'यथाशक्ति' का सही विग्रह होगा- शक्ति के अनुसार

Key Points
- अव्ययीभाव समास- 'पहला पद प्रधान तथा अव्यय होता है'।
पहचान- पहला पद अनु, भर, प्रति, यथा, यावत आदि।
जैसे- अनुरूप, यथासंभव।
2. द्वंद्व समास- दोनों पद प्रधान होते है।
पहचान- योजक चिन्ह (-) का प्रयोग। तथा, मध्य में ”और”, “अथवा”, “या” लगते है।
जैसे- 'नदी-नाले' "नदी और नाले"।
3. तत्पुरुष समास- 'उत्तर पद प्रधान होता'।
पहचान- "कारक चिन्ह" का लोप हों जाना।
जैसे- 'यशप्राप्त' "यश को प्राप्त" (कर्म कारक विभक्ति "को" का लोप)।
4. द्विगु समास- 'उत्तर पद प्रधान होता'।
पहचान- पहला पद "संख्यावाचक" तथा इसमें "समूह या समाहार" का पता चलता है।
जैसे- 'सप्तसिंधु' शब्द में 'सात सिंधुओ के समूह' का ज्ञान हो रहा है।
5. कर्मधारय समास- 'उत्तर पद प्रधान होता'।
पहचान- 'दोनों पदों' के मध्य मे 'है जो' , 'के समान' आता हैं।
जैसे- 'नीलकंठ' "नीला है जो कंठ"।
6. बहुब्रीहि समास- 'अन्य पद प्रधान होता'।
पहचान- 'दोनों पद' मिलकर किसी "तीसरे पद" की ओर संकेत देते हैं।
जैसे- 'लंबोदर' "लंबा है उदर जिसका" अर्थात् "गणेश जी"।

Additional Informationसमास- दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने नये सार्थक शब्द को समास कहते है।
समास भेद- 6 भेद होते हैं।
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- द्विगु समास
- द्वन्द्व समास
- कर्मधारय समास
- बहुव्रीहि समास

Mistake Points
- 'यथाशक्ति' में अव्ययीभाव समास होगा क्योंकि, पहला पद प्रधान है।
- द्वंद समास में दोनों पद, द्विगु समास तथा तत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान होता है।