आभ्यंतर प्रयत्न के अनुसार वर्णों के भेद हैं:
- AOption (a)
तीन
- BOption (b)
चार
- COption (c)
दो
- DOption (d)
पाँच
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Correct answer
चार
Why this answer is correct
आभ्यंतर प्रयत्न के अनुसार वर्णों के भेद चार हैं। अतः उपर्युक्त विकल्पों में से विकल्प 4 सही है तथा अन्य विकल्प असंगतहैं।
Key Points
- आभ्यंतर प्रयत्न
- ध्वनि उत्पन्न होने के पहले वागिंद्रिय की क्रिया को आभ्यंतर प्रयत्न कहते हैं।
- आभ्यंतर प्रयत्न के अनुसार वर्णों के चार भेद हैं :-
- विवृत :- जिनके उच्चारण में वगिंद्रिय खुली रहती है, जैसे, स्वर ।
- स्पृष्ट :- जिनके उच्चारण में वागिंद्रिय का द्वार बंद रहता है, जैसे, 'क' से 'म' तक 25 व्यंजन।
- ईषत् विवृत :- जिनके उच्चारण में वागिंद्रिय कुछ खुली रहती है, जैसे य र ल व।
- ईषत् स्पृष्ट :- श ष स ह ।
Additional Information
- बाह्य प्रयत्न
- ध्वनि के अंत की क्रिया को बाह्य प्रयत्न कहते हैं ।
- ब्राह्य प्रयत्न के अनुसार दो भेद हैं
- अघोष वर्ण
- अघोष वर्णों के उच्चारण में केवल श्वास का उपयोग होता है । कोई नाद नहीं होता, जैसे:- क ख, च छ, ट,ठ, त, थ, प, फ, श, ष और स।
- घोष वर्ण
- घोष वर्णों के उच्चारण में केवल नाँद का उपयोग होता है :- शेष व्यंजन और सब स्वर।