निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार
विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
शहरों का भ्रमण करके मैंने जाना कि शहर के बीच हरित स्थान प्रकृति की शाश्वत पाठशाला है। अगर इन स्थानों में समय गुज़ार कर हम प्रकृति की स्वचालित पद्धति को देखें, तो हमें पता चलता है कि किस तरह प्रकृति में कुछ भी व्यर्थ नहीं है। पेड़ के पत्ते नीचे गिरकर खाद बन जाते हैं। चिड़ियाँ और भवरे एक जगह से दूसरी जगह बीज गिराकर एक नए फूल को जन्म देते हैं। बारिश की बूंदें ज़मीन को हरा-भरा बनाकर फिर वापस ओस बन जाती हैं। ऐसा लगता है यह कौन वास्तुकार है जो बिना रुके, बिना किसी प्रयास के सहजता से चलता रहता है। प्रकृति को और नज़दीक से जानने के लिए में शहर में स्थित एक 'नेचर वॉक' ग्रुप के साथ जुड़ गई। 'नेचर वॉक' ग्रुप हर शहर में प्रकृति प्रेमी लोगों के समूह होते हैं जो कि शहर के भीतर और शहर से बाहर हरित स्थानों (ग्रीन स्पेसों) का भ्रमण करते हैं, उनका अवलोकन करते हैं और साथ में मिलकर प्रकृति और प्राकृतिक स्थानों को बचाने का सतत प्रयास करते हैं।
'नेचर वॉक' ग्रुप के साथ शहर में कंक्रीट जंगल के बीचों-बीच एक ऐसे ग्रीन स्पेस से परिचय हुआ, जिसकी कशिश ही अलग थी, उसकी सौंधी-सौंधी महक हर किसी को आकर्षित कर रही थी। उस स्थान का नाम था 'सावित्री अर्बन फूड फॉरेस्ट'। यहां पर न केवल पड़े-पौधे और घूमने की जगह थी, बल्कि हर फल के एक या दो वृक्ष लगे हुए थे।
तने पर लटके हुए हुए केले, अंगूर की बेल से बातें कर रहे थे। रात की रानी, मोगरा, रजनीगंधा, तुलसी और लेमन ग्रास की महक, चिड़ियों, तितलियों और भवरों को आमंत्रण दे रही थी। इस अर्बन फूड फॉरेस्ट में 90-100 तक अलग-अलग फल-फूल, घास, वृक्ष सब्ज़ियां और बेलें लगी हुई थीं। वहां पर एक छोटी सी 'आयर्वेदिक डिस्पसेंरी' भी थी जिसमें तुलसी, अडूसी, शतावरी, ब्राह्मी, इन्सलुिलिन जैसै अन्य आयर्वेदिक प्लांट लोगों को बरबस अपनी ओर खींच रहे थे।
हरित स्थान एक 'ऑक्सीजन फैक्ट्री होते हैं जो शरीर और मन, दोनों में रक्त संचार करते हैं। शहरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हरित क्षेत्र फल, फूल और वृक्षों का 'लाइव डेमो' होते हैं। मिट्टी को छूना और उस पर नंगे पांव चलना, अपने आप में ही एक थेरेपी है।
हरित स्थान पर लगे हुए नीम, जामुन, बरगद, पीपल के वृक्ष न केवल हवा को शुद्ध करते हैं बल्कि हरा रंग खुशहाली का भी प्रतीक होता है, जो कि तनाव कम करके, मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। इससे मांसपेशियों को सुकून मिलता है और तनाव का स्तर भी कम होता है, इसलिए मनोवैज्ञानिक तनाव और एंग्जायटी में बगीचे में चलने का सुझाव देते हैं, जिससे सांस हल्की होती है। हरा रंग शान्ति देता है, इसलिए हॉस्पिटल में हरे रंग के पर्दे लगाए जाते हैं।