दिये गए विकल्पों में से विकल्प 3 'ओष्ठ' सही उत्तर है।

Key Points
प ओष्ठ की सहायता से उच्चरित होने वाला व्यंजन है, अत: यह ओष्ठ्य वर्ण है।
हिंदी के वर्णो का उनके उच्चारण स्थान के आधार पर वर्गीकरण :-
1. कण्ठ्य वर्ण :-जिन वर्णो का उच्चारण कंठ से होता है। कंठ से उच्चारित वर्ण जैसे - अ , आ (स्वर) , क, ख , ग, घ, ङ (व्यंजन) और विसर्ग (:)
2. तालव्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में जिहवा का मध्य भाग तालु से स्पर्श करता है। उन्हें तालव्य वर्ण कहते है। तालु से उच्चारित वर्ण जैसे - इ , ई(स्वर) , च, छ, ज, झ, ञ , य , श (व्यंजन)
3. मूर्द्धन्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण मूर्द्धा से होता है। उन्हें मूर्द्धन्य वर्ण कहते है। मूर्द्धा से उच्चारित वर्ण जैसे- ऋ (स्वर) , ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष (व्यंजन)
4. दन्त्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में जिहवा का अग्र भाग दन्त से स्पर्श करता है। उन्हें दन्त्य वर्ण कहते है। दन्त से उच्चारित वर्ण जैसे- लृ , त, थ, द, ध, न, ल, स (सभी व्यंजन)
5. ओष्ठ्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में दोनों होठ स्पर्श करते है। उन्हें ओष्ठ्य वर्ण कहते है। ओष्ठ से उच्चारित वर्ण जैसे- उ ,ऊ (स्वर) , प, फ, ब, भ, म (व्यंजन)
6. नासिक्य वर्ण :- जिन वर्णो का उच्चारण मुँह और नाक दोनों से होता है। उन्हें नासिक्य वर्ण कहते है। नासिका से उच्चारित वर्ण जैसे- अं , ङ, ञ , ण , न , म
7. कंठतालव्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में कंठ तथा तालु दोनों का सहयोग होता है। उन्हें कंठतालव्य वर्ण कहते है। कंठ-तालु से उच्चारित वर्ण जैसे- ए , ऐ
8. कंठोष्ठ्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में कंठ तथा ओष्ठ दोनों का सहयोग होता है। उन्हें कंठोष्ठ्य वर्ण कहते है। कंठ-ओष्ठ से उच्चारित वर्ण जैसे - ओ , औ
9. दन्तोष्ठ्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में दन्त तथा ओष्ठ दोनों का सहयोग होता है। उन्हें दन्तोष्ठ्य वर्ण कहते है। दन्त-ओष्ठ से उच्चारित वर्ण जैसे - व
10. वर्त्स्य वर्ण :- जिन अरबी-फ़ारसी वर्णो के उच्चारण ऊपर वाले मसूड़ों के कठोरतम भाग से होते है , उन्हें वर्त्स्य वर्ण कहते है। वर्त्स्य से उच्चारित वर्ण जैसे - फ़ और ज़।
11. जिह्वामूलक वर्ण :- जिन अरबी- फ़ारसी वर्णो का उच्चारण जिहवा के पीछे के भाग से होता है। उन्हें जिह्वामूलक वर्ण कहते है। जिह्वामूलक से उच्चारित वर्ण जैसे - क़ , ख़ और ग़।
12. अलिजिह्वा/काकल्य वर्ण :- जिन वर्णो के उच्चारण में मुख खुला रहता है , तथा वायु कंठ को खोलकर झटके से बाहर निकलती है। उन्हें अलिजिह्वा वर्ण या काकल्य वर्ण कहते है। जैसे - ह।

Additional Information
| स्वर की परिभाषा | उदाहरण |
|---|
| जिनका उच्चारण बिना किसी अवरोध और बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता से किया जाता है वे स्वर वर्ण कहलाते हैं। स्वर मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। | अ, आ, ई, इ, ए आदि |
| हृस्व | अ, इ, उ, ऋ आदि |
| दीर्घ | आ, ई, ऊ, ऐ आदि |
| प्लुत | ॐ |
| व्यंजन की परिभाषा | उदाहरण |
|---|
| जिनका उच्चारण स्वर की सहायता से किया जाता है वे व्यंजन वर्ण कहलाते हैं। | क, ख, ग, घ आदि |
| स्पर्श व्यंजन | च, छ, ज, ट, ठ आदि। |
| ऊष्म व्यंजन | श, ष, स, ह आदि। |
| अंतःस्थ व्यंजन | य, र, ल, व आदि। |
| संयुक्त व्यंजन | क्ष, त्र, ज्ञ आदि। |
| आगत व्यंजन | ज़, फ़ आदि |
| अनुनासिक | ङ, ञ, ण, न, म |
| श्वास की मात्रा के आधार पर दो भागों में बांटा गया है- अल्पप्राण और महाप्राण। | क्रमशः- क, ब, प, म और ख, घ, छ, झ आदि |
| उच्चारण में ध्वनि गूंज के आधार पर भी इनके दो भेद किए गए हैं- घोष और अघोष व्यंजन। | क्रमशः- ग, घ, ज, झ और क, ख, च, छ आदि। |