निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
अहिंसात्मक अभ्यास का मार्ग ही अलग है । फौज में प्रतिदिन कवायद, कसरत, क्रूरतापूर्ण शिकार इत्यादि कराए जाते हैं । अहिंसात्मक अभ्यास इससे बिलकुल भिन्न है । उसका साधन, यदि एक शब्द में कहना चाहें, तो बस, संयम है । यहाँ संयम व्यापक अर्थ में उन तमाम नियमों के लिए व्यवहृत किया गया है, जिनका उल्लेख हिन्दुओं के तथा दूसरे धर्मों के धर्मग्रंथों में पाया जाता है । ये साधारण सदाचार के नियम सख्ती से पालन करके सीखे जाते हैं । इन सब नियमों का झुकाव अहिंसा और सत्य की ओर ही होता है । गांधीजी ने बार-बार लिखा है कि ईश्वर पर विश्वास इसका एक बहुत बड़ा सहायक होता है । यदि इस अहिंसात्मक प्रवृत्ति को जागृत और पुष्ट करने में समय लगाया जाए, बचपन से ही अभ्यास कराया जाए और इस पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निर्भयता इत्यादि जो इसके मुख्य बाह्य रूप देखने में आते हैं, अवश्य ही प्राप्त किए जा सकते हैं । यह कहना कि यह मनुष्य के लिए संभव नहीं, बेबुनियाद बात है ।