक्य प्रधान हों, ऐसे वाक्य को सयुंक्त वाक्य कहते हैं।  ​सयुंक्त वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्यों को और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, तो, नहीं तो, किन्तु, परन्तु, लेकिन, पर आदि का प्रयोग करके जोड़ा जाता है।राम स्कूल गया और उसने पढ़ाई की।
58

'मैंने लड़के को पुस्तक पढ़ाई।' उक्त वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का भेद है -

  1. ((a))

    अकर्मक

  2. ((b))

    संयुक्त

  3. ((c))

    पूर्वकालिक

  4. ((d))

    द्विकर्मक

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Answer: ((d))

द्विकर्मक

'मैंने लड़के को पुस्तक पढ़ाई।' उक्त वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का भेद है - द्विकर्मक

Key Points

  • 'मैंने लड़के को पुस्तक पढ़ाई।' वाक्य में द्विकर्मक क्रिया  है।
  • इस वाक्य में क्रिया (पढ़ाई) के साथ दो कर्म प्रयुक्त हुए हैं:
  • पहला 'लड़के को' (गौण/अप्रत्यक्ष कर्म) और दूसरा 'पुस्तक' (मुख्य/प्रत्यक्ष कर्म)
  • जिस सकर्मक क्रिया का अर्थ स्पष्ट करने के लिए वाक्य में दो कर्म प्रयुक्त होते हैं, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • ​​उदाहरण- राकेश ने रमेश को रुपए दिए।

Important Points 

  क्रिया के भेद -

  • कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं।
  1. सकर्मक क्रिया
  2. अकर्मक क्रिया

Additional Information 

 

क्रियापरिभाषाउदाहरण
सकर्मकजिन क्रियाओं के कार्य का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है उन्हे सकर्मक क्रिया कहते है।सकर्मक क्रिया कर्म के बिना अपना भाव पूर्ण रूप से प्रकट नहीं कर पाती।सचिन फुटबॉल मैच खेलता है।
अकर्मकजिस क्रिया में कार्य का फल कर्ता पर ही पड़े, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं पाया जाता है।सिपाही गिर गया।
संयुक्तजब दो या दो से अधिक क्रियापद मिलकर एक ही क्रिया का बोध कराते हैं, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं।प्रियंका ने दूध पी लिया।
पूर्वकालिकजब कर्ता एक कार्य को समाप्त करके तुरंत दूसरे काम में लग जाता है, तब जो क्रिया पहले ही समाप्त हो जाती है, उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं। क्रिया भेद का पूर्वकालिक रूप बनाने के लिए मूल धातु के साथ 'कर' या 'करके' जोड़ दिया जाता है।समाचार सुनकर वह रो पड़ा।
59

इनमें संयुक्त वाक्य कौन सा है?

  1. ((a))

    वह आगे बढ़ गया, लेकिन परिवार पीछे रह गया।

  2. ((b))

    जब बरसात थमी, तब हम लोग बाहर निकले।

  3. ((c))

    मैंने सुना है कि आप अच्छे कवि हैं।

  4. ((d))

    लाखों लोग कोरोना से काल कवलित हो गए।

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Answer: ((a))

वह आगे बढ़ गया, लेकिन परिवार पीछे रह गया।

इनमें संयुक्त वाक्य है- वह आगे बढ़ गया, लेकिन परिवार पीछे रह गया

Key Points

  • ​"वह आगे बढ़ गया" और "परिवार पीछे रह गया" दोनों स्वतंत्र उपवाक्य हैं, जिन्हें "लेकिन" योजक द्वारा जोड़ा गया है। इसलिए यह संयुक्त वाक्य है।

अन्य विकल्प -

  • (जब बरसात थमी, तब हम लोग बाहर निकले): यह एक मिश्रित वाक्य है, क्योंकि यहाँ 'जब-तब' का प्रयोग हुआ है, जो उपवाक्यों में आश्रित संबंध बताता है।
  • (मैंने सुना है कि आप अच्छे कवि हैं): यह भी एक मिश्रित वाक्य है, जहाँ 'कि' योजक का प्रयोग आश्रित उपवाक्य को जोड़ने के लिए किया गया है।
  • (लाखों लोग कोरोना से काल कवलित हो गए): यह एक सरल वाक्य है, क्योंकि इसमें केवल एक मुख्य क्रिया है और यह किसी अन्य उपवाक्य पर निर्भर नहीं है।

Important Pointsरचना के आधार पर वाक्य भेद -

  • रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं।
  • सरल वाक्य
  • मिश्रित वाक्य
  • संयुक्त वाक्य

Additional Information 

वाक्यपरिभाषाउदाहरण
सरलऐसा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।​चिड़िया चहचहा रही है।
मिश्रऐसे वाक्य जिनमें सरल वाक्य के साथ-साथ कोई दूसरा उपवाक्य भी हो, वे वाक्य मिश्र वाक्य कहलाते हैं। मिश्र वाक्य में प्रधान वाक्य को आश्रित उपवाक्य से जोड़ने के लिए जो आपस में कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, अगर/यदि, तो, यद्यपि, तथापि आदि का प्रयोग किया जाता है।​ यदि तुम मेहनत करोगे तो सफल हो जाओगे।
संयुक्त​ऐसा वाक्य जिसमे दो या दो से अधिक उपवाक्य हो एवं सभी उपवाक्य प्रधान हों, ऐसे वाक्य को सयुंक्त वाक्य कहते हैं।  ​सयुंक्त वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्यों को और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, तो, नहीं तो, किन्तु, परन्तु, लेकिन, पर आदि का प्रयोग करके जोड़ा जाता है।वह बीमार था इसलिए स्कूल नहीं गया।
60

निम्नलिखित में सरल/साधारण वाक्य है :

  1. ((a))

    जहाँ अभी रेगिस्तान है, वहाँ किसी समय जंगल था।

  2. ((b))

    मेरा भाई यहाँ आएगा या मैं ही उसके पास जाऊँगा।

  3. ((c))

    जो जितना मांगता, उसको उतना दिया जाता।

  4. ((d))

    दिन का थका हुआ आदमी रात को खूब सोता है।

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Answer: ((d))

दिन का थका हुआ आदमी रात को खूब सोता है।

सरल/साधारण वाक्य है : दिन का थका हुआ आदमी रात को खूब सोता है।

Key Points

  • ​यहाँ "दिन का थका हुआ आदमी" पूरा एक ही उद्देश्य (कर्ता) है और "रात को खूब सोता है" उसकी मुख्य क्रिया (विधेय) है।
  • इसमें कोई उपवाक्य नहीं है, इसलिए यह सरल वाक्य है।

अन्य विकल्प -

  • (जहाँ अभी रेगिस्तान है, वहाँ किसी समय जंगल था): यह मिश्रित वाक्य है
  • क्योंकि इसमें 'जहाँ...वहाँ' जैसे व्याधिकरण योजक का प्रयोग हुआ है, जहाँ एक उपवाक्य दूसरे पर आश्रित है।
  • (मेरा भाई यहाँ आएगा या मैं ही उसके पास जाऊँगा): यह संयुक्त वाक्य है क्योंकि इसमें 'या' योजक का प्रयोग करके दो स्वतंत्र वाक्यों को जोड़ा गया है।
  • (जो जितना मांगता, उसको उतना दिया जाता): यह भी मिश्रित वाक्य है, क्योंकि इसमें 'जो...उतना' के माध्यम से आश्रित उपवाक्य जुड़ा हुआ है।

Important Pointsरचना के आधार पर वाक्य भेद -

  • रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं।
  • सरल वाक्य
  • मिश्रित वाक्य
  • संयुक्त वाक्य

Additional Information 

वाक्यपरिभाषाउदाहरण
सरलऐसा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।​ हम खा चुके।
मिश्रऐसे वाक्य जिनमें सरल वाक्य के साथ-साथ कोई दूसरा उपवाक्य भी हो, वे वाक्य मिश्र वाक्य कहलाते हैं। मिश्र वाक्य में प्रधान वाक्य को आश्रित उपवाक्य से जोड़ने के लिए जो आपस में कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, अगर/यदि, तो, यद्यपि, तथापि आदि का प्रयोग किया जाता है।​ मैं खाना खा चुका, तब वह आया।
संयुक्त​ऐसा वाक्य जिसमे दो या दो से अधिक उपवाक्य हो एवं सभी उपवाक्य प्रधान हों, ऐसे वाक्य को सयुंक्त वाक्य कहते हैं।  ​सयुंक्त वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्यों को और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, तो, नहीं तो, किन्तु, परन्तु, लेकिन, पर आदि का प्रयोग करके जोड़ा जाता है।मैंने खाना खाया और मेरी भूख मिट गयी।
61

व्याकरण की दृष्टि से गलत कथन है -

  1. ((a))

    संज्ञा की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं।

  2. ((b))

    संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

  3. ((c))

    क्रिया के प्रमुख रूप से दो भेद माने गये हैं : 1. सकर्मक और 2. अकर्मक

  4. ((d))

    सर्वनाम और क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

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Answer: ((d))

सर्वनाम और क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

व्याकरण की दृष्टि से दिए गए कथनों में से गलत कथन का सही उत्तर है- सर्वनाम और क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

Key Points

  • उपर्युक्त कथन गलत है क्योंकि क्रिया-विशेषण केवल क्रिया की विशेषता बताते हैं, सर्वनाम की नहीं।
  • जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता (काल, स्थान, रीति, परिमाण) का पता चलता है, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं।
  • क्रिया-विशेषण का उदाहरण: वह धीरे-धीरे चलता है। (यहाँ 'धीरे-धीरे' शब्द 'चलना' क्रिया की विशेषता बता रहा ���ै।)

Important Points 

 प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद-

  1. विकारी शब्द (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)
  2. अविकारी शब्द (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक)

Additional Information

श्रेणीपरिभाषामुख्य कार्यउदाहरण
विशेषणसंज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द।संज्ञा/सर्वनाम के गुण, दोष, संख्या या परिमाण बताना।काला घोड़ा, पाँच आम, थोड़ा दूध।
सर्वनामसंज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द।संज्ञा की पुनरावृत्ति को रोकना और वाक्य को सरल बनाना।मैं, तुम, वह, हम, आप।
क्रियाजिस शब्द से किसी कार्य के होने या करने का बोध हो।वाक्य में हो रही हलचल या स्थिति को स्पष्ट करना।पढ़ना, दौड़ना, खाना, सोना।
62

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है :

  1. ((a))

    मेरी बात ध्यान के साथ सुनो।

  2. ((b))

    साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है।

  3. ((c))

    एक लोटा पानी से भरा लाओ।

  4. ((d))

    वह सारी रातभर जागता रहा।

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Answer: ((b))

साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है।

दिए गए विकल्पों में 'शुद्ध वाक्य' का सही उत्तर है- साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है।

Key Points

  • 'साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है' वाक्य पूर्णतः शुद्ध है क्योंकि इसमें व्याकरणिक दृष्टि से पदक्रम, लिंग, वचन और कारक का सही प्रयोग किया गया है।
  • वाक्य में शुद्धता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि शब्दों का प्रयोग उनके उचित अर्थ और सही स्थान पर किया जाए।
  • अन्य उदाहरण: राम स्कूल जाता है।, आकाश में पक्षी उड़ रहे हैं।

अन्य विकल्प -

अशुद्ध वाक्यशुद्ध रूप/विग्रहअशुद्धि का कारण
मेरी बात ध्यान के साथ सुनो।मेरी बात ध्यान से सुनो।कारक संबंधी अशुद्धि
एक लोटा पानी से भरा लाओ।पानी से भरा एक लोटा लाओ।पदक्रम संबंधी अशुद्धि
वह सारी रातभर जागता रहा।वह रातभर जागता रहा। या वह सारी रात जागता रहा।पुनरुक्ति दोष (दो समान अर्थी शब्दों का प्रयोग)

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि शोधन के मुख्य प्रकार-

  1. संज्ञा संबंधी अशुद्धि
  2. लिंग संबंधी अशुद्धि
  3. वचन संबंधी अशुद्धि
  4. कारक संबंधी अशुद्धि
  5. पुनरुक्ति संबंधी अशुद्धि (अनावश्यक शब्द प्रयोग)
  6. पदक्रम संबंधी अशुद्धि

Additional Information

अशुद्धि का प्रकारपरिभाषाउदाहरण
कारक संबंधी​ जब वाक्य में विभक्ति चिह्नों (ने, को, से, में, पर आदि) का गलत प्रयोग होता है।अशुद्ध: पेड़ पर पत्ता गिर गया। शुद्ध: पेड़ से पत्ता गिर गया (अपादान कारक)।
पदक्रम संबंधीजब वाक्य में प्रयुक्त शब्दों को उनके निश्चित स्थान पर न रखकर कहीं और रख दिया जाता है।अशुद्ध: खरगोश को काटकर गाजर खिलाओ। शुद्ध: खरगोश को गाजर काटकर खिलाओ।
पुनरुक्ति संबंधीजब एक ही भाव को प्रकट करने वाले दो शब्दों का प्रयोग एक साथ किया जाता है।अशुद्ध: कृपया आज का अवकाश देने की कृपा करें। शुद्ध: आज का अवकाश देने की कृपा करें।
63

कौन सा वाक्य अशुद्ध है?

