यशपाल कृत 'झूठा - सच' उपन्यास के केन्द्रीय विषय कौन से हैं?
(A) विभाजन की त्रासदी
(B) नारी की विवशता और शोषण
(C) सांप्रदायिक दंगो की भयावहता
(D) भारत छोड़ो आंदोलन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
- AOption (a)
(B) और (C)
- BOption (b)
(A) और (C)
- COption (c)
(A) और (D)
- DOption (d)
(B) और (D)
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Correct answer
(A) और (C)
Why this answer is correct
यशपाल कृत 'झूठा-सच' उपन्यास के केंद्रीय विषय हैं-(A)विभाजन की त्रासदी (C)साम्प्रदायिक दंगो की भयावहता।
Key Points
- यशपाल(1903-1976)-प्रमुख प्रगतिवादी उपन्यासकार।
- प्रकाशन वर्ष-झूठ सच;दो भाग:वतन और देश(1958),देश का भविष्य(1960)।
- 'झूठा सच' उपन्यास में 1942 से 1957 तक भारत के राष्ट्रीय एवं सामाजिक जीवन का चित्रण हुआ है।
- मुख्य पात्र-तारा,जयदेव पूरी,कनक। गौण पात्र-असद,शीला,डॉ.प्राणनाथ,सोमराज,पं. गिरधारीलाल आदि।
Important Points
- अन्य उपन्यास-
| उपन्यास | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| दादा कामरेड | 1941 | ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध क्रांतिकारियों की गतिविधियों का चित्रण। |
| दिव्या | 1945 | ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का आधार लेकर स्त्री स्वाधीनता एवं स्त्री गरिमा का प्रश्न उठाया गया है। |
| पार्टी कामरेड | 1946 | कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा एवं कार्यक्रम का समर्थन। |
| मेरी तेरी उसकी बात | 1974 | स्वाधीनता आंदोलन के 1919 से लेकर 1945 तक के कालखंड की राजनीतिक घटनाओं का चित्रण,विशेषकर 'भारत छोड़ो आंदोलन' में छात्रों की भूमिका का वर्णन। |