'झूठा सच' उपन्यास की स्त्री-पात्र हैं:
A. मोहनी
B. पूरन देई
C. लक्ष्मी
D. शीलो
E. बंती
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केवल B, D और E
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'झूठा सच'
उपन्यास की स्त्री-पात्र हैं:
- B. पूरन देई
- D. शीलो
- E. बंती
Key Pointsझूठा-सच-
- रचनाकार- यशपाल
- विधा- उपन्यास
- प्रकाशन वर्ष- 1958 ई.
- मुख्य पात्र-
- तार
- जयदेव
- कनक
- गिल
- डाक्टर नाथ
- नैयर
- सूद जी
- सोमराज
- रावत
- ईसाक
- असद
- प्रधान मंत्रीआदि।
- विषय-
- 'वतन और देश' तथा 'देश का भविष्य' नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उपरान्त चारित्रिक स्खलन एवं विविध विडम्बनाओं का व्यापक फलक पर कलात्मक चित्र उकेरा गया है।
- झूठा सच (1958-60) हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है।
- यह उपन्यास हिन्दी साहित्य के सर्वोत्तम उपन्यासों में परिगण्य माना गया है।
Important Pointsयशपाल-
- जन्म-1903-1977ई.
- यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं।
- प्रमुख रचनाएँ -
- दादा कामरेड(1941 ई.)
- देशद्रोही(1943 ई.)
- दिव्या(1945 ई.)
- पार्टी कामरेड(1946 ई.) आदि।