  1. ((a))

    दाल में कुछ गिरा है।

  2. ((b))

    वह बुरे आदमी नहीं है।

  3. ((c))

    मैंने स्वयं को कितनी बार समझाया।

  4. ((d))

    मुझे उसका काम अच्छा लगता है।

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Answer: ((b))

वह बुरे आदमी नहीं है।

दिए गए विकल्पों में अशुद्ध वाक्य का सही उत्तर है- वह बुरे आदमी नहीं है।

Key Points

  • 'वह बुरे आदमी नहीं है' वाक्य विशेषण और वचन संबंधी अशुद्धि के कारण गलत है।
  • वाक्य शुद्धि के नियम के अनुसार, यदि कर्ता एकवचन है, तो विशेषण और क्रिया भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए।
  • यहाँ 'वह' एकवचन सर्वनाम है, इसलिए इसके साथ 'बुरा' (एकवचन विशेषण) और 'है' का प्रयोग होना चाहिए।
  • इसका शुद्ध रूप होगा: "वह बुरा आदमी नहीं है।" या यदि सम्मानपूर्वक कहना हो तो: "वे बुरे आदमी नहीं हैं।"
  • अन्य उदाहरण:
  • अशुद्ध: वह अच्छे लड़का है। (शुद्ध: वह अच्छा लड़का है।)
  • अशुद्ध: सीता विद्वान है। (शुद्ध: सीता विदुषी है - लिंग संबंधी अशुद्धि)

अन्य विकल्प -

शब्द/वाक्यविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
दाल में कुछ गिरा है।यहाँ 'कुछ' अनिश्चयवाचक सर्वनाम का प्रयोग बिल्कुल सही है।शुद्ध वाक्य
मैंने स्वयं को कितनी बार समझाया।यहाँ 'स्व��ं' निजवाचक सर्वनाम का सटीक प्रयोग हुआ है।शुद्ध वाक्य
मुझे उसका काम अच्छा लगता है।वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया का अन्वय व्याकरणिक रूप से सही है।शुद्ध वाक्य

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि के मुख्य भेद-

  1. संज्ञा संबंधी अशुद्धि
  2. सर्वनाम संबंधी अशुद्धि
  3. विशेषण संबंधी अशुद्धि
  4. क्रिया संबंधी अशुद्धि
  5. कारक संबंधी अशुद्धि
  6. पुनरुक्ति संबंधी अशुद्धि

Additional Informationविशेषण और वचन संबंधी अशुद्धि -

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
वह बुद्धिमान स्त्री है।वह बुद्धिमती स्त्री है।
उसे भारी प्यास लगी है।उसे बहुत प्यास लगी है।
वहाँ अनेकों लोग थे।वहाँ अनेक लोग थे।
मेरे प्राण निकल गया।मेरे प्राण निकल गए।
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व्याकरण की दृष्टि से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. ((a))

    सार्थक शब्द समूह को वाक्य कहते हैं।

  2. ((b))

    वाक्य के दो प्रमुख घटक माने गये हैं : 1. उद्देश्य और 2. विधेय

  3. ((c))

    किसी भी वाक्य में कर्ता और कर्म का होना आवश्यक होता है।

  4. ((d))

    किसी वाक्य में उद्देश्य के विषय में जो कुछ बताया जाता है, उसे विधेय कहते हैं।

Show Answer
Answer: ((c))

किसी भी वाक्य में कर्ता और कर्म का होना आवश्यक होता है।

व्याकरण की दृष्टि से दिए गए कथनों में से अशुद्ध कथन का सही उत्तर है- किसी भी वाक्य में कर्ता और कर्म का होना आवश्यक होता है।

Key Points

  • उपरोक्त कथन गलत है क्योंकि व्याकरण के अनुसार, एक पूर्ण वाक्य के लिए कर्ता और क्रिया का होना तो प्रायः आवश्यक होता है, लेकिन कर्म का होना अनिवार्य नहीं है।
  • जिन वाक्यों में अकर्मक क्रिया होती है, उनमें कर्म नहीं होता, फिर भी वे व्याकरणिक दृष्टि से पूर्ण वाक्य कहलाते हैं।
  • उदाहरण:
  • राम सोता है। (यहाँ 'राम' कर्ता है और 'सोता है' क्रिया है, इसमें कर्म नहीं है फिर भी यह पूर्ण वाक्य है।)
  • पक्षी उड़ रहे हैं। (यहाँ भी कोई कर्म नहीं है।)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
सार्थक शब्द समूहशब्दों का वह व्यवस्थित समूह जिसका पूर्ण अर्थ निकलता हो, वाक्य कहलाता है।वाक्य की परिभाषा
उद्देश्य और विधेयवाक्य के संरचनात्मक ढांचे के दो मुख्य भाग होते हैं।वाक्य के घटक
विधेयवाक्य में कर्ता (उद्देश्य) के संबंध में जो जानकारी दी जाती है।वाक्य का अंग

Important Points 

 वाक्य के मुख्य भेद-

  1. रचना के आधार पर: सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य, मिश्र वाक्य।
  2. अर्थ के आधार पर: विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक, संकेतवाचक।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
उद्देश्य (Subject)वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं। इसमें मुख्य रूप से कर्ता आता है।मोहन पुस्तक पढ़ता है। = यहाँ 'मोहन' उद्देश्य है।
विधेय (Predicate)उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा या विधान किया जाता है, उसे विधेय कहते हैं। इसमें क्रिया और कर्म शामिल होते हैं।मोहन पुस्तक पढ़ता है। = यहाँ 'पुस्तक पढ़ता है' विधेय है।
65

कौन सा वाक्य शुद्ध है?

  1. ((a))

    यह बात जब मैं छोटा था, उस समय की है।

  2. ((b))

    बकरी को बारीक काटकर घास खिलाओ।

  3. ((c))

    वह पुस्तक जो आलमारी में रखी है, वह बहुत अच्छी है।

  4. ((d))

    मुझे शिक्षाप्रद कहानियों की पुस्तक चाहिए।

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Answer: ((d))

मुझे शिक्षाप्रद कहानियों की पुस्तक चाहिए।

शुद्ध वाक्य का सही उत्तर है- मुझे शिक्षाप्रद कहानियों की पुस्तक चाहिए।

Key Points

  • विकल्प 4 'मुझे शिक्षाप्रद कहानियों की पुस्तक चाहिए' पूर्णतः शुद्ध है क्योंकि इसमें पदक्रम, व्याकरण और अर्थ की स्पष्टता सही है।
  • किसी भी वाक्य को शुद्ध होने के लिए उसमें शब्दों का उचित पदक्रम, सार्थक शब्दों का प्रयोग और पुनरुक्ति दोष का अभाव होना आवश्यक है।
  • अन्य उदाहरण:
  1. राम पुस्तक पढ़ता है।
  2. वह कल दिल्ली जाएगा।

अन्य विकल्प -

विकल्पविग्रह/अशुद्धि का कारणशुद्ध रूप
यह बात जब मैं छोटा था, उस समय की है।इसमें 'जब' और 'उस समय' का साथ प्रयोग पुनरुक्ति दोष है।यह बात मेरे बचपन की है। / यह बात तब की है जब मैं छोटा था।
बकरी को बारीक काटकर घास खिलाओ।इसमें पदक्रम संबंधी अशुद्धि है; अर्थ निकल रहा है कि बकरी को काटना है।घास बारीक काटकर बकरी को खिलाओ।
वह पुस्तक जो आलमारी में रखी है, वह बहुत अच्छी है।सर्वनाम 'वह' का अनावश्यक दोहराव हुआ है।आलमारी में रखी वह पुस्तक बहुत अच्छी है।

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि के मुख्य भेद-

  1. पदक्रम संबंधी अशुद्धि
  2. पुनरुक्ति या अनावश्यक शब्द संबंधी अशुद्धि
  3. अन्विति (लिंग, वचन, कारक) संबंधी अशुद्धि
  4. शब्द-ज्ञान या अर्थ संबंधी अशुद्धि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
पदक्रम संबंधीवाक्य में प्रयुक्त शब्दों का निश्चित स्थान पर न होना।अशुद्ध: यहाँ शुद्ध गाय का दूध मिलता है। शुद्ध: यहाँ गाय का शुद्ध दूध मिलता है।
पुनरुक्ति संबंधीएक ही अर्थ वाले दो शब्दों का एक साथ प्रयोग करना।अशुद्ध: कृपया करके मुझे जाने दें। शुद्ध: कृपया मुझे जाने दें।
66

कौन सा वाक्य शुद्ध नहीं है?

  1. ((a))

    बेफालतू बात मत करो।

  2. ((b))

    देश के सभी लोग एकजुट हैं।

  3. ((c))

    हमें शुद्ध भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

  4. ((d))

    कहानी सुनकर हमें बहुत आनंद आया।

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Answer: ((a))

बेफालतू बात मत करो।

'कौन सा वाक्य शुद्ध नहीं है?' का सही उत्तर है- बेफालतू बात मत करो।

Key Points

  • विकल्प 1 'बेफालतू बात मत करो' अशुद्ध है क्योंकि इसमें 'पुनरुक्ति दोष' है। 'फालतू' शब्द का अर्थ ही 'व्यर्थ' होता है, इसके साथ 'बे' उपसर्ग का प्रयोग अनावश्यक है।
  • व्याकरण के नियमानुसार, जब किसी वाक्य में एक ही अर्थ को प्रकट करने वाले दो शब्दों या अनावश्यक उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है, तो वह वाक्य अशुद्ध हो जाता है।
  • इसका शुद्ध रूप होगा: "फालतू बात मत करो" या "बेकार की बात मत करो"
  • अन्य उदाहरण: 'सप्रेम सहित' के स्थान पर 'सप्रेम' या 'प्रेम सहित' का प्रयोग शुद्ध होता है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
देश के सभी लोग एकजुट हैं।यह वाक्य व्याकरणिक दृष्टि से पूर्णतः सही है और एकता का भाव प्रकट करता है।शुद्ध वाक्य
हमें शुद्ध भाषा का प्रयोग करना चाहिए।इसमें संज्ञा और क्रिया का उचित तालमेल है।शुद्ध वाक्य
कहानी सुनकर हमें बहुत आनंद आया।वाक्य में पदक्रम और अर्थगत स्पष्टता सही है।शुद्ध वाक्य

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि के प्रमुख भेद-

  1. अनावश्यक शब्द-प्रयोग संबंधी अशुद्धि (जैसे: बेफालतू)।
  2. शब्द-ज्ञान संबंधी अशुद्धि (अनुपयुक्त शब्द का चयन)।
  3. लिंग, वचन और कारक संबंधी अशुद्धियाँ।
  4. पदक्रम संबंधी अशुद्धि (शब्दों का गलत स्थान पर होना)।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
शब्दों की पुनरुक्तिजब वाक्य में समानार्थी शब्दों का एक साथ प्रयोग किया जाता है जो कि अर्थ की दृष्टि से अनावश्यक होते हैं।अशुद्ध: वह वापस लौट आया। शुद्ध: वह लौट आया। अशुद्ध: वह सायंकाल के समय आया। शुद्ध: वह सायंकाल आया। अशुद्ध: केवल मात्र दो रुपये चाहिए। शुद्ध: मात्र दो रुपये चाहिए।
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निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है :

  1. ((a))

    तेरी बात सुनते-सुनते कान पक गए।

  2. ((b))

    वे सब कालचक्र के पहिए के नीचे पिस गए।

  3. ((c))

    हमारे देश में अनेक रमणीक स्थल हैं।

  4. ((d))

    यही वे कारण हैं, जिनके कारण वह परेशान हैं।

Show Answer
Answer: ((c))

हमारे देश में अनेक रमणीक स्थल हैं।

दिए गए विकल्पों में शुद्ध वाक्य का सही उत्तर है- हमारे देश में अनेक रमणीक स्थल हैं।

Key Points

  • यहाँ विकल्प 3 'हमारे देश में अनेक रमणीक स्थल हैं' पूर्णतः शुद्ध है क्योंकि इसमें व्याकरणिक दृष्टि से पदक्रम, लिंग, वचन और शब्दों का चयन सटीक है।
  • किसी भी वाक्य को शुद्ध होने के लिए उसमें पुनरुक्ति दोष नहीं होना चाहिए और उपयुक्त शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • शुद्ध वाक्य के अन्य उदाहरण:
  • वह बहुत मधुर गाता है।
  • साहित्य और जीवन का अभिन्न संबंध है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थअशुद्धि का कारण
तेरी बात सुनते-सुनते कान पक गए।शुद्ध रूप: तुम्हारी बात सुनते-सुनते कान पक गए।सर्वनाम संबंधी अशुद्धि
वे सब कालचक्र के पहिए के नीचे पिस गए।शुद्ध रूप: वे सब कालचक्र में पिस गए। ('चक्र' का अर्थ ही पहिया है)पुनरुक्ति दोष (अनावश्यक शब्द)
यही वे कारण हैं, जिनके कारण वह परेशान है।शुद्ध रूप: यही वे कारण हैं, जिनसे वह परेशान है।शब्द की अनावश्यक आवृत्ति

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि के मुख्य भेद-

  1. संज्ञा संबंधी अशुद्धि: अनावश्यक संज्ञा शब्���ों का प्रयोग।
  2. सर्वनाम संबंधी अशुद्धि: गलत सर्वनाम का चुनाव (जैसे- 'मेरे को' के स्थान पर 'मुझे')।
  3. विशेषण संबंधी अशुद्धि: अनुपयुक्त विशेषण का प्रयोग।
  4. क्रिया संबंधी अशुद्धि: कर्ता के अनुसार क्रिया का न होना।
  5. पदक्रम संबंधी अशुद्धि: वाक्य में शब्दों का सही स्थान पर न होना।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
पुनरुक्ति दोषजब वाक्य में एक ही अर्थ को प्रकट करने वाले दो शब्दों का प्रयोग एक साथ किया जाता है।अशुद्ध: वह प्रातःकाल के समय घूमता है। शुद्ध: वह प्रातःकाल घूमता है।
पदक्रम दोषवाक्य में व्याकरण के अनुसार शब्दों का निश्चित क्रम न होने पर पदक्रम दोष होता है।अशुद्ध: बच्चे को काटकर फल खिलाओ। शुद्ध: फल काटकर बच्चे को खिलाओ।
68

‘आदि-आदी’ शब्द-युग्म का सही अर्थ है :

  1. ((a))

    आदिवासी-आरंभ

  2. ((b))

    आरंभ-अभ्यस्त

  3. ((c))

    आरंभ-आदिवासी

  4. ((d))

    अभ्यस्त-आरंभ

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Answer: ((b))

