चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर।
को घटि; ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
- AOption (a)
श्लेष
- BOption (b)
परिसंख्या
- COption (c)
प्रतीप
- DOption (d)
यमक
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Correct answer
श्लेष
Why this answer is correct
प्रस्तुत काव्य-पंक्ति "चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि; ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।" का सही उत्तर है- श्लेष अलंकार
Key Points
- इन पंक्तियों में 'वृषभानुजा' और 'हलधर' शब्दों के एक से अधिक अर्थ निकलने के कारण यहाँ श्लेष अलंकार है।
- श्लेष अलंकार - जहाँ काव्य में कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो, किन्तु प्रसंग भेद के अनुसार उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
- यहाँ वृषभानुजा के दो अर्थ हैं:
- वृषभानु की पुत्री (राधा) और 2. वृषभ (बैल) की अनुजा (गाय)। इसी प्रकार हलधर के भी दो अर्थ हैं:
- बलराम और 2. बैल। इस प्रकार एक ही शब्द में कई अर्थ चिपके हुए हैं।
- अन्य उदाहरण: 'रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।' (यहाँ पानी शब्द के तीन अर्थ—चमक, सम्मान और जल हैं)।
अन्य विकल्प -
| शब्द/विकल्प | विग्रह/अर्थ | उदाहरण | भेद/प्रकार |
|---|---|---|---|
| परिसंख्या | जहाँ किसी वस्तु का वर्णन अन्य जगह निषेध कर एक जगह किया जाए। | दण्ड यतिन कर भेद जहँ। | अर्थालंकार |
| प्रतीप | जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय बना दिया जाए (उपमा का उल्टा)। | सिय मुख समता किमि करै चन्द वापुरो रंक। | अर्थालंकार |
| यमक | जहाँ एक ही शब्द की आवृत्ति हो और अर्थ भिन्न हों। | कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। | शब्दालंकार |
Important Pointsअलंकार के मुख्य भेद-
- शब्दालंकार
- अर्थालंकार
- उभयालंकार
Additional Information
| प्रकार/भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूपक | उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप। | चरन कमल बंदौ हरि राई। |
| उपमा | दो वस्तुओं के बीच समानता दिखाना। | पीपर पात सरिस मन डोला। |
| अतिशयोक्ति | बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना। | आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। |









