'ध्रुवस्वामिनी' के प्रतिपाद्य हैं :
(A) स्त्री पुरुषार्थ का ढोंग न करे। विश्व भर में सब काम सबके लिए नहीं हैं।
(B) प्रेम में अपना सर्वस्व निछावर करने वाली स्त्रियाँ कभी असहाय नहीं होती हैं।
(C) स्त्री उपहार में देने की वस्तु नहीं है। पुरुष उसे अपनी पशु-सम्पत्ति समझकर अत्याचार न करे।
(D) स्त्री को अपने चुनाव और निर्णय की स्वतंत्रता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
- AOption (a)
(A) और (C)
- BOption (b)
(B) और (D)
- COption (c)
(C) और (D)
- DOption (d)
(B) और (C)
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Correct answer
(C) और (D)
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'ध्रुवस्वामिनी' के प्रतिपाद्य हैं-(C)स्त्री उपहार में देने की वस्तु नहीं है।पुरुष उसे अपनी पशु-सम्पत्ति समझकर अत्याचार न करे। (D)स्त्री को अपने चुनाव और निर्णय की स्वतंत्रता है।
Key Points
- 'ध्रुवस्वामिनी' नाटक जयशंकर प्रसाद द्वारा कृत है।
- प्रकाशन वर्ष-1933 ई.
- यह नाटक 3 अंकों में विभक्त है तथा इसमें स्त्री-पुनर्विवाह का चित्रण किया गया है।
- साथ ही स्त्री-पात्रों की सशक्तिकरण का चित्रण भी किया गया है।
- पात्र:पुरुष पात्र-चन्द्रगुप्त,रामगुप्त,शिखरस्वामी,शकराज आदि।स्त्री पात्र-ध्रुवस्वामिनी,मन्दाकिनी,कोमा आदि।
Additional Information
- अन्य नाटक-
| नाटक | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| सज्जन | 1910 | महाभारत के कथानक पर आधारित। |
| करुणालय | 1912 | गीति नाटक,पौराणिक कथा आधारित। |
| स्कन्दगुप्त | 1928 | कुमारगुप्त के विलासी साम्राज्य की आंतरिक स्थिति का चित्रण। |
| चन्द्रगुप्त | 1931 | चन्द्रगुप्त और चाणक्य का अत्याचारी नन्द तथा विदेशी यूनानियों से संघर्ष का चित्रण। |