आरंभ-अभ्यस्त

‘आदि-आदी’ शब्द-युग्म का सही उदाहरण/उत्तर है- आरंभ-अभ्यस्त

Key Points

  • दिए गए शब्द-युग्म में 'आदि' का अर्थ 'आरंभ' या 'शुरुआत' होता है, जबकि 'आदी' का अर्थ किसी चीज़ का 'अभ्यस्त' होना या 'लत' होना होता है।
  • हिंदी व्याकरण में ऐसे शब्दों को श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहा जाता है, जो सुनने में लगभग एक समान लगते हैं परंतु उनके अर्थ भिन्न होते हैं।
  • इस नियम के अन्य उदाहरण:
  • अनल (आग) - अनिल (हवा)
  • अपेक्षा (आशा/तुलना में) - उपेक्षा (तिरस्कार)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
आदिवासी-आरंभआदिवासी का अर्थ मूल निवासी है और आरंभ का अर्थ शुरुआत है।असंगत युग्म
आरंभ-आदिवासीक्रम के अनुसार आदि का अर्थ आरंभ तो ठीक है, पर आदी का अर्थ आदिवासी नहीं होता।असंगत युग्म
अभ्यस्त-आरंभयहाँ शब्दों का अर्थ विपरीत क्रम में दिया गया है।क्रम दोष

Important Points 

 श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द के मुख्य भेद-

  1. मात्रा भेद के आधार पर (जैसे- अवधि/अवधी)
  2. वर्ण भेद के आधार पर (जैसे- जलज/जलद)
  3. उच्चारण के सूक्ष्म अंतर के आधार पर (जैसे- अंश/अंस)

Additional Information

शब्द युग्मअर्थ 1अर्थ 2
अवलंब / अविलंबसहाराशीघ्र/बिना देरी के
कुल / कूलवंश / सबकिनारा
तरणि / तरणीसूर्यनाव
प्रसाद / प्रासादकृपा / भोगमहल
शाल / सालएक वृक्ष / ओढ़ने वाली चादरवर्ष
परिणाम / परिमाणनतीजा / फलमात्रा / नाप-तोल
लक्ष / लक्ष्यलाख (संख्या)उद्देश्य / निशाना
वदन / वदनशरीर (तन)मुख (चेहरा)
सर / शरतालाबबाण (तीर)
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किस विकल्प में शुद्ध वाक्य है?

  1. ((a))

    वह पुत्रवत् प्रजा का पालन करता था।

  2. ((b))

    हरिश्चंद्र के समीप कोई सत्यवादी नहीं हुआ।

  3. ((c))

    आपकी सौभाग्यवती कन्या का विवाह कब होगा।

  4. ((d))

    अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा गया।

Show Answer
Answer: ((d))

अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा गया।

'शुद्ध वाक्य' का सही उत्तर है- वह पुत्रवत् प्रजा का पालन करता था।

Key Points

  • विकल्प 1 'वह पुत्रवत् प्रजा का पालन करता था।' पूर्णतः व्याकरण सम्मत और शुद्ध वाक्य है। इसमें 'पुत्रवत्' (पुत्र के समान) शब्द का प्रयोग उचित है।
  • वाक्य शुद्धि का अर्थ है वाक्य को व्याकरण के नियमों के अनुसार लिखना। शुद्ध वाक्य में पदों का क्रम, लिंग, वचन, कारक और शब्द चयन सही होना चाहिए।
  • अन्य उदाहरण:
  1. राम ने रावण का वध किया। (शुद्ध)
  2. वह रोज व्यायाम करता है। (शुद्ध)

अन्य विकल्प -

गलत वाक्यविग्रह/सुधारअशुद्धि का प्रकार
हरिश्चंद्र के समीप कोई सत्यवादी नहीं हुआ।यहाँ 'समीप' के स्थान पर 'समान' होना चाहिए।अनुपयुक्त शब्द प्रयोग
आपकी सौभाग्यवती कन्या का विवाह कब होगा।विवाह से पूर्व कन्या के लिए 'सौभाग्यकांक्षिणी' या 'आयुष्मती' शब्द प्रयुक्त होता है।शब्द-अर्थ संबंधी अशुद्धि
अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा गया।शुद्ध रूप: 'अश्वमेध यज्ञ' का घोड़ा पकड़ा गया।अपूर्ण वाक्य/स्पष्टता की कमी

Important Points 

 वाक्य अशुद्धि के मुख्य प्रकार-

  1. संज्ञा संबंधी अशुद्धि
  2. सर्वनाम संबंधी अशुद्धि
  3. विशेषण और क्रिया संबंधी अशुद्धि
  4. पदक्रम संबंधी अशुद्धि
  5. पुनरावृत्ति या शब्द-आधिक्य संबंधी अशुद्धि

Additional Informationशब्द-अर्थ संबंधी अशुद्धि-

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
वह गाँठ बाँधकर बैठ गया।वह जिद्द पकड़कर बैठ गया।
आकाश में तारे चमक रहे थे।आकाश में तारे झिलमिला रहे थे।
इस समय आपकी अवस्था चालीस वर्ष है।इस समय आपकी आयु चालीस वर्ष है।
प्रधानमंत्री ने भाषण दिया।प्रधानमंत्री ने उद्बोधन दिया।
डाकुओं के दल ने हमला किया।डाकुओं के गिरोह ने हमला किया।
70

निम्नलिखित में गलत कथन है :

  1. ((a))

    वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक या विस्मयसूचक चिह्न आने पर पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता है।

  2. ((b))

    जिन वाक्यों में प्रश्नवाचक शब्दों का अर्थ संबंधवाचक शब्दों जैसा होता है, उनके अंत में प्रश्नवाचक चिह्न लगाया जाता है।

  3. ((c))

    विषय विभाजन में क्रमसूचक अंकों या अक्षरों के साथ कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।

  4. ((d))

    अल्पविराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम समय तक ठहरने के लिए अर्द्धविराम का प्रयोग किया जाता है।

Show Answer
Answer: ((b))

जिन वाक्यों में प्रश्नवाचक शब्दों का अर्थ संबंधवाचक शब्दों जैसा होता है, उनके अंत में प्रश्नवाचक चिह्न लगाया जाता है।

विराम चिह्नों के संदर्भ में दिए गए कथनों में से का सही उत्तर है- जिन वाक्यों में प्रश्नवाचक शब्दों का अर्थ संबंधवाचक शब्दों जैसा होता है, उनके अंत में प्रश्नवाचक चिह्न लगाया जाता है।

Key Points

  • जब प्रश्नवाचक शब्दों (जैसे - क्या, कब, कहाँ) का प्रयोग संबंधवाचक शब्दों के रूप में किया जाता है, तो वाक्य के अंत में पूर्ण विराम (.) लगाया जाता है, न कि प्रश्नवाचक चिह्न (?)
  • व्याकरणिक नियम के अनुसार, प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग केवल वहीं होता है जहाँ प्रत्यक्ष रूप से कोई जिज्ञासा या प्रश्न व्यक्त किया गया हो।
  • उदाहरण:
  • उसने कहा कि वह क्या चाहता है। (यहाँ प्रश्नवाचक चिह्न नहीं लगेगा क्योंकि यह एक कथन है)।
  • तुम जानते हो कि वह कहाँ रहता है। (सही प्रयोग - पूर्ण विराम के साथ)।

अन्य विकल्प -

विकल्प कथनव्याख्यास्थिति
विकल्प 1वाक्य के अंत में ? या ! आने पर पूर्ण विराम का प्रयोग वर्जित है।सही कथन
विकल्प 3क्रमसूचक अंकों (1, 2, 3) या अक्षरों (अ, ���) के साथ कोष्ठक ( ) का प्रयोग होता है।सही कथन
विकल्प 4अल्पविराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव के लिए अर्द्धविराम (;) लगता है।सही कथन

Important Points 

 प्रमुख विराम चिह्नों के भेद-

  1. पूर्ण विराम (।)
  2. अल्प विराम (,)
  3. अर्द्ध विराम (;)
  4. प्रश्नवाचक चिह्न (?)
  5. विस्मयवाचक चिह्न (!)
  6. योजक चिह्न (-)

Additional Information

विराम चिह्ननामप्रयोग का नियमउदाहरण
पूर्ण विरामवाक्य के पूरी तरह समाप्त होने पर अंत में लगाया जाता है।राम स्कूल जाता है**।**
,अल्प विरामवाक्य के बीच में बहुत कम समय के लिए रुकने या शब्दों को अलग करने हेतु।राम , श्याम और मोहन खेल रहे हैं।
;अर्द्ध विरामपूर्ण विराम से कम और अल्प विराम से अधिक रुकने के लिए।कल रविवार है ; हम सब पिकनिक चलेंगे।
?प्रश्नवाचक चिह्नप्रश्न पूछे जाने वाले वाक्यों के अंत में।तुम्हारा नाम क्या है ?
!विस्मयवाचक चिह्नहर्ष, शोक, घृणा या आश्चर्य जैसे भावों को प्रकट करने के लिए।वाह ! कितना सुंदर दृश्य है।
-योजक चिह्नदो शब्दों को जोड़ने या तुलना करने के लिए (द्वंद्व समास में प्रमुखता से)।माता - पिता, सुख - दुःख।
71

‘माँ ने बच्चों के झगड़े को ...... पड़ोसियों में सिर फुटौवल करवा दी।’ उक्त वाक्य के रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त मुहावरा होगा –

  1. ((a))

    पानी में आग लगाकर

  2. ((b))

    मीन-मेख निकालकर

  3. ((c))

    घाव पर नमक छिड़ककर

  4. ((d))

    तिल का ताड़ बनाकर

Show Answer
Answer: ((d))

तिल का ताड़ बनाकर

‘माँ ने बच्चों के झगड़े को ...... पड़ोसियों में सिर फुटौवल करवा दी।’ वाक्य के रिक्त स्थान के लिए मुहावरे का सही उत्तर है- तिल का ताड़ ब��ाकर

Key Points

  • उपर्युक्त वाक्य के अनुसार, माँ ने बच्चों के बीच हुए छोटे से झगड़े को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया,
  • जिससे पड़ोसियों में बड़ी लड़ाई हो गई। अतः यहाँ 'तिल का ताड़ बनाना' सबसे उपयुक्त मुहावरा है।
  • तिल का ताड़ बनाना का अर्थ है- छोटी सी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना।
  • जब कोई वाक्यांश अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर किसी विलक्षण या विशेष अर्थ में रूढ़ हो जाता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।
  • उदाहरण:
  1. अखबार वालों ने इस मामूली घटना का तिल का ताड़ बना दिया।
  2. उसकी आदत है कि वह हमेशा हर छोटी बात का तिल का ताड़ बना देता है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
पानी में आग लगानाजहाँ शांति हो वहाँ अशांति या झगड़ा पैदा कर देना।मुहावरा
मीन-मेख निकालनाकिसी के कार्य में व्यर्थ के दोष ढूँढना या नुक्ताचीनी करना।मुहावरा
घाव पर नमक छिड़कनादुखी व्यक्ति को और अधिक दुखी करना या परेशान करना।मुहावरा

Important Points 

 मुहावरों के मुख्य लक्षण-

  1. मुहावरा पूर्ण वाक्य न होकर एक 'वाक्यांश' होता है।
  2. मुहावरा अपना सामान्य अर्थ छोड़कर विशेष अर्थ प्रकट करता है।
  3. मुहावरे का प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि वाक्य के अंतर्गत होता है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग (उदाहरण)
अंगारे उगलनाक्रोध में कठोर शब्द कहनापरीक्षा में फेल होने पर पिताजी अंगारे उगलने लगे।
कलम तोड़नाबहुत सुंदर लिखनाकवि ने अपनी कविता में प्रेम का वर्णन कर कलम तोड़ दी।
गागर में सागर भरनाथोड़े शब्दों में बहुत कुछ कहनाबिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
जूतियाँ चाटनाचापलूसी करनाकुछ लोग पद पाने के लिए अफसरों की जूतियाँ चाटते हैं।
दाँतों तले उँगली दबानादंग रह जाना या आश्चर्यचकित होनानन्हीं बच्ची का अद्भुत नृत्य देखकर सभी ने दाँतों तले उँगली दबा ली।
72

‘सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना’ मुहावरे का उपयुक्त भावार्थ है –

  1. ((a))

    आगे होकर परेशानी मोल लेना।

  2. ((b))

    अचानक बड़ी विपदा का आ जाना।

  3. ((c))

    कार्यारंभ होते ही विघ्न पड़ना।

  4. ((d))

    उत्सव के माहौल का ग़म में बदल जाना।

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Answer: ((c))

कार्यारंभ होते ही विघ्न पड़ना।

‘सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना’ मुहावरे का सही भावार्थ है- कार्यारंभ होते ही विघ्न पड़ना

Key Points

  • ‘सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना’ एक प्रसिद्ध लोकोक्ति/मुहावरा है जिसका अर्थ है कि जैसे ही कोई नया कार्य शुरू किया जाए, वैसे ही उसमें बाधा या मुसीबत आ जाना।
  • हिंदी व्याकरण में मुहावरा ऐसे वाक्यांश को कहते हैं जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करता है।
  • उदाहरण:
  1. मैंने आज ही नई दुकान खोली थी कि चोरी हो गई, इसे कहते हैं- 'सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना'।
  2. मोहन ने जैसे ही यात्रा शुरू की, उसकी गाड़ी खराब हो गई; यह तो वही बात हुई कि 'सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना'।

अन्य विकल्प -

विकल्पभावार्थ/संबंधित मुहावरा
आगे होकर परेशानी मोल लेनाइसका अर्थ स्वयं मुसीबत को बुलावा देना है। (मुहावरा: आ बैल मुझे मार)
अचानक बड़ी विपदा का आ जानाइसका अर्थ है कि अचानक कोई बड़ी मुसीबत टूट पड़ना। (मुहावरा: आसमान टूटना)
उत्सव के माहौल का ग़म में बदल जानाइसका अर्थ है कि आनंद या खुशी में बाधा पड़ना। (मुहावरा: रंग में भंग पड़ना)

