'आधे अधूरे' नाटक के संबंध में सत्य कथन हैं :
(A) यह नाटक मौजूदा जीवन की विडम्बना के कुछेक सघन बिन्दुओं को रेखांकित करता है ।
(B) श्री ओम शिवपुरी को यह समकालीन ज़िन्दगी का पहला सार्थक हिन्दी नाटक लगता है।
(C) इसके पात्र, स्थितियाँ एवं मनःस्थितियाँ यथार्थपरक तथा विश्वसनीय नहीं लगती।
(D) 'आधे-अधूरे' आज के जीवन के एक गहन अनुभव - खंड को मूर्त करता है ।
(E) इस नाटक की भाषा में वह सामर्थ्य नहीं है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
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सही उत्तर है- "केवल (A), (B), (D)"। अन्य विकल्प असंगत हैं।
- 'आधे अधूरे' नाटक के संबंध में सत्य कथन हैं-
- यह नाटक मौजूदा जीवन की विडम्बना के कुछेक सघन बिन्दुओं को रेखांकित करता है ।
- श्री ओम शिवपुरी को यह समकालीन ज़िन्दगी का पहला सार्थक हिन्दी नाटक लगता है।
- 'आधे-अधूरे' आज के जीवन के एक गहन अनुभव - खंड को मूर्त करता है।
Key Pointsआधे अधूरे-
- रचनाकार- मोहन राकेश
- प्रकाशन वर्ष- 1969 ईo
- विधा- नाटक।
- भाग- 2
- उत्तरार्ध
- पूर्वार्ध
- उद्देश्य-
- आधे-अधूरे नाटक के माध्यम से मोहन राकेश ने महानगरों में रहने वाले मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियों एवं विडंबनाओं का चित्रण किया है।
- भूमंडलीकरण के इस दौर में मध्यवर्गीय परिवार के टूटते-बिखरते रिश्ते, उनका अधुरापन, कुंठा, घुटन इत्यादि को मोहन राकेश ने सावित्री और महेन्द्रनाथ के परिवार के माध्यम से सफलतापूर्वक अभिव्यक्ति किया है।
- आधे-अधूरे नाटक का पहली बार ‘ओमशिवपुरी’ के निर्देशन में दिशांतर द्वारा दिल्ली में फरवरी 1969 में मंचन हुआ था।
- यह नाटक धर्मयुग साप्ताहिक पत्रिका 1969 के 3-4 अंको में प्रकाशित हुआ था।
- रंगमंच की दृष्टि से आधे-अधूरे नाटक को प्रयोगशील नाटक कहा जाता है।
- इस नाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही पुरुष चार-चार पुरुषों की भूमिका मात्र वस्त्र परिवर्तन के आधार पर करता है।
- मुख्य पात्र-
- सावित्री- नाटक की नायिका, महेन्द्रनाथ की पत्नी उम्र 40 वर्ष
- पुरुष- 1 महेन्द्रनाथ (सावित्री का पति उम्र 49 वर्ष)
- पुरुष- 2 सिंघानिया (सावित्री का बौस, चीफ़ कमिश्नर)
- पुरुष- 3 जगमोहन
- पुरुष- 4 जुनेजा
- बिन्नी- सावित्री की बड़ी बेटी उम्र 20 वर्ष
- अशोक- सावित्री और महेन्द्रनाथ का बेटा
- किन्नी- सावित्री की छोटी बेटीउम्र 12,13 वर्ष
- मनोज- बिन्नी का पति (मात्र संबादों में उल्लेखनीय)
- विषय-
- मध्यवार्गीय जीवन की विडंबनाओं का चित्रण।
- पारिवारिक विघटन का चित्रण।
- स्त्री-पुरुष सम्बन्ध का चित्रण।
- नारी की त्रासदी का चित्रण।
- वैवाहिक संबंधों की विडंबना।
Important Pointsमोहन राकेश-
- जन्म- 1925 - 1972 ईo
- उपन्यास-
- अँधेरे बंद कमरे (1961)
- अन्तराल (1972)
- न आने वाला कल (1968)
- नाटक-
- लहरों के राजहंस (1963 ईo)
- आषाढ़ का एक दिन (1958 ईo)
- आधे-अधूरे (1969 ईo)
- पैर तले की जमीन (अधुरा कमलेश्वर जी ने पूरा किया 1975 ईo)