'म्हारो नाम बाल्या हे' किस कवि की रचना है ?
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इसुरी
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मदनमोहन व्यास
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आनंदराव दुबे
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श्रीनिवास जोशी
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आनंदराव दुबे
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'म्हारो नाम बाल्या हे' रचना है - आनंदराव दुबे
Key Pointsआनंदराव दुबे-
- जन्म- 1918-1966 ई.
- काव्य-
- गीता फिर गायो
- रामाजी रईग्या ने रेल जाती री
Important Pointsइसुरी-
- जन्म- 1824-1909 ई.
- बुंदेलखंड के लोकप्रिय और समर्थ कवि।
- फाग के लिए स्मरणीय।
- रचनाएं-
- पर गए इन सालन में ओरे
- बीते जात मायके मइयाँ
- मोहन भर पिचकारी खींचें
- जो तुम छैल छला हो जाते
श्रीनिवास जोशी-
- जन्म- 11 मई 1936
- हिमाचल प्रदेश , भारत के एक स्तंभकार, रंगमंच कलाकार और सेवानिवृत्त सिविल सेवक हैं ।
- एक स्तंभकार के रूप में, जोशी को विशेष रूप से भारतीय अंग्रेजी दैनिक द ट्रिब्यून में अपने कॉलम 'विगनेट्स' के लिए जाना जाता है , जिसके माध्यम से उन्होंने हिमाचल प्रदेश भर के लोगों, इतिहास, स्थानों और विलक्षण चीजों का दस्तावेजीकरण किया है।
- एक रंगमंचीय हस्ती के रूप में, वह दशकों से शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर से जुड़े हुए हैं , जिसके लिए उन्होंने कई नाटक लिखे, उनमें अभिनय किया और उनका निर्देशन किया। एक सेवानिवृत्त सिविल सेवक के रूप में, जोशी शिमला में विभिन्न नागरिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिनमें विरासत संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और कला को बढ़ावा देना शामिल है।