Important Points 

 मुहावरे की विशेषताएँ-

  1. मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता, बल्कि एक वाक्यांश होता है।
  2. मुहावरे का प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि वाक्यों के अंतर्गत किया जाता है।
  3. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार बदल जाता है और यह हमेशा लाक्षणिक अर्थ देता है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
अरण्य रोदनव्यर्थ का विलाप / जिसका कोई प्रभाव न पड़ेस्वार्थी व्यक्ति के सामने दुखड़ा रोना अरण्य रोदन के समान है।
खरी-खरी सुनानासाफ-साफ और कड़वी बात कहनाउसने मैनेजर की गलती पर उसे सबके सामने खरी-खरी सुना दी।
चाँद पर थूकनाकिसी निर्दोष या महान व्यक्ति पर लांछन लगानाईमानदार अफसर को भ्रष्ट कहना चाँद पर थूकने जैसा है।
तलवे चाटनाखुशामद या चापलूसी करनास्वाभिमानी व्यक्ति कभी किसी के तलवे नहीं चाटता।
पानी पीकर कोसनाहर समय किसी का बुरा चाहनावह तो दिन-भर उसे पानी पीकर कोसता रहता है।
73

‘गागर में सागर भरना’ का भावार्थ है :

  1. ((a))

    असंभव कार्य करना।

  2. ((b))

    समुद्र से छोटे बर्तन में पानी लाना।

  3. ((c))

    बहुत कम शब्दों में महत्त्वपूर्ण बात कहना।

  4. ((d))

    छोटे बर्तन में बहुत अधिक पानी भरना।

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Answer: ((c))

बहुत कम शब्दों में महत्त्वपूर्ण बात कहना।

‘गागर में सागर भरना’ मुहावरे का सही भावार्थ है- बहुत कम शब्दों में महत्त्वपूर्ण बात कहना।

Key Points

  • 'गागर में सागर भरना' एक अत्यंत प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ है बहुत ही कम शब्दों में बहुत बड़ी और गहरी बात कह देना।
  • हिंदी व्याकरण में मुहावरा ऐसा वाक्यांश होता है जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करता है।
  • उदाहरण: "कवि बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।" (अर्थात् उन्होंने छोटे से दोहे में बहुत विस्तृत अर्थ समाहित किया है।)

अन्य विकल्प -

विकल्पअर्थटिप्पणी
असंभव कार्य करनाकिसी ऐसे कार्य को करना जो साधारणतः मुमकिन न होभिन्न मुहावरा (जैसे: आकाश-पाताल एक करना)
समुद्र से छोटे बर्तन में पानी लानामुहावरे का शाब्दिक या भौतिक अर्थ।अनुचित अर्थ
छोटे बर्तन में अधिक पानी भरनाबिना किसी लाक्षणिक भाव के सीधा अर्थ।तार्किक रूप से गलत

Important Points 

 मुहावरे और लोकोक्तियों के भेद-

  1. मुहावरा: यह एक वाक्यांश होता है और वाक्य के भीतर प्रयुक्त होता है।
  2. लोकोक्ति: यह एक पूर्ण वाक्य होती है और स्वतंत्र रूप से प्रयोग की जा सकती है।
  3. कहावत: लोकोक्ति का ही दूसरा नाम है जो जनसाधारण के अनुभव पर आधारित होती है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
कलेजा मुँह को आनाअत्यधिक दुखी या व्याकुल होनाअपने इकलौते पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर माँ का कलेजा मुँह को आ गया।
अंगारों पर पैर रखनाजान-बूझकर जोखिम मोल लेनाउस अपराधी से दुश्मनी मोल लेना अंगारों पर पैर रखने के समान है।
दाँत खट्टे करनाबुरी तरह हरा देनाभारतीय सेना ने युद्ध के मैदान में शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।
मुट्ठी गर्म करनारिश्वत (रिश्वत) देनाआजकल सरकारी दफ्तरों में बिना मुट्ठी गर्म किए काम होना मुश्किल है।
हवा से बातें करनाबहुत तेज दौड़ना या गतिमान होनामहाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक मैदान में हवा से बातें करता था।
लोहा माननाश्रेष्ठता या शक्ति को स्वीकार करनापूरी दुनिया ने भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा मान लिया है।
74

‘कमजोर द्वारा शक्ति प्रदर्शन करना / नष्ट होने के करीब पहुँचना’ भावार्थ से संबंधित लोकोक्ति/मुहावरा है -

  1. ((a))

    अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना

  2. ((b))

    अधजल गगरी छलकत जाए

  3. ((c))

    चींटी के पर निकलना

  4. ((d))

    मेरी बिल्ली मुझसे ही म्याऊँ

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Answer: ((c))

चींटी के पर निकलना

‘कमजोर द्वारा शक्ति प्रदर्शन करना / नष्ट होने के करीब पहुँचना’ का सही मुहावरा है- चींटी के पर निकलना

Key Points

  • 'चींटी के पर निकलना' मुहावरे का सही अर्थ है - सामर्थ्य से बाहर की बातें करना या विनाश के लक्षण प्रकट होना।
  • जब कोई व्यक्ति अपनी औकात से बढ़कर व्यवहार करता है, तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
  • मुहावरा एक ऐसा वाक्यांश होता है जो सामान्य अर्थ न देकर एक विशेष अर्थ प्रकट करता है।
  • उदाहरण: 1. कल का छोकरा आज पुलिस को आँखें दिखा रहा है, लगता है इसके चींटी के पर निकल आए हैं।
  • उदाहरण: 2. छोटे से कर्मचारी का बड़े अफसर से बदतमीजी करना चींटी के पर निकलने जैसा है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पअर्थभेद/प्रकार
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननाअपनी प्रशंसा स्वयं करना।मुहावरा
अधजल गगरी छलकत जाएकम ज्ञान रखने वाले व्यक्ति का अधिक दिखावा करना।लोकोक्ति
मेरी बिल्ली मुझसे ही म्याऊँअपने ही आश्रयदाता पर धौंस जमानालोकोक्ति

Important Points 

 मुहावरे और लोकोक्ति के लक्षण-

  1. मुहावरा एक वाक्यांश होता है, जबकि लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है।
  2. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अंत, आदि या मध्य में कहीं भी हो सकता है।
  3. लोकोक्ति प्रायः किसी घटना या अनुभव पर आधारित होती है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
उल्टी गंगा बहानानियम या परंपरा के विरुद्ध कार्य करनाबड़ों को उपदेश देकर तुम उल्टी गंगा बहा रहे हो।
काठ का उल्लूबहुत बड़ा मूर्खउसे कुछ भी समझाना व्यर्थ है, वह तो निरा काठ का उल्लू है।
खिचड़ी पकानागुप्त रूप से कोई योजना बनानातुम दोनों कोने में बैठकर क्या खिचड़ी पका रहे हो?
जूते मारनाबहुत अधिक अपमानित करनासमाज में गलत काम करने वालों को लोग जूते मारते हैं।
तलवे धोकर पीनाअत्यधिक चापलूसी या सेवा करनाकुछ लोग पदोन्नति के लिए अपने अधिकारियों के तलवे धोकर पीते हैं।
75

“अत्यधिक परिश्रम से आरंभ किए व्यापार में बहुत कम लाभ होने पर, हताश उद्यमी ने कहा .... ।” उक्त वाक्य के रिक्त स्थान में प्रयुक्त लोकोक्ति है –

  1. ((a))

    ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर

  2. ((b))

    खोदा पहाड़ निकली चुहिया

  3. ((c))

    बैठे से बेगार भली

  4. ((d))

    अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत

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Answer: ((b))

खोदा पहाड़ निकली चुहिया

दिए गए वाक्य के रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त लोकोक्ति का सही उत्तर है- खोदा पहाड़ निकली चुहिया

Key Points

  • 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' लोकोक्ति का अर्थ है - अत्यधिक परिश्रम करने पर बहुत कम फल प्राप्त होना
  • प्रस्तुत वाक्य में उद्यमी के कठिन परिश्रम और व्यापार में हुए नाममात्र के लाभ की स्थिति को दर्शाया गया है, जो इस लोकोक्ति के मूल भाव (कठिन प्रयत्न और अल्प परिणाम) के पूर्णतः अनुकूल है।
  • लोकोक्ति - जब कोई पूरा वाक्य किसी विशेष प्रसंग में अपना विशिष्ट अर्थ प्रकट करता है, तो उसे लोकोक्ति कहते हैं।
  • उदाहरण: "रमेश ने सिविल सेवा की तैयारी में दस साल लगा दिए, लेकिन अंत में उसे चपरासी की नौकरी मिली; इसे कहते हैं - खोदा पहाड़ निकली चुहिया।"

अन्य विकल्प -

लोकोक्तिविग्रह/अर्थ
ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरजब कठिन कार्य प्रारंभ कर ही दिया है, तो आने वाली बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए।
बैठे से बेगार भलीखाली बैठने की तुलना में बिना लाभ के भी कुछ काम करना बेहतर होता है।
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेतअवसर निकल जाने के बाद पछतावा करना व्यर्थ है।

Important Points 

 लोकोक्तियों के मुख्य आधार-

  1. सामाजिक अनुभव पर आधारित
  2. नैतिक शिक्षा पर आधारित
  3. हास्य और व्यंग्य पर आधारित

Additional Information

लोकोक्तिअर्थवाक्य प्रयोग
आम के आम गुठलियों के दामदोहरा लाभ होना।पुस्तक पढ़कर ज्ञान भी मिला और उसे पुरानी बताकर अच्छे दाम में बेच दिया, इसे कहते हैं— आम के आम गुठलियों के दाम।
उल्टा चोर कोतवाल को डाँटेअपनी गलती होने पर भी दूसरे को दोष देना।तुमने मेरी साइकिल तोड़ी और अब मुझ पर ही चिल्ला रहे हो! यह तो वही बात हुई— उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।
काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़तीछल-कपट का व्यवहार बार-बार नहीं चलता।तुमने एक बार झूठ बोलकर पैसे ठग लिए, पर अब कोई तुम पर विश्वास नहीं करेगा, क्योंकि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।
घर का भेदी लंका ढाएआपसी फूट से भारी नुकसान होना।विभीषण ने रावण के भेद बता दिए थे, तभी तो कहा गया है— घर का भेदी लंका ढाए।
दूर के ढोल सुहावने लगते हैंदूर की वस्तुएँ या बातें अच्छी मालूम होना।शहर की चकाचौंध देख जो लोग वहाँ जाते हैं, उन्हें बाद में पता चलता है कि दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों में दोष निकालना।उसे टाइपिंग तो आती नहीं और कह रहा है कि की-बोर्ड खराब है, इसे कहते हैं— नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
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‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’ लोकोक्ति का उपयुक्त भावार्थ है –

  1. ((a))

    गुणी व्यक्ति ही गुणवान को पहचानता है।  

  2. ((b))

    चालाक का अधिक चालाक से सामना होना।

  3. ((c))

    सज्जन द्वारा कपट व्यवहार करना।

  4. ((d))

    कुसंग से बुरे का अधिक बुरा हो जाना।

Show Answer
Answer: ((d))

कुसंग से बुरे का अधिक बुरा हो जाना।

‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’ लोकोक्ति का सही भावार्थ है- कुसंग से बुरे का अधिक बुरा हो जाना।

Key Points

  • ‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’ का अर्थ है कि एक दोष के साथ दूसरे दोष का भी जुड़ जाना या कुसंगति के कारण बुरा व्यक्ति और भी बुरा हो जाना।
  • वाक्य प्रयोग - रोहन पहले ही बात-बात पर झगड़ता था, अब उसने शराब भी पीना शुरू कर दिया है। इसे कहते हैं— "एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा।"
  • लोकोक्ति (लोक + उक्ति) समाज के भाषाई इतिहास के लंबे अनुभवों को संचित कर निर्मित होती है। यह एक पूर्ण वाक्य होती है जिसका प्रयोग किसी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।
  • अन्य उदाहरण: 1. आम के आम गुठलियों के दाम (दोहरा लाभ होना)। 2. घर का भेदी लंका ढाए (आपसी फूट से सर्वनाश होना)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पलोकोक्ति
गुणी व्यक्ति ही गुणवान को पहचानता है।जौहरी ही जौहर को जानता है।
चालाक का अधिक चालाक से सामना होना।सेर को सवा सेर मिलना।
सज्जन द्वारा कपट व्यवहार करना।मुँह में राम बगल में छुरी (कथनी और करनी में अंतर)।

Important Points 

 लोकोक्ति और मुहावरे के भेद-

  1. मुहावरा एक वाक्यांश होता है, जबकि लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है।
  2. मुहावरे में लिंग, वचन और काल के अनुसार परिवर्तन होता है, लोकोक्ति अपरिवर्तित रहती है।
  3. मुहावरा वाक्य के अंत में आता है या बीच में खप जाता है, लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र रूप से उदाहरण स्वरूप किया जाता है।

Additional Information

लोकोक्तिअर्थवाक्य प्रयोग
अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को देअधिकार मिलने पर स्वार्थी व्यक्ति अपनों को ही लाभ पहुँचाता है।जब मंत्री जी ने सारी नौकरियाँ अपने रिश्तेदारों को दे दीं, तो लोगों ने कहा— अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे।
ऊधो का लेना न माधो का देनाकिसी से कोई मतलब न रखना / तटस्थ रहना।मैं अपना काम करता हूँ और घर जाता हूँ, मेरा तो ऊधो का लेना न माधो का देना वाला हिसाब है।
खिसियानी बिल्ली खंभा नोचेलज्जित या असफल होने पर दूसरों पर क्रोध निकालना।मैच हारने के बाद टीम का कप्तान अंपायर पर चिल्लाने लगा, इसे कहते हैं— खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।
गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादासअवसरवादी व्यक्ति (जिसका कोई निश्चित सिद्धांत न हो)।चुनाव आते ही उसने दल बदल लिया, उसका क्या— गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास।
जंगल में मोर नाचा, किसने देखागुण की कद्र तभी होती है जब उसे सही स्थान या दर्शकों के सामने दिखाया जाए।उसने सुनसान जंगल में अपनी कला का प्रदर्शन किया, पर जंगल में मोर नाचा, किसने देखा।
77

किस मुहावरे का भावार्थ सही नहीं है?

