निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
मैं सत्तर का हो गया हूँ। हैरत की बात है कि मैं अब इस उम्र में कभी-कभी भगवान के बारे में सोचता हूँ। भगवान के विचार पर मैं दरअसल गणित के जरिये पहुंचा हूँ। गणित और भगवान? गणित से मेरा अर्थ भी ठीक वही है, जो आप समझते हैं। अल्जेब्रा, ज्योमेट्री और कैलकुलस, यानी वही गणित, जो स्कूलों में पढ़ाई जाती है।
हालांकि गणित से मेरा लगाव कोई नया नहीं है। कई साल पहले जब मैं स्कूल में था, तभी मैंने गणित की गहराइयों में जाने का फैसला ले लिया था। मेरा मानना था कि अगर मैं गणित नहीं पढूंगा तो इससे मेरी सोचने एवं समस्याओं के निदान ढूंढने और दुनिया को जटिल ढंग से देखने की क्षमता सीमित हो जाएगी।
मेरा अनुभव मुझे यह भरोसा दिलाता है कि भगवान खुद को गणित के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं। हालांकि इस मामले में मेरा कोई निष्कर्ष नहीं है, लेकिन तमाम गणितज्ञ गणित और भगवान के बीच की कड़ी जरूर ढूंढते रहे हैं। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में पाइथागोरस के बाद से ही गणित में भगवान को ढूंढने के प्रयास जारी हैं।
कुछ साधारण से रहस्य हैं, जो यह समझाने में मदद करते हैं कि ऐसा क्यों हो सकता है? सबसे महत्त्वपूर्ण रहस्य इस सवाल में निहित है कि गणित का निर्माण किया गया या उसकी खोज की गई? कुछ गणितज्ञों का मानना है कि गणित मनुष्य द्वारा आविष्कार की गई एक प्रणाली है जो विशिष्ट प्रकार की विचार-प्रक्रिया के प्रति मनुष्य के आकर्षण से आकार लेती है।