  1. ((a))

    घड़ों पानी पड़ना = बहुत वर्षा होना

  2. ((b))

    सूरज पर थूकना = किसी निर्दोष पर लांछन लगाना

  3. ((c))

    नाक भौं सिकोड़ना = अरुचि और अप्रसन्नता प्रकट करना

  4. ((d))

    थूककर चाटना = कहकर मुकर जाना

Show Answer
Answer: ((a))

घड़ों पानी पड़ना = बहुत वर्षा होना

विकल्पों में से गलत भावार्थ वाले मुहावरे का सही उदाहरण/उत्तर है- घड़ों पानी पड़ना = बहुत वर्षा होना

Key Points

  • यहाँ 'घड़ों पानी पड़ना' मुहावरे का अर्थ 'बहुत वर्षा होना' दिया गया है जो कि गलत है। इस मुहावरे का सही अर्थ 'बहुत लज्जित होना' होता है।
  • वाक्य प्रयोग - अपने ही मित्र के साथ धोखा करने की बात जब सबके सामने आई, तो उस पर 'घड़ों पानी पड़ गया'।
  • मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ 'अभ्यास' होता है। जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में रूढ़ हो जाता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।
  • मुहावरे के कुछ अन्य उदाहरण:
  • अंगारे उगलना - क्रोध में कटु वचन कहना।
  • ईंट से ईंट बजाना - पूरी तरह नष्ट कर देना।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
सूरज पर थूकनाकिसी महान व्यक्ति या निर्दोष पर लांछन लगाना या दोष मढ़ना।मुहावरा
नाक भौं सिकोड़नाकिसी वस्तु या बात के प्रति घृणा, अरुचि या अप्रसन्नता प्रकट करना।मुहावरा
थूककर चाटनाअपनी कही हुई बात या दिए गए वचन से मुकर जानामुहावरा

Important Points 

 मुहावरों की मुख्य विशेषताएँ-

  1. मुहावरे का प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं बल्कि वाक्य के प्रसंग में होता है।
  2. मुहावरे का रूप लिंग, वचन और कारक के अनुसार बदल जाता है।
  3. मुहावरे का सीधा अर्थ न लेकर उसका लाक्षणिक या विशिष्ट अर्थ लिया जाता है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
आँखें बिछानाअत्यंत प्रेम या श्रद्धा से स्वागत करनाभक्त अपने आराध्य के आगमन की प्रतीक्षा में आँखें बिछाए बैठे हैं।
गड़े मुर्दे उखाड़नादबी हुई पुरानी बातों को फिर से उठानाअब झगड़ा खत्म करो, गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई लाभ नहीं होने वाला।
छाती पर मूँग दलनापास रहकर कष्ट देनावह अपनी बुरी आदतों से दिन-रात अपनी माँ की छाती पर मूँग दलता है।
तिल का ताड़ बनानाछोटी सी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहनाउनके बीच कोई बड़ा झगड़ा नहीं था, पड़ोसियों ने तिल का ताड़ बना दिया।
ठंडी आह भरनाउदास या निराश होनाव्यापार में भारी नुकसान होने के बाद वह बस ठंडी आहें भरता रहता है।
78

'आग बबूला होना' का भावार्थ है:

  1. ((a))

    बबूल के पेड़ में आग लगना

  2. ((b))

    लू के बगूले उठना

  3. ((c))

    अत्यंत क्रोध करना

  4. ((d))

    भयंकर आग लगना

Show Answer
Answer: ((c))

अत्यंत क्रोध करना

'आग बबूला होना' मुहावरे का सही भावार्थ है- अत्यंत क्रोध करना

Key Points

  • 'आग बबूला होना' एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जिसका अर्थ अत्यंत क्रोधित होना या बहुत अधिक गुस्सा करना होता है।
  • जब कोई व्यक्ति किसी बात पर अपना नियंत्रण खो देता है और बहुत गुस्सा करता है, तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
  • व्याकरण के अनुसार, मुहावरा ऐसा वाक्यांश होता है जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष या लाक्षणिक अर्थ को प्रकट करता है।
  • उदाहरण: "नौकर से शीशा टूट जाने पर मालिक उस पर आग बबूला हो गया।"
  • उदाहरण: "झूठ पकड़े जाने पर सोहन अपने मित्र पर आग बबूला होने लगा।"

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
बबूल के पेड़ में आग लगनायह मुहावरे का शाब्दिक (Literal) अर्थ है, जो यहाँ लागू नहीं होता।अनुचित विकल्प
लू के बगूले उठनायह गर्मी के मौसम की एक प्राकृतिक क्रिया को दर्शाता है।अनुचित विकल्प
भयंकर आग लगनायह किसी स्थान पर अग्नि लगने की घटना का वर्णन करता है।अनुचित विकल्प

Important Points 

 मुहावरों की मुख्य विशेषताएँ-

  1. मुहावरा पूर्ण वाक्य न होकर एक वाक्यांश होता है।
  2. मुहावरा अपने मूल अर्थ को छोड़कर विशेष अर्थ देता है।
  3. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के प्रसंग में ही होता है, स्वतंत्र रूप से नहीं।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
आस्तीन का साँपविश्वासघाती मित्र (साथ रहने वाला शत्रु)जिसे मैं अपना परम मित्र समझता था, वह तो आस्तीन का साँप निकला।
कोल्हू का बैलरात-दिन कठिन परिश्रम करने वालाबेचारा सोहन परिवार का पेट पालने के लिए कोल्हू का बैल बना रहता है।
गूलर का फूल होनादुर्लभ होना या दिखाई न देनाआज के दौर में सच्चा और निस्वार्थ मित्र तो गूलर का फूल हो गया है।
जहर का घूँट पीनाकड़वी बात को चुपचाप सह लेनाअपमानजनक बातें सुनकर भी उसने शांति बनाए रखी और जहर का घूँट पी लिया।
दाल न गलनायुक्ति या चाल सफल न होनाचतुर अधिकारियों के सामने भ्रष्ट बाबू की एक भी दाल नहीं गली।
पत्थर की लकीरपक्की या अमिट बातमेरे पिताजी ने जो कह दिया, वह हमारे परिवार के लिए पत्थर की लकीर है।
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'अपने पैरों पर खड़े होना' का भावार्थ है:

  1. ((a))

    सावधानीपूर्वक चलना

  2. ((b))

    आत्मनिर्भर होना

  3. ((c))

    छोटे बच्चों का चलना सीखना

  4. ((d))

    बिना किसी छड़ी आदि के अपने आप आगे बढ़ना

Show Answer
Answer: ((b))

आत्मनिर्भर होना

'अपने पैरों पर खड़े होना' मुहावरे का सही उत्तर है- आत्मनिर्भर होना

Key Points

  • 'अपने पैरों पर खड़े होना' एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी दूसरे की सहायता के बिना अपना काम स्वयं करना या आत्मनिर्भर बनना।
  • हिंदी व्याकरण में मुहावरा ऐसे वाक्यांश को कहते हैं जो अपने सामान्य (शाब्दिक) अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करता है।
  • उदाहरण:
  1. राम नौकरी लगने के बाद अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया है।
  2. आजकल के युवाओं के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़ा होना बहुत जरूरी है।

अन्य विकल्प -

विकल्पअर्थप्रकार
सावधानीपूर्वक चलनाइसका अर्थ सतर्कता के साथ कदम बढ़ाना होता है।सामान्य वाक्यांश
छोटे बच्चों का चलना सीखनायह वाक्य का शाब्दिक (वाच्यार्थ) अर्थ है, मुहावरा नहीं।सामान्य क्रिया
बिना किसी छड़ी के आगे बढ़नायह केवल शारीरिक क्रिया को दर्शाता है।सामान्य अर्थ

Important Points 

 मुहावरे की विशेषताएँ-

  1. मुहावरा एक पूर्ण वाक्य न होकर वाक्यांश होता है।
  2. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार बदलता है, लेकिन इसका मूल रूप कभी नहीं बदलता।
  3. मुहावरे का प्रयोग करने से भाषा अधिक चुटीली, आकर्षक और प्रभावशाली हो जाती है।

Additional Information

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
उड़न छू होनागायब हो जाना या तेजी से भाग जाना।पुलिस के आने की भनक लगते ही प्रदर्शनकारी मैदान से उड़न छू हो गए।
कंधे से कंधा मिलानापूर्ण सहयोग देना या साथ मिलकर काम करना।देश की प्रगति के लिए हम सभी को कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा।
चिकना घड़ा होनाजिस पर किसी बात का कोई प्रभाव न पड़े।उसे कितना भी समझाओ, कोई फायदा नहीं; वह तो निरा चिकना घड़ा है।
नाक कटनाप्रतिष्ठा या इज्जत नष्ट होना।बेटे की बुरी हरकतों ने समाज में पिता की नाक काट दी
पसीने-पसीने होनाबहुत अधिक थक जाना या शर्मिंदा होना।अचानक मंच पर अपना नाम सुनकर वह घबराहट में पसीने-पसीने हो गया।
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किस विकल्प में हिंदी पारिभाषिक शब्द का सही प्रयोग हुआ है?

  1. ((a))

    Appeasement = तुष्टीकरण

  2. ((b))

    Judicious = विधिसम्मत

  3. ((c))

    Arbitrary = उचित

  4. ((d))

    Accountability = लेखा संबंधी

Show Answer
Answer: ((a))

Appeasement = तुष्टीकरण

दिए गए विकल्पों में पारिभाषिक शब्द का सही प्रयोग Appeasement = तुष्टीकरण का हुआ है।

Key Points

  • विकल्प 1 'Appeasement = तुष्टीकरण' बिल्कुल सही है।
  • Appeasement का अर्थ है किसी पक्ष की माँगों को मानकर उसे शांत करने की नीति, जिसे हिंदी प्रशासनिक शब्दावली में तुष्टीकरण कहा जाता है।
  • पारिभाषिक शब्दावली उन शब्दों को कहते हैं जो कि��ी विशेष ज्ञान के क्षेत्र (जैसे- प्रशासन, विधि, विज्ञान आदि) में एक निश्चित अर्थ के लिए प्रयुक्त होते हैं।
  • पारिभाषिक शब्दों के अन्य उदाहरण:
  • Agenda = कार्यसूची
  • Affidavit = शपथ-पत्र

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पसही अर्थत्रुटि का कारण
Judiciousविवेकपूर्ण / न्यायसंगतविधिसम्मत का अंग्रेजी शब्द Statutory या Lawful होता है।
Arbitraryमनमाना / स्वेच्छाचारीउचित का अंग्रेजी शब्द Proper या Appropriate होता है।
Accountabilityजवाबदेही / उत्तरदायित्वलेखा संबंधी का अंग्रेजी शब्द Accounting होता है।

Important Points 

 पारिभाषिक शब्दावली के प्रमुख क्षेत्र-

  1. प्रशासनिक शब्दावली: सरकारी कामकाज में प्रयुक्त शब्द।
  2. विधिक शब्दावली: कानून और न्यायालय में प्रयुक्त शब्द।
  3. वैज्ञानिक/तकनीकी शब्दावली: विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र के शब्द।

Additional Information

अंग्रेजी शब्दहिंदी अर्थ
Affidavitशपथ पत्र
Bona fideवास्तविक / सद्भावी
Gazetteराजपत्र
Honorariumमानदेय
Memorandumज्ञापन
Quorumगणपूर्ति
Vigilanceसतर्कता
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किस विकल्प में हिंदी पारिभाषिक शब्द का सही प्रयोग नहीं हुआ है?

  1. ((a))

    Assume = ग्रहण करना

  2. ((b))

    Apparent = प्रकट

  3. ((c))

    Attorney General = महान्यायवादी 

  4. ((d))

    Legal Protection = विधिक संरक्षण

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Answer: ((a))

Assume = ग्रहण करना

दिए गए विकल्पों में से 'हिंदी पारिभाषिक शब्द' का सही प्रयोग नहीं हुआ है, वह विकल्प है- Assume = ग्रहण करना

Key Points

  • 'Assume' शब्द का सही पारिभाषिक अर्थ 'मान लेना' या 'कल्पना करना' होता है।
  • प्रशासनिक और तकनीकी शब्दावली में ग्रहण करना शब्द के लिए अंग्रेजी में 'Accept' या 'Take' का प्रयोग किया जाता है।
  • हालाँकि, 'Assume charge' का अर्थ 'कार्यभार ग्रहण करना' होता है, लेकिन स्वतंत्र रूप से 'Assume' का मुख्य अर्थ 'कल्पना करना' ही मान्य है।
  • उदाहरण:
  1. Let us assume that x is equal to 10. (मान लीजिए कि x, 10 के बराबर है।)
  2. He accepted the proposal. (उसने प्रस्ताव ग्रहण/स्वीकार किया।)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
Apparentवह जो स्पष्ट रूप से प्रकट या दृश्यमान हो।विशेषण
Attorney Generalभारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार या महान्यायवादीपदनाम (विधिक)
Legal Protectionकानून के दायरे में मिलने वाला विधिक संरक्षणविधिक शब्दावली

Important Points 

 पारिभाषिक शब्दावली के मुख्य क्षेत्र-

  1. प्रशासनिक शब्दावली: शासन-प्रशासन में प्रयुक्त शब्द (जैसे- Cabinet, Agenda)।
  2. विधिक शब्दावली: कानून और न्यायालयों में प्रयुक्त शब्द (जैसे- Affidavit, Plaintiff)।
  3. तकनीकी/वैज्ञानिक शब्दावली: विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रयुक्त शब्द।

Additional Information

अंग्रेजी शब्दहिंदी अर्थ
Standardizationमानकीकरण
Authenticationप्रमाणीकरण
Implementationकार्यान्वयन
Infrastructureआधारभूत संरचना
Jurisdictionक्षेत्राधिकार
Discretionaryविवेकाधीन
Technical Snagतकनीकी खराबी
Transparencyपारदर्शिता
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किस विकल्प में लोकोक्ति का भावार्थ असंगत है?

  1. ((a))

    चोर की दाढ़ी में तिनका = अपराधी का निशंक होना

  2. ((b))

    नेकी कर दरिया में डाल = भला करके भूल जाना

  3. ((c))

    हाथ कंगन को आरसी क्या = प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं

  4. ((d))

    साँच को आँच नहीं = सच्चा व्यक्ति डरता नहीं

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Answer: ((a))

चोर की दाढ़ी में तिनका = अपराधी का निशंक होना

किस विकल्प में लोकोक्ति का भावार्थ असंगत है? का सही उत्तर है- चोर की दाढ़ी में तिनका = अपराधी का निशंक होना

Key Points

  • 'चोर की दाढ़ी में तिनका' लोकोक्ति का सही अर्थ 'अपराधी का सशंकित होना' या 'दोषी व्यक्ति का खुद ही डरना' होता है, न कि 'निशंक (बिना किसी शंका के) होना'।
  • लोकोक्ति लोक जीवन के अनुभवों पर आधारित वह कथन है जो संक्षेप में किसी सत्य को प्रकट करता है। इसमें व्यंजना शक्ति का प्रयोग होता है और यह अपने आप में एक पूर्ण वाक्य होती है।
  • उदाहरण 1: पुलिस को देखते ही रमेश घबरा गया, इसे ही कहते हैं- चोर की दाढ़ी में तिनका
  • उदाहरण 2: जब सभा में चोरी की बात चली, तो सोहन बार-बार अपना पसीना पोंछने लगा, मानो चोर की दाढ़ी में तिनका हो।

अन्य विकल्प -

लोकोक्तिविग्रह/अर्थभावार्थ की स्थिति
नेकी कर दरिया में डालकिसी का भला करके उसे भूल जाना चाहिए।संगत (सही)
हाथ कंगन को आरसी क्याप्रत्यक्ष बात के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।संगत (सही)
साँच को आँच नहींजो व्यक्ति सच्चा होता है, उसे किसी का डर नहीं होता।संगत (सही)

Important Points 

 लोकोक्ति और मुहावरे के मुख्य भेद-

  1. मुहावरा एक वाक्यांश होता है, जबकि लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है।
  2. मुहावरे के अंत में प्रायः 'ना' (जैसे- आँखों का तारा होना) आता है, लोकोक्ति में ऐसा अनिवार्य नहीं है।
  3. लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, जबकि मुहावरे का प्रयोग वाक्य के बीच में होता है।

Additional Information

लोकोक्तिअर्थवाक्य प्रयोग
खरी मजदूरी चोखा कामनकद या अच्छी मजदूरी देने पर काम भी अच्छा होता है।यदि आप कारीगर को समय पर पूरा पैसा देंगे, तभी वह मन लगाकर काम करेगा; क्योंकि खरी मजदूरी चोखा काम।
गये थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ीछोटे संकट से बचने के प्रयास में उससे भी बड़ा संकट मोल लेना।वह अपनी छोटी सी उधारी चुकाने के लिए बैंक गया था, पर वहाँ उसे भारी जुर्माना भरना पड़ा, इसे कहते हैं— गये थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी।
जस दूल्हा तस बनी बराताजैसा मुखिया होता है, वैसे ही उसके साथी भी होते हैं।भ्रष्ट नेता के सभी चमचे भी वैसे ही निकले, सच है— जस दूल्हा तस बनी बराता।
नेकी कर दरिया में डालभलाई करने के बाद उसे जताना नहीं चाहिए या बदले की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।मदद करने के बाद एहसान नहीं जताना चाहिए, हमेशा नेकी कर दरिया में डाल वाली नीति अपनाओ।
बंदर क्या जाने अदरक का स्वादमूर्ख व्यक्ति गुणों की पहचान नहीं कर सकता।उसे शास्त्रीय संगीत सुनाना व्यर्थ है, उसे उसकी समझ नहीं; बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
83

Jurisdiction के लिए समकक्ष हिन्दी पारिभाषिक शब्द होगा:

  1. ((a))

    कार्यक्षेत्र

  2. ((b))

    विशिष्ट क्षेत्र

  3. ((c))

    विशेषाधिकार

  4. ((d))

    क्षेत्राधिकार

Show Answer
Answer: ((d))

क्षेत्राधिकार

दिए गए प्रश्न में 'Jurisdiction' के लिए समकक्ष हिन्दी पारिभाषिक शब्द का सही उत्तर है- क्षेत्राधिकार

Key Points

  • 'Jurisdiction' शब्द का अर्थ उस विधिक अधिकार या सीमा से है, जिसके भीतर कोई न्यायालय या संस्था अपना निर्णय सुना सकती है।
  • प्रशासनिक और कानूनी शब्दावली में क्षेत्राधिकार का अर्थ वह निश्चित सीमा या दायरा है जिसके अंतर्गत किसी प्राधिकारी या न्यायालय को कार्य करने की शक्ति प्राप्त होती है।
  • उदाहरण 1: यह मामला इस पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) में नहीं आता।
  • उदाहरण 2: सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) संपूर्ण भारत पर है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
कार्यक्षेत्रवह दायरा जहाँ किसी व्यक्ति या विभाग का काम सीमित होता है (Scope/Work area)।प्रशासनिक शब्द
विशिष्ट क्षेत्रकोई विशेष या खास स्थान अथवा विषय (Specialized field)।सामान्य शब्द
विशेषाधिकारकिसी व्यक्ति या संस्था को प्राप्त विशेष अधिकार (Privilege)।विधिक शब्द

Important Points 

 प्रशासनिक एवं पारिभाषिक शब्दावली के मुख्य भेद-

  1. प्रशासनिक शब्दावली: जो सरकारी कामकाज में प्रयुक्त होती है।
  2. विधिक शब्दावली: जो कानून और न्यायालयों में प्रयुक्त होती है।
  3. तकनीकी शब्दावली: जो विज्ञान, वाणिज्य या अन्य विशिष्ट विषयों में प्रयुक्त होती है।

Additional Information

अंग्रेजी शब्दहिन्दी परिभाषासमानार्थी शब्द
Authorityकिसी कार्य को करने का वैधानिक हक या शक्ति।Authority = प्राधिकार Power = शक्ति
Legislationनियम या कानून बनाने की प्रक्रिया।Legislation = विधान Statute = कानून
84

Approach शब्द का असंगत पारिभाषिक शब्द है:

  1. ((a))

    पहुँच

  2. ((b))

    उपमार्ग

  3. ((c))

    दृष्टिकोण

  4. ((d))

    सिफ़ारिश

Show Answer
Answer: ((d))

सिफ़ारिश

'Approach' शब्द के लिए असंगत पारिभाषिक शब्द का सही उत्तर है- सिफ़ारिश

Key Points

  • 'Approach' शब्द के विभिन्न प्रशासनिक और सामान्य अर्थ पहुँच, दृष्टिकोण और उपमार्ग होते हैं, जबकि सिफ़ारिश इसके लिए एक सर्वथा भिन्न और असंगत शब्द है।
  • पारिभाषिक शब्दावली उन शब्दों को कहते हैं जो सामान्य व्यवहार की भाषा के शब्द न होकर ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे प्रशासन, विधि, विज्ञान आदि के लिए निश्चित अर्थ में प्रयुक्त होते हैं।
  • उदाहरण के लिए: Agenda का अर्थ 'कार्यसूची' और Sanction का अर्थ 'मंजूरी' या 'शास्ति' होता है।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
पहुँच'Approach' का वह अर्थ जो किसी स्थान या व्यक्ति तक पहुँचने को दर्शाता है।संगत पारिभाषिक शब्द
उपमार्ग'Approach' का वह अर्थ जो किसी मुख्य मार्ग से जुड़ने वाले रास्ते को दर्शाता है।संगत पारिभाषिक शब्द
दृष्टिकोण'Approach' का वह अर्थ जो किसी कार्य को करने के नज़रिये को दर्शाता है।संगत पारिभाषिक शब्द

Important Points

प्रशासनिक शब्दावली के मुख्य क्षेत्र-

  1. प्रशासनिक (Administrative)
  2. विधिक (Legal)
  3. वाणिज्यिक (Commercial)
  4. तकनीकी (Technical)

Additional Information

अंग्रेजी शब्दहिंदी अर्थ
Minutesकार्यवृत्त
Liaison Officerसंपर्क अधिकारी
Statutoryसांविधिक / वैधानिक
Nomineeनामित / नामिती
Disbursementसंवितरण
Outlayपरिव्यय
Seniority cum Meritवरिष्ठता-सह-योग्यता
Handing Overकार्यभार सौंपना
85

Authority शब्द का सुसंगत पारिभाषिक शब्द नहीं है:

  1. ((a))

    प्राधिकार

  2. ((b))

    अधिकारी विद्वान

  3. ((c))

    लेखकीय अधिकार

  4. ((d))

    प्राधिकरण

Show Answer
Answer: ((c))

लेखकीय अधिकार

'Authority' शब्द का सुसंगत पारिभाषिक शब्द नहीं है- लेखकीय अधिकार

Key Points

  • 'Authority' शब्द के लिए लेखकीय अधिकार सुसंगत शब्द नहीं है क्योंकि लेखकीय अधिकार का अंग्रेजी अनुवाद 'Authorship' होता है।
  • प्रशासनिक शब्दावली में Authority शब्द का प्रयोग विभिन्न संदर्भों में किया जाता है, जहाँ इसका अर्थ शक्ति, विशेषज्ञता या किसी सरकारी संस्था से होता है।
  • 'Authority' के अन्य मान्य अर्थ हैं: प्राधिकार (Power), प्राधिकरण (Body/Organization), और अधिकारी विद्वान (Expert)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
प्राधिकारविधि द्वारा प्रदत्त शक्ति या अधिकारप्रशासनिक शब्दावली
अधिकारी विद्वानकिसी विषय का प्रमाणित विशेषज्ञशैक्षणिक शब्दावली
प्राधिकरणएक स्वायत्त सरकारी संस्थासंस्थानिक शब्दावली

Important Points 

 पारिभाषिक शब्दावली के मुख्य भेद-

  1. सामान्य शब्द: वे शब्द जो आम बोलचाल में प्रयुक्त होते हैं।
  2. पारिभाषिक शब्द: वे शब्द जिनका प्रयोग किसी विशेष शास्त्र या विषय में निश्चित अर्थ में होता है।
  3. अर्ध-पारिभाषिक शब्द: वे शब्द जो सामान्य और पारिभाषिक दोनों रूपों में प्रयुक्त होते हैं।

Additional Information

अंग्रेजी शब्दहिंदी अर्थ
Bureaucracyनौकरशाही
In cameraबंद कमरे में
Circularपरिपत्र
Demurrageविलंब शुल्क
Interimअंतरिम
Provisionalअनंतिम
Sanctityपवित्रता / शुचिता
Voucherप्रमाणक
86

किस विकल्प में सुसंगत पारिभाषिक शब्द नहीं है?

  1. ((a))

    Transport = आयात-निर्यात

  2. ((b))

    Retrospective = भूतलक्षी

  3. ((c))

    Legible = सुवाच्य

  4. ((d))

    Act = अधिनियम

Show Answer
Answer: ((a))

Transport = आयात-निर्यात

दिए गए विकल्पों में सुसंगत पारिभाषिक शब्द नहीं है का सही उत्तर है- Transport = आयात-निर्यात

Key Points

  • 'Transport' शब्द का सुसंगत पारिभाषिक अर्थ 'परिवहन' होता है, जबकि 'आयात-निर्यात' के लिए अंग्रेजी में 'Import-Export' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • पारिभाषिक शब्द उन शब्दों को कहते हैं जो सामान्य व्यवहार की भाषा के शब्द न होकर ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे प्रशासन, विज्ञान, विधि, वाणिज्य आदि में एक निश्चित अर्थ के लिए प्रयुक्त होते हैं।
  • अन्य उदाहरण: Maintenance = रख-रखाव, Agenda = कार्यसूची।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
Retrospectiveवह नियम या कानून जो पिछली तिथि से प्रभावी हो।विधि शब्दावली
Legibleजो लिखावट पढ़ने योग्य या साफ़ हो।सामान्य प्रशासनिक
Actसंसद द्वारा पारित कोई विधि या कानूनप्रशासनिक शब्दावली

Important Points 

 प्रशासनिक शब्दावली के मुख्य लक्षण-

  1. अर्थ की स्पष्टता और निश्चितता।
  2. अर्थ में संदिग्धता का अभाव।
  3. विशिष्ट संदर्भ में रूढ़ अर्थ का होना।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
पारिभाषिक शब्दावलीऐसे शब्द जिनका प्रयोग किसी विशिष्ट ज्ञान के क्षेत्र में निश्चित अर्थ को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।Affidavit = शपथ-पत्र Gazetted = राजपत्रित
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किस विकल्प में गलत पारिभाषिक शब्द है?

  1. ((a))

    Juvenile Court = किशोर न्यायालय

  2. ((b))

    Apprentice = प्रशिक्षण

  3. ((c))

    Indemnity = क्षतिपूर्ति

  4. ((d))

    Reimbursement = प्रतिपूर्ति

Show Answer
Answer: ((b))

Apprentice = प्रशिक्षण

किस विकल्प में गलत पारिभाषिक शब्द है? का सही उत्तर है- Apprentice = प्रशिक्षण

Key Points

  • यहाँ 'Apprentice' का हिंदी पारिभाषिक अर्थ गलत दिया गया है। Apprentice का सही हिंदी अर्थ 'शिक्षु' होता है।
  • प्रशासनिक कार्यों में प्रयुक्त होने वाले वे शब्द जिनका अर्थ एक निश्चित सीमा में बंधा होता है, पारिभाषिक शब्द कहलाते हैं।
  • प्रशिक्षण के लिए सही अंग्रेजी शब्द 'Training' है।
  • अन्य उदाहरण: Agenda = कार्यसूची, Audit = लेखा परीक्षा।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
Juvenile Courtवह न्यायालय जो किशोर अपराधियों के मामलों की सुनवाई करता है।विधिक शब्दावली
Indemnityहानि या नुकसान के बदले दी जाने वाली क्षतिपूर्तिप्रशासनिक शब्दावली
Reimbursementखर्च किए गए धन की वापस होने वाली प्रतिपूर्तिप्रशासनिक/वित्तीय शब्दावली

Important Points 

 पारिभाषिक शब्दावली के मुख्य क्षेत्र-

  1. प्रशासनिक शब्दावली
  2. विधिक (कानूनी) शब्दावली
  3. वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
प्रशासनिक शब्दसरकारी कार्यालयों और प्रशासन में प्रयुक्त होने वाले शब्द जो विशिष्ट अर्थ व्यक्त करते हैं।Affidavit = शपथ-पत्र Bureaucracy = नौकरशाही
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Gross Misconduct के लिए समकक्ष हिन्दी पारिभाषिक शब्द होगा:

  1. ((a))

    सकल दुर्व्यवहार

  2. ((b))

    घोर कदाचार

  3. ((c))

    भारी अपचारिता

  4. ((d))

    घोर अशिष्टता

Show Answer
Answer: ((b))

घोर कदाचार

'Gross Misconduct' के लिए समकक्ष हिन्दी पारिभाषिक शब्द का सही उत्तर है- घोर कदाचार

Key Points

  • प्रशासनिक और कानूनी संदर्भ में 'Gross Misconduct' का अर्थ अत्यंत गंभीर प्रकृति का गलत व्यवहार होता है, जिसे हिंदी में घोर कदाचार कहा जाता है।
  • पारिभाषिक शब्दावली के नियमों के अनुसार, Gross का अर्थ यहाँ 'सकल' (कुल) न होकर 'घोर' या 'गंभीर' है और Misconduct का मानक अर्थ 'कदाचार' होता है।
  • इसी प्रकार के अन्य उदाहरण:
  • Professional Misconduct = व्यावसायिक कदाचार
  • Official Misconduct = पदीय कदाचार

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
सकल दुर्व्यवहारसकल (Total) और दुर्व्यवहार (Misbehavior) का मेल, जो प्रशासनिक शब्दावली में मान्य नहीं है।अशुद्ध पारिभाषिक शब्द
भारी अपचारिताभारी (Heavy) और अपचारिता (Delinquency) का मेल, जो कानूनी रूप से सटीक नहीं है।अशुद्ध पारिभाषिक शब्द
घोर अशिष्टताघोर (Extreme) और अशिष्टता (Immodesty/Rudeness) का मेल, जो व्यवहार को दर्शाता है, सेवा नियमों को नहीं।सामान्य शब्दावली

Important Points 

 प्रशासनिक पारिभाषिक शब्दावली के मुख्य क्षेत्र-

  1. प्रशासनिक शब्दावली (Administrative Terminology)
  2. विधिक शब्दावली (Legal Terminology)
  3. वित्तीय शब्दावली (Financial Terminology)
  4. संसदीय शब्दावली (Parliamentary Terminology)

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
पारिभाषिक शब्दऐसे शब्द जिनका प्रयोग विशेष क्षेत्र (जैसे प्रशासन, विज्ञान, विधि) में एक निश्चित और सीमित अर्थ में किया जाता है।Gazette = राजपत्र Affidavit = शपथ-पत्र
89

किस शब्द की संधि सही नहीं है?

  1. ((a))

    तत् + उपरांत = तदोपरांत

  2. ((b))

    षट् + आनन = षडानन

  3. ((c))

    वाक् + ईश = वागीश

  4. ((d))

    सत् + चरित्र = सच्चरित्र

Show Answer
Answer: ((a))

तत् + उपरांत = तदोपरांत

दिए गए विकल्पों में संधि की दृष्टि से अशुद्ध शब्द का सही उत्तर है- तत् + उपरांत = तदोपरांत

Key Points

  • 'तत् + उपरांत' की सही संधि 'तदुपरांत' होती है। यहाँ 'तदोपरांत' शब्द वर्तनी और संधि दोनों नियमों से अशुद्ध है। यहाँ व्यंजन संधि का नियम लागू होता है।
  • नियम के अनुसार, यदि किसी वर्ग के प्रथम वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई स्वर या किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण आए, तो प्रथम वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है।
  • यहाँ 'त्' के बाद 'उ' (स्वर) आने पर 'त्', 'द्' में परिवर्तित हो गया है (त् + उ = दु)।
  • अन्य उदाहरण:
  • सत् + आशय = सदाशय
  • जगत् + ईश = जगदीश

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/नियमभेद/प्रकार
षडाननषट् + आनन (ट् का 'ड्' में परिवर्तन)व्यंजन संधि
वागीशवाक् + ईश (क् का 'ग्' में परिवर्तन)व्यंजन संधि
सच्चरित्रसत् + चरित्र (त् के बाद 'च' होने पर 'त्' का 'च्' होना)व्यंजन संधि

Important Points 

 संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि: दो स्वरों के मेल से होने वाला परिवर्तन।
  2. व्यंजन संधि: व्यंजन का व्यंजन या स्वर से मेल होने पर होने वाला परिवर्तन।
  3. विसर्ग संधि: विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला परिवर्तन।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
व्यंजन संधिजब किसी व्यंजन का मेल किसी स्वर या व्यंजन से होता है, तो उत्पन्न विकार को व्यंजन संधि कहते हैं।दिक् + अंबर = दिगंबर उत् + लास = उल्लास
90

निम्नलिखित में से कौन सा शब्द संधि रहित है?

  1. ((a))

    अनुच्छेद

  2. ((b))

    परिणाम

  3. ((c))

    तल्लीन

  4. ((d))

    फलस्वरूप

Show Answer
Answer: ((d))

फलस्वरूप

दिए गए विकल्पों में 'संधि रहित' शब्द का सही उदाहरण है- फलस्वरूप

Key Points

  • 'फलस्वरूप' शब्द में दो शब्दों (फल + स्वरूप) का केवल मेल हुआ है,
  • इसमें वर्णों के स्तर पर कोई ध्वन्यात्मक परिवर्तन (विकार) नहीं हुआ है। अतः यह संयोग का उदाहरण है, संधि का नहीं।
  • जब दो वर्णों के पास-पास आने से उनमें जो विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। जहाँ कोई परिवर्तन न हो, उसे संयोग कहा जाता है।
  • संयोग के अन्य उदाहरण: देशप्रेम (देश + प्रेम), प्रतिदिन (प्रति + दिन)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
अनुच्छेदअनु + छेद (ह्रस्व स्वर के बाद 'छ' होने पर 'च्' का आगम)व्यंजन संधि
परिणामपरि + नाम ('र्' के प्रभाव से 'न्' का 'ण्' में परिवर्तन)व्यंजन संधि
तल्लीनतत् + लीन ('त्' के बाद 'ल्' होने पर 'त्' का 'ल्' में बदलना)व्यंजन संधि

Important Points 

 संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
व्यंजन संधिव्यंजन के साथ व्यंजन या स्वर के मेल होने से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।सज्जन = सत् + जन दिग्गज = दिक् + गज
91

किस शब्द का संधि-विच्छेद सही नहीं है?

  1. ((a))

    सच्छास्त्र = सत् + शास्त्र

  2. ((b))

    आद्योपांत = आदि + उपांत

  3. ((c))

    परिणत = परि + नत

  4. ((d))

    अनुष्ठान = अनु + स्थान

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Answer: ((b))

आद्योपांत = आदि + उपांत

दिए गए विकल्पों में 'संधि-विच्छेद' का सही उदाहरण/उत्तर है- आद्योपांत = आदि + उपांत

Key Points

  • 'आदि + उपांत' का संधि रूप 'आद्युपान्त' होता है, न कि 'आद्योपांत'
  • यहाँ यण संधि का नियम लागू होता है। जब इ/ई के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो इ/ई का 'य्' हो जाता है।
  • आदि (इ) + उपांत (उ) = आद्युपान्त (इ + उ = यु)।
  • यदि शब्द 'आद्योपांत' है, तो इसका सही विच्छेद 'आद्य + उपांत' (अ + उ = ओ, गुण संधि) होगा।
  • यण संधि के अन्य उदाहरण: इति + आदि = इत्यादि, अभि + उदय = अभ्युदय

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
सच्छास्त्रसत् + शास्त्र (त् के बाद श होने पर त् का च और श का छ हो जाता है)व्यंजन संधि
परिणतपरि + नत (ऋ, र, ष के बाद 'न' आने पर वह 'ण' में बदल जाता है)व्यंजन संधि
अनुष्ठानअनु + स्थान (इ/उ के बाद 'स' या 'स्थ' होने पर वह 'ष' या 'ष्ठ' हो जाता है)व्यंजन संधि

Important Points 

 संधि के भेद-

  1. स्वर संधि: दो स्वरों के मेल से होने वाला विकार। (जैसे- दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि)
  2. व्यंजन संधि: व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला विकार।
  3. विसर्ग संधि: विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाला विकार।

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
यण स्वर संधियदि इ, ई, उ, ऊ, ऋ के बाद कोई असमान स्वर आए तो इ/ई का 'य', उ/ऊ का 'व' और ऋ का 'र' हो जाता है।प्रति + एक = प्रत्येक सु + आगत = स्वागत
व्यंजन संधि (न-ण नियम)यदि ऋ, र्, ष् से परे 'न' व्यंजन आता है तो वह 'ण' में बदल जाता है, चाहे बीच में स्वर, क-वर्ग या प-वर्ग ही क्यों न हो।प्र + नाम = प्रणाम भर + अन = भरण
92

इनमें से कौन सा संधि-शब्द सही नहीं है?

  1. ((a))

    रवि + इन्द्र = रविन्द्र

  2. ((b))

    तथा + एव = तथैव

  3. ((c))

    निः + रोग = नीरोग

  4. ((d))

    मनः + ताप = मनस्ताप

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Answer: ((a))

रवि + इन्द्र = रविन्द्र

दिए गए विकल्पों में संधि-विच्छेद की दृष्टि से जो सही नहीं है, उसका सही उत्तर है- रवि + इन्द्र = रविन्द्र

Key Points

  • विकल्प 'रवि + इन्द्र = रविन्द्र' गलत है क्योंकि यहाँ दीर्घ स्वर संधि का नियम लागू होता है।
  • नियम के अनुसार, जब ह्रस्व या दीर्घ 'इ' के बाद ह्रस्व या दीर्घ 'इ' आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ 'ई' हो जाते हैं। अतः सही शब्द 'रवीन्द्र' होना चाहिए।
  • अन्य उदाहरण: कवि + इन्द्र = कवीन्द्र, गिरि + ईश = गिरीश

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
तथैवतथा + एव (आ + ए = )वृद्धि स्वर संधि
नीरोगनिः + रोग (विसर्ग का लोप और स्वर दीर्घ)विसर्ग संधि
मनस्तापमनः + ताप (विसर्ग का 'स्' होना)विसर्ग संधि

Important Points

संधि के मुख्य भेद-

संधि का नाममेल (संयोग)मुख्य पहचान / विकारप्रमुख उदाहरण
स्वर संधिस्वर + स्वरदो स्वरों के मेल से मात्रा में परिवर्तन होता है। इसके 5 उपभेद हैं।हिमालय (हिम + आलय)
व्यंजन संधिव्यंजन + स्वर/व्यंजनव्यंजन में विकार उत्पन्न होता है (जैसे आधा अक्षर या वर्ण परिवर्तन)।सज्जन (सत् + जन)
विसर्ग संधिविसर्ग (:) + स्वर/व्यंजनविसर्ग 'ओ', 'र', 'श', 'ष', या 'स' में बदल जाता है।मनोहर (मनः + हर)

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
दीर्घ संधि​जब दो सवर्ण (समान) स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आपस में मिलकर दीर्घ (बड़े) स्वर बन जाते हैं, तो उसे दीर्घ संधि कहते हैं।विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (आ + अ = ) भानु + उदय = भानूदय (उ + उ = )
वृद्धि  संधि​जहाँ 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आने पर दोनों मिलकर 'ऐ' हो जाते हैं, और 'ओ' या 'औ' आने पर 'औ' हो जाते हैं।​मत + ऐक्य = मतैक्य (अ + ऐ = ) वन + औषधि = वनौषधि (अ + ओ = )
93

इनमें से कौन सा संधि-शब्द गलत है?

  1. ((a))

    सत् + जन = सज्जन

  2. ((b))

    चित् + मय = चिन्मय

  3. ((c))

    सत् + गति = सद्गति

  4. ((d))

    सत् + मार्ग = सद्मार्ग

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Answer: ((d))

सत् + मार्ग = सद्मार्ग

दिए गए विकल्पों में से गलत संधि-शब्द का सही उत्तर है- सत् + मार्ग = सद्मार्ग

Key Points

  • सत् + मार्ग का सही संधि-रूप 'सन्मार्ग' होगा, न कि 'सद्मार्ग'।  नियम: त् + म = न्
  • व्यंजन संधि के नियम के अनुसार, यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (न, म) आए, तो वह वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (पंचम वर्ण) में बदल जाता है।
  • इस नियम के अन्य उदाहरण:
  • उत् + नति = उन्नति
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
सज्जनसत् + जन (त् के बाद 'ज' होने पर 'त्' का 'ज्' हो जाता है)व्यंजन संधि
चिन्मयचित् + मय (त् के बाद 'म' होने पर 'त्' का 'न्' हो जाता है)व्यंजन संधि
सद्गतिसत् + गति (त् के बाद वर्ग का तीसरा वर्ण होने पर 'त्' का 'द्' हो जाता है)व्यंजन संधि

Important Points 

 संधि के मुख्य भेद-

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
व्यंजन संधिव्यंजन का व्यंजन से अथवा किसी स्वर से मेल होने पर जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।वागीश = वाक् + ईश उद्धार = उत् + हार
94

निम्नलिखित में से किस शब्द की संधि सही है?

  1. ((a))

    स्त्री + उचित = स्त्रीयोचित

  2. ((b))

    गति + अवरोध = गत्यावरोध

  3. ((c))

    शीत + ऋतु = शीतर्तु

  4. ((d))

    राम + ईश = रमेश

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Answer: ((c))

शीत + ऋतु = शीतर्तु

उपरोक्त विकल्पों में से संधि की दृष्टि से सही शब्द का सही उदाहरण है- शीत + ऋतु = शीतर्तु

Key Points

  • 'शीत + ऋतु' के मेल से 'शीतर्तु' शब्द बनता है, जो पूर्णतः व्याकरणिक रूप से सही है।
  • यहाँ गुण स्वर संधि का नियम लागू होता है। नियमानुसार, यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ऋ' आए, तो दोनों के स्थान पर 'अर्' हो जाता है।
  • अन्य उदाहरण:
  • देव + ऋषि = देवर्षि (अ + ऋ = अर्)
  • महा + ऋषि = महर्षि (आ + ऋ = अर्)

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
स्त्री + उचितसही शब्द स्त्र्युचित है। यहाँ ई + उ = यु हुआ है।यण स्वर संधि
गति + अवरोधसही शब्द गत्यवरोध है। यहाँ इ + अ = य हुआ है।यण स्वर संधि
राम + ईशइसका संधि रूप रामेश होगा। रमेश का संधि विच्छेद रमा + ईश होता है।गुण स्वर संधि

Important Points 
 स्वर संधि के भेद-

  1. दीर्घ स्वर संधि
  2. गुण स्वर संधि
  3. वृद्धि स्वर संधि
  4. यण स्वर संधि
  5. अयादि स्वर संधि

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
गुण संधिजब अ, आ के बाद इ, ई आए तो 'ए'; उ, ऊ आए तो 'ओ' और आए तो 'अर्' हो जाता है।महा + उत्सव = महोत्सव नर + इंद्र = नरेंद्र
यण संधिजब इ, ई, उ, ऊ, ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो इ/ई का 'य', उ/ऊ का 'व' और ऋ का 'र' हो जाता है।इति + आदि = इत्यादि सु + आगत = स्वागत
95

किस विकल���प में कर्मधारय समास नहीं है?

  1. ((a))

    नीलगाय

  2. ((b))

    देहलता

  3. ((c))

    आपबीती

  4. ((d))

    लघुकथा

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Answer: ((c))

आपबीती

किस विकल्प में कर्मधारय समास नहीं है का सही उत्तर है- आपबीती

Key Points

  • 'आपबीती' शब्द में तत्पुरुष समास (अधिकरण तत्पुरुष) है, क्योंकि इसका विग्रह 'आप पर बीती' होता है। यहाँ 'पर' विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
  • तत्पुरुष समास में उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कारक चिन्हों (को, से, के लिए, का, में, आदि) का लोप हो जाता है।
  • मुख्य रूप से कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण तत्पुरुष शामिल हैं।
  • अन्य उदाहरण: दानपेटी - दान के लिए पेटी, पददलित - पद से दलित

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
नीलगायनीली है जो गायकर्मधारय समास
देहलतादेह रूपी लताकर्मधारय समास
लघुकथालघु है जो कथाकर्मधारय समास

Important Points 

 समास के मुख्य भेद-

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद्व समास
  6. बहुव्रीहि समास

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
कर्मधारय समासजिसका उत्तर पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य (उपमेय-उपमान) का संबंध होता है। इसमें विग्रह करते समय ‘के समान’, ‘है जो’, या ‘रूपी’ शब्दों का प्रयोग किया जाता है।महादेव = महान है जो देव चरणकमल = कमल के समान चरण
96

इनमें से किस विकल्प में तत्पुरुष समास है?

  1. ((a))

    आमरण

  2. ((b))

    कामकाज

  3. ((c))

    मंदबुद्धि 

  4. ((d))

    तुलसीकृत

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Answer: ((d))

तुलसीकृत

दिए गए विकल्पों में 'तत्पुरुष समास' का सही उदाहरण है- तुलसीकृत

Key Points

  • 'तुलसीकृत' शब्द का समास विग्रह 'तुलसी द्वारा कृत' होता है। इसमें 'द्वारा' कारक चिह्न का लोप हुआ है, अतः यह तत्पुरुष समास (करण तत्पुरुष) का उदाहरण है।
  • जिस समास में उत्तरपद (अंतिम पद) प्रधान होता है और पूर्वपद के साथ लगे कारक चिह्नों का लोप कर दिया जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
  • इस समास में दो पदों के बीच की कारक विभक्ति (को, से, के लिए, का, की, में, पर) का लोप हो जाता है।
  • तत्पुरुष समास के अन्य उदाहरण: राजपुत्र (राजा का पुत्र), हस्तलिखित (हाथ से लिखित)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
आमरणमरण तकअव्ययीभाव समास
कामकाजकाम और काजद्वंद्व समास
मंदबुद्धिमंद है जिसकी बुद्धि (अर्थात मूर्ख व्यक्ति)बहुव्रीहि समास

Important Points 

 समास के मुख्य भेद-

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद्व समास
  6. बहुव्रीहि समास

Additional Information

समास का नाममुख्य विशेषताउदाहरणविग्रह
अव्ययीभाव समासप्रथम पद प्रधान और अव्यय/उपसर्ग होता है।यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
कर्मधारय समासविशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है।चरणकमलकमल के समान चरण
द्विगु समासप्रथम पद संख्यावाचक (नंबर) होता है।चौराहाचार राहों का समूह
द्वंद्व समासदोनों पद प्रधान होते हैं, विग्रह करने पर 'और/या' लगता है।माता-पितामाता और पिता
बहुव्रीहि समासकोई पद प्रधान नहीं होता, दोनों मिलकर तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं।लम्बोदरलम्बा है उदर जिसका (गणेश)
97

किस विकल्प में द्वंद्व समास नहीं है?

  1. ((a))

    परमपिता

  2. ((b))

    मातापिता

  3. ((c))

    हानिलाभ

  4. ((d))

    चालचलन

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Answer: ((a))

परमपिता

'द्वंद्व समास' नहीं होने का सही उत्तर है- परमपिता

Key Points

  • 'परमपिता' शब्द में द्वंद्व समास नहीं है, बल्कि इसमें कर्मधारय समास है। इसका विग्रह 'परम है जो पिता' होता है।
  • द्वंद्व समास वह समास होता है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' आदि लगते हैं।
  • द्वंद्व समास के अन्य उदाहरण: सीता-राम (सीता और राम), सुख-दुख (सुख य��� दुख)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
मातापितामाता और पिताद्वंद्व समास (इतरेतर)
हानिलाभहानि या लाभद्वंद्व समास (वैकल्पिक)
चालचलनचाल और चलन (आदि)द्वंद्व समास (समाहार)

Important Points 

 समास के मुख्य भेद-

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद्व समास
  6. बहुव्रीहि समास

Additional Information

प्रकार/भेदपरिभाषाउदाहरण
कर्मधारय समासजिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध हो।नीलकमल = नीला है जो कमल महापुरुष = महान है जो पुरुष
98

निम्नलिखित में से कौन सा शब्द उपसर्ग रहित है?

  1. ((a))

    आसन

  2. ((b))

    आकार

  3. ((c))

    आनंद

  4. ((d))

    आरोह

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Answer: ((a))

आसन

दिए गए विकल्पों में 'उपसर्ग रहित' शब्द का सही उत्तर है- आसन

Key Points

  • 'आसन' शब्द में किसी भी उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है, यह एक मूल शब्द है।
  • उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के प्रारंभ (शुरुआत) में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं।
  • 'आ' उपसर्ग के अन्य उदाहरण: जीवन (आ + जीवन), मरण (आ + मरण)।

अन्य विकल्प -

शब्द/विकल्पविग्रह/अर्थभेद/प्रकार
आकार + कार (विशेष आकृति)संस्कृत उपसर्ग युक्त शब्द
आनंद + नंद (खुशी/हर्ष)संस्कृत उपसर्ग युक्त शब्द
आरोह + रोह (ऊपर चढ़ना)संस्कृत उपसर्ग युक्त शब्द

Important Points 

 उपसर्ग के मुख्य भेद-

  1. संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम उपसर्ग)
  2. हिंदी के उपसर्ग (तद्भव उपसर्ग)
  3. उर्दू/फारसी/अरबी के उपसर्ग (आगत उपसर्ग)
  4. अंग्रेजी के उपसर्ग

Additional Informationसंस्कृत के प्रमुख उपसर्ग और उदाहरण -

  •  (तक, समेत): आहार, आजीवन, आक्रमण, आगमन, आदान।
  • परा (विपरीत, पीछे): पराजय, पराभव, परामर्श, पराक्रम।
  • अप (हीनता, बुरा): अपशब्द, अपमान, अपकार, अपयश।
  • सम् (अच्छी तरह, संयोग): संस्कार, सम्मुख, संतोष, संगम।
  • अनु (पीछे, समानता): अनुकरण, अनुचर, अनुशासन, अनुवाद।
  • अव (नीचे, हीन): अवनति, अवगुण, अवकाश, अवतरण।
  • निस्/निर् (रहित, बिना): निःशब्द, निश्छल, निर्बल, निर्दोष, निष्कर्ष।
  • दुस्/दुर् (बुरा, कठिन): दुस्साहस, दुष्ट, दुर्बल, दुर्जन, दुष्कर्म।
99

किस शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों प्रयुक्त हुए हैं?

  1. ((a))

    आलंकारिक

  2. ((b))

    सुंदरता

  3. ((c))

    अधिकारी

  4. ((d))

    अधुनातन

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Answer: ((c))

अधिकारी

उपसर्ग और प्रत्यय दोनों प्रयुक्त हुए हैं- अधिकारी

Key Points

  • अधि + कार +  
  • अधि (उपसर्ग), कार (मूल शब्द) और  (प्रत्यय)।
  • 'अधिकारी' का अर्थ - वह व्यक्ति जो विश्वास, अधिकार या आदेश का पद धारण करता है।

अन्य विकल्प 

शब्दविश्लेषणनिष्कर्ष
आलंकारिकअलंकार (मूल शब्द) + इक (प्रत्यय)केवल प्रत्यय प्रयुक्त है।
सुंदरतासुंदर (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)केवल प्रत्यय प्रयुक्त है।
अधुनातनअधुना (मूल शब्द) + तन (प्रत्यय)केवल प्रत्यय प्रयुक्त है।

Important Points

  • उपसर्ग - वे शब्दांश जो किसी शब्द के पहले/पूर्व जुड़कर अर्थ को परिवर्तित कर देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।
  • प्रत्यय - जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय शब्द कहलाते है।

Additional Information   कुछ महत्वपूर्ण उपसर्ग शब्द:-​​​​

  • अधि (श्रेष्ठ' या प्रधान) - अधिकार, अधिपति, अधिनायक, अधिराज, अध्यक्ष।
  • प्रति (प्रत्येक) - प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिरोध, प्रत्यारोपण, प्रतिस्पर्धा।
  • अव (नीचे, बुरा) - अवनति, अवतार, अवसान, अवशेष, अवरोध, अवकाश।
  • अनु (पीछे) - अनुचर, अनुकरण, अनुकूल, अनुनाद, अनुभव।
  • निर् (बिना) - निराकार, निरादर, नीरोग, नीरस, निरीह, निरक्षर।
  • उप (सहायक) - उपभोग, उपवन, उपमन्त्री, उपयोग, उपनाम, उपहार।
  • सम् (अच्छी तरह) - सन्तोष, संगठन,संलग्न, संकल्प, संशय, संरक्षा।

कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय शब्द -

  • ई -  सुखी, दुखी, देशी, विदेशी, गुलाबी, पहाड़ी।
  • इक - सामाजिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक।
  • ता - प्रसन्नता, सफलता, उत्कृष्टता, कुशलता।
  • तन - अद्यतन, पुरातन, सनातन, ​नूतन।
  • अक - गायक, लेखक, नायक, धावक।
  • उक - भिक्षुक, भावुक, कामुक, नाजुक।
  • अन - चिंतन, मनन, भवन, मरण, करण।
  • अक्कड़ - पियक्कड़, भुलक्कड़, घुमक्कड़।
  • आई - पढ़ाई, लिखाई, बुनाई, सिलाई।
100

द्वंद्व समास का उदाहरण है:

  1. ((a))

    प्रत्यक्ष

  2. ((b))

    शीतोष्ण

  3. ((c))

    मनचाहा

  4. ((d))

    गौशाला

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Answer: ((b))

शीतोष्ण

द्वंद्व समास का उदाहरण है: शीतोष्ण

Key Points

  • 'शीतोष्ण' का समास विग्रह है- "शीत और उष्ण" (अर्थात: ठंडा और गर्म)।
  • यहाँ 'शीत' और 'उष्ण' दोनों पद समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, इसलिए यह द्वंद्व समास का उदाहरण है।
  • जिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों
  • एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वन्द्व समास कहलाता है।
  • उदाहरण - दिन-रात = दिन और रात, लाभ-हानि = लाभ या हानि।

अन्य विकल्प -

  • प्रत्यक्ष: यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है (प्रति + अक्ष = आँखों के सामने)।
  • मनचाहा: यह तत्पुरुष समास है (मन से चाहा)।
  • गौशाला: यह भी तत्पुरुष समास है (गौ के लिए शाला)।

Important Pointsसमास के भेद-

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास​

Additional Information 

समासपरिभाषाउदाहरण
तत्पुरुषसमास का वह रूप जिसमें द्वितीय पद या उत्तर पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।कष्टसाध्य - कष्ट से साध्य 
हथकड़ी - हाथ के लिए कड़ी
अव्ययीभावजिस समास में प्रथम पद अव्यय होता है और जिसका अर्थ प्रधान होता है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।निडर - बिना डर के
घर-घर - प्रत्येक